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  • बारां में बनेगा राजस्थान का पहला लहसुन एक्सीलेंस सेंटर, 5 करोड़ से शुरू होंगे काम

    बारां में बनेगा राजस्थान का पहला लहसुन एक्सीलेंस सेंटर, 5 करोड़ से शुरू होंगे काम

    बारां
     राजस्थान के पहले लहसुन एक्सीलेंस सेंटर की स्थापना के लिए राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत करीब 5 करोड़ रुपए के विभिन्न निर्माण कार्यों को 15 अगस्त से पूर्व निविदा जारी कर कार्य शुरू करवा दिया जाएगा। जिले के कवाई कस्बा क्षेत्र में 10 हेक्टेयर भूमि पर लहसुन एक्सीलेंस सेंटर का निर्माण कराया जाएगा। कृषि विपणन बोर्ड जैयारी में जुटा है।

    राजस्थान में सर्वाधिक लहसुन उत्पादक क्षेत्र में बारां जिले के लिए राज्य सरकार ने साल 2025-26 के बजट में लहसुन एक्सीलेंस सेंटर की स्थापना की घोषणा की गई थी। घोषणा के बाद कृषि विभाग (विस्तार) की ओर से पूर्व में अटरू क्षेत्र के गोविंदपुरा गांव में भूमि का चयन किया गया था। लेकिन जयपुर से आई विभाग के विशेषज्ञ अधिकारियों की टीम ने उक्त चयनित भूमि को अयोग्य बताने के बाद कवाई में भूमि चयन किया गया था।

    ये कार्य शुरू होंगे
    कार्यकारी एजेंसी कृषि विपणन बोर्ड की ओर से लहसुन एक्सीलेंस सेंटर का निर्माण कार्य करवाया जाएगा। प्रथम स्तर पर 4.17 करोड़ रुपए से प्रशासनिक भवन समेत बाउंड्रीवाल का कार्य, 22 लाख रुपए से रोड वर्क, 30 लाख रुपए से इलेक्ट्रिक वर्क तथा 30 लाख रुपए से फर्नीचर का कार्य होगा।

    14 सौ मीटर की और 6 फुट ऊंची बाउंड्रीवाल
    कृषि विपणन बोर्ड के अधिशासी अभियंता जुगल किशोर सांखला ने बताया कि करीब 14 सौ मीटर लंबाई में 6 फीट उंची बाउंड्रीवॉल का निर्माण कार्य किया जाएगा। इसी के साथ ही प्रशासनिक भवन, रोड वर्क तथा बिजली का कार्य भी शुरू करवा दिया जाएगा। करीब 12 करोड़ की लागत से बनने वाले लहसुन एक्सीलेंस सेंटर में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत 10 करोड़ रुपए की लागत से भवन निर्माण तथा अन्य कार्य होंगे। वहीं, पंच गौरव योजना के तहत करीब 2 करोड़ रुपए की लागत से प्रोसेसिंग यूनिट बनाई जाएगी।

    लहसुन एक्सीलेस सेंटर से जिले के किसानों तथा व्यापारियों को नवीन तकनीकी वह प्रोसेसिंग की जानकारी का लाभ मिलेगा। किसानों को जहां नई तकनीकी तथा किस्मों एवं उत्पादन से संबंधित जानकारियां मिलेगी, वहीं व्यापारियों को लहसुन प्रोसेसिंग तथा मार्केटिंग से संबंधित जानकारी उपलब्ध हो पाएगी। प्रोसेसिंग यूनिट भी बनाई जाएगी

    ये जानना भी है जरूरी

    • लहसुन फसल में क्षेत्रफल, उत्पादन और उत्पादकता की दृष्टि से राजस्थान में प्रथम स्थान रखता है।
    • पिछले सालों में राज्य में लहसुन की औसत 89 हजार 805 हेक्टेयर में बुवाई होकर औसत उत्पादकता 5916 किलोग्राम रही है।
    • इसमें बारां जिले का औसत क्षेत्रफल 30 हजार 714 हेक्टेयर रहा और उत्पादकता 6133 रही है।
    • यहां पिछले तीन साल से औसतन 16 लाख क्विटल लहसुन पहुंच रहा है।
  • जनगणना 2027 की तैयारियों में राजस्थान आगे, मकान सूचीकरण कार्य सफलतापूर्वक पूरा

