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  • संसद में बड़ा खुलासा! पंजाब बना तस्करी नेटवर्क का बड़ा रास्ता, बॉर्डर से शहरों तक फैला नशे का जाल

    संसद में बड़ा खुलासा! पंजाब बना तस्करी नेटवर्क का बड़ा रास्ता, बॉर्डर से शहरों तक फैला नशे का जाल

    चंडीगढ़
    पाकिस्तान से पंजाब सीमा के रास्ते ड्रोन के माध्यम से भेजी जा रही हेरोइन अब केवल सीमावर्ती जिलों तक सीमित नहीं रह गई है। जांच एजेंसियों के अनुसार पंजाब पहुंचने के बाद संगठित तस्करी नेटवर्क इस खेप को देश के कई राज्यों तक पहुंचा रहा है। राज्यसभा में केंद्र सरकार ने भी स्वीकार किया है कि ड्रोन के जरिए होने वाली नशा तस्करी का सबसे अधिक दबाव पंजाब सीमा पर है और बरामद नशीले पदार्थों में सबसे बड़ा हिस्सा हेरोइन का है।

    केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में लिखित उत्तर में बताया कि वर्ष 2025 में देशभर में ड्रोन के माध्यम से नशीले पदार्थों की तस्करी के 305 मामले सामने आए। इनमें 298 मामले केवल पंजाब सीमा से जुड़े थे। इन मामलों में करीब 460 किलोग्राम नशीले पदार्थ बरामद किए गए, जिनमें 448 किलोग्राम हेरोइन, नौ किलोग्राम मेथामफेटामाइन और तीन किलोग्राम अफीम शामिल थी।यानी ड्रोन के जरिए बरामद कुल नशीले पदार्थों में लगभग 97 प्रतिशत हिस्सा हेरोइन का रहा।

    सीमावर्ती इलाकों से आगे पहुंचती है खेप
    जांच एजेंसियों के अनुसार पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए पंजाब के सीमावर्ती इलाकों अमृतसर, तरनतारन, फिरोजपुर, फाजिल्का और गुरदासपुर में गिराई गई खेप को स्थानीय तस्कर पहले सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचाते हैं। इसके बाद राष्ट्रीय राजमार्गों और सड़क नेटवर्क के माध्यम से इसे विभिन्न राज्यों में सक्रिय गिरोहों तक भेजा जाता है।

    एनसीबी की इंडिया नारकोटिक्स थ्रेट असेसमेंट-2024, एनआईए तथा पंजाब पुलिस की जांच में पंजाब को अंतरराज्यीय तस्करी का प्रमुख ट्रांजिट कारिडोर बताया गया है। तस्कर अब केवल ड्रोन पर निर्भर नहीं हैं। वे संपर्क बनाए रखने, खेप की आवाजाही का समन्वय करने, तस्वीरें और वीडियो साझा करने तथा वास्तविक समय की लोकेशन भेजने के लिए गुप्त संदेश मंचों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

    वीपीएन से छिपती है पचहान
    पहचान छिपाने के लिए आभासी निजी नेटवर्क (वीपीएन) का उपयोग किया जा रहा है, जबकि नशे के कारोबार से अर्जित धन के लेनदेन में डिजिटल मुद्रा और अन्य आभासी डिजिटल परिसंपत्तियों का सहारा लिया जा रहा है। विदेशों में संचालित डिजिटल विनिमय मंचों के कारण धन के स्रोत तक पहुंचना जांच एजेंसियों के लिए चुनौती बना हुआ है।

    कुछ मामलों में जेलों में बंद तस्कर भी मोबाइल फोन के जरिए अपने सहयोगियों के संपर्क में रहकर नेटवर्क का संचालन करते पाए गए हैं। इसी कारण जांच एजेंसियां अब केवल सीमा पर निगरानी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि डिजिटल साक्ष्यों और वित्तीय लेनदेन की भी गहन जांच कर रही हैं।

    राज्यसभा में सरकार द्वारा दी गई जानकारी

        तस्कर संपर्क और नेटवर्क संचालन के लिए गुप्त संदेश मंचों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
        पहचान छिपाने के लिए आभासी निजी नेटवर्क (वीपीएन) का उपयोग किया जा रहा है।

        नशे के कारोबार से अर्जित धन के लेनदेन में डिजिटल मुद्रा और आभासी डिजिटल परिसंपत्तियों का इस्तेमाल बढ़ा है।

        जेलों में बंद कुछ तस्कर भी मोबाइल फोन के जरिए अपने सहयोगियों के संपर्क में रहकर नेटवर्क का संचालन करते पाए गए हैं।

        सीमा पर ड्रोन रोधी प्रणाली, बंद परिपथ कैमरे, दूर से घूमकर निगरानी करने वाले कैमरे, रात्रि दृष्टि उपकरण, नई डिजाइन की सीमा बाड़ और फ्लड लाइट व्यवस्था को लगातार मजबूत किया जा रहा है।

     

  • Punjab Congress में बढ़ी सियासी हलचल! पूर्व CM चन्नी के इस्तीफे की तैयारी, वड़िंग की नेतृत्व क्षमता पर उठाए सवाल

    Punjab Congress में बढ़ी सियासी हलचल! पूर्व CM चन्नी के इस्तीफे की तैयारी, वड़िंग की नेतृत्व क्षमता पर उठाए सवाल

    चंडीगढ़ 

    पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री व जालंधर से सांसद चरणजीत चन्नी कांग्रेस हाईकमान को बड़ा झटका दे सकते हैं। चन्नी गुट से जुड़े नेताओं के मुताबिक वह जल्द ही 2027 चुनाव की कैंपेन कमेटी के चेयरमैन का पद छोड़ सकते हैं। मीटिंग में मौजूद कुछ नेताओं के मुताबिक दिल्ली में केसी वेणुगोपाल की अगवाई में हुई बैठक में चन्नी गुट ने फिर से बागी तेवर अपनाए। चन्नी ने पंजाब कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल को यहां तक कह दिया कि पंजाब में मौजूदा प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की अगुआई में कांग्रेस चुनाव नहीं जीत सकती। अगर वड़िंग कुर्सी पर बरकरार रहे तो हार या जीत की जिम्मेदारी आपकी होगी।

