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  • राजस्थान में खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा, किसानों की आय और रोजगार बढ़ेंगे

    राजस्थान में खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा, किसानों की आय और रोजगार बढ़ेंगे

    जयपुर
     मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि राजस्थान की कृषि क्षमता को आर्थिक समृद्धि में बदलने के लिए कृषि उत्पादों के अधिक से अधिक प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन आवश्यक है। इससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा, युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, निवेश को बढ़ावा मिलेगा तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

    मुख्य सचिव सोमवार को सचिवालय में केंद्र सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के सचिव ए.पी. दास जोशी की उपस्थिति में आयोजित स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में राजस्थान में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के विस्तार, उपलब्ध अवसरों, चुनौतियों तथा आवश्यक नीतिगत सुधारों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

    मुख्य सचिव ने नई खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना, फूड पार्कों एवं एग्रो प्रोसेसिंग क्लस्टरों के विकास, आधुनिक तकनीक के उपयोग तथा उद्यमियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया। साथ ही उद्योगों को आवश्यक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने तथा विभिन्न विभागों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित कर इस क्षेत्र के विकास को गति देने के निर्देश दिए।

    मुख्य सचिव ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के समग्र विकास के लिए केंद्र सरकार, राज्य सरकार, उद्योगों, वित्तीय संस्थानों, कृषि एवं शैक्षणिक संस्थानों के बीच निरंतर समन्वय और सहयोग आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बैठक में प्राप्त सुझावों के आधार पर आवश्यक नीतिगत एवं संस्थागत पहल की जाएंगी। इससे राज्य में निवेश, मूल्य संवर्धन, रोजगार सृजन तथा किसानों की आय में वृद्धि को और गति मिलेगी।

    केंद्रीय सचिव श्री जोशी ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण ऐसा क्षेत्र है, जो बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित करने के साथ किसानों की आय बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने राजस्थान की कृषि एवं बागवानी क्षमता की सराहना करते हुए कहा कि राज्य में इस क्षेत्र के विकास की व्यापक संभावनाएं हैं। उन्होंने मंत्रालय की योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने, कृषि उत्पादों में मूल्य संवर्धन तथा प्रसंस्करण क्षमता का विस्तार करने पर बल देते हुए राज्य सरकार को हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।

    बैठक में कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के सचिव श्री राजन विशाल ने राजस्थान की कृषि क्षमता, निवेश-अनुकूल वातावरण, फूड पार्कों, एग्रो प्रोसेसिंग क्लस्टरों, कोल्ड चेन अवसंरचना, राज्य सरकार की प्रोत्साहन नीतियों तथा प्रस्तावित फूड पार्क नीति पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के समग्र विकास के लिए केंद्र सरकार से अपेक्षित सहयोग तथा भावी कार्ययोजना की भी जानकारी दी।

    बैठक में उद्योग प्रतिनिधियों, एमएसएमई, एफपीओ, निर्यातकों, स्टार्टअप्स, कृषि विश्वविद्यालयों, बैंकिंग क्षेत्र तथा अन्य हितधारकों ने अपने सुझाव साझा किए। उन्होंने उद्योगों के लिए वित्तीय सहायता की सरल उपलब्धता, खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाओं एवं इनक्यूबेशन केंद्रों को सुदृढ़ बनाने, कोल्ड चेन और प्रसंस्करण अवसंरचना के विस्तार तथा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक सुधारों पर जोर दिया। उद्योग प्रतिनिधियों ने राजस्थान के निवेश-अनुकूल वातावरण की सराहना करते हुए राज्य में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में निवेश और विस्तार की संभावनाओं पर विश्वास व्यक्त किया।

     

  • बिहार में बकरी दूध फेडरेशन बनेगा, डेयरी सेक्टर को मिलेगी नई उड़ान

    बिहार में बकरी दूध फेडरेशन बनेगा, डेयरी सेक्टर को मिलेगी नई उड़ान

    नालंदा
     मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को नालंदा में बिहार के डेयरी सेक्टर को नई दिशा देने वाले कई बड़े एलान किए।

    उन्होंने 20 मीट्रिक टन क्षमता वाले आधुनिक दही-लस्सी प्लांट का उद्घाटन किया और भविष्य में बकरी के दूध के लिए अलग फेडरेशन बनाने की घोषणा की।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि अब केवल गाय-भैंस के दूध तक ही सीमित नहीं रहना है, बल्कि बकरी पालन और उसके उत्पादों को भी मुख्यधारा से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में बिहार में गाय और भैंस के दूध का उत्पादन लगातार बढ़ रहा है, लेकिन आने वाले समय में बकरी के दूध के उत्पादन को भी संगठित रूप से बढ़ावा दिया जाएगा।

    इसके लिए अलग फेडरेशन बनाया जाएगा, ताकि बकरी पालकों को बेहतर बाजार और उचित मूल्य मिल सके।

    नालंदा में बनेगा स्वतंत्र दूध उत्पादक संघ
    सम्राट चौधरी ने घोषणा की कि नालंदा में स्वतंत्र दूध उत्पादक संघ की स्थापना की जाएगी। उन्होंने नालंदा की ऐतिहासिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि कभी नालंदा ही भारत की पहचान था और आज भी देश की प्रगति की मजबूत नींव इसी धरती से जुड़ी हुई है।

