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  • कौलेश्वरी मंदिर मार्ग पर बनेगी नई पीसीसी सड़क, श्रद्धालुओं को मिलेगी बड़ी राहत जल्द

    कौलेश्वरी मंदिर मार्ग पर बनेगी नई पीसीसी सड़क, श्रद्धालुओं को मिलेगी बड़ी राहत जल्द

     चतरा
     प्रसिद्ध धार्मिक एवं पर्यटन स्थल कौलेश्वरी पर्वत आने वाले श्रद्धालुओं के लिए जल्द ही आवागमन की सुविधा बेहतर होने की उम्मीद है। कालेश्वरी मंदिर तक पहुंचने वाले फारेस्ट के प्रमुख मार्ग को सुगम बनाने की दिशा में उत्तरी वन प्रमंडल ने महत्वपूर्ण पहल की है।

    इसके तहत जूठा से बेलतरनी तक 2.8 किलोमीटर लंबी एवं 12 फीट चौड़ी पीसीसी सड़क के निर्माण का प्रस्ताव तैयार कर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) को भेज दिया गया है।

    प्रस्ताव को स्वीकृति मिलने के बाद सड़क निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। वर्तमान में इस मार्ग की स्थिति कई स्थानों पर खराब है। कच्ची होने के कारण बरसात में और बदतर हो जाती है। जिससे श्रद्धालुओं, स्थानीय ग्रामीणों तथा पर्यटकों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

    सड़क बनने से न केवल यात्रा आसान होगी, बल्कि क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी। कालेश्वरी पर्वत झारखंड के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। जहां साल भर बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। चैत्र नवरात्र और अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है।

    कौलेश्वरी मंदिर विकास समिति के सदस्य अमरेंद्र कुमार केसरी कहते हैं कि चैत्र नवरात्र में दस दिवसीय मेला का आयोजन होता है। उस दौरान आठ से दस लाख श्रद्धालु यहां आते हैं।

    उन्होंने कहा कि इतना ही नहीं विदेशी पर्यटकों की संख्या भी अच्छी खासी रहती है। आगे कहा कि बेहतर सड़क सुविधा की लंबे समय से मांग की जा रही है। उनका कहना है कि सड़क बनने से कालेश्वरी आने वाले श्रद्धालुओं को काफी राहत मिलेगी।

    साथ ही आसपास के गांवों के लोगों को भी बेहतर आवागमन की सुविधा प्राप्त होगी। लोगों ने उम्मीद जताई कि परियोजना को शीघ्र मंजूरी मिलेगी, जिससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ क्षेत्र के विकास को भी नई दिशा मिलेगी।

    जूठा से बेलतरनी तक पीसीसी सड़क निर्माण के लिए विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर पीसीसीएफ को भेजा गया है। प्रस्ताव में 2.8 किलोमीटर लंबी एवं 12 फीट चौड़ी सड़क के निर्माण का प्रावधान किया गया है। स्वीकृति मिलते ही आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी। सड़क फारेस्ट की है। वर्तमान समय में कच्ची है। बरसात के बाद हर साल मिट्टी और मोरम डाल कर ठीक किया जाता है। पीसीसी का निर्माण हो जाने से स्थायी निदान हो जाएगा। -राहुल मीना, उत्तरी वन प्रमंडल पदाधिकारी, चतरा।

     

  • Delhi Lakshmi Yojana: आज से रजिस्ट्रेशन शुरू, महिलाओं को हर महीने ₹2,500; जानें कौन नहीं होगा पात्र

    Delhi Lakshmi Yojana: आज से रजिस्ट्रेशन शुरू, महिलाओं को हर महीने ₹2,500; जानें कौन नहीं होगा पात्र

    नई दिल्ली

    दिल्ली लक्ष्मी योजना (Delhi Laxmi Yojana) के तहत रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया आज यानी  1 अगस्त से शुरू हो चुकी है. दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार ने 'दिल्ली लक्ष्मी योजना' का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन पोर्टल लाइव कर दिया है. उन्होंने खुद  'एक्स' (X) पर पोस्ट कर बताया कि आज से इस योजना के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन पोर्टल खुल गया है.इस योजना के जरिए पात्र महिलाओं के खाते में हर महीने पूरे ₹2,500 भेजे जाएंगे। 

