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  • जोधपुर रेलवे स्टेशन पर बनेंगे दो नए प्लेटफॉर्म, बढ़ेंगी यात्री सुविधाएं

    जोधपुर रेलवे स्टेशन पर बनेंगे दो नए प्लेटफॉर्म, बढ़ेंगी यात्री सुविधाएं

    जोधपुर
     जोधपुर सिटी रेलवे स्टेशन पर बढ़ते रेल यातायात और यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्लेटफॉर्म विस्तार और यार्ड री-मॉडलिंग का काम तेजी से किया जा रहा है। मौजूदा समय में स्टेशन पर 5 प्लेटफॉर्म हैं जो बढ़ते रेल संचालन और यात्रीभार के कारण कम पड़ रहे हैं। ऐसे में रेलवे ने स्टेशन की क्षमता बढ़ाने के लिए करीब 40.10 करोड़ रुपए की लागत से विकास कार्य शुरू किया है।

    परियोजना के तहत स्टेशन पर दो नए प्लेटफॉर्म संख्या 6 और 7 बनाए जा रहे हैं। इसके साथ ही प्लेटफॉर्म संख्या 5 का चौड़ीकरण और लंबाई बढ़ाने का कार्य भी किया जा रहा है। रेलवे ने इस पूरे कार्य को इसी वर्ष पूरा करने का लक्ष्य रखा है। नए प्लेटफॉर्म तैयार होने के बाद यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और ट्रेनों के संचालन में भी आसानी होगी।

    नए प्लेटफॉर्म पर यात्रियों की सुविधा के लिए कई आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इनमें लिफ्ट, एस्केलेटर, फूड कोर्ट, वॉकवे, शेड और दिव्यांगजन के लिए विशेष व्यवस्थाएं शामिल हैं। इसके अलावा प्लेटफॉर्म संख्या-5 को फुट ओवरब्रिज से जोड़ा जाएगा, जिससे यात्रियों को एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म तक पहुंचने में परेशानी नहीं होगी और आवाजाही अधिक सुगम हो जाएगी।

    319 मीटर लंबा होगा प्लेटफॉर्म-5
    रेलवे के अनुसार प्लेटफॉर्म संख्या-5 की लंबाई बढ़ाकर 319 मीटर की जा रही है। इसके लिए करीब 207 मीटर हिस्से में प्लेटफॉर्म का चौड़ीकरण किया जा रहा है, जबकि 80 मीटर हिस्से में लंबाई बढ़ाने का काम किया जा रहा है। इससे एलएचबी रैक वाली लंबी ट्रेनों का संचालन आसानी से किया जा सकेगा और ट्रेनों को प्लेटफॉर्म पर खड़ा करने में आने वाली दिक्कतें कम होंगी।

    बढ़ेगी परिचालन क्षमता
    मंडल रेल प्रबंधक अनुराग त्रिपाठी ने बताया कि यार्ड री-मॉडलिंग का कार्य पूरा होने के बाद जोधपुर स्टेशन की परिचालन क्षमता में काफी बढ़ोतरी होगी। वर्तमान में कई बार प्लेटफॉर्म उपलब्ध नहीं होने के कारण ट्रेनों को पास के स्टेशनों पर रोकना पड़ता है, लेकिन नए प्लेटफॉर्म बनने के बाद ऐसी स्थिति में कमी आएगी।

    उन्होंने बताया कि नए प्लेटफॉर्म और बेहतर व्यवस्था से ट्रेनों के आगमन और प्रस्थान में सुविधा होगी। साथ ही यात्रियों को भी अधिक सुविधाजनक यात्रा अनुभव मिलेगा। रेलवे का मानना है कि इस विकास कार्य के पूरा होने के बाद जोधपुर सिटी रेलवे स्टेशन भविष्य में बढ़ने वाले रेल यातायात का दबाव आसानी से संभाल सकेगा।

  • बिहार का बड़ा मिशन: पांच साल में 50 लाख युवाओं को मिलेगा कौशल प्रशिक्षण

    बिहार का बड़ा मिशन: पांच साल में 50 लाख युवाओं को मिलेगा कौशल प्रशिक्षण

    पटना
    बिहार सरकार के युवा रोजगार एवं कौशल विकास विभाग ने पांच साल में 50 लाख युवाओं का कौशल विकास कर उन्हें हुनरमंद बनाने का रोडमैप तैयार कर लिया है। इसके लिए 16 सरकारी विभाग अलग-अलग ट्रेड में युवाओं को प्रशिक्षित करेंगे। इसमें सरकार नामी-गिरामी कंपनियों का भी साथ लेगी। मुख्य जोर उद्योगों और बाजार की जरूरतों के अनुसार रोजगार के लिए युवाओं को तैयार करने पर होगा। विकास आयुक्त की अध्यक्षता में हाल ही में बिहार कौशल विकास मिशन के शासी पर्षद की 21वीं बैठक में इसका खाका तैयार किया गया है। युवा रोजगार एवं कौशल विकास विभाग ने वर्षवार लक्ष्य तय किया है। इसी के अनुसार युवाओं को प्रशिक्षित किया जायेगा। वर्तमान वित्तीय वर्ष ( 2026-27) में चार लाख 65 हजार 740 युवाओं का कौशल विकास होगा।

    योजनावार होगा युवाओं का प्रशिक्षण
    युवाओं का कौशल विकास केंद्र व राज्य सरकार की ओर से चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं के तहत होगा। लक्ष्य में से आधे युवाओं को पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत प्रशिक्षत किया जाएगा। इस योजना में 25 लाख युवाओं को हुनरमंद बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। वहीं टाटा टेक सीओआई के माध्यम से 81 हजार 520 युवाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा। इसी तरह पीएम सेतु योजना में 37 हजार 200, इमर्जिंग टेक्नोलॉजी में 21 हजार 500, ग्रीन इकोनॉमी में 5400, सर्कुलर इकोनॉमी में सात हजार युवाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा।

