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  • बिहार की बंद नौ चीनी मिलों की जमीन निवेशकों को सौंपने का रास्ता साफ

    बिहार की बंद नौ चीनी मिलों की जमीन निवेशकों को सौंपने का रास्ता साफ

    पटना  
    बिहार की बंद नौ चीनी मिलों की जमीन निवेशकों को सौंपने का रास्ता साफ हो गया है। इसके लिए सरकार ने चीनी उपक्रम (अधिग्रहण) अधिनियम में संशोधन किया है। इसके बाद बंद चीनी मिलों की जमीन का स्वामित्व निजी कंपनियां या सहकारी समितियों को सौंपी जा सकेगी। सरकार ने राज्य की बंद नौ चीनी मिलों को दोबारा शुरू करने का निर्णय लिया है। सकरी और रैयाम दो मिलों का संचालन सहकारिता विभाग के जरिए होना है। अन्य मिलों के संचालन के लिए निवेशकों को आमंत्रित किया गया है। इसके लिए बंद मिलों की जमीन सहकारी समितियों या निवेशकों को सौंपा जाना जरूरी है। बंद चीनी मिलों का अधिग्रहण चीनी विकास निगम ने किया था। इसका स्वामित्व अभी भी निगम के पास है।

    इस कारण 1985 में बने अधिनियमि के अनुसार मिल का संचालन सिर्फ राज्य सरकार ही कर सकती थी। इसलिए बिना स्वामित्व बदले जमीन सौंपने की प्रक्रिया पर विधि विभाग को आपत्ति थी। अब गन्ना उद्योग विभाग ने जमीन हस्तांतरण के लिए अधिनियम में संशोधन कर लिया है।

    नवंबर 2026 से तीन मिलें शुरू होंगी
    पहले चरण में तीन बंद चीनी मिलें शुरू होंगी। इसमें मधुबनी जिले की सकरी, दरभंगा जिले की रैयाम और गोपालगंज जिले की सासामूसा चीनी मिल है। राज्य सरकार ने नवंबर 2026 से यहां पेराई शुरू करने का निर्णय लिया है। सकरी और रैयाम चीनी मिल का संचालन सहकारिता विभाग के जरिए होगा। सासामूसा के लिए निवेशक का चयन किया जा रहा है।

    बता दें कि बिहार सरकार की सात निश्चय-3 के अंतर्गत "समृद्ध उद्योग – सशक्त बिहार" के लक्ष्य को साकार करने के लिए राज्य में चीनी उद्योग एवं गन्ना आधारित अर्थव्यवस्था को नई गति देने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। गन्ना उद्योग विभाग इसके लिए व्यापक एवं दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार कर रहा है।

    गन्ना उद्योग विभाग द्वारा नई चीनी मिलों की स्थापना, निवेश प्रोत्साहन, तकनीकी सहयोग, गन्ना क्षेत्र विस्तार तथा किसानों की आय वृद्धि को केंद्र में रखकर कार्य किया जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी पहल की निगरानी एवं क्रियान्वयन के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है, जो विभिन्न परियोजनाओं एवं निवेश प्रस्तावों की नियमित समीक्षा कर रही है।

    राज्य सरकार एवं सहकारिता विभाग द्वारा राष्ट्रीय सहकारी शक्कर कारखाना संघ (एनएफसीएसएफ), नई दिल्ली के साथ महत्वपूर्ण समझौता (एमओयू) किया गया है। इस समझौते के अंतर्गत बंद पड़ी सकरी एवं रैयाम चीनी मिलों की तकनीकी एवं आर्थिक संभावनाओं का विस्तृत अध्ययन कराया गया है। एनएफसीएसएफ द्वारा दोनों चीनी मिलों की संभाव्यता फिजिब्लिटी रिपोर्ट तैयार कर ली गई है। गत दिनों मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में सकरी एवं रैयाम चीनी मिलों के पुनः संचालन हेतु इंडियन पोटाश लिमिटेड से प्रस्ताव आमंत्रित किए गए हैं।

  • भागलपुर एलिवेटेड पथ परियोजना की डीपीआर शुरू, जाम से मिलेगी बड़ी राहत जल्द

    भागलपुर एलिवेटेड पथ परियोजना की डीपीआर शुरू, जाम से मिलेगी बड़ी राहत जल्द

    भागलपुर
     भागलपुर शहर की वर्षों पुरानी जाम समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई है।

