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  • केंद्र सरकार ने पंजाब के शहरी विकास के लिए खोला खजाना, ₹4,500 करोड़ की परियोजनाएं मंजूर

    केंद्र सरकार ने पंजाब के शहरी विकास के लिए खोला खजाना, ₹4,500 करोड़ की परियोजनाएं मंजूर

    चंडीगढ़.

    भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद तरुण चुघ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने स्मार्ट सिटी मिशन के तहत पंजाब के तीन प्रमुख शहरों—अमृतसर, जालंधर और लुधियाना के लिए 4,485 करोड़ रुपये की लागत वाली 204 विकास परियोजनाओं को मंजूरी दी है।

    उन्होंने कहा कि पंजाब के शहरी विकास के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। राज्यसभा में पूछे गए सवाल के जवाब का हवाला देते हुए तरुण चुघ ने बताया कि अमृतसर में 44 परियोजनाओं पर 1,911 करोड़ रुपये, जालंधर में 78 परियोजनाओं पर 1,186 करोड़ रुपये और लुधियाना में 82 परियोजनाओं पर 1,388 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं में पार्किंग, खेल बुनियादी ढांचा, ठोस कचरा प्रबंधन, जलापूर्ति, हरित क्षेत्रों का विकास और अन्य शहरी सुविधाओं से जुड़े कार्य शामिल हैं। उन्होंने बताया कि 31 मार्च 2026 तक तीनों शहरों में 204 में से 190 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जिन पर 4,148 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। यह कुल परियोजनाओं का लगभग 93 प्रतिशत है।

    तरुण चुघ ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने परियोजनाओं के लिए पर्याप्त धन और संसाधन उपलब्ध कराए, लेकिन इन्हें प्रभावी ढंग से लागू करने में पंजाब सरकार का अपेक्षित सहयोग और इच्छाशक्ति देखने को नहीं मिली। उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप भी सामने आते रहे हैं। उन्होंने पंजाब सरकार से केंद्र द्वारा उपलब्ध कराई गई राशि का पारदर्शी, योजनाबद्ध और बिना किसी भेदभाव के उपयोग सुनिश्चित करने की अपील की। उनका कहना है कि इससे अमृतसर, जालंधर और लुधियाना का समग्र विकास होगा और लोगों को आधुनिक शहरी सुविधाओं का लाभ मिलेगा। 

  • बिहार के विश्वविद्यालयों में शुरू होंगे 7 नए व्यावसायिक पाठ्यक्रम, छात्रों को मिलेगा लाभ

    बिहार के विश्वविद्यालयों में शुरू होंगे 7 नए व्यावसायिक पाठ्यक्रम, छात्रों को मिलेगा लाभ

    पटना
    राज्य के विश्वविद्यालयों में 7 से अधिक नए व्यावसायिक पाठ्यक्रम लागू होंगे, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के दिशा-निर्देश पर आधारित होंगे

    इससे संबंधित पाठ्यक्रमों को राज्यपाल एवं कुलाधिपति सैयद अता हसनैन के निर्देश पर विशेषज्ञों की कमेटी तैयार कर रही है।

    जिन पाठ्यक्रमों का प्रारुप तय हो रहा है उनमें मिश्रित मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (BMBA), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में बैचलर ऑफ साइंस, बैचलर आफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (BBA), डिजिटल साइंस एंड बिजनेस मैनेजमेंट, इंटीग्रेटेड प्रोग्राम इन मैनेजमेंट (IPM),डेटा साइंस एंड बिजनेस स्टडीज और आइटी एंड मैनेजमेंट स्टडीज शामिल हैं।

    राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने सभी विश्वविद्यालयों, अंगीभूत महाविद्यालयों और संबद्ध महाविद्यालयों में एकसमान
    व्यावसायिक पाठ्यक्रम को लागू कराने एवं शिक्षण शुल्क में समानता रखने का निर्देश दिया है।
    योग्य शिक्षकों और पेशेवर व अनुभवी लोगों को शैक्षणिक कार्य से जोड़ने की भी तैयारी

    साथ ही, सभी व्यावसायिक पाठ्यक्रम के लिए विश्वविद्यालयों से लेकर महाविद्यालयों में आधारभूत संरचना विकसित करने की प्राथमिकता देने को कहा गया है।

    योग्य शिक्षकों और पेशेवर तथा अनुभवी लोगों को शैक्षणिक कार्य से जोड़ने की भी तैयारी करने को कहा गया है। राज्यपाल के निर्देश के आलोक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत विशेषज्ञों की टीम की ओर से व्यावसायिक पाठ्यक्रम को तैयार कराया जा रहा है।

