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  • हरियाणा पुलिस भर्ती में अनाथ अभ्यर्थियों को हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

    हरियाणा पुलिस भर्ती में अनाथ अभ्यर्थियों को हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

    चंडीगढ़
     हाई कोर्ट ने हरियाणा पुलिस भर्ती में अनाथ अभ्यर्थियों को दिए जाने वाले पांच अंकों के वेटेज को लेकर बड़ा फैसला सुनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि मात्र पिता की मृत्यु हो जाने से कोई अभ्यर्थी अनाथ नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि भर्ती विज्ञापन के उद्देश्य और राज्य सरकार की व्याख्या के अनुसार अनाथ वही होगा, जिसके माता-पिता दोनों का निधन हो चुका हो।

    साथ ही पिता की मृत्यु या तो 42 वर्ष की आयु पूरी करने से पहले हुई हो अथवा अभ्यर्थी के 15 वर्ष की आयु पूरी होने से पहले हुई हो। जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस अमरिंदर सिंह ग्रेवाल की खंडपीठ ने हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (एचएसएससी) की 51 अपीलों को स्वीकार करते हुए 16 मई 2023 के सिंगल बेंच के फैसले को रद कर दिया।

    मामला वर्ष 2018 में निकाले गए हरियाणा पुलिस भर्ती विज्ञापन से जुड़ा था, जिसमें 5000 पुरुष कॉन्स्टेबल , 1147 महिला कॉन्स्टेबल , 500 आइआरबी पुरुष कॉन्स्टेबल , 400 पुरुष सब-इंस्पेक्टर तथा 63 महिला सब-इंस्पेक्टर के पदों के लिए आवेदन मांगे गए थे। भर्ती प्रक्रिया में विभिन्न श्रेणियों के लिए वेटेज का प्रविधान था।

    इनमें अनाथ और विधवा श्रेणी के पात्र अभ्यर्थियों को पांच अतिरिक्त अंक देने का भी प्रविधान शामिल है। विवाद तब शुरू हुआ, जब कुछ अभ्यर्थियों ने दावा किया कि विज्ञापन में केवल पिता की मृत्यु की शर्त का उल्लेख है, इसलिए यदि मां जीवित है तब भी उन्हें अनाथ मानकर पांच अंक दिए जाने चाहिएं। सिंगल बेंच ने इस दलील को स्वीकार करते हुए आयोग को मेरिट सूची दोबारा तैयार करने का निर्देश दिया था।

    इस आदेश से पहले से चयनित कई अभ्यर्थियों की नियुक्तियां प्रभावित होने की आशंका थी, इसलिए चयनित अभ्यर्थियों और एचएसएससी दोनों ने डिवीजन बेंच में अपील दायर की। डिवीजन बेंच ने कहा कि किसी नियम या शर्त में यदि व्याख्या का प्रश्न उठता है तो सबसे पहले उस प्राधिकरण की व्याख्या को महत्व दिया जाएगा, जिसने वह नियम बनाया है। यदि अदालत नियम निर्माता की मंशा से अलग अर्थ निकालती है तो वह न्यायिक विधिनिर्माण होगा, जिसकी अनुमति कानून नहीं देता।

     

  • बिहार में ईओयू की बड़ी कार्रवाई, इंजीनियर के छह ठिकानों पर छापेमारी जारी

    बिहार में ईओयू की बड़ी कार्रवाई, इंजीनियर के छह ठिकानों पर छापेमारी जारी

    पटना
     बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के तहत आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने गुरुवार को बड़ी कार्रवाई की है। 

    लघु सिंचाई प्रमंडल, रोहतास के कार्यपालक अभियंता अरविंद कुमार चौधरी के छह ठिकानों पर एक साथ छापेमारी शुरू की।

    आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में ईओयू की अलग-अलग टीमों ने पटना, रोहतास, मुजफ्फरपुर और बांका में उनके आवास, कार्यालय और अन्य परिसरों की तलाशी ली।

    ईओयू के अनुसार, प्रारंभिक जांच में अरविंद कुमार चौधरी के पास उनकी ज्ञात आय के स्रोतों की तुलना में करीब 1.19 करोड़ रुपये से अधिक की अतिरिक्त संपत्ति मिलने के साक्ष्य सामने आए हैं।

    जांच में यह भी पाया गया कि उनकी अर्जित संपत्ति ज्ञात आय के स्रोतों से करीब 85 प्रतिशत अधिक है।

    29 जुलाई को दर्ज हुई एफआईआर
    आर्थिक अपराध इकाई ने इस मामले में 29 जुलाई को ईओयू थाने में कांड संख्या 15/26 के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी।