    बिहार सरकार ने प्रस्तावित एलिवेटेड पथ परियोजना की व्यवहार्यता रिपोर्ट (फिजिबिलिटी रिपोर्ट) तैयार कर ली है और अब विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

    यह जानकारी बिहार विधानसभा में पथ निर्माण मंत्री कुमार शैलेन्द्र ने विधायक रोहित पांडेय के गैर-सरकारी संकल्प के जवाब में दी।

    सरकार के अनुसार प्रस्तावित एलिवेटेड पथ जीरो माइल से तिलकामांझी चौक, घंटाघर चौक, स्टेशन चौक, तातारपुर और टीएनबी कॉलेज होते हुए चंपानदी तक बनाया जाएगा।

    फिजिबिलिटी रिपोर्ट में इसकी अनुमानित लागत करीब 1800 करोड़ रुपये आंकी गई है। डीपीआर तैयार होने के बाद संसाधनों की उपलब्धता और सरकार की प्राथमिकता के आधार पर परियोजना को आगे बढ़ाया जाएगा।

    विधायक रोहित पांडेय ने इसे भागलपुर के लिए ऐतिहासिक और स्वागतयोग्य कदम बताया। उन्होंने कहा कि शहर लगातार बढ़ती आबादी, वाहनों की संख्या में तेजी और सीमित सड़क नेटवर्क के कारण गंभीर जाम की समस्या से जूझ रहा है।

    प्रतिदिन प्रमुख चौक-चौराहों पर घंटों जाम लगने से आम लोगों, व्यापारियों, विद्यार्थियों, मरीजों और आपातकालीन सेवाओं को भारी परेशानी उठानी पड़ती है।

    उन्होंने बताया कि भागलपुर की जाम समस्या के समाधान के लिए उन्होंने बिहार विधानसभा के बजट सत्र में गैर-सरकारी संकल्प के माध्यम से एलिवेटेड फ्लाईओवर और एलिवेटेड पथ निर्माण की मांग उठाई थी।

    इसके अलावा नई दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मिलकर भी इस परियोजना को मंजूरी देने का आग्रह किया था। केंद्रीय मंत्री ने भी इस दिशा में सकारात्मक पहल का भरोसा दिया था।

    रोहित पांडेय ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार कर डीपीआर निर्माण की प्रक्रिया शुरू करना इस परियोजना को जमीन पर उतारने की दिशा में बड़ा कदम है।

    जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद
    उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य मंत्रिपरिषद से जल्द प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण कार्य का रास्ता साफ होगा और शहर को लंबे समय से चली आ रही जाम की समस्या से राहत मिलेगी।

    उन्होंने कहा कि प्रस्तावित एलिवेटेड पथ केवल यातायात सुविधा का प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि भागलपुर के भविष्य के विकास की आधारशिला है। इसके बनने से शहर में यातायात सुगम होगा, यात्रा का समय कम होगा, व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और निवेश की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

    विधायक ने यह भी कहा कि सबौर से मुंगेर तक प्रस्तावित गंगा पथ (मरीन ड्राइव) परियोजना पर भी काम शुरू हो चुका है। आने वाले वर्षों में मरीन ड्राइव और एलिवेटेड पथ दोनों परियोजनाएं मिलकर भागलपुर की यातायात व्यवस्था को नई दिशा देंगी।

    इससे जाम की समस्या में उल्लेखनीय कमी आएगी, व्यापार, उद्योग और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा तथा स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

    साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, पथ निर्माण मंत्री कुमार शैलेन्द्र और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के प्रति आभार जताते हुए परियोजना को शीघ्र कैबिनेट मंजूरी देने की मांग की।

  • रिम्स को मिला 450 करोड़ फंड, कर्मचारियों का लंबित वेतन जल्द होगा जारी

    रिम्स को मिला 450 करोड़ फंड, कर्मचारियों का लंबित वेतन जल्द होगा जारी

     रांची
    रिम्स को लंबे इंतजार के बाद स्वास्थ्य विभाग से गैर योजना मद में 450 करोड़ रुपये का फंड मिल गया है. राशि आवंटित होने से संस्थान को वित्तीय संकट से राहत मिलने की उम्मीद है. इस फेड़ से रिम्स अपने कर्मियों का लंबित वेतन भुगतान करने के साथ मरीजों के इलाज और रोजमर्रा के संचालन पर होने वाले खर्च पूरे कर सकेगा. ज्ञात हो कि 21 जुलाई को हुई रिम्स शासी परिषद (जीबी) की बैठक के पूर्व भात खबर ने इस मुद्दे को उठाया था.

