Category: लाइफस्टाइल

  • बिहार में भूमिहीन परिवारों को मिलेगा जमीन का पर्चा, 22 सितंबर से हर पंचायत में विशेष शिविर

    बिहार में भूमिहीन परिवारों को मिलेगा जमीन का पर्चा, 22 सितंबर से हर पंचायत में विशेष शिविर

    पटना
    बिहार में प्रत्येक भूमिहीन परिवारों का भी अपना आशियाना होगा। इसी संकल्प के साथ राज्य सरकार ने "अभियान बसेरा" के तहत 22/09/2026 से सभी पंचायतों में विशेष शिविर आयोजित करने का निर्णय लिया है। सीएम सम्राट चौधरी ने कहा है कि लंबे समय से सरकारी जमीन पर रहने वालों को भूमि का पर्चा दिया जाएगा। 20 से 40 सालों तक सरकारी जमीन पर घर बनाकर रहने वालों को हटाने के बजाए व्यवस्थित किया जाएगा। इसके लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को आवश्यक निर्देश दिया गया है।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि अब गृहस्थल (वासभूमि) के पर्चे के लिए किसी प्रकार की परेशानी उठाने की आवश्यकता नहीं है। अपने नजदीकी ग्राम पंचायत अथवा अंचल कार्यालय में जाकर आवेदन जमा करें। सभी संबंधित अधिकारियों को आवेदन स्वीकार करने और उसकी रसीद उपलब्ध कराने के निर्देश सरकार की ओर से दिए गए हैं।

    ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं
    सीएम ने बताया कि लोगों की सुविधा के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के बिहार भूमि पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था की गई है। https://biharbhumi.bihar.gov.in/Biharbhumi/ के माध्यम से लाभुक घर बैठे भी गृहस्थल (वासभूमि) के लिए आवेदन कर सकते हैं। सरकार का लक्ष्य है कि बिहार का कोई भी पात्र परिवार आवासीय भूमि के अधिकार से वंचित न रहे। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को प्रक्रिया तेज करने का निर्देश जारी कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया के माध्यम से खुद यह जानकारी दी है।

    आवेदन करने की प्रक्रिया
    अभियान बसेरा के तहत अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग सहित अन्य पात्र भूमिहीन परिवारों को वासभूमि उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जाएगी। इसमें पात्र परिवारों को आवेदन के साथ परिवार के सभी सदस्यों का विवरण एवं मोबाइल नंबर, आवेदक,पति/पत्नी तथा वयस्क पारिवारिक सदस्यों के आधार कार्ड की स्व-अभिप्रमाणित प्रतियां, जाति प्रमाण-पत्र की प्रति तथा राशन कार्ड/मतदाता पहचान-पत्र/निवास प्रमाण-पत्र से संबंधित उपलब्ध दस्तावेज संलग्न करने होंगे। इसके साथ परिवार का सामूहिक फोटो तथा निर्धारित प्रारूप में शपथ-पत्र देना होगा,जिसमें यह उल्लेख हो कि परिवार के पास वास योग्य भूमि नहीं है तथा पूर्व में किसी सरकारी योजना के माध्यम से वासभूमि प्राप्त नहीं हुई है। यदि कोई परिवार सरकारी भूमि पर निवास कर रहा है,तो उपलब्ध होने पर संबंधित मौजा, खाता, खेसरा एवं पूर्व निवास संबंधी साक्ष्य भी आवेदन के साथ प्रस्तुत किए जा सकते हैं। आवेदक योजना से संबंधित जानकारी और आवेदन करने की प्रक्रिया एवं आवश्यक दस्तावेजों के संबंध में पूरी जानकारी संबंधित अंचल कार्यालय से प्राप्त कर सकते हैं।

  • OnePlus 16 की पहली झलक आई सामने, 1TB स्टोरेज और 165Hz डिस्प्ले से मचेगा तहलका

    OnePlus 16 की पहली झलक आई सामने, 1TB स्टोरेज और 165Hz डिस्प्ले से मचेगा तहलका

    OnePlus 16 को लेकर अब तक सिर्फ लीक्स और टीजर सामने आ रहे थे, लेकिन अब कंपनी ने फोन की तस्वीर और कलर ऑप्शन जारी कर दिए हैं. यानी OnePlus का अगला फ्लैगशिप फोन अब धीरे-धीरे सामने आ रहा है. फोन का डिजाइन देखकर साफ है कि कंपनी ने इस बार परफॉर्मेंस के साथ लुक पर भी काफी काम किया है.

    OnePlus 16 को तीन कलर में लाया जाएगा. खास बात यह है कि स्टारलाइट वेरिएंट में पीछे की तरफ अलग तरह का स्टारलाइट इफेक्ट दिया गया है. कंपनी के मुताबिक इसमें सिल्क ग्लास फिनिश का इस्तेमाल किया गया है, जिससे फोन पर उंगलियों के निशान कम पड़ेंगे. यह फोन फिलहाल चीन में प्री-ऑर्डर के लिए सामने आया है.