    इसके बाद निगरानी की विशेष अदालत से तलाशी वारंट प्राप्त किया गया। अदालत से अनुमति मिलने के बाद गुरुवार सुबह डीएसपी स्तर के अधिकारियों के नेतृत्व में कई टीमों ने एक साथ छापेमारी शुरू की।
    इन छह ठिकानों पर चल रही तलाशी

    ईओयू की टीमें जिन स्थानों पर तलाशी ले रही हैं, उनमें 
        पटना के दानापुर स्थित आदमपुर में वीनस पैराडाइज अपार्टमेंट का फ्लैट
        पटना में एक अन्य ठिकाना
        मुजफ्फरपुर के महामाया स्थान स्थित ससुराल
        रोहतास स्थित कार्यपालक अभियंता का कार्यालय
        डेहरी-ऑन-सोन स्थित सरकारी आवास
        बांका जिले के रजौन थाना क्षेत्र अंतर्गत पीपराडीह गांव स्थित पैतृक आवास शामिल हैं। 

    दस्तावेजों और निवेश की हो रही जांच
    छापेमारी के दौरान ईओयू की टीमें अचल और चल संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज, बैंक खातों का विवरण, निवेश संबंधी कागजात, नकदी, आभूषण तथा अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर रही हैं।

    अधिकारियों के अनुसार, तलाशी पूरी होने के बाद जब्त दस्तावेजों का विश्लेषण किया जाएगा, जिसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    ईओयू का कहना है कि यदि जांच में आय से अधिक संपत्ति के आरोप पूरी तरह प्रमाणित होते हैं, तो मामले में अभियोजन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। फिलहाल सभी छह ठिकानों पर तलाशी की कार्रवाई जारी है।

     

  • राजस्थान ने फसल बीमा योजना में सुधार के लिए केंद्र को भेजे 11 सुझाव

    राजस्थान ने फसल बीमा योजना में सुधार के लिए केंद्र को भेजे 11 सुझाव

    जयपुर
    प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को अधिक पारदर्शी और किसान हितैषी बनाने के लिए राजस्थान सरकार ने केंद्र को 11 बड़े सुधार सुझाव भेजे हैं। इनमें ऋणी किसानों के खातों से बिना सहमति प्रीमियम कटौती पर रोक, खेत स्तर पर नुकसान का आकलन और क्लेम भुगतान में देरी पर बीमा कंपनियों पर स्वतः ब्याज लगाने जैसे प्रस्ताव शामिल है। मंजूरी मिलने पर किसानों को बड़ी राहत मिल सकती है। राज्य सरकार इससे पहले बीमा कंपनियों के साथ अनुबंध में भी कई कड़ी शर्ते जोड़ चुकी है। अब राष्ट्रीय स्तर पर योजना में बदलाव की पहल की गई है।

    कृषि विभाग ने किसान संगठनों, किसान प्रतिनिधियों तथा विभागीय अधिकारियों से मिले सुझावों के आधार पर कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के फसल बीमा सीईओ को प्रस्ताव भेजे हैं। राजस्थान पत्रिका भी लगातार योजना की विसंगतियों का मुद्दा उठाता रहा है। कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने पत्र में कहा है कि फसल कटाई प्रयोगों में अनियमितताओं को रोकने के लिए प्रत्येक किसान के खेत को इकाई मानकर तकनीक आधारित नुकसान आकलन किया जाए। इससे मनमाने मूल्यांकन पर रोक लगेगी।

    केन्द्र को भेजे गए प्रमुख सुझाव
    1. ऋणी किसानों का बीमा भी पूरी तरह स्वैच्छिक हो, बिना सहमति प्रीमियम न कटे।
    2. सभी किसानों का फसल बीमा एग्रीस्टैंक आईडी से जोड़ा जाए।
    3. आधार, एग्रीस्टैंक आइडी और जनाधार से बैंक विवरण एनसीआईपी पोर्टल पर स्वतः उपलब्ध हों।
    4. ई-गिरदावरी/क्रॉप बुकिंग ऐप से बोई गई फसल का सत्यापन कर पॉलिसी अनुमोदित हो।
    5. प्रत्येक किसान के खेत स्तर पर तकनीक आधारित नुकसान आकलन कर क्लेम तय हो।
    6. एड-ऑन कवर क्लेम के लिए तकनीक आधारित मानक तय हो।
    7. क्लेम भुगतान में देरी पर बीमा कंपनियों पर ब्याज या पेनल्टी लगे।
    8. पॉलिसी निरस्त होने पर प्रीमियम ब्याज सहित लौटाया जाए।
    9. राज्य स्तरीय शिकायत निवारण समिति में किसान प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए।

