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  • प्रधानमंत्री मोदी से मिले भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों, पंजाब के विकास के रोडमैप पर हुई अहम चर्चा

    प्रधानमंत्री मोदी से मिले भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों, पंजाब के विकास के रोडमैप पर हुई अहम चर्चा

    चंडीगढ़
     भारतीय जनता पार्टी के पंजाब प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर पंजाब के विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान राज्य में निवेश बढ़ाने, औद्योगिक विकास को नई गति देने, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने और किसानों तथा मजदूरों के कल्याण जैसे अहम विषय बैठक के केंद्र में रहे।

    जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री से हुई इस मुलाकात में केवल सिंह ढिल्लों ने पंजाब के सर्वांगीण विकास को लेकर अपनी प्राथमिकताओं से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि राज्य को फिर से औद्योगिक दृष्टि से मजबूत बनाने के लिए बड़े निवेश की आवश्यकता है। इसके लिए केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय के साथ उद्योगों के अनुकूल माहौल तैयार किया जाना जरूरी है।

    औद्योगिक इकाइयों के विस्तार का मुद्दा उठाया
    बैठक में ढिल्लों ने पंजाब में नए उद्योग स्थापित करने और मौजूदा औद्योगिक इकाइयों के विस्तार का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि यदि राज्य में बड़े पैमाने पर निवेश आता है तो इससे हजारों युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही पंजाब की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी और राज्य फिर से औद्योगिक विकास के क्षेत्र में अग्रणी बन सकेगा।

    उन्होंने किसानों और मजदूरों के कल्याण से जुड़े विषयों पर भी प्रधानमंत्री का ध्यान आकर्षित किया। ढिल्लों ने कहा कि पंजाब की अर्थव्यवस्था में कृषि और उद्योग दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसलिए दोनों क्षेत्रों को समान रूप से मजबूत करने की दिशा में लगातार प्रयास किए जाने चाहिए, ताकि प्रदेश के हर वर्ग को विकास का लाभ मिल सके।

    जनता की सेवा के लिए प्रतिबद्ध भाजपा
    मुलाकात के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उनकी दूरदर्शी सोच और विकास केंद्रित नीतियों से देश के विभिन्न राज्यों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि पंजाब को भी केंद्र सरकार की योजनाओं और सहयोग का पूरा लाभ मिलेगा।

    केवल सिंह ढिल्लों ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी पंजाब के विकास, निवेश को बढ़ावा देने, युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने और जनता की सेवा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करती रहेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी का लक्ष्य प्रदेश को विकास, निवेश और रोजगार के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है।

     

  • दिल्ली में बनेगा नया फ्लाईओवर, वसंतकुंज-महरौली जाम से मिलेगी राहत

    दिल्ली में बनेगा नया फ्लाईओवर, वसंतकुंज-महरौली जाम से मिलेगी राहत

    नई दिल्ली
     महिपालपुर-महरौली मार्ग, नेशनल हाइवे-48 और आसपास के इलाकों से वसंतकुंज और JNU की तरफ आने-जाने वालों को जल्द ही ट्रैफिक जाम से मुक्ति मिलने वाली है। दिल्ली सरकार ने अरुणा आसफ अली मार्ग पर ट्रैफिक को सुगम बनाने के लिए एक बड़े फ्लाईओवर निर्माण की योजना तैयार की है। लगभग 6 किलोमीटर लंबे इस पूरे स्ट्रेच पर फ्लाईओवर की संभावनाओं को तलाशने के लिए 1.97 करोड़ की लागत से फीजिबिलिटी स्टडी कराने के आदेश दिए गए हैं। इस नए फ्लाईओवर के बनने से न सिर्फ अरुणा आसफ अली रोड पर गाड़ियां सरपट दौड़ सकेंगी, बल्कि आउटर रिंग रोड, नेलसन मंडेला मार्ग और श्री अरबिंदो मार्ग जैसे प्रमुख रास्तों पर भी गाड़ियों का दबाव काफी हद तक कम हो जाएगा।

    • पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश साहिब सिंह के अनुसार नेशनल हाइवे-48 से वसंत कुंज, वसंत विहार, मुनिरका, आईआईटी या अरबिंदो मार्ग जाने वाले नेलसन मंडेला या फिर अरुणा आसफ अली रोड का ही इस्तेमाल करते हैं।
    • इससे इन दोनों रास्तों पर हर समय जाम की स्थिति रहती है।
    • आईआईटी फ्लाईओवर से नई दिल्ली एरिया, एम्स या सफदरजंग जाने का सबसे बेहतरीन विकल्प अरुणा आसफ अली रोड ही है।
    • JNU, इंटरनेशनल मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट, श्री लाल बहादुर शास्त्री संस्कृत यूनिवर्सिटी और कुतुब इंस्टिट्यूशनल एरिया के चलते अरुणा आसफ अली रोड पर पिछले कुछ साल में जाम काफी बढ़ गया है। इसलिए फ्लाईओवर निर्माण की योजना बनाई गई है।
    • कैबिनेट मंत्री के अनुसार, अरुणा आसफ अली मार्ग पर फ्लाईओवर निर्माण के लिए फीजिबिलिटी स्टडी किशनगढ़ गांव (वसंत कुंज के पास) से आउटर रिंग रोड-अरबिंदो मार्ग जंक्शन तक कराने का आदेश दिया गया है।

