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  • झारखंड में 43 लाख से ज्यादा मतदाता फार्म लंबित, 5 अगस्त को आएगी सूची

    झारखंड में 43 लाख से ज्यादा मतदाता फार्म लंबित, 5 अगस्त को आएगी सूची

     रांची
    झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का गणना चरण पूरा हो गया है, लेकिन अब भी 43.68 लाख से अधिक गणना प्रपत्र (एन्यूमरेशन फार्म) जमा नहीं हो सके हैं। इनमें करीब 7.64 लाख ऐसे मतदाताओं के फार्म भी शामिल हैं, जिनका निधन हो चुका है।

    राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (सीईओ) के. रवि कुमार ने यह जानकारी दी। राज्य में कुल 2.64 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं के लिए बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) ने घर-घर जाकर गणना प्रपत्र वितरित किए थे।

    मतदाता सूची का प्रारूप 5 अगस्त को होगा प्रकाशित
    निर्वाचन विभाग के अनुसार, प्राप्त सभी फार्म का डिजिटलीकरण कर लिया गया है। अंतिम मतदाता सूची का प्रारूप 5 अगस्त को प्रकाशित किया जाएगा। इसी दिन अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और डुप्लीकेट (एएसडीडी) मतदाताओं की सूची भी जारी होगी।

    निर्वाचन विभाग ने बताया कि 5 अगस्त से 3 अक्टूबर तक दावे और आपत्तियां दर्ज कराई जा सकेंगी। इस दौरान सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों और मतदाताओं को सूची में संशोधन का अवसर मिलेगा। आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक अप्राप्त फार्म शहरी विधानसभा क्षेत्रों में हैं।

    बोकारो में 2.03 लाख, हटिया में 1.84 लाख, रांची में 1.53 लाख, धनबाद में 1.53 लाख, कांके में 1.42 लाख और जमशेदपुर पश्चिम में 1.13 लाख से अधिक फार्म जमा नहीं हुए हैं। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में बोरियो विधानसभा क्षेत्र में 53 हजार से अधिक फार्म लंबित हैं।

    आंकड़ों में हो सकते हैं बदलाव
    निर्वाचन विभाग का मानना है कि दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया के दौरान इन आंकड़ों में बदलाव संभव है। विभाग ने मतदाताओं से समय सीमा के भीतर अपने दावे और आपत्तियां दर्ज कराकर मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाने में सहयोग करने की अपील की है।

     

  • हरियाणा में 70 लाख की नकली दवाइयों का बड़ा भंडाफोड़, 16 आरोपी गिरफ्तार

    हरियाणा में 70 लाख की नकली दवाइयों का बड़ा भंडाफोड़, 16 आरोपी गिरफ्तार

    चंडीगढ़.

    हरियाणा में नकली दवाओं के कारोबार पर खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग (एफडीए) ने बड़ा शिकंजा कसते हुए राज्य को इस तरह की अवैध गतिविधियों के खिलाफ सबसे सक्रिय राज्यों में शामिल कर दिया है। औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के तहत चलाए जा रहे विशेष अभियान में अब तक 16 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है।

    इनमें 12 गिरफ्तारियां गुरुग्राम में हुई हैं, जहां अंतरराज्यीय नकली दवा सिंडिकेट का पर्दाफाश कर करीब 70 लाख रुपये की नकली दवाएं और 323 प्रकार की एलोपैथिक दवाएं बरामद की गई हैं।
    स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डा. सुमिता मिश्रा के निर्देश पर राज्यभर में खुफिया सूचनाओं के आधार पर निगरानी, छापेमारी और सैंपलिंग अभियान तेज किए गए हैं। राज्य औषधि नियंत्रक रिपन मेहता ने सभी क्षेत्रीय अधिकारियों को दोषियों के खिलाफ त्वरित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