    दो माह की देरी के बाद मिला फंड, जल्द जारी होगा वेतन
    स्वास्थ्य विभाग ने पत्र जारी कर फंड आवंटन की जानकारी रिम्ना प्रबंधन को दे दी है. सामान्यतः यह राशि मई के अंत तक मिल जाती थी, लेकिन इस वित्तीय वर्ष में करीब दो माह की देरी से उपलब्ध करायी गयी है. रिम्स हर माह वेतन मद में करीब 28 करोड़ रुपये खर्च करता है. ऐसे में जून माह का वेतन जल्द जारी होने की संभावना है. साथ ही आवश्यक चिकित्सा उपकरणों की खरीद और अन्य जरूनी भुगतान भी किये जा सकेंगे. वेतन में देरी से सबसे अधिक परेशानी तृतीय और चतुर्थ वर्ग के कर्मचारियों को हो रही थी, जिन्हें अव राहत मिलने की उम्मीद है.

  • पुलिस का बड़ा खुलासा: प्रदर्शन के दौरान कोई हताहत नहीं, तनाव फैलाने वाले 480 पाकिस्तानी हैंडल्स ब्लॉक

    पुलिस का बड़ा खुलासा: प्रदर्शन के दौरान कोई हताहत नहीं, तनाव फैलाने वाले 480 पाकिस्तानी हैंडल्स ब्लॉक

     नई दिल्ली

    राजधानी दिल्ली में जंतर-मंतर पर चल रहे CJP के प्रदर्शन के बीच सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे फेक वीडियो और भ्रामक पोस्ट को लेकर दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बड़ा खुलासा किया. सेंट्रल दिल्ली के डीसीपी रोहित राजबीर सिंह ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान सोशल मीडिया, खासकर इंस्टाग्राम और अन्य प्लेटफॉर्म का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया. इनमें कई पोस्ट ऐसे थे जिनका उद्देश्य लोगों में भ्रम और दहशत फैलाना था। 

    डीसीपी ने बताया कि दिल्ली पुलिस ने अब तक 400 से अधिक सोशल मीडिया हैंडल की पहचान की है, जो भ्रामक और तथ्यहीन सामग्री फैलाने में सक्रिय पाए गए. इसके अलावा पाकिस्तान से संचालित 480 सोशल मीडिया हैंडल भी ब्लॉक किए गए हैं, जो प्रदर्शन से जुड़ी झूठी और भड़काऊ सामग्री प्रसारित कर रहे थे। 

    रोहित राजबीर सिंह ने कहा कि प्रदर्शन से जुड़े कई वीडियो और पोस्ट को तथ्यों से छेड़छाड़ कर वायरल किया गया. उन्होंने लोगों से अपील की कि सोशल मीडिया पर किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच अवश्य करें। 

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखाई केजरीवाल की पोस्ट
     दिल्ली पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐसे कई उदाहरण भी साझा किए. पुलिस के अनुसार, एक वायरल पोस्ट में दावा किया गया था कि 20 जुलाई की घटना में एक महिला प्रदर्शनकारी की मौत हो गई, जबकि वास्तविकता यह थी कि महिला अस्पताल में भर्ती थी और उसकी मौत नहीं हुई थी. पुलिस ने तत्काल इस दावे का खंडन करते हुए आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया था। 

    अरविंद केजरीवाल का पोस्ट दिखाते हुए डीसीपी ने यह भी बताया कि एक प्रमुख राजनीतिक नेता द्वारा यह दावा किया गया था कि दिल्ली पुलिस रात के समय प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाने वाली है. पुलिस ने इसे पूरी तरह भ्रामक बताते हुए कहा कि ऐसा कोई अभियान प्रस्तावित नहीं था। 

    इसके अलावा, सोनम वांगचुक का एक डीपफेक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल किया गया. वहीं, सेना की दिल्ली में तैनाती को लेकर भी फर्जी वीडियो तैयार कर प्रसारित किए गए. दिल्ली पुलिस का कहना है कि इन वीडियो का उद्देश्य लोगों में भय और भ्रम पैदा करना था.

