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  • दिल्ली दंगों में IB अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड: ताहिर हुसैन समेत 5 दोषियों को उम्रकैद की सजा

    दिल्ली दंगों में IB अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड: ताहिर हुसैन समेत 5 दोषियों को उम्रकैद की सजा

    नई दिल्ली

    दिल्ली दंगों के दौरान अंकित शर्मा की हत्या के दोषी ताहिर हुसैन को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है. 2020 में उत्तर पूर्वी दिल्ली में ये दंगे हुए थे और इसी दौरान आईबी के अधिकारी अंकित शर्मा का कत्ल हो गया था. इस मर्डर केस में ताहिर हुसैन समेत 5 लोगों को उम्रकैद की सजा दी गई है. दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने इन लोगों को पहले ही दोषी ठहरा दिया था, लेकिन आज सजा का ऐलान हुआ है. इस मामले मे कडकडूमा कोर्ट ने 13 जुलाई को पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन, नाजिम, कासिम, जावेद और अनस को हत्या और आपराधिक साजिश जैसी गंभीर धाराओं मे दोषी करार दिया था. इस मामले में सजा पर सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने ताहिर हुसैन समेत अन्य दोषियों को मौत की सज़ा देने की मांग किया था. आईबी अधिकारी अकिंत शर्मा का शव एक नाले से बरामद किया गया था। 

    इस मामले में सजा का ऐलान करते हुए जज ने कहा कि यह बहुत ही गंभीर घटना थी. उन्होंने कहा कि अंकित शर्मा की बुरी तरह से हत्या की गई , उनकी बॉडी जानवर की तरह छोड़ दी गई थी. कोर्ट ने कहा कि यह घटना समाज को झकझोर देने वाली थी. उन्होंने कहा कि जिस तरह से यह पूरी घटना हुई उसने समाज को सोचने पर मजबूर किया. अदालत ने कहा कि अपराध को अंजाम देने का तरीका अत्यंत क्रूर था. जज ने कहा कि अंकित शर्मा पर हुआ हमला इतना भीषण और निर्मम था कि पीड़ित की मौत के बाद भी उसका शव दोषी घसीटकर चांद बाग ले गए और उसे नाले में फेंक दिया। 

    ताहिर हुसैन के अलावा कौन से हैं अन्य 4 दोषी, जिन्हें मिली उम्रकैद
    इस मामले में दिल्ली पुलिस की जांच को जमीन पर देखने के लिए ट्रायल कोर्ट के जज खुद पहुंचे थे. ताहिर हुसैन के अलावा जिन अन्य 4 लोगों को उम्रकैद की सजा दी गई है, उनमें अनस, नाजिम, कासिम और जावेद शामिल हैं. ताहिर हुसैन को लेकर यह भी कहा जा रहा है कि वह दिल्ली दंगों के दौरान गलियों में गैंग को लेकर घूम रहा था और बहुसंख्यक समुदाय के लोगों को निशाना बनाया जा रहा था। 

    51 गवाहों की लिस्ट दिल्ली पुलिस ने अदालत को दी थी
    अंकित शर्मा के परिवार की इस फैसले के बाद कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. कहा यह भी जा रहा है कि अंकित शर्मा का परिवार इसलिए मीडिया में बाइट देने से बच रहा है क्योंकि उन्हें अपनी सुरक्षा का खतरा है. दिल्ली पुलिस ने इस मामले में 91 गवाहों की सूची अदालत में सौंपी थी. इन लोगों में से ही कई ने बताया था कि ताहिर हुसैन और उसके साथियों को उन्होंने नाले में अंकित शर्मा का शव फेंकते हुए देखा था. अंकित शर्मा की जब हत्या हुई थी, वह घर की जरूरत का कोई सामान लेने निकले थे. लेकिन लौटे नहीं और फिर कई दिनों के बाद उनका शव चांद बाग नाले से मिला था. उनके शरीर पर कई दर्जन चोटों के निशान थे। 

  • 657 करोड़ घोटाले में आईएएस पंकज अग्रवाल की जमानत पर सीबीआई सख्त

    657 करोड़ घोटाले में आईएएस पंकज अग्रवाल की जमानत पर सीबीआई सख्त

     पंचकूला
     हरियाणा के चर्चित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से जुड़े 657 करोड़ रुपये के घोटाले के मामले में गिरफ्तार वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

    पंकज अग्रवाल की जमानत याचिका पर पंचकूला स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में सुनवाई हुई। सीबीआई ने पंकज अग्रवाल की नियमित जमानत याचिका का विरोध किया।

