Category: लाइफस्टाइल

  • Frozen Food से डायबिटीज का खतरा? 16 मामलों के बाद 11 कंपनियों पर केस, जानिए भारत में कितना है जोखिम

    Frozen Food से डायबिटीज का खतरा? 16 मामलों के बाद 11 कंपनियों पर केस, जानिए भारत में कितना है जोखिम

    नई दिल्ली

    अमेरिका में एक 18 वर्षीय युवक ने 11 बड़ी फूड कंपनियों के खिलाफ मुकदमा दायर कर पूरी दुनिया में फ्रोजन और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड को लेकर नई बहस छेड़ दी है. युवक का आरोप है कि बचपन से ऐसे खाने की चीजों की वजह से उसे महज 16 साल की उम्र में टाइप-2 डायबिटीज और फैटी लिवर जैसी गंभीर बीमारियां हो गईं. इस मामले के सामने आने के बाद अमेरिका में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड और फ्रोजन फूड की सुरक्षा पर सवाल उठने लगे हैं. ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या भारत में तेजी से बढ़ रहा फ्रोजन फूड बाजार भी भविष्य में ऐसी चिंता की वजह बन सकता है?

    कैसे सामने आया मामला?

     रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के पेंसिल्वेनिया निवासी ब्राइस मार्टिनेज  को 16 साल की उम्र में अचानक सीने के पास तेज दर्द महसूस हुआ. शुरुआत में उन्हें लगा कि शायद अस्थमा का दौरा पड़ रहा है, लेकिन स्कूल की नर्स ने जब उनका ब्लड प्रेशर जांचा तो स्थिति गंभीर निकली. उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें टाइप-2 डायबिटीज और फैटी लिवर डिजीज है. ब्राइस के लिए यह खबर चौंकाने वाली थी. बचपन से उनका वजन ज्यादा जरूर था, लेकिन इसके अलावा उन्हें कोई बड़ी स्वास्थ्य समस्या महसूस नहीं हुई थी. उन्हें यह भी नहीं पता था कि कम उम्र में भी टाइप-2 डायबिटीज हो सकती है।  

    बीमारी के बारे में जानकारी जुटाया
    बीमारी का पता चलने के बाद उन्होंने इंटरनेट पर अपनी बीमारी से जुड़ी जानकारी जुटानी शुरू की. इसी दौरान उन्हें अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड, बच्चों को टारगेट करके किए जाने वाले फूड मार्केटिंग और खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल होने वाले नमक, चीनी, फैट और एडिटिव्स के बारे में जानकारी मिली. उनका कहना है कि बचपन में उनके खाने का बड़ा हिस्सा ऐसे ही पैकेज्ड और रेडी-टू-ईट उत्पादों से जुड़ा था. सुबह मीठे सीरियल, स्कूल में पिज्जा, बर्गर और मैकरोनी, जबकि घर लौटने पर माइक्रोवेव में तैयार होने वाला पैक्ड खाना उनकी डेली रूटीन का हिस्सा था। 

    11 कंपनियों के खिलाफ मुकदमा किया
    18 साल की उम्र में उन्होंने 11 बड़ी फूड कंपनियों के खिलाफ मुकदमा दायर किया. इनमें क्राफ्ट हेंज, कोका-कोला, पेप्सिको और नेस्ले यूएसए जैसी कंपनियां शामिल हैं. उनका आरोप है कि कंपनियों ने बच्चों को ध्यान में रखकर ऐसे उत्पाद तैयार किए और उनका प्रचार किया, जिनके लगातार सेवन से उनकी सेहत गंभीर रूप से प्रभावित हुई. इसे अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड से जुड़ा पहला पर्सनल इंजरी मुकदमा माना जा रहा है. इसके बाद अमेरिका में इसी तरह के कई अन्य मामले भी सामने आए हैं, जिनमें आरोप लगाया गया है कि अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों ने कम उम्र में गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ाया। 

    भारत में क्या है स्थिति?
    अमेरिका में चल रही बहस के बीच भारत में भी फ्रोजन फूड का बाजार तेजी से बढ़ रहा है. कभी सिर्फ खास मौकों पर खरीदे जाने वाले फ्रोजन उत्पाद अब धीरे-धीरे रोजमर्रा की रसोई का हिस्सा बनते जा रहे हैं. फ्रोजन मोमोज, नगेट्स, फ्राइज, कबाब, बर्गर पैटी और रेडी-टू-कुक स्नैक्स अब बड़ी संख्या में घरों के फ्रीजर में जगह बना रहे हैं. इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह तेजी से बदलती लाइफस्टाइल मानी जा रही है. कामकाजी परिवारों की संख्या बढ़ने, समय की कमी और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म की आसान उपलब्धता के कारण लोग ऐसे विकल्पों को तेजी से अपना रहे हैं, जिन्हें कुछ ही मिनटों में तैयार किया जा सके। 

    fortuneindia की रिपोर्ट के अनुसार, मार्केट रिसर्च फ्यूचर की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का फ्रोजन फूड बाजार 2025 से 2035 के बीच औसतन 14.5 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ने का अनुमान है. वहींमिनिस्ट्री ऑफ फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज का कहना है कि कोल्ड-चेन और वैल्यू एडिशन इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ने से इस सेक्टर का विस्तार हो रहा है और उत्पादों की उपलब्धता भी पहले से बेहतर हुई है। 

  • नींबू के छिलके फेंकें नहीं, स्किन से सफाई तक आएंगे इतने काम

    नींबू के छिलके फेंकें नहीं, स्किन से सफाई तक आएंगे इतने काम

    नींबू के छिलके आपके लिए बहुत फायदेमंद होते हैं. खाना पकाने के अलावा भी ये कई चीजों में काम आते हैं. इनमें विटामिन C और विटामिन A भरपूर मात्रा में होता है जो आपकी स्किन के लिए बहुत अच्छा है और आपको बीमार होने से बचाने में मदद करता है. नींबू के छिलकों में पेक्टिन भी होता है, जो एक तरह का फाइबर है और शरीर को खाना पचाने में मदद करता है l

    इनमें कैल्शियम भी होता है जो आपकी हड्डियों के लिए अच्छा है. नींबू के छिलकों में पोटैशियम भी होता है जो आपके दिल के लिए अच्छा है और लिमोनीन नाम का तत्व भी होता है जो बीमारियों से लड़ने का एक नैचुरल तरीका है. नींबू के छिलकों में मौजूद ये सभी अच्छी चीजें इन्हें स्किन केयर, घर की सफाई और कीड़े-मकोड़ों को दूर रखने के लिए बेहतरीन बनाती हैं l  

    छिलके चमकाएंगे स्किन
    चूंकि नींबू के छिलकों में भी विटामिन सी, एंटीऑक्सीडेंट और नेचुरल एसिड होते हैं इसलिए ये भी त्वचा को साफ और चमकदार बनाने में मदद करते हैं. आप नींबू के बचे छिलकों को धूप में सुखाकर पीस लें और पाउडर बना लें. इस पाउडर को दही, शहद, या गुलाब जल किसी में भी मिलाकर फेस पैक या स्क्रब की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं.

