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  • NH-48 पर बड़ा बदलाव, गुरुग्राम-जयपुर हाईवे हुआ बैरियर-फ्री, टोल ऑटोमैटिक कटेगा

    NH-48 पर बड़ा बदलाव, गुरुग्राम-जयपुर हाईवे हुआ बैरियर-फ्री, टोल ऑटोमैटिक कटेगा

    जयपुर
    राष्ट्रीय राजमार्ग 48 (NH-48) पर गुरुग्राम से जयपुर के बीच रोजाना सफर करने वाले लाखों यात्रियों, ट्रांसपोर्टरों और पर्यटकों के लिए आज 1 अगस्त 2026 की तारीख ऐतिहासिक साबित हो रही है। दरअसल, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इस 270 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर को पूरी तरह से बैरियर-फ्री करते हुए 'मल्टी-लेन फ्री फ्लो' (MLFF) टोल कलेक्शन सिस्टम में तब्दील कर दिया है। राजस्थान-हरियाणा बॉर्डर पर स्थित प्रसिद्ध शाहजहांपुर टोल प्लाजा पर इस अत्याधुनिक सिस्टम के लाइव होते ही अब गाड़ियों को टोल देने के लिए लंबी कतारों में खड़ा नहीं होना पड़ेगा। अब वाहन चालक बिना अपनी स्पीड कम किए सीधे हाईवे गेंट्री के नीचे से गुजर सकेंगे और उनका टोल अपने आप उनके लिंक FASTag खाते से कट जाएगा।

    बता दें कि राजस्थान के मनोहरपुरा और दौलतपुर प्लाजा पहले ही इस तकनीक से लैस हो चुके थे, जिसके बाद शाहजहांपुर अंतिम पड़ाव था। इस ऐतिहासिक बदलाव से न सिर्फ ईंधन की भारी बचत होगी बल्कि दिल्ली से जयपुर के बीच लगने वाले समय में भी काफी हद तक कम हो सकेगा।

    क्या है फ्री-फ्लो टोलिंग और कैसे काम करेगा यह नया सिस्टम?
    फ्री-फ्लो टोलिंग तकनीक का मुख्य मकसद हाईवे पर गाड़ियों की स्पीड को बिना प्रभावित किए टोल कलेक्शन को पूरा करना है।

    हाई-परफॉर्मेंस RFID और ANPR कैमरे: हाईवे के ऊपर बने लोहे के विशाल गेंट्री फ्रेम पर हाई-टेक RFID रीडर और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरे लगाए गए हैं।

    फुल स्पीड में स्कैनिंग: जब भी कोई कार या ट्रक 80 से 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से इन गेंट्री के नीचे से गुजरता है, तो कैमरे और रीडर सेकेंड के सौवें हिस्से में वाहन के विंडशील्ड पर लगे FASTag और नंबर प्लेट को स्कैन कर लेते हैं।

    ऑटोमैटिक डिडक्शन: FASTag से लिंक बैंक खाते से तय टोल राशि अपने आप कट जाती है और चालक के मोबाइल पर तुरंत मैसेज प्राप्त हो जाता है।

    1. 270 किमी का कॉरिडोर पूरी तरह बैरियर-फ्री
    गुरुग्राम से जयपुर तक अब एक भी टोल बूथ पर बूम-बैलियर गिरा हुआ नहीं मिलेगा। पूरी सड़क अब फ्री-वे की तरह काम करेगी।

    2. शाहजहांपुर बना अंतिम लिंक
    राजस्थान के दौलतपुर और मनोहरपुरा टोल प्लाजा पहले ही MLFF से जुड़ चुके थे। 1 अगस्त 2026 से शाहजहांपुर टोल प्लाजा पर भी यह व्यवस्था पूरी तरह लाइव हो गई है

    3. जाम और प्रदूषण से मुक्ति
    टोल बूथों पर लगने वाली 15 से 30 मिनट की लंबी कतारों से मुक्ति मिलेगी। इससे गाड़ियों का ईंधन बचेगा और प्रदूषण में भारी कमी आएगी।

    4. FASTag में पर्याप्त बैलेंस अनिवार्य
    NHAI ने साफ निर्देश जारी किए हैं कि यात्रा शुरू करने से पहले चालक अपने FASTag में पर्याप्त बैलेंस जरूर जांच लें, क्योंकि कम बैलेंस होने पर सिस्टम तुरंत गाड़ी को ब्लैकलिस्ट श्रेणी में डाल देगा।

    5. 72 घंटे का नियम और इलेक्ट्रॉनिक नोटिस
    अगर किसी वाहन का FASTag अमान्य, खराब या बैलेंस रहित पाया जाता है, तो MLFF सिस्टम तुरंत वाहन स्वामी के पास इलेक्ट्रॉनिक नोटिस भेजेगा।

