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  • ChatGPT के फ्री वर्जन में दिखेंगे Sponsored Ads, जानें आपकी पर्सनल चैट कितनी रहेगी सेफ

    ChatGPT के फ्री वर्जन में दिखेंगे Sponsored Ads, जानें आपकी पर्सनल चैट कितनी रहेगी सेफ

    आज के समय में AI हमारी जिंदगी का हिस्सा बन चुका है. ऑफिस के काम से लेकर बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा के कामों तक, लोग AI टूल्स का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं. इनमें ChatGPT भी काफी पॉपुलर है. अब तक इसके फ्री वर्जन का इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है.

    चैटजीपीटी के फ्री वर्जन में अब सवालों के जवाब के साथ Sponsored Ads भी नजर आ सकते हैं. यानी किसी सवाल का जवाब पढ़ते समय उसके नीचे आपको किसी कंपनी या प्रोडक्ट का एडवर्टाइजमेंट देखने मिलेगा.

    OpenAI अपने सब्सक्रिप्शन मॉडल के अलवा Ads के जरिए भी कमाई का रास्ता तैयार कर रहा है. ऐसे में आने वाले समय में चैटजीपीटी इस्तेमाल करने का एक्सपीरिएंस फ्री यूजर्स के लिए थोड़ा बदल सकता है. आइए समझते हैं कि ये Ads कैसे दिखेंगे और क्या आपकी पर्सनल चैट्स सेफ रहेगा.

    क्या सभी यूजर्स को दिखेंगे Ads?
    चैटजीपीटी के बढ़ते यूजर बेस के बीच OpenAI ने Ads को लेकर अपनी तैयारी शुरू कर दी है. ये Ads खास तौर पर फ्री में चैटजीपीटी इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को दिखाई दे सकते हैं.

    हालांकि, इसका मतलब ये नहीं है कि हर सवाल के जवाब के नीचे एडवर्टाइजमेंट जरूर नजर आएगा. Ad किस यूजर को और किस तरह दिखाया जाएगा, यह प्लेटफॉर्म के सिस्टम और Ad मॉडल पर निर्भर करेगा.

    जवाब के नीचे दिख सकता है Sponsored Ad
    मान लीजिए आपने चैटजीपीटी से किसी प्रोडक्ट के बारे में सवाल पूछा. चैटजीपीटी आपको हमेशा की तरह इसका जवाब देगा. इसी जवाब के नीचे आपको एक छोटा स्पॉन्सर्ड Ad दिखाई दे सकता है.

    अगर आपको उस एडवर्टाइजमेंट में दिखाया गया कोई प्रोडक्ट पसंद आता है, तो आप उसके बारे में ज्यादा जानकारी ले सकते हैं या उसे खरीद सकते हैं. इस तरह कंपनियों को अपने प्रोडक्ट संभावित ग्राहकों तक पहुंचाने का नया प्लेटफॉर्म मिल जाएगा.

    कंपनियां चैटजीपीटी पर कैसे चलाएंगी Ads?
    चैटजीपीटी पर एडवर्टाइजमेंट दिखाने के लिए कंपनियां OpenAI के Ads प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर सकती हैं. इसके जरिए कंपनियों को अपने Ads को ज्यादा से ज्यादा पोटेंशियल कस्टमर तक पहुंचाने का मौका मिलेगा.

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनियों के लिए एडवर्टाइजमेंट की शुरुआती कीमत करीब 725 रुपये प्रति दिन हो सकती है. हालांकि, कीमत और Ad की अवेलियेबलीटी जैसे नियम समय के साथ बदल सकते हैं. क्या एडवर्टाइजर्स आपकी चैटजीपीटी चैट्स पढ़ पाएंगे? यह सवाल सबसे इंपॉर्टेंट है. आखिर जब चैटजीपीटी पर Ads दिखेंगे, तो क्या कंपनियां आपकी पर्सनल बातचीत भी देख पाएंगी?

    OpenAI के मुताबिक, एडवर्टाइजर्स यूजर्स की पर्सनल चैट्स को पढ़ नहीं सकते. यानी आपने चैटजीपीटी पर क्या सवाल पूछा, क्या इन्फॉर्मेशन शेयर की या किस सब्जेक्ट पर बातचीत की, इसकी जानकारी एडवर्टाइजर्स के साथ सीधे शेयर नहीं की जाएगी.

    Ads को सही यूजर्स तक पहुंचाने के लिए कुछ जरूरी जानकारी का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन आपकी पर्सनल बातचीत एडवर्टाइजर्स को अवेलेबल नहीं कराई जाएगी. यानी चैटजीपीटी पर Ads आने के बावजूद आपकी पर्सनल चैट्स और एडवर्टाइजर्स के बीच एक अलगाव बनाए रखने की कोशिश की जा रही है.

  • चाणक्य नीति: ये 5 आदतें इंसान को सफलता से रखती हैं दूर, आज ही सुधार लें

    चाणक्य नीति: ये 5 आदतें इंसान को सफलता से रखती हैं दूर, आज ही सुधार लें

     हर व्यक्ति जिंदगी में आगे बढ़ना और सफलता हासिल करना चाहता है, लेकिन सिर्फ मेहनत करना ही काफी नहीं होता. कई बार हमारी अपनी आदतें ही तरक्की की राह में रुकावट बन जाती हैं. आचार्य चाणक्य ने अपने नीति शास्त्र में ऐसी ही आदतों और व्यवहार के बारे में बताया है, जो व्यक्ति को आगे बढ़ने से रोक सकते हैं. चाणक्य के अनुसार अगर इंसान समय रहते अपनी कमियों को पहचानकर उनमें सुधार कर ले, तो सफलता की राह आसान हो सकती है.

