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  • हरियाणा भाजपा की नई कार्यकारिणी जल्द घोषित, केंद्रीय नेतृत्व कर रहा अंतिम मंथन

    हरियाणा भाजपा की नई कार्यकारिणी जल्द घोषित, केंद्रीय नेतृत्व कर रहा अंतिम मंथन

    पंचकूला
    हरियाणा भाजपा में नई प्रदेश कार्यकारिणी के गठन की प्रक्रिया अंतिम दौर में पहुंच गई है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने नई दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) बीएल संतोष और केंद्रीय ऊर्जा, आवासन एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल से उनके आवास पर शिष्टाचार भेंट की। मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री ने बताया कि समसामयिक विषयों और समाजहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा हुई तथा संगठन महामंत्री व केंद्रीय मंत्री का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।

    इससे पहले प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता भी बीएल संतोष से मिलकर संगठनात्मक विषयों पर विस्तार से चर्चा कर चुकी हैं। दोनों मुलाकातों को नई कार्यकारिणी के गठन की अंतिम तैयारियों, राज्य में एसआइआर अभियान की प्रगति, भविष्य की कार्ययोजना तथा छात्रों के आंदोलन की राज्य में स्थिति पर हुई चर्चा के रूप में जोड़कर देखा जा रहा है।

    भाजपा सूत्रों के अनुसार नई प्रदेश कार्यकारिणी की सूची किसी भी समय जारी हो सकती है। संभावित नामों का पैनल तैयार है और अब केंद्रीय नेतृत्व अंतिम मंथन कर रहा है। पार्टी इस बार जातीय और क्षेत्रीय संतुलन के साथ युवाओं व महिलाओं को अधिक अवसर देने की रणनीति पर काम कर रही है।

    महामंत्रियों की संख्या में बढ़ोतरी करने की तैयारी
    यही वजह है कि प्रदेश उपाध्यक्षों और महामंत्रियों की संख्या मौजूदा कार्यकारिणी की तुलना में बढ़ाई जा सकती है। सूत्रों के मुताबिक महामंत्रियों की संख्या छह से बढ़ाकर आठ तक किए जाने पर भी विचार चल रहा है। अभी तक भाजपा में तीन प्रदेश महामंत्री होते हैं। खुद अर्चना गुप्ता प्रदेश अध्यक्ष बनने से पहले प्रदेश महामंत्री थी।

    कई नए चेहरों को प्रदेश कमेटी में जिम्मेदारी मिलने की संभावना है, जबकि कुछ मौजूदा पदाधिकारियों का कार्यकाल व स्तर दोनों बढ़ाए जा सकते हैं। नई कार्यकारिणी पर चर्चा के लिए प्रदेश अध्यक्ष डा. अर्चना गुप्ता और बीएल संतोष के बीच भाजपा मुख्यालय में करीब एक घंटे तक बैठक हुई।

    इससे एक दिन पहले नई दिल्ली स्थित हरियाणा भवन में वरिष्ठ नेताओं की छोटी टोली की बैठक में भी संभावित नामों पर मंथन किया गया था, जिसमें मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के भी शामिल होने की जानकारी मिली है।

    केंद्रीय नेतृत्व के बीच होगी चर्चा
    भाजपा सूत्रों का कहना है कि अंतिम सूची पर राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और केंद्रीय नेतृत्व के बीच एक और दौर की चर्चा हो सकती है। इसके बाद प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा कर दी जाएगी।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कार्यकारिणी केवल संगठन का विस्तार नहीं होगी, बल्कि 2029 के विधानसभा चुनाव और आगामी संगठनात्मक अभियानों को ध्यान में रखते हुए भाजपा की नई राजनीतिक रणनीति की झलक भी देगी।

  • राजस्थान में सीएलजी समितियों में राजनीतिक कार्यकर्ताओं की सदस्यता का रास्ता खुला