    बता दें कि हाल ही में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की पड़ताल में सामने आया था कि राजस्थान का 64 प्रतिशत कृषि क्षेत्र अब भी फसल बीमा से बाहर है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य के कुल कृषि क्षेत्र का सिर्फ 36 प्रतिशत हिस्सा ही बीमित हो सका। सबसे अधिक कवरेज चूरू में 77 प्रतिशत रही, जबकि धौलपुर में यह महज 5 प्रतिशत, करौली में 7 प्रतिशत और दौसा में 9 प्रतिशत दर्ज की गई।

    कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार पिछले पांच वर्ष में किसानों को 18,189.16 करोड़ का बीमा दावा मिला। सबसे अधिक भुगतान चूरू जिले में 2,459.63 करोड़, हनुमानगढ़ जिले में 2,253.59 करोड़, जोधपुर जिले में 1,570.94 करोड़, जालोर जिले में 1,392.02 करोड़, नागौर जिले में 1,287.89 करोड़ और बीकानेर जिले में 1,101.64 करोड़ रुपए हुआ। वहीं, राजसमंद 4.66 करोड़, धौलपुर 7.23 करोड़ और करौली 9.51 करोड़ के साथ सबसे पीछे रहे।

    बीमा कंपनियों को 8,568.40 करोड़ रुपए का मुनाफा
    पिछले पांच साल में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 26,757.56 करोड़ रुपए प्रीमियम जमा हुआ। इसमें किसानों का अंश 4,650.78 करोड़, राज्य सरकार का 11,253.68 करोड़ और केंद्र सरकार का 10,853.10 करोड़ रुपए रहा। इसी अवधि में किसानों को 18,189.16 करोड़ रुपए का क्लेम मिला। ऐसे में बीमा कंपनियों ने 8,568.40 करोड़ रुपए का मुनाफा कमाया।

  • Haryana Police Recruitment: माता-पिता दोनों के निधन पर ही मिलेगा अनाथ का वेटेज, हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

    Haryana Police Recruitment: माता-पिता दोनों के निधन पर ही मिलेगा अनाथ का वेटेज, हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

    चंडीगढ़.

    हाई कोर्ट ने हरियाणा पुलिस भर्ती में अनाथ अभ्यर्थियों को दिए जाने वाले पांच अंकों के वेटेज को लेकर बड़ा फैसला सुनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि मात्र पिता की मृत्यु हो जाने से कोई अभ्यर्थी अनाथ नहीं माना जा सकता।

    अदालत ने कहा कि भर्ती विज्ञापन के उद्देश्य और राज्य सरकार की व्याख्या के अनुसार अनाथ वही होगा, जिसके माता-पिता दोनों का निधन हो चुका हो। साथ ही पिता की मृत्यु या तो 42 वर्ष की आयु पूरी करने से पहले हुई हो अथवा अभ्यर्थी के 15 वर्ष की आयु पूरी होने से पहले हुई हो। जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस अमरिंदर सिंह ग्रेवाल की खंडपीठ ने हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (एचएसएससी) की 51 अपीलों को स्वीकार करते हुए 16 मई 2023 के सिंगल बेंच के फैसले को रद कर दिया।

    मामला वर्ष 2018 में निकाले गए हरियाणा पुलिस भर्ती विज्ञापन से जुड़ा था, जिसमें 5000 पुरुष कॉन्स्टेबल , 1147 महिला कॉन्स्टेबल , 500 आइआरबी पुरुष कॉन्स्टेबल , 400 पुरुष सब-इंस्पेक्टर तथा 63 महिला सब-इंस्पेक्टर के पदों के लिए आवेदन मांगे गए थे। भर्ती प्रक्रिया में विभिन्न श्रेणियों के लिए वेटेज का प्रविधान था। इनमें अनाथ और विधवा श्रेणी के पात्र अभ्यर्थियों को पांच अतिरिक्त अंक देने का भी प्रविधान शामिल है। विवाद तब शुरू हुआ, जब कुछ अभ्यर्थियों ने दावा किया कि विज्ञापन में केवल पिता की मृत्यु की शर्त का उल्लेख है, इसलिए यदि मां जीवित है तब भी उन्हें अनाथ मानकर पांच अंक दिए जाने चाहिएं। सिंगल बेंच ने इस दलील को स्वीकार करते हुए आयोग को मेरिट सूची दोबारा तैयार करने का निर्देश दिया था।

