Category: news

  • दिल्ली से पटना तक बुलेट ट्रेन! बिहार-UP में दौड़ेगी हाईस्पीड रेल, सफर होगा बेहद तेज

    दिल्ली से पटना तक बुलेट ट्रेन! बिहार-UP में दौड़ेगी हाईस्पीड रेल, सफर होगा बेहद तेज

    पटना / नई दिल्ली

    देश के कई हिस्‍सों में हाई-स्‍पीड यानी बुलेट ट्रेन का जाल बिछाने का काम पूरे जोरशोर से चल रहा है. मुंबई से अहमदाबाद के बीच देश में पहली बुलेट ट्रेन दौड़ाने की तैयारी अपने चरम पर है. साल 2027 में इस रूट के कुछ हिस्‍सों पर हाई-स्‍पीड ट्रेन ऑपरेट करने का प्रयास है. भारत सरकार ने बिहार और उत्‍तर प्रदेश में भी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर बनाने की योजना बनाई है. अब दिवाली-छठ से पहले रेल मंत्री अश्विनी वैष्‍णव ने इसपर बड़ा अपडेट दिया है. उन्‍होंने बताया कि दिल्‍ली से कानपुर, लखनऊ और पटना के बीच बुलेट ट्रेन चलाने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है. बता दें कि दिल्‍ली से पटना का रेल रूट सबसे व्‍यस्‍ततम रेल मार्गों में से एक है, ऐसे में इस सेक्‍शन में बुलेट ट्रेन चलने से हजारों-लाखों लोगों को काफी राहत मिलेगी. रेल मंत्री ने बताया कि हाई-स्‍पीड ट्रेन से दिल्‍ली से पटना महज 4.5 घंटे में पहुंचा जा सकेगा. फिलहाल यह सफर 12 घंटों का है. इस तरह जो काम राजधानी, वंदे भारत और दुरंतो जैसी प्रीमियम सुपरफास्‍ट ट्रेनें नहीं कर सकीं वो बुलेट ट्रेन से संभव हो सकेगा. साथ ही बिहार-यूपी वालों का सपना भी पूरा होगा। 

    बिहार-यूपी वालों का सपना साकार करने की दिशा में मोदी सरकार लगातार काम कर रही है. आने वाले कुछ सालों में दिल्‍ली से कानपुर, लखनऊ और पटना के बीच बुलेट ट्रेन के दौड़ने का सपना साकार होने वाला है. देश में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा संकेत दिया है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने खुद बताया कि प्रस्तावित बुलेट ट्रेन परियोजना को उत्तर प्रदेश और बिहार तक ले जाने की योजना पर काम चल रहा है. इस हाई-स्‍पीड रेल कॉरिडोर के बनने के बाद दिल्ली से लखनऊ का सफर करीब दो घंटे और राष्ट्रीय राजधानी से पटना की यात्रा महज साढ़े चार घंटे में पूरी की जा सकेगी. दिल्‍ली से पटना की दूरी 1000 किलोमीटर है. इस तरह बुलेट ट्रेन की संभावित रफ्तार 250 किलोमीटर प्रति घंटे के आसपास रहने की संभावना है. प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर दिल्ली को उत्तर प्रदेश और बिहार के प्रमुख शहरों से जोड़ेगा। 

    बुलेट ट्रेन कॉरिडोर में कौन से बड़े शहर
    रेल मंत्री अश्विनी वैष्‍णव ने बताया कि प्रस्तावित बुलेट ट्रेन कॉरिडोर में आगरा, कानपुर, लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी और पटना जैसे प्रमुख शहर शामिल होंगे. इससे दिल्ली और इन शहरों के बीच मौजूदा रेल यात्रा समय में भारी कमी आने की उम्मीद है. वैष्णव के मुताबिक, प्रस्तावित परियोजना के तहत दिल्ली से आगरा की करीब 200 किलोमीटर दूरी केवल 58 मिनट में तय की जा सकेगी. वहीं 455 किलोमीटर दूर कानपुर पहुंचने में करीब 1 घंटे 50 मिनट लगेंगे. दिल्ली से लखनऊ की करीब 495 किलोमीटर दूरी 2 घंटे 12 मिनट में पूरी होने का अनुमान है. इसी तरह 750 किलोमीटर दूर प्रयागराज तक पहुंचने में लगभग तीन घंटे और 945 किलोमीटर दूर वाराणसी तक करीब 3 घंटे 33 मिनट लग सकते हैं. दिल्ली से पटना की करीब 1,170 किलोमीटर की दूरी लगभग 4.5 घंटे में पूरी करने का लक्ष्य होगा। 

