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  • मोहाली-चंडीगढ़ बॉर्डर पर 7 दिन का किसान कैंप, नया रूट पता करके ही घर से निकलें

    मोहाली-चंडीगढ़ बॉर्डर पर 7 दिन का किसान कैंप, नया रूट पता करके ही घर से निकलें

    मोहाली.

    पंजाब के किसानों के 32 संगठनों ने संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले आज से मोहाली-चंडीगढ़ बार्डर पर सात दिनों तक पक्का मोर्चा लगाया जा रहा है। अपनी मांगों को लेकर लगाए जाने वाले इस मोर्चे को लेकर किसानों की ओर से पूरी तैयारी कर ली गई है।

    मोर्चे में पंजाब के हर इलाकों से किसान धरना स्थल पर पहुंच रहे है। इस कारण फेज-11 , जगतपुरा, बाबा व्हाइट हाउस चौक सहित शहर के अंदरूनी भागों में किसान ट्रैक्टरों सहित होकर मोर्चे वाले स्थान पर पहुंचेंगे। इस कारण मोहाली प्रशासन की ओर से आयशर चौक से एयरपोर्ट रोड और आयशर चौक से फेज-9 की तरफ से चंडीगढ़ तरफ जाया जा सकता है। किसानों के पक्के मोर्चे को देखते हुए चंडीगढ़ तरफ जाने वालों को फेज 10 , फेज-11 की तरफ नहीं जाना चाहिए।

    किसानों की ओर से ट्रैक्टर ट्रालियां लेकर आया जा रहा है इस कारण आयशर चौक से बेस्टेक माल तक की सड़क को सभी तरह के वाहनाें के लिए बंद किया गया है। पिछली बार किसानों ने इस स्थान पर प्रशासन से मीटिंग किए बगैर मोर्चा लगाया था तो कई रास्तों पर जाम की स्थिति बन गई थी। इस बार किसान यूनियन के नेताओं की ओर से मोहाली-चंडीगढ़ पुलिस अधिकारियों के साथ मीटिंग होने के बाद ही मोर्चा लगाने की इजाजत मिली है। इसलिए पिछली बार लगाए मोर्चे की तरह स्थिति खराब नहीं होगी और लोगों को ज्यादा कठिनाईयों का सामना नहीं करना पड़ सकता है।

    ट्रैफिक पुलिस ने चंडीगढ़ जाने वाले वाहन चालकों के लिए तीन वैकल्पिक रास्ते सुझाए हैं। –
    पहला रूटः आयशर चौक से लांडरां रोड सेक्टर-82/83 रोड जगतपुरा चंडीगढ़।
    दूसरा रूटः आइआइएसईआर चौक से एयरपोर्ट रोड आईटी सिटी/एरोट्रोपोलिस जगतपुरा चंडीगढ़।
    तीसरा रूटः आइआइएसईआर चौक से फेज-9 रोड सेक्टर-66/68 रोड जगतपुरा चंडीगढ़।

  • पटना में 15 सितंबर से सजेगा लालबाग के राजा का दरबार, 55 लाख के मुकुट से होगा गणपति का श्रृंगार

    पटना में 15 सितंबर से सजेगा लालबाग के राजा का दरबार, 55 लाख के मुकुट से होगा गणपति का श्रृंगार

    पटना
    मुंबई के लालबाग के राजा भगवान गणपति का दरबार 15 सितंबर से सज जाएगा। गणेश उत्सव को लेकर महाराष्ट्र मंडल की ओर से तैयारी आरंभ हो गई है। लालबाग के राजा भगवान गणेश की प्रतिमा मुंबई से सड़क के रास्ते 12 सितंबर को पटना पहुंच जाएगी।

    दारोगा राय पथ स्थित महाराष्ट्र मंडल कार्यालय में इस बार मीनाक्षी मंदिर की तर्ज पर भव्य पंडाल बनाया जा रहा है। पंडाल मे भगवान गणेश की प्रतिमा प्रतिष्ठित होगी। 15 सितंबर को भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को विघ्नहर्ता गणेश का जन्मोत्सव धूमधाम से मनेगा।

    महाराष्ट्र मंडल के सचिव संजय भोंसले ने बताया कि इस बार मंडल की ओर से 56वां गणेश उत्सव मनेगा। सात दिनों तक चलने वाले कार्यक्रम के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र होगा।

    भगवान गणेश की प्रतिमा छह फीट की होगी। भगवान गणेश को हीरा, पन्ना, मानिक जड़ित 55 लाख रुपये के मुकुट पहनाया जाएगा। पूजन के लिए महाराष्ट्र के पांच पंडितों का ग्रुप प्रशांत जागीरदार आएंगे।

    शाडू मिट्टी से बनाई जाती है प्रतिमा:
    पटना में महाराष्ट्र मंडल पंडाल में विराजमान होने वाले भगवान गणेश की प्रतिमा मुंबई में शाडू मिट्टी से तैयार होती है। प्रतिमा का निर्माण मुंबई के बांद्रा इलाके के मूर्तिकार दीपक घोटकर करते आ रहे हैं।