    कुशल युवा कार्यक्रम तकनीक के तहत 18 लाख 37 हजार युवाओं को प्रशिक्षित करने की योजना है। वहीं डोमेन स्किलिंग में एक लाख 22 हजार, बीएस और सीएफए के तहत 36 हजार, भर्ती प्रशिक्षण तैनाती योजना में 70 हजार युवाओं को प्रशिक्षितकिया जाएगा।

    क्यों जरूरी है कौशल विकास
    कौशल विकास योजना के तहत युवाओं को अलग-अलग सेक्टर में बांटकर नि:शुल्क अल्पावधि का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसका मकसद युवाओं को बाजार या उद्योग जगत की मांग के अनुरूप स्वरोजगार या रोजगार के लिए तैयार करना है। सरकार का लक्ष्य है कि बिहार के युवा भी राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा के योग्य बन सकें।

    स्कूलों में भी युवाओं को प्रशिक्षण
    स्कूलों में पढ़ाई के दौरान ही युवाओं को प्रशिक्षित किए जाने की तैयारी है। शिक्षा विभाग के माध्यम से स्कूलों में एक लाख 42 हजार छात्रों का कौशल विकास करने का लक्ष्य तय किया गया है। बिहार में विदेशी भाषा का भी प्रशिक्षण शुरू हुआ है। पटना से शुरू प्रशिक्षण केंद्र को प्रमंडल और फिर िलों तक विस्तार करने की योजना है। सरकार ने स्कूलों में पांच साल में 39 हजार 280 युवाओं को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य तय किया है। वहीं उद्यमिता विकास प्रशिक्षण के तहत 40 हजार 500 युवाओं का कौशल विकास होगा।

    वर्षवार तय हुआ लक्ष्य
    2026-27 : 04. 65 लाख

    2027-28 : 11.27 लाख

    2028-29 : 11.27 लाख

    2029-30 : 11.33 लाख

    2030-31 : 11.45 लाख

  • Punjab Weather Alert: पंजाब-चंडीगढ़ में 4 दिन भारी बारिश का अलर्ट, कई जिलों में ऑरेंज चेतावनी जारी

    Punjab Weather Alert: पंजाब-चंडीगढ़ में 4 दिन भारी बारिश का अलर्ट, कई जिलों में ऑरेंज चेतावनी जारी

    मोहाली 

    पंजाब में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। बीती रात से कई इलाकों में बारिश का सिलसिला शुरू हो गया है, जिससे लोगों को उमस और गर्मी से काफी राहत मिली है। भारत मौसम विभाग (IMD) ने आज, 27 जुलाई से अगले चार दिनों तक प्रदेश में तेज बारिश की संभावना जताई है। खासतौर पर 28 और 29 जुलाई के लिए भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

    चंडीगढ़ मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, राज्य के अधिकतम तापमान में 1.6 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे यह सामान्य के करीब पहुंच गया है। सबसे अधिक 36.8 डिग्री सेल्सियस तापमान बठिंडा में रिकॉर्ड किया गया। वहीं, चंडीगढ़ में रात तक 40 मिमी बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग के अनुसार, आज पूरे पंजाब में बारिश की संभावना है।

    पठानकोट, गुरदासपुर, होशियारपुर और रूपनगर में भारी बारिश के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। इसके अलावा पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, तरनतारन, कपूरथला, जालंधर, होशियारपुर, नवांशहर (शहीद भगत सिंह नगर), रूपनगर, एसएएस नगर (मोहाली), लुधियाना, मोगा, फिरोजपुर, फाजिल्का, फरीदकोट, मुक्तसर, बठिंडा, मानसा, बरनाला, संगरूर, फतेहगढ़ साहिब और पटियाला के अलग-अलग इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।

    आज पूरे पंजाब में बारिश के आसार
    चंडीगढ़ मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, राज्यभर में आज बारिश होने की संभावना है। पिछले 24 घंटों के दौरान चंडीगढ़ में करीब 40 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। वहीं, अधिकतम तापमान में लगभग 1.6 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे तापमान सामान्य स्तर के करीब पहुंच गया है। सबसे अधिक तापमान बठिंडा में 36.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

    इन जिलों में भारी बारिश और बिजली गिरने की चेतावनी
    मौसम विभाग ने पठानकोट, गुरदासपुर, होशियारपुर और रूपनगर में गरज-चमक, तेज हवाओं और भारी बारिश की संभावना जताई है।

    इसके अलावा अमृतसर, तरनतारन, कपूरथला, जालंधर, शहीद भगत सिंह नगर (नवांशहर), मोहाली, लुधियाना, मोगा, फिरोजपुर, फाजिल्का, फरीदकोट, श्री मुक्तसर साहिब, फतेहगढ़ साहिब, पटियाला, बठिंडा और आसपास के कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश होने के आसार हैं।

    फिर सक्रिय होगा मानसून
    मौसम विभाग के निदेशक सुरेंद्र पाल के अनुसार, राजस्थान के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। इसके साथ ही उत्तर भारत में एक पश्चिमी विक्षोभ भी सक्रिय है। इन दोनों मौसम प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव से पंजाब और चंडीगढ़ में अगले कुछ दिनों तक बादल छाए रहने और रुक-रुककर बारिश होने की संभावना बनी हुई है। कई इलाकों में मध्यम से भारी वर्षा दर्ज की जा सकती है।

    भाखड़ा डैम की स्थिति फिलहाल सुरक्षित
    लगातार हो रही बारिश के बावजूद भाखड़ा डैम में फिलहाल किसी तरह का खतरा नहीं है। डैम का जलस्तर बढ़कर 1,594 फीट तक पहुंच गया है, जो खतरे के निशान 1,680 फीट से अभी भी 86 फीट नीचे है।

    वर्तमान में डैम में लगभग 42,712 क्यूसेक पानी की आवक हो रही है, जबकि 25,893 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। इससे जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ रहा है, लेकिन स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।