    हाई-स्‍पीड रेल नेटवर्क का बढ़ता दायरा
    बुलेट ट्रेन का दायरा लगातार बढ़ रहा है. रेल मंत्री ने कहा कि परियोजना के साकार होने पर यह मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के बाद देश में बुलेट ट्रेन नेटवर्क का अगला बड़ा चरण होगा. साथ ही यह राष्ट्रीय राजधानी को उत्तर प्रदेश और बिहार के कई प्रमुख शहरों से जोड़ने वाला पहला व्यापक हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बन सकता है. इससे दिल्ली-उत्तर प्रदेश-बिहार बेल्ट में रहने वाले लाखों यात्रियों को तेज और सुविधाजनक परिवहन विकल्प मिलने की उम्मीद है. आगरा, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर और पटना जैसे धार्मिक और पर्यटन केंद्रों तक तेज कनेक्टिविटी से पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है. इसके अलावा कारोबार, निवेश और रीजनल इकोनोमिक एक्टिविटीज में भी तेजी आने की उम्मीद है। 

    180 किलोमीटर वाली सेमी हाई-स्‍पीड ट्रेन
    फिलहाल भारतीय रेलवे नेटवर्क में करीब 180 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम डिजाइन स्पीड वाली सेमी हाई स्पीड सर्विसेज ऑपरेट हो रही हैं. इसके मुकाबले मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना की डिजाइन स्पीड 350 किलोमीटर प्रति घंटे और परिचालन गति 320 किलोमीटर प्रति घंटे निर्धारित है. इस परियोजना के तहत मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा समय घटकर करीब 1 घंटे 58 मिनट होने की उम्मीद है. देश की पहली हाई स्पीड रेल सेवा अगस्त 2027 में शुरू होने की संभावना है और शुरुआती चरण में सूरत-वापी सेक्शन खोले जाने की योजना है। 

  • 25 साल पुराना सोन नदी जल विवाद खत्म, बिहार-झारखंड के 10 जिलों को मिलेगा लाभ

    25 साल पुराना सोन नदी जल विवाद खत्म, बिहार-झारखंड के 10 जिलों को मिलेगा लाभ

    पटना
     आखिरकार बिहार और झारखंड के बीच 25 सालों से चला आ रहा सोन नदी जल बंटवारा विवाद (Sone River Dispute) समाप्त हो गया। दोनों ही राज्यों के बीच दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने समझौता कराया।

    31 अगस्त को बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (Samrat Choudhary) और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Hemant Soren) ने सोन नदी बंटवारे को लेकर हुए करार पर हस्ताक्षर किए। इस विवाद के सुलझने से मुख्य रूप से बिहार और झारखंड के 10 जिलों को लाभ मिलेगा।

    चलिए समझते हैं कि आखिरसोन नदी जल विवाद क्या है और इससे किन-किन जिलों को लाभ मिलेगा?

    क्या है सोन नदी जल बंटवारा विवाद?
    सोन नदी जल बंटवारा विवाद मुख्य रूप से बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के पानी के अधिकार और उसके उपयोग को लेकर चला आ रहा अंतर-राज्यीय जल विवाद था।

    विवाद की मुख्य कड़ी: 1973 का बाणसागर समझौता
    दरअसल, सोन नदी के जल प्रबंधन के लिए 1973 में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और तत्कालीन अविभाजित बिहार के बीच 'बाणसागर समझौता' हुआ था।

    इस एग्रीमेंट के मुताबिक, बिहार को सोन नदी से 7.75 मिलियन एकड़-फीट (MAF) जल आवंटित किया गया था। यहां तक तो सब ठीक था, लेकिन फिर जब साल 2000 में झारखंड बिहार से अलग होकर नया राज्य बना तो इस विवाद ने फिर तूल पकड़ लिया।

    झारखंड का पक्ष:
    15 नवंबर, 2000 को बिहार से अलग होने वाले झारखंड का कहना था कि सोन नदी का उद्गम (जहां से नदी निकलती है), इसका जलग्रहण क्षेत्र (जिस इलाके का पानी नदी में आता है) और इसके बहाव का एक बड़ा हिस्सा गढ़वा और पलामू जैसे झारखंड के इलाकों में पड़ता है।

    इसी वजह से बिहार को मिले कुल 7.75 MAF पानी में से झारखंड को भी उसका जायज हिस्सा मिलना चाहिए।

    बिहार का पक्ष:
    दूसरी ओर, बिहार का कहना था कि 1973 का बाणसागर समझौता अंतिम है और दक्षिण बिहार के कृषि आधारित जिलों जैसे कि भोजपुर, बक्सर, रोहतास, औरंगाबाद और पटना की सिंचाई व्यवस्था सोन नदी पर पूरी तरह निर्भर है, इसलिए 7.75 MAF पानी पर बिहार का ही अधिकार है।

    इंद्रपुरी जलाशय प्रोजेक्ट पर पड़ा असर, योजना अटकी
    अब बिहार और झारखंड के बीच सालों चले इस विवाद के कारण रोहतास जिले में प्रस्तावित इंद्रपुरी जलाशय परियोजना पिछले कई दशकों से रुकी हुई थी।