    6. डबल पेनल्टी (दोगुना जुर्माना)
    नोटिस जारी होने के 72 घंटे के भीतर यदि बकाया टोल राशि का भुगतान नहीं किया गया, तो वाहन मालिक पर दोगुना टोल शुल्क (Double Penalty) लागू कर दिया जाएगा।

    7. ANPR कैमरे से ट्रैकिंग
    यदि FASTag काम नहीं कर रहा है, तो हाईवे गेंट्री पर लगे ANPR कैमरे वाहन के नंबर प्लेट से चालान और बकाया टोल सीधे वाहन पोर्टल से जोड़ देंगे।

    8. राजस्थान के यात्रियों को सबसे बड़ा फायदा
    जयपुर, कोटपूतली, बहरोड़, नीमराणा, अलवर और शाहजहांपुर के दैनिक यात्रियों को अब बिना किसी रुकावट के तेज रफ्तार कनेक्टिविटी मिलेगी।

    9. देशभर में विस्तार की योजना
    आर्थिक समीक्षा (Economic Survey 2025-26) के अनुसार, वर्तमान में यह MLFF सिस्टम गुजरात के चोरयासी (NH-48), दिल्ली के मुंडका (UER-II), हरियाणा के घरौंडा (NH-44) और राजस्थान के मनोहरपुरा, दौलतपुर व शाहजहांपुर में लागू हो चुका है।

    10. मार्च 2029 तक पूरा देश होगा बैरियर-फ्री
    केंद्र सरकार का लक्ष्य मार्च 2029 तक देश के सभी 4-लेन और उससे चौड़े राष्ट्रीय राजमार्गों तथा एक्सप्रेसवे को पूरी तरह से इसी तरह फ्री-फ्लो टोलिंग सिस्टम में बदलने का है।

    बिना बैलेंस सफर करने वालों के लिए सख्त चेतावनी
    NHAI और यातायात पुलिस ने स्पष्ट किया है कि बैरियर हटने का मतलब टोल फ्री होना बिल्कुल नहीं है। यदि कोई चालक बिना FASTag या बिना बैलेंस के इस कॉरिडोर से गुजरता है, तो गेंट्री कैमरे उसकी गाड़ी की हर एंगल से एचडी फोटो और वीडियो रिकॉर्ड कर लेंगे।

    72 घंटे की समयसीमा बीत जाने के बाद परिवहन विभाग के एकीकृत सिस्टम के जरिए गाड़ी पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इसलिए राजस्थान और दिल्ली-एनसीआर के बीच यात्रा करने वाले सभी वाहन मालिकों को सला

  • फ्रीहोल्ड’ नीति पर अनिल विज की आपत्ति, बोले- सरकार पर पड़ेगा भारी आर्थिक बोझ

    फ्रीहोल्ड’ नीति पर अनिल विज की आपत्ति, बोले- सरकार पर पड़ेगा भारी आर्थिक बोझ

    अंबाला.

    अंबाला छावनी की 1065 एकड़ एक्साइज भूमि को फ्रीहोल्ड करने की पॉलिसी हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में आई, लेकिन अंबाला छावनी से विधायक एवं परिवहन मंत्री अनिल विज के कड़े विरोध के बाद इसे मंजूरी नहीं मिल पाई।

    दशकों से इस जमीन पर काबिज हजारों परिवारों पर पड़ने वाले मोटे अतिरिक्त बोझ का विज ने विरोध किया और तर्क दिया कि पॉलिसी बनाने वाले अधिकारी, मुख्यमंत्री और वे स्वयं इस बनाई गई नीति पर विचार विमर्श करें। उसके बाद इस नीति को लागू किया जाए। इस पर प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी सहमति जताई जिसके चलते यह पॉलिसी को हरी झंडी नहीं मिल पाई। अब इस पॉलिसी को लेकर विचार विमर्श किया जाएगा ताकि सौ प्रतिशत जनता इस पॉलिसी का लाभ उठा सके। लंबे समय से अंबाला छावनी को फ्रीहोल्ड करने की मांग उठ रही है। इस मांग पर जनता पर अतिरिक्त बोझ न पड़ जाए जिसका विरोध हो, इसलिए इस पर अध्ययन करने की मांग विज ने उठाई।