    आलस्य को न बनने दें आदत
    चाणक्य नीति के अनुसार आलस्य व्यक्ति की प्रगति का सबसे बड़ा दुश्मन हो सकता है. जो व्यक्ति जरूरी काम को लगातार टालता रहता है, उसके हाथ से कई अच्छे अवसर निकल जाते हैं. सही समय पर फैसला लेना और काम को पूरा करना सफलता के लिए जरूरी है. इसलिए किसी भी काम को कल पर टालने की आदत से बचना चाहिए.

    केवल किस्मत के भरोसे न बैठें
    किस्मत पर भरोसा करना गलत नहीं है, लेकिन सिर्फ भाग्य के भरोसे बैठकर प्रयास छोड़ देना नुकसानदायक हो सकता है. चाणक्य के अनुसार व्यक्ति को अपने कर्म पर ध्यान देना चाहिए. मेहनत और सही दिशा में किया गया प्रयास ही आगे बढ़ने में मदद करता है.

    लक्ष्य की कमी भी बन सकती है बाधा
    अगर व्यक्ति को यह ही पता न हो कि उसे हासिल क्या करना है, तो उसकी मेहनत सही दिशा में नहीं जा पाती. चाणक्य नीति के अनुसार जीवन में स्पष्ट लक्ष्य होना जरूरी है. इसके साथ ही अनुशासन और निरंतर प्रयास भी सफलता के लिए महत्वपूर्ण हैं.

    अभ्यास छोड़ने की गलती न करें
    किसी भी काम में लगातार बेहतर बनने के लिए अभ्यास जरूरी है. चाणक्य ने भी ज्ञान और विद्या के साथ अभ्यास के महत्व पर जोर दिया है. लगातार अभ्यास न करने से सीखी हुई चीजें भी धीरे-धीरे कमजोर पड़ सकती हैं. इसलिए नई चीजें सीखने और अपनी क्षमता को बेहतर करने का प्रयास जारी रखना चाहिए.

    मुश्किल आने से पहले तैयार रहें
    चाणक्य के बताए श्लोक का भाव है कि जो व्यक्ति संकट आने से पहले ही उसके समाधान के बारे में सोच लेता है. मुश्किल समय में अपनी बुद्धि का सही इस्तेमाल करता है, वह बेहतर स्थिति में रहता है. वहीं हर परिस्थिति को किस्मत के भरोसे छोड़ देने वाला व्यक्ति मुश्किल में फंस सकता है. इसलिए भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए पहले से तैयारी करना समझदारी है.

  • दाल-चावल में डालें सब्जियों का ट्विस्ट, संजीव कपूर से सीखें स्वादिष्ट और हेल्दी खिचड़ी बनाना

    दाल-चावल में डालें सब्जियों का ट्विस्ट, संजीव कपूर से सीखें स्वादिष्ट और हेल्दी खिचड़ी बनाना

    खिचड़ी का नाम सुनते ही अक्सर लोगों के दिमाग में दाल-चावल वाली सिंपल खिचड़ी आती है. लेकिन ये खाना बच्चों से लेकर बड़ों तक को पसंद नहीं आता है. जब भी घर में खिचड़ी बनाने का नाम लिया जाता है, तभी बच्चे मुंह बना लेते हैं. लेकिन क्या हो अगर इसमें थोड़ा सा ट्विस्ट देकर इसे स्वादिष्ट और पौष्टिक बना दिया जाए तो? जी हां, मशहूर शेफ संजीव कपूर ने सिंपल सी दाल खिचड़ी को स्वादिष्ट और पौष्टिक बनाने का आसान तरीका शेयर किया है.

    संजीव कपूर कहते हैं अगर इसमें कुछ पौष्टिक चीजें मिला दी जाएं तो यही साधारण सी डिश बच्चों के लिए और भी हेल्दी और स्वादिष्ट बन सकती है. इसमें दाल और चावल के साथ उन्होंने कुछ मसालों के साथ सब्जियां डाली हैं. खास बात ये है कि इसे घी के साथ प्रेशर कुक किया जाता है, जिससे खिचड़ी स्वादिष्ट और सॉफ्ट बनती है. चलिए जानते हैं कैसे बनाएं संजीव कपूर स्टाइल दाल खिचड़ी.

    दाल खिचड़ी बनाने के लिए इंग्रेडिएंट्स
        चावल- जरूरत के अनुसार
        मूंग दाल- थोड़ी मात्रा में
        छिलके वाली मूंग दाल- थोड़ी मात्रा में
        बिना छिलके वाली मूंग दाल- थोड़ी मात्रा में
        बीन्स- कटी हुई
        गाजर- कद्दूकस की हुई
        घी- जरूरत के अनुसार
        अदरक- कटा हुआ
        लौंग- 2-3
        दालचीनी- 1 टुकड़ा
        हींग- चुटकी भर
        हल्दी- थोड़ी सी
        नमक- स्वादानुसार
        पानी- जरूरत के अनुसार
        लाल मिर्च- स्वादानुसार

    बनाने का तरीका:
    1.
    इस खिचड़ी को बनाने के लिए सबसे पहले चावल और अलग-अलग तरह की मूंग दाल लें. इसमें छिलके वाली और बिना छिलके वाली मूंग दाल दोनों शामिल करें. दाल और चावल को अच्छी तरह धोकर साफ कर लें. इससे दाल और चावल में मौजूद धूल-मिट्टी निकल जाएगी.

    2. अब इसमें कटी हुई बीन्स और कद्दूकस की हुई गाजर डालें. इसके साथ अदरक, लौंग, दालचीनी और थोड़ी सी हींग डालें. स्वाद के लिए नमक और हल्दी भी मिला दें. अगर बच्चों के लिए बना रहे हैं तो तीखापन उनकी पसंद के हिसाब से रखें.