    अप्रैल 2026 में एफडीए गुरुग्राम ने नकली मौनजारो इंजेक्शन रैकेट का भंडाफोड़ कर डीएलएफ फेज-4 और सेक्टर-69 से करीब 70 लाख रुपये के नकली इंजेक्शन जब्त किए। जुलाई में नकली टेल्मा-एएम गोलियों के अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा हुआ, जिसकी जांच के दौरान तोफाजैक 5 एमजी जैसे अन्य संदिग्ध उत्पाद भी सामने आए। एफडीए हरियाणा और दिल्ली की संयुक्त कार्रवाई में दिल्ली के एक अवैध परिसर से बड़ी मात्रा में नकली एनाबालिक स्टेरायड सहित 323 प्रकार की दवाएं बरामद की गईं। विभाग ने 23 हजार आर-जारा डीएसआर कैप्सूल भी जब्त किए हैं।

  • राजस्थान की 59 हजार भर्तियों पर हाई लेवल समीक्षा, मुख्य सचिव ने मांगी प्रगति रिपोर्ट

    राजस्थान की 59 हजार भर्तियों पर हाई लेवल समीक्षा, मुख्य सचिव ने मांगी प्रगति रिपोर्ट

    जयपुर
    राजस्थान सरकार की 59 हजार सरकारी भर्तियों को लेकर बड़ा प्रशासनिक मंथन सामने आया है. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के 4 लाख नौकरियां देने के संकल्प को समय पर पूरा करने के लिए मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने 13 विभागों के आईएएस अधिकारियों से भर्ती प्रक्रियाओं की प्रगति रिपोर्ट तलब की. लेकिन समीक्षा बैठक में चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई जहां एक भी भर्ती फाइनल स्टेज तक पहुंची हुई नहीं मिली.

    यही नहीं बैठक में जब मुख्य सचिव ने पूछा कि जिन पदों पर भर्ती होनी है, क्या उनकी वित्त विभाग से मंजूरी मिल चुकी है, परीक्षाएं कब होंगी और परिणाम कब जारी होंगे, तो अधिकांश अधिकारी कोई तय समय-सीमा नहीं बता सके. सभी का जवाब सिर्फ इतना था कि "प्रक्रिया जारी है." सरकार जल्द से जल्द इन भर्तियों को अंतिम रूप देकर अगले रोजगार उत्सव में अधिक से अधिक युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपना चाहती है. इससे पहले पिछले महीने प्रधानमंत्री के हाथों 54 हजार नियुक्ति पत्र वितरित कराए जा चुके हैं. अब सरकार की नजर नई 59 हजार भर्तियों पर है.

    मुख्य सचिव ने जिन प्रमुख भर्तियों की रिपोर्ट मांगी, उनमें 24,752 सफाई कर्मचारी, 10,644 कनिष्ठ सहायक एवं क्लर्क ग्रेड-द्वितीय, 6,000 पुलिस कांस्टेबल, 3,500 शिक्षण सहयोगी, 3,430 ग्राम विकास अधिकारी, 3,000 जूनियर टेक्निकल सुपरवाइजर (पीएचईडी), 2,000 नर्सिंग एवं पैरामेडिकल, 1,548 आयुष विभाग, 1,100 कृषि पर्यवेक्षक, 1,100 पशु चिकित्सा अधिकारी, 1,059 सहायक अभियंता और 774 जूनियर अभियंता सहित कई अहम भर्तियां शामिल हैं.

    उधर सरकार चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, शिक्षक ग्रेड-III, संस्कृत शिक्षा विभाग, पुस्तकालयाध्यक्ष, जेल प्रहरी, एनएचएम और बस परिचालक जैसी अंतिम चरण में पहुंची भर्ती प्रक्रियाओं को भी तेज करने में जुटी है. दस्तावेज सत्यापन, परिणाम घोषणा और नियुक्ति आदेश जारी करने की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि पात्र अभ्यर्थियों को जल्द से जल्द नौकरी मिल सके

  • बैंक अधिकारी बनकर लोगों को ठगने वाली दो महिलाएं गिरफ्तार, चंडीगढ़ पुलिस की बड़ी कार्रवाई

    बैंक अधिकारी बनकर लोगों को ठगने वाली दो महिलाएं गिरफ्तार, चंडीगढ़ पुलिस की बड़ी कार्रवाई

    चंडीगढ़.

