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  • दिल्ली में जाम से राहत के लिए बनेंगे दो नए फ्लाईओवर

    दिल्ली में जाम से राहत के लिए बनेंगे दो नए फ्लाईओवर

     नई दिल्ली
    दिल्ली सरकार ने राजधानी में ट्रैफिक जाम कम करने के लिए उत्तर-पूर्वी और पश्चिमी दिल्ली में दो नए फ्लाईओवर बनाने की योजना तैयार की है।

    इन परियोजनाओं की व्यवहार्यता (फिजिबिलिटी) जांच जल्द कराई जाएगी। इसके लिए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने निजी सलाहकार नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

    करावल नगर और शकूर बस्ती मार्ग पर परियोजनाएं
    करीब पांच किलोमीटर लंबे पहले फ्लाईओवर का प्रस्ताव करावल नगर ड्रेन के ऊपर अंकुर एन्क्लेव से गोकलपुरी मेट्रो स्टेशन तक है। वहीं दूसरा करीब पांच किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर गुरु हरकिशन रोड पर ब्रिटानिया चौक से शकूर बस्ती रेलवे स्टेशन होते हुए आउटर रिंग रोड तक प्रस्तावित है।

    आसपास के ढांचों और सुविधाओं का होगा सर्वे
    पीडब्ल्यूडी व्यवहार्यता अध्ययन के दौरान आसपास की इमारतों, अतिक्रमण, पेड़ों, सड़क संकेतकों और अन्य स्थायी ढांचों का सर्वे करेगा। साथ ही बिजली, पानी, गैस पाइपलाइन समेत अन्य सेवा लाइनों का भी आकलन किया जाएगा।

    पार्किंग और रेलवे फाटकों का भी होगा आकलन
    अध्ययन में इन मार्गों पर उपलब्ध पार्किंग व्यवस्था और रेलवे फाटकों के खुलने-बंद होने के समय का भी विश्लेषण किया जाएगा। व्यवहार्यता रिपोर्ट के आधार पर परियोजना का विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर मंजूरी के लिए संबंधित प्राधिकरण को भेजा जाएगा।

    पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के अनुसार, अध्ययन कराने के लिए लगभग तीन करोड़ रुपये की लागत से निजी सलाहकार नियुक्त करने का टेंडर जारी किया गया है।

    लेआउट और ट्रैफिक लोड का तैयार होगा विस्तृत खाका
    सलाहकार अंडरपास और ओवरब्रिज का लेआउट तैयार करेगा। इसमें मुख्य सड़क, फुटपाथ, सर्विस रोड, गैर-मोटर चालित वाहनों के लिए लेन, सेंट्रल वर्ज और बस स्टॉप जैसी सुविधाओं का भी विवरण शामिल होगा।

    अध्ययन के दौरान इन मार्गों पर कुल वाहनों की संख्या और पीक आवर के ट्रैफिक लोड का भी आकलन किया जाएगा। इसके अलावा परियोजनाओं का वित्तीय, पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभाव देखते हुए लागत-लाभ विश्लेषण भी तैयार किया जाएगा।

  • हरियाणा में जर्जर स्कूल भवनों पर बड़ा फैसला, जिला समिति लेगी निर्णय

    हरियाणा में जर्जर स्कूल भवनों पर बड़ा फैसला, जिला समिति लेगी निर्णय

    चरखी दादरी
     सरकारी स्कूलों के जर्जर और असुरक्षित भवनों के मामलों में निर्णय प्रक्रिया को तेज करने के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है।

    स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश के तहत वर्ष 2011 के पुराने निर्देशों में संशोधन करते हुए जिला स्तरीय समिति का पुनर्गठन कर दिया है। अब यह समिति स्कूल भवनों की सुरक्षा का आकलन करेगी, कमरों को उपयोग के लिए कंडम घोषित करेगी तथा उनसे प्राप्त होने वाली सामग्री की नीलामी भी स्वयं कर सकेगी। इसके लिए माध्यमिक शिक्षा एवं प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय से अलग से मंजूरी लेने की आवश्यकता नहीं होगी।

    स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव द्वारा जारी आदेश के अनुसार नई व्यवस्था का उद्देश्य जर्जर भवनों को हटाने की प्रक्रिया में होने वाली देरी को समाप्त करना और विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। लंबे समय से कई स्कूलों में पुराने और खस्ताहाल कमरे होने के बावजूद प्रशासनिक स्वीकृति में देरी के कारण कार्यवाही नहीं हो पा रही थी। अब जिला स्तर पर ही निर्णय होने से प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज होगी।

    आदेश के अनुसार जिला स्तरीय समिति की अध्यक्षता अतिरिक्त उपायुक्त करेंगे। समिति में सदस्य के रूप में एसएसए ,पीडब्ल्यूडी, जनस्वास्थ्य या हरियाणा सरकार के किसी भी सिविल विभाग के कार्यकारी अभियंता, संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी अथवा जिला प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी तथा संबंधित विद्यालय के मुखिया को शामिल किया गया है