    इस आदेश से पहले से चयनित कई अभ्यर्थियों की नियुक्तियां प्रभावित होने की आशंका थी, इसलिए चयनित अभ्यर्थियों और एचएसएससी दोनों ने डिवीजन बेंच में अपील दायर की। डिवीजन बेंच ने कहा कि किसी नियम या शर्त में यदि व्याख्या का प्रश्न उठता है तो सबसे पहले उस प्राधिकरण की व्याख्या को महत्व दिया जाएगा, जिसने वह नियम बनाया है। यदि अदालत नियम निर्माता की मंशा से अलग अर्थ निकालती है तो वह न्यायिक विधिनिर्माण होगा, जिसकी अनुमति कानून नहीं देता।

  • Mohali: जीरकपुर को मिला नया थाना प्रभारी, स्नैचिंग और लूट की घटनाओं पर लगाम सबसे बड़ी चुनौती

    Mohali: जीरकपुर को मिला नया थाना प्रभारी, स्नैचिंग और लूट की घटनाओं पर लगाम सबसे बड़ी चुनौती

    जीरकपुर/मोहाली.

    जीरकपुर पुलिस स्टेशन में प्रशासनिक फेरबदल के तहत इंस्पेक्टर जसबीर सिंह तूर को नया थाना प्रभारी नियुक्त किया गया है। वे धूरी (जिला संगरूर) से स्थानांतरित होकर मोहाली पहुंचे हैं। मौजूदा थाना प्रभारी इंस्पेक्टर सतिंदर सिंह का तबादला कर उन्हें ढकोली थाना भेजा गया है।

    जीरकपुर पंजाब के तेजी से विकसित हो रहे शहरों में से एक है। बढ़ती जनसंख्या, ट्रैफिक की समस्या, व्यावसायिक गतिविधियों का विस्तार और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों के बीच नए थाना प्रभारी की नियुक्ति महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उनके कार्यों में ट्रैफिक प्रबंधन, नशा तस्करी, चोरी, लूटपाट, स्नैचिंग, साइबर अपराध और अवैध कब्जों पर नियंत्रण शामिल रहेगा। पुलिस नेतृत्व में यह बदलाव प्रशासन की कार्यप्रणाली को प्रभावी बनाने की दिशा में एक अहम कदम है। इंस्पेक्टर तूर के पास पुलिस सेवा का लंबा अनुभव है। उन्हें जीरकपुर में कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने की जिम्मेदारी दी गई है।

  • बिहार में नए बिजली कनेक्शन की दरें तय, घरेलू उपभोक्ताओं को देना होगा शुल्क

    बिहार में नए बिजली कनेक्शन की दरें तय, घरेलू उपभोक्ताओं को देना होगा शुल्क

    पटना 
    बिहार में बिजली कनेक्शन की नई दर तय कर दी गई है। घरेलू के लिए प्रति किलोवाट तीन सौ रुपये की दर से तीन किलोवाट के लिए 900 रुपये शुल्क लिये जाएंगे। बिहार विद्युत विनियामक आयोग ने नई दर की मंजूरी दी थी। बुधवार को बिजली कंपनियों ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी। कंपनियों ने 150 किलोवाट तक के नये कनेक्शन के लिए सर्विस कनेक्शन शुल्क निर्धारित किया है। एलटी सिंगल फेज, एलटी थ्री फेज के नए कनेक्शन निर्धारित शुल्क के आधार पर जारी किए जाएंगे।

    बिजली कनेक्शन शुल्क
    लो टेंशन सिंगल फेज: (7 केवी तक सभी श्रेणी) 3 केवी तक 900 रुपये। इससे अधिक पर 2700 के साथ हर अतिरिक्त केवी पर एक हजार लगेंगे।
    लो टेंशन 3 फेज (5 से 19 किलोवाट): 5 केवी तक 4,500 और 5 केवी से अधिक पर हर अतिरिक्त किलोवाट पर 1500 रुपये लगेंगे।

    लो टेंशन 3 फेज (20 से 44 किलोवाट): 20 केवी तक 21,000 और इससे अधिक पर हर अतिरिक्त किलोवाट पर दो हजार रुपये लगेंगे।

    बिहार के श्रमिकों को ₹5 में पौष्टिक भोजन, ठहरने की भी सुविधा मिलेगी
    बिहार के 42 लाख से अधिक निबंधित निर्माण श्रमिकों को मात्र पांच रुपये में पौष्टिक भोजन मिलेगा। साथ ही रियायती दर पर रहने की भी सुविधा मिलेगी। पटना से इस योजना की शुरुआत होगी। श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग के अधीन बिहार भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड ने ‘भोजशाला योजना’ और ‘श्रमिक अतिथिशाला योजना’ के लिए निविदा जारी कर दी है। दो-तीन महीने में श्रमिकों को इन सुविधाओं का लाभ मिलने लगेगा। विभागीय मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने कहा कि दोनों योजना बिहार सरकार श्रमिकों के सम्मानजनक जीवन, बेहतर स्वास्थ्य और सुरक्षित भविष्य के लिए संचालित की जाएगी।

