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  • सहरसा में शुरू होगा पंचायत परिसीमन, गांवों के आधार पर तय होंगी सीमाएं

    सहरसा में शुरू होगा पंचायत परिसीमन, गांवों के आधार पर तय होंगी सीमाएं

    सहरसा
     जिले में पंचायतों के परिसीमन की नई प्रक्रिया जल्द शुरू होने जा रही है। इस बार पंचायतों की सीमाओं का निर्धारण राजस्व गांवों तथा वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर किया जाएगा।

    प्रशासनिक स्तर पर इसकी तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। परिसीमन के दौरान प्रत्येक पंचायत की आबादी, राजस्व गांवों की स्थिति और भौगोलिक संतुलन को ध्यान में रखा जाएगा।

    इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद जिले की संबंधित प्रखंड में पंचायतों की सीमाओं का निर्धारण उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र से शुरू होकर दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र तक किया जाएगा। प्रशासन का उद्देश्य है कि परिसीमन के दौरान किसी भी गांव का अनावश्यक विभाजन न हो।

    सीओ मौनी बहन ने बताया कि आबादी या प्रशासनिक जरूरतों के कारण आवश्यक होने पर गांवों का विभाजन किया जाएगा। नई पंचायतों की सीमाएं तय करते समय प्राकृतिक और स्थायी सीमाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।

    नदी, रेलवे लाइन, नहर, प्रमुख सड़क और अन्य सार्वजनिक पहचान वाले स्थलों को सीमा निर्धारण का आधार बनाया जाएगा। इससे भविष्य में सीमा विवाद की संभावना कम होने की उम्मीद है।

    गांव के नाम पर होगा पंचायत का नाम
    नई पंचायतों का नाम भी सामान्यतः उसी गांव के नाम पर रखा जाएगा, जहां सबसे अधिक जनसंख्या होगी। प्रशासन का मानना है कि इस प्रक्रिया से पंचायतों का संचालन अधिक व्यवस्थित होगा और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी।

    दिशा-निर्देशों के अनुसार, सामान्य स्थिति में पंचायत मुख्यालय उस गांव में बनाया जाएगा, जहां सबसे अधिक आबादी निवास करती है।

    वहीं, यदि किसी पंचायत क्षेत्र में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्ग की संयुक्त आबादी 50 प्रतिशत से अधिक होगी तो मुख्यालय उसी वर्ग की सर्वाधिक आबादी वाले गांव में स्थापित किया जाएगा।

     

  • अंकित शर्मा हत्याकांड: दिल्ली पुलिस ने ताहिर हुसैन समेत दोषियों के लिए मांगी फांसी, बोली- ‘कसाई बन गए थे’

    अंकित शर्मा हत्याकांड: दिल्ली पुलिस ने ताहिर हुसैन समेत दोषियों के लिए मांगी फांसी, बोली- ‘कसाई बन गए थे’

    नई दिल्ली
    दिल्ली पुलिस ने आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में ताहिर हुसैन और उनके सह-दोषियों के लिए अदालत में फांसी की सजा की मांग की है. पुलिस ने सुनवाई के दौरान दलील दी कि अपराधियों ने बेहद क्रूर और जघन्य तरीके से इस वारदात को अंजाम दिया है जो इन लोगों की सोची-समझी साजिश थी. अंकित शर्मा के शरीर पर हमलावरों ने 51 गंभीर चोटों के निशान मिले थे. कड़ा रुख अपनाते हुए दिल्ली पुलिस ने अदालत से कहा कि इस तरह के बर्बर और अक्षम्य अपराध के लिए सभी दोषियों को केवल मृत्युदंड ही दिया जाना चाहिए। 

    दिल्ली पुलिस ने सजा पर बहस करते हुए कोर्ट में कहा कि वारदात के वक्त आरोपी कसाई  बन चुके थे. पुलिस ने इसे बेहद ठंडे दिमाग से किया गया हत्याकांड (कोल्ड-ब्लडेड किलिंग) बताया. अंकित शर्मा की मौत हो जाने के बाद भी आरोपी उनके शव पर हमला करते रहे. जब उनका शव बरामद हुआ, तब उनके शरीर पर अंडरवियर के अलावा कोई कपड़ा मौजूद नहीं था। 

    अदालत में पुलिस ने अंकित शर्मा पर की गई अत्यधिक बर्बरता का ब्योरा दिया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट और सबूतों के हवाले से बताया गया कि उनके शरीर पर कुल 51 चोटें थीं, जिनमें से 7 चोटें अलग से ही मौत का कारण बनने के लिए काफी थीं। 

    इसके अलावा 16 घाव धारदार हथियारों से दिए गए थे. पुलिस ने कहा कि धारदार हथियारों का ये इस्तेमाल अपराध की नृशंसता को स्पष्ट रूप से दिखाता है। 

    इस मामले में आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच दोषी हैं। ताहिर हुसैन के अलावा अदाल ने जावेद, अनस, कासिम और नाजिम को दोषी करार दिया था, जबकि छह आरोपी बरी कर दिए गए। मधुकर पांडे ने कहा कि दोषियों ने कोर्ट में जो अपनी सामाजिक-आर्थिक स्थिति को लेकर जो हलफनामे दाखिल किए हैं, उसमें सजा कम करने या नरमी बरतने की कोई गुंजाइश नहीं है। उन्होंने कहा, 'किसी व्यक्ति की हत्या के लिए सात गंभीर चोट पर्याप्त होते हैं, लेकिन अंकित के शव पर 51 चोट के निशान पाए गए थे, जो इनकी बर्बरता की मंशा को दर्शाने के लिए बहुत हैं।'

