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  • सात साल बाद खुलेगा निजी यूनिवर्सिटी का रास्ता, राजस्थान सरकार ने बदले नियम

    सात साल बाद खुलेगा निजी यूनिवर्सिटी का रास्ता, राजस्थान सरकार ने बदले नियम

    जयपुर
    राजस्थान सरकार के उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेश में उच्च शिक्षा के दायरे को विस्तार देने और नए शैक्षणिक निवेश को आकर्षित करने के लिए एक महत्वपूर्ण नीतिगत फैसला लिया है। पिछले 7 वर्षों से पुरानी जटिल गाइडलाइंस और जमीन संबंधी शर्तों के कारण एक भी नया निजी विश्वविद्यालय स्थापित नहीं हो पाया था, जिसे देखते हुए राज्य सरकार ने भूमि एवं भवन संबंधी कठोर नियमों में तत्काल प्रभाव से महत्वपूर्ण संशोधन कर दिए हैं। नए जारी आदेशों के तहत अब नई निजी यूनिवर्सिटी स्थापित करने के लिए स्पॉन्सरिंग बॉडी को 30 एकड़ के बजाय केवल 20 एकड़ भूमि की आवश्यकता होगी। इसके साथ ही सरकार ने एक ही स्थान पर बड़ी जमीन न मिलने की समस्या का समाधान करते हुए दो अलग-अलग भू-खंडों पर भी विश्वविद्यालय स्थापित करने की विशेष छूट प्रदान की है। इस फैसले से प्रदेश के युवाओं को अपने ही राज्य में आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के नए विकल्प मिलेंगे।

    ये हुए 4 बड़े बदलाव
    राजस्थान में नए विश्वविद्यालयों की स्थापना में सबसे बड़ी बाधा विशाल भू-खंड की उपलब्धता थी, जिसे अब सरकार ने काफी हद तक सरल बना दिया है। भूमि के साथ-साथ इन्फ्रास्ट्रक्चर और बिल्डिंग कारपेट एरिया के मानकों में भी व्यावहारिक बदलाव किए हैं।

    भूमि की नई सीमा: पूर्व में जारी गाइडलाइंस के अनुसार नई निजी यूनिवर्सिटी शुरू करने के लिए कम से कम 30 एकड़ जमीन की अनिवार्यता थी, जिसे अब संशोधित कर 20 एकड़ कर दिया गया है।

    40% खुला क्षेत्र अनिवार्य: सरकार ने शर्त रखी है कि 20 एकड़ के इस कुल परिसर में कम से कम 40% हिस्सा खुला क्षेत्र के रूप में संरक्षित रखा जाना जरूरी होगा ताकि हरित परिसर और खेलकूद जैसी गतिविधियों के लिए जगह उपलब्ध रहे।

    कार्पेट एरिया और ओपन स्पेस का गणित: नई यूनिवर्सिटी स्थापित करने वाली स्पॉन्सरिंग बॉडी के पास न्यूनतम 25,000 वर्गमीटर का निर्मित भवन (Carpet Area) और न्यूनतम 25,000 वर्गमीटर का खुला क्षेत्र होना अनिवार्य होगा।

    दो टुकड़ों में भी बनेगी यूनिवर्सिटी: अक्सर शहरों के पास एकमुश्त बड़ी जमीन मिलना मुश्किल होता है। इसलिए सरकार ने अब एक ही स्थान के बजाय दो अलग-अलग भू-खंडों (Plots) पर भी कुछ आवश्यक सुरक्षा और दूरी की शर्तों के साथ विश्वविद्यालय स्थापित करने की छूट दी है।

    तत्काल प्रभाव से लागू
    गृह और उच्च शिक्षा विभाग के समन्वय से तैयार यह नया आदेश राज्य भर में तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है। जमीन की अनिवार्यता कम होने से शैक्षणिक संस्थाओं और स्पॉन्सरिंग बॉडीज के लिए भारी-भरकम बजट और विशाल भू-खंड जुटाने की चुनौती काफी हद तक खत्म हो जाएगी।

    7 साल का 'सूखा' होगा खत्म!
    राजस्थान में पिछले 7 सालों से एक भी नई प्राइवेट यूनिवर्सिटी का न खुलना उच्च शिक्षा के क्षेत्र में ठहराव की वजह बन रहा था। 30 एकड़ की सख्त शर्त और शहरी सीमाओं में इतनी जमीन का उपलब्ध न होना मुख्य कारण था जिसके चलते कई बड़े एजुकेशनल ग्रुप्स राजस्थान में निवेश करने से हिचकिचा रहे थे।

    नियमों के सरलीकरण से अब जयपुर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर और अजमेर जैसे प्रमुख शहरों के पास नए और आधुनिक विश्वविद्यालय खुल सकेंगे। इससे राजस्थान के छात्रों को पढ़ाई के लिए दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना पड़ेगा।