    पार्टी सोर्सेज के मुताबिक तल्खी तब ज्यादा बढ़ी जब कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने चरणजीत सिंह चन्नी समेत उनके गुट के नेताओं को कहा कि पार्टी ने आपको इतने बड़े पद दिए हैं और आप फिर भी साथ चलने को तैयार नहीं हैं। यह सुनते ही चन्नी ने पलटकर कहा कि अगर ऐसा है तो वह कंपेन कमेटी के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे देते हैं।

    इस दिल्ली मीटिंग में प्रधान राजा वडिंग पहले चुप रहे लेकिन जब चन्नी गुट ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया तो राजा वडिंग ने कह दिया कि अगर नेताओं को उनसे प्रॉब्लम है तो वो इस्तीफा दे देते हैं। जिस पर केसी वेणुगोपाल ने उन्हें टोक दिया और कहा कि राजा वडिंग को हाईकमान ने प्रधान बनाया है। वही प्रधान रहेंगे।

    केसी वेणुगोपाल ने सुखजिंदर सिंह रंधावा की भी क्लास लगाई और कहा कि पिछली मीटिंग में जब सब कुछ ठीक हो गया था तो आपने फिर राजा वडिंग के खिलाफ स्टेटमेंट क्यों दी जिस पर सुखजिंदर सिंह रंधावा ने भी कह दिया कि उन्होंने जो कहा सच कहा।

    पार्टी सोर्सेज के मुताबिक जब तल्खी ज्यादा हुई तो केसी वेणुगोपाल मीटिंग छोड़कर चले गए। वेणुगोपाल के जाते ही चरणजीत सिंह चन्नी भी मीटिंग से चले गए। चन्नी गुट की नाराजगी का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि उनमें से किसी ने भी हाईकमान के साथ हुई बैठक की फोटो सोशल मीडिया पर शेयर नहीं की।

    पंजाब कांग्रेस की दिल्ली बैठक में क्या-क्या हुआ जानिए..

        ग्राउंड पर चन्नी-चन्नी हो रही है, हाईकमान रिएलिटी समझे: बैठक में बैठे चन्नी गुट के एक बड़े नेता ने कहा कि पंजाब के लोग कांग्रेस की सरकार बनाना चाहते हैं। उन्हें कांग्रेस से उम्मीदें हैं। उन्होंने कहा कि ग्राउंड पर लोग चन्नी को पसंद करते हैं और चन्नी-चन्नी कर रहे हैं। हाईकमान को ग्राउंड रिएलिटी समझकर फैसला लेना होगा। इस केसी वेणुगोपल ने उन्हें भी कहा कि ग्राउंड पर जिसका दबदबा है उसका रिजल्ट इलेक्शन में दो।

        हाईकमान की दो टूक, राजा ही रहेंगे प्रधान: हाईकमान ने चन्नी गुट को साफ कह दिया कि अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को हाईकमान ने प्रधान बनाया है तो वही प्रधान रहेंगे। अगल इलेक्शन उनकी प्रधानगी में लड़ा जाएगा। राजा यूथ कांग्रेस से लेकर पंजाब कांग्रेस में पार्टी के लिए काम कर रहे हैं और हाईकमान को उन पर पूरा विश्वास है। जिस पर चरणजीत सिंह चन्नी गुट ने कह दिया कि पार्टी राजा की अगुआई में चुनाव लड़के देख लें।

        हाईकमान ने चन्नी को किया था आश्वस्त, फिर भी नहीं माने: पार्टी सूत्रों के मुताबिक संसद सत्र शुरू होने के बाद चन्नी की हाईकमान के साथ एक मुलाकात हुई जिसमें उन्हें कह दिया था कि कांग्रेस में चुनाव कैंपेन कमेटी के चेयरमैन का पद सबसे अहम होता है। चुनाव की हर गतिविधि में कैंपेनिंग कमेटी के चेयरमैन की सहमति जरूर ली जाती है। इसके बावजूद चरणजीत चन्नी नहीं माने और जैसे ही मीटिंग में आए तो उन्होंने राजा वडिंग का विरोध करना शुरू कर दिया।

        बस यात्रा की जगह रैलियां करने पर विचार: बैठक में राहुल गांधी की पंजाब बस यात्रा के कार्यक्रम पर चर्चा हुई, लेकिन गुटबाजी को देखते हुए हाईकमान ने अभी इस कार्यक्रम को कुछ दिन के लिए स्थगित कर दिया। केसी वेणुगोपाल ने पंजाब कांग्रेस को कहा कि बस यात्रा नहीं होती है तो उन्हें हाल ही में पंजाब में चार बड़ी रैलियां करनी होंगी। इस पर चन्नी गुट ने कहा कि राहुल गांधी के कार्यक्रमों में वो हिस्सा लेंगे लेकिन उससे पहले हाईकमान को नेतृत्व परिवर्तन पर विचार करना होगा।

        तल्खी बढ़ी तो केसी वेणुगोपाल उठकर चले गए: पार्टी सोर्सेज के मुताबिक मीटिंग में जब तल्खी बढ़ी तो केसी वेणुगोपाल उठकर चले गए। उनके साथ ही चरणजीत सिंह चन्नी भी मीटिंग से बाहर चले गए। हालांकि उसके बाद भी मीटिंग में अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा होती रही। बैठक में मौजूद नेताओं ने भूपेश बघेल को कहा कि कांग्रेस में चल रही इस गुटबाजी को खत्म करना होगा।

