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  • झारखंड में मतदाता सूची पुनरीक्षण पूरा, पांच अगस्त को ड्राफ्ट सूची होगी जारी

    झारखंड में मतदाता सूची पुनरीक्षण पूरा, पांच अगस्त को ड्राफ्ट सूची होगी जारी

    रांची
      राज्य में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत गणना चरण बुधवार को संपन्न हो गया। अंतिम दिन शत-प्रतिशत मतदाताओं के गणना पपत्र डिजिटाइज्ड कर दिए गए। इनमें 2,20,94,859 ऐसे मतदाता हैं, जिन्होंने गणना प्रपत्र भरकर तथा हस्ताक्षर कर बीएलओ को सौंपे हैं।

    इन सभी के नाम पांच अगस्त को प्रकाशित होने वाली प्रारुप मतदाता सूची में होंगे। वहीं, एएसडीडी सूची में 43,68,377 मतदाता सम्मिलित है, जिनके नाम प्रारुप मतदाता सूची में नहीं होंगे। हालांकि इन्हें दावा आपत्ति चरण के दौरान अपना पक्ष रखने का अवसर प्राप्त होगा। पांच अगस्त से चार सितंबर तक ये दावा-आपत्ति कर सकेंगे।

    राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रवि कुमार ने कहा कि झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम के पहले चरण गणना चरण के अंतिम दिन वर्तमान मतदाता सूची के सभी पात्र मतदाताओं, मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बीएलए, बीएलओ, सभी जिलों के जिला निर्वाचन पदाधिकारी, सभी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के ईआरओ/एईआरओ, उप निर्वाचन पदाधिकारी, वालेंटियर्स एवं निर्वाचन कार्य से जुड़े सभी स्टेकहोल्डर के सहभागिता से शत-प्रतिशत कार्य समय पर पूरा हो गया है।

    पांच अगस्त को मतदाता सूची के ड्राफ्ट पब्लिकेशन किया जाना है। इसी दिन एएसडीडी सूची भी प्रकाशित की जाएगी। उक्त दोनों सूचियों को सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को सॉफ्ट कॉपी एवं सभी मतदान केंद्र के मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बीएलए 2 को हार्ड कॉपी (प्रिंट फार्म में) उपलब्ध कराई जाएगी।

    उन्होंने कहा कि पांच अगस्त से दावा आपत्ति की अवधि आरंभ हो रही है। इस अवधि में भी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से संबंधित सभी स्टेकहोल्डर की सहभागिता अपेक्षित है।

    7,63,930 मतदाता मृत, 14,55,733 मतदाता नहीं मिले
    गणना चरण के दौरान 7,63,930 ऐसे मतदाताओं की पहचान की गई जो मृत हो चुके हैं। वहीं, 14,55,733 मतदाता ऐसे हैं जिनका पता नहीं लगाया जा सका। ये लगातार अनुपस्थित रहे तथा इन्होंने बीएलओ से भी कोई संपर्क नहीं किया। यह संख्या कुल मतदाताओं का 5.5 प्रतिशत है।

    फैक्ट फाइल
    – वर्ष 2026 की मतदाता सूची में मतदाताओं की कुल संख्या : 2,64,63,236
    – जिन्हें गणना प्रपत्र उपलब्ध कराए गए : 2,64,62,345
    – भरे हुए एवं हस्ताक्षर किए हुए जमा गणना प्रपत्र : 2,20,94,859
    – एएसडीडी सूची में सम्मिलित मतदाता, जिनके नाम कटे : 43,68,377
    – स्थायी रूप से स्थानांतरित मतदाताओं की कुल संख्या : 15,92,960
    – अन्य स्थानों पर पहले से ही नामांकित मतदाताओं की कुल संख्या : 4,38,584
    – गणना प्रपत्र पर हस्ताक्षर करने से इन्कार करनेवाले मतदाता : 1,18,030
    – गणना प्रपत्र डिजिटाइजेशन की कुल संख्या : 2,64,63,236

     

  • 4.62 करोड़ की परियोजना से गुरुग्राम में सड़क और ड्रेनेज व्यवस्था होगी मजबूत

    4.62 करोड़ की परियोजना से गुरुग्राम में सड़क और ड्रेनेज व्यवस्था होगी मजबूत

    गुरुग्राम
     नए गुरुग्राम के सेक्टर-78 और 79 में सड़क संपर्क और यातायात व्यवस्था को मजबूत करने के लिए गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) ने नई परियोजना शुरू करने का निर्णय लिया है। 4.62 करोड़ रुपये की लागत से 2.4 किलोमीटर लंबी सर्विस रोड का निर्माण किया जाएगा।

    दोनों ओर 1.2-1.2 किलोमीटर लंबे सर्विस रोड विकसित किए जाएंगे। परियोजना के तहत बनने वाले सर्विस रोड सेक्टरों की आंतरिक सड़कों को सीधे मुख्य कैरिज वे से जोड़ेंगे। इससे स्थानीय निवासियों और दैनिक आवागमन करने वाले लोगों को बेहतर संपर्क सुविधा मिलेगी। साथ ही मुख्य सड़क पर अनावश्यक वाहनों का दबाव कम होगा और यातायात अधिक व्यवस्थित रहेगा।

