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  • कांवड़ यात्रा को लेकर रोहतक पुलिस अलर्ट, सुरक्षा प्लान और पाबंदियां लागू

    कांवड़ यात्रा को लेकर रोहतक पुलिस अलर्ट, सुरक्षा प्लान और पाबंदियां लागू

     रोहतक
     कांवड़ यात्रा और आगामी शिवरात्रि पर्व को देखते हुए पुलिस ने जिले में सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। 30 जुलाई से हरिद्वार में शुरू हुई कांवड़ यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में हरियाणा से श्रद्धालु जल लेने के लिए रवाना हो रहे हैं।

    ऐसे में पुलिस ने कांवड़ियों की सुरक्षा, कानून व्यवस्था बनाए रखने और यातायात को सुचारु रखने के लिए विशेष सुरक्षा प्लान लागू किया है। पुलिस अधीक्षक गौरव राजपुरोहित के निर्देश पर सभी थाना प्रभारियों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। उन्हें स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि कांवड़ यात्रा से जुड़ी किसी भी सूचना पर पांच मिनट के भीतर पुलिस टीम मौके पर पहुंचे और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

    इन पर रहेगा पूरी तरह प्रतिबंध
    यात्रा के दौरान सुरक्षा के लिहाज से कई चीजों पर पाबंदी लगाई गई है। अब सड़क पर जुगाड़ वाहन, ट्रैक्टर-ट्राली और भारी वाहन नहीं चलेंगे। डीजे और हाई पावर साउंड सिस्टम के इस्तेमाल पर रोक रहेगी। डाक कांवड़ झांकी की ऊंचाई अधिकतम 10 फीट और पैदल कांवड़ की ऊंचाई 7 फीट तय की गई है। इसके अलावा यात्रा के साथ शराब, मादक पदार्थ, एलपीजी सिलेंडर, हाकी स्टिक, बेसबाल बैट, डंडे, लाठी, त्रिशूल, भाला या अन्य कोई भी हथियार ले जाना प्रतिबंधित रहेगा। बुलेट या अन्य बाइकों से साइलेंसर हटाकर पटाखे बजाने वालों पर भी पुलिस का डंडा चलेगा।

    बिना अनुमति नहीं लगेंगे शिविर, सत्यापन जरूरी
    कोई भी व्यक्ति या संस्था बिना प्रशासनिक अनुमति के कांवड़ शिविर नहीं लगा पाएगी। संचालकों को सदस्यों व वाहनों का पूरा ब्योरा देना होगा। शिविर में काम करने वाले हर शख्स का पुलिस सत्यापन अनिवार्य किया गया है। इसके साथ ही शिविरों में पर्याप्त रोशनी, पेयजल, सीसीटीवी कैमरे और पुख्ता सुरक्षा इंतजाम करने होंगे।

    यातायात डायवर्जन और सोशल मीडिया पर पैनी नजर
    संवेदनशील रूटों पर अतिरिक्त पुलिस बल, होमगार्ड और स्पेशल पुलिस अधिकारी तैनात होंगे। चौराहों पर लगातार गश्त होगी और जरूरत पड़ने पर ट्रैफिक डायवर्ट किया जाएगा। तेज रफ्तार और नियम तोड़ने वालों के चालान कटेंगे। पुलिस ने सोशल मीडिया पर भी कड़ी नजर रखनी शुरू कर दी है। भड़काऊ या आपत्तिजनक पोस्ट डालने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    प्रशासन ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे सफर के दौरान अपनी पहचान पत्र साथ रखें, नशे से दूर रहें, हमेशा सड़क की बाईं तरफ चलें और नियमों का पूरी तरह पालन करें ताकि यात्रा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।

  • पंजाब की तन्वी ने ताइपे ओपन जीतकर रचा इतिहास, देश का बढ़ाया मान

    पंजाब की तन्वी ने ताइपे ओपन जीतकर रचा इतिहास, देश का बढ़ाया मान

    होशियारपुर 
    पंजाब के होशियारपुर की युवा बैडमिंटन खिलाड़ी तन्वी शर्मा ने  ताइपे ओपन सुपर 300 महिला सिंगल्स का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया। तन्वी 17 साल और 222 दिन की उम्र में दिग्गज खिलाड़ी ताई ज़ू यिंग को पीछे छोड़ते हुए ताइपे ओपन में सबसे कम उम्र की चैंपियन बन गईं।

    युवा भारतीय सनसनी तन्वी शर्मा ने  ताइपे ओपन सुपर 300 बैडमिंटन टूर्नामेंट के महिला एकल फाइनल में वियतनाम की छठी वरीय थुई लिन्ह एनगुएन को सीधे गेम में हराकर अपना पहला बीडब्ल्यूएफ विश्व टूर खिताब जीता। पिछले साल अमेरिकी ओपन सुपर 300 में उप विजेता रही पंजाब की 17 साल की तन्वी ने फाइनल में एनगुएन को 36 मिनट में 21-16, 21-16 से हराया। खिताब जीतने के बाद तन्वी ने कहा, ''यहां यह खिताब जीतकर मैं बेहद खुश हूं।'' 17 साल और 222 दिन की उम्र में ताइपे ओपन के इतिहास की सबसे कम उम्र की चैंपियन बनी तन्वी ने इस मामले में ताइवान की महान खिलाड़ी ताई जू यिंग का रिकॉर्ड तोड़ा। उन्होंने कहा, ''मुझे इस टूर्नामेंट का खिताब जीतने की उम्मीद नहीं थी। मेरा लक्ष्य सिर्फ अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना था। मैंने एक बार में एक मैच पर ध्यान दिया और पूरे टूर्नामेंट में अच्छा प्रदर्शन किया।'' पीवी सिंधू के पूर्व मेंटर (मार्गदर्शक) पार्क ताए संग से कोचिंग लेने वाली तन्वी 18 सालों में ताइपे ओपन का महिला एकल खिताब जीतने वाली पहली भारतीय हैं। उनसे पहले 2008 में साइना नेहवाल ने ऐसा किया था।