    रोजगार की तलाश में शहरों में आने वाले निर्माण श्रमिकों तथा दूसरे राज्यों से लौटने वाले बिहार के श्रमिकों को सुरक्षित और सम्मानजनक अस्थायी आवास उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार ‘श्रमिक अतिथिशाला’ योजना शुरू कर रही है। प्रथम चरण में पटना के नौ प्रमुख स्थानों पाटलिपुत्र इंडस्ट्रियल एरिया, पाटलिपुत्र स्टेशन, बैरिया जीरोमाइल, आईएसबीटी-कंकड़बाग, दानापुर जंक्शन, सगुना मोड़, बिहटा कॉरिडोर, नौबतपुर और दीदारगंज में अतिथिशालाओं का संचालन किया जाएगा। बाद में इस सुविधा का विस्तार राज्य के अन्य जिलों में किया जाएगा। अतिथिशालाओं में महिला एवं पुरुष श्रमिकों के लिए अलग डॉरमेट्री होगी, जिनमें क्रमशः 50 और 100 बेड की व्यवस्था रहेगी। श्रमिक यहां सामान्यतः 7 से 10 दिनों तक ठहर सकेंगे।

  • जयपुर में भारत टैक्सी ऐप शुरू, यात्रियों को मिलेगा सस्ता और सुरक्षित सफर

    जयपुर में भारत टैक्सी ऐप शुरू, यात्रियों को मिलेगा सस्ता और सुरक्षित सफर

    जयपुर 
    भारत टैक्सी ऐप के जरिए यात्रियों को कम किराया और 'शेक टू एसएमएस' जैसी सुरक्षा सुविधा देने के साथ चालकों को बिना कमीशन काम करने का मौका दिया जा रहा है। इस सहकारी कंपनी का दावा है कि यात्रियों को 10 से 15 प्रतिशत तक सस्ता किराए की सुविधा, सर्ज प्राइसिंग नहीं होगी और चालकों से कोई कमीशन नहीं लिया जाएगा। अगले कुछ महीनों में पूरे जयपुर में 24 घंटे सेवा उपलब्ध करा दी जाएगी। हालांकि, सेवा अभी शुरुआती चरण में है। यही वजह है कि शहर के अधिकांश बाहरी इलाकों में यात्रियों को भारत टैक्सी आसानी से उपलब्ध नहीं हो रही। बीते एक महीने में जयपुर से करीब 36 हजार चालकों ने पंजीकरण कराया है, लेकिन फिलहाल केवल 3400 वाहन ही संचालन में हैं।

    यात्रियों के लिए क्या है खास?
    किराया कम- अन्य एग्रीगेटर कंपनियों की तुलना में यात्रियों से 10 से 15 प्रतिशत तक कम किराया। पीक आवर्स या बारिश जैसी परिस्थितियों में भी सर्ज प्राइसिंग लागू नहीं होगी यानी दिन, रात या व्यस्त समय में किराया नहीं बढ़ेगा।

    सुरक्षा का अहसास- ऐप में 'शेक टू एसएमएस' फीचर में तीन इमरजेंसी मोबाइल नंबर दर्ज किए जा सकते हैं। आपात स्थिति में यदि यात्री मोबाइल को जोर से हिलाता है तो उसकी लाइव लोकेशन स्वतः इन तीनों नंबरों पर भेज दी जाएगी। कंपनी का दावा है कि यह फीचर महिलाओं और अकेले सफर करने वाले यात्रियों को अतिरिक्त सुरक्षा देगा।

    इन इलाकों में टैक्सी सेवा शुरू
    फिलहाल जयपुर के मालवीय नगर, दुर्गापुरा, टोंक रोड, सोडाला और जवाहर सर्किल जैसे इलाकों में भारत टैक्सी आसानी से मिल रही है। वहीं वैशाली नगर, प्रतापनगर, मान्यावास, भांकरोटा, आगरा रोड और सीकर रोड जैसे क्षेत्रों में अभी टैक्सी की उपलब्धता कम है, इसलिए यात्रियों को कैब मिलने के लिए थोड़ा ज्यादा इंतजार करना पड़ सकता है। कंपनी का कहना है कि आने वाले कुछ महीनों में पूरे जयपुर में 24 घंटे टैक्सी सेवा उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।

    कुछ महीनों में 24 घंटे सेवा उपलब्ध कराने का लक्ष्य
    "भारत टैक्सी अभी शुरुआती चरण में है। अगले कुछ महीनों में पूरे जयपुर में 24 घंटे सेवा उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। हमारा फोकस यात्रियों को सस्ता और सुरक्षित सफर देने के साथ चालकों को बिना कमीशन बेहतर आय उपलब्ध कराना है।"

    — अभिषेक चारण, सिटी हेड, भारत टैक्सी, जयपुर

  • Punjab हादसा: स्कूल बस की टक्कर से बाइक सवार दो छात्रों की दर्दनाक मौत, इलाके में मातम

    Punjab हादसा: स्कूल बस की टक्कर से बाइक सवार दो छात्रों की दर्दनाक मौत, इलाके में मातम

    पटियाला.

