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  • BPSC TRE 4 Notification: बिहार शिक्षक भर्ती का नोटिफिकेशन जल्द, सामान्य प्रशासन विभाग को भेजा गया प्रस्ताव; 20 हजार पदों पर भर्ती संभव

    BPSC TRE 4 Notification: बिहार शिक्षक भर्ती का नोटिफिकेशन जल्द, सामान्य प्रशासन विभाग को भेजा गया प्रस्ताव; 20 हजार पदों पर भर्ती संभव

    पटना 

    बीपीएससी टीआरई 4 के तहत शिक्षक भर्ती का प्रस्ताव बिहार सामान्य प्रशासन विभाग को भेज दिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी खुद इस विभाग के मंत्री हैं। इसके साथ ही शिक्षक नियुक्ति चौथे चरण की प्रक्रिया अब अंतिम प्रशासनिक चरण में पहुंच गयी है। टीआरई-4 के माध्यम से 20 हजार से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति की संभावना है। अब मुख्यमंत्री की स्वीकृति के बाद नियुक्ति की अधियाचना एक से दो दिनों में बिहार लोक सेवा आयोग को भेज दी जाएगी। इसके बाद बीपीएससी भर्ती का विस्तृत विज्ञापन जारी करेगा।

    शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बताया कि विभाग ने सोमवार को टीआरई-4 के तहत शिक्षक नियुक्ति का प्रस्ताव सामान्य प्रशासन विभाग को भेज दिया है। मुख्यमंत्री की मंजूरी मिलते ही अधियाचना बीपीएससी को भेजी जाएगी, ताकि नियुक्ति में किसी प्रकार की विलंब न हो। माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर के साथ कुछ रिक्तियां प्राथमिक में भी आएगी। मुख्यमंत्री की स्वीकृति मिलने के बाद बीपीएससी भर्ती का विस्तृत विज्ञापन जारी कर ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू करेगा।

    बीपीएससी ने वायरल विज्ञप्ति को फर्जी बताया
    बीपीएससी ने देर रात सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही टीआरई फोर की विज्ञप्ति को फर्जी करार दिया है। इसकी सूचना आयोग के जनसंपर्क अधिकारी ने दी। बताया कि अब तक आयोग के पास रिक्तियां प्राप्त नहीं हुई हैं। जैसे ही आयोग के पास वैकेंसी आएगी। इसकी सूचना जारी की जाएगी।

    तबादले के साथ ही शिक्षकों का जिला कैडर भी बनेगा
    शिक्षकों का तबादले के साथ ही जिला कैडर बन जाएगा। नई व्यवस्था के तहत सभी पात्र शिक्षकों को स्थानांतरण का मौका मिलेगा। जो अंतर जिला तबादले का विकल्प चुनेंगे, उनकी वरीयता नई तैनाती वाले जिले के आधार पर तय होगी। अंतर जिला तबादले के बाद संबंधित शिक्षक की वरीयता नये जिले में पहले से कार्यरत शिक्षकों के बाद तय होगी। शिक्षक तबादले के लिए बुधवार से आवेदन कर सकेंगे। शिक्षा विभाग ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर 5 अगस्त तक ऑनलाइन आवेदन स्वीकार करेगा। टीआरई-3 वाले और नियोजित शिक्षकों को इसका मौका नहीं मिलेगा।

    सरकार ने तबादले को एसओपी जारी कर दी है। तबादला जिला स्तर पर होने के अलावा अंतर प्रमंडलीय स्थानांतरण की स्थिति में नई वरीयता संबंधित प्रमंडल के अनुसार तय होगी। सबसे पहले अधिशेष शिक्षकों का समायोजन और समानुपातीकरण होगा। पारस्परिक स्थानांतरण के मामलों का निपटारा होगा और अंत में सामान्य स्थानांतरण की प्रक्रिया पूरी होगी। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि जिले का चयन सोच-समझकर करें, क्योंकि तबादले के बाद सेवा वरीयता उसी जिले के अनुसार तय होगी। पांच वर्षों तक तबादला नहीं होगा।

    बीपीएससी ने वायरल विज्ञप्ति को फर्जी बताया
    बीपीएससी ने सोमवार की देर रात सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही टीआरई फोर की विज्ञप्ति को फर्जी करार दिया है। इसकी सूचना आयोग के जनसंपर्क अधिकारी ने दी। बताया कि अब तक आयोग के पास रिक्तियां प्राप्त नहीं हुई हैं। जैसे ही आयोग के पास वैकेंसी आएगी। इसकी सूचना जारी की जाएगी।

    क्या लिखा है वायरल विज्ञप्ति में
    ''बिहार लोक सेवा आयोग को सामान्य प्रशासन विभाग के माध्यम से शिक्षा विभाग के अंतर्गत वर्ग- 1 से 5, 6 से 8, 9 से 10, वर्ग 11 से 12 के विद्यालय अध्यापक तथा अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग के अन्तर्गत वर्ग 1 से 5, 6 से 8, 9 से 10, 11 से 12 के विद्यालय अध्यापक एवं प्रधानाध्यापक तथा शिक्षा विभाग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के अन्तर्गत वर्ग 6 से 8, 9 से 10, 11 से 12 के विद्यालय अध्यापक एवं प्रधानाध्यापक के पदों पर नियुक्ति हेतु अधियाचना प्राप्त हुई है। उक्त पदों पर नियुक्ति हेतु समवेत विज्ञापन प्रकाशित कर ऑनलाइन आवेदन करने से संबंधित सूचना शीघ्र ही आयोग की आधिकारिक वेबसाईट पर प्रकाशित की जायेगी।''