    जांच एजेंसी ने अदालत में दायर जवाब में आरोप लगाया कि पंकज अग्रवाल घोटाले के मास्टरमाइंड और चंडीगढ़ सेक्टर-32 स्थित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के पूर्व अधिकारी रिभव ऋषि के करीबी सहयोगी थे और उनसे आर्थिक और अन्य अनुचित लाभ प्राप्त करते रहे।

    सीबीआई के अनुसार, 10 दिसंबर 2024 से 16 जून 2025 तक स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव रहते हुए अग्रवाल ने 17 दिसंबर 2024 को आईडीएफसी फर्स्ट बैंक द्वारा भेजे गए हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद (एचएसएसपीपी) का खाता खोलने के प्रस्ताव को मंजूरी दी।

    31 दिसंबर 2024 को उन्होंने कोटक महिंद्रा बैंक से 100 करोड़ रुपये इस खाते में स्थानांतरित करने की स्वीकृति भी दी। एजेंसी का दावा है कि यह निर्णय वित्त विभाग के दिशा-निर्देशों के विपरीत था।

    न तो सूचीबद्ध बैंकों से प्रतिस्पर्धी प्रस्ताव मंगाए गए और न ही ब्याज दरों की तुलना की गई। बैंक की निवेश सीमा 50 करोड़ रुपये होने के बावजूद 100 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए। इसी खाते में बाद में 101 फर्जी डेबिट और 33 फर्जी क्रेडिट लेनदेन के जरिए 50.54 करोड़ रुपये के गबन का आरोप है।

    अग्रवाल ने अधिकारियों पर बनाया था दवाब
    सीबीआई ने यह भी आरोप लगाया कि अग्रवाल ने अधीनस्थ अधिकारियों पर फाइल और नोटशीट अपने पक्ष में बदलने का दबाव बनाया। 20 जून 2025 को कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के प्रधान सचिव और हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड (एचएसएएमबी) के चेयरमैन बनने के बाद उन्होंने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में एक और खाता खुलवाने में हस्तक्षेप किया।

    जांच एजेंसी के अनुसार, पहले लंबित पड़े प्रस्ताव को उनके हस्तक्षेप के बाद एक ही दिन में मंजूरी मिली और 10 जुलाई 2025 को हरियाणा मार्केटिंग डेवलपमेंट फंड के नाम से खाता खोल दिया गया। बाद में इसी खाते से 14 जनवरी 2026 को रद चेक का दुरुपयोग कर 10 करोड़ रुपये फर्जी तरीके से निकाल लिए गए।

    रिभव को पद से हटाए जाने के बाद भी था संपर्क
    सीबीआई ने अदालत को बताया कि जांच में पंकज अग्रवाल और रिभव ऋषि के बीच इस पूरे प्रकरण से जुड़े पूर्व संवाद के साक्ष्य मिले हैं। एजेंसी का दावा है कि अग्रवाल को यह जानकारी थी कि रिभव ऋषि बैंक के पद से हटाए जा चुके थे, इसके बावजूद दोनों के बीच लगातार संपर्क बना रहा।

    आरोपों को बताया बेबुनियाद
    बचाव पक्ष ने सभी आरोपों से बेबुनियाद बताया। उनका कहना है कि अग्रवाल ने कभी किसी से रिश्वत नहीं मांगी और न ही कोई अवैध लाभ लिया। अब इस मामले की अगली सुनवाई तीन अगस्त को होगी।

     

  • राजस्थान निकाय चुनाव की तैयारी तेज, 309 निकायों में आरक्षण प्रक्रिया शुरू

    राजस्थान निकाय चुनाव की तैयारी तेज, 309 निकायों में आरक्षण प्रक्रिया शुरू

    जयपुर
    राजस्थान में लंबे समय से अटके पड़े नगरीय निकाय चुनावों को लेकर स्वायत्त शासन विभाग ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक आदेश और नई अधिसूचना जारी कर दी है। प्रदेश की 309 नगरीय निकायों में चुनावी प्रक्रिया को समय पर पूरा कराने के लिए स्वायत्त शासन विभाग ने सभी जिला कलेक्टरों को अपने-अपने जिलों के वार्डों का वर्गवार और महिला आरक्षण तय करने के लिए अधिकृत कर दिया है। राजस्थान हाईकोर्ट के सख्त रुख और तय की गई समय-सीमा के बाद राज्य सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। जारी निर्देशों के अनुसार, जिला कलेक्टर स्थानीय स्तर पर अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), अनारक्षित वर्ग और महिलाओं के लिए निर्धारित वार्डों की संख्या के आधार पर पारदर्शी लॉटरी प्रक्रिया का संचालन करेंगे।