    जलभराव रोकने के लिए बनेगी नई ड्रेन
    सर्विस रोड के साथ नया स्टार्म वाटर ड्रेन भी बनाई जाएगी। इस ड्रेन को मास्टर ड्रेनेज नेटवर्क से जोड़ा जाएगा ताकि वर्षा का पानी तेजी से निकाला जा सके। इससे मानसून के दौरान सर्विस रोड पर जलभराव नहीं होगा और भारी वर्षा के समय भी यातायात प्रभावित होने की संभावना कम रहेगी।

    12 माह में पूरा होगा काम
    जीएमडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पीसी मीणा ने बताया कि 4.62 करोड़ रुपये की इस परियोजना को 12 माह में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके पूरा होने से सेक्टर-78 और 79 के नियोजित विकास को गति मिलेगी तथा नए गुरुग्राम की सड़क और ड्रेनेज अवसंरचना पहले से अधिक मजबूत होगी।

    पीसी मीणा ने कहा कि जीएमडीए आधुनिक, सुरक्षित और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप शहरी आधारभूत ढांचे के विकास पर लगातार कार्य कर रहा है। इस तरह की परियोजनाओं से नागरिकों को बेहतर आवागमन सुविधा मिलेगी और शहर के दीर्घकालिक विकास को भी मजबूती मिलेगी।

  • लालसोट से दूदू हाईवे के लिए 601 करोड़ मंजूर, सफर होगा तेज और सुरक्षित

    लालसोट से दूदू हाईवे के लिए 601 करोड़ मंजूर, सफर होगा तेज और सुरक्षित

     दौसा
     लालसोट क्षेत्र के लोगों, व्यापारियों और रोजाना सफर करने वाले वाहन चालकों के लिए राहत भरी खबर है। सार्वजनिक निर्माण विभाग ने विश्व बैंक सहायता प्राप्त राजस्थान हाईवे मॉडर्नाइजेशन प्रोजेक्ट के तहत लालसोट-तूंगा-चाकसू-फागी से दूदू तक विस्तारित स्टेट हाईवे-02 के विकास, चौड़ीकरण, सुदृढ़ीकरण एवं दीर्घकालिक रखरखाव के लिए 601.40 करोड़ रुपए की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति जारी कर दी है। स्वीकृति के साथ ही भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।

    परियोजना के तहत 565.73 करोड़ रुपए सड़क निर्माण एवं रखरखाव तथा 35.67 करोड़ रुपए भूमि अवाप्ति और मुआवजा वितरण पर खर्च किए जाएंगे। निर्माण कार्य हाइब्रिड एन्युटी मोड पर होगा, जिससे गुणवत्ता और समयबद्ध निर्माण सुनिश्चित किया जाएगा। यह परियोजना राज्य सरकार की बजट घोषणा तथा विश्व बैंक पोषित पांच प्रमुख सड़क परियोजनाओं में शामिल है।

    नई सड़क बनने से लालसोट से दूदू तक यात्रा अधिक सुरक्षित, तेज और सुगम होगी। साथ ही जयपुर शहर के भारी ट्रैफिक से बचते हुए अजमेर-जयपुर-दिल्ली नेशनल हाईवे (एनएच-48) तक सीधी और बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे पश्चिमी राजस्थान और गुजरात की ओर आवागमन भी आसान होगा।

    आर्थिक विकास को मिलेगी गति
    विधायक रामबिलास मीना ने बताया कि इस परियोजना से क्षेत्र के आर्थिक विकास को गति मिलेगी। किसानों और व्यापारियों को कृषि उपज एवं स्थानीय उत्पाद प्रमुख मंडियों और औद्योगिक क्षेत्रों तक कम समय और कम लागत में पहुंचाने में सुविधा होगी। सड़क के चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण से दुर्घटनाओं में कमी आने के साथ यात्रा समय, ईंधन और वाहन रखरखाव की लागत में भी बचत होगी।

    भूमि अधिग्रहण की शुरुआती कार्रवाई भी शुरू
    राजस्थान राज्य सडक़ विकास एवं निर्माण निगम लिमिटेड के सहायक अभियंता ईश्वर चौधरी ने बताया कि यह मार्ग टू-लेन विथ पेव शोल्डर (मुख्य सडक़ की दोनों लेन के बगल में बनी पर पटरी) के रूप में तैयार किया जाएगा। परियोजना को लेकर वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृतियां जारी की जा चुकी हैं। भूमि अधिग्रहण की शुरुआती कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।

  • चंडीगढ़ में बंदी सिंहों और अमृतपाल की रिहाई को लेकर प्रदर्शन हिंसक, 15 पुलिसकर्मी घायल; वाटर कैनन चालक का हाथ टूटा

    चंडीगढ़ में बंदी सिंहों और अमृतपाल की रिहाई को लेकर प्रदर्शन हिंसक, 15 पुलिसकर्मी घायल; वाटर कैनन चालक का हाथ टूटा