    सबसे महत्वपूर्ण यह कि नए व्यावसायिक पाठ्यक्रम को सभी अंगीभूत महाविद्यालयों में शुरू किए जाएंगे। महाविद्यालयों में आधारभूत संरचना को और विकसित किए जाएंगे। नए पाठ्यक्रम को इंटनर्शिप से जोड़ा जाएगा।

    प्रत्येक विश्वविद्यालय में कोर्स कमेटी का गठन
    राज्यपाल सचिवालय की ओर से कुलपतियों को व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के प्रभावी संचालन के लिए कोर्स कमेटी गठित करने को कहा गया है।

    इनमें पटना विश्वविद्यालय, मगध विश्वविद्यालय, वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, जय प्रकाश विश्वविद्यालय, बीआर आंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय, भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय, कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय शाम‍िल हैं।

    इनके अलावा मौलाना मजहरुल हक अरबी एवं फारसी विश्वविद्यालय. तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, मुंगेर विश्वविद्यालय, पूर्णिया विश्वविद्यालय, नालंदा खुला विश्वविद्यालय और आर्यभट् ज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति शामिल हैं।

     

  • बिहार में 65 हजार सरप्लस शिक्षकों की तैनाती अब आंगनबाड़ी केंद्रों में होगी

    बिहार में 65 हजार सरप्लस शिक्षकों की तैनाती अब आंगनबाड़ी केंद्रों में होगी

    पटना
    बिहार के प्राथमिक विद्यालयों के मानक से अधिक पदस्थापित शिक्षकों को बाल बाटिका और आंगनबाड़ी केंद्रों में तैनात किया जाएगा। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने यह एलान किया किया है। उन्होंने बताया कि इस समय सूबे के सरकारी विद्यालयों में 1.06 लाख अधिशेष (सरप्लस) शिक्षक हैं। इनमें 65413 अधिशेष शिक्षक सिर्फ पहली से पांचवीं कक्षा के प्राथमिक विद्यालयों में हैं। हालांकि, तीन जिलों अररिया, जमुई और पूर्णिया में शिक्षकों की कमी है।

    मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बताया कि सूबे के 10 हजार सरकारी विद्यालयों के कैंपस में आंगनबाड़ी केन्द्र संचालित हो रहे हैं। इनके साथ-साथ सरकारी विद्यालयों के निकट के आंगनबाड़ी केन्द्रों में भी प्राथमिक शिक्षकों को भेजा जाएगा। उन्होंने बताया कि 30 बच्चों पर एक शिक्षक के निर्धारित मानक से अधिक पदस्थापित शिक्षकों को चरणबद्ध तरीके से उन विद्यालयों में भेजा जाएगा जहां शिक्षकों की कमी है या फिर जहां संबंधित विषयों के शिक्षक नहीं हैं। शिक्षकों के तबादले के लिए विभाग का पोर्टल खोल दिया गया है। ई-शिक्षा कोश के माध्यम से बच्चों की संख्या के अनुपात में सरप्लस शिक्षकों को चिन्हित किया गया है। हालांकि, बड़ी संख्या में ऐसे विद्यालय हैं जहां सभी नामांकित छात्र छत्राओं का डेटा ई शिक्षाकोष पर दर्ज नहीं है।

    विकल्प में ही शिक्षकों को मिलेगा विद्यालय
    प्रेस कांफ्रेंस में शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षकों का तबादला पूरी तरह ऐच्छिक हैं। जो आवेदन करेंगे, उनका ही तबादला होगा। इस प्रक्रिया के तहत शिक्षक कम से कम 30 विद्यालयों का विकल्प दे सकेंगे। शिक्षकों द्वारा जिन विद्यालयों का विकल्प दिया जाएगा, उन्हीं में से किसी एक में उनका तबादला होगा। किसी भी शिक्षक का तबादला दिए गए विकल्प के अलावा दूसरे विद्यालय में नहीं होगा। पुरुष शिक्षकों का तबादला उनके गृह प्रखंड के निकट के अन्य प्रखंड में होगा। वे चार प्रखंडों का चयन कर सकेंगे। मंत्री ने बताया कि महिला शिक्षकों का तबादला उनकी गृह पंचायत के निकट की किसी अन्य पंचायत में होगा, जहां उनकी इच्छा होगी और जो उनके द्वारा दिये गये विकल्प में शामिल होगा।