    1065 एकड़ एक्साइज्ड एरिया का वर्षों पुराना मामला
    अंबाला छावनी के 1065 एकड़ एक्साइज्ड एरिया की ओल्ड-ग्रांट और लीजहोल्ड संपत्तियों के स्वामित्व का मामला कई दशकों से लटका हुआ है। साल 1977 में कैंटोनमेंट बोर्ड से हटाकर जमीन नगर परिषद के अधीन कर दी गई थी। इस जमीन पर सरकारी कार्यालय भी बने हुए हैं। इस जमीन की खरीद फरोख्त जब भी होगी, उसका पचास प्रतिशत हिस्सा नगर परिषद विकास पर लगाएगा, जबकि बाकी पचास प्रतिशत बोर्ड के खाते में जाएगा। हजारों परिवारों को मालिकाना हक नहीं मिल सका। लोगों के पास रजिस्ट्रियां भी हैं, लेकिन जमीन की मालिक आज भी सरकार है। लोगों के पास जो रजिस्ट्रियां हैं वे मलबे की हैं। लोगों को जमीन का मालिकाना हक भी मिले, इसके लिए फ्रीहोल्ड को लेकर लंबे समय से मांग चली आ रही है।

    कांग्रेस सरकार में भी मंत्रिमंडल बैठक से आगे नहीं बढ़ी पॉलिसी
    अंबाला छावनी को फ्रीहोल्ड करवाने का अब का नहीं बल्कि लंबे समय से विचाराधीन है। कांग्रेस सरकार के दौरान भी फ्रीहोल्ड करने का मामला तूल पकड़ा था। बाकायदा इसकी पॉलिसी बनाई गई और मंत्रिमंडल की बैठक तक पहुंची। बताते हैं कि उस समय इस जमीन पर काबिज लोगों का कलेक्टर रेट इतना लगा दिया कि सरकार इसे लागू ही नहीं कर पाई। यानी कि कांग्रेस सरकार ने पॉलिसी तो बनाई, लेकिन लोगों के विरोध के डर के चलते लागू नहीं कर पाई। बताते हैं कि उस समय के कलेक्टर रेट सिर्फ बीस से पच्चीस प्रतिशत की राहत मिल रही थी। ऐसे में उस पॉलिसी का फायदा छावनी के महज पांच से दस प्रतिशत लोगों को हो रहा था, जिसके चलते यह लागू नहीं हो पाई। अब छावनी केा फ्रीहोल्ड करने की पॉलिसी फिर से बनाई है, जिसको लेकर अब अध्ययन किया जाएगा कि जनता पर बोझ ज्यादा न पड़े।

    मुख्यमंत्री ने दिए पुनरीक्षण के निर्देश
    मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी विज की आपत्तियों को गंभीरता से लिया। उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय, शहरी स्थानीय निकाय विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और मंत्री अनिल विज की संयुक्त बैठक बुलाकर पूरे मसौदे की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। पॉलिसी में जो कलेक्टर रेट, शुल्क निर्धारण, पेनल्टी और अन्य तकनीकी प्रावधानों का जिक्र किया गया है, उस पर अध्ययन हैं कि जनता के हक में कितने हैं।

    मालिकाना हक में कैंट को बाहर करने पर भी विराेध में आए थे विज
    प्रदेश में दुकानों के किरायेदारों को मालिकाना हक देने की पॉलिसी लाकर राज्य सरकार ने बेहतरीन कार्य किया था। लेकिन अंबाला छावनी का इस पॉलिसी में जिक्र नहीं था। ऐसे में अंबाला छावनी से सात बार के विधायक अनिल विज इसके विरोध में आए और कहा कि अंबाला छावनी को भी इस पॉलिसी का हिस्सा बनाया जाए। उस समय के मुख्यमंत्री मनोहर लाल भी विज के समर्थन में आए थे और बाद में अंबाला छावनी के दुकानदारों को मालिकाना हक मिला था।

  • पंजाब में मनरेगा पर बड़ा एक्शन, 8 लाख जॉब कार्ड निरस्त, 14 लाख श्रमिक बाहर

    पंजाब में मनरेगा पर बड़ा एक्शन, 8 लाख जॉब कार्ड निरस्त, 14 लाख श्रमिक बाहर

    चंडीगढ़.

    पंजाब के लोगों के लिए चिंता की खबर सामने आई है। पिछले 5 वर्षों में राज्य में मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) के तहत 8 लाख से अधिक जॉब कार्ड रद्द कर दिए गए हैं। इसके चलते करीब 14 लाख श्रमिक इस योजना से बाहर हो गए हैं।

