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  • खाप पंचायत का फरमान, 12 साल से गांव वापसी को तरस रहा परिवार

    खाप पंचायत का फरमान, 12 साल से गांव वापसी को तरस रहा परिवार

    डुंगरपुर
    राजस्थान के डूंगरपुर जिले के रामसागड़ा थाना क्षेत्र से सामाजिक कुरीतियों और खाप पंचायत के तुगलकी फरमान का एक दर्दनाक मामला सामने आया है। यहां एक खाप पंचायत के फैसले के कारण एक पीड़ित विधवा महिला और उसकी बेटी पिछले 12 वर्षों से अपने ही घर नहीं लौट पाई हैं और उन्हें दिल्ली में रहकर दिन काटने पड़ रहे हैं। 17 गांवों के पंचों और मुखियों ने मिलकर इस परिवार का सामाजिक बहिष्कार (हुक्का-पानी बंद) कर रखा है। अब समाज में वापस शामिल करने के नाम पर पीड़ित परिवार पर 21 लाख रुपए का जुर्माना भरने का भारी दबाव बनाया जा रहा है।

    क्या है पूरा मामला?
    मामले की शुरुआत 10 अगस्त 2015 से हुई थी, जब गांव के तीन युवक जन्मदिन मनाने निकले थे और रातभर वापस नहीं लौटे। अगले दिन 11 अगस्त को पुलिस ने एक कुएं से दो युवकों के शव बरामद किए। उदयपुर के मेडिकल बोर्ड द्वारा किए गए पोस्टमार्टम में मौतों का कारण डूबना बताया गया था।

    हालांकि, 12 अगस्त 2015 को मृतकों के परिजनों ने कलेक्ट्रेट परिसर में शव रखकर हंगामा किया और पीड़िता के भाई को हत्या का मुख्य आरोपी बनवा दिया। इसी दौरान गांव के मुखिया और पंचों ने पीड़िता के भाई, पिता और मामा को दोषी मानते हुए उनका हुक्का-पानी बंद कर दिया। घटना के तीन महीने बाद 17 गांवों की महापंचायत बुलाई गई, जहां इस सामाजिक पाबंदी पर पक्की मुहर लगा दी गई।

    क्या कहना है पीड़िता का
    पीड़िता के अनुसार, 29 अगस्त 2015 को रक्षाबंधन के दिन मृतकों के परिजनों ने उसकी मां के साथ मारपीट कर उन्हें गांव से खदेड़ दिया। वर्ष 2016 में जब पीड़िता कॉलेज से पढ़ाई कर लौट रही थी, तब बस स्टैंड पर उसके साथ मारपीट और छेड़छाड़ की गई। इस लगातार प्रताड़ना, बेटी की पढ़ाई छूटने और सामाजिक अपमान के सदमे में पीड़िता के पिता का निधन हो गया। मामले में पुलिस ने पीड़िता के भाई का दिल्ली में नार्को टेस्ट भी कराया था, जिसकी रिपोर्ट पूरी तरह से नेगेटिव आई थी। इसके बावजूद परिवार को राहत नहीं मिली।

    अपनी आपबीती लेकर पीड़िता ने गुरुवार को जिला कलेक्टर देशलदान को ज्ञापन सौंपा और न्याय की गुहार लगाई। पीड़िता ने बताया कि जब भी वे गांव लौटने की कोशिश करते हैं, तो समाज के तथाकथित 'सुप्रीम लीडर' 21 लाख रुपए नकद जमा कराने और 17 गांवों के लोगों को दावत देने की शर्त रखते हैं। पीड़िता का कहना है कि रामसागड़ा थाना पुलिस में पहले भी परिवाद दिया गया था, लेकिन मामला सिर्फ जांच तक ही सीमित रहा।

    क्या कहना है पुलिस का
    इस पूरे मामले पर रामसागड़ा थानाधिकारी कैलाश पंचारिया का कहना है कि पीड़ित पक्ष की शिकायत और परिवाद के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और मामले में नियमानुसार अग्रिम अनुसंधान किया जा रहा है।

  • झज्जर में बनेगा पहला 9 मेगावाट सोलर पावर प्लांट, 25 करोड़ की परियोजना को मिली रफ्तार

    झज्जर में बनेगा पहला 9 मेगावाट सोलर पावर प्लांट, 25 करोड़ की परियोजना को मिली रफ्तार

     झज्जर
     ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में झज्जर जिला एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करने जा रहा है। पहले से ही जिले में दो बड़े तापीय पावर प्लांट संचालित हो रहे हैं, और अब हरित ऊर्जा की दिशा में भी जिले ने मजबूत कदम बढ़ा दिया है। जिले में पहली बार 9 मेगावाट क्षमता का पहला सोलर पावर प्लांट स्थापित किया जा रहा है। करीब 25 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह प्लांट बहु गांव के निकट लगभग 27 एकड़ भूमि पर विकसित किया जा रहा है।