    पातड़ा-जाखल रोड पर पंजाब-हरियाणा सीमा के निकट गांव खानेवाल के पास वीरवार सुबह दर्दनाक सड़क हादसे में बाइक पर स्कूल जा रहे 12वीं कक्षा के दो छात्रों की मौत हो गई। हादसे के बाद गुस्साए लोगों ने सड़क पर जाम लगाकर आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

    जानकारी के अनुसार गांव हरियाऊ कलां निवासी मोहित कुमार और प्रिंस कुमार बाइक पर सवार होकर संगरूर जिले के गांव बंगा स्थित सीनियर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ने जा रहे थे। इसी दौरान मूनक क्षेत्र के गांव हमीरगढ़ स्थित बचपन इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल की एक प्राइवेट बस ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसा इतना भीषण था कि बस दोनों छात्रों को करीब 50 फुट तक घसीटती हुई ले गई, जिससे दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।

    मृतकों में मोहित कुमार अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। हादसे की सूचना मिलते ही परिजनों और ग्रामीणों में भारी रोष फैल गया। गुस्साए लोगों ने पातड़ां-जाखल रोड पर जाम लगाकर यातायात पूरी तरह ठप कर दिया और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। परिजनों ने आरोप लगाया कि 25 सीटों वाली स्कूल बस में करीब 45 विद्यार्थियों को बैठाकर ले जाया जा रहा था। उनका यह भी आरोप है कि मौके पर पहुंचे स्कूल प्रिंसिपल का रवैया भी उचित नहीं था, जिससे लोगों का गुस्सा और बढ़ गया। घटना की सूचना मिलते ही थाना पातड़ां के प्रभारी इंस्पेक्टर गगनदीप सिंह पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभालते हुए जांच शुरू कर दी। पुलिस ने दोनों छात्रों के शव कब्जे में लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। वहीं, हादसे के कारण क्षेत्र में लंबे समय तक यातायात बाधित रहा।

  • झारखंड में 2.20 करोड़ के इनामी माओवादी मिसिर बेसरा सहित पांच गिरफ्तार

    झारखंड में 2.20 करोड़ के इनामी माओवादी मिसिर बेसरा सहित पांच गिरफ्तार

     रांची
     झारखंड के एक मात्र सक्रिय पोलित ब्यूरो सदस्य सह राज्य का सबसे बड़ा इनामी माओवादी मिसिर बेसरा उर्फ सागर उर्फ भास्कर उर्फ सुनिर्मल सहित पांच की गिरफ्तारी के दूसरे ही दिन बुधवार को डीजीपी तदाशा मिश्रा व अन्य अधिकारियों ने प्रेस वार्ता कर पूरे मामले की जानकारी दी है।

    माओवादी मिसिर बेसरा राज्य का पहला माओवादी है, जिसपर कुल 2.20 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। उसपर एक करोड़ रुपये का इनाम झारखंड सरकार ने तो एक करोड़ 20 लाख रुपये का इनाम ओडिशा सरकार ने घोषित कर रखा था।

    डीजीपी ने प्रेस वार्ता में बताया कि मिसिर बेसरा व उसके सहयोगियों की सूचना पर सुरक्षा बलों ने 28 जुलाई को धनबाद के बरवड्डा थाना क्षेत्र के जंगली इलाकों में आपरेशन दौरा पहाड़ चलाया।

    इस अभियान में धनबाद, गिरिडीह जिला बल व 209 कोबरा बटालियन ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए धनबाद के उक्त इलाके से मिसिर बेसरा के अलावा 15 लाख के इनामी माओवादियों के रीजनल कमेटी सदस्य मेहनत उर्फ मोछू उर्फ विभिषण, एरिया कमांडर गौरव उर्फ वीरेंद्र हांसदा उर्फ सौरभ तथा दो अन्य सदस्यों को गिरफ्तार किया। आरोपितों के पास से तीन एके-47 रायफल, आठ मैगजीन व 288 कारतूस बरामद किए गए हैं।