    यूटी पुलिस के साइबर क्राइम थाने ने क्रेडिट कार्ड फ्रॉड करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दिल्ली के उत्तम नगर से दो महिलाओं को गिरफ्तार किया है। ये महिलाएं बैंक अधिकारी बनकर लोगों को क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने का झांसा देती थीं।

    ये महिलाएं ओटीपी, सीवीवी सहित गोपनीय बैंकिंग जानकारी हासिल कर लाखों रुपये की साइबर ठगी को अंजाम देती थीं। पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से 10 मोबाइल फोन और कई सिम कार्ड बरामद किए हैं। यह कार्रवाई एसपी साइबर गीतांजलि खंडेलवाल के निर्देशन में की गई। 30 जून को साइबर क्राइम थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि एसबीआई क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने के नाम पर उससे ओटीपी और कार्ड संबंधी गोपनीय जानकारी ले ली गई, जिसके बाद उसके क्रेडिट कार्ड से करीब 1.92 लाख रुपये के अनधिकृत ट्रांजेक्शन कर दिए गए।

    पुलिस ने दिल्ली के उत्तम नगर में किराये के मकान पर छापा मारकर दोनों महिलाओं को गिरफ्तार किया। पूछताछ में महिलाओं ने बताया कि एक अन्य साथी उन्हें लोगों का डाटा उपलब्ध कराता था। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है। गिरफ्तार महिलाओं में से एक को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है, जबकि दूसरी पुलिस रिमांड पर है।

  • बिहार में बढ़े बच्चों के अपहरण मामले, मानव तस्करी रोकने को बनेगी विशेष सेल

    बिहार में बढ़े बच्चों के अपहरण मामले, मानव तस्करी रोकने को बनेगी विशेष सेल

    पटना
    राज्य में पिछले पांच सालों में बच्चों के गायब होने के मामले तीन से चार गुना तक बढ़ गए हैं। वर्ष 2020 में सामान्य अपहरण के आठ हजार मामले दर्ज किए गए थे, जो 2025 में बढ़कर 24 हजार से अधिक हो गए।

    इनमें बच्चों की बरामदगी दर 70 प्रतिशत है। मानव तस्करी के शिकार बच्चों एवं महिलाओं की रिकवरी दर कम है। डीजीपी विनय कुमार ने गुरुवार को इन आंकड़ों पर चिंता जताते हुए सभी महिला थानों में एंटी ट्रैफिकिंग (मानव व्यापार निषेध) रोकने के लिए विशेष इकाइयों का गठन करने का निर्देश दिया है। वहीं, हर जिले में मानव तस्करी रोकने के लिए विशेष सेल भी बनाया जाएगा।

    पुलिस मुख्यालय के सभागार में गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय मानव व्यापार निषेध दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में डीजीपी ने कहा कि महिला थानों में एक इकाई मानव तस्करी के विरुद्ध काम करेगी, जबकि दूसरी इकाई महिला एवं बच्चों के विरुद्ध अपराध से जुड़े मामले को देखेगी।

    दोनों इकाइयों की कमान इंस्पेक्टर रैंक के पदाधिकारी संभालेंगे। उन्होंने सीआईडी की कमजोर वर्ग इकाई को इससे संबंधित प्रस्ताव तैयार कर भेजने को कहा।

    डीजीपी ने कहा कि महिला थाने की कमान डीएसपी रैंक के अधिकारी के पास होनी चाहिए। मानव तस्करी साइबर अपराध से भी ज्यादा खतरनाक है और उससे तीन गुना अधिक मामले दर्ज होते हैं।

    बिहार देश में पहला राज्य है, जहां सभी जिलों में इस तरह के मामले देखने के लिए डीएसपी (स्पेशल क्राइम) का पद सृजित हैं और इन पर पदाधिकारी की तैनाती भी है।

    डीजीपी ने सभी पुलिस पदाधिकारियों से कहा कि गुमशुदगी के मामलों को बेहद संवेदनशीलता के साथ सर्वोच्च प्राथमिकता दिया जाए।