    ताहिर की ओर से क्या कहा गया
    ताहिर हुसैन की तरफ से पेश हुए अधिव
    क्ता राजीव मोहन ने कहा कि पूरे केस में ताहिर पर आपराधिक साजिश के तहत कोई दोष साबित नहीं हो पाया। ताहिर को गैरकानूनी भीड़ का हिस्सा बताया गया। उन्होंने कहा, 'घटनास्थल के मौके पर पुलिस की मौजूदगी थी फिर भी वे दंगा रोकने में विफल रहे तो फिर वहां जब भीड़ की मौजूदगी थी तो ताहिर व अन्य को क्यों गिरफ्तार किया गया और ट्रायल चलाया गया?

    ताहिर हुसैन ने अपने लिए मांगी नरमी
    राजीव मोहन ने पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जिन फैसलों में मृत्युदंड दिया गया उनमें और ताहिर के केस में काफी अंतर है। हुसैन की तरफ से कहा गया, 'जब मैं आईपीसी 120बी यानी आपराधिक साजिश के आरोप से बरी हो चुका हूं तो इसका अर्थ है कि हत्या की कोई मंशा या योजना नहीं थी। मुझे उस भीड़ का हिस्सा होने के लिए दोषी ठहराया गया है जिसने अंकित की हत्या की थी।' बचाव पक्ष ने कोर्ट से ताहिर के लिए सजा में नरमी बरतने की मांग की है।

    हिंसाग्रस्त इलाके के नाले में मिला था अंकित का शव
    यह मामला दयालपुर थाने में अंकित शर्मा के पिता रविंदर कुमार की शिकायत पर दर्ज किया गया था। 25 फरवरी 2020 को अंकित शर्मा ऑफिस से घर लौटने के बाद दोबारा बाहर निकले थे, लेकिन काफी देर तक वापस नहीं आए। परिवार उनकी तलाश कर रहा था, तभी लोगों ने बताया कि उनकी हत्या कर शव को चांदबाग पुलिया के पास खजूरी खास नाले में फेंक दिया गया है। अगले दिन सुबह पुलिस ने नाले से उनका शव बरामद किया था।

    रविंदर कुमार का आरोप था कि उनके बेटे की हत्या तत्कालीन AAP पार्षद ताहिर हुसैन और उनके साथियों ने की। शिकायत के अनुसार, आरोपी ताहिर हुसैन के ऑफिस में इकट्ठा हुए थे और हत्या के बाद अंकित के शव को नाले में फेंक दिया गया।

    मामले में नाम सामने आने के बाद आम आदमी पार्टी ने ताहिर हुसैन को निलंबित कर दिया था। 24 मार्च 2023 को अदालत ने ताहिर हुसैन सहित 11 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे।

    CAA के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हुआ था दंगा
    23 फरवरी 2020 को नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) विरोधी और समर्थक आमने-सामने आ गए थे। इसके बाद दोनों पक्षों की ओर से पथराव होने लगे थे। 26 फरवरी तक चले दंगों में 53 लोगों की जान गई और 250 से ज्यादा जख्मी हो गए थे। मरने वालों में 38 मुसलमान और 15 हिंदू थे। करीब 800 दुकानें जला दी गईं। 500 से ज्यादा घरों को आग के हवाले कर दिया गया था।

  • हरियाणा में नए ग्रुप-डी कर्मचारियों का 29 जुलाई को होगा प्रशिक्षण कार्यक्रम

    हरियाणा में नए ग्रुप-डी कर्मचारियों का 29 जुलाई को होगा प्रशिक्षण कार्यक्रम

    चंडीगढ़
     हरियाणा सरकार ने हाल ही में नियुक्त ग्रुप-डी कर्मचारियों के लिए 29 जुलाई को पंचकूला के सेक्टर-तीन स्थित ताऊ देवी लाल स्टेडियम में राज्य स्तरीय परिचय एवं प्रशिक्षण (इंडक्शन) कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया है।

    इसे केवल औपचारिक स्वागत समारोह नहीं, बल्कि सरकारी सेवा की नई कार्य संस्कृति विकसित करने की दिशा में सरकार की महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। कार्यक्रम सुबह 10 बजे शुरू होगा, जिसमें मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी नवनियुक्त कर्मचारियों को भाजपा सरकार की रीति-नीति, योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी देंगे।

    मानव संसाधन विभाग द्वारा सभी विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों और उपायुक्तों को जारी निर्देशों के अनुसार 16 अक्टूबर 2025 या उसके बाद नियुक्त सभी ग्रुप-डी कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी।

    विशेष बात यह है कि कर्मचारियों के माता-पिता अथवा जीवनसाथी को भी कार्यक्रम में शामिल होने का अवसर दिया गया है। इससे सरकार नियुक्ति को केवल रोजगार नहीं, बल्कि परिवार के सम्मान और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ने का संदेश देना चाहती है।

    इस परिचय एवं अभिमुखीकरण कार्यक्रम का उद्देश्य नए कर्मचारियों को सरकारी सेवा की कार्य संस्कृति, प्रशासनिक व्यवस्था, सेवा आचरण, अनुशासन और जनहित में कार्य करने की जिम्मेदारियों से परिचित कराना है।