    आयोग का बयान
    ''सोशल मीडिया के विभिन्न माध्यमों पर बिहार लोक सेवा आयोग के नाम से उक्त प्रेस विज्ञप्ति प्रसारित की जा रही है, जिसमें विभिन्न विभागों के अंतर्गत विद्यालय अध्यापक एवं प्रधानाध्यापक पदों पर नियुक्ति से संबंधित सूचना प्रदर्शित की गई है। यह स्पष्ट किया जाता है कि उक्त प्रेस विज्ञप्ति पूर्णतः फर्जी, भ्रामक एवं असत्य है। बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा ऐसी कोई प्रेस विज्ञप्ति जारी नहीं की गई है। अभ्यर्थियों एवं आमजन से अनुरोध है कि वे इस प्रकार की अप्रमाणित एवं भ्रामक सूचनाओं पर विश्वास न करें तथा उन्हें किसी भी माध्यम से आगे प्रचारित प्रसारित करने से बचें। बिहार लोक सेवा आयोग से संबंधित किसी भी परीक्षा, विज्ञापन अथवा अन्य आधिकारिक सूचना के लिए केवल आयोग की आधिकारिक वेबसाईट एवं आधिकारिक सोशल मीडिया माध्यमों का ही अनुसरण करें। अन्य किसी भी अनधिकृत स्रोत से प्राप्त जानकारी पर विश्वास न करें।''

    इस बार ये बदलाव संभव
    1. बीपीएससी ने अप्रैल में कहा था कि टीआरई 4 में फॉर्म भरने के समय ही 38 जिलों की चॉइस भरनी होगी। यह बेहद अहम होगा। मान लीजिए अगर आपने 30 ही जिलों की चॉइस भरी है, वर्ग 6-8 के लिए आवेदन किया है, और रैंक के हिसाब से आपको 32वें जिले में मिल रहा है तो आपका नहीं होगा क्योंकि आपने 30 ही जिले भरे हैं। यह बिल्कुल बीपीएससी कंबाइंड की तरह है।

    2- आयोग पहले कह चुका है कि 'इस बार पहले आवेदन की फीस ली जाएगी, इसके बाद ही फॉर्म भरने का लिंक खुलेगा। पहले फीस में दिक्कत होती थी। अभ्यर्थी फीस भर देते थे, लेकिन हमारे एंड पर फीस नहीं दिखती थी। अब यह दिक्कत नहीं आएगी।'

  • तेजप्रताप यादव को फिलहाल नहीं मिली राहत, बेल पर फैसला सुरक्षित; हत्या की कोशिश के केस में बढ़ीं मुश्किलें

    तेजप्रताप यादव को फिलहाल नहीं मिली राहत, बेल पर फैसला सुरक्षित; हत्या की कोशिश के केस में बढ़ीं मुश्किलें

    पटना

    लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव को अभी जेल से बाहर आने के लिए और भी इंतजार करना पड़ेगा। पुलिस की हत्या की कोशिश क आरोपी जनशक्ति जनता दल सुप्रीमो तेजप्रताप यादव की जमानत अर्जी पर सोमवार को सुनवाई तो हुई। लेकिन अदालत ने फिलहाल अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है। अनुमंडलीय न्यायिक दंडाधिकारी आरती उपाध्याय ने सोमवार को बेऊर जेल में बंद पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव और छात्र अभय आत्मन सिंह की नियमित जमानत अर्जी पर सुनवाई के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया। गांधी मैदान थाना के पुलिस अधिकारियों ने पूर्व विधायक तेज प्रताप यादव और प्रर्दशनकारी छात्रों पर पुलिस की हत्या करने का प्रयास समेत कई धाराओं में अपराध करने का दावा करते हुए एफआईआर दर्ज की है।

    पुलिस ने दावा कि इस आपराधिक घटना में गांधी मैदान थाना अध्यक्ष समेत आधा दर्जन पुलिस जख्मी हुए है। तेज प्रताप यादव के वकील ने बहस करते हुए कहा कि पुलिस अधिकारियों ने राजनीतिक विरोध के चलते झूठा केस कर गिरफ्तार किया है। तेजप्रताप के वकील ने अपने मुवक्किल को निर्दोष बताया और उन्हें नियमित जमानत पर मुक्त किए जाने की प्रार्थना की। अदालत में सरकारी वकील ने जमानत अर्जी का विरोध किया।

    पटना सिविल कोर्ट के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मनीष कुमार उपाध्याय ने विधायक संदीप सौरभ समेत एक दर्जन नेताओं और छात्रों की नियमित जमानत अर्जी पर सुनवाई करने के बाद पुलिस से उनके आपराधिक इतिहास और जख्म प्रतिवेदन की मांग की है। इनकी जमानत अर्जी पर 1 अगस्त को सुनवाई होगी।