    राजस्थान में सीएलजी समितियों में राजनीतिक कार्यकर्ताओं की सदस्यता का रास्ता खुला

    जयपुर
    राजस्थान में पुलिस और आम जनता के बीच बेहतर तालमेल, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और आपराधिक गतिविधियों पर लगाम कसने के उद्देश्य से गठित सामुदायिक संपर्क समूहों (CLG – Community Liaison Group) की व्यवस्था में भजनलाल सरकार ने एक बड़ा और नीतिगत बदलाव किया है। गृह विभाग की ओर से जारी आधिकारिक अधिसूचना के तहत अब राजनीतिक दलों और उनसे जुड़े संगठनों के कार्यकर्ता भी थाना व पंचायत स्तर पर गठित होने वाली सीएलजी समितियों के सदस्य बन सकेंगे। राज्य सरकार ने राजस्थान पुलिस नियम, 2008 के नियम 12(5) के क्लॉज (सी) को पूरी तरह से निरस्त कर दिया है, जिसके तहत पहले किसी भी राजनीतिक दल के सक्रिय कार्यकर्ताओं या पदाधिकारियों के सीएलजी सदस्य बनने पर स्पष्ट पाबंदी लगी हुई थी। इस फैसले के बाद प्रदेश भर के थानों में स्थानीय स्तर पर सामाजिक व राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदलने के आसार हैं और जमीनी स्तर पर राजनीतिक कार्यकर्ताओं को पुलिस प्रशासन के साथ सीधे संवाद का एक नया मंच मिल गया है।

    गृह विभाग द्वारा 19 जुलाई को जारी अधिसूचना के बाद राजस्थान की पुलिसिंग और प्रशासनिक व्यवस्था में एक नई बहस छिड़ गई है।

    नियम 12(5)(सी) को हटाया गया
     साल 2008 में तत्कालीन भाजपा (वसुंधरा राजे) सरकार के दौरान बने राजस्थान पुलिस नियमों में यह प्रावधान जोड़ा गया था कि सीएलजी को पूरी तरह गैर-राजनीतिक और निष्पक्ष रखा जाएगा।

    राजनीतिक कार्यकर्ताओं को रास्ता साफ
    अब इस प्रतिबंधात्मक क्लॉज को हटा दिए जाने के बाद सत्ताधारी दल सहित सभी राजनीतिक दलों से जुड़े स्थानीय नेता, कार्यकर्ता और सामाजिक-राजनीतिक पृष्ठभूमियों वाले लोग सीएलजी सदस्यता के लिए आधिकारिक रूप से पात्र हो गए हैं।

    संगठन स्तर पर नई जिम्मेदारी
    राजनीतिक विश्लेषक इसे सरकार द्वारा जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को प्रशासनिक सहयोग और सामाजिक पहचान देने की एक बड़ी पहल के रूप में देख रहे हैं।

    क्या काम करती है सीएलजी?
    आम नागरिकों और पुलिस प्रशासन के बीच थाना स्तर पर सामंजस्य बनाने में सीएलजी सदस्यों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। सीएलजी सदस्य स्थानीय स्तर पर शांति व्यवस्था बनाए रखने, त्योहारों व धार्मिक जुलूसों के दौरान सौहार्द कायम करने, प्राकृतिक आपदाओं के समय सहायता पहुंचाने और अपराध नियंत्रण में पुलिस को गोपनीय सुझाव देने का काम करते हैं।

    वर्तमान में राजस्थान के सभी पुलिस थानों और पंचायतों में मिलाकर 75 हजार से अधिक सीएलजी सदस्य सक्रिय हैं। नियम के अनुसार प्रत्येक पंचायत स्तर पर 5 सदस्य और थाना स्तर पर 30 सदस्य नियुक्त करने का प्रावधान है। इन सदस्यों की नियुक्ति संबंधित थाना अधिकारी (SHO) और वृत्ताधिकारी (CO) की सिफारिश पर जिला पुलिस अधीक्षक (SP) द्वारा की जाती है।

    फैसले पर गर्माई सियासत
    सरकार के इस आदेश के सार्वजनिक होते ही राजस्थान के राजनीतिक हलकों में तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इस निर्णय का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि भाजपा और आरएसएस के लोग अब थानों में सीधी एंट्री लेकर कानून-व्यवस्था को प्रभावित करना चाहते हैं। इससे पुलिस की निष्पक्षता और जनता का भरोसा दोनों खत्म होगा।

    भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि सीएलजी में समाज के सभी वर्गों और राजनीतिक वर्ग का भी संतुलित प्रतिनिधित्व होना चाहिए। ऐसे लोगों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए जिनकी सोच सकारात्मक हो और जो समाज में आपसी तालमेल बिठा सकें।