    फेक न्यूज पर जारी है एक्शन
    पुलिस ने बताया कि ऐसी अफवाहों पर तत्काल कार्रवाई के लिए एक विशेष सोशल मीडिया टास्क फोर्स बनाई गई है. यह टीम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रही सामग्री की लगातार निगरानी कर रही है और फर्जी पोस्ट के खिलाफ त्वरित तथ्यात्मक जवाब जारी कर रही है। 

    दिल्ली पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी वायरल वीडियो, फोटो या संदेश पर भरोसा करने से पहले उसकी पुष्टि आधिकारिक स्रोतों से करें. पुलिस का कहना है कि अफवाहें न केवल कानून-व्यवस्था को प्रभावित करती हैं, बल्कि आम लोगों में अनावश्यक भय और तनाव भी पैदा करती हैं। 

  • विलुप्ति की कगार पर मालवी ऊंट, संरक्षण के लिए एनआरसीसी ने बढ़ाया कदम

    विलुप्ति की कगार पर मालवी ऊंट, संरक्षण के लिए एनआरसीसी ने बढ़ाया कदम

    जयपुर
    देश की 9 मान्यता प्राप्त ऊंट नस्लों में शामिल मालवी (सफेद) ऊंट अब अस्तित्व के सबसे बड़े संकट से गुजर रहा है। लगातार घटती संख्या के कारण यह नस्ल विलुप्ति के कगार पर पहुंच गई है। यदि समय रहते संरक्षण के ठोस प्रयास नहीं किए गए, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए मालवी ऊंट केवल किताबों में दर्ज इतिहास बनकर रह जाएगा। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (एनआरसीसी), बीकानेर ने इसके संरक्षण और संवर्धन की पहल शुरू की है।

    एनआरसीसी के सर्वे में सामने आया कि मालवी नस्ल के ऊंटों की संख्या बेहद कम रह गई है। पशुधन गणना-2019 के अनुसार देशभर में इस नस्ल के केवल 102 ऊंट ही मौजूद हैं। घटती संख्या को देखते हुए संस्थान ने इसके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए विशेष पहल शुरू की है। इसके तहत एनआरसीसी ने 12 मालवी ऊंट खरीदे हैं, जिनमें तीन नर और नौ मादा ऊंट शामिल हैं। इन ऊंटों के माध्यम से शुद्ध प्रजनन कार्यक्रम चलाकर नस्ल की संख्या बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।

    कहां पाए जाते हैं मालवी ऊंट
    मालवी नस्ल के ऊंट मुख्य रूप से राजस्थान के कोटा, बूंदी, झालावाड़ और बारां जिलों के अलावा मध्यप्रदेश के मंदसौर, नीमच, रतलाम और ग्वालियर क्षेत्रों में पाए जाते हैं। इनकी पहचान सफेद रंग और अपेक्षाकृत छोटा कद है। मादा मालवी ऊंट एक बार में करीब चार से पांच किलो तक दूध देने की क्षमता रखती है।

    तीन सौ से कम मादा ऊंट होने पर संकटग्रस्त श्रेणी
    वैज्ञानिकों के अनुसार किसी भी ऊंट नस्ल में मादा ऊंटों की संख्या 300 से कम हो जाने पर उसे संकटग्रस्त और लुप्तप्राय श्रेणी में माना जाता है। ऐसी स्थिति में वैज्ञानिक संरक्षण, प्रजनन और आनुवंशिक संसाधनों को बचाने के प्रयास शुरू किए जाते हैं।

    गौरतलब है कि भारत में ऊंटों की 9 नस्लों को मान्यता मिली हुई है। इनमें बीकानेरी, जैसलमेरी, कच्छी, मेवाड़ी, जालौरी, मेवाती, मालवी, मारवाड़ी और खराई नस्ल शामिल हैं

