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  • Punjab Weather Alert: मानसून हुआ सक्रिय, लुधियाना में झमाझम बारिश; 2 दिन भारी से बेहद भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट

    Punjab Weather Alert: मानसून हुआ सक्रिय, लुधियाना में झमाझम बारिश; 2 दिन भारी से बेहद भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट

    लुधियाना 

    पंजाब में आज मानसून पूरी तरह सक्रिय हो जाएगा। लुधियाना में सुबह हुई तेज बरसात से लोगों को उमस और गरमी से राहत मिली। मौसम विभाग ने अगले दो दिनों के लिए राज्य के 12 जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इससे तापमान में गिरावट आने की संभावना है।

    जिन जिलों के लिए अलर्ट जारी किया गया है, उनमें पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, कपूरथला, होशियारपुर, जालंधर, नवांशहर, लुधियाना, रूपनगर, मोहाली, फतेहगढ़ साहिब और पटियाला शामिल हैं। बुधवार को पंजाब में मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहा। इससे तापमान में एक डिग्री की वृद्धि दर्ज की गई। फरीदकोट में सर्वाधिक 38.1 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। हालांकि, राज्य के न्यूनतम तापमान में 1.7 डिग्री की गिरावट आई। अमृतसर में सबसे कम 23.9 डिग्री न्यूनतम पारा दर्ज किया गया। 

    इसके अलावा बठिंडा में 46.0 मिमी, चंडीगढ़ में 45.6 मिमी, मोहाली में 45.5 मिमी, पटियाला में 28.5 मिमी, फरीदकोट में 23.0 मिमी, बठिंडा में 20.0 मिमी, अमृतसर में 19.5 मिमी, एसबीएस नगर में 15.3 मिमी, पठानकोट में 8.5 मिमी, लुधियाना में 2.0 मिमी और फिरोजपुर, कपूरथला, तरनतारन और फाजिल्का समेत कुछ अन्य जिलों में हल्की बारिश दर्ज की गई।

    वहीं, मौसम विभाग के अनुसार मंगलवार की तुलना में राज्य के औसत अधिकतम तापमान में लगभग एक डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी, जबकि औसत न्यूनतम तापमान में 1.7 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई। इसके बावजूद तापमान सामान्य के आसपास बना हुआ है।

    मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार राज्य के अधिकांश हिस्सों में बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने फिर से 30 व 31 जुलाई को कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश की संभावना जताई है। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती है। जबकि एक से चार अगस्त तक हिमाचल के साथ लगते जिलों में भारी वर्षा की संभावना है।

    प्रमुख शहरों का तापमान
    बुधवार को अमृतसर का अधिकतम तापमान 30.0 डिग्री, लुधियाना का 34.5 डिग्री और पटियाला का 35.5 डिग्री रहा। पठानकोट में 32.5 डिग्री और बठिंडा में 35.2 डिग्री अधिकतम तापमान दर्ज किया गया। न्यूनतम तापमान की बात करें तो लुधियाना में 26.4 डिग्री और पटियाला में 26.2 डिग्री दर्ज किया गया। बठिंडा का न्यूनतम पारा 28.0 डिग्री और होशियारपुर का 25.5 डिग्री रहा। 

  • Punjab News: कार की डिलीवरी में देरी पड़ी भारी, डीलर को ग्राहक को देने होंगे 3 लाख रुपये हर्जाना

    Punjab News: कार की डिलीवरी में देरी पड़ी भारी, डीलर को ग्राहक को देने होंगे 3 लाख रुपये हर्जाना

    चंडीगढ़.

    नई कार खरीदने के लिए पूरी कीमत चुकाने के बावजूद समय पर डिलीवरी न देने के मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने इंडस्ट्रियल एरिया स्थित ऑटोपेस नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड (नेक्सा डीलर) को सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक का दोषी ठहराया है।

    आयोग ने डीलर को ब्याज समेत 3.25 लाख रुपये हर्जाना और मुकदमा खर्च अदा करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने सेक्टर-30 निवासी प्रीति शर्मा की शिकायत पर यह फैसला सुनाया। प्रीति ने शिकायत में बताया कि उन्होंने 15 फरवरी 2026 को ग्रैंड विटारा अल्फा स्मार्ट हाइब्रिड मैनुअल कार बुक करवाई थी। बुकिंग के समय डीलर ने उन्हें 13 दिन में गाड़ी की डिलीवरी का भरोसा दिया था। उन्होंने 11 हजार रुपये की बुकिंग राशि जमा करवा दी और उसके बाद स्टेट बैंक आफ इंडिया से 14.28 लाख का कार लोन करवा लिया। उन्होंने डीलर को गाड़ी की इंश्योरेंस के लिए करीब 45 हजार रुपये भी जमा करवाए। इसके बावजूद उन्हें तय समय पर कार नहीं दी गई।

