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  • राजस्थान में ड्रग माफियाओं पर बड़ा एक्शन, संपत्ति जब्त करने की तैयारी

    राजस्थान में ड्रग माफियाओं पर बड़ा एक्शन, संपत्ति जब्त करने की तैयारी

    जयपुर
    राजस्थान को पूरी तरह से नशा मुक्त बनाने और सीमावर्ती जिलों से लेकर शहरी इलाकों तक फैले मादक पदार्थों के काले कारोबार को जड़ से उखाड़ने के लिए भजनलाल शर्मा सरकार ने बड़ा रोडमैप तैयार किया है। जयपुर स्थित शासन सचिवालय में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में आयोजित राज्य स्तरीय नार्को समन्वय केंद्र (NCORD) की उच्चस्तरीय बैठक में मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए केंद्र सरकार की 'डिटेक्ट-डिसरप्ट-डेस्ट्रॉय' (Detect-Disrupt-Destroy) नीति को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। इस नई रणनीति के तहत राजस्थान के प्रत्येक जिले में मादक पदार्थों से जुड़े 10 प्रमुख मुकदमों की विशेष सूची तैयार की जाएगी और हर जिले से 5 सबसे कुख्यात ड्रग माफियाओं को चिन्हित कर उनकी संपत्तियों को जब्त करने व नेटवर्क को तबाह करने का बड़ा अभियान चलाया जाएगा। इसके साथ ही प्रदेश के सभी पुलिस थानों में एक ही दिन विशेष अभियान चलाकर अब तक जब्त किए गए करोड़ों रुपये के नशीले पदार्थों को एक साथ नष्ट करने की योजना बनाई गई है।

    क्या है 'डिटेक्ट-डिसरप्ट-डेस्ट्रॉय' नीति और कैसे करेगी काम?
    ड्रग्स के अवैध कारोबार की सप्लाई चेन को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए भजनलाल सरकार ने त्रिस्तरीय रणनीति पर काम शुरू किया है।

    डिटेक्ट (Detect): इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB), एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) और स्थानीय पुलिस की मदद से राज्य में नशे के प्रवेश मार्गों, अंतरराज्यीय तस्करों और स्थानीय सप्लायरों का सटीक डेटा तैयार कर उन्हें ट्रैक किया जाएगा।

    डिसरप्ट (Disrupt): ड्रग्स नेटवर्क के वित्तीय स्रोतों, कोरियर बॉयज और मुख्य वित्तीय मददगारों पर कड़ा प्रहार कर उनकी सप्लाई चेन और मनी ट्रेल को बीच में ही तोड़ दिया जाएगा।

    डेस्ट्रॉय (Destroy): तस्करों द्वारा नशे की कमाई से बनाई गई अवैध संपत्तियों को कानूनन सीज व कुर्क किया जाएगा और जब्त किए गए नशे के खेपों को पारदर्शी तरीके से नष्ट किया जाएगा।

    तीन साल का रोडमैप, सख्ती से लागू हो नीति : गृह मंत्री
    हाल ही में गृह मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में आयोजित 'एनसीओआरडी' (NCORD) की 10वीं शीर्ष स्तरीय बैठक में नशीले पदार्थों के नियंत्रण पर 'विज़न डॉक्यूमेंट' लॉन्च किया गया। इस दौरान गृह मंत्री ने कहा था कि नशीली दवाओं के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मिशन को हासिल करने के लिए यह एक व्यापक और समयबद्ध दिशा निर्देश है। यह दस्तावेज़ इस खतरे पर घातक प्रहार करने के लिए हमारे एंटी-नारकोटिक्स तंत्र के आधुनिक, खुफिया जानकारी आधारित, तकनीक-संचालित और नेटवर्क-केंद्रित दृष्टिकोण का लाभ उठाता है।

    गृह मंत्री ने कहा, 'डिटेक्ट, डिसरप्ट और डेस्ट्रॉय' (खोजें, बाधित करें और नष्ट करें) के सिद्धांत पर तैयार की गई यह रणनीति अगले तीन वर्षों का रोडमैप तैयार करती है, ताकि हमारे युवाओं को ड्रग कार्टेल के चंगुल से बचाने के लिए एक अटूट सुरक्षा घेरा बनाया जा सके।'

    ड्रग माफियाओं की संपत्ति होगी सीज
    मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने राज्य के सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों (SPs) को मुख्य तौर पर तीन महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं।

    टॉप 10 केस और 5 माफिया चिन्हित: प्रत्येक जिले के पुलिस कप्तान अपने इलाके के 10 सबसे बड़े ड्रग्स मुकदमों को शॉर्टलिस्ट करेंगे और उनमें शामिल 5 सबसे कुख्यात ड्रग तस्करों की सूची तैयार करेंगे।

    मजबूत चार्जशीट से सजा: आदतन अपराधियों के खिलाफ ठोस साक्ष्यों के आधार पर ऐसी अभेद्य चार्जशीट तैयार की जाएगी जिससे अदालत में प्रभावी पैरवी हो सके और दोषियों को जल्द से जल्द कठोर सजा मिल सके।

    3 या अधिक केस वाले अपराधियों पर तुरंत एक्शन: जिन तस्करों के खिलाफ 3 या उससे अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं, उनके केसों का प्राथमिकता के आधार पर त्वरित निस्तारण किया जाएगा।

    सभी थानों में एक साथ चलेगा 'ड्रग्स निस्तारण अभियान'
    राजस्थान पुलिस के इतिहास में पहली बार जब्ती की गई नशीली दवाओं और मादक पदार्थों के निस्तारण को लेकर एक व्यापक राज्यव्यापी योजना बनाई गई है।