    आनुवंशिक विरासत बचाने की पहल
    एनआरसीसी ने मालवी ऊंट के संरक्षण के लिए फार्म आधारित प्रजनन समूह स्थापित किया है। इसके माध्यम से शुद्ध नस्ल के प्रजनन, वैज्ञानिक संरक्षण और भविष्य के लिए इस दुर्लभ आनुवंशिक संपदा को सुरक्षित रखने का कार्य किया जाएगा। डॉ. अनिल कुमार पूनिया, निदेशक, एनआरसीसी ने बताया कि मालवी ऊंट नस्ल के संरक्षण और संवर्धन के लिए संस्थान ने पहल की है। प्रजनन कार्यक्रम के माध्यम से इस संकटग्रस्त नस्ल को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।

    मालवी ऊंटों की संख्या बढ़ाने का प्रयास शुरू
    संरक्षण अभियान सफल रहा, तो आने वाले वर्षों में मालवी ऊंटों की संख्या बढ़ाने के साथ इस अनमोल आनुवंशिक विरासत को सुरक्षित रखा जा सकेगा।
    डॉ. वेदप्रकाश, प्रधान वैज्ञानिक, एनआरसीसी

  • राशन कार्ड से वंचित परिवार पांच अगस्त तक करें आवेदन, मिलेगा लाभ

    राशन कार्ड से वंचित परिवार पांच अगस्त तक करें आवेदन, मिलेगा लाभ

     पटना
    श्रमिक, स्लम बस्ती में रहने वाले, वेंडर समेत अन्य जरूरतमंद लोग जिनके पास राशन कार्ड नहीं है या परिवार के सदस्य का नाम छूटा है, वो पांच अगस्त से पहले आवेदन करें।

    बिहार खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के पोर्टल पर जरूरी जानकारी दर्ज करें या अनुमंडल, अंचल एवं प्रखंड स्थित काउंटरों पर आवेदन जमा करें।

    अब तक 6,186 आवेदन जमा हो चुके हैं। 15 अगस्त से पहले सभी पात्र परिवार का राशन कार्ड बन जाएगा। कार्ड में नया नाम भी जुड़ जाएगा।

    पटना सिटी अनुमंडल में बनेंगे 16 हजार राशन कार्ड
    यह जानकारी अनुमंडलाधिकारी सत्यम सहाय ने दी। उन्होंने बताया कि अनुमंडल क्षेत्र से लगभग सोलह हजार पात्र परिवार का राशन कार्ड बनाने का लक्ष्य तय कर पूरी टीम काम में जुटी है।

    एसडीओ ने कहा कि वार्ड पार्षदों एवं जन प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर राशन कार्ड के लिए आवेदन भरने और जमा करने में पात्र परिवार का सहयोग करने की अपील की है।

    उन्होंने कहा कि मार्केटिंग आफिसर एवं विकास मित्र भी इस काम में लगाए गए हैं। एसडीओ सत्यम सहाय ने बताया कि आवेदन के लिए परिवार के सभी सदस्यों के आधार कार्ड के साथ आय एवं आवासीय प्रमाण पत्र की आवश्यकता होती है।

    अस्थायी रूप से आय एवं आवासीय प्रमाण पत्र बनाने के लिए अनुमंडल एवं पटना सिटी अंचल में व्यवस्था की गयी है। आवेदन को कोई समस्या नहीं होगी।

    ऐसे लोग राशन कार्ड के पात्र नहीं
    एसडीओ सत्यम सहाय ने कहा कि जो सरकारी नौकरी में हैं, इनकम टैक्स या प्रोफेशनल टैक्स जमा करते हैं, तीन कमरों का पक्का मकान है, चार पहिया वाहन है, सालाना दो लाख चालीस हजार रुपए से अधिक आय है वो नया राशन कार्ड बनवाने के लिए आवेदन करने के पात्र नहीं हैं।

     

  • राजस्थान पंचायत चुनाव की तैयारी तेज, आरक्षण प्रक्रिया का जिम्मा कलेक्टरों को मिला

    राजस्थान पंचायत चुनाव की तैयारी तेज, आरक्षण प्रक्रिया का जिम्मा कलेक्टरों को मिला

    जयपुर
     राजस्थान में पंचायत चुनाव की तैयारियां तेज हो गई हैं। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग ने पंचायत चुनाव प्रक्रिया के पहले कदम के रूप में पंचायती राज संस्थाओं में सदस्य व अन्य प्रतिनिधियों के आरक्षण का श्रेणीवार निर्धारण का अधिकार कलक्टर और एसडीएम को सौंप दिया। ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग के सचिव एवं आयुक्त डॉ जोगाराम ने इस बारे में आदेश जारी कर दिया।