    इसके अलावा नींबू के छिलके पर थोड़ा सा चीनी या नमक छिड़ककर अपनी कोहनी, घुटनों या पैरों पर हल्के हाथों से रगड़ें. यह नेचुरल स्क्रब का काम करता है और कालापन दूर करता है l

    छिलकों से नेचुरल क्लीनर बनाएं
    सूखे नींबू के छिलके असरदार नैचुरल डिसइंफेक्टेंट होते हैं क्योंकि इनमें साइट्रिक एसिड और जरूरी तेलों की मात्रा ज्यादा होती है. मल्टीपर्पस क्लीनर बनाने के लिए नींबू के छिलकों को दो हफ्ते तक सफेद सिरके में भिगोकर रखें. फिर इसे छान लें और सिरके को एक स्प्रे बोतल में भर लें. यह क्लीनर चिकनाई हटाता है, सतहों को कीटाणु-मुक्त करता है और इसमें नींबू जैसी ताजगी भरी खुशबू होती है. यह काउंटरटॉप, कांच और बाथरूम के सामान के लिए बहुत अच्छा है l

    दूर होगी घर की बदबू
    अगर आपके गार्बेज डिस्पोजल या फ्रिज से थोड़ी बदबू आ रही है तो नींबू के छिलके इसका सही उपाय हैं. बदबू दूर करने के लिए गार्बेज डिस्पोजल में थोड़े पानी के साथ कुछ छिलके डालें और उसे चला दें. या फिर छिलकों को सुखाकर एक छोटे खुले पाउच में रखें और अलमारी, लॉन्ड्री रूम या जिम बैग में रख दें ताकि वहां ताजगी बनी रहे. इनमें मौजूद एसेंशियल ऑयल तीखी बदबू को दूर करते हैं और नींबू जैसी अच्छी खुशबू छोड़ते हैं l

    कीड़े रहेंगे दूर
    नींबू के छिलके कीड़ों को दूर रखने का एक बेहतरीन प्राकृतिक उपाय हैं. इनकी तेज नींबू जैसी खुशबू चींटियों और मच्छरों समेत ज्यादातर कीड़ों को दूर रखती है. कीड़ों से छुटकारा पाने के लिए दरवाजों, खिड़कियों और दरारों के आस-पास ताजे या सूखे नींबू के छिलके छिड़कें. घर से बाहर होने पर त्वचा पर नींबू के छिलके रगड़ने से मच्छरों से भी कुछ समय के लिए राहत मिलती है l

    घर पर स्किन एक्सफोलिएंट बनाएं
    नींबू के सूखे छिलकों में विटामिन C और साइट्रिक एसिड होता है, इसलिए ये स्किन के लिए बहुत अच्छे होते हैं. छिलकों को सुखाकर उनका पाउडर बना लें. नेचुरल बॉडी स्क्रब बनाने के लिए इस पाउडर में चीनी और नारियल का तेल मिलाएं. डेड सेल्स को हटाने, स्किन का रंग हल्का करने और लंबे समय में काले धब्बों को खत्म करने के लिए इसे गोल-गोल घुमाते हुए स्किन पर लगाएं. कुछ ही दिन में आपको चेंज नजर आएगा l

    महकेगा घर का कोना-कोना
    केमिकल वाले एयर फ्रेशनर के बजाय अपने घर को नेचुरल और ताजी खुशबू से महकाने के लिए नींबू के छिलकों का इस्तेमाल करें. कुछ छिलकों को पानी में उबालें और फिर और अच्छी खुशबू के लिए उसमें रोजमेरी की कुछ डंडियां या दालचीनी के टुकड़े डालें. इसे स्टोव पर उबालें और कुछ ही मिनटों में आपका पूरा घर एक प्यारी और ताजी खुशबू से भर जाएगा. यह एक आसान तरीका है जो केमिकल-फ्री और पर्यावरण के अनुकूल है l

  • हेपेटाइटिस को हल्के में न लें, समय पर इलाज नहीं हुआ तो लिवर को हो सकता है स्थायी नुकसान

    हेपेटाइटिस को हल्के में न लें, समय पर इलाज नहीं हुआ तो लिवर को हो सकता है स्थायी नुकसान

    लिवर शरीर का ऐसा अंग है, जो खुद को काफी हद तक ठीक कर सकता है. लेकिन अगर हेपेटाइटिस का समय पर इलाज न कराया जाए, तो यह धीरे-धीरे लिवर को स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है. भगवान महावीर मणिपाल हॉस्पिटल, रांची के कंसल्टेंट गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. अंतरिक्ष कुमार ने बताया कि हेपेटाइटिस अक्सर बिना किसी खास लक्षण के बढ़ता रहता है. ऐसे में कई लोगों को इसकी जानकारी तब मिलती है, जब लिवर काफी प्रभावित हो चुका होता है l  

    हेपेटाइटिस से लिवर को स्थायी नुकसान कैसे होता है?
    डॉ. अंतरिक्ष कुमार बताते हैं कि अगर हेपेटाइटिस बी या हेपेटाइटिस सी लंबे समय तक बना रहे, तो लिवर में लगातार सूजन रहती है. धीरे-धीरे स्वस्थ लिवर की जगह दागदार ऊतक (स्कार टिश्यू) बनने लगते हैं. इसे फाइब्रोसिस कहा जाता है. अगर यह समस्या और बढ़ जाए, तो यह सिरोसिस में बदल सकती है. इस स्थिति में लिवर ठीक से काम नहीं कर पाता और हुए नुकसान को पूरी तरह ठीक करना संभव नहीं होता. डॉक्टर के अनुसार, क्रॉनिक हेपेटाइटिस बी या सी के मरीजों में मोटापा, फैटी लिवर और नियमित शराब का सेवन लिवर को होने वाले नुकसान की रफ्तार और बढ़ा सकता है l  