    क्या निष्पक्ष पुलिसिंग पर पड़ेगा असर?
    गृह विभाग के इस आदेश के बाद अब जिला स्तर पर पुलिस कप्तानों (SP) को नई सीएलजी समितियों के गठन के दौरान नए मापदंडों का पालन करना होगा। कुछ पूर्व पुलिस अधिकारियों और प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि राजनीतिक कार्यकर्ताओं की सीधी एंट्री से कई मामलों में स्थानीय पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं और आपसी गुटबाजी थानों तक पहुंच सकती है।

    वहीं सरकार से जुड़े लोगों का मानना है कि स्थानीय स्तर पर जनसमस्याओं को उठाने और पुलिस व जनता के बीच पुल का काम करने में राजनीतिक व सामाजिक रूप से सक्रिय कार्यकर्ताओं का अनुभव काफी मददगार साबित होगा।

     

  • हरियाणा में आज कई जिलों में होगी तेज बारिश, ऑरेंज अलर्ट जारी

    हरियाणा में आज कई जिलों में होगी तेज बारिश, ऑरेंज अलर्ट जारी

    हिसार.

    प्रदेश के 15 जिलों में शुक्रवार को हल्की वर्षा हुई। जिलों में रुक-रुक कर हो रही वर्षा के चलते मौसम सुहावना बना रहा। मानसून के सक्रिय होने के बाद 27 जुलाई के बाद फिर से तेज वर्षा का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। कारण है कि मानसून टर्फ के उत्तर की तरफ बढ़ने से नमी वाली हवाएं आ सकती है।

    भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार तापमान में तेजी से बदलाव हो सकता है। अभी हर रोज हल्की बूंदाबांदी या वर्षा हो रही है। इससे मौसम सुहावना बना है। दिन के समय धूप निकलने से उमस जरूर बढ़ी है। चौधरी चरणसिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मौसम विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. मदन खीचड़ ने बताया कि मानसून टर्फ की अक्षय रेखा की उत्तरी सीमा नीचे की ओर जैसलमेर, गुना, सीधी, डेल्टागंज से बंगाल की खाड़ी तक बनी हुई है, जिससे हरियाणा राज्य में मानसून की गतिविधियों में थोड़ी कमी बनी होने से कहीं-कहीं बारिश हो रही है।

    अरब सागर से नमी वाली हवाएं तथा दक्षिण पूर्व राजस्थान के ऊपर एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन बनने से 25 से 27 जुलाई के दौरान राज्य में हवाओं व गरज-चमक के साथ कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। परंतु 27 जुलाई से मानसून टर्फ उत्तर की तरफ बढ़ने तथा बंगाल की खाड़ी की तरफ से नमी वाली हवाएं आने की संभावना है जिससे 28 जुलाई से 30 जुलाई के दौरान हरियाणा राज्य के उत्तरी जिलों में ज्यादातर क्षेत्रों में मध्यम से तेज बारिश होने की संभावना है। पश्चिमी व दक्षिणी जिलों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। इस दौरान कुछ एक स्थानों पर तेज बारिश की भी संभावना है। इस दौरान बीच-बीच में हवाओं में बदलाव की संभावना है जिससे दिन के तापमान में हल्की बढ़ोतरी परंतु रात्रि तापमान में कमी आने की संभावना है।

    वर्षा की चेतावनी
    पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, करनाल, सोनीपत, पानीपत, कैथल, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, झज्जर, गुरुग्राम, मेवात, पलवल, फरीदाबाद, रोहतक, सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, जींद, भिवानी व चरखी दादरी।

  • पूर्व विजिलेंस प्रमुख परमार को बड़ी राहत, आरोप साबित नहीं होने पर सरकार ने बहाल किए सभी सेवा लाभ

    पूर्व विजिलेंस प्रमुख परमार को बड़ी राहत, आरोप साबित नहीं होने पर सरकार ने बहाल किए सभी सेवा लाभ

    चंडीगढ़.