    गुणवत्ता पर नहीं पड़ेगा असर : विशेषज्ञ
    नियमों में दी गई इस बड़ी छूट को लेकर शिक्षाविदों का मानना है कि यह फैसला राजस्थान के शैक्षणिक परिदृश्य के लिए सकारात्मक साबित होगा। सेंट्रल यूनिवर्सिटी, अजमेर के प्रोफेसर अमिताभ श्रीवास्तव के अनुसार, नियमों के सरलीकरण और जमीन की बाध्यता कम होने से शिक्षा की गुणवत्ता पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि आधुनिक शिक्षा के लिए केवल विशाल जमीनों की बजाय आधुनिक लैब्स, लाइब्रेरी, डिजिटल क्लासरूम और योग्य फैकल्टी की अधिक आवश्यकता होती है, जो कि 20 एकड़ और 25 हजार वर्गमीटर के परिसर में भी बेहद शानदार तरीके से विकसित की जा सकती है।

  • बिहार सरकार के 100 दिन पूरे, 11 हजार करोड़ की योजनाओं का एलान

    बिहार सरकार के 100 दिन पूरे, 11 हजार करोड़ की योजनाओं का एलान

    पटना
     बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार के 100 दिन पूरे होने के अवसर पर शनिवार को राजधानी पटना में राज्यस्तरीय विकास उत्सव का आयोजन किया गया।

    मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बीआईटी मेसरा, पटना परिसर में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया और राज्य के विकास का रोडमैप प्रस्तुत करते हुए उद्योग, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना, कृषि और निवेश से जुड़े कई बड़े एलान किए।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने 11,464 करोड़ रुपये की लागत वाली 2,476 विकास योजनाओं का शिलान्यास एवं उद्घाटन किया।

    कार्यक्रम में दोनों उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव सहित कई मंत्री एवं वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

    215 करोड़ के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का लोकार्पण
    मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम से पहले पूर्व राजवंशी नगर स्थित लोकनायक जयप्रकाश नारायण (एलएनजेपी) अस्पताल पहुंचकर 215 करोड़ रुपये की लागत से बने 400 बेड वाले अत्याधुनिक ऑर्थोपेडिक एवं न्यूरो सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का उद्घाटन किया।

    उन्होंने कहा कि अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू, रेडियोलॉजी विभाग, स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर, फिजियोथेरेपी, ट्रॉमा सेंटर और 24×7 आपातकालीन सेवाओं से लैस यह अस्पताल बिहार की स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देगा और मरीजों को राज्य से बाहर इलाज के लिए जाने की जरूरत कम होगी।

    अधिकारियों से बोले- 12 नहीं, 15 घंटे काम करना होगा
    बीआईटी परिसर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि बिहार को देश के अग्रणी राज्यों की कतार में खड़ा करना है तो कार्य संस्कृति बदलनी होगी।

    उन्होंने कहा, 'अब तक 10 से 12 घंटे काम करते थे, लेकिन बिहार को देश की विकास गति के साथ ले जाना है तो 12 से 15 घंटे काम करना होगा।'

    15 अगस्त से रेफरल सिस्टम पर सख्ती
    मुख्यमंत्री ने दावा किया कि सरकारी अस्पतालों में मुफ्त दवाएं उपलब्ध कराने के मामले में बिहार देश में अग्रणी राज्यों में शामिल है। उन्होंने कहा कि राज्य में 101 अनुमंडलीय अस्पताल और 38 जिला अस्पताल कार्यरत हैं।

    उन्होंने घोषणा की कि 15 अगस्त से जिला एवं अनुमंडलीय अस्पताल सामान्य बीमारियों के मरीजों को बिना ठोस कारण के रेफर नहीं कर सकेंगे। यदि अनावश्यक रेफरल किया गया तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी।

    साथ ही उन्होंने अधिकारियों को अधिक से अधिक नर्सिंग और पैरामेडिकल कॉलेज खोलने के निर्देश दिए तथा जरूरत पड़ने पर पीपीपी मॉडल पर आयुर्वेद चिकित्सा संस्थानों की स्थापना का भी सुझाव दिया।

    हर जिले में एक उद्योग लगाने का लक्ष्य
    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार अब हर जिले में कम-से-कम एक बड़े उद्योग की स्थापना के लक्ष्य पर काम करेगी। उन्होंने कहा कि 20 नवंबर को सरकार के एक वर्ष पूरे होने तक बिहार की धरती पर पांच लाख करोड़ रुपये के निवेश को मूर्त रूप देने का प्रयास किया जाएगा।

    उन्होंने कहा कि राज्य का मौजूदा बजट लगभग 3.47 लाख करोड़ रुपये का है, लेकिन आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के लिए राजस्व बढ़ाना जरूरी है।

    सरकार उद्योगों के लिए पीपीपी मॉडल पर जमीन उपलब्ध कराएगी ताकि परियोजनाओं को तेजी से पूरा किया जा सके।

