Category: लाइफस्टाइल

  • मेटा की एल्गोरिद्म गलती पर सवाल, अब चाहिए टेक कंपनियों से जवाबदेही

    मेटा की एल्गोरिद्म गलती पर सवाल, अब चाहिए टेक कंपनियों से जवाबदेही

    साल 2016 था. तारीख 8 सितंबर. नॉर्वे के बड़े अखबार Aftenposten के पहले पन्ने पर एक खुला खत छपा. यह खत Meta के CEO मार्क जुकरबर्ग के नाम था. इसमें अखबार के एडिटर ने लिखा था कि उन्हें डर है कि दुनिया का सबसे बड़ा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म अभिव्यक्ति की आजादी बढ़ाने के बजाय उसे खत्म कर रहा है. और कई बार यह काम ऐसे तरीके से हो रहा है, जो किसी लोकतांत्रिक समाज के लिए ठीक नहीं है.

    इस खत की वजह फेसबुक की एक बड़ी गलती थी. प्लेटफॉर्म ने वियतनाम युद्ध की एक मशहूर तस्वीर हटा दी थी. यह वही तस्वीर थी, जिसे पुलित्जर पुरस्कार मिला था. लेकिन फेसबुक के एल्गोरिद्म और ऑटोमैटिक फिल्टर ने उसे न्यूडिटी पॉलिसी का उल्लंघन मान लिया और पोस्ट डिलीट कर दी. जब इस फैसले पर दुनिया भर में सवाल उठे, तब फेसबुक ने माना कि उससे गलती हुई है. कंपनी ने कहा कि यह सब एक तकनीकी गड़बड़ी की वजह से हुआ.

    अब साल 2026 है. तारीख 28 जुलाई. इस बार फेसबुक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो हटा दिया. वीडियो में ऐसा कुछ भी नहीं था, जिसे आपत्तिजनक कहा जा सके. लेकिन मेटा ने फिर वही जवाब दिया. कंपनी ने कहा कि यह एक तकनीकी गलती थी. दस साल का फर्क है. दोनों बार पोस्ट हटाई गई. दोनों बार बाद में वापस भी आ गई. और दोनों बार वजह बताई गई – तकनीकी गड़बड़ी.

    यही मेटा का तरीका बन चुका है. कंपनी की ओर से जब भी कोई बड़ी गलती होती है, उसके पीछे एल्गोरिद्म या तकनीकी गड़बड़ी का बहाना सामने आ जाता है. सवाल यह है कि क्या हर बार यही जवाब काफी है? क्या दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियां सिर्फ सॉरी बोलकर अपनी जिम्मेदारी खत्म कर सकती हैं?

    असल समस्या एल्गोरिद्म नहीं हैं. असली समस्या जवाबदेही की है. टेक कंपनियां लंबे समय से अपने प्रोडक्ट और सर्विस की जिम्मेदारी लेने से बचती रही हैं. वे नियमों के दायरे में काम करना कम पसंद करती हैं और अपने सिस्टम को एक ऐसे ब्लैक बॉक्स की तरह पेश करती हैं, जिसे कोई समझ नहीं सकता.

    मार्क जुकरबर्ग ने फेसबुक के शुरुआती दिनों में एक मशहूर लाइन कही थी – 'Move fast and break things' यानी तेजी से आगे बढ़ो, चाहे रास्ते में कुछ टूटता ही क्यों न हो. सिलिकॉन वैली की सोच लंबे समय तक इसी लाइन के आसपास घूमती रही. पहले प्रोडक्ट लॉन्च करो, बाद में अगर गलती होगी तो देख लेंगे. लेकिन अब सवाल यह है कि जब इन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल अरबों लोग कर रहे हैं, सरकारें कर रही हैं और दुनिया के बड़े नेता भी इन्हीं पर मौजूद हैं, तब क्या यही सोच सही मानी जा सकती है?

    भारत के लिए प्रधानमंत्री मोदी के वीडियो वाला मामला एक मौका भी है. यह सिर्फ एक पोस्ट हटने का मामला नहीं है. यह इस बात पर बहस शुरू करने का मौका है कि क्या बड़ी टेक कंपनियों को अपने एल्गोरिद्म और ऑटोमैटिक सिस्टम के लिए भी जवाबदेह बनाया जाना चाहिए. पिछले कुछ सालों में टेक कंपनियों ने एल्गोरिद्म को एक ऐसे ब्लैक बॉक्स में बदल दिया है, जिसके अंदर क्या हो रहा है, इसकी जानकारी किसी को नहीं होती. एल्गोरिद्म इंसानों ने बनाए हैं, इंसान ही उन्हें ट्रेन करते हैं और लगातार बदलते भी हैं. लेकिन जब कोई सवाल पूछा जाता है, तो जवाब मिलता है कि यह तो एल्गोरिद्म का फैसला था.

    ऐसे उदाहरण हर दिन देखने को मिलते हैं. ई-कॉमर्स वेबसाइट एक ही प्रोडक्ट अलग-अलग लोगों को अलग कीमत पर दिखाती हैं. वजह बताई जाती है – एल्गोरिद्म. Uber, Ola और Rapido कभी किराया बढ़ा देते हैं, कभी घटा देते हैं. इसके पीछे भी एल्गोरिद्म का हवाला दिया जाता है. इंस्टाग्राम पर कई लोगों के अकाउंट बिना किसी साफ वजह के सस्पेंड हो जाते हैं. जवाब मिलता है कि सिस्टम ने ऐसा किया. कई बार किसी अपमानजनक पोस्ट पर लाखों व्यूज आते रहते हैं और कोई कार्रवाई नहीं होती. वहीं दूसरी तरफ कोई सामान्य सवाल पूछने वाला यूजर भी अचानक बैन हो जाता है. वजह फिर वही – एल्गोरिद्म.