    जनगणना 2027 की तैयारियों में राजस्थान आगे, मकान सूचीकरण कार्य सफलतापूर्वक पूरा

    जयपुर
    मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने सोमवार को जनगणना कार्य निदेशालय का दौरा कर निदेशालय की विभिन्न कोर गतिविधियों, जनगणना 2027 के प्रथम चरण के तहत मकान सूचीकरण की सफलतापूर्वक पूर्णता तथा भविष्य की तैयारियों की समीक्षा बैठक ली। मुख्य सचिव ने  सांख्यिकीय टीम के प्रति स्नेह और उत्साह व्यक्त किया तथा निदेशालय के उच्च सांख्यिकीय मानकों की सराहना की।

    हाउस लिस्टिंग एवं हाउसिंग सेंसस का सफल समापन
    मुख्य सचिव ने बताया कि जनगणना 2027 के प्रथम चरण के तहत मकान सूचीकरण और मकानों की गणना (हाउस लिस्टिंग एंड हाउसिंग सेंसस) का कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है। निदेशालय अब आगामी फरवरी 2027 में प्रस्तावित जनगणना के द्वितीय चरण  की तैयारियों में जुट गया है, जिसके लिए प्रशासनिक एवं लॉजिस्टिक व्यवस्थाएं तेजी से की जा रही हैं।

    राष्ट्रीय नीति-निर्माण में सांख्यिकी का महत्व और राजस्थान की अग्रणी भूमिका
    उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय डेमोग्राफिक चेंज कमेटी, जिसमें उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव दुर्गाशंकर मिश्र भी शामिल हैं, के साथ हाल ही में हुई चर्चाओं में सांख्यिकीय डेटा को नियमित रूप से अद्यतन करने के महत्व पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण, कृषि एवं जनसंख्या के सटीक आंकड़े ही पारदर्शी और प्रभावी नीति-निर्माण की रीढ़ हैं। उन्होंने बताया कि राजस्थान अपनी सुदृढ़ सांख्यिकीय डेटाबेस प्रणालियों तथा अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय की नियमित प्रकाशन परंपरा के कारण देश के सबसे प्रगतिशील राज्यों में अग्रणी स्थान रखता है।

    जिला जनगणना हस्तपुस्तिका और प्रशासनिक एटलस का अद्यतन
    समीक्षा बैठक के दौरान जिला जनगणना हस्तपुस्तिका एवं प्रशासनिक एटलस के त्वरित अद्यतन पर विशेष बल दिया गया। प्रदेश में जिलों, तहसीलों और उप-मंडलों की संख्या में हुई उल्लेखनीय वृद्धि को देखते हुए ग्रामीण एवं शहरी विकास योजनाओं की रूपरेखा तैयार करने में यह दस्तावेज अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि डिजिटल तकनीक और भू-स्थानिक उपकरणों के कुशल उपयोग से शासन की योजनाओं को धरातल पर उतारने में और अधिक सहायता मिलेगी।

    बैठक के समापन पर मुख्य सचिव ने निदेशालय के सभी सांख्यिकीय अन्वेषकों एवं अधिकारियों के योगदान की सराहना की और कहा कि जनगणना से जन कल्याण के विजन को साकार करने में सांख्यिकी संवर्ग की भूमिका सर्वोपरि है। आगामी 17 अगस्त से पूर्व भू-स्थानिक एवं डिजिटल टूल्स के उपयोग पर एक विस्तृत कार्यशाला आयोजित करने का भी निर्णय लिया गया। इस दौरान मुख्य सचिव ने निदेशालय परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का सन्देश भी दिया।

     

  • सावन की पहली सोमवारी पर नाग पंचमी का संयोग, बिहार के शिवालयों में उमड़ा आस्था का सैलाब

    सावन की पहली सोमवारी पर नाग पंचमी का संयोग, बिहार के शिवालयों में उमड़ा आस्था का सैलाब

    पटना
    सावन मास की पहली सोमवारी और नाग पंचमी का दुर्लभ संयोग इस बार बिहार में आस्था, लोकविश्वास और सांस्कृतिक परंपराओं के भव्य उत्सव के रूप में देखने को मिला। सोमवार तड़के से ही राज्यभर के शिव मंदिरों और नाग देवता के पूजा स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिरों में घंटियों की गूंज, शंखनाद और 'हर-हर महादेव' के जयघोष से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। शिवालयों में जलाभिषेक और रुद्राभिषेक के साथ-साथ नाग देवता और विषहरी (मनसा) माता की विशेष पूजा-अर्चना भी की गई।