    ऐसे में उन्होंने उपभोक्ता आयोग में याचिका दायर कर दी। आयोग के अंतरिम आदेश के बाद 27 अप्रैल 2026 को उन्हें गाड़ी की डिलीवरी मिली। सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि डीलर ने गाड़ी की इंश्योरेंस, रजिस्ट्रेशन और वारंटी के लिए अलग-अलग रकम वसूल की। कई चार्जेस को अनिवार्य बताया गया कि जबकि ग्राहक को यह नहीं बताया गया कि यह वैकल्पिक थे। आयोग ने इसे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत अनुचित व्यापारिक व्यवहार माना। शिकायत ने बताया कि उन्होंने अपनी पुरानी कार डीलर को सौंप दी थी। पुरानी कार की कीमत 90 हजार रुपये लगाई गई।

    महिला ने बताई स्वास्थ्य समस्या
    शिकायतकर्ता ने बताया कि उन्हें गाड़ी की सख्त जरूरत थी। वह गर्भवती थी और उनकी सास भी बीमार रहती थी। उन्होंने अपनी पुरानी गाड़ी डीलर को पहले ही सौंप दी थी, फिर भी डीलर ने उनकी मजबूरी नहीं समझी और गाड़ी की डिलीवरी में देरी कर दी। हालांकि डीलर ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि शिकायतकर्ता के पास रकम कम पड़ गई थी, इसलिए गाड़ी की डिलीवरी में देरी हो गई, हालांकि इस बात का कोई भी सबूत सुनवाई के दौरान सामने नहीं आया। ऐसे में आयोग ने डीलर को मानसिक प्रताड़ना व उत्पीड़न के लिए तीन लाख रुपये हर्जाना और 25 हजार रुपये मुकदमा खर्च अदा करने के निर्देश दिए।

  • कांवड़ यात्रा को लेकर दिल्ली में ट्रैफिक प्लान जारी, कई रास्तों पर प्रतिबंध

    कांवड़ यात्रा को लेकर दिल्ली में ट्रैफिक प्लान जारी, कई रास्तों पर प्रतिबंध

    नई दिल्ली
    दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने 30 जुलाई से 11 अगस्त तक होने वाली कांवड़ यात्रा के लिए ट्रैफिक मैनेजमेंट प्लान बनाया है। यूपी, हरियाणा, पंजाब और दिल्ली से करीब 15-20 लाख श्रद्धालुओं के राजधानी से होकर गुजरने की उम्मीद है। जल अभिषेक 11 और 12 अगस्त को होगा। शहर में सैकड़ों कैंप लगाए गए हैं। अकेले पूर्वी ट्रैफिक रेंज में ही करीब 120 कैंप होंगे, क्योंकि यह तीर्थयात्रियों के लिए एक मुख्य रास्ता है।

    दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर एंट्री नहीं
    इस रेंज में मुख्य एंट्री पॉइंट गाजीपुर, महाराजपुर, अप्सरा, भोपुरा, सोनिया विहार, लोनी और DLF बॉर्डर हैं। 47 मोबाइल ट्रैफिक सेंटर और 19 क्रेन स्टैंडबाय पर रहेंगी। सुरक्षा कारणों से दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने कांवड़ियों और उनके वाहनों को दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर जाने से रोक दिया है। तीर्थयात्रियों से पारंपरिक रास्तों का इस्तेमाल करने को कहा गया है।

    कांवड़ यात्रा को लेकर मुख्य रास्ते ये हैं
        अप्सरा बॉर्डर से सीलमपुर और ISBT फ्लाईओवर तक
        भोपुरा बॉर्डर से वजीराबाद रोड, सीलमपुर और GT रोड होते हुए नए ISBT ब्रिज तक
        भोपुरा बॉर्डर से वजीराबाद ब्रिज और आउटर रिंग रोड होते हुए; लोनी बॉर्डर से खजूरी चौक होते हुए सिग्नेचर ब्रिज या पुराने यमुना ब्रिज तक
        सोनिया विहार से वजीराबाद रोड होते हुए पुराने यमुना ब्रिज तक
        महाराजपुर बॉर्डर से गाजीपुर, NH-24 और मथुरा रोड होते हुए।

    इन रास्तों से बचकर
    अप्सरा बॉर्डर और यमुना ब्रिज के बीच GT रोड का हिस्सा 9 अगस्त की सुबह 7 बजे से 12 अगस्त की रात 8 बजे तक बंद रहेगा। यह सिर्फ कांवड़ियों के लिए खुला रहेगा। महाराजपुर, अप्सरा, सीमापुरी, DLF, भोपुरा, लोनी, पुस्ता रोड और सोनिया विहार बॉर्डर से आम ट्रैफिक को आने की इजाजत नहीं होगी। सोनिया विहार से सिटी बसों को आने-जाने की इजाजत होगी। यात्रियों को, खासकर पूर्वी और उत्तर-पूर्वी दिल्ली जाने वालों को, ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ सकता है।

    मुंबई की बारिश ने मचाई आफत, राजस्थान से गुजरने वाली ये चार ट्रेनें रद्द
    दिल्ली में सुरक्षा के खास इंतजाम
    12 अगस्त तक GT रोड (अप्सरा बॉर्डर से यमुना ब्रिज), वजीराबाद रोड (भोपुरा बॉर्डर से सिग्नेचर ब्रिज), विकास मार्ग, आशा राम त्यागी मार्ग (रोड नंबर 66), पुस्ता रोड और लोनी रोड पर भारी ट्रांसपोर्ट गाड़ियों (सिटी बसों को छोड़कर) की आवाजाही पर रोक होगी या उन्हें दूसरे रास्तों पर भेजा जाएगा। सिर्फ पूर्वी रेंज में ही लगभग 640 ट्रैफिक पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे।