    OnePlus 16 में 1TB तक स्टोरेज
    OnePlus 16 का एक बड़ा अट्रैक्शन इसका 1TB स्टोरेज वेरिएंट है. प्री-ऑर्डर लिस्टिंग के मुताबिक फोन 12GB RAM के साथ 256GB और 512GB स्टोरेज में आएगा. इसके अलावा 16GB RAM के साथ 512GB और 1TB स्टोरेज का विकल्प भी दिया जाएगा. यानी जिन लोगों के फोन में फोटो, वीडियो और गेम्स की वजह से स्टोरेज जल्दी भर जाती है, उनके लिए यह बड़ा अपग्रेड हो सकता है.

    फोन का डिजाइन पिछले OnePlus फ्लैगशिप से पूरी तरह अलग नहीं है. पीछे ऊपर बाईं तरफ चौकोर कैमरा मॉड्यूल दिया गया है, जिसमें तीन कैमरे और फ्लैश नजर आते हैं. लेकिन नए कलर और फिनिश की वजह से फोन को अलग लुक मिलता है.

    165Hz डिस्प्ले
    OnePlus 16 की सबसे ज्यादा चर्चा इसके डिस्प्ले को लेकर है. कंपनी ने 165Hz रिफ्रेश रेट कन्फर्म किया है. खास बात यह है कि यह सिर्फ गेमिंग के लिए नहीं होगा. रिपोर्ट्स के मुताबिक OnePlus 16 में सिस्टम लेवल पर 165Hz रिफ्रेश रेट काम करेगा.

    पिछले OnePlus 15 में भी 165Hz डिस्प्ले दिया गया था, लेकिन इसका इस्तेमाल कई मामलों में गेमिंग तक सीमित था. OnePlus 16 में कंपनी इसे ज्यादा जगह इस्तेमाल करने की तैयारी में है. गेमिंग के दौरान रिफ्रेश रेट 185Hz तक पहुंचने की बात भी रिपोर्ट्स में कही गई है, हालांकि इसे अभी पूरी तरह आधिकारिक स्पेसिफिकेशन नहीं माना जाना चाहिए.

    इसका फायदा क्या होगा? फोन पर स्क्रॉलिंग ज्यादा स्मूद दिख सकती है और गेम में मूवमेंट ज्यादा फ्लुइड महसूस हो सकता है. हालांकि आम यूजर के लिए 120Hz और 165Hz के बीच का फर्क हर सिचुएशन में बहुत बड़ा नहीं होगा. इसका असली फायदा हाई-फ्रेम गेमिंग में ज्यादा दिखाई दे सकता है.

    9000mAh की बैटरी भी हो सकती है
    OnePlus 16 को लेकर सबसे बड़ी लीक इसकी बैटरी को लेकर है. रिपोर्ट्स में 9000mAh बैटरी की बात सामने आई है. अगर यह सही साबित होती है तो यह आज के ज्यादातर प्रीमियम फोन की तुलना में काफी बड़ी बैटरी होगी.

    फोन में 100W वायर्ड चार्जिंग और 50W वायरलेस चार्जिंग मिलने की भी रिपोर्ट है. 3C सर्टिफिकेशन में 100W चार्जिंग सपोर्ट सामने आ चुका है. यहां OnePlus 15 से तुलना भी दिलचस्प है.  OnePlus 15 में 7300mAh बैटरी थी और कंपनी ने 120W चार्जिंग और 50W वायरलेस चार्जिंग दी थी.

    कैमरा में 200MP का बड़ा दांव
    कैमरे को लेकर भी OnePlus 16 काफी बड़ा अपग्रेड कर सकता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक फोन में 200MP का मेन कैमरा मिल सकता है. इसके साथ 50MP अल्ट्रावाइड और 50MP पेरिस्कोप टेलीफोटो कैमरा दिया जा सकता है.

    मेन कैमरे में 1/1.4 इंच का सेंसर मिलने की बात है. इसका मतलब सिर्फ मेगापिक्सल ज्यादा होना ही नहीं, बल्कि सेंसर का साइज भी बड़ा होगा. हालांकि कैमरे की असली क्वालिटी का पता फोन के लॉन्च और रियल लाइफ टेस्ट के बाद ही चलेगा.

    अंदर मिल सकती है नई फ्लैगशिप चिप
    परफॉर्मेंस के लिए OnePlus 16 में Qualcomm की अगली फ्लैगशिप चिप मिलने की रिपोर्ट है. अलग-अलग रिपोर्ट्स में इसे Snapdragon 8 Elite Gen 6 Pro या Snapdragon 8 Elite Extreme Gen 6 नाम से बताया गया है.

  • AI को लेकर बराक ओबामा की चिंता, बोले- अब खुद सीख रहे AI सिस्टम

    AI को लेकर बराक ओबामा की चिंता, बोले- अब खुद सीख रहे AI सिस्टम

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर दुनियाभर में बहस चल रही है. कोई इसे फ्यूचर की सबसे बड़ी टेक्नोलॉजी बता रहा है, तो कोई इससे जॉब्स और इंसानों पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंतित है. इसी बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Barack Obama ने AI को लेकर अपनी चिंता बताई है. ओबामा का कहना है कि एआई कंपनियों के मार्केट वैल्यूएशन में हाइप हो सकता है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि एआई की टेक्नोलॉजी भी ओवरहाइप्ड है. आइए जानते हैं इसके बारे में. उन्होंने AI से ह्यूमैनिटी खत्म होने की बात से भी इनकार नहीं किया है और ये बेहद डरावना है.