    प्लांट से उत्पादित बिजली हरियाणा ग्रिड के माध्यम से उत्तर क्षेत्र के मेरठ स्थित लोड कंट्रोल सिस्टम तक पहुंचेगी, जहां से ओपन एक्सेस व्यवस्था के तहत सोनीपत स्थित अवतार स्टील प्राइवेट लिमिटेड को आपूर्ति की जाएगी।

    पावर हाउस तक बिछाई जाएगी पांच किलोमीटर लंबी लाइन
    इस परियोजना के लिए सोलर प्लांट से बहु गांव स्थित 132 केवी पावर हाउस तक करीब पांच किलोमीटर लंबी बिजली लाइन बिछाई जाएगी। इसके बाद बिजली हरियाणा ग्रिड में शामिल होकर निर्धारित उपभोक्ता तक पहुंचेगी। पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता घटाने और औद्योगिक क्षेत्र के लिए स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराने की दिशा में यह परियोजना बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    पीएम सूर्यघर योजना से आम जन भी हो रहे आत्मनिर्भर
    केवल बड़े सोलर प्लांट ही नहीं, बल्कि आम नागरिक भी अब सौर ऊर्जा को अपनाने में उत्साह दिखा रहे हैं। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं के माध्यम से लोगों को छतों पर रूफटाप सोलर सिस्टम लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। बिजली निगम की ओर से दी जा रही सब्सिडी और सरल प्रक्रिया के कारण जिले में घरेलू सोलर सिस्टम लगाने वालों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है।

    बता दे कि जिले में बिजली निगम के माध्यम से अब तक लगभग आठ मेगावाट क्षमता के रूफटाप सोलर सिस्टम स्थापित किए जा चुके हैं, जिनमें अधिकांश दो किलोवाट क्षमता के घरेलू सिस्टम हैं। अब तक करीब 4,200 उपभोक्ताओं को सोलर कनेक्शन दिए जा चुके हैं। विभाग का लक्ष्य जिले में 8,532 सोलर सिस्टम स्थापित करने का है, जिसे जल्द पूरा करने की दिशा में कार्य चल रहा है।

    सोलर ऊर्जा अपनाने से बिजली बिल में कमी आने के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन भी घटता है। इससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है और ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता भी बढ़ती है। झज्जर में बनने वाला 9 मेगावाट का यह सोलर पावर प्लांट न केवल जिले की पहचान को नई दिशा देगा, बल्कि नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार को भी मजबूती प्रदान करेगा। -प्रदीप कुमार, कार्यकारी अभियंता, उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम

     

  • 1 अगस्त से राजस्थान में डिजिटल क्रॉप सर्वे की शुरुआत, AI से होगी फसल गिरदावरी

    1 अगस्त से राजस्थान में डिजिटल क्रॉप सर्वे की शुरुआत, AI से होगी फसल गिरदावरी

    जयपुर
     राजस्थान सरकार कृषि क्षेत्र में डिजिटल परिवर्तन की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए एक अगस्त 2026 से प्रदेशभर में खरीफ 2083 (2026-27) डिजिटल क्रॉप सर्वे प्रारम्भ करने जा रही है। यह सर्वे राज्य के 41 जिलों  की 424 ऑनलाइन तहसीलों एवं 50,456 ऑनलाइन राजस्व ग्रामों में किया जाएगा।

    शुक्रवार को निबन्धक, राजस्व मण्डल श्री महावीर प्रसाद की अध्‍यक्षता में आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के तहत एग्रीस्टेक-डिजिटल क्रॉप सर्वे के अंतर्गत फसल खरीफ सम्वत् 2083 की गिरदावरी के संबंध में आवश्यक प्रशिक्षण के साथ ही महत्‍वपूर्ण दिशा-निर्देश प्रदान किये गये।  वीसी में राज्‍य के समस्‍त जिलों के प्रभारी अधिकारी (भू.अभिलेख), समस्त तहसीलदार (भू.अ.), तकनीकी अधिकारी डीसीएस, कृषि आयुक्तालय के अधिकारी, सभी  जिलों के रिसोर्स पर्सन, मास्टर्स ट्रेनर्स आदि उपस्थित रहे

    निबंधक ने डिजिटल क्रॉप सर्वे में हर स्‍तर से अधिकाधिक किसानों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्‍होंने उपखंड अधिकारी एवं तहसीलदारगण से कहा कि वे ऑनलाइन गिरदावरी कार्य की समय समय पर मॉनिटरिंग करें। साथ ही फिल्ड विजिट कर स्‍वयं किसानों से रूबरू होकर उन्‍हें ऑनलाइन गिरदावरी के लाभों से अवगत कराते हुए जागरूकता लायें। उन्होंने इसका व्‍यापक प्रचार प्रसार भी करने के निर्देश दिये।