    3. अब सभी चीजों को कुकर में डालकर जरूरत के मुताबिक पानी मिलाएं और थोड़ा सा घी डालें. इसके बाद इसे 2-3 सीटी आने तक प्रेशर कुक करें. अच्छी तरह पकने के बाद दाल, चावल और सब्जियां आपस में मिलकर सॉफ्ट हो जाएंगी और एक स्वादिष्ट खिचड़ी तैयार हो जाएगी.

    4. आप इसे बच्चों को दही और पापड़ जैसी चीजों के साथ सर्व कर सकते हैं.

    बच्चों को पसंद आएगी ये मजेदार खिचड़ी
    संजीव कपूर की इस खिचड़ी की खासियत यही है कि इसमें दाल और चावल के साथ सब्जियों को भी आसानी से शामिल किया जाता है. घी और हल्के मसालों की वजह से इसका स्वाद भी अच्छा आता है. बच्चों के लिए इसे नरम और हल्की कंसिस्टेंसी में बनाएं, ताकि वो इसे आसानी से खा सकें.

     

  • घर पर ऐसे बनाएं नीम का साबुन, पिंपल्स और एक्स्ट्रा ऑयल से मिलेगी राहत

    घर पर ऐसे बनाएं नीम का साबुन, पिंपल्स और एक्स्ट्रा ऑयल से मिलेगी राहत

     नीम का इस्तेमाल लंबे समय से स्किन केयर में किया जाता रहा है. इसमें एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण पाए जाते हैं जो स्किन से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में मदद करते हैं. आज हम आपको नीम की पत्तियों से घर पर साबुन बनाना बताएंगे. यह साबुन चेहरे पर जमी गंदगी, एक्स्ट्रा ऑयल और बैक्टीरिया को साफ करने में मदद करता है, जिससे पिंपल्स होने का खतरा कम रहता है. साथ ही, यह स्किन को साफ, सॉफ्ट और फ्रेश बनाएं रखने में भी मदद करता है. आइए जानते हैं कि घर पर नीम से साबुन कैसे बना सकते हैं और इसे बनाने के लिए किन-किन चीजों की जरूरत होती है.

    इंग्रेडिएंट्स (ingredients)
    250 ग्राम ग्लिसरीन सोप बेस
    25 से 30 नीम की पत्तियां
    1/2 छोटा चम्मच हल्दी पाउडर
    2 से 3 विटामिन ई कैप्सूल
    4 बूंद नीम एसेंशियल ऑयल  

    नीम की पत्तियों से घर पर साबुन कैसे बनाएं?

    • नीम साबुन बनाने के लिए सबसे पहले नीम की पत्तियों को अच्छी तरह धोकर सुखा लें. अब इन्हें मिक्सर में डालकर पीस लें. पत्तियों को पीसते समय पानी न डालें.
    • अब इसमें 1/2 छोटा चम्मच हल्दी पाउडर डालें. इसके बाद विटामिन ई कैप्सूल को काटकर उसका तेल भी मिश्रण में डाल दें. आखिर में नीम एसेंशियल ऑयल की 4 बूंदें डालकर सभी चीजों को अच्छी तरह मिला लें.
    • अब ग्लिसरीन सोप बेस को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें. इसे माइक्रोवेव या डबल बॉयलर की मदद से पिघला लें. जब सोप बेस पूरी तरह पिघल जाए तो इसमें तैयार नीम का मिश्रण डालकर अच्छी तरह मिलाएं.
    • अब इस मिश्रण को साबुन के सांचे में डाल दें और इसे 12 से 24 घंटे तक सेट होने के लिए छोड़ दें. साबुन जम जाए तो इसे सांचे से निकाल लें.

        कैसे करें इस्तेमाल?
        साबुन को सांचे से निकालने के बाद इसे छोटे टुकड़ों में काटकर इस्तेमाल कर सकते हैं. पहली बार इस्तेमाल करने से पहले पैर या हाथ के छोटे हिस्से पर लगाकर पैच टेस्ट जरूर कर लें. अगर जलन या खुजली जैसी समस्या हो तो इसका इस्तेमाल न करें.

     

  • रोज की रोटी में जोड़ें चुकंदर, स्वाद के साथ मिलेगा भरपूर पोषण; जानें आसान रेसिपी

    रोज की रोटी में जोड़ें चुकंदर, स्वाद के साथ मिलेगा भरपूर पोषण; जानें आसान रेसिपी

     रोटी भारतीय खाने का एक अहम हिस्सा है और लगभग हर घर में रोज बनाई जाती है. ज्यादातर लोग गेहूं की रोटी खाते हैं लेकिन आप रोज के रोटी को थोड़ा ज्यादा हेल्दी और टेस्टी बनाना चाहते हैं तो चुकंदर की रोटी ट्राई कर सकते हैं. चुकंदर में आयरन, फाइबर, फोलेट और एंटीऑक्सीडेंट जैसे कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं जो ओवरऑल हेल्थ को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं . आज हम आपको चुकंदर की स्वादिष्ट और पौष्टिक रोटी बनाने का आसान तरीका बताएंगे, जिसे आप आसानी से घर पर बनाकर अपने खाने का स्वाद और पोषण दोनों बढ़ा सकते हैं.
    चुकंदर की रोटी बनाने के लिए किन-किन चीजों की जरूरत होती है?

    2 कप गेहूं का आटा
    1 मीडियम साइज चुकंदर (उबला हुआ या कद्दूकस किया हुआ)
    ½ छोटा चम्मच जीरा पाउडर
    1 हरी मिर्च (बारीक कटी हुई)
    ¼ छोटा चम्मच अजवाइन
    1 छोटा चम्मच तेल या घी
    स्वादानुसार नमक
    जरूरत के अनुसार पानी

    चुकंदर की रोटी बनाएं कैसे?