    'मैं काफी नर्वस थी लेकिन मैंने…'
    पूरे टूर्नामेंट में केवल एक गेम गंवाने वाली तन्वी ने कहा, ''मैं काफी नर्वस थी लेकिन मैंने यही सोचा कि मुझे अपना शत प्रतिशत देना है और अपने स्वाभाविक खेल पर भरोसा रखना है।'' उन्होंने कहा, ''लगातार पांच मैच खेलना मेरे लिए भी आसान नहीं था। लेकिन मुझे पूरे टूर्नामेंट में निरंतरता बनाए रखनी थी। अब मुझे सुपर 500 और सुपर 750 स्तर के टूर्नामेंट में अच्छा प्रदर्शन करने के लिए और अधिक मेहनत करनी होगी। मैं लगातार कड़ी मेहनत करती रहूंगी।'' तन्वी ने अमेरिकी ओपन में फाइनल में अपने सफर के दौरान भी एनगुएन को हराया था। इस भारतीय खिलाड़ी ने मुकाबले की शुरुआत आक्रामक अंदाज में की। उन्होंने अपने प्रभावी ड्रॉप शॉट से एनगुएन को लगातार छकाते हुए 4-1 की बढ़त बना ली। ड्रॉप शॉट और क्रॉस कोर्ट स्मैश का बेहतरीन मिश्रण करते हुए भारतीय खिलाड़ी ने बढ़त को 10-2 तक पहुंचा दिया। वियतनाम की खिलाड़ी तन्वी के खेल को पढ़ने और शटल की दिशा का सही आकलन करने में संघर्ष करती नजर आई।

    दमदार स्मैश से तीन अंक की बढ़त
    हालांकि, इसके बाद तन्वी से लगातार कुछ सहज गलतियां हुईं जिससे एनगुएन को वापसी का मौका मिला। इसके बावजूद तन्वी ने एक दमदार स्मैश लगाकर ब्रेक तक तीन अंक की बढ़त बरकरार रखी। मध्यांतर के बाद तन्वी ने फिर लय हासिल की और दोनों ओर से दमदार स्मैश लगाते हुए 15-9 की बढ़त बना ली। नेट और बैक कोर्ट से कुछ अंक गंवाने के बावजूद उन्होंने मुकाबले पर अपनी पकड़ बनाए रखी। पांच गेम प्वाइंट हासिल करने के बाद उन्होंने क्रॉस कोर्ट स्मैश के साथ पहला गेम अपने नाम कर लिया। कोर्ट बदलने के बाद एनगुएन ने तेज शुरुआत करते हुए 3-0 की बढ़त बनाई और तन्वी को पूरे कोर्ट पर दौड़ाया। भारतीय खिलाड़ी ने धीरे-धीरे रैलियों पर नियंत्रण स्थापित किया और शानदार नेट शॉट की मदद से स्कोर 3-3 से बराबर कर दिया। इसके बाद उन्होंने विरोधी को लगातार बैक कोर्ट में धकेलते हुए नेट पर अपने नपे-तुले शॉट से दबाव बनाए रखा।

    पदक अपने कोच के गले में पहनाया
    तन्वी ने 8-4 की बढ़त बना ली। हालांकि, एक बार फिर तन्वी की कुछ गलतियों के कारण वियतनाम की खिलाड़ी ने अंतर घटाकर 7-8 कर दिया। तन्वी ब्रेक तक 11-8 की बढ़त हासिल करने में सफल रहीं। इसके बाद तन्वी ने धीरे-धीरे अपनी बढ़त 15-10 और फिर 18-12 तक पहुंचाई। उनके भ्रामक शॉट लगातार उन्हें महत्वपूर्ण अंक दिलाते रहे। 19-12 के स्कोर पर लाइन कॉल को लेकर उनकी चुनौती असफल रही लेकिन इसके तुरंत बाद दमदार स्मैश के साथ उन्होंने सात मैच प्वाइंट हासिल कर लिए। शुरुआती तीन मैच प्वाइंट गंवाने के बावजूद तन्वी ने चौथे अवसर का फायदा उठाते हुए मुकाबला और अपना पहला बीडब्ल्यूएफ विश्व टूर खिताब जीत लिया। जीत के बाद भावुक क्षण में तन्वी ने अपना स्वर्ण पदक उतारकर कोच पार्क के गले में पहनाया। इसके बाद दोनों ने साथ में तस्वीरें खिंचवाईं।

    सबसे कम उम्र की फाइनलिस्ट बनीं
    तन्वी 17 साल और 222 दिन की उम्र में टूर्नामेंट के इतिहास में सबसे कम उम्र की फाइनलिस्ट भी बनीं। उन्होंने कोरिया के महान युगल खिलाड़ी ली योंग डे को पीछे छोड़ दिया जो 2006 में पुरुष युगल फाइनल में पहुंचने पर 17 साल और 287 दिन के थे। पूर्व विश्व जूनियर नंबर एक तन्वी विश्व जूनियर चैंपियनशिप के एक ही सत्र में दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय हैं। उन्होंने लड़कियों के एकल वर्ग में रजत पदक के अलावा मिश्रित टीम स्पर्धा में कांस्य पदक जीता। वह उस भारतीय टीम की भी सदस्य थीं जिसने एशियाई टीम चैंपियनशिप में देश के लिए पहला स्वर्ण पदक जीता था। तन्वी 16 साल की उम्र में 2025 अमेरिकी ओपन में अपने पहले सुपर 300 फाइनल में पहुंचीं। वह इस साल ताइपे ओपन में खिताबी मुकाबले में भी पहुंची और ओडिशा मास्टर्स सुपर 100 तथा गुवाहाटी मास्टर्स सुपर 100 में भी उप विजेता रहीं और दुनिया की शीर्ष 35 खिलाड़ियों में शामिल हो गईं।