    डीजीपी ने बताया कि झारखंड माओवादियों के शीर्ष नेतृत्व की गिरफ्तारी से लगभग माओवाद मुक्त हो गया है। अब केवल छिटपुट ही बचे हैं और जो बचे हैं वे प्रभावहीन हो चुके हैं, कमजोर हो चुके हैं, जिनकी तलाश में सुरक्षा में तैनात जवान लगे हुए हैं। झारखंड में बचा एक करोड़ का इकलौता माओवादी असीम मंडल भागा-भागा फिर रहा है।

    बंगाल सीमा पर होने की सूचना पर छापेमारी चल रही है। उसका भी जल्द खेल खत्म हो सकता है। उन्होंने शेष बचे माओवादियों से अपील की है कि हिंसा और भयादोहन का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटें और झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का लाभ उठाएं।

    प्रेस वार्ता के मौके पर आइजी सीआरपीएफ साकेत कुमार सिंह, आइजी अभियान नरेंद्र कुमार सिंह, आइजी झारखंड जगुआर अनूप बिरथरे, डीआइजी झारखंड जगुआर इंद्रजीत महथा, एसएसपी धनबाद प्रभात कुमार व एसपी गिरिडीह डा. विमल कुमार भी मौजूद थे।
    ये हैं गिरफ्तार मिसिर बेसरा सहित पांच आरोपित

    – मिसिर बेसरा उर्फ सागर उर्फ भाष्कर उर्फ सुनिर्मल : मदनडीह, पीरटांड़, गिरिडीह। पोलित ब्यूरो सदस्य, सेंट्रल कमेटी सदस्य, झारखंड सरकार ने एक करोड़ व ओडिशा सरकार ने एक करोड़ 20 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। इसपर दर्ज हैं कुल 175 कांड।

    – मेहनत उर्फ मोछू उर्फ विभिषण उर्फ तुंबा मुर्मू : घोराबांध, बरवड्डा, धनबाद। रीजनल कमेटी सदस्य है। इसपर झारखंड सरकार ने 15 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। इसपर दर्ज हैं कुल 137 कांड।

    – गौरव उर्फ वीरेंद्र हांसदा उर्फ सौरभ : सतकठिया, थाना मधुबन, जिला गिरिडीह। यह एरिया कमेटी सदस्य है, इसपर कुल आठ कांड दर्ज हैं।

    – मंगल मुर्मू : घोराबांध, बरवड्डा, धनबाद। यह सदस्य है।
    – दिनेश राय : पुरनाडीह, बरवड्डा, धनबाद। यह सदस्य है।

    बरामद हथियार
    तीन एके-47 रायफल, आठ मैगजीन व 288 कारतूस।

    हाल के दिनों में माओवादियों के विरुद्ध सुरक्षा बलों की बड़ी कार्रवाई
    – 21 मई 2026 को झारखंड के 27 कुख्यात माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया था। इनमें सात सब जोनल कमांडर, सात एरिया कमेटी सदस्य व 13 दस्ता सदस्य शामिल थे। इन माओवादियों ने कुल 18 हथियारों व 2987 कारतूसों के साथ आत्मसमर्पण किया था।
    – 13 जुलाई 2026 को सुरक्षा बलों ने माओवादियों के शीर्ष कमांडर रीजनल कमेटी सदस्य सह 20 लाख के इनामी रवींद्र गंझू को गिरफ्तार किया था।
    – 17 जुलाई 2026 को सुरक्षा बलों ने माओवादियों के शीर्ष कमांडर स्पेशल एरिया कमेटी (सैक) सदस्य, 25 लाख के इनामी अजय महतो उर्फ टाइगर को गिरफ्तार किया था। इसी दिन एरिया कमेटी सदस्य बबिता उर्फ अनिता किस्कू ने आत्मसमर्पण किया था।
    – 28 जुलाई 2026 को पुलिस मुख्यालय में कुल 16 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया था। इनमें एक रीजनल कमेटी सदस्य, तीन जोनल कमेटी सदस्य, तीन सब जोनल कमेटी सदस्य, छह एरिया कमांडर व तीन दस्ता सदस्य शामिल थे। इन माओवादियों ने 11 हथियार व 1562 कारतूस के साथ आत्मसमर्पण किया था।

    प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से शामिल अधिकारियों-जवानों व गुप्तचरों में बंटेगी इनाम की राशि
    मिसिर बेसरा व उसके सहयोगियों पर घोषित इनाम की राशि इस अभियान में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल अधिकारियों व जवानों में बंटेगी। इसके लिए संबंधित जिले के एसपी वहां के डीआइजी के माध्यम से आइजी अभियान को अपनी अनुशंसा भेजेंगे। विशेष शाखा के पदाधिकारियों के साथ मिलकर समीक्षा बैठक कर इनाम के हकदारों की सूची तैयार होगी, जिन्हें इनाम की राशि दी जाएगी।