    यह समिति स्कूल भवनों का तकनीकी और सुरक्षा के दृष्टिकोण से निरीक्षण करेगी। यदि कोई कमरा या भवन विद्यार्थियों एवं स्टाफ के लिए असुरक्षित पाया जाता है तो समिति उसे कंडम घोषित करने का निर्णय ले सकेगी। इसके साथ ही भवन से निकलने वाली सामग्री की नीलामी की दरें तय करने और नीलामी प्रक्रिया पूरी कराने का अधिकार भी समिति को दिया गया है।

    स्वीकृति के लिए नहीं लेकिन सूचना के लिए भेजना होगा
    सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों को अब माध्यमिक शिक्षा निदेशालय या प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय को स्वीकृति के लिए नहीं भेजा जाएगा

    हालांकि जिला समिति को यह सुनिश्चित करना होगा कि जिन कमरों को कंडम घोषित किया गया है और जिनके स्थान पर नए कमरों के निर्माण के लिए धनराशि की आवश्यकता होगी, उसकी सूचना समय रहते संबंधित निदेशालय को भेजी जाए ताकि नए निर्माण के लिए बजट आवंटन की प्रक्रिया प्रभावित न हो।

    विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इस निर्णय से स्कूलों में जर्जर भवनों को हटाने और नए कमरों के निर्माण का रास्ता आसान होगा। साथ ही विद्यार्थियों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में त्वरित निर्णय लिए जा सकेंगे।

    विभाग ने आदेश की प्रतियां सभी उपायुक्तों, अतिरिक्त उपायुक्तों, जिला शिक्षा अधिकारियों, जिला प्रारंभिक शिक्षा अधिकारियों, संबंधित विभागों के इंजीनियरों और शिक्षा परियोजना परिषद को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दी हैं।

    एडीसी होंगे समिति के अध्यक्ष
    जिला शिक्षा अधिकारी धर्मेंद्र चौधरी ने कहा कि भवनों को कंडम घोषित करने का निर्णय पीडब्ल्यूडी विभाग लेता है। संबंधित सूचना उन्हें निदेशालय भेजनी होगी लेकिन जिला स्तरीय समिति के सर्वेसर्वा एडीसी होंगे।

     

  • झारखंड में नए सरकारी कर्मियों को नियुक्ति से पहले लेनी होगी शपथ

    झारखंड में नए सरकारी कर्मियों को नियुक्ति से पहले लेनी होगी शपथ

    रांची
    झारखंड सरकार के अधीन नियुक्त होनेवाले सभी नये सरकारी सेवकों के लिए नया नियम बनाया गया है. उनको कार्यभार ग्रहण करने से पहले निष्ठा और गोपनीयता की शपथ लेना अनिवार्य होगा. उन्हें दहेज प्रथा का विरोध करने, नशाखोरी से दूर रहने और सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन में सक्रिय भूमिका निभाने का भी संकल्प लेना होगा. इस संबंध में कार्मिक विभाग ने संकल्प जारी कर नयी व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी है. संकल्प के अनुसार सभी नव नियुक्त कर्मी पहले सामूहिक नियुक्ति पत्र वितरण समारोह में शपथ लेंगे. इसके बाद संबंधित कार्यालय में योगदान के समय अपने नियंत्री पदाधिकारी के समक्ष शपथ पत्र का वाचन करेंगे, उस पर हस्ताक्षर करेंगे और विभाग में जमा करेंगे. अब तक राज्य में नियुक्ति के समय ऐसी औपचारिक शपथ लेने का कोई प्रावधान नहीं था.

    संविधान के प्रति निष्ठा और निष्पक्ष सेवा का लेना होगा संकल्प
    शपथ पत्र में सरकारी सेवकों को भारत के संविधान के प्रति पूर्ण निष्ठा एवं श्रद्धा रखने, न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करने तथा बिना किसी पक्षपात, अनुराग या द्वेष के लोकहित को सर्वोपरि मानकर कार्य करने का संकल्प लेना होगा. इसके अलावा सरकारी कार्यों से जुड़ी गोपनीय सूचनाओं को सुरक्षित रखने और सेवा के दौरान ईमानदारी एवं निष्पक्षता बनाये रखने की भी शपथ दिलायी जायेगी.