    20 मीट्रिक टन क्षमता वाला दही-लस्सी प्लांट शुरू
    मुख्यमंत्री ने नालंदा में 20 मीट्रिक टन क्षमता वाले आधुनिक दही-लस्सी प्लांट का उद्घाटन किया। इसके साथ ही कॉम्फेड की ओर से 300 डेयरी खुदरा विक्रेताओं को डीप फ्रीजर वितरित किए गए।

    उन्होंने कहा कि इससे दूध एवं दुग्ध उत्पादों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकेगा और खुदरा कारोबारियों को बड़ा लाभ मिलेगा।

    पशुओं के लिए भी बनेगी मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था
    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने पशु उठाव एवं परिवहन वाहन का भी लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार केवल लोगों की नहीं, बल्कि पशुओं की भी चिंता कर रही है।

    यदि किसी पशु की मृत्यु हो जाए या वह गंभीर रूप से बीमार हो जाए तो पशु उठाव वाहन तत्काल मौके पर पहुंचेगा।

    इसके अलावा उन्होंने घोषणा की कि राज्य के सभी प्रखंडों में जिस तरह मनुष्यों के लिए दवा दुकानें हैं, उसी तरह एक हजार से अधिक पशु औषधि केंद्र स्थापित किए जाएंगे, ताकि पशुपालकों को समय पर उपचार की सुविधा मिल सके।

    हर घर तक पहुंचेगा पशुपालन अभियान
    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य बिहार के हर गांव और हर घर तक पशुपालन को पहुंचाना है। इससे ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ेगी और राज्य की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

    उन्होंने कहा कि किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) जैसी योजनाओं के जरिए भी पशुपालन को बढ़ावा दिया जा रहा है।

    बिहार का डेयरी सेक्टर तेजी से बढ़ा
    सम्राट चौधरी ने कहा कि लगभग 20 वर्ष पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में जीविका समूहों के माध्यम से डेयरी क्षेत्र को मजबूत करने की शुरुआत हुई थी।

    आज बिहार दूध उत्पादन के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। अब लक्ष्य राज्य में प्रतिदिन एक करोड़ लीटर दूध उत्पादन तक पहुंचने का है।

    उन्होंने कहा कि कॉम्फेड ने बिहार के दूध, आइसक्रीम, पेड़ा और अन्य दुग्ध उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की योजना तैयार की है।

    200 नए आउटलेट, 88 स्थानों का चयन
    मुख्यमंत्री ने बताया कि कॉम्फेड की ओर से लगभग 2,500 नई समितियों का गठन किया गया है। राज्यभर में 200 नए डेयरी आउटलेट खोलने की योजना है, जिसके लिए 88 स्थानों का चयन पहले ही किया जा चुका है।

    ग्रामीण हाट और एक्वा पार्क से मिलेगा रोजगार
    मुख्यमंत्री ने बताया कि भोजपुर में एक्वा पार्क का शिलान्यास किया जा चुका है। साथ ही राज्य के सभी गांवों में ग्रामीण हाट विकसित किए जाएंगे, जहां सब्जी, मछली और अन्य कृषि उत्पादों की बिक्री होगी। इससे किसानों और पशुपालकों को स्थानीय स्तर पर बेहतर बाजार उपलब्ध होगा।

    एचपीसीएल पेट्रोल पंप और कैफेटेरिया का भी शिलान्यास
    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कॉम्फेड द्वारा संचालित हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) के पेट्रोल पंप और कैफेटेरिया का भी शिलान्यास किया।

    इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजेंद्र यादव, ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे।

     

  • परीक्षा सुधार टास्क फोर्स में राजस्थान के अमृत लाल मीणा को मिली जगह

    परीक्षा सुधार टास्क फोर्स में राजस्थान के अमृत लाल मीणा को मिली जगह

    जयपुर
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के परीक्षा तंत्र को पूरी तरह से पारदर्शी, तकनीक-संचालित और लीक-प्रूफ बनाने के लिए 6 सदस्यों की एक उच्चस्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया है। इस ऐतिहासिक फैसले में राजस्थान के लिए सबसे गौरवान्वित करने वाला पहलू यह है कि इस हाई-प्रोफाइल कमेटी में देश के शीर्ष नौकरशाह और राजस्थान की माटी से ताल्लुक रखने वाले पूर्व आईएएस अधिकारी अमृत लाल मीणा (Amrit Lal Meena) को विशेष स्थान दिया गया है।

    कोटा, जयपुर और जोधपुर समेत पूरे राजस्थान के लाखों छात्र जो सालों से नीट और जेईई जैसी राष्ट्रीय परीक्षाओं के लिए तैयारी करते हैं, उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए पीएम मोदी ने देश के सबसे भरोसेमंद 6 दिग्गजों पर दांव खेला है।

    राजस्थान से गहरा और सीधा संबंध
    जन्म और पैतृक निवास : अमृत लाल मीणा का जन्म राजस्थान के करौली जिले के सपोटरा उपखंड के 'डाबरा' गांव में एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। वे मूल रूप से राजस्थान के ही निवासी हैं और उनका गृह राज्य राजस्थान ही है।