    किन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है?
    प्रभात खबर से बातचीत में डॉ. अंतरिक्ष कुमार ने बताया कि क्रॉनिक हेपेटाइटिस बी या सी से पीड़ित लोगों, नियमित शराब पीने वालों, फैटी लिवर, मोटापे या डायबिटीज के मरीजों और जिनके परिवार में लिवर की बीमारी का इतिहास रहा हो, उन्हें खास सावधानी बरतनी चाहिए. समय पर इलाज न मिलने पर इनमें गंभीर लिवर क्षति का खतरा अधिक होता है l

    इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें
        आंखों या त्वचा का पीला पड़ना (पीलिया)
        लगातार थकान या कमजोरी
        पेट या पैरों में सूजन
        भूख कम लगना और बिना किसी कारण वजन घटना
        मामूली चोट लगने पर भी आसानी से खून बहना या नीले निशान पड़ना

    क्या इससे बचाव संभव है?
    डॉ. अंतरिक्ष कुमार के मुताबिक, समय पर जांच ही सबसे बड़ा बचाव है. साधारण ब्लड टेस्ट से हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी का पता लगाया जा सकता है. इससे लिवर को स्थायी नुकसान पहुंचने से पहले इलाज शुरू किया जा सकता है l  

    उन्होंने बताया कि हेपेटाइटिस बी से वैक्सीनेशन के जरिए बचाव किया जा सकता है. वहीं, हेपेटाइटिस सी का इलाज आज उपलब्ध एंटीवायरल दवाओं से अधिकांश मरीजों में पूरी तरह संभव है. नियमित फॉलो-अप, जरूरत पड़ने पर समय पर इलाज, स्वस्थ वजन बनाए रखना और शराब से परहेज करने से सिरोसिस, लिवर फेलियर और लिवर कैंसर का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है l  

    विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनियाभर में करीब 25.4 करोड़ लोग क्रॉनिक हेपेटाइटिस बी और लगभग 5 करोड़ लोग क्रॉनिक हेपेटाइटिस सी के साथ जीवन जी रहे हैं. चूंकि ये संक्रमण कई वर्षों तक बिना किसी लक्षण के रह सकते हैं, इसलिए समय पर स्क्रीनिंग कराना बेहद जरूरी है l

    डॉक्टर की सलाह
     डॉ. अंतरिक्ष कुमार ने कहा, "अगर हेपेटाइटिस का समय रहते पता चल जाए, तो लिवर को होने वाले गंभीर नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है. लिवर में खुद को ठीक करने की क्षमता होती है, लेकिन जब फाइब्रोसिस बढ़कर सिरोसिस में बदल जाता है, तो हुए नुकसान को पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता. इसलिए पीलिया या पेट में सूजन जैसे लक्षण आने का इंतजार नहीं करना चाहिए. ये अक्सर बीमारी के गंभीर चरण के संकेत होते हैं. जोखिम वाले लोगों को नियमित स्क्रीनिंग करानी चाहिए, समय पर इलाज लेना चाहिए, डॉक्टर की सलाह के अनुसार फॉलो-अप कराना चाहिए और स्वस्थ जीवनशैली अपनानी चाहिए. इससे लिवर लंबे समय तक स्वस्थ रह सकता है और लिवर फेलियर व लिवर कैंसर जैसी गंभीर समस्याओं से बचाव संभव है."

  • घर पर बनाएं पापड़ जैसी पतली मटका रोटी, जानें आसान रेसिपी और टिप्स

    घर पर बनाएं पापड़ जैसी पतली मटका रोटी, जानें आसान रेसिपी और टिप्स

    घरों में रोजाना रोटियां बनाई जाती हैं. गेहूं की रोटी दाल से लेकर सब्जी तक के साथ लोग बड़े ही चाव से खाते हैं. लेकिन कई बार एक जैसी रोटी खाते-खाते लोग बोर हो जाते हैं. अगर आप भी उन लोगों में शामिल हैं, जो रोज-रोज एक जैसी रोटियां खाकर बोर हो चुके हैं, तो आप कुछ नया ट्राई कर सकते हैं. इस बार क्यों ना घर पर मटका रोटी बनाई जाए? मटका रोटी का नाम सुनकर आपको थोड़ा अजीब तो लग सकता है, लेकिन यकीन मानिए ये बहुत ही स्वादिष्ट और पापड़ जैसी पतली होती है.

    इन दिनों देसी मटका रोटी की रेसिपी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है. इसकी खासियत है कि ये देखने में बेहद पतली, हल्की कुरकुरी और अंदर से नरम होती है. सबसे अच्छी बात ये है कि इसे बनाने के लिए तंदूर या किसी महंगी मशीन की जरूरत नहीं पड़ती है. सिर्फ एक मिट्टी का मटका, गेहूं का आटा और सही तकनीक की मदद से आप घर पर ही होटल जैसी मटका रोटी बना सकते हैं. आइए जानते हैं इसे कैसे घर पर आसानी से बनाया जा सकता है.

    मटका रोटी बनाने के लिए इंग्रेडिएंट्स
        1 किलो गेहूं का आटा
        1 चम्मच नमक
        जरूरत अनुसार पानी
        मटके पर लगाने के लिए थोड़ा सा तेल
        1 मटका

    नोट: अगर आप 4-5 लोगों के लिए बना रहे हैं तो 1 किलो आटा काफी रहेगा.

    बनाने का तरीका
    1. मटका रोटी बनाने के लिए सबसे पहले गेहूं के आटे में नमक मिलाएं और सामान्य रोटी से ज्यादा मुलायम आटा गूंथ लें. ध्यान रखें कि आटा थोड़ा ज्यादा नरम और गीला होना चाहिए. आटा तैयार होने के बाद इसे लगभग 30 मिनट के लिए ढककर रख दें ताकि ये अच्छी तरह सेट हो जाए.

    2. 30 मिनट बाद आटे का थोड़ा हिस्सा लें और उसे लगातार 5-10 मिनट तक पटकते रहें. इसके बाद थोड़ा-थोड़ा पानी मिलाकर फिर से 15 मिनट तक अच्छी तरह पटकें.

    3. यही प्रोसेस 3-4 बार दोहरानी होती है. हर बार थोड़ा पानी मिलाएं और आटे को तब तक पटकें, जब तक वो पूरी तरह चिकना, लचीला और स्ट्रेची न हो जाए.

    4. आपका आटा तैयार हो गया है इसकी पहचान ये है कि आटा हाथों से ज्यादा चिपके नहीं. आसानी से फैल जाए. खींचने पर टूटे नहीं.
    बिल्कुल पतला और इलास्टिक महसूस हो. अगर आपका आटा इस तरह का होगा तो रोटी बिल्कुल परफेक्ट और टेस्टी बनेगी.