     

  • दिल्ली में 30 लाख पानी कनेक्शन होंगे रेगुलर, छह महीने चलेगा e-KYC अभियान

    दिल्ली में 30 लाख पानी कनेक्शन होंगे रेगुलर, छह महीने चलेगा e-KYC अभियान

     नई दिल्ली
     दिल्ली जल बोर्ड के 73 लाख ग्राहकों में से 30 लाख से ज्यादा घरों (यानी 40 फीसदी से ज्यादा) में पाइप से पानी की सप्लाई तो हो रही है। हालांकि, उन्हें बिल नहीं मिल रहे हैं। इसी वजह से दिल्ली सरकार इन कनेक्शनों को रेगुलर करने के लिए छह महीने का e-KYC अभियान शुरू कर रही है। वाटर मिनिस्टर प्रवेश वर्मा ने कहा कि ऐसे ग्राहकों की पहचान करने, मीटर रीडिंग लेने और बिल बांटने के लिए तीन एजेंसियों को काम पर लगाया गया है।

    पानी मंत्री प्रवेश वर्मा ने बताया प्लान
    मंत्री प्रवेश वर्मा ने कहा कि e-KYC का काम अगले छह महीनों में पूरे शहर में किया जाएगा। इसके लिए एजेंसियां लगभग 700 कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को काम पर रखेंगी। दिल्ली जल बोर्ड एक इंटर्नशिप प्रोग्राम भी शुरू करेगा, जिसके तहत हर साल 40 युवाओं को 10,000 रुपये के मासिक स्टाइपेंड पर काम पर रखा जाएगा। इस बीच, DJB ने राजधानी की लंबे समय तक पानी जमा करने की क्षमता को बेहतर बनाने और यमुना को साफ करने की बड़ी कोशिश के तहत कई प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है।

    पानी के बिल पर सरकार ने लिए ये फैसले
        इनमें 58 करोड़ रुपये की लागत से 250 वॉटर ATM लगाना शामिल है।
        इन्हें पहले सरकारी स्कूलों में लगाया जाएगा और फिर दूसरी जगहों पर बढ़ाया जाएगा।
        लगभग 2,000 करोड़ रुपये की लागत से 15 डिसेंट्रलाइज्ड सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (DSTP) लगाने का काम भी शामिल है।
        नजफगढ़ और दिल्ली गेट नालों का इन-सीटू ट्रीटमेंट करना और वजीराबाद पॉड्स को ठीक करना शामिल है।
        इन 15 प्लांट की कुल ट्रीटमेंट क्षमता 103.5 मिलियन गैलन प्रति दिन (MGD) होगी।
        इस प्रोजेक्ट में काम करने वाली एजेंसियों की ओर से 15 साल तक ऑपरेशन और मेंटेनेंस का काम भी शामिल है।
        इससे लगभग 20 लाख लोगों को फायदा होने की उम्मीद है।

    दिल्ली जल बोर्ड भी कर रहा बड़ी तैयारी
    दिल्ली जल बोर्ड ने सीवेज कचरे के निपटान को बेहतर बनाने के लिए 10 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में स्लज मैनेजमेंट सिस्टम लगाने को भी मंजूरी दी है। इसके अलावा, 244 अनधिकृत कॉलोनियों और 57 गांवों में सीवर लाइनें बिछाई जाएंगी, जिससे लगभग 33 लाख निवासियों तक सीवर कनेक्टिविटी पहुंच सकेगी। अधिकारियों ने बताया कि इस प्रोजेक्ट को 18 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

    DJB ने 4500 करोड़ के प्रोजेक्ट को दी मंजूरी
    यमुना को फिर से जीवित करने की अपनी योजना के तहत, दिल्ली जल बोर्ड ने लगभग 4,500 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। इनमें शहर के सीवर इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार, मौजूदा ट्रीटमेंट प्लांट को अपग्रेड करना और बड़े नालों – खासकर नजफगढ़ नाले, जो नदी के प्रदूषण का एक बड़ा कारण है – का वहीं पर ट्रीटमेंट (इन-सीटू ट्रीटमेंट) करना शामिल है। नालों के ट्रीटमेंट के लिए कॉन्ट्रैक्टर को पेमेंट उनके काम के आधार पर किया जाएगा। ट्रीट किए गए पानी की मात्रा मापने के लिए इनलेट और आउटलेट दोनों जगहों पर फ्लो मीटर लगाए जाएंगे।