    4.62 करोड़ से अधिक ऑनलाइन खसरों की होगी गिरदावरी-
    डिजिटल क्रॉप सर्वे के तहत प्रदेश के 4.62 करोड़ से अधिक ऑनलाइन खसरों की नियमानुसार गिरदावरी की जाएगी। इनमें से लगभग 2.86 करोड़ कृषि योग्य खसरों को डिजिटल क्रॉप सर्वे के लिए चिन्हित किया गया है, जहां 20 मीटर खसरा सीमा (Geo-fencing) के भीतर Geo-tagged फसल फोटो एवं डिजिटल सत्यापन के साथ गिरदावरी की जाएगी। शेष खसरों, जिनमें मुख्यतः सरकारी भूमि, गैर-कृषि भूमि एवं पड़त भूमि  की सामान्य ई-गिरदावरी की जाएगी। पटवारी एवं प्राइवेट सर्वेयर के स्‍तर से राज खसरा गिरदावरी मोबाइल एप से ऑनलाइन गिरदावरी करने की सुविधा प्रदान की गई है।

    किसानों की होगी सक्रिय भागीदारी
    इस वर्ष डिजिटल क्रॉप सर्वे में किसानों की प्रत्यक्ष भागीदारी को विशेष महत्व देते हुए राज्य सरकार ने डीसीएस हेतु लक्षित खसरों में से 25 प्रतिशत खसरों की गिरदावरी स्वयं किसानों द्वारा किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इससे फसल संबंधी आंकड़ों की गुणवत्ता में सुधार होगा तथा किसानों की सहभागिता भी सुनिश्चित होगी। किसान स्वयं के मोबाइल पर राजकिसान गिरदावरी एप डाउनलोड कर ऑनलाइन गिरदावरी कर सकेंगे।

    पहली बार AI आधारित गुणवत्ता परीक्षण
    खरीफ 2083 डिजिटल क्रॉप सर्वे में पहली बार Artificial Intelligence (AI) आधारित गुणवत्ता परीक्षण प्रणाली लागू की जा रही है। सर्वेक्षण के दौरान अपलोड किए गए फसल फोटोग्राफ एवं दर्ज फसल विवरण का AI के माध्यम से स्वतः विश्लेषण किया जाएगा। यह प्रणाली संभावित त्रुटियों, असंगतियों तथा अनुपयुक्त फोटोग्राफ की पहचान कर सर्वेक्षण की गुणवत्ता एवं विश्वसनीयता को और अधिक सुदृढ़ बनाएगी।

    सेन्ट्रॉइड डिटेक्शन से बढ़ेगी सर्वे की सटीकता
    खरीफ गिरदावरी में खसरे पर सेन्ट्रॉइड डिटेक्शन तकनीक का भी उपयोग किया जाएगा, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि सर्वेयर या पटवारी द्वारा गिरदावरी संबंधित खसरे के वास्तविक क्षेत्र और खसरे की दिशा में सही एंगल से फसल की फोटो लेते हुए गिरदावरी की जाये। यह तकनीक गिरदावरी की सटीकता, पारदर्शिता एवं प्रामाणिकता को और अधिक मजबूत बनाएगी।

    कृषि योजनाओं के लिए बनेगा विश्वसनीय आधार
    डिजिटल क्रॉप सर्वे से प्राप्त आंकड़े फसल उत्पादन आकलन, कृषि सांख्यिकी, कृषि नीति निर्माण, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्राकृतिक आपदा राहत तथा विभिन्न किसान कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण आधार प्रदान करेंगे।

    राजस्व विभाग द्वारा सभी जिलों में सर्वेक्षण के सफल संचालन हेतु तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। अधिकारियों एवं कार्मिकों का प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता, हेल्पडेस्क व्यवस्था तथा सतत मॉनिटरिंग की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, ताकि निर्धारित समय सीमा में गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी एवं समयबद्ध डिजिटल क्रॉप सर्वे सफलतापूर्वक सम्पन्न किया जा सके।

  • बिहार में 6000 करोड़ का इस्पात उद्योग, गयाजी में लगेगा बड़ा प्लांट

    बिहार में 6000 करोड़ का इस्पात उद्योग, गयाजी में लगेगा बड़ा प्लांट

     पटना
     बिहार के औद्योगिक विकास को नई गति मिल रही है। इसी क्रम में गुरुवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की उपस्थिति में लोक सेवक आवास स्थित संकल्प सभागार में छह हजार करोड़ रुपये के प्रस्तावित बड़े एकीकृत इस्पात उद्योग की स्थापना के लिए महाशक्ति समूह एवं उद्योग विभाग के बीच एमओयू हुआ।

    यह परियोजना गयाजी जिले में स्थापित की जाएगी। फैक्ट्री की उत्पादन क्षमता 1.0 से 1.5 मिलियन टन प्रति वर्ष होगी।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार सरकार राज्य में उद्योगों के अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