    मीटिंग की फोटो नहीं की चन्नी गुट ने शेयर दिल्ली में मीटिंग खत्म होने के बाद केसी वेणुगोपाल, भूपेश बघेल, अमरिंदर सिंह राजा वडिंग, सुखपाल सिंह खैहरा समेत अन्य नेताओं ने दिल्ली में हुई बैठक के फोटो सोशल मीडिया पर शेयर किए लेकिन चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा व उनके गुट के नेताओं ने ये फोटो शेयर नहीं किए।

    सूत्रों के मुताबिक चन्नी गुट ने नाराजगी जताने के लिए इन फोटोज को शेयर नहीं किया है। इससे पहले उन्होंने नियुक्ति को लेकर भी न कुछ पोस्ट किया और न ही हाईकमान का धन्यवाद किया था। जिससे साफ है कि कांग्रेस हाईकमान के साथ चरणजीत सिंह चन्नी गुट की अभी सुलह नहीं हुई है।

    दिल्ली के प्रदर्शन में पंजाब के सांसदों में रही सुपर दिखने की होड़ दिल्ली में केवल बंद कमरे की बैठक ही नहीं, बल्कि सड़कों पर हुए विरोध प्रदर्शनों में भी नेताओं के बीच खुद को हाईकमान का सबसे करीबी दिखाने की होड़ साफ दिखी। जब राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेसी सांसदों ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना दिया, तो पंजाब के नेता भी अग्रिम पंक्ति में दिखे।

    राजा वडिंग धरना स्थल पर राहुल गांधी के ठीक पास बैठकर नारेबाजी करते दिखे। पुलिस अधिकारियों के साथ बहस के दौरान भी वडिंग राहुल गांधी के साथ साये की तरह डटे रहे और जिस बस में राहुल को हिरासत में लिया गया, वडिंग उसकी छत पर चढ़ गए। दूसरी ओर, हिरासत में लिए जाने पर चरणजीत सिंह चन्नी भी आक्रामक अंदाज में केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री मोदी पर बरसे। उन्होंने मीडिया के सामने स्पष्ट किया कि वह राहुल गांधी के नेतृत्व में पूरी तरह समर्पित हैं और हाईकमान के हर फैसले के साथ खड़े हैं।

    चन्नी को अलग-थलग नहीं करना चाहता हाईकमान पॉलिटिकल एक्सपर्ट पवनदीप शर्मा का कहना है कि पंजाब कांग्रेस में चन्नी हाशिए पर चल रहे थे और हाईकमान उन्हें ज्यादा तवज्जो नहीं दे रहा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पंजाब दौर पर डेरा सचखंड बल्लां के संत निरंजन दास से बार-बार मुलाकात करने से कांग्रेस को अपना दलित वोट बैंक खिसकने का डर बना है। ऐसे में अगर चरणजीत सिंह चन्नी को किनारे कर दिया तो कांग्रेस का यह पारंपरिक वोट बैंक पूरी तरह से डायवर्ट हो जाएगा। इसलिए कांग्रेस हाईकमान चरणजीत सिंह चन्नी को फिर से तवज्जो देने लगी।

  • कालका-शिमला टॉय ट्रेन 29 जुलाई तक रद, भूस्खलन की आशंका बनी वजह

    कालका-शिमला टॉय ट्रेन 29 जुलाई तक रद, भूस्खलन की आशंका बनी वजह

    पंचकूला
     रेलवे ने खराब मौसम और कालका-शिमला हेरिटेज रेलमार्ग पर भूस्खलन की आशंका के मद्देनज़र एक बार फिर एहतियाती कदम उठाते हुए कालका से सुबह 8 बजे शिमला के लिए रवाना होने वाली टाॅय ट्रेन को 29 जुलाई तक रद कर दिया है।

    इस निर्णय ने यात्रियों के साथ-साथ स्थानीय लोगों को भी हैरानी में डाल दिया है, क्योंकि इससे पहले भी मौसम की आशंका के आधार पर ट्रेनें रद की गई थीं, लेकिन ट्रैक पर कोई बाधा नहीं आई थी।

    रेलवे ने इससे पहले सोमवार को भी खराब मौसम की चेतावनी का हवाला देते हुए कालका से चलने वाली हिम दर्शन और हिमालयन क्वीन टाॅय ट्रेनों को एक दिन के लिए रद किया था।

    हालांकि उस दिन हेरिटेज ट्रैक पर कहीं भी भूस्खलन या मलबा गिरने की घटना नहीं हुई और अन्य सभी टाॅय ट्रेनें सामान्य रूप से संचालित होती रहीं। ऐसे में रेलवे का पूर्वानुमान गलत साबित होने पर लोगों ने इस फैसले की आलोचना भी की थी।

    अब रेलवे ने दोबारा मौसम खराब होने और ट्रैक पर मलबा आने की संभावना जताते हुए सुबह 8 बजे चलने वाली टाॅय ट्रेन का संचालन पू स्थगित कर दिया है। रेलवे का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और मानसून के दौरान किसी भी संभावित खतरे से बचने के लिए यह निर्णय लिया गया है।

  • चंडीगढ़ की इंडस्ट्री को मिलेगी नई रफ्तार, FAR बढ़ाने पर केंद्र की मंजूरी जल्द मिलने के संकेत

    चंडीगढ़ की इंडस्ट्री को मिलेगी नई रफ्तार, FAR बढ़ाने पर केंद्र की मंजूरी जल्द मिलने के संकेत

     चंडीगढ़
     केंद्र सरकार जल्द ही पंचकूला और मोहाली की तर्ज पर शहर के उद्योगपतियों को बड़ी राहत देने जा रही है। प्रशासन की ओर से केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजे गए औद्योगिक सुधार संबंधी प्रस्तावों को अंतिम मंजूरी मिलने की संभावना है। इस मामले को लेकर प्रशासक गुलाब चंद कटारिया खुद गृह मंत्रालय के संपर्क में हैं।