    5. रोटी बनाने से पहले मटके के बाहर की तरफ अच्छी तरह तेल लगा लें. इससे रोटी मटके पर चिपकेगी नहीं और आसानी से निकल जाएगी.

    6. रोटी बनाने के लिए हाथ में थोड़ा सा आटा लें. उसे हल्के-हल्के फैलाकर गोल आकार दें. अब इसे मटके की सतह पर धीरे-धीरे चिपका दें. अगर कहीं रोटी पतली या फटी हुई लगे तो ऊपर से थोड़ा आटा लगाकर उसे ठीक कर दें. आप देखेंगे कि लगभग 1 मिनट में रोटी पक जाती है.

    7. जब रोटी पक जाए तो चाकू या किसी पतले बर्तन की मदद से उसे ध्यान से निकाल लें. ध्यान रखें कि मटका गर्म होगा, इसलिए हाथ सीधे न लगाएं.

    गैस पर भी बना सकते हैं मटका रोटी
    अगर आपके पास चूल्हा नहीं है तो चिंता की बात नहीं है. आप गैस स्टोव पर भी मटका रखकर ये रोटी बना सकते हैं. हालांकि गैस की आंच पर रोटी पकने में थोड़ा ज्यादा समय लगता है, इसलिए सबर रखने की जरूरत पड़ेगी.

    परफेक्ट मटका रोटी बनाने के आसान टिप्स

    • आटा जितना ज्यादा लचीला होगा, रोटी उतनी ही पतली बनेगी.
    • आटे को बीच-बीच में पटकते रहें, नहीं तो वह पानी छोड़ सकता है.
    • हर रोटी से पहले मटके पर हल्का तेल जरूर लगाएं.
    • रोटी को ज्यादा देर तक न पकाएं, वरना वह सख्त हो सकती है.
    • पहली बार में आकार परफेक्ट न आए तो परेशान न हों, अभ्यास के साथ रोटी आसानी से बनने लगेगी.

     

  • OnePlus N6x भारत में लॉन्च, 7000mAh बैटरी और दमदार फीचर्स से लैस स्मार्टफोन

    OnePlus N6x भारत में लॉन्च, 7000mAh बैटरी और दमदार फीचर्स से लैस स्मार्टफोन

    OnePlus ने भारत में अपना नया बजट स्मार्टफोन OnePlus N6x लॉन्च कर दिया है. ये कंपनी की नई N Series का दूसरा स्मार्टफोन है और OnePlus N6 के बाद लाइनअप में एंट्री-लेवल मॉडल के तौर पर आया है. फोन में 7,000mAh की बड़ी बैटरी, MediaTek Dimensity 6360 Apex प्रोसेसर, 120Hz डिस्प्ले और Android 16 आधारित OxygenOS 16 दिया गया है. कंपनी इसे दो स्टोरेज वैरिएंट और दो कलर ऑप्शन में बिक्री के लिए उपलब्ध कराएगी.

    OnePlus N6x की कीमत और उपलब्धता
    OnePlus N6x की शुरुआती कीमत 18,999 रुपये रखी गई है. इस कीमत में 4GB RAM और 64GB स्टोरेज वाला वैरिएंट मिलेगा. वहीं 4GB RAM और 128GB स्टोरेज वाले मॉडल की कीमत 20,999 रुपये है. कंपनी चुनिंदा बैंक कार्ड पर 1,500 रुपये का इंस्टेंट डिस्काउंट भी दे रही है. इसके अलावा ग्राहक 6 महीने तक No Cost EMI का लाभ भी उठा सकते हैं. OnePlus N6x की बिक्री 4 अगस्त दोपहर 12 बजे से Amazon और OnePlus Online Store पर शुरू होगी. ये स्मार्टफोन Burgundy Red और Ice Blue रंगों में उपलब्ध होगा.

    OnePlus N6x के स्पेसिफिकेशन्स और फीचर्स
    OnePlus N6x में 6.8 इंच का HD+ LCD डिस्प्ले दिया गया है, जिसका रेजोल्यूशन 720×1570 पिक्सल है. डिस्प्ले 120Hz रिफ्रेश रेट, 900 निट्स पीक ब्राइटनेस, डार्क मोड, आई प्रोटेक्शन मोड, स्क्रीन कलर टेम्परेचर एडजस्टमेंट और अलग-अलग स्क्रीन कलर मोड को सपोर्ट करता है. कंपनी का दावा है कि यह स्मार्टफोन MIL-STD-810H ड्यूरेबिलिटी सर्टिफिकेशन के साथ आता है, जिससे इसकी मजबूती बेहतर होती है.

    OnePlus N6x
    फोन में MediaTek Dimensity 6360 Apex Octa-Core प्रोसेसर दिया गया है. इसके साथ 4GB RAM और 128GB तक इंटरनल स्टोरेज का विकल्प मिलता है. बेहतर थर्मल मैनेजमेंट के लिए फोन में 13,280 वर्ग मिलीमीटर वेपर चैम्बर कूलिंग सिस्टम दिया गया है, जो लंबे समय तक इस्तेमाल के दौरान फोन को ज्यादा गर्म होने से बचाने में मदद करता है.

    कैमरा और वीडियो
    फोटोग्राफी के लिए OnePlus N6x में 13 मेगापिक्सल का रियर कैमरा दिया गया है. यह CMOS सेंसर, ऑटोफोकस और 10x Digital Zoom को सपोर्ट करता है. सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए फोन में 5 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा मिलता है. ये स्मार्टफोन 1080p रिजोल्यूशन पर 30fps तक वीडियो रिकॉर्डिंग कर सकता है.

    7,000mAh बैटरी और अन्य फीचर्स
    OnePlus N6x में 7,000mAh की बड़ी बैटरी दी गई है. यह 15W Wired Fast Charging और 5W Wired Reverse Charging को सपोर्ट करती है. फोन Dual SIM सपोर्ट के साथ आता है और Android 16 आधारित OxygenOS 16 पर चलता है. इसका वजन करीब 214 ग्राम है, जबकि इसकी मोटाई 8.65mm है.

  • बेसन-सूजी का हलवा बनाएं मिनटों में, मिलेगा देसी स्वाद का मजा

    बेसन-सूजी का हलवा बनाएं मिनटों में, मिलेगा देसी स्वाद का मजा

    अगर आपको मीठा खाना पसंद है और घर पर कुछ झटपट बनाना चाहते हैं तो इस बार सिर्फ बेसन या सूजी का नहीं, बल्कि बेसन और सूजी का मिक्स हलवा ट्राई करें. देसी घी, इलायची और काजू के स्वाद से तैयार होने वाला यह हलवा खाने में काफी टेस्टी लगता है. इसे आप किसी भी खास मौके, त्योहार या अचानक मीठा खाने की इच्छा होने पर आसानी से बना सकते हैं.