    पीपीपी मॉडल पर सड़कें, 200 किमी होगी मरीन ड्राइव
    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी संसाधनों से परियोजनाओं को पूरा करने में अधिक समय लगता है, इसलिए अब सड़क निर्माण में भी पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल को प्राथमिकता दी जाएगी।

    उन्होंने घोषणा की कि पटना की मरीन ड्राइव को 200 किलोमीटर तक विस्तारित किया जाएगा। इस परियोजना में लगभग एक लाख करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि टोल शुल्क केवल व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े वाहनों एवं उपयोगकर्ताओं से लिया जाएगा।

    गन्ना किसानों के लिए 25 नई चीनी मिलों का लक्ष्य
    मुख्यमंत्री ने कहा कि कभी बिहार में 20 चीनी मिलें संचालित होती थीं। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के सुझाव के बाद सरकार ने अगले पांच वर्षों में 25 चीनी मिलों को शुरू करने का लक्ष्य तय किया है।

    उन्होंने बताया कि सकरी रैयाम और सासामुसा चीनी मिलों का काम इसी वर्ष शुरू होगा, जिससे गन्ना किसानों को बड़ा लाभ मिलेगा।

    वैशाली और गया में बड़े निवेश की तैयारी
    सम्राट चौधरी ने घोषणा की कि वैशाली के राजापाकड़ में इंडस्ट्रियल इलेक्ट्रॉनिक्स हब स्थापित किया जाएगा। इस परियोजना में 20 से 30 हजार करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है और इससे करीब एक लाख युवाओं को रोजगार मिलने का अनुमान है।

    इसके अलावा गया में इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (आईएमसी) के तहत समर्पित स्टील प्लांट विकसित करने की योजना पर भी सरकार काम कर रही है।

    नदियों के किनारे विकसित होंगे इंडस्ट्रियल कॉरिडोर
    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने बागमती और बूढ़ी गंडक को जोड़ने की पहल शुरू कर दी है। भविष्य में नारायणी और कोसी को भी विकास कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा।

    इन नदियों के किनारे सड़क नेटवर्क के साथ-साथ औद्योगिक कॉरिडोर भी तैयार किए जाएंगे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि गंगा, गंडक और कोसी के तटों पर आधुनिक रिवर-फेसिंग टाउनशिप विकसित करने की योजना तैयार की जाए।

    उपलब्धियों की बुकलेट और प्रचार रथ रवाना
    कार्यक्रम के दौरान 'सेवा, संकल्प और समर्पण' थीम पर सरकार के 100 दिनों की उपलब्धियों की एक पुस्तिका जारी की गई। साथ ही सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने के लिए डिजिटल एवं प्रिंट प्रचार रथों को भी रवाना किया गया।

    सरकार का कहना है कि आने वाले दिनों में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, सार्वजनिक परिवहन के आधुनिकीकरण, औद्योगिक निवेश और रोजगार सृजन पर विशेष फोकस रखा जाएगा, ताकि बिहार को तेज आर्थिक विकास के रास्ते पर आगे बढ़ाया जा सके।

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  • पंजाब में छात्राओं को धमकाने और अभद्रता करने वाला शिक्षक सस्पेंड, शिक्षा विभाग का बड़ा एक्शन

    पंजाब में छात्राओं को धमकाने और अभद्रता करने वाला शिक्षक सस्पेंड, शिक्षा विभाग का बड़ा एक्शन

    चंडीगढ़/जालंधर.

    छात्राओं द्वारा अनुचित व्यवहार और धमकियां देने की शिकायत मिलने के बाद पंजाब स्कूल शिक्षा विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मोगा जिले के गांव मोठांवाली स्थित सरकारी मिडिल स्कूल में तैनात सामाजिक शिक्षा के एक शिक्षक को निलंबित कर दिया है।

    यह कार्रवाई जिला शिक्षा अधिकारी (सेकेंडरी), मोगा द्वारा प्रस्तुत प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है। जानकारी के अनुसार, छठी और आठवीं कक्षा की छात्राओं ने आरोप लगाया कि संबंधित शिक्षक ने उनके साथ अनुचित तरीके से व्यवहार किया और गलत ढंग से छुआ। छात्राओं का यह भी आरोप है कि शिक्षक ने उन्हें धमकी दी कि यदि उन्होंने इस घटना के बारे में किसी को बताया तो उन्हें परीक्षा में फेल कर दिया जाएगा। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पंजाब स्कूल शिक्षा विभाग ने संबंधित शिक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। मामले की आगे जांच की जा रही है।

  • जयपुर बना दुनिया का छठा सबसे खुशहाल शहर, भारत में नंबर वन

    जयपुर बना दुनिया का छठा सबसे खुशहाल शहर, भारत में नंबर वन

     जयपुर
    दुनिया के सबसे खुशहाल शहरों में अब जयपुर भी शुमार हो गया है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया प्लेटफॉर्म टाइम आउट की ओर से जारी द वर्ल्ड्स हैप्पीएस्ट सिटीज 2026 सूची में जयपुर को दुनिया का छठा सबसे खुशहाल शहर बताया गया है। खास बात यह है कि टॉप-10 में जगह बनाने वाला जयपुर भारत का एकमात्र शहर है। रिपोर्ट के अनुसार, जयपुर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक धरोहर, जीवनशैली, स्थानीय लोगों की मेहमाननवाजी, पारंपरिक बाजार, खानपान और सामुदायिक जुड़ाव ने उसे दुनिया के सबसे खुशहाल शहरों में शामिल कराया। पर्यटन और संस्कृति के साथ आधुनिक शहरी जीवन का संतुलन भी जयपुर की बड़ी ताकत माना गया है।