    यानी एल्गोरिद्म अब सिर्फ यह तय नहीं कर रहे कि आपको कौन-सी पोस्ट दिखेगी. वे यह भी तय कर रहे हैं कि आपकी आवाज कितने लोगों तक पहुंचेगी, कौन दिखेगा, कौन नहीं दिखेगा और किसका अकाउंट चलता रहेगा. अब 2026 है. और ऐसा लगता है कि एल्गोरिद्म की इस दुनिया से किसी को छूट नहीं है. यहां तक कि किसी देश के प्रधानमंत्री का वीडियो भी इससे नहीं बच पाया.

    इसीलिए अब सिर्फ माफी काफी नहीं है. Meta ने वीडियो वापस बहाल कर दिया है और माफी भी मांग ली है. आने वाले दिनों में यह भी हो सकता है कि खुद मार्क जुकरबर्ग भी माफी मांग लें. लेकिन भारत को बात सिर्फ माफी तक सीमित नहीं रखनी चाहिए.

    भारत को जवाबदेही मांगनी चाहिए. यह पूछना चाहिए कि आखिर ऐसा हुआ कैसे? एल्गोरिद्म किस आधार पर फैसला लेते हैं? तकनीकी गड़बड़ी कितनी बार हो सकती है? और जब ऐसी गलती होती है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? अगर हर बार एल्गोरिद्म और टेक्निकल ग्लिच ही बचने का रास्ता बन जाएंगे, तो जवाबदेही का कोई मतलब नहीं बचेगा.

     

  • घर पर बनाएं 5000 रुपये किलो वाली शाही पिस्ता लॉज मिठाई, आसान रेसिपी से

    घर पर बनाएं 5000 रुपये किलो वाली शाही पिस्ता लॉज मिठाई, आसान रेसिपी से

    सावन और राखी में घरों में मिठाइयों का आना शुरू हो जाता है और बाजारों में मिठाइयों के दाम भी बढ़ जाते हैं. भारत में त्योहार हों, मेहमानों का स्वागत करना हो तो मिठाइयां होना तो लाजमी होता है. अगर आप भी सावन और राखी के लिए अपने हाथ से कुछ मीठा बनाने के बारे में सोच रहे हैं तो आप पिस्ता लॉज ट्राई कर सकते हैं. क्योंकि पिस्ता से बनी मिठाइयों की बात ही अलग होती है. लेकिन बाजार में मिलने वाली पिस्ता लॉज की कीमत कई जगह 4000 से 5000 रुपये किलो तक होती है.

    यही वजह है कि इसकी गिनती रॉयल मिठाइयों में की जाती है, क्योंकि इसे महंगे पिस्ता से तैयार किया जाता है. ऐसे में हर बार इसे खरीदना हर किसी के लिए आसान नहीं होता. अच्छी बात यह है कि यही शाही मिठाई आप घर पर भी बेहद आसानी से बना सकते हैं. इसके लिए बस कुछ चुनिंदा सामग्री की ही जरूरत होती है, थोड़ी-सी मेहनत से तैयार होने वाली यह मिठाई स्वाद में इतनी लाजवाब बनती है कि हर कोई इसकी तारीफ करेगा.

    अगर आप इस बार घर पर कुछ अलग और प्रीमियम मिठाई बनाना चाहते हैं, तो पिस्ता लॉज की यह आसान रेसिपी जरूर ट्राई करें. अगर आपने इसे एक बार बनाकर खिला दिया तो आपके घरवाले बार-बार आपसे इसे बनाने की मांग करेंगे.

    पिस्ता लॉज बनाने के लिए इंग्रेडिएंट्स
        2 कप बिना नमक वाले पिस्ता
        1 कप चीनी
        ½ कप पानी
        2 बड़े चम्मच मिल्क पाउडर
        1 बड़ा चम्मच घी
        ¼ छोटा चम्मच इलायची पाउडर
        थोड़े से कटे हुए पिस्ता सजाने के लिए
        चांदी का वर्क

    मिठाई बनाने का आसान तरीका

    • सबसे पहले पिस्ता को 10 से 15 मिनट के लिए गर्म पानी में भिगो दें. इसके बाद छिलका निकालकर अच्छी तरह सुखा लें.
    • उसके बाद पिस्ता को मिक्सर में बारीक पीस लें. ध्यान रखें कि ज्यादा देर तक न पीसें, वरना पिस्ता अपना तेल छोड़ सकता है.
    • अब एक पैन में चीनी और पानी डालकर एक तार की चाशनी तैयार करें. जब चाशनी बन जाए, तब इसमें पिसा हुआ पिस्ता और मिल्क पाउडर डालकर लगातार चलाते रहें.
    • कुछ मिनट बाद इसमें घी और इलायची पाउडर मिलाएं. मिक्सर जब गाढ़ा होकर पैन छोड़ने लगे, तब गैस बंद कर दें.
    • अब एक घी लगी हुई ट्रे या प्लेट में इस मिक्सर को फैलाकर बराबर कर लें. ऊपर से कटे हुए पिस्ता और चाहें तो चांदी का वर्क लगाकर गार्निश करें.
    • मिठाई को 2 से 3 घंटे के लिए सेट होने दें. इसके बाद मनचाहे डायमंड या चौकोर शेप में काट लें.