    क्या होगा फायदा?
    यह परियोजना साउथ दिल्ली की लाइफलाइन साबित हो सकती है। अगर इसे तय समय सीमा में पूरा कर लिया जाता है तो यह न केवल ट्रैफिक सिस्टम का स्तर सुधारेगा, बल्कि वसंत कुंज और महरौली क्षेत्र के लोगों के जीवन को काफी आसान बना देगा। वर्तमान में इस 5-6 किमी लंबे स्ट्रेच को क्रॉस करने में ही 30-35 मिनट का समय लगता है, लेकिन इसके बाद यह दूरी तय करने में मुश्किल से 5 से 7 मिनट लगेगा।

  • झारखंड में 60 लाख इनामी 16 माओवादी करेंगे आत्मसमर्पण

    झारखंड में 60 लाख इनामी 16 माओवादी करेंगे आत्मसमर्पण

    रांची
    झारखंड में माओवादी विचारधारा का अंत अब तय नजर आ रहा है। पुलिस और सुरक्षा बलों के चौतरफा घेराबंदी और राज्य सरकार की आत्मसमर्पण व पुनर्वास नीति के प्रभाव में आकर माओवादी लगातार मुख्यधारा में लौट रहे हैं।

    इसी क्रम में 28 जुलाई को एक बार फिर 16 कुख्यात माओवादी सामूहिक रूप से आत्मसमर्पण कर अपने हथियार डालेंगे। इस आत्मसमर्पण करने वाले समूह पर कुल 60 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इनमें सबसे प्रमुख चेहरा 15 लाख रुपये का इनामी रिजनल कमांडर संतोष उर्फ गांधी है।

    10-10 लाख के तीन और पांच-पांच लाख के तीन इनामी भी शामिल
    इसके साथ ही 10-10 लाख रुपये के इनामी तीन जोनल कमांडर, पांच-पांच लाख रुपये के तीन सब-जोनल कमांडर, छह एरिया कमांडर और संगठन के तीन निचले दस्ता कैडर भी मुख्यधारा में सम्मिलित होंगे।

    माओवादियों की इतनी बड़ी संख्या में सरेंडर करने की सबसे मुख्य वजह पुलिस का बिना रुके चल रहा निरंतर अभियान है, जिसने संगठन के आपूर्ति और कैडर नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है।

    लगातार खत्म होते आधार के कारण माओवादियों का मनोबल टूट चुका है। अब केवल सारंडा के जंगलों में ही कुछ नक्सली सिमट कर रह गए हैं, जिनमें एक-एक करोड़ के दो बड़े इनामी माओवादी मिसिर बेसरा और असीम मंडल सम्मिलित हैं।

    सुरक्षा बलों का कहना है कि बचे हुए माओवादियों के सामने भी अब सिर्फ दो ही विकल्प बचे हैं। या तो वे सरेंडर करें या फिर पुलिस की गोली का सामना करें।

    28 जुलाई को सरेंडर करने वाले 16 इनामी माओवादी
        रिजनल कमांडर (15 लाख इनामी): संतोष उर्फ गांधी
        जोनल कमांडर (10-10 लाख इनामी): तीन माओवादी
        सब-जोनल कमांडर (5-5 लाख इनामी): तीन माओवादी
        एरिया कमांडर : छह माओवादी
        दस्ता कैडर (सक्रिय सदस्य): तीन माओवादी

     

  • समस्तीपुर में सात कोल्ड प्रेस ऑयल मिलें, किसानों को मिलेगा अनुदान और लाभ

    समस्तीपुर में सात कोल्ड प्रेस ऑयल मिलें, किसानों को मिलेगा अनुदान और लाभ

    समस्तीपुर
    किसानों की आय बढ़ाने और कृषि आधारित उद्यमों को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से वित्तीय वर्ष 2026-27 में सात कोल्ड प्रेस ऑयल मिल एवं पैकेजिंग यूनिट स्थापित की जाएंगी। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत शुरू की जा रही इस योजना की तैयारियों में कृषि विभाग जुट गया है।