        बाथ (ब्रिटेन)
        पनामा सिटी (पनामा)
        ग्वाडलहारा (मेक्सिको)
        मेडेलिन (कोलंबिया)
        क्राको (पोलैंड)
        जयपुर (भारत)
        शिकागो (अमेरिका)
        केपटाउन (दक्षिण अफ्रीका)
        शंघाई (चीन)
        गोथेनबर्ग (स्वीडन)

    हजारों लोगों ने लिया सर्वे में हिस्सा
    यह रिपोर्ट 24 हजार से अधिक लोगों के वैश्विक सर्वे पर आधारित है। इसमें लोगों से उनके अनुभव, सामुदायिक भावना, सकारात्मक माहौल, खुशी के मापक को आधार बनाया गया।

    गुलाबी नगर के लिए ये उम्मीद
        विदेशी पर्यटकों के बीच जयपुर की ब्रांड वैल्यू और मजबूत होगी।
        अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के सामने शहर की सकारात्मक छवि बनेगी।
        पर्यटन, होटल, हस्तशिल्प और स्थानीय कारोबार को बढ़ावा मिलेगा।
        स्टूडेंट्स, स्टार्टअप व प्रोफेशनल्स के लिए आकर्षण बढ़ सकता है।
        अंतरराष्ट्रीय आयोजनों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की संभावनाएं मजबूत होंगी।
        रहने योग्य शहर के रूप में जयपुर की पहचान और मजबूत होगी।
        वैश्विक मंच पर भारत की शहरी संस्कृति का सकारात्मक प्रतिनिधित्व।
        निकायों पर शहरी सुविधाएं बेहतर बनाए रखने का दबाव भी बढ़ेगा।

    टूरिस्ट गाइड एवं सैलानियों के वक्तव्य
    "विदेशी पर्यटक जयपुर को सिर्फ किलों और महलों के लिए नहीं, बल्कि यहां के लोगों की मेहमाननवाजी, खानपान और जीवंत माहौल के लिए भी पसंद करते हैं। अधिकांश पर्यटक यहां दोबारा आने की इच्छा जताते हैं। यही सामुदायिक भावना और सांस्कृतिक समृद्धि जयपुर को दुनिया के सबसे खुशहाल शहरों में शामिल करने की बड़ी वजह हैं।"

    -शिवांग धवन, टूरिस्ट गाइड
    "जयपुर का माहौल बेहद जीवंत और रंगों से भरा हुआ है। यहां के लोग मुस्कुराकर स्वागत करते हैं, जिससे अपनेपन का एहसास होता है। ऐतिहासिक इमारतें, स्थानीय बाजार और संस्कृति इस शहर को खास बनाते हैं।"

    "हमने कई देशों की यात्रा की है, लेकिन जयपुर की सांस्कृतिक पहचान और लोगों का व्यवहार अलग ही अनुभव देता है। यहां परंपरा और आधुनिक जीवन साथ-साथ चलते हैं। पर्यटकों के लिए यह शहर सुरक्षित, आकर्षक और यादगार अनुभव देने वाला है।"
    -एंटोनियो-कियारा डॉगल्लिनी, फ्रांस

  • बिहार में जीविका दीदियों को नई जिम्मेदारी, चंपारण मीट से जुड़ेंगी महिलाएं

    बिहार में जीविका दीदियों को नई जिम्मेदारी, चंपारण मीट से जुड़ेंगी महिलाएं

     पटना
     सरकार जीविका दीदियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर पहल कर रही है। इसी क्रम में विधान परिषद में भोजनावकाश के उपरांत गुरुवार को ग्रामीण विकास तथा सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री श्रवण कुमार ने बड़ी घोषणा की।

    उन्होंने सदन को बताया कि अब जीविका दीदियां चंपारण मीट की ब्रांड एंबेसेडर बनेंगी। सरकार पहाड़ी जिलों विशेषकर पश्चिमी चंपारण जिले में बकरी पालन को बढ़ावा देने पर बल देगी।

    राज्य भर में बकरी पालन एवं पशुपालन से जुड़कर जीविका दीदी आत्मनिर्भरता की तरफ तेजी से आगे बढ़ रही हैं, जिसमें अबतक नौ लाख 78 हजार से ज्यादा परिवार सशक्त हो रहे हैं।

    केवल अररिया में सीमांचल बकरी उत्पादन कंपनी बनाकर 19 हजार 956 परिवार को जोड़ा गया। इसके बूते जीविका दीदियां काफी तरक्की कर रही हैं।