    स्वाद बढ़ाने के लिए अपनाएं ये टिप्स
        हमेशा अच्छी क्वालिटी के बिना नमक वाले पिस्ता का इस्तेमाल करें.
        चाशनी एक तार से ज्यादा गाढ़ी न होने दें, नहीं तो मिठाई सख्त हो सकती है.
        अगर ज्यादा रिच स्वाद चाहते हैं, तो थोड़ा-सा केसर या गुलाब जल भी मिला सकते हैं.
        मिठाई को एयरटाइट डिब्बे में रखकर 7 से 10 दिन तक सुरक्षित रखा जा सकता है.

    घर पर बनी यह पिस्ता लॉज दिखने में जितनी शाही लगती है, स्वाद में भी उतनी ही शानदार होती है. खास बात यह है कि इसमें आप अपनी पसंद के अनुसार मिठास और फ्लेवर भी तय कर सकते हैं. अगली बार महंगी मिठाई खरीदने की बजाय इस आसान रेसिपी को जरूर आजमाएं और परिवार के साथ घर की बनी स्वादिष्ट पिस्ता लॉज का मजा लें.

  • Apple AirPods में आएंगे कैमरे, Siri और AI अनुभव को मिलेगा नया अपग्रेड

    Apple AirPods में आएंगे कैमरे, Siri और AI अनुभव को मिलेगा नया अपग्रेड

    ऐपल अगले महीने iPhone 18 सीरीज लॉन्च करने वाला है. फोल्डेबल फोन की भी चर्चा हो रही है. इसी बीच रिपोर्ट ये भी आ रही है कि कंपनी इस बार अपने AirPods में बड़े बदलाव कर सकती है. कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि कंपनी ऐसे AirPods पर काम कर रही है जिनमें छोटे कैमरे या इंफ्रारेड सेंसर दिए जाएंगे. पहली नजर में यह सुनकर लग सकता है कि अब AirPods से फोटो या वीडियो भी रिकॉर्ड किए जा सकेंगे, लेकिन ऐसा नहीं है. इन कैमरों का मकसद पूरी तरह अलग होगा.

    ब्लूमबर्ग के मार्क गुरमन और सप्लाई चेन रिपोर्ट्स के आधार पर सामने आई जानकारी के मुताबिक ऐपल इन कैमरों का इस्तेमाल ऐपल इंटेलिजेंस और सिरी को ज्यादा स्मार्ट बनाने के लिए करना चाहता है. यानी AirPods आपके आसपास की चीजों को देख सकेंगे और उसी हिसाब से आपको जानकारी दे पाएंगे. ऐपल पिछले कुछ समय से AI की रेस में तेजी से आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है.

    आईफोन में विजुअल इंटेलिजेंस फीचर आने के बाद अब कंपनी चाहती है कि यही एक्सपीरिएंस दूसरे डिवाइस में भी मिले. इसी वजह से AirPods को सिर्फ म्यूजिक सुनने वाला डिवाइस नहीं, बल्कि AI वियरेबल बनाने की तैयारी चल रही है. लीक्स के मुताबिक AirPods में दिए जाने वाले कैमरे आम कैमरों जैसे नहीं होंगे. ये छोटे इंफ्रारेड सेंसर होंगे जो आसपास के माहौल को समझने में मदद करेंगे.

    उदाहरण के लिए अगर आप किसी दुकान में खड़े हैं और किसी प्रोडक्ट के बारे में जानना चाहते हैं, तो Siri उससे जुड़ी जानकारी बता सकती है. अगर आप किसी विदेशी शहर में हैं, तो रास्ता समझाने या किसी बोर्ड को पहचानने में भी यह सिस्टम मदद कर सकता है.

    ऐपल का फोकस फिलहाल विजुअल इंटेलिजेंस को और बेहतर बनाने पर है. फिलहाल यह फीचर नए iPhone मॉडल में कैमरे के जरिए काम करता है, लेकिन फेयूचर में AirPods भी इसमें अहम भूमिका निभा सकते हैं. कंपनी चाहती है कि यूजर बिना फोन निकाले सिर्फ Siri से सवाल पूछ सके और AI उसके आसपास की चीजों को समझकर जवाब दे सके.

    रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि AirPods में एक LED इंडिकेटर दिया जा सकता है. जब भी कैमरे या सेंसर विजुअल डेटा प्रोसेस करेंगे, तब यह लाइट जल जाएगी. इसका मकसद लोगों को यह बताना होगा कि डिवाइस उस समय विजुअल इनपुट का इस्तेमाल कर रहा है. इससे प्राइवेसी को लेकर ट्रांसपेरेंसी बनाए रखने की कोशिश की जाएगी.

    अगर यह प्रोजेक्ट सफल होता है, और सेंसर्स वाले एयर पॉड्स लॉन्च होते हैं तो ये सिर्फ वायरलेस ईयरबड्स नहीं रहेंगे. वे ऐपल के AI इकोसिस्टम का अहम हिस्सा बन जाएंगे. इससे Siri ज्यादा समझदार होगी और यूजर को बिना स्क्रीन देखे भी कई काम करने में मदद मिल सकती है.