    जिले में सामान्य वर्ग के लिए छह तथा अनुसूचित जाति वर्ग के लिए एक यूनिट स्थापित की जाएगी। योजना के तहत सरसों, तिल, मूंगफली सहित अन्य तिलहनी फसलों का स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण कर मूल्य संवर्धन किया जाएगा।

    इसके साथ ही उत्पादों की ब्रांडिंग और पैकेजिंग को बढ़ावा देने के लिए भी सरकार अनुदान उपलब्ध कराएगी।

    जिला कृषि पदाधिकारी डॉ. सुमित सौरभ ने बताया कि योजना के तहत 10 एचपी या इससे अधिक क्षमता वाली इलेक्ट्रिक मोटर संचालित कोल्ड प्रेस ऑयल मिल लगाने पर सामान्य वर्ग के लाभार्थियों को अधिकतम दो लाख रुपये अथवा परियोजना लागत का 40 प्रतिशत (जो कम हो) अनुदान मिलेगा।

    वहीं, अनुसूचित जाति वर्ग के किसानों को अधिकतम 2.50 लाख रुपये अथवा लागत का 50 प्रतिशत तक सहायता दी जाएगी। इसके लिए आवेदन की प्रक्रिया जल्द ही शुरू कर दी जाएगी।

    जिला स्तरीय समिति करेगी इच्छुक किसानों का चयन:
    कृषि विभाग के अनुसार, पैकेजिंग यूनिट की स्थापना पर सामान्य वर्ग के लाभार्थियों को 1.20 लाख रुपये अथवा परियोजना लागत का 40 प्रतिशत, जबकि अनुसूचित जाति वर्ग के लाभार्थियों को 1.50 लाख रुपये अथवा परियोजना लागत का 50 प्रतिशत तक अनुदान मिलेगा।

    योजना का लाभ लेने के इच्छुक किसानों को कृषि विभाग की वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इसको लेकर विभागीय स्तर पर प्रक्रिया चल रही है। चयन आधारित ऑनलाइन आवेदन के आधार पर जिला स्तरीय समिति करेगी।

    अधिक आवेदन आने पर लाटरी के माध्यम माध्यम से चयन होगा। चयनित लाभार्थियों को एक माह के भीतर बैंक ऋण स्वीकृत कराना होगा तथा अगले महीने मशीनों की खरीद एवं स्थापना पूरी करनी होगी। योजना स्वीकृत होने के दो से तीन माह के भीतर उत्पादन शुरू करना भी अनिवार्य रहेगा।

    बिना बीजों को गर्म किए यांत्रिक दबाव से निकाला जाएगा तेल:
    यह तेल निकालने की एक प्रक्रिया है, जिसमें बिना बीजों को गर्म किए यांत्रिक दबाव से तेल निकाला जाता है। पारंपरिक तरीके या रिफाइनरी तेल मिलों के विपरीत, इसमें उच्च तापमान और केमिकल का प्रयोग नहीं किया जाता है, इससे तेल का प्राकृतिक स्वाद, खुशबू और सभी पोषक तत्व यथा विटामिन और एंटी-आक्सीडेंट सुरक्षित रहते हैं।

     

  • जयपुर की नई पेयजल पाइपलाइन लागत बढ़ी, अब खर्च 2500 करोड़

    जयपुर की नई पेयजल पाइपलाइन लागत बढ़ी, अब खर्च 2500 करोड़

    जयपुर
     जयपुर शहर की बढ़ती आबादी की पेयजल जरूरतों को पूरा करने के लिए सूरजपुरा से बालावाला तक बिछाई जाने वाली 105 किलोमीटर लंबी नई पाइप लाइन को लेकर बीसलपुर प्रोजेक्ट विंग से चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। वर्ष 2015 में इस लाइन की लागत 1100 करोड़ रुपए आंकी गई थी, जबकि अब करीब 10 वर्ष बाद इसका खर्च बढ़कर 2500 करोड़ रुपए से अधिक पहुंचने का अनुमान है।

    राजस्थान सरकार ने बजट में सूरजपुरा से बालावाला तक नई पाइप लाइन 1889 करोड़ रुपए की लागत से बिछाने की घोषणा की थी। हालांकि, हाल ही में विभाग की विकास परियोजनाओं के लिए जारी नई बीएसआर के आधार पर लागत का आकलन किया गया तो बीसलपुर प्रोजेक्ट विंग और जलदाय विभाग के अधिकारियों के सामने खर्च 2500 करोड़ रुपए से अधिक बैठ रहा है। सूत्रों के अनुसार, लागत में इस बढ़ोतरी के बाद डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया भी धीमी पड़ गई है।