    राज्यपाल के आदेश पर जारी हुआ संकल्प
    संकल्प का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष सामाजिक दायित्वों से जुड़ा है. नये सरकारी सेवकों को दहेज प्रथा का विरोध करने, बाल विवाह रोकने, नशाखोरी से दूर रहने, जातीय भेदभाव, लैंगिक असमानता और अस्पृश्यता जैसी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ सक्रिय रूप से काम करने का भी संकल्प लेना होगा. सरकार का मानना है कि इससे सरकारी कर्मियों में संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता बढ़ेगी और समाज में सकारात्मक संदेश जायेगा. कार्मिक सचिव प्रवीण कुमार टोप्पो के हस्ताक्षर से राज्यपाल के आदेश पर जारी इस संकल्प को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है. सरकार का कहना है कि इस पहल से सुशासन, प्रशासनिक अनुशासन और लोकसेवा की गुणवत्ता को और मजबूती मिलेगी.

  • कारगिल विजय में पश्चिमी राजस्थान के स्टेशनों ने निभाई रणनीतिक भूमिका

    कारगिल विजय में पश्चिमी राजस्थान के स्टेशनों ने निभाई रणनीतिक भूमिका

     जयपुर
    कारगिल युद्ध के दौरान देश की नजरें बर्फ से ढकी चोटियों पर डटी भारतीय सेना पर थीं, लेकिन हजारों किलोमीटर दूर पश्चिमी राजस्थान की रेल पटरियां भी जीत की अहम कड़ी बनी हुई थीं। कारण था कि राजस्थान के सीमावर्ती रेलवे स्टेशन भारतीय सेना की लॉजिस्टिक लाइफलाइन बन गए थे। यहां से गुजरने वाली हर सैन्य ट्रेन सिर्फ डिब्बों का काफिला नहीं थी। बल्कि जवानों, टैंकों, तोपों, गोला-बारूद, ईंधन और देश की उम्मीदों को मोर्चे तक पहुंचाने का जरिया थी।

    दरअसल, साल 1999 में भारत-पाकिस्तान के बीच कारगिल युद्ध शुरू होते ही रेलवे ने अपने परिचालन को युद्धकालीन जरूरतों के अनुरूप ढाल दिया। जोधपुर, बीकानेर, बाड़मेर और जैसलमेर स्थित सैन्य ठिकानों से लगातार विशेष सैन्य ट्रेनें जम्मू और पठानकोट की ओर रवाना होती रहीं। रेलवे यार्डों में सामान्य माल की जगह टैंक, तोपें, सैन्य वाहन और गोला-बारूद से भरी सैन्य रेक नजर आने लगीं। स्टेशन मास्टर, लोको पायलट, गार्ड, कंट्रोलर और ट्रैकमैन सहित हर रेलकर्मी उस दौर में युद्ध का मौन सिपाही बन गया था।

    इधर, युद्ध में 17 रेलकर्मियों ने दी थी शहादत
    साल 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान गडरारोड के पास सेना की रसद लेकर जा रही ट्रेन पर पाकिस्तानी सेना ने हमला कर दिया था। युद्ध में रेलवे के 17 रेल कर्मचारियों ने देश सेवा में अपने प्राणों का बलिदान दिया।

    ये स्टेशन बने थे केंद्र: रेलवे ट्रैक से बंधी थी उम्मीदें
    रेलवे स्टेशन     अंतरराष्ट्रीय सीमा से दूरी
    मुनाबाव            लगभग 2 किमी
    गडरा रोड           लगभग 8 किमी
    श्रीगंगानग र      लगभग 25 किमी
    अनूपगढ़            लगभग 30 किमी
    बाड़मेर              लगभग 100 किमी
    जैसलमेर           लगभग 110 किमी

    हाई अलर्ट पर था पूरा रेल नेटवर्क
    पश्चिमी सीमा पर बढ़े तनाव के बीच राजस्थान का रेल नेटवर्क भी हाई अलर्ट पर रहा। संवेदनशील रेल पुलों, यार्डों और स्टेशनों की सुरक्षा बढ़ाई गई। जोधपुर-जैसलमेर, जोधपुर-बाड़मेर-मुनाबाव और बीकानेर-सूरतगढ़-अनूपगढ़ जैसे रणनीतिक रेल मार्गों पर सेना की जरूरतों के अनुरूप निर्बाध परिचालन जारी रखा गया। सैन्य ट्रैफिक की लगातार निगरानी की गई।
    -अमित सुदर्शन, सीपीआरओ, उत्तर पश्चिम रेलवे

  • बिहार में उग्र प्रदर्शन, उपद्रवियों की पहचान बताने पर मिलेगा दस हजार इनाम

    बिहार में उग्र प्रदर्शन, उपद्रवियों की पहचान बताने पर मिलेगा दस हजार इनाम

    पटना
    नीट पेपर लीक और दिल्ली व पटना में प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज के खिलाफ बिहार के कई जिलों में उग्र प्रदर्शन किया गया। मुजफ्फरपुर, बेगूसराय, दरभंगा, कटिहार, जहानाबाद जैसे जिलों से हिंसा, तोड़फोड़, पुलिस पर हमला और सरकारी संपत्ति को नुकसान की घटनाएं गुरुवार को आम रहीं। उपद्रवी तत्वों पर नकेल कसने के लिए बिहार पुलिस ने तैयारी कर ली है। उनकी तस्वीरें जारी करते हुए पुलिस ने इनाम देने की भी घोषणा की है। मुजफ्फरपुर एसएसपी कांतेश मिश्रा के आदेश पर उपद्रवियों की पहचान बताने वाले को 10 हजार का इनाम दिया जाएगा। उनकी पहचान गुप्त रखी जाएगी।