    मंत्री ने जारी किए दो नंबर
    शिक्षा मंत्री ने कहा है कि शिक्षकों को तबादले में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होना चाहिए। उन्होंने कमांड एंड कंट्रोल सेंटर की ओर से दो टॉल फ्री नंबर के साथ-साथ ई-शिक्षा कोष के हेल्पडेस्क का नंबर भी जारी किया है जिस पर शिक्षक कॉल करके अपनी परेशानी शेयर कर सकते हैं। महिला शिक्षकों को उनके पंचायत में जबकि पुरुष शिक्षकों का उनके आवासीय प्रखंड के निकटतम प्रखंड में ट्रांसफर किया जाएगा।

  • राजस्थान में हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं के लिए नई स्वास्थ्य व्यवस्था के निर्देश

    राजस्थान में हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं के लिए नई स्वास्थ्य व्यवस्था के निर्देश

    जयपुर
     मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने गर्भवती महिलाओं को समय पर गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने के लिए रेफरल परिवहन तंत्र को और अधिक सुदृढ़ करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सुरक्षित प्रसव एवं जननी एक्सप्रेस सेवाओं के प्रभावी संचालन के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देशों सहित परिपत्र जारी करने को कहा। साथ ही निर्देश दिए कि उच्च जोखिम (हाई रिस्क) वाली गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने के लिए संभावित प्रसव तिथि से एक-दो दिन पूर्व ही उच्च स्तरीय स्वास्थ्य संस्थान में रेफर किया जाए।

    मुख्य सचिव शनिवार को स्वास्थ्य भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्यों, अस्पताल अधीक्षकों, संयुक्त निदेशकों, पीएमओ, आरसीएचओ एवं सीएमएचओ के साथ सुरक्षित मातृत्व सेवाओं की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने गर्भवती महिलाओं में गंभीर एनीमिया (सीवियर एनीमिया) के मामलों में कमी आने तथा उन्हें माइल्ड एनीमिया श्रेणी में लाने के प्रयासों पर संतोष व्यक्त किया।

    बैठक में मुख्य सचिव ने मातृ मृत्यु के विभिन्न कारणों की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने भीलवाड़ा में हाल ही में हुई मातृ मृत्यु के मामले की विस्तृत जानकारी प्राप्त की तथा शाहपुरा सीएचसी के स्त्री रोग विशेषज्ञ और एएनएम से सीधे संवाद कर घटनाक्रम की जानकारी ली। उन्होंने संबंधित चिकित्सकों से चर्चा कर उपचार व्यवस्था एवं प्रोटोकॉल की समीक्षा भी की।

    वी. श्रीनिवास ने ‘प्रसव सखी’ पहल के क्रियान्वयन की भी समीक्षा की तथा इसके माध्यम से गर्भवती महिलाओं को दी जा रही सहायता एवं सेवाओं के संबंध में फीडबैक प्राप्त किया। उन्होंने अलवर, भरतपुर एवं दौसा के सीएमएचओ तथा आरसीएचओ से हाई रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं की पहचान, उपचार तथा फील्ड स्तर पर एएनएम द्वारा एनीमिया एवं हाईपरटेंशन के लक्षणों की निगरानी की जानकारी ली। बैठक में स्त्री रोग विशेषज्ञों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबंधित चिकित्सकों को उपचार प्रबंधन एवं प्रोटोकॉल के संबंध में आवश्यक मार्गदर्शन भी दिया।

    मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं में एनीमिया एवं हाईपरटेंशन के उपचार और प्रबंधन के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की जाए, ताकि पूरे प्रदेश में एक समान उपचार प्रोटोकॉल की प्रभावी पालना सुनिश्चित हो सके। उन्होंने ब्यावर, चित्तौड़गढ़, बारां, झालावाड़ एवं सलूम्बर जिलों में एनीमिया और हाईपरटेंशन की स्क्रीनिंग एवं उपचार पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। बैठक में सर्जिकल प्रोटोकॉल, औषधि उपलब्धता तथा 104 एवं 108 एम्बुलेंस सेवाओं की समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए।

    वी. श्रीनिवास ने स्पष्ट कहा कि रक्त की उपलब्धता के अभाव में किसी भी गर्भवती महिला की मृत्यु नहीं होनी चाहिए। उन्होंने आवश्यकता वाले क्षेत्रों में विशेष रक्तदान शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए। साथ ही बीकानेर, अजमेर, जोधपुर, उदयपुर एवं कोटा मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्यों से हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं के प्रसव प्रबंधन, आईसीयू सुविधाओं तथा उपचार प्रोटोकॉल की जानकारी ली।

    प्रमुख शासन सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, श्रीमती गायत्री राठौड़ ने बैठक में ‘प्रसव सखी’ पहल, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं की एएनएम स्तर पर सूचीबद्धता, गंभीर एनीमिया को नियंत्रित करने के लिए किए जा रहे प्रयासों तथा विभिन्न उपचार प्रोटोकॉल के प्रभावी क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की।

     

  • मनीष तिवारी की पोस्ट से पंजाब कांग्रेस में हलचल, चुनाव से पहले चर्चाओं का दौर तेज

    मनीष तिवारी की पोस्ट से पंजाब कांग्रेस में हलचल, चुनाव से पहले चर्चाओं का दौर तेज

    चंडीगढ़.