  • जालंधर में 7-8 बदमाशों ने युवक का किया अपहरण, पुलिस ने कुछ ही घंटों में सकुशल छुड़ाया

    जालंधर में 7-8 बदमाशों ने युवक का किया अपहरण, पुलिस ने कुछ ही घंटों में सकुशल छुड़ाया

    जालंधर.

    जालंधर के भार्गव कैंप थाना के अवतार नगर में शनिवार देर रात एक युवक का अपहरण हो गया। जानकारी के अनुसार रात करीब 11 बजे 7 से 8 हमलावर एक घर में जबरन घुस आए। वहां मौजूद शुभम नामक युवक के साथ पहले मारपीट की गई और इसके बाद उसे जबरन एक गाड़ी में बैठाकर अपने साथ ले गए।

    पूरी घटना इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई, जिसके आधार पर पुलिस आरोपियों की पहचान में जुटी है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस कंट्रोल रूम के जरिए डायल-112 पर शिकायत दर्ज हुई। सूचना मिलते ही कमिश्नरेट पुलिस हरकत में आई। एडीसीपी इन्वेस्टिगेशन जयंत पुरी मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण कर जांच शुरू करवाई। पुलिस की कई टीमें तुरंत सक्रिय की गईं और युवक की तलाश शुरू कर दी गई।पुलिस की तुरंत कार्रवाई के चलते कुछ ही घंटों में शुभम को सुरक्षित बरामद कर लिया गया। इसके बाद उसे उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। घटना के बाद परिवार ने राहत की सांस ली।

    एसीपी वेस्ट अतिश भाटिया ने बताया कि 2 अगस्त 2026 की रात करीब 11 बजे डायल-112 पर सूचना मिली थी कि थाना भार्गव कैंप के अंतर्गत अवतार नगर क्षेत्र से एक युवक के साथ मारपीट कर अपहरण किया गया है। सूचना मिलते ही कमिश्नरेट पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए युवक का पता लगाकर उसे सुरक्षित बरामद कर लिया। उन्होंने कहा कि मामले की जांच जारी है। पुलिस सभी पहलुओं से जांच कर रही है और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपितों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के अनुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • 34 साल बाद भाजपा से अलग हुए सुखमिंदरपाल सिंह ग्रेवाल, प्राथमिक सदस्यता से दिया इस्तीफा

    34 साल बाद भाजपा से अलग हुए सुखमिंदरपाल सिंह ग्रेवाल, प्राथमिक सदस्यता से दिया इस्तीफा

    लुधियाना

    राष्ट्रीय भाजपा नेता सुखमिंदरपाल ग्रेवाल ने 34 वर्षों से अधिक समय तक पार्टी की सेवा करने के बाद भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और पंजाब प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों को भेजा। ग्रेवाल ने एक्स पर पोस्ट साझा कर कहा कि यह इस्तीफा केवल राजनीतिक दल से संबंध समाप्त करने का निर्णय नहीं है। उन्होंने 1992 में भाजपा से जुड़ने का जिक्र किया, जब पंजाब में पार्टी का साथ देना साहस का विषय था। ग्रेवाल के अनुसार, आज की पंजाब भाजपा उस पार्टी से पूरी तरह अलग है जिससे वह तीन दशक पहले जुड़े थे। उन्होंने कहा कि त्याग और समर्पण की संस्कृति समाप्त हो गई है, जिससे कार्यकर्ता निराश हैं। ग्रेवाल ने जोर देकर कहा कि उनका इस्तीफा व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से प्रेरित नहीं है। यह सिद्धांतों पर आधारित विरोध है। 

  • खेतों की झाड़ियों वाला कीकोड़ा बना किसानों का हरा सोना, बढ़ी कमाई

    खेतों की झाड़ियों वाला कीकोड़ा बना किसानों का हरा सोना, बढ़ी कमाई

    जयपुर
     कभी खेतों की वाड़, मेड़ों और जंगल की झाड़ियों में स्वतः उगने वाला कीकोड़ा अब किसानों की नई उम्मीद बन गया है। बरसात के सीमित मौसम में मिलने वाली ये पारंपरिक सब्जी अब किसानों के लिए अतिरिक्त आय का मजबूत जरिया बन रही है। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता और मांग के चलते कीकोड़ा की कीमतों में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। राजस्थान के कई जिलों में यह 120 से 300 रुपए प्रति किलो तक बिक रहा है जिससे किसानों को सामान्य सब्जियों की तुलना में बेहतर मुनाफा मिल रहा है।

    कभी ग्रामीण परिवार केवल अपने उपयोग के लिए खेतों की वाड़ और झाड़ियों से कीकोड़ा तोड़कर लाते थे, लेकिन अब इसकी मांग इतनी बढ़ गई है कि कई किसान इसकी व्यावसायिक खेती करने लगे हैं। स्थानीय मंडियों से लेकर जयपुर, उदयपुर, जोधपुर और अहमदाबाद तक इसकी आपूर्ति हो रही है।