    उक्त जानकारी केंद्र सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों में सामने आई है। 1 जुलाई से इस योजना का नाम बदलकर 'विकसित भारत जी राम जी' कर दिया गया है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021 से 2026 के बीच अयोग्य लाभार्थियों को सूची से हटाने के अभियान के तहत पंजाब में 8 लाख से अधिक जॉब कार्ड रद्द किए गए। इसी अवधि में कुल 14.05 लाख श्रमिकों को योजना के डेटाबेस से हटाया गया। केंद्र सरकार के अनुसार, लाभार्थियों के रिकॉर्ड में अनियमितताओं को रोकने और पात्र लोगों तक ही योजना का लाभ पहुंचाने के लिए समय-समय पर सत्यापन अभियान चलाया गया। इसके तहत यह कार्रवाई की गई।

    आंकड़ों के मुताबिक, मनरेगा के तहत रोजगार की मांग करने वाले परिवारों की संख्या भी घटी है। वर्ष 2025-26 में जहां 6.46 लाख परिवारों ने रोजगार की मांग की थी, वहीं 2026-27 में यह संख्या घटकर 3.02 लाख रह गई। कई मामलों में जब किसी जॉब कार्ड के सभी पंजीकृत सदस्य अयोग्य पाए गए या गांव छोड़ चुके थे, तो पूरे जॉब कार्ड ही रद्द कर दिए गए। अधिकारियों के अनुसार, फर्जी जॉब कार्ड हटाना, मृत लाभार्थियों के नाम हटाना, नियमित रोजगार मिलने के बाद लाभार्थियों का योजना से बाहर होना और लंबे समय से निष्क्रिय पड़े जॉब कार्ड रद्द करना इसके प्रमुख कारण रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि अब सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि योजना का लाभ केवल पात्र ग्रामीण परिवारों तक पहुंचे और मनरेगा के तहत बनाई जाने वाली परिसंपत्तियों की गुणवत्ता में सुधार हो।

  • दिल्ली में 1.40 लाख छात्राओं को मिलेंगी मुफ्त साइकिल, विद्या वाहिनी योजना शुरू

    दिल्ली में 1.40 लाख छात्राओं को मिलेंगी मुफ्त साइकिल, विद्या वाहिनी योजना शुरू

    नई दिल्ली
    मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को सरकारी स्कूलों की छात्राओं को मुफ्त साइकल देने वाली 'विद्या वाहिनी' योजना की शुरुआत की। सीएम ने ईस्ट विनोद नगर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में आयोजित कार्यक्रम में 9वीं कक्षा की 3,000 से अधिक छात्राओं को मुफ्त साइकल बाटे। सीएम ने कहा कि साइकल केवल परिवहन का साधन नहीं, बल्कि स्वतंत्रता, आत्मविश्वास, स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। योजना के तहत 1.40 लाख छात्राओं को मुफ्त साइकलें मिलेंगी।

    छात्रों ने सीएम गुप्ता को भेंट किए चित्र
    सीएम ने छात्राओं से लगन के साथ पढ़ाई करने, साइकल का जिम्मेदारी से उपयोग करने और यातायात नियमों का पालन करने की अपील की। छात्राओं ने मुख्यमंत्री को अपने हाथों से बनाए चित्र भी भेंट किए। इस मौके पर केंद्रीय राज्य मंत्री और दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा, शिक्षा मंत्री आशीष सूद, स्थानीय विधायक, शिक्षक और अभिभावक मौजूद रहे।

    सामूहिक संकल्प का उत्सव
    सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि 'विद्या वाहिनी' प्रत्येक बेटी को शिक्षा के माध्यम से सशक्त बनाने के सामूहिक संकल्प का उत्सव है। इस योजना से स्कूलों में छात्राओं की नियमित उपस्थिति बढ़ेगी, ड्रॉपआउट की आशंका कम होगी और अभिभावकों की चिंता भी घटेगी।

    क्या बोले शिक्षा मंत्री आशीष सूद
    वहीं, शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि 9वीं में पहुंचने के बाद स्कूल की दूरी और ट्रांसपोर्ट संबंधी कठिनाइयों के कारण कई छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित होती रही है। यह योजना इन बाधाओं को दूर करने की दिशा में बड़ा कदम है। दिल्ली सरकार प्रचार के बजाय शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए छात्राओं की वास्तविक जरूरतों पर काम कर रही है। इससे छात्राओं का समय बचेगा और स्कूलों में उपस्थिति बढ़ेगी।

     

  • हरियाणा में नई प्लॉटेड कॉलोनियों को मंजूरी, 50 से 250 वर्गमीटर प्लॉट मिलेंगे

    हरियाणा में नई प्लॉटेड कॉलोनियों को मंजूरी, 50 से 250 वर्गमीटर प्लॉट मिलेंगे

     चंडीगढ़
     हरियाणा के उन शहरी इलाकों में नई आवासीय प्लॉटेड कॉलोनियों विकसित की जाएंगी, जहां नियंत्रित क्षेत्र के प्रविधान लागू नहीं होते। शहरों में तेजी से पनप रही अनियमित कॉलोनियों की समस्या से निपटने के लिए प्रदेश सरकार ने नई आवासीय प्लॉटेड कॉलोनियों के लिए लाइसेंस देने का निर्णय लिया है, जिनमें 50 वर्ग मीटर से लेकर 250 वर्ग मीटर के प्लॉट काटे जा सकेंगे।