    132 केवी ग्रिड पर ही 100 करोड़ से ज्यादा खर्च
    पत्रिका ने बीसलपुर प्रोजेक्ट के इंजीनियरों से नई पाइप लाइन की लागत को लेकर बात की तो सामने आया कि देरी का असर पूरे प्रोजेक्ट पर पड़ रहा है। केवल 132 केवी ग्रिड के निर्माण पर ही 100 करोड़ रुपए से अधिक खर्च आने का अनुमान है। इसके अलावा फिल्टर प्लांट, पंप और अन्य मशीनरी की लागत भी 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ चुकी है। ऐसे में पूरी परियोजना का खर्च पहले के अनुमान से काफी अधिक हो गया है। मौजूदा पाइप लाइन 17 वर्ष पुरानी हो चुकी है। बीसलपुर प्रोजेक्ट विंग ने इसमें 33 से अधिक लीकेज होने की रिपोर्ट भी तैयार कर रखी है।

    देरी का खमियाजा विभाग और शहर के लोगों पर
    नई पाइप लाइन बिछाने में हुई करीब 10 वर्ष की देरी का खमियाजा जलदाय विभाग और शहर के लोगों, दोनों को भुगतना पड़ रहा है। विभाग को बढ़ी हुई लागत का बोझ उठाना पड़ रहा है, जबकि शहरवासियों को बीसलपुर का पर्याप्त पानी समय पर नहीं मिल पा रहा। कई इलाकों की जलापूर्ति घटाकर दूसरे क्षेत्रों में पानी दिया जा रहा है। जबकि बीसलपुर बांध में पर्याप्त पानी उपलब्ध है, लेकिन शहर की वर्तमान जरूरत के अनुरूप पानी लाने के लिए आवश्यक पाइपलाइन व्यवस्था उपलब्ध नहीं है।

    फैक्ट फाइल
    -वर्ष 2009 में बिछाई गई थी मौजूदा पाइप लाइन
    -सूरजपुरा से बालावाला तक पाइप लाइन बिछाने पर हुए थे 400 करोड़ रुपए खर्च
    -वर्ष 2021 तक की शहर की आबादी की पेयजल जरूरतों के हिसाब से तैयार की गई थी लाइन
    -वर्ष 2026 तक बढ़ी आबादी का अतिरिक्त पांच वर्ष का भार भी मौजूदा पाइप लाइन पर
    -वर्ष 2029 तक नई पाइप लाइन बिछाने का लक्ष्य

  • बिहार सरकार का नया रोडमैप, निवेश और रोजगार पर रहेगा फोकस

    बिहार सरकार का नया रोडमैप, निवेश और रोजगार पर रहेगा फोकस

    पटना
    मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में सरकार के पहले 100 दिनों में कई महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिए गए। अब सरकार का अगला चरण इन सभी नीतियों को मजबूती से सरजमी पर उतारना होगा।

    पूरा फोकस बिहार में निवेश एवं उद्योग को बढ़ावा देने के साथ ही रोजगार का नया केंद्र बनाने पर होगा। इसे लेकर राज्य सरकार के स्तर से एक विस्तृत दस्तावेज तैयार किया गया है।

    ताकि सभी भावी योजनाओं को समुचित तरीके से मूर्तरूप दिया जा सके।100 दिनों के दौरान घोषित औद्योगिक, निवेश और व्यापार-अनुकूल नीतियां आने वाले महीनों में बड़े निवेश व रोजगार सृजन का आधार बनेगी।

    बिहार स्वयं को पूर्वी भारत के उभरते औद्योगिक और निवेश केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ा सकता है।

    इस 100 दिवसीय पुस्तिका में उद्योग, निवेश, डिजिटलीकरण और नागरिक-केंद्रित शासन पर दिए गए जोर के अनुरूप है।

    अगले चरण में सरकार की प्राथमिकताएं
    सरकार के स्तर से औद्योगिक निवेश के प्रोत्साहन से जुड़ी सशक्त नीतियों को निवेशकों तक सुलभता से पहुंचने की कवायद की जाएगी।

    लाइसेंस, एनओसी एवं अन्य दस्तावेजों को समयबद्ध स्वीकृति प्रदान करने की सुविधा के साथ ही भूमि आवंटन और परियोजनाओं के शीघ्र क्रियान्वयन पर विशेष जोर रहेगा।

    ईज आफ डूइंग बिजनेस 2.0
    उद्योग स्थापित करने की प्रक्रियाओं को अधिक सरल, डिजिटल तथा पारदर्शी बनाकर बिहार को निवेश के लिए प्रतिस्पर्धी राज्य के रूप में विकसित करने की दिशा में खासतौर से पहल की जाएगी। इससे राज्य में निवेश बढ़ने के साथ ही रोजगार के नए अवसर भी बढ़ेंगे।

    ग्रीन इंडस्ट्री और ईवी इकोसिस्टम
    इलेक्ट्रिक वाहन नीति-2026 के तहत बैटरी चालित वाहनों के लिए चार्जिंग नेटवर्क, विनिर्माण, बैटरी रीसाइक्लिंग उद्योगों को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा मिलेगा। इससे बिहार स्वच्छ औद्योगिक विकास की दिशा में आगे बढ़ेगा।

