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  • चाणक्य नीति: ये 5 बातें भूलकर भी किसी से शेयर न करें, वरना बढ़ सकती हैं परेशानियां

    चाणक्य नीति: ये 5 बातें भूलकर भी किसी से शेयर न करें, वरना बढ़ सकती हैं परेशानियां

    : हर बात हर किसी से साझा करना हमेशा समझदारी नहीं होती. कई बार हम भरोसे में आकर अपनी निजी बातें, परिवार की परेशानियां या अपनी योजनाएं दूसरों को बता देते हैं. बाद में यही जानकारी हमारे लिए परेशानी का कारण बन सकती है. आचार्य चाणक्य ने भी अपनी नीतियों में गोपनीयता और सही समय पर बोलने के महत्व पर जोर दिया है. चाणक्य नीति के 14वें अध्याय के 17वें श्लोक में ऐसी पांच बातों का उल्लेख मिलता है जिन्हें बुद्धिमान व्यक्ति को सार्वजनिक नहीं करना चाहिए.

    1. अपनी बनाई या कारगर औषधि की जानकारी
    चाणक्य नीति में ऐसी औषधि या उपचार के बारे में हर किसी को बताने से बचने की बात कही गई है, जिसे व्यक्ति ने स्वयं तैयार किया हो और जिससे उसे लाभ मिला हो. इसका व्यापक अर्थ अपनी उपयोगी जानकारी और अनुभव को बिना सोचे-समझे सार्वजनिक करने से भी जोड़ा जा सकता है.

    आज के समय में भी किसी व्यक्तिगत उपचार या नुस्खे को दूसरों पर आजमाने से पहले सावधानी जरूरी है. हर व्यक्ति की स्थिति अलग हो सकती है, इसलिए किसी भी स्वास्थ्य संबंधी उपाय को डॉक्टर की सलाह के बिना अपनाना उचित नहीं है.

    2. अपने धर्म-कर्म और पुण्य का दिखावा न करें
    चाणक्य के अनुसार व्यक्ति को अपने धार्मिक कार्यों और पुण्य का प्रदर्शन नहीं करना चाहिए. पूजा-पाठ, दान या किसी जरूरतमंद की मदद करने के बाद उसका बार-बार जिक्र करके प्रशंसा पाने की कोशिश करना उचित नहीं माना गया है.

    धार्मिक दृष्टि से भी दान और सेवा का महत्व निस्वार्थ भाव से किए जाने में माना जाता है. इसलिए अगर आपने किसी की मदद की है या कोई धार्मिक कार्य किया है, तो उसे हर जगह बताने के बजाय अपने तक रखना बेहतर माना गया है.

    3. घर के झगड़े और पारिवारिक परेशानियां
    परिवार में होने वाले मतभेद और घरेलू परेशानियां निजी विषय होते हैं. चाणक्य नीति में घर के दोष और कलह को बाहरी लोगों के सामने उजागर न करने की सलाह दी गई है.

    हर व्यक्ति आपके परिवार की स्थिति को समझे या आपकी समस्या का सही समाधान बताए, यह जरूरी नहीं है. इसलिए परिवार से जुड़ी संवेदनशील बातों को साझा करने से पहले यह देखना जरूरी है कि सामने वाला व्यक्ति कितना भरोसेमंद है और उसे यह जानकारी देना वास्तव में जरूरी है या नहीं.

    4. पति-पत्नी की निजी बातें
    चाणक्य नीति में दांपत्य जीवन की निजी बातों को भी दूसरों से साझा न करने की सीख मिलती है. पति-पत्नी के बीच होने वाली बातचीत, निजी मतभेद या व्यक्तिगत संबंधों की जानकारी बाहर बताने से रिश्ते की निजता प्रभावित हो सकती है.

    किसी रिश्ते में समस्या हो तो हर व्यक्ति से चर्चा करने के बजाय किसी भरोसेमंद और समझदार व्यक्ति या जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ से सलाह लेना अधिक उचित हो सकता है.

    5. खराब भोजन और दूसरों की निंदा
    चाणक्य नीति में खराब या ठीक से न पके भोजन और किसी व्यक्ति के बारे में सुनी गई निंदात्मक बातों को आगे फैलाने से भी बचने की बात कही गई है. किसी के बारे में सिर्फ सुनी-सुनाई बात को सच मानकर दूसरों तक पहुंचाने से विवाद बढ़ सकता है और किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान हो सकता है. इसलिए किसी बात को आगे बढ़ाने से पहले उसकी सच्चाई और जरूरत पर विचार करना चाहिए.

    चाणक्य की नीति में मौन का भी है महत्व
    चाणक्य ने सही समय पर बोलने को भी महत्वपूर्ण माना है. उनकी नीति में कोयल का उदाहरण दिया गया है, जो उचित समय आने तक शांत रहती है और मौसम आने पर ही अपनी आवाज से वातावरण को गुंजायमान करती है.

    इससे यह सीख ली जाती है कि हर बात तुरंत कहना जरूरी नहीं है. किसी भी बात को साझा करने से पहले यह देखना चाहिए कि सामने वाला कौन है, जानकारी कितनी निजी है और उसे बताना वास्तव में जरूरी है या नहीं.

    आज के समय में क्यों जरूरी है ये सीख?
    आज सोशल मीडिया के दौर में निजी जानकारी साझा करना पहले से कहीं आसान हो गया है. परिवार की बातें, आर्थिक स्थिति, व्यक्तिगत रिश्ते और भविष्य की योजनाएं लोग कई बार सार्वजनिक मंचों पर भी साझा कर देते हैं.

    ऐसे में चाणक्य की यह सीख गोपनीयता और सोच-समझकर बोलने के महत्व की याद दिलाती है. हालांकि, हर परिस्थिति अलग होती है. किसी गंभीर पारिवारिक, कानूनी या स्वास्थ्य संबंधी समस्या में जरूरी जानकारी भरोसेमंद व्यक्ति या संबंधित विशेषज्ञ से साझा करना जरूरी हो सकता है.