    साउथ रेंज में कहां कहां कैंप
    दक्षिणी रेंज समेत दूसरे इलाकों में भी ऐसे ही रास्ते तय किए गए हैं, जहां कालिंदी कुंज-बदरपुर बॉर्डर/MB रोड-मथुरा रोड-मोदी मिल-मां आनंदमयी मार्ग कॉरिडोर के किनारे लगभग 38 कैंप लगाए गए हैं। भीड़-भाड़ वाले रास्तों पर बैरिकेड लगाकर अलग रास्ते बनाए जाएंगे ताकि तीर्थयात्रियों को ट्रैफिक से अलग रखा जा सके।

    बाइक पर पुलिसकर्मी करेंगे निगरानी
    मोटरसाइकिल पर सवार पुलिसकर्मी रास्तों पर नजर रखेंगे और हर जोन में रात के इंतजामों की देखरेख के लिए एक ट्रैफिक इंस्पेक्टर तैनात होगा। जिन रास्तों पर जाम लगने की संभावना है, उनमें अप्सरा बॉर्डर से यमुना ब्रिज तक GT रोड, रोहतक रोड, नजफगढ़ रोड, आशा राम त्यागी मार्ग, वजीराबाद रोड, MG मार्ग, मथुरा रोड, पुस्ता रोड, खजूरी रोड, लोनी रोड और GT करनाल रोड शामिल हैं।

  • राजस्थान में मिड डे मील घोटाले का बड़ा खुलासा, बच्चों का दूध मावा भट्टियों तक पहुंचाने का आरोप

    राजस्थान में मिड डे मील घोटाले का बड़ा खुलासा, बच्चों का दूध मावा भट्टियों तक पहुंचाने का आरोप

    जयपुर
     राजस्थान में सरकारी स्कूलों के मासूम बच्चों के दूध पर डाका डाला जा रहा है. मिड डे मील का सरकारी दूध पाउडर बाजार में बेचने का बड़ा खुलासा हुआ है. स्कूल के बच्चों का यह दूध पाउडर चोरी छिपे मावा भट्टियों तक पहुंचाया रहा है. जयपुर के सामोद इलाके में 3 हजार किलो दूध पाउडर से भरी पिकअप जब्त होने के बाद संबंधित विभागों में हड़कंप मचा हुआ है. पुलिस ने इस मामले में कुछ लोगों को हिरासत में लिया है. बताया जा रहा है कि अप्रैल से स्कूलों में बच्चों को दूध नहीं मिल रहा था. यह दूध ‘पन्नाधाय बाल गोपाल योजना’ के तहत स्कूलों में बच्चों को दिया जाता है। 

    प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह दूध पाउडर स्कूलों में वितरण के बजाय मावा भट्टियों तक पहुंचाया जा रहा था. जबकि पन्नाधाय बाल गोपाल योजना के तहत यह दूध पाउडर केवल सरकारी विद्यालयों के बच्चों को नि:शुल्क वितरण के लिए होता है और इसे बाजार में बेचना प्रतिबंधित है. डीएसटी टीम और सामोद थाना पुलिस टीम ने बुधवार को संयुक्त रूप से इस कार्रवाई का अंजाम दिया था. पुलिस ने मौके से कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है. अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ के बाद पूरे गिरोह से जुड़े अन्य लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं। 

    कई स्कूलों में बच्चों को दूध उपलब्ध नहीं हो रहा
    बताया जा रहा है कि अप्रैल माह के बाद से कई स्कूलों में बच्चों को मिड डे मील के साथ मिलने वाला दूध उपलब्ध नहीं हो रहा था. बरामद दूध पाउडर के पैकेट श्रीगंगानगर, भीलवाड़ा और जयपुर डेयरी से निर्मित बताए जा रहे हैं. पुलिस ने संबंधित विभागों को मामले की सूचना दे दी है. उसके बाद इस मामले में आरसीडीएफ (राजस्थान को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन) ने बड़ा एक्शन लिया है. मामले की जानकारी मिलते ही आरसीडीएफ ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सामोद थाने में एफाआईआर दर्ज कराई है। 

    बच्चों के हक का दूध पाउडर सप्लाई चेन से बाहर कैसे पहुंचा?
    सवाल यह उठ रहा है कि आखिरकार बच्चों के हक का दूध पाउडर सप्लाई चेन से बाहर कैसे पहुंचा? इसमें किन-किन लोगों की भूमिका है. बहरहाल पुलिस प्रशासन पूरे मामले की जड़ें खोदने में जुटा है. वहीं आरसीडीएफ ने साफ किया है कि सरकारी योजनाओं में किसी भी तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी. RCDF की ओर से दर्ज शिकायत के आधार पर पुलिस साक्ष्य जुटाने और पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी है। 

  • पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: पैसे वापस मांगना आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं, सामूहिक सुसाइड केस की FIR रद्द

    पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: पैसे वापस मांगना आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं, सामूहिक सुसाइड केस की FIR रद्द

    चंडीगढ़ 

    पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने आत्महत्या के लिए उकसाने के एक मामले में अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल उधार दिए पैसे वापस मांगना, लगातार भुगतान का दबाव बनाना या लेन-देन को लेकर तकाजा करना अपने आप में आत्महत्या के लिए उकसाने नहीं था। 

    कुलवीर सिंह उर्फ कुलबीर सिंह और राजवीर कौर की याचिका स्वीकार करते हुए उनके खिलाफ दर्ज FIR और उससे जुड़ी सभी कानूनी कार्यवाहियों को रद्द कर दिया।

    2016 में एक ही परिवार के चार लोगों ने की थी आत्महत्या

    मामला सितंबर 2016 का है। जालंधर जिले के भोगपुर थाना क्षेत्र में अनिल अग्रवाल, उनकी पत्नी रजनी अग्रवाल और उनके दो बच्चों अभिषेक व राशि ने घर में सामूहिक रूप से आत्महत्या कर ली थी।

    पुलिस को मौके से एक पन्ने का सुसाइड नोट मिला था। इसमें याचिकाकर्ताओं समेत 8 लोगों के नाम और मोबाइल नंबर लिखे थे। आरोप था कि मृतक परिवार ने इन लोगों से पैसे उधार लिए थे। परिवार का दावा था कि मूल रकम से अधिक और ब्याज समेत भुगतान करने के बावजूद आरोपियों की ओर से लगातार पैसों की मांग की जा रही थी।

    सुसाइड नोट में रोजाना धमकाने और परिवार की महिलाओं को उठाकर ले जाने की धमकी देने के भी आरोप लगाए गए थे। इसी मानसिक दबाव के चलते परिवार ने आत्मघाती कदम उठाने की बात लिखी थी।

    SIT जांच में नहीं मिला सीधा उकसावे का सबूत

    मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विशेष जांच टीम (SIT) गठित की थी। जांच के दौरान मृतक की बहन ने भी बयान दिया कि मानसिक तनाव के कारण उसने FIR दर्ज कराई थी और उसे मौत के सटीक कारणों की जानकारी नहीं थी।

    SIT की विस्तृत जांच में आरोपियों की ओर से आत्महत्या के लिए सीधे उकसाने का कोई ठोस सबूत नहीं मिला। जांच के बाद 5 आरोपियों को क्लीन चिट दे दी गई। इसके बावजूद कुलवीर सिंह और राजवीर कौर के खिलाफ IPC की धारा 306 के तहत चालान और सप्लीमेंट्री चालान अदालत में पेश किया गया। इसके बाद दोनों ने हाईकोर्ट का रुख किया।

    कोर्ट ने कहा- सिर्फ कर्ज की वसूली को उकसावा नहीं मान सकते

    हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि IPC की धारा 306 के साथ धारा 107 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध साबित करने के लिए प्रत्यक्ष उकसावे या किसी स्पष्ट कृत्य (Overt Act) और आरोपी की आपराधिक मंशा (Mens Rea) का होना जरूरी है।

    कोर्ट के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति ने किसी को पैसे दिए हैं और वह अपनी रकम वापस मांगता है, तो सामान्य परिस्थितियों में वह अपने कानूनी अधिकार का इस्तेमाल कर रहा है। केवल भुगतान के लिए फोन करना या रकम वापस करने का दबाव बनाना तब तक आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं माना जा सकता, जब तक आरोपी की ओर से कोई स्पष्ट और तत्काल उकसाने वाला कृत्य सामने न आए।

    सुसाइड नोट में नाम होना अकेले पर्याप्त नहीं

    कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सुसाइड नोट में किसी व्यक्ति का नाम होना महत्वपूर्ण तथ्य हो सकता है, लेकिन केवल इसके आधार पर धारा 306 का अपराध साबित नहीं किया जा सकता। इसके लिए ठोस साक्ष्य जरूरी हैं, जो यह दिखाएं कि आरोपी ने जानबूझकर मृतक को आत्महत्या के लिए प्रेरित किया था।

    FIR और पूरी कार्रवाई रद्द

    हाईकोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ लगाए गए आरोप धारा 306 IPC के आवश्यक कानूनी तत्वों को पूरा नहीं करते। ऐसे में अदालत ने FIR नंबर 115/2016 और उससे जुड़ी सभी कार्यवाहियों को दोनों याचिकाकर्ताओं के खिलाफ रद्द कर दिया।

    कोर्ट ने कहा कि प्रत्यक्ष और तत्काल उकसावे के अभाव में केवल कर्ज या भुगतान के विवाद को आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला मानकर आपराधिक मुकदमा जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।