    एमएसएमई और स्टार्टअप को नई ऊर्जा
    सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों, स्थानीय उद्यमिता और स्टार्टअप आधारित रोजगार को बढ़ावा देने के लिए विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर रहेगा।

  • BFUHS MO Recruitment 2026: MBBS पास के लिए 630 मेडिकल ऑफिसर पदों पर भर्ती, ₹53,100 होगी शुरुआती सैलरी

    BFUHS MO Recruitment 2026: MBBS पास के लिए 630 मेडिकल ऑफिसर पदों पर भर्ती, ₹53,100 होगी शुरुआती सैलरी

    चंडीगढ़ 
    सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे MBBS डॉक्टरों के लिए अच्छी खबर है। बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (BFUHS), फरीदकोट ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, पंजाब सरकार के तहत मेडिकल ऑफिसर (जनरल) के 630 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मांगे हैं। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जबकि आवेदन करने की अंतिम तिथि 5 अगस्त 2026 तय की गई है।

    इस भर्ती अभियान के तहत 540 नए पदों और 90 बैकलॉग पदों समेत कुल 630 रिक्तियों को भरा जाएगा। इनमें विभिन्न आरक्षित वर्गों के लिए भी पद निर्धारित किए गए हैं। भर्ती में महिलाओं के लिए भी आरक्षण का प्रावधान किया गया है।

    नोट करें सभी जरूर तिथियां
     
    विवरण                                         तिथि
    ऑनलाइन आवेदन शुरू           16 जुलाई 2026
    आवेदन की अंतिम तिथि            5 अगस्त 2026

    कौन कर सकता है आवेदन?
    आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से MBBS डिग्री होना अनिवार्य है। इसके साथ ही उम्मीदवार का पंजाब मेडिकल काउंसिल या भारत की किसी अन्य मान्यता प्राप्त मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण होना चाहिए।

    उम्मीदवारों को मैट्रिक स्तर तक पंजाबी भाषा का ज्ञान भी होना चाहिए। हालांकि, जिन अभ्यर्थियों के पास यह योग्यता नहीं है, उन्हें नियुक्ति के छह महीने के भीतर यह शर्त पूरी करनी होगी।

    सरकारी सेवा में कार्यरत उम्मीदवारों को आवेदन के समय एनओसी (No Objection Certificate) प्रस्तुत करना होगा। वहीं, खेल कोटे के तहत आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास पंजाब सरकार द्वारा जारी स्पोर्ट्स ग्रेडेशन सर्टिफिकेट होना जरूरी है। 

    आयु सीमा कितनी है?
    1 जनवरी 2026 के अनुसार उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 37 वर्ष निर्धारित की गई है। आरक्षित वर्गों को नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट मिलेगी।

    वर्ग                                                    अधिकतम आयु
    SC/BC                                            42 वर्ष
    दिव्यांग                                            47 वर्ष
    सरकारी कर्मचारी                            45 वर्ष
    विधवा एवं तलाकशुदा महिलाएं     40 वर्ष

     कितना मिलेगा वेतन?
    चयनित उम्मीदवारों को सातवें वेतन आयोग के तहत पे लेवल-9 में नियुक्त किया जाएगा। शुरुआती वेतन 53,100 रुपये प्रति माह होगा। इसके अलावा सरकार के नियमों के अनुसार अन्य भत्तों का लाभ भी मिलेगा।

    चयन कैसे होगा?
    उम्मीदवारों का चयन 100 अंकों की लिखित परीक्षा के आधार पर किया जाएगा। परीक्षा में सफल होने के लिए अभ्यर्थियों को कम से कम 33 प्रतिशत अंक हासिल करने होंगे। अंतिम चयन मेरिट और आरक्षण नियमों के आधार पर किया जाएगा।

    आवेदन शुल्क
    श्रेणी                                         शुल्क
    सामान्य एवं अन्य वर्ग        2,360 रुपये
    एससी वर्ग                       1,180 रुपये

    ऐसे करें आवेदन
        सबसे पहले BFUHS की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
        मेडिकल ऑफिसर (जनरल) भर्ती लिंक पर क्लिक करें।
        आवेदन फॉर्म में मांगी गई जानकारी भरें।
        जरूरी दस्तावेज अपलोड करें।
        आवेदन शुल्क का ऑनलाइन भुगतान करें।
        फॉर्म जमा करने के बाद उसका प्रिंट आउट सुरक्षित रख लें।

     

  • भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन अब दिल्ली में करेगी ट्रायल

    भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन अब दिल्ली में करेगी ट्रायल