    बता दें कि तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा की मांग को लेकर चल रहे धरना प्रदर्शन में शामिल होकर सरकारी कर्मचारियों के कार्यो में बल प्रयोग कर बाधा डालने और हत्या का प्रयास करने के आरोप में एक मुकदमा दर्ज करने के बाद पुलिस ने तेज प्रताप यादव को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इस संबंध में गांधी मैदान थाने में पटना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 109(1), 121(1), 121( 2 ) और 132 के तहत कांड संख्या 400/2026 दर्ज किया है।

    तेजप्रताप यादव को वामपंथी छात्र संगठनों द्वारा परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरोध में 25 जुलाई को बुलाए गए बिहार बंद का समर्थन करने के आरोप में शनिवार को गिरफ्तार किया गया था। इस दौरान पटना, सारण, सिवान, औरंगाबाद और भागलपुर में प्रदर्शन हिंसक हो गए थे। न्यायिक हिरासत में भेजे गए तेज प्रताप यादव को फिलहाल बेउर केंद्रीय कारागार में रखा गया है। जेजेडी प्रमुख की ओर से पेश अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि तेज प्रताप यादव के खिलाफ प्राथमिकी रविवार रात लगभग 12 बजकर 50 मिनट पर दर्ज की गई, जबकि उन्हें कई घंटे पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया था।

  • बिहार TRE-4 भर्ती को मिली रफ्तार, 20 हजार से अधिक शिक्षकों की होगी नियुक्ति

    बिहार TRE-4 भर्ती को मिली रफ्तार, 20 हजार से अधिक शिक्षकों की होगी नियुक्ति

    पटना
     बिहार में टीआरई-4 के तहत शिक्षक नियुक्ति का प्रस्ताव सोमवार को सामान्य प्रशासन विभाग को भेज दिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी खुद इस विभाग के मंत्री हैं। इसके साथ ही शिक्षक नियुक्ति चौथे चरण की प्रक्रिया अब अंतिम प्रशासनिक चरण में पहुंच गयी है। टीआरई-4 के माध्यम से 20 हजार से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति की संभावना है। अब मुख्यमंत्री की स्वीकृति के बाद नियुक्ति की अधियाचना एक से दो दिनों में बिहार लोक सेवा आयोग को भेज दी जाएगी। इसके बाद बीपीएससी भर्ती का विस्तृत विज्ञापन जारी करेगा।

    शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बताया कि विभाग ने सोमवार को टीआरई-4 के तहत शिक्षक नियुक्ति का प्रस्ताव सामान्य प्रशासन विभाग को भेज दिया है। मुख्यमंत्री की मंजूरी मिलते ही अधियाचना बीपीएससी को भेजी जाएगी, ताकि नियुक्ति में किसी प्रकार की विलंब न हो। माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर के साथ कुछ रिक्तियां प्राथमिक में भी आएगी। मुख्यमंत्री की स्वीकृति मिलने के बाद बीपीएससी भर्ती का विस्तृत विज्ञापन जारी कर ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू करेगा।

    बीपीएससी ने वायरल विज्ञप्ति को फर्जी बताया
    बीपीएससी ने सोमवार की देर रात सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही टीआरई फोर की विज्ञप्ति को फर्जी करार दिया है। इसकी सूचना आयोग के जनसंपर्क अधिकारी ने दी। बताया कि अब तक आयोग के पास रिक्तियां प्राप्त नहीं हुई हैं। जैसे ही आयोग के पास वैकेंसी आएगी। इसकी सूचना जारी की जाएगी।

    तबादले के साथ ही शिक्षकों का जिला कैडर भी बनेगा
    शिक्षकों का तबादले के साथ ही जिला कैडर बन जाएगा। नई व्यवस्था के तहत सभी पात्र शिक्षकों को स्थानांतरण का मौका मिलेगा। जो अंतर जिला तबादले का विकल्प चुनेंगे, उनकी वरीयता नई तैनाती वाले जिले के आधार पर तय होगी। अंतर जिला तबादले के बाद संबंधित शिक्षक की वरीयता नये जिले में पहले से कार्यरत शिक्षकों के बाद तय होगी। शिक्षक तबादले के लिए बुधवार से आवेदन कर सकेंगे। शिक्षा विभाग ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर 5 अगस्त तक ऑनलाइन आवेदन स्वीकार करेगा। टीआरई-3 वाले और नियोजित शिक्षकों को इसका मौका नहीं मिलेगा।

    सरकार ने तबादले को एसओपी जारी कर दी है। तबादला जिला स्तर पर होने के अलावा अंतर प्रमंडलीय स्थानांतरण की स्थिति में नई वरीयता संबंधित प्रमंडल के अनुसार तय होगी। सबसे पहले अधिशेष शिक्षकों का समायोजन और समानुपातीकरण होगा। पारस्परिक स्थानांतरण के मामलों का निपटारा होगा और अंत में सामान्य स्थानांतरण की प्रक्रिया पूरी होगी। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि जिले का चयन सोच-समझकर करें, क्योंकि तबादले के बाद सेवा वरीयता उसी जिले के अनुसार तय होगी। पांच वर्षों तक तबादला नहीं होगा।