    प्रशासक ने उद्योगपतियों को आश्वासन दिया है कि जल्द ही इस प्रस्ताव की मंजूरी गृह मंत्रालय से मिलने वाली है। प्रस्ताव के तहत इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 और 2 में फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) 0.75 से बढ़ाकर 2 और फेज-3 में 2.50 करने का प्रविधान है । इसके अलावा कुछ अतिरिक्त कमर्शियल गतिविधियों की अनुमति भी दी जाएगी।

    इसके साथ ही सर्विस से जुड़े कारोबार करने की भी मंजूरी दी जाएगी। सेंट्रल कोर्टयार्ड की अनिवार्यता समाप्त कर आगे और पीछे सेटबैक का प्रावधान करने की भी सिफारिश की गई है। इससे उद्योगपतियों को अतिरिक्त निर्माण क्षेत्र मिलेगा, कारोबार का विस्तार होगा, नए निवेश और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।

    प्रशासन के अनुसार अगले महीने केंद्र सरकार की मंजूरी मिलने के बाद फाइल आ जाएगी इसके बाद फ्लोर एरिया रेशियो बढ़ाने का शुल्क तय किया जाएगा ।शुल्क तय करने के लिए अलग से कमेटी का गठन तय किया जाएगा । इससे प्लाट का कवर एरिया बढ़ जाएगा और उद्योगपति को काम करने के लिए ज्यादा एरिया मिल जाएगा ।उद्योगपतियो को राहत देने के साथ ही प्रशासन का भी राजस्व बढ़ेगा ।

    संसद में भी उठ चुका है मामला
    उद्योगपतियों के प्लाॅट्स के एफएआर का मामले पर सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा में सवाल पूछे थे। प्रशासक के निर्देश पर ही एफएआर बढ़ाने की कमेटी गठित की गई थी।

    कमेटी ने ही इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 और 2 में एफएआर का एरिया 0.75 से बढ़ाकर 2 करने की सिफारिश की थी। उद्योगपतियों के प्लाॅट्स के एफएआर का मामले पर सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा में सवाल पूछे थे। कमेटी ने उद्योगपतियों के प्रतिनिधियों से बात करके राहत देने वाली रिपोर्ट तैयार की है।

    फैक्ट्री आउटलेट की भी मिलेगी मंजूरी
    इसके साथ ही उद्योगपतियों को फैक्ट्री आउटलेट खोलने की मंजूरी मिलने वाली है ।इसके साथ ही लोकल टू वोकल को प्रमोट करने के लिए भी उद्योगपतियों को राहत दी जाएगी। इस समय औद्योगिक क्षेत्र में ट्राईसिटी की सबसे बड़ी फर्नीचर मार्केट है। प्रशासन को पूरे शहर में सबसे ज्यादा जीएसटी से राजस्व भी इंडस्ट्री एरिया से आता है।

    एफएआर का एरिया बढ़ने से इससे जो उद्योगपतियों के खिलाफ मिसयूज और वायलेशन के नोटिस लंबित है वह भी खत्म हो जाएंगे। मालूम हो कि प्रशासक की ओर से जो 11 सदस्य अधिकारियों की कमेटी गठित की थी, जिसकी रिपोर्ट पर राहत दी जा रही है।

    फेज-3 के प्लाॅट्स की होगी नीलामी
    प्रशासन की ओर से इंडस्ट्रियल एरिया फेज-3 में नए प्लाॅट खरीदने के लिए ई नीलामी भी शुरू करने का निर्णय लिया है। प्रशासन के अनुसार फ्लोर एरिया रेशो बढ़ने से जो प्लाॅट इस समय बिक भी नहीं रहे हैं वह भी नीलाम हो जाएंगे। इस समय प्रशासन का पूरा फोकस को फेज-3 को विकसित करने पर है।

    औद्योगिक क्षेत्र फेज-1 और फेज-2 में 5 मरला से लेकर बड़े प्लाॅट्स तक मौजूद हैं। फेज-2 में 95 प्रतिशत प्लाॅट एक कनाल तक के हैं, जबकि फेज-1 में यह संख्या करीब 35 प्रतिशत है। लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष अवि भसीन का कहना है कि प्रशासक ने आश्वासन दिया है कि एफएआर बढ़ेगा।

    इसके साथ ही लोकल टू वोकल कारोबार को भी बढ़ावा दिया जाएगा। मंजूरी मिलने से इससे शहर की इंडस्ट्री को बूस्ट मिलेगा। यह राहत मिलने से जो पंचकूला और मोहाली जो इंडस्ट्री शिफ्ट हो रही है वह बंद हो जाएगी ।

  • रांची जगन्नाथ मंदिर में घुरती रथयात्रा से नौ दिवसीय महोत्सव का समापन

    रांची जगन्नाथ मंदिर में घुरती रथयात्रा से नौ दिवसीय महोत्सव का समापन

     रांची
    रांची के ऐतिहासिक जगन्नाथपुर मंदिर में आयोजित रथयात्रा महोत्सव का समापन 25 जुलाई 2026 को घुरती रथयात्रा के साथ होगा. नौ दिनों के प्रवास के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा मुख्य मंदिर लौटेंगे.

    परंपरा और आस्था का महापर्व
    राजधानी रांची में 16 जुलाई 2026 से प्रारंभ हुआ जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव 25 जुलाई को घुरती रथयात्रा (बहुड़ा यात्रा) के साथ संपन्न होगा. यह पर्व भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के मौसीबाड़ी प्रवास के समापन का प्रतीक माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नौ दिनों तक मौसीबाड़ी में रहने के बाद तीनों देवताओं की पुनः मुख्य मंदिर में वापसी कराई जाती है.