    अगर आप भी दिल्ली सरकार की दिल्ली लक्ष्मी योजना के तहत हर महीने ₹2,500 की आर्थिक मदद पाना चाहती हैं तो बिना देर किए आज ही ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर अपना रजिस्ट्रेशन करा लें. हालांकि इस योजना का लाभ हर महिला को नहीं मिलने वाला है.आइए जानते हैं इस योजना का लाभ किसे मिलेगा और किसे नहीं…

    17 लाख से ज्यादा महिलाओं को  फायदा 
    मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस योजना की शुरुआत करते हुए कहा कि यह पहल दिल्ली की महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाएगी.  दिल्ली सरकार ने अपने 2026-27 के बजट में  इसके लिए 5,110 करोड़ रुपए का बजट का प्रावधान किया है, जिससे राज्य की करीब 17 लाख से ज्यादा महिलाओं को सीधा फायदा  मिलने का अनुमान है। 

    किसे मिलेगा योजना का लाभ? 
    नियमों के तहत, 21 से 60 साल की उम्र की वे महिलाएं 'दिल्ली लक्ष्मी योजना' के लिए पात्र होंगी, जिनके परिवार की सालाना आय 2.5 लाख रुपए तक है. दिल्ली सरकार ने यह फैसला लिया है कि केवल वे महिलाएं ही पात्र होंगी, जो या जिनके परिवार कम से कम 10 वर्षों से दिल्ली के निवासी हैं. एक परिवार में, केवल सबसे बड़ी पात्र महिला ही योजना के लिए योग्य होगी और प्रत्येक परिवार से केवल एक महिला ही इस योजना का लाभ उठा सकेगी। 

    किसे नहीं मिलेगा 'दिल्ली लक्ष्मी योजना' का फायदा?
    इस योजना का लाभ केवल जरूरतमंदों को मिले, इसके लिए सरकार ने कुछ कड़े नियम बनाए हैं. ऐसे में ये जान ले कि कौन-कौन इस योजना से बाहर रहेगा? आइए आसान शब्दों में आपको बताते हैं कि किन महिलाओं को इस योजना का फायदा नहीं मिलेगा। 

        जो महिलाएं इनकम टैक्स देती हैं या जीएसटी (GST) फाइल करती हैं.
        सरकारी कर्मचारी या जिनके परिवार के सदस्य सरकारी विभागों/पीएसयू (PSU) में काम करते हैं.
        जो महिलाएं पहले से ही किसी अन्य सरकारी योजना के तहत आर्थिक मदद ले रही हैं.
        जिन परिवारों के पास चार पहिया  गाड़ी है.
        जो परिवार सालाना 2,400 यूनिट से ज्यादा बिजली का इस्तेमाल करते हैं.
        तीन से ज्यादा बच्चे होने पर या आपराधिक रिकॉर्ड होने वाली महिलाएं इसके लिए पात्र नहीं होंगी

    पैसे कैसे मिलेंगे? आपके पास हैं 2 आसान ऑप्शंस

    आपको 2,500 रुपये की मदद किस तरह चाहिए, इसके लिए सरकार ने दो रास्ते दिए हैं:

        हर महीने 1,500 रुपए रिकरिंग डिपॉजिट (RD) या फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) खाते में जमा होंगे, जबकि बाकी 1,000 रुपए सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) वॉलेट में दिए जाएंगे जिसका इस्तेमाल आप सिर्फ मंजूरी-प्राप्त जरूरी सामान खरीदने के लिए कर पाएंगी। 

        आप चाहें तो पूरे के पूरे 2,500 रुपए की राशि को सीधे अपने बैंक खाते (RD या FD) में जमा करवा सकती हैं। 

    दिल्ली लक्ष्मी योजना: आवेदन के लिए कौन-कौन से डॉक्यूमेंट्स चाहिए?