    क्या है इंद्रपुरी जलाशय प्रोजेक्ट?
    इंद्रपुरी जलाशय परियोजना सोन नदी पर प्रस्तावित एक महत्वपूर्ण और जल संसाधन परियोजना है। यह परियोजना बिहार के रोहतास जिले और झारखंड के गढ़वा जिले की सीमा पर स्थित है।
    अब चूंकि बिहार और झारखंड के बीच विवाद खत्म हो गया है कि इंद्रपुरी जलाशय प्रोजेक्ट को भी अंतिम मंजूरी मिल गई है।

    सोन नदी जल आवंटन
    राज्य     आवंटित सोन जल
    बिहार     5.75 MAF
    झारखंड     2.00 MAF
    कुल     7.75 MAF

    किन-किन जिलों को मिलेगा लाभ?
    बिहार के 8 जिले: इस जलाशय से सोन नहर प्रणाली को निर्बाध पानी मिलेगा, जिससे दक्षिण बिहार के भोजपुर, बक्सर, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, अरवल, गया और पटना जिलों की लगभग 10 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई की गारंटी मिलेगी।

    झारखंड के 2 जिले: पलामू और गढ़वा जैसे गंभीर जल-संकट वाले जिलों को सिंचाई और पीने के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा।

    बिहार और झारखंड में कहां-कहां से गुजरती है सोन नदी?
    झारखंड की सीमा पार कर सोन नदी बिहार के मैदानों में प्रवेश करती है। यह बिहार के 6 मुख्य जिलों से होकर गुजरती है।

        रोहतास (डेहरी ऑन सोन, इंद्रपुरी बराज)
        औरंगाबाद (दाउदनगर)
        अरवल
        भोजपुर (आरा) (कोइलवर)
        पटना (मनेर के पास गंगा नदी में विलय)
        बक्सर (रोहतास व भोजपुर के पास का सीमावर्ती क्षेत्र)

    अंत में सोन नदी पटना जिले के मनेर (दानापुर के पास) में जाकर गंगा नदी में मिल जाती है।

    झारखंड में कहां-कहां से गुजरती है सोन नदी?
    झारखंड के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में सोन नदी राज्य में प्रवेश करती है और मुख्य रूप से गढ़वा तथा पलामू जिलों की सीमा बनाते हुए गुजरती है।

  • दिल्ली में प्याज की बढ़ती कीमतों पर सरकार का बड़ा फैसला, 35 रुपये किलो मिलेगा प्याज

    दिल्ली में प्याज की बढ़ती कीमतों पर सरकार का बड़ा फैसला, 35 रुपये किलो मिलेगा प्याज

    नई दिल्ली
    दिल्ली में पिछले कुछ दिनों से प्याज की बढ़ती कीमतों से लोग परेशान हैं। इसे देखते हुए दिल्ली सरकार ने उचित दर की दुकानों (सरकारी राशन दुकानों) और वैन के माध्यम से 35 रुपये प्रति किलो की दर से प्याज उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है।

    मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि उनकी सरकार राजधानी में प्याज का संकट पैदा नहीं होने देगी। सरकार का उद्देश्य दिल्लीवासियों को आवश्यक खाद्य वस्तुओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ उन्हें उचित और सस्ती दरों पर प्याज उपलब्ध कराना है। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि प्याज आम लोगों की पहुँच से बाहर न हो।

    दिल्ली के लिए 1000 टन प्याज आवंटित
    उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने दिल्ली के लिए 1000 टन प्याज आवंटित करने का निर्णय लिया है। इसे उचित दर की दुकानों के माध्यम से 35 रुपये प्रति किलो की दर से उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही दिल्ली के सभी 13 जिलों में एक-एक वैन के माध्यम से भी प्याज की बिक्री की जाएगी।

    प्रत्येक जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में वैन पहुँचने से लोगों को प्याज खरीदने में आसानी होगी। इससे राजधानी के विभिन्न इलाकों में प्याज की उपलब्धता बढ़ेगी और अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकेंगे।

  • सिवान में 39 हजार लोगों ने नहीं दिया जिंदा होने का ‘सबूत’, प्रशासन में मचा हड़कंप

    सिवान में 39 हजार लोगों ने नहीं दिया जिंदा होने का ‘सबूत’, प्रशासन में मचा हड़कंप

    सिवान.