    वार्ड आरक्षण और लॉटरी प्रक्रिया: किसे क्या मिले अधिकार?
    स्वायत्त शासन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के तहत नगरीय निकायों के आरक्षण और लॉटरी प्रक्रिया को दो स्तरों पर विभाजित किया गया है ताकि व्यवस्था सुचारू रूप से चल सके।

    प्रदेश के सभी जिलों में नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पालिकाओं के वार्डों का वर्गवार निर्धारण और महिलाओं के लिए सीटों का आरक्षण संबंधित जिला कलेक्टरों द्वारा लॉटरी निकालकर तय किया जाएगा।

    वार्ड स्तर की लॉटरी जिला कलेक्टर निकालेंगे, लेकिन प्रदेश भर के नगर निगमों के महापौर, नगर परिषदों के सभापति और नगर पालिकाओं के अध्यक्ष पदों के लिए आरक्षण की लॉटरी राज्य स्तर पर स्वायत्त शासन विभाग (DLB) द्वारा जयपुर से निकाली जाएगी।

    क्यों महत्वपूर्ण है यह प्रशासनिक कदम?
    पिछले काफी समय से निकायों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी चुनाव न हो पाने के कारण स्थानीय विकास कार्य और नागरिक सुविधाएं प्रभावित हो रही थीं। जिला कलेक्टरों को अधिकार मिलने से आरक्षण की प्रक्रिया त्वरित गति से पूरी होगी और स्थानीय स्तर पर पारदर्शिता बनी रहेगी।

    इस अधिसूचना के आते ही प्रदेश के 309 निकायों में वार्ड स्तर पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे दावेदारों और राजनीतिक दलों की गतिविधियां तेज हो गई हैं।

    OBC ट्रिपल टेस्ट सर्वे और 5 अगस्त की डेडलाइन
    स्थानीय निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के सही और न्यायसंगत राजनीतिक प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के 'ट्रिपल टेस्ट' नियमों का पालन किया जा रहा है।

    राज्य में चल रहे ओबसी सर्वे की अंतिम रिपोर्ट 5 अगस्त 2026 तक सरकार और संबंधित आयोग को सौंप दी जाएगी। सर्वे रिपोर्ट मिलते ही राज्य सरकार 15 अगस्त 2026 तक प्रदेश की सभी निकायों में आरक्षण और लॉटरी की पूरी कागजी व प्रशासनिक प्रक्रिया को पूरा करने के प्रयास में जुटी है।

    राजस्थान निकाय चुनाव 2026 : संभावित टाइमलाइन
    राजस्थान सरकार ने हाईकोर्ट में जो संभावित चुनावी टाइमलाइन प्रस्तुत की है, उसके अनुसार चुनाव प्रक्रिया निम्नलिखित चरणों में पूरी की जाएगी।

    17 अगस्त 2026: निकाय चुनाव से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश और गाइडलाइन जारी की जाएगी।

    22 अगस्त 2026: राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा चुनावों की आधिकारिक अधिसूचना जारी की जाएगी।

    सितंबर 2026: प्रदेश की विभिन्न निकायों में वार्ड पार्षदों के लिए मतदान कराया जा सकता है।

    15 नवंबर 2026 की अंतिम सीमा: राजस्थान हाईकोर्ट की ओर से स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि स्थानीय निकाय और पंचायती राज, दोनों तरह के चुनाव हर हाल में 15 नवंबर 2026 तक संपन्न करा लिए जाने चाहिए।

  • पंचकूला में कांवड़ यात्रा को लेकर सुरक्षा सख्त, 540 पुलिसकर्मी संभालेंगे मोर्चा

    पंचकूला में कांवड़ यात्रा को लेकर सुरक्षा सख्त, 540 पुलिसकर्मी संभालेंगे मोर्चा

    पंचकूला
    सावन माह की कांवड़ यात्रा शुरू होते ही पंचकूला में शिवभक्तों की आस्था के साथ उनकी सुरक्षा भी पुलिस की सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी। 30 जुलाई से 12 अगस्त तक चलने वाली कांवड़ यात्रा को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित बनाने के लिए पंचकूला पुलिस ने व्यापक सुरक्षा और ट्रैफिक प्रबंधन का खाका तैयार कर लिया है।

    पुलिस कमिश्नर आइपीएस पंकज नैन के निर्देश पर यात्रा मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस बल, सीसीटीवी निगरानी और विशेष ट्रैफिक व्यवस्था लागू रहेगी, ताकि श्रद्धालुओं और आम लोगों दोनों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