    अगर आप 'दिल्ली लक्ष्मी योजना' का लाभ लेने के लिए आवेदन (Apply) कर रही हैं, तो अपने पास ये  डॉक्यूमेंट्स तैयार रखें…

    1. ये सभी अनिवार्य डॉक्यूमेंट्स 

        आधार कार्ड
        दिल्ली का वोटर आईडी कार्ड
        आपकी (आवेदक की) फोटो और हस्ताक्षर
        क्षेत्रीय विधायक (MLA) या सांसद (MP) का सिफारिश पत्र (Recommendation Letter)

    2. 10 साल से दिल्ली में रहने का सबूत (कोई भी 1 डॉक्यूमेंट्स):

        दिल्ली का वोटर आईडी कार्ड
        राशन कार्ड
        ड्राइविंग लाइसेंस
        बिजली का बिल / गैस कनेक्शन बिल या रसीद

    3. उम्र का सबूत / एज प्रूफ (कोई भी 1 डॉक्यूमेंट्स):

        जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate)
        स्कूल छोड़ने का प्रमाणपत्र (SLC – अंतिम पढ़ी गई कक्षा का)
        10वीं कक्षा (मैट्रिक) की मार्कशीट या सर्टिफिकेट
        पैन कार्ड (PAN Card)
        ड्राइविंग लाइसेंस
        आधार कार्ड
        वोटर आईडी कार्ड

    आर्थिक सहायता के अलावा क्या-क्या फायदे?

    2,500 रुपए की आर्थिक सहायता  देने के साथ-साथ, 'दिल्ली लक्ष्मी योजना' का मकसद कई बड़े सामाजिक सुधारों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य , पोषण और स्वच्छता और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना भी है…

        बेटियों का स्कूल में दाखिला कराने, उनकी 'अपार' (APAAR) कार्ड और 'आभा' (ABHA) हेल्थ आईडी बनवाने के साथ-साथ बच्चों का समय पर टीकाकरण पूरा करने के लिए प्रेरित करना। 

        'पोषण' ट्रैकर पर रजिस्ट्रेशन कराने के अलावा देशहित के अभियानों जैसे 'एक पेड़ मां के नाम' के तहत पौधरोपण करने और स्वच्छ भारत अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाना। 

        महिलाओं को स्वयं-सहायता समूहों (Self-Help Groups) और सरकारी कौशल विकास (Skill Development) ट्रेनिंग से जोड़ना, ताकि वे खुद का काम सीखकर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें। 

    बता दें कि इस योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया दिल्ली सरकार के आधिकारिक 'दिल्ली लक्ष्मी योजना पोर्टल' के जरिए की जाएगी। 

  • हरियाणा में बदलेगी लेबर चौक की व्यवस्था, टोकन सिस्टम से मिलेगा मजदूरों को समान काम

    हरियाणा में बदलेगी लेबर चौक की व्यवस्था, टोकन सिस्टम से मिलेगा मजदूरों को समान काम

    चंडीगढ़
     हरियाणा के शहरों और कस्बों में वर्षों से सुबह की शुरुआत एक परिचित दृश्य के साथ होती है। लेबर चौकों पर सैकड़ों निर्माण श्रमिक, राजमिस्त्री, पेंटर, प्लंबर, बढ़ई और महिला मजदूर काम मिलने की उम्मीद लेकर खड़े रहते हैं।

    जैसे ही कोई ठेकेदार या मकान मालिक पहुंचता है, काम पाने की होड़ शुरू हो जाती है। कई बार एक ही व्यक्ति को बार-बार काम मिल जाता है, जबकि कई श्रमिक कई दिनों तक खाली हाथ निराश होकर लौटते हैं। अब इस पूरी व्यवस्था को बदलने की तैयारी शुरू हो गई है।

    हरियाणा के शहरी स्थानीय निकाय, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन तथा विमानन मंत्री विपुल गोयल ने ''श्रम टोकन आधारित लेबर चौक प्रबंधन प्रणाली'' का मॉडल तैयार किया है। टोकन बनाने का काम सार्वजनिक निजी सहभागिता (पीपीपी) मॉडल पर, राज्य सरकार के स्तर पर अथवा निजी कंपनी को भी प्रदान किया जा सकता है।

    फरीदाबाद में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इसका सकारात्मक परिणाम सामने आने के बाद अब इसे पूरे हरियाणा में लागू करने की तैयारी है। मंत्री जल्द ही इस प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और श्रम मंत्री अनिल विज से चर्चा करेंगे।

    नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक श्रमिक का पंजीकरण किया जाएगा और उसे एक टोकन कार्ड दिया जाएगा। काम देने वाला व्यक्ति जब लेबर चौक पहुंचेगा तो टोकन के क्रम के अनुसार ही श्रमिक को काम मिलेगा। इससे धक्का-मुक्की, मनमानी और बार-बार एक ही व्यक्ति को काम मिलने जैसी शिकायतों पर रोक लगेगी। साथ ही मजदूरी की दरें भी तय होने से श्रमिकों के शोषण की संभावना कम होगी और काम देने वालों को भी पारदर्शी व्यवस्था मिलेगी।

    हरियाणा के फरीदाबाद, गुरुग्राम, रोहतक, सोनीपत, पानीपत, करनाल, अंबाला, पंचकूला, हिसार, भिवानी, जींद, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, सिरसा, रेवाड़ी, पलवल, महेंद्रगढ़ और बहादुरगढ़ सहित लगभग सभी प्रमुख शहरों में लेबर चौक असंगठित श्रम बाजार की रीढ़ हैं। रोज हजारों श्रमिक इन्हीं चौकों के भरोसे रोजगार की तलाश में निकलते हैं, लेकिन अब तक उनके लिए कोई समान और सुव्यवस्थित व्यवस्था नहीं थी।

    विपुल गोयल का कहना है कि यह केवल टोकन प्रणाली नहीं, बल्कि श्रमिक सम्मान और सुशासन की नई पहल है। पंजीकृत श्रमिकों को स्वास्थ्य जांच, उपचार और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराना भी आसान होगा। तकनीक आधारित इस मॉडल से श्रम प्रबंधन अधिक पारदर्शी, सुव्यवस्थित और जवाबदेह बनेगा।

    यदि यह व्यवस्था पूरे प्रदेश में लागू होती है तो हरियाणा असंगठित श्रम क्षेत्र में बड़ा सुधार करने वाला अग्रणी राज्य बन सकता है। यह पहल केवल काम के आवंटन का नया तरीका नहीं, बल्कि उन हजारों मेहनतकश श्रमिकों को सम्मान, समान अवसर और सामाजिक सुरक्षा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

  • राजस्थान में महिलाओं की सेहत पर संकट, आधी से ज्यादा महिलाएं एनीमिया की शिकार

    राजस्थान में महिलाओं की सेहत पर संकट, आधी से ज्यादा महिलाएं एनीमिया की शिकार

    डूंगरपुर
    राजस्थान में महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। प्रदेश में 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की आधी से अधिक महिलाएं एनीमिया यानी खून की कमी से जूझ रही हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के अनुसार राजस्थान में इस आयु वर्ग की 54.4 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं। वहीं गर्भवती महिलाओं में भी एनीमिया की स्थिति गंभीर बनी हुई है। आदिवासी बहुल क्षेत्रों में हालात और अधिक चिंताजनक हैं। सर्वे के अनुसार प्रदेश की अनुसूचित जनजाति वर्ग की 15 से 49 वर्ष आयु की महिलाओं में एनीमिया की दर 61.6 प्रतिशत है। डूंगरपुर जिले में यह आंकड़ा बढ़कर 72.6 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

    बांसवाड़ा-डूंगरपुर सांसद राजकुमार रोत की ओर से लोकसभा में उठाए गए सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने एनीमिया की स्थिति और इसके उपचार को लेकर जानकारी दी। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार डूंगरपुर जिले में अप्रेल 2025 से फरवरी 2026 तक 34 हजार 304 गर्भवती महिलाओं की जांच की गई। इनमें 3152 महिलाओं में गंभीर एनीमिया पाया गया, जिनका हीमोग्लोबिन स्तर 7 ग्राम प्रति डेसीलीटर से कम था। इस अवधि में डूंगरपुर मेडिकल कॉलेज एवं संबद्ध अस्पतालों की ओर से 5390 यूनिट रक्त व रक्त अवयव उपलब्ध कराए गए। इनमें से 1662 यूनिट रक्त गंभीर एनीमिया से पीड़ित गर्भवती महिलाओं के उपचार में उपयोग किया गया।