    Obama के समय में ही बनी थी AI पर रिपोर्ट
    ओबामा ने बताया कि उनके राष्ट्रपति रहते 2015-16 के आसपास उनकी एडमिनिस्ट्रेशन ने एआई के सोशल, इकोनॉमिक और एथिकल इम्पैक्ट को समझने के लिए एक कमीशन बनाया था. इस कमीशन ने AI को लेकर एक बड़ी रिपोर्ट भी तैयार की थी.

    ओबामा के मुताबिक इसके बाद आई एडमिनिस्ट्रेशन ने इस रिपोर्ट को ज्यादा आगे नहीं बढ़ाया. यानी AI को लेकर जिन सवालों पर उस समय चर्चा शुरू हुई थी, वो अब और ज्यादा बड़े हो चुके हैं.

    अब AI खुद सीख रहा है
    एआई के तेजी से आगे बढ़ने की सबसे बड़ी वजहों में से एक रिसर्सिव लर्निंग है. आसान भाषा में समझें तो AI अब सिर्फ इंसानों से ट्रेनिंग लेकर आगे नहीं बढ़ रहा, बल्कि खुद भी सीखने लगा है.

    ओबामा के मुताबिक कुछ समय पहले तक एआई मॉडल्स की लर्निंग में करीब 90 फीसदी हिस्सा इंसानों के इनपुट का था. लेकिन कुछ ही महीनों में तस्वीर बदल गई और यह बैलेंस करीब 50-50 तक पहुंच गया. यानी अब AI को आगे बढ़ाने में ह्यूमन ट्रेनिंग के साथ उसका खुद से सीखना भी बड़ी भूमिका निभा रहा है.

    आने वाले समय में 90% खुद सीखेगा AI?
    ओबामा का अनुमान है कि आने वाले समय में एआई की लर्निंग में करीब 90 फीसदी हिस्सा सेल्फ-लर्निंग का हो सकता है. अगर ऐसा होता है तो AI डेवलपमेंट की स्पीड आज के मुकाबले काफी ज्यादा तेज हो सकती है.

    उन्होंने एआई की इस ग्रोथ को हॉकी स्टिक जैसी ग्रोथ बताया. इसका मतलब है कि शुरुआत में ग्रोथ धीरे होती है, लेकिन एक पॉइंट के बाद इसकी स्पीड अचानक बहुत ज्यादा बढ़ने लगती है.

    किलर रोबोट नहीं, ये है असली डर
    एआई के खतरे की बात होते ही किलर रोबोट्स और इंसानों को खत्म करने वाली मशीनों की चर्चा शुरू हो जाती है. ओबामा के मुताबिक ऐसा खतरा पूरी तरह जीरो नहीं है, लेकिन इसकी संभावना कम है.उनकी असली चिंता AI मिसअलाइनमेंट को लेकर है. यानी एआई सिस्टम ऐसा गोल तय कर ले जो इंसानों के इरादों से अलग हो.

    इसके लिए AI का कॉन्शियस होना या इंसानों से नफरत करना जरूरी नहीं है. अगर एआई खुद से फैसले लेने लगे और उसके गोल्स इंसानों के गोल्स से अलग हो जाएं, तो बड़ी समस्या पैदा हो सकती है. यही वजह है कि एआई के तेज विकास के साथ यह सवाल भी जरूरी होता जा रहा है कि आखिर इसे इंसानों के कंट्रोल और गोल्स के साथ कैसे जोड़ा जाए.

  • बेसन और चावल के आटे से बनाएं बाजार जैसी क्रिस्पी चकली, जानें आसान रेसिपी

    बेसन और चावल के आटे से बनाएं बाजार जैसी क्रिस्पी चकली, जानें आसान रेसिपी

     शाम की चाय के साथ अगर कुछ क्रिस्पी और चटपटा खाने का मन हो तो चकली एक बढ़िया ऑप्शन है. चकली का कुरकुरा स्वाद बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आता है. बाजार में कई तरह की चकली आसानी से मिल जाती है लेकिन आप इसे घर पर बनाते हैं तो अपने स्वाद के हिसाब से मसाले कम या ज्यादा कर सकते हैं. आज हम आपको बेसन और चावल के आटे से बाजार जैसी क्रिस्पी और चटपटी चकली बनाना बताएंगे, जिससे आप इसे आसानी से घर पर तैयार कर सकते हैं.

    इसे बनाकर आप कई दिनों तक एयरटाइट कंटेनर में स्टोर भी कर सकते हैं और जब मन करे चाय के साथ इसका आनंद ले सकते हैं. तो अगर आप भी कुछ नया और टेस्टी स्नैक घर पर बनाना चाहते हैं तो बेसन चकली ट्राई कर सकते हैं. आइए जानते हैं बेसन से क्रिस्पी और टेस्टी चकली बनाने की आसान रेसिपी.

    इंग्रेडिएंट्स (Ingredients)
    2 कप बेसन
    1 कप चावल का आटा
    1 छोटी चम्मच लाल मिर्च पाउडर
    ¼ छोटी चम्मच हल्दी पाउडर
    ½ छोटी चम्मच अजवाइन
    1 बड़ा चम्मच तिल
    2 बड़े चम्मच घी या तेल (मोयन के लिए)
    नमक स्वादानुसार
    पानी जरूरत के अनुसार
    तेल तलने के लिए

    बेसन चकली बनाएंगे कैसे?