    सरकार का मानना है कि सेवा के शुरुआती चरण में ही कर्मचारियों को प्रशासनिक मूल्यों और सुशासन की भावना से जोड़ने पर उनकी कार्यशैली अधिक जवाबदेह और नागरिक केंद्रित बनेगी। हरियाणा की नायब सरकार अभी तक 60 हजार से अधिक सरकारी नौकरियां प्रदान कर चुकी है। मुख्यमंत्री ने शपथ लेते ही करीब 25 हजार कर्मचारियों का रिजल्ट घोषित कर दिया था।

    प्रशासनिक और राजनीतिक दृष्टि से भी इस पहल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नायब सिंह सैनी सरकार लगातार ''''बिना पर्ची, बिना खर्ची'''' के आधार पर पारदर्शी और मेरिट आधारित सरकारी भर्ती को अपनी प्रमुख उपलब्धियों में शामिल करती रही है।

    ऐसे में यह कार्यक्रम उसी व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में अगला कदम माना जा रहा है, जहां निष्पक्ष भर्ती के बाद कर्मचारियों को ईमानदार, संवेदनशील और उत्तरदायी प्रशासन का हिस्सा बनने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

    फैक्ट फाइल
    – 29 जुलाई को ताऊ देवी लाल स्टेडियम, पंचकूला में होगा राज्य स्तरीय परिचय एवं अभिमुखीकरण कार्यक्रम।
    – 16 अक्टूबर 2025 या उसके बाद नियुक्त सभी ग्रुप-डी कर्मचारी होंगे शामिल।
    – कर्मचारियों के माता-पिता या जीवनसाथी को भी किया गया आमंत्रित।
    – उद्देश्य सेवा भावना, अनुशासन, प्रशासनिक कार्य संस्कृति और जनसेवा के मूल्यों से परिचित कराना।
    – 'बिना पर्ची-बिना खर्ची' भर्ती व्यवस्था को सुशासन और जवाबदेह प्रशासन से जोड़ने की दिशा में सरकार की अहम पहल।

     

  • बिहार में इको-टूरिज्म को बढ़ावा, सात जिलों में बनेगा नया मास्टरप्लान

    बिहार में इको-टूरिज्म को बढ़ावा, सात जिलों में बनेगा नया मास्टरप्लान

    पटना
     बिहार सरकार ने इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए विशेष कार्ययोजना पर काम शुरू कर दिया है। इसके अंतर्गत पहाड़, जंगलों, झरनों और प्राकृतिक सुंदरता से संपन्न क्षेत्रों को चिह्नित कर विकसित करने की योजना है।

    पहले चरण में नालंदा, पश्चिम चंपारण, अररिया, किशनगंज, बांका, कैमूर और सहरसा जिले का चयन इको-टूरिज्म के विशेष क्षेत्र के रूप में किया गया है।

    इन जिलों में इको-टूरिज्म स्थलों के समेकित विकास के लिए पर्यटक मास्टरप्लान बनाया जाएगा। इसके अंतर्गत इन स्थानों पर बुनियादी सुविधाओं का विकास कर पर्यटकों के लिए आकर्षक और सुविधाजनक वातावरण तैयार किया जाएगा।

    पर्यटन विभाग के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में नालंदा में सबसे अधिक पर्यटक पहुंचे हैं, जबकि पर्यटकों की संख्या में सबसे तेज वृद्धि कैमूर जिले में दर्ज की गई है। हाल के दिनों में कैमूर तेजी से इको टूरिज्म के प्रमुख आकर्षण के रूप में उभर रहा है।

    मास्टर प्लान के तहत चयनित पर्यटन स्थलों के व्यवस्थित, सतत और आर्थिक विकास के लिए रणनीतिक ब्लूप्रिंट तैयार किया जाएगा। इसका उद्देश्य पर्यटकों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करना और प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण सुनिश्चित करना है।

    विभाग का मानना है कि इस पहल से बिहार में पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिलेगी और राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

    सरकार की नीतियों से अति-पिछड़ा समाज का जीवन-स्तर हुआ बेहतर : प्रेम कुमार
    अति-पिछड़ा वर्ग की कामना है कि केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों का लाभ उसे निरतंर मिलता रहे। इन नीतियों से समाज का जीवन-स्तर बेहतर हुआ है। सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के सौ दिन पूरे होने के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय अति-पिछड़ा वर्ग महासभा ने विधानसभा के कान्फ्रेंस हाल में कार्यक्रम का आयोजन किया।

    उसमें अति-पिछड़ा वर्ग की लगभग 30 उप-जातियों के प्रतिनिधियों की सहभागिता रही। अध्यक्षता महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. प्रेम कुमार ने की, जो विधानसभा के अध्यक्ष हैं।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार और सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली बिहार सरकार ने अति-पिछड़ा वर्ग के सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक सशक्तीकरण के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाएं संचालित की हैं।

    इन योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है। इससे सकारात्मक परिवर्तन आ रहा है और समाज का जीवन-स्तर बेहतर हुआ है। आशा है कि जन-हितकारी योजनाओं का लाभ अति-पिछड़ा वर्ग निरंतर प्राप्त करता रहेगा और समाज के सर्वांगीण विकास का मार्ग और अधिक सशक्त होगा। कार्यक्रम का संचालन महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री रणविजय रोशन ने किया।

     