  • छत्तीसगढ़ की देसी मूली भाजी-दाल, कम मसालों में बनाएं स्वादिष्ट खाना

    छत्तीसगढ़ की देसी मूली भाजी-दाल, कम मसालों में बनाएं स्वादिष्ट खाना

    ज्यादातर लोग पकौड़े खाना पसंद करते हैं. पकौडे़ खाने में जितने स्वादिष्ट लगते हैं, उन्हें बनाने में उतना ही समय और मेहनत लगती है. ऐसे में क्या हो अगर थाली में कुछ ऐसा परोसा जाए, जिसमें घर के देसी खाने का स्वाद भी हो और बनाने में ज्यादा झंझट भी न हो? तो आप कहेंगे नेकी और पूछ पूछ, मजा ही आ जाएगा. छत्तीसगढ़ की मूली भाजी और दाल ऐसी ही ट्रेडिशनल डिश है.

    हरी मूली की पत्तियों और दाल से बनने वाली ये सब्जी कम मसालों में तैयार हो जाती है, लेकिन ऊपर से पड़ने वाला लहसुन, मिर्च और जीरे का तड़का इसके स्वाद को खास बना देता है. इसे गरमा-गरम चावल या रोटी के साथ खाया जाए तो साधारण खाना भी बेहद स्वादिष्ट लगने लगता है. अगर आप भी बारिश के जाते मौसम का भरपूर मजा लेना चाहते हैं, तो ये रेसिपी आपके बहुत काम आ सकती है. चलिए जानते हैं कैसे बनाते हैं छत्तीसगढ़ की मूली भाजी और दाल की सब्जी.

    मूली भाजी और दाल बनाने के लिए इंग्रेडिएंट्स
        मूली की हरी भाजी- 1 गुच्छा
        दाल- 1 कप
        तेल- 1-2 बड़े चम्मच
        जीरा- 1 छोटा चम्मच
        लहसुन- 5-6 कलियां
        हरी मिर्च- 2-3
        नमक- स्वादानुसार
        हल्दी- ½ छोटा चम्मच (ऑप्शनल)
        पानी- जरूरत के अनुसार

    बनाने का तरीका
    1. इस सब्जी की सबसे खास बात ये है कि इसमें मूली के साथ उसकी हरी पत्तियों यानी मूली भाजी का भी इस्तेमाल होता है. सबसे पहले भाजी को अच्छी तरह चुनकर साफ कर लें.

    2. पत्तियों पर लगी मिट्टी हटाने के लिए इन्हें बहते पानी में अच्छी तरह धोना जरूरी है. इसके बाद भाजी को बारीक या अपनी पसंद के हिसाब से काट लें और एक बार फिर पानी से धो लें.

    3. अब साफ की हुई मूली भाजी को दाल के साथ प्रेशर कुकर में डाल दें. इसमें जरूरत के हिसाब से पानी और नमक मिलाएं और कुकर का ढक्कन बंद कर दें. इसे करीब 2 से 3 सीटी आने तक पकाया जा सकता है.

    4. जब कुकर का प्रेशर निकल जाए तब उसके बाद ढक्कन खोलें और भाजी-दाल को अच्छी तरह मिला लें.

    5. अब इस साधारण सी भाजी को स्वादिष्ट बनाने की बारी आती है. इसके लिए कढ़ाई में थोड़ा तेल गर्म करें. तेल गर्म होने पर इसमें जीरा, लहसुन और मिर्च डालकर अच्छे से भूनें. जब लहसुन हल्का सुनहरा होने लगे और उसकी खुशबू आने लगे, तो समझिए तड़का तैयार है.

    6. अब इसमें कुकर में पकी हुई मूली भाजी और दाल डाल दें. सभी चीजों को अच्छी तरह मिलाकर कुछ मिनट पकाएं, ताकि तड़के का स्वाद पूरी सब्जी में अच्छी तरह घुल जाए. चाहें तो स्वाद के मुताबिक नमक और मसाला भी एडजस्ट कर सकते हैं.

    चावल हो या रोटी, दोनों के साथ लगेगी लाजवाब
    मूली भाजी और दाल की यह सब्जी छत्तीसगढ़ के पारंपरिक घरों में लंबे समय से बनाई जाती रही है. इसकी खासियत यही है कि इसे बनाने के लिए बहुत ज्यादा मसालों या किसी खास इंग्रेडिएंट्स की जरूरत नहीं पड़ती. साधारण दाल, हरी भाजी और घर के मसालों से ही बढ़िया स्वाद तैयार हो जाता है.

    बारिश के दिनों में गरमा-गरम चावल के साथ इसका स्वाद खास तौर पर अच्छा लगता है. वहीं रोटी के साथ भी इसे आसानी से परोसा जा सकता है. अगर रोज की दाल-सब्जी से कुछ अलग लेकिन पूरी तरह देसी खाना ट्राई करना चाहते हैं, तो छत्तीसगढ़ की ये मूली भाजी और दाल जरूर बना सकते हैं.

  • Meta ने लॉन्च किए 100 ग्राम वाले VR Glasses, 2027 में आएंगे; कीमत ₹1.24 लाख

    Meta ने लॉन्च किए 100 ग्राम वाले VR Glasses, 2027 में आएंगे; कीमत ₹1.24 लाख

    Meta ने एक बड़ा ऐलान कर दिया है. फेसबुक की पैरेंट कंपनी ने अपने नए और हल्के वर्चुअल रियलिटी (VR) ग्लासेस को लॉन्च कर दिया है. इन्हें आम चश्मों की तरह आसानी से पहना जा सकता है. ये Apple Vision Pro जैसे भारी भरकम हेडसेट नहीं है. मेटा के न्यू VR ग्लासेस के PayTM फाउंडर भी फैन हो चुके हैं.

    कैलिफोर्निया के मेनलो पार्क में कंपनी के एनुअल प्रोग्राम कनेक्ट इवेंट हुआ. इस इवेंट के दौरान Meta CEO मार्क जकरबर्ग ने कई बड़े ऐलान किए हैं, जिसमें VR ग्लास एक खास अनाउंसमेंट हैं.

    कंपनी ने इसका नाम Meta VR Glasses रखा है. जकरबर्ग ने खुद बताया है कि इसका वजन 100 ग्राम से भी कम है. इसका वजन लगभग एक सामान्य चश्मे के आसपास ही है. हालांकि अन्य VR हेडसेट की तुलना में यह काफी हल्के हैं.