    क्या है घुरती रथ का महत्व?
    घुरती रथ, जिसे बहुड़ा रथयात्रा भी कहा जाता है, रथयात्रा उत्सव का अंतिम और अत्यंत महत्वपूर्ण चरण है. इस दिन श्रद्धालु भगवान के पुनः मंदिर प्रवेश के साक्षी बनते हैं. मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना, वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है. यह परंपरा भगवान और भक्तों के पुनर्मिलन का प्रतीक मानी जाती है.

    मेले की अंतिम रौनक
    रथ मेले के अंतिम दिनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचे. बच्चों ने झूले, मनोरंजन कार्यक्रमों और झूलों का आनंद लिया, जबकि लोगों ने विभिन्न दुकानों से खरीदारी की. घुरती रथयात्रा के बाद मेले की गतिविधियां धीरे-धीरे समाप्त होने लगेंगी और मंदिर परिसर में सामान्य धार्मिक व्यवस्था बहाल हो जाएगी.

    चातुर्मास की शुरुआत और विशेष मान्यता
    25 जुलाई को देवशयनी एकादशी के साथ चातुर्मास का भी आरंभ होगा. धार्मिक मान्यता है कि इस अवधि में भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं. इसी कारण भगवान जगन्नाथ के दर्शन भी सीमित हो जाते हैं और केवल नियमित पूजा-अर्चना जारी रहती है. देवोत्थान एकादशी पर भगवान के जागरण के साथ पुनः विशेष दर्शन और धार्मिक अनुष्ठान प्रारंभ होते हैं.

    धार्मिक विशेषज्ञों की राय
    पंडित पुरनेंदु पाठक के अनुसार घुरती रथयात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, सामुदायिक सहभागिता और आस्था की निरंतरता का प्रतीक है. यह पर्व श्रद्धालुओं को भक्ति, सेवा और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है.

  • उदयपुर में हाईवे किनारे 658 अतिक्रमण पर चलेगा बुलडोजर, प्रशासन ने कसी कमर

    उदयपुर में हाईवे किनारे 658 अतिक्रमण पर चलेगा बुलडोजर, प्रशासन ने कसी कमर

    उदयपुर
    भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और पीडब्ल्यूडी की जमीनों से अतिक्रमण हटाए जा रहे हैं। उदयपुर जिले की सात तहसीलों में दोनों विभागों की जमीनों पर 1 हजार 254 अवैध अतिक्रमण चिन्हित किए गए हैं। इनमें से अब तक 598 से ज्यादा अतिक्रमणों को हटाया जा चुका है, जबकि 658 अतिक्रमण अब भी मौजूद हैं, जिन पर बुलडोजर चलना तय माना जा रहा है। ये वे निर्माण हैं, जो हाईवे के दोनों ओर 40-40 मीटर क्षेत्र के प्रतिबंधित सीमा में हुए हैं। जिले में एनएचएआई की जमीन पर 418 और पीडब्ल्यूडी की जमीन पर 80 के करीब अतिक्रमण है।

    हाईवे और तहसीलवार लेखा-जोखा
    उदयपुर में नेशनल हाईवे की जमीन पर धार्मिक, आवासीय और व्यावसायिक (होटल/ढाबा) तीन श्रेणियों में अतिक्रमण पाए गए हैं।
        धार्मिक- 9
        आवासीय- 97
        व्यावसायिक (होटल/ढाबा)- 312
        कुल अतिक्रमण- 418
        अब तक हटाए- 137
        बकाया- 281

    क्या कहते हैं आंकड़े?
    गोमती चौराहा-उदयपुर सेक्शनः यहां सर्वाधिक 160 अतिक्रमण चिन्हित किए, जिनमें 126 होटल और ढाबे शामिल हैं। इनमें से 20 हटाए गए हैं।

    पिंडवाडा-उदयपुर सेक्शन: एक धार्मिक स्थल, 2 घर और 7 कमर्शियल भवन मिले, इनमें से सभी को हटा दिया गया है।

    बड़गांव तहसील का कुल आंकड़ाः 170 में से 20 हटाए गए और 150 अतिक्रमण हटाए जाने बाकी हैं।

    पिंडवाड़ा-उदयपुर सेक्शनः यहां 53 अतिक्रमण हैं, जिनमें 1 धार्मिक, 7 आवासीय, 45 होटल/ढाबे पाए गए। इनमें से 39 को हटाया जा चुका है।

    पिंडवाड़ा-उदयपुर सेक्शनः 31 अतिक्रमण जिनमें 6 आवासीय और 25 होटल/ढाबे मिले हैं। कोई कार्रवाई नहीं हुई।

    उदयपुर-रतनपुर-शामलाजी सेक्शनः यहां 31 निर्माण चिन्हित किए गए हैं, जिनमें 3 धार्मिक, 5 आवासीय, 23 होटल/ढाबे शामिल थे, इनमें से 17 हटाए जा चुके हैं।

    यहां 21 अतिक्रमण पाए गए हैं, जिनमें 10 आवासीय, 11 होटल/ढाबे शामिल हैं। 12 अतिक्रमण हटाए गए हैं।

    पिंडवाड़ा-उदयपुर सेक्शनः 12 अतिक्रमण मिले, सभी हटा दिए गए।

    उदयपुर-रतनपुर-शामलाजी सेक्शनः यहां 64 अतिक्रमण (35 आवासीय, 28 होटल/ढाबे) मिले, जिनमें से 19 हटाए गए।

    सिक्स लेन ग्रीनफील्ड उदयपुर बाइपासः यहां 14 अवैध निर्माण दर्ज (13 होटल/ढाबे), जिनमें से सभी को हटाया जा चुका है।

    भिंडर व वल्लभनगर तहसील (एनएच-76)