    राजनीति से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है। चंडीगढ़ से कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी के कांग्रेस छोड़ने की अटकलें लगने लगी है। दरअसल, सांसद मनीष तिवारी ने सोशल मीडिया (X) पर एक शायरी ट्वीट की है, जिसमें उनका दर्द छलकता हुआ दिखाई दे रहा है।

    कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने पार्टी में अनदेखी को लेकर हबीब जालिब की शायरी ट्वीट की है, ''झुका के सर को हो जाता 'सर' मैं, तो लीडर भी अजीमुश्सान होता।'' जिससे शायद उनका मतलब है कि अगर मैं भी सिर झुका देता, समझौता कर लेता तो बड़ा नेता या फिर बड़ा पद पा सकता था। लेकिन हबीब जालिब की इस शायरी का संदेश स त्ता के सामने झुकने के बजाया स्वाभिमान और सिद्धांतों पर अडिग रहने का रहा है।  मनीष तिवारी के सोशल मीडिया पर शेयर की इस पोस्ट से कयास लगाए जा रहा है कि वह पार्टी से नाराज है और जल्द ही पार्टी को छोड़ सकते हैं। फिलहाल इस बारे में अभी तक मनीष तिवारी का कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है।

    आपको बता दें कि इससे पहले जब पंजाब चुनाव 2027 को लेकर कमेटियों को ऐलान किया गया तो तब मनीष तिवारी को कोई पद नहीं मिला, जिससे वह नाराज नजर आए। उन्होंने तब सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर लिखा था कि, "जब आपकी योग्यता दूसरों की असुरक्षा बन जाती है, तो फैसले सांगठनिक नहीं, बल्कि व्यक्तिगत पूर्वाग्रहों से प्रेरित होते हैं…" और अंत में लिखा था जो होगा सो होगा, भविष्य में जो होना है वही होगा।''

    आपको ये भी बता दें कि, पंजाब कांग्रेस में पहले ही तनाव चल रहा है। राजा वड़िंग के प्रधान पद को लेकर विरोध हो रहा है। पूर्व सीएम और मौजूदा सांसद चरणजीत चन्नी को लेकर अलग गुट बना हुआ है। इस चन्नी की अगुवाई में बगवात हो रही और सांसद सुखजिंदर रंधावा भी नाराज नजर आ रहे हैं।

  • बिहार में रक्तदाताओं को अब व्हाट्सएप पर मिलेगा स्मार्ट कार्ड, डिजिटल रिकॉर्ड रहेगा सुरक्षित

    बिहार में रक्तदाताओं को अब व्हाट्सएप पर मिलेगा स्मार्ट कार्ड, डिजिटल रिकॉर्ड रहेगा सुरक्षित

    पटना
     बिहार में अपनी इच्छा से रक्तदान करने वाले लोगों के लिए स्मार्ट कार्ड आधारित डिजिटल ट्रैकिंग प्रणाली और अपडेट हो रही है।

    अब पहली बार रक्तदान करने पर रक्तदाता को स्मार्ट कार्ड सीधे उसके वॉट्सएप पर उपलब्ध कराया जाएगा। उसके बाद प्रत्येक रक्तदान का डिजिटल रिकॉर्ड स्मार्ट कार्ड में अपडेट होता रहेगा।

    इस व्यवस्था से रक्तदाताओं का अद्यतन रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा। इससे रक्त की शत प्रतिशत ट्रैकिंग होगी और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहेगी।

    विभागीय अधिकारियों ने शुक्रवार को स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल (एसबीटीसी) की समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य सचिव डॉ. रवि को इससे अवगत कराया। बैठक में 20 महत्वपूर्ण एजेंडों पर चर्चा हुई।

    सचिव ने निर्देश दिया कि स्टेट ड्रग कंट्रोलर की अनुमति या अनापत्ति प्रमाण-पत्र के बिना कोई भी ब्लड बैंक संचालित नहीं होगा। ब्लड बैंकों का नियमित निरीक्षण हो।