    इसके अंतर्गत कलक्टर अपने क्षेत्र की पंचायत समितियों और जिला परिषदों के वार्डो के आरक्षण और प्रधान पदों के आरक्षण का निर्धारण करेंगे. वहीं उपखंड अधिकारी अपने क्षेत्र की ग्राम पंचायतों के वार्डो और सरपंच पदों के आरक्षण का श्रेणीवार निर्धारण करेंगे। हालांकि आरक्षण निर्धारण के लिए कलक्टर व एसडीएम को अभी ओबीसी आयोग की रिपोर्ट का इंतजार करना होगा। यह रिपोर्ट 5 अगस्त तक आएगी। आरक्षण निर्धारण के बाद चुनाव आयोग चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करेगा। बता दें 41 जिला परिषद, 457 पंचायत समितियों और 14 हजार 403 ग्राम पंचायतों में नवंबर तक चुनाव कराए जाना प्रस्तावित हैं।

    5 अगस्त तक आयोग की रिपोर्ट
    राजस्थान सरकार ने 15 जुलाई के कोर्ट आदेश की पालना में रिपोर्ट पेश की, जिसमें बताया था कि ओबीसी आयोग को सरकार ने पूर्ण सहयोग किया तो अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनीतिक) आयोग 5 अगस्त तक ओबीसी का सर्वे कर रिपोर्ट सौंप देगा। 15 अगस्त तक लॉटरी की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव की घोषणा कर देगा। 90 दिन में 15 नवम्बर तक चुनाव की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। ऐसे में माना जा रहा हे कि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट 5 अगस्त तक आने के बाद सरकार के स्तर पर सभी पंचायती राज संस्थाओं में सरपंच, उपसरपंच, प्रधान के अलावा वार्डों के आरक्षण की लॉटरी निकाली जाएगी। ये लॉटरी जिला मुख्यालय पर कलक्टर और उपखंड स्तर पर उपखंड अधिकारी के स्तर पर निकाली जाएगी।

    चार चरणों में होंगे पंचायत चुनाव
    राजस्थान में पंचायत चुनाव चार चरणों में होंगे। राजस्थान हाईकोर्ट में सोमवार हुई सुनवाई के दौरान राज्य निर्वाचन आयोग ने कहा था कि 17 अगस्त को चुनाव प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा कर दी जाएगी। संभावित कार्यक्रम पेश होने पर कोर्ट ने कहा था कि चुनाव प्रक्रिया शुरू करने के लिए 15 अगस्त को चुनाव कार्यक्रम जारी कर दिया जाए।

    ये है संभावित चुनावी कार्यक्रम: पंचायती राज संस्थाएं (54 दिन)
    चुनाव घोषणाः 23 सितम्बर
    निर्वाचन की अधिसूचनाः 28 सितम्बर
    नामांकन की अंतिम तिथिः 1 अक्टूबर अपराह्न 03:00 बजे तक
    नाम वापसी की तिथिः 5 अक्टूबर अपराह्न 3:00 बजे तक

    मतदान दल रवानगी
    प्रथम चरणः 12 अक्टूबर
    द्वितीय चरणः 22 अक्टूबर
    तृतीय चरणः 28 अक्टूबर
    चतुर्थ चरणः 2 नवम्बर

    उप सरपंच
    प्रथम चरणः 15 अक्टूबर
    द्वितीय चरणः 25 अक्टूबर
    तृतीय चरणः 31 अक्टूबर
    चतुर्थ चरणः 5 नवम्बर
    मतदानः प्रातः 7 से सायं 6 बजे तक

    मतदान-मतगणना: जिला परिषद/पंचायत समिति सदस्य
    प्रथम चरणः 13 अक्टूबर
    द्वितीय चरणः 23 अक्टूबर
    तृतीय चरणः 29 अक्टूबर
    चतुर्थ चरणः 3 नवम्बर
    मतगणनाः 12 नवम्बर

    पंच/सरपंच चुनाव
    प्रथम चरणः 14 अक्टूबर
    द्वितीय चरणः 24 अक्टूबर
    तृतीय चरणः 30 अक्टूबर
    चतुर्थ चरणः 4 नवम्बर
    प्रमुख/प्रधान का चुनावः 14 नवम्बर
    उप प्रमुख/उप प्रधान का चुनावः 15 नवम्बर
    नामांकनः सुबह 10 से 11 बजे तक