    जिले के 39 हजार हजार पेंशनधारकों का जीवन प्रमाणीकरण अभी भी लंबित (पेंडिंग) है। इस कारण इन लाभुकों की पेंशन की राशि का भुगतान अटक गया है। सामाजिक सुरक्षा विभाग ने सभी लंबित पेंशनधारियों का जीवन प्रमाणीकरण कराने को निर्देशित किया है।

    उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जिले में कुल तीन लाख 57 हजार 147 लाभार्थियों में से तीन लाख आठ हजार 987 लाभार्थियों का बायोमेट्रिक सत्यापन पूरा हो चुका है। वहीं, अभी भी 39012 लाभार्थियों का बायोमेट्रिक सत्यापन लंबित है। इसके अलावा इसमें 3015 लाभार्थी ऐसे हैं, जिनका आधार अब तक मैप नहीं हुआ है। प्रखंडवार आंकड़ों पर नजर डालें तो बरहरिया में सबसे अधिक 32 हजार 838 लाभार्थी दर्ज हैं। इनमें 28 हजार 108 का बायोमेट्रिक सत्यापन हो चुका है, जबकि 4085 लाभार्थियों का सत्यापन अभी बाकी है।

    वहीं, सिवान सदर प्रखंड में कुल 27 हजार 247 लाभार्थियों में से 22 हजार 540 का सत्यापन हुआ है। यहां 4323 लाभार्थियों का बायोमेट्रिक सत्यापन लंबित है। इसी प्रकार भगवानपुर हाट में 26 हजार 717 में 23057 का सत्यापन पूर्ण व 2197 का सत्यापन नहीं हुआ है। गोरेयाकोठी में कुल 25 हजार 546 में से 22 हजार 367 का सत्यापन पूर्ण व 2432 का लंबित, दारौंदा में 23193 में से 19023 और महाराजगंज में 23075 में से 19362 लाभार्थियों का बायोमेट्रिक सत्यापन पूरा हुआ है। आंकड़ों के अनुसार, आंदर में 13481 में से 12259, बसंतपुर में 12509 में से 10829, दरौली में 17586 में से 15747, गुठनी में 13156 में 12032 और हसनपुरा में 16154 में से 14625 लाभार्थियों का सत्यापन पूर्ण किया है।

    सामाजिक सुरक्षा के सहायक निदेशक मो. मिनहाजुद्दीन ने कहा कि सरकार ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि को 400 रूपये से बढ़ाकर 1100 रूपये प्रतिमाह कर दिया है। यह राशि सीधे लाभुकों के बैंक खाते में ऑनलाइन भेजी जा रही है, लेकिन जीवन प्रमाणीकरण नहीं कराने वाले लाभुकों को पेंशन की राशि का भुगतान नहीं किया जा रहा है। जिला प्रशासन ने सभी पेंशनधारकों से यह अपील की है कि वे जल्द से जल्द जीवन प्रमाणीकरण सत्यापन कार्य पूर्ण करा लें।

  • पटना में डेंगू का बढ़ता कहर, अगस्त में 97 मरीज मिले, कई इलाके हॉटस्पॉट

    पटना में डेंगू का बढ़ता कहर, अगस्त में 97 मरीज मिले, कई इलाके हॉटस्पॉट

    पटना 
    पटना में डेंगू के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। दस दिनों में 40 तो पांच दिनों में 18 मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। 31 अगस्त तक पटना में इस साल डेंगू के कुल 167 मरीज मिल चुके हैं। अगस्त में 97 मरीज मिले हैं। जनवरी से जून तक डेंगू के 44 मरीज मिले थे। जुलाई में 26 नए मामले सामने आए थे। अगस्त में संक्रमण की रफ्तार तेज हो गई है। अगस्त में मिले मरीजों की संख्या जुलाई के मुकाबले कई गुना है। सात अगस्त तक जिले में कुल मामलों की संख्या 89 पहुंच चुकी थी।

    पटना के सिविल सर्जन डॉ. योगेन्द्र प्रसाद मंडल ने बताया कि इस वर्ष अबतक 167 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें सरकारी अस्पतालों और लैब के साथ-साथ निजी अस्पतालों एवं पैथोलॉजी लैब में जांच के दौरान भी मरीजों की पहचान हुई है। उन्होंने बताया कि नगर निगम के सहयोग से प्रभावित इलाकों में फॉगिंग और एंटी-लार्वा अभियान चलाया जा रहा है। डेंगू मरीज मिलने पर उसके आसपास के क्षेत्रों में मच्छरों के प्रजनन स्रोतों की जांच और लार्वीसाइडल छिड़काव की कार्रवाई भी की जानी है।

    ये अंचल और मोहल्ले हॉटस्पॉट
    बांकीपुर और पाटलिपुत्र अंचल में डेंगू के मरीज अधिक पाए गये हैं। इसमें कंकड़बाग, हनुमान नगर, पत्रकार नगर, अशोक नगर, पाटलिपुत्र, पोस्टल पार्क, अजीमाबाद, योगीपुर, जक्कनपुर जैसे घनी आबादी वाले इलाके शामिल है। इन इलाकों में संक्रमण बढ़ने के प्रमुख कारण बारिश के बाद जलजमाव, खाली प्लॉटों और निर्माण स्थलों पर जमा पानी, नालियों की समस्या तथा घरों के आसपास छोटे-छोटे जलस्रोत माने जा रहे हैं।