    पालिका क्षेत्रों में नियंत्रित क्षेत्र से बाहर न्यूनतम पांच एकड़ क्षेत्र में यह प्लॉटेड कॉलोनियों विकसित की जा सकेंगी। इनमें न्यूनतम 65 प्रतिशत प्लॉट आवासीय होंगे, जबकि वाणिज्यिक क्षेत्र के लिए अधिकतम पांच प्रतिशत हिस्सा निर्धारित रहेगा।

    मंत्रिमंडल के फैसले को लागू करते हुए शहरी स्थानीय निकाय विभाग के आयुक्त एवं सचिव अशोक कुमार मीणा ने अधिसूचना जारी कर दी है। नगर निकाय क्षेत्रों में, जहां नियंत्रित क्षेत्र के प्रविधान लागू नहीं हैं, आवासीय प्लॉटेड आवास हेतु नई टाउन प्लानिंग योजना को लागू किया गया है। नए नियमों का उद्देश्य ऐसे नगर निकाय क्षेत्रों में सुनियोजित एवं विनियमित आवासीय विकास सुनिश्चित करना है।

    स्वीकृत योजना के अनुसार आवासीय प्लॉटेड आवास परियोजनाओं के लिए न्यूनतम पांच एकड़ भूमि आवश्यक होगी, जबकि अधिकतम क्षेत्रफल की कोई सीमा निर्धारित नहीं है। परियोजना स्थल तक पहुंचने के लिए सड़क होनी चाहिए, जिसकी चौड़ाई कम से कम 33 फीट हो। आवासीय प्लॉटों का आकार 50 वर्गमीटर से 250 वर्गमीटर के बीच होगा। साथ ही प्रत्येक परियोजना में कम से कम 50 प्रतिशत आवासीय प्लॉट 150 वर्गमीटर या उससे कम क्षेत्रफल के होंगे, ताकि किफायती आवास को बढ़ावा मिल सके।

    परियोजना क्षेत्र के अधिकतम 65 प्रतिशत हिस्से का उपयोग आवासीय प्लॉटों के लिए किया जा सकेगा, जबकि वाणिज्यिक क्षेत्र का हिस्सा अधिकतम पांच प्रतिशत तक सीमित रहेगा। इसके अतिरिक्त परियोजना के भीतर सभी आंतरिक सड़कों की न्यूनतम चौड़ाई 10 मीटर निर्धारित की गई है।

    नई योजना का उद्देश्य राज्य में आवासीय विकास के लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध कराना और अनुमोदन प्रक्रिया को तेज करना है। इससे आवास क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा तथा नई अनधिकृत कॉलोनियों को पनपने से रोकने में मदद मिलेगी।

    डेवलपर्स को देना होगा 10 रुपये प्रति वर्गमीटर स्क्रूटनी शुल्क
    डेवलपर्स को हरियाणा शहरी अवसंरचना विकास बोर्ड (एचयूआइडीबी) के मुख्य प्रशासक को 10 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से स्क्रूटनी शुल्क जमा कराना होगा। इसके अलावा उन्हें लो-पोटेंशियल जोन में आवासीय उपयोग के लिए लागू परिवर्तन शुल्क का 50 प्रतिशत भुगतान करना होगा। इसके साथ ही डेवलपर्स को प्रचलित बाह्य विकास शुल्क (ईडीसी) का 25 प्रतिशत विकास शुल्क के रूप में एचयूआइडीबी को देना होगा। यह दर नगर समितियों और नगर परिषदों दोनों में समान रूप से लागू होगी।

     

  • सड़क दुर्घटना मामले में हरियाणा कोर्ट का बड़ा फैसला, दोषी चालक पर जुर्माना

    सड़क दुर्घटना मामले में हरियाणा कोर्ट का बड़ा फैसला, दोषी चालक पर जुर्माना

    हिसार.