    गुरुवार की शाम को मुजफ्फरपुर समाहरणालय परिसर एवं अन्य स्थानों पर प्रदर्शन किया गया। शहर के विभिन्न सड़कों पर भी प्रदर्शन किया गया। शहर के मोतीझील, कल्याणी चौक पर रात के दस बजे तक पुलिस, प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच तकरार की स्थिति बनी रही। इस के दौरान तोड़फोड़ व सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। इन घटनाओं में संलिप्त उपद्रवियों की पहचान बताने वालों को पुलिस दस हजार रुपया इनाम देगी। सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रखा जाएगा । इसकी घोषणा एसएसपी कांतेश कुमार मिश्र ने शुक्रवार की सुबह की।

    उन्होंने कहा कि घटना से संबंधित सीसीटीवी फुटेज, वीडियो एवं सोशल मीडिया पर उपलब्ध तस्वीरों के आधार पर तोड़फोड़ करने वाले की पहचान की कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में संदिग्ध व्यक्तियों की तस्वीरें भी सार्वजनिक की जा रही हैं। उन्होंने आम जनों से अपील किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना गलत नहीं है लेकिन, आन्दोलन के नाम पर गैरकानूनी कदम उठाना गलत है। ऐसे लोगों के साथ पुलिस सख्ती से निपटेगी। आवाम को भी ऐसे तत्वों की पहचान करने में पुलिस की मदद करना चाहिए।

    उन्होंने आमजन से अपील की है कि यदि प्रकाशित तस्वीरों में किसी व्यक्ति की पहचान होती है तो इसकी सूचना जिला पुलिस नियंत्रण कक्ष के हेल्पलाइन नंबर 9431896700 पर दें। जिससे संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने चेतावनी दी है कि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले व्यक्तियों से नियमानुसार जुर्माना एवं हर्जाने की राशि की वसूली भी की जाएगी।

    गुरुवार को पटना, मुजफ्फरपुर, जहानाबाद, बेगूसराय, दरभंगा और कटिहार में उग्र प्रदर्शन पर पुलिस ने लाठी चार्ज किया। उधर, बुधवार को पटना में प्रदर्शन के दौरान तोड़फोड़ और हिंसा में पुलिस ने 58 को गिरफ्तार किया है, जबकि 60 की तस्वीर जारी की है। जहानाबाद में उपद्रवियों ने डीएम आवास और पुलिस पर पथराव किया। उन्हें नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने करीब 50 राउंड हवाई फायरिंग की। एसपी ने 30 राउंड फायरिंग की पुष्टि की है। पथराव में नगर थाना प्रभारी समेत चार पुलिसकर्मी घायल हो गए। रेलवे स्टेशन के पास ट्रैक जामकर पथराव किया, जिससे ट्रेनों का परिचालन भी प्रभावित रहा।

    पटना में छात्रों ने पटना साइंस कॉलेज गेट के सामने प्रदर्शन किया और कारगिल चौक की तरफ बढ़ने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस के लाठीचार्ज में एक छात्र का सिर फट गया। छह को हिरासत में लिया गया है। बेगूसराय में पथराव में सदर एसडीएम समेत 12 पुलिसकर्मी घायल हुए। दरभंगा में छात्रों ने रोड़ेबाजी की, जिसमें सिटी एसपी, सदर एसडीपीओ और कुछ पुलिसकर्मी घायल हो गए। पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़ उन्हें नियंत्रित किया। कटिहार कलेक्ट्रेट के गेट को तोड़ने की कोशिश कर रहे छात्रों पर पुलिस ने लाठी चार्ज किया। पथराव में सीओ की आंख में गंभीर चोट आयी।

  • Punjab School Fee Ordinance: स्कूल फीस अध्यादेश हाईकोर्ट पहुंचा, 5% बढ़ोतरी पर निजी स्कूलों की आपत्ति

    Punjab School Fee Ordinance: स्कूल फीस अध्यादेश हाईकोर्ट पहुंचा, 5% बढ़ोतरी पर निजी स्कूलों की आपत्ति

    लुधियाना 

    पंजाब में प्राइवेट स्कूलों की फीस को लेकर राज्य सरकार के नए अध्यादेश के खिलाफ स्कूल संचालक हाईकोर्ट पहुंच गए हैं। 'फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स एंड एसोसिएशंस ऑफ पंजाब' ने इस मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। 

    फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स एंड एसोसिएशंस ऑफ पंजाब की ओर से वीरवार को एडवोकेट राजीव आत्माराम और बृजेश भोंसला कोर्ट में पेश हुए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि 25 जुलाई 2026 से सरकार स्कूलों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई कर सकती है।

    स्कूल संचालकों ने कोर्ट से अपील की कि मामले की सुनवाई 25 जुलाई से पहले की जाए। इस पर दो जजों की बेंच ने याचिका पर सुनवाई करने का फैसला किया है। स्कूल संचालकों ने 21 जुलाई को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार के समक्ष अपनी याचिका दायर की थी।

    स्कूल संचालकों को सरकार के इन फैसलों पर है ऐतराज, जानिए…

        फीस बढ़ाने पर रोक: स्कूल वालों का कहना है कि साल में सिर्फ 5% फीस बढ़ाने की छूट बहुत कम है। इससे टीचरों की सैलरी बढ़ाना, नए कमरे-बेंच बनवाना और स्कूल का खर्चा चलाना मुश्किल हो जाएगा। उनका कहना है कि राइट टू एजुकेशन एक्ट में तो 8 प्रतिशत तक फीस बढ़ाने की अनुमति स्कूल मैनेजमेंट को मिली है।

        पुराना पैसा वापस करने का नियम: स्कूल संचालकों को सबसे बड़ा एतराजा पुरानी फीस वापस करने पर है। उनका कहना है कि सरकार कह रही है कि जिन्होंने पिछले 3 सालों में 15% से ज्यादा फीस बढ़ाई है, वे पैसा अभिभावकों को वापस करें या आगे की फीस में काटें। स्कूल वालों का कहना है कि यह पैसा तो पहले ही खर्च हो चुका है, अब इसे वापस लौटाना मुमकिन नहीं है।

        हर तरह के चार्ज को फीस मानना: स्कूल संचालकों का कहना है कि सरकार कह रही है कि हर तरह के चार्जेज को फीस माना जाएगा। उनका कहना है कि बस का किराया, कंप्यूटर फीस, खेलकूद और डेवलपमेंट का पैसा भी फीस में जोड़ देने से स्कूलों का कामकाज ठप पड़ जाएगा।

        स्कूल की मान्यता रद्द करने का डर: स्कूल संचालकों ने कोर्ट में दायर याचिका में कहा कि सरकार ने थोड़ी सी भी गलती होने पर भारी जुर्माना लगाने और स्कूल की मान्यता रद्द करने की धमकी दी है। जिससे स्कूल मालिक डरे हुए हैं।

    पंजाब सरकार के अध्यादेश में क्या क्या है

        साल में सिर्फ 5% फीस बढ़ेगी: पंजाब सरकार के नए ‘द पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अन-एडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस (अमेंडमेंट) ऑर्डिनेंस, 2026’ में प्राइवेट स्कूल हर साल अपनी फीस 5 प्रतिशत से ज्यादा नहीं बढ़ा सकते। अगर किसी को इससे ज्यादा बढ़ानी है, तो उसे 6 महीने (180 दिन) पहले सरकारी कमेटी से लिखित मंजूरी लेनी होगी।

        पिछले 3 साल का हिसाब-किताब: अगर किसी स्कूल ने बीते 3 सालों में कुल मिलाकर 15% से ज्यादा फीस बढ़ाई है, तो उसे वह ज्यादा लिया गया पैसा 90 दिनों के अंदर माता-पिता को वापस करना होगा या अगली फीस में एडजस्ट करना होगा।

        हर तरह की फीस पर नजर: सरकार ने नए अध्यादेश में कहा है कि अब ट्यूशन फीस के साथ-साथ बस का किराया, कंप्यूटर फीस, लैब और एनुअल चार्ज भी इसी नियम के दायरे में आएंगे।

        ऑनलाइन पोर्टल पर देना होगा पूरा ब्योरा: सभी प्राइवेट स्कूलों को पिछले 4 साल की फीस का पूरा हिसाब सरकार के पोर्टल पर अपलोड करना होगा, ताकि अधिकारी उसकी जांच कर सकें। स्कूल संचालकों का कहना है कि पुरानी फीसों को वो खर्च कर चुके हैं और अपनी रिटर्न भरकर डिपार्टमेंट को जमा कर चुके हैं।

  • गंगा लिंक एक्सप्रेसवे के लिए 78 प्रतिशत जमीन खरीद, निर्माण जल्द शुरू

    गंगा लिंक एक्सप्रेसवे के लिए 78 प्रतिशत जमीन खरीद, निर्माण जल्द शुरू

     ग्रेटर नोएडा
    गंगा लिंक एक्सप्रेसवे का निर्माण जल्द शुरू हो जाएगा। यमुना प्राधिकरण (यीडा) गंगा लिंक एक्सप्रेसवे के लिए 78 प्रतिशत जमीन क्रय का काम पूरा कर चुका है। शेष जमीन माह के अंत तक खरीदने का दावा है।