    भिंडरः कुल 3 व्यावसायिक निर्माण, सभी हटा दिए।

    वल्लभनगर: कुल 19 व्यावसायिक निर्माण, 13 हटाए।

    टास्क फोर्स करेगी सीधी कार्रवाई
    हाईवे सुरक्षा क्षेत्र पर सबसे ज्यादा कब्जा होटल और ढाबा संचालकों का है। उदयपुर में एनएच-58, 27, 48 और ग्रीन फील्ड हाईवे निकल रहे हैं। जिले में इनकी लंबाई करीब 315 किमी से ज्यादा है। जिला कलक्टर गौरव अग्रवाल ने बताया कि जिले में एनएचएआई की जमीन पर 418 और पीडब्ल्यूडी की जमीन पर 80 के करीब अतिक्रमण हैं। रोड सेफ्टी टास्क फोर्स की मीटिंग कर रहे हैं। इसके बाद जिले भर में 137 स्थानों से अतिक्रमण हटाए और शेष 281 स्थानों पर नोटिस दिए गए हैं और जल्द ही वहां भी कार्रवाई शुरू होगी।

     

  • राजस्थान में विज्ञान शिक्षा को नई उड़ान, 430 करोड़ के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को मंजूरी

    राजस्थान में विज्ञान शिक्षा को नई उड़ान, 430 करोड़ के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को मंजूरी

    जयपुर
    राजस्थान में विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान को वैश्विक मानकों के अनुरूप ढालने की दिशा में एक ऐतिहासिक और बड़ा कदम उठाया गया है। प्रदेश में विद्यार्थियों, शिक्षकों और शोध संस्थानों को आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राजस्थान कौंसिल ऑफ साइंस एजुकेशन ने 430.69 करोड़ रुपये मूल्य के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास कार्यों के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। नेशनल बिल्डिंग्स कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NBCC) के साथ हुए इस महत्वपूर्ण करार के तहत इस वृहद परियोजना का मुख्य मकसद राजस्थान में विज्ञान शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, दूरदराज के क्षेत्रों तक आधुनिक प्रयोगशालाएं पहुंचाना और युवाओं में नवाचार तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देना है।

    इस 430 करोड़ रुपये के मेगा प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन से प्रदेश के सरकारी और स्वायत्त शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ने वाले लाखों विद्यार्थियों को सीधे तौर पर लाभ पहुंचेगा और उन्हें राष्ट्रीय स्तर के आधुनिक अध्ययन केंद्र उपलब्ध होंगे।

    राजस्थान में लंबे समय से साइंस एजुकेशन के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने और ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों के बीच शैक्षणिक अंतर को कम करने की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।

    मॉडर्न इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण: 430.69 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट के तहत अत्याधुनिक शैक्षणिक परिसरों, हाई-टेक विज्ञान प्रयोगशालाओं और रिसर्च सेंटरों का निर्माण व सुदृढ़ीकरण किया जाएगा।

    एडवांस्ड लर्निंग रिसोर्सेज: विद्यार्थियों को आधुनिक उपकरणों, डिजिटल लैब, रोबोटिक्स और स्टेम (STEM) लर्निंग से जुड़ी तकनीकें उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे वे प्रतियोगी परीक्षाओं और रिसर्च क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।

    शिक्षकों और शोधकर्ताओं के लिए सुविधाएं: इस परियोजना में न केवल विद्यार्थियों बल्कि शिक्षकों और शोधार्थियों के लिए भी आधुनिक प्रशिक्षण वातावरण तैयार करने का प्रावधान किया गया है।

    युवाओं को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर का माहौल
    राजस्थान के युवाओं में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के प्रति हमेशा से गहरा रुझान रहा है, लेकिन बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर के अभाव में कई मेधावी छात्र बड़े शहरों की ओर रुख करने को मजबूर होते थे।

    430 करोड़ रुपये के इस निवेश के बाद राजस्थान के विभिन्न जिलों में ही विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का लैब इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रयोगात्मक अध्ययन का अवसर मिलेगा। आधुनिक लैब और इनोवेशन हब बनने से राजस्थान के युवाओं को अपने नए विचारों और वैज्ञानिक सोच को धरातल पर उतारने का मंच मिलेगा।

    स्कूली और उच्च शिक्षा स्तर पर विज्ञान के व्यावहारिक अध्ययन को बढ़ावा देने के लिए नए स्टडी सेंटर और एक्जीबिशन जोन भी विकसित किए जाएंगे।

    गुणवत्तापूर्ण निर्माण और समयबद्ध पूरा करने का लक्ष्य
    प्रोजेक्ट को पारदर्शी, मजबूत और समय पर पूरा करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण क्षेत्र के विशेषज्ञों के साथ रणनीतिक सहयोग किया गया है।पूरे निर्माण कार्य में पर्यावरण-अनुकूल टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल और आधुनिक वास्तुकला का उपयोग किया जाएगा

    शैक्षणिक भवनों और प्रयोगशालाओं को सुरक्षा और आधुनिक तकनीकों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया जा रहा है। एमओयू के तहत निर्धारित समय सीमा में सभी विकास कार्यों को पूरा कर राज्य के विद्यार्थियों को समर्पित करने का खाका तैयार किया गया है।

    शिक्षा और रोजगार के नए अवसर
    यह 430 करोड़ रुपये से अधिक का प्रोजेक्ट केवल इमारतों और प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर प्रदेश के सामाजिक और आर्थिक विकास पर भी पड़ेगा।

    जब युवाओं को स्कूल और कॉलेज स्तर पर ही आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों को संचालित करने का अनुभव मिलेगा, तो उनकी तकनीकी कुशलता मजबूत होगी।

    साइंस और टेक्नोलॉजी में बेहतर प्रशिक्षण मिलने से राजस्थान के युवाओं को आईटी, रिसर्च, बायोटेक्नोलॉजी और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे।

     