    • बेसन चकली बनाने के लिए सबसे पहले एक बड़े बाउल में बेसन, चावल का आटा, तिल, अजवाइन, हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर और नमक डालकर अच्छी तरह मिला लें. अब इसमें मोयन के लिए घी या तेल डालें और हाथों से अच्छी तरह मिक्स करें, ताकि घी आटे में अच्छी तरह मिल जाए.
    • इसके बाद इसमें थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए नरम आटा गूंध लें. ध्यान रखें कि आटा बहुत ज्यादा नरम न हो, वरना चकली का शेप बनाने में परेशानी हो सकती है. आटा तैयार होने के बाद इसे कुछ देर के लिए ढककर रख दें.
    • अब चकली मेकर में स्टार शेप वाली प्लेट लगाएं और उसमें तैयार आटा भर दें. एक प्लास्टिक शीट या बटर पेपर पर हल्का सा तेल लगाएं. इसके बाद चकली मेकर की मदद से गोल-गोल चकली बनाएं. चकली बनाते समय ध्यान रखें कि इसका आकार एक जैसा रहे और चकली टूटे नहीं.
    • अब एक कड़ाही में तेल डालकर मीडियम आंच पर गर्म करें. तेल ज्यादा तेज गर्म न हो, वरना चकली बाहर से जल्दी ब्राउन हो सकती है और अंदर से कच्ची रह सकती है. तेल गर्म होने पर चकली को सावधानी से कड़ाही में डालें और दोनों तरफ से सुनहरा और क्रिस्पी होने तक तलें.
    • तली हुई चकली को टिश्यू पेपर पर निकाल लें, ताकि जो एक्स्ट्रा तेल हो निकल जाए. चकली को पूरी तरह ठंडा होने दें.
    • इसके बाद इसे एयरटाइट कंटेनर में भरकर रखें. इस तरह आप घर पर आसानी से बेसन की क्रिस्पी और टेस्टी चकली तैयार कर सकते हैं.

     

  • नाश्ते में बनाएं क्रिस्पी प्याज-मिर्च चीला, 10 मिनट में तैयार होगी टेस्टी रेसिपी

    नाश्ते में बनाएं क्रिस्पी प्याज-मिर्च चीला, 10 मिनट में तैयार होगी टेस्टी रेसिपी

     सुबह के नाश्ते में रोज कुछ नया और टेस्टी खाने का मन करता है लेकिन ज्यादा समय कम होने की वजह से कई बार लोग वही पोहा, पराठा या ब्रेड खा लेते हैं. अगर आपके साथ भी ऐसा होता है तो इस बार आप प्याज-मिर्च चीला ट्राई कर सकते हैं. इसे बनाने के लिए बेसन और सूजी का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें प्याज, हरी मिर्च और हरा धनिया मिलाया जाता है. मसालों के साथ तैयार यह चीला खाने में काफी टेस्टी लगता है और इसे बनाने में भी ज्यादा समय नहीं लगता. यह चीला बाहर से हल्का क्रिस्पी और अंदर से सॉफ्ट रहता है. इसे आप सुबह के नाश्ते के अलावा शाम की हल्की भूख के समय भी बना सकते हैं. तो आइए जानते हैं घर पर टेस्टी प्याज-मिर्च चीला बनाने की आसान रेसिपी.

    इंग्रेडिएंट्स (Ingredients)
    200 ग्राम बेसन
    2-3 बड़े चम्मच सूजी
    1/4 छोटी चम्मच लाल मिर्च पाउडर
    1/2 छोटी चम्मच हल्दी
    1/4 छोटी चम्मच अजवाइन
    1/2 छोटी चम्मच धनिया पाउडर
    1 हरी मिर्च, बारीक कटी हुई
    1/4 कप हरा धनिया, बारीक कटा हुआ
    2 प्याज, बारीक कटे हुए
    नमक स्वादानुसार
    थोड़ा सा दही
    जरूरत के अनुसार पानी
    सेंकने के लिए थोड़ा सा तेल

    कैसे बनाएं प्याज-मिर्च चीला?

    • प्याज-मिर्च चीला बनाने के लिए सबसे पहले एक बड़े बर्तन में बेसन और सूजी डालकर अच्छी तरह मिला लें.
    • अब इसमें नमक, लाल मिर्च पाउडर, हल्दी, अजवाइन, धनिया पाउडर, दही और थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए घोल तैयार करें. ध्यान रखें कि बैटर न ज्यादा गाढ़ा हो और न ही बहुत पतला. इसे लगभग 10 मिनट के लिए ढककर रख दें.
    • अब प्याज, हरी मिर्च और हरा धनिया बारीक काट लें. तैयार बैटर में इन सभी चीजों को डालकर अच्छी तरह मिला लें.
    • इसके बाद तवा गर्म करें और उस पर थोड़ा सा तेल लगाकर चिकना कर लें. अब तवे पर 2 बड़े चम्मच बैटर डालें और इसे गोल आकार में हल्का पतला फैलाएं. ऊपर से थोड़ा सा तेल डालें और चीले को कुछ देर सिकने दें.
    • जब नीचे की तरफ से चीला हल्का सुनहरा और किनारे क्रिस्पी होने लगें तो इसे सावधानी से पलट दें. दोनों तरफ से अच्छी तरह पकने और हल्का सुनहरा होने तक सेंक लें.
    • तैयार प्याज-मिर्च चीले को प्लेट में निकाल लें. इसे हरी चटनी, दही या टोमैटो कैचअप के साथ गरमागरम सर्व करें.