    सिर्फ दो-तीन महीने का सीजन, इसलिए रहती है ऊंची कीमत
    कीकोड़ा का उत्पादन मुख्य रूप से जुलाई से सितंबर तक ही होता है। सीमित अवधि और कम उपलब्धता के कारण बाजार में इसकी कीमत अन्य हरी सब्जियों की तुलना में कई गुना अधिक रहती है। बारिश के मौसम में इसकी मांग लगातार बढ़ती है, जबकि आपूर्ति सीमित होने से किसानों को अच्छे दाम मिल जाते हैं।

    डॉक्टर भी बताते हैं फायदेमंद
    कीकोड़ा में विटामिन-सी, फाइबर, आयरन, कैल्शियम और एंटीऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। आयुर्वेद में इसे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, पाचन तंत्र मजबूत करने और मौसमी संक्रमण से बचाव के लिए उपयोगी माना गया है। यही वजह है कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है।

    कम लागत, ज्यादा मुनाफा
    कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि कीकोड़ा की खेती में अन्य सब्जियों की तुलना में लागत कम आती है। बेल वाली यह फसल बरसात में तेजी से बढ़ती है और रासायनिक दवाओं की आवश्यकता भी अपेक्षाकृत कम पड़ती है। यदि किसानों को उन्नत बीज, तकनीकी मार्गदर्शन और विपणन की सुविधा मिले तो यह प्रदेश की महत्वपूर्ण नकदी फसल बन सकती है।

    क्या कहते हैं किसान
    उदयपुर जिले के बिछडी निवासी किसान चुनीलाल डांगी का कहना है कि पहले कीकोड़ा खेत की वाड़ में अपने आप उग जाता था और घर में ही खा लेते थे। अब व्यापारी गांव तक खरीदने आने लगे हैं। अच्छी कीमत मिलने से अतिरिक्त आमदनी हो रही है।

    गोटीपा निवासी किसान श्रवण सिंह देवल का कहना है कि बरसात के मौसम में कीकोड़ा की अच्छी मांग रहती है। मंडी में ले जाने पर तुरंत बिक जाता है। कम मेहनत में अच्छी कमाई होने से अब इसकी देखभाल भी पहले से ज्यादा करने लगे हैं।

    कीकोड़ा क्यों बन रहा है ''हरा सोना''
        खेतों की वाड़ और झाड़ियों से निकलकर होटलों तक पहुंचा।
        केवल बरसात में उपलब्ध होने से बाजार में ऊंची कीमत।
        औषधीय गुणों के कारण बढ़ रही उपभोक्ताओं की मांग।
        कम लागत में किसानों को अच्छा लाभ।
        प्रदेश में व्यावसायिक खेती की बढ़ रही संभावनाएं।

    इनका कहना है
    कीकोड़ा एक पौष्टिक एवं औषधीय महत्व की सब्जी है। इसकी व्यावसायिक खेती की अच्छी संभावनाएं हैं। यदि किसान वैज्ञानिक तरीके से इसकी खेती करें और उचित विपणन व्यवस्था मिले तो यह उनकी आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
    भावना डांगी, सहायक कृषि अधिकारी, डबोक

  • बिहार में वज्रपात का कहर, बांका समेत तीन जिलों में आठ लोगों की मौत

    बिहार में वज्रपात का कहर, बांका समेत तीन जिलों में आठ लोगों की मौत

    पटना
    पूर्वी बिहार और सीमांचल में रविवार दोपहर गरज-चमक के साथ हुई तेज बारिश के दौरान वज्रपात की चपेट में आने से बांका में पिता-पुत्र समेत छह लोगों की मौत हो गई। वहीं जमुई और कटिहार जिले में भी किशोर समेत दो लोगों की मौत हो गई। बांका के रजौन और चांदन प्रखंड में आठ लोग झुलस गए। सभी मृतक खेतों में धान रोपाई अथवा कृषि कार्य के दौरान वज्रपात की चपेट में आए।बांका प्रखंड के खाबा गांव में खेत में काम कर रहे ब्रह्मदेव यादव (35 वर्ष) अपने बच्चों को खेत के किनारे बिठाकर खेत में काम कर रहे थे। इसी दौरान वज्रपात की चपेट में आने से ब्रह्मदेव और उनके पांच वर्षीय पुत्र प्रिंस कुमार की मौत हो गई।

    वज्रपात से 8 लोगों की मौत
    वहीं गोलहुआ गांव में खेत में कार्य कर रहे किसान इनोद यादव (35 वर्ष) की वज्रपात की चपेट में आने से मौत हो गई। लीलाबरन गांव में धान रोपाई कर रहीं सरिता देवी (30 वर्ष) की भी आकाशीय बिजली गिरने से मौत हो गई। बाराहाट प्रखंड के डफरपुर गांव निवासी मजदूर साधु तांती (55 वर्ष) खेत में कार्य करने के दौरान वज्रपात की चपेट में आ गए, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। अमरपुर प्रखंड के सलेमपुर गांव में धान रोपाई कर रहे अजय महतो (35 वर्ष) की भी वज्रपात से मौत हो गई। वहीं रजौन तथा चांदन प्रखंड के आनंदपुर क्षेत्र में वज्रपात की अलग-अलग घटनाओं में आठ लोग गंभीर रूप से झुलस गए।