    लिंक एक्सप्रेसवे का निर्माण यमुना एक्सप्रेसवे की ओर से शुरू होकर गंगा एक्सप्रेसवे की ओर बढ़ेगा। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) भी लिंक एक्सप्रेसवे के लिए तकरीबन 52 प्रतिशत जमीन खरीद चुका है।

    नोएडा एयरपोर्ट से होगी कनेक्टिविटी
    नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को गंगा एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी के लिए प्रदेश सरकार ने गंगा लिंक एक्सप्रेसवे की योजना तैयार की है। यूपीडा इसका निर्माण कराएगा।

    74.3 किमी लंबे लिंक एक्सप्रेसवे का करीब 20 किमी हिस्सा यीडा के अधिसूचित क्षेत्र में हैं। यीडा सेक्टर 21 के नजदीक इंटरचेंज बनाकर इसे यमुना एक्सप्रेसवे से जोड़ा जाएगा।

    जमीन अधिग्रहण का काम अंतिम चरण में
    यमुना प्राधिकरण को अपने अधिसूचित क्षेत्र में 225 हेक्टेयर जमीन क्रय करने का लक्ष्य दिया गया था। इसके लिए शासन ने यीडा को 1209 करोड़ रुपये आवंटित किए थे। प्राधिकरण ने 78 प्रतिशत लक्ष्य पूरा कर लिया है।

    एक्सप्रेसवे की शेष जमीन खरीदने का काम यूपीडा कर रहा है। उसने भी 52 प्रतशित जमीन क्रय कर ली है। मुख्यमंत्री भी जुलाई अंत तक लिंक एक्सप्रेसवे की जमीन क्रय का काम पूरा करने के निर्देश दे चुके हैं।

    लिंक एक्सप्रेसवे गौतमबुद्ध नगर के आठ व बुलंदशहर के 48 गांवों से होकर गुजर रहा है। यीडा में कुल 16 गांव इससे प्रभावित होंगे। एसीईओ राजेश कुमार सिंह का कहना है कि शेष जमीन माह के अंत तक क्रय कर ली जाएगी।करीब चार हजार करोड़ की परियोजना के तहत 80 मीटर चौड़ी सड़क बनाई जाएगी।

    130 मीटर चौड़ा होगा सड़क कॉरिडोर
    यीडा क्षेत्र में यह सड़क जमीन की सतह पर होगी, जबकि आगे की सड़क एलिवेटेड होगी। यीडा क्षेत्र में इस सड़क के समानांतर दो सर्विस रोड भी होंगी। इन्हें मिलाकर सड़क की कुल चौड़ाई 130 मीटर होगी। सर्विस रोड के लिए जमीन क्रय व निर्माण यीडा अपने बजट से करेगा।

    पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कनेक्टिविटी होगी बेहतर
    लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण से पश्चिम उत्तर प्रदेश के कई जिले यमुना एक्सप्रेसवे से होकर नोएडा एयरपोर्ट से जुड़ जाएंगे। इसके अलावा मथुरा, आगरा, लखनऊ के अलावा बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर भी आवाजाही सुगम हो जाएगी।

    मुआवजा दर बढ़ने से तेज हुआ जमीन अधिग्रहण
    यीडा क्षेत्र में लिंक एक्सप्रेसवे के लिए जमीन के एवज में 4300 रुपये प्रति वर्गमीटर मुआवजा दिया जा रहा है। लेकिन बुलंदशहर में लिंक एक्सप्रेसवे के प्रभावित गांवों का सर्किल रेट कम होने के कारण अंतर काफी अधिक था।

    इससे किसानों से जमीन मिलने में अड़चन को देखते हुए मुआवजा दर बढ़ाकर 2800 रुपये प्रति वर्गमीटर की गई। रजिस्ट्री कार्यालयों में हड़ताल के कारण भी जमीन क्रय का काम प्रभावित हुआ। हड़ताल समाप्त होते ही जेवर व खुर्जा तहसील मेंं जमीन की रजिस्ट्री तेजी से निपटाई गईं।

  • आज नहीं जमा किया गणना प्रपत्र, मतदाता सूची से कटेगा नाम

    आज नहीं जमा किया गणना प्रपत्र, मतदाता सूची से कटेगा नाम

     चंडीगढ़
    हरियाणा में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) के तहत जो मतदाता शुक्रवार शाम तक गणना प्रपत्र बीएलओ को वापस नहीं देंगे, उनका नाम प्रारंभिक मतदाता सूची से काट दिया जाएगा। प्रारंभिक मतदाता सूची से 34 लाख दो हजार 917 मतदाताओं का नाम कटना तय है।