    मिट्टी की खासियत है कि यह प्लास्टर आफ पेरिस की तरह मजबूत होता है। जिससे इसकी मजूबती बनी रहती है। पानी या मिट्टी के संपर्क में जाने पर सामान्य मिट्टी की तरह गल जाता है।

    झांज पथक की होगी प्रस्तुति:
    सुहागिनों के लिए हल्दी कुमकुम कार्यक्रम खास होगा। महाराष्ट्र के कलाकार झांज पथक की प्रस्तुति से सभी को आनंदित करेंगे। पूजा पंडाल को लेकर कारीगर कार्य को अंतिम रूप देने में लगे हैं। पंडाल को प्रतिदिन विभिन्न प्रकार के फूलों से सजाया जाएगा। इसके लिए कोलकाता से फूल मंगाए जाएंगे।

    बंगाल के चंदन नगर के कलाकारों की ओर से विशेष सजावट होगी। दर्शन को आने वाले विशिष्ट अतिथियों को पगड़ी पहनाने के लिए मुंबई के लोग पंडाल में मौजूद रहेंगे।

     

  • हरियाणा के गेस्ट टीचर्स के लिए बड़ी राहत, CM नायब सैनी ने दिया नियमित करने का भरोसा

    हरियाणा के गेस्ट टीचर्स के लिए बड़ी राहत, CM नायब सैनी ने दिया नियमित करने का भरोसा

    चंडीगढ़
     हरियाणा के सरकारी स्कूलों में पिछले 20 वर्षों से सेवाएं दे रहे अतिथि अध्यापकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है।

    मुख्यमंत्री नायब सैनी ने सोमवार देर रात अतिथि अध्यापकों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ एक हाई लेवल मीटिंग की। विधानसभा सत्र समाप्त होने के बाद विधानसभा सचिवालय के भीतर आधी रात तक चली इस बैठक के बाद से ही गेस्ट टीचर्स को पक्का किए जाने को लेकर सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं।

    शिक्षा मंत्री भी थे शामिल
    इस बैठक में हरियाणा के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा और सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। अतिथि अध्यापकों के मीडिया प्रभारी डॉ. अजय लोहान ने जानकारी देते हुए बताया कि शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने स्वयं मुख्यमंत्री के समक्ष गेस्ट टीचर्स का पूरा मुद्दा प्रमुखता से उठाया।

    मुख्यमंत्री ने मामले पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए आश्वासन दिया है कि जल्द ही अधिकारियों के साथ एक औपचारिक बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें इस समस्या के अंतिम समाधान पर फैसला लिया जाएगा।

    2014 की नीति की सभी शर्तें पूरी करते हैं गेस्ट टीचर
    प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि गेस्ट टीचर्स 2014 की नीति के तहत तय सभी नियमों और शर्तों को पूरा करते हैं। डॉ. लोहान के अनुसार, कॉलेज लेक्चरर और गेस्ट टीचर्स के नियम व शर्तें बिल्कुल एक समान थीं।

    कॉलेज लेक्चरर 2014 में ही पक्के किए जा चुके हैं, जबकि सरकारी स्कूलों में 21 वर्षों से सेवाएं दे रहे गेस्ट टीचर आज भी अपने नियमितीकरण का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि 2014 में बीजेपी ने सरकार बनने पर पहली कलम से गेस्ट टीचर्स को नियमित करने का वादा किया था।

    अतिथि अध्यापकों के प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे लगातार उनकी मांगों को लेकर गंभीर हैं और मजबूती से उनके साथ खड़े हैं। मुख्यमंत्री नायब सैनी के सकारात्मक रुख के बाद अब हजारों गेस्ट टीचर्स में जल्द पक्के होने की उम्मीद जग गई है।

  • चंडीगढ़ में BLO ड्यूटी में लापरवाही पड़ी भारी, अमृत पाल कौर निलंबित

    चंडीगढ़ में BLO ड्यूटी में लापरवाही पड़ी भारी, अमृत पाल कौर निलंबित

    चंडीगढ़.

    विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान बूथ लेवल अधिकारी की जिम्मेदारी में लापरवाही बरतने पर जिला निर्वाचन अधिकारी ने जीएमएचएस-32 में तैनात टीजीटी (हिंदी) अध्यापिका अमृत पाल कौर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

    वह सेक्टर-41डी के भाग संख्या 324 (पूर्व भाग संख्या 350) की बीएलओ थीं। आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, अमृत पाल कौर पर मतदाताओं और चुनाव अधिकारियों के साथ सहयोग नहीं करने तथा निर्वाचन कार्य से संबंधित गणना प्रपत्र एकत्र करने से जानबूझकर इन्कार करने का आरोप है। आरोप है कि उन्होंने मतदाताओं को बीएलओ के माध्यम से फॉर्म जमा कराने के बजाय सीधे चुनाव कार्यालय में जमा कराने के लिए कहा। रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि उन्होंने एक अनधिकृत संचार समूह बनाकर अन्य बीएलओ के बीच भ्रामक जानकारी प्रसारित की, जिससे चल रहे एसआईआर कार्य में बाधा उत्पन्न हुई। इसके अलावा अपनी बीएलओ ड्यूटी से बचने के उद्देश्य से मतदाता सूची से अपना नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 जमा करने की बात भी सामने आई है।

    लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत कार्रवाई
    निर्वाचन अधिकारियों के मुताबिक बीएलओ चुनाव आयोग और मतदाताओं के बीच महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं। ऐसे में एस आई आर जैसे महत्वपूर्ण चुनावी कार्य के दौरान निर्धारित जिम्मेदारियों का पालन नहीं करना गंभीर मामला माना गया। अधिकारियों ने उनके आचरण को लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 के तहत कर्तव्य में लापरवाही के रूप में माना है।

    शिक्षा विभाग को विभागीय जांच के निर्देश
    निलंबन आदेश की प्रतियां मुख्य निर्वाचन अधिकारी, चंडीगढ़ प्रशासन, स्कूल शिक्षा निदेशक तथा संबंधित सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी समेत अन्य अधिकारियों को भेजी गई हैं। स्कूल शिक्षा निदेशालय को निलंबन अवधि के दौरान अमृत पाल कौर का मुख्यालय निर्धारित करने के साथ-साथ कथित अनुशासनहीनता और कर्तव्य में लापरवाही के संबंध में विभागीय कार्रवाई शुरू करने को भी कहा गया है।

  • CG में बिजली उपभोक्ताओं के लिए E-KYC प्रक्रिया शुरू, जानें कैसे होगा अपडेट

    CG में बिजली उपभोक्ताओं के लिए E-KYC प्रक्रिया शुरू, जानें कैसे होगा अपडेट

    दुर्ग.

    छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड द्वारा विद्युत उपभोक्ताओं के कनेक्शनों एवं उनके रिकॉर्ड को अधिक प्रमाणिक, अद्यतन और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है. विद्युत रीजन दुर्ग के अंतर्गत दुर्ग, बालोद एवं बेमेतरा जिले के लगभग 10 लाख 09 हजार 521 निम्नदाब उपभोक्ताओं को ई-केवाईसी कराया जाएगा, जिसकी शुरुआत 1 सितंबर से होगी.

    यह प्रक्रिया उपभोक्ता डेटाबेस को सटीक बनाने और यह सुनिश्चित करने में मदद करेगी कि कनेक्शन का उपयोग करने वाला व्यक्ति वास्तविक एवं वैध है. ई-केवाईसी के माध्यम से विद्युत कनेक्शन से संबंधित उपभोक्ता की पहचान का सत्यापन किया जाएगा. इससे यह सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी कि विद्युत कनेक्शन जिस व्यक्ति के नाम पर दर्ज है, वह वास्तविक एवं वैध उपभोक्ता है तथा वर्तमान में कनेक्शन का उपयोग कौन कर रहा है. इस प्रक्रिया से विद्युत कंपनी को अपने उपभोक्ता रिकॉर्ड को व्यवस्थित एवं अद्यतन करने के साथ वास्तविक उपभोक्ताओं का प्रमाणिक डेटाबेस तैयार करने में मदद मिलेगी. उपभोक्ताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए ई-केवाईसी के लिए तीन आसान विकल्प उपलब्ध कराए गए हैं.

    उपभोक्ता “मोर बिजली मोबाइल ऐप” के माध्यम से स्वयं ऑनलाइन ई केवाईसी कर सकते हैं. इसके अलावा नजदीकी वितरण केंद्र अथवा जोन कार्यालय में उपस्थित होकर अधिकृत कर्मचारियों के माध्यम से ई-केवाईसी कराया जा सकता है, अथवा मीटर रीडर उपभोक्ता के घर पहुंचकर मोबाइल एप के माध्यम से ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी करेगा. ई-केवाईसी के दौरान उपभोक्ता की पहचान का सत्यापन आधार ऑथेंटिकेशन के माध्यम से ओटीपी, फिंगरप्रिंट अथवा फेस ऑथेंटिकेशन से किया जा सकेगा.