    • चुकंदर की रोटी बनाने के लिए सबसे पहले चुकंदर को अच्छी तरह धोकर छील लें. इसके बाद इसे कद्दूकस कर लें या उबालकर मिक्सर में पीस लें.
    • अब एक बड़े बर्तन में गेहूं का आटा लें और उसमें नमक, जीरा पाउडर, अजवाइन और बारीक कटी हरी मिर्च डालकर मिला लें. इसके बाद इसमें कद्दूकस किया हुआ या पिसा हुआ चुकंदर डालें और सभी चीजों को अच्छी तरह मिक्स करें.
    • अब जरूरत के अनुसार पानी डालते हुए नरम आटा गूंथ लें. आटे पर थोड़ा सा तेल या घी लगाकर 5 से 7 मिनट के लिए ढककर रख दें.
    • इसके बाद आटे की छोटी-छोटी लोइयां बनाकर सामान्य रोटी की तरह बेल लें. गरम तवे पर दोनों तरफ से अच्छी तरह सेंकें. चाहें तो ऊपर से थोड़ा घी लगाकर भी परोस सकते हैं.
    • गरमा-गरम चुकंदर की रोटी को दही, अचार, रायता या अपनी पसंद की किसी भी सब्जी के साथ खाया जा सकता है.

    चुकंदर की रोटी खाने के फायदे
    चुकंदर की रोटी स्वाद के साथ-साथ पोषण भी देती है. इसमें मौजूद आयरन हीमोग्लोबिन बढ़ाने में मदद करता है, जबकि फाइबर पाचन को बेहतर रखने में सहायक होता है. चुकंदर में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाने में मदद करते हैं.

  • चौथे स्टेज के स्तन कैंसर में भी इलाज की उम्मीद, बीमारी की पहचान के आधार पर तय होगा उपचार

    चौथे स्टेज के स्तन कैंसर में भी इलाज की उम्मीद, बीमारी की पहचान के आधार पर तय होगा उपचार

    भोपाल

    स्तन कैंसर की चौथी स्टेज सुनते ही मरीज और परिवार अक्सर उम्मीद छोड़ने लगते हैं, लेकिन हेर-टू पॉजिटिव स्तन कैंसर के मामले में इलाज की तस्वीर अब बदल रही है। आधुनिक लक्षित दवाओं ने उन मरीजों के लिए भी उपचार के नए रास्ते खोले हैं, जिनका कैंसर शरीर के दूसरे हिस्सों तक फैल चुका है। एम्स भोपाल की चिकित्सा कैंसर विज्ञान एवं रक्त रोग विभाग की संकाय सदस्य डॉ. आकांक्षा चौधरी ने भोपाल ऑन्कोलॉजी अपडेट्स 2026 में हेर-टू पॉजिटिव मेटास्टेटिक स्तन कैंसर के एक मामले पर विशेषज्ञ चर्चा में हिस्सा लिया। उन्होंने नई लक्षित दवाओं और मरीज की बीमारी के अनुसार उपचार चुनने की आधुनिक पद्धति की जानकारी साझा की।

    बीमारी की पहचान से तय होगा इलाज
    डॉ. चौधरी के अनुसार अब कैंसर का उपचार केवल यह देखकर तय नहीं किया जाता कि बीमारी किस अंग में है या किस चरण में पहुंची है। कैंसर कोशिकाओं की विशेषताओं की जांच कर यह पता लगाया जाता है कि मरीज के लिए कौन-सा उपचार अधिक प्रभावी हो सकता है। हेर-टू एक प्रोटीन है, जो कुछ स्तन कैंसर कोशिकाओं की सतह पर सामान्य से अधिक मात्रा में पाया जाता है। ऐसे कैंसर को हेर-टू पॉजिटिव स्तन कैंसर कहा जाता है। जब यह स्तन से निकलकर शरीर के दूसरे हिस्सों तक फैल जाता है तो इसे मेटास्टेटिक यानी चौथी स्टेज का कैंसर माना जाता है।

    नई दवाओं से बढ़े उपचार के विकल्प
    विशेषज्ञ चर्चा में ट्रास्टुजुमैब डेरक्सटेकैन, पर्टुजुमैब और टुकाटिनिब जैसी नई लक्षित दवाओं पर चर्चा हुई। इन उपचारों ने चौथी स्टेज के हेर-टू पॉजिटिव स्तन कैंसर में बीमारी को नियंत्रित करने की संभावनाएं बढ़ाई हैं। इनके साथ मरीजों के लंबे समय तक बेहतर जीवन जीने की उम्मीद भी पहले की तुलना में बढ़ी है। डॉ. चौधरी ने बताया कि कुछ वर्ष पहले हेर-टू पॉजिटिव स्तन कैंसर के उपचार के विकल्प काफी सीमित थे। लगातार हो रही चिकित्सा प्रगति के कारण अब मरीज की बीमारी की विशेषताओं के आधार पर कई उपचार विकल्प उपलब्ध हैं।

    राहत: आयुष्मान से लक्षित इलाज
    एम्स भोपाल में हेर-टू पॉजिटिव स्तन कैंसर के मरीजों के लिए आधुनिक लक्षित उपचार  उपलब्ध हैं। ट्रास्टुजुमैब आधारित लक्षित उपचार आयुष्मान भारत योजना के तहत निःशुल्क उपलब्ध है।

    इसके अलावा एम्स भोपाल के चिकित्सा कैंसर विज्ञान विभाग में स्तन कैंसर समेत उन्नत कैंसर के मरीजों के लिए लक्षित दवाओं, इम्यूनोथेरेपी और मरीज की बीमारी के अनुसार व्यक्तिगत उपचार की सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। 