    सावन की पहली बारिश बनी 4 परिवारों का काल
    सावन की पहली बारिश बांका जिले के चार परिवारों के लिए काल बनकर बरसी। जिले के अलग-अलग गांवों में खेतों में धान का बिचड़ा तैयार करने के दौरान आकाशीय बिजली (वज्रपात) गिरने से पिता-पुत्र समेत चार लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। हादसों के बाद मृतकों के गांवों में मातम पसर गया और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पहली घटना बांका प्रखंड की दक्षिणी कटेली पंचायत के खाबा गांव की है। जहां घनश्याम प्रसाद यादव के 35 वर्षीय पुत्र ब्रह्मदेव यादव अपने पांच वर्षीय पुत्र प्रिंस कुमार के साथ खेत में धान का बिचड़ा तैयार कर रहे थे और प्रिंस पास में ही मेड़ पर खेल रहा था। इसी दौरान तेज बारिश के बीच अचानक वज्रपात हुआ, जिसकी चपेट में आकर दोनों गंभीर रूप से झुलस गए। आसपास काम कर रहे ग्रामीण तत्काल दोनों को सदर अस्पताल, बांका लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद पिता-पुत्र को मृत घोषित कर दिया।

    धान का बिचड़ा लगाने के दौरान ठनका गिरा
    खेती कर परिवार का भरण-पोषण करने वाले ब्रह्मदेव यादव अपने पीछे पत्नी और एक पुत्री को छोड़ गए है। जबकि दूसरी घटना बांका प्रखंड की डारा पंचायत के लीलावरण गांव में हुई। यहां प्रकाश यादव की 30 वर्षीय पत्नी सरिता देवी खेत में धान का बिचड़ा तैयार कर रही थीं। इसी दौरान ठनका गिरने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई। बताया गया कि, उनके पति दिल्ली में मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। सरिता देवी अपने पीछे दो पुत्र, 10 वर्षीय अभिषेक कुमार और आठ वर्षीय ललन कुमार को छोड़ गई हैं।

    विनोद यादव की खेत में काम करने के दौरान मौत
    वहीं तीसरी घटना कर्मा पंचायत के गोलाहु गांव की है। यहां उपेंद्र यादव के 35 वर्षीय पुत्र इनोद यादव खेत में बिचड़ा तैयार कर रहे थे। तभी वज्रपात की चपेट में आने से उनकी भी मौत हो गई। खेती कर अपने परिवार का पेट पालने वाले इनोद यादव अपने पीछे पत्नी कविता देवी और पांच बेटियों को छोड़ गए हैं। एक ही दिन में चार लोगों की मौत से बांका प्रखंड में शोक की लहर दौड़ गई। साथ ही ग्रामीणों ने पीड़ित परिवारों को सरकारी सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। इधर प्रशासन ने लोगों से बारिश और गर्जन के दौरान खेतों या खुले स्थानों में काम नहीं करने तथा सुरक्षित स्थान पर रहने की अपील की है।

    जमुई और कटिहार में भी ठनका से एक-एक मौत
    जमुई के चकाई प्रखंड की परांची पंचायत के कोकहरा गांव में रविवार दोपहर बाद ठनका की चपेट में आने से उत्क्रमित मध्य विद्यालय कोकहरा में टोला सेवक प्रकाश तुरी (36 वर्ष) की मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी पत्नी गुड़िया देवी गंभीर रूप से झुलस गईं। उन्हें इलाज के लिए देवघर रेफर किया गया है। वहीं कटिहार के आजमनगर थाना क्षेत्र की बैरिया पंचायत के सोलकंधा गांव में आकाशीय बिजली की चपेट में आने से लक्ष्मण कुमार सिंह (14 वर्ष) की मौत हो गई

  • हिसार के केंद्रीय विद्यालय में AI का कमाल, शिक्षक और 3 छात्राओं ने बनाई ‘दादी-पोते का प्रेम’ शॉर्ट फिल्म

    हिसार के केंद्रीय विद्यालय में AI का कमाल, शिक्षक और 3 छात्राओं ने बनाई ‘दादी-पोते का प्रेम’ शॉर्ट फिल्म

    हिसार.

    हर गुरुजी के पढ़ाने का तरीका व नजरिया अलग-अलग होता है। कुछ पाठ्यक्रमों में बंधकर अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करते हैं तो कुछ अपनी अलग सोच-दृष्टिकोण में पूरे अध्याय पर केवल मंथन करते हैं अपितु कक्षा में बैठे हर एक बच्चे तक पाठ्यक्रम से मिलने वाली सीख पहुंचाने के लिए तरीकें इस्तेमाल में लाते हैं।

    ऐसे ही हिसार सैनिक छावनी स्थित केंद्रीय विद्यालय में अंग्रेजी विषय के शिक्षक संतोष काना है। जिन्होंने 11वीं कक्षा के अध्याय महिला का चित्र शीर्षक पर आधारित वापसी: बैक टू द रूटस पर 8.30 मिनट की यू-ट्यूब शार्ट फिल्म बनाई। यह शार्ट फिल्म ग्रामीण आंचल में रह रहे दादी-पाेते के बीच गहरे प्रेम को दर्शा रही है। इस फिल्म में अहम भूमिका में विज्ञान संकाय की वर्तिका व वाणिज्य संकाय की अनुष्का व खुशी शामिल है।

    30 दिन में बनाई शार्ट फिल्म
    शिक्षक संतोष काना ने बताया कि जून में यह प्रोजेक्ट शुरू किया गया था। जिसमें तीनों विद्यार्थी वर्तिका, अनुष्का व खुशी ने उत्सुकता दिखाई। एक से दो दिन तो मंथन करने में लग गए कि शार्ट फिल्म को कैसे बनाए। क्योंकि पात्र लेकर किरदार निभाते हैं तो चुनौतियां भी काफी होगी और समय भी अधिक खर्च होगा। जिसके बाद शिक्षक ने एआई का विकल्प दिया। जिस पर तीनों विद्यार्थी राजी हो गए। उसके बाद एआई की मदद से शिक्षक सहित चारों सदस्यों ने डोक्यूमेंट्री पर आधारित 8.30 मिनट की शार्ट फिल्म बना दी।