    पंजाब में फिर एक्टिव होगा मानसून
    मौसम विभाग के निदेशक सुरेंद्र पाल के अनुसार, राजस्थान के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र (लो प्रेशर एरिया) बना हुआ है। इसके साथ ही उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ भी सक्रिय है। इन दोनों मौसम प्रणालियों के प्रभाव से पंजाब और चंडीगढ़ में बादल छाए रहेंगे और अगले कुछ दिनों तक बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। इस दौरान दोनों क्षेत्रों के कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।

    बिजली की डिमांड 13,967 मेगावाट पहुंची
    पंजाब में रविवार को बिजली आपूर्ति सामान्य रही। राज्य में बिजली की अधिकतम मांग 13,967 मेगावाट दर्ज की गई। इस मांग को पूरा करने के लिए पंजाब के बिजलीघरों ने 4,417 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया, जबकि शेष बिजली अन्य स्रोतों से प्राप्त की गई। हालांकि, निर्धारित आवंटन की तुलना में 595 मेगावाट कम बिजली मिली, लेकिन इसका बिजली व्यवस्था पर कोई खास असर नहीं पड़ा और पूरे राज्य में बिजली आपूर्ति सामान्य बनी रही।

    डैम खतरे के निशान से नीचे
        भाखड़ा डैम: भाखड़ा डैम का जलस्तर बढ़कर
    1,594 फीट पहुंच गया है। हालांकि, यह अभी भी खतरे के निशान 1,680 फीट से 86 फीट नीचे है। फिलहाल डैम में 42,712 क्यूसेक पानी की आवक हो रही है, जबकि 25,893 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। यानी डैम का जलस्तर बढ़ रहा है, लेकिन फिलहाल किसी तरह के खतरे की स्थिति नहीं है।

        पोंग डैम: पोंग डैम का जलस्तर 1,330.55 फीट दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 1,390 फीट से करीब 59.45 फीट नीचे है। डैम में 37,370 क्यूसेक पानी की आवक हो रही है, जबकि 9,983 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। बारिश के बावजूद पोंग डैम पूरी तरह सुरक्षित स्थिति में है। हालांकि, जलस्तर में हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए उस पर लगातार नजर रखी जा रही है।

  • Punjab Bandh का मिला-जुला असर: जालंधर के 4 स्कूल बंद, लुधियाना में खुले बाजार; वाल्मीकि समाज का प्रदर्शन

    Punjab Bandh का मिला-जुला असर: जालंधर के 4 स्कूल बंद, लुधियाना में खुले बाजार; वाल्मीकि समाज का प्रदर्शन

    जालंधर 

    बरनाला में सफाई कर्मचारियों पर हुए कथित लाठीचार्ज के विरोध में वाल्मीकि समाज ने आज पंजाब बंद का आह्वान किया है। इसका असर जालंधर में भी दिखाई दिया। बंद को देखते हुए एमजीएन स्कूल, सेठ हुक्म चंद स्कूल, इनोसेंट हार्ट स्कूल और शिव ज्योति स्कूल ने छुट्टी घोषित कर दी है। विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए कई स्कूलों ने ऑनलाइन कक्षाएं शुरू कर दी हैं। बाजारों और परिवहन पर भी असर देखने को मिला। वाल्मीकि समाज के विभिन्न संगठनों ने आम जनता, व्यापारिक संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और सभी वर्गों से बंद का समर्थन करने और उनके आंदोलन में शामिल होने की अपील की है। बंद के दौरान सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक बाजार, व्यापारिक प्रतिष्ठान और परिवहन सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। हालांकि, अब तक किसी प्रमुख व्यापारिक संगठन या एसोसिएशन ने आधिकारिक रूप से बंद के समर्थन की पुष्टि नहीं की है। प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है और लोगों से शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की गई है। शहर के प्रमुख बाजारों और चौराहों पर पुलिस फोर्स देना की गई है ताकि लोगों को आवाजाही परेशानी ना हो।

    एमजीएन स्कूल, सेठ हुक्म चंद स्कूल, इनोसेंट हार्ट स्कूल और शिव ज्योति स्कूल ने सोमवार को छुट्टी की घोषणा की है। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि छात्रों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। वहीं ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाई जारी रखी जा रही है, ताकि शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित न हों।

    बंद के आह्वान का असर बाजारों और सार्वजनिक परिवहन पर भी पड़ने की संभावना है। वाल्मीकि समाज के विभिन्न संगठनों ने व्यापारिक संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और आम नागरिकों से आंदोलन का समर्थन करने की अपील की है। बंद के दौरान सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक बाजार, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और परिवहन सेवाएं प्रभावित रह सकती हैं।

    हालांकि, अब तक किसी प्रमुख व्यापारिक संगठन या व्यापारी एसोसिएशन ने आधिकारिक रूप से बंद को समर्थन देने की घोषणा नहीं की है। प्रशासन ने स्थिति पर नजर बनाए रखी है और लोगों से शांति बनाए रखने तथा अफवाहों से बचने की अपील की है।

    कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जालंधर के प्रमुख बाजारों, चौराहों और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आम लोगों की आवाजाही सुचारु बनाए रखने और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए आवश्यक सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं।

    वाल्मीकि समाज की 2 मुख्य मांगें
        वाल्मीकि समाज के नेताओं का कहना है कि बरनाला की घटना के बाद से ही पूरे समुदाय में गहरा आक्रोश और नाराजगी है। समाज ने पंजाब सरकार और स्थानीय प्रशासन के समक्ष पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाने की मांग की।

        इसके अलावा उनकी मांग है कि निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग करने वाले दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ तुरंत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, और पीड़ित सफाई कर्मचारियों को बिना किसी देरी के इंसाफ दिलाया जाए।

    शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक प्रदर्शन की अपील
    पंजाब बंद के मद्देनजर राज्य के विभिन्न जिलों में विरोध प्रदर्शनों और शांतिपूर्ण रैलियों की तैयारियां जोरों पर हैं। प्रदर्शन के आयोजकों ने सभी समर्थकों और आम जनता से अपील की है कि आंदोलन के दौरान पूरी तरह से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीका अपनाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदर्शन का मकसद अपनी आवाज उठाना है, इसलिए कानून-व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करें और आम जनता को अनावश्यक परेशानी न होने दें।