    महिलाओं के लिए जरूरी संदेश
    हेर-टू पॉजिटिव स्तन कैंसर की रिपोर्ट आने का मतलब यह नहीं है कि उपचार के विकल्प खत्म हो गए। खासकर बीमारी के शरीर में फैल जाने के बाद भी आधुनिक उपचार से बीमारी को नियंत्रित करने की संभावनाएं मौजूद हैं। इसलिए स्तन में गांठ, आकार में बदलाव, त्वचा या निप्पल में असामान्य परिवर्तन जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच, कैंसर की सही पहचान और विशेषज्ञ चिकित्सक से उपचार शुरू करना सबसे महत्वपूर्ण है। 

  • मोटापा-तनाव बढ़ा रहे कैंसर का खतरा! पुरुषों में ओरल तो महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के मामले बढ़े

    मोटापा-तनाव बढ़ा रहे कैंसर का खतरा! पुरुषों में ओरल तो महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के मामले बढ़े

    मुंबई
     तनाव, मोटापे और बिगड़ी हुई जीनवशैली की वजह से शहरों में कैंसर के मामले तेज़ी से बढ़े हैं. टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल के डेटा के मुताबिक भारत में उत्तर पूर्व के राज्य बिहार, बंगाल उड़ीसा में ओरल कैंसर के साथ लंग्स कैंसर इसोफेगस और स्टमक कैंसर के मामले बहुत तेजी से बढ़े हैं. और ये आंकड़ा राष्ट्रीय औसत के भी आगे निकल गया है। 

    पुरुषों में अगर सबसे ज्यादा मामले ओरल कैंसर के हैं तो महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर. सर्वाइकल कैंसर ग्रामीण इलाकों के मुकाबले शहरों में तेजी से बढ़ा है. कैसे टाटा मेमोरियल अब कैंसर को लेकर अवेयरनेस के साथ कैंसर फैलने से पहले उसके बचाव की रणनीति पर काम कर रहा है. आर्युवेद पर शुरु होने वाले क्लीनिकल ट्रायल क्या कैंसर के उपचार में नई खोज साबित होंगे. टाटा मैमोरियल हॉस्पिटल क्यों प्राइमरी स्क्रीनिंग पर सबसे ज्यादा जोर दे रहा है। 

    शहरी जिंदगी का तनाव और मोटापा कैंसर की जड़
    टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल के रिसेप्शन से लेकर रेडियोलॉजी डिपार्टमेंट तक मरीज और उनके परिजन ही दिखाई देते हैं. कैंसर के इलाज की पहली और आखिरी उम्मीद है ये अस्पताल. उम्मीद की यहां आ गए तो ज़िंदगी बच सकती है. रेडियोलॉजी एंव एकेडेमिक्स डिपार्टमेंट के हेड डॉ. सुयश कुलकर्णी बताते हैं, ''देश भर से यहां लोग आते हैं. हालांकि हमारे और सेंटर भी हैं, लेकिन एक ट्रेडिशनल जो मरीज का रहता है उसे भरोसा होता है कि अगर मुंबई टाटा मेमोरियल में पहुंच गए तो सब ठीक हो जाएगा। 

    हम ये पूरी कोशिश करते भी हैं. लेकिन चुनौती ये है कि कैंसर के मामले अब तेजी से बढ़ रहे हैं. और ग्रामीण इलाकों के मुकाबले शहरी इलाकों में इनकी तादाद ज्यादा है.'' डॉ. कुलकर्णी बताते हैं, ''शहरी जिंदगी का तनाव मोटापा और बिगड़ती लाइफस्टाइल इसकी सबसे बड़ी वजह है. दूसरा एक खतरा पेस्टिसाइड्स से भी है.'' वे कहते हैं, ''तनाव सीधे आपके शरीर के सेल्फ डिफेंस सिस्टम पर अटैक करता है. सीधे इम्यूनिटी प्रभावित होती है. तनाव से दूरी योग और एक्सरसाइज ये लाइफ स्टाइल में शामिल किये जाने की जरुरत है। 

    ये राज्य हैं जहां तेजी से फैल रहा है कैंसर
    भारत में उत्तर पूर्व के राज्य बिहार, पश्चिम बंगाल और उड़ीसा इन राज्यों में इसोफेगस कैंसर, लंग्स कैंसर ओरल कैंसर और स्टमक कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल की डॉक्टर शर्मिला पिंपरे के मुताबिक, ''अगर हम एक औसत देखें तो अगर हर एक लाख लोगों में 110 लोगों को कैंसर है तो इन राज्यों में ये आंकड़ा 210 तक पहुंच रहा है. यहां पर मुख्य वजह फूड हैबिट्स के साथ स्मोकिंग भी है. इसी तरह से अगर हम महिलाओं में देखें तो ग्रामीण इलाकों से ज्यादा मामले ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर के हैं। 

    आर्युवेद कैंसर में कितना कारगर क्लीनिकल ट्रायल की तैयारी
    कैंसर पर किस तरह से पूरी रोकथाम हो सके, इसके लिए प्रयास चिकित्सा की दूसरी विधाओं में भी किए जा रहे हैं. टाटा मैमोरियल हॉस्पिटल एक पूरा सैटअप तैयार कर रहा है. जहां पर आयुष के डॉक्टर्स के साथ पहले आर्युवेद का मेडिकल कल्टिनेशन किया जाएगा. उसके बाद क्लीनिकल ट्रायल भी शुरु होंगे. महाराष्ट्र के खोपोली में इसकी तैयारी हो रही है। 