    प्रारंभिक जीवन और शिक्षा : उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई राजस्थान के ग्रामीण परिवेश में ही की। इसके बाद उन्होंने जयपुर के प्रतिष्ठित मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MNIT, Jaipur) से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बी.ई. (Bachelor of Engineering) की डिग्री हासिल की।

    शानदार प्रशासनिक करियर (IAS)
    इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास की और 1989 बैच के आईएएस (IAS) अधिकारी बने, जहां उन्हें बिहार कैडर आवंटित हुआ। वे केंद्र सरकार में कोयला सचिव और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय में विशेष सचिव (लॉजिस्टिक्स) जैसे कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे। इसके बाद उन्होंने बिहार के मुख्य सचिव के रूप में राज्य की नौकरशाही के सर्वोच्च पद की जिम्मेदारी संभाली।

    पीएम मोदी के 'ट्रस्टेड कमांडर'
    सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अमृत लाल मीणा का प्रशासनिक अनुभव किसी मिसाल से कम नहीं है।

    35 सालों का बेदाग और बेजोड़ अनुभव: अमृत लाल मीणा के पास जिला स्तर से लेकर केंद्र सरकार के मंत्रालयों और राज्य के सर्वोच्च मुख्य सचिव (Chief Secretary) पद तक काम करने का 35 वर्षों का समृद्ध अनुभव है।

    नक्सल प्रभावित इलाकों में कानून व्यवस्था का लोहा: उन्होंने 1995 से 2004 के बीच सिवान, नालंदा, भोजपुर, गया और मुजफ्फरपुर जैसे अति-संवेदनशील और नक्सल प्रभावित 5 जिलों में लगातार 9 सालों तक जिलाधिकारी के रूप में काम कर कानून-व्यवस्था को संभाला।

    नेशनल पॉलिसी के शिल्पकार: केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय में विशेष सचिव (लॉजिस्टिक्स) रहते हुए उन्होंने पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट 'पीएम गतिशक्ति मास्टर प्लान' और नेशनल लॉजिस्टिक्स पॉलिसी को जमीनी धरातल पर उतारने में केंद्रीय भूमिका निभाई।

    कोयला क्षेत्र में ऐतिहासिक रिकॉर्ड: केंद्रीय कोयला सचिव (2022-2024) के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान भारत में कोयला उत्पादन में ऐतिहासिक दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज की गई और सरकारी कोयला कंपनियों का मार्केट कैप 150% से अधिक बढ़ गया।

    नंदन नीलेकणी के साथ करेंगे काम
    प्रधानमंत्री मोदी द्वारा गठित इस 6-सदस्यीय पैनल में इंफोसिस के सह-संस्थापक और आधार (UIDAI) के जनक नंदन नीलेकणी को अध्यक्ष बनाया गया है। इस सुपर-टीम में अमृत लाल मीणा लॉजिस्टिक्स और प्रशासनिक सुरक्षा के सबसे बड़े विशेषज्ञ के रूप में काम करेंगे।

    नंदन नीलेकणी (अध्यक्ष): इंफोसिस के सह-संस्थापक और यूआईडीएआई के पूर्व अध्यक्ष।
    एस. सोमनाथ: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पूर्व अध्यक्ष।

    तपन डेका: इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के पूर्व निदेशक।

    प्रो. वी. कामकोटी: आईआईटी मद्रास (IIT Chennai) के निदेशक।

    अनिता करवल: पूर्व केंद्रीय शिक्षा सचिव।

    अमृत लाल मीणा (IAS Rtd): बिहार के पूर्व मुख्य सचिव, पूर्व कोयला सचिव और लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ।

    नेशनल टेस्टिंग एजेंसी में क्या होंगे बदलाव?
    यह टास्क फोर्स नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के पूरे ढांचे को नया रूप देने और परीक्षाओं में सेंधमारी रोकने के लिए एक सख्त और एक्शन-ओरिएंटेड रोडमैप तैयार करेगी:

    लीक-प्रूफ डिजिटल और फिजिकल सिक्योरिटी: ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों मोड की परीक्षाओं में डेटा सुरक्षा मजबूत करना ताकि किसी भी स्तर पर पेपर लीक न हो सके

    लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन की कड़ाई: पेपर छपने से लेकर परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने की पूरी चेन को ट्रैक करने के लिए अमृत लाल मीणा के लॉजिस्टिक्स अनुभव का सीधा फायदा मिलेगा।

    NTA का प्रशासनिक पुनर्गठन: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के अधिकारियों की जवाबदेही तय करना और पूरी व्यवस्था को पारदर्शी बनाना।

    फास्ट-ट्रैक कोर्ट और सख्त कानून: केंद्र सरकार संसद में एंटी-पेपर लीक बिल (Public Examinations Amendment Bill) भी ला रही है, जिसके तहत पेपर लीक में शामिल अपराधियों पर भारी जुर्माना और तुरंत सजा का प्रावधान होगा।