    निवेशकों को बेहतर आधारभूत संरचना, पारदर्शी नीतियां तथा त्वरित प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है। राज्य में बड़े निवेश आकर्षित हो रहे हैं।

    रोजगार के मिलेंगे अवसर
    उन्होंने कहा कि इस्पात परियोजना के स्थापित होने से स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। साथ ही इससे सहायक एवं लघु उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्राप्त होगी।

    मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि बिहार इंडस्ट्रियल एरिया डेवलपमेंट अथारिटी (बियाडा), उद्योग विभाग एवं निवेशक संस्थानों के समन्वित प्रयासों से यह परियोजना निर्धारित समय सीमा में आगे बढ़ेगी और राज्य के औद्योगिक विकास के नए अध्याय की शुरुआत करेगी।

    कार्यक्रम में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार एवं अन्य पदाधिकारीगण के अतिरिक्त महाशक्ति ग्रुप के अनमोल लोढ़ा तथा विष्णु नाथ के अतिरिक्त महाशक्ति ग्रुप के पदाधिकारी उपस्थित थे।

  • जंतर-मंतर प्रदर्शन रोकने की खबर फर्जी, दिल्ली पुलिस ने किया बड़ा खुलासा

    जंतर-मंतर प्रदर्शन रोकने की खबर फर्जी, दिल्ली पुलिस ने किया बड़ा खुलासा

    नई दिल्ली
     राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन भले ही खत्म हो गया हो। लेकिन कुछ आसामजिक तत्व में इन दिनों समाज में भ्रम फैलाने की मंशा से प्रदर्शन से जुड़ी कई वीडियो और उनसे जुड़ी कई बातों को तोड़ मरोड़ के वायरल करवा रहे हैं और दिल्ली पुलिस उन पर सख्ती से कार्रवाई कर रही है। इसी कड़ी में दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पर एक और दावे को फर्जी करार दिया है जिसमें कहा जा रहा था कि जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने पर रोक लगा दी गई है।

    दिल्ली पुलिस ने दिया स्पष्टीकरण
    दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पर किए जा रहे इन दावों को बृहस्पतिवार को 'झूठ और भ्रामक' बताया कि जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने पर रोक लगा दी गई है।
    पुलिस ने कहा कि यह जगह अब भी अनुमति लेकर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों के लिए उपलब्ध है।

    अभी भी नियमों के हिसाब से कर सकते हैं प्रदर्शन
    दिल्ली पुलिस ने स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर फैल रही यह अफवाह पूरी तरह बेबुनियाद और तथ्यहीन है कि अब जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं है। पुलिस ने कहा कि जंतर-मंतर अब भी शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के लिए अधिकृत स्थान है। यहां सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और अदालती आदेश के अनुरूप दिल्ली पुलिस द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार प्रदर्शन किए जा सकते हैं।

    दिल्ली पुलिस ने लोगों से की अपील
    मौजूदा एसओपी के तहत, सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी मिलने पर जंतर-मंतर पर अधिकतम 1,000 लोगों के जुटने की अनुमति दी जा सकती है। इससे पहले सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा था कि जंतर मंतर को विरोध-प्रदर्शनों के लिए बंद कर दिया गया है। पुलिस ने लोगों से अपील की कि वे अपुष्ट सूचना पर भरोसा न करें और न ही उसे आगे फैलाएं।
    पुलिस ने कहा कि सही और प्रमाणिक जानकारी के लिए केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।

  • राजस्थान में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की समीक्षा, एक करोड़ परिवारों को मिल रहा लाभ

    राजस्थान में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की समीक्षा, एक करोड़ परिवारों को मिल रहा लाभ

    जयपुर
    मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि राज्य सरकार समाज के कमजोर, जरूरतमंद एवं वंचित वर्गों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ शिक्षा, पोषण एवं आर्थिक सशक्तिकरण सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना, उत्तर मैट्रिक छात्रवृत्ति एवं पालनहार योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश के लगभग एक करोड़ परिवारों को प्रत्यक्ष लाभ मिल रहा है।

    मुख्य सचिव शुक्रवार को शासन सचिवालय में आयोजित सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना, उत्तर मैट्रिक छात्रवृत्ति एवं पालनहार योजना की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।

    डेटा आधारित मॉनिटरिंग पर जोर
    मुख्य सचिव ने योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता एवं दक्षता बढ़ाने के लिए राज्य के सभी पेंशनरों के आंकड़ों का समुचित विश्लेषण करने हेतु प्रभावी डेटा डैशबोर्ड विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि तकनीक आधारित मॉनिटरिंग से योजनाओं का संचालन अधिक प्रभावी एवं पारदर्शी बनाया जा सकेगा।