     चंडीगढ़
    ‘वारिस पंजाब दे’ संगठन के प्रमुख अमृतपाल सिंह तथा देश की विभिन्न जेलों में बंद बंदी सिंहों की रिहाई की मांग को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान से मिलने निकले प्रदर्शनकारियों का प्रदर्शन

    उग्र हो गया। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान हुई झड़पों में 15 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए, जबकि सुरक्षा व्यवस्था में तैनात एक वाटर कैनन चालक के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई, जिससे उसका हाथ टूट गया।

    पुलिस के मुताबिक, सेक्टर-45/46 चौक पर तैनात वाटर कैनन को प्रदर्शनकारियों ने घेर लिया। इस दौरान चालक के साथ मारपीट की गई और उसे गंभीर चोटें आईं। घायल चालक का इलाज करवाया गया।

    एसएसपी कंवरदीप कौर ने बताया कि शहर में लागू भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस ) की धारा 163 के आदेशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। देर रात बीएनएसएस की धारा 173(1) के तहत संज्ञेय अपराधों के आधार पर मामला दर्ज किया गया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने अधिकतम संयम बरता ताकि किसी प्रकार की जनहानि न हो।

    एसएसपी के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान 15 से अधिक पुलिसकर्मियों को चोटें आईं, जिनका मेडिकल परीक्षण कराया गया है। पुलिस का यह भी दावा है कि कुछ प्रदर्शनकारी हथियार लेकर पहुंचे थे, जिसकी जांच की जा रही है।

    घटना के बाद चंडीगढ़ पुलिस ने कुछ संदिग्ध प्रदर्शनकारियों की तस्वीरें जारी की हैं। पुलिस का कहना है कि इन व्यक्तियों की पहचान कर उनकी तलाश की जा रही है। सीसीटीवी फुटेज, वीडियो रिकॉर्डिंग और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपितों की पहचान की जा रही है। पुलिस ने आम लोगों से भी अपील की है कि यदि जारी तस्वीरों में दिख रहे व्यक्तियों के बारे में कोई जानकारी हो तो तत्काल पुलिस को सूचित करें।

     

  • Punjab Bandh का बड़ा असर: फिरोजपुर में बाजार-स्कूल बंद, लुधियाना समेत 7 जिलों में ठप रहा कारोबार

    Punjab Bandh का बड़ा असर: फिरोजपुर में बाजार-स्कूल बंद, लुधियाना समेत 7 जिलों में ठप रहा कारोबार

    फिरोजपुर / लुधियाना/ बरनाला

    बरनाला में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे सफाई कर्मचारियों पर पुलिस लाठीचार्ज के विरोध में वाल्मीकि समाज की ओर से गुरुवार (30 जुलाई) को फिर से पंजाब बंद का आह्वान किया। समाज ने बाजार, स्कूल, कॉलेज, मॉल और अन्य संस्थानों को बंद रखने की अपील की।

    इसी बंद के दौरान अमृतसर में भंडारी पुल पर तैनात एंटी राइट पुलिस (ARP) के जवान रणबीर सिंह की मौत हो गई। वह इमरजेंसी कॉल पर घर जा रहे थे। इसी दौरान भंडारी पुल पर लगाई रस्सी में उनका गला फंस गया और वह स्कूटी से गिर गए। रस्सी से गला घुटने से उनकी मौत हो गई।भंडारी पुल को प्रदर्शनकारियों ने जाम कर दिया गया है। यहां से लोगों को नहीं निकलने दिया जा रहा। वाल्मीकि समाज के लोग रॉड, डंडे लेकर खड़े हैं जो लोगों को आवाजाही करने से रोक रहे हैं।

    पठानकोट में सफाईकर्मियों ने निगम दफ्तर पर ताला लगाकर प्रदर्शन शुरू कर दिया है। यहां रैली निकालकर दुकानों को जबरन बंद करवाने की चेतावनी दी गई है।वहीं, जालंधर में बंद का असर नहीं है, लेकिन सफाईकर्मी निगम परिसर में धरना लगाकर प्रदर्शन कर रहे हैं। बंद का असर सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक रहेगा। इसके बाद स्थिति सामान्य होगी। लुधियाना, बठिंडा, होशियारपुर, फाजिल्का, कपूरथला, अमृतसर, पटियाला, पठानकोट और गुरदासपुर की विभिन्न संस्थाओं ने बंद को समर्थन दिया है।

    यूनियन नेताओं का दावा है कि कार्रवाई में कई सफाई कर्मचारी घायल हुए और उनके सिर फोड़ दिए गए। प्रदर्शनकारियों ने महिला सफाई कर्मचारियों के साथ भी दुर्व्यवहार का आरोप लगाया। प्रदर्शनकारियों ने बरनाला के DSP के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

    बाजार और स्कूल रहे पूरी तरह बंद 

     सफाई कर्मचारियों की मांगों के समर्थन में गुरुवार को दिए गए पंजाब बंद का फिरोजपुर में व्यापक असर देखने को मिला। शहर के मुख्य बाजारों सहित अधिकांश व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे।

    निजी स्कूलों और कई निजी कार्यालयों में भी कामकाज प्रभावित रहा, जबकि सरकारी स्कूल सामान्य रूप से खुले रहे। बंद के कारण सड़कों पर आम दिनों की अपेक्षा यातायात भी कम दिखाई दिया।