    Meta VR ग्लासेस की कीमत
    Meta VR ग्लासेस की कीमत 1299 अमेरिकी डॉलर (करीब 1,24,513 रुपये) है. जकरबर्ग ने बताया है कि न्यू VR ग्लासेस की सेल अगले साल के पहले क्वार्टर में शुरू होगी. इसको खासतौर से मूवी देखने, कंप्यूटिंग और गेमिंग एक्सपीरियंस के लिए तैयार किया गया है.

    इवेंट के दौरान जुकरबर्ग ने बताया है कि कंपनी ने फिलहाल मेटावर्स को लेकर अपना फोकस कम कर दिया है और VR डिवाइस लॉन्च करने का फैसला किया है.

    Paytm फाउंडर हुए फैन्स
    Paytm फाउंडर विजय शेखर शर्मा ने गुरुवार की सुबह-सुबह ही मेटा के न्यू VR ग्लासेस को पोस्ट किया. उन्होंने एक वीडियो भी पोस्ट किया है, जिसमें न्यू Meta VR हेडसेट की खूबियों को दिखाया गया है.

    Apple Vision Pro से होगा मुकाबला
    Meta के न्यू VR ग्लासेस का सीधा मुकाबला Apple Vision Pro के साथ होगा. दोनों डिवाइस में सबसे बड़ी चुनौती साइज है, जहां विजन प्रो एक भारी डिवाइस है और मेटा का VR हेडसेट 100 ग्राम से भी कम है. दोनों की कीमत में भी काफी अंतर विजन प्रो की कीमत 3,700 डॉलर है.

    जुकरबर्ग ने दिखाया नया Muse Charm
    Connect इवेंट के दौरान जकरबर्ग ने एक अन्य प्रोडक्ट को पेश किया है. इसको चाबी आदि में लगाया जा सकता है, जिसमें Meta का Muse AI एजेंट मौजूद हैं. यह एक रियल टाइम वॉयस मोड का भी सपोर्ट मिलता है.

  • बिना ग्रेवी बनाए बनाएं ढाबे जैसा राजमा, कुकर में डालें सारी चीजें और मिनटों में करें तैयार

    बिना ग्रेवी बनाए बनाएं ढाबे जैसा राजमा, कुकर में डालें सारी चीजें और मिनटों में करें तैयार

     राजमा-चावल का नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है, लेकिन इसे बनाने का लंबा प्रोसेस देखकर कई बार लोग अपनी पसंदीदा डिश का प्लान ही बदल देते हैं. पहले प्याज-टमाटर काटो, फिर मसालों को भूनकर ग्रेवी तैयार करो और उसके बाद राजमा को पकाने का इंतजार करो. यानी लोगों को अपना मनपसंद और टेस्टी राजमा बनाने के लिए रसोई में अच्छा-खासा समय देना पड़ता है.

    लेकिन अगर आपको ऐसा राजमा बनाने का तरीका मिल जाए जिसमें न अलग से ग्रेवी तैयार करनी पड़े और न ही प्याज-टमाटर को तेल में भूनने की जरूरत हो, तो कैसा रहेगा? आज हम आपको राजमा बनाने का एक ऐसा तरीका बताने वाले हैं, जिसमें आपको मसाला भूनने की जरूरत नहीं होगी. सभी इंग्रेडिएंट्स को सीधे कुकर में डालकर बनाया जाएगा. खास बात ये है कि राजमा बनाने का तरीका बेशक बदला है, लेकिन उसका स्वाद बिल्कुल ढाबे जैसा आएगा, जिसकी तारीफ घर का हर सदस्य करेगा. चलिए जानते हैं क्या है वो तरीका.

    इंग्रेडिएंट्स

       250 ग्राम राजमा, रातभर भिगोया हुआ
        3 कप पानी
        3-4 चम्मच देसी घी
        3 प्याज, मोटे टुकड़ों में कटे हुए
        4 टमाटर, ऊपर से हल्का चीरा लगे हुए
        10 लहसुन की कलियां
        3 इंच अदरक, कद्दूकस किया हुआ
        2-3 हरी मिर्च या स्वादानुसार

    खड़े मसाले
        1 छोटा चम्मच जीरा
        1 बड़ी इलायची
        1 तेजपत्ता
        2-3 हरी इलायची
        2-3 लौंग
        2 इंच दालचीनी

    पिसे मसाले
        2 छोटे चम्मच कश्मीरी लाल मिर्च
        2 छोटे चम्मच धनिया पाउडर
        ¼ छोटा चम्मच हल्दी
        ¼ छोटा चम्मच गरम मसाला
        स्वादानुसार नमक

    आखिर में डालें
        भुनी हुई कसूरी मेथी
        बारीक कटा हरा धनिया
        1 चम्मच देसी घी

    बनाने का तरीका
    1.
    सबसे पहले रातभर पानी में भिगोए हुए राजमा को अच्छी तरह धोकर प्रेशर कुकर में डालें. अब इसमें मोटे कटे प्याज, चीरा लगे टमाटर, लहसुन की कलियां, कद्दूकस किया अदरक और हरी मिर्च डाल दें.

    2. इसके बाद जीरा, बड़ी इलायची, तेजपत्ता, हरी इलायची, लौंग और दालचीनी जैसे सभी खड़े मसाले डालें. साथ ही कश्मीरी लाल मिर्च, धनिया पाउडर, हल्दी, गरम मसाला और नमक भी मिला दें.

    3. अब इसमें 3-4 चम्मच देसी घी और करीब 3 कप पानी डालकर सभी चीजों को अच्छी तरह मिला लें और कुकर का ढक्कन बंद कर दें. यहां आपको अलग से तेल गर्म करके मसाले भूनने या प्याज-टमाटर की ग्रेवी बनाने की जरूरत नहीं है.

    4. इसे मीडिया आंच पर करीब 4-5 सीटी आने तक पकाएं. इसके बाद गैस बंद कर दें और कुकर का प्रेशर अपने आप निकलने दें.

    5. जब कुकर का प्रेशर पूरी तरह निकल जाए तो ढक्कन खोलें. अब चिमटे से टमाटरों को बाहर निकालकर उनके छिलके हटा दें. इसके बाद टमाटरों को अच्छी तरह मैश करके वापस कुकर में डालें और राजमा के साथ सब कुछ अच्छी तरह मिला दें.

    6. अब कुकर को बिना ढक्कन लगाए मध्यम आंच पर करीब 10-15 मिनट पकाएं. इससे राजमा की ग्रेवी गाढ़ी हो जाएगी और सभी मसालों का स्वाद भी अच्छी तरह घुल जाएगा.