    रुकनपुरा में आज कटी रहेगी बिजली
    रुकनपुरा में सड़क किनारे दो विशाल पेड़ काटे जाएंगे। इसे देखते हुए काटेगा। इसे देखते हुए मंगलवार की रात 11 बजे से 1 बजे तक रुकनपुरा क्षेत्र, बीकानेर स्वीट्स और मुशहरी के आसपास बिजली आपूर्ति बंद रहेगी। सुबह 11 बजे से दोपहर 12 बजे तक लोटस अपार्टमेंट, पाटलिपुत्र, इमारत अपार्टमेंट, विकास विहार की बिजली आपूर्ति बाधित रहेगी।

    सुबह 7 बजे से 9 बजे तक ईस्ट बोरिंग कैनाल रोड, सुर सुधा लेन और रामसूचित मिश्रा पथ की आपूर्ति प्रभावित रहेगी। सुबह 11 बजे से दोपहर दो बजे तक आईओबी नगर, सर्वोयोनि सिटी, सरारी, शिवाला, भगवतीपुर में बिजली बाधित रहेगी।

  • पंजाब के स्कूलों में वीरवार को छुट्टी का ऐलान, 3 जिलों के स्कूल रहेंगे बंद

    पंजाब के स्कूलों में वीरवार को छुट्टी का ऐलान, 3 जिलों के स्कूल रहेंगे बंद

    बठिंडा.

    पंजाब में वीरवार को स्कूलों में छुट्टी की खबर सामने आई है। 3 जिलों बठिंडा, मानसा और बरनाला के सभी प्राइवेट स्कूल 3 सितंबर को बंद रहेंगे। दरअसल, पंजाब भर के प्राइवेट स्कूल और कॉलेज के बस ऑपरेटरों ने 3 सितंबर को बठिंडा में राज्य स्तरीय महापंचायत करने का ऐलान किया है। इसमें सभी जिलों के प्राइवेट स्कूल बस ड्राइवर, कंडक्टर और बस मालिक हिस्सा लेंगे।

    इसलिए, इस फैसले से स्कूलों की ट्रांसपोर्ट सर्विस पर काफी असर पड़ सकता है, जिसके चलते निजी स्कूल बंद रखे जाएंगे। ये फैसला फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स एंड एसोसिएशन ऑफ पंजाब (FAP) द्वारा स्कूल बस औ र वैन आप्रेटरों की महापंचायत को लेकर  लिया है। इस संबंधी जानकारी देते हुए फेडरेशन अध्यक्ष जगीत सिंह धूर ने बताया कि, स्कूल बसों और वैनों के लिए प्रशासन द्वारा लागू किए गए नियमों के खिलाफ बस आप्रटेरों द्वारा 3 सितंबर को बठिंडा से राज्य स्तरीय महापंचायत की जा रही है।

    इस बारे में जानकारी देते हुए पंजाब स्कूल और कॉलेज प्राइवेट बस ट्रांसपोर्ट यूनियन के प्रेसिडेंट गुरप्रीत सिंह सरां ने कहा कि उन्होंने अपनी मांगों को लेकर 3 सितंबर को बठिंडा की अनाज मंडी में महापंचायत रैली रखी है, जिसमें पूरे पंजाब के सभी ड्राइवर, कंडक्टर और बस मालिक हिस्सा लेंगे। उन्होंने कहा कि सरकारों ने लंबे समय से मांगों को नजरअंदाज किया है। कोई ट्रांसपोर्ट अधिकारी या कोई मंत्री हमें समय नहीं दे रहा है, जबकि लाखों परिवार हमसे जुड़े हैं, क्योंकि हम उन बच्चों को स्कूलों तक पहुंचाते हैं जिनके माता-पिता हम पर भरोसा करते हैं। हजारों ड्राइवर और कंडक्टर हमसे जुड़े हैं और हमें ही सरकारों ने दरकिनार कर दिया है। उन्होंने कहा कि जो ट्रांसपोर्ट पॉलिसी बड़ी बसों के लिए है, वही पॉलिसी हमारे लिए (छोटी बसों के लिए) है।

    लेकिन हमारी बसें 50 km चलती हैं और दूसरी बसें 500-500 km चलती हैं। हमारे लिए अलग पॉलिसी बनाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ट्रांसपोर्ट पॉलिसी बदलने, सड़कों पर RTO को परेशान करने, भारी टैक्स कम करने, उम्र 15 साल से बढ़ाकर 25 साल करने, टैक्स में छूट देने जैसी हमारी मांगें नहीं मानती है, तो आने वाले दिनों में यह संघर्ष जिला लेवल से शुरू होगा। उन्होंने कहा कि हम सरकार से रिक्वेस्ट करते हैं कि हमसे बात करके हमारी मांगें पूरी करें।