    डीसीपी अदिति सिंह ने बताया कि यात्रा के दौरान छह एसीपी स्तर के अधिकारियों समेत करीब 540 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। प्रमुख मार्गों पर 24 घंटे पुलिस की मौजूदगी रहेगी, जबकि 18 महत्वपूर्ण स्थानों पर विशेष सुरक्षा नाके बनाए गए हैं।

    सभी थाना और चौकी प्रभारियों को लगातार फील्ड में रहकर सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। यात्रा मार्गों पर लगे सीसीटीवी कैमरों से हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी, वहीं इंटरनेट मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट या अफवाह फैलाने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    डीसीपी ने कांवड़ शिविर संचालकों से सड़क से पर्याप्त दूरी पर शिविर लगाने की अपील की है, ताकि यातायात प्रभावित न हो। श्रद्धालुओं से भी पुलिस के दिशा-निर्देशों का पालन करने का आग्रह किया गया है। डीसीपी क्राइम एंड ट्रैफिक अमरिंदर सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर चेतावनी एवं जागरूकता बोर्ड लगाए गए हैं।

    वाहन चालकों से कांवड़ियों के लिए आरक्षित लेन का सम्मान करने, धीमी गति से वाहन चलाने और विशेषकर रात के समय अतिरिक्त सतर्कता बरतने की अपील की गई है। पुलिस का कहना है कि उद्देश्य केवल सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था और आमजन की सुविधा के बीच संतुलन कायम रखना भी है।

  • राजस्थान में जनशिकायतों पर सख्ती, मुख्य सचिव ने त्वरित समाधान के दिए निर्देश

    राजस्थान में जनशिकायतों पर सख्ती, मुख्य सचिव ने त्वरित समाधान के दिए निर्देश

    जयपुर
    मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशानुसार नागरिक सुविधाओं से जुड़े परिवादों का त्वरित एवं प्रभावी समाधान राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि परिवाद दर्ज होने से लेकर उसके समाधान तक की पूरी प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिससे प्रत्येक नागरिक को यह अनुभव हो कि शासन उसकी समस्या के प्रति संवेदनशील है और उसे समय पर राहत मिल रही है। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक परिवाद के समाधान को नागरिकों के विश्वास से जोड़ते हुए परिवाद निवारण व्यवस्था को और अधिक प्रभावी, उत्तरदायी एवं जन-केंद्रित बनाया जाए।

    मुख्य सचिव ने शुक्रवार को शासन सचिवालय स्थित राजस्थान संपर्क (181) कॉल सेंटर पहुंचकर सार्वजनिक निर्माण विभाग, स्वायत्त शासन विभाग, पंचायती राज विभाग, नगरीय विकास एवं आवासन, ग्रामीण विकास एवं ऊर्जा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ नागरिक सुविधाओं से जुड़े परिवादों की समीक्षा की। उन्होंने विभागवार परिवादों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को नियमित मॉनिटरिंग, त्वरित निस्तारण एवं दैनिक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

    समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव ने नागरिक सुविधाओं से संबंधित कुल 46 हजार 214 परिवादों की विभागवार स्थिति का भी अवलोकन किया। इनमें ऊर्जा विभाग के 25 हजार 488, स्वायत्त शासन विभाग के 16 हजार 689, सार्वजनिक निर्माण विभाग के 1 हजार 798, नगरीय विकास एवं आवासन विभाग के 1 हजार 373, पंचायती राज विभाग के 591 तथा ग्रामीण विकास विभाग के 275 परिवाद शामिल हैं। उन्होंने जिन विभागों में शिकायतों की संख्या अधिक है, वहां नियमित समीक्षा, बेहतर समन्वय एवं त्वरित कार्रवाई के माध्यम से लंबित प्रकरणों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    इस दौरान मुख्य सचिव ने राजस्थान संपर्क पोर्टल के माध्यम से दौसा निवासी गौरव से दूरभाष पर संवाद कर उनकी बिजली संबंधी शिकायत के समाधान की जानकारी ली। परिवादी द्वारा समाधान पर संतोष व्यक्त किए जाने पर उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्रत्येक शिकायत के समाधान में यही संवेदनशीलता और तत्परता दिखाई जानी चाहिए। उन्होंने सार्वजनिक निर्माण विभाग को सड़कों से संबंधित शिकायतों के शीघ्र एवं प्रभावी निस्तारण पर विशेष ध्यान देने के निर्देश भी दिए।

    इस अवसर पर अतिरिक्त मुख्य सचिव  सार्वजनिक निर्माण विभाग प्रवीण गुप्ता, शासन सचिव स्वायत्त शासन विभाग श्री रवि जैन, शासन सचिव  आयोजना डॉ. रवि कुमार सुरपुर, शासन सचिव उर्जा विभाग सुश्री आरती डोगरा  ने भी अपने-अपने विभागों से संबंधित परिवादियों से सीधे संवाद कर शिकायतों के समाधान का फीडबैक प्राप्त किया तथा सम्बंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

    उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री से लेकर मुख्य सचिव एवं सचिव स्तर तक राजस्थान संपर्क पोर्टल पर प्राप्त जन शिकायतों की नियमित समीक्षा की जा रही है। इस माह एक जुलाई से 31 जुलाई, 2026 की अवधि में पोर्टल पर लगभग 4 लाख 63 हजार परिवाद प्राप्त हुए, जिनमें से 3 लाख 2  हजार 390 परिवादों का निस्तारण किया गया है, जबकि 1 लाख 60 हजार 862 परिवाद प्रक्रियाधीन हैं। इस अवधि में शिकायतों के औसत निस्तारण की अवधि 8 दिन रही। शिकायतों के निस्तारण के उपरांत प्राप्त फीडबैक के आधार पर लगभग 71 प्रतिशत परिवादियों ने समाधान पर संतोष व्यक्त किया है।

  • बिहार में अवैध खनन पर शिकंजा, दिन में भी होगी ट्रांजिट पास की जांच

    बिहार में अवैध खनन पर शिकंजा, दिन में भी होगी ट्रांजिट पास की जांच

    पटना
     खान एवं भूतत्व विभाग ने अवैध खनन और खनिजों के अवैध परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए जिलों के अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। विभाग का यह निर्णय भी हुआ है कि अब केवल रात नहीं, बल्कि दिन के समय भी इंटर स्टेट ट्रांजिट पास की सघन जांच के लिए अभियान चलाया जाएगा।

    विभाग ने सभी जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे संयुक्त जांच अभियान चलाकर बिना वैध ट्रांजिट पास के खनिजों का परिवहन करने वाले वाहनों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करें। इससे अवैध खनन और राजस्व की चोरी पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।

    आईएसटीपी के अधिक से अधिक प्रचार पर जोर
    बीते दिनों विभाग के स्तर पर हुई समीक्षा बैठक में विभाग से जुड़े कई मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। जिसमें ट्रांजिट पास पोर्टल पर कम पंजीकरण की बात सामने आई थी। जिसके बाद निर्देश दिए गए कि सभी अधिकारी ट्रांजिट पास व्यवस्था का व्यापक प्रचार-प्रसार करें और खनिज परिवहन से जुड़े वाहन मालिकों एवं संचालकों को आईएसटीपी पोर्टल पर पंजीकरण के लिए प्रेरित करें।

    सुनिश्चित करें कि पंजीकरण की संख्या लगातार बढ़े और कोई भी जिला इस मामले में पीछे न रहे। खान एवं भूतत्व विभाग का मानना है कि आईएसटीपी पोर्टल पर अधिक से अधिक वाहनों का पंजीकरण, नियमित जांच अभियान और ट्रांजिट पास की सख्त निगरानी से खनिज परिवहन व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनेगी।

    साथ ही अवैध खनन एवं अवैध परिवहन पर प्रभावी रोक लगेगी, जिससे राज्य के राजस्व में वृद्धि होगी और खनन व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाया जा सकेगा।

    विभाग ने जारी किया हेल्पलाइन नंबर
    विभाग ने आईएसटीपी पोर्टल पर वाहन पंजीकरण के दौरान तकनीकी या अन्य किसी प्रकार की समस्या आने पर सहायता की व्यवस्था भी की है। इसके लिए 0612-2215360 तथा 9472238821 हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं।

    अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि किसी भी प्रकार की समस्या होने पर इन नंबरों पर तुरंत संपर्क कर उसका शीघ्र समाधान कराया जाए। ताकि पंजीकरण की प्रक्रिया प्रभावित न हो।

  • गुरुग्राम में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की सर्किट बेंच की मांग, राज्यसभा में सांसद भाटिया ने उठाया मुद्दा

    गुरुग्राम में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की सर्किट बेंच की मांग, राज्यसभा में सांसद भाटिया ने उठाया मुद्दा

    चंडीगढ़.