  • शिरोमणि अकाली दल नेता टोनी जिंदल पर CGST का एक्शन, घर-फैक्टरी समेत रिश्तेदारों के ठिकानों पर छापेमारी

    शिरोमणि अकाली दल नेता टोनी जिंदल पर CGST का एक्शन, घर-फैक्टरी समेत रिश्तेदारों के ठिकानों पर छापेमारी

    मंडी गोबिंदगढ़
     शिरोमणि अकाली दल नेता और फर्नेस एसोसिएशन के प्रधान टोनी जिंदल के प्रतिष्ठानों पर सीजीएसटी विभाग ने छापा मारा है। प्रिंसिपल कमिश्नर एंटी-एवेजन सीजीएसटी लुधियाना की टीम ने उनके घर और फैक्टरी में जांच की है।

    विभाग उनके हिस्सेदारों और रिश्तेदारों के प्रतिष्ठानों की भी जांच कर रहा है। टोनी जिंदल मंडी गोबिंदगढ़ के प्रमुख उद्योगपति हैं और फर्नेस एसोसिएशन के प्रधान होने के साथ शिअद में सक्रिय हैं। फिलहाल विभाग की ओर से छापे को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी जा रही है।

  • Rajasthan Safai Karmchari Recruitment 2026: 24,752 पदों पर बंपर भर्ती, बिना परीक्षा-इंटरव्यू होगा चयन; अनपढ़ भी कर सकते हैं आवेदन

    Rajasthan Safai Karmchari Recruitment 2026: 24,752 पदों पर बंपर भर्ती, बिना परीक्षा-इंटरव्यू होगा चयन; अनपढ़ भी कर सकते हैं आवेदन

    जयपुर 

    राजस्थान में 24752 पदों पर सफाई कर्मचारियों के पदों पर भर्ती निकाली गई है। राज्य सरकार की ओर से प्रदेश की 183 से नगरीय निकायों (नगर पालिका, नगर परिषद और नगर निगम) में संविदा (कॉन्ट्रेक्ट) के तहत यह भर्ती निकाली है। इस भर्ती के आवेदन 15 अगस्त 2026 से आवेदन लिए जाएंगे। एप्लाई करने की आखिरी तारीख 28 सितंबर है। आवेदन एसएसओ (SSO) आईडी या राजस्थान स्वायत्त शासन निदेशालय की वेबसाइट के माध्यम से किए जा सकेंगे। आवेदन के समय लाइव फोटो अपलोड करना अनिवार्य किया गया है। चयन लॉटरी से होगा। परीक्षा और इंटरव्यू नहीं होंगे। कोई भी अभ्यर्थी अपनी इच्छानुसार केवल एक ही नगरीय निकाय से आवेदन कर सकेगा। एक से अधिक निकायों में आवेदन करने पर अभ्यर्थी के सभी आवेदन पत्र निरस्त (रद्द) कर दिए जाएंगे। 5 साल तक संविदा पर काम करने और संतोषजनक सेवा देने के बाद इन कर्मचारियों को स्थाई (नियमित) कर दिया जाएगा।

    आयु सीमा और योग्यता
    आयु: 1 जनवरी 2027 के अनुसार आवेदक की आयु 21 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए। महिला अभ्यर्थियों और आरक्षित श्रेणियों (SC, ST, OBC, MBC, EWS) को अधिकतम आयु सीमा में 5 से 10 वर्ष तक की छूट मिलेगी।

    शैक्षणिक योग्यता: इस भर्ती के लिए कोई न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता निर्धारित नहीं की गई है। यानी अनपढ़ भी योग्य है।

    मूल निवास: आवेदक का राजस्थान का मूल निवासी होना अनिवार्य है।
    सबसे अधिक पदों वाले नगर निकाय:

    जयपुर: 4,811 पद

    कोटा: 1,357 पद

    बीकानेर: 1,084 पद

    जोधपुर: 890 पद

    सीकर: 480 पद

    भरतपुर: 450 पद

    अलवर: 426 पद

    भिवाड़ी: 350 पद

    धौलपुर: 340 पद

    चूरू: 320 पद

    उदयपुर: 300 पद

    भीलवाड़ा: 296 पद

    अजमेर: 290 पद

    झुंझुनूं: 287 पद

    पाली: 287 पद

    अनुभव कितना होना चाहिए
    अभ्यर्थी को राज्य के किसी भी नगरीय निकाय, केंद्र/राज्य सरकार के उपक्रम, या अधिकृत ठेकेदार/संस्था में न्यूनतम 1 वर्ष का सफाई कार्य का व्यावहारिक अनुभव होना चाहिए।

    अनुभव प्रमाण-पत्र सक्षम अधिकारी द्वारा सत्यापित होना चाहिए और यह 1 अगस्त 2026 के बाद का जारी किया हुआ ही मान्य होगा।

    चयन प्रक्रिया
    कोई परीक्षा या इंटरव्यू नहीं: इस भर्ती में ना तो कोई लिखित परीक्षा होगी और ना ही इंटरव्यू लिया जाएगा।