    एक दिन, एक साथ निस्तारण: प्रदेश के सभी पुलिस थानों के मालखानों में वर्षों से जमा जब्त शुदा ड्रग्स को एक ही दिन विशेष अभियान चलाकर कानूनी प्रक्रियाओं के तहत विनष्ट (Destroy) किया जाएगा।

    जब्त वाहनों की होगी नीलामी: तस्करों से जब्त किए गए वाहनों और अन्य साधनों को कानूनी अड़चनों से मुक्त कराकर शीघ्र नीलाम किया जाएगा ताकि सरकारी राजस्व में वृद्धि हो और अपराधियों को कड़ा सबक मिले।

    'राजस्थान विजन 2026-29': तीन विभागों का जॉइंट प्लान
    बैठक में वर्ष 2026 से 2029 तक के लिए मादक पदार्थों के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' नीति का खाका तैयार किया गया, जिसमें पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ सामाजिक सुधार पर भी जोर दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग तथा युवा मामलात विभाग मिलकर नशा मुक्ति केंद्रों के संचालन, युवाओं के काउंसलिंग और जन-जागरूकता अभियानों का संचालन करेंगे।

    बैठक में डीजीपी राजीव कुमार शर्मा, गृह विभाग के एसीएस भास्कर ए. सावंत, एसीएस कुलदीप रांका, एएनटीएफ के एडीजी विकास कुमार, एडीजी दिनेश एम.एन., केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो और बीएसएफ राजस्थान फ्रंटियर के आईजी सहित तमाम विभागों के वरिष्ठ अफसर शामिल रहे।

  • पटना में 2463 करोड़ की छह परियोजनाओं से बदलेगी शहर की तस्वीर

    पटना में 2463 करोड़ की छह परियोजनाओं से बदलेगी शहर की तस्वीर

     पटना
    राजधानी में आधुनिक शहरी सुविधाओं के विस्तार की दिशा में बड़ी पहल होने जा रही है। अर्बन चैलेंज फंड (यूसीएफ) मिशन के तहत नगर निगम ने 2,463.91 करोड़ रुपये की लागत से शापिंग माल, वेंडिंग जोन व सिविक इंफ्रास्ट्रक्चर समेत छह बड़ी परियोजनाओं की तैयारी शुरू कर दी है।

    इनके लिए नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा चयनित एजेंसी के साथ नगर निगम जल्द एकरारनामा करेगा। इसके बाद सभी परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार किया जाएगा।

    राजधानी का बुनियादी ढांचा मजबूत होगा
    इन योजनाओं का उद्देश्य शहर में आधुनिक व्यावसायिक सुविधाएं विकसित करना, स्ट्रीट वेंडरों को व्यवस्थित स्थान उपलब्ध कराना, हरित क्षेत्र बढ़ाना और नगर निगम की आय में वृद्धि करना है। नगर निगम का मानना है कि परियोजनाओं के पूरा होने के बाद रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे और राजधानी का बुनियादी ढांचा मजबूत होगा।

    सबसे बड़ी परियोजना खेतान मार्केट में प्रस्तावित 736.41 करोड़ रुपये का कमर्शियल काम्प्लेक्स है। वहीं, शहर के विभिन्न हिस्सों में 724.93 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक वेंडिंग जोन बनाए जाएंगे।

    न्यू मार्केट का 590.05 करोड़ रुपये से पुनर्विकास
    पटना जंक्शन के पास स्थित न्यू मार्केट का भी 590.05 करोड़ रुपये से पुनर्विकास कर यहां बहुमंजिला कमर्शियल काम्प्लेक्स बनाया जाएगा। इसके अलावा वार्ड-42 स्थित बावन बीघा, आर्य कुमार रोड में 280.44 करोड़ रुपये से शापिंग काम्प्लेक्स बनाया जाएगा।

    श्रीकृष्ण पुरी में 82.08 करोड़ रुपये की लागत से अतिथि गृह-सह-नागरिक सुविधा केंद्र विकसित होगा, जहां बैंक्वेट हॉल, गेस्ट हाउस, रेस्तरां और अन्य नागरिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

    50 करोड़ रुपये से साइकिल ट्रैक, वाक-वे, लैंडस्केपिंग और अन्य हरित सुविधाएं
    शहर के विभिन्न हिस्सों में करीब 50 करोड़ रुपये से साइकिल ट्रैक, वाक-वे, लैंडस्केपिंग और अन्य हरित सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। नगर निगम के अनुसार इन सभी परियोजनाओं की कुल लागत का 50 प्रतिशत हिस्सा बाजार आधारित वित्तीय संसाधनों से जुटाया जाएगा, जबकि 25 प्रतिशत राशि राज्य सरकार और 25 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार उपलब्ध कराएगी।

    परियोजनाओं के पूरा होने के बाद राजधानी में आधुनिक व्यावसायिक केंद्रों का विकास होगा, स्ट्रीट वेंडरों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, नागरिक सुविधाओं का विस्तार होगा और नगर निगम के राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी। इससे राजधानी के समग्र शहरी विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।

    इन छह परियोजनाओं पर होगा काम
    परियोजना का नाम                                  अनुमानित लागत (करोड़ में)
    न्यू मार्केट कमर्शियल काम्प्लेक्स                       590.05
    खेतान मार्केट कमर्शियल काम्प्लेक्स                   736.41
    वार्ड-42 में शॉपिंग काम्प्लेक्स                              280.44
    शहरभर में वेंडिंग जोन                                        724.93
    अतिथि गृह-सह-नागरिक सुविधा केंद्र                  82.08
    अर्बन ग्रीन एवं रिक्रिएशनल इंफ्रास्ट्रक्चर              50.00

    ऐसे होगी परियोजनाओं की फंडिंग
        50 प्रतिशत राशि बाजार आधारित वित्तीय संसाधनों से जुटाएगा नगर निगम
        25 प्रतिशत राशि राज्य सरकार देगी
        25 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार से मिलेगी
        डीपीआर तैयार होने के बाद परियोजनाओं को अंतिम स्वीकृति मिलेगी
        योजनाओं का लक्ष्य राजस्व बढ़ाने के साथ रोजगार और आधुनिक शहरी सुविधाओं का विस्तार करना

     

  • पंजाब से खाटू श्याम और हरिद्वार के लिए चलेंगी सरकारी बसें, CM मान ने किया बड़ा ऐलान

    पंजाब से खाटू श्याम और हरिद्वार के लिए चलेंगी सरकारी बसें, CM मान ने किया बड़ा ऐलान

    मोहाली.