    राज्यसभा में बृहस्पतिवार को शून्यकाल के दौरान सांसद संजय भाटिया ने गुरुग्राम में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की सर्किट बेंच स्थापित किए जाने की जोरदार मांग उठाई। उन्होंने कहा कि यह केवल न्यायिक सुविधा का विषय नहीं, बल्कि सबके लिए न्याय, न्यायिक विकेंद्रीकरण और न्याय प्राप्त करने में आसानी से जुड़ा राष्ट्रीय महत्व का मुद्दा है।

    सदन में मुद्दा उठाते हुए राज्यसभा सदस्य संजय भाटिया ने कहा कि वर्तमान में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट केवल चंडीगढ़ में स्थित होने के कारण गुरुग्राम, फरीदाबाद, नूंह, पलवल, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़ तथा दक्षिण हरियाणा के अन्य जिलों के लाखों वादकारियों, अधिवक्ताओं, उद्योगों, एमएसएमइ और कॉरपोरेट संस्थानों को प्रत्येक मामले के लिए चंडीगढ़ जाना पड़ता है। इससे मुकदमेबाजी की लागत, यात्रा का समय तथा अवसर लागत में अनावश्यक वृद्धि होती है और समयबद्ध न्याय प्राप्त करने में कठिनाई आती है। संजय भाटिया ने कहा कि गुरुग्राम आज देश का प्रमुख आइटी हब, कॉरपोरेट केंद्र, वित्तीय सेवाओं का महत्वपूर्ण केंद्र, स्टार्टअप इकोसिस्टम तथा औद्योगिक विकास का प्रमुख इंजन बन चुका है।

    गुरुग्राम में हाईकोर्ट की सर्किट बेंच स्थापित होना आवश्यक
    यहां बड़ी संख्या में वाणिज्यिक विवाद, श्रम संबंधी मामले, भूमि अधिग्रहण, मध्यस्थता, कर विवाद, दिवालियापन तथा संवैधानिक मामलों से जुड़े प्रकरण उत्पन्न होते हैं। ऐसे में गुरुग्राम में हाईकोर्ट की सर्किट बेंच स्थापित होना समय की आवश्यकता है। भाजपा सांसद ने यह भी उल्लेख किया कि हाल ही में गुरुग्राम में अत्याधुनिक 'टावर आफ जस्टिस' का उद्घाटन किया गया है, जिसमें आधुनिक न्यायिक अवसंरचना, डिजिटल कोर्टरूम और ई-कोर्ट सुविधाएं उपलब्ध हैं। यह परिसर हाईकोर्ट की सर्किट बेंच के संचालन के लिए उपयुक्त आधार प्रदान करता है।

    संजय ने किया संविधान 39ए का उल्लेख
    संजय भाटिया ने अपने वक्तव्य में संविधान के अनुच्छेद 39ए का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य का दायित्व है कि प्रत्येक नागरिक को समान न्याय उपलब्ध कराया जाए। वहीं अनुच्छेद 21 के अंतर्गत त्वरित न्याय को भी जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का अभिन्न हिस्सा माना गया है। इसलिए न्यायिक संस्थाओं का विकेंद्रीकरण केवल प्रशासनिक आवश्यकता नहीं बल्कि संवैधानिक दायित्व भी है।

    उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि हरियाणा सरकार, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट तथा अन्य संबंधित विभागों के साथ परामर्श कर गुरुग्राम में हाईकोर्ट की सर्किट बेंच स्थापित किए जाने की व्यवहार्यता अध्ययन शीघ्र प्रारंभ किया जाए। उनके अनुसार इससे न्याय तक आसान, सुलभ और समयबद्ध पहुंच सुनिश्चित होगी, लंबित मामलों का बोझ कम होगा तथा दक्षिण हरियाणा में कानून के शासन, निवेशकों के विश्वास और व्यापार को नई गति मिलेगी।

  • पंजाब में बीमारियों के हॉटस्पॉट इलाकों पर सख्ती, सरकार ने तेज कार्रवाई के दिए आदेश

    पंजाब में बीमारियों के हॉटस्पॉट इलाकों पर सख्ती, सरकार ने तेज कार्रवाई के दिए आदेश

    अमृतसर.

    डेंगू और चिकनगुनिया जैसी मौसमी बीमारियों के खतरे को देखते हुए अमृतसर में जिला प्रशासन ने तैयारियों को और तेज कर दिया है। नैशनल डेंगू कंट्रोल प्रोग्राम के तहत जिला प्रशासनिक परिसर में जिला टास्क फोर्स की बैठक बुलाई गई जिसकी अध्यक्षता एडिशनल डिप्टी कमिश्नर पल्लवी शर्मा ने की।

    इस मौके पर हॉटस्पॉट इलाकों में कार्रवाई तेज करने के आदेश दिए गए। इस अवसर पर डेंगू के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए एक विशेष बैनर भी जारी किया गया। बैठक के दौरान स्वास्थ्य विभाग सहित नगर निगम, लोकल बॉडी विभाग, शिक्षा विभाग, पंजाब रोडवेज, वाटर सप्लाई एवं सैनिटेशन विभाग, मैडीकल कॉलेजों, आई.एम.ए., फूड सप्लाई, ग्रामीण विकास एवं पंचायत, पशु पालन, मंडी बोर्ड और सामाजिक सुरक्षा विभाग के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सभी विभागों को डेंगू रोकथाम के लिए जिम्मेदारियां सौंपी गईं। 