  • हरियाणा में जमीन के दस्तावेज अब घर बैठे मिलेंगे, शुरू हुआ ऑनलाइन मॉड्यूल

    हरियाणा में जमीन के दस्तावेज अब घर बैठे मिलेंगे, शुरू हुआ ऑनलाइन मॉड्यूल

     चंडीगढ़
    हरियाणा सरकार ने जमीन से जुड़ी सेवाओं को अधिक तेज, पारदर्शी और नागरिक-अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब प्रदेश के लोगों को जमाबंदी, म्यूटेशन, फर्द बदर और रजिस्टर्ड सेल डीड की प्रमाणित प्रतियां प्राप्त करने के लिए बार-बार तहसील या राजस्व कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

    सरकार ने 'रेवेन्यू हरियाणा पोर्टल' पर नया ऑनलाइन मॉड्यूल शुरू किया है, जिसके माध्यम से नागरिक घर बैठे आवेदन कर सकेंगे और डिजिटल रूप से प्रमाणित दस्तावेज डाउनलोड भी कर सकेंगे।

    हरियाणा के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री विपुल गोयल के अनुसार इस नई व्यवस्था को पूरे प्रदेश में एक समान लागू करने के लिए सभी मंडलायुक्तों और उपायुक्तों को विभाग की ओर से आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

    इसके साथ ही राजस्व अधिकारियों के लिए स्टैंडर्ड आपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) तथा नागरिकों की सुविधा के लिए चरणबद्ध मार्गदर्शिका वाला विस्तृत यूजर मैनुअल भी तैयार किया गया है।

    राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत आवेदक अपने पंजीकृत मोबाइल नंबर पर ओटीपी सत्यापन के माध्यम से पोर्टल पर लागिन करेंगे। इसके बाद आवश्यक दस्तावेज का चयन कर जिला, तहसील और गांव सहित जरूरी जानकारी भरकर आवेदन जमा किया जा सकेगा।

    प्रत्येक आवेदन के लिए एक यूनिक ट्रैकिंग आईडी जारी होगी, जिससे उसकी ऑनलाइन निगरानी की जा सकेगी। आवेदन स्वतः संबंधित पटवारी या राजस्व अधिकारी के पास सत्यापन के लिए भेजा जाएगा। सत्यापन और स्वीकृति के बाद निर्धारित शुल्क ऑनलाइन जमा करते ही डिजिटल रूप से प्रमाणित दस्तावेज आवेदक के डैशबोर्ड पर डाउनलोड के लिए उपलब्ध हो जाएगा।

    हरियाणा सरकार ने शुल्क व्यवस्था भी सरल और एकरूप रखी है। म्यूटेशन, रजिस्टर्ड सेल डीड और फर्द बदर की प्रमाणित प्रति के लिए दस्तावेज के आकार की परवाह किए बिना 100 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। वहीं, जमाबंदी की प्रमाणित प्रति के लिए पहले 10 पृष्ठों तक 100 रुपये तथा इसके बाद प्रत्येक अतिरिक्त पृष्ठ के लिए पांच रुपये शुल्क देना होगा। पूरा भुगतान ऑनलाइन किया जा सकेगा।

    राजस्व मंत्री विपुल गोयल ने कहा कि इस पहल से तहसील कार्यालयों में अनावश्यक भीड़ कम होगी, लोगों का समय बचेगा और जमीन संबंधी रिकार्ड प्राप्त करने में होने वाली देरी भी घटेगी। पूरी प्रक्रिया डिजिटल होने से पारदर्शिता बढ़ेगी और प्रत्येक आवेदन व उसकी स्वीकृति का इलेक्ट्रानिक रिकार्ड सुरक्षित रहेगा, जिससे जवाबदेही भी मजबूत होगी।

    डॉ. सुमिता मिश्रा के अनुसार पोर्टल पर अपलोड किए गए रिकॉर्ड की शुद्धता की जिम्मेदारी संबंधित पटवारी या राजस्व अधिकारी की होगी। किसी रिकार्ड में संशोधन केवल निर्धारित आधिकारिक प्रक्रिया के तहत ही किया जा सकेगा।

  • बांकीपुर उपचुनाव में जदयू ने दिखाई सक्रियता, एनडीए अभियान को मिली नई धार

    बांकीपुर उपचुनाव में जदयू ने दिखाई सक्रियता, एनडीए अभियान को मिली नई धार

    पटना
    बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में जदयू ने अपनी सक्रियता से गठबंधन धर्म को रफ्तार दिया। बिहार एनडीए में भाजपा और जदयू सहित पांच दल हैं।

    रालोमो, लोजपा (रामविलास) और हम की सक्रियता बांकीपुर उपचुनाव में एनडीए प्रत्याशी के पक्ष में अपेक्षाकृत कम रही पर जदयू ने कई मोर्चे पर इस उपचुनाव में अपने को जोड़े रखा।

    जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने अपने आवास पर बांकीपुर उपचुनाव को ले दो बैठकें कीं। संसद के मानसून सत्र पर जाने से पहले उन्होंने जदयू के वरिष्ठ नेताओं के साथ अपने आवास पर बैठक की।