    सेक्टर-79 के दशहरा ग्राउंड में "एक शाम भगवान शिव के नाम" भक्ति संध्या के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि राज्य सरकार की धार्मिक यात्रा योजना के तहत श्रद्धालुओं को विभिन्न धार्मिक स्थलों के दर्शन कराए जा रहे हैं।

    उन्होंने घोषणा की कि एक अगस्त से मोहाली से खाटू श्याम, सालासर धाम, ऋषिकेश और हरिद्वार के लिए नई बस सेवाएं शुरू की जाएंगी, जिससे आर्थिक या अन्य कारणों से यात्रा न कर पाने वाले श्रद्धालु भी दर्शन कर सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि बुजुर्गों को तीर्थ यात्रा करवाने से बड़ा तीर्थ कोई नहीं है। उन्होंने पंजाब की संस्कृति और भाईचारे की परंपरा की सराहना करते हुए कहा कि पंजाब की धरती पर नफरत के बीज बोने वालों के लिए कोई जगह नहीं है। यहां सभी धर्मों के लोग मिलकर त्योहार और धार्मिक आयोजन मनाते हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता से टैक्स के रूप में मिलने वाला पैसा स्कूलों, अस्पतालों, सड़कों और सामाजिक योजनाओं पर खर्च किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि एक अगस्त से 40 लाख महिलाओं के मोबाइलों पर मावां धीया सम्मान योजना के तहत मिलने वाली राशि की प्राप्ति की घंटियां फिर बजेंगी। इस अवसर पर आप के प्रांतीय नेता दीपक बाली व मोहाली के विधायक कुलवंत सिंह भी उपस्थित थे।

  • लक्ष्मी योजना में बेटियों को हर महीने ₹2,500, RD में निवेश से बन सकता है ₹1 लाख का फंड; जानें पूरा गणित

    लक्ष्मी योजना में बेटियों को हर महीने ₹2,500, RD में निवेश से बन सकता है ₹1 लाख का फंड; जानें पूरा गणित

    नई दिल्ली

    अक्सर जब हमें पैसा मिलता है तो उसे हम खर्चा कर देते हैं, मगर थोड़ा सा पैसा अगर आरडी में लगाते हैं तो आपको कई गुना फायदा हो सकता है. अब दिल्ली की महिलाओं को भी ऐसा ही फायदा मिलेगा. दिल्ली सरकार की नई लक्ष्मी योजना इसी आदत को बदलने की कोशिश कर रही है. इस योजना के तहत महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी, लेकिन पूरी रकम सीधे खर्च करने के लिए नहीं मिलेगी. सरकार चाहती है कि इस पैसे का एक बड़ा हिस्सा बचत और निवेश में जाए, ताकि भविष्य के लिए अच्छी रकम तैयार हो सके। 

    इसी मकसद से सरकार ने महिलाओं को दो ऑप्शन दिए हैं. पहला ऑप्शन यह है कि हर महीने मिलने वाले 2,500 रुपये में से 1,500 रुपये RD (Recurring Deposit) या FD (Fixed Deposit) में जमा किए जाएंगे, जबकि बाकी 1,000 रुपये RBI के CBDC (Central Bank Digital Currency) डिजिटल वॉलेट में मिलेंगे. दूसरा ऑप्शन यह है कि महिला चाहे तो पूरे 2,500 रुपये ही RD या FD में जमा करवा सकती है. इस जमा राशि पर 3 साल का लॉक-इन रहेगा, यानी तीन साल पूरे होने के बाद ही ब्याज के साथ पैसा निकाला जा सकेगा। 

    कैसे मिलेगा महिलाओं को लक्ष्मी योजना से पैसा?
    सरकार का पहला ऑप्शन उन महिलाओं के लिए है जो कुछ पैसा रोजमर्रा के खर्च के लिए भी इस्तेमाल करना चाहती हैं. इसमें हर महीने 1,500 रुपये RD या FD में जमा होंगे और 1,000 रुपये CBDC डिजिटल वॉलेट में आएंगे. बता दें कि CBDC एक तरह की सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी है. ये आरबीआई के द्वारा बनाया गया ऐप है. इस ऐप में डिजिटल करेंसी के रूप में पैसे मिलेंगे। 

    अगर कोई महिला चाहती है कि पूरी राशि भविष्य के लिए बचाई जाए, तो वह दूसरा ऑप्शन चुन सकती है. इसमें पूरे 2,500 रुपये हर महीने RD या FD में जमा होंगे. इस राशि को तीन साल तक नहीं निकाला जा सकेगा. सरकार का मानना है कि इससे महिलाओं में नियमित बचत की आदत विकसित होगी। 

    1,500 रुपये हर महीने RD में जमा करने पर कितना मिलेगा?
    अगर हर महीने 1,500 रुपये पोस्ट ऑफिस की RD में जमा किए जाते हैं तो उस पर 6.7% सालाना ब्याज मिलता है, तो तीन साल में कुल जमा राशि 54,000 रुपये होगी.