    इन मामलों की गवाही में सभी पदाधिकारी को समय निकाल कर प्राथमिकता के आधार पर गवाही देने कोर्ट जाना चाहिए। अगर ऐसे 10 से 15 मामलों में लगातार सजा हो जाए, तो इन अपराध पर अंकुश लगाने में काफी मदद मिलेगी।

    वात्सल्य पोर्टल से जुड़े 1200 थाने : एडीजी
    एडीजी (कमजोर वर्ग) केएस अनुपम ने बताया कि राज्य के 1200 थानों को गुमशुदा बच्चों की सूचना अपलोड करने वाले वात्सल्य पोर्टल से जोड़ दिया गया है।

    सभी थानों को गुमशुदा बच्चों की पूरी जानकारी इस पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य है। अब तक दस हजार से अधिक बच्चों के रिकार्ड इस पर अपलोड कर दिए गए हैं।

    नया सवेरा 3.0 अभियान के तहत अब तक 88 तस्करों को सजा दिलाई गई है। पटना जिले में सर्वाधिक 56 तस्करों को गिरफ्तार किया गया। नाबालिग और महिलाओं की बरामदगी में किशनगंज पहले और सीतामढ़ी दूसरे स्थान पर रहा।

    बेहतर काम करने वाले जिला कप्तानों को सम्मानित भी किया गया। बगहा के जज मानवेंद्र कुमार मिश्रा के अलावा एसडीपीओ कुमार दयेंद्र और एपीपी जितेंद्र कुमार भारती को विशेषतौर से सम्मानित किया गया। यहां दो तस्करों को ट्रायल चलाकर सिर्फ 34 दिनों में सजा दिलाई। कार्यक्रम के दौरान एडीजी (सीआईडी) पारसनाथ भी मौजूद थे।

     

  • हरियाणा के करोड़ों के घोटाले में IAS पंकज अग्रवाल की जमानत का CBI ने किया कड़ा विरोध

    हरियाणा के करोड़ों के घोटाले में IAS पंकज अग्रवाल की जमानत का CBI ने किया कड़ा विरोध

    पंचकूला.

    हरियाणा के चर्चित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से जुड़े 657 करोड़ रुपये के घोटाले के मामले में गिरफ्तार वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पंकज अग्रवाल की जमानत याचिका पर पंचकूला स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में सुनवाई हुई। सीबीआई ने पंकज अग्रवाल की नियमित जमानत याचिका का विरोध किया।

    जांच एजेंसी ने अदालत में दायर जवाब में आरोप लगाया कि पंकज अग्रवाल घोटाले के मास्टरमाइंड और चंडीगढ़ सेक्टर-32 स्थित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के पूर्व अधिकारी रिभव ऋषि के करीबी सहयोगी थे और उनसे आर्थिक और अन्य अनुचित लाभ प्राप्त करते रहे। सीबीआई के अनुसार, 10 दिसंबर 2024 से 16 जून 2025 तक स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव रहते हुए अग्रवाल ने 17 दिसंबर 2024 को आईडीएफसी फर्स्ट बैंक द्वारा भेजे गए हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद (एचएसएसपीपी) का खाता खोलने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। 31 दिसंबर 2024 को उन्होंने कोटक महिंद्रा बैंक से 100 करोड़ रुपये इस खाते में स्थानांतरित करने की स्वीकृति भी दी। एजेंसी का दावा है कि यह निर्णय वित्त विभाग के दिशा-निर्देशों के विपरीत था। न तो सूचीबद्ध बैंकों से प्रतिस्पर्धी प्रस्ताव मंगाए गए और न ही ब्याज दरों की तुलना की गई। बैंक की निवेश सीमा 50 करोड़ रुपये होने के बावजूद 100 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए। इसी खाते में बाद में 101 फर्जी डेबिट और 33 फर्जी क्रेडिट लेनदेन के जरिए 50.54 करोड़ रुपये के गबन का आरोप है।