    यदि किसी उपभोक्ता का नाम विद्युत कनेक्शन एवं आधार कार्ड में अलग है, तो पहले विद्युत कनेक्शन में नाम सुधार करना होगा, जिसके लिए केवल नाम में त्रुटि होने पर कोई प्रोसेसिंग शुल्क नहीं लिया जाएगा, जबकि मालिकाना हक में परिवर्तन होने पर नियमानुसार शुल्क और दस्तावेज देने होंगे. विद्युत कंपनी ने स्पष्ट किया है कि ई-केवाईसी की पूरी प्रक्रिया निःशुल्क है और इसके लिए उपभोक्ता से किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा. उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि ई-केवाईसी के नाम पर किसी अनधिकृत व्यक्ति को राशि न दें. उपभोक्ता केवल अधिकृत माध्यमों से ही ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी करें और किसी संदिग्ध लिंक या अनधिकृत ऑनलाइन माध्यम का उपयोग न करें.

  • झारखंड में मंईयां सम्मान योजना पर संकट! 51 लाख महिलाओं को ₹2500 देने पर मंडराया खतरा

    झारखंड में मंईयां सम्मान योजना पर संकट! 51 लाख महिलाओं को ₹2500 देने पर मंडराया खतरा

    रांची
    झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना में एक साथ पूरे राज्य की महिलाओं के खाते में पैसा डालने की योजना फिलहाल अधर में है। सितंबर-अक्टूबर से हर महीने एक विशेष दिन को ‘मंईयां सम्मान दिवस’ घोषित कर एक साथ राशि भेजने का विचार था, लेकिन अब यह संभव नहीं दिख रहा।

    फिलहाल पैसा पहले की तरह अलग-अलग जिलों में महिलाओं के खातों में जाएगा। योजना में कोई अन्य परिवर्तन नहीं होगा और झारखंड सरकार का प्रयास है कि पूर्व की भांति महिलाओं को नियमित रूप से सम्मान राशि मिलती रहे।

    वरिष्ठ पत्रकार राकेश परिहार बताते हैं कि राज्य सरकार का सबसे बड़ा पैसा इस योजना में जा रहा है। यह महिलाओं की जिंदगी में सकारातमक बदलाव रहा है। झामुमो सरकार की यह सबसे महत्वाकांक्षी योजना है। मगर इस बजट पर गंभीर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

    केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में संसद से पारित खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (MMDR Amendment Bill, 2026) के कारण राज्य सरकार को खनन से होने वाले अतिरिक्त राजस्व में भारी कमी का अनुमान है। इससे महिलाओं को प्रतिमाह मिलने वाली सम्मान राशि प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

    योजना के तहत राज्य की करीब 51 लाख पात्र महिलाओं (18 से 50 वर्ष आयु वर्ग) को हर महीने 2,500 रुपये सीधे बैंक खाते में दिए जा रहे हैं। यह राशि मुख्य रूप से झारखंड मिनरल बेयरिंग लैंड सेस एक्ट, 2024 के तहत खनिज-युक्त भूमि पर लगाए गए सेस से जुटाई जा रही थी।

    राज्य सरकार के अनुसार, इस सेस से सालाना करीब 11,000 से 14,000 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने का अनुमान था, जिसका बड़ा हिस्सा मंईयां सम्मान योजना सहित अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में इस्तेमाल होता था।

    नए संशोधन के बाद राज्य सरकारें खनिज अधिकारों या खनिज-युक्त भूमि पर अपनी ओर से अतिरिक्त कर, उपकर या सेस नहीं लगा सकेंगी। राज्य सरकार का दावा है कि इससे हर साल 13,000-15,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता है।

    वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने इसे राज्य के राजस्व पर बड़ा झटका बताया है और कहा है कि इससे मंईयां सम्मान योजना समेत अन्य कल्याणकारी योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं। राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में इस कानून को चुनौती देने की तैयारी कर रही है।

    वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में योजना के लिए 14,065 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। इससे पहले भी अनुपूरक बजट में बड़ी राशि आवंटित की जा चुकी है।

    सत्ता पक्ष का आंदोलन और आर्थिक नाकेबंदी की तैयारी
    सत्ताधारी झामुमो-कांग्रेस गठबंधन केंद्र के खिलाफ जोरदार आंदोलन चला रहा है। झामुमो ने चेतावनी दी है कि अगर बिल वापस नहीं लिया गया तो चरणबद्ध तरीके से जन जागरण, बंद और अंत में खनिजों की आर्थिक नाकेबंदी की जा सकती है।

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर चिंता जताई है कि खनन राजस्व राज्य के अपने गैर-कर राजस्व का करीब 85 प्रतिशत है और इसमें कटौती से विकास तथा कल्याणकारी योजनाएं प्रभावित होंगी।

    केंद्र सरकार का पक्ष है कि खनन से होने वाले कुल राजस्व का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा अब भी राज्यों को ही मिलता रहेगा और नए कानून से राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा। संशोधन का उद्देश्य खनन क्षेत्र में स्थिरता और पारदर्शिता लाना बताया जा रहा है।

    राज्य सरकार कानूनी और लोकतांत्रिक तरीकों से अपना अधिकार बचाने पर जोर दे रही है। योजना की निरंतरता और महिलाओं को समय पर राशि मिलने पर नजर बनी हुई है।