    पंजाब सरकार ने पूर्व विजिलेंस प्रमुख और वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सुरिंदर पाल सिंह परमार को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ चल रही विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई समाप्त कर दी है। गृह विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार विभागीय जांच में परमार के खिलाफ कर्तव्य में लापरवाही या दुराचार के आरोप सिद्ध नहीं हुए।

    राज्यपाल ने जांच अधिकारी की रिपोर्ट स्वीकार करते हुए उनके निलंबन अवधि को भी सेवाकाल मानने और सभी सेवा लाभ बहाल करने की मंजूरी दे दी है। गृह विभाग के अनुसार पूर्व विशेष डीजीपी (ला एंड आर्डर) अर्पित शुक्ला को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया था। जांच में उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया कि परमार के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि नहीं होती। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि विजिलेंस ब्यूरो ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 17-ए के प्रावधानों का पालन करते हुए कार्रवाई की थी और किसी प्रकार की प्रक्रियागत चूक सामने नहीं आई।

    24 जुलाई को औपचारिक आदेश जारी
    जांच रिपोर्ट मिलने के बाद राज्यपाल ने 22 जुलाई को इसे मंजूरी दी, जबकि 24 जुलाई को गृह सचिव गुरकिरत किरपाल सिंह ने औपचारिक आदेश जारी कर विभागीय कार्यवाही समाप्त करने की पुष्टि की। आदेश के साथ ही परमार की सेवा स्थिति और अन्य सभी लाभ भी बहाल कर दिए गए। परमार ने बताया कि जांच में उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की अनियमितता या गलत आचरण का कोई साक्ष्य नहीं मिला। उन्होंने कहा कि उन्होंने पूरे कार्यकाल में ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के साथ काम किया तथा जांच रिपोर्ट ने इस बात की पुष्टि कर दी है।

    परिवहन विभाग से जुड़ा है मामला
    यह पूरा मामला अप्रैल 2025 में पंजाब परिवहन विभाग में कथित भ्रष्टाचार की जांच से जुड़ा है। उस समय विजिलेंस ब्यूरो ने रिश्वतखोरी, अवैध परमिट, वसूली और परिवहन विभाग से जुड़े अधिकारियों, बस आपरेटरों तथा बिचौलियों के कथित गठजोड़ की जांच शुरू की थी। उस दौरान परमार विजिलेंस ब्यूरो के प्रमुख थे। इसके बाद 18 मई 2025 को गृह विभाग ने अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1969 के नियम-8 के तहत उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की थी। आरोप था कि उन्होंने अभियान के दौरान अपने कर्तव्यों का समुचित निर्वहन नहीं किया। जांच लंबित रहने तक उन्हें निलंबित भी किया गया था। अब विस्तृत विभागीय जांच में आरोपों की पुष्टि नहीं होने पर सरकार ने सभी आरोप वापस लेते हुए उन्हें पूरी तरह क्लीन चिट दे दी है।

  • बिहार में खनिज आधारित उद्योगों से निवेश और रोजगार के नए अवसर बढ़ेंगे जल्द

    बिहार में खनिज आधारित उद्योगों से निवेश और रोजगार के नए अवसर बढ़ेंगे जल्द

    पटना
     बिहार के औद्योगिक विकास को गति देने में कोयला और खनिज क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। राज्य के जमुई, भागलपुर, गया और औरंगाबाद सहित कई जिलों में खनिज संसाधनों की संभावनाएं हैं। इन क्षेत्रों में खनिज अन्वेषण और उपलब्ध संसाधनों के वैज्ञानिक उपयोग से राज्य में खनिज आधारित उद्योगों के विकास और रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं।

    यह बातें केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्रालय के राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कहीं। वह बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (बीआइए) की ओर से आयोजित विशेष संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

    उन्होंने कहा कि बिहार के उद्यमियों को कोयला खनन क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए छोटे-छोटे कोल ब्लाक उपलब्ध कराने की दिशा में अवसर तलाशे जा रहे हैं। उन्होंने स्थानीय उद्यमियों से इस क्षेत्र में अपनी भागीदारी बढ़ाने का आह्वान किया।

    उन्होंने कहा कि कोयला और खनिज क्षेत्र में स्थानीय उद्योगों की सक्रिय भागीदारी बढ़ने से राज्य में निवेश के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश आत्मनिर्भरता और विकसित भारत-2047 के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है