    प्रदेश में दो करोड़ छह लाख 55 हजार 221 मतदाताओं को गणना प्रपत्र वितरित किए गए हैं। इनमें से एक करोड़ 72 लाख 49 हजार 753 (83.51%) गणना प्रपत्र बीएलओ के माध्यम से डिजिटाइज्ड एवं अपलोड किए जा चुके हैं। गणना प्रपत्र बीएलओ को वापस जमा कराने के लिए अब केवल एक दिन का समय शेष है।

    31 जुलाई को प्रकाशित होने वाली प्रारंभिक मतदाता सूची-2026 में केवल उन्हीं मतदाताओं के नाम शामिल किए जाएंगे, जिनके हस्ताक्षरित गणना प्रपत्र बीएलओ को प्राप्त हो चुके होंगे। जिन मतदाताओं के गणना प्रपत्र प्राप्त नहीं होंगे, उनके नाम प्रारंभिक मतदाता सूची में शामिल नहीं किए जाएंगे। ऐसे मतदाता voters.eci.gov.in पोर्टल के माध्यम से भी अपना गणना प्रपत्र ऑनलाइन भर सकते हैं।

    मुख्य निर्वाचन अधिकारी ए श्रीनिवास ने बताया कि प्रदेश में 34 लाख से अधिक (16.47%) ऐसे मतदाता चिन्हित किए गए हैं, जो स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके हैं, अनुपस्थित हैं, मृतक हैं अथवा जिनके नाम किसी कारणवश मतदाता सूची में दोहरी प्रविष्टि के रूप में दर्ज हैं। ऐसे मतदाताओं के नाम प्रारंभिक मतदाता सूची में शामिल नहीं किए जाएंगे।

    इन मतदाताओं की सूची मतदान केंद्रवार तैयार कर सभी बीएलओ के माध्यम से राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त बीएलए को उपलब्ध कराई गई है। यह सूची मुख्य निर्वाचन अधिकारी हरियाणा की वेबसाइट पर भी उपलब्ध रहेगी।

    प्रारंभिक मतदाता सूची में शामिल मतदाताओं का मिलान विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के दौरान प्राप्त सूचनाओं से किया जाएगा। जिन मतदाताओं के संबंध में कोई आपत्ति या विसंगति पाई जाएगी, उन्हें संबंधित निर्वाचन पंजीयन अधिकारी अथवा सहायक निर्वाचन पंजीयन अधिकारी द्वारा सुनवाई का नोटिस जारी किया जाएगा।

    ऐसे मतदाताओं से निर्धारित तिथि पर आवश्यक दस्तावेजों सहित उपस्थित होने का आग्रह किया गया है, ताकि उनका नाम तीन अक्टूबर को प्रकाशित होने वाली अंतिम मतदाता सूची में शामिल किया जा सके।

    पता बदलने के लिए भर सकते फार्म-8
    जिन मतदाताओं ने किसी कारणवश अपना गणना प्रपत्र बीएलओ को जमा नहीं कराया है, वे 31 जुलाई से 30 अगस्त तक आवश्यक दस्तावेजों के साथ फार्म-6 भरकर मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। पहले से दर्ज प्रविष्टियों में सुधार अथवा पता/स्थान परिवर्तन के लिए फार्म-8 भरा जा सकता है।

    निर्वाचन पंजीयन अधिकारी के निर्णय से असंतुष्ट कोई भी मतदाता 15 दिनों के भीतर संबंधित जिलाधिकारी के समक्ष तथा जिलाधिकारी के निर्णय के विरुद्ध 30 दिनों के भीतर मुख्य निर्वाचन अधिकारी के समक्ष अपील कर सकता है।

  • मतदाता सूची पुनरीक्षण में लापरवाही पर सीओ को शो-कॉज, वेतन भी रुकेगा

    मतदाता सूची पुनरीक्षण में लापरवाही पर सीओ को शो-कॉज, वेतन भी रुकेगा

    रांची
    मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के कार्यों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर जिला प्रशासन ने सख्ती शुरू कर दी है. जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने समीक्षा बैठक में कार्यों की धीमी प्रगति और खराब प्रदर्शन पर नाराजगी जतायी. उन्होंने रातू, चान्हो और हेहल के सीओ को शो-कॉज जारी करने का निर्देश दिया, जबकि बुंडू और बड़गाईं के सीओ को शो-कॉज के साथ वेतन रोकने की कार्रवाई के निर्देश दिये गये हैं.

    गणना प्रपत्र का कार्य तय समय में पूरा करने का निर्देश
    उपायुक्त ने कहा कि एन्यूमरेशन फॉर्म (गणना प्रपत्र) के वितरण, संग्रहण और डिजिटाइजेशन का कार्य निर्धारित समयसीमा के भीतर मिशन मोड में पूरा करें. उन्होंने चेतावनी दी है कि निर्वाचन कार्य में किसी भी स्तर पर लापरवाही या शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जायेगी. डीसी ने हेहल के एएमसी चंद्र दीप कुमार को भी शोकॉज जारी करने का निर्देश दिया.