    जिला अदालत ने 10 साल पुराने सड़क हादसे के एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि बिना ड्राइविंग लाइसेंस वाहन चलाना एक अलग अपराध है, लेकिन इससे दूसरे गाड़ी के चालक की जिम्मेदारी समाप्त नहीं हो जाती।

    अगर किसी के पास लाइसेंस नहीं है तो एक्सीडेंट करने वाले दूसरे गाड़ी चालक को छूट नहीं मिल जाएगी। अदालत ने मामले में आरोपित विजेंद्र की दोषसिद्धि बरकरार रखी, लेकिन यह देखते हुए कि वह पिछले 10 वर्षों से मुकदमे का सामना कर रहा है और परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य है, उसकी एक वर्ष की कठोर कारावास की सजा को निरस्त कर केवल 1,500 रुपये जुर्माना लगाया है। मामला 21 जुलाई 2016 का है। हांसी के हुडा सेक्टर-6 में तेज रफ्तार आटो ने स्कूटी सवार सीता को टक्कर मार दी थी। हादसे में महिला के सिर, कालर बोन और हाथ में गंभीर चोटें आई थीं। पुलिस ने आरोपित के खिलाफ मामला दर्ज किया था। अपील के दौरान बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि पीड़िता के पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था, इसलिए हादसे में उसकी भी लापरवाही थी।

    अदालत ने यह दलील खारिज करते हुए कहा कि बिना लाइसेंस वाहन चलाना मोटर वाहन अधिनियम के तहत अलग अपराध हो सकता है, लेकिन इससे दूसरे चालक को लापरवाही से वाहन चलाने या दुर्घटना करने की छूट नहीं मिल जाती। कोर्ट ने कहा कि मोड़ पर वाहन चलाते समय चालक का दायित्व है कि वह गति नियंत्रित रखे और सामने से आने वाले वाहनों का ध्यान रखे।

  • पंजाब में जारी रहेगा बारिश का दौर, अगस्त के पहले सप्ताह हिमाचल सीमा से लगे जिलों में बरसेंगे बादल

    पंजाब में जारी रहेगा बारिश का दौर, अगस्त के पहले सप्ताह हिमाचल सीमा से लगे जिलों में बरसेंगे बादल

    लुधियाना.

    शुक्रवार को भी पंजाब के कई जिलों में मानसून सक्रिय रहने से तेज वर्षा हुई। मौसम केंद्र चंडीगढ़ के अनुसार चंडीगढ़ में 3.8 मिलीमीटर, लुधियाना में 8.1 मिलीमीटर, पटियाला में 23.2 मिलीमीटर, पठानकोट में 32.0 मिलीमीटर, बरनाला में 16.5 मिलीमीटर, अमृतसर में 3.5 मिलीमीटर, कपूरथला में 4.0 मिलीमीटर, रूपनगर में 26.9 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई।

    जबकि एसबीएस नगर, जालंधर में भी हल्की वर्षा हुई। दूरी तरफ वर्षा के चलते पठानकोट में दिन व रात का तापमान एक सामान रहा। यहां दिन का तापमान 27.9 डिग्री व रात का तापमापन 27.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जबकि अमृतसर में दिन का तापमान 30.6 डिग्री व रात का तापमान 27.8 डिग्री सेल्सियस रहा। दूसरे जिलों में दिन का तापमान 31 से 33 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया। उधर माैसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार पांच अगस्त तक मानसून सक्रिय रहेगा।

    हालांकि, मानसून की गति में कमी आएगी। हिमाचल के साथ लगते जिलों में भारी वर्षा की संभावना है, जबकि दूसरे जिलों में हल्की से मध्यम वर्षा हो सकती है। छह अगसत से मानसून कमजोर पड़ेगा और आगे वर्षा की कमी झेलनी पड़ सकती है।

  • बिहार में बदला ट्रैफिक नियम, अब एसआई ही करेंगे वाहन जांच, आदेश जारी

    बिहार में बदला ट्रैफिक नियम, अब एसआई ही करेंगे वाहन जांच, आदेश जारी

    पटना
    बिहार में अब दारोगा (एसआई) से नीचे रैंक के पुलिस अफसर अब सड़कों पर वाहन जांच नहीं करेंगे। इनसे नीचे रैंक के पुलिस पदाधिकारी एएसआई या सिपाही का काम सड़कों को जाम से मुक्त रखना होगा। वे सिर्फ ट्रैफिक को रेगुलेट करेंगे। ट्रैफिक व्यवस्था को अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनाने के लिए बिहार पुलिस मुख्यालय ने इससे संबंधित आदेश जारी किया है।

    एडीजी (ट्रैफिक) सुधांशु कुमार ने शुक्रवार को पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में स्पष्ट कहा कि सामान्य तौर पर वाहन को रोकने या उसकी जांच करने का अधिकार सिर्फ एसआई या उससे ऊपर रैंक के पदाधिकारी को ही होगा। उन्होंने कहा, ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को निर्धारित ड्रेस कोड का कड़ाई से पालन करना होगा।