    पूर्व में जारी कारण बताओ नोटिस का जिन जिन ब्लड बैंकों ने जवाब नहीं दिया है, उनके विरुद्ध कार्रवाई हो। आवश्यकता पड़ने पर लाइसेंस निलंबित किया जाए।

    उन्होंने पीएमसीएच में पीपीपी माडल पर केमिलुमिनेसेंस एनालाइजर लगाने का निर्देश दिया। यह उपकरण जांच के दौरान निकलने वाले प्रकाश (केमिलुमिनेसेंस) को मापकर रक्त के नमूने में मौजूद पदार्थों की मात्रा का पता लगाता है।

    खून की दर का होगा पुनर्निधारण
    बैठक में तय हुआ कि ब्लड एवं ब्लड कंपोनेंट्स (प्लेटलेट्स, प्लाज्मा एवं आरबीसी आदि) के प्रोसेसिंग चार्ज नेशनल ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल (एनबीटीसी) की नई गाइड-लाइन के अनुरूप निर्धारित किए जाएंगे। इससे अस्पतालों में मरीजों को रियायती एवं न्यूनतम दर पर रक्त मिलेगा। इसके साथ ही सरकारी और निजी ब्लड बैंकों के बीच समन्वय पारदर्शी होगा।

    खून में पांच संक्रमण की जांच
    ब्लड सेंटरों में एकत्रित रक्त को मरीजों को उपलब्ध कराने से पहले पांच प्रमुख संक्रमण (एचआईवी-1, एचआईवी-2, हेपेटाइटिस-बी, हेपेटाइटिस-सी, मलेरिया तथा सिफिलिस) की जांच होती है।

    अभी अधिसंख्य ब्लड सेंटरों में एचआइवी, हेपेटाइटिस-बी एवं हेपेटाइटिस-सी की जांच एलिसा पद्धति से तथा मलेरिया एवं सिफिलिस की जांच रैपिड कार्ड पद्धति से होती है।

     

  • कोयला खदानों से निकलेगी मीथेन, ग्लोबल वार्मिंग घटाने में मिलेगी मदद: IIT बॉम्बे विशेषज्ञ

    कोयला खदानों से निकलेगी मीथेन, ग्लोबल वार्मिंग घटाने में मिलेगी मदद: IIT बॉम्बे विशेषज्ञ

    रांची
     ग्लोबल वार्मिंग में कमी आ सकती है यदि हम मीथेन गैस का उपयोग करें। हमारे पास भी इसका भंडार है। हमारे पास भी इसका भंडार है, जिसका हम उपयोग नहीं कर पा रहे।

    हम बंद खदानों या खनन से पहले मीथेन गैस निकाल सकते हैं। इसका उपयोग वाहन, बिजली या अन्य जगहों पर इस्तेमाल कर सकते हैं।

    ये बातें आईआईटी बांबे के विजिटिंग प्रोफेसर डॉ. एके सिंह ने कही। वे शुक्रवार को होटल बीएनआर चाणक्या में राउंड टेबल कार्यक्रम में बोल रहे थे। कार्यक्रम में संयुक्त रूप से अशोका सेंटर फार ए पीपल-सेंट्रिक एनर्जी ट्रांजिशन (एसपेट), अशोका यूनिवर्सिटी और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी बांबे (आईआईटी बांबे) के अर्थ साइंसेज डिपार्टमेंट की सहभागिता रही।

    हम माइनिंग से पहले भी मीथेन गैस निकाल सकते हैं और बंद खदानों से भी। इससे वायुमंडल की भी रक्षा हो सकेगी। धनबाद जिले में मुनीडीह खदान में कोल बेड मीथेन (सीबीएम) और कोल माइन मीथेन (सीएमएम) गैस के दोहन और व्यावसायिक उत्पादन पर कार्य चल रहा है।

    एसपेट के डायरेक्टर वैभव चौधरी ने स्वागत करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नेट जीरों की बात कह रहे हैं। हमें इस दिशा में शोध करने की जरूरत है। कोयले का हम मल्टीपल उपयोग कर रहे हैं।

    कोयले के अंदर मिल रहे मीथेन का हम उपयोग कर सकते हैं। हमें इस दिशा में शोध करने की जरूरत है। चीन, पोलैंड, यूएस इसका उपयोग कर रहे हैं। उनके सामने भी चुनौतियां थीं। उसे उन्होंने दूर किया और हमारे सामने भी है और हम भी इसे दूर कर सकते हैं।