    डॉ. शर्मिला बताती हैं, ''आयुष युनानी जो भी दूसरी पद्धतियां हैं उनके भी क्लीनिकल ट्रायल होंगे और फिर एविडेंस के साथ हम इस निश्कर्ष पर पहुंच सकेंगे कि ये कितना कारगर है. खोपोली में 27 एकड़ में ये तैयारी चल रही है.'' वे कहती हैं, ''अभी लोग कीमोथैरेपी छोड़कर आर्युवेद ट्रीटमेंट लेते हैं. लेकिन क्लनिकली साबित हो जाने के बाद ही इस पर जाना चाहिए. इसके लिए ही हम प्रयास कर रहे हैं कि क्या एलोपैथिक के साथ इन दवाओं की भी मदद ली जा सकती है. लेकिन क्लीनिकल ट्रायल के बाद ही परिणाम जान लेने के बाद ही इस मामले में कुछ स्पष्ट हो सकेगा। 

    कैंसर रोकने अवेयरनेस कैम्प 13 से 15 साल के बच्चे टारगेट
    टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल केवल रोकथाम ही नहीं कैंसर के लिए जरुरी सावधानी क्या रखनी चाहिए इसके लिए भी जागरुकता अभियान चला रहा है. खास बात ये है कि ये कैम्पेन स्कूल के 13 से 15 साल के बच्चों को टारगेट करके डिजाइन किया गया है. टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल की डॉ मंजूर सैंगर बताती हैं, ''असल में इस एज ग्रुप को चुनने की खास वजह ये है कि ये बच्चे खुद तो स्मोकिग करने से पहले संभाल लेंगे. ये परिवार में भी एक कैटेलिस्ट बनेंगे और सिगरेट से लेकर एल्कोहल रोकने का काम करेंगे. ये बच्चे अगर इस उम्र में संभल गए तो कॉलेज में भी ये इस सबसे दूर रहेंगे। 

  • ₹3,500 के बजट में OnePlus Nord Buds 4: दमदार ANC और 54 घंटे की बैटरी, जानें पूरा रिव्यू

    ₹3,500 के बजट में OnePlus Nord Buds 4: दमदार ANC और 54 घंटे की बैटरी, जानें पूरा रिव्यू

    बजट TWS ईयरबड्स खरीदते समय सबसे बड़ा सवाल यही होता है, कि बजट में कौन-सा मॉडल सबसे बेहतर रहेगा. OnePlus Nord Buds 4 भी इसी सेगमेंट में एक नया ऑप्शन बनकर आया है. कंपनी ने इनमें दमदार ANC, शानदार साउंड, लंबी बैटरी लाइफ और प्रीमियम डिजाइन जैसे कई फीचर्स दिए हैं. लेकिन क्या ये ईयरबड्स रोजमर्रा के इस्तेमाल में भी उतने ही अच्छे साबित होते हैं, जितना कंपनी ने कई प्रीमियम फीचर्स देने का दावा किया है? अगर आप जानना चाहते हैं कि ये ईयरबड्स पैसे वसूल हैं या नहीं, तो यहां पढिए इसका पूरा रिव्यू.

    डिजाइन और कम्फर्ट
    OnePlus Nord Buds 4 का डिजाइन पहले के मुकाबले ज्यादा प्रीमियम और क्लीन है. कंपनी ने इस बार ग्लॉसी फिनिश की जगह मैट टेक्सचर दिया है, जिससे फिंगरप्रिंट और हल्के स्क्रैच आसानी से नहीं दिखेंगे. इसका चार्जिंग केस कॉम्पैक्ट है और जेब में आसानी से रखा जा सकता है. ईयरबड्स स्टेम-स्टाइल डिजाइन के साथ आते हैं और इनमें सिलिकॉन ईयर टिप्स मिलते हैं. हर एक ईयरबड का वजन सिर्फ 4.3 ग्राम है, इसलिए लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर भी कानों में भारीपन महसूस नहीं होगा. साथ ही IP55 रेटिंग की वजह से ये हल्की बारिश और पसीने से भी सुरक्षित रहते हैं.

    क्या-क्या मिलेंगे फीचर्स?
    OnePlus Nord Buds 4 में कई ऐसे फीचर्स मिलते हैं, जो आमतौर पर महंगे TWS में देखने को मिलते हैं. इनमें Bluetooth 6.1, ड्यूल-डिवाइस कनेक्टिविटी, गूगल फास्ट पेयर, माइक्रोसॉफ्ट स्विफ्ट पेयर, 6 माइक्रोफोन, 52dB तक Active Noise Cancellation (ANC) और AI Translate जैसे फीचर्स दिए गए हैं. इसके अलावा, 3D स्पेशियल ऑडियो (3D Spatial Audio), गेम स्पेशियल ऑडियो (Game Spatial Audio), मास्टर ट्यूनिंग मोड (Master Tuning Mode), कस्टम EQ प्रीसेट्स और HeyMelody ऐप का सपोर्ट भी मिलता है, जिसकी मदद से टच कंट्रोल, ANC मोड, गेम मोड और इक्वलाइजर जैसी सेटिंग्स को आसानी से कस्टमाइज किया जा सकता है. हालांकि, इसमें LHDC हाई-रेज ऑडियो कोडेक का सपोर्ट नहीं मिलता. यह सिर्फ SBC और AAC कोडेक्स को सपोर्ट करता है, लेकिन सामान्य यूजर्स के लिए यह कोई बड़ी कमी नहीं मानी जाएगी.

    साउंड क्वालिटी और ANC
    OnePlus Nord Buds 4 में 12mm टाइटेनियम-कोटेड डायनेमिक ड्राइवर दिए गए हैं, जो दमदार और बैलेंस्ड साउंड आउटपुट देते हैं. इसमें इन-डेप्थ बेस मिलेगा, लेकिन जरूरत से ज्यादा नहीं, जिससे म्यूजिक साफ और डिटेल्ड सुनाई देगी. वोकल्स और मिड्स भी काफी क्लियर हैं, इसलिए गाने सुनने के साथ-साथ पॉडकास्ट और वीडियो देखने का एक्सपीरियंस भी अच्छा मिलेगा. ANC इसकी सबसे बड़ी खूबियों में से एक है. यह AC, पंखे और मेट्रो जैसी लगातार आने वाली आवाजों को काफी हद तक कम कर देता है. वहीं ट्रांसपेरेंसी मोड भी ठीक काम करता है, हालांकि कभी-कभी आवाजें थोड़ी आर्टिफिशियल महसूस हो सकती हैं.