  • हरियाली में यमुनानगर नंबर-1, जंगलों से बाहर 60.94 लाख पेड़; 98% पेड़ गांवों में

    हरियाली में यमुनानगर नंबर-1, जंगलों से बाहर 60.94 लाख पेड़; 98% पेड़ गांवों में

    यमुनानगर
    जिले की हरियाली का बोझ गांव उठा रहे हैं। राज्य में जंगलों से बाहर करीब 4.01 करोड़ पेड़ हैं। इनमें अकेले जिले के 60 लाख 94 हजार 153 पेड़ हैं। कुल पेड़ों में जिले की हिस्सेदारी करीब 14.86 प्रतिशत है।

    यानी राज्य के जंगलों से बाहर दर्ज करीब हर सातवां पेड़ यमुनानगर में है। लेकिन जिले की इस हरियाली का बड़ा हिस्सा गांवों में है। 490 पंचायतों में 59 लाख 97 हजार 412 पेड़ दर्ज हैं, जबकि शहरी क्षेत्र में सिर्फ 96 हजार 474 पेड़ हैं।

    कुल पेड़ों में ग्रामीण हिस्सेदारी 98.41 प्रतिशत और शहरी हिस्सेदारी महज 1.58 प्रतिशत है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के पेड़ों की संख्या में करीब 62 गुना का अंतर है। आंकड़े शहरों में हरियाली बढ़ाने की बड़ी चुनौती सामने रखते हैं।

    आंकड़ों में यमुनानगर प्रदेश में सबसे अधिक पेड़ों वाला जिला है। प्रदेश के कुल पेड़ों में 14.86 प्रतिशत हिस्सेदारी इसे हरियाली के मामले में अलग स्थान देती है। इसके बावजूद शहरों में पेड़ों की कम संख्या चिंता और चितंन का विषय है।

    जिले का भौगोलिक क्षेत्रफल 1756 वर्ग किलोमीटर यानी 4 लाख 33 हजार 916 एकड़ है। 25 हजार एकड़ क्षेत्र कलेसर राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव प्राणी विहार का है। निजी क्षेत्र को शामिल करने पर जिले के 18.55 प्रतिशत क्षेत्र में वन क्षेत्र आता है। वन क्षेत्र के मामले में प्रदेश में पंचकूला के बाद यमुनानगर दूसरे स्थान पर है।/B

    पौधे लगाने से ज्यादा बड़ी चुनौती बचाना
    हर साल पौधारोपण अभियान चलाए जाते हैं। इसके बावजूद पौधों को बचाना चुनौती बना हुआ है। पौधों की बचत दर 65 से 70 प्रतिशत है। यानी 100 पौधे लगाने पर करीब 30 से 35 पौधे जीवित नहीं रह पाते। इस बार बचत दर 90 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए मौजूदा अधिकतम बचत दर से 20 प्रतिशत अंक का सुधार करना होगा।

    कलेसर में आयोजित 74वें वन महोत्सव में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अधिकारियों को पौधों की बचत दर 90 प्रतिशत करने के निर्देश दिए थे। लोगों से पौधे लगाने के बाद पांच साल तक उनकी देखरेख करने की अपील भी की थी।

    15 नर्सरियों में तैयार हुए 16.40 लाख पौधे
    जिले में वन विभाग की 15 नर्सरियां हैं। वर्ष 2025-26 में करीब 16 लाख 40 हजार 767 पौधों की आपूर्ति की जा रही है। इनमें क्लोन यूके प्लांट के 10 लाख 23 हजार 115, सरकारी भूमि के लिए 2 लाख 62 हजार 652, किसानों को निशुल्क देने के लिए 75 हजार, जल शक्ति अभियान के लिए दो लाख और पौधागिरी के 80 हजार पौधे शामिल हैं। वर्ष 2024-25 में कुल 22 लाख 50 हजार 808 पौधों की आपूर्ति हुई थी। पिछले वर्ष के मुकाबले करीब 27.10 प्रतिशत कम है।

    जिले में पापुलर और सफेदा की संख्या सबसे ज्यादा है। पापुलर के 42 लाख 56 हजार 654 पेड़ हैं। यह कुल पेड़ों का 69.86 प्रतिशत है। सफेदा के 11 लाख 39 हजार 557 पेड़ हैं। इनकी हिस्सेदारी 18.70 प्रतिशत है। दोनों प्रजातियों को मिलाकर 53 लाख 96 हजार 211 पेड़ हैं।

    यानी जिले के कुल पेड़ों में करीब 88.54 प्रतिशत हिस्सेदारी पापुलर और सफेदा की है। प्लाईवुड उद्योग के कारण किसान इन दोनों प्रजातियों की खेती बड़े स्तर पर करते हैं। यमुना नदी के आसपास की परिस्थितियां भी इनके लिए अनुकूल हैं। ये पेड़ करीब तीन से चार साल में तैयार हो जाते हैं।