    जीविका दीदियों को किया जाएगा प्रोत्साहित
    सभापति अवधेश नारायण सिंह का ध्यान आकृष्ट करते हुए मंत्री ने कहा कि बिहार के पहाड़ी जिले जैसे पश्चिमी चंपारण, कैमूर, जमुई, गया, नवादा, बांका, मुंगेर, रोहतास, नालंदा एवं शेखपुरा जिले में विशेष रूप से जीविका दीदियों को डेरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग की मदद से तरक्की के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

    इनकी मदद के लिए राज्य में अबतक सात हजार 781 पशु सखी को प्रशिक्षण दिया गया है। राज्य में जीविका दीदी के द्वारा 61 उत्पादक कंपनी बनाई गई है। जीविका दीदियां राज्य में 520 कस्टम हायरिंग सेंटर चला रही हैं। जैविक खेती को प्रोत्साहन देने के लिए छह हजार 876 जीविका दीदी किसानों को जोड़ा गया।

    राज्य में दीदियों के रोजगार को बढ़ावा और जीविका दीदियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 2025-26 में 1 लाख 29 हजार समूह को बैंकों से 7 हजार 52 करोड़ से अधिक ऋण उपलब्ध कराया गया।

    साथ ही महिलाओं की उद्यमशिलता को और अधिक बढ़ावा प्रदान करने हेतु राज्य स्तर पर एक सहकारी संस्थान बिहार राज्य जीविका निधि शाख सहकारी संघ लिमिटेड जीविका निधि का गठन किया गया।

    राज्यभर में 1 हजार 365 सिलाई केंद्र में माध्यम सिलाई कार्य किया जा रहा है। प्रत्येक प्रखंड में सिलाई केंद्र खोला जा रहा है, जिसके 40 हजार से ज्यादा जीविका दीदी को प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें 51 हजार से अधिक दीदी को रोजगार मिल रहा है।

    बिहार की सरकार एवं बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दीदी के सुझाव को एक- एक कर मान लिया और आज बिहार में योजना लागू की गई है।

  • आईआरसीटीसी ने शुरू की ज्योतिर्लिंग और साईं दर्शन यात्रा, 1 सितंबर को रक्सौल से चलेगी ट्रेन

    आईआरसीटीसी ने शुरू की ज्योतिर्लिंग और साईं दर्शन यात्रा, 1 सितंबर को रक्सौल से चलेगी ट्रेन

    पटना
     भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) ने श्रद्धालुओं के लिए ज्योतिर्लिंग दर्शन एवं श्री साईं दर्शन यात्रा नाम से भारत गौरव पर्यटक ट्रेन चलाने की घोषणा की है। पैकेज कोड ईजेडबीजी32 वाली यह विशेष ट्रेन एक सितंबर को रक्सौल से अपनी यात्रा शुरू करेगी।

    आठ रात और नौ दिन की इस यात्रा में यात्रियों को देश के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों और प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों के दर्शन कराए जाएंगे।

    यह ट्रेन रक्सौल से चलकर सीतामढ़ी, दरभंगा, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, हाजीपुर, पाटलिपुत्र जंक्शन, आरा, बक्सर, डीडीयू जंक्शन (पं. दीनदयाल उपाध्याय) और प्रयागराज छिवकी स्टेशन से यात्रियों को लेकर आगे बढ़ेगी।

    आईआरसीटीसी के क्षेत्रीय प्रबंधक कन्हैया शर्मा ने बताया कि यात्रा के दौरान श्रद्धालु उज्जैन के महाकालेश्वर और ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग, नासिक के त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग, शिरडी में श्री साईं बाबा तथा छत्रपति संभाजीनगर स्थित घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग एवं एलोरा की गुफाओं का भ्रमण करेंगे।

    आईआरसीटीसी के अनुसार यह यात्रा केंद्र सरकार के ''देखो अपना देश'' और ''एक भारत श्रेष्ठ भारत'' अभियान के तहत संचालित की जा रही है, जिसका उद्देश्य धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा देना है।

    आईआरसीटीसी के वरिष्ठ पर्यवेक्षक संजीव कुमार ने बताया कि पैकेज पूरी तरह आल इनक्लूसिव है। इसमें रेल यात्रा, होटल में ठहरने की व्यवस्था, स्थानीय परिवहन, दर्शनीय स्थलों का भ्रमण, ऑनबोर्ड एवं आफबोर्ड शाकाहारी भोजन, यात्रा बीमा और सुरक्षा सहित अन्य सुविधाएं शामिल हैं।

    प्रति यात्री किराया इकोनॉमी (स्लीपर) श्रेणी के लिए 18,160 रुपये, स्टैंडर्ड (3 एसी) के लिए 32,550 रुपये तथा कंफर्ट (2 एसी) के लिए 39,425 रुपये निर्धारित किया गया है।