    इसका स्वाद इतना लाजवाब होगा कि एक बार खाने के बाद आप इसे बार-बार बनाना पसंद करेंगे. आइए जानते हैं बेसन-सूजी का हलवा बनाने के लिए किन-किन चीजों की जरूरत होती है और इसे आसानी से कैसे बना सकते हैं.

    इंग्रेडिएंट्स (Ingredients)
    1 कप बेसन
    ½ कप सूजी
    ¼ छोटा चम्मच इलायची पाउडर
    2 बड़े चम्मच चीनी (स्वादानुसार)
    1 छोटा चम्मच काजू पाउडर
    1 बड़ा चम्मच कटे हुए काजू
    जरूरत अनुसार देसी घी
    जरूरत अनुसार पानी

    बेसन-सूजी का हलवा बनाते कैसे हैं?

    • बेसन-सूजी का हलवा बनाने के लिए सबसे पहले एक कड़ाही में देसी घी गर्म करें. अब इसमें बेसन और सूजी डालकर कम गैस पर लगातार चलाते हुए सुनहरा और खुशबूदार होने तक भूनें.
    • जब मिश्रण का रंग हल्का सुनहरा हो जाए, तब इसमें धीरे-धीरे पानी डालें और लगातार चलाते रहें, ताकि इसमें गांठें न पड़ें.
    • अब इसमें चीनी और काजू पाउडर डालकर अच्छी तरह मिलाएं. चीनी पूरी तरह घुलने तक हलवे को पकाएं.
    • इसके बाद इलायची पाउडर डालकर 2–3 मिनट तक और पकाएं. जब हलवा गाढ़ा होकर कड़ाही छोड़ने लगे, तब गैस बंद कर दें.
    • तैयार हलवे को सर्विंग बाउल में निकालें और ऊपर से कटे हुए काजू डालकर गरमा-गरम परोसें.

    हलवा बनाते समय इन बातों का रखें ध्यान

    • बेसन और सूजी को कम गैस पर अच्छी तरह भूनें, तभी हलवे का स्वाद और खुशबू अच्छी आएगी.
    • पानी धीरे-धीरे डालें और लगातार चलाते रहें, ताकि हलवा मुलायम बने.
    • चीनी हमेशा पानी डालने के बाद मिलाएं.
    • स्वाद बढ़ाने के लिए ऊपर से बादाम, पिस्ता या किशमिश भी डाल सकते हैं.

     

  • मथुरा के फेमस डुबकी वाले आलू, बेड़मी पूरी के साथ बनाएं स्वादिष्ट नाश्ता

    मथुरा के फेमस डुबकी वाले आलू, बेड़मी पूरी के साथ बनाएं स्वादिष्ट नाश्ता

     भारत में आलू की सब्जी हर घर में बनाई जाती है, लेकिन सब्जी का बनाने का तरीका और नाम अलग होते हैं. पूड़ी के साथ आलू की चटपटी सब्जी कमाल लगती है, लेकिन क्या आपने कभी बेड़मी पूड़ी के साथ मथुरा के डुबकी वाले आलू जरूर ट्राई करें. मथुरा की गलियों में मिलने वाली बेड़मी पूरी और मसालेदार आलू की सब्जी का स्वाद लोगों को खूब पसंद आता है. खास बात यह है कि इन आलू की सब्जी में न तो ज्यादा टमाटर की जरूरत होती है और न ही क्रीम या किसी तरह की ग्रेवी.

    मथुरा के डुबकी वाले आलू का नाम सुनकर ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि इसमें आलू मसालेदार ग्रेवी में अच्छी तरह डूबे हुए होते हैं. इस सब्जी की ग्रेवी न ज्यादा गाढ़ी होती है और न ही बहुत पतली. मसालों, हरी प्यूरी और सरसों के तेल से तैयार यह सब्जी स्वाद में बेहद खास होती है. इसे बेड़मी पूरी के साथ परोसा जाता है, लेकिन आप चाहें तो इसे पूड़ी, पराठे या कचौड़ी के साथ भी खा सकते हैं. आइए आपको मथुरा के डुबकी वाले आलू बनाने का सिंपल तरीका बताते हैं.

    डुबकी वाले आलू बनाने के लिए सामग्री
        उबले आलू: 3 से 4 (हल्के मैश किए हुए)
        पालक: ½ कप
        हरा धनिया: 1 कप
        अदरक: 2 इंच
        हरी मिर्च: 2 से 3
        बड़ी इलायची: 1
        छोटी इलायची: 1
        लौंग: 1 से 2
        काली मिर्च: 5 से 6
        दालचीनी: 2 इंच
        पानी: थोड़ा सा

    तड़के के लिए:
        सरसों का तेल: 2 चम्मच
        जीरा: 1 चम्मच
        सौंफ: 1 चम्मच
        हींग: 1 चुटकी

    मसाले व स्वाद के लिए:
        लाल मिर्च पाउडर: 1 चम्मच
        हल्दी पाउडर: ½ चम्मच
        धनिया पाउडर: 1½ चम्मच
        नमक: स्वादानुसार
        अमचूर पाउडर: 1 से 2 चम्मच
        काला नमक: ¼ चम्मच

    ऐसे बनाएं मथुरा के डुबकी वाले आलू

    • सबसे पहले एक कड़ाही में सरसों का तेल डालकर अच्छी तरह गर्म करें. जब तेल से धुआं निकलने लगे तो आंच थोड़ी कम कर दें.
    • अब इसमें जीरा डालें. जीरा चटकने लगे तो सौंफ और हींग डालकर कुछ सेकंड भूनें. अब तैयार की हुई हरी प्यूरी कड़ाही में डालें और अच्छी तरह मिलाएं.
    • इसके बाद लाल मिर्च, हल्दी और धनिया पाउडर को थोड़े पानी में घोलकर कड़ाही में डालें.
    • मसालों को कुछ मिनट तक पकाएं, ताकि उनका कच्चापन दूर हो जाए.
    • अब इसमें 2 से 3 कप पानी डालें और ग्रेवी को उबलने दें. पानी की मात्रा आप अपनी पसंद के अनुसार कम या ज्यादा कर सकते हैं.
    • इसके बाद मैश किए हुए आलू डालकर अच्छी तरह मिलाएं. कड़ाही को ढककर धीमी आंच पर 12 से 15 मिनट तक पकाएं.
    • इससे आलू मसालों का स्वाद अच्छी तरह सोख लेंगे. आखिर में इसमें अमचूर पाउडर और काला नमक डालकर मिलाएं.
    • गरमागरम डुबकी वाले आलू को बेड़मी पूरी के साथ परोसें और मथुरा के मशहूर नाश्ते का स्वाद घर पर ही लें.
  • रोबोट से राउटर तक, चीनी गैजेट्स पर अमेरिका की बढ़ती सुरक्षा चिंता