    कुपोषण और पोषण की कमी बड़ी वजह
    जनजाति क्षेत्रों में एनीमिया की समस्या केवल महिलाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चे और पुरुष भी इससे प्रभावित हैं। विशेषज्ञों के अनुसार पर्याप्त पोषण नहीं मिलना, आयरन युक्त आहार की कमी और स्वास्थ्य जागरूकता का अभाव इसके प्रमुख कारण हैं। चिकित्सकों के अनुसार सामान्य व्यक्ति में हीमोग्लोबिन का स्तर 12 से 16 ग्राम प्रति डेसीलीटर होना चाहिए, लेकिन कई ग्रामीण क्षेत्रों में गर्भवती महिलाएं बेहद कम हीमोग्लोबिन स्तर के साथ अस्पताल पहुंच रही हैं। कई मामलों में प्रसव से पहले रक्त चढ़ाने की आवश्यकता पड़ती है।

    कई योजनाएं फिर भी चुनौती बरकरार
    सरकार की ओर से एनीमिया नियंत्रण के लिए आयरन-फोलिक एसिड वितरण, जांच और उपचार सहित कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि राजस्थान में महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए एनीमिया अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।

  • हरियाणा में मतदाता सूची की बड़ी सफाई, पंचकूला में 65,967 वोट हटाए गए

    हरियाणा में मतदाता सूची की बड़ी सफाई, पंचकूला में 65,967 वोट हटाए गए

    पंचकूला.

    विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के आंकड़ों में बड़ा खुलासा हुआ है। पंचकूला विधानसभा क्षेत्र से 65,967 मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं, जबकि कालका विधानसभा से 33,776 नाम विलोपित किए गए हैं। पूरे जिले में कुल 99,743 मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं।

    इतने बड़े पैमाने पर नाम हटने के बाद जिले में मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। कांग्रेस और भाजपा ने जिला में 40 हजार फर्जी मतदाता होने का दावा किया था। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता ने वर्ष 2024 में चुनाव हारने के बाद न्यायालय में याचिका दाखिल करके भी इसी संख्या का उल्लेख किया था। एसआईआर में फर्जी मतदाता होने के दावों से आंकड़ा 25 हजार अधिक है। वहीं 65967 मतदाता कम होने पर पंचकूला नगर निगम के अस्तित्व पर भी खतरा पैदा हो सकता है, क्योंकि मतदाताओं की संख्या औसतन 3 लाख से कम हो गई है। कांग्रेस और इनेलो इस मुद्दे पर अंतिम सूची आने आने पर निर्णय लेगी।

    पंचकूला एवं कालका में नाम हटे
    उपायुक्त एवं जिला निर्वाचन अधिकारी सतपाल शर्मा की अध्यक्षता में लघु सचिवालय में आयोजित बैठक में बताया गया कि यह कार्रवाई भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के तहत बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) द्वारा किए गए घर-घर सत्यापन के आधार पर की गई है। आंकड़ों के अनुसार पंचकूला विधानसभा में 7,907 मृत मतदाता, 34,731 स्थायी रूप से स्थानांतरित, 1,697 डुप्लीकेट प्रविष्टियां, 13,266 लंबे समय से अनुपस्थित तथा 8,366 अन्य कारणों से नाम हटाए गए। दूसरी ओर कालका विधानसभा में 7,091 मृत, 11,986 स्थानांतरित, 1,708 डुप्लीकेट, 9,707 अनुपस्थित और 3,284 अन्य श्रेणी के मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए।

    30 अगस्त तक कर सकते हैं दावा
    जिला निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया कि यह केवल प्रारंभिक मतदाता सूची है और 31 जुलाई से 30 अगस्त 2026 तक कोई भी पात्र नागरिक दावा या आपत्ति दर्ज करा सकता है। जिनका नाम सूची में नहीं है, वे फार्म-6 भरकर नया वोट बनवा सकते हैं, जबकि नाम, पता या अन्य त्रुटियों के सुधार के लिए फार्म-8 का उपयोग किया जा सकता है। अंतिम मतदाता सूची 3 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित होगी। जिला उपायुक्त सतपाल शर्मा का कहना है कि सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को मतदाता सूची की हार्ड कापी और साफ्ट कापी निशुल्क उपलब्ध कराई, ताकि वे सूची का परीक्षण कर समय रहते आवश्यक दावे और आपत्तियां दर्ज करा सकें। नागरिकों से भी अपील की है कि वे अपने और अपने परिवार के प्रत्येक सदस्य का नाम मतदाता सूची में अवश्य जांच लें।

  • पंजाब कांग्रेस में बढ़ी अंदरूनी कलह, मीटिंग में राजा वड़िंग के खिलाफ नारेबाजी

    पंजाब कांग्रेस में बढ़ी अंदरूनी कलह, मीटिंग में राजा वड़िंग के खिलाफ नारेबाजी

    पटियाला.