    ये है शिक्षक संतोष काना की उपलब्धियां

    • – टीचर ट्रेनिंग वर्कशाप और कोर्स के लिए रिसोर्स पर्सन के रूप में कार्यरत
    • – भारतीय दूतावास के तहत नेपाल के काठमांडू के केंद्रीय विद्यालय में अहम भूमिका निभाई
    • – 2011 से छात्रों के साथ पाठ्यक्रमों से संबंधित कई अध्यायों पर शार्ट फिल्म बनाई और रेडियो के लिए नाटक बनाए
    • – केरल में छात्रों के साथ मिलकर इनोवेटिव प्रोजेक्ट पर बेहतरीन कार्य करने के लिए नई दिल्ली स्थित केंद्रीय विद्यालय में प्रशंसा पत्र से सम्मानित
    • – नेपाल स्थित काठमांडू पर एक यात्रा-वृतांत नामक तीन किताबें प्रकाशित की
    • – अंग्रेजी व मलयालम भाषा में कई कविताएं भी लिखी है

    यह है यू-ट्यूब शार्ट फिल्म का अंश
    एक गांव में परिवार रहता है। जिसमें बेटा-बहू रोजगार के लिए शहर शिफ्ट हो जाते हैं। पीछे परिवार में दादी-पोते रह जाते हैं, जोकि एक साथ समय बिताते है। एक दिन पोते को भी शहर से बुलावा आ जाता है। जिसके बाद दादी-पोते शहर शिफ्ट हो जाते हैं। मगर वहां पोता-दादी एक साथ समय नहीं बिता पाते। एक दिन दादी ने पोते से सवाल किया कि स्कूल में क्या भगवान के बारे में बताते हैं। जैसे ही ना का जवाब मिला तो दादी उदास हो गई और चली गई। समय बितता रहा। पोते ने कालेज की पढ़ाई पूरी कर विदेश में शिफ्ट हो गया। पीछे से दादी उदास रहने लगी। 7 साल बाद पोता घर लौटा तो दादी से मिला। लेकिन वो पहले वाली उत्सुकता नहीं दिखी। एक दिन दादी की तबीयत खराब हुई और चल बसी। जिसके बाद पोते को सूनापन काटने लगा।

  • Punjab PTI Vacancy 2026: 2000 PTI पदों पर भर्ती शुरू, जानें कौन कर सकता है आवेदन और क्या है योग्यता

    Punjab PTI Vacancy 2026: 2000 PTI पदों पर भर्ती शुरू, जानें कौन कर सकता है आवेदन और क्या है योग्यता

    चंडीगढ़ 

    पंजाब स्कूल शिक्षा भर्ती निदेशालय ने 31 जुलाई 2026 को पंजाब पीटीआई भर्ती 2026 का नोटिफिकेशन जारी किया है। इस भर्ती के तहत फिजिकल ट्रेनिंग इंस्ट्रक्टर (PTI) प्राथमिक कैडर के कुल 2000 पदों को भरा जाएगा।

    इस भर्ती के लिए 18 से 37 वर्ष तक के उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। उम्मीदवारों के पास 12वीं पास होने के साथ शारीरिक शिक्षा में दो वर्षीय डिप्लोमा/सर्टिफिकेट (DPED/CPED) या समकक्ष योग्यता होना जरूरी है। आवेदन प्रक्रिया 1 अगस्त से 31 अगस्त 2026 तक चलेगी।

    वर्ग                        कुल नई रिक्तियां     महिलाओं के लिए आरक्षित रिक्तियां
    सामान्य                          780                                  220
    एससी (M&B)                200                                   80
    एससी (R&O)                   200                              80
    बीसी                            200                                   80
    पूर्व सैनिक – सामान्य      140                                 80
    पूर्व सैनिक – एससी (M&B)     40     –
    पूर्व सैनिक – एससी (R&O)     40     –
    पूर्व सैनिक – बीसी                  40     –
    खेल – सामान्य                        40                                 20
    खेल – एससी (M&B)             10     –
    खेल – एससी (R&O)            10     –
    पीएच – दृष्टिबाधित               20                                    5
    पीएच – श्रवण बाधित          20                                 5
    पीएच – ऑर्थो                 20                                5
    पीएच – ID/MD                20                                  5
    स्वतंत्रता सेनानी               20                                    10
    आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS)     200               60
    कुल                          2000                                                650

    कौन कर सकता है आवेदन?

        शैक्षणिक योग्यता: पंजाब पीटीआई भर्ती 2026 के लिए उम्मीदवारों का 12वीं पास होना जरूरी है। इसके साथ ही उनके पास दो वर्षीय शारीरिक शिक्षा डिप्लोमा/सर्टिफिकेट (DPED/CPED) या इसके समकक्ष योग्यता होनी चाहिए। जो उम्मीदवार DPED/CPED के अंतिम वर्ष में पढ़ रहे हैं, वे भी आवेदन कर सकते हैं, लेकिन उन्हें अंतिम भर्ती योग्यता सूची जारी होने तक डिप्लोमा पूरा करना होगा।

        आयु सीमा: पंजाब पीटीआई भर्ती 2026 के लिए उम्मीदवारों की आयु की गणना 1 जनवरी 2026 के आधार पर की जाएगी। उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 37 वर्ष होनी चाहिए। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट दी जाएगी।