    अग्रवाल ने अधिकारियों पर बनाया था दवाब
    सीबीआई ने यह भी आरोप लगाया कि अग्रवाल ने अधीनस्थ अधिकारियों पर फाइल और नोटशीट अपने पक्ष में बदलने का दबाव बनाया। 20 जून 2025 को कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के प्रधान सचिव और हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड (एचएसएएमबी) के चेयरमैन बनने के बाद उन्होंने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में एक और खाता खुलवाने में हस्तक्षेप किया। जांच एजेंसी के अनुसार, पहले लंबित पड़े प्रस्ताव को उनके हस्तक्षेप के बाद एक ही दिन में मंजूरी मिली और 10 जुलाई 2025 को हरियाणा मार्केटिंग डेवलपमेंट फंड के नाम से खाता खोल दिया गया। बाद में इसी खाते से 14 जनवरी 2026 को रद चेक का दुरुपयोग कर 10 करोड़ रुपये फर्जी तरीके से निकाल लिए गए।

    रिभव को पद से हटाए जाने के बाद भी था संपर्क
    सीबीआई ने अदालत को बताया कि जांच में पंकज अग्रवाल और रिभव ऋषि के बीच इस पूरे प्रकरण से जुड़े पूर्व संवाद के साक्ष्य मिले हैं। एजेंसी का दावा है कि अग्रवाल को यह जानकारी थी कि रिभव ऋषि बैंक के पद से हटाए जा चुके थे, इसके बावजूद दोनों के बीच लगातार संपर्क बना रहा।

    आरोपों को बताया बेबुनियाद
    बचाव पक्ष ने सभी आरोपों से बेबुनियाद बताया। उनका कहना है कि अग्रवाल ने कभी किसी से रिश्वत नहीं मांगी और न ही कोई अवैध लाभ लिया। अब इस मामले की अगली सुनवाई तीन अगस्त को होगी।

  • 15 अगस्त पर बड़े आतंकी हमले की साजिश नाकाम, खालिस्तान लिबरेशन फोर्स के 4 आतंकी गिरफ्तार

    15 अगस्त पर बड़े आतंकी हमले की साजिश नाकाम, खालिस्तान लिबरेशन फोर्स के 4 आतंकी गिरफ्तार

    अमृतसर.

    स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आतंकी घटना को अंजाम देने की तैयारी कर रहे खालिस्तान लिबरेशन फोर्स के चार सदस्यों को अमृतसर देहात पुलिस ने शुक्रवार की सुबह अजनाला इलाके से गिरफ्तार किया है।

    जानकारी के अनुसार, आरोपित पहले थानों और पुलिस इमारतों पर बोतल बम और ग्रेनेड से हमले कर चुके हैं। बताया जा रहा है कि चारों आरोपितों ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ के इशारे पर 23 जुलाई की आधी रात को सीमावर्ती थाना अजनाला की पुलिस चौकी चमियारी पर बोतल बम फेंका था। घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। हालांकि पुलिस अधिकारी उक्त पुलिस चौकी पर हमले की बात को नकार रहे हैं।

    जोगा सिंह की हत्या में यही गिरोह शामिल
    पुलिस जांच में जुटी है कि विगत में एएसआइ जोगा सिंह की हत्या और आर्मी इलाका खासा के बाहर धमाके भी इसी गिरोह के सदस्यों द्वारा किए गए थे। फिलहाल चारों से पूछताछ जारी है। डीआइजी प्रेस कांफ्रेंस कर सकते हैं। चारों आरोपितों को कोर्ट में पेश कर पुलिस रिमांड हासिल भी किया जाना है।

    पुलिस ने खालिस्तान लिबरेशन आर्मी के सदस्यों की पहचान रमदास निवासी करणबीर सिंह, मनदीप सिंह, सुखदीप सिंह और प्रदीप सिंह के रूप में बताई हैl सभी आरोपितों से पूछताछ जारी है दोपहर 2:00 बजे के बाद चारों और ऑफिसों को कोर्ट में पेश किया जाएगाl पता चला है चारों ने पूछताछ में कई अहम राज खोले हैंl जिन पर जांच जारी है।

  • पापा की यूनिफॉर्म खून से लाल थी’—घायल पुलिसकर्मी की बेटी का छलका दर्द, CJP प्रदर्शन पर उठाए सवाल