  • मुंबई का फेमस स्वाद, अब घर पर बनाएं कुरकुरी कोथिंबीर वड़ा पाव रेसिपी

    मुंबई का फेमस स्वाद, अब घर पर बनाएं कुरकुरी कोथिंबीर वड़ा पाव रेसिपी

    दिल्ली-मुंबई के खाने की अक्सर ही तुलना होती रहती है और दोनों ही जगहों का खाना लोगों को बहुत पसंद आता है. नाश्ते में मुंबई के लोग वड़ा पाव बड़े चाव से खाते हैं, लेकिन जब इसमें धनिया से बनी कुरकुरी कोथिंबीर वड़ी का स्वाद जुड़ जाता है, तो इसका जायका कई गुना बढ़ जाता है. अगर रोजाना पोहा, पराठा या ब्रेड खाकर बोर हो गए हैं, तो इस बार नाश्ते में महाराष्ट्र की मशहूर कोथिंबीर वड़ा पाव रेसिपी ट्राई करें l  

    कोथिंबीर वड़ा पाव का नाम सुनकर अगर आप सोच रहे हैं कि इसे बनाने में काफी मेहनत और समय लगता होगा, तो ऐसा नहीं है. अगर आप भी फेमस और स्वादिष्ट नाश्ते को बनाना चाहते हैं तो आप इस आसान रेसिपी को ट्राई कर सकते हैं, जो सुबह के नाश्ते और शाम की चाय के साथ और बच्चों को टिफिन के लिए एकदम परफेक्ट रहने वाली है l  

    आइए आपको महाराष्ट्र स्टाइल में स्वादिष्ट कोथिंबीर वड़ा पाव बनाने का सिंपल तरीका बताते हैं. यह बाहर से कुरकुरी और अंदर से नरम होती है और जब सबसे अच्छी बात यह है कि इसे आप कुछ ही मिनटों में तैयार कर सकते हैं l

    कोथिंबीर वड़ा पाव बनाने के लिए सामग्री

    कोथिंबीर वड़ी के लिए

        2 कप बारीक कटा हरा धनिया
        1 कप बेसन
        2 बड़े चम्मच चावल का आटा
        1 छोटा चम्मच अदरक-लहसुन का पेस्ट
        2 हरी मिर्च बारीक कटी हुई
        ½ छोटा चम्मच हल्दी
        1 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर
        1 छोटा चम्मच धनिया पाउडर
        ½ छोटा चम्मच जीरा
        ½ छोटा चम्मच अजवाइन
        1 छोटा चम्मच तिल
        स्वादानुसार नमक
        जरूरत अनुसार पानी
        तलने के लिए तेल

    वड़ा पाव के लिए

        4-5 पाव
        हरी चटनी
        लहसुन की सूखी चटनी
        थोड़ा मक्खन

    बनाने की विधि

    • सबसे पहले एक बड़े बाउल में बारीक कटा हरा धनिया, बेसन, चावल का आटा, हल्दी, लाल मिर्च, धनिया पाउडर, जीरा, अजवाइन, तिल, अदरक-लहसुन का पेस्ट, हरी मिर्च और नमक मिलाएं.
    • फिर इसका थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए गाढ़ा बैटर तैयार करें. इस मिक्सर को चिकनी की हुई थाली में फैलाकर 15 से 20 मिनट तक स्टीम करें.
    • ठंडा होने पर इसे चौकोर या लंबी स्टिक के आकार में काट लें. एक तरफ कड़ाही में तेल गर्म करने के लिए रख दीजिए.
    • जब तेल गर्म हो जाए तो इन टुकड़ों को सुनहरा और कुरकुरा होने तक तल लें. अब पाव को बीच से काटकर हल्का मक्खन लगाकर तवे पर सेंक लें.
    • पाव के अंदर हरी चटनी और लहसुन की सूखी चटनी लगाएं. बीच में 2 से 3 कुरकुरी कोथिंबीर वड़ी रखें और पाव बंद करके सर्व करें.

    परोसने का तरीका
    गरमा-गरम कोथिंबीर वड़ा पाव को तली हुई हरी मिर्च, टमाटर सॉस या हरी चटनी के साथ परोसें.  अगर चाहें तो ऊपर से थोड़ा चाट मसाला छिड़ककर इसका स्वाद और भी बढ़ा सकते हैं.  यह रेसिपी बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आएगी और कम समय में बनने वाला एक शानदार नाश्ता साबित होगी. इसका स्वाद नॉर्मल वड़ा पाव से हटकर होता है, इसलिए लोग इसे मजे से खाते हैं. आप इसको शाम की चाय के साथ भी बनाकर खा सकते हैं, बारिश में भी इसका लुफ्त उठाया जा सकता है.

  • WhatsApp यूजर्स अलर्ट! 24 घंटे के लिए बंद हो रहे अकाउंट, Meta ने बताई बड़ी वजह

    WhatsApp यूजर्स अलर्ट! 24 घंटे के लिए बंद हो रहे अकाउंट, Meta ने बताई बड़ी वजह

    नई दिल्ली

    अगर आपका WhatsApp अचानक बंद हो जाए तो घबराने की जरूरत नहीं है। भारत समेत कई देशों के हजारों यूजर्स के साथ भी ऐसा ही हुआ है, जहां बिना किसी चेतावनी के उनके अकाउंट 24 घंटे के लिए रिव्यू में चले गए। इसके बाद वे अपने अकाउंट का इस्तेमाल नहीं कर सके और उन्हें बताया गया कि रिव्यू प्रक्रिया में 24 घंटे तक का समय लग सकता है। सबसे हैरानी की बात यह रही कि कई यूजर्स का दावा है कि उन्होंने न तो स्पैम मैसेज भेजे, न किसी थर्ड-पार्टी WhatsApp ऐप का इस्तेमाल किया और न ही प्लेटफॉर्म का कोई नियम थोड़ा। इसके बावजूद उनके अकाउंट लॉक हो गए।

    क्या है पूरा मामला
    भारत सहित कई देशों के WhatsApp यूजर्स ने अचानक अपने अकाउंट पर "Account Under Review" का मैसेज देखा। इसके बाद वे चैट, कॉल या अन्य फीचर्स का इस्तेमाल नहीं कर पाए। कई यूजर्स के अनुसार, उन्हें पहले कोई चेतावनी भी नहीं मिली थी। कई मामलों में यूजर्स को बताया गया कि उनका अकाउंट रीव्यू हो रहा है और इस प्रोसेस में 24 घंटे तक लग सकते हैं। इस दौरान अकाउंट का सामान्य इस्तेमाल संभव नहीं था।