    लॉटरी सिस्टम से होगा चयन
    चयन प्रक्रिया ऑनलाइन लॉटरी के जरिए होगी, जिसे सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग (DoIT&C) के सॉफ्टवेयर के माध्यम से निकाला जाएगा। लॉटरी से पहले दस्तावेजों की जांच होगी।

    प्राथमिकता
    सबसे पहले उसी निकाय के अनुभवी स्थानीय अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी।

    आवेदन शुल्क
    सामान्य वर्ग के लिए 600 रुपये।

    आरक्षित वर्ग और दिव्यांगों के लिए 400 रुपये।

    वेतन और नौकरी की शर्तें (स्थायीकरण)
    यह भर्ती 'राजस्थान कॉन्ट्रेक्चुअल हायरिंग टू सिविल पोस्ट्स रूल्स, 2022' के तहत की जा रही है। संविदा के दौरान चयनित अभ्यर्थियों को 7,410 रुपये प्रतिमाह का नियत मानदेय दिया जाएगा।

    आरक्षण की व्यवस्था
    भर्ती में महिलाओं के लिए 30% क्षैतिज आरक्षण तय किया गया है।

    इसके अलावा दिव्यांगों के लिए 4% और उत्कृष्ट खिलाड़ियों के लिए 2% आरक्षण का प्रावधान है।

    SC, ST, OBC, MBC और EWS वर्गों को नियमानुसार आरक्षण मिलेगा।

  • CJP प्रदर्शन में बवाल: पूर्व विधायक की बेटी से छेड़छाड़ का आरोप, जंतर-मंतर पहुंचे 900 से ज्यादा अपराधियों की हुई पहचान

    CJP प्रदर्शन में बवाल: पूर्व विधायक की बेटी से छेड़छाड़ का आरोप, जंतर-मंतर पहुंचे 900 से ज्यादा अपराधियों की हुई पहचान

    नई दिल्ली

    जंतर-मंतर पर आयोजित विरोध-प्रदर्शन के दौरान 24 जुलाई को भाजपा के एक पूर्व विधायक की बेटी के साथ छेड़छाड़ का गंभीर मामला सामने आया है। पीड़िता ने सोशल मीडिया पर इस घटना का खुलासा करते हुए प्रदर्शन में सुरक्षा व्यवस्था और वॉलंटियर्स के रवैये पर भी सवाल उठाए हैं। पीड़िता के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान जब बैरिकेड टूटे और भगदड़ जैसी स्थिति बनी, तब पीछे से एक अज्ञात व्यक्ति ने उसे गलत तरीके से छुआ। उन्होंने तुरंत पलटकर आरोपी को रंगे हाथों पकड़ा और उसे कई थप्पड़ जड़े। आरोप है कि घटना के बाद जब उसने शिकायत की तो एक पुरुष वॉलंटियर ने उस पर ही चिल्लाना शुरू कर दिया। एक अन्य ने कहा ऐसी गलतियां हो जाती हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

    सभी संदिग्धों पर नजर रखने के लिए दिल्ली पुलिस के पास मौजूद तमाम तकनीकों का इस्तेमाल किया था। इसमें पुलिसकर्मियों को विशेष एआई-संचालित स्मार्ट चश्मे दिए गए थे। इन चश्मों में फेस रिकॉग्निशन, वीडियो एनालिटिक्स और थर्मल इमेजिंग तकनीक इन-बिल्ट है। चलते-फिरते भीड़ को देखते समय यदि कोई संदिग्ध सामने आता है, तो फोन पर तुरंत अलर्ट चला जाता है। इसके अलावा इक्षणा वाहन को तैनाय किया गया था जो कि पहली बार 2023 के जी-20 (जी20) शिखर सम्मेलन के दौरान बेड़े में शामिल किया गया था। इसमें आठ फिक्स कैमरे लगे हैं जो 360-डिग्री कवरेज प्रदान करते हैं।

    डीपी-दृष्टि मोबाइल सर्विलांस वैन को विशेष रूप से उच्च भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों में अपराधियों और संदिग्धों की रीयल-टाइम ट्रैकिंग के लिए तैयार किया गया है। इसके साथ ही मोबाइल कमांड एंड कंट्रोल व्हीकल वैन ग्राउंड पर चल रही पुलिस लाइव ऑपरेशन्स को कोऑर्डिनेट करने और सभी सीसीटीवी फीड को एक जगह प्रोसेस करने का काम करती है।

    ऐसे लोग मौजूद थे, जिनका पुराना आपराधिक रिकॉर्ड
    पुलिस के मुताबिक प्रदर्शन के दौरान 20 से 25 जुलाई के बीच वहां 2,873 ऐसे लोग मौजूद थे, जिनका पुराना आपराधिक रिकॉर्ड है। इनमें 989 ऐसे लोग भी थे जो जघन्य अपराधों में शामिल रहे हैं। पुलिस ने फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) और अन्य तकनीकी माध्यमों के जरिए इन संदिग्धों की पहचान की गई है। अब जांच इस बात की हो रही है कि क्या ये लोग वहां भड़की हिंसा में शामिल थे। इसमें से जघन्य अपराधों में संलिप्त बदमाशों में से 101 हत्या के आरोपी हैं। 62 पर हत्या के प्रयास, 284 पर डकैती/लूटपाट, 61 पर दुष्कर्म, छह पर पॉक्सो एक्ट, 25 पर महिला उत्पीड़न, 229 पर आर्म्स एक्ट और 67 पर ड्रग्स मामलों से जुड़े आरोप हैं।