    हॉटस्पॉट इलाकों में तुरन्त एक्शन:  पल्लवी शर्मा
    अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर पल्लवी शर्मा ने सभी विभागों को सख्त निर्देश जारी करते हुए कहा कि आने वाले डेंगू सीजन को ध्यान में रखते हुए जागरूकता अभियान तुरंत शुरू किया जाए। उन्होंने खास तौर पर हॉटस्पॉट इलाकों में सर्विलांस और सफाई अभियान को तेज करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हर डिपार्टमेंट को अपनी ज़िम्मेदारी समझनी चाहिए और हेल्थ डिपार्टमेंट के साथ मिलकर कोशिश करनी चाहिए ताकि डेंगू को फैलने से पहले ही रोका जा सके।

    मच्छरों को पनपने से रोकना सबसे असरदार हथियार है: सिविल सर्जन
    सिविल सर्जन डॉ. रश्मि विज ने डेंगू और चिकनगुनिया के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि इन बीमारियों से बचाव के लिए सबसे जरूरी मच्छरों की पैदावार को रोकना है। उन्होंने कहा कि लोग अपने घरों और आस-पास कहीं भी पानी जमा न होने दें। छतों, कूलर, गमलों, टायरों और अन्य वस्तुओं में खड़ा पानी मच्छरों के पनपने का मुख्य स्रोत बनता है।

    डेंगू रोकथाम के लिए हर विभाग की सांझा भागीदारी अनिवार्य : डा. हरजोत कौर
    जिला एपिडेमोलॉजिस्ट डा. हरजोत कौर ने कहा कि डेंगू रोकथाम के लिए सिर्फ स्वास्थ्य विभाग ही नहीं बल्कि हर विभाग की सांझा भागीदारी अनिवार्य है। नगर निगम द्वारा सफाई और फॉगिंग, शिक्षा विभाग द्वारा स्कूलों में जागरूकता, वाटर सप्लाई विभाग द्वारा पानी की सही निकासी और अन्य विभागों द्वारा अपने क्षेत्र में कार्रवाई करने पर जोर दिया गया।

    डेंगू रोकथाम के लिए जागरूकता सबसे बड़ा हथियार
    जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनजीत सिंह रटौल ने जोर दिया कि डेंगू रोकथाम के लिए जागरूकता सबसे बड़ा हथियार है। लोगों को इसके प्रति सचेत करना और उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना बहुत जरूरी है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जल्द ही घर-घर जाकर सर्वे, लार्वा चैकिंग और जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।

  • कम बारिश से बरवाडीह में बालू संकट की आहट, नदियों में नहीं हुआ प्राकृतिक पुनर्भरण

    कम बारिश से बरवाडीह में बालू संकट की आहट, नदियों में नहीं हुआ प्राकृतिक पुनर्भरण

    लातेहार
    मानसून की दस्तक के बाद भी बरवाडीह क्षेत्र में अपेक्षित वर्षा नहीं होने का असर अब सिर्फ खेती तक सीमित नहीं रहा है। कोयल, धड़धड़ी समेत अन्य नदियों में अब तक सामान्य बाढ़ नहीं आने से बालू के प्राकृतिक पुनर्भरण की रफ्तार थम गई है। इसका असर अब बालू कारोबार पर भी साफ दिखाई देने लगा है।

    कारोबारियों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में अच्छी वर्षा नहीं हुई तो अगले सीजन में बालू की उपलब्धता घट सकती है। इसका सीधा असर निर्माण कार्यों के साथ इस व्यवसाय से जुड़े हजारों लोगों की आजीविका पर पड़ेगा।

    बाढ़ नहीं आई तो नहीं जमा हुआ नया बालू
    स्थानीय लोगों के अनुसार इस वर्ष अब तक सामान्य से कम वर्षा हुई है। इसके कारण नदियों का जलस्तर अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच सका और बाढ़ जैसी स्थिति भी नहीं बनी। हर वर्ष बरसात के दौरान तेज बहाव के साथ पहाड़ी क्षेत्रों से नई बालू नदी तल में जमा होती है।

    यही प्राकृतिक प्रक्रिया अगले सीजन के लिए बालू का प्रमुख आधार बनती है, लेकिन इस बार कम वर्षा के कारण इस प्रक्रिया पर असर पड़ा है।