    7. आखिर में इसमें भुनी हुई कसूरी मेथी, बारीक कटा हरा धनिया और एक चम्मच देसी घी डालकर मिला दें. बस तैयार है आपका गरमा-गरम, गाढ़ा और मसालेदार राजमा. इसे जीरा राइस के साथ परोसें और ऊपर से थोड़ा हरा धनिया डाल दें.

  • ब्रह्म मुहूर्त में क्यों उठना चाहिए? प्रेमानंद महाराज ने बताया साधना का सही समय और नियम

    ब्रह्म मुहूर्त में क्यों उठना चाहिए? प्रेमानंद महाराज ने बताया साधना का सही समय और नियम

     हिंदू धर्म में ब्रह्म मुहूर्त बहुत ही शुभ समय माना जाता है. ब्रह्म मुहूर्त को अमृत वेला और अक्षय मुहूर्त के नाम से भी जाना जाता है, जिसे आम भाषा में ईश्वर का समय माना जाता है. ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले का बेहद शुभ समय माना जाता है. आमतौर पर यह समय सुबह करीब 4 बजे से 5:30 बजे तक माना जाता है. इस दौरान मंत्र जाप के साथ-साथ कुछ ऐसे उपाय भी किए जा सकते हैं, जिन्हें धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुभ और लाभकारी माना जाता है.

    ब्रह्म मुहूर्त को लेकर मथुरा वृंदावन के जाने माने बाबा प्रेमानंद महाराज ने भी अपनी राय रखी. प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि, 'कभी-कभी जब नए उपासकों से बातचीत होती है और वे अपनी दिनचर्या बताते हैं कि हम सुबह 6:30 बजे स्नान करते हैं, तब मन में सवाल आता है कि इतनी देर तक सोने के बाद साधना कैसे होगी? अगर कोई साधक सुबह 6:30 बजे तक सोता रहता है, तो उसकी साधना और ब्रह्मचर्य की दिनचर्या पर सवाल उठना स्वाभाविक है.'

    आगे प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि, 'शास्त्रों और महापुरुषों ने ब्रह्म मुहूर्त के समय को साधना के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया है. सामान्य रूप से साधक को सुबह 2 से 4 बजे के बीच उठकर भजन, जप और ध्यान करना चाहिए. हालांकि, अगर कोई व्यक्ति पूरी रात भजन में लगा रहा हो और किसी कारण से सुबह देर से सोया हो, तो उसकी स्थिति अलग है. लेकिन बिना किसी विशेष कारण के देर तक सोते रहना साधक की दिनचर्या के लिए उचित नहीं माना जाता है.'

    केवल सत्संग सुनना पर्याप्त नहीं
    प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि, 'मान लें आप खूब सत्संग सुनते हैं, प्रवचन सुनते हैं और भगवान की चर्चा करते हैं, लेकिन आपकी दिनचर्या में कोई बदलाव नहीं आ रहा. तब यह विचार करने की जरूरत है कि आखिर साधना का प्रभाव जीवन में क्यों नहीं दिखाई दे रहा है. सत्संग सुनना अच्छी बात है, लेकिन उसके साथ अपनी दिनचर्या को भी सुधारना जरूरी है. सुबह समय पर उठना, जप करना, ध्यान लगाना और अपने नियमों का पालन करना साधना का हिस्सा है.'

    फिर साधना में हमारा अभ्यास इतना कमजोर क्यों हो कि हम सुबह उठकर दोबारा सो जाएं?

    आज से नई दिनचर्या बनाएं
    फिर प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि, 'अगर आपकी पुरानी दिनचर्या ठीक है तो उसे बनाए रखें. अगर उसमें कमी है तो आज से उसमें सुधार करें. अपनी दिनचर्या को लिखिए और स्वयं को उसके नियमों में बांधिए. केवल रजिस्टर में लिख देने से काम नहीं चलेगा कि आज मैं 2 बजे उठ गया या 3 बजे उठ गया. खुद को इसका साक्षी बनाना होगा और अपने नियमों का ईमानदारी से पालन करना होगा. बिना नियम के प्रेम भी स्थिर नहीं हो सकता. साधना में नियम और नियमितता बहुत महत्वपूर्ण हैं.'

    ' किसी भी संत के जीवन को देखिए, उनकी दिनचर्या में अनुशासन दिखाई देगा. हमें महापुरुषों की विशेष अवस्थाओं की नकल करने के बजाय उनके दिए हुए उपदेश और साधना के नियमों को अपने जीवन में उतारना चाहिए.'

    शरीर स्वस्थ है, तभी साधना का अवसर है
    'जीवन बहुत अनमोल है. जब तक शरीर स्वस्थ है, तब तक हमारे पास भजन करने, सत्संग सुनने और भगवान का नाम लेने का अवसर है. जब कोई गंभीर बीमारी सामने आती है, तब मनुष्य को अचानक जीवन की वास्तविकता का एहसास होने लगता है. बीमारी की रिपोर्ट हाथ में आते ही अच्छे-अच्छे लोगों का मन विचलित हो जाता है. तब संसार की दूसरी चीजों से मन हटकर केवल बीमारी और मृत्यु का चिंतन करने लगता है. इसलिए जब शरीर स्वस्थ है, तभी समय का सदुपयोग करना चाहिए. यह नहीं सोचना चाहिए कि भजन बाद में कर लेंगे. भजन कोई साधारण वस्तु नहीं है. संतों ने बार-बार समझाया है कि जब तक शरीर स्वस्थ है और बुढ़ापा दूर है, तब तक भगवान के भजन में मन लगाना चाहिए.'

    भगवान का आश्रय और नाम जप
    फिर, प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि, 'साधना की दो बातें बहुत महत्वपूर्ण हैं- भीतर से भगवान का आश्रय और जिह्वा से भगवान का नाम. जब मनुष्य नियमित रूप से भगवान का नाम जपता है और उनका चिंतन करता है, तो धीरे-धीरे उसके भीतर वैराग्य बढ़ने लगता है. संसार की कई चीजों से अपने आप अरुचि होने लगती है. भजन का प्रभाव केवल बाहरी व्यवहार पर नहीं पड़ता, बल्कि मन और अंतःकरण पर भी पड़ता है. बाहरी कर्मों से बाहरी पवित्रता आती है, जबकि अंतःकरण की पवित्रता चिंतन और भजन से होती है. जब बाहरी और आंतरिक दोनों स्तरों पर साधना होने लगती है, तब धीरे-धीरे स्वभाव में परिवर्तन आता है.'