    भारत के यूजर्स भी हुए प्रभावित
    यह समस्या केवल किसी एक देश तक सीमित नहीं रही। भारत के कई यूजर्स ने भी सोशल मीडिया और Reddit जैसे प्लेटफॉर्म पर बताया कि उनके WhatsApp अकाउंट अचानक लॉक हो गए। हालांकि, बड़ी संख्या में एक साथ सामने आए मामलों को देखते हुए कई यूजर्स का मानना है कि यह ऑटोमेटेड मॉडरेशन सिस्टम की गड़बड़ी या किसी तकनीकी बग हो सकता है। कुछ यूजर्स ने यह भी बताया कि उनका अकाउंट 2 से 3 घंटे के भीतर फिर से चालू हो गया, जबकि कुछ को पूरे 24 घंटे रिव्यू पीरियड का इंतजार करना पड़ा।

    अगर आपका WhatsApp अकाउंट भी Review में चला जाए करें ये काम

    अगर आपके WhatsApp पर भी "Account Under Review" दिखाई देता है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आप इन बातों का ध्यान रखें:

    – आधिकारिक WhatsApp ऐप का ही इस्तेमाल करें।

    – किसी भी मॉडिफाइड ऐप (GB WhatsApp, YoWhatsApp आदि) का यूज न करें।

    – बार-बार ऐप अनइंस्टॉल या नंबर दोबारा रजिस्टर करने से बचें।

    – अगर ऐप में Request Review का ऑप्शन मिले, तो 'Review' बटन दिखे तो उस पर टैप करके रिक्वेस्ट के लिए भेज दें।

    – रिव्यू पूरा होने तक इंतजार करें।

    Meta ने किया इस परेशानी को कन्फर्म, बताई यह वजह

    इस पूरे मामले पर Meta ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि कंपनी अपने प्लेटफॉर्म को सुरक्षित बनाए रखने और गलत इस्तेमाल रोकने के लिए लगातार काम करती है। इसी प्रक्रिया के तहत उसके सुरक्षा सिस्टम संदिग्ध गतिविधियों वाले कुछ अकाउंट्स की जांच करते हैं या उन पर कार्रवाई करते हैं। हालांकि Meta ने यह भी माना कि कुछ मामलों में उसके ऑटोमेटेड सिस्टम से गलती हो सकती है। कंपनी का कहना है कि अगर किसी यूजर का अकाउंट गलती से प्रभावित हुआ है, तो उसे जल्द से जल्द ठीक करने और यूजर्स को दोबारा WhatsApp इस्तेमाल करने की सुविधा देने की कोशिश की जा रही है।

  • Telegram App की हुई वापसी! पेपर लीक रोकने के लिए भारत सरकार ने कराया था रिमूव

    Telegram App की हुई वापसी! पेपर लीक रोकने के लिए भारत सरकार ने कराया था रिमूव

     नई दिल्ली

    Telegram मैसेजिंग ऐप की वापसी चुकी है. अब ये ऐप ऐप स्टोर पर लौट चुका है. भारत सरकार ने जून महीने के दौरान ऑर्डर दिए थे, जिसके बाद इस ऐप को अस्थाई रूप से ऐप स्टोर और प्ले स्टोर से रिमूव कर दिया था। 

    23 जून को ऐप की लिस्टिंग शुरू कर दी गई थी और धीरे-धीरे सभी यूजर्स के लिए उसको उपलब्ध करा दिया गया और अब ये सभी यूजर्स के लिए अवेलेबल हो गया है, हालांकि जिनको ये अभी ऐप स्टोर पर नहीं दिख रहा है, उनको जल्द ही दिखाई देगा। 

    भारत सरकार ने जून महीने में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 69A के तहत Telegram ऐप को स्टोर से रिमूव करने के निर्देश दिए थे. ये नियम सरकार को राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था और देश की संप्रभुता के हित में ऑनलाइन कंटेंट तक सार्वजनिक पहुंच रोकने का अधिकार देता है।  

    NEET-UG री-एग्जाम के चलते लिया था फैसला 
    अधिकारियों को आशंका थी कि NEET-UG री-एग्जाम के पेपर टेलीग्राम चैनल के जरिए लीक किए जा सकते हैं. दरअसल, NEET-UG देश की सबसे बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक है। 

    एग्जाम के बाद हुई थी बहाली 
    NEET-UG री-एग्जाम 22 जून तक पूरा होने के बाद 23 जून को सबसे पहले Google ने Play Store पर Telegram को दोबारा से रिस्टोर करने का आदेश दिया. इसके बाद Apple ने भी App Store पर ऐप को फिर से उपलब्ध करा दिया। 

    टेलीग्राम ऐप क्या है? 
    टेलीग्राम, असल में एक फ्री में मिलने वाला क्लाउड बेस्ड इंस्टेंट मैसेजिंग और सोशल मीडिया ऐप है. इसका इस्तेमाल मैसेज भेजने-रिसीव करने, मीडिया शेयर करने और बड़े-बड़े ग्रुप बनाने में किया जाता है. इस पर यूजर्स अपने चैनल्स भी तैयार कर सकते हैं. टेलीग्राम ऐप की शुरुआत पावेल दुरोव ने साल 2013 में की थी। 

    टेलीग्राम पर लगते रहे हैं आरोप 
    टेलीग्राम पर अक्सर आरोप लगते रहे हैं कि उस पर कई ऐसे ग्रुप हैं, जो हैकिंग, साइबर ठगी और लोगों को ठगने का काम करने वाले काम से जुड़े हैं. टेलीग्राम पर कई ऐसे फीचर्स हैं, जो हैकर्स और ठगों के काम आते हैं। 

  • JioTag2 लॉन्च, बिना सिम कार्ड के सामान ट्रैक करेगा यह स्मार्ट डिवाइस

    JioTag2 लॉन्च, बिना सिम कार्ड के सामान ट्रैक करेगा यह स्मार्ट डिवाइस

    रिलायंस जियो ने एक न्यू प्रोडक्ट लॉन्च कर दिया है, जिसका नाम JioTag2 है. यह कॉम्पैक्ट डिवाइस असल में यूजर्स को ट्रैकिंग की सुविधा की देता है और इसमें कोई भी सिम आदि को लगाने की जरूरत नहीं है.