    पापा की यूनिफॉर्म खून से लाल थी’—घायल पुलिसकर्मी की बेटी का छलका दर्द, CJP प्रदर्शन पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली

    राजधानी दिल्ली में हाल ही में 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के प्रदर्शन और 'संसद चलो' मार्च के दौरान हुई हिंसा में घायल हुए पुलिसकर्मियों के परिवारों का दर्द अब सामने आया है. हिंसा में गंभीर रूप से चोटिल हुए जवानों के परिजनों ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर  अपनी आपबीती बयां की। 

    प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान परिजनों का भावुक रूप देखने को मिला. घायल पुलिसकर्मी के एक परिजन ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई, "जब मेरे पिता उस दिन ड्यूटी के बाद घर लौटे, तो उनकी खाकी वर्दी खून से पूरी तरह लाल थी. उनके सिर और हाथों पर गंभीर चोटें थीं। 

    दिल्ली पुलिस के एसीपी की पत्नी अवनीत कौर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उस खौफनाक दिन को याद करते हुए बताया, "20 जुलाई की रात जब मेरे पति घायल अवस्था में घर पहुंचे, तो उनकी हालत देखकर मेरी रूह कांप गई. वह दृश्य मेरे और हमारी 2 साल की बेटी के लिए बेहद दर्दनाक और ट्रॉमेटिक था. मेरी मासूम बेटी अपने पिता को उस हालत में देखकर सहम गई थी। 

    मेरे पिता को लिंच करने की कोशिश
    प्रदर्शनकारियों के उग्र रवैये और पुलिस पर हुए हमले पर गंभीर सवाल उठाते हुए अवनीत कौर ने कहा, "लोग यह भूल जाते हैं कि एक पुलिस अधिकारी सिर्फ एक अकेला इंसान या वर्दी नहीं होता. उसके पीछे उसका एक परिवार होता है-उसकी पत्नी, छोटे बच्चे और बूढ़े माता-पिता, जो हर पल घर पर उसके सुरक्षित लौटने का इंतजार करते हैं। 

    घायल सब-इंस्पेक्टर की बेटी ने रोते हुए बताया, "पुलिस में शामिल होने से पहले, मेरे पिता इंडियन नेवी में मरीन कमांडो थे. उन्होंने अपनी ज़िंदगी के 15 साल इंडियन नेवी को दिए. उस दिन मेरे पिता बैरिकेड्स पर तैनात थे, जहां बहुत भारी भीड़ मौजूद थी. पापा अक्सर घर पर बताते थे कि अब यह सिर्फ छात्रों का आंदोलन नहीं रह गया है, इसमें कुछ असामाजिक तत्व घुस चुके हैं। 

    उस खौफनाक दिन को याद करते हुए बेटी ने बताया, "25 तारीख को प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने मेरे पिता को जबरन खींच लिया और उन पर जानलेवा हमला कर दिया. उन्हें लगभग मार ही डाला गया था. हमले के बाद वे 4 घंटे से भी ज्यादा समय तक मौके पर बेहोश पड़े रहे. बाद में जब उनकी टीम के लोग उन्हें किसी तरह बचाकर घर लाए, तो उनकी पूरी वर्दी खून से लथपथ थी. एक तरफ मेरे पिता अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे थे, उनकी वर्दी खून से सनी हुई थी, लेकिन जब मैंने सोशल मीडिया खोला तो देखकर दंग रह गई. सोशल मीडिया पर मेरे पिता को ही एक अपराधी और विलेन की तरह पेश किया जा रहा था। 

    उन्होंने आगे बताया, 'ठीक अगले दिन, मुझे पता चला कि जिन लोगों ने मेरे पिता पर हमला किया था, वे अपने जुर्म को छिपाने के लिए सुप्रीम कोर्ट जा रहे थे और उनके और सभी पुलिसकर्मियों के खिलाफ शिकायतें दर्ज करा रहे थे. मुझे बहुत दुख हुआ और मैंने तय किया कि मुझे भी अपने पिता के लिए न्याय मांगना चाहिए. मुझे पुलिस के अन्य परिवारों का समर्थन मिला, और हम सुप्रीम कोर्ट गए. हमने एक वकील से माननीय सुप्रीम कोर्ट के सामने हमारा पक्ष रखने का अनुरोध किया. वकील ने हमें भरोसा दिलाया कि इस देश के नागरिक के तौर पर हमारे भी समान अधिकार हैं और हमें भी न्याय मिलेगा। 