    ऊर्जा सुरक्षा, खनिज संसाधनों का वैज्ञानिक उपयोग और औद्योगिक विकास इस दिशा में महत्वपूर्ण हैं। केंद्र सरकार बिहार में उद्योगों के विकास, निवेश संवर्धन और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

    उन्होंने उद्योग जगत से सरकार के साथ साझेदारी में काम करते हुए नए निवेश और रोजगार सृजन की दिशा में आगे आने की अपील की। कार्यक्रम की अध्यक्षता बीआइए के अध्यक्ष रामलाल खेतान ने की।

    कार्यक्रम में उद्योगपतियों, उद्यमियों और निवेशकों ने राज्य में औद्योगिक विकास, निवेश और खनिज आधारित उद्योगों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अपने सुझाव दिए।

    संचालन बीआइए की नेटवर्किंग कमेटी के अध्यक्ष मनीष कुमार तिवारी ने किया। धन्यवाद ज्ञापन महासचिव अमरनाथ जायसवाल ने किया। इस अवसर पर बीआइए के उपाध्यक्ष पुरुषोत्तम कुमार अग्रवाल, देव प्रकाश सिंह, पूर्व अध्यक्ष केपीएस केसरी, अरुण अग्रवाल भी थे।

     

  • हरियाणा के पहाड़ी किसानों की नई पहल, प्राकृतिक मिर्च की आधुनिक खेती से बढ़ेगी आय

    हरियाणा के पहाड़ी किसानों की नई पहल, प्राकृतिक मिर्च की आधुनिक खेती से बढ़ेगी आय

    पंचकूला.

    हरियाणा के पहाड़ी क्षेत्र मोरनी में प्राकृतिक मिर्च की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। किसान कृषि की आधुनिक तकनीक सीख रहे हैं। उद्यान विभाग की ओर से शुक्रवार को पंचायत घर, मोरनी में एमडीएच काॅन्ट्रेक्ट फाॅर्मिंग कार्यक्रम के तहत प्राकृतिक एवं जैविक मिर्च की खेती विषय पर प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया।

    मोरनी क्षेत्र के करीब 80 किसानों ने प्राकृतिक मिर्च की खेती की आधुनिक तकनीकें सीखीं। कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि प्राकृतिक एवं जैविक खेती अपनाने से उत्पादन लागत कम होती है, मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और रसायन अवशेष रहित गुणवत्तापूर्ण उत्पादन प्राप्त होता है। इससे किसानों को बाजार में बेहतर कीमत मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है। प्रशिक्षण के दौरान कृषि वैज्ञानिक डा. राजेश लाठर और डा. गजेन्द्र ने किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक तरीके से मिर्च की खेती करने के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने गुणवत्तायुक्त पौध सामग्री के चयन, भूमि की तैयारी, पोषक तत्व प्रबंधन, जीवामृत एवं अन्य प्राकृतिक आदानों के उपयोग, कीट एवं रोगों के प्राकृतिक नियंत्रण, सिंचाई प्रबंधन तथा गुणवत्तापूर्ण उत्पादन बढ़ाने की वैज्ञानिक तकनीकों पर विस्तार से जानकारी दी।

    इस अवसर पर उद्यान विकास अधिकारी प्रत्युष चौहान ने किसानों को विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए प्राकृतिक खेती के साथ अनुबंध (कान्ट्रैक्ट) खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों द्वारा सुझाई गई तकनीकों को अपनाकर किसान मिर्च की खेती को अधिक लाभकारी बना सकते हैं। कार्यक्रम में किसानों ने प्राकृतिक खेती और अनुबंध खेती से जुड़ी योजनाओं में भी विशेष रुचि दिखाई।

  • सफाई कर्मियों पर लाठीचार्ज मामले में CM मान का बड़ा एक्शन, DSP सस्पेंड

    सफाई कर्मियों पर लाठीचार्ज मामले में CM मान का बड़ा एक्शन, DSP सस्पेंड

    बरनाला.