    JioTag2 को बैगपैक, वॉलेट, चाबी और इलेक्ट्रोनिक गैजेट आदि के साथ लगाया जा सकता है, जिसके बाद अगर वह सामान गुम होता है तो उसको आसानी से ट्रैक किया जा सके. रिलायंस जियो ने JioTag का फर्स्ट वर्जन साल 2023 में लॉन्च किया था.

    रिलायंस जियो का ये डिवाइस एक मल्टी फ्लेटफॉर्म ट्रैकर के रूप में काम करता है. यह अधिकतर स्मार्टफोन के ईकोसिस्टम के साथ इंटीग्रेट हो जाता है. ऐसे में यूजर्स आसानी से अपने गुम हुए सामान को खोज सकते हैं.

    JioTag 2 के साथ डुअल कंपेटेबिलिटी मिलती है, जो अधिकतर मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम के काम करता है. यह डिवाइस ऐपल के फाइंड माय और गूगल फाइंड हब के साथ मिलकर काम कर सकता है.

    JioTag 2 के फीचर्स
    JioTag 2 के फीचर्स की बात करें, तो इसमें कुछ खास सर्विस को शामिल किया है. इसमें ऑडियो अलर्ट, ब्लूटूथ लो एनर्जी, ग्लोबल कम्युनिटी नेटवर्क की सुविधा मिलती है.

    120 dB का इनबिल्ट साउंड बजर
    ऑडियो अलर्ट की बात करें तो इस ट्रैकर में 120 dB का इनबिल्ट लाउड बजर दिया जाता है. जब भी यूजर्स अपने कनेक्टेड ऐप के जरिए प्ले साउंड कमांड देंगे तो वह ट्रैकर साउंड जनरेट करेगा, जिसकी मदद से उसको खोजना सिंपल हो जाएगा.

    JioTag2 लो एनर्जी का यूज
    JioTag2 का दूसरा फीचर्स ये है कि इसमें ब्लूटूथ लो एनर्जी का इस्तेमाल किया है, जिसकी वजह से यह बहुत ही कम बिजली की खपत करता है.

    JioTag2 के साथ ही ग्लोबल कम्युनिटी नेटवर्क सर्विस को शामिल किया है. अगर कोई सामान्य ब्लूटूथ रेंज से बाहर खो जाता है तो ट्रैकर कम्युनिटी-बेस्ड लोकेशन सिस्टम का इस्तेमाल करता है.

    JioTag2 में लगाना है कोई सिम कार्ड
    JioTag2 के साथ सिम कार्ड की जरूरत नहीं होती है. यह ट्रैकर पूरी तरह से बीकनिंग प्रोटोकॉल पर काम करता है. इसलिए इसे चलाने के लिए किसी सिम कार्ड की जरूरत नहीं होती है और ना ही कोई रिचार्ज कराने की जरूरत होती है.

    बैटरी और ड्यूरेबिलिटी
    JioTag2 के साथ IP64 रेटिंग मिलती है, जो डस्ट और वाटर रेजिस्टेंस रेटिंग है. इसमें रिप्लेस करने वाली बैटरी दी गई है और कंपनी का दावा है कि यह एक बैटरी पूरे 1 साल तक चल सकती है. कंपनी रिटेल बॉक्स के अंदर बैटरी भी देती है.

    JioTag2 की कीमत 1249 रुपये है. यह कई कलर वेरिएंट में आता है, जो ब्लैक, ग्रीन और रेड कलर्स हैं. ये अभी ऐमेजॉन इंडिया पर लिस्ट है.

  • जींस और डेनिम में क्या है फर्क? जानिए दोनों के नाम और इतिहास की दिलचस्प कहानी

    जींस और डेनिम में क्या है फर्क? जानिए दोनों के नाम और इतिहास की दिलचस्प कहानी

    आज शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसकी अलमारी में जींस न हो. बच्चे हों, युवा हों या बुजुर्ग, जींस हर उम्र के लोगों की पसंद बन चुकी है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जींस को अक्सर डेनिम क्यों कहा जाता है? क्या जींस और डेनिम एक ही चीज हैं या दोनों में कोई फर्क है? बहुत कम लोग इसका सही जवाब जानते हैं. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि डेनिम और जींस की कहानी क्या है.

    क्या डेनिम और जींस एक ही चीज है?
    सबसे पहले जानते हैं कि ज्यादातर लोग डेनिम और जींस को एक ही क्यों कहते हैं. आपको बता दें कि डेनिम एक तरह का मजबूत कपड़ा (फैब्रिक)होता है, जबकि जींस उस कपड़े से बनाई जाने वाली पैंट है. यानी हर जींस डेनिम से बन सकती है, लेकिन डेनिम से सिर्फ जींस ही नहीं, बल्कि जैकेट, शर्ट, स्कर्ट, बैग और कई दूसरे कपड़े भी बनाए जाते हैं.

    आसान शब्दों में समझें तो डेनिम कपड़ा है और जींस उस कपड़े से तैयार किए गए ड्रेस या परिधान.