  • हिसार के डाबड़ा गांव की 193 साल पुरानी हवेलियां बनीं विरासत की पहचान

    हिसार के डाबड़ा गांव की 193 साल पुरानी हवेलियां बनीं विरासत की पहचान

     हिसार
    जब गांव डाबड़ा की पुरानी गलियों में कदम बढ़ते हैं तो अचानक समय जैसे ठहर जाता है। ऊंचे-ऊंचे लकड़ी के दरवाजे, पीतल से सजी चौखटें, मोटी लाखोरी ईंटों की दीवारें और विशाल आंगन, ऐसा लगता है मानो कोई इमारत नहीं, बल्कि इतिहास अपने पूरे वैभव के साथ सामने खड़ा हो।

    करीब 146 और 193 वर्ष पुरानी ये हवेलियां आज भी उस दौर की गवाही देती हैं, जब घर केवल रहने के लिए नहीं, बल्कि पीढ़ियों के सम्मान, समृद्धि और शिल्पकला की पहचान के रूप में बनाए जाते थे।

    इन हवेलियों की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इन्होंने केवल समय नहीं देखा, बल्कि समय को झेला भी है। अंग्रेजी शासन, आजादी का दौर, हरियाणा का गठन, गांवों की बदलती तस्वीर और आधुनिक कंक्रीट के जंगल, सब कुछ बदल गया, लेकिन हवेलियों की दीवारें आज भी उसी मजबूती से खड़ी हैं। इन्हें देखकर सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि उस दौर के कारीगर केवल राजमिस्त्री नहीं, बल्कि पत्थर और ईंटों में कला उकेरने वाले शिल्पकार थे।

    क्या है हवेली का इतिहास?
    राजस्थान से शुरू हुई विरासत की कहानी धन्ना सिंह की पांचवीं पीढ़ी से जुड़े बलजीत सिंह डाबड़ा बताते हैं कि उनके पूर्वज धन्ना सिंह 1833 में राजस्थान के सीकर जिले से डाबड़ा आए थे। यहीं उन्होंने परिवार बसाया और पहली हवेली का निर्माण कराया।

    इसके बाद वर्ष 1880 में सरदार ईशर सिंह ने दूसरी भव्य हवेली बनवाई। उस समय गांव तक निर्माण सामग्री पहुंचाना किसी चुनौती से कम नहीं था। नहर मार्ग से मजबूत गार्डर मंगवाए गए और सातरोड से ऊंट-रेहड़ियों के जरिए ईंटें ढोई गईं। महीनों की मेहनत और पारंपरिक तकनीक के बाद यह विशाल आर्किटेक्चर आकार ले सका।

    कारीगरों के हुनर की देती हैं गवाही
    इन हवेलियों के निर्माण में लाखोरी ईंट, चूना, सुर्खी और साल की मजबूत लकड़ी का इस्तेमाल किया गया। मुख्य द्वारों पर पीतल की नक्काशी, विशाल लकड़ी के दरवाजे, चौड़ा आंगन, कलात्मक चौखटें और पारंपरिक चित्रकारी आज भी उसी शान से मौजूद हैं। यही वजह है कि लगभग दो सदियां गुजरने के बाद भी ये हवेलियां मजबूती से खड़ी हैं और आने वाले लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं।

    ग्रामीणों ने सरकार से धरोहर घोषित कर संरक्षण की मांग उठाई
    परिवार की पहचान से बढ़कर गांव की विरासत बलजीत सिंह डाबड़ा बताते हैं कि उनके परिवार की वंश परंपरा में धन्ना सिंह के बाद ईशर सिंह, हरजीराम, नौनीहाल सिंह, हरि सिंह और फिर पूर्ण सिंह डाबड़ा, बलजीत सिंह, दलजीत सिंह तथा परमजीत सिंह सहित परिवार के सदस्य इस धरोहर की देखभाल कर रहे हैं।

    इसी परिवार से हरियाणा सरकार में मंत्री और विधायक भी रह चुके हैं। गांव के लोग चाहते हैं कि इस ऐतिहासिक हवेली को धरोहर के रूप में संरक्षित किया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी अपने गौरवशाली इतिहास से परिचित हो सकें।

    धरोहर घोषित करने की उठी मांग पर ग्रामीणों का कहना है कि यदि इन हवेलियों को संरक्षित कर विरासत पर्यटन से जोड़ा जाए तो यह केवल डाबड़ा गांव ही नहीं, बल्कि पूरे हरियाणा की पारंपरिक वास्तु-कला और सांस्कृतिक इतिहास की पहचान बन सकती हैं। उनका मानना है कि यह धरोहर आने वाली पीढ़ियों को अपने अतीत से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है।

    कैसे बनी हवेली?
    जब ट्रक नहीं, ऊंटगाड़ी ढोती थीं ईंटें, उस दौर में निर्माण सामग्री गांव तक पहुंचाना आसान नहीं था। सातरोड से ईंटें ऊंटगाड़ी के माध्यम से लाई जाती थीं, जबकि अन्य सामग्री नहर मार्ग से पहुंचती थी। सीमित संसाधनों के बावजूद कारीगरों ने ऐसा निर्माण किया, जो आज भी इंजीनियरिंग और पारंपरिक शिल्प का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है।

     