    इसके बाद जब वह दिल्ली से पटना लौटे तो आते ही जदयू के वरिष्ठ नेताओं को अपने आवास पर बुलाकर बांकीपुर उपचुनाव पर बैठक की। काफी देर तक उन्होंने इस चुनाव के बारे में फीडबैक लिया।

    पार्टी के लोगों की सक्रियता के बारे में पूछताछ की। दिलचस्प यह रहा कि नीतीश कुमार ने अपनी दूसरी बैठक में यह हिदायत दी कि इवीएम सील होने तक कार्यकर्ता सक्रिय रहें।

    जदयू की सक्रियता इस मायने में भी दिखी कि बांकीपुर उपचुनाव के लिए एनडीए के प्रत्याशी का नाम तय होते ही जदयू ने अपने पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की एक बैठक पार्टी के प्रदेश कार्यालय में बुलाई।

    जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा की इस बैठक में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी भी शामिल हुए। इस बैठक में जदयू ने अपने दल के लोगों को चुनाव में किस तरह से सक्रियता रखनी है इसका टास्क दिया।

    चुनाव प्रचार की गति जैसे-जैसे आगे बढ़ी वैसे-वैसे जदयू ने अपने लोगों की सक्रियता बढ़ानी शुरू की। जिस तरह से जदयू अपने दल के प्रत्याशियों के लिए जनसंपर्क अभियान की बढ़ाता है ठीक उसी अंदाज में बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में चुनाव प्रचार के लिए 20 टीम का गठन कर उन्हें शहर के अलग-अलग हिस्सों में भेजा गया।

    राज्य मंत्रिमंडल में जदयू कोटे के प्राय: सभी मंत्रियों ने मोर्चा संभाला। यह कार्यक्रम लगातार चलता रहा। बांकीपुर उपचुनाव के लिए जदयू अपने एक विधायक को प्रभारी भी बनाया।

    जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा ने लगातार दो दिन बांकीपुर उपचुनाव के लिए जनसभा की। मंत्री श्रवण कुमार व निशांत भी उनके साथ चुनावी सभा में शामिल हुए।

  • हरियाणा के सरकारी स्कूलों में एफएलएन मिशन से बच्चों की सीखने की गुणवत्ता बढ़ी

    हरियाणा के सरकारी स्कूलों में एफएलएन मिशन से बच्चों की सीखने की गुणवत्ता बढ़ी

     रोहतक
    हरियाणा में भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा 2021 को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अंतर्गत शुरू किया गया बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान यानी फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी (एफएलएन) के तहत पढ़ाई करवाई जा रही है।

    इस पहल के तहत 2026–27 तक प्रत्येक बच्चे को कक्षा 3 के अंत तक बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान में काबिल बनाना है, ताकि प्रारम्भिक कक्षाओं में ही बच्चे पढ़ना, लिखना और गणित की बुनियादी समझ विकसित कर सके, जिससे आगे की शिक्षा में उन्हें कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़े।

    विद्यार्थियों के सीखने के स्तर में वृद्धि
    टीचिंग-लर्निंग प्रैक्टिसेस सर्वे 2025 के अनुसार, सितंबर से दिसंबर 2025 के बीच दो चरणों के आकलन में विद्यार्थियों की दक्षता में सुधार हुआ है। सितंबर से दिसंबर 2025 के बीच हुए मूल्यांकन में पाया गया कि कैटेगरी-ए स्कूलों की संख्या 7 प्रतिशत से बढ़कर 53 प्रतिशत हो गई और कैटेगरी-सी स्कूलों की संख्या 74 प्रतिशत से घटकर 23 प्रतिशत रह गई। यह दर्शाता है कि विद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार हुआ है।

    सेंट्रल स्क्वायर फाउंडेशनल में सीनियर एकेडमिक प्रोफेशनल अजय गुप्ता ने बताया कि टीचिंग-लर्निंग प्रैक्टिसेस सर्वे (टीएलपीएस) 2025 में सामने आया कि फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी (एफएलएन) को लेकर सकारात्मक पहलें हुई हैं और उनका असर भी दिखाई देता है।

    वहीं यदि बच्चों की त्रुटियों को समय रहते समझा जाए और उन्हें सुधारने में सहयोग दिया जाए, तो सीखने की प्रक्रिया कहीं अधिक प्रभावी बन सकती है। क्योंकि कई बार कक्षा में अपनाए गए छोटे-छोटे बदलाव ही बच्चे के सीखने में बड़ा अंतर पैदा कर सकते हैं।

    पढ़ने की क्षमता में सुधार
    टीचिंग-लर्निंग प्रैक्टिसेस सर्वे 2025 के अनुसार, कक्षा दूसरी के विद्यार्थियों का साक्षरता स्तर 46.5 प्रतिशत से बढ़कर 67 प्रतिशत हो गया। कक्षा तीसरी का साक्षरता स्तर 44.2 प्रतिशत से बढ़कर 61.4 प्रतिशत हुआ। इसके साथ ही प्रति मिनट 45 शब्द पढ़ने वाले विद्यार्थियों का प्रतिशत 48 से बढ़कर 65 प्रतिशत हो गया और 31 प्रतिशत विद्यार्थी प्रति मिनट 60 शब्द पढ़ने में सक्षम पाए गए।