    75 वर्ष पुराने 507 पेड़ों को पेंशन
    नए पौधे लगाने के साथ पुराने पेड़ों के संरक्षण पर भी जोर दिया जा रहा है। प्राण वायु देवता योजना के तहत जिले में 75 वर्ष पुराने 507 पेड़ों का चयन किया गया है। इनके संरक्षण के लिए प्रति पेड़ तीन हजार रुपये सालाना पेंशन दी जा रही है। इस हिसाब पेड़ों के संरक्षण पर सालाना 15 लाख 21 हजार रुपये की पेंशन दी जा रही है। योजना में पेड़ों के चयन के मामले में यमुनानगर प्रदेश में रेवाड़ी के बाद दूसरे स्थान पर है।

    शहरों की हरियाली बढ़ाने पर विशेष जोर
    प्रदेश सरकार ने इस बार पौधारोपण के साथ शहरी वानिकी पर भी जोर दिया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कलेसर में आयोजित वन महोत्सव में शहरों में हरियाली बढ़ाने के लिए विशेष योजनाओं का उल्लेख किया था। 

    वन रक्षा दल के महासचिव चौधरी बलबीर सिंह व सदस्य रविंद्र गुर्जर का कहना है कि पौधा लगाना शुरुआत है, लेकिन असली काम उसे बचाना है। नियमित देखरेख और सुरक्षा की व्यवस्था हो तो बचत दर बढ़ाई जा सकती है। 

    आंकड़ों में यमुनानगर की हरियाली
    आंकड़ा श्रेणी                                                                      विवरण / संख्या
    कुल पेड़                                                                              60,94,153
    हरियाणा में जंगलों से बाहर कुल पेड़                                           करीब 4.01 करोड़
    प्रदेश के कुल पेड़ों में यमुनानगर की हिस्सेदारी                              करीब 14.86%
    ग्रामीण क्षेत्र के पेड़                                                                   59,97,412 (98.41%)
    शहरी क्षेत्र के पेड़                                                                     96,474 (1.58%)
    ग्रामीण-शहरी पेड़ों का अनुपात                                               करीब 62 गुना
    कुल भौगोलिक क्षेत्रफल                                                        4,33,916 एकड़
    कलेसर राष्ट्रीय उद्यान व वन्यजीव प्राणी विहार                           25,000 एकड़
    वन क्षेत्र                                                                            18.55%
    वन विभाग की नर्सरियां                                                        15
    पौधा आपूर्ति में एक साल में कमी                                     6,10,041 पौधे (27.10% की कमी)
    वर्तमान पौधा बचत दर                                                 65% से 70%
    इस बार पौधा बचत का लक्ष्य                                         90%
    प्रदेश में पौधारोपण का कुल लक्ष्य                                    2.10 करोड़ से अधिक
    प्राण वायु देवता योजना (वृद्ध पेड़)                                     507 पेड़ (₹3,000/वर्ष प्रति पेड़, कुल ₹15.21 लाख सालाना)

    प्रमुख प्रजातियों के पेड़ों की हिस्सेदारी
    पेड़ की प्रजाति     संख्या     हिस्सेदारी (%)
    पापुलर     42,56,654     69.86%
    सफेदा     11,39,557     18.70%
    मिक्स     4,59,228     7.53%
    आम     81,507     1.34%
    शीशम     71,476     1.17%
    जामुन     31,707     0.52%
    पापड़ी     14,664     0.24%
    नीम     12,609     0.21%
    अमरूद     11,112     0.18%
    आंवला     5,901     0.10%
    किकर     4,619     0.08%
    पीपल     2,957     0.05%
    पिलखन     1,890     0.03%
    बरगद     272     0.004%

    पौधों की आपूर्ति (वर्षवार तुलना)
    श्रेणी                           2024-25     2025-26
    क्लोन यूके प्लांट            13,37,050     10,23,115
    सरकारी भूमि के लिए     3,58,758     2,62,652
    किसानों को निशुल्क      75,000     75,000
    जल शक्ति अभियान      4,00,000     2,00,0

     

  • PU में ABVP ने लहराया भगवा, युवाओं का मूड भांपा; पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए नए संकेत

    PU में ABVP ने लहराया भगवा, युवाओं का मूड भांपा; पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए नए संकेत

    चंडीगढ़.