    पंजाब कांग्रेस का अंदरूनी कलह खत्म नहीं हो रहा है। इसी बीच आज आज पटियाला में भूपेश बघेल और कांग्रेस के प्रदेश प्रधान अमरिंदर राजा वड़िंग की मीटिंग के दौरान खूब हंगामा हो गया।

    इस दौरान पूर्व सी.एम. चरणजीत चन्नी के समर्थकों द्वारा जमकर नारेबाजी की गई और राजा वड़िंग का विरोध किया गया। बता दें कि कार्यक्रम के दौरान जैसे ही राजा वड़िंग ने बोलना शुरू किया तो चन्नी के समर्थकों द्वारा नारेजाबी की गई। इस दौरान चन्नी लाओ-पंजाब बचाओ के नारे लगाए गए। यहां माहौल गरमा गया और विरोध को देख भड़के राजा वड़िंग ने कहा कि ऐसे लोगों के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

  • पानीपत में सात करोड़ रंगदारी कांड का खुलासा, चार आरोपित गिरफ्तार, साजिश बेनकाब

    पानीपत में सात करोड़ रंगदारी कांड का खुलासा, चार आरोपित गिरफ्तार, साजिश बेनकाब

    पानीपत
    जिले के एक शिक्षण संस्थान के चेयरमैन से सात करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने के मामले का पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। पुलिस ने इस मामले में चार आरोपितों अजय, रोहित, अमित और रिहान को गिरफ्तार किया है। एसपी भूपेंद्र सिंह ने शनिवार को प्रेसवार्ता में पूरे मामले का खुलासा किया।

    एसपी ने बताया कि मुख्य आरोपित अजय वर्ष 2022 में डंकी रूट के जरिए अमेरिका गया था। वर्ष 2026 में वह वापस भारत लौट आया। यहां आने के बाद उसका संपर्क कुछ युवकों से हुआ और उसने रंगदारी की साजिश रची। सबसे पहले अजय ने रोहित को अपने साथ जोड़ा। इसके बाद रोहित ने अमित से संपर्क किया, जबकि अमित ने रिहान को योजना में शामिल किया।

    गंभीर परिणाम भुगतने की दी धमकी
    पुलिस जांच में सामने आया कि रिहान संबंधित शिक्षण संस्थान का पूर्व छात्र रह चुका है। इसी कारण उसके पास संस्थान के चेयरमैन का मोबाइल नंबर था। रिहान ने चेयरमैन का नंबर अपने साथियों को उपलब्ध कराया, जिसके बाद आरोपितों ने फोन कर सात करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी। रकम नहीं देने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी गई।

    जांच के दौरान यह भी सामने आया कि चारों आरोपित आपस में एक मोबाइल एप के जरिए वीडियो काल कर बातचीत करते थे, जिससे उनकी गतिविधियों का आसानी से पता न चल सके। इसी माध्यम से पूरी साजिश तैयार की गई और रंगदारी मांगने की योजना बनाई गई।

    आरोपियों से पूछताछ कर रही पुलिस
    पुलिस ने तकनीकी जांच और अन्य साक्ष्यों के आधार पर चारों आरोपितों को पानीपत से गिरफ्तार कर लिया। सभी आरोपित पानीपत जिले के आसपास के गांवों के रहने वाले हैं। पुलिस आरोपितों से पूछताछ कर रही है और यह भी जांच की जा रही है कि कहीं वे पहले भी इस तरह की किसी वारदात में शामिल तो नहीं रहे। साथ ही मामले में अन्य संभावित कड़ियों की भी जांच जारी है।

     