    देखें श्रेणीवार आवेदन शुल्क
    पंजाब पीटीआई भर्ती 2026 के लिए सामान्य और अन्य श्रेणी के उम्मीदवारों को 2000 आवेदन प्रसंस्करण शुल्क जमा करना होगा। वहीं अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए शुल्क 1000 निर्धारित है। पूर्व सैनिक (स्वयं) उम्मीदवारों से कोई आवेदन शुल्क नहीं लिया जाएगा।

    कितना मिलेगा वेतन?
    पंजाब पीटीआई भर्ती 2026 में चयनित उम्मीदवारों को परिवीक्षा अवधि के दौरान ₹29,200 प्रति माह निश्चित वेतन दिया जाएगा। इस अवधि में अन्य भत्ते लागू नहीं होंगे। उम्मीदवारों की परिवीक्षा अवधि 3 वर्ष की होगी।

    ऐसे करें आवेदन

        पंजाब स्कूल शिक्षा भर्ती निदेशालय की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
        Punjab PTI Recruitment 2026 लिंक पर क्लिक करें।
        नए उम्मीदवार पहले रजिस्ट्रेशन करें और लॉगिन आईडी बनाएं।
        लॉगिन करके आवेदन फॉर्म में मांगी गई जानकारी भरें।
        फोटो, हस्ताक्षर और आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें।
        अपनी श्रेणी के अनुसार आवेदन शुल्क का ऑनलाइन भुगतान करें।
        भरी गई जानकारी को एक बार जांच लें और फॉर्म सबमिट करें।

     

     

  • PU परिसर में छात्रा की मौत: जिला मजिस्ट्रेट ने दिए जांच के आदेश, एक हफ्ते में आएगी रिपोर्ट

    PU परिसर में छात्रा की मौत: जिला मजिस्ट्रेट ने दिए जांच के आदेश, एक हफ्ते में आएगी रिपोर्ट

    चंडीगढ़.

    पंजाब यूनिवर्सिटी की पीएचडी शोधार्थी ज्योति की परिसर में हुई मौत के मामले में आखिरकार यूटी प्रशासन ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। जिला मजिस्ट्रेट, यूटी चंडीगढ़ ने मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की है।

    समिति को एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी। जांच में मौत के कारणों के साथ-साथ किसी भी स्तर पर हुई लापरवाही या जिम्मेदारी की भी पड़ताल की जाएगी। जिला मजिस्ट्रेट की ओर से जारी आदेश के अनुसार, जांच समिति की अध्यक्षता यूटी के समाज कल्याण निदेशक नवीन रत्तू (डेनिक्स) करेंगे। समिति में चंडीगढ़ पुलिस के डीएसपी (ट्रैफिक) लक्ष्य पांडे (डैनिप्स) और यूटी इंजीनियरिंग विभाग के डिवीजन-1 के कार्यकारी अभियंता (इलेक्ट्रिकल) गुरप्रीत सिंह बैंस सदस्य होंगे।समिति को घटना से जुड़े सभी तथ्यों और परिस्थितियों की जांच कर यह पता लगाने की जिम्मेदारी दी गई है कि शोधार्थी की मौत किन हालात में हुई और इसके तत्काल एवं वास्तविक कारण क्या थे। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि किसी व्यक्ति, विभाग, एजेंसी, संस्था या विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से किसी प्रकार की लापरवाही, चूक या जिम्मेदारी बनती है या नहीं। जांच केवल मौत के कारणों तक सीमित नहीं रहेगी।

    समिति को घटना स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था, रखरखाव प्रणाली और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र की भी समीक्षा करने को कहा गया है। यदि सुरक्षा मानकों या रखरखाव में कोई कमी सामने आती है तो उसे भी रिपोर्ट का हिस्सा बनाया जाएगा। इसके अलावा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक सुधारात्मक और संस्थागत उपाय सुझाने की जिम्मेदारी भी समिति को सौंपी गई है।
    जांच को प्रभावी बनाने के लिए समिति को घटना स्थल का निरीक्षण करने, सीसीटीवी फुटेज और अन्य रिकॉर्ड की जांच करने, संबंधित अधिकारियों और प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ करने, तकनीकी विशेषज्ञों की राय लेने तथा आवश्यक दस्तावेज जुटाने के अधिकार दिए गए हैं। जिला मजिस्ट्रेट ने पंजाब यूनिवर्सिटी प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि जांच समिति को हर स्तर पर पूरा सहयोग दिया जाए।

    विश्वविद्यालय को सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी रिपोर्ट, संबंधित रिकॉर्ड और अन्य जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने के साथ-साथ जांच के लिए आवश्यक प्रशासनिक एवं लॉजिस्टिक सहायता भी सुनिश्चित करनी होगी। सभी संबंधित विभागों और अधिकारियों को भी जांच में पूर्ण सहयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। गौरतलब है कि 28 जुलाई को पंजाब यूनिवर्सिटी परिसर में पीएचडी शोधार्थी ज्योति की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। घटना के बाद छात्रों और विभिन्न संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच तथा जिम्मेदारी तय करने की मांग उठाई थी। अब मजिस्ट्रियल जांच के आदेश के बाद पूरे मामले में एक सप्ताह के भीतर प्रारंभिक तस्वीर सामने आने की उम्मीद है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

  • पंजाब को केंद्र की बड़ी सौगात, विकास कार्यों के लिए मिले ₹1970 करोड़; राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल ने कही बड़ी बात

    पंजाब को केंद्र की बड़ी सौगात, विकास कार्यों के लिए मिले ₹1970 करोड़; राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल ने कही बड़ी बात