    इस यात्रा के लिए करीब 550 सीटें उपलब्ध हैं। इनमें लगभग 350 स्लीपर, 160 थर्ड एसी और 40 सेकेंड एसी सीटें शामिल हैं। 10 या इससे अधिक की समूह बुकिंग पर प्रतिव्यक्ति 750 रुपये छूट की सुविधा भी उपलब्ध है।

    बुकिंग के लिए यात्री आईआरसीटीसी के पटना क्षेत्रीय कार्यालय या हेल्पलाइन 85959377 32 पर संपर्क कर सकते हैं या वेबसाइट से भी टिकट बुक कर सकते हैं

  • धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर हरपाल चीमा का हमला, बोले- छात्रों के आगे झुकी अहंकारी BJP

    धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर हरपाल चीमा का हमला, बोले- छात्रों के आगे झुकी अहंकारी BJP

    चंडीगढ़.

    केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर पंजाब के फाइनेंस मिनिस्टर हरपाल सिंह चीमा ने कहा, 'जब से देश में BJP सत्ता में आई है, पेपर लीक का सिलसिला लगातार चल रहा है। परीक्षा के पेपर बेचे जा रहे हैं और छात्रों का भविष्य दांव पर लगाए जा रहे हैं।'

    उन्होंने कहा, 'हमारे बच्चों ने अपनी ताकत दिखाई है, चाहे दिल्ली में जंतर-मंतर पर हो, दूसरे राज्यों की राजधानियों में हो, या अलग-अलग डिपार्टमेंट के ऑफिस में जाकर हो। उन्होंने बड़े लेवल पर प्रोटेस्ट किया। इन प्रोटेस्ट के चलते धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा।' हरपाल चीमा ने आगे कहा, 'बीजेपी ने कई दिनों तक इस आंदोलन को तोड़ने की कोशिश की, लेकिन देश के युवा एकजुट रहे। आज देश के अहंकारी शासकों, अहंकारी भारतीय जनता पार्टी को झुकना पड़ा। धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है और मेरा मानना है कि यह हमारे छात्रों और देश के भविष्य के लिए एक बहुत बड़ी जीत है।'

    युवाओं की भावनाओं का सम्मान: धर्मेंद्र प्रधान
    बता दें कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शनिवार (25 जुलाई, 2026) को पोस्ट करते हुए लिखा कि मेरे युवा साथियों, मैं पिछले 4 दशकों से अधिक समय से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहा हूं। मेरा सदैव यह विश्वास रहा है कि एक सशक्त, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही सशक्त राष्ट्र की आधारशिला होती है। मैं देश के युवाओं की आकांक्षाओं, भावनाओं और उनकी न्यायोचित अपेक्षाओं का गहरा सम्मान करता हूं। भारत की युवा पीढ़ी के सपनों को साकार करना हम सभी के राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन का नैतिक संकल्प रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में राष्ट्र की सेवा करने का जो अवसर मुझे प्राप्त हुआ उसके लिए मैं प्रधानमंत्री मोदी का आभार प्रकट करता हूं।

  • जेएनयू में बड़ा बदलाव, कुलगुरु ने दो रेक्टरों को पदमुक्त किया

    जेएनयू में बड़ा बदलाव, कुलगुरु ने दो रेक्टरों को पदमुक्त किया

    नई दिल्ली
     जेएनयू में बड़ा प्रशासनिक बदलाव करते हुए कुलगुरु प्रो. शांतिश्री डी. पंडित ने प्रो. बृजेश पांडेय (रेक्टर-एक) और प्रो. दीपेंद्र नाथ दास (रेक्टर-दो) को उनके पदों से कार्यमुक्त कर दिया है।

    यह निर्णय कार्यकारी परिषद (ईसी) की बैठक में लिया गया। हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक कारण या विस्तृत आदेश सार्वजनिक नहीं किया गया है।

    दोनों रेक्टरों को कार्यमुक्त कर दिया
    विश्वविद्यालय के सूत्रों ने दोनों रेक्टरों को पद से हटाए जाने की पुष्टि की है। हाल के दिनों में कुछ प्रशासनिक मुद्दों पर मतभेद सामने आए थे। इन्हीं असहमतियों के बाद कुलगुरु ने यह कहते हुए दोनों रेक्टरों को कार्यमुक्त कर दिया कि उनकी सेवाओं की अब आवश्यकता नहीं है। दोनों अधिकारी पिछले दो वर्ष से अधिक समय से इस पद पर थे।

    रेक्टर स्तर पर बदलाव किया गया
    जेएनयू में यह पहली बार नहीं है, जब कुलगुरु के कार्यकाल के दौरान रेक्टर स्तर पर बदलाव किया गया हो। इससे पहले भी उनके कार्यकाल में कई रेक्टर बदले जा चुके हैं। ऐसे में इस ताजा फैसले को विश्वविद्यालय के प्रशासनिक ढांचे में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