    शहर के मुख्य बाजार, सदर बाजार, रेलवे रोड सहित विभिन्न व्यापारिक क्षेत्रों में सुबह से ही दुकानों के शटर बंद रहे। बंद पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा और कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।

    रावण सी. अंबेडकर मिशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष दीप दशानन ने कहा कि बरनाला में पंजाब पुलिस अधिकारियों द्वारा सफाई कर्मचारियों के साथ की गई मारपीट की वह कड़ी निंदा करते हैं।

    उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारी पिछले करीब 20 दिनों से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दे रही। उन्होंने सरकार से कच्चे सफाई कर्मचारियों को नियमित करने और उनकी लंबित मांगों का शीघ्र समाधान करने की मांग की।

    उधर, डीएसपी सुखविंदर सिंह ने बताया कि बंद के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए शहर के सभी प्रमुख चौक-चौराहों पर पुलिस बल तैनात किया गया और लगातार गश्त की गई।

    उन्होंने कहा कि व्यापारियों ने स्वेच्छा से अपनी दुकानें बंद रखीं। पुलिस पूरी तरह सतर्क है और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक सभी प्रबंध किए गए हैं। फिलहाल जिले में स्थिति पूरी तरह शांतिपूर्ण बनी हुई है।

     

  • छात्रों पर हिंसा विवाद के बीच CRPF चीफ का बड़ा बयान, बोले- ‘मैं जिम्मेदारी लूंगा, डरने की जरूरत नहीं’

    छात्रों पर हिंसा विवाद के बीच CRPF चीफ का बड़ा बयान, बोले- ‘मैं जिम्मेदारी लूंगा, डरने की जरूरत नहीं’

    नई दिल्ली

    दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक को लेकर हुए छात्र आंदोलन के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा कथित तौर पर बर्बरता के आरोपों के बीच CRPF चीफ ने बड़ा दिया है। एक कार्यक्रम में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के महानिदेशक ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने अपने जवानों और अधिकारियों का मनोबल बढ़ाते नजर आए। उन्होंने कार्यक्रम में जवानों को संबोधित करते हुए साफ कहा है कि ड्यूटी के दौरान जवानों द्वारा लिए गए हर फैसले की जिम्मेदारी वे खुद लेंगे।

    सोमवार को सीआरपीएफ के इन्वेस्टीचर समारोह को संबोधित करते हुए DG ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने जवानों से कहा, "सीआरपीएफ के महानिदेशक के रूप में आप सभी को भरोसा दिलाना चाहता हूं कि चाहे आप ऑपरेशनल बटालियन हों या कानून-व्यवस्था यूनिट हो, आप सभी, राष्ट्र हित में, जनहित में और बल हित में जो भी निर्णय लेते हैं, उन सभी एक्शन का दायित्व मेरा है।” CRPF चीफ ने आगे कहा, “निर्भय होकर अपना काम करते रहें। जहां भी जवाबदेही तय करने की जरूरत होगी, मैं महानिदेशक के तौर उसकी जिम्मेदारी लूंगा।”

    इससे पहले इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक CRPF मुख्यालय ने अपनी सभी फील्ड टुकड़ियों को यह संदेश जारी कर हालिया तैनातियों के दौरान जवानों के 'धैर्य और सहनशीलता' की तारीफ भी की है। हालांकि, केंद्रीय बल ने यह भी साफ कर दिया कि जानबूझकर की गई लापरवाही या कानून का उल्लंघन करने पर नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जाएगी।

    RAF की कार्रवाई पर सवाल
    गौरतलब कि सीआरपीएफ की रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) इस समय जांच के दायरे में है। 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी के संसद मार्च के दौरान जंतर-मंतर और दिल्ली के अन्य इलाकों में भीड़ को संभालने के RAF के तरीके पर सवाल उठ रहे हैं। RAF, सीआरपीएफ की एक विशेष यूनिट है। इस यूनिट को 1992 में दंगे और सार्वजनिक अशांति जैसी स्थितियों से निपटने के लिए बनाया गया था।

    जंतर-मंतर पर क्या हुआ था?
    20 जुलाई को CJP की अपील पर आयोजित संसद मार्च के दौरान हजारों प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर और आसपास की जगहों पर इकट्ठा हो गए। भीड़ संसद भवन के पास तक पहुंच गई थी। ऐसे में पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए बल का प्रयोग किया। इस दौरान लाठीचार्ज के अलावा टीयर गैस के गोले भी दागे गए। इससे जुड़े कई विडियोज सोशल मीडिया पर वायरल हो गए, जहां पुलिस द्वारा छात्रों पर इस तरह की कार्रवाई की निंदा की जा रही है। कई छात्रों ने पैलेट गन के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया है।

    इस बीच जांच में कई खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, रैपिड एक्शन फोर्स ने डीसीपी के निर्देशों पर कार्रवाई करते हुए दो राउंड प्लास्टिक पैलेट चलाए थे। हालांकि दिल्ली पुलिस ने शुरूआत में प्रदर्शनकारियों पर पैलेट चलाने के आरोपों का खंडन किया था। सुरक्षा बलों पर लग रहे आरोपों के बाद CRPF ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