  • झारखंड में भारी बारिश से बिगड़े हालात, सोन नदी का जलस्तर बढ़ा, प्रशासन अलर्ट

    झारखंड में भारी बारिश से बिगड़े हालात, सोन नदी का जलस्तर बढ़ा, प्रशासन अलर्ट

    रांची 
    झारखंड में मानसून की सक्रियता के बीच सोमवार सुबह से राजधानी रांची में रुक-रुक कर हो रही बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। राज्य के कई हिस्सों में लगातार बारिश के कारण नदियों और जलाशयों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। कहीं घरों में पानी घुस गया है तो कहीं पुल-पुलियों के ऊपर से पानी का तेज बहाव देखने को मिल रहा है। प्रशासन ने नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

    लगातार बारिश से जलजमाव
    मेदिनीनगर समेत पूरे पलामू में सोमवार से रिमझिम बारिश जारी है। कई सड़कों पर जलजमाव से आम लोगों की परेशानी बढ़ी है।

    ग्रामीण सड़कों पर बढ़ा दबाव
    कई प्रखंडों में ग्रामीण सड़क और पुलिया पर पानी का दबाव बढ़ गया है। आवागमन प्रभावित होने की आशंका है।

    सोन नदी का जलस्तर अचानक बढ़ा
    अपस्ट्रीम के बराज और जलाशयों से करीब 2 लाख क्यूसेक अतिरिक्त पानी सोन नदी में पहुंचने के बाद नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है।

    हुसैनाबाद में प्रशासन का अलर्ट
    नदी किनारे रहने वाले ग्रामीणों, किसानों और पशुपालकों को प्रशासन और जल संसाधन विभाग ने सतर्क रहने की सलाह दी है।

    कई गांवों में कटाव जारी
    सोनपुरवा, देवरी खुर्द, देवरी कला, बुधुआ, बड़ेपुर और दंगवार समेत कई गांवों में सोन नदी के किनारे कटाव जारी है।

    तटबंध निर्माण की मांग
    कटाव से परेशान ग्रामीण लंबे समय से तटबंध निर्माण की मांग कर रहे हैं। ठोस पहल नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी है।

    नदी के बीच खेती करने वालों को सलाह
    सोन नदी के बालू के टीलों पर किसान परवल, खीरा समेत मौसमी सब्जियों की खेती करते हैं। कुछ लोग मवेशी भी रखते हैं।

    सुरक्षित स्थानों पर लौटने की अपील
    जलस्तर बढ़ने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने नदी के बीच और किनारे रहने वाले लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर लौटने की सलाह दी है।

    मलय डैम पर भी बढ़ा पानी
    सतबरवा में मलय डैम का स्पीलवे मंगलवार सुबह ओवरफ्लो के करीब पहुंच गया।

    कोयल नदी में बाढ़ की स्थिति
    लगातार बारिश के कारण कोयल नदी में भी बाढ़ जैसी स्थिति बनी हुई है। नदी किनारे रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है।

  • राजस्थान में ‘बॉस स्कैम’ का खतरा बढ़ा, पुलिस ने कंपनियों के कर्मचारियों को किया अलर्ट

    राजस्थान में ‘बॉस स्कैम’ का खतरा बढ़ा, पुलिस ने कंपनियों के कर्मचारियों को किया अलर्ट

    जयपुर 
    राजस्थान में साइबर अपराधियों ने ठगी का एक खतरनाक और नया तरीका ढूंढ निकाला है, जिसे साइबर सुरक्षा की भाषा में 'बॉस स्कैम' (Boss Scam) कहा जा रहा है। राजस्थान के पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कुमार शर्मा के कड़े निर्देशों के बाद राज्य की साइबर क्राइम शाखा ने प्रदेश भर के प्राइवेट कंपनियों, कॉर्पोरेट दफ्तरों में काम करने वाले मैनेजर्स, अकाउंटेंट्स और अन्य कर्मचारियों के लिए एक विशेष एडवाइजरी जारी की है। साइबर अपराधी सोशल इंजीनियरिंग तकनीक का इस्तेमाल कर कंपनी के वास्तविक मालिक, एमडी या सीनियर अफसर का रूप धारण कर व्हाट्सएप, ईमेल या एसएमएस के जरिए कर्मचारियों से संपर्क साधते हैं और अर्जेंट वित्तीय लेन-देन या गोपनीय डेटा साझा करने का दबाव बनाकर लाखों रुपये की चपत लगा रहे हैं।

    राजस्थान के कॉर्पोरेट और बिजनेस सेक्टर में तेजी से पैर पसार रहे इस नए साइबर फ्रॉड को लेकर पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद हो गया है और लोगों से सतर्क रहने की अपील कर रहा है।

    फर्जी आईडी- असली नाम, ऐसे बनाते हैं शिकार
    अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (ADG) साइबर क्राइम वी.के. सिंह ने बताया कि यह गिरोह बहुत ही योजनाबद्ध तरीके से काम करता है। ठग सबसे पहले किसी लक्षित कंपनी, उसके वरिष्ठ अधिकारियों के सोशल मीडिया प्रोफाइल, उनके आधिकारिक ईमेल पैटर्न और जारी प्रोजेक्ट्स के बारे में पूरी रिसर्च करते हैं।