  • 56 साल पुराने चर्च संपत्ति विवाद में हाई कोर्ट ने एसएमएनसी के पक्ष में फैसला

    56 साल पुराने चर्च संपत्ति विवाद में हाई कोर्ट ने एसएमएनसी के पक्ष में फैसला

    रांची
     हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने संताल मिशन आफ नार्दर्न चर्चेज (एसएमएनसी) और ट्रस्ट एसोसिएशन आफ नार्दर्न इवेंजेलिकल लूथरन चर्च (एनईएलसी) के बीच लगभग 56 वर्षों से चले आ रहे चर्च संपत्ति विवाद पर अहम निर्णय सुनाया है।

    गुरुवार को खंडपीठ ने एसएमएनसी के खिलाफ दायर दोनों अपील याचिकाओं को खारिज करते हुए वर्ष 1992 में एकल पीठ द्वारा दिए गए निर्णय को बरकरार रखा। अदालत ने कहा कि 10 फरवरी 1968 को किया गया ट्रस्ट ट्रांसफर (इंस्ट्रूमेंट आफ ट्रांसफर) कानून के अनुरूप था और उसे अवैध घोषित करने का कोई आधार नहीं है।

    यह विवाद वर्ष 1880 में स्थापित संताल मिशन आफ नार्दर्न चर्चेज (एसएमएनसी) से जुड़ा है। इस मिशन की स्थापना संताल परगना क्षेत्र में शिक्षा, सामाजिक उत्थान और ईसाई मिशनरी कार्यों के उद्देश्य से की गई थी। मिशन के नाम पर बड़ी संख्या में चल और अचल संपत्तियां खरीदी गईं और उनके संचालन के लिए ट्रस्ट बनाया गया।

    बाद में वर्ष 1956 में कंपनी अधिनियम के तहत ट्रस्ट एसोसिएशन आफ नार्दर्न इवेंजेलिकल लूथरन चर्च (एनईएलसी) का गठन हुआ। इसके बाद 10 फरवरी 1968 को तत्कालीन ट्रस्टियों ने एक दस्तावेज के माध्यम से एनईएलसी को नया ट्रस्टी नियुक्त कर दिया।

    इसी हस्तांतरण को लेकर विवाद शुरू हुआ। वर्ष 1971 में दायर टाइटल सूट में कुछ लाभार्थियों ने आरोप लगाया कि ट्रस्टियों ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए 1968 का हस्तांतरण किया। उन्होंने ट्रस्ट के प्रबंधन के लिए नई योजना बनाने, ट्रस्टियों को हटाने और ट्रांसफर को अवैध घोषित करने की मांग की।

    परस्पर विरोधी दोनों निर्णय को पहले पटना हाई कोर्ट में चुनौती दी गई
    एनईएलसी ने मिशन की संपत्तियों पर अपने अधिकार की घोषणा और विरोधी पक्ष को हस्तक्षेप से रोकने की मांग की। 28 जून 1985 को ट्रायल कोर्ट ने पहले मुकदमे में 1968 के ट्रांसफर को अवैध और प्रभावहीन घोषित कर दिया तथा ट्रस्ट की संपत्ति के हस्तांतरण पर रोक लगा दी। पांच फरवरी 1986 को दूसरे मुकदमे में ट्रायल कोर्ट ने एनईएलसी के पक्ष में फैसला सुनाया।

    इस तरह दोनों मामलों में परस्पर विरोधी निर्णय सामने आए। बाद में दोनों फैसलों को पटना हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। 30 जून 1992 को एकलपीठ ने ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को निरस्त कर दिया, जिसमें 1968 के ट्रांसफर को अवैध घोषित किया गया था, और एनईएलसी के पक्ष में दिए गए निर्णय को बरकरार रखा।

    झारखंड राज्य गठन के बाद दोनों अपील झारखंड हाई कोर्ट स्थानांतरित हो गए। खंडपीठ ने अपने निर्णय में कहा कि सुनवाई के दौरान यह साबित नहीं हो सका कि ट्रस्टियों ने ट्रस्ट का दुरुपयोग किया या न्यासभंग किया। जब कुप्रबंधन का आरोप सिद्ध नहीं हुआ तो केवल ट्रांसफर दस्तावेज को अवैध नहीं ठहराया जा सकता।

    अदालत ने यह भी कहा कि ट्रायल कोर्ट ने स्वयं ट्रस्टियों को हटाने या नया प्रबंधन गठित करने जैसी मुख्य मांगें स्वीकार नहीं की थीं, इसलिए केवल ट्रांसफर को अवैध घोषित करना कानूनी रूप से उचित नहीं था।

  • सोनीपत से दिल्ली आईएसबीटी तक दौड़ेंगी ई-बसें, 70 रुपये होगा किराया

    सोनीपत से दिल्ली आईएसबीटी तक दौड़ेंगी ई-बसें, 70 रुपये होगा किराया

    सोनीपत
     इलेक्ट्रिक बसों (ई-बस) का संचालन अब हरियाणा की सीमा से आगे बढ़ाते हुए सीधे दिल्ली के आइएसबीटी (कश्मीरी गेट) तक किया जाएगा। इस रूट के लिए प्रति यात्री किराया 70 रुपये तय करने पर सहमति बन गई है।

    जिससे यात्रियों को एक किफायती और सुगम सफर मिलने का रास्ता साफ हो गया है। शुक्रवार को ट्रायल के लिए दो बसों को भेजा जाएगा। इसके बाद समयसारणी निर्धारित कर ई-बसों का संचालन शुरू कर दिया जाएगा।

    दिल्ली रूट पर 70 रुपये होगा किराया
    दिल्ली रूट के लिए किराया ई-बसों का 87 रुपये प्रस्तावित किया गया था, जबकि एसी बस का किराया 79 रुपये है। इस किराये के अंतर के चलते ई-बसों को दिल्ली के लिए नहीं चलाया गया और मुख्यालय से किराया 70 रुपये करने की मांग की गई।