    इस दिशा में उन देशों के अनुभव और ज्ञान का लाभ हम ले सकते हैं। इसलिए, इस आयोजन में वैज्ञानिक-शोधार्थी, कोल इंडिया के अधिकारी शामिल हैं। आईआईटी बांबे के प्रोफेसर विक्रम विशाल ऑनलाइन जुड़े थे।

    विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के एसोसिएट हेड-साइंटिस्ट डॉ नीलिमा आलम ने संबोधित किया। इसके बाद एक तकनीकी सत्र का संचालन रिसर्च मैनेजर डॉ. ऐश्वर्या रामचंद्रन ने किया। इस सत्र में उद्योग, अनुसंधान और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के प्रतिनिधियों ने अपने विचार साझा किए और फिर व्यापक चर्चा के लिए मंच खोला गया।

    चर्चा में शामिल होने वालों में प्रभा एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के अधिकारी, सोसाइटी आफ जियो साइंटिस्ट्स, झारखंड के डॉ अनल सिन्हा, सीएमपीडीआई के विनोद कुमार पांडे और बीके पांडे, यूएनइपी के इंटरनेशनल मीथेन एमिशन आब्जर्वेटरी के डॉ. कुशल टिबरेवाल, एंबर एनर्जी के राजशेखर मोदादुगु, ग्लोबल मीथेन हब की विद्वत्ता शर्मा और यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के डॉ. उदयन सिंह ने भी विचार रखे।

    मीथेन का उपयोग ही बेहतर: डॉ. अनल
    कोल बेड मीथेन कोयले के किसी नए खनन में पाया जा सकता है जबकि कोल माइंस मीथेन किसी भी बंद माइंस में पाया जा सकता है। जो माइंस आज की तारीख में चल रहे हैं वहां भी मीथेन का रिसाव पाया जाता है।

    झारखंड में उच्च रैंक का कोयला पाया जाता है, जिसके साथ में कोल बेड मीथेन गैस का जमाव रहता है। अगर इस गैस को समय और तकनीक से निकाल लिया जाए और इसे इस्तेमाल किया जाए तो ठीक है, अन्यथा यह हमारे वातावरण में जाकर वातावरण को अंशत: या पूर्णत: दूषित कर देता है।

    इससे बचने का सर्वोत्तम उपाय यही है कि समय के साथ इस गैस के दोहन का भी इंतजाम कोयले के खनन से पूर्व कर लिया जाए।

    धनबाद के बंद कोयल खदानों में नए तरीके से भारत सरकार ने कोयले के खनन की घोषणा की तथा इन कोयले के साथ अगर मीथेन गैस का भी दोहन किया जाए तो सरकार संबंधित एजेंसियों को कोयला मंत्रालय को दिए जाने वाले रेवेन्यू में 50 प्रतिशत छूट देगी।
    डॉ. अनल सिन्हा, अध्यक्ष, झारखंड आई आई टी एलुमनी सोसाइटी।

  • बिहार को रेलवे का बड़ा तोहफा, दानापुर-फतुहा रेलखंड पर ₹976 करोड़ से बनेगी नई मल्टीट्रैक लाइन

    बिहार को रेलवे का बड़ा तोहफा, दानापुर-फतुहा रेलखंड पर ₹976 करोड़ से बनेगी नई मल्टीट्रैक लाइन

     पटना
     बिहार में रेल अवसंरचना को मजबूत करने की दिशा में भारतीय रेलवे ने एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए पूर्व मध्य रेलवे के दानापुर-फतुहा रेलखंड पर 29 किलोमीटर लंबी मल्टीट्रैकिंग परियोजना को मंजूरी दे दी है।

    लगभग 976 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना के पूरा होने से पटना रेल कारिडोर के सबसे व्यस्त खंडों में से एक पर ट्रेनों की आवाजाही सुगम होगी, परिचालन क्षमता बढ़ेगी और यात्रियों को समय पर ट्रेन संचालन का लाभ मिलेगा।

    यह रेलखंड पूर्व मध्य रेलवे का सबसे अधिक व्यस्त मार्ग माना जाता है, जहां वर्तमान में ट्रेनों की संख्या क्षमता के करीब पहुंच चुकी है।

    रेल ट्रैफ‍िक का कम होगा दबाव
    नई लाइनों के निर्माण से ट्रैफिक का दबाव कम होगा और भविष्य में बढ़ती रेल सेवाओं के लिए पर्याप्त क्षमता उपलब्ध हो सकेगी।

    परियोजना के तहत दानापुर से पटना के बीच तीसरी एवं चौथी रेल लाइन, पटना से राजेंद्र नगर–पटना साहिब के बीच तीसरी लाइन तथा पटना साहिब से फतुहा के बीच तीसरी एवं चौथी लाइन बिछाई जाएगी।