    ट्रैफिक पुलिस के कंधे पर बॉडी वॉर्न कैमरा
    एडीजी ने बताया कि कार्यस्थल पर मोबाइल चलाने पर भी सख्ती रहेगी। पुलिस मुख्यालय का दस्ता इसकी औचक जांच करेगा। पीक आवर में ट्रैफिक के सभी पर्यवेक्षी पदाधिकारी (इंस्पेक्टर से एसपी तक) अनिवार्य रूप से सड़क पर रहेंगे। सभी ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को कंधे पर लगे बॉडी वॉर्न कैमरे को हर हाल में चालू रखने का निर्देश दिया गया है। कैमरा बंद रहने पर कोई वाद-विवाद या आरोप लगा तो उसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित ट्रैफिक कर्मी पर ही होगी। गलती पाए जाने पर उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है।

    पटना में 40 हजार से अधिक ऑटो-ई-रिक्शा
    पटना में वर्तमान में 40 हजार से अधिक ऑटो और ई-रिक्शा संचालित हो रहे हैं। इनके लिए निर्धारित रूट नहीं होने के कारण अधिकांश वाहन मनमाने ढंग से चलते हैं। सबसे अधिक ऑटो और ई-रिक्शा जंक्शन से दानापुर, सगुना मोड़, फुलवारीशरीफ और कंकड़बाग रूट पर चलते हैं। इनमें से लगभग 40 प्रतिशत वाहन नेहरू पथ से होकर गुजरते हैं, जिनका रूट डायवर्जन होगा। सिटी बसों का सबसे अधिक परिचालन भी नेहरू पथ पर होता है। पटना शहर में 298 सिटी बसें संचालित हो रही हैं। वहीं प्रतिदिन करीब 700 बसें शहर से गुजरती हैं, लेकिन इनमें अधिकांश बसें मुख्य शहर में प्रवेश करने के बजाय बाइपास मार्ग का उपयोग करती हैं।

    नेहरू पथ बंद, इन रास्तों का करें उपयोग
    नेहरू पथ पर व्यावसायिक वाहनों के प्रवेश पर रोक लगने के बाद नौ वैकल्पिक मार्ग निर्धारित किए गए हैं। इनमें हार्डिंग रोड, वीरचंद पटेल पथ, पीर अली पथ, एयरपोर्ट-शेखपुरा रोड, जगदेव पथ, दीघा-आशियाना रोड, रूपसपुर नहर रोड, दीघा-राजापुर पुल रोड और आयकर गोलंबर से मंदिरी रोड शामिल हैं। इन मार्गों से सिटी बसों, ऑटो, ई-रिक्शा और अन्य वाहनों का परिचालन कराया जाएगा।

  • ED का शिकंजा: हरियाणा के रहेजा डेवलपर्स की ₹782 करोड़ की संपत्ति अटैच

    ED का शिकंजा: हरियाणा के रहेजा डेवलपर्स की ₹782 करोड़ की संपत्ति अटैच

    गुरुग्राम.

    प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने धन शोधन मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए रियल एस्टेट कंपनी रहेजा डेवलपर्स लिमिटेड की करीब 782.36 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। इस कार्रवाई के साथ ही इस मामले में अब तक कुर्क की गई संपत्तियों का कुल मूल्य बढ़कर करीब 2399.65 करोड़ रुपये हो गया है।

    इसे देश में होमबायर्स के पैसे के कथित दुरुपयोग से जुड़े सबसे बड़े मामलों में से एक माना जा रहा है। ईडी की दिल्ली जोनल ऑफिस ने यह कार्रवाई धन शोधन अधिनियम (पीएमएलए) के तहत की है। जांच रहेजा डेवलपर्स लिमिटेड, उसके निदेशक नवीन एम रहेजा और अन्य संबंधित लोगों के विरुद्ध की जा रही है।

    एफआईआर के आधार पर जांच शुरू
    यह जांच आर्थिक अपराध शाखा में दर्ज कई एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। ये शिकायतें उन होमबायर्स ने दर्ज कराई थीं जिन्होंने कंपनी की विभिन्न आवासीय परियोजनाओं में निवेश किया था।

    हजारों खरीदारों को घर मिलने का इंतजार
    ईडी के अनुसार, रहेजा डेवलपर्स ने अपनी विभिन्न हाउसिंग परियोजनाओं के लिए करीब 4600 खरीदारों से लगभग 2425.99 करोड़ रुपये जुटाए थे। जांच एजेंसी का आरोप है कि इन पैसों का बड़ा हिस्सा परियोजनाओं के निर्माण और उन्हें पूरा करने में खर्च करने के बजाय दूसरी जगह इस्तेमाल किया गया। इसके कारण हजारों खरीदार आज भी अपने घर मिलने का इंतजार कर रहे हैं।