    कारोबार और रोजगार दोनों पर खतरे के संकेत
    बालू कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि नदियों से लगातार बालू का उठाव होता रहता है। यदि बरसात के मौसम में उसका प्राकृतिक पुनर्भरण नहीं हुआ तो आने वाले समय में बालू की कमी होना तय है। इससे निर्माण कार्य प्रभावित होंगे और इस व्यवसाय से जुड़े मजदूरों, वाहन चालकों तथा छोटे कारोबारियों की आय पर भी संकट गहरा सकता है।

    अब मानसून की मेहरबानी का इंतजार
    कारोबारियों का कहना है कि उनकी रोजी-रोटी काफी हद तक इसी व्यवसाय पर निर्भर है।इसलिए सभी की निगाहें अब मानसून की अगली वर्षा पर टिकी हैं। उनका मानना है कि यदि आने वाले दिनों में अच्छी वर्षा हुई और नदियों में तेज बहाव आया तो प्राकृतिक रूप से नई बालू का जमाव होगा और संभावित संकट काफी हद तक टल जाएगा।

    प्राकृतिक संतुलन बनाए रखना भी जरूरी
    बरवाडीह के अंचलाधिकारी लवकेश सिंह ने कहा कि नदी में बालू का प्राकृतिक पुनर्भरण पूरी तरह वर्षा और जल प्रवाह पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि बालू का खनन सरकार के निर्धारित नियमों और पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप ही किया जाना चाहिए। इससे नदियों का प्राकृतिक संतुलन बना रहेगा और भविष्य के लिए बालू जैसे प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी सुनिश्चित होगा।

     

  • वैशाली की डीएम वर्षा सिंह खेत में उतरीं, किसानों संग की धान रोपनी

    वैशाली की डीएम वर्षा सिंह खेत में उतरीं, किसानों संग की धान रोपनी

    पटना
    किसी जिले का डीएम… यानी फाइलें, मीटिंग, निरीक्षण और सरकारी दफ्तर. लेकिन बिहार के वैशाली में लोगों ने डीएम को बिल्कुल अलग अंदाज में देखा. न मंच था, न माइक और न कोई औपचारिक कार्यक्रम. सामने था धान का खेत, पैरों तक कीचड़, हाथों में धान की पौध… और किसानों के बीच थीं वैशाली की जिला पदाधिकारी वर्षा सिंह…

    यह तस्वीर वैशाली जिले के बिदुपुर प्रखंड के खजवत्ता गांव की है, जहां डीएम वर्षा सिंह सीधे खेत में उतर गईं. उन्होंने किसान उमेश राय के खेत में श्रीविधि (SRI) पद्धति से धान की रोपनी की और किसानों के साथ खेती की बारीकियों को भी समझा. खेत में मौजूद किसानों से बातचीत की.

    डीएम वर्षा सिंह ने कहा कि प्राकृतिक खेती आने वाले समय की जरूरत है. उनका कहना था कि इस पद्धति से खेती की लागत कम होती है, रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर निर्भरता घटती है, मिट्टी की सेहत बेहतर रहती है और पर्यावरण भी सुरक्षित रहता है. साथ ही किसानों की आय बढ़ाने में भी यह तरीका मददगार साबित हो सकता है.

    डीएम वर्षा सिंह ने कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि ज्यादा से ज्यादा किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ा जाए. उन्हें ट्रेनिंग दी जाए, समय पर बीज और जैविक इनपुट उपलब्ध कराए जाएं और सरकारी योजनाओं का फायदा बिना किसी परेशानी के किसानों तक पहुंचे. इस दौरान उन्होंने खजवत्ता स्थित बायो रिसर्च सेंटर का भी जायजा लिया.

    उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्राकृतिक खेती के मॉडल को ज्यादा से ज्यादा गांवों तक पहुंचाया जाए, ताकि किसान कम लागत में टिकाऊ खेती अपना सकें.

    जिला प्रशासन के मुताबिक, बिदुपुर प्रखंड में फिलहाल प्राकृतिक खेती के 10 क्लस्टर बनाए गए हैं, जिनसे 1,250 किसान जुड़े हुए हैं. इन किसानों को 2-2 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि भी दी जा चुकी है, ताकि वे प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित हों.

    कीचड़ से सने खेत में उतरकर धान की रोपनी करती डीएम वर्षा सिंह की तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर भी चर्चा में हैं. प्रशासन का मानना है कि अगर अधिकारी खुद खेत तक पहुंचेंगे, तो किसानों का भरोसा भी बढ़ेगा और नई खेती की तकनीकों को अपनाने की रफ्तार भी तेज होगी.