    दिनचर्या मन को बांधने का साधन है
    'दिनचर्या का अर्थ केवल समय बांटना नहीं है. इसका उद्देश्य मन को अनुशासित करना भी है. किस समय जप करना है, किस समय सत्संग सुनना है, किस समय परिक्रमा करनी है, किस समय मौन रहना है और किस समय भोजन करना है – इन सबका एक निश्चित नियम होना चाहिए.'

    'अगर आपने तय किया है कि सुबह एक निश्चित समय पर भजन करेंगे, तो उस समय को लंबे समय तक भजन के लिए सुरक्षित रखें. शुरुआत में अगर केवल 10 मिनट संभव हैं, तो 10 मिनट से शुरू कीजिए, लेकिन उस नियम को लगातार निभाइए. धीरे-धीरे अभ्यास मजबूत होगा और समय भी बढ़ाया जा सकता है.'

  • बुंदेलखंड की फेमस महेरी बनाएं घर पर, छाछ-चावल से तैयार होती है ये देसी डिश

    बुंदेलखंड की फेमस महेरी बनाएं घर पर, छाछ-चावल से तैयार होती है ये देसी डिश

    खाने के मामले में भारत का कोई तोड़ नहीं है, यहां हर शहर का अपना अलग स्वाद होता है. यूपी, उत्तराखंड से लेकर पंजाब में खाने में अलग-अलग चीजें परोसी जाती हैं और उनका टेस्ट भी हटकर होता है. उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के सीमावर्ती इलाके बुंदेलखंड के देसी खाने का स्वाद कमाल है, जो स्वाद में तो अच्छा होती है, इसके साथ ही डाइजेशन में भी अच्छा होता है. अगर आप भी कुछ झटपट बनने वाली लंच और डिनर रेसिपी की तलाश में हैं तो यह आप बुंदेलखंड की फेमस डिश महेरी ट्राई कर सकते हैं.

    महेरी एक देसी डिश है, जिसका स्वाद बच्चे और बुजुर्ग दोनों को ही पसंद आता है और यह हल्की भी होती है. इसलिए अगर आप लंच में दाल-चावल और रोटी सब्जी से हटकर कुछ खाना चाहते हैं तो आप महेरी बनाकर सकते हैं, जिसे चावल और मट्ठे से मिलकर बनाया जाता है. इस डिश को बनाने में भी बिल्कुल समय नहीं लगता है और यह आसानी से भी रेडी हो जाती है. आइए आपको महेरी बनाने का आसान तरीका बताते हैं.

    महेरी बनाने के लिए इंग्रेडिएंट्स
        कच्चे चावल -1 कप
        छाछ या मट्ठा -2 कप
        पानी -1 कप
        हल्दी पाउडर -आधा छोटी चम्मच
        नमक -स्वाद के हिसाब से
        देसी घी -जरूरत के हिसाब से
        जीरा -1 छोटी चम्मच
        सूखी लाल मिर्च -1 या 2

    महेरी बनाने का आसान तरीका

    • महेरी बनाने के लिए सबसे पहले कच्चे चावल को पानी में अच्छी तरह से धो लें, उसके बाद इन्हें करीब आधे घंटे के लिए पानी में भिगोकर रख दें. पानी में भिगोने से चावल फूल जाते हैं और पकने में आसानी होती है.
    • गैस पर कहाड़ी रखें और उसमें मट्ठा और पानी मिलाकर गर्म होने के लिए रख दें, इस मिक्सर में हल्दी और नमक मिला लें. अब लगातार इसे हल्के हाथ से चलाते रहना है, ताकि मट्ठा फटे नहीं.
    • जब मिक्चर में उबाल आने लगे तो इसमें भिगोकर रखे हुए चावलों को डालकर मिला दें. चावल डालने के बाद भी लगातार आपको चलाते रहना है.
    • करीबन 8 से 10 मिनट में चावल पक जाएंगे और इसकी कंसिस्टेंसी भी सही हो जाएगी. महेरी ना तो ज्यादा गाढ़ी और न ही ज्यादा पतली होती है.
    • चावल के पक जाने के बाद ढक्कर रखकर 2 से 3 मिनट तक के लिए पका लें और गैस बंद करके महेरी को साइड में रख दीजिए.
    • अब तड़के के लिए एक पैन में देसी घी गर्म करें और उसमें जीरा और सूखी लाल मिर्च डालकर भून लें. अब इस तड़के को सीधे महेरी के ऊपर डालकर मिला दें.

     

  • अंकुरित गेहूं से बनाएं स्वादिष्ट हलवा, स्वाद के साथ मिलेगा पोषण भी

    अंकुरित गेहूं से बनाएं स्वादिष्ट हलवा, स्वाद के साथ मिलेगा पोषण भी

    मीठा खाने का मन हो तो हलवा एक बढ़िया ऑप्शन है. आपने सूजी, आटे और बेसन से बना हलवा तो कई बार खाया होगा लेकिन क्या आपने कभी अंकुरित गेहूं का हलवा ट्राई किया है. अंकुरित गेहूं से बना यह हलवा स्वाद में लाजवाब होने के साथ पोषण से भी भरपूर होता है. इसे बनाने के लिए अंकुरित गेहूं को पीसकर घी में अच्छी तरह भुना जाता है. इसके बाद इसमें दूध, चीनी या गुड़ और इलायची मिलाई जाती है. ऊपर से काजू, बादाम, पिस्ता और किशमिश डालने से इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है. तो आइए जानते हैं घर पर अंकुरित गेहूं का हलवा कैसे बना सकते हैं और इसे बनाने के लिए किन-किन चीजों की जरूरत होती है.

    इंग्रेडिएंट्स (Ingredients)
    2 कप अंकुरित गेहूं
    4 से 5 बड़े चम्मच देसी घी
    2 कप दूध
    1 कप चीनी या गुड़
    1 छोटी चम्मच इलायची पाउडर
    10 से 12 काजू
    10 से 12 बादाम
    1 बड़ा चम्मच बारीक कटा हुआ पिस्ता
    1 बड़ा चम्मच किशमिश

    अंकुरित गेहूं का हलवा बनाएं कैसे?