  • बिहार पुलिस में बड़ा बदलाव, चार जोन और 12 रेंज व्यवस्था फिर लागू

    बिहार पुलिस में बड़ा बदलाव, चार जोन और 12 रेंज व्यवस्था फिर लागू

    पटना 
    बिहार पुलिस में बड़ा फेरबदल किया गया है। पुलिस के कामकाज को प्रभावी बनाने और अपराध नियंत्रण को लेकर दोबारा जोन (प्रक्षेत्र) और रेंज (क्षेत्र) की व्यवस्था लागू की गई है। पूरे बिहार में चार पुलिस जोन बनाए गए हैं, जहां आईजी रैंक के अधिकारी की तैनात होगी। वहीं रेंज की कमान डीआईजी को सौंपी जाएगी। गृह विभाग ने इससे संबंधित संकल्प जारी कर दिया है

    सभी जोन में तीन-तीन रेंज होंगे
    गृह विभाग द्वारा जारी संकल्प के मुताबिक पूरे बिहार को चार पुलिस जोन में बांटा गया है। पटना, मुजफ्फरपुर, दरभंगा और भागलपुर में पुलिस जोन होगा। इनके अधीन 3-3 रेंज रहेंगे। पटना जोन में केन्द्रीय क्षेत्र पटना (पटना व नालंदा), मगध रेंज (गया, औरंगाबाद, नवादा, जहानाबाद व अरवल) और शाहाबाद रेंज (बक्सर, भोजपुर, रोहतास, कैमूर) को शामिल किया गया है।

    वहीं मुजफ्फरपुर जोन में तिरहुत (मुजफ्फरपुर, वैशाली, शिवहर, सीतामढ़ी), चंपारण (पूर्वी व पं. चंपारण, बगहा) और सारण रेंज (सारण, सीवान, गोपालगंज) आएंगे। इसके अलावा दरभंगा जोन के अधीन मिथिला (दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर), कोशी (सहरसा, सुपौल, मधेपुरा)

    और पूर्णिया रेंज (पूर्णिया, किशनगंज, किटहार, अरिरया) शामिल होगा। जबकि भागलपुर जोन के अधीन पूर्वी क्षेत्र (भागलपुर, बांका, नवगछिया) मुंगेर (मुंगेर, शेखपुरा, जमुई, लखीसराय) और बेगूसराय रेंज (बेगूसराय, खगड़िया) शामिल किए गए हैं।

    बदले जाएंगे कई अधिकारी
    साल साल पहले पुलिस जोन की व्यवस्था को खत्म करते हुए बिहार के सभी जिलों को 12 रेंज (रेल पुलिस को छोड़कर) में बांटा गया था। इससे संबंधित आदेश 13 अगस्त 2019 को जारी किया गया था। लेकिन इस वर्षों में इसका कोई फायदा नहीं दिखा। इसके बाद पुलिस मुख्यालय ने सरकार को इसमें बदलाव कर दोबारा पुरानी व्यवस्था को लागू करने का प्रस्ताव भेजा था। पुलिस मुख्यालय के प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए जोन और रेंज पुलिसिंग की व्यवस्था को दोबारा लागू करने का संकल्प जारी कर दिया है।

    मौजूद व्यवस्था में रेल पुलिस को छोड़कर जो बारह रेंज हैं उसमें कई में आईजी रैंक के अफसर तैनात हैं। अब रेंज में डीआईजी रैंक के ही अफसर रहेंगे जबकि रेंज की कमान आईजी को सौंपी जाएगी। ऐसे में जल्द ही अधिकारियों की तैनाती में फेरबदल तय है।

  • Haryana News: अगले रबी सीजन तक जारी रहेगी PM फसल बीमा योजना, किसानों को मिलेगा सुरक्षा कवच

    Haryana News: अगले रबी सीजन तक जारी रहेगी PM फसल बीमा योजना, किसानों को मिलेगा सुरक्षा कवच

    चंडीगढ़.

    सरकार ने खरीफ 2026 से रबी 2026-27 तक प्रदेश में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी है। पूरे प्रदेश में क्लस्टर आधारित व्यवस्था लागू रखते हुए फसलल बीमा, बीमा राशि, प्रीमियम दरें, बीमा इकाई और दावों के निपटान संबंधी प्रविधान तय किए हैं।

    खरीफ में धान, बाजरा, मक्का, कपास और मूंग तो रबी में गेहूं, जौ, चना, सरसों और सूरजमुखी की फसलें अधिसूचित की गई हैं। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की अधिसूचना के अनुसार योजना सभी ऋणी और गैर-ऋणी किसानों के लिए वैकल्पिक रहेगी। जो किसान योजना से बाहर रहना चाहते हैं, उन्हें नामांकन की अंतिम तिथि से कम से कम सात दिन पहले निर्धारित घोषणा पत्र जमा करना होगा।

    गैर-ऋणी किसान स्वयं या कामन सर्विस सेंटर (सीएससी) के जरिये आवेदन कर सकेंगे। योजना के तहत सूखा, बाढ़, जलभराव, कीट एवं रोग प्रकोप, ओलावृष्टि, तूफान जैसी व्यापक प्राकृतिक आपदाओं के अलावा स्थानीय आपदाओं तथा कटाई के बाद अधिकतम दो सप्ताह तक होने वाले ओलावृष्टि, चक्रवाती वर्षा और बेमौसम बारिश से हुए नुकसान को भी कवर किया जाएगा। स्थानीय आपदा से हुए नुकसान की सूचना किसानों को 72 घंटे के भीतर कृषि रक्षक पोर्टल एवं हेल्पलाइन 14447 या क्राप लास मोबाइल ऐप के माध्यम से दर्ज कराया जा सकेगा।