    रोबोट से राउटर तक, चीनी गैजेट्स पर अमेरिका की बढ़ती सुरक्षा चिंता

    घर साफ करने वाले रोबोट, वाईफाई राउटर, ड्रोन और सीसीटीवी कैमरे अमेरिका की नेशनल सिक्योरिटी पर खतरा कैसे बन रहे हैं? अमेरिका और चीन के बीच की राइवरली बढ़ती ही जा रही है. लेकिन इसी बीच अब अमेरिका ने एक बार फिर से चीनी कंपनियों के गैजेट्स और प्रोडक्ट्स अमेरिका में बैन करने शुरू कर दिए हैं.

    पहले Huawei पर रोक लगी, फिर ZTE पर कार्रवाई हुई, उसके बाद Hikvision, DJI, TikTok और अब ह्यूमनॉयड रोबोट, रोबो डॉग, रोबोट वैक्यूम क्लीन, स्मार्ट राउटर सहित कई AI गैजेट्स अब अमेरिकी ट्रंप सरकार के निशाने पर हैं. बाहर से देखने पर यह सिर्फ ट्रेड वॉर या अमेरिका-चीन की राजनीतिक लड़ाई लग सकती है, लेकिन असल में यह उससे कहीं बड़ी कहानी है.

    गौरतलब है कि हाल ही में भारत सरकार की तरफ से भी एडवाइजरी जारी की गई थी. बताया गया कि Hikvision और TP Link जैसी कंपनियों के सीसीटीवी कैमरे भारत में बैन किए जा सकते हैं. हालांकि अब तक ये डिवाइसेज भारत में उपलब्ध हैं.

    यह लड़ाई दुनिया की अगली टेक सुपरपावर बनने की है. यह लड़ाई डेटा की है. यह लड़ाई AI की है. और सबसे बढ़कर यह लड़ाई उस जानकारी की है जो आज हर स्मार्ट गैजेट आपके बारे में कलेक्ट कर रहा है. ज्यादातर लोग इस बात से पूरी तरह अनजान रहते हैं कि इस तरह के गैजेट्स आपका डेटा इस कदर कलेक्ट करते हैं कि आप चाह कर भी बच नहीं सकते हैं.

    अमेरिका की फेडरल कम्यूनिकेशन कमिशन यानी FCC ने हाल ही में नए नियम जारी किए हैं. इन नियमों के तहत चीन समेत कुछ और देशों में बने कई नए स्मार्ट डिवाइस को अमेरिकी बाजार में मंजूरी नहीं मिलेगी. इनमें ह्यूमनॉयड रोबोट, रोबोट डॉग, रोबोट वैक्यूम क्लीनर, स्मार्ट राउटर, पावर इन्वर्टर और कई नेटवर्क से जुड़े AI डिवाइस शामिल हैं.

    FCC का कहना है कि ऐसे प्रोडक्ट सिर्फ मशीन नहीं हैं, बल्कि डेटा इकट्ठा करने वाले नेटवर्क डिवाइस हैं और अगर इनका डेटा किसी विदेशी सरकार तक पहुंचता है तो यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है.

    अमेरिका को अचानक यह डर क्यों लगने लगा?
    अगर इस फैसले को सिर्फ आज की खबर मानेंगे तो पूरी कहानी समझ नहीं आएगी. इसकी शुरुआत करीब एक दशक पहले हो चुकी थी. 2018 में अमेरिका ने पहली बार चीन की बड़ी कंपनी Huawei और ZTE पर गंभीर आरोप लगाए. दावा किया गया कि इन कंपनियों के नेटवर्क उपकरणों का इस्तेमाल जासूसी के लिए किया जा सकता है. Huawei ने इन आरोपों को बार-बार खारिज किया, लेकिन इसके बावजूद अमेरिका ने अपने 5G नेटवर्क से हुआवे को लगभग बाहर कर दिया.

    इसके बाद Hikvision और Dahua जैसी सीसीटीवी कैमरा कंपनियां निशाने पर आईं. फिर DJI ड्रोन को लेकर सवाल उठे. बाद में TikTok पर यूजर डेटा चीन जाने का आरोप लगा. अब अमेरिका का मानना है कि AI और रोबोटिक्स के दौर में खतरा सिर्फ मोबाइल फोन तक ही नहीं है. घर में रखा हर स्मार्ट डिवाइस पोटेंशियल डेटा कलेक्टर बन चुका है. यही वजह है कि इस बार कार्रवाई की लिस्ट में ऐसे गैजेट्स भी शामिल हैं जिनके बारे में कुछ साल पहले तक किसी ने सोचा भी नहीं था.

    एक रोबोट वैक्यूम क्लीनर कैसे जासूसी कर सकता है?
    ज्यादातर लोगों को लगता है कि रोबोट वैक्यूम क्लीनर सिर्फ घर की सफाई करता है. लेकिन असलियत इससे काफी अलग है. आज के प्रीमियम रोबोट वैक्यूम क्लीनर्स LiDAR सेंसर से पूरे घर का 3D मैप बनाता है. उसमें कैमरा हो सकता है. कई मॉडल माइक्रोफोन का इस्तेमाल करते हैं. वह Wi-Fi से हमेशा इंटरनेट से जुड़ा रहता है. उसका मोबाइल ऐप आपके फोन से कनेक्ट रहता है और कई कंपनियां यह डेटा क्लाउड सर्वर पर भी स्टोर करती हैं. फ्रंट में कैमरा भी दिया गया होता है जो रिकॉर्ड करके सेव करता है.

    मतलब यह मशीन सिर्फ धूल नहीं देख रही होती, बल्कि उसे आपके घर का पूरा नक्शा पता होता है. किस कमरे में कौन सा फर्नीचर है, मुख्य दरवाजा कहां है, कितने कमरे हैं और घर का लेआउट कैसा है. घर में कौन कौन है ये भी देख रहा होता है.

    FCC का तर्क है कि अगर ऐसे डिवाइस बड़ी संख्या में किसी विदेशी कंपनी के सर्वर से जुड़े हों और उस कंपनी को अपने देश के कानून के तहत डेटा साझा करना पड़े, तो यह केवल प्राइवेसी का मामला नहीं रहेगा बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बन सकता है.