    जिला एफएलएन कोऑर्डिनेटर रूपांशी डुड्डा ने बताया कि प्रदेश भर के स्कूलों में प्रत्येक बच्चे को निपुण बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। इसके लिए शिक्षा विभाग की ओर से अनेक कदम उठाए जा रहे हैं।

    स्कूलों में बच्चों को टीएलएम का प्रयोग कर पढ़ाई करवाई जा रही है। फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी (एफएलएन) के तहत सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की सीखने की गुणवत्ता में व्यापक सुधार किया है।

    कक्षाओं में बेहतर हुआ सीखने का माहौल
    टीचिंग-लर्निंग प्रैक्टिसेस सर्वे (TLPS) 2025 के अनुसार, हरियाणा के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का माहौल पहले से बेहतर हुआ है। सर्वे में पाया गया कि 71% समय शिक्षक पढ़ाने में, जबकि 12% समय बच्चों की भागीदारी वाली गतिविधियों में बीता। हालांकि, 31% समय बच्चे किसी सीखने की गतिविधि में शामिल नहीं थे।

    83% शिक्षकों ने पिछले एक वर्ष में एफएलएन प्रशिक्षण प्राप्त किया और अब शत-प्रतिशत शिक्षकों को यह प्रशिक्षण दिया जा चुका है। लगभग 75 प्रतिशत कक्षाओं में चार्ट, पोस्टर और अन्य शिक्षण सामग्री लगाई गई थी, जिनमें से 80 प्रतिशत सामग्री बच्चों की आँखों के स्तर पर थी। इससे बच्चों के लिए सीखना अधिक आसान और रोचक बना है।

    क्या हैं निपुण भारत के मुख्य उद्देश्य?
    निपुण भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा 5 जुलाई 2021 को शुरू किया गया एक राष्ट्रीय मिशन है। NIPUN का पूरा नाम नेशनल इनिशिएटिव फॉर प्रोफिशीयंशि इन रीड़िग विथ अंडरस्टेनड़िंग एंड नियुमेरेसी है। यह मिशन राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत संचालित किया जा रहा है और एफएलएन को मजबूत बनाने पर
    केंद्रित है। निपुण भारत के मुख्य उद्देश्य है:

    1.प्रत्येक बच्चे को समझ के साथ पढ़ना और लिखना सिखाना।
    2.बच्चों में बुनियादी गणितीय कौशल विकसित करना।
    3.गतिविधि आधारित और बाल-केंद्रित शिक्षण को बढ़ावा देना।
    4.शिक्षकों को प्रशिक्षण और शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराना।
    5.वर्ष 2026–27 तक सभी बच्चों को कक्षा 3 के अंत तक एफएलएन में काबिल बनाना।

  • रांची एचईसी परिसर में हटेगा अतिक्रमण, 1200 करोड़ की जमीन पर कब्जा

    रांची एचईसी परिसर में हटेगा अतिक्रमण, 1200 करोड़ की जमीन पर कब्जा

    रांची
     रांची के एचइसी आवासीय परिसर में अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया जायेगा. इसको लेकर एचइसी प्रबंधन ने जिला प्रशासन को पत्र लिख कर अवैध निर्माण हटाने में सहयोग की मांग की है. एचइसी नगर प्रशासन विभाग के अधिकारी ने कहा कि कर्मियों की कमी के कारण व्यापक स्तर पर अभियान नहीं चलाया जा रहा है. एचइसी आवासीय परिसर में लोगों द्वारा धड़ल्ले से अवैध निर्माण किया जा रहा है. शिकायत मिलने पर चेतावनी भी दी जाती है, इसके बावजूद लोग रातों-रात निर्माण कार्य कर रहे हैं.

    1200 करोड़ की जमीन पर अवैध कब्जा
    अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई को लेकर एचइसी प्रबंधन ने पिछले दिनों सर्वे भी कराया है. मालूम हो कि एचइसी कॉलोनी के अंदर सौ एकड़ से अधिक जमीन पर अवैध कब्जा है. एचइसी ने जमीन की लीज दर 12 करोड़ रुपये प्रति एकड़ निधर्धारित की है. इस हिसाब से कब्जा की गयी जमीन की कीमत 1200 करोड़ रुपये से अधिक है. जमीन पर अवैध कब्जा होने से एचइसी को राजस्व नहीं मिल रहा है. वहीं, कानून व्यवस्था की स्थिति भी बिगड़ रही है. आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण सुरक्षाकर्मियों द्वारा पूर्व की तरह नियमित गश्त भी नहीं की जा रही है.

    1850 एकड़ भूखंड खाली है
    मालूम हो कि एचइसी के लिए आठ हजार एकड़ जमीन अधिग्रहित की गयी थी. इनमें दो हजार 194 एकड़ पर तीन प्लांटों की स्थापना, 430 एकड़ पर आवासीय कॉलोनियों का निर्माण, 158 एकड़ सीआइएसएफ को आवंटित, 303 एकड़ जमीन शैक्षणिक और अन्य संस्थानों को आवंटित, 2305 एकड़ जमीन राज्य सरकार को हस्तांतरित, 100 एकड़ पर अवैध कब्जा व 1850 एकड़ खाली भूखंड है.