    जिला-वार आंकड़ों का हो क्रॉस वेरिफिकेशन
    मुख्य सचिव ने जिला-वार पेंशनरों के आंकड़ों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को आंकड़ों का क्रॉस वेरिफिकेशन कर वास्तविक पात्र लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पेंशन स्वीकृति एवं वितरण में आने वाली सभी प्रकार की बाधाओं को दूर किया जाएं। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी पात्र व्यक्ति पेंशन से वंचित न रहे तथा लंबित प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण किया जाए। मुख्य सचिव ने पिछली बैठक में दिए गए निर्देशों की अनुपालना की भी समीक्षा की और अधिकारियों को सभी कार्य निर्धारित समयसीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए।

    'समाधान साथी' ऐप के व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश
    बैठक के दौरान उन्होंने विभाग द्वारा विकसित 'समाधान साथी' ऐप की सराहना करते हुए इसे जनहित में एक अभिनव पहल बताया। उन्होंने कहा कि इस ऐप के माध्यम से आमजन घर बैठे पेंशन, छात्रवृत्ति एवं अन्य योजनाओं से संबंधित जानकारी प्राप्त करने के साथ-साथ आवेदन की स्थिति भी जान सकते हैं। उन्होंने ऐप के व्यापक प्रचार-प्रसार एवं अधिकाधिक लोगों तक इसकी जानकारी पहुंचाने के निर्देश दिए।

    लगभग एक करोड़ परिवारों को मिल रहा है प्रत्यक्ष लाभ
    बैठक में बताया गया कि इन योजनाओं के माध्यम से प्रदेश के लगभग एक करोड़ परिवारों को प्रत्यक्ष लाभ मिल रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य की सबसे बड़ी सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत लगभग 90 लाख लोगों को पेंशन का लाभ दिया जा रहा है, जिस पर प्रतिवर्ष करीब 17 हजार करोड़ रुपये व्यय किए जाते हैं। इसी प्रकार पालनहार योजना के माध्यम से अनाथ एवं जरूरतमंद बच्चों की देखभाल करने वाले परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। इस योजना से लगभग 6.10 लाख बच्चे लाभान्वित हो रहे हैं तथा इस पर प्रतिवर्ष करीब 1,200 करोड़ रुपये व्यय किए जाते हैं। उन्होंने बताया कि उत्तर मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत लगभग 4.11 लाख विद्यार्थियों को शिक्षण शुल्क की प्रतिपूर्ति एवं अनुरक्षण भत्ता प्रदान किया जा रहा है। इस योजना पर प्रतिवर्ष करीब 550 करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं।

  • मुंशी प्रेमचंद की जयंती: रांची विवि में 50 शोध और 8 डी. लिट

    मुंशी प्रेमचंद की जयंती: रांची विवि में 50 शोध और 8 डी. लिट

    रांची
     आम आदमी के किरदार को कागज पर उकेरने वाले महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद की आज जयंती है। बच्चों से लेकर बुर्जुग तक शायद ही कोई ऐसा होगा जो मुंशी प्रेमचंद की कहानियों से ओतप्रोत नहीं हुआ होगा।

    ये कथाकार वर्षों पहले भी प्रासंगिक थे और वर्तमान समय में भी इनकी प्रासंगिकता बनी हुई है। रांची विश्वविद्यालय में हिंदी विषय में शोधार्थियों की पहली पसंद मुंशी प्रेमचंद हैं और यूजी और पीजी के कोर्स में भी इनकी कहानियों को पढ़ाया जाता है।

    बचपन में छात्रों ने ईदगाह से लेकर बड़े होने वाले स्नातक के विद्यार्थियों ने गोदान और गबन जैसी कहानियों से रूबरू हुए हैं। रांची विवि में मुंशी प्रेमचंद पर आठ से अधिक डि लिट हो चुके हैं और 50 से अधिक शोध हो चुके हैं।

    रांची विवि में 50 से अधिक शोध और आठ डी. लिट
    हिंदी साहित्य में प्रेमचंद जैसा कोई कथाकार नहीं रहा और यही वजह है कि अन्य साहित्यकारों की तुलना में शोधार्थी मुंशी प्रेमचंद पर अधिक शोध करना पसंद करते हैं। जिसका सबसे बड़ा परिणाम है कि अब तक रांची विवि में मुंशी प्रेमचंद पर आठ डी. लिट हो चुके हैं और 50 से अधिक शोध।

    प्रेमचंद से जुड़े विषयों पर काम करने वाले और प्रसिद्ध साहित्यकार कमल किशोर गोयनका ने भी 1984 में रांची विवि के हिंदी विभाग के डा. वचनदेव कुमार के देखरेख में डी. लिट किया था। जिसका विषय था। प्रेमचंद का जीवन।

    हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. हीरानंद प्रसाद ने बताया कि शोधार्थियों की पहली पसंद हैं मुंशी प्रेमचंद। इन्हीं से जुड़े साहित्य और इनकी लिखी किताबों पर विद्यार्थी सबसे अधिक शोध करना पसंद करते हैं।