    रोबोट डॉग और ह्यूमनॉयड रोबोट से अमेरिका क्यों परेशान है?
    AI रोबोट आज पहले जैसे नहीं रहे. अब उनमें कई कैमरे, डेप्थ सेंसर, माइक्रोफोन, GPS, AI चिप और लगातार इंटरनेट कनेक्टिविटी होती है. अगर कोई ह्यूमनॉयड रोबोट किसी फैक्ट्री, लैब, सरकारी दफ्तर, एयरपोर्ट या बिजली स्टेशन में काम कर रहा है तो वह अपने आसपास का वीडियो, आवाज और दूसरी जानकारी रिकॉर्ड कर सकता है. आने वाले समय में यही रोबोट सुरक्षा, हेल्थकेयर, मैन्युफैक्चरिंग और सैन्य क्षेत्र में भी इस्तेमाल होंगे.

    अमेरिका का कहना है कि अगर अभी नियम नहीं बनाए गए तो फ्यूचर में ऐसे AI रोबोट सुरक्षा के लिए बड़ा जोखिम बन सकते हैं. इसलिए पहली बार ह्यूमनॉयड रोबोट को भी राष्ट्रीय सुरक्षा के दायरे में लाया गया है. इसके अलावा बैन की लिस्ट में स्मार्ट राउटर्स भी हैं.

    रोबोट वैक्यूम क्लीनर की तुलना में स्मार्ट राउटर ज्यादा खतरनाक माना जा रहा है. आपके घर का राउटर सिर्फ इंटरनेट नहीं चलाता. आपके घर का पूरा डिजिटल ट्रैफिक उसी से होकर गुजरता है. कौन सा डिवाइस कब जुड़ा, कौन सी वेबसाइट खुली, कितना डेटा इस्तेमाल हुआ, कौन सा स्मार्ट टीवी, कैमरा, लैपटॉप या मोबाइल नेटवर्क पर है, इन सबकी जानकारी राउटर के पास होती है. यहां तक कौन कहां बैठा है ये भी हैकर्स राउटर के जरिए पता लगा सकते हैं. ये कैसे मुमकिन है आप हमारे इस आर्टिकल को पढ़ कर समझ सकते हैं.

    अगर ऐसे नेटवर्क इक्विप्मेंट्स में कोई कमजोरी हो या किसी तरह का बैकडोर मौजूद हो, तो साइबर हमले का खतरा बढ़ सकता है. इसी वजह से TP-Link जैसे चीनी नेटवर्किंग प्रोडक्ट भी लंबे समय से अमेरिकी जांच के दायरे में हैं.

    क्या सिर्फ सुरक्षा की वजह से यह सब हो रहा है?
    यहीं से कहानी दिलचस्प हो जाती है. सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का एक बड़ा वर्ग मानता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा की चिंता पूरी तरह गलत नहीं है. लेकिन कई इकॉनमिस्ट और टेक एक्सपर्ट्स यह भी कहते हैं कि यह सिर्फ सिक्योरिटी का मामला नहीं है. आज दुनिया के रोबोट वैक्यूम बाजार में Roborock, Ecovacs, Dreame, Narwal और Xiaomi जैसी चीनी कंपनियों का दबदबा है. ड्रोन बाजार में DJI दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी है. रोबोटिक्स, AI हार्डवेयर और बैटरी तकनीक में भी चीन तेजी से आगे बढ़ रहा है.

    ऐसे में अमेरिका चाहता है कि उसके इंपॉर्टेंट नेटवर्क और भविष्य के AI इकोसिस्टम में विदेशी, खासकर चीनी कंपनियों की भूमिका कम हो. कई एक्सपर्ट्स इसे 'Tech Decoupling' कहते हैं, यानी अमेरिका और चीन का धीरे-धीरे अलग-अलग टेक इकोसिस्टम बनाना.

    चीन क्या कह रहा है?
    चीन ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है. चीन का कहना है कि अमेरिका बिना ठोस सबूत के राष्ट्रीय सुरक्षा का बहाना बनाकर चीनी कंपनियों को ग्लोबल बाजार से बाहर करना चाहता है. चीनी विदेश मंत्रालय का कहना है कि अगर किसी कंपनी के खिलाफ सबूत हैं तो उन्हें पब्लिक किया जाए. सिर्फ इस आधार पर कि कंपनी चीन की है, उस पर रोक लगाना निष्पक्ष व्यापार के फंडामेंटल्स के खिलाफ है.

    चीन ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका मुक्त बाजार की बात करता है, लेकिन जब चीनी कंपनियां टेक्नोलॉजी में आगे निकलती हैं तो नए नियम बनाकर उन्हें रोकने की कोशिश करता है. चीन ने चेतावनी दी है कि अगर ऐसे कदम जारी रहे तो वह अपने हितों की रक्षा के लिए जवाबी कार्रवाई करेगा. इसलिए अब दुनिया अब दो टेक कैंप में बंट रही है.

    कुछ साल पहले तक Apple, Samsung, Xiaomi या Huawei जैसे ब्रांड पूरी दुनिया के लिए लगभग एक जैसे प्रोडक्ट बनाते थे. अब स्थिति बदल रही है. अमेरिका अपने नेटवर्क, AI और सरकारी सिस्टम के लिए अलग नियम बना रहा है. यूरोप डेटा सुरक्षा के लिए अलग कानून बना रहा है. चीन अपना अलग डिजिटल इकोसिस्टम तैयार कर रहा है. इसका मतलब है कि आने वाले सालों में एक ही गैजेट हर देश में नहीं बिकेगा. कुछ डिवाइस अमेरिका में बैन होंगे लेकिन एशिया में उपलब्ध रहेंगे. कुछ ऐप यूरोप में चलेंगे लेकिन अमेरिका में नहीं.