    चंडीगढ़ 
    लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ''विकसित भारत संकल्प अभियान'' के तहत ''नशा मुक्ति भारत अभियान'' और ''मन की बात'' कार्यक्रम की विशेष स्क्रीनिंग आयोजित की गई। इस दौरान हजारों विद्यार्थियों ने प्रधानमंत्री का संबोधन सुना। अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने युवाओं से नशे से दूर रहने, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और समाज में जागरूकता फैलाने का आह्वान किया। 

    कार्यक्रम के बाद राज्यसभा सांसद और एलपीयू के चांसलर अशोक मित्तल ने कहा कि प्रधानमंत्री का लक्ष्य वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है। उन्होंने जोर दिया कि इसमें युवाओं की अहम भूमिका होगी। मित्तल ने कहा कि यदि युवा नशे की गिरफ्त में गए तो विकसित भारत का सपना अधूरा रह जाएगा। उन्होंने बताया कि एलपीयू के ऑडिटोरियम में करीब पांच हजार छात्रों ने प्रधानमंत्री का संबोधन लाइव देखा। 

    मित्तल ने नशे की समस्या को केवल पंजाब तक सीमित न मानते हुए इसे पूरे देश की चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि देश का करीब हर हिस्सा इस चुनौती से जूझ रहा है इसलिए केंद्र, राज्य सरकारें और समाज के हर वर्ग को मिलकर इस लड़ाई को लड़ना होगा। सीमावर्ती राज्यों में ड्रोन से हो रही नशे की तस्करी पर चिंता जताते हुए मित्तल ने केंद्र सरकार से विशेष एंटी-ड्रोन फोर्स बनाने की मांग की।

    पंजाब के विकास और एंटी-ड्रोन फोर्स की मांग
    अशोक मित्तल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पंजाब से विशेष जुड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने पंजाब के विकास कार्यों के लिए 1,970 करोड़ रुपये जारी किए हैं, जिससे सड़क और रेलवे सहित कई परियोजनाओं को गति मिलेगी। मित्तल ने ऐसी तकनीक विकसित करने को कहा, जिससे सीमा पार से आने वाले ड्रोन भारतीय सीमा में प्रवेश करते ही निष्क्रिय हो जाएं।

    राजनीतिक दलों को एकजुटता का संदेश
    पंजाब कांग्रेस में जारी अंदरूनी विवाद पर अशोक मित्तल ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि हर राजनीतिक दल के लिए अनुशासन, संयम और एकजुटता आवश्यक है। मित्तल ने सभी राजनीतिक दलों से संगठनात्मक एकता बनाए रखने की अपील की।

    राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब का हवाला देते हुए तरुण चुघ ने बताया कि अमृतसर में 44 परियोजनाओं पर 1,911 करोड़ रुपये, जालंधर में 78 परियोजनाओं पर 1,186 करोड़ रुपये और लुधियाना में 82 परियोजनाओं पर 1,388 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं में पार्किंग, खेल बुनियादी ढांचा, ठोस कचरा प्रबंधन, जलापूर्ति, हरित क्षेत्रों का विकास और अन्य शहरी सुविधाओं से जुड़े कार्य शामिल हैं। उन्होंने बताया कि 31 मार्च 2026 तक तीनों शहरों में 204 में से 190 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जिन पर 4,148 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। यह कुल परियोजनाओं का लगभग 93 प्रतिशत है।

    तरुण चुघ ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने परियोजनाओं के लिए पर्याप्त धन और संसाधन उपलब्ध कराए, लेकिन इन्हें प्रभावी ढंग से लागू करने में पंजाब सरकार का अपेक्षित सहयोग और इच्छाशक्ति देखने को नहीं मिली। उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप भी सामने आते रहे हैं। उन्होंने पंजाब सरकार से केंद्र द्वारा उपलब्ध कराई गई राशि का पारदर्शी, योजनाबद्ध और बिना किसी भेदभाव के उपयोग सुनिश्चित करने की अपील की। उनका कहना है कि इससे अमृतसर, जालंधर और लुधियाना का समग्र विकास होगा और लोगों को आधुनिक शहरी सुविधाओं का लाभ मिलेगा। 

    ऐसे आता है यह पैसा
    केंद्र सरकार हर साल आयकर, जीएसटी, केंद्रीय उत्पाद शुल्क और दूसरे केंद्रीय करों से होने वाली कमाई का एक तय हिस्सा राज्यों को देती है। इसी व्यवस्था के तहत राज्यों को हर महीने राशि जारी की जाती है। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, समय से पहले राशि जारी करने का मकसद राज्यों की वित्तीय स्थिति मजबूत करना है।

    इससे राज्यों के पास विकास कार्यों और पूंजीगत परियोजनाओं के लिए समय पर पैसा उपलब्ध रहेगा। सरकार का कहना है कि इससे सड़क, पुल, स्वास्थ्य, शिक्षा, सिंचाई और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर काम तेजी से आगे बढ़ सकेगा। पंजाब को भी इस अतिरिक्त किश्त में उसके हिस्से की राशि मिली है।

    इससे राज्य सरकार को विकास योजनाओं के लिए फंड जुटाने में राहत मिलेगी और पहले से चल रही परियोजनाओं के भुगतान में भी आसानी होगी।

    केंद्र सरकार ने क्या कहा?
    वित्त मंत्रालय के अनुसार, यह अतिरिक्त किस्त राज्यों की विकास जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जारी की गई है। सरकार का मानना है कि समय से पहले पैसा मिलने से राज्य पूंजीगत खर्च बढ़ा सकेंगे, जिससे विकास कार्यों में तेजी आएगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।