    वाल्मीकि समाज के विभिन्न संगठनों ने आम जनता, व्यापारिक संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और सभी वर्गों से बंद का समर्थन करने और उनके आंदोलन में शामिल होने की अपील की है। 

    बंद के दौरान सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक बाजार, व्यापारिक प्रतिष्ठान और परिवहन सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। हालांकि, अब तक किसी प्रमुख व्यापारिक संगठन या एसोसिएशन ने आधिकारिक रूप से बंद के समर्थन की पुष्टि नहीं की है। प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है और लोगों से शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की गई है। शहर के प्रमुख बाजारों और चौराहों पर पुलिस फोर्स देना की गई है ताकि लोगों को आवाजाही परेशानी ना हो।

    बरनाला में क्या हुआ था, जानिए…

        विवाद की वजह: सफाई कर्मचारी पक्की नौकरी, वेतन वृद्धि और पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने जैसी मांगों को लेकर 8 जुलाई से हड़ताल पर थे। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद 22 जुलाई को जब बरनाला नगर निगम और जिला प्रशासन ने पुलिस सुरक्षा में शहर से कूड़ा हटाने का अभियान शुरू किया, तो हड़ताली सफाई कर्मचारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हो गई।

        पुलिस का लाठीचार्ज: इस झड़प के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिए कथित तौर पर लाठीचार्ज और अत्यधिक बल प्रयोग किया। सोशल मीडिया पर इसके वीडियो वायरल हुए, जिसमें महिला सफाई कर्मचारियों के साथ भी मारपीट और बदसलूकी की बात सामने आई।

        सरकार का एक्शन: चौतरफा राजनीतिक आलोचना और राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग (NCSK) तथा एससी कमीशन के दखल के बाद, पंजाब के डीजीपी ने पटियाला रेंज से रिपोर्ट मिलने पर डीएसपी सतवीर सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के आदेश जारी किए।

        राजनीतिक विरोध हुआ: भाजपा, कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल (SAD) जैसी विपक्षी पार्टियों ने इस घटना को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार को घेरा है। नेताओं का आरोप है कि सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की जायज मांगें सुनने के बजाय उन पर लाठियां बरसा रही है। इस लाठीचार्ज की घटना के विरोध में पंजाब के कई अन्य शहरों में भी सफाई संगठनों में रोष है और वे दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई (FIR) की मांग कर रहे हैं।

     

  • झारखंड में निजी अस्पतालों के ICU इलाज पर नई व्यवस्था, एक समान होंगी दरें

    झारखंड में निजी अस्पतालों के ICU इलाज पर नई व्यवस्था, एक समान होंगी दरें

     रांची
    राज्य सरकार निजी अस्पतालों में गंभीर मरीजों के इलाज और रेफरल व्यवस्था में बड़ा बदलाव होगा। नई स्टैंडर्ड आपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) के तहत राज्य के निजी अस्पतालों में आइसीयू उपचार की दरों को एक समान करने की योजना बनाई है।

    उद्देश्य यह है कि आर्थिक कारणों से इलाज बीच में न रुके और मरीजों को गंभीर अवस्था में रिम्स या सदर अस्पताल रेफर करने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाया जा सके। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार वर्तमान व्यवस्था में कई निजी अस्पताल मरीजों का प्रारंभिक इलाज करने के बाद, जब स्वजन इलाज का खर्च वहन करने में असमर्थ हो जाते हैं, तब उन्हें सरकारी अस्पतालों में रेफर कर देते हैं।

    इससे रिम्स और सदर अस्पताल की इमरजेंसी पर अचानक गंभीर मरीजों का दबाव बढ़ जाता है। परिणामस्वरूप नए गंभीर मरीजों को समय पर बेड और वेंटिलेटर उपलब्ध कराना मुश्किल हो जाता है। रिम्स शासी परिषद की हालिया बैठक में भी इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा हुई।

    स्वास्थ्य मंत्री डा. इरफान अंसारी ने संकेत दिया कि सरकार ऐसी व्यवस्था लागू करेगी, जिसमें निजी अस्पतालों में आइसीयू उपचार की दरों में अनावश्यक अंतर समाप्त होगा। इससे मरीजों का इलाज अपेक्षाकृत कम खर्च में हो सकेगा और रेफरल केवल चिकित्सकीय आवश्यकता के आधार पर होगा, आर्थिक मजबूरी के कारण नहीं।

    70 प्रतिशत से अधिक गंभीर मरीज रेफर होकर पहुंचते हैं रिम्स
    रिम्स प्रबंधन के अनुसार संस्थान में भर्ती होने वाले 70 प्रतिशत से अधिक गंभीर मरीज निजी अस्पतालों से रेफर होकर आते हैं। इनमें अधिकांश मरीज शाम से देर रात के बीच पहुंचते हैं, जब इमरजेंसी विभाग में पहले से ही मरीजों का अत्यधिक दबाव रहता है।

    ऐसे समय एक साथ सभी मरीजों को आइसीयू बेड या वेंटिलेटर उपलब्ध कराना चुनौती बन जाता है। रिम्स के चिकित्सकों का कहना है कि कई मरीज ऐसी अवस्था में पहुंचते हैं, जब उनकी हालत काफी बिगड़ चुकी होती है। इससे इलाज की जटिलता बढ़ जाती है और मृत्यु दर पर भी असर पड़ता है।

    पहले भी बनी थी एसओपी, लेकिन नहीं दिखा असर
    निजी अस्पतालों से अनियंत्रित रेफरल रोकने के लिए इससे पहले जिला प्रशासन, रिम्स प्रबंधन और निजी अस्पतालों के बीच एसओपी बनाई गई थी। रिम्स के जनसंपर्क पदाधिकारी डाॅ. शिशिर कुमार के अनुसार, उस एसओपी के तहत किसी भी निजी अस्पताल को मरीज रेफर करने से पहले रिम्स प्रबंधन को सूचना देनी थी।