    यह होगी फसलवार बीमित और प्रीमियम की राशि
    प्रदेश सरकार ने खरीफ 2026 से रबी 2026-27 तक 90% इंडेम्निटी लेवल यथावत रखा है। प्रति हेक्टेयर बीमित राशि धान के लिए 1 लाख 11 हजार 561 रुपये, कपास के लिए 1 लाख 14 हजार 136 रुपये, गेहूं के लिए 84 हजार 386 रुपये, सरसों के लिए 56 हजार 639 रुपये, चने की फसल के लिए 41 हजार 478 रुपये, जौ के लिए 53 हजार 779 रुपये, मक्का और सूरजमुखी 57 हजार 211 रुपये तथा मूंग 50 हजार 59 रुपये निर्धारित की गई है। किसानों का प्रीमियम रबी फसलों के लिए 1.50 प्रतिशत, खरीफ फसलों के लिए 2 प्रतिशत तथा कपास के लिए 5 प्रतिशत रहेगा।

  • Punjab Protest: रिहाई प्रदर्शन मामले में विधायक समेत 15 नेता नामजद, चंडीगढ़ पुलिस पर हमले का आरोप

    Punjab Protest: रिहाई प्रदर्शन मामले में विधायक समेत 15 नेता नामजद, चंडीगढ़ पुलिस पर हमले का आरोप

    चंडीगढ़.

    पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से मुलाकात कर ‘वारिस पंजाब दे’ संगठन के प्रमुख अमृतपाल सिंह और विभिन्न जेलों में बंद बंदी सिंहों की रिहाई की मांग को लेकर निकले मार्च के बाद चंडीगढ़ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है।

    पुलिस ने ‘वारिस पंजाब दे’ से जुड़े विधायक मनप्रीत सिंह आयली समेत 15 नेताओं को नामजद करते हुए एफआईआर दर्ज की है। एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि नेताओं के नेतृत्व में पहुंचे हजारों प्रदर्शनकारियों ने गौशाला चौक पर बैरिकेड तोड़ दिए, पुलिस बल पर हमला किया और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। पुलिस के अनुसार, मंगलवार दोपहर करीब 2500 से 3000 प्रदर्शनकारी सेक्टर-50/51/44/45 स्थित गौशाला चौक पहुंचे। प्रदर्शनकारी अमृतपाल सिंह और अन्य बंदी सिंहों की रिहाई की मांग करते हुए मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ना चाहते थे। पुलिस का कहना है कि कई प्रदर्शनकारी तलवार, फरसे, कुल्हाड़ी, नेजे और डंडे लेकर पहुंचे थे तथा सड़क जाम कर नारेबाजी कर रहे थे।

    एफआईआर के मुताबिक, मौके पर मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को कई बार समझाया कि शहर में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस ) की धारा 163 लागू है और बिना अनुमति मार्च की इजाजत नहीं है। उन्हें सेक्टर-25 रैली ग्राउंड में प्रदर्शन करने की सलाह भी दी गई, लेकिन पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारी नहीं माने और बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ने का प्रयास किया। स्थिति बिगड़ने पर ड्यूटी मजिस्ट्रेट की अनुमति से पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों ने कथित रूप से पुलिस पर हमला कर दिया। झड़प में 15 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए।

    सबसे गंभीर घटना सेक्टर-45/46 चौक पर हुई, जहां पुलिस के अनुसार कुछ प्रदर्शनकारी वाटर कैनन वाहन पर चढ़ गए, उसकी नोजल क्षतिग्रस्त कर दी और चालक एएसआई गुरजीत सिंह पर हमला कर दिया। हमले में उनके हाथ में गंभीर चोट आई। उन्हें जीएमएसएच-16 में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। पुलिस ने इस मामले में विधायक मनप्रीत सिंह आयली, सतिंदरजीत सिंह गिल, काबल सिंह भुल्लर, जगदीप सिंह कंसाला, इकबाल सिंह संधू, परमजीत सिंह जोहल, पूर्व विधायक अजीब सिंह मखमेलपुर, चमकौर सिंह धुन, एडवोकेट ईमान सिंह खरा, जसविंदर सिंह ड्रॉली, इकबाल सिंह चुंडा, करनैल सिंह पंजोली, लाख सिधाना, भाना सिद्धू और लखवीर सिंह लाख को नामजद किया है। अन्य अज्ञात प्रदर्शनकारियों की पहचान सीसीटीवी फुटेज और वीडियो रिकॉर्डिंग के आधार पर की जा रही है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस ) की धारा 121(1), 132 और 223 सहित अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

  • बेअदबी कानून संशोधन पर पंजाब सरकार को झटका, श्री अकाल तख्त साहिब ने रिपोर्ट खारिज कर बनाई 5 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति

    बेअदबी कानून संशोधन पर पंजाब सरकार को झटका, श्री अकाल तख्त साहिब ने रिपोर्ट खारिज कर बनाई 5 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति

    अमृतसर
    श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने पंजाब सरकार द्वारा बेअदबी कानून में संशोधन को लेकर भेजी गई रिपोर्ट को अस्वीकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से दिए गए सुझावों को गंभीरता से नहीं लिया और मसौदे में केवल करीब 10 प्रतिशत बदलाव किए गए हैं, जबकि 90 प्रतिशत सुझावों को अब तक स्वीकार नहीं किया गया।

    जत्थेदार गड़गज्ज ने वीरवार को श्री अकाल तख्त सचिवालय में मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि 29 जून को पंजाब सरकार के मंत्रियों और विधायकों के साथ हुई बैठक में जिन बिंदुओं पर सहमति बनी थी, उन्हें सरकार ने संशोधित मसौदे में शामिल नहीं किया।

    उन्होंने कहा कि  विधायक डॉ. इंदरबीर सिंह निज्जर और अमृतसर के डीसी दलविंदरजीत सिंह द्वारा श्री अकाल तख्त साहिब को सौंपे गए दस्तावेज का गहन अध्ययन करने के बाद यह स्पष्ट हुआ कि सरकार अधिकांश सुझावों को लागू करने के लिए तैयार नहीं है।

    इस मामले में आगे की रणनीति तय करने के लिए श्री अकाल तख्त साहिब ने पांच सदस्यीय विशेषज्ञ समिति गठित करने की घोषणा की है। जत्थेदार गड़गज्ज ने कहा कि यदि पंजाब सरकार चाहे तो वह इस समिति के साथ बैठकर कानून के विवादित प्रावधानों पर चर्चा कर सकती है। समिति कानून का विस्तृत अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट श्री अकाल तख्त साहिब को सौंपेगी, जिसके बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

    उन्होंने पंजाब सरकार को दो महीने का समय देते हुए कहा कि यदि इस अवधि के भीतर कानून से आपत्तिजनक प्रावधान नहीं हटाए गए तो श्री अकाल तख्त साहिब इस मुद्दे पर सख्त फैसला लेने के लिए बाध्य होगा।

    उन्होंने कहा कि 29 जून को श्री अकाल तख्त साहिब में हुई बैठक में जिन बिंदुओं पर सहमति बनी थी, सरकार ने अपने ताजा मसौदे में उन्हें लागू नहीं किया और लगभग 90 प्रतिशत मामलों में पहले वाली व्यवस्था ही बरकरार रखी है।

    श्री अकाल तख्त की सबसे बड़ी आपत्ति पंजाब के 2008 और 2021 के अधिनियमों में शामिल दो "निगरानी" धाराओं को लेकर है। उनका कहना था कि इन धाराओं के जरिए सरकार को यह अधिकार मिल जाता है कि वह तय करे कि पवित्र स्वरूपों को कौन रख सकता है, कौन छाप सकता है और उनका रिकॉर्ड कैसे रखा जाएगा, जबकि यह अधिकार केवल श्री अकाल तख्त साहिब और पूरे पंथ का है, सरकार का नहीं।

    ज्ञानी गड़गज्ज ने कहा कि 29 जून की बैठक में सभी राजनीतिक दलों के सिख विधायक और मंत्री मौजूद थे। पांच सिंह साहिबान की मौजूदगी में सभी ने हाथ उठाकर यह सहमति दी थी कि निगरानी संबंधी धाराएं हटाई जाएंगी, पवित्र ग्रंथों के लिए किसी भी प्रकार की विशिष्ट नंबर प्रणाली लागू करने का निर्णय पंथ करेगा और इस संबंध में कोई रिकॉर्ड किसी वेबसाइट पर सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। लेकिन सरकार ने 29 जुलाई को भेजे गए मसौदे में इन वादों का पालन नहीं किया।

    उन्होंने कहा कि सरकार ने "निगरानी" शब्द की लंबी कानूनी व्याख्या देकर मूल मुद्दे से ध्यान हटाने की कोशिश की है। सरकार की भूमिका केवल बेअदबी करने वालों को गिरफ्तार करने, मुकदमा चलाने और कड़ी सजा दिलाने तक सीमित होनी चाहिए, न कि धार्मिक शब्दावली या पवित्र स्वरूपों के प्रबंधन का अधिकार अपने हाथ में लेने की।

    जत्थेदार ने बरगाड़ी समेत अन्य बेअदबी मामलों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि आज तक दोषियों को सजा नहीं मिली। कई मामलों को पंजाब से बाहर स्थानांतरित कर दिया गया और सरकार उन्हें वापस लाने में भी विफल रही।

    उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने पूरी प्रक्रिया के दौरान श्री अकाल तख्त और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी से खुलकर चर्चा करने के बजाय कुछ अज्ञात कानूनी विशेषज्ञों से गुप्त सलाह-मशविरा किया।

    उन्होंने मांग की कि बेअदबी मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें बनाई जाएं और ऐसा विशेष कानून लाया जाए, जिससे सिख विरोधी डेरों या संगठनों के प्रमुखों को भी बेअदबी के मामलों में कानूनी रूप से जिम्मेदार ठहराया जा सके।

    मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए ज्ञानी गड़गज्ज ने कहा कि जिन्हें श्री अकाल तख्त पहले ही "गुरु-द्रोही" घोषित कर चुका है, उन्हें विधानसभा में सिख विधायकों को स्वीकार या संबोधित नहीं करना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि मिरी-पीरी खालसा मार्च को लगातार जनसमर्थन मिल रहा है। साथ ही पंजाब में बढ़ते नशे, श्री दरबार साहिब के आसपास सफाई व्यवस्था, गुटका साहिब के स्वरूपों के सम्मानजनक प्रबंधन और अमृतसर की 450वीं वर्षगांठ से पहले शहर की व्यवस्था जैसे मुद्दों पर भी सरकार को गंभीरता से काम करना चाहिए।

    ज्ञानी गड़गज्ज ने घोषणा की कि 3 अगस्त को प्रस्तावित विधायी प्रक्रिया से पहले श्री अकाल तख्त ने सरकार के साथ बातचीत के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है। इसमें सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रुपिंदर सिंह सोढ़ी, सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति महेंद्र मोहन बेदी, वरिष्ठ अधिवक्ता पूर्ण सिंह हुंदल, डॉ. केहर सिंह और प्रो. जगमोहन सिंह टोनी शामिल हैं।

    चंडीगढ़ से सचिव लखबीर सिंह समन्वयक होंगे। उन्होंने कहा कि सरकार भी अपनी समिति बनाए और दोनों पक्षों के बीच सहमति बनने के बाद ही कानून विधानसभा में लाया जाए।

    उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अगले दो महीनों में सरकार ने सहमति के अनुरूप कार्रवाई नहीं की तो उसे और समय नहीं दिया जाएगा। कई विधायकों ने कानून का मसौदा पढ़े बिना ही उसका समर्थन कर दिया, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

    प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने यह भी दावा किया कि आम आदमी पार्टी के विधायक कुंवर विजय प्रताप सिंह ने भी उनसे संपर्क कर कहा है कि सरकार ने चुनाव के समय उनका उपयोग किया, लेकिन अब उनकी बात नहीं सुनी जा रही। ज्ञानी गड़गज्ज ने इसे सरकार के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बताया।

  • हरियाणा में खरीफ 2026 से लागू होगी नई फसल बीमा योजना, अधिसूचना जारी

    हरियाणा में खरीफ 2026 से लागू होगी नई फसल बीमा योजना, अधिसूचना जारी

    चंडीगढ़
     सरकार ने खरीफ 2026 से रबी 2026-27 तक प्रदेश में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी है। पूरे प्रदेश में क्लस्टर आधारित व्यवस्था लागू रखते हुए फसलल बीमा, बीमा राशि, प्रीमियम दरें, बीमा इकाई और दावों के निपटान संबंधी प्रविधान तय किए हैं। खरीफ में धान, बाजरा, मक्का, कपास और मूंग तो रबी में गेहूं, जौ, चना, सरसों और सूरजमुखी की फसलें अधिसूचित की गई हैं।

    कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की अधिसूचना के अनुसार योजना सभी ऋणी और गैर-ऋणी किसानों के लिए वैकल्पिक रहेगी। जो किसान योजना से बाहर रहना चाहते हैं, उन्हें नामांकन की अंतिम तिथि से कम से कम सात दिन पहले निर्धारित घोषणा पत्र जमा करना होगा।

    गैर-ऋणी किसान स्वयं या कामन सर्विस सेंटर (सीएससी) के जरिये आवेदन कर सकेंगे। योजना के तहत सूखा, बाढ़, जलभराव, कीट एवं रोग प्रकोप, ओलावृष्टि, तूफान जैसी व्यापक प्राकृतिक आपदाओं के अलावा स्थानीय आपदाओं तथा कटाई के बाद अधिकतम दो सप्ताह तक होने वाले ओलावृष्टि, चक्रवाती वर्षा और बेमौसम बारिश से हुए नुकसान को भी कवर किया जाएगा। स्थानीय आपदा से हुए नुकसान की सूचना किसानों को 72 घंटे के भीतर कृषि रक्षक पोर्टल एवं हेल्पलाइन 14447 या क्राप लास मोबाइल ऐप के माध्यम से दर्ज कराया जा सकेगा।

    यह होगी फसलवार बीमित और प्रीमियम की राशि
    प्रदेश सरकार ने खरीफ 2026 से रबी 2026-27 तक 90% इंडेम्निटी लेवल यथावत रखा है। प्रति हेक्टेयर बीमित राशि धान के लिए 1 लाख 11 हजार 561 रुपये, कपास के लिए 1 लाख 14 हजार 136 रुपये, गेहूं के लिए 84 हजार 386 रुपये, सरसों के लिए 56 हजार 639 रुपये, चने की फसल के लिए 41 हजार 478 रुपये, जौ के लिए 53 हजार 779 रुपये, मक्का और सूरजमुखी 57 हजार 211 रुपये तथा मूंग 50 हजार 59 रुपये निर्धारित की गई है। किसानों का प्रीमियम रबी फसलों के लिए 1.50 प्रतिशत, खरीफ फसलों के लिए 2 प्रतिशत तथा कपास के लिए 5 प्रतिशत रहेगा।