    नौंवी से यूजी और पीजी कोर्स में भी पढ़ाये जाते हैं मुंशी प्रेमचंद
    केवल शोध तक ही नहीं बल्कि नौंवी से लेकर पीजी तक की पढ़ाई में मुंशी प्रेमचंद के कहानियों को शामिल किया गया है। निचली और उच्च कक्षाएं और इसके अलावा कई राज्यों के बोर्डों (जैसे यूपी बोर्ड, बिहार बोर्ड, झारखंड बोर्ड आदि) की छठी से आठवीं व 12वीं कक्षा की सहायक हिंदी पुस्तकों में भी उनकी कहानियां जैसे ईदगाह, पंच परमेश्वर, और बूढ़ी काकी शामिल रहती हैं।

    कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर पर बीए और एमए की हिंदी साहित्य डिग्री कक्षाओं में उनके उपन्यास जैसे गोदान, गबन, और निर्मला विशेष अध्ययन के रूप में पढ़ाए जाते हैं। रांची विवि के पीजी के तीसरे सेमेस्टर में गोदान और गबन कहानियों और यूजी में भी सेमेस्टर थ्री में मुंशी प्रेमचंद की कहानियों को पढ़ाया जाता है।

    मुंशी प्रेमचंद की कुछ प्रमुख कहानियां
    उन्होंने अपने जीवनकाल में 300 से अधिक कहानियां लिखीं, जो समाज, गरीबों और किसानों के जीवन पर आधारित हैं। ईदगाह, बड़े भाई साहब, कफन, नमक का दारोगा, पंच परमेश्वर, दो बैलों की कथा, पूस की रात, मंत्र, गबन, गोदान, बूढ़ी काकी – बुजुर्गों के प्रति उपेक्षा और संवेदना की कहानी। बड़े घर की बेटी, ठाकुर का कुआं, सवा सेर गेहूं, आत्माराम सहित कई कहानियां शामिल हैं।

    स्कूली पाठ्यक्रम से लेकर उच्च शिक्षा तक में अध्ययन
    मुंशी प्रेमचंद की रचनाओं का दायरा सिर्फ शोध तक सीमित नहीं है, यह स्कूली शिक्षा से लेकर विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम की रीढ़ है।

    • स्कूली स्तर: विभिन्न राज्यों के बोर्डों (जैसे झारखंड, बिहार, यूपी बोर्ड आदि) की छठी से आठवीं व 12वीं कक्षा की हिंदी पुस्तकों में 'ईदगाह', 'पंच परमेश्वर', और 'बूढ़ी काकी' जैसी प्रसिद्ध कहानियां पढ़ाई जाती हैं।
    • ग्रेजुएशन और पोस्ट-ग्रेजुएशन (BA & MA): कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर पर बीए और एमए की कक्षाओं में उनके उपन्यास विशेष अध्ययन के रूप में शामिल हैं।
    • रांची विवि का पाठ्यक्रम: रांची विश्वविद्यालय के पीजी (PG) के तीसरे सेमेस्टर में 'गोदान' और 'गबन' उपन्यासों के साथ-साथ यूजी (UG) के सेमेस्टर 3 में भी उनकी विशेष कहानियों को पाठ्यक्रम में पढ़ाया जाता है।
  • राजस्थान में अगले 5 दिन बारिश का अलर्ट, कई जिलों में ऑरेंज और येलो चेतावनी

    राजस्थान में अगले 5 दिन बारिश का अलर्ट, कई जिलों में ऑरेंज और येलो चेतावनी

    जयपुर
    राजस्थान में पिछले 24 घंटे में सबसे ज्यादा बारिश बांसवाड़ा जिले के कुशलगढ़ में 7 सेमी बारिश दर्ज हुई। वहीं बांसवाड़ा के उड़ा, दानपुर और सज्जनगढ़ में 5-5 सेमी और अजमेर जिले के जियोला और सरवर में भी 5-5 सेमी बारिश दर्ज की गई। इसी बीच मौसम विभाग ने अगले 5 दिन के लिए येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए बारिश की संभावना जताई है। ऐसे में अगस्त के शुरू होते ही राजस्थान में झमाझम बारिश होने की पूरी संभावना है।