    साथ ही मरीज को रेफर करने का कारण, उसकी वर्तमान चिकित्सीय स्थिति, अब तक दिए गए उपचार और दवाओं का पूरा विवरण साझा करना अनिवार्य किया गया था। इसके बाद ही रेफरल पर सहमति दी जानी थी।

    हालांकि, व्यवहारिक स्तर पर यह व्यवस्था प्रभावी साबित नहीं हो सकी। आज भी बड़ी संख्या में गंभीर मरीज सीधे रेफर होकर रिम्स पहुंच रहे हैं और पूर्व निर्धारित प्रक्रिया का पूर्ण पालन नहीं हो रहा है।

    इमरजेंसी पर बढ़ता है अतिरिक्त दबाव
    रिम्स के डाक्टरों का कहना है कि निजी अस्पतालों से लगातार बढ़ रहे रेफरल का सीधा असर सरकारी अस्पतालों की इमरजेंसी सेवाओं पर पड़ता है। पहले से सीमित संसाधनों के बीच अचानक बड़ी संख्या में गंभीर मरीज पहुंचने से आईसीयू, वेंटिलेटर, आक्सीजन सपोर्ट और विशेषज्ञ चिकित्सकों पर अतिरिक्त दबाव बनता है।

    इससे पहले से भर्ती मरीजों के साथ-साथ नए मरीजों को भी समय पर उपचार मिलने में कठिनाई होती है। स्वास्थ्य मंत्री का मानना है कि यदि नई व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है तो निजी और सरकारी अस्पतालों के बीच रेफरल प्रणाली अधिक पारदर्शी बनेगी।

    इससे एक ओर मरीजों का आर्थिक बोझ कम होगा, वहीं दूसरी ओर रिम्स जैसे सरकारी संस्थानों में संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा। रेफरल व्यवस्था को व्यवस्थित करना राज्य की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।

    सरकार की नई व्यवस्था से क्या होगा फायदा

    • राज्य के निजी अस्पतालों में आईसीयू उपचार की दरों को तर्कसंगत और एकरूप बनाया जाएगा।
    • आर्थिक कारणों से मरीजों को बीच इलाज में रेफर करने की प्रवृत्ति कम होगी।
    • रेफरल केवल चिकित्सकीय आवश्यकता के आधार पर होगा।
    • मरीज की पूरी मेडिकल हिस्ट्री डिजिटल अथवा निर्धारित प्रारूप में सरकारी अस्पताल को उपलब्ध कराई जाएगी।
    • सरकारी अस्पतालों की इमरजेंसी पर अनावश्यक दबाव कम होगा।
    • गंभीर मरीजों को समय पर आईसीयू बेड और वेंटिलेटर उपलब्ध कराने में सुविधा होगी।
    • स्वास्थ्य व्यवस्था में संतुलन लाने की कोशिश
  • दरभंगा नगर निगम का बड़ा फैसला, ऑनलाइन होगी राजस्व वसूली और हटेगा अतिक्रमण

    दरभंगा नगर निगम का बड़ा फैसला, ऑनलाइन होगी राजस्व वसूली और हटेगा अतिक्रमण

     दरभंगा
     शहर की प्रमुख जनसमस्याओं के समाधान को लेकर नगर निगम सामान्य बोर्ड की बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। महापौर अंजुम आरा की अध्यक्षता में हुई बैठक में राजस्व संग्रह को ऑनलाइन करने, बंदरों के आतंक से निपटने, अतिक्रमण हटाने, कचरा वाहनों की मरम्मत और शहर के सौंदर्यीकरण जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। सदन ने कई प्रस्तावों को मंजूरी दी, जबकि पार्षदों ने विभिन्न जनसमस्याओं को जोरदार ढंग से उठाया।

    ऑनलाइन होगी राजस्व वसूली
    बैठक में नगर निगम की आय बढ़ाने और राजस्व संग्रह प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही एजेंसी के माध्यम से राजस्व संग्रह के लिए निविदा जारी करने पर भी सहमति बनी। निगम का मानना है कि इससे राजस्व वसूली अधिक प्रभावी होगी और अनियमितताओं पर अंकुश लगेगा।

    बंदरों के आतंक पर बनी विशेष टीम
    शहर में बढ़ते बंदरों के आतंक का मुद्दा बैठक में प्रमुखता से उठा। पार्षद नवीन सिन्हा ने कहा कि लंबे समय से लोग बंदरों के कारण परेशान हैं, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

    इस पर महापौर अंजुम आरा ने नगर निगम की चार सदस्यीय टीम गठित करने की घोषणा की। यह टीम वन विभाग के अधिकारियों से समन्वय स्थापित कर समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में काम करेगी।

    अतिक्रमण हटाने और सौंदर्यीकरण की मांग
    पार्षद रवि रोहन ने मिर्जापुर चौक से इनकम टैक्स चौराहा तक फैले अतिक्रमण को हटाने के लिए विशेष अभियान चलाने की मांग की। वहीं वार्ड 45 के पार्षद देव कृष्ण झा उर्फ कोमल झा ने चट्टी गुमटी से 22 नंबर गुमटी तक करीब डेढ़ किलोमीटर क्षेत्र में अतिक्रमण से लोगों को हो रही परेशानी का मुद्दा उठाया।

    पार्षद विश्वपति मिश्रा ने शहर के प्रमुख चौक-चौराहों का आकर्षक सौंदर्यीकरण कराने की आवश्यकता बताई, जबकि वार्ड 23 की पार्षद चांदनी देवी ने नदी और पोखरों पर घाट निर्माण का प्रस्ताव रखा।

    कचरा वाहनों पर लापरवाही पर नाराजगी
    बैठक में लंबे समय से 15 कचरा वाहनों के खराब पड़े रहने पर पार्षदों ने निगम अधिकारियों और कर्मियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए। पार्षदों ने कहा कि समय पर मरम्मत नहीं होने से कई वार्डों में नियमित कचरा उठाव प्रभावित हो रहा है और लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।