     

  • ग्लोइंग स्किन के लिए बनाएं चुकंदर के आइस क्यूब्स, जानें बनाने और लगाने का तरीका

    ग्लोइंग स्किन के लिए बनाएं चुकंदर के आइस क्यूब्स, जानें बनाने और लगाने का तरीका

    आजकल ग्लोइंग और फ्रेश स्किन पाने के लिए लोग कई तरह के स्किन केयर प्रोडक्ट्स के साथ-साथ घरेलू नुस्खे भी आजमाते हैं. उन्हीं में से एक है चुकंदर से बने आइस क्यूब्स. चुकंदर में विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जबकि बर्फ की ठंडक चेहरे को कुछ समय के लिए ठंडक और फ्रेशनेस देने में मदद कर सकती है.

    खास बात यह है कि चुकंदर के आइस क्यूब्स को घर पर बनाना काफी आसान है. इसके लिए आपको सिर्फ चुकंदर और थोड़ा सा पानी चाहिए. चाहें तो इसमें एलोवेरा जेल, गुलाब जल या विटामिन ई ऑयल भी मिला सकते हैं. तो आइए जानते हैं चुकंदर के आइस क्यूब्स कैसे तैयार करें और चेहरे पर इन्हें इस्तेमाल करने का सही तरीका क्या है.
    चुकंदर के आइस क्यूब्स बनाने के लिए क्या चाहिए?

    चुकंदर
    थोड़ा सा पानी
    1 चम्मच एलोवेरा जेल (ऑप्शनल)
    गुलाब जल (ऑप्शनल)
    थोड़ा सा विटामिन E ऑयल (ऑप्शनल)

    कैसे बनाएं चुकंदर के आइस क्यूब्स?
        सबसे पहले एक मध्यम आकार का चुकंदर अच्छी तरह धोकर छील लें. अब इसे छोटे टुकड़ों में काटकर थोड़ा सा पानी डालें और ब्लेंडर में अच्छी तरह पीस लें. अगर आप बिल्कुल साफ जूस चाहते हैं तो इसे छलनी या मलमल के कपड़े से छान सकते हैं.
        अब इसमें एक चम्मच एलोवेरा जेल, थोड़ा सा गुलाब जल या विटामिन E ऑयल मिला सकते हैं. हालांकि, ये चीजें डालना जरूरी नहीं है. सिर्फ चुकंदर के जूस से भी आइस क्यूब्स तैयार किए जा सकते हैं.
        तैयार मिश्रण को साफ आइस क्यूब ट्रे में डालें और करीब 4 से 6 घंटे के लिए फ्रीजर में रख दें. जब ये पूरी तरह जम जाएं तो क्यूब्स को निकालकर एयरटाइट कंटेनर या जिप लॉक बैग में रख सकते हैं. इन्हें करीब दो हफ्ते तक फ्रीजर में स्टोर किया जा सकता है.

    चेहरे पर कैसे लगाएं?
    आइस क्यूब को सीधे चेहरे पर लगाने के बजाय इसे किसी पतले और मुलायम कपड़े में लपेट लें. इससे बहुत ज्यादा ठंड की वजह से स्किन पर जलन होने का खतरा कम रहेगा. अब इसे चेहरे और गर्दन पर हल्के हाथों से सर्कुलर मोशन में घुमाएं. इसे करीब 1-2 मिनट तक ही इस्तेमाल करें.

    आप इन आइस क्यूब्स को हफ्ते में 2-3 बार इस्तेमाल कर सकते हैं. बहुत ज्यादा देर तक या रोजाना चेहरे पर बर्फ लगाने से स्किन में जलन हो सकती है, इसलिए इसका जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल न करें.

    इन बातों का रखें ध्यान
    चुकंदर के आइस क्यूब्स हर किसी की स्किन पर एक जैसा असर करें, यह जरूरी नहीं है. पहली बार इस्तेमाल करने से पहले हाथ या चेहरे के किसी छोटे हिस्से पर पैच टेस्ट जरूर करें. अगर जलन, लालिमा या खुजली हो तो इसका इस्तेमाल तुरंत बंद कर दें.

  • AI के ‘गॉडफादर’ Geoffrey Hinton की चेतावनी, बोले- खतरा समझेंगे तो रात में चैन से नहीं सो पाएंगे

    AI के ‘गॉडफादर’ Geoffrey Hinton की चेतावनी, बोले- खतरा समझेंगे तो रात में चैन से नहीं सो पाएंगे

    आज के समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वजह से सभी के अंदर डर का माहौल बना हुआ है. पिछले कुछ सालों में AI में होने वाली तेजी को देखकर कई लोग हैरान हो चुके हैं. बड़ी कंपनियों में कई एंट्री-लेवल जॉब्स भी खत्म हो रही हैं. इसकी वजह से नए स्टूडेंट्स हों या जॉब करने वाले लोग, सभी के दिमाग में AI का डर होना आम बात है.