    पहली सोमवारी और नाग पंचमी ने कई गुना बढ़ाया श्रद्धालुओं का उत्साह
    इस वर्ष सावन की पहली सोमवारी और नाग पंचमी एक ही दिन पड़ने से श्रद्धालुओं का उत्साह कई गुना बढ़ गया। राज्य के प्रमुख शिवधामों में सुबह से ही जलाभिषेक के लिए लंबी कतारें लगी रहीं। वहीं नाग देवता की पूजा के लिए भी विशेष अनुष्ठान आयोजित किए गए। यह आयोजन केवल धार्मिक नहीं, बल्कि बिहार की सदियों पुरानी लोक परंपरा, कृषि संस्कृति और प्रकृति के प्रति सम्मान का भी प्रतीक बनकर सामने आया। गांवों से लेकर शहरों तक मंदिरों में घंटियों की गूंज, शंखनाद और 'हर-हर महादेव' के जयघोष से पूरा वातावरण शिवमय बना रहा।

    नाग पंचमी सिर्फ पर्व नहीं, सनातन की जीवन-दृष्टि का प्रतीक
    सनातन परंपरा में नाग केवल एक जीव नहीं, बल्कि सृष्टि के संतुलन, धरती की उर्वरता और प्रकृति की रक्षा के प्रतीक माने जाते हैं। भगवान शिव के गले में विराजमान वासुकी नाग यह संदेश देते हैं कि जीवन में शक्ति और करुणा दोनों का संतुलन आवश्यक है। यही कारण है कि सावन और नाग पंचमी का संबंध केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और पर्यावरणीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। बिहार के ग्रामीण इलाकों में आज भी नाग पंचमी के दिन खेतों की मेड़, पुराने पीपल और बरगद के नीचे तथा नाग देवता के प्रतीक स्थलों पर विशेष पूजा की जाती है। किसान अच्छी वर्षा, भरपूर फसल और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं।

    धार्मिक मान्यता है कि नाग पंचमी केवल पूजा का पर्व नहीं, बल्कि लोकजीवन और प्रकृति से जुड़ी सदियों पुरानी परंपरा का उत्सव भी है। यहां नाग देवता की पूजा भगवान शिव की आराधना के साथ-साथ खेत-खलिहान, वर्षा, धरती की उर्वरता और जीव-जंतुओं के संरक्षण की भावना से भी जुड़ी हुई है। यही वजह है कि मिथिलांचल, मगध, सीमांचल, अंग और तिरहुत के ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी 'विषहरी स्थान', 'मनसा स्थान' और 'गहबर' पर विशेष पूजा की परंपरा निभाई जाती है।

    बिहार के इन मंदिरों में उमड़ती है सबसे अधिक आस्था
    नाग पंचमी पर बिहार के कई प्राचीन शिव मंदिरों और नाग पूजा स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। समस्तीपुर के थानेश्वर स्थान, विद्यापतिधाम स्थित उगना महादेव मंदिर और खुदनेश्वर धाम, मुजफ्फरपुर के गरीबनाथ धाम, दरभंगा के कुशेश्वरनाथ मंदिर तथा भागलपुर के अजगैविनाथ धाम में भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की गई।

    वहीं नाग देवता की आराधना के लिए लखीसराय का बभनगावां नाग मंदिर विशेष रूप से प्रसिद्ध है। स्थानीय मान्यता है कि नाग पंचमी की रात यहां चढ़ाया गया दूध और लावा सुबह तक नहीं मिलता, जिसे श्रद्धालु नाग देवता का आशीर्वाद मानते हैं।
    बेगूसराय जिले के मंसूरचक प्रखंड स्थित बाजोपुर विषहरी मंदिर भी अपनी अनूठी परंपरा के लिए जाना जाता है। यहां विषहरी (मनसा) माता के साथ नाग देवता की पूजा होती है। स्थानीय लोकविश्वास के अनुसार मंदिर परिसर में जीवित सांपों का वास माना जाता है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां अपनी मनोकामना लेकर पहुंचते हैं।