    1 अगस्त को 2 जिलों में ऑरेंज और 22 जिलों में येलो अलर्ट
    मौसम विभाग ने 1 अगस्त को बांसवाड़ा, डूंगरपुर, सलूम्बर, उदयपुर और बाड़मेर में भारी बारिश, मेघगर्जन-वज्रपात और 40KMPH की स्पीड से हवाएं चलने का येलो अलर्ट जारी किया है। वहीं चित्तौड़गढ़, झालावाड़, झुंझुनूं, प्रतापगढ़, राजसमंद, सीकर, बालोतरा, बीकानेर, चूरू, डीडवाना-कुचामन, हनुमानगढ़, जैसलमेर, जोधपुर, नागौर, पाली, फलौदी और श्रीगंगागर में बारिश मेघगर्जन-वज्रपात और 40KMPH की स्पीड से हवाएं चलने का येलो अलर्ट जारी किया है। इसके साथ ही सिरोही और जालौर में अतिभारी बारिश, मेघगर्जन-वज्रपात और 40KMPH की स्पीड से तेज हवाएं चलने का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

    2 अगस्त को 20 जिलों में बारिश, मेघगर्जन-वज्रपात और हवाएं चलने का येलो अलर्ट और बाड़मेर-जालोर में अतिभारी बारिश, मेघगर्जन-वज्रपात और तेज हवाएं चलने का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

    3 अगस्त को अलवर, भरतपुर, दौसा, डीग, धौलपुर, झुंझुनूं, करौली, खैरथल-तिजारा, कोटपूतली-बहरोड़, सिरोही, बालोतरा, बाड़मेर, बीकानेर, चूरू, डीडवाना-कुचामन, हनुमानगढ़, जैसलमेर, जालौर, जोधपुर, नागौर, पाली, फलौदी, श्रीगंगागर और सीकर में मेघगर्जन-वज्रपात और हवाएं चलने का येलो अलर्ट जारी किया है।

    4 अगस्त को अलवर, भरतपुर, दौसा, डीग, धौलपुर, जयपुर, झुंझुनूं, करौली, खैरथल-तिजारा, कोटपूतली-बहरोड़, सवाईमाधोपुर, टोंक, सीकर, बीकानेर, चूरू, डीडवाना-कुचामन, और श्रीगंगागर में मेघगर्जन-वज्रपात और हवाएं चलने का येलो अलर्ट जारी किया है।

    5 अगस्त को भरतपुर, कोटा, अजमेर, उदयपुर और बीकानेर संभाग में कहीं-कहीं बारिश होने की संभावना है।

    कहां-कितनी हुई बारिश
    राज्य के पूर्वी भाग में कहीं-कहीं मेघगर्जन के साथ कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश और 1-2 स्थानों पर भारी बारिश दर्ज हुई। वहीं पश्चिमी भाग में कहीं-कहीं मेघगर्जन के साथ झोंकदार तेज हवाएं चली और हल्की बारिश दर्ज हुई।

    पूर्वी राजस्थान के जयपुर, भरतपुर, अजमेर, उदयपुर संभाग के ज्यादातर भागों में आगामी 5-6 दिन मानसून सक्रिय रहने तथा मध्यम से कहीं-कहीं तेज बारिश होने की प्रबल संभावना है। इस दौरान राज्य के उदयपुर संभाग व आसपास के जिलों में कहीं-कहीं भारी/अतिभारी बारिश होने की संभावना है।

    पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर, बीकानेर संभाग के कुछ भागों में भी 31 जुलाई से बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी होने की संभावना है। इस दौरान जोधपुर संभाग के दक्षिणी भागों में भी 31 जुलाई से 2 अगस्त के दौरान कहीं-कहीं भारी/अतिभारी बारिश होने की संभावना है।

  • जोधपुर में 54 लाख के विकास कार्यों का लोकार्पण, मंत्री ने गिनाईं उपलब्धियां

    जोधपुर में 54 लाख के विकास कार्यों का लोकार्पण, मंत्री ने गिनाईं उपलब्धियां

    जोधपुर
    जोधपुर जिलें की ग्राम पंचायत चाली- सेवाला में विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं शिलान्यास समारोह शुक्रवार को राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय चाली में संसदीय कार्य, विधि एवं विधिक मंत्री जोगाराम पटेल के मुख्य आतिथ्य में आयोजित हुआ। कार्यक्रम में 54.50 लाख रुपये की लागत के 8 विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास किया गया।

    रीडिंग प्रमोशन कैम्पेन का शुभारंभ
    पटेल ने कहा यशस्वी मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कुशल नेतृत्व में प्रदेश सरकार हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए कटिबद्ध है। उन्होंने कहा कि प्रदेश भर में ‘मिशन पढ़ो राजस्थान’ के अंतर्गत रीडिंग प्रमोशन कैम्पेन का शुभारंभ किया गया है। उन्होंने कहा हमारा संकल्प है कि विद्यार्थियों में पढ़ने की बुनियादी क्षमता विकसित होने के साथ ही अध्ययन संस्कृति को बढ़ावा मिले और विद्यालयों में सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण निर्मित हो।