    बरनाला में 22 जुलाई को सफाई कर्मचारियों पर हुए लाठीचार्ज के मामले में मुख्यमंत्री भगवंत मान के निर्देश के बाद डीएसपी सतवीर सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इसकी पुष्टि संगरूर से सांसद व आप नेता गुरमीत सिंह मीत हेयर ने अपने फेसबुक अकाउंट पर की है।

    उन्होंने उक्त घटना को अत्यंत निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि इस मामले पर मुख्यमंत्री भगवंत मान से विस्तार से चर्चा की गई। बातचीत के दौरान पूरे घटनाक्रम की समीक्षा की गई।
    मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित डीएसपी सतवीर सिंह बैंस को निलंबित कर दिया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी और पूरे प्रकरण की गंभीरता से जांच की जाएगी। उल्लेखनीय है कि बरनाला में सफाई कर्मचारी स्थायी नौकरी और वेनन वृद्धि की मांग को लेकर गत आठ जुलाई से लगातार आंदोलन कर रहे हैं। 

    बीजेपी ने आप और कांग्रेस को घेरा
    उधर, बरनाला में सफाई कर्मचारियों पर पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज को लेकर भाजपा व कांग्रेस ने आप सरकार को घेरा है और मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने कहा कि इस अत्याचार ने आप सरकार का गरीब और दलित विरोधी चेहरा उजागर कर दिया है। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय आम आदमी पार्टी ने सभी कर्मचारियों को पक्का करने की गारंटी दी थी, लेकिन उन्हें नियमित करना तो दूर, अब अपने अधिकार मांगने पर लाठियां बरसाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी पटियाला में रोजगार की मांग कर रहे बेरोजगार युवाओं पर लाठीचार्ज किया गया था और खन्ना में मनरेगा कर्मचारियों को भी बेरहमी से पीटा गया था। अब पंजाब में अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण संघर्ष करना भी अपराध बना दिया गया है।

  • झारखंड में बदलेगा एमडीएम भुगतान सिस्टम, दुकानदारों को सीधे मिलेगी राशि

    झारखंड में बदलेगा एमडीएम भुगतान सिस्टम, दुकानदारों को सीधे मिलेगी राशि

    रांची
    झारखंड राज्य में मध्याह्न भोजन योजना की राशि के आवंटन के प्रक्रिया में बदलाव होगा. इस संबंध में झारखंड राज्य मध्याह्न भोजन प्राधिकरण द्वारा जल्द दिशा-निर्देश जारी किया जायेगा. मध्याह्न भोजन की राशि वर्तमान सरस्वती वाहिनी संचालन समिति के बैंक खाता में भेजा जाता है. राशि की निकासी समिति के अध्यक्ष व संयोजिका द्वारा संयुक्त रूप से किया जाता है. अब नयी व्यवस्था के तहत राशि सरस्वती वाहिनी संचालन समिति के बैंक खाता में ट्रांसफर नहीं किया जायेगा. अब स्कूलों द्वारा मध्याह्न भोजन के लिए समान क्रय करने के बाद वाउचर कुबेर पोर्टल पर अपलोड किया जायेगा. इसके बाद संबंधित दुकानदार को राशि का भुगतान किया जायेगा.

    चार महीने से नहीं मिली राशि
    इधर, स्कूलों को लगभग चार माह से मध्याह्न भोजन को लेकर राशि नहीं मिली है. इस कारण स्कूलों को मध्याह्न भोजन संचालन में परेशानी हो रही है. स्कूलों द्वारा उधार की राशि से एमडीएम का संचालन किया जा रहा है. अप्रैल से कुकिंग कॉस्ट की राशि नहीं दी गयी है. कुकिंग कास्ट की राशि से ही मध्याह्न भोजन की सामग्री की क्रय की जाती है. मध्याह्न भोजन के लिए चावल के अलावा अन्य सामग्री कुकिंग कॉस्ट की राशि से ही क्रय की जाती है. मध्याह्न भोजन का संचालन केंद्र व राज्य सरकार के संयुक्त तत्वावधान में किया जाता है. मध्याह्न भोजन के लिए 60 फीसदी राशि केंद्र व 40 फीसदी राशि राज्य सरकार देती है. वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अब तक राशि का आवंटन नहीं हुआ है. प्राप्त जानकारी के अनुसार इस माह अंत की राशि आंवटन की संभावना है.