  • हरियाणा बना स्पोर्ट्स पावरहाउस, खिलाड़ियों को मिले 730 करोड़ रुपये

    हरियाणा बना स्पोर्ट्स पावरहाउस, खिलाड़ियों को मिले 730 करोड़ रुपये

    चंडीगढ़
     मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा आज देश का स्पोर्ट्स पावरहाउस बन चुका है। प्रदेश की आबादी देश की कुल आबादी का केवल दो प्रतिशत होने के बावजूद ओलिंपिक, पैरालिंपिक, एशियाई और राष्ट्रमंडल खेलों में सबसे अधिक पदक जीतने वाले खिलाड़ियों में हरियाणा का दबदबा कायम है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं, आर्थिक प्रोत्साहन और रोजगार उपलब्ध कराकर खेल संस्कृति को लगातार मजबूत कर रही है।

    नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित स्पोर्ट्स, फिटनेस एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर एक्सपो को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में हरियाणा के 17,182 खिलाड़ियों के खातों में सीधे ₹730 करोड़ की प्रोत्साहन राशि भेजी गई है। ओलिंपिक, एशियाई और राष्ट्रमंडल खेलों के स्वर्ण पदक विजेताओं को छह करोड़ तक का नकद पुरस्कार दिया जा रहा है। इसके अलावा 260 उत्कृष्ट खिलाड़ियों को ग्रुप-ए, बी और सी श्रेणी में सीधी सरकारी नौकरी भी दी गई है।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने खेल ढांचे को मजबूत करने के लिए पिछले 12 वर्षों में करीब 1,100 करोड़ खर्च किए हैं। प्रदेश में 2,000 खेल नर्सरियां और 25 खेल अकादमियां संचालित हैं, जहां खिलाड़ियों को प्रतिदिन 500 रुपये का डाइट भत्ता दिया जाता है। 8 से 14 वर्ष के खिलाड़ियों को 1,500 और 15 से 19 वर्ष के खिलाड़ियों को 2,000 प्रतिमाह छात्रवृत्ति भी प्रदान की जा रही है। पंचकूला में 10 करोड़ की लागत से उत्तर भारत का पहला अत्याधुनिक वैज्ञानिक प्रशिक्षण एवं पुनर्वास केंद्र स्थापित किया गया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा का खेल माडल केवल पदक जीतने तक सीमित नहीं है, बल्कि फिटनेस और राष्ट्र निर्माण से भी जुड़ा है। उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहकर खेलों को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि सरकार की नशे के प्रति जीरो टालरेंस की नीति है। वह स्वयं हर महीने युवाओं के साथ मैराथन में भाग लेते हैं और हाल ही में यमुनानगर मैराथन में करीब एक लाख युवाओं ने हिस्सा लिया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने जींद की रैली में हरियाणा को आगामी राष्ट्रमंडल और ओलिंपिक खेलों के लिए नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को तैयार करने का लक्ष्य दिया है। उन्होंने विश्वास जताया कि हरियाणा भविष्य में भी देश के लिए सर्वाधिक पदक जीतकर भारत का गौरव बढ़ाता रहेगा।

    कार्यक्रम में केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया, दिल्ली के गृह, शिक्षा और खेल मंत्री आशीष सूद, बिहार की खेल मंत्री श्रेयसी सिंह, हरियाणा के खेल राज्य मंत्री गौरव गौतम, सूचना, जनसंपर्क और भाषा विभाग के महानिदेशक के मकरंद पांडुरंग शामिल रहे।