    लेकिन ऐसे कई बच्चे भी होंगे जो इसको बहुत ज्यादा सीरियस प्रॉब्लम नहीं मान रहे होंगे. हालांकि, दुनिया भर के एक्सपर्ट्स ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से हो रहे डेवलपमेंट को देखकर बहुत बड़ी चिंता जाहिर की है. इनमें AI के 'गॉडफादर' कहे जाने वाले Geoffrey Hinton भी शामिल हैं. उन्हें 2024 में नोबेल प्राइज से नवाजा गया था.

    ज्योफ्री हिंटन ने AI के खतरे को लेकर चिंता जाहिर करते हुए कहा है कि अगर आप रात में चैन से सो पा रहे हैं, तो शायद आप AI के असली खतरे को समझ नहीं रहे हैं. आइए जानते हैं कि AI कितना बड़ा खतरा बन सकता है और क्यों दुनिया भर के एक्सपर्ट्स इसके खतरे को लेकर चिंता जाहिर कर रहे हैं.

    जानिए 'गॉडफादर' का क्या कहना है AI के बारे में
    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के 'गॉडफादर' कहे जाने वाले ज्योफ्री हिंटन दुनिया के जाने-माने AI एक्सपर्ट हैं. उन्हें साल 2024 में फिजिक्स का नोबेल प्राइज दिया गया था.

    AI के खतरों को लेकर एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि अगर आप AI के तेजी से बढ़ते खतरे के बावजूद आराम से सो पा रहे हैं, तो शायद आप इस खतरे की गंभीरता को नहीं समझ रहे हैं. उनका मानना है कि AI का खतरा काफी गंभीर है. यही वजह है कि कई एक्सपर्ट्स भी AI के खतरों के बारे में सोचकर चिंता जाहिर कर चुके हैं.

    इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बेंगलुरु के प्रोफेसर ने भी जताया था खतरा
    डॉ. प्रतोष, जो भारत के नंबर 1 माने जाने वाले इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बेंगलुरु में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं, उनका एक लेक्चर वीडियो भी वायरल हो रहा है. इसमें वह बता रहे हैं कि दुनिया में AI को लेकर जो कुछ हो रहा है, उसे देखने के बाद वह भी ठीक से सो नहीं पा रहे हैं.

    इसके अलावा सोशल मीडिया पर भी AI को लेकर कई ऐसी बातें सामने आ रही हैं, जिनमें इसके तेजी से बढ़ते इस्तेमाल और इसके संभावित खतरों को लेकर चिंता जताई जा रही है.

    इंसानों को खत्म करने वाली बात
    OpenAI के एक कर्मचारी ने कंपनी से रिजाइन करने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर AI के खतरे को लेकर अपनी चिंता जाहिर की. उनका कहना था कि आने वाले 10 सालों में AI इंसानों के लिए बड़ा खतरा बन सकता है. उन्होंने यह भी दावा किया कि AI की वजह से इंसानों के खत्म होने की 10 फीसदी संभावना हो सकती है.

    इस एम्पलाई का नाम Jacob Coxon है. इन सभी बातों से यह साफ नजर आ रहा है कि AI के बढ़ते इस्तेमाल और इसके संभावित खतरों को लेकर दुनिया भर के एक्सपर्ट्स और AI को बनाने वाले लोग भी चिंता जाहिर कर रहे हैं.

  • AI की रफ्तार रोकने का आरोप, Anthropic-OpenAI समेत 4 कंपनियों पर अमेरिका में मुकदमा

    AI की रफ्तार रोकने का आरोप, Anthropic-OpenAI समेत 4 कंपनियों पर अमेरिका में मुकदमा

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की रफ्तार रोकने की बात अब सिर्फ बहस तक नहीं रही, मामला कोर्ट पहुंच गया है. अमेरिका में Anthropic, OpenAI, Google और SpaceXAI के खिलाफ मुकदमा दायर किया गया है. आरोप है कि इन बड़ी AI कंपनियों ने मिलकर AI के विकास की रफ्तार कम करने पर सहमति बनाई. अगर ये आरोप साबित होते हैं, तो मामला अमेरिकी एंटीट्रस्ट कानूनों के तहत गंभीर हो सकता है.

    एआई को लेकर अब तक सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की रही है कि इसे कितना तेज बनाया जाए. लेकिन अब सवाल उल्टा हो गया है. क्या AI को जानबूझकर स्लो करने की कोशिश भी कंपनियों के लिए कानूनी मुसीबत बन सकती है? अमेरिका में दायर एक नए मुकदमे में Anthropic, OpenAI, Google और SpaceXAI पर यही आरोप लगाया गया है.

    मामला अमेरिका के नॉर्दर्न डिस्ट्रिक्ट ऑफ कैलिफोर्निया की कोर्ट में पहुंचा है. मुकदमा उन लोगों की तरफ से दायर किया गया है, जो ChatGPT, Claude, Grok और Gemini जैसी AI सर्विस के पेड यूजर हैं.

    एक पोस्ट से शुरू हुआ पूरा विवाद
    इस मामले की शुरुआत 12 सितंबर को एंथ्रोपिक के CEO Dario Amodei के एक सोशल मीडिया पोस्ट से हुई. अमोदेई ने एआई के तेजी से बढ़ते विकास को लेकर चिंता जताई और कहा कि कंपनियों को AI को ज्यादा सावधानी और सेफ्टी के साथ आगे बढ़ाना चाहिए.