    इनमें से आदतन अपराधियों की बात की जाए तो हत्या के आरोपियों में से 42 लोग दो या उससे अधिक मामलों में और 12 लोग 10 से अधिक मामलों में शामिल रहे हैं। डकैती के 155 आरोपी ऐसे हैं जो दो या अधिक बार अपराध कर चुके हैं। आशंका है कि फुटेज में कैद ये वो लोग हैं जो प्रदर्शन की आड़ में हिंसा करने की नीयत से वहां मौजूद थे। फुटेज में कैद इन संदिग्धों में से ही कई पर विरोध प्रदर्शन की आड़ में सुरक्षाकर्मियों पर हमला करने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का शक है, जिसकी बारीकी से जांच की जा रही है।

  • वांगचुक, अभिजीत दीपके और कुणाल कामरा पर FIR की मांग! चंडीगढ़ कोर्ट में याचिका, पुलिस को जारी हुआ नोटिस

    वांगचुक, अभिजीत दीपके और कुणाल कामरा पर FIR की मांग! चंडीगढ़ कोर्ट में याचिका, पुलिस को जारी हुआ नोटिस

     चंडीगढ़
     समाजिक कार्यकर्ता एवं शिक्षाविद सोनम वांगचुक, कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक और कॉमेडियन कुणाल कामरा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। इसके लेकर चंडीगढ़ जिला अदालत ने पुलिस ने जवाब मांगा है। 

    एफआईआर की मांग को लेकर एडवोकेट विभु सैनी ने याचिका दायर की है। कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए पुलिस को नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी। 

    याचिका में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन का भी उल्लेख किया गया है, जिसपर याचिकाकर्ता ने कार्रवाई की मांग की है। पुलिस का जवाब और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ही कोर्ट अगला आदेश जारी करेगा। अभी किसी के खिलाफ एफआईआर करने और दोषी मानने का आदेश नहीं दिया गया।

  • 1200KM दौड़ी हाइड्रोजन ट्रेन! 3200 लीटर डीजल की बचत, अब दिल्ली तक दौड़ाने की तैयारी

    1200KM दौड़ी हाइड्रोजन ट्रेन! 3200 लीटर डीजल की बचत, अब दिल्ली तक दौड़ाने की तैयारी

    नई दिल्ली

    देश में हाइड्रोजन ट्रेन की खूब चर्चा हो रही है. 17 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था. तब से ट्रेन लगातार पटरी पर बिना किसी दिक्कत की दौड़ रही है। 

    दरअसल, भारतीय रेलवे ने पर्यावरण को बचाने के लिए एक नई और अनोखी 'हाइड्रोजन ट्रेन' चलाई है. यह ट्रेन धुएं की जगह सिर्फ पानी की भांप छोड़ती है. रेलवे के मुताबिक भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन ने अपनी शुरुआती यात्रा में ही पर्यावरण संरक्षण की एक नई मिसाल पेश की है। 

    17 जुलाई 2026 को दिल्ली के निकट जींद और सोनीपत के बीच शुरू हुई इस ट्रेन ने 25 जुलाई तक 1200 किलोमीटर से अधिक का सफर सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है. इस दौरान ट्रेन ने 3,200 लीटर से अधिक डीजल की खपत को बचाकर रेलवे के ईंधन खर्च और प्रदूषण दोनों में भारी कमी लाई है।

    कैसे काम करती है हाइड्रोजन ट्रेन?
    यह हाइड्रोजन ट्रेन डीजल इंजन या बाहरी बिजली (OHE लाइन) से चलने की बजाय अपने अंदर ही बिजली पैदा करती है. ट्रेन में लगे फ्यूल सेल में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच रासायनिक प्रतिक्रिया होती है, जिससे बिजली बनती है और ट्रेन का इंजन चलता है। 

    इस पूरी प्रक्रिया में कोई धुआं या प्रदूषित गैस नहीं निकलती है. बाय-प्रोडक्ट के रूप में साइलेंसर से सिर्फ जलवाष्प निकलता है, चंद दिनों में ही इस ट्रेन ने केवल 1,200 किलोमीटर का सफर तय करके 3,200 लीटर से ज्यादा डीजल बचा लिया है. अब कल्पना कीजिए कि जब पूरे देश में हाइड्रोजन ट्रेनें चलने लगेंगी तो फिर कितना डीजल बचेगा। 

    दिल्ली से हाइड्रोजन ट्रेन चलाने की तैयारी
    जींद से सोनीपत के बीच चलने वाली इस हाइड्रोजन ट्रेन में 10 डिब्बे हैं. जो कि बेहद हाईटेक हैं. दिखने में बिल्कुल मेट्रो कोच की तरह नजर आती हैं। 

    पॉवर और बैटरी क्षमता 
    इस देश में दो 'हाइड्रोजन ड्राइविंग पॉवर कार' लगाई गई हैं, जो कुल 2,400 किलोवाट की पावर जेनरेट करती हैं. इसे सपोर्ट देने के लिए लिथियम आयरन फास्फेट बैटरी और हाइड्रोजन सिलेंडरों का उपयोग किया गया है। 

    सुरक्षा का पूरा ध्यान
    ट्रेन में आग या गैस लीक का पता लगाने के लिए ऑटोमैटिक सेंसर और सेफ्टी सिस्टम लगे हैं. अगर कोई दिक्कत होती है, तो गैस की सप्लाई अपने आप बंद हो जाती है. जींद-सोनीपत रूट पर मिली सफलता के बाद, अब बहुत जल्द इस हाइड्रोजन ट्रेन का ट्रायल दिल्ली वाले रूट पर शुरू होने जा रहा है। 

     

  • अमृतसर RTO ऑफिस होगा शिफ्ट! जर्जर भवन से मिलेगी राहत, मंजूरी का इंतजार

    अमृतसर RTO ऑफिस होगा शिफ्ट! जर्जर भवन से मिलेगी राहत, मंजूरी का इंतजार

     अमृतसर
     अमृतसर में क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय का पता करीब 16 वर्ष बाद एक बार फिर बदलने जा रहा है। मौजूदा जर्जर भवन से राहत दिलाने के लिए विभाग ने कार्यालय को बस अड्डे के समीप स्थित रेडक्रास भवन परिसर में स्थानांतरित करने का प्रस्ताव मुख्यालय को भेज दिया है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलते ही कार्यालय को नई जगह शिफ्ट कर दिया जाएगा।

    हालांकि इस फैसले से कर्मचारियों और आम लोगों को असुरक्षित भवन से राहत मिलेगी, लेकिन ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक और मोटर वाहन निरीक्षक कार्यालय से दूरी बढ़ने के कारण लोगों की परेशानियां भी बढ़ सकती हैं।

    सूत्रों के अनुसार, स्थानांतरण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और अब केवल मुख्यालय की स्वीकृति का इंतजार है। मंजूरी मिलते ही विभाग बिना देरी किए कार्यालय को नई जगह स्थानांतरित कर देगा। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2010 में क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय को टेलर रोड से ग्वालमंडी स्थानांतरित किया गया था। अब करीब 16 वर्ष बाद इसे फिर से नए पते पर ले जाने की तैयारी चल रही है।

    तीन किलोमीटर की बढ़ेगी अतिरिक्त दूरी
    मौजूदा समय में क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय से स्वचालित ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक और मोटर वाहन निरीक्षक कार्यालय की दूरी करीब एक से डेढ़ किलोमीटर है। किसी भी दस्तावेज की जांच, वाहन पासिंग या अन्य औपचारिकताओं के लिए आवेदक आसानी से कुछ मिनटों में दोनों कार्यालयों के बीच पहुंच जाते हैं।

    नई जगह कार्यालय शिफ्ट होने के बाद यह दूरी बढ़कर करीब तीन किलोमीटर हो जाएगी। इससे ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन पंजीकरण, वाहन पासिंग और अन्य परिवहन संबंधी कार्य करवाने आने वाले लोगों को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी। समय के साथ ईंधन की खपत भी बढ़ेगी। 

    बस अड्डे के आसपास अक्सर यातायात का दबाव बना रहता है। ऐसे में लोगों को दस्तावेजी कार्यों के लिए आने-जाने में अधिक समय लग सकता है। यही परेशानी विभागीय कर्मचारियों के सामने भी आएगी, जिन्हें दिनभर क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय और मोटर वाहन निरीक्षक कार्यालय के बीच कई बार आना-जाना पड़ सकता है।

    दुकानदारों की भी बढ़ी चिंता
    ग्वालमंडी चौक के आसपास वर्षों से ड्राइविंग लाइसेंस, आरसी और अन्य परिवहन संबंधी दस्तावेज तैयार करने का कार्य करने वाले दुकानदारों की चिंता भी बढ़ गई है। उनका मानना है कि कार्यालय स्थानांतरित होने के बाद ग्राहकों की संख्या कम हो सकती है, जिससे उनके कारोबार पर सीधा असर पड़ेगा। 

    कार्यालय को स्थानांतरित करने का सबसे बड़ा कारण वर्तमान भवन की खराब स्थिति है। हाल ही में हुई तेज बारिश के दौरान कार्यालय की फॉल्स सीलिंग का एक हिस्सा गिर गया था, जिससे एक कंप्यूटर क्षतिग्रस्त हो गया। संयोग से उस समय कमरे में कोई कर्मचारी या आवेदक मौजूद नहीं था, जिससे बड़ा हादसा टल गया।

    मंजूरी मिलते ही होगी शिफ्टिंग
    इस घटना के बाद कर्मचारियों में भवन की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई थी। विभाग ने भवन की स्थिति का आकलन करने के बाद मुख्यालय को स्थानांतरण का प्रस्ताव भेज दिया। क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी हितेशवीर गुप्ता ने बताया कि वर्तमान कार्यालय भवन की जर्जर स्थिति को देखते हुए मुख्यालय को स्थानांतरण का प्रस्ताव भेजा गया है।

    जैसे ही मंजूरी मिलेगी, बिना किसी देरी के कार्यालय को नई जगह स्थानांतरित कर दिया जाएगा। विभाग का उद्देश्य कर्मचारियों और आम लोगों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है, हालांकि नई व्यवस्था में लोगों की सुविधा को लेकर भी आगे आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

  • सिर्फ 1-2 किमी जमीन बनी रुकावट! पंजाब में 35 हाईवे प्रोजेक्ट अटके, करोड़ों की सड़क योजनाएं लटकीं

    सिर्फ 1-2 किमी जमीन बनी रुकावट! पंजाब में 35 हाईवे प्रोजेक्ट अटके, करोड़ों की सड़क योजनाएं लटकीं

     चंडीगढ़
     पंजाब में राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेस-वे का नेटवर्क मजबूत करने की केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना छोटे-छोटे अवरोधों में उलझ गई है। कई परियोजनाओं में अधिकांश निर्माण कार्य पूरा होने के बावजूद एक-दो किलोमीटर भूमि अधिग्रहण, किसानों के विरोध, वन मंजूरी और उपयोगिता सेवाओं के स्थानांतरण जैसी बाधाओं के कारण पूरा प्रोजेक्ट लटक गया है।

    यही वजह है कि राज्य में चल रही 35 राष्ट्रीय राजमार्ग एवं एक्सप्रेस-वे परियोजनाएं निर्धारित समयसीमा से पीछे चल रही हैं। यह जानकारी केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में सांसद तरुण चुग के सवाल के लिखित जवाब में दी।

    केंद्रीय मंत्री ने स्वीकार किया कि पंजाब में सड़क परियोजनाओं की धीमी रफ्तार के पीछे सबसे बड़ी वजह भूमि अधिग्रहण से जुड़े विवाद हैं। कई स्थानों पर किसानों के विरोध, मुआवजे को लेकर असहमति, वन विभाग की मंजूरियों में देरी और बिजली, पानी व दूरसंचार जैसी उपयोगिता सेवाओं को दूसरी जगह स्थानांतरित करने का काम समय पर पूरा नहीं हो पाया। इसका सीधा असर परियोजनाओं की समयसीमा पर पड़ा है।

    परियोजनाओं में रुकावट से पहुंचा नुकसान
    सबसे अहम बात यह है कि कई परियोजनाओं में अधिकांश हिस्से का निर्माण पूरा होने के बावजूद छोटे-छोटे हिस्सों में जमीन उपलब्ध नहीं होने से पूरा कॉरिडोर शुरू नहीं किया जा सका। सड़क परियोजनाओं में निर्माण की निरंतरता जरूरी होती है। यदि बीच में एक-दो किलोमीटर का हिस्सा भी अधूरा रह जाए तो पूरी सड़क का संचालन संभव नहीं हो पाता।

    यही कारण है कि सीमित दूरी की बाधा पूरे प्रोजेक्ट को महीनों, बल्कि कई मामलों में वर्षों तक पीछे धकेल देती है। मंत्रालय के अनुसार प्रभावित परियोजनाओं में दिल्ली-कटरा एक्सप्रेस-वे और जामनगर-अमृतसर इकोनॉमिक कॉरिडोर जैसी राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाएं भी शामिल हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने से पंजाब की देश के प्रमुख औद्योगिक और आर्थिक गलियारों से बेहतर कनेक्टिविटी होगी।

    परियोजनाओं के समाधान के प्रयास
    इससे माल ढुलाई की लागत कम होगी और यात्रा का समय भी घटेगा। लेकिन लंबित भूमि अधिग्रहण और स्थानीय स्तर की बाधाओं ने इन परियोजनाओं की रफ्तार पर असर डाला है।

    राज्यसभा में दिए जवाब के अनुसार मंत्रालय परियोजना-वार निगरानी कर रहा है। इसमें भूमि अधिग्रहण की स्थिति, स्थानीय और वन मंजूरियां, उपयोगिता सेवाओं के स्थानांतरण, स्वीकृत लागत, जारी धनराशि, अब तक हुए व्यय और निर्माण की भौतिक प्रगति की नियमित समीक्षा की जा रही है। जिन परियोजनाओं में बाधाएं हैं, वहां संबंधित एजेंसियों और राज्य सरकार के साथ समन्वय बनाकर समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है।

    पंजाब की तरक्की का नया रास्ता खुलेगा
    विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे या राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना में अंतिम कुछ किलोमीटर का काम अटकने से पूरे प्रोजेक्ट की उपयोगिता प्रभावित हो जाती है। इससे निर्माण लागत बढ़ती है, ठेकेदारों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ता है और लोगों को परियोजना का लाभ मिलने में भी देरी होती है।

    अब निगाह इस बात पर है कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर भूमि अधिग्रहण, स्थानीय विवाद और अन्य प्रशासनिक अड़चनों को कितनी तेजी से दूर कर पाते हैं। क्योंकि इन 35 परियोजनाओं के पूरा होने पर पंजाब की सड़क संपर्क व्यवस्था में बड़ा बदलाव आने के साथ उद्योग, व्यापार और निवेश को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।