    नई दिल्ली
     जींद-सोनीपत के बीच सफलतापूर्वक दौड़ रही भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का अगला डेस्टिनेशन अब दिल्ली होगा। सूत्रों का कहना है कि जल्द ही इसका ट्रायल सोनीपत से दिल्ली में सब्जी मंडी रेलवे स्टेशन के बीच शुरू किया जाएगा। यहां ट्रायल सफल होने के बाद फिर इसका दायरा नई दिल्ली रेलवे स्टेशन तक बढ़ाए जाने की योजना है। हालांकि, सोनीपत से सब्जी मंडी के बीच ट्रायल शुरू करने में संचालन संबंधित एक दिक्कत आ रही है। जिसमें अगर इसका ट्रायल दिल्ली तक शुरू किया जाता है तो फिर चार-पांच दिनों के लिए हरियाणा में इसकी सर्विस बंद करनी पड़ेगी। इसी वजह से दिल्ली में इसका ट्रायल शुरू नहीं हो पा रहा है।

    सूत्रों का कहना है कि असल में सोनीपत से दिल्ली के बीच जब भी इस हाइड्रोजन ट्रेन का ट्रायल शुरू किया जाएगा। तब ट्रेन और ट्रैक की क्षमता समेत अन्य तकनीकी मसलों को देखने के लिए ट्रेन में 2600 यात्रियों के वजन जितनी रेत की बोरी भरी जाएंगी। 10 डिब्बों वाली इस ट्रेन में 8 यात्री कोच हैं। हर कोच में यात्रियों के बैठने और खड़े होने की क्षमता के हिसाब से उतने ही वजन की रेत की बोरियां भी इसमें रखकर ट्रायल किया जाएगा।

    10 डिब्बों वाली ट्रेन में 8 यात्री कोच
        ट्रायल सफल होने के बाद इसका दायरा नई दिल्ली स्टेशन तक बढ़ाए जाने की योजना है यात्रियों के बैठने और खड़े होने की क्षमता अनुसार उतने ही वजन की रेत की बोरियां रखी जाएंगी

    ट्रायल में आ रही है थोड़ी दिक्कत
    कम से कम चार-पांच दिनों तक सोनीपत से दिल्ली के बीच इसका ट्रायल किया जाएगा। इस दौरान यह अपनी सेवाएं जींद-सोनीपत रूट पर नहीं दे सकेगी। जबकि अब इस रूट पर ट्रेन चार्ट में यह जुड़ चुकी है। ऐसे में इसे इतने दिनों को हटाना और फिर दिल्ली के व्यस्त रूट पर इसका ट्रायल करने में थोड़ी दिक्कत आ रही है। लेकिन जल्द ही इसका समाधान निकाल लिया जाएगा। जिसके बाद सोनीपत से दिल्ली के बीच इसका ट्रायल होगा।

  • मक्का किसानों को एचएयू की सलाह, फाल आर्मीवर्म से बचाएं फसल

    मक्का किसानों को एचएयू की सलाह, फाल आर्मीवर्म से बचाएं फसल

     हिसार
     मक्का की फसल इस समय बढ़वार के अहम दौर में है। ऐसे में थोड़ी-सी लापरवाही किसानों की मेहनत पर भारी पड़ सकती है। इसी को देखते हुए चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) के कृषि वैज्ञानिकों की विशेष एडवाइजरी प्रकाशित की गई है।

    इसमें किसानों को 31 जुलाई के दौरान मक्का की फसल की देखभाल, रोग एवं कीट नियंत्रण तथा बेहतर उत्पादन के लिए वैज्ञानिक तरीके अपनाने की सलाह दी गई है। वैज्ञानिकों के अनुसार सबसे बड़ा खतरा फाल आर्मीवर्म (फा) से है।

    यह कीट शुरुआती अवस्था में ही पत्तियों को नुकसान पहुंचाना शुरू कर देता है और समय पर नियंत्रण नहीं होने पर पूरी फसल की उत्पादकता प्रभावित कर सकता है। इसलिए किसानों को खेतों का नियमित निरीक्षण करने और शुरुआती लक्षण दिखाई देते ही अनुशंसित दवाओं का छिड़काव करने की सलाह दी गई है।

    कृषि विज्ञानियों ने कहा कि जलभराव वाले खेतों में मक्का की खेती से बचें। अच्छी जल निकासी वाले खेत, उपचारित बीज, संतुलित उर्वरक और समय पर खरपतवार नियंत्रण से फसल की बढ़वार बेहतर होती है। चौड़ी कतार (वाइड रो) पद्धति अपनाने से सिंचाई के पानी की भी उल्लेखनीय बचत की जा सकती है।