    इसके बाद कर्मचारी के मोबाइल या ईमेल पर कंपनी के बॉस का नाम और फोटो लगाकर मैसेज भेजा जाता है। मैसेज में लिखा होता है कि बॉस एक बेहद जरूरी गुप्त मीटिंग में व्यस्त हैं, इसलिए तुरंत किसी नए बैंक खाते में रकम ट्रांसफर की जाए या अर्जेंट गिफ्ट कार्ड खरीदे जाएं। कर्मचारी अपने बॉस का नाम, पद और असली प्रोजेक्ट का जिक्र देखकर झांसे में आ जाता है और बिना वेरिफिकेशन किए पैसे भेज देता है।

    वेब हाईजैक और ट्रोजन हॉर्स मालवेयर का इस्तेमाल
    एडीजी वी.के. सिंह ने साइबर ठगों की हाईटेक कार्यप्रणाली का खुलासा करते हुए बताया कि अपराधी दफ्तरों के कंप्यूटर और लैपटॉप में ट्रोजन हॉर्स मालवेयर भेजकर सिस्टम का एक्सेस हासिल करने की कोशिश करते हैं।

    यदि सिस्टम में व्हाट्सएप वेब लॉग-इन है, तो अपराधी क्यूआर कोड हाईजैक करके सीधे कर्मचारी के व्हाट्सएप तक पहुंच बना लेते हैं। इसके बाद नकली बॉस की डीपी लगाकर अर्जेंट पेमेंट का मैसेज भेजा जाता है। इस ठगी की रकम को फर्जी म्यूल अकाउंट्स, क्रिप्टोकरेंसी या तुरंत कैश निकालकर एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर कर दिया जाता है।

    'बॉस स्कैम' को पहचानने के 7 मुख्य संकेत
    राजस्थान पुलिस की साइबर शाखा ने आमजन और कर्मचारियों को सतर्क रहने के लिए कुछ बेहद महत्वपूर्ण लक्षण साझा किए हैं:

    ईमेल एड्रेस के स्पेलिंग या डोमेन नेम में अचानक या मामूली बदलाव होना।

    दफ्तर का समय समाप्त होने के बाद देर रात या असामान्य समय पर अचानक संदेश आना।

    बिना किसी पूर्व सूचना के अत्यधिक अर्जेंट या गोपनीय वित्तीय ट्रांसफर करने का दबाव।

    किसी अनजान या नए बैंक खाते में तुरंत धनराशि भेजने का निर्देश मिलना।

    सामने वाले व्यक्ति द्वारा फोन या वीडियो कॉल पर बात करने से बार-बार बचना।

    मैसेज या ईमेल की भाषा और व्याकरण में अजीब गलतियां होना।

    व्हाट्सएप, एसएमएस या पर्सनल ईमेल पर असामान्य वित्तीय निर्देश मिलना।

    क्या करें और क्या न करें?
    पुलिस ने स्पष्ट किया है कि केवल व्हाट्सएप मैसेज या ईमेल देखकर किसी भी अनजान खाते में भुगतान न करें। जब भी कंपनी के बॉस या वरिष्ठ अधिकारी के नाम से ऐसा कोई मैसेज आए, तो तुरंत उनके व्यक्तिगत या आधिकारिक फोन नंबर पर सीधे कॉल करके पुष्टि करें।

    कंपनियों को अपने सिस्टम में सुरक्षा के कड़े नियम लागू करने चाहिए:

    बड़े भुगतान या असामान्य वित्तीय लेन-देन के लिए मल्टीलेवल अप्रूवल (Multilevel Approval) सिस्टम लागू करें।

    व्हाट्सएप वेब और लिंक्ड डिवाइसेज (Linked Devices) को काम खत्म होते ही तुरंत लॉगआउट करें।

    व्हाट्सएप में टू-फैक्टर वेरिफिकेशन (Two-Factor Verification) हमेशा एक्टिव रखें।

    सिस्टम में एंटीवायरस और सुरक्षा सॉफ्टवेयर नियमित रूप से अपडेट रखें।

    साइबर फ्रॉड होते ही तुरंत 1930 पर करें शिकायत
    राजस्थान पुलिस ने अपील की है कि यदि कोई भी व्यक्ति या कर्मचारी इस प्रकार की ठगी का शिकार हो जाता है, तो बिना समय गंवाए तुरंत कार्रवाई करें:

    वित्तीय साइबर धोखाधड़ी होने पर तुरंत राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें।

    राजस्थान पुलिस साइबर हेल्पडेस्क के नंबरों 9256001930 और 9257510100 पर तुरंत सूचित करें।

    आधिकारिक शिकायत के लिए National Cyber Crime Reporting Portal पर विजिट करें।

    राजस्थान पुलिस के आधिकारिक अपडेट्स के लिए Rajasthan Police Portal का अवलोकन करें।

  • हरियाणा को मिलेगा 177 KM लंबा हाईवे, सफर होगा आसान; नहीं लगेगा टोल टैक्स

    हरियाणा को मिलेगा 177 KM लंबा हाईवे, सफर होगा आसान; नहीं लगेगा टोल टैक्स

    अंबाला.