  • पंजाब में BJP दफ्तर पर पेट्रोल बम से हमला! संगरूर में आगजनी से मचा हड़कंप

    पंजाब में BJP दफ्तर पर पेट्रोल बम से हमला! संगरूर में आगजनी से मचा हड़कंप

    संगरूर 

    देशभर में पेपर लीक और अन्य मुद्दों को लेकर जारी बवाल के बीच पंजाब से बड़ी खबर सामने आई है। यहां राज्य के संगरूर जिले में भाजपा के दफ्तर पर बड़ा हमला हुआ है। पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक यहां उप्पली रोड स्थित भारतीय जनता पार्टी के ज़िला कार्यालय को असामाजिक तत्वों ने पेट्रोल बम फेंककर निशाना बनाया। हालांकि इस हमले में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। घटना के बाद से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है।

    पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, हमलावर ने बियर की बोतल को पेट्रोल बम बनाकर बीजेपी दफ्तर की बाहरी दीवार की तरफ फेंक दी। घटना रविवार देर रात करीब 3 बजे की बताई जा रही है। पेट्रोल बम दफ्तर की दीवार से टकराकर फूट गया, जिससे वहां आग लगने की भी खबर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक सोमवार सुबह जब कार्यकर्ता दफ्तर खोलने पहुंचे, तब इस घटना का खुलासा हुआ और तुरंत पुलिस को सूचना दी गई।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत जांच शुरू कर दी है। संगरूर के एसपी दविंदर अत्री ने बताया कि उन्होंने डीएसपी और संगरूर थाना प्रभारी के साथ बीजेपी कार्यालय पहुंचकर घटनास्थल की जांच की है। अत्री ने बताया, “मैं, डीएसपी और संगरूर के SHO मौके पर पहुंचे हैं। हम पूरे घटनास्थल का निरीक्षण कर रहे हैं। बीयर की बोतल में पेट्रोल भरकर उसे पेट्रोल बम में बदला गया था।”

    पुलिस फिलहाल इस मामले की जांच के लिए आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। एसपी दविंदर अत्री ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा रही है और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा, "हम आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर रहे हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। दोषियों को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।"

    बता दें कि पंजाब में इससे पहले भी भाजपा के दफ्तर पर हमले हुए हैं। बीते जून में बठिंडा में बीजेपी के एक नेता के क्लिनिक पर दो अज्ञात लोगों ने पेट्रोल बम फेंका था। वहीं इस साल की शुरुआत में चंडीगढ़ स्थित पंजाब बीजेपी मुख्यालय पर भी एक देसी बम फेंका गया था। कई एजेंसियों ने मिलकर घटना की जांच की थी।बाद में इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पंजाब पुलिस के मुताबिक कि इन आरोपियों के तार विदेश में बैठे हैंडलर्स से जुड़े हुए थे।

  • राजस्थान में रोडवेज को मिली 144 नई बसें, यात्रियों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं

    राजस्थान में रोडवेज को मिली 144 नई बसें, यात्रियों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं

    जयपुर
    मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने रविवार को जयपुर के अजमेर रोड स्थित हीरापुरा बस टर्मिनल से रोडवेज की 144 नई बसों को पूजन के बाद हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने बस चालकों के साथ संवाद करते हुए ग्रुप फोटो भी खिंचवाई। मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार सभी संकल्पों एवं वादों को पूरा करते हुए जनकल्याण से जुड़े प्रत्येक क्षेत्र में तेजी से कार्य कर रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में लगातार सार्वजनिक परिवहन सेवा का विस्तार किया जा रहा है, ताकि आमजन को सुरक्षित, सुलभ और सुविधाजनक यात्रा उपलब्ध हो सके। हमारी सरकार की प्राथमिकता प्रदेश के हर कोने में परिवहन सुविधा पहुंचाना है। आज रवाना की गई 144 नई बसों के संचालन से प्रदेश के लाखों यात्रियों को बेहतर यात्रा सुविधा मिलेगी।

    उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के प्रभावी प्रबंधन और पारदर्शी कार्यप्रणाली के कारण राजस्थान रोडवेज घाटे से निकलकर लाभ की स्थिति में पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने वित्तीय अनुशासन स्थापित कर रोडवेज कर्मचारियों को समय पर वेतन देना सुनिश्चित किया है।

    अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस नई ब्लू लाइन एक्सप्रेस बसें
    राजस्थान पथ परिवहन निगम लिमिटेड की नई ब्लू लाइन एक्सप्रेस बसें बेहतर तकनीक, सुरक्षा मानकों और अत्याधुनिक यात्री सुविधाओं से सुसज्जित हैं। यात्रियों की सुरक्षा के लिए बसों में सीसीटीवी कैमरे, लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम, पैनिक बटन, उद्घोषणा प्रणाली, आपातकालीन सचेतक प्रणाली तथा रिवर्स सेंसर की व्यवस्था की गई है। वहीं, यात्रा के दौरान आवश्यक एवं आपातकालीन सूचनाओं के प्रसारण, यात्रियों के मनोरंजन तथा निगम की गैर-संचालन आय में वृद्धि के उद्देश्य से वैशाली नगर आगार को आवंटित 5 नई बसों में एलईडी टीवी लगाए गए हैं। आगामी चरणों में अन्य आगारों की बसों में भी एलईडी स्थापित की जाएंगी। बसों में आगे एवं पीछे एलईडी डेस्टिनेशन बोर्ड लगाए गए हैं तथा प्रत्येक सीट पर मोबाइल चार्जिंग की सुविधा है।