    वर्षा के मौसम में पत्ती अंगमारी रोग की आशंका भी बढ़ जाती है। वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि पत्तियों पर भूरे धब्बे या अन्य लक्षण दिखाई देने पर तुरंत फफूंदनाशी का छिड़काव करें। साथ ही मौसम विभाग के पूर्वानुमान को देखते हुए ही सिंचाई और कीटनाशकों के प्रयोग की योजना बनाएं।

    किसानों के लिए पांच अहम सलाह
        खेत में जलभराव न होने दें, अच्छी निकासी सुनिश्चित करें।
        बुवाई से पहले बीज का उपचार अवश्य करें।
        फाल आर्मीवर्म के शुरुआती लक्षण दिखते ही नियंत्रण शुरू करें।
        खरपतवार नियंत्रण समय पर करें ताकि पोषक तत्वों की प्रतिस्पर्धा न हो।
        मौसम पूर्वानुमान के अनुसार ही सिंचाई और दवा का छिड़काव करें।

    बिजाई का तरीका
    पूर्व-पश्चिम दिशा में मेंढ बनाकर, मेंढ के दक्षिण दिशा में उपचारित बीज से 4-6 सेमी गहरी बीजाई करें। बाद में आधा खूड़ की ऊंचाई तक पानी लगाने से जमाव ज्यादा व जल्दी हाेता है। बिजाई यदि न्यूमैटिक प्लांटर द्वारा चैड़ा खूड विधि का उपयोग करके की जाए तो मक्का का जमाव भी अधिक हाेता है व पानी की भी 30-35 प्रतिशत बचत होती है।

    जुलाई महीने में पत्ता अंगमारी रोग के लक्षण दिखाई देते हैं। पत्ता अंगमारी में प्रभावित पत्ताें पर मोतीनुमा या सीधे निरंतर लम्बे स्लेटी भूरे रंग के हरे पीले प्रभामंडल वाले धब्बे देखे जा सकते हैं।

    रोग नियंत्रण:
    रासायनिक विधि द्वारा पौधों के उपचार के लिए 600 ग्राम मैंकोजेब (इंडोफिल एम- 45) का 200 ली पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें और जरुरत पड़ने पर इस क्रिया को 10-15 दिन के अंतराल पर दोहराएं।
    फाल आर्मी वर्म कीट का कब और कैसे नियंत्रण करें

    कीट नियंत्रण :
    मक्का में तना छेदक व फाल आर्मी वर्म (फा) मुख्या हानिकारक कीट हैं। फाल आर्मी वर्म एक बहुभक्षी व सर्वाधिक हानिकारक कीट है जो कई फसलों को नुकसान पहुंचता है। छोटी अवस्था के लार्वा (सुंडी) पत्ताें को खुरच कर कहते हैं जिससे शुरुआत में पत्ताें पर पिन के आकार के छोटे छोटे सुराख दिखाई देते हैं इसके अलावा छोटी सुंडियाें द्वारा ग्रसित पत्तों पत्ताें पर कागजी झिल्ली जैसे या लम्बे सुराख बन जाते हैं।

    बड़ी सुंडियाें द्वारा ग्रसित पत्तों पर अनियमित टेढ़े मेढ़े सुराख मिलते हैं। सुंडी पौधाें की गोभ में काफी मल-मूत्र छोड़ती है। उचित प्रबंधन के लिए कीट का निरिक्षण फसल उगने के तुरंत बाद ही शुरू कर देना चाहिए और शुरुआती प्रकोप दिखाई देते ही रोकथाम करनी चाहिए। इस कीट के प्रौढ़ मक्का के उगने के तुरंत बाद ही छोटे-छोटे पौधाें पर अंडे देती है और फसल की छोटी अवस्था में ही ये कीट अधिक नुक्सान करता है।

    फा कीट नियंत्रण के लिए फसल की छोटी अवस्था (3-4 सप्ताह) में 5 प्रतिशत आक्रमण पर व 5-7 सप्ताह की फसल में 10 प्रतिशत आक्रमण पर नीम की निम्बोली का 5 प्रतिशत घोल या अजाड़ीरेक्टिन 1500 पीपीएम (नीम तेल) 5 मी ली प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें।

    पौधों के पत्तों पर टेढ़े मेढ़े सुराख और गोभ में भी कीट का आक्रमण दिखाई दे ताे क्लोरैनट्निलीप्रोल 18.5 एस सी 80 मी ली प्रति एकड़ की दर से (0.4 मी ली प्रति लीटर पानी) या स्पिनिटाेट्राम 11.7 एस सी 100 मी ली प्रति एकड़ की दर से (0.5 मी ली प्रति लीटर पानी) 200-250 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।

  • झारखंड में बिजली सुरक्षा सख्त, नए कनेक्शन पर लागू होंगे नए नियम

    झारखंड में बिजली सुरक्षा सख्त, नए कनेक्शन पर लागू होंगे नए नियम

    रांची
    झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड ने बिजली से होने वाली दुर्घटनाओं पर रोक लगाने और उपभोक्ताओं को सुरक्षित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं।