    डेनिम नाम कहां से आया?
    सबसे पहले ये जान लें कि डेनिम शब्द की शुरुआत फ्रांस से हुई थी. फ्रांस के एक शहर Nîmes (नीम) में एक खास तरह का मजबूत कपड़ा बनाया जाता था. फ्रेंच भाषा में इसे 'Serge de Nîmes' कहा जाता था, जिसका मतलब था 'नीम शहर का मजबूत कपड़ा'. समय के साथ 'De Nîmes' छोटा होकर 'Denim' बन गया और यही नाम पूरी दुनिया में मशहूर हो गया.

    जींस नाम की कहानी क्या है?
    जींस शब्द की कहानी भी यूरोप से जुड़ी है. इटली के जेनोआ शहर में नाविक मजबूत सूती पैंट पहनते थे. फ्रांस के लोग इस शहर को Genes कहते थे. धीरे-धीरे यही शब्द बदलकर Jeans बन गया. यानी डेनिम और जींस दोनों के नाम अलग-अलग यूरोपीय शहरों से आए हैं.

    जींस सबसे पहले किसने बनाई?
    19वीं सदी में अमेरिका में सोने की खदानों में काम करने वाले मजदूरों को ऐसे कपड़ों की जरूरत थी जो जल्दी फटे नहीं. साल 1873 में कारोबारी 'Levi Strauss' और दर्जी 'Jacob Davis' ने मिलकर मजबूत डेनिम कपड़े से ऐसी पैंट बनाई, जिसमें जेबों के किनारों पर तांबे के रिवेट लगाए गए थे ताकि पैंट ज्यादा मजबूत रहे. यहीं से आधुनिक जींस की शुरुआत मानी जाती है. शुरुआत में इसे मजदूर पहनते थे, लेकिन बाद में यह पूरी दुनिया का फैशन बन गई.

    डेनिम इतना मजबूत क्यों होता है?
    डेनिम की बुनाई सामान्य कपड़ों से अलग होती है. इसमें धागों को खास तरीके से बुना जाता है, जिसे ट्विल वीव (Twill Weave) कहा जाता है. इस वजह से डेनिम जल्दी नहीं फटता. यह लंबे समय तक चलता है. बार-बार पहनने पर भी मजबूत रहता है. समय के साथ इसका लुक और बेहतर लगने लगता है. इसी कारण यह मजदूरों के कपड़ों से निकलकर फैशन की दुनिया तक पहुंच गया.

    नीला रंग ही क्यों होता है?
    अगर आपने ध्यान दिया हो तो ज्यादातर जींस नीले रंग की होती है. ऐसा इसलिए क्योंकि पहले डेनिम को इंडिगो नाम के प्राकृतिक रंग से रंगा जाता था. यह रंग कपड़े की ऊपरी सतह पर चढ़ता है और धीरे-धीरे इस्तेमाल के साथ हल्का होता जाता है. यही वजह है कि पुरानी जींस का फेडेड लुक लोगों को पसंद आता है.

    क्या आज भी सिर्फ डेनिम से ही जींस बनती है?
    आज के समय में ज्यादातर जींस डेनिम से ही बनाई जाती हैं, लेकिन उनमें आराम बढ़ाने के लिए इलास्टेन या दूसरे फाइबर भी मिलाए जाते हैं. इसके अलावा अब अलग-अलग तरह की डेनिम भी बाजार में उपलब्ध है, जैसे स्ट्रेच डेनिम, ऑर्गेनिक डेनिम, रिसाइकल्ड डेनिम, लाइटवेट डेनिम. डेनिम सिर्फ जींस तक सीमित नहीं है. आज इससे कई तरह के फैशन प्रोडक्ट बनाए जाते हैं. जैकेट, शर्ट, स्कर्ट, शॉर्ट्स, बैग, कैप, जूते, एप्रन आदि. यानी डेनिम एक कपड़ा है, जिससे कई तरह के प्रोडक्ट तैयार किए जा सकते हैं.

    आज भी क्यों है सबसे ज्यादा लोकप्रिय?
    जींस की लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण इसकी मजबूती और आराम है. यह लगभग हर मौसम में पहनी जा सकती है और हर उम्र के लोगों पर अच्छी लगती है. आज ऑफिस, कॉलेज, ट्रैवल, पार्टी और रोजमर्रा की जिंदगी में जींस सबसे ज्यादा पहने जाने वाले कपड़ों में शामिल है. फैशन बदलता रहता है, लेकिन जींस का ट्रेंड कभी खत्म नहीं होता.

    अगली बार जब कोई जींस को डेनिम कहे, तो आपको दोनों के बीच का फर्क पता होगा. डेनिम एक मजबूत कपड़ा है, जबकि जींस उसी कपड़े से बनी पैंट होती है. डेनिम का नाम फ्रांस के 'Nîmes' शहर से आया, जबकि जींस शब्द इटली के 'Genoa' शहर से जुड़ा है. यही वजह है कि दोनों शब्द साथ-साथ इस्तेमाल किए जाते हैं, लेकिन दोनों का मतलब अलग है.

  • व्रत स्पेशल आलू भुजिया, कम मसालों में बनाएं स्वादिष्ट और कुरकुरी डिश

    व्रत स्पेशल आलू भुजिया, कम मसालों में बनाएं स्वादिष्ट और कुरकुरी डिश

     किसी भी व्रत के दौरान लोग टेस्टी और हल्का फलाहारी खाना पसंद करते हैं. ऐसे में अगर आप हर बार आलू की सब्जी या दही-आलू खाकर बोर हो गए हैं तो इस बार व्रत वाली आलू भुजिया जरूर ट्राई कर सकते हैं. कम मसालों और सेंधा नमक से बनने वाली यह रेसिपी बाहर से हल्की कुरकुरी और अंदर से नरम होती है.