    ब्याज जोड़ने के बाद मैच्योरिटी पर करीब 59,925 रुपये मिल सकते हैं. यानी सिर्फ ब्याज के रूप में लगभग 5,925 रुपये का अतिरिक्त फायदा होगा। 

    पूरे 2,500 रुपये RD में जमा करने पर कितना बनेगा?

    अगर महिला हर महीने मिलने वाले पूरे 2,500 रुपये RD में जमा करवाती है, तो तीन साल में उसकी कुल जमा राशि 90,000 रुपये होगी। 

    6.7% सालाना ब्याज के आधार पर मैच्योरिटी पर करीब 99,874 रुपये मिल सकते हैं. यानी तीन साल में लगभग 9,874 रुपये सिर्फ ब्याज के रूप में मिलेंगे. इससे बिना अतिरिक्त निवेश किए अच्छी बचत तैयार हो जाएगी। 

    FD पर कितना ब्याज मिल रहा है?
    अगर कोई महिला RD की जगह FD चुनना चाहती है, तो पोस्ट ऑफिस की टाइम डिपॉजिट (FD) योजना भी एक ऑप्शन हो सकती है. फिलहाल पोस्ट ऑफिस की ब्याज दरें इस प्रकार हैं

        1 Year Time Deposit: 6.9% सालाना
        2 Year Time Deposit: 7.0% सालाना
        3 Year Time Deposit: 7.1% सालाना
        5 Year Time Deposit: 7.5% सालाना

    सरकार योजना के तहत बैंक या पोस्ट ऑफिस में ऐसी जगह निवेश करा सकती है, जहां तय नियमों के अनुसार बेहतर ब्याज का फायदा मिले। 

    इस योजना से सिर्फ आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि महिलाओं को नियमित बचत और निवेश की आदत से जोड़ना भी है. तीन साल बाद उनके पास ब्याज सहित अच्छी रकम जमा होगी, जिससे भविष्य की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है। 

  • बिहार बॉर्डर से बनेगा सुपरफास्ट एक्सप्रेसवे! मुजफ्फरपुर, बेगूसराय, देवघर से बंगाल तक मिलेगी हाई-स्पीड कनेक्टिविटी

    बिहार बॉर्डर से बनेगा सुपरफास्ट एक्सप्रेसवे! मुजफ्फरपुर, बेगूसराय, देवघर से बंगाल तक मिलेगी हाई-स्पीड कनेक्टिविटी

    पटना 
    रक्सौल–हल्दिया एक्सप्रेसवे बिहार-यूपी बॉर्डर से पश्चिम बंगाल के हल्दिया पोर्ट को जोड़ने वाला आर्थिक गलियारा है. यह उत्तर प्रदेश-बिहार के बॉर्डर से झारखंड, बंगाल के साथ नेपाल तक तेज आवाजाही का साधन बनेगा. रक्सौल–हल्दिया एक्सप्रेसवे (Raxaul–Haldia Expressway) भारतमाला परियोजना के तहत ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे है.यह एक्सप्रेसवे नेपाल सीमा पर बिहार के रक्सौल शहर को बंगाल के प्रमुख समुद्री बंदरगाह हल्दिया पोर्ट तक कनेक्टिविटी देगी.यह शुरुआती चरण में 4 लेन का एक्सप्रेसवे होगा, जिसे 6 लेन तक विस्तार दिया जा सकते है. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) इस एक्सप्रेसवे का निर्माण कर रहा है। 

        695 से 700 किलोमीटर लंबाई एक्सप्रेसवे की
        35 से 40,000 करोड़ रुपये लागत
        बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल से कनेक्शन

    रक्सौल–हल्दिया एक्सप्रेसवे की कनेक्टिविटी

        पटना–पूर्णिया एक्सप्रेसवे: बिहार के राज्यों के एक्सप्रेसवे को इंटरचेंज मिलेगा. तीन अन्य एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी होगी. 
        वाराणसी–कोलकाता एक्सप्रेसवे: पश्चिम बंगाल और झारखंड में यह वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जुड़ेगा.
        इंडो-नेपाल बॉर्डर पर एकीकृत चेक पोस्ट रक्सौल से जुड़कर यह इंटरनेशनल इकोनॉमिक कॉरिडोर का हिस्सा बनेगा.
        गंगा एक्सप्रेसवे के एक्सटेंशन, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से भी क्रॉस करेगा और इससे उत्तर प्रदेश को भी फायदा होगा.

    बिहार में 290 किमी लंबाई
    बिहार में रक्सौल जो इंडिया-नेपाल बॉर्डर पर है, वहां से शुरू होगा. पूर्वी चंपारण जिले के रक्सौल से शिवहर,मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, बेगूसराय, लखीसराय, जमुई जिले से गुजरेगा. बिहार के उत्तर से दक्षिण-पूर्वी हिस्से को सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी. गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे के अलावा ये एक और एक्सप्रेसवे है, जो बिहार से बंगाल तक कनेक्टिविटी देगा। 

    झारखंड में 120 किमी तक लंबाई

    झारखंड में देवघर, दुमका और जामताड़ा तक ये एक्सप्रेसवे जाता है और इसकी लंबाई 100 से 120 किमी है. संथाल परगना क्षेत्र में औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा. एनएचएआई इसे अलग-अलग फेज में पूरा करेगा.