    सदन ने संबंधित कर्मियों को 15 दिनों के भीतर सभी वाहन चालू कराने का निर्देश दिया। तय समय में कार्य पूरा नहीं होने पर 25 प्रतिशत वेतन कटौती और कार्य पूरा होने तक वेतन रोकने की चेतावनी भी दी गई।

    दुकानों के आवंटन में पारदर्शिता पर जोर
    पार्षद राकेश रोशन चौधरी ने नगर निगम की दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने की मांग की। उनका कहना था कि स्पष्ट और निष्पक्ष व्यवस्था से विवाद की संभावनाएं कम होंगी और पात्र लोगों को लाभ मिल सकेगा।

    चलंत शौचालय की बदहाली का मुद्दा उठा
    सांसद प्रतिनिधि ठाकुर भूपेंद्र किशोर (गुड्डू) ने नगर निगम कार्यालय के बाहर वर्षों से अनुपयोगी पड़े चलंत शौचालय का मामला उठाया। उन्होंने बताया कि शौचालय के पहिए चोरी हो चुके हैं और उसका एक हिस्सा भी क्षतिग्रस्त है। इससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। उन्होंने सवाल उठाया कि अब तक इसकी मरम्मत नहीं कराई गई और न ही पहियों की चोरी के मामले में प्राथमिकी दर्ज कराई गई।

    जनसुविधाओं पर दिए गए कई सुझाव
    विधान परिषद प्रतिनिधि आशुतोष कुमार ने शहर में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार, स्वच्छता व्यवस्था, यातायात सुधार और जनहित से जुड़े कई सुझाव दिए। बैठक में नगर आयुक्त राकेश गुप्ता, सिटी मैनेजर रवि अमरनाथ, डीएमसीएच के उपाधीक्षक डॉ. अमित कुमार झा सहित बड़ी संख्या में पार्षद, निगम अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। बैठक में पारित प्रस्तावों के जल्द क्रियान्वयन पर भी जोर दिया गया।

     

  • बगहा में चार दिन की भीषण गर्मी से किसान परेशान, बारिश का इंतजार

    बगहा में चार दिन की भीषण गर्मी से किसान परेशान, बारिश का इंतजार

     बगहा
     बीते एक पखवारे में बादलों ने जमघट लगाई तो किसानों की बाछे खिल गईं। अमृत वर्षा ने जहां गन्ने की फसल को नवजीवन दिया तो वही पारंपरिक गीतों के बीच धरती की कोख में धान के बिचड़े डाले जाने लगे। खेती ने परवाज भरी तो किसानों के चेहरे की आभा को चार चांद लग गए।

    इस बीच बीते चार दिनों से मौसम ने ऐसी तल्खी दिखाई है कि किसान भविष्य को लेकर आशंकित नजर आने लगे हैं। बादलों की आवाजाही तो लगी है, लेकिन इनकी दगाबाजी ने धरती का तापमान आसमान तक पहुंचा दिया हैं।

    रविवार को पूर्वी हवाओं के बावजूद बगहा का तापमान 39-40 डिग्री तक जा पहुंचा। उधर, तापमान बढ़ने से आम जन जीवन अस्त व्यस्त होकर रह गया हैं। दोपहर में सड़कें सूनी दिख रहीं हैं तो स्कूलों में बच्चों की आवाजाही में भारी परेशानी उठानी पड़ रही। वर्षा नहीं होने से लोगों की उम्मीदों पर पानी फिरता जा रहा है।

    झुलसने लगीं फसलें
    वहीं, पिछले चार दिनों तक पड़ी गर्मी के कारण खेतों में लगी फसल तेज धूप और गर्म हवा से झुलसने लगी हैं। किसान खेत से शाम को लौटते वक्त हालत बेहद खराब हो जा रही है। लगातार बढ़ते तापमान के कारण कई बीमारियां के मामले भी सामने आने लगे हैं।

    भीषण गर्मी से बचाव के लिए लोग ठंडे पदार्थों का सेवन कर रहे हैं और दोपहर के समय घरों में रहना ही बेहतर समझ रहे है। वही, फुटपाथ पर दुकान लगाने वाले दुकानदारों की परेशानी बढ़ गयी है कड़ी धूप के कारण ग्राहक उनकी दुकानों तक नहीं पहुंच रहे। जिससे रोजगार पूरी तरह प्रभावित हो गया है। गन्ने का रस व सत्तू की बिक्री में तेजी आई है तो सामान्य दुकानों से भीड़ नदारद है।

    विद्यालयों में झुलस रहा बचपन
    गर्मी और उमस के बीच विद्यालयों के संचालन की चुनौती बनी हुई है। ख़ासकर प्रारंभिक कक्षाओं में दिन के उमस के बीच बच्चों का पठन पाठन दुश्वारियों से भरा हुआ है। दोपहर बाद छुट्टी होने पर बच्चों को घर पहुंचने में भी काफी परेशानी हो रही है।

    अगले कुछ दिनों में बदलेगा मौसम का मिजाज
    मौसम विभाग के अनुसार अगले दो दिनों में मौसम का मिजाज बदलेगा। बगहा दो के क़ृषि विभाग के कर्मियों ने बताया कि सोमवार और मंगलवार को बारिश के आसार हैं।

    यह बारिश धान और गन्ने की फसल के लिए काफी फायदेमंद साबित होगी। उल्लेखनीय है कि मौसम की बेरुखी से कुछ किसानों ने अबतक धान की रोपनी नहीं की है, यदि बारिश होती है तो किसानों को काफी लाभ पहुंचेगा।

     

  • राजस्थान को मिली 144 नई रोडवेज बसें, CM भजनलाल ने दिखाई हरी झंडी

    राजस्थान को मिली 144 नई रोडवेज बसें, CM भजनलाल ने दिखाई हरी झंडी

     जयपुर
    मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने आज राजस्थान की जनता को रोडवेज की 144 नई ब्लू लाइन एक्सप्रेस बस का तोहफा दिया। इसके बाद जयपुर में अजमेर रोड स्थित हीरापुरा बस टर्मिनल पर CM भजनलाल शर्मा ने कहा, हमने राजस्थान की जनता से जो वादे किए थे, उन्हें लगातार पूरा कर रहे हैं। एरिया के हिसाब से राजस्थान देश का सबसे बड़ा राज्य है। यहां लोगों के आने-जाने के लिए यह ज़रूरी है कि हमारा ट्रांसपोर्ट सिस्टम अच्छा हो।