    कहां-कहां है अवैध निर्माण?
    एचइसी आवासीय परिसर के सेक्टर 2, सेक्टर 3, मामा नगर, पटेल नगर, पंचमुखी मंदिर के पीछे, डीएवी स्कूल के पास, जेपी मार्केट, टंकी साइड, डैम साइड सहित विभिन्न जगहों पर खाली जमीन पर लोग अवैध निर्माण किये हुए हैं.

  • झारखंड के 600 सरकारी स्कूलों में एआई आधारित स्मार्ट क्लासेज जल्द शुरू होंगी

    झारखंड के 600 सरकारी स्कूलों में एआई आधारित स्मार्ट क्लासेज जल्द शुरू होंगी

    रांची
    राज्य के कई सरकारी स्कूलों में समग्र शिक्षा अभियान के तहत स्मार्ट क्लासेज की व्यवस्था पहले से शुरू की गई है। लेकिन अब स्कूलों में एआई आधारित स्मार्ट क्लासेज की सुविधा बहाल की जाएगी। इस सुविधा के लिए राज्य के 600 स्कूलों का चयन किया गया है। एआई आधारित स्मार्ट क्लासेज होने से उसकी जिला से लेकर राज्य सतर पर रियल टाइम निगरानी हो सकेगी।

    झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने राज्य के 600 मिडिल स्कूलों में एआई आधारित स्मार्ट क्लासेज की सुविधा बहाल करने तथा स्मार्ट क्लासेज साॅल्यूशन तैयार करने तथा उनके रखरखाव के लिए निजी एजेंसी के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

    पहली बार स्मार्ट क्लास को एआई से लैस करते हुए स्मार्ट क्लास साॅल्यूशन लागू किया जा रहा है। इससे स्कूलों में कब और कितने समय स्मार्ट क्लासेज हुईं, शिक्षा विभाग को रियल टाइम जानकारी मिलती रहेगी। इसे डैश बोर्ड से भी जोड़ा जाएगा।

    गलत डिजिटल सामग्री प्रसारित होने पर जिम्मेदार शिक्षकों के विरुद्ध कार्रवाई
    इससे स्कूलों में लगे उपकरण इस्तेमाल हो रहे हैं या नहीं, सिस्टम कब ऑन या ऑफ हुआ, कितनी देर इस्तेमाल हुआ, कौन से एप्लीकेशन कितने घंटे इस्तेमाल हो रहे हैं आदि की जानकारी ऑनलाइन मिलेगी। इस पर एनालिटिकल रिपोर्ट भी तैयार हो सकेगी।

    इतना ही नहीं स्मार्ट क्लासेज में किस तरह की डिजिटल शैक्षणिक सामग्री प्रसारित हुईं, इसकी भी जानकारी मिलेगी। किसी तरह की गलत डिजिटल सामग्री प्रसारित होने पर जिम्मेदार शिक्षकों के विरुद्ध कार्रवाई हो सकेगी।

    स्मार्ट क्लास के आसान और समय पर मेंटेनेंस के लिए आनलाइन काल लाग मैनेजमेंट सिस्टम तैयार किया जाएगा। बताते चलें कि राज्य सरकार ने लाइव क्लासेज के लिए कुल सात स्टूडियो स्थापित करने का भी निर्णय लिया है।

    पिछले दिनों कैबिनेट की बैठक में इस योजना पर स्वीकृति मिली। रांची के रातू स्थित जेसीईआरटी में दो तथ पांच प्रमंडलों में एक-एक स्टूडियो का निर्माण कराया जाएगा। यहां से चिह्नित एक हजार स्कूलों में लाइव क्लासेज की सुविध बहाल की जाएगी। यह सुविधा स्मार्ट क्लासेज से भिन्न होगी।

     

  • बिहार के सभी शिक्षकों के लिए प्रशस्त एप 2.0 पर पंजीकरण अनिवार्य

    बिहार के सभी शिक्षकों के लिए प्रशस्त एप 2.0 पर पंजीकरण अनिवार्य

    पटना
     बिहार शिक्षा परियोजना परिषद ने सभी सरकारी एवं निजी विद्यालयों के शिक्षकों के लिए 'प्रशस्त एप 2.0' पर पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है। जिला शिक्षा कार्यालय ने बिहार शिक्षा परियोजना परिषद से मिले निर्देश के बाद सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को पत्र जारी कर आवश्यक दिशा- निर्देश जारी किया है।

    जिला शिक्षा कार्यालय ने कहा है कि राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) द्वारा छह जुलाई को 'प्रशस्त एप 2.0' का शुभारंभ किया गया। इसके तहत सभी सरकारी एवं निजी विद्यालयों के शिक्षकों को 31 जुलाई तक अनिवार्य रूप से पंजीकरण करना है।

    यू-डाइस में दर्ज मोबाइल नंबर से होगा पंजीकरण
    निर्देश के अनुसार, शिक्षक पंजीकरण के दौरान यू-डाइस पोर्टल पर दर्ज मोबाइल नंबर का ही उपयोग करेंगे। पंजीकरण के बाद एप के संचालन से संबंधित प्रशिक्षण वीडियो देखना भी सभी शिक्षकों के लिए अनिवार्य होगा।