    उनकी बात का मतलब था कि AI की रफ्तार इतनी तेज हो रही है कि उसकी सेफ्टी को लेकर भी ज्यादा तैयारी जरूरी है. उन्होंने AI कंपनियों के बीच सुरक्षा से जुड़े मामलों में कोलैबोरेशन की जरूरत की बात भी कही.

    इसके बाद OpenAI के CEO Sam Altman, SpaceXAI के Elon Musk और Google DeepMind के Demis Hassabis ने भी अमोदेई के प्रपोजल पर सार्वजनिक तौर पर रिएक्शन दिया. मुकदमा करने वालों का दावा है कि इन बयानों से पता चलता है कि बड़ी एआई कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की रफ्तार कम करने के मुद्दे पर एक-दूसरे के साथ तालमेल कर रही थीं.

    यूजर्स को क्या नुकसान होने का दावा?
    मुकदमे में सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसे एआई कंपनियों के कॉम्पिटिटर्स ने नहीं, बल्कि उनके पेड यूजर्स ने दायर किया है.
    पिटीशनर्स का कहना है कि अगर ChatGPT, Claude, Grok और Gemini जैसी सर्विसेज को बेहतर बनाने की रफ्तार कंपनियां मिलकर कम करती हैं, तो इसका सीधा असर यूजर्स को मिलने वाली सर्विस पर पड़ सकता है.

    उनका तर्क है कि अगर कोई एक कंपनी खुद अपनी AI डेवलपमेंट की रफ्तार कम करती है तो उसे बाकी कंपनियों से पीछे रहने का खतरा होगा. लेकिन अगर सभी बड़ी कंपनियां मिलकर ऐसा करें, तो मार्केट में कॉम्पिटिशन कम हो सकता है. हालांकि, यहां एक बात साफ समझना जरूरी है. अभी ये सिर्फ मुकदमे में लगाए गए आरोप हैं. कोर्ट ने इन आरोपों को सही साबित नहीं किया है.

    खुद एंथ्रोपिक ने भी उठाई थी एंटीट्रस्ट की बात
    इस पूरे मामले का एक दिलचस्प पहलू यह है कि एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई ने अपने प्रपोजल में खुद भी एंटीट्रस्ट से जुड़ी चिंता का जिक्र किया था. उन्होंने सुझाव दिया था कि अमेरिकी सरकार एआई कंपनियों के बीच सेफ्टी से जुड़ी बातचीत को आसान बनाने में मदद कर सकती है. इसके लिए कुछ खास तरह की सेफ्टी बातचीत को लेकर सीमित कानूनी छूट की जरूरत हो सकती है.

    Sam Altman ने भी ऐसे सरकारी फ्रेमवर्क का समर्थन किया था, जिसमें एआई सेफ्टी को लेकर कंपनियों के लिए एक जैसे नियम हों. हालांकि उनका कहना था कि AI सेफ्टी पर काम शुरू करने के लिए किसी नई एंटीट्रस्ट छूट या कानून का इंतजार जरूरी नहीं है.

    अब कोर्ट के सामने बड़ा सवाल
    अब इस केस में असली सवाल यही है कि एआई कंपनियों का सेफ्टी के लिए साथ काम करना कहां तक सही है. AI कंपनियां अगर अलग-अलग अपने मॉडल की सेफ्टी बढ़ाती हैं, तो यह एक बात है. लेकिन अगर कम्पेटिटर कंपनियां मिलकर एआई के विकास की रफ्तार कम करने पर सहमत होती हैं, तो अमेरिकी एंटीट्रस्ट कानून इसे किस नजर से देखता है, यही इस केस का अहम मुद्दा बन गया है.

    फिलहाल मामला शुरुआती स्टेज में है. एंथ्रोपिक, ओपनएआई, गूगल और स्पेसएक्स एआई के रेप्रेसेंटेटिव ने शनिवार तक इस मुकदमे पर तुरंत कोई जवाब नहीं दिया था. अब आगे कोर्ट में यह तय होना है कि कंपनियों का दावा किया गया सहयोग AI की सुरक्षा के लिए था या फिर इससे मार्केट में कम्पटीशन पर असर पड़ सकता है.

  • Google AI का हैरान करने वाला कारनामा, 3 कंपनियों के सिस्टम में सेंधमारी का दावा

    Google AI का हैरान करने वाला कारनामा, 3 कंपनियों के सिस्टम में सेंधमारी का दावा

    नई दिल्ली
    Google के आर्टिफिशियल मॉडल (AI) ने सभी को हैरान कर दिया है. AI मॉडल Gemini ने साइबर सिक्योरिटी टेस्टिंग के दौरान तीन कंपनियों के सिक्योरिटी सिस्टम को तोड़ते हुए उनके सिस्टम तक पहुंच बना ली. पहली बार सामने आया है, जब Google के AI सिस्टम ने खुद इस तरह का एक्शन लिया है। 

    सिस्टम में सेंधमारी की यह घटना मई में हुई थी, उस दौरान एक साइबर सिक्योरिटी कंपनी जेमिनाई की सिक्योरिटी ताकत को टेस्ट कर रही थी। 