    कॉलिंग और बैटरी
    कॉलिंग के लिए दिए गए 6 माइक्रोफोन इनडोर में साफ आवाज पहुंचाते हैं. बाहर हल्की हवा में भी कॉल क्वालिटी अच्छी रहती है, हालांकि तेज हवा में इसकी परफॉर्मेंस थोड़ी खराब हो सकती है. बैटरी लाइफ इस प्राइस रेंज में इसकी सबसे बड़ी खूबी है. कंपनी के मुताबिक, चार्जिंग केस के साथ ANC बंद होने पर 54 घंटे और ANC ऑन रहने पर 27 घंटे तक का कुल प्लेबैक मिलता है. इसके अलावा 10 मिनट की फास्ट चार्जिंग कई घंटों तक म्यूजिक सुनने के लिए अच्छा बैकअप दे देती है.

    क्या OnePlus Nord Buds 4 खरीदने चाहिए?
    अगर आपका बजट 3,500 रुपये के आसपास है और आप ऐसे TWS ईयरबड्स चाहते हैं, जिनमें शानदार साउंड क्वालिटी, भरोसेमंद ANC, लंबी बैटरी लाइफ और प्रीमियम डिजाइन मिले, तो OnePlus Nord Buds 4 एक बढ़िया ऑप्शन साबित हो सकते हैं. हाई-रेज ऑडियो कोडेक का सपोर्ट नहीं होना इसकी एक छोटी कमी जरूर है, लेकिन कीमत को देखते हुए यह इसकी खूबियों के सामने ज्यादा मायने नहीं रखती. यानी OnePlus Nord Buds 4 अपने सेगमेंट में एक ऑल-राउंडर और वैल्यू फॉर मनी TWS साबित होते हैं.

  • फ्रिज चलाने के लिए कितने सोलर पैनल चाहिए? छोटे से बड़े रेफ्रिजरेटर तक समझें पूरा हिसाब

    फ्रिज चलाने के लिए कितने सोलर पैनल चाहिए? छोटे से बड़े रेफ्रिजरेटर तक समझें पूरा हिसाब

    एक आम फ्रिज काफी बिजली खाता है। शुरू होने पर इसे ज्यादा बिजली चाहिए होती है और फिर ठंडा रखने के लिए लगातार बिजली की जरूरत पड़ती है बिल्कुल AC की तरह। इसीलिए अगर आप सोलर लगवाने जा रहे हैं, तो सबसे पहले यह जान लेना जरूरी है कि आपके घर के फ्रिज और बाकी सामानों को चलाने के लिए कुल कितने सोलर पैनल लगेंगे। अगर हम रेफ्रिजरेटर की बात करें तो अकेले इसके लिए कम से कम 3 से 4 खास सोलर पैनल की जरूरत होगी। हालांकि, हर फ्रिज का साइज और वॉट अलग होता है, इसलिए बिजली की खपत भी कम या ज्यादा हो सकती है। वैसे तो 3 से 4 सोलर पैनल किसी भी आम फ्रिज के लिए बहुत हैं, लेकिन अगर आपको बेस्ट रिस्पॉन्स और सही सेटअप चाहिए, तो कुछ जरूरी डिटेल्स देखनी होंगी। आइये, जानते हैं कि आपके फ्रिज के लिए कितने सोलर पैनल चाहिए होंगे।

    छोटी फ्रिज के लिए चाहिए 0.3 kW के सोलर पैनल
    एक उदाहरण देकर समझते हैं। मान लीजिए अगर आपके पास एक छोटा यानी मिनी-फ्रिज है, जैसा कि आप छोटी कैंपर वैन या काम की जगह पर इस्तेमाल करते हैं। बड़े साइज वाले मॉडल के मुकाबले, इस तरह के फ्रिज को बहुत कम बिजली की जरूरत होती है। इसे शुरू करने के लिए लगभग 0.3-0.4 kW और इसे चालू रखने के लिए 0.1-0.2 kW चाहिए होते हैं। जानकारी के अनुसार, इतनी बिजली के लिए आपको सिर्फ एक 0.3 kW के सोलर पैनल की जरूरत होगी।

    बड़े फ्रिज के लिए चाहिए कितने वॉट का सोलर सिस्टम?
    वहीं, अगर आप ज्यादा क्यूबिक फीट वाले बड़े फ्रेंच-डोर रेफ्रिजरेटर को चलाना चाहते हैं, तो इसमें बिजली का खर्च ज्यादा आएगा। फ्रेंच-डोर फ्रिज (आमतौर पर 500 लीटर या उससे ज्यादा) को शुरू करने के लिए लगभग 1.2-1.3 kW और उसके बाद साइकल चलाने के लिए 0.5-0.7 kW बिजली की जरूरत होगी। इसके लिए, आपको कम से कम 3 से 4 0.3 kW सोलर पैनल की जरूरत होगी और हो सकता है कि शुरुआती स्टार्ट-अप के लिए और भी ज्यादा पैनल लगें। (REF.)