    इन अतिरिक्त लाइनों के निर्माण से ट्रेनों के क्रासिंग और ओवरटेकिंग में लगने वाला समय घटेगा, जिससे परिचालन अधिक सुचारु और समयबद्ध होगा।

    रेलवे के अनुसार, परियोजना के पहले ही वर्ष में इस मार्ग पर प्रतिदिन 22 अतिरिक्त यात्री ट्रेनें तथा 18 अतिरिक्त मालगाड़ियां चलाने की क्षमता विकसित हो जाएगी।

    इसके अलावा इस रेलखंड से प्रति वर्ष 52 लाख टन अतिरिक्त माल ढुलाई संभव होगी। इससे कोयला, सीमेंट, खनिज और अन्य औद्योगिक उत्पादों की ढुलाई को गति मिलेगी।

    रेलवे के एनर्जी, मिनरल एवं सीमेंट कॉरिडोर का हिस्‍सा
    यह परियोजना दिल्ली–पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन–पटना–किऊल–भागलपुर–खाना–हावड़ा रेल मार्ग के चौड़ीकरण (क्वाड्रुपलिंग) कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    यह मार्ग भारतीय रेलवे के एनर्जी, मिनरल एवं सीमेंट कारिडोर के अंतर्गत आता है, जहां भारी मात्रा में औद्योगिक और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी माल ढुलाई होती है।

    परियोजना का एक महत्वपूर्ण लाभ बक्सर जिले के चौसा में निर्माणाधीन 2120 मेगावाट ताप विद्युत परियोजना को भी मिलेगा।

    इस बिजलीघर के लिए कोयला और अन्य आवश्यक सामग्रियों की आपूर्ति मुख्य रूप से रेल मार्ग से की जाएगी। अतिरिक्त रेल लाइनों के निर्माण से इस परियोजना के लिए निर्बाध माल परिवहन सुनिश्चित होगा।

    रेल विशेषज्ञों का मानना है कि दानापुर-फतुहा रेलखंड की क्षमता बढ़ने से पूर्व मध्य रेलवे के पूरे पटना मंडल में ट्रेनों के संचालन में सुधार आएगा।

    यात्र‍ियों को अधिक ट्रेनों का म‍िलेगा विकल्‍प
    राजधानी पटना से होकर गुजरने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों के साथ-साथ उपनगरीय और मेमू सेवाओं के विस्तार का भी मार्ग प्रशस्त होगा। इससे यात्रियों को अधिक ट्रेन विकल्प, कम विलंब और बेहतर यात्रा अनुभव मिलेगा।

    भारतीय रेलवे का कहना है कि यह परियोजना केवल रेल क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि बिहार में औद्योगिक विकास, ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, रोजगार और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को नई गति देने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

    परियोजना के पूरा होने के बाद पूर्व मध्य रेलवे के इस महत्वपूर्ण रेलखंड पर परिचालन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और राज्य के विकास को नई मजबूती मिलेगी।

  • बिहार में चीनी उत्पादन घटा, बेहतर रिकवरी रेट के बावजूद चुनौती बरकरार

    बिहार में चीनी उत्पादन घटा, बेहतर रिकवरी रेट के बावजूद चुनौती बरकरार

    पटना
     यद्यपि उत्पादन में इस मामूली गिरावट से निराश होने का कोई तुक नहीं, लेकिन बिहार में मीठी चीनी की यह कड़वी सच्चाई है। राष्ट्रीय औसत से अधिक रिकवरी रेट (10.3%) के बावजूद इस बार (पेराई सत्र 2025-26) चीनी का उत्पादन अपेक्षाकृत कम हुआ है।

    कार्यशील सभी 10 मिलों ने मिलकर मात्र 586549.011 टन चीनी का उत्पादन किया, जो पूरे देश में उत्पादित चीनी की मात्रा का लगभग 2.5 प्रतिशत है। रिकवरी रेट का मतलब है कि एक क्विंटल गन्ने से उतना किलोग्राम चीनी तैयार हुई।

    गन्ना उद्योग पर फोकस किए हुए बिहार के लिए उत्पादन का वर्तमान आंकड़ा किसी चुनौती से कम नहीं। चीनी बनाने के लिए इस बार राज्य में 5690140 टन गन्ने की पेराई हुई। सुखद यह कि किसानों से खरीदे गए गन्ना मूल्य का चीनी मिलों ने शत प्रतिशत (2137.83 करोड़ रुपये) भुगतान कर दिया है।