    • अंकुरित गेहूं का हलवा बनाने के लिए सबसे पहले  साबुत गेहूं को 8–10 घंटे भिगो दें. फिर पानी निकालकर कपड़े में बांधकर 1–2 दिन रखें, जब तक उसमें छोटे अंकुर न निकल आएं.
    • जब गेहूं अंकुरित हो जाए तो उसे अच्छी तरह धो लें. अब इसे मिक्सी में थोड़ा पानी डालकर दरदरा पीस लें. ध्यान रखें कि गेहूं को बहुत बारीक न पीसें, क्योंकि हल्का दरदरा पेस्ट रखने से हलवे की बनावट अच्छी रहती है.
    • अब एक भारी तले की कड़ाही में देसी घी गर्म करें. घी गर्म होने पर इसमें काजू, बादाम और किशमिश डालकर हल्का सुनहरा होने तक भून लें. भुने हुए मेवों को निकालकर अलग रख दें.
    • अब उसी कड़ाही में पिसा हुआ अंकुरित गेहूं डालें और मध्यम आंच पर लगातार चलाते हुए भूनें. इसे लगभघ 10 से 15 मिनट तक भूनें, जब तक इसका रंग हल्का सुनहरा न हो जाए और अच्छी खुशबू आने न लगे. गेहूं को अच्छी तरह भूनना जरूरी है, तभी हलवे का स्वाद अच्छा आएगा.
    • इसके बाद इसमें दूध डालें और लगातार चलाते रहें, ताकि इसमें गांठें न पड़ें. कुछ देर पकाने के बाद मिश्रण गाढ़ा होने लगेगा. अब इसमें चीनी या गुड़ डालकर अच्छी तरह मिलाएं. अगर आप गुड़ का इस्तेमाल कर रहे हैं तो उसे पहले थोड़ा पिघला सकते हैं.
    • हलवे को धीमी आंच पर पकाते रहें. जब यह गाढ़ा होकर कड़ाही छोड़ने लगे, तब इसमें इलायची पाउडर और भुने हुए मेवे डाल दें. सभी चीजों को अच्छी तरह मिलाकर 2 से 3 मिनट तक और पकाएं.
    • तैयार अंकुरित गेहूं के हलवे को एक बाउल में निकालें. ऊपर से बारीक कटे पिस्ते और बादाम डालकर सजाएं. इसे गरमा-गरम परोस सकते हैं. चाहें तो ठंडा करके भी इसका स्वाद ले सकते हैं. त्योहार या किसी खास मौके पर आप इस हलवे को घर पर आसानी से बना सकते हैं.
    • अंकुरित गेहूं में फाइबर, प्रोटीन समेत कई पोषक तत्व पाए जाते हैं. हालांकि, हलवे में घी और चीनी या गुड़ की मात्रा भी होती है, इसलिए इसे बैलेंस में खाना बेहतर है.
  • iPhone Duo को लीड कर रहे भारतीय पीयूष प्रतीक, IIT Delhi से Apple तक का सफर

    iPhone Duo को लीड कर रहे भारतीय पीयूष प्रतीक, IIT Delhi से Apple तक का सफर

    Apple का पहला फोल्डेबल iPhone Duo इस समय टेक की दुनिया में चर्चा का सबसे बड़ा नाम है. करीब 3 लाख रुपये से शुरू होने वाला यह फोन सिर्फ इसलिए खास नहीं है कि यह फोल्ड होता है. इसके पीछे काम करने वाली टीम में एक भारतीय नाम भी अब खास तौर पर चर्चा में है. नाम है पीयूष प्रतीक. IIT Delhi से पढ़े पीयूष अब Apple में iPhone Duo के प्रोडक्ट मैनेजर हैं और उन्होंने खुद LinkedIn पर बताया है कि इस नए iPhone को लीड करना उनके लिए बड़ी जिम्मेदारी रही है.

    Apple ने 9 सितंबर 2026 को अपना पहला फोल्डेबल iPhone पेश किया था. कंपनी ने इसका नाम iPhone Duo रखा. फोन खुलने पर इसमें 7.6 इंच का बड़ा डिस्प्ले मिलता है, जबकि बंद करने पर 5.4 इंच की बाहरी स्क्रीन मिलती है. भारत में इसकी शुरुआती कीमत ₹2,99,900 है और इसकी बिक्री 23 अक्टूबर से शुरू होगी.

    कौन हैं पीयूष प्रतीक?
    लेकिन इस फोन की चर्चा के बीच एक भारतीय प्रोफेशनल का नाम भी तेजी से सामने आया है. यह नाम है Piyush Pratik. उनकी मौजूदा लिंक्डइन प्रोफाइल पर पद प्रोडक्ट मैनेजर, iPhone Duo लिखा है. अपने हालिया पोस्ट में उन्होंने iPhone Duo को लेकर लिखा कि इस प्रोडक्ट को लीड करना उनके लिए एक बड़ी जिम्मेदारी और सौभाग्य है. उन्होंने इस काम के पीछे ऐपल की कई टीमों की मेहनत का भी जिक्र किया है.

    यहां एक बात समझना जरूरी है. iPhone Duo किसी एक व्यक्ति ने नहीं बनाया है. ऐपल के ऐसे प्रोडक्ट में हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, डिजाइन, इंजीनियरिंग, कैमरा, ऑपरेशंस और मार्केटिंग समेत कई टीमें काम करती हैं. इसलिए पीयूष को अकेले 'iPhone Duo बनाने वाला भारतीय' कहना सही नहीं होगा. लेकिन उनकी मौजूदा भूमिका और उनके अपने बयान यह जरूर बताते हैं कि वह इस प्रोडक्ट की लीडिंग टीम का हिस्सा हैं.

    IIT Delhi से शुरू हुआ सफर
    पीयूष प्रतीक की कहानी किसी सामान्य इंजीनियरिंग जॉब से Apple तक पहुंचने वाली कहानी नहीं है. उन्होंने IIT Delhi से बायोकेमिकल इंजीनियरिंग एंड बायोटेक्नोलॉजी में B.Tech और M.Tech की डुअल डिग्री की. एवेलेबल प्रोफाइल और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने 2011 में IIT Delhi से पढ़ाई पूरी की और वहां गोल्ड मेडल भी हासिल किया.