    धूप के बाद फ्रिज चलाने के लिए चाहिए होगी बैटरी
    यह भी ध्यान देने वाली बात है कि सोलर पैनल अकेले फ्रिज को तभी तक चला पाएगा जब तक धूप खिली रहेगी। अगर आप फ्रिज को लगातार चलाना चाहते हैं, तो आपको अपने घर पर सोलर बैटरी लगाने या पोर्टेबल पावर स्टेशन खरीदने के बारे में भी सोचना होगा। चाहे फ्रिज का साइज कुछ भी हो। इन दोनों में से किसी भी चीज से आप रात भर चीजों को चलाने के लिए काफी अतिरिक्त बिजली स्टोर कर पाएंगे।

     

  • चाणक्य नीति: इन 3 चीजों को लेकर कभी न करें शर्म, वरना बढ़ सकती है परेशानी

    चाणक्य नीति: इन 3 चीजों को लेकर कभी न करें शर्म, वरना बढ़ सकती है परेशानी

    आज के दौर में लोगों के बीच खुद को बेहतर दिखाने का दबाव काफी बढ़ गया है. अच्छी नौकरी, महंगी चीजें, बेहतर लाइफस्टाइल और आर्थिक स्थिति को लेकर लोग अक्सर दूसरों से अपनी तुलना करने लगते हैं. कई बार इसी दिखावे के कारण व्यक्ति अपनी वास्तविक जरूरतों और परिस्थितियों को छिपाने लगता है. आचार्य चाणक्य की नीतियां इससे बिल्कुल अलग सोच अपनाने की सीख देती हैं. उनके अनुसार कुछ ऐसी परिस्थितियां हैं, जिनके लिए व्यक्ति को न तो संकोच करना चाहिए और न ही दूसरों के सामने शर्मिंदा महसूस करना चाहिए l

    आर्थिक परेशानी छिपाने में न करें संकोच
    हर व्यक्ति की आर्थिक स्थिति हमेशा एक जैसी नहीं रहती. कभी किसी के पास पर्याप्त धन होता है तो कभी परिस्थितियां ऐसी बन जाती हैं कि खर्च चलाना भी मुश्किल हो जाता है.चाणक्य नीति के अनुसार आर्थिक तंगी ऐसी चीज नहीं है, जिसे लेकर इंसान को शर्म महसूस करनी चाहिए  l

    मुश्किल समय को छिपाने के बजाय उसे स्वीकार करके उससे बाहर निकलने की कोशिश करनी चाहिए. अपनी क्षमता के अनुसार मेहनत करना, नए कौशल सीखना और बेहतर अवसर तलाशना ज्यादा जरूरी है. सिर्फ लोगों को अपनी स्थिति बेहतर दिखाने के लिए कर्ज या अनावश्यक खर्च का सहारा लेना परेशानी को और बढ़ा सकता है  l

    ईमानदारी से किया कोई काम छोटा नहीं
    कई बार लोग काम को उसके पद और कमाई के आधार पर आंकने लगते हैं. यही वजह है कि कुछ लोग छोटा काम करने में भी झिझकते हैं . चाणक्य की सीख है कि ईमानदारी से किया गया कोई भी काम छोटा नहीं होता  l

    नौकरी छोटी हो या बड़ी, कारोबार हो या मेहनत-मजदूरी अगर व्यक्ति अपने काम को ईमानदारी से करता है तो उसे अपने पेशे पर गर्व होना चाहिए. मुश्किल समय में मिलने वाला कोई भी सही काम आगे बढ़ने का जरिया बन सकता है. काम से मिलने वाला अनुभव भविष्य में नए अवसरों के दरवाजे भी खोल सकता है  l

    भूख लगे तो खाना मांगने में न करें शर्म
    चाणक्य नीति में शरीर की मूल जरूरतों को भी महत्व दिया गया है. अगर किसी व्यक्ति को भूख लगी है तो सिर्फ लोकलाज या दूसरों के सामने अच्छा दिखने के लिए अपनी भूख को दबाना सही नहीं है l

    भोजन शरीर की बुनियादी जरूरत है . इसलिए समय पर खाना खाना या जरूरत पड़ने पर भोजन मांगना कोई शर्म की बात नहीं है. अपनी सेहत और शरीर की जरूरतों को नजरअंदाज करना समझदारी नहीं कही जा सकती l

    लोग क्या कहेंगे के डर से न रोकें खुद को
    अक्सर व्यक्ति अपनी जरूरतों से ज्यादा इस बात की चिंता करता है कि दूसरे उसके बारे में क्या सोचेंगे. आर्थिक स्थिति खराब हो तो उसे छिपाना, मेहनत का काम करने से बचना या भूख लगने पर भी संकोच करना इसी मानसिकता का हिस्सा हो सकता है  l

    चाणक्य की इस सीख का मूल भाव यही है कि दूसरों की राय से ज्यादा अपने आत्मसम्मान और जरूरतों को महत्व देना चाहिए . समाज की बातें हमेशा बदलती रहती हैं, लेकिन अपने जीवन की जिम्मेदारी व्यक्ति को खुद उठानी होती है l

    दिखावे से बेहतर है वास्तविकता को स्वीकार करना
    आज सोशल मीडिया के दौर में तुलना और दिखावे का असर और बढ़ गया है. किसी की महंगी कार, शानदार घर या लग्जरी लाइफ देखकर लोग अपनी जिंदगी को कमतर समझने लगते हैं. लेकिन दूसरों की जिंदगी देखकर अपनी क्षमता से ज्यादा खर्च करना समझदारी नहीं है l

    खुशहाल जीवन का मतलब सिर्फ महंगी चीजें होना नहीं है. आर्थिक अनुशासन, मेहनत, आत्मसम्मान और अपनी वास्तविक परिस्थितियों को स्वीकार करना भी उतना ही जरूरी है l

    चाणक्य नीति की यह सीख हमें याद दिलाती है कि जरूरत के समय मदद मांगना, ईमानदारी से काम करना और अपनी मूल जरूरतों को स्वीकार करना कमजोरी नहीं है. असली कमजोरी तब है, जब इंसान सिर्फ समाज के डर से अपनी जरूरतों और सच्चाई को छिपाता रहे l