    क्षमता के हिसाब से गन्ने की सर्वाधिक पेराई हरिनगर चीनी मिल ने की और सबसे कम रीगा ने। चार वर्ष के अंतराल के बाद रीगा चीनी मिल द्वारा पुन: उत्पादन शुरू हुआ है। इस संतोषजनक पहल से आगे की उपलब्धि के लिए अभी प्रयास नीति और नियम से आगे नहीं बढ़ पाया है।

    उत्पादन में सातवां स्थान:
    देश में चीनी का उत्पादन करने वाले राज्यों में बिहार अब तक सातवें स्थान पर रहा है। इस बार भी सर्वाधिक उत्पादन महाराष्ट्र ने किया। उत्तर प्रदेश और कर्नाटक क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। ये तीनों राज्य मिलकर देश के चीनी उत्पादन में लगभग 80 प्रतिशत का योगदान करते हैं।

    कम उत्पादन के कारण:
    बेहतर रिकवरी रेट के बावजूद चीनी के कम उत्पादन के मुख्य कारणों में पुरानी मशीनें, प्रति हेक्टेयर कम उपज, निम्न प्रभेद का गन्ना और सहवर्ती उत्पाद (एथनॉल, बिजली आदि) हैं। उत्पादन बढ़ाने के लिए मिलों में अत्याधुनिक संयंत्र लगाने के साथ उन्नत प्रभेद के गन्ने की बुआई अपेक्षित है।

    बिहार में चीनी का उत्पादन (लाख टन में)
    वर्ष     उत्पादन (लाख टन)
    2022-23     6.27
    2023-24     6.88
    2024-25     6.08
    2025-26     5.87

    2025-26 में मिलों द्वारा चीनी का उत्पादन (टन में)
    मिल का नाम       उत्पादन (टन)
    हरिनगर               143583.70
    नरकटियागंज      105163.81
    बगहा                   89101.90
    हसनपुर                50519.00
    मझौलिया             48800.00
    सिधवलिया          46965.00
    गोपालगंज           34716.30
    लौरिया              30039.30
    सुगौली             22530.50
    रीगा                15129.50

  • पंजाब पुलिस ने बड़ी साजिश नाकाम की, वारदात से पहले 5 बदमाश हथियारों सहित दबोचे

    पंजाब पुलिस ने बड़ी साजिश नाकाम की, वारदात से पहले 5 बदमाश हथियारों सहित दबोचे

    फरीदकोट.

    थाना सदर फरीदकोट पुलिस ने एक बड़ी वारदात होने से पहले कार्रवाई करते हुए लूट की योजना बनाने के आरोप में पांच लोगों को धारदार हथियारों सहित गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ थाना सदर फरीदकोट में मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

    यह जानकारी डीएसपी तरलोचन सिंह तथा थाना सदर फरीदकोट के प्रभारी इंस्पेक्टर राजेश कुमार ने दी। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मनमोहनजीत सिंह और लखविंदर सिंह निवासी गांव शेर सिंह वाला, मोहितप्रीत सिंह और राजविंदर सिंह निवासी गांव महिमूआणा तथा हरमेल सिंह निवासी गांव बहलेवाला, जिला फरीदकोट के रूप में हुई है। डीएसपी तरलोचन सिंह और इंस्पेक्टर राजेश कुमार ने बताया कि सहायक थाना प्रभारी गुरबख्श सिंह पुलिस पार्टी के साथ गांव मचाकी कलां बस स्टैंड के पास संदिग्ध व्यक्तियों की जांच कर रहे थे।

    इसी दौरान एक विश्वसनीय मुखबिर ने सूचना दी कि उक्त व्यक्ति, जिनके खिलाफ पहले भी विभिन्न आपराधिक मामले दर्ज हैं, फरीदकोट-सादिक मुख्य मार्ग पर आदेश कॉलेज के निकट गांव महिमूआणा के पास स्थित पुल की पटरी पर एकत्र होकर राहगीरों को लूटने की योजना बना रहे हैं। मुखबिर ने यह भी बताया कि उनके पास धारदार हथियार मौजूद हैं। सूचना मिलते ही पुलिस ने मौके पर दबिश देकर पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। तलाशी के दौरान उनके कब्जे से एक कृपाण, एक गंडासी, एक लोहे की पाइप तथा दो कापे बरामद किए गए, जिन्हें पुलिस ने कब्जे में ले लिया।

    पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ लूट की योजना बनाने तथा अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। आरोपियों को अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड हासिल करने की कार्रवाई की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वे पहले किसी अन्य आपराधिक वारदात में शामिल रहे हैं या नहीं। मामले की जांच जारी है।