  • बस-मेट्रो में सफर के साथ डेबिट कार्ड का भी काम करेगा Pink Saheli Smart Card, महिलाओं को मिलेगी डबल सुविधा

    बस-मेट्रो में सफर के साथ डेबिट कार्ड का भी काम करेगा Pink Saheli Smart Card, महिलाओं को मिलेगी डबल सुविधा

    नई दिल्ली

     दिल्ली की डीटीसी बसों में फ्री सफर के साथ-साथ पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड डेबिट कार्ड की तरह भी इस्तेमाल हो सकेगा। पिंक कार्ड धारक महिलाएं इससे मॉल और दुकानों से भी खरीदारी कर सकेंगी। इसके लिए डीटीसी की ओर से अधिकृत किए गए बैंक की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा।

    डीटीसी की ओर से फिलहाल दो तरह के नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड (एनसीएमसी) जारी किए जा रहे हैं। इसमें एक कार्ड जीरो केवाईसी के जरिये बनाया जा रहा है। इसमें महज आधार कार्ड के जरिए महिलाओं को पिंक कार्ड जारी किए जा रहे हैं। इसके लिए आधार कार्ड से लिंक मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी के जरिए यह कार्ड जारी किया जा रहा है। दूसरा कार्ड फुल केवाईसी के बाद जारी किया जा रहा है। इसमें बैंक की ओर से लंबी आवेदन प्रक्रिया को पूरा करना पड़ता है और यह कार्ड डेबिट कार्ड की तरह घर के पते पर डाक के जरिये भेजा जाता है।

    ऐसे बनेगा कार्ड
    डीटीसी के अधिकारी के मुताबिक, डेबिट कार्ड की तरह इस्तेमाल होने वाला पिंक स्मार्ट कार्ड बनवाने के लिए अधिकृत बैंक के ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन करना होगा। इसके साथ दिल्ली के पते वाला आधार कार्ड, पासपोर्ट साइज के फोटो समेत अपनी व्यक्तिगत डिटेल देनी होगी। जरूरत हुई तो बैंक की ओर से पैन कार्ड मांगा जा सकता है। इसके बाद बैंक द्वारा वीडियो केवाईसी की प्रक्रिया पूरी होगी। वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद कार्ड बनाकर आवेदक के पते पर भेज दिया जाएगा।

    ऐसे इस्तेमाल कर सकेंगे
    फुल केवाईसी पिंक स्मार्ट कार्ड से सभी बसों में निशुल्क टिकट मिलेगा। अगर मेट्रो, नमो भारत ट्रेनों में इस कार्ड से सफर करना है या शॉपिंग करनी है तो इसे रिचार्ज कराना होगा।
    नारंगी कार्ड के लिए इंतजार करना होगा

    डीटीसी ने यात्रियों के लिए तीन रंग के कार्ड निर्धारित किए हैं। महिलाओं के लिए गुलाबी, सामान्य यात्रियों के लिए नीला और वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांग व अन्य छूट प्राप्त यात्रियों के लिए नारंगी रंग का कार्ड जारी किया जाएगा। विभाग का कहना है कि नारंगी कार्ड जारी करना अभी शुरू नहीं किया गया है।

    01 अगस्त से पिंक सहेली कार्ड दिखाना होगा अनिवार्य
    गौरतलब है कि दिल्ली में 01 अगस्त से मुफ्त बस यात्रा की सुविधा का लाभ लेने के लिए महिलाओं को पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड दिखाना अनिवार्य होगा। दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) ने अपनी बसों में एक विशेष अभियान भी शुरू किया है। इसके तहत महिला यात्रियों को जल्द से जल्द यह स्मार्ट कार्ड बनवाने की सलाह दी जा रही है।

    डीटीसी की ओर से जारी एक आदेश में कहा गया है कि 01 अगस्त से केवल उन्हीं महिला यात्रियों को पिंक टिकट जारी किया जाएगा, जिनके पास वैध पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड होगा। बस में चढ़ते समय उन्हें इस कार्ड को टैप करना होगा। ऐसी महिला यात्री योजना की शर्तों के अनुसार मुफ्त बस यात्रा का लाभ लेती रहेंगी।

  • Punjab Weather: 126 साल में सबसे सूखा मानसून! 38% कम बारिश से धान की फसल पर गहराया संकट

    Punjab Weather: 126 साल में सबसे सूखा मानसून! 38% कम बारिश से धान की फसल पर गहराया संकट

    चंडीगढ़ 
     पंजाब में इस बार कमजोर मानसून ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। प्रदेश में खरीफ सीजन के तहत धान की रोपाई लगभग पूरी हो चुकी है और अब फसल को सबसे अधिक पानी की जरूरत है।

    ऐसे समय में सामान्य से 38 फीसदी कम बारिश होने से धान समेत अन्य खरीफ फसलों की पैदावार प्रभावित होने की आशंका गहरा गई है। यदि आने वाले दिनों में पर्याप्त वर्षा नहीं हुई तो इसका सीधा असर किसानों की आय और राज्य के धान उत्पादन पर पड़ सकता है।