    संघ का दावा- बंद होने के कगार पर एमडीएम
    अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश प्रवक्ता नसीम अहमद ने कहा है कि राशि नहीं मिलने के कारण स्कूलों में मध्याह्न भोजन बंद होने के कगार पर पहुंच गया है. दुकानों से उधार समान लेकर बच्चों को खाना खिलाया जा रहा है. उन्होंने कहा है कि स्थिति है शिक्षक या तो अपने पैसे से समान क्रय कर रहे हैं, या फिर दुकानों से उधार सामान लिया जा रहा है. मध्याह्न भोजन बंद होने पर शिक्षक पर ही कार्रवाई की जाती है. उन्होंने जल्द राशि आवंटन की मांग की है.

  • दिल्ली में हल्की बारिश के आसार, तेज हवाओं संग मौसम रहेगा सुहाना आज

    दिल्ली में हल्की बारिश के आसार, तेज हवाओं संग मौसम रहेगा सुहाना आज

    नई दिल्ली
     दिल्ली में शनिवार की सुबह गर्म रही और न्यूनतम तापमान में मामूली बढ़ोत्तरी देखने को मिली। हालांकि दिन की शुरुआत में राजधानी हल्की बारिश दर्ज की गई। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

    आईएमडी के डेटा मुताबिक, शुक्रवार और शनिवार की दरमियानी रात राजधानी के कई इलाकों में हल्की बारिश दर्ज की गई। सफदरजंग में शनिवार रात ढाई बजे से सुबह साढ़े पांच बजे तक 1 मिमि जबकि इस टाइम पीरियड के दौरान पालम में 0.4 मिमि बारिश दर्ज की गई। लोधी रोड शुक्रवार रात साढ़े 11 बजे से शनिवार रात ढाई बजे तक 1.9 मिमि बारिश हुई। वहीं नजफगढ़ में शनिवार सुबह साढ़े पांच बजे से साढ़े आठ बजे तक 0.5 मिमि बारिश दर्ज की गई।

    कहां कितना न्यूनतम तापमान दर्ज?
    शहर के मुख्य मौसम केंद्र सफदरजंग में न्यूनतम तापमान 27.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया जो कि सामान्य से 0.4 डिग्री सेल्सियस और शुक्रवार के मुकाबले 0.4 डिग्री ज्यादा रहा। अन्य मौसम केंद्र की बात करें तो पालम में न्यूनतम तापमान 25.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो कि कल के मुकाबले 0.2 डिग्री ज्यादा था। लोधी रोड में न्यूनतम तामपान 27 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो कि शुक्रवार के मुकाबले 0.2 डिग्री ज्यादा रहा जबकि आया नगर में न्यूनतम तापमान 24.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जिसमें 1.1 डिग्री की बढ़ोत्तरी हुई है।

    40 की स्पीड से चलेंगी हवाएं
    भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने शनिवार को बेहद हल्की से हल्की बारिश की संभावना जताई है। विभाग के अधिकारी ने बताया ‘शनिवार सुबह और दोपहर के समय शहर के कुछ हिस्सो में बेहद हल्की से हल्की बारिश की संभावना है और इस दौरान 20 से 30 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं जिसी स्पीड 40 किलोमीटर तक भी जा सकती है। वहीं इसके बाद दोपहर से रात के बीच हल्की से हल्की बारिश का एक और दौर चल सकता है।’

    रविवार को कैसा रहेगा मौसम का मिजाज?
    भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने कहा है कि इसी तरह का मौसम रविवार (26 जुलाई) को भी रह सकता है। विभाग ने मंगलवार और बुधवार के लिए बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के मुताबिक, राजधानी में आज अधिकतम तापमान 33 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है।

    दिल्ली की हवा का स्तर क्या?
    दिल्ली की हवा की बात करें तो सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (सीपीसीबी) के मुताबिक एयर क्वालिटी इडेंक्स (एक्यूआई) शनिवार सुबह 9 बजे 68 दर्ज किया गया जो कि 'संतोषजनक' श्रेणी में आता है। सीपीसीबी के मुताबिक, शून्य से 50 के बीच के एक्यूआई को 'अच्छा', 51 से 100 को 'संतोषजनक', 101 से 200 को 'मध्यम', 201 से 300 को 'खराब', 301 से 400 को 'बहुत खराब' और 401 से 500 को 'गंभीर' माना जाता है।

  • हरियाणा में मेडिकल बिलों पर नई सख्ती, बिजली इंजीनियरों की तकनीकी जांच के बाद ही होगा भुगतान

    हरियाणा में मेडिकल बिलों पर नई सख्ती, बिजली इंजीनियरों की तकनीकी जांच के बाद ही होगा भुगतान

    अंबाला.

    उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (यूएचबीवीएन) के नए आदेश ने बिजली अधिकारियों को ऐसे काम की जिम्मेदारी दे दी है, जिसके लिए वे प्रशिक्षित ही नहीं हैं। अब तक कर्मचारियों के मेडिकल प्रतिपूर्ति बिलों की तकनीकी जांच मेडिकल अधिकारी करते थे, लेकिन नई व्यवस्था में यह जिम्मेदारी सीधे कार्यकारी अभियंता पर डाल दी गई है। इससे विभाग में असंतोष बढ़ रहा है।

    पहले कर्मचारी अपने मेडिकल बिल संबंधित कार्यकारी अभियंता कार्यालय में जमा करवाते थे। वहां से फाइलें पंचकूला या रोहतक स्थित निगम की डिस्पेंसरी भेजी जाती थीं। जहां मेडिकल अधिकारी यह जांच करते थे कि जिस बीमारी का इलाज कराया गया, उसके अनुसार दवाएं उचित थीं या नहीं, करवाए गए टेस्ट आवश्यक थे या नहीं। अस्पताल निगम के पैनल में शामिल है या नहीं तथा नियमानुसार कितनी राशि का भुगतान बनता है। जांच के बाद मेडिकल अधिकारी बिल पास करते थे या आपत्तियां लगाकर फाइल वापस भेज देते थे। अब नई व्यवस्था में यह पूरा दायित्व कार्यकारी अभियंताओं को सौंप दिया है। अब वही तय करेंगे कि कौन सी दवा सही है, कौन सा टेस्ट जरूरी था, किस अस्पताल का बिल मान्य है और कितनी राशि स्वीकृत की जानी चाहिए।

    मेडिकल ज्ञान नहीं, फिर कैसे करेंगे फैसला
    निगम के कई अधिकारियों का कहना है कि कार्यकारी अभियंता बिजली व्यवस्था के विशेषज्ञ हैं, चिकित्सा के नहीं। ऐसे में उनसे दवाओं, इलाज और मेडिकल प्रक्रियाओं की जांच करवाना व्यावहारिक नहीं है। यदि किसी बिल में विवाद होता है या गलत भुगतान हो जाता है तो उसकी जवाबदेही भी संबंधित अधिकारी पर ही आएगी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद कार्यकारी अभियंताओं को प्रत्येक मेडिकल बिल की बारीकी से जांच करनी पड़ रही है। इससे एक-एक बिल के निपटान में कई दिन लग रहे हैं और कर्मचारियों के मेडिकल क्लेम भी लंबित होने लगे हैं।

    कर्मचारी भी परेशान, अधिकारी भी असहज
    बिलों के निपटान में देरी से कर्मचारियों को प्रतिपूर्ति राशि मिलने में इंतजार करना पड़ रहा है, जबकि अधिकारी अतिरिक्त प्रशासनिक बोझ से परेशान हैं। विभागीय स्तर पर चर्चा है कि मेडिकल विशेषज्ञों का काम तकनीकी अधिकारियों को सौंपने से व्यवस्था और अधिक जटिल हो गई है।

    पहले क्या था, अब क्या है
    मेडिकल बिल कार्यकारी अभियंता कार्यालय जमा होते थे जहां से निगम की डिस्पेंसरी में मेडिकल अधिकारी की जांच कर बिल पास करते रहे। अब मेडिकल बिल कार्यकारी अभियंता कार्यालय में जमा होंगे जहां अभियंता स्वयं जांच और मंजूरी देंगे। विभागीय हलकों में यह भी चर्चा है कि यदि किसी मेडिकल बिल में अनियमितता रह जाती है या नियमों के विपरीत भुगतान हो जाता है तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित कार्यकारी अभियंता पर आएगी। ऐसे में अधिकारी बिना चिकित्सा विशेषज्ञता के निर्णय लेने को लेकर चिंता जता रहे हैं।