    50% से कम डिजिटाइजेशन पर बीएलओ को शोकॉज
    जिला समाज कल्याण पदाधिकारी और जिला शिक्षा अधीक्षक को निर्देश दिया कि अगले छह दिनों तक सभी बीएलओ सुपरवाइजरों को सक्रिय रूप से क्षेत्र में तैनात रखा जाये, ताकि शत-प्रतिशत फॉर्म वितरण, संग्रहण और डिजिटाइजेशन समय पर पूरा हो सके. उन्होंने कहा कि 50 प्रतिशत से कम डिजिटाइजेशन करने वाले बीएलओ को भी शोकॉज जारी करें. शिकायत मिलने पर संबंधित सुपरवाइजरों के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई की जायेगी.

  • रेल यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी! होडल-शोलाका रेलखंड पर ऑटोमैटिक सिग्नलिंग शुरू, बढ़ेगी ट्रेनों की रफ्तार

    रेल यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी! होडल-शोलाका रेलखंड पर ऑटोमैटिक सिग्नलिंग शुरू, बढ़ेगी ट्रेनों की रफ्तार

    पलवल
     उत्तर मध्य रेलवे के आगरा मंडल ने दिल्ली–मथुरा रेल मार्ग पर यात्री सुविधाओं और रेल संचालन को अधिक सुरक्षित एवं आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। मंडल ने होडल–शोलाका रेलखंड की तीसरी एवं चौथी लाइन पर 10.34 रूट किलोमीटर में ऑटोमैटिक सिग्नलिंग प्रणाली का सफलतापूर्वक संचालन शुरू कर दिया है। इसके साथ ही भूतेश्वर से शोलाका तक कुल 61 किलोमीटर रेलखंड पर ऑटोमैटिक सिग्नलिंग प्रणाली लागू हो गई है। अब एक साथ कई ट्रेनें सुरक्षित रेलवे ट्रैक पर दौड़ सकेगी।

    क्या है रेलवे का एबीएस सिस्टम
    रेल अधिकारियों ने बताया कि ऑटोमैटिक सिग्नल प्रणाली (ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग) रेलवे की एक आधुनिक तकनीक है, जिसमें दो स्टेशनों के बीच ट्रैक को छोटे-छोटे हिस्सों ('ब्लॉक') में बांटा जाता है। ट्रेन के आगे बढ़ने पर सिग्नल बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के स्वचालित रूप से लाल या हरे हो जाते हैं। इससे एक ही ट्रैक पर कई ट्रेनें सुरक्षित रूप से एक-दूसरे के पीछे चल सकती हैं

    यह सिस्टम ऐसे करती है काम
    रेल अधिकारियों ने बताया कि पटरियों में बिजली के सेंसर लगे होते हैं। जब ट्रेन ट्रैक से गुजरती है, तो उसके पहियों की मौजूदगी से सर्किट पूरा हो जाता है जिससे सिग्नल अपने आप लाल हो जाता है। जैसे ही ट्रेन आगे बढ़ती है और ट्रैक खाली हो जाता है और सिग्नल वापस हरा हाे जाता है। इस सिस्टम के शुरू होने से ट्रेनों की संख्या में बढ़ोतरी होगी। एक ही ब्लॉक में एक के पीछे एक कई ट्रेनें चल सकती हैं। इस सिस्टम से स्टेशन मास्टर के मैनुअल सिग्नल देने पर निर्भर नहीं करता, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा कम होता है। इसके अलावा ट्रेनों को स्टेशनों पर लंबा इंतजार नहीं करना पड़ता और यात्रा का समय घटता है।

    ट्रेनों को चलाने में ये होगा फायदा
    उत्तर मध्य रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि परियोजना के अंतर्गत आधुनिक इंटीग्रेटेड पावर सप्लाई (आईपीएस), फायर अलार्म यूनिट तथा शोलाका यार्ड का व्यापक आधुनिकीकरण किया गया है। अब यहां वीडियो डिस्प्ले यूनिट (वीडीयू) आधारित संचालन और रीसेटिंग की सुविधा उपलब्ध होगी। तीसरी एवं चौथी लाइन पर पहले लागू एब्सलूट ब्लॉक वर्किंग प्रणाली को हटाकर ऑटोमैटिक सिग्नलिंग प्रणाली लागू कर दी गई है। नई प्रणाली लागू होने से एक ही ट्रैक पर सुरक्षित तरीके से एक से अधिक ट्रेनों का संचालन संभव होगा। ट्रेनों को अगले स्टेशन से लाइन क्लियर मिलने की प्रतीक्षा कम करनी पड़ेगी, जिससे अनावश्यक ठहराव घटेगा और समयपालन में सुधार होगा।