    कार्रवाई को लेकर कई तरह की चर्चाएं
    वहीं, विश्वविद्यालय परिसर में इस कार्रवाई को लेकर कई तरह की चर्चाएं भी चल रही हैं। सूत्रों का कहना है कि हाल में छात्रों के प्रदर्शनों से जुड़े घटनाक्रम और प्रशासनिक स्तर पर हुई असहमतियां इस फैसले की पृष्ठभूमि में हो सकती हैं।

    यह भी चर्चा है कि करीब एक माह पहले एक रेक्टर और कुलगुरु के बीच किसी मुद्दे पर विवाद हुआ था, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया। हालांकि, इन दावों की विश्वविद्यालय प्रशासन ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

    बता दें कि कुलगुरु प्रो. शांतिश्री डी. पंडित का कार्यकाल अगले वर्ष फरवरी में समाप्त होने वाला है। ऐसे में कार्यकाल के अंतिम महीनों में हुआ यह प्रशासनिक फेरबदल विश्वविद्यालय में चर्चा का विषय बना हुआ है।

     

  • बिहार सरकार के 100 दिन, विकास योजनाओं और फैसलों की बड़ी शुरुआत

    बिहार सरकार के 100 दिन, विकास योजनाओं और फैसलों की बड़ी शुरुआत

    पटना
     बिहार में संसाधनों की कमी के बीच बुलंद इमारत खड़ी करने की जद्दोजहद में सम्राट सरकार ने बड़े-बड़े फैसले किये हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, आधारभूत संरचना सहित जनसरोकार से जुड़े क्षेत्रों में बेहद तेजगति से निर्णय लिए गए हैं। इन फैसलों में संकल्प, सक्रियता और समाधान की स्पष्ट झलक दिखी।

    नीतीश कुमार ने बिहार के समग्र विकास की जो बुनियाद रखी थी, उसे आगे बढ़ाते हुए सम्राट सरकार ने महज 100 दिनों में विकास की अपनी आधारशिला रखी है। हालांकि ताबड़तोड़ फैसलों के परिणाम आने अभी बाकी हैं, लेकिन सरकार पर लोगों का भरोसा बढ़ा है और आगे विकास की उम्मीदें भी जगी हैं।

    इन सौ दिनों में कानून व्यवस्था, सुशासन, प्रशासनिक सख्ती, जनसेवा की तेज रफ्तार और विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए कई ठोस कदम उठाए गए हैं। कानून व्यवस्था बनाए रखने, पांच वर्षों में एक करोड़ नौकरी व रोजगार देने के वायदे को पूरा करना, औद्योगिक विकास और निवेश, भू अधिग्रहण, शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करना, रोजगार सृजन और वायदों की पूर्ति जैसी चुनौतियां सामने खड़ी हैं। सबसे बड़ी दिक्कत जमीन अधिग्रहण को लेकर है, जिससे सड़क, औद्योगिक और शहरी परियोजनाओं की गति प्रभावित हो सकती है। सुशासन के लिए तंत्र को चुस्त, दुरुस्त और जिम्मेदार बनाने के प्रयास हुए।

    अहम फैसले लिये
    15 जून को गयाजी में सम्राट ने अफसरों को दो टूक कहा कि हर दिन 20 घंटे काम करने की जरूरत है। ना खाना है, न खाने देना है। न सोना है न सोने देना है। तभी, बिहार को विकसित और समृद्ध राज्य बना सकते हैं। लोगों की समस्याओं और शिकायतों के निष्पादन के लिए सहयोग शिविर की शुरुआत 19 मई को हुई। इसके जरिये अधिकतम 30 दिनों में लोगों को उचित लाभ दिलाना है। सहयोग शिविर में छह लाख आवेदन मिले। इनमें साढ़े पांच लाख से अधिक का निष्पादन कर दिया गया है।

    मेन प्वाइंट्स
    ● राज्य में 12 नए ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप विकसित

    ● 15 अगस्त से मरीजों को चिकित्सक नहीं करेंगे रेफर

    ● 80 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग लोगों को घर पर ही निबंधन

    ● 80 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को घरों में पहुंचेगा अनाज

    ● महिलाओं द्वारा चारपहिया इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर एक लाख का प्रोत्साहन

    ● विधायकों और सरकारी कर्मियों को मिलेगी कैशलेस इलाज की सुविधा

    ● हेलीकॉप्टर से हवाई पर्यटन की शुरुआत, पटना का 2100 रुपये में भ्रमण

    ● भागलपुर में एआई और कंप्यूटर साइंस विश्वविद्यालय की स्थापना

    ● मुजफ्फरपुर में आर्किटेक्चर और सिविल इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय

    ● बेगूसराय में दिनकर सिंह विश्वविद्यालय की स्थापना होगी

    ● विधायकों और सरकारी कर्मियों को मिलेगी कैशलेस इलाज की सुविधा

    ● वाराणसी की तर्ज पर बनेगा बाबा हरिहरनाथ कॉरिडोर, 680 करोड़ की योजना

    मॉडल स्कूल और डिग्री कॉलेजों की बड़ी सौगात
    राज्य में 551 मॉडल स्कूल और 211 नए डिग्री कॉलेज खोलने की पहल की गई है। इनमें संसाधन और शिक्षक की व्यवस्था अभी बाकी है। पेपर लीक माफिया पर शिकंजा कसने के लिए कानून बनाया जा रहा है। वर्षों से नासूर बने शिक्षकों के तबादले की प्रक्रिया प्रारंभ हो गयी है।

    सभी जिलों में मॉडल अस्पताल
    सभी जिला अस्पतालों को सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के रूप में विकसित करने और आईसीयू की स्थापना का बड़ा फैसला किया गया है। इसके साथ ही पास के अस्पतालों में इलाज की समुचित व्य्वस्था और रेफर करने पर पूर्ण विराम लगाने का निर्णय भी काफी अहम है।

    उद्योग पर जोर
    विकसित बिहार बनाने के लिए मुख्यमंत्री का जोर उद्योग लगाने पर है। उन्होंने साफ कहा है कि ऐसा बिहार बनाना चाहते हैं कि पांच सालों में उद्योग के लिए यह राज्य जाना जाएगा। उद्योग लगाने से संबंधित किसी भी आवेदन पर अधिकतम 30 दिनों में स्वीकृति की व्यवस्था लागू की गई है।

    12 नई टाउनशीप, आधा दर्जन हवाई अड्डे
    सरकार ने 12 नई टाउनशिप विकसित करने की दिशा में काम शुरू किया है। सड़क, पुल और राज्य राजमार्गों के निर्माण कार्यों में तेजी लाने पर जोर दिया गया है। कृषि क्षेत्र में किसानों की आय बढ़ाने, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करने और कृषि आधारित स्टार्टअप को बढ़ावा देने जैसी योजनाएं भी सामने आई हैं। लगभग आधा दर्जन हवाई अड्डों के निर्माण की भी पहल की गयी है।

    समय पर पेंशन
    पेंशन भुगतान को नियमित करना सरकार की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल है। करीब 98 लाख लोगों को समय पर पेंशन मिल रही है। यह कदम खासकर बुजुर्गों, विधवाओं और सामाजिक सुरक्षा पर निर्भर वर्गों के लिए राहतकारी बताया जा रहा है। सरकार इसे सेवा-डिलीवरी में सुधार का बड़ा उदाहरण मान रही है।

  • जालंधर में एडमिशन न मिलने पर अभिभावकों ने कॉलेज में जड़ा ताला

    जालंधर में एडमिशन न मिलने पर अभिभावकों ने कॉलेज में जड़ा ताला

    जालंधर.

    जालंधर के एक महाविद्यालय में दाखिले को लेकर शनिवार को विवाद खड़ा हो गया। एक विद्यार्थी को प्रवेश नहीं दिए जाने का आरोप लगाते हुए उसके अभिभावकों ने महाविद्यालय के बाहर धरना शुरू कर दिया। विरोध बढ़ने पर अभिभावकों ने महाविद्यालय के मुख्य द्वार के बाहर खुद ताला लगा दिया और सड़क पर बैठकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। इससे कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित रहा।

    प्रदर्शन कर रहे अभिभावकों का आरोप है कि उनके बच्चे को बिना उचित कारण बताए प्रवेश देने से मना कर दिया गया। उन्होंने कहा कि कई बार महाविद्यालय प्रबंधन से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। इसके बाद मजबूर होकर उन्हें धरना प्रदर्शन करना पड़ा।

    महाविद्यालय का दरवाजा किया गया बंद
    विवाद उस समय और बढ़ गया जब प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि महाविद्यालय की ओर से मुख्य द्वार नहीं खोला गया। इसके विरोध में अभिभावक सड़क पर बैठ गए और आवाजाही रोक दी। सड़क जाम होने से दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ा। इस दौरान विद्यार्थी के समर्थन में महाविद्यालय के छात्र संगठन के सदस्य भी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने अभिभावकों के साथ मिलकर नारेबाजी की और विद्यार्थी को दाखिला देने की मांग उठाई। छात्र संगठन के प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि पात्र विद्यार्थी को प्रवेश नहीं दिया जाता है तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

    दाखिले की मांग पर जारी विरोध प्रदर्शन
    प्रदर्शनकारी अभिभावकों ने मांग की कि महाविद्यालय प्रबंधन पूरे मामले पर स्पष्ट जवाब दे और विद्यार्थी को नियमानुसार प्रवेश दिया जाए। उनका कहना था कि जब तक उनकी मांगों पर उचित निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। फिलहाल मामले को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने के प्रयास किए जा रहे हैं। समाचार लिखे जाने तक प्रदर्शन जारी था और महाविद्यालय प्रबंधन की ओर से इस पूरे विवाद पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। वहीं, स्थिति पर नजर बनाए रखने के लिए स्थानीय प्रशासन और पुलिस भी मौके पर पहुंच गई थी, ताकि कानून व्यवस्था बनी रहे।