    पश्चिम बंगाल में 280-300 किमी
    पश्चिम बंगाल में 280 से 300 किमी इसकी लंबाई है. पश्चिम बर्धमान (आसनसोल, दुर्गापुर के समीप से ये बांकुरा जिले, पश्चिम मेदिनीपुर और पूर्व मेदिनीपुर जिले से गुजरेगा.हल्दिया पोर्ट इस एक्सप्रेसवे का आखिरी बिंदु होगा। 

    रक्सौल–हल्दिया एक्सप्रेसवे का फायदा
    इस एक्सप्रेसवे से नेपाल के साथ अंतरराष्ट्रीय व्यापार आसान होगा. चारोंओर जमीन से घिरे नेपाल का अधिकांश आयात-निर्यात कोलकाता के हल्दिया पोर्ट से होता है. एक्सप्रेसवे से नेपाल से हल्दिया बंदरगाह तक माल ढुलाई का समय 30 घंटे से कम होकर 10-12 घंटे रह जाएगा. अभी नेशनल हाईवे (NH-31, NH-2) पर भारी ट्रैफिक से आवाजाही, लॉजिस्टिक्स खर्च काफी ज्यादा रहता है. नया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार देगा। 

    रक्सौल–हल्दिया एक्सप्रेसवे से बिहार-झारखंड को फायदा
    यह एक्सप्रेसवे बिहार और झारखंड के इंडस्ट्रियल हब को सीधे हल्दिया पोर्ट से जोड़ेगा. निर्यात कारोबार को गति मिलेगी.पूर्वी भारत में इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का नेटवर्क बनाने में जुटी सरकार का लक्ष्य पूरा होगा.लॉजिस्टिक्स पार्क, इंडस्ट्रियल क्लस्टर और फूड प्रोसेसिंग यूनिट एक्सप्रेसवे किनारे बनने से युवाओं को रोजगार मिलेगा. इस प्रोजेक्ट के लिए डीपीआर और भूमि अलाइनमेंट सर्वे का काम चल रहा है. बिहार और पश्चिम बंगाल के संबंधित जिलों में भूमि अधिग्रहण के लिए गजट नोटिफिकेशन और सीमांकन का काम हो रहा है.यह भारतमाला-2 का अहम प्रोजेक्ट जिससे पूर्वी भारत की अर्थव्यवस्था की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी। 

  • जंतर-मंतर पर बढ़ी हलचल! बैरिकेड्स हुए मजबूत, RAF तैनात; आखिर क्या है वजह?

    जंतर-मंतर पर बढ़ी हलचल! बैरिकेड्स हुए मजबूत, RAF तैनात; आखिर क्या है वजह?

    नई दिल्ली

    दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक बार फिर हलचल बढ़ गई है. जंतर-मंतर पर बैरिकेड्स वेल्ड किए गए हैं. रेपिड एक्शन फोर्स (RAF) तैनात कर गई है. कुल मिलाकर दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर एक सुरक्षा इंतजाम कड़े कर दिए हैं. यह सब सीजेपी यानी कॉकरोच जनता पार्टी की नई चेतावनी के मद्देनजर है. सीजेपी ने चेतावनी दी है कि अगर प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ दर्ज सभी FIR तुरंत वापस नहीं ली गईं, तो वे अपना विरोध प्रदर्शन फिर से शुरू कर देंगे। 

    दरअसल, अधिकारियों ने प्रदर्शन स्थल पर अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी तैनात किए हैं. बैरिकेड्स को और मजबूत कर दिया है.  जंतर-मंतर पर जहां सीजेपी ने प्रोटेस्ट किया था, वहां दोनों तरफ के बैरिकेड्स को लोहे से वेल्ड करके जोड़ दिया गया है. अधिकारियों ने बताया कि आरएएफ यानी रैपिड एक्शन फ़ोर्स (RAF) की एक कंपनी और स्थानीय पुलिसकर्मी भी चौबीसों घंटे वहां तैनात हैं। 

    दिल्ली के जंतर-मंतर पर क्या हलचल
    पुलिस सूत्रों ने बताया कि जंतर-मंतर पर संभावित भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के ये कड़े इंतजाम किए गए हैं. यही कारण है कि बैरिकेड्स को मजबूत कर दिया गया है. गौरतलब है कि जंतर-मंतर पर सीजेपी ने ने पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर 36 दिनों तक आंदोलन किया था। 

    कॉकरोच जनता पार्टी ने एक बार फिर प्रदर्शन की चेतावनी दी है. सीजेपी ने मंगलवार को केंद्र पर आरोप लगाया कि वह प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई न करने के अपने वादे को पूरा करने में नाकाम रहा है। 

    आशुतोष रांका ने क्या आरोप लगाया
    कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने केंद्र के साथ 25 जुलाई को हुए समझौते का पूरी तरह से उल्लंघन होने का आरोप लगाया. आशुतोष रांका ने दावा किया कि भाजपा शासित राज्यों में सैकड़ों छात्रों को गिरफ्तार किया गया है. उन्होंने सभी एफआईआर वापस लेने, हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को रिहा करने, दिल्ली पुलिस, केंद्रीय एजेंसियों और BJP शासित राज्यों की पुलिस द्वारा नए आपराधिक मामले दर्ज करने पर रोक लगाने और हस्ताक्षरित समझौते को तुरंत जारी करने की मांग की। 

    सीजेपी ने वेबसाइट क्यों लॉन्च की?
    सीजेपी ने देशव्यापी कानूनी सहायता सेल बनाने की भी घोषणा की और ‘साक्षी’ (SAAKSHI) नाम से सबूत इकट्ठा करने वाला एक ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म लॉन्च किया. राज्यसभा सांसद कपिल सिबल ने आपराधिक मुकदमों का सामना कर रहे प्रदर्शनकारियों को कानूनी सहायता देने के लिए 1 करोड़ रुपये का फंड बनाने की घोषणा की. धर्मेंद्र प्रधान के केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद 25 जुलाई को यह आंदोलन वापस ले लिया गया था। 

  • Punjab PTI Teacher Recruitment 2026: 2000 पीटीआई शिक्षकों की भर्ती आज  से शुरू, हेल्पलाइन नंबर जारी