    स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की रिपोर्ट के अनुसार जून से 17 जुलाई तक पंजाब में सामान्य से 38 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। देश में बिहार के बाद पंजाब सबसे अधिक वर्षा कमी वाला राज्य है। इसके बाद तेलंगाना में 34 फीसदी, केरल में 33 फीसदी और गुजरात में 31 फीसदी कम बारिश हुई है। कृषि प्रधान राज्य होने के कारण पंजाब में मानसून की कमी को गंभीर चुनौती माना जा रहा है।

    रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2026 का जून-जुलाई का दौर पिछले 126 वर्षों में पांचवां सबसे सूखा रहा है। पूरे देश में भी इस अवधि के दौरान सामान्य से 24 फीसदी कम बारिश हुई है। इससे पहले वर्ष 2002 में 32.6 फीसदी कम वर्षा दर्ज की गई थी। वर्ष 1972, 1987 और 1918 भी देश के बड़े सूखे वाले वर्षों में शामिल रहे हैं।

    कम बारिश का असर केवल मौजूदा खरीफ सीजन तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि आने वाली रबी फसलों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भू-जल स्तर और मिट्टी की नमी लगातार घटती रही तो किसानों की सिंचाई लागत बढ़ेगी और उत्पादन घटेगा।

    खरीफ की फसलों पर पड़ेगा असर, रोग बढ़ने की भी आशंका
    कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि सबसे बड़ा असर धान की पैदावार पर पड़ेगा क्योंकि यह फसल सबसे अधिक पानी मांगती है। इसके अलावा कपास, मक्का और मूंग की खेती भी प्रभावित होने की आशंका है। कम बारिश के कारण फसलों में विभिन्न प्रकार के रोग और कीटों का खतरा भी बढ़ सकता है।

    पिछले वर्ष प्रदेश में बाढ़ से करीब पांच लाख एकड़ क्षेत्र की फसल खराब हो गई थी जबकि इस बार सूखे ने नई चुनौती खड़ी कर दी है। पहले से ही इन फसलों की पैदावार में गिरावट देखी जा रही है। ऐसे में कमजोर मानसून किसानों की मुश्किलें और बढ़ा सकता है।

    180 लाख मीट्रिक टन धान खरीद के लक्ष्य पर खतरा
    कम बारिश का असर राज्य सरकार के इस वर्ष तय किए गए 180 लाख मीट्रिक टन धान खरीद लक्ष्य पर भी पड़ सकता है। पिछले वर्ष भी सरकार ने 180 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य रखा था जबकि मंडियों में 190 लाख मीट्रिक टन तक की तैयारी की गई थी। इसके बावजूद केवल 156 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद हो सकी।

    वर्ष 2016 के बाद यह सबसे कम खरीद रही थी। वर्ष 2016 में 140 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया था। हालांकि वर्ष 2025 को छोड़कर पिछले वर्षों में खरीद बेहतर रही है। वर्ष 2020 में 162 लाख मीट्रिक टन, वर्ष 2021 में 187 लाख मीट्रिक टन, वर्ष 2022 में 183 लाख मीट्रिक टन, वर्ष 2023 में 188 लाख मीट्रिक टन और वर्ष 2024 में 175 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद हुई थी।

    बिजली संकट ने बढ़ाई किसानों की मुश्किल
    इस बार किसानों को सूखे के साथ बिजली संकट का भी सामना करना पड़ रहा है। धान की रोपाई के दौरान सरकार की ओर से आठ घंटे बिजली आपूर्ति का प्रावधान है ताकि किसान ट्यूबवेलों से सिंचाई कर सकें। लेकिन कई जिलों से केवल चार घंटे बिजली मिलने की शिकायतें सामने आई हैं।

    प्रदेश में इस बार बिजली की मांग रिकॉर्ड 16,844 मेगावाट तक पहुंच गई। अधिक मांग और बढ़ते लोड के कारण कई स्थानों पर बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई जिससे किसानों को समय पर सिंचाई करने में दिक्कत आई।

    15 से 20 फीसदी तक घट सकती है धान की पैदावार 
    पंजाब विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक प्रोफेसर हर्ष नैयर का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो धान की पैदावार में 15 से 20 फीसदी तक गिरावट आ सकती है। उन्होंने बताया कि बारिश नहीं होने से किसान पूरी तरह ट्यूबवेल आधारित सिंचाई पर निर्भर हो गए हैं जिससे पंपिंग का खर्च 20 से 30 फीसदी तक बढ़ गया है। इसका सीधा असर किसानों की आय पर पड़ेगा।

    उन्होंने कहा कि ऊपरी मिट्टी में नमी कम होने से मक्का और चरी की फसल भी प्रभावित होगी। इससे पशुओं के लिए उपलब्ध हरे चारे की मात्रा और उसकी पोषण गुणवत्ता घटेगी। इन फसलों की पैदावार में 12 से 18 फीसदी तक कमी आ सकती है।

    प्रोफेसर नैयर के अनुसार लंबे समय तक सूखा और अधिक तापमान रहने पर कपास की फसल पर सफेद मक्खी और गुलाबी सुंडी का हमला बढ़ सकता है जिससे उत्पादन में 12 से 20 फीसदी तक गिरावट आ सकती है। पिछले कुछ वर्षों से कपास की पैदावार पहले ही लगातार प्रभावित हो रही है।