  • झारखंड में पीएम सूर्य घर योजना धीमी, सिर्फ 3242 घरों में लगा सोलर

    झारखंड में पीएम सूर्य घर योजना धीमी, सिर्फ 3242 घरों में लगा सोलर

    रांची
     प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का लाभ झारखंड के अधिकांश जरूरतमंद परिवारों तक अब भी नहीं पहुंच सका है। इसका सीधा असर यह है कि हजारों परिवार हर महीने महंगा बिजली बिल चुकाने को मजबूर हैं, जबकि केंद्र सरकार रूफटॉप सोलर लगाने पर लाखों रुपये तक की सब्सिडी और लंबे समय तक बिजली खर्च में राहत देने की सुविधा उपलब्ध करा रही है।

    पर्याप्त धूप और सौर ऊर्जा की अपार संभावनाओं के बावजूद झारखंड इस योजना के क्रियान्वयन में देश के सबसे पिछड़े राज्यों में शामिल हो गया है।

    झारखंड में केवल 3,242 रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए
    लोकसभा में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा 29 जुलाई को दी गई जानकारी के अनुसार, फरवरी 2024 में योजना शुरू होने के बाद से अब तक झारखंड में केवल 3,242 रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए गए हैं। इससे महज 3,463 परिवार लाभान्वित हो सके हैं।

    इसके विपरीत देशभर में 40.07 लाख घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित हो चुके हैं और 48.22 लाख परिवारों को योजना का लाभ मिल चुका है। केंद्र सरकार का लक्ष्य वर्ष 2026-27 तक एक करोड़ घरों को इस योजना से जोड़ना है।

    सिर्फ 360 उपभोक्ताओं का बिजली बिल शून्य
    पूर्वी भारत में झारखंड का प्रदर्शन भी बेहद निराशाजनक रहा है। असम में 1.59 लाख, ओडिशा में 1.41 लाख, छत्तीसगढ़ में 84,317 और बिहार में 24,755 परिवार योजना से जुड़ चुके हैं। झारखंड केवल पश्चिम बंगाल (3,132 परिवार) से थोड़ा आगे है।
    आंकड़े बताते हैं कि झारखंड में अब तक सिर्फ 360 उपभोक्ताओं का बिजली बिल शून्य हुआ है।

    प्रक्रियागत अड़चनें योजना की रफ्तार रोक रही
    विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता की कमी, बैंक ऋण मिलने में देरी, अधिकृत वेंडरों की सीमित संख्या और बिजली वितरण कंपनियों के स्तर पर प्रक्रियागत अड़चनें योजना की रफ्तार रोक रही हैं। यदि इन समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो बड़ी संख्या में परिवार सस्ती और स्वच्छ बिजली के साथ केंद्र सरकार की सब्सिडी के लाभ से भी वंचित रह जाएंगे।

    इसके विपरीत देशभर में 40.07 लाख घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित हो चुके हैं और 48.22 लाख परिवारों को योजना का लाभ मिल चुका है। केंद्र सरकार का लक्ष्य वर्ष 2026-27 तक एक करोड़ घरों को इस योजना से जोड़ना है।

    पश्चिम बंगाल से थोड़ा आगे झारखंड
    पूर्वी भारत में झारखंड का प्रदर्शन भी बेहद निराशाजनक रहा है। असम में 1.59 लाख, ओडिशा में 1.41 लाख, छत्तीसगढ़ में 84,317 और बिहार में 24,755 परिवार योजना से जुड़ चुके हैं। झारखंड केवल पश्चिम बंगाल (3,132 परिवार) से थोड़ा आगे है।

    आंकड़े बताते हैं कि झारखंड में अब तक सिर्फ 360 उपभोक्ताओं का बिजली बिल शून्य हुआ है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता की कमी, बैंक ऋण मिलने में देरी, अधिकृत वेंडरों की सीमित संख्या और बिजली वितरण कंपनियों के स्तर पर प्रक्रियागत अड़चनें योजना की रफ्तार रोक रही हैं। यदि इन समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो बड़ी संख्या में परिवार सस्ती और स्वच्छ बिजली के साथ केंद्र सरकार की सब्सिडी के लाभ से भी वंचित रह जाएंगे।