    पटना जिले के मसौढ़ी क्षेत्र स्थित नागस्थान भी नाग पंचमी के अवसर पर आस्था का प्रमुख केंद्र बन जाता है। यहां नागों के प्राचीन बसेरे की मान्यता के कारण विशेष पूजा और मेले का आयोजन किया जाता है। मधुबनी जिले के राजनगर स्थित नाग देवता मंदिर में भी संतान प्राप्ति और मनोकामना पूर्ण होने की मान्यता के चलते दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसके अलावा बिहार के लगभग हर जिले के गांवों में स्थित विषहरी स्थान, मनसा स्थान और गहबर पर महिलाएं और किसान दूध, लावा, दूर्वा, पुष्प और प्रसाद अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि और अच्छी फसल की कामना करते हैं।

    ऐसे होती है नाग पंचमी की पूजा
    धर्माचार्यों के अनुसार श्रद्धालु सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लेते हैं। इसके बाद भगवान शिव का गंगाजल, जल और पंचामृत से अभिषेक किया जाता है। शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, भांग, आक के फूल, चंदन और मौसमी फल अर्पित किए जाते हैं।इसके बाद नाग देवता या विषहरी माता के प्रतीक स्वरूप स्थापित प्रतिमा, शिला या चित्र की पूजा कर हल्दी, अक्षत, दूर्वा, पुष्प, लावा और प्रसाद अर्पित किया जाता है। कई मंदिरों में रुद्राष्टाध्यायी, महामृत्युंजय मंत्र और शिव पुराण का पाठ भी कराया जाता है।

    लोकविश्वास के साथ प्रकृति संरक्षण का भी संदेश देता है पर्व
    धार्मिक मान्यता नाग देवता के सम्मान और प्रकृति संरक्षण की भावना को मजबूत करती है। वहीं वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि जीवित सांपों को पकड़ना या उन्हें दूध पिलाना उचित नहीं है। सांप पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और उनका संरक्षण भी उतना ही जरूरी है। इसलिए प्रतीकात्मक पूजा और वन्यजीवों के प्रति संवेदनशील व्यवहार को बढ़ावा देना चाहिए।

    सोमवारी के संयोग ने बढ़ाई मंदिरों में भीड़
    पहली सोमवारी और नाग पंचमी एक साथ पड़ने के कारण इस बार राज्यभर के मंदिरों में सामान्य वर्षों की तुलना में अधिक श्रद्धालु पहुंचे। प्रमुख शिवालयों और नाग पूजा स्थलों पर प्रशासन ने सुरक्षा, बैरिकेडिंग, चिकित्सा सुविधा और यातायात प्रबंधन के विशेष इंतजाम किए। पूरे दिन जलाभिषेक, रुद्रपाठ, भजन-कीर्तन और नाग पूजा का सिलसिला चलता रहा। धार्मिक मान्यता के अनुसार बिहार में नाग पंचमी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि लोकआस्था, शिवभक्ति और विषहरी माता के प्रति श्रद्धा का अद्भुत प्रतीक है।

     सुरक्षा के रहे व्यापक इंतजाम
    श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए राज्य के प्रमुख मंदिरों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई। बैरिकेडिंग, सीसीटीवी निगरानी, मेडिकल टीम और यातायात नियंत्रण की व्यवस्था की गई। कई स्थानों पर स्वयंसेवी संस्थाओं ने पेयजल, प्राथमिक उपचार और श्रद्धालुओं की सहायता के लिए सेवा शिविर भी लगाए।

    आस्था के साथ संस्कृति और प्रकृति संरक्षण का संदेश
    सावन की पहली सोमवारी और नाग पंचमी का यह दुर्लभ संगम केवल पूजा-अर्चना का अवसर नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की उस परंपरा का भी प्रतीक है, जिसमें प्रकृति, पशु-पक्षी और मानव जीवन को एक-दूसरे का पूरक माना गया है। यही वजह है कि हर वर्ष यह पर्व लाखों लोगों को अपनी धार्मिक आस्था के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत और प्रकृति संरक्षण के संदेश से भी जोड़ता है।

  • सावन के पहले सोमवार पर पानीपत के शिवालयों में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब

    सावन के पहले सोमवार पर पानीपत के शिवालयों में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब

    पानीपत.