    पंजाब विधान सभा चुनाव से पहले पंजाब यूनिवर्सिटी छात्र संघ के हुए चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की छात्र इकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने लगातार दूसरी बार अपनी जीत का परचम लहराया है।

    चुनाव भले ही छात्र संघ के हो लेकिन भाजपा ने विरोधी पार्टी कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की चिंताएं बढ़ा दी हैं। क्योंकि पंजाब यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव से पंजाब के युवा मतदाताओं के मूड का अंदाजा लगता है। यूनिवर्सिटी में करीब 65 फीसदी छात्र पंजाब के विभिन्न जिलों व विभिन्न वर्गों से जुड़े हुए हैं। एबीवीपी के अंकित बिढान ने अपने निकटम प्रतिद्वंद्वी आप के छात्र संघ एएसएपी के आदिल बराड़ को 506 वोटों से हराया। अंकित को 3149 तो आदिल को 2637 वोट मिले। जबकि एनएसयूआई के प्रत्याशी गुरमन सिद्धू को 2263 वोट मिले।

    छात्र संघ चुनाव में भाजपा की जीत से पंजाब की सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी की चिंताएं इसलिए भी बढ़ी हैं क्योंकि 31 अगस्त को मतदान से ठीक एक दिन पहले एबीवीपी और शिरोमणि अकाली दल की इकाई सोई का गठबंधन हो गया था। पंजाब में भले ही भाजपा अपने दम पर 117 विधान सभा सीटों पर चुनाव लड़ने का दावा कर रही हो लेकिन विपक्षी पार्टियां हमेशा ही इस आशंका में रहती हैं की चुनाव से पहले दोनों पार्टियों का गठबंधन संभव है।

    युवा शक्ति पर अटूट विश्वास का प्रमाण –
    ""पंजाब यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में @ABVPVoice की शानदार जीत पर परिषद् के सभी कार्यकर्ताओं को हार्दिक बधाई। लगातार दूसरी बार मिली यह जीत युवा शक्ति के राष्ट्र प्रथम की विचारधारा पर अटूट विश्वास का प्रमाण है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि परिषद् के कार्यकर्ता स्वामी विवेकानंद जी के…""
    — Amit Shah (@AmitShah)

  • अगस्त में भी पंजाब को बारिश का इंतजार, सामान्य से 39% कम हुई बरसात; जल्द राहत की उम्मीद

    अगस्त में भी पंजाब को बारिश का इंतजार, सामान्य से 39% कम हुई बरसात; जल्द राहत की उम्मीद

    अमृतसर
     पंजाब में मानसून का प्रदर्शन अगस्त में भी निराशाजनक रहा। पूरे महीने प्रदेश में सामान्य से करीब 39 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। अगस्त में सामान्य बारिश 146.2 मिलीमीटर होनी चाहिए थी, लेकिन केवल 88.7 मिलीमीटर बारिश हुई। इससे पहले जून से अगस्त तक भी पंजाब में बारिश की कमी बनी हुई है।

    भारत मौसम विज्ञान विभाग के आंकड़ों के अनुसार, एक जून से 31 अगस्त तक पंजाब में सामान्य 362.1 मिलीमीटर के मुकाबले केवल 230.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इस तरह इस अवधि में बारिश करीब 36 प्रतिशत कम रही। लगातार कम बारिश से कृषि और भूजल को लेकर भी चिंता बनी हुई है।

    उधर, 31 अगस्त के जारी आंकड़ों के अनुसार को प्रदेश में मौसम अधिकांश हिस्सों में शुष्क रहा। केवल पठानकोट में 3.5 मिलीमीटर और थीन बांध क्षेत्र में एक मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। प्रदेश का औसत अधिकतम तापमान पिछले दिन के मुकाबले 0.6 डिग्री सेल्सियस कम रहा, लेकिन यह सामान्य से 1.8 डिग्री अधिक बना हुआ है। फरीदकोट में सबसे अधिक 38.8 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।

    आज राहत नहीं, लेकिन जल्द बरसेंगे बादल
    1 सितंबर: मौसम विभाग के अनुसार एक सितंबर को प्रदेश में किसी तरह की चेतावनी नहीं है। हिमाचल से सटे कुछ जिलों में हल्की-फुल्की बारिश होने की संभावनाएं हैं।

    2 सितंबर: मौसम में बदलाव के संकेत हैं। इस दिन पठानकोट, होशियारपुर, रूपनगर और साहिबजादा अजीत सिंह नगर में भारी बारिश को लेकर यलो अलर्ट जारी किया गया है।

    3 सितंबर: इन जिलों के साथ पठानकोट, होशियारपुर, नवांशहर, मोहाली और फतेहगढ़ साहिब में भारी बारिश की चेतावनी रहेगी। अन्य जिलों के लिए इन दिनों कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है। जबकि अन्य जिलों में हल्की फुल्की बारिश होने के आसार हैं।

    4 सितंबर: पठानकोट, होशियारपुर, नवांशहर, मोहाली और फतेहगढ़ साहिब में भारी बारिश की चेतावनी रहेगी। अन्य जिलों में मौसम सामान्य बना रहने का अनुमान है।