    दिलचस्प बात यह है कि इंजीनियरिंग के बाद पीयूष सीधे Apple नहीं पहुंचे. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत Bain & Company में एसोसिएट कंसल्टेंट के तौर पर की. इसके बाद 2013 में वह InMobi से जुड़े. यहां उन्होंने प्रोडक्ट मार्केटिंग में काम किया और आगे चलकर डायरेक्टर की भूमिका तक पहुंचे.

    इसके बाद उनके करियर में एक और बड़ा मोड़ आया. 2017 में उन्होंने स्टैनफोर्ड ग्रेजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस में MBA शुरू किया. रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्हें रिलायंस धीरूभाई स्कॉलरशिप मिली थी, जिसके जरिए उनकी स्टैनफोर्ड की पढ़ाई को पूरा समर्थन मिला. 2019 में MBA पूरा करने के बाद पीयूष ने ऐपल जॉइन किया.

    iPhone Duo के अलावा इन iPhone मॉडल्स में बड़ा रोल
    पीयूष का ऐपल के साथ काम iPhone 16 से शुरू नहीं हुआ था. ऐपल में आने के बाद उन्होंने iPhone की प्रोडक्ट मैनेजमेंट टीम में काम किया और iPhone 13 लाइनअप और दूसरी जेनेरेशन के iPhone SE से जुड़े काम में भी उनकी भूमिका रही.  2024 में उनका नाम पहली बार बड़े पैमाने पर लोगों के सामने तब आया, जब Apple के iPhone 16 लॉन्च इवेंट में उन्होंने नए कैमरा कंट्रोल के बारे में जानकारी दी. इस समय भी वो भारत में सुर्खियों में रहे थे.

    यह सिर्फ एक नॉर्मल कैमरा बटन नहीं था. ऐपल ने इसे टच और प्रेशर सेंसर के साथ डिजाइन किया था. इससे कैमरा जल्दी खोला जा सकता था, फोटो क्लिक की जा सकती थी और उंगली को स्लाइड करके कैमरा सेटिंग्स जैसे जूम को कंट्रोल किया जा सकता था. बाद में इसी Camera Control को Visual Intelligence जैसे फीचर्स दिए गए.

    पीयूष ने Apple के इस नए फीचर के पीछे की सोच को भी समझाया था. उनके मुताबिक मकसद सिर्फ iPhone में एक और बटन जोड़ना नहीं था, बल्कि कैमरा इस्तेमाल करने के पूरे अनुभव को तेज और आसान बनाना था. Apple की टीम ने कैमरा कंट्रोल को इस तरह डिजाइन किया कि इसे फोन को पोर्ट्रेट और लैंडस्केप दोनों तरह से पकड़कर इस्तेमाल किया जा सके.

    अब कहानी पहुंची iPhone Duo तक
    2026 में पीयूष की भूमिका और भी ज्यादा चर्चा में आ गई है. ऐपल ने पहली बार iPhone को फोल्डेबल डिजाइन दिया है और इसका नाम iPhone Duo रखा है. पीयूष ने अपने LinkedIn पोस्ट में इस लॉन्च को ओरिजनल आईफोन के बाद सबसे बड़े बदलावों में से एक बताया और लिखा कि वह इस प्रोडक्ट को लीड करने के लिए खुद को भाग्यशाली मानते हैं. उन्होंने खास तौर पर ऐपल की अलग-अलग टीमों की मेहनत और डिटेल पर दिए गए ध्यान को इस प्रोडक्ट की सफलता का हिस्सा बताया.

  • शाम की चाय के साथ बनाएं कुरकुरी आटे की पापड़ी, बाजार की नमकीन भूल जाएंगे

    शाम की चाय के साथ बनाएं कुरकुरी आटे की पापड़ी, बाजार की नमकीन भूल जाएंगे

    शाम की चाय के साथ अगर कुछ कुरकुरा और चटपटा खाने का मन हो तो बाजार से नमकीन या बिस्किट खरीदने की जरूरत नहीं है. आप घर पर ही आसानी से पापड़ी बना सकते हैं जो खाने में मजेदार भी लगती है और इसका स्वाद भी बाजार वाली पापड़ी जैसा ही लगता है. सबसे अच्छी बात यह है कि मैदा नहीं बल्कि आप गेहूं के आटे से स्वादिष्ट और कुरकुरी पापड़ी बना सकते हैं, जो चाय के साथ बहुत मजेदार लगती है.

    खास बात यह है कि इसे बनाने के लिए बहुत ज्यादा सामग्री की जरूरत नहीं पड़ती. आटा, सूजी और कुछ बेसिक मसालों से आसानी से पापड़ी तैयार हो जाती है. इसे आप चाय के साथ स्नैक की तरह खा सकते हैं या फिर दही पापड़ी चाट जैसी डिश में भी इस्तेमाल कर सकते हैं. आइए आपको आटे की पापड़ी बनाने का तरीका बताते हैं.

    आटे की पापड़ी बनाने के लिए सामग्री
        2 कप गेहूं का आटा
        4 बड़े चम्मच बारीक सूजी
        ½ छोटा चम्मच जीरा
        1 छोटा चम्मच अजवाइन
        1 छोटा चम्मच कलौंजी
        1 छोटा चम्मच नमक
        3 बड़े चम्मच तेल
        तलने के लिए तेल

    स्वाद के लिए
        1 बड़ा चम्मच मैजिक/नूडल मसाला
        ½ छोटा चम्मच चाट मसाला