  • iPhone 18 Pro की कीमत में बड़ा इजाफा, 1.50 लाख पार जा सकता दाम

    iPhone 18 Pro की कीमत में बड़ा इजाफा, 1.50 लाख पार जा सकता दाम

    अगस्त के बाद सितंबर महीना आएगा, जो टेक वर्ल्ड के लिए यह महीना बहुत ही अहम है. सितंबर महीने में ऐपल कंपनी बहुप्रतीक्षित न्यू iPhone सीरीज को लॉन्च करेगी. इस साल कंपनी भी कंपनी न्यू iPhone 18 Pro सीरीज को लॉन्च करेगी l  

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, मौजूदा सीरीज की तुलना में इस साल लॉन्च होने वाले प्रो सीरीज हैंडसेट की कीमत में करीब 26 हजार रुपये तक का इजाफा हो सकता है. मौजूदा समय में iPhone 17 Pro का शुरुआती वेरिएंट 1,34,900 रुपये में आता है. अगर इस पर 26 हजार रुपये का इजाफा होता है तो ये कीमत 1.50 लाख रुपये पार कर जाएगी l

    रिपोर्ट्स में दावा किया है कि iPhone 18 Pro सीरीज के मॉडल्स में टॉप एंड वेरिएंट की कीमत में काफी बड़ा अंतर देखने को मिल सकता है. अनुमान है कि टॉप एंड वेरिएंट की कीमत में काफी इजाफा हो सकता है. भारतीय में यह कीमत करीब 26 हजार रुपये तक बढ़ सकती है l

    iPhone 18 Pro के महंगे हैं कंपोनेंट्स
    मीडिया रिपोर्ट्स में बताया है कि कीमत में इजाफा होने पीछे सबसे बड़ी वजह महंगे होते कंपोनेंट्स हैं. ऐपल अपकमिंग आईफोन के लिए एक पावरफुल चिपसेट तैयार किया है, जिसको 2-नैनोमीटर (2nm) चिप टेक्नोलॉजी पर शिफ्ट किया जा रहा है l

    नई चिपसेट को तैयार करना महंगा
    रिपोर्ट्स में बातया है कि ऐपल के लिए नई चिप को बनाना पिछले वर्जन के  प्रोसेसर की तुलना में काफी महंगा है. साथ ही Pro मॉडल्स में ज्यादा RAM को शामिल किया जाएगा, जिसकी वजह से लागत में इजाफा होगा l

    अभी तक कंपनी ने कीमत का खुलासा नहीं किया है, लेकिन दावा किया है कि मौजूदा आईफोन की तुलना में अपकमिंग आईफोन सीरीजी की कीमत में इजाफा देखने को मिलेगा l

    बेहतर होगा कैमरा सेटअप
    रिपोर्ट्स में दावा किया है कि ऐपल अपने iPhone 18 Pro वेरिएंट में कैमरा सेंसर को अपग्रेड्स करने जा रहा है. अपकमिंग सीरीज में वेरिएबल अपर्चर वाला प्राइमरी कैमरा दिया जाएगा. इससे यूजर शूटिंग की स्थिति के अनुसार लेंस में आने वाली रोशनी को कंट्रोल कर सकेंगे. साथ ही टेलिफोटो लेंस में भी सुधार होगा l  

    iPhone 18 Pro सीरीज में नेक्स्ट जनरेशन A20 प्रोसेसर का इस्तेमाल किया जाएगा. इस प्रोसेसर को TSMC की 2nm प्रोसेस टेक्नोलॉजी पर तैयार किया जाएगा. नया चिपसेट मौजूदा जनरेशन की तुलना में बेहतर परफॉर्मेंस और ज्यादा एनर्जी एफिशिएंसट होगा l 

  • सावन व्रत स्पेशल: बिना चीनी-गुड़ की हेल्दी मखाना खीर रेसिपी

    सावन व्रत स्पेशल: बिना चीनी-गुड़ की हेल्दी मखाना खीर रेसिपी

    सावन के पावन महीने की शुरुआत हो चुकी है और 2 दिन बाद सोमवार का पहला व्रत रखा जाएगा. व्रत के दौरान कई लोगों को दिन में भूख या कमजोरी महसूस होती है. ऐसे में अगर आप कुछ हल्का-फुल्का, हेल्दी और बिना चीनी-गुड़ के मीठा खाने की सोच रहे हैं तो मखाने की यह खीर आपके लिए एकदम परफेक्ट विकल्प है. मखाने को कैल्शियम, प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट्स का पावरहाउस माना जाता है.

    साथ ही खीर में मौजूद दूध से भी काफी पोषण मिलता है. यहां हम आपको जो रेसिपी बता रहे हैं उसमें चीनी या गुड़ का बिल्कुल इस्तेमाल नहीं किया गया है बल्कि इसे खजूर या प्राकृतिक मिठास वाले फलों से तैयार किया जाता है जिससे यह स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद होती है. व्रत के दौरान यह आपको पूरे दिन ऊर्जावान रखेगी और भारीपन भी महसूस नहीं होने देगी. आइए जानते हैं इसे बनाने की आसान विधि.

    सामग्री (Ingredients)
    मखाने: 2 कप
    दूध: 1 लीटर (फुल क्रीम या टोंड)

    खजूर: 10-12 (बीज निकाले हुए और बारीक कटे हुए – नेचुरल मिठास के लिए)

    किसमिस: 1 बड़ा चम्मच (प्राकृतिक मिठास और स्वाद बढ़ाने के लिए)

    ड्राई फ्रूट्स: 2 बड़े चम्मच (कटे हुए बादाम, काजू और पिस्ता)

    हरी इलायची पाउडर: आधा चम्मच

    शुद्ध घी: 1-2 बड़े चम्मच

    बनाने की विधि
    सबसे पहले एक भारी तले की कड़ाही में 1-2 चम्मच शुद्ध घी गर्म करें. इसमें मखाने डालकर धीमी आंच पर लगातार चलाते हुए तब तक भूनें जब तक वे पूरी तरह क्रिस्पी न हो जाएं.

    भुने हुए मखानों में से आधे मखानों को मिक्सी में हल्का दरदरा पीस लें या हाथों से क्रश कर लें और आधे मखाने साबुत ही रहने दें. पिसे हुए मखाने खीर को बेहतरीन गाढ़ापन देंगे.

    एक भारी तले के बर्तन में 1 लीटर दूध डालकर मध्यम आंच पर उबलने के लिए रखें. जब दूध में उबाल आ जाए, तो आंच धीमी कर दें.

    अब उबलते हुए दूध में बारीक कटे हुए खजूर और किशमिश डाल दें. खजूर पकने के बाद अपनी प्राकृतिक मिठास दूध में छोड़ देंगे, जिससे चीनी या गुड़ की बिल्कुल आवश्यकता नहीं पड़ेगी.

    इसके बाद दूध में दरदरे पिसे हुए और साबुत दोनों तरह के मखाने मिला लें. इसे अच्छी तरह चलाएं.

    खीर को धीमी आंच पर 10 से 12 मिनट तक पकने दें, जब तक मखाने पूरी तरह सॉफ्ट न हो जाएं और दूध गाढ़ा व मलाईदार न दिखने लगे.

    अंत में कटे हुए ड्राई फ्रूट्स और हरी इलायची पाउडर डालकर अच्छी तरह मिलाएं. 2 मिनट और पकाने के बाद गैस बंद कर दें.