    इसे बनाना भी बेहद आसान है और यह कुट्टू या राजगिरा की पूरी, पराठे, दही या फलाहारी चटनी के साथ काफी टेस्टी लगती है. अगर आप व्रत में कुछ झटपट और टेस्टी बनाना चाहते हैं तो यह रेसिपी आपके लिए एक बेहतरीन ऑप्शन हो सकती है.

    इंग्रेडिएंट्स (ingredients)
    5-6 आलू
    2 बड़े चम्मच घी या मूंगफली का तेल
    2 हरी मिर्च (बारीक कटी हुई)
    1 छोटा चम्मच सेंधा नमक (स्वादानुसार)
    1 छोटा चम्मच नींबू का रस (ऑप्शनल)

    व्रत वाली आलू भुजिया कैसे बनाएं?
        व्रत वाली आलू भुजिया बनाने के लिए सबसे पहले आलू छीलकर उन्हें पतला-पतला लंबा काट लें. इसके बाद आलू को 2-3 बार पानी से अच्छे से धो लें. फिर आलू का सारा पानी निकालकर उन्हें अच्छी तरह सुखा लें.
        अब एक कड़ाही में घी या मूंगफली का तेल गर्म करें. तेल गर्म होने पर बारीक कटी हुई हरी मिर्च डालकर कुछ सेकंड भून लें.
        अब कटे हुए आलू कड़ाही में डालें और अच्छी तरह मिला लें. कड़ाही को ढककर मीडियम गैस पर 5-7 मिनट तक पकाएं. बीच-बीच में आलू को हल्के हाथों से चलाते रहें.
        जब आलू लगभग पक जाएं, तब उसमें सेंधा नमक और काली मिर्च पाउडर डालकर अच्छी तरह मिलाएं. अब ढक्कन हटाकर 4-5 मिनट तक और पकाएं, ताकि आलू बाहर से हल्के कुरकुरे हो जाएं.
        अब आपकी टेस्टी व्रत वाली आलू भुजिया तैयार है. चाहें तो ऊपर से हल्का सा नींबू का रस मिला सकते हैं.
        इसे आप व्रत की कुट्टू या राजगिरा की पूरी, दही या फलाहारी चटनी के साथ गरमागरम परोस सकते हैं. इसका सादा और कुरकुरा स्वाद व्रत के खाने का मजा दोगुना कर देगा.

     

  • फ्लिपकार्ट प्लस मेंबर्स को मिलेगा फ्री Netflix मोबाइल प्लान, शॉपिंग से फायदा

    फ्लिपकार्ट प्लस मेंबर्स को मिलेगा फ्री Netflix मोबाइल प्लान, शॉपिंग से फायदा

    ईकॉमर्स प्लेटफॉर्म फ्लिपकार्ट के साथ अब Netflix प्लान मिलने जा रहा है. फ्लिपकार्ट ने इसके लिए ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स के साथ पार्टनरशिप की है. इस सर्विस का शुरुआत 1 अगस्त 2026 से होने जा रही है.

    फ्लिपकार्ट प्लस मेंबर अपनी रेगुलर शॉपिंग के दम पर हर महीने नेटफ्लिक्स के मोबाइल प्लान का फायदा उठा सकेंगे.

    मजेदार बात यह है कि इसके लिए उन्हें अलग से नेटफ्लिक्स सब्सक्रिप्शन लेने या कोई बंडल्ड रिचार्ज कराने की जरूरत नहीं होगी.

    Netflix का प्लान अलग से खरीदने की जरूरत नहीं
    इंडियन ईकॉमर्स प्लेटफॉर्म जगत में पहली बार ऐसा होने जा रहा है, जब कोई प्लेटफॉर्म अपने साथ एंटरटेनमेंट सर्विस नेटफ्लिक्स का प्लान में दे रहा है. सिर्फ डेली की शॉपिंग के दम पर ही नेटफ्लिक्स का मोबाइल प्लान मिल जाएगा.

    फ्लिपकार्ट के साथ नेटफ्लिक्स कैसे पाएं?
        फ्लिपकार्ट प्लस मेंबर को एक महीने के अंदर 299 रुपये या उससे अधिक के चार ऑर्डर पूरे करने पड़ेंगे.
        ये क्वालिफाइंग ऑर्डर फ्लिपकार्ट, फ्लिपकार्ट मिनट्स और फ्लिपकार्ट ग्रॉसरी- तीनों प्लेटफॉर्म पर किए जा सकते हैं.
        वहीं, चौथा क्वालिफाइंग ऑर्डर कंप्लीट होते ही अगले 30 दिनों के लिए Netflix Mobile Plan शुरू हो जाएगा.

    नेटफ्लिक्स का फायदा डायरेक्ट Flipkart App से ही एक्टिव होगा. यूजर्स को इसके लिए अलग से लॉग-इन करने या एक्स्ट्रा पेमेंट की जरूरत नहीं होगी. 30 दिन पूरे होने के बाद यह प्लान अपने आप खत्म हो जाएगा.

    फ्लिपकार्ट प्लस मेंबर कैसे मिलती है?
    अगर आप फ्लिपकार्ट प्लस मेंबर नहीं हैं, तो इसका भी तरीका बता देते हैं, 12 महीनों के अंदर 15 ऑर्डर को कंप्लीट करना होता है. 15 ऑर्डर कंप्लीट करते ही बिना किसी एक्स्ट्रा चार्ज के खुद ब खुद प्लस मेंबरशिप एक्टिव हो जाएगी.