    साल 2027 में हरियाणा के लोगों को एक नई सौगात मिलेगी। अंबाला से शामली तक छह लाइन का हाइवे बनाया जा रहा है। इसका काम तकरीबन 70 फीसदी पूरा भी हो चुका है। इस राजमार्ग से बन जाने से पश्चिमी यूपी का सफर आसान हो जाएगा। वहीं, इस रूट का फायदा हरियाणावासियों को भी खूब मिलेगा। हरियाणा से वेस्ट यूपी तक बन रहा यह हाइवे मार्च, 2027 तक पूरा हो जाएगा।

    4900 करोड़ की लागत से हो रहा निर्माण
    हरियाणा के अंबाला से लेकर उत्तर प्रदेश के बीच बन रहा 122 किलोमीटर लंबा यह हाइवे की लागत 4800 करोड़ रुपये है। जिसके पूरा होने का लक्ष्य मार्च, 2027 रखा है। इस हाइवे को भारतमाला परियोजना के तहत किया जा रहा है। यह साल 2024 में शुरू हुआ था।

    हरियाणा के किन जिलों को फायदा?
    करनाल
    पानीपत
    कुरुक्षेत्र
    यमुनानगर
    अंबाला
    कैथल
    जींद
    रोहतक

    कहां से लेकर कहां तक बना रहा यह हाईवे?
    इस हाइवे का निर्माण अंबाला से शामली के बीच हो रहा है। इस बीच यह छह जिलों से होकर गुजरेगा। हरियाणा के अंबाला के अंतर्गत सोदापुर गांव से इसकी शुरुआत होगी। इसके बाद कुरुक्षेत्र, करनाल और यमुनानगर से होते हुए यह यूपी के सहारनपुर से होकर शामली को जोड़ेगा। खास बात है कि इस पूरे हाइवे पर कोई टोल प्लाजा नहीं होगा। 

    हाइवे से जुड़ी खास बातें…
    हाइवे पर कई स्थानों पर दिल्ली-देहरादून इकोनामिक काॉरिडोर की तर्ज पर रेस्ट एरिया बनाया जाएगा।
    पेट्रोल, सीएनजी पंप, रेस्टोरेंट और शौचालय आदि की सुविधा सुलभ कराई जाएगी।  NHAI बागपत डिवीजन द्वारा शामली से सहारनपुर तक 45 किमी हाइवे का निर्माण कराया जा रहा है। इस हाइवे का 77 किमी का दरमियां अंबाला डिवीजन के अंतर्गत आता है। हाइवे का लगभग 70 फीसदी काम पूरा हो चुका है। मार्च-2027 तक निर्माण कार्य पूरा करा लिया जाएगा।

  • पंजाब के किसानों ने नेशनल हाईवे पर लगाया जाम, पांच राज्यों के वाहन चालक परेशान

    पंजाब के किसानों ने नेशनल हाईवे पर लगाया जाम, पांच राज्यों के वाहन चालक परेशान

    मोहाली.

    खेती की मोटरों के लिए पर्याप्त बिजली न मिलने से नाराज पंजाब के किसानों ने मंगलवार को लालडू में अंबाला-चंडीगढ़ हाईवे पर जाम लगाया। इससे पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ समेत हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के वाहन चालकों को परेशानी हुई।

    किसानों ने भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां के नेतृत्व में पावरकाम के एक्सईएन कार्यालय लालड़ू के बाहर धरना दिया। प्रदर्शन की अगुआई संगठन के जिला प्रधान लखविंदर सिंह हैप्पी मलकपुर ने की। किसानों ने पंजाब सरकार और पावरकाॅम के खिलाफ नारेबाजी करते हुए निर्बाध बिजली आपूर्ति की मांग उठाई। आरोप था कि खेती की मोटरों को जरूरत के मुताबिक बिजली नहीं मिलने के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    धरने के दौरान एक्सईएन की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर किसानों का रोष बढ़ गया और उन्होंने अंबाला-चंडीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम लगा दिया। इससे मुख्य मार्ग पर यातायात प्रभावित हुआ। करीब एक घंटे तक चले जाम के बाद पुलिस प्रशासन और पावरकाम अधिकारियों ने किसान नेताओं के साथ बैठक की। बातचीत के दौरान पावरकाॅम अधिकारियों ने किसानों को लिखित आश्वासन दिया कि आगे से खेती की मोटरों के लिए 20 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। लिखित आश्वासन मिलने के बाद किसानों ने राष्ट्रीय राजमार्ग से जाम हटा लिया और धरना समाप्त करने की घोषणा कर दी।