    38 के पार पहुंचा तापमान
    भारत मौसम विज्ञान विभाग चंडीगढ़ द्वारा जारी 31 अगस्त 2026 के आंकड़ों के अनुसार, पंजाब का औसत अधिकतम तापमान बीते दिन की तुलना में 0.6°C कम रहा है, हालांकि यह अभी भी सामान्य से 1.8°C अधिक बना हुआ है। राज्य में सबसे अधिक अधिकतम तापमान फरीदकोट में 38.8°C दर्ज किया गया, जबकि प्रमुख शहरों में पटियाला में 35.7°C (सामान्य से 2.2°C अधिक), अमृतसर में 35.5°C, चंडीगढ़ व लुधियाना में 35.0°C, मोहाली में 34.1°C और जालंधर में 32.6°C तापमान रहा।

    मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में उत्तर और पूर्वी पंजाब के जिलों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। ऐसे में लंबे समय से बारिश की कमी झेल रहे क्षेत्रों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, प्रदेश में मानसून की कुल कमी को देखते हुए कुछ दिनों की बारिश से स्थिति में बड़ा बदलाव आने की संभावना सीमित है।

  • पंजाब में गहराया बिजली संकट, 4 थर्मल प्लांटों में सिर्फ 8 से 15 दिन का कोयला बचा

    पंजाब में गहराया बिजली संकट, 4 थर्मल प्लांटों में सिर्फ 8 से 15 दिन का कोयला बचा

    पटियाला 
    पंजाब में बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बीच थर्मल प्लांटों में कोयले का स्टॉक घट गया है। प्रदेश के पांच थर्मल प्लांटों में से चार में सिर्फ 8 से 15 दिन का कोयला बचा है। इनमें तलवंडी साबो में आठ, राजपुरा में 10, गोइंदवाल में 11 और लहरा मुहब्बत में 15 दिन का स्टॉक है। रोपड़ में 29 दिन का कोयला उपलब्ध है।

    केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के नियमों के मुताबिक 1000 किलोमीटर से अधिक दूरी की कोयला खदानों से आपूर्ति पाने वाले थर्मल प्लांटों में 30 दिन का कोयला स्टॉक होना चाहिए। मानसून से पहले ऐसे प्लांटों में 21 दिन का स्टॉक होना चाहिए। पंजाब को कोयला 1300 से 1900 किलोमीटर दूर स्थित खदानों से मिलता है। ऐसे में मौजूदा स्टॉक तय मानक से काफी कम है।

    कोयला उत्पादक राज्यों ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ में भारी मानसूनी बारिश के कारण खनन प्रभावित होने और कोयले का परिवहन धीमा होने को सप्लाई में कमी की वजह बताया जा रहा है। पावरकाम के डायरेक्टर (उत्पादन) पुन्नरदीप सिंह बराड़ ने बताया कि कोयले की सप्लाई तेज कराने के लिए केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण को पत्र लिखा गया है।

    इधर, सोमवार को पंजाब में बिजली की मांग 16,467 मेगावाट के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। 2025 में इसी दिन मांग 8,090 मेगावाट थी, यानी इस बार 8,377 मेगावाट ज्यादा मांग रही। 2024 में इसी दिन मांग 12,093 मेगावाट दर्ज की गई थी।

    रिकॉर्ड मांग के मुकाबले पावरकाम के अपने सभी स्रोतों से सिर्फ 4,833 मेगावाट बिजली उपलब्ध रही। इसमें सरकारी थर्मलों से 839, हाइडल प्रोजेक्टों से 720 और निजी थर्मलों से 2,941 मेगावाट बिजली मिली। मांग पूरी करने के लिए पावरकाम ने पावर ग्रिड से 11,623 मेगावाट बिजली ली।

    अभी तक पांच यूनिट बंद, 1130 मेगावाट उत्पादन ठप
    रोपड़ के यूनिट नंबर 4 और 5 तथा लहरा मुहब्बत के यूनिट नंबर 1, 3 और 4 तकनीकी समस्या के कारण बंद हैं। इनसे कुल 1130 मेगावाट बिजली उत्पादन प्रभावित है। इसके अलावा रणजीत सागर बांध के दो और यूबीडीसी प्रोजेक्ट के तीन यूनिट बंद हैं, जिससे करीब 345 मेगावाट उत्पादन ठप है। भाखड़ा, पौंग और रणजीत सागर बांधों में पिछले साल के मुकाबले पानी का स्तर भी कम है, जिससे हाइडल उत्पादन प्रभावित हुआ है। 

    बिजली की कमी के चलते पावरकाम ने उद्योगों में रोटेशन के आधार पर साढ़े चार घंटे तक के कट लगाए। यदि कोयले की सप्लाई और बंद यूनिटों की स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ तो बिजली उपलब्धता पर दबाव बना रहेगा।

    किस थर्मल में कितना कोयला
    तलवंडी साबो (1980 मेगावाट)  – 8 दिन
    राजपुरा (1400 मेगावाट) – 10 दिन
    गोइंदवाल (540 मेगावाट) – 11 दिन
    लहरा मुहब्बत (920 मेगावाट) – 15 दिन
    रोपड़ (840 मेगावाट) – 29 दिन