    सावन मास के पहले सोमवार को शिवालयों में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। अलसुबह से ही शहर के प्रमुख मंदिरों और शिवालयों में भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए भक्तों का तांता लगना शुरू हो गया था। 'हर-हर महादेव' और 'बम-बम भोले' के जयकारों से पूरा शहर शिवमय नजर आया।

    भोर होते ही पांच बजे मंदिरों के कपाट भक्तों के लिए खोल दिए गए। कपाट खुलते ही शिवभक्तों की लंबी-लंबी कतारें लग गईं। बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग सभी में भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद पाने की भारी उत्सुकता और श्रद्धा देखने को मिली। भक्तों ने अनुशासित तरीके से लाइनों में खड़े होकर शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, भांग और अक्षत अर्पित किए। पहले सोमवार के अवसर पर मंदिरों को फूलों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया था। गर्भगृह में स्थापित शिवलिंग का विशेष शृंगार किया गया। आकर्षक फूलों की मालाओं, चंदन और भांग से भोलेबाबा के मनमोहक स्वरूप को सजाया गया, जिसके दर्शन कर भक्त निहाल हो गए।

    सुरक्षा और व्यवस्था के कड़े प्रबंध
    भारी भीड़ को देखते हुए शहर के प्राचीन देवी मंदिर, श्री सनातन धर्म सभा मंदिर, श्री बांके बिहारी ज्ञानेश्वर मंदिर सहित अन्य मंदिरों में में सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए गए थे। मंदिरों के आसपास पुलिस बल तैनात रहा ताकि श्रद्धालुओं को दर्शन करने में किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

  • पंजाब पुलिस चौकी पर दो नाबालिगों ने फेंका था ग्रेनेड, विदेश से पैसों का मिला लालच

    पंजाब पुलिस चौकी पर दो नाबालिगों ने फेंका था ग्रेनेड, विदेश से पैसों का मिला लालच

    बटाला.

    गुरदासपुर के बटाला में अर्बन एस्टेट पुलिस चौकी पर हुए ग्रेनेड हमले के मामले में पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए दो नाबालिग आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार दोनों आरोपियों ने विदेश में बैठे एक हैंडलर के निर्देश पर और थोड़े से पैसों के लालच में इस वारदात को अंजाम दिया।

    मामले में एक अन्य आरोपी की पहचान भी कर ली गई है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। डीआईजी बॉर्डर रेंज हरमनबीर सिंह गिल ने बटाला में पत्रकारों से बातचीत के दौरान बताया कि शनिवार रात करीब दस बजे अर्बन एस्टेट पुलिस चौकी पर ग्रेनेड से हमला किया गया था। घटना के तुरंत बाद पुलिस ने विभिन्न टीमों का गठन कर जांच शुरू की। जांच के दौरान प्रतिरक्षा खुफिया इकाई और बटाला पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग मिले, जिनके आधार पर कार्रवाई करते हुए दोनों नाबालिग आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

    बटाला के ही रहने वाले हैं दोनों नाबालिग
    पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपी बटाला पुलिस जिले के रहने वाले हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि वे विदेश में बैठे अपने हैंडलर के संपर्क में थे। हैंडलर के कहने पर उन्होंने मामूली रकम के लालच में पुलिस चौकी पर ग्रेनेड फेंका। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि आरोपियों का संपर्क किस माध्यम से हुआ और उन्हें वारदात के लिए किस प्रकार तैयार किया गया। उप महानिरीक्षक हरमनबीर सिंह गिल ने बताया कि इस मामले में एक अन्य आरोपी की पहचान कर ली गई है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं और उम्मीद है कि उसे भी जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है ताकि इस साजिश से जुड़े सभी लोगों तक पहुंचा जा सके।

    आतंकवादी संगठन की संलिप्तता से इंकार
    पुलिस अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि अब तक की जांच में इस ग्रेनेड हमले के पीछे किसी आतंकवादी संगठन की संलिप्तता के संकेत नहीं मिले हैं। हालांकि घटना के बाद सामाजिक माध्यमों पर डाली गई कुछ पोस्टों की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इन पोस्टों का घटना से कोई संबंध है या नहीं। अधिकारियों ने कहा कि जांच अभी जारी है और तकनीकी व अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का कहना है कि सीमा पार से युवाओं को बहकाने और उन्हें लालच देकर इस तरह की गतिविधियों में शामिल करने के प्रयासों पर भी विशेष नजर रखी जा रही है।

  • टोरी जंक्शन पर एफओबी निर्माण की राह साफ, प्लेटफॉर्म-5 की लाइन शिफ्टिंग शुरू

    टोरी जंक्शन पर एफओबी निर्माण की राह साफ, प्लेटफॉर्म-5 की लाइन शिफ्टिंग शुरू

    लातेहार
     बरकाकाना-