    Punjab PTI Teacher Recruitment 2026: 2000 पीटीआई शिक्षकों की भर्ती आज से शुरू, हेल्पलाइन नंबर जारी

    चंडीगढ़ 
    सरकारी शिक्षक भर्ती का इंतजार कर रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है। शिक्षा भर्ती निदेशालय (ERD), पंजाब ने PTI (Primary Cadre) के 2000 पदों पर भर्ती का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 31 जुलाई 2026 से शुरू होगी। इच्छुक उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकेंगे।

    भर्ती विभाग द्वारा जारी नोटिफिकेशन के अनुसार यह भर्ती पंजाब के सरकारी प्राथमिक स्कूलों में Physical Training Instructor (PTI) के पदों पर की जाएगी। विस्तृत नोटिफिकेशन में पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और अन्य सभी जरूरी जानकारी नीचे दी गई है।

    पंजाब के सरकारी स्कूलों में प्राइमरी कैडर के 2,000 फिजिकल ट्रेनिंग इंस्ट्रक्टर (पीटीआई) पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। मोहाली स्थित डायरेक्टर एजुकेशन रिक्रूटमेंट (शिक्षा भर्ती निदेशालय) ने इसके लिए सार्वजनिक सूचना जारी कर दी है।

    विभाग के अनुसार भर्ती से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश 31 जुलाई को जारी किए जाएंगे, जिसके बाद योग्य अभ्यर्थी आवेदन प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे। यह भर्ती लंबे समय से सरकारी स्कूलों में रिक्त पड़े पीटीआई पदों को भरने के उद्देश्य से की जा रही है।

    राज्यभर के हजारों युवा इस भर्ती का इंतजार कर रहे थे। भर्ती पूरी होने के बाद सरकारी प्राथमिक स्कूलों में शारीरिक शिक्षा शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ेगी और खेल गतिविधियों को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    विभाग की ओर से जारी सूचना के अनुसार 31 जुलाई को शैक्षणिक योग्यता, आयु सीमा, आरक्षण नीति, आवेदन शुल्क, चयन प्रक्रिया, आनलाइन आवेदन की तिथियां, आवश्यक दस्तावेज और अन्य नियम जारी किए जाएंगे।

    अभ्यर्थी भर्ती से जुड़ी पूरी जानकारी शिक्षा भर्ती निदेशालय की आधिकारिक वेबसाइट erd.punjab.gov.in पर देख सकेंगे। भर्ती प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवारों की सुविधा के लिए विभाग ने हेल्पलाइन नंबर 0172-3115378 और ई-मेलrecruitment@punjabeducation.gov.in भी जारी किया है। आवेदन से संबंधित किसी भी प्रकार की तकनीकी या अन्य समस्या आने पर अभ्यर्थी इन माध्यमों से संपर्क कर सकेंगे।

     

    भर्ती की मुख्य जानकारी
        भर्ती विभाग: Education Recruitment Directorate (ERD), Punjab
        विभाग का नाम: School Education Department, Punjab
        पद का नाम: PTI (Primary Cadre)
        कुल पद: 2000
        विज्ञापन संख्या: E-888608/B.D.1/2026205729
        आवेदन शुरू: 31 जुलाई 2026
        आवेदन का माध्यम: ऑनलाइन

    आयु सीमा
    उम्मीदवार की आयु 18 से 37 वर्ष के बीच होनी चाहिए। आयु की गणना 01 जनवरी 2026 के आधार पर की जाएगी। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु में छूट मिलेगी।

    आवेदन शुल्क
        ESM / PWD: ₹500
        SC / ST / BC: ₹750
        अन्य सभी वर्ग: ₹1500

    शैक्षणिक योग्यता
    इस भर्ती के लिए उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं पास होना आवश्यक है। इसके साथ C.P.Ed / D.P.Ed / B.P.Ed में से कोई एक सर्टिफिकेट, डिप्लोमा या डिग्री होना अनिवार्य है।

    चयन प्रक्रिया
    उम्मीदवारों का चयन निम्न चरणों के आधार पर किया जाएगा—

        लिखित परीक्षा
        दस्तावेज सत्यापन
        मेडिकल परीक्षण

    Punjab PTI Recruitment 2026 के लिए आवेदन कैसे करें?
        सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
        Latest Recruitment सेक्शन में जाएं।
        Punjab PTI (Primary Cadre) Recruitment 2026 लिंक पर क्लिक करें।
        नया रजिस्ट्रेशन करके लॉगिन करें।
        आवेदन फॉर्म में सभी आवश्यक जानकारी सही-सही भरें।
        जरूरी दस्तावेज, फोटो और हस्ताक्षर अपलोड करें।
        आवेदन शुल्क का ऑनलाइन भुगतान करें।
        फॉर्म सबमिट करके उसका प्रिंटआउट सुरक्षित रख लें।

    महत्वपूर्ण तिथियां
        नोटिफिकेशन जारी: 30 जुलाई 2026
        ऑनलाइन आवेदन शुरू: 31 जुलाई 2026 (रात 12:01 बजे से)
        आवेदन की अंतिम तिथि: जल्द जारी की जाएगी

     

  • प्राकृतिक खेती में राजस्थान की बड़ी छलांग, 2.12 लाख किसान मिशन से जुड़े

    प्राकृतिक खेती में राजस्थान की बड़ी छलांग, 2.12 लाख किसान मिशन से जुड़े

    जयपुर
    मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। राज्य सरकार ढाई लाख किसानों को जोड़कर एक लाख हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन देने की दिशा में कार्य कर रही है, ताकि मिट्टी की उर्वरता बनाए रखते हुए टिकाऊ कृषि को बढ़ावा दिया जा सके।
     
    राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के अंतर्गत राज्य में अब तक 2 हजार 380 क्लस्टर गठित किए जा चुके हैं, जो आंध्र प्रदेश के बाद देशभर में सर्वाधिक है। इन क्लस्टरों से प्रदेश के 2 लाख 12 हजार 346 किसान जुड़े हैं, यह संख्या आंध्र प्रदेश व उत्तर प्रदेश के बाद देश में सबसे अधिक है। साथ ही, अब तक राज्य के लगभग 91 हजार 166 हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती अपनाई जा चुकी है, जो राज्य को देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करती है। मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सरकार द्वारा वर्ष 2025-26 तक लगभग 49 करोड़ 97 लाख रुपये का व्यय किया गया है।

    प्राकृतिक कृषि को नई दिशा दे रही डबल इंजन सरकार
    मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार प्राकृतिक खेती को नई दिशा देने के लिए मिशन मोड पर कार्य कर रही है। प्रदेश में 50 हजार किसानों को गोवर्धन जैविक उर्वरक योजना के माध्यम से जैविक खाद उत्पादन के लिए 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। जोधपुर, कोटा और उदयपुर में ऑर्गेनिक फूड मार्केट स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे किसानों को जैविक उत्पादों का बेहतर बाजार उपलब्ध हो सकेगा। 
    राज्य सरकार पारंपरिक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए बैलों से खेती करने वाले किसानों को 30 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दे रही है। गौ संरक्षण एवं संवर्धन के लिए 2 हजार 856 करोड़ रुपये का अनुदान राज्य की गोशालाओं को दिया गया है। बजट 2025-26 में कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर नैचुरल फार्मिंग की स्थापना का प्रावधान किया गया है, जो अनुसंधान, प्रशिक्षण और नवाचार का प्रमुख केंद्र बनेगा।

    समृद्ध किसान, स्वस्थ समाज, सुरक्षित पर्यावरण का आधार प्राकृतिक कृषि
    उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन 25 नवंबर 2024 को प्रारम्भ किया गया, जिसका उद्देश्य रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करना, मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार करना तथा किसानों की आय बढ़ाना है। यह मिशन केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन, प्रमाणन और विपणन की समग्र सुविधा भी उपलब्ध कराता है। इसके तहत देशभर में 527 कृषि विज्ञान केंद्र, 76 कृषि विश्वविद्यालय, 194 स्थानीय प्राकृतिक खेती संस्थान तथा 18 उत्कृष्टता केंद्र मिशन अंतर्गत किसानों को प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं। 

    प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा किसानों को प्रति एकड़ प्रति वर्ष 4 हजार रुपये की प्रोत्साहन सहायता राशि दो वर्षों तक उपलब्ध करवाई जा रही है। नीति आयोग की मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार प्राकृतिक खेती अपनाने वाले लगभग 91 प्रतिशत किसानों के उत्पादन में वृद्धि हुई तथा लगभग 90 प्रतिशत किसानों की उत्पादन लागत में कमी आई है। साथ ही, मिट्टी के स्वास्थ्य में भी महत्वपूर्ण सुधार देखा गया है।
    प्राकृतिक खेती पर्यावरण संरक्षण, किसानों की आय में वृद्धि और भावी पीढ़ियों के लिए स्वस्थ कृषि व्यवस्था का आधार बन रही है। यह समृद्ध किसान, स्वस्थ समाज और सुरक्षित पर्यावरण की आधारशिला है। जब किसान प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित कर खेती करेगा, तभी विकसित भारत और विकसित राजस्थान के संकल्प को नई गति मिलेगी।

    क्या होती है प्राकृतिक कृषि
    प्राकृतिक कृषि ऐसी कृषि पद्धति है जिसमें प्रकृति के अनुरूप खेती की जाती है तथा मिट्टी, जल, जैव विविधता और सूक्ष्मजीवों के प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने पर विशेष बल दिया जाता है। इसमें स्थानीय संसाधनों, विशेषकर देशी गाय आधारित जैविक घोल, फसल अवशेष, मल्चिंग तथा मिश्रित खेती का उपयोग किया जाता है। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम होने से किसानों की उत्पादन लागत में कमी आती है और उपभोक्ताओं को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य उत्पाद उपलब्ध होते हैं।

     

     

     

     

     

  • रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेस-वे के लिए बांका में जमीन अधिग्रहण शुरू, 58 गांवों की भूमि होगी शामिल

    रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेस-वे के लिए बांका में जमीन अधिग्रहण शुरू, 58 गांवों की भूमि होगी शामिल

    बांका
     रक्सौल-हल्दिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे परियोजना के लिए जिले में भूमि अधिग्रहण शुरू हो गया है। करीब 600 किलोमीटर लंबे इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे का लगभग 75 किलोमीटर हिस्सा जिले से होकर गुजरेगा। इसके लिए जिले के पांच प्रखंडों के 58 राजस्व ग्रामों की भूमि का अधिग्रहण किया जाना है।

    पहले चरण में शंभूगंज, अमरपुर और बांका प्रखंडों के 29 राजस्व ग्रामों से संबंधित थ्री-ए अधिसूचना की रिपोर्ट भू-अर्जन कार्यालय को प्राप्त हो चुकी है। इसके आधार पर संबंधित भूखंडों का सत्यापन और जांच शुरू कर दी गई है।

    वहीं, फुल्लीडुमर और कटोरिया प्रखंडों के शेष 29 राजस्व ग्रामों की थ्री-ए रिपोर्ट अब तक नहीं मिली है। रिपोर्ट प्राप्त होते ही वहां भी भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