    CM भजनलाल शर्मा ने कहा कि आपने देखा है कि जब से हमारी सरकार आई है, हम जनता की हर समस्या को सुलझाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं, और हम लगातार रोडवेज़ बसों की संख्या बढ़ा रहे हैं। आज हमने राजस्थान की जनता को 144 बसें दी हैं ताकि वे इनका ज़्यादा से ज़्यादा फ़ायदा उठा सकें।

    पहली बार राजस्थान रोडवेज़ प्रॉफ़िट में आई
    CM भजनलाल शर्मा ने कहा कि पहली बार राजस्थान रोडवेज़ प्रॉफ़िट में आई है। लंबे समय से रोडवेज़ लॉस में चल रही थी, लेकिन आज रोडवेज़ लॉस में नहीं, प्रॉफ़िट में चल रही है।

    …अब समय पर मिल रही है सैलरी
    CM भजनलाल शर्मा ने कहा कि रोडवेज़ के सभी ड्राइवर, ऑपरेटर और इसमें काम करने वाले कर्मचारियों को समय पर सैलरी मिल रही है। पिछली सरकार ने छह, सात, या आठ महीने तक सैलरी नहीं दी। मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमारी सरकार जनता से जुड़े सभी काम पूरे कर रही है।

    सड़क सुरक्षा अग्रदूत महिलाओं को वितरित किए हेलमेट
    मुख्यमंत्री भजनलाल ने सड़क सुरक्षा के प्रति जागरुकता का संदेश देते हुए सड़क सुरक्षा अग्रदूत महिलाओं को हेलमेट भी वितरित किए। उन्होंने प्रदेशवासियों से यातायात नियमों का पालन करने तथा दोपहिया वाहन चलाते समय अनिवार्य रूप से हेलमेट पहनने की अपील की। उन्होंने कहा कि सुरक्षित यात्रा प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है और सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए जनभागीदारी अत्यंत आवश्यक है।

    कांग्रेस सरकार ने 5 साल के कार्यकाल में एक भी बस नहीं खरीदी : प्रेम चंद बैरवा
    राजस्थान के डिप्टी चीफ मिनिस्टर प्रेम चंद बैरवा ने कहा, सीएम भजन लाल शर्मा राजस्थान रोडवेज के बेड़े को मजबूत कर रहे हैं। चार्ज संभालने के बाद से सरकार ने पिछले ढाई साल में एक हजार से ज़्यादा बसें जोड़ी हैं। पिछली कांग्रेस सरकार ने अपने पांच साल के कार्यकाल में एक भी बस नहीं खरीदी। इससे राजस्थान के लोगों को ज़्यादा सुरक्षित, ज़्यादा सुविधाजनक और बेहतर यात्रा की सुविधा मिलेगी।

    जानें नई ब्लू लाइन एक्सप्रेस बस में क्या हैं सुविधाएं
    राजस्थान में रोडवेज ने इन बसों को 22 अलग-अलग डिपो में भेजा है। ये ब्लू लाइन एक्सप्रेस बसें नए लुक और आधुनिक सुविधाएं के साथ लांच की गईं हैं। सभी बसें BS-VI मानक के अनुसार तैयार की गई हैं। नई ब्लू लाइन एक्सप्रेस बस में मोबाइल चार्जिंग पॉइंट, एलईडी डिस्प्ले, व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम (VLTS) लगाया गया है। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट (ECU) भी बसों में दी गई है। रोडवेज की हर बस में पैनिक बटन लगाया गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद मिल सके। वीएलटीएस सिस्टम के जरिए कंट्रोल रूम से बसों की लाइव लोकेशन पर नजर रखी जा सकेगी। बसों एक तरफ तीन और दूसरी तरफ दो सीटों का लेआउट रखा गया है। इससे यात्रियों को बैठने में ज्यादा आराम मिलेगा। उधर विभाग का मानना है कि नई बसों के संचालन से शहरों और जिलों के बीच यात्रा पहले से अधिक आसान होगी।

  • सावन में श्रद्धालुओं को राहत, देवघर के लिए चलेंगी स्पेशल ट्रेनें

    सावन में श्रद्धालुओं को राहत, देवघर के लिए चलेंगी स्पेशल ट्रेनें

     धनबाद
     30 जुलाई से सावन माह शुरू हो रहा है। झारखंड के देवघर में एक महीने का विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला लगता है। यहां पर बाबा बैद्यनाथ को जलाभिषेक करने के लिए प्रतिदिन करीब एक लाख लोग पहुंचते हैं।

    देवघर में पहुंचने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए रेलवे की ओर से स्पेशल ट्रेनें चलाईं जा रही हैं। रविवार से रांची-भागलपुर सावन स्पेशल ट्रेन की सेवा बहाल हो गई है।

    रांची से भागलपुर के बीच अलग-अलग रूटों से दो जोड़ी सावन स्पेशल ट्रेन चलेंगी। इनमें एक बोकारो, गोमो, कोडरमा, तिलैया होकर तथा दूसरी बरकाकाना, हजारीबाग टाउन हाेकर चलेगी। सभी ट्रेनें सुल्तानगंज होकर चलेंगी।

    रांची-भागलपुर स्पेशल में थर्ड एसी एक, स्लीपर सात एवं जनरल के सात कोच जोड़े जाएंगे। दूसरी ओर, एक अगस्त से महाराष्ट्र के इतवारी से मधुपुर तक सावन स्पेशल ट्रेन चलेगी।

    स्पेशल ट्रेन रांची, बोकारो, चंद्रपुरा, कतरास और धनबाद होकर चलेगी। इस ट्रेन में थर्ड एसी के चार, स्लीपर 10 एवं साधारण श्रेणी के चार कोच जुड़ेंगे।