  • रेलवे पेंशनरों को बड़ी राहत, अब HRMS के साथ मैनुअल पास की सुविधा भी जारी

    रेलवे पेंशनरों को बड़ी राहत, अब HRMS के साथ मैनुअल पास की सुविधा भी जारी

    रांची
     रेलवे बोर्ड ने सेवानिवृत्त रेलकर्मियों, पारिवारिक पेंशनरों और कार्यरत दिव्यांग कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए पोस्ट रिटायरमेंट कॉम्प्लीमेंटरी पास (पीआरसीपी) एवं पीटीओ प्राप्त करने के लिए एचआरएमएस के साथ-साथ मैनुअल व्यवस्था का विकल्प भी जारी रखने का निर्णय लिया है।

    यह व्यवस्था अगले छह माह तक लागू रहेगी। इसके बाद इसकी समीक्षा की जाएगी। रेलवे बोर्ड ने इस संबंध में सभी जोनल रेलवे, उत्पादन इकाइयों, आईआरसीटीसी और क्रिस को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।

    रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि पहले 29 मई 2026 को पीआरसीपी को एचआरएमएस के माध्यम से जारी करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद 15 जुलाई 2026 को अंतरिम व्यवस्था के तहत तीन माह के लिए मैनुअल पास जारी करने की अनुमति दी गई थी। हालांकि, विभिन्न मान्यता प्राप्त रेलवे महासंघों और पेंशनर संगठनों ने बोर्ड के समक्ष कई व्यावहारिक कठिनाइयों की ओर ध्यान आकर्षित किया।

    डिजिटल व्यवस्था में आ रही थीं व्यावहारिक दिक्कतें
    रेलवे बोर्ड को बताया गया कि बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त कर्मचारी और पारिवारिक पेंशनर डिजिटल माध्यम के उपयोग में दक्ष नहीं हैं। कई क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या भी है, जबकि अनेक रेलवे इकाइयों में पूरी तरह ई-पास व्यवस्था लागू करने की तैयारी अभी अधूरी है। ऐसे में पुराने और नए दोनों विकल्प उपलब्ध कराने की मांग की गई थी।

    दोनों माध्यमों से पास लेने की होगी सुविधा
    रेलवे बोर्ड ने सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद निर्णय लिया है कि सेवानिवृत्त रेलकर्मी, पारिवारिक पेंशनर और कार्यरत दिव्यांग कर्मचारी अपनी सुविधा के अनुसार एचआरएमएस या मैनुअल, किसी भी माध्यम से पास एवं पीटीओ प्राप्त कर सकेंगे।

    हालांकि, जिन पेंशनरों या पारिवारिक पेंशनरों ने पहले से एचआरएमएस के माध्यम से पास लेना शुरू कर दिया है या जो सेवा के दौरान ही एचआरएमएस से पास प्राप्त कर रहे थे, उन्हें यह छूट नहीं मिलेगी। उनके लिए एचआरएमएस व्यवस्था पूर्ववत लागू रहेगी।

    रेलवे इकाइयों को हेल्पडेस्क बनाने का निर्देश
    रेलवे बोर्ड ने सभी रेलवे जोनों और इकाइयों को निर्देश दिया है कि जहां भी मैनुअल पास जारी किए जाते हैं, वहां हेल्पडेस्क एवं सुविधा केंद्र स्थापित किए जाएं। साथ ही आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, ताकि पात्र लाभार्थियों को पास प्राप्त करने में किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

    छह माह बाद होगी समीक्षा
    रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था फिलहाल छह माह के लिए लागू रहेगी। इसके बाद इसकी समीक्षा कर आगे की नीति तय की जाएगी।

     

  • गुरुग्राम के चौराहों पर हाईटेक निगरानी, नियम तोड़ते ही स्क्रीन पर दिखेगा ई-चालान

    गुरुग्राम के चौराहों पर हाईटेक निगरानी, नियम तोड़ते ही स्क्रीन पर दिखेगा ई-चालान

    गुरुग्राम. ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों को अब सोहना चौक पर नया अनुभव होगा। गुरुग्राम पुलिस ने यहां एक स्मार्ट एलईडी स्क्रीन लगाई है। जिस पर ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों का नंबर और उनके लंबित चालान की जानकारी दिखाई जाएगी।