    अब मुख्यालय ने ई-बसों का किराया दिल्ली के लिए 70 रुपये करने की मंजूरी दे दी है। रोडवेज अब दिल्ली रूट पर ई-बसों का संचालन करेंगा। अब कम किराए और पर्यावरण-अनुकूल इलेक्ट्रिक बस सेवा होने के कारण दैनिक यात्रियों, नौकरीपेशा लोगों और विद्यार्थियों को इसका विशेष लाभ मिलेगा।

    अब सीधे आईएसबीटी तक मिलेगा सफर
    प्रारंभिक योजनाओं में इन बसों को केवल कुंडली बाॅर्डर तक ही संचालित किया जा रहा था, जिससे यात्रियों को दिल्ली के अंदर प्रवेश करने के लिए अन्य वाहनों का सहारा लेना पड़ता था, लेकिन यात्रियों की मांग और उनकी सहूलियत को देखते हुए रूट का दायरा बढ़ाने का निर्णय लिया गया।

    अब सोनीपत डिपो की ये ई-बसें सीधे दिल्ली आईएसबीटी तक जाएंगी, जिससे यात्रियों को बार-बार वाहन बदलने की झंझट से मुक्ति मिलेगी और उनका समय भी बचेगा।

    सोनीपत डिपो का अंतर-राज्यीय संचालन में पहला कदम
    सोनीपत डिपो के बेड़े में शामिल 15 ई-बसों में से यह पहला मौका होगा जब किसी बस का संचालन दूसरे राज्य के लिए किया जा रहा है। इससे पहले सोनीपत डिपो की ई-बसों का संचालन केवल गोहाना, पानीपत, गन्नौर और रोहतक जैसे स्थानीय व अंतर-जिला रूटों पर ही किया जा रहा है।

    दिल्ली रूट पर इन बसों के उतरने जीएम की मुख्य भूमिका है। उन्होंने अपने स्तर पर दिल्ली मेंं बसों को लेकर जाने की अनुमति ली है।

    सभी तय स्टापेज पर रुकेंगी बसें
    यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रोडवेज प्रशासन द्वारा इस रूट का टाइमटेबल (समयसारिणी) जल्द ही आधिकारिक तौर पर जारी किया जाएगा।

    अधिकारियों के अनुसार बसें तय समय पर डिपो से रवाना होंगी और मार्ग में पड़ने वाले सभी निर्धारित स्टापेज पर रुकेंगी, ताकि रास्ते के यात्रियों को भी सुगमता से परिवहन सेवा मिल सके।

        दिल्ली रूट पर ई-बस सेवा शुरू करने की सभी तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। 70 रुपये किराया तय होने के बाद अब प्रशासनिक औपचारिकताओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। शुक्रवार को ट्रायल के लिए दो बसों को भेजा जाएगा।

        – संजय कुमार, जीएम, रोडवेज सोनीपत

     

  • उदयपुर में मानसून सक्रिय, लसाड़िया में साढ़े नौ इंच बारिश से नदियां उफनी

    उदयपुर में मानसून सक्रिय, लसाड़िया में साढ़े नौ इंच बारिश से नदियां उफनी

    उदयपुर
     दक्षिणी राजस्थान में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। सलूंबर जिले के लसाड़िया क्षेत्र में बीते 24 घंटों में 235 मिलीमीटर (करीब साढ़े नौ इंच) बारिश दर्ज की गई, जो प्रदेश में सर्वाधिक रही। भारी बारिश के बाद खरका और गोमती नदी में पानी की जोरदार आवक शुरू हो गई।

    नदी में बहता पानी देखने के लिए सुबह से बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंच गए। मौसम विभाग ने शुक्रवार को उदयपुर और सलूंबर जिलों के लिए भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

    जिला बाढ़ नियंत्रण कक्ष के अनुसार, लसाड़िया के अलावा झल्लारा में 88, सेमारी में 51 और सलूंबर मुख्यालय पर 50 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। सराड़ी गांव के पास गोमती नदी और सेमारी क्षेत्र की खरका नदी में पानी का बहाव तेज हो गया है। खरका नदी का पानी आगे जाकर जयसमंद झील में पहुंचता है। लगातार दो दिनों से हो रही बारिश के कारण क्षेत्र के मौसम में ठंडक घुल गई है और लोगों को उमस से राहत मिली है।

    जल संसाधन विभाग के अनुसार बीते 24 घंटों में उदयपुर के डाया और सोम पिकअप वियर वर्षामापी केंद्रों पर तीन-तीन इंच, जबकि सलूंबर और कोटड़ा क्षेत्र में सवा-सवा इंच वर्षा दर्ज की गई। हालांकि, अच्छी बारिश के बावजूद उदयपुर जिले में अब भी सामान्य से 36 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। अब तक जिले में 214.1 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, जबकि केवल 137.5 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है।

    बारिश से बढ़ी किसानों की उम्मीद, जयसमंद के कैचमेंट में पहुंचा पानी
    लंबे समय से सामान्य से कम बारिश झेल रहे उदयपुर और सलूंबर जिले के किसानों के लिए गुरुवार रात हुई बारिश राहत लेकर आई है। लसाड़िया, सेमारी और सराड़ी क्षेत्र में अच्छी वर्षा होने से नदियों और नालों में पानी की आवक शुरू हो गई है। खरका नदी का पानी जयसमंद झील के कैचमेंट में पहुंचने लगा है, जिससे झील में जलस्तर बढ़ने की उम्मीद जगी है।

    मौसम विभाग का ऑरेंज अलर्ट और अगले पांच दिनों तक बारिश की संभावना किसानों के साथ-साथ जल संसाधन विभाग के लिए भी राहत भरी खबर मानी जा रही है।