    सड़क सुरक्षा नियमों की पालना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी
    मुख्यमंत्री ने सड़क सुरक्षा के प्रति जागरुकता का संदेश देते हुए सड़क सुरक्षा अग्रदूत महिलाओं को हेलमेट भी वितरित किए। उन्होंने प्रदेशवासियों से यातायात नियमों का पालन करने तथा दोपहिया वाहन चलाते समय अनिवार्य रूप से हेलमेट पहनने की अपील की। उन्होंने कहा कि सुरक्षित यात्रा प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है और सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए जनभागीदारी अत्यंत आवश्यक है।

    इस दौरान उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा, सांसद मंजू शर्मा सहित जनप्रतिनिधि और आमजन उपस्थित रहे।

  • देश के पांच आयुर्वेद कॉलेज बनेंगे गुरुकुल, एमबीबीएस में पढ़ेगा आयुर्वेद

    देश के पांच आयुर्वेद कॉलेज बनेंगे गुरुकुल, एमबीबीएस में पढ़ेगा आयुर्वेद

     पटना
     आयुर्वेद शिक्षा को नई दिशा देने के लिए देश में पांच आयुर्वेद महाविद्यालयों को आयुर्वेद गुरुकुल के रूप में विकसित किया जाएगा। साथ ही एमबीबीएस पाठ्यक्रम में आयुर्वेद का मौलिक ज्ञान भी शामिल करने की तैयारी है, ताकि आधुनिक चिकित्सा पद्धति के विद्यार्थी आयुर्वेद की मूल अवधारणाओं से परिचित हो सकें। भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग (एनसीआइएसएम) की चेयरपर्सन डॉ. मनीषा कोटेकर ने कहीं।

    वह रविवार को ज्ञान भवन में राजकीय आयुर्वेदिक कालेज एवं अस्पताल, पटना के शताब्दी समारोह को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद महाविद्यालयों को निर्धारित मानकों के अनुरूप विकसित करने के साथ शिक्षा और चिकित्सा में वैज्ञानिकता एवं गुणवत्ता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि भारतीय प्रशासनिक सेवा के प्रशिक्षण माड्यूल में आयुर्वेद को शामिल करने की दिशा में भी पाठ्यक्रम तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद के वर्तमान 14 विषयों को आवश्यकता और वैज्ञानिक आधार के अनुसार भविष्य में और विस्तार दिया जाएगा।

    आयुर्वेद शिक्षा को शोध और आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जोड़ना समय की मांग है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद को केवल पारंपरिक चिकित्सा पद्धति तक सीमित न रखकर इसके वैज्ञानिक पक्ष को भी मजबूती से सामने लाने की जरूरत है।

    इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ एनसीआइएसएम की चेयरपर्सन डॉ. मनीषा कोटेकर, बिहार स्वास्थ्य विभाग के विशेष सचिव डॉ. एसएम त्यागराजन, अपर सचिव शंभू शरण, कार्यपालक निदेशक आलोक कुमार, महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. कुमारी उमा पांडेय, अधीक्षक डॉ. शिवादित्य ठाकुर, आयुर्वेद निदेशक डॉ. वरुण कुमार, आयोजन समिति के सचिव डॉ. अरविंद चौरसिया ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

    इस अवसर पर डॉ. अरुण कुमार सिंह, डॉ. आशुतोष कुमार, डॉ. रोहित रंजन, डॉ. सुशील कुमार झा, डॉ. रमन रंजन, डॉ. एसएस गुप्ता, डॉ. दीपाली सुंदरी वर्मा, डॉ. अमरेंद्र कुमार सिंह भी मौजूद रहे।

    अनुसंधान को बढ़ावा देने पर जोर
    बिहार स्वास्थ्य विभाग के विशेष सचिव डॉ. एसएम त्यागराजन ने आयुर्वेद के शिक्षक, विद्यार्थी और चिकित्सक की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद के विकास के लिए बेहतर शिक्षा के साथ गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान को बढ़ावा देना जरूरी है।

    डाक विभाग के निदेशक ने आयुर्वेद चिकित्सा के महत्व और इसकी व्यापक उपयोगिता पर प्रकाश डाला। शताब्दी समारोह के अवसर पर डाक विभाग की ओर से विशेष डाक टिकट भी जारी किया गया।

    हर दिन मरीजों को इलाज और जांच की सुविधा
    अस्पताल के अधीक्षक डॉ. शिवादित्य ठाकुर ने कहा कि अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं। मरीजों को आवश्यक जांच और दवाएं उपलब्ध कराने के साथ बेहतर उपचार देने का प्रयास किया जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि मरीज यहां परेशानी के साथ आते हैं, लेकिन स्वस्थ होने के भरोसे के साथ लौटते हैं और बड़ी संख्या में मरीजों को उपचार से लाभ भी मिल रहा है।

    महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. कुमारी उमा पांडेय ने स्वागत भाषण में शताब्दी समारोह के उद्देश्य और संस्थान की गौरवशाली यात्रा पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन रूपम त्रिविक्रम ने, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. प्रभात कुमार द्विवेदी ने किया।

    100 से अधिक पूर्व प्राचार्य और विद्वान सम्मानित
    शताब्दी समारोह के दौरान आयुर्वेद के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 100 से अधिक पूर्व प्राचार्यों, मूर्धन्य विद्वानों और विशिष्ट पूर्ववर्ती छात्रों को सम्मानित किया गया। समारोह के दूसरे सत्र में पूर्ववर्ती छात्र मिलन समारोह आयोजित किया गया, जिसमें देश-विदेश से आए 600 से अधिक पूर्ववर्ती छात्रों ने हिस्सा लिया।