    भू-अर्जन कार्यालय के अधिकारियों के अनुसार, थ्री-ए की रिपोर्ट मिलने के बाद संबंधित गांवों में जमीन का सत्यापन, रकबा, खाता-खेसरा और स्वामित्व से जुड़े अभिलेखों की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद अधिग्रहण की अगली प्रक्रिया शुरू होगी।

    इसके तहत आपत्तियों का निष्पादन, मुआवजा निर्धारण और अन्य कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। प्रशासन का प्रयास है कि सभी राजस्व ग्रामों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तय समय के भीतर पूरी कर ली जाए, ताकि परियोजना के निर्माण कार्य में किसी प्रकार की देरी न हो।

    प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे बांका जिले में शंभूगंज प्रखंड से प्रवेश करेगा। इसके बाद यह फुल्लीडुमर, अमरपुर और बांका प्रखंडों से गुजरते हुए कटोरिया के रास्ते देवघर के समीप झारखंड की सीमा में प्रवेश करेगा। इस मार्ग के निर्माण से बांका सहित आसपास के जिलों की सड़क संपर्क व्यवस्था में बड़ा बदलाव आएगा।

    लंबी दूरी का आवागमन पहले की तुलना में काफी आसान और तेज होगा। इसके अलावा, परिवहन की लागत और समय में भी कमी आएगी, जिससे व्यापार, उद्योग और कृषि क्षेत्र को लाभ मिलने की संभावना है। स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

    सबसे बड़ा हिस्सा बिहार से गुजरेगा
    करीब 600 किलोमीटर लंबा रक्सौल-हल्दिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में शामिल है। इस परियोजना का सबसे बड़ा हिस्सा बिहार में प्रस्तावित है।

    बिहार में इसकी लंबाई लगभग 406 किलोमीटर होगी, जबकि झारखंड में करीब 90 किलोमीटर और पश्चिम बंगाल में लगभग 90 से 100 किलोमीटर तक इसका निर्माण किया जाएगा। अकेले बांका जिले में इसका करीब 75 किलोमीटर लंबा हिस्सा प्रस्तावित है।

    रक्सौल-हल्दिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे के लिए जिले के पांच प्रखंडों के 58 राजस्व ग्रामों की भूमि का अधिग्रहण किया जाना है। पहले चरण में शंभूगंज, अमरपुर और बांका प्रखंडों के 29 राजस्व ग्रामों से संबंधित थ्री-ए अधिसूचना की रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है। – पंकज कुमार, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी

     

  • Punjab News: अमृतसर बंद के दौरान ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी की मौत, पुलिस महकमे में शोक

    Punjab News: अमृतसर बंद के दौरान ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी की मौत, पुलिस महकमे में शोक

    अमृतसर.

    आज एक बार फिर पंजाब बंद का असर कई शहरों में देखे को मिल रहा है। बरनाला में सफाई कर्मचारियों पर पुलिस द्वारा कथित लाठीचार्ज और कार्रवाई के विरोध में सफाई कर्मचारी यूनियनों की ओर से पंजाब बंद के आह्वान का असर जिला अमृतसर में भी देखने को मिला। बंद के दौरान कई स्कूल/कॉलेजों में छुट्टी कर दी गई और बाजारों को बंद रखा गया।

    इस धरना प्रदर्शन के दौरान एक पुलिस कर्मी की दर्दनाक मौत होने की भी सूचना प्राप्त हुई है। मिली जानकारी के अनुसार अमृतसर के भंडारी पुल पर  दर्दनाक हादसा हुआ, जिसमें पंजाब पुलिस के सीनियर कांस्टेबल रणबीर सिंह की मौत हो गई। रणबीर सिंह, जो ARP में तैनात थे और बटाला के रहने वाले थे, अपनी ड्यूटी खत्म करके घर लौट रहे थे। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, पंजाब बंद के मद्देनजर भंडारी पुल पर ट्रैफिक रोकने के लिए रस्सी बांधी गई थी। एक्टिवा चला रहे रणबीर सिंह इस रस्सी को देख नहीं पाए और तेजी से आगे बढ़ते हुए रस्सी सीधे उनकी गर्दन से टकरा गई। टक्कर इतनी भयानक थी कि वह गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर गए।

    घटना के तुरंत बाद मौके पर मौजूद लोगों और पुलिसवालों ने रणबीर को तुरंत सिविल हॉस्पिटल अमृतसर पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद पुलिसकर्मी को मृत घोषित कर दिया। इस दुखद घटना से पुलिस डिपार्टमेंट में शोक की लहर दौड़ गई है। जानकारी के मुताबिक, रणबीर सिंह को घर से फोन आया था कि उनके बेटे को चोट लग गई है। इस खबर के बाद वह परेशान हो गए और जल्दी में घर के लिए निकल गए। इसी बीच भंडारी ब्रिज पर लगी रस्सी की वजह से यह भयानक हादसा हो गया। घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। यह पता लगाया जा रहा है कि पुल पर रस्सी लगाते समय ज़रूरी सुरक्षा इंतज़ाम किए गए थे या नहीं और हादसे के लिए ज़िम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई होनी चाहिए। इस दर्दनाक हादसे ने पंजाब बंद के दौरान सुरक्षा इंतज़ामों पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

    हालांकि, जिले के अधिकांश स्कूल और कॉलेज खुले रहे। वहीं, कई ग्रामीण क्षेत्रों में बंद का मिला-जुला असर देखने को मिला। कुछ गांवों में दुकानें और अन्य कारोबार सामान्य रूप से खुले रहे। सफाई कर्मचारी यूनियन के प्रधान बलविंदर सिंह ने बताया कि बंद के दौरान आम लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अस्पताल, मेडिकल स्टोर, लैब और स्कैनिंग सेंटर जैसी आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं को बंद से बाहर रखा गया है, ताकि किसी भी मरीज को परेशानी का सामना न करना पड़े।