    इन तिथियों में चलेंगी सावन स्पेशल ट्रेनें
    08690 रांची-भागलपुर स्पेशल 26 जुलाइ से नौ सितंबर तक प्रत्येक रविवार एवं बुधवार को चलेगी। रांची से शाम 5:40 पर खुल कर 8:25 पर बोकारो, 8:58 पर चंद्रपुरा एवं 9:25 पर गोमो आएगी। अगले दिन सुबह 5:25 पर सुल्तानगंज और 6:30 पर भागलपुर पहुंचेगी।

    08689 भागलपुर-रांची स्पेशल 27 जुलाई से 10 सितंबर तक प्रत्येक सोमवार व गुरुवार को चलेगी। भागलपुर से सुबह 9:10 पर खुल कर 9:35 पर सुल्तानगंज, शाम 5:05 पर गोमो, 6:53 चंद्रपुरा, 7:35 बोकारो तथा रात 10:20 पर रांची पहुंचेगी।

    08895 इतवारी-मधुपुर सावन स्पेशल प्रत्येक शनिवार को एक से 29 अगस्त से चलेगी। इतवारी से सुबह 4:30 पर खुल कर देर रात 1:30 पर कतरास, 2:15 पर धनबाद एवं सुबह 6:00 बजे मधुपुर पहुंचेगी।

    08896 मधुपुर-इतवारी सावन स्पेशल दो से 30 अगस्त तक प्रत्येक रविवार को चलेगी। मधुपुर से सुबह 9:00 बजे खुल कर दोपहर 12:10 पर धनबाद, 12:45 पर कतरास एवं अगले दिन 11:50 पर इतवारी पहुंचेगी।

    जसीडीह स्टेशन पर पांच मिनट ठहराव
    हावड़ा-नई दिल्ली व नई दिल्ली-हावड़ा राजधानी एक्सप्रेस, कोलकाता-आरा व आरा-कोलकाता गरीब रथ, हावड़ा-पटना वंदे भारत, पटना-हावड़ा वंदे भारत, हावड़ा-नई दिल्ली पूर्वा एक्सप्रेस, नई दिल्ली-हावड़ा पूर्वा एक्सप्रेस, देवघर-वाराणसी वंदे भारत, वाराणसी-देवघर वंदे भारत, हावउ़ा-पटना व पटना-हावड़ा जन शताब्दी, हावड़ा-नई दिल्ली व नई दिल्ली-हावड़ा दुरंतो, शालीमार-पटना व पटना-शालीमार दुरंतो, मधुपुर-आनंदविहार हमसफर, सियालदह-बनारस अमृत भारत व मधुपुर-आनंदविहार बाबा वैद्यनाथ एक्सप्रेस।

     

  • बिहार में सहायक प्राध्यापक बनेंगे प्रोफेसर, नई नियमावली से खुला रास्ता

    बिहार में सहायक प्राध्यापक बनेंगे प्रोफेसर, नई नियमावली से खुला रास्ता

    पटना
    प्रदेश में संचालित संबद्ध घाटानुदानित और धार्मिक अल्पसंख्यक महाविद्यालयों के सहायक प्राध्यापक भी प्रोफेसर बनेंगे। इससे संबंधित करियर एडवांसमेंट स्कीम नियमावली, 2026 को राज्यपाल और कुलाधिपति सैयद अता हसनैन ने स्वीकृति प्रदान कर दी।

    इससे संबद्ध घाटानुदानित व धार्मिक अल्पसंख्यक महाविद्यालयों के सहायक प्राध्यापकों की लंबित प्रोन्नति का रास्ता साफ हो गया है। यह नियमावली तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।

    इसके तहत सहायक प्राध्यापकों को करियर एडवांसमेंट स्कीम के तहत प्रोन्नति का लाभ उसी तरह मिलेगा जिस तरह अंगीभूत महाविद्यालयों के सहायक प्राध्यापकों को मिल रहा है। नियमावली से संबद्ध घाटानुदानित और धार्मिक अल्पसंख्यक महाविद्यालयों के सहायक प्राध्यापक अब एसोसिएट प्रोफेसर एवं प्रोफेसर के पदों पर प्रोन्नत होंगे।

    राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह के हस्ताक्षर से जारी अधिसूचना के मुताबिक इससे राज्य के हजारों सहायक प्राध्यापकों को लाभ मिलेगा। नियमावली के अनुसार अब सहायक प्राध्यापक अपने कार्य निष्पादन और शैक्षणिक उपलब्धियों के आधार पर एसोसिएट प्रोफेसर एवं प्रोफेसर के पद पर प्रोन्नत हो सकेंगे।

    इसके लिए शिक्षण एवं शोध कार्य, शोध पत्रों का प्रकाशन, रिफ्रेशर और ओरिएंटेशन जैसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों में अनिवार्य भागीदारी और अन्य शैक्षणिक मानकों को पूरा करना होगा। प्रोन्नति की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए स्क्रीनिंग और चयन समितियों का गठन किया जाएगा, जिनमें कुलपति, विषय विशेषज्ञ और सरकार के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

    शिक्षण कार्य के मूल्यांकन में 80 प्रतिशत कक्षाएं लेने पर अच्छा ग्रेड अनिवार्य
    नियमावली में यह प्रविधान किया गया है कि शिक्षण कार्य के मूल्यांकन में कम-से-कम 80 प्रतिशत कक्षाएं लेने पर अच्छा ग्रेड अनिवार्य होगा। नियमावली में उन सहायक प्राध्यापकों को भी राहत दी गई है, जिनकी प्रोन्नति 18 जुलाई, 2018 से पहले नियमावली के अभाव में लंबित रह गई थी।

    ऐसे सहायक प्राध्यापक पुराने या नए नियमों के तहत प्रोन्नति का विकल्प चुन सकेंगे। इसके साथ ही जिन सहायक प्राध्यापकों को पहले ही कालबद्ध प्रोन्नति योजना या अन्य व्यवस्था के तहत प्रोन्नति मिल चुकी है, उनके पद पर नई नियमावली का कोई असर नहीं पड़ेगा।