    कार्यक्रम का उद्घाटन पूर्ववर्ती छात्र संघ के अध्यक्ष डॉ. देवव्रत नारायण सिंह ने किया। महासचिव डॉ. अरुण कुमार सिंह ने संघ की गतिविधियों और कार्यों की जानकारी दी
    नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश और मारीशस के विशेषज्ञों ने की शोध पर चर्चा

    समारोह में वैज्ञानिक सत्र के तहत गोलमेज सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश और मारीशस के चिकित्सकों ने भाग लिया।

    विशेषज्ञों ने आयुर्वेद के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध को बढ़ावा देने, विभिन्न देशों के बीच ज्ञान और अनुभव साझा करने तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ आयुर्वेद चिकित्सा को आगे बढ़ाने पर विचार-विमर्श किया।

    शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया, जिसमें कलाकारों के साथ पूर्ववर्ती छात्रों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। इससे शताब्दी समारोह का समापन यादगार माहौल में हुआ।

    देश-विदेश से पहुंचे पूर्ववर्ती छात्रों ने अपने अनुभव साझा किए और संस्थान से जुड़ी पुरानी यादों को ताजा किया। इस दौरान महाविद्यालय के पूर्व छात्रों के योगदान और उनकी उपलब्धियों पर भी चर्चा हुई।

     

  • पटना को मिलेंगे तीन नए पार्क, सेल्फी प्वाइंट और जिम सुविधाएं

    पटना को मिलेंगे तीन नए पार्क, सेल्फी प्वाइंट और जिम सुविधाएं

    पटना
    पटना के लोगों के लिए अच्छी खबर है। पटनावासियों को जल्द ही तीन नए पार्कों की सौगात मिलेगी। इन पार्कों में सेल्फी प्वाइंट से लेकर जिम तक की सुविधा होगी। जाहिर है इससे पटनाा की खुबसूरती में चार-चांद जरूर लगेगा। जानकारी के मुताबिक, पटना नगर निगम क्षेत्र में बुडको तीन नए पार्क बनाएगा। ये पार्क किदवईपुरी, पाटलिपुत्र और मीठापुर इलाके में बनेंगे। तीनों पार्क के निर्माण पर करीब 4.76 करोड़ की लागत आएगी। इसमें सबसे बड़ा मीठापुर पार्क होगा, जो पुराने बस स्टैंड के सामने न्यू बाइपास के दक्षिण में बनेगा। बताया जा रह है कि बुडको ने तीनों पार्क के संबंधित योजनाएं तैयार कर ली हैं। जल्द ही इसका निर्माण शुरू होगा। नए पार्क बनने से स्थानीय लोगों को लाभ मिलेगा और क्षेत्र की सुंदरता भी बढ़ेगी।

    मीठापुर पार्क 138 मीटर लंबा और 27 मीटर चौड़ा होगा। मीठापुर पार्क का निर्माण होने से दक्षिणी पटना के लोगों को सबसे अधिक लाभ होगा। दक्षिणी पटना का यह पहला पार्क होगा, जिसमें सभी आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी। मीठापुर पार्क के निर्माण पर 1.85 करोड़ खर्च होंगे। मीठापुर पार्क में एक तालाब भी बनेगा और सेल्फी प्वाइंट भी होगा। वार्ड 25 में ठाकुर प्रसाद सामुदायिक हॉल के बगल में आदर्श कॉलोनी किदवईपुरी पार्क का भी जीर्णोद्धार किया जाएगा।

    पाटलिपुत्र अंचल में पड़ने वाले इस पार्क के जीर्णोद्धार पर बुडको 1.67 करोड़ खर्च करेगा। किदवईपुरी पार्क 36 मीटर लंबा और 32 मीटर चौड़ा है। किदवईपुरी पार्क में जो सुविधाएं मिलेंगी, उसमें वाटर फाउंटेन, योगा शेड, पाथवे, हाई मास्ट लाइट, बच्चों के खेलने के लिए उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। पार्क की सुंदरता बढ़ाने के लिए मिथिला पेंटिंग भी करायी जाएगी। वार्ड-5 में बैंक ऑफ इंडिया कॉलोनी में प्रस्तावित पार्क के निर्माण पर 1.22 करोड़ रुपये की लागत आएगी। यहां का पार्क 32 मीटर लंबा और 17 मीटर चौड़ा होगा। इस में सभी तरह की सुविधाएं उपलब्ध होगी।

    मीठापुर पार्क में ओपन जिम की होगी सुविधा
    मीठापुर पार्क में ओपन जिम की सुविधा होगी। पार्क के अंदर तालाब, सेल्फी प्वाइंट, योगा शेड, चिल्ड्रन पार्क, शौचालय की व्यवस्था होगी। पूरे पार्क को सुंदर और आकर्षक बनाने के लिए चारों ओर पेंटिंग और रोशनी की व्यवस्था की जाएगी। जलनिकासी के लिए पार्क के अंदर ड्रेनेज सिस्टम बनाया जाएगा। ये सुविधाएं तीनों पार्क में उपलब्ध कराई जाएंगी। तीन पार्क बनने से एक बड़ी आबादी को लाभ होगा। साथ ही इन क्षेत्रों में पार्क की कमी को पूरा किया जा सकेगा। इसका सबसे अधिक लाभ बच्चे और बुजुर्गों को मिलेगा।