    15 अगस्त से शुरू होगी विद्यार्थियों की स्क्रीनिंग
    पंजीकरण पूरा होने के बाद 15 अगस्त से 15 सितंबर के बीच विद्यालयों में अध्ययनरत सभी छात्र-छात्राओं की 'प्रशस्त एप 2.0' के माध्यम से स्क्रीनिंग की जाएगी।

    इसका उद्देश्य विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की समय पर पहचान कर उन्हें आवश्यक शैक्षणिक सहयोग उपलब्ध कराना है। प्रशस्त एप 2.0 के माध्यम से विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगी और समावेशी शिक्षा व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी।

    एनसीईआरटी करेगी जिलावार समीक्षा
    पत्र में कहा गया है कि शिक्षकों के पंजीकरण की जिलावार प्रगति की समीक्षा एनसीईआरटी द्वारा की जाएगी। इसलिए प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को शिविर आयोजित कर निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी शिक्षकों का पंजीकरण सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया गया है।

     

  • महिला आईटीआई में 275 सीटें खाली, ड्रोन पायलट ट्रेड में नहीं मिला प्रवेश

    महिला आईटीआई में 275 सीटें खाली, ड्रोन पायलट ट्रेड में नहीं मिला प्रवेश

     अंबाला
    राजकीय महिला औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) में चल रही दाखिला प्रक्रिया के पहले चरण में 129 सीटों पर ही दाखिला हो सका। संस्थान की 404 सीटे हैं लिहाजा अभी 275 सीटें अभी भी खाली हैं।

    सबसे चौकाने वाली स्थिति ड्रोन पायलट (जूनियर) ट्रेड की है, जहां 24 की 24 सीटें खाली हैं और एक भी छात्रा ने प्रवेश नहीं लिया। प्रवेश आंकड़ों के अनुसार कंप्यूटर आपरेटर एंड प्रोग्रामिंग असिस्टेंट (एनसीवीटी) में 48 सीटों में से 28 पर दाखिले हुए हैं और 20 सीटें रिक्त हैं। कास्मेटोलाजी (एनसीवीटी) में 24 में से 12 सीटें भरी हैं, जबकि कास्मेटोलाजी (एससीवीटी) में केवल 5 छात्राओं ने प्रवेश लिया और 19 सीटें खाली हैं।

    इन ट्रेड में भी खाली पड़ी सीट
    इसी तरह कंप्यूटर हार्डवेयर एंड नेटवर्क मेंटेनेंस की 24 में से 17, डेंटल लेबोरेटरी इक्विपमेंट टेक्नीशियन की 24 में से 18, ड्राफ्ट्समैन (सिविल) की 24 में से 16, ड्राफ्ट्समैन (मैकेनिकल) की 24 में से 14 तथा मैकेनिक कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स एप्लायंसेज की 24 में से 20 सीटें अभी भी खाली हैं। सिलाई और परिधान से जुड़े ट्रेडों की स्थिति भी उत्साहजनक नहीं रही।

    ड्रेस मेकिंग (एससीवीटी) में 20 में से 18, सिलाई टेक्नोलॉजी (एससीवीटी) की सभी 20 सीटें, सिलाई टेक्नोलॉजी (एनसीवीटी) में 14, सिलाई टेक्नोलाजी ड्यूल में 11 तथा सरफेस आर्नामेंटेशन टेक्निक्स (एंब्रायडरी) में 40 में से 27 सीटें रिक्त हैं।

    अब अगले चरण से उम्मीद
    प्रवेश के आंकड़े बताते हैं कि इस वर्ष महिला आईटीआई में कई रोजगारपरक ट्रेड भी छात्राओं को आकर्षित नहीं कर पाए हैं। अब संस्थान की उम्मीद अगले चरण की काउंसलिंग पर टिकी है, जिससे खाली सीटों पर प्रवेश बढ़ने की संभावना है। सबसे बड़ी चुनौती आधुनिक और उभरते हुए ड्रोन पायलट जैसे ट्रेडों में छात्राओं की रुचि बढ़ाना होगी।

    मूलचंद राजकीय आईटीआई में महज 60 सीटों पर हुआ दाखिला
    मूलचंद राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) में विभिन्न एनसीवीटी ट्रेडों की 176 सीटें अभी भी खाली हैं। संस्थान में अभी तक 60 सीटों पर ही दाखिला हुआ है

    रिकॉर्ड के अनुसार सबसे अधिक वेल्डर ट्रेड में 40 में से 37 सीटें, ड्राफ्ट्समैन (सिविल) में 24 में से 21 सीटें, इंस्ट्रूमेंट मैकेनिक में 24 में से 21 सीटें, टर्नर में 20 में से 16 सीटें तथा मशीनिस्ट में 20 में से 16 सीटें रिक्त हैं। इसके अलावा कंप्यूटर आपरेटर एंड प्रोग्रामिंग असिस्टेंट (कोपा), इलेक्ट्रीशियन, फिटर, वायरमैन और स्टेनोग्राफर (हिंदी) ट्रेडों में भी सीटें उपलब्ध हैं।