    कुल 2399.65 करोड़ की संपत्ति कुर्क
    इस साल इस मामले में यह ईडी की तीसरी बड़ी अटैचमेंट है। इससे पहले अप्रैल में एजेंसी ने 1113.81 करोड़ रुपये और जून में 503.48 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की थीं। अब 782.36 करोड़ रुपये की नई कार्रवाई के बाद कुल कुर्क संपत्तियों का मूल्य करीब 2399.65 करोड़ रुपये पहुंच गया है। ईडी ने फिलहाल यह जानकारी नहीं दी है कि इस बार किन संपत्तियों को कुर्क किया गया है और वे कहां स्थित हैं। पीएमएलए के तहत इस तरह की अस्थायी कुर्की का उद्देश्य जांच पूरी होने तक उन संपत्तियों की बिक्री या हस्तांतरण को रोकना होता है, जिन्हें अपराध से अर्जित आय से जुड़ा माना जाता है।

    न्याय की मांग कर रहे लोग
    एनसीआर के रियल एस्टेट सेक्टर में होमबायर्स के धन के कथित दुरुपयोग से जुड़े मामलों में यह जांच सबसे महत्वपूर्ण मानी जा रही है। लंबे समय से परियोजनाएं पूरी नहीं होने के कारण हजारों खरीदार कानूनी और नियामकीय मंचों पर न्याय की मांग कर रहे हैं।

  • पंजाब पुलिस का दावा, सभी पुरानी लंबित शिकायतों का निपटारा; हाई कोर्ट में DGP का हलफनामा

    पंजाब पुलिस का दावा, सभी पुरानी लंबित शिकायतों का निपटारा; हाई कोर्ट में DGP का हलफनामा

    चंडीगढ़.

    पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में पंजाब पुलिस ने राज्य में लंबित शिकायतों के निस्तारण को लेकर बड़ा दावा किया है। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की ओर से दाखिल हलफनामे में अदालत को बताया कि लंबित शिकायतों और जांचों के निस्तारण के लिए विशेष अभियान चलाया गया, जिसके परिणामस्वरूप 27 जुलाई 2026 तक 13 जुलाई 2026 से पहले प्राप्त कोई भी शिकायत राज्य के किसी भी जिला अथवा पुलिस कमिश्नरेट में लंबित नहीं रही।

    इस आश्वासन के बाद हाई कोर्ट ने मामले में किसी और आदेश की आवश्यकता न मानते हुए याचिका का निस्तारण कर दिया। जस्टिस एनएस शेखावत की पीठ के समक्ष मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता ने विशेष पुलिस महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) के निर्देशों के आधार पर अदालत को बताया कि प्रदेशभर में लंबित शिकायतों और जांचों को समयबद्ध ढंग से निपटाने के लिए विशेष अभियान संचालित किया गया। इस अभियान के तहत पुराने मामलों की लगातार समीक्षा की गई और उनके निस्तारण की प्रक्रिया तेज की गई।

    सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने यह भी बताया कि डीजीपी, पंजाब ने सभी पुलिस आयुक्तों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि शिकायतों की जांच करते समय कानून के प्रावधानों का किसी भी स्थिति में उल्लंघन न हो। जांच पूरी तरह विधि के अनुरूप और निष्पक्ष तरीके से की जाए ताकि शिकायतकर्ताओं का विश्वास बना रहे और किसी भी प्रकार की कानूनी त्रुटि न हो। अदालत को यह भी अवगत कराया गया कि पंजाब पुलिस ने आम लोगों की शिकायतों के प्रभावी और त्वरित निस्तारण के लिए 'पब्लिक ग्रीवांसेज रिड्रेसल पोर्टल' तैयार कर लागू कर दिया है। यह पोर्टल लोगों को शिकायत दर्ज कराने और उसके निस्तारण की प्रक्रिया के लिए सिंगल विंडो सुविधा उपलब्ध कराएगा। इसके अलावा राज्यभर में 'समाधान कैंप' आयोजित किए जाएंगे, जहां पीड़ित पक्ष अपनी शिकायतें सीधे अधिकारियों के समक्ष रख सकेंगे और उनका मौके पर ही समाधान करने का प्रयास किया जाएगा।

    डीजीपी, पंजाब की ओर से दायर हलफनामे और राज्य सरकार द्वारा अदालत में दिए गए आश्वासनों को रिकॉर्ड पर लेते हुए जस्टिस एनएस शेखावत ने कहा कि अब इस मामले में कोई और आदेश पारित करने की आवश्यकता नहीं है। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने याचिका का निस्तारण कर दिया।