  • पहाड़ी क्षेत्र मोरनी में जैविक मिर्च खेती की नई पहल शुरू

    पहाड़ी क्षेत्र मोरनी में जैविक मिर्च खेती की नई पहल शुरू

    पंचकूला
     हरियाणा के पहाड़ी क्षेत्र मोरनी में प्राकृतिक मिर्च की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। किसान कृषि की आधुनिक तकनीक सीख रहे हैं।

    उद्यान विभाग की ओर से शुक्रवार को पंचायत घर, मोरनी में एमडीएच काॅन्ट्रेक्ट फाॅर्मिंग कार्यक्रम के तहत प्राकृतिक एवं जैविक मिर्च की खेती विषय पर प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। मोरनी क्षेत्र के करीब 80 किसानों ने प्राकृतिक मिर्च की खेती की आधुनिक तकनीकें सीखीं।

    कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि प्राकृतिक एवं जैविक खेती अपनाने से उत्पादन लागत कम होती है, मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और रसायन अवशेष रहित गुणवत्तापूर्ण उत्पादन प्राप्त होता है। इससे किसानों को बाजार में बेहतर कीमत मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है।

    प्रशिक्षण के दौरान कृषि वैज्ञानिक डा. राजेश लाठर और डा. गजेन्द्र ने किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक तरीके से मिर्च की खेती करने के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी।

    उन्होंने गुणवत्तायुक्त पौध सामग्री के चयन, भूमि की तैयारी, पोषक तत्व प्रबंधन, जीवामृत एवं अन्य प्राकृतिक आदानों के उपयोग, कीट एवं रोगों के प्राकृतिक नियंत्रण, सिंचाई प्रबंधन तथा गुणवत्तापूर्ण उत्पादन बढ़ाने की वैज्ञानिक तकनीकों पर विस्तार से जानकारी दी।

    इस अवसर पर उद्यान विकास अधिकारी प्रत्युष चौहान ने किसानों को विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए प्राकृतिक खेती के साथ अनुबंध (कान्ट्रैक्ट) खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया।

    उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों द्वारा सुझाई गई तकनीकों को अपनाकर किसान मिर्च की खेती को अधिक लाभकारी बना सकते हैं। कार्यक्रम में किसानों ने प्राकृतिक खेती और अनुबंध खेती से जुड़ी योजनाओं में भी विशेष रुचि दिखाई।

     

  • डूरंड कप के लिए रांची में ट्रैफिक प्लान जारी, जानें पार्किंग व्यवस्था

    डूरंड कप के लिए रांची में ट्रैफिक प्लान जारी, जानें पार्किंग व्यवस्था

    रांची
     रांची के बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम, मोराबादी में 26 जुलाई से 16 अगस्त तक डूरंड कप फुटबॉल टूर्नामेंट के 135वें संस्करण का आयोजन होगा। प्रतियोगिता के दौरान बड़ी संख्या में दर्शकों के आगमन को देखते हुए रांची ट्रैफिक पुलिस ने वाहनों की पार्किंग और आवागमन को लेकर विस्तृत मार्ग परामर्शी जारी की है।

    पुलिस ने लोगों से निर्धारित पार्किंग स्थलों का ही उपयोग करने और यातायात व्यवस्था में सहयोग करने की अपील की है। खूंटी, जमशेदपुर, गुमला, लोहरदगा, रामगढ़ जिला, रातू, कांके, पिठोरिया तथा इन क्षेत्रों की ओर से आने वाले वाहन कांके रिंग रोड, चांदनी चौक और राम मंदिर होते हुए रांची यूनिवर्सिटी फुटबाल मैदान, मोराबादी स्थित पार्किंग स्थल में अपने वाहन पार्क कर सकेंगे।

    टाटीसिलवे, खेलगांव, बूटी मोड़, रिम्स, बरियातू, करमटोली, बोड़या रोड और जेल चौक की ओर से आने वाले वाहनों के लिए टीआरआई मैदान (मंदिर मैदान) को पार्किंग स्थल बनाया गया है। इन क्षेत्रों से आने वाले वाहन इसी पार्किंग का उपयोग करेंगे। वहीं शहर के अंदर धुर्वा, हिनू, डोरंडा, मेन रोड, रेडियम चौक, लालपुर, कांटाटोली, हरमू और अरगोड़ा सहित अन्य क्षेत्रों से आने वाले वाहनों की पार्किंग आर्मी मैदान में की जाएगी।