    गूगल की सिक्योरिटी इंजीनियर की वाइस प्रेसिडेंट हेथर एकिंस ने बताा है कि एक सामान्य टेस्टिंग के दौरान Gemini ने इंटरनेट पर मौजूद पब्लिक इंफोर्मेशन को कलेक्ट किया और क्रेडेंशियल का अनुमान लगाया. फिर जेमिनाई ने तीन अन्य वेबसाइट के सिस्टम में सेंधमारी कर दी। 

    तीनों संस्थाओं को इस घटना की जानकारी दी
    एडकिंस ने बताया है कि उन्होंने यह सुनिश्चित किया है
    कि तीनों संस्थाओं को इस घटना की जानकारी दी जाए. फिर अपने ट्रेनिंग पार्टनर के साथ मिलकर उनके टेस्टिंग प्रोसेस में बदलाव पर काम किए हैं।  

    ऐसे में यह घटना दिखाती है कि पावरफुल AI मॉडल को जिम्मेदारी से काम करना सिखाना कितना मुश्किल और जरूरी भी है. यह कई कंपनियों के लिए बड़ा ही खतरनाक साबित हो सकता है। 

    गूगल के अलावा और भी कंपनियां 
    गूगल के अलावा और भी कंपनियां पावरफुल मॉडल बना चुकी है, जिसमें OpenAI और एंथ्रोपिक के नाम शामिल हैं. एंथ्रोपिक का Claude मिथोस मॉडल है, जो कंपनियों के सिस्टम को रिव्यू करता है और उनकी कमजोरियों का पता लगाता है। 

    पनी का दावा है कि इसकी मदद से कंपनियां अपनी सिक्योरिटी वॉल को मजबूत कर सकती हैं. हालांकि कई लोगों को चिंता सता रही है कि अगर मिथोस गलत हाथों में पड़ गया तो वह कंपनियों के सिस्टम में सेंधमारी करने की आशंका है। 

  • महंगे रेटिनॉल सीरम का देसी विकल्प, गाजर और एलोवेरा से बनाएं नेचुरल एंटी-एजिंग सीरम घर पर

    महंगे रेटिनॉल सीरम का देसी विकल्प, गाजर और एलोवेरा से बनाएं नेचुरल एंटी-एजिंग सीरम घर पर

     बढ़ती उम्र के साथ चेहरे पर बारीक रेखाएं (फाइन लाइन्स), झुर्रियां, स्किन का ढीलापन और डार्क स्पॉट्स आना स्वाभाविक है. आजकल स्किनकेयर में रेटिनॉल को एंटी-एजिंग के लिए सबसे असरदार माना जाता है. लेकिन बाजार में मिलने वाले रेटिनॉल सीरम बेहद महंगे होते हैं और कई बार संवेदनशील त्वचा पर जलन, लालिमा या ड्राइनेस पैदा कर देते हैं. अगर आप बिना किसी केमिकल और जलन के त्वचा में कसाव, बेदाग निखार और जवानी जैसा ग्लो पाना चाहते हैं, तो विटामिन A से भरपूर गाजर और एलोवेरा की मदद से घर पर ही 100% नेचुरल प्लांट-बेस्ड रेटिनॉल सीरम बनाकर इस्तेमाल कर सकते हैं.

    सामग्री:
    ताजी गाजर (कद्दूकस की हुई) – 1 छोटी (विटामिन A का बेहतरीन प्राकृतिक स्रोत)

    रोजहिप ऑयल या स्वीट आलमंड ऑयल (बादाम तेल) – 1 बड़ा चम्मच

    एलोवेरा जेल – 2 बड़े चम्मच (ताजा या बाजार का)

    गुलाब जल – 1 बड़ा चम्मच

    विटामिन E कैप्सूल – 1

    ग्लिसरीन – 1/2 छोटा चम्मच

    बनाने का तरीका:
    कद्दूकस की हुई गाजर में 1 बड़ा चम्मच बादाम तेल या रोजहिप ऑयल मिलाएं. अब डबल बॉइलर  मेथड से धीमी आंच पर इस मिश्रण को 8-10 मिनट तक स्टीम दें ताकि गाजर में मौजूद बीटा-कैरोटीन (विटामिन A) तेल में आ जाए. ठंडा होने पर सूती कपड़े से छानकर तेल अलग कर लें.

    एक कांच के बाउल में 2 बड़े चम्मच एलोवेरा जेल, 1 बड़ा चम्मच तैयार किया हुआ गाजर का तेल, 1 बड़ा चम्मच गुलाब जल, 1/2 छोटा चम्मच ग्लिसरीन और 1 विटामिन E कैप्सूल का तेल डालें.

    एक चम्मच की मदद से इस पूरे मिश्रण को 2 मिनट तक अच्छे से फेंटें. धीरे-धीरे इसका टेक्सचर एकदम बाजार जैसे हल्के, मखमली और नारंगी-रंग के सीरम जैसा हो जाएगा.

    इस सीरम को किसी साफ और सूखी ड्रॉप वाली कांच की डार्क बोतल में भर लें. इसे आप फ्रिज में रखकर 12-15 दिनों तक आराम से इस्तेमाल कर सकते हैं.

    रोज रात को चेहरा अच्छे से धोकर सुखा लें. 3-4 बूंद सीरम लेकर चेहरे और गर्दन पर नीचे से ऊपर की तरफ हल्के हाथों से मसाज करें और रातभर लगा रहने दें.