    घर पर आटे की पापड़ी बनाने का तरीका

    • सबसे पहले एक बड़े बर्तन में गेहूं का आटा और बारीक सूजी डालें. इसमें जीरा, अजवाइन, कलौंजी और नमक मिला दें.
    • अब 3 बड़े चम्मच तेल डालकर हाथों से अच्छी तरह मिलाएं. आटे को मुट्ठी में दबाकर देखें, अगर मिक्सर बंधने लगे तो समझें कि मोयन सही है.
    • अब इसमें थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए सख्त आटा गूंथ लें. आटा नरम नहीं होना चाहिए, वरना पापड़ी उतनी कुरकुरी नहीं बनेगी. आटे को करीब 10 मिनट के लिए ढककर रख दें.
    • इसके बाद आटे की छोटी-छोटी लोइयां बना लें. एक लोई को बेलकर पतली पूरी जितनी शेप दें.
    • अब कांटे की मदद से पूरी पर जगह-जगह छोटे छेद कर दें. इससे तलते समय पापड़ी ज्यादा फूलती नहीं है और अच्छी तरह कुरकुरी बनती है.
    • अब किसी गिलास या छोटे गोल कटर की मदद से बेली हुई शीट से छोटी-छोटी गोल पापड़ियां काट लें. बचा हुआ आटा फिर से गूंथकर बेलें और इसी तरह सारी पापड़ियां तैयार कर लें.
    • कड़ाही में तेल गर्म करें और पापड़ियों को स्लो से मिडियम फ्लेम पर तलें. इन्हें धीरे-धीरे पलटते रहें, जब तक कि पापड़ी गोल्डन और कुरकुरी न हो जाए.
    • हाई फ्लेम पर तलने से बाहर से पापड़ी जल्दी रंग पकड़ सकती है, जबकि अंदर से अच्छी तरह कुरकुरी नहीं होती है. इसलिए स्लो-मिडियम फ्लेम पर ही पापड़ी, पूड़ी जैसी चीजों को फ्राई करना चाहिए.
    • तली हुई पापड़ियों को निकालकर उनको प्लेट पर रख दीजिए, उनका एक्स्ट्रा तेल सोखने के लिए प्लेट पर टेश्यू पेपर बिछा दें.
    • जब पापड़ी हल्की गर्म हों, तभी ऊपर से अपनी पसंद का कोई भी नूडल मसाला और चाट मसाला डालकर अच्छी तरह टॉस करें.

    इस तरीके से करें स्टोर
    मसाला मिलाने के बाद पापड़ियों को ठंडा होने के लिए साडइ में रख दीजिए. जब पूरी तरह से ठंडी हो जाए तो उनको एयरटाइट डिब्बे में भरकर रखकर दीजिए. सही तरीके से स्टोर करने पर ये करीब 2 महीने तक इस्तेमाल की जा सकती हैं. बस निकालते समय गीले हाथ ना लगाएं और डिब्बे को टाइट से बंद करके रखें.

  • मोबाइल स्क्रीन प्रोटेक्टर पर नए नियम, 1 अप्रैल 2027 से BIS सर्टिफिकेशन होगा जरूरी

    मोबाइल स्क्रीन प्रोटेक्टर पर नए नियम, 1 अप्रैल 2027 से BIS सर्टिफिकेशन होगा जरूरी

    भारत सरकार ने मोबाइल फोन पर इस्तेमाल होने वाली स्क्रीन प्रोटेक्टर के लिए नए नियम का ऐलान किया है. नए नियम के तहत फोन डिस्प्ले पर लगने वाले प्रोटेक्टर के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) को अनिवार्य कर दिया है. यह नियम 1 अप्रैल 2027 से लागू होगा.

    इलेक्ट्रोनिक्स और सूचना प्रोद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की तरफ से दिशा-निर्देश जारी किए हैं. अधिसूचना के मुताबिक, मोबाइल फोन के डिस्प्ले पर इस्तेमाल होने वाले स्क्रीन प्रोटेक्टर को उन सामानों की लिस्ट में शामिल किया है, जिनके लिए BIS सर्टिफिकेशन्स की जरूरत होती है.

    स्मार्टफोन के डिस्प्ले के लिए इस्तेमाल होने वाले स्क्रीन प्रोटेक्टर का नया नियम 1 अप्रैल 2027 से लागू होगा. स्क्रीन प्रोटेक्टर को निर्धारित भारतीय मानक IS 19348:2025 का पालन करना होगा. रजिस्ट्रेशन सिस्टम के तहत  BIS की मंजूरी के बिना ऐसे स्क्रीन प्रोटेक्टर को भारत में कानूनी रूप से बेचना संभव नहीं होगा.

    किन कंपनियों पर पड़ेगा सीधा असर
    मोबाइल स्क्रीन प्रोटेक्टर वाले नियम का सीधा असर उन कंपनियों और ब्रांड पर पड़ेगा, जो भारत में इंपोर्ट करने वालों पर पड़ेगा. नियमों के तहत यह सुनिश्चित किया जाएगा कि मार्केट में सेल होने वाले स्क्रीन प्रोटेक्टर क्वालिटी और सेफ्टी मानकों को पूरा करते हैं.

    BIS स्क्रीन प्रोटेक्टर के लिए नए स्टैंडर्ड को सेट करेगा
    BIS के स्क्रीन प्रोटेक्टर के लिए नए स्टैंडर्ड तैयार किए जाएंगे, जिनको स्क्रीन प्रोटेक्टर मैन्यूफैक्चरर और सेलर को मानना होगा. इसके लिए जरूरी फीचर्स और टेस्टिंग को कंप्लीट करना होगा.

    इसमें स्क्रीन प्रोटेक्टर की थिकनेस और डाइमेंशन को तय किया जाएगा. साथ ही ग्लास की क्वालिटी, मजबूती का ध्यान रखा जाएगा. इसमें एंटी-शैटर फिल्म, ओलेओफोबिक कोटिंग, एंटी-ग्लेयर फिल्म, ब्लू-लाइट फिल्टर आदि के लिए नियम बनाएं जाएंगे.

    स्मार्टफोन यूजर्स पर क्या पड़ेगा असर
    स्क्रीन प्रोटेक्टर के नए नियम आने के बाद स्मार्टफोन यूजर्स पर उसका क्या असर पड़ेगा. बिजनेस टुडे ने बताया है कि भारत में बिकने वाले स्क्रीन प्रोटेक्टर एक निर्धारित क्वालिटी स्टैंडर्ड को पूरा करेंगे. इसकी वजह से स्क्रीन प्रोटेक्टर की कीमत और अवेलेबिलिटी पर असर नजर आएगा. नए स्टैंडर्ड के तहत बनने वाले स्क्रीन प्रोटेक्टर महंगे की कीमत ज्यादा हो सकती है.

    भारतीय मार्केट में मौजूदा समय में ढेरों स्मार्टफोन स्क्रीन प्रोटेक्टर ब्रांड और कंपनियां मौजूद हैं. इनमें से कुछ भारत में प्रोडक्शन करती हैं तो कई चीन और अन्य देशों से इंपोर्ट भी करते हैं.