    ट्रैफिक पुलिस ने इन इलाकों से आने वाले लोगों को निर्धारित पार्किंग स्थल का ही उपयोग करने की सलाह दी है। वीआइपी, पासधारी और मीडिया वाहनों के लिए मौराबादी परेड मैदान को विशेष पार्किंग स्थल के रूप में निर्धारित किया गया है। केवल वैध वीआईपी पास और मीडिया पास वाले वाहन ही इस पार्किंग में प्रवेश कर सकेंगे।

    ट्रैफिक पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि टूर्नामेंट के दौरान यातायात के दबाव और आवश्यकता के अनुसार किसी भी समय कुछ मार्गों पर वाहनों का परिचालन अस्थायी रूप से डायवर्ट किया जा सकता है या कुछ समय के लिए रोका भी जा सकता है।

    ऐसे में आम लोगों से अपील की गई है कि वे ट्रैफिक पुलिस के निर्देशों का पालन करें, निर्धारित पार्किंग स्थलों का उपयोग करें और वैकल्पिक मार्गों की जानकारी लेकर ही यात्रा करें, ताकि डूरंड कप के दौरान शहर की यातायात व्यवस्था सुचारु बनी रहे।

  • झारखंड में SIR की समयसीमा तय, 29 जुलाई तक जमा होंगे गणना प्रपत्र

    झारखंड में SIR की समयसीमा तय, 29 जुलाई तक जमा होंगे गणना प्रपत्र

     रांची
     झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की अवधि नहीं बढ़ेगी। गणना चरण का काउंट डाउन शुरू हो चुका है। इसमें अब पांच दिन ही शेष बचे हैं। 29 जुलाई के बाद मतदाताओं से गणना प्रपत्र नहीं लिया जाएगा।

    पांच अगस्त को प्रकाशित होनेवाली प्रारुप मतदाता सूची में उन मतदाताओं का ही नाम होगा, जो इस अवधि तक अपना गणना प्रपत्र भरकर तथा हस्ताक्षर कर बीएलओ को वापस लौटा देंगे। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने इसकी पुष्टि की है।

    उन्होंने उन सभी मतदाताओं से गणना प्रपत्र भरकर तथा हस्ताक्षर कर अपने बीएलओ को लौटाने की अपील की है, जिन्होंने अभी तक यह कार्य पूरा नहीं किया है। गणना प्रपत्र भरकर तथा हस्ताक्षर कर जमा नहीं करने पर उनका नाम प्रारुप मतदाता सूची में नहीं होगा।

    अभी तक गणना चरण की उपलब्धियों की बात करें तो कुल 2,64,63,236 मतदाताओं में से 2,63,30,846 मतदाताओं को गणना प्रपत्र बीएलओ के माध्यम से उपलब्ध करा दिए गए हैं। इस तरह, लगभग शत-प्रतिशत मतदाताओं को गणना प्रपत्र मिल चुके हैं।

    इनमें से 88 प्रतिशत मतदाताओं के गणना प्रपत्र डिजिटाइज्ड हो चुके हैं। इनमें मतदाताओं द्वारा भरे गए एवं हस्ताक्षरित मतदाताओं के अलावा वैसे मतदाताओं के भी गणना प्रपत्र भी सम्मिलित हैं, जो एएसडीडी (अब्सेंट, शिफ्टेड, डेथ एवं डुप्लीकेट) सूची में हैं।

    सिर्फ 12 प्रतिशत मतदाताओं का गणना प्रपत्र जमा होना बाकी है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने उम्मीद जताई है कि शेष पांच दिनों में इनके भी गणना प्रपत्र जमा हो जाएंगे।

    मतदाताओं द्वारा भरे हुए एवं हस्ताक्षर किए हुए गणना प्रपत्र के डिजिटाइजेशन की बात करें तो अबतक 2,09,28,990 मतदाताओं के गणना प्रपत्र डिजिटाइज्ड हो चुके हैं। इनके नाम पांच अगस्त को प्रकाशित हाेनेवाली मतदाता सूची में होंगे।