    रांची विद्युत आपूर्ति क्षेत्र के महाप्रबंधक-सह-मुख्य अभियंता मनमोहन कुमार ने आदेश जारी कर रांची और गुमला विद्युत आपूर्ति सर्किल के सभी अधीक्षण अभियंताओं, कार्यपालक अभियंताओं एवं सहायक अभियंताओं को निर्देश दिया है कि नए कनेक्शन के दौरान चाइनिज तार से कनेक्शन लेने वाले पर जांच के दौरान कार्रवाई की जाएगी।

    वहीं आदेश में कहा गया है कि प्रत्येक नए एलटी कनेक्शन में उपयुक्त क्षमता का एमसीबी तथा आरसीसीबी लगाया जाएगा। इससे ओवरलोड, शॉर्ट सर्किट, अर्थ लीकेज और करंट लगने जैसी दुर्घटनाओं से बचाव सुनिश्चित होगा। किसी भी उपभोक्ता को सुरक्षा उपकरणों के बिना नया बिजली कनेक्शन जारी नहीं किया जाएगा।

    केवल आईएसआई मार्क वाले तारों का होगा उपयोग
    जेबीवीएनएल ने स्पष्ट किया है कि बिजली कनेक्शन देने के लिए केवल आइएसआइ प्रमाणित एवं निर्धारित गुणवत्ता वाले सर्विस वायर का ही उपयोग किया जाएगा। घटिया गुणवत्ता अथवा कम क्षमता वाले तारों का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। निगम का मानना है कि निम्न गुणवत्ता के तार बिजली दुर्घटनाओं और आग लगने की प्रमुख वजह बनते हैं।

    स्वीकृत लोड के अनुसार ही लगेगा सर्विस वायर
    निर्देश में कहा गया है कि उपभोक्ता के स्वीकृत लोड के अनुसार ही सर्विस वायर की क्षमता तय की जाएगी। इससे तारों के गर्म होने, वोल्टेज ड्रॉप और आग लगने जैसी घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सकेगा। यदि उपभोक्ता को अधिक बिजली की आवश्यकता है तो पहले स्वीकृत लोड बढ़वाना होगा।

    दूसरे मकान या दुकान तक बिजली देना प्रतिबंधित
    जेबीवीएनएल ने स्पष्ट किया है कि किसी एक परिसर के लिए स्वीकृत बिजली कनेक्शन का उपयोग केवल उसी परिसर में किया जा सकेगा। उसी कनेक्शन से दूसरे मकान, दुकान, प्लॉट या भवन तक बिजली पहुंचाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। यदि एक से अधिक परिसरों में बिजली चाहिए तो प्रत्येक परिसर के लिए अलग बिजली कनेक्शन लेना होगा।

    घरेलू कनेक्शन का व्यावसायिक उपयोग नहीं
    निगम ने यह भी कहा है कि उपभोक्ता बिजली का उपयोग केवल उसी उद्देश्य के लिए करेंगे, जिस श्रेणी का कनेक्शन स्वीकृत किया गया है। घरेलू कनेक्शन का व्यावसायिक उपयोग अथवा बिना अनुमति श्रेणी बदलकर बिजली उपयोग करना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा और संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई होगी।

    ओवरलोड और असुरक्षित वायरिंग पर विशेष निगरानी
    आदेश में कहा गया है कि उपभोक्ताओं को स्वीकृत लोड के भीतर ही बिजली का उपयोग करना होगा। अतिरिक्त लोड की आवश्यकता होने पर पहले JBVNL से लोड वृद्धि की स्वीकृति लेनी होगी। वहीं जिन भवनों की वायरिंग मानकों के अनुरूप नहीं होगी या जहां ढीले एवं असुरक्षित तार पाए जाएंगे, वहां नया सेवा कनेक्शन देने से बचने का निर्देश दिया गया है।

    निरीक्षण अभियान चलेगा, लापरवाही पर होगी कार्रवाई
    महाप्रबंधक-सह-मुख्य अभियंता ने सभी फील्ड अधिकारियों को नियमित निरीक्षण अभियान चलाने, नए कनेक्शन, मीटर इंस्टॉलेशन और रखरखाव के दौरान सुरक्षा मानकों का सत्यापन करने तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता मिलने पर तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

    साथ ही स्पष्ट किया गया है कि विद्युत अधिनियम-2003, झारखंड राज्य विद्युत विनियामक आयोग (JSERC) सप्लाई कोड और JBVNL के नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। आदेश में यह भी कहा गया है कि इस मामले में किसी भी प्रकार की ढिलाई को गंभीरता से लिया जाएगा और जिम्मेदार अधिकारियों एवं संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।