    1 लाख 78 हजार से अधिक युवाओं को मिली नियुक्ति
     पटेल ने कहा कि युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में प्रदेश सरकार अनवरत काम कर रही हैं। उन्होंने कहा ढाई वर्षों में 1 लाख 78 हजार से अधिक पदों पर युवाओं को नियुक्ति दी जा चुकी हैं। वहीं, 1 लाख 32 हजार से अधिक पदों पर भर्तियां प्रक्रियाधीन व 70 हजार से अधिक पदों पर भर्ती की तैयारियां की जा रही हैं। उन्होंने हा कि सरकार द्वारा भर्ती प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता के साथ सम्पादित किया जा रहा है और पेपर लीक माफिया के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की गई है।

    निःशुल्क यूनिफॉर्म के लिए 250 करोड़ रुपये की राशि डीबीटी
    संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि कक्षा 1 से 8 में अध्यनरत 40 लाख से अधिक पात्र विद्यार्थियों को निःशुल्क यूनिफॉर्म के लिए 250 करोड़ रुपये की राशि डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरित की गई। उन्होंने सभी विद्यार्थियों को अपनी रुचि के खेल, नवाचार और पढ़ाई के बीच समन्वय को लेकर प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि युवा शक्ति ही हमारे देश के सुदृढ़ भविष्य की नींव है।

    अधिकाधिक पेड़ लगाने का किया आह्वान
    विधि मंत्री ने वृक्षारोपण कर सभी ग्रामवासियों से अधिकाधिक पेड़ लगाने का आह्वान किया। उन्होंने नव प्रवेशित बच्चों का सम्मान किया और प्रवेशोत्सव कार्यक्रम के तहत नामांकन वृद्धि की सराहना की।

    इन कार्यों का हुआ लोकार्पण
    – राजस्व ग्राम चाली के सार्वजनिक श्मशान भूमि खसरा सं. 155/80 में खरंजा निर्माण (विधायक निधि) -लागत राशि 5 लाख
    – रा.उ.मा.वि. चाली में अपूर्ण ब्लॉक खरंजा निर्माण (विधायक निधि)- लागत राशि 10 लाख
    – ग्राम पंचायत भवन परिसर में अपूर्ण खरंजा निर्माण (विधायक निधि)-लागत राशि 5 लाख
    – ग्राम पंचायत परिसर में खरंजा मय टांका निर्माण कार्य -लागत राशि 6 लाख
    – राउमावि चाली में पिंक शौचालय टॉयलेट का निर्माण – लागत राशि 4.50 लाख
    – ⁠राजस्व ग्राम चाली में श्मशान भूमि की चार दीवारी निर्माण कार्य- लागत राशि 10 लाख

    इन कार्यों का हुआ शिलान्यास
    – ⁠राजस्व ग्राम चाली में श्मशान भूमि में चबुतरा एवं टिन शेड निर्माण- लागत राशि: 10 लाख
    – ⁠राजस्व गांव चाली के समुद्रा नाडा में घाट निर्माण – लागत राशि 4 लाख

     

  • बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेस-वे की डीपीआर शुरू, दो हाई-स्पीड कॉरिडोर पर बढ़ा सस्पेंस

    बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेस-वे की डीपीआर शुरू, दो हाई-स्पीड कॉरिडोर पर बढ़ा सस्पेंस

     बक्सर
     बिहार के पश्चिमी छोर पर स्थित बक्सर को राज्य के पूर्वी हिस्से से जोड़ने वाले 'बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेस-वे' (हाई-स्पीड कॉरिडोर) के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) बनाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

    लोकसभा में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से एक प्रश्न के लिए दिए गए उत्तर में स्पष्ट किया गया है कि इस एक्सप्रेस-वे की डीपीआर तैयार करने के लिए इसी साल 13 जनवरी को आधिकारिक तौर पर कंसल्टेंट (परामर्शदाता) की नियुक्ति कर दी गई है।

    ब्राउनफील्ड परियोजना
    यह कार्य एनएचएआई के माध्यम से हो रहा है, जिसमें मुख्य रूप से बक्सर से पटना, मोकामा और मुंगेर होते हुए एनएच के मौजूदा स्ट्रेच को एक्सप्रेस-वे या हाई स्पीड कॉरिडोर के रूप में विकसित करने की संभावना पर जोर दिया जा रहा है। यह एक ब्राउनफील्ड परियोजना है।

    ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे
    आपको बता दें कि बक्सर से भागलपुर के बीच ही एक पूर्णत: नए ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे का डीपीआर तैयार करने की जिम्मेदारी बिहार सरकार के पथ निर्माण विभाग ने बिहार राज्य पथ विकास निगम को सौंपी है। इसके लिए भी निविदा प्रकाशित हो चुकी है।

    क्या बनेंगे 2 हाई-स्पीड कॉरिडोर?
    अब सभी का ध्यान इस बात पर है कि क्या बिहार और केंद्र की सरकारें बक्सर से भागलपुर के बीच दो अलग-अलग एक्सप्रेस-वे बनाएंगी या इनमें से कोई एक योजना रद की जाएगी।