  • हरियाणा में महिलाओं को डेयरी के लिए पंचायत भूमि पट्टे पर मिलेगी अब

    हरियाणा में महिलाओं को डेयरी के लिए पंचायत भूमि पट्टे पर मिलेगी अब

    रोहतक
    हरियाणा सरकार ने ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को पंचायत की शामलात भूमि पट्टे पर उपलब्ध कराने के नए नियम लागू कर दिए हैं।

    अब हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एचएसआरएलएम) से जुड़े पात्र स्वयं सहायता समूह पंचायत की शामलात भूमि लेकर डेयरी गतिविधियां शुरू कर सकेंगे। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को स्थायी आजीविका उपलब्ध कराना और गांवों में डेयरी व्यवसाय को बढ़ावा देना है।

    इसी संबंध में जिला विकास भवन में एडीसी एवं जिला परिषद और डीआरडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी नरेंद्र कुमार के मार्गदर्शन में पशु सखी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में जिले के पांचों खंडों के 16 गांवों की 27 सक्रिय स्वयं सहायता समूह सदस्यों को पशुपालन एवं डेयरी प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया गया।

    500 वर्ग गज तक की जमीन मिलेगी पट्टे पर
    प्रशिक्षण को संबोधित करते हुए एडीसी नरेंद्र कुमार ने कहा कि नए प्रावधानों के तहत उपायुक्त ग्राम पंचायत की 500 वर्ग गज तक शामलात भूमि दो वर्ष की अवधि के लिए स्वयं सहायता समूहों को पट्टे पर देने की अनुमति प्रदान कर सकेंगे। यदि समूह की ओर से संचालित डेयरी गतिविधियां संतोषजनक पाई जाती हैं तो पट्टे की अवधि तीन वर्ष और बढ़ाई जा सकेगी।

    ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन महिलाओं की पारंपरिक आजीविका का महत्वपूर्ण साधन है, लेकिन भूमि और संसाधनों के अभाव में अनेक महिलाएं इस क्षेत्र में आगे नहीं बढ़ पातीं। नई व्यवस्था उनके लिए स्वरोजगार के नए अवसर खोलेगी।

    योजना का लाभ लेने के लिए ये होंगी शर्तें
    योजना का लाभ केवल उन स्वयं सहायता समूहों को मिलेगा जो कम से कम एक वर्ष से सक्रिय हों और नियमित बचत एवं ऋण गतिविधियों का रिकार्ड रखते हों। समूह में कम से कम 10 महिलाएं होना अनिवार्य होगा और सभी सदस्य उसी ग्राम पंचायत की निवासी होंगी। इसके अलावा समूह की बैठकों में न्यूनतम 75 प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करनी होगी।

    नरेंद्र कुमार ने बताया कि किसी सरकारी योजना या बैंक में डिफाल्ट अथवा लंबित विवाद वाले समूह इस योजना के पात्र नहीं होंगे। वहीं, जिन सदस्यों या उनके परिवार के नाम परिवार पहचान पत्र के अनुसार 500 वर्ग गज या उससे अधिक भूमि दर्ज है, वे भी इस योजना का लाभ नहीं ले सकेंगे।

    पशु सखी बनेंगी ग्रामीण महिलाओं की मार्गदर्शक
    हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला कार्यक्रम प्रबंधक योगेश पाराशर ने बताया कि जिले में कुल 50 सक्रिय महिलाओं को पशु सखी के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। ये प्रशिक्षित महिलाएं अन्य स्वयं सहायता समूहों को पशुपालन, पशुओं के बेहतर प्रबंधन, पौष्टिक आहार, टीकाकरण, दुग्ध उत्पादन और विपणन संबंधी जानकारी उपलब्ध कराएंगी।

    पशु सखी की जिम्मेदारी भूमिहीन महिलाओं को इस योजना से जोड़ना, पंचायत की भूमि पट्टे पर दिलवाने में सहयोग करना, बैंक अथवा समूह के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराने में सहायता करना और दूध की बेहतर कीमत दिलाने में मार्गदर्शन करना भी होगी।

    ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल
    अधिकारियों का कहना है कि यह योजना ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ डेयरी क्षेत्र में नए रोजगार सृजित करेगी। पंचायत की निष्क्रिय शामलात भूमि का उत्पादक उपयोग होगा और स्वयं सहायता समूहों की आय बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। प्रशिक्षण कार्यक्रम में मिशन के युवा पेशेवर राहुल मलिक, लेखाकार कमलेश और बीसीसी रीना और हेमलता सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी भी मौजूद रहे।

    यह हैं योजना की प्रमुख बातें
        पंचायत की 500 वर्ग गज तक शामलात भूमि पट्टे पर मिलेगी।
        प्रारंभिक पट्टा अवधि दो वर्ष, संतोषजनक कार्य पर तीन वर्ष का विस्तार संभव।
        कम से कम एक वर्ष से सक्रिय स्वयं सहायता समूह ही होंगे पात्र।
        समूह में न्यूनतम 10 सदस्य और 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य।
        बैंक या सरकारी योजना में डिफाल्ट वाले समूह पात्र नहीं होंगे।
        500 वर्ग गज या अधिक निजी भूमि वाले परिवार योजना का लाभ नहीं ले सकेंगे।
        पशु सखी महिलाओं को डेयरी संचालन, ऋण, विपणन और पशुपालन में सहयोग देंगी।