    उन्होंने बताया कि मिर्च और टमाटर जैसी कम गहराई वाली जड़ों वाली फसलों में भी नमी की भारी कमी होगी जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ेगा। अधिक गर्म मिट्टी के कारण पतझड़ की शुरुआत में लगाई जाने वाली फूलगोभी और टमाटर की पौध भी बड़ी संख्या में खराब हो सकती है। इससे इन फसलों की पैदावार 15 से 30 फीसदी तक घटने की आशंका है।

    रबी की फसलों पर भी दिखेगा असर
    प्रोफेसर नैयर का कहना है कि इसका असर केवल खरीफ तक सीमित नहीं रहेगा। गेहूं जैसी रबी फसलों के लिए भी जमीन में नमी कम रहेगी। ऐसे में किसानों को बुआई से पहले अतिरिक्त सिंचाई करनी पड़ेगी जिससे शुरुआती लागत बढ़ेगी। समय पर बुआई प्रभावित होने से गेहूं की पैदावार में भी चार से आठ फीसदी तक कमी आ सकती है।

    सरकार किसानों की मदद करे : राजेवाल
    भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल) के प्रधान बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि केंद्र सरकार की रिपोर्ट भी यह स्वीकार कर रही है कि इस बार सामान्य से काफी कम बारिश हुई है और इसका असर फसलों पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि पहले ही डीजल की कीमत बढ़ने से खेती की लागत में इजाफा हुआ है जबकि न्यूनतम समर्थन मूल्य में की गई बढ़ोतरी पर्याप्त नहीं है।

    राजेवाल ने मांग की कि केंद्र और राज्य सरकार दोनों किसानों की अतिरिक्त लागत और संभावित नुकसान को देखते हुए राहत पैकेज और आर्थिक सहायता की घोषणा करें।

    रिकॉर्ड नहरी पानी उपलब्ध कराया
    जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने कहा कि राज्य सरकार हर खेत तक नहरी पानी पहुंचाने के अभियान पर लगातार काम कर रही है ताकि भू-जल का दोहन कम हो सके। उनके अनुसार पहले केवल 17 से 18 फीसदी क्षेत्र में नहरी पानी का उपयोग होता था जो अब बढ़कर 86 फीसदी तक पहुंच गया है।

    उन्होंने कहा कि इस बार धान सीजन में पहली बार रिकॉर्ड मात्रा में नहरी पानी उपलब्ध कराया गया है। सरकार का दावा है कि किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त नहरी पानी दिया गया और इस संबंध में किसी प्रकार की परेशानी नहीं आने दी गई। 

     

  • हरियाणा सरकार की नई पहल: ट्यूबवेल के पानी की जांच से बढ़ेगी किसानों की पैदावार

    हरियाणा सरकार की नई पहल: ट्यूबवेल के पानी की जांच से बढ़ेगी किसानों की पैदावार

    चंडीगढ़.

    किसान अक्सर मिट्टी की जांच तो कराते हैं, लेकिन सिंचाई के लिए इस्तेमाल होने वाले ट्यूबवेल के पानी की जांच को नजरअंदाज कर देते हैं। कई बार अच्छी जमीन और बेहतर बीज होने के बावजूद फसल की पैदावार कम होने का कारण पानी की खराब गुणवत्ता होती है। इसी को देखते हुए हरियाणा सरकार ने किसानों को ट्यूबवेल के पानी की नियमित जांच कराने के लिए प्रेरित किया है, ताकि पानी की गुणवत्ता के हिसाब से फसलों का चयन किया जा सके।

    कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने 'करवाओगे पानी की जांच, नहीं आएगी फसल उत्पादन पर आंच' नाम से एक नारा दिया है। उनका कहना है कि सिंचाई के पानी में यदि लवणता (नमक की मात्रा) या क्षारीयता अधिक हो तो इसका सीधा असर मिट्टी की उर्वरता और फसल उत्पादन पर पड़ता है। समय पर जांच रिपोर्ट मिलने से किसान यह तय कर सकते हैं कि उनके खेत के लिए कौन-सी फसल अधिक उपयुक्त रहेगी और खाद एवं उर्वरकों का कितना और किस प्रकार उपयोग करना चाहिए। इससे उत्पादन लागत घटाने और बेहतर पैदावार हासिल होने में मदद मिल सकती है।

    पानी की जांच कराना भी बेहद आसान है। इसके लिए किसान सबसे पहले अपने ट्यूबवेल को कम से कम 30 मिनट तक लगातार चलाएं। इसके बाद लगभग 500 मिलीलीटर या एक लीटर पानी एक साफ प्लास्टिक की बोतल में भरें। बोतल पर अपना नाम, मेरी फसल-मेरा ब्योरा (एमएफएमबी) आइडी, गांव का नाम, किल्ला/खसरा नंबर, मोबाइल नंबर तथा बोरवेल की गहराई (फीट में) स्पष्ट रूप से लिखें।
    इसके बाद इस नमूने को नजदीकी मृदा स्वास्थ्य जांच प्रयोगशाला (साइल टेस्टिंग लैब) में जमा कराया जा सकता है। प्रयोगशाला की रिपोर्ट के आधार पर किसानों को सिंचाई जल की गुणवत्ता, उपयुक्त फसल चयन और खाद प्रबंधन के संबंध में वैज्ञानिक सलाह मिलेगी, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता लंबे समय तक सुरक्षित रखने में भी मदद मिलेगी।