    पुलिस का मानना है कि इससे लोगों में जागरूकता बढ़ेगी और ट्रैफिक नियमों के पालन को बढ़ावा मिलेगा। ट्रैफिक पुलिस के अनुसार चौक पर लगे एएनपीआर (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) कैमरे गुजरने वाले वाहनों की नंबर प्लेट स्कैन करेंगे। यह सिस्टम केंद्रीय सर्वर से जुड़ा होगा। यदि किसी वाहन का चालान लंबित है या मौके पर कोई उल्लंघन दर्ज होता है तो कुछ ही सेकेंड में वाहन का नंबर और बकाया चालान की राशि एलईडी स्क्रीन पर दिखाई देगी।

    उद्देश्य जागरूकता बढ़ाना
    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य किसी को सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा करना नहीं, बल्कि लोगों को ट्रैफिक नियमों के प्रति जागरूक करना है। उम्मीद है कि जब लोगों को पता होगा कि उनका लंबित चालान या नियम उल्लंघन सार्वजनिक डिस्प्ले पर दिख सकता है तो वे हेलमेट पहनने, सीट बेल्ट लगाने और सिग्नल जैसे नियमों का अधिक गंभीरता से पालन करेंगे।

    सफल होने पर अन्य प्रमुख चौराहों तक विस्तार
    फिलहाल यह व्यवस्था पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सोहना चौक पर शुरू की गई है। इसके परिणाम सकारात्मक रहने पर राजीव चौक, हीरो होंडा चौक और इफको चौक जैसे अन्य व्यस्त चौराहों पर भी ऐसी स्मार्ट एलईडी स्क्रीन लगाने की योजना है।

    लंबे समय से बकाया चालान वालों पर होगी कार्रवाई
    पुलिस के अनुसार कैमरे लगातार वाहनों की निगरानी करेंगे। जिन वाहनों के चालान लंबे समय से लंबित हैं, उनके खिलाफ विशेष अभियान चलाया जाएगा। ऐसे मामलों में वाहन जब्त करने या मौके पर ही चालान जमा कराने जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है।

    दूसरे शहरों में भी हो चुका है प्रयोग
    देश के कुछ अन्य शहरों में भी इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल शुरू हो चुका है। ऐसे सिस्टम का उद्देश्य चालान वसूली बढ़ाने के साथ लोगों में ट्रैफिक नियमों के पालन की आदत विकसित करना है।

    दूसरे शहरों में भी सफल रहा प्रयोग
    गुरुग्राम से पहले भी कई शहर इस तरह की सार्वजनिक डिस्प्ले व्यवस्था अपना चुके हैं।

    • बेंगलुरु: सितंबर 2025 से सार्वजनिक डिस्प्ले सिस्टम लागू।
    • जयपुर: मार्च 2026 से प्रमुख चौराहों पर व्यवस्था शुरू।
    • उद्देश्य: ट्रैफिक नियमों के पालन के प्रति जागरूकता बढ़ाना और लंबित चालानों की वसूली तेज करना।
  • पंजाब में बड़ी कार्रवाई, पाकिस्तान से आई 20 किलो हेरोइन के साथ तस्कर दबोचा गया

    पंजाब में बड़ी कार्रवाई, पाकिस्तान से आई 20 किलो हेरोइन के साथ तस्कर दबोचा गया

    अमृतसर.

    काउंटर इंटेलिजेंस अमृतसर ने सीमा पार संचालित ड्रग्स तस्करी और संगठित अपराध के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी के कब्जे से 20 किलो हेरोइन बरामद की गई है। इसकी जानकारी पंजाब के डीजीपी गौरव यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की।

    डीजीपी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी सीमा पार सक्रिय तस्करों से जुड़े एक विदेशी हैंडलर के निर्देश पर काम कर रहा था। वह भारत-पाकिस्तान सीमा के पास पहुंचाई गई हेरोइन की खेप प्राप्त कर उसे पंजाब के विभिन्न इलाकों में आगे सप्लाई करता था। इस मामले में आरोपी के खिलाफ स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल (SSOC), अमृतसर थाने में एनडीपीएस एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस पूरे नेटवर्क की पहचान करने, इसके अन्य सदस्यों तक पहुंचने और पहले पकड़े जा चुके ड्रग्स तस्करी मॉड्यूल से इसके संभावित संबंधों की जांच कर रही है।