    कृषि मंत्री ने किसानों से कहा है कि वे बिना जांच के अनुमान के आधार पर खेती करने की बजाय वैज्ञानिक सलाह को अपनाएं। पानी की जांच और संबंधित योजनाओं की अधिक जानकारी के लिए किसान टोल-फ्री नंबर 1800-180-2117 पर संपर्क कर सकते हैं या अपने जिले के कृषि उप-निदेशक कार्यालय से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इससे न केवल फसल उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी, बल्कि मिट्टी और पानी दोनों का बेहतर एवं टिकाऊ प्रबंधन भी संभव हो सकेगा।

  • पंजाब सरकार का बड़ा कदम, ‘बेअदबी कानून संशोधन’ का मसौदा श्री अकाल तख्त साहिब को सौंपा

    पंजाब सरकार का बड़ा कदम, ‘बेअदबी कानून संशोधन’ का मसौदा श्री अकाल तख्त साहिब को सौंपा

    अमृतसर.

    बेअदबी कानून में संशोधन को लेकर चल रहे विवाद के बीच पंजाब सरकार ने बुधवार को श्री अकाल तख्त साहिब सचिवालय में संशोधित कानून का 25 पन्नों का मसौदा और उठाई गई आपत्तियों के जवाब आधिकारिक रूप से सौंप दिए।

    सरकार की ओर से आम आदमी पार्टी के विधायक डॉ. इंद्रबीर सिंह निज्जर और अमृतसर के डिप्टी कमिश्नर दलविंदरजीत सिंह ने यह दस्तावेज सचिवालय के प्रभारी को सौंपे। श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने बेअदबी कानून में मौजूद आपत्तिजनक प्रावधानों और शब्दावली में संशोधन के लिए पंजाब सरकार को एक महीने का समय दिया था। बुधवार को इस अवधि का अंतिम दिन था, जिसके ठीक पहले सरकार ने अपना संशोधित मसौदा श्री अकाल तख्त साहिब को सौंप दिया। दस्तावेज सौंपने के बाद विधायक डा. इंद्रबीर सिंह निज्जर ने कहा कि पंजाब सरकार ने उन्हें संशोधित मसौदा श्री अकाल तख्त साहिब तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दी थी।

    सरकार ने अपना पक्ष आधिकारिक रूप से रख दिया है। हालांकि जब उनसे पूछा गया कि क्या सिख समुदाय की सभी आपत्तियों का समाधान मसौदे में कर दिया गया है, तो उन्होंने इस पर स्पष्ट जवाब नहीं दिया और कहा कि अब आगे का निर्णय श्री अकाल तख्त साहिब को करना है। वहीं श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से प्रतिनिधि जसकरण सिंह ने कहा कि सरकार द्वारा सौंपे गए मसौदे का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा। यह मामला पूरे खालसा पंथ की भावनाओं से जुड़ा हुआ है, इसलिए इस पर पांच सिंह साहिबानों की आगामी बैठक में गंभीरता से विचार किया जाएगा। बैठक में मसौदे की समीक्षा के बाद ही श्री अकाल तख्त साहिब अपनी आधिकारिक राय पंजाब सरकार को देगा।

    जसकरण सिंह ने कहा कि सरकार को मसौदा तैयार करने से पहले श्री अकाल तख्त साहिब से औपचारिक चर्चा करनी चाहिए थी। उनका सुझाव है कि विद्वानों और दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों की एक संयुक्त समिति बनाई जाए, ताकि आपसी सहमति से ऐसा कानून तैयार हो सके जो सिख भावनाओं के अनुरूप होने के साथ-साथ सभी पक्षों को स्वीकार्य हो। इस बीच श्री अकाल तख्त साहिब ने पंजाब सरकार को यह भी सलाह दी है कि 3 अगस्त से शुरू होने वाले पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र में संशोधित बेअदबी विधेयक तब तक पेश न किया जाए, जब तक श्री अकाल तख्त साहिब इसकी समीक्षा पूरी कर अपनी राय सरकार को नहीं दे देता। इससे स्पष्ट संकेत मिला है कि धार्मिक संस्था पहले मसौदे की हर धारा की जांच करना चाहती है।

    अब इस पूरे मामले पर सभी की निगाहें पांच सिंह साहिबानों की होने वाली बैठक पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि इस बैठक में मसौदे पर विस्तृत चर्चा होगी और उसके बाद श्री अकाल तख्त साहिब सरकार को अपनी अंतिम सिफारिशें और निर्णय से अवगत कराएगा। इसके बाद ही यह तय होगा कि संशोधित बेअदबी कानून विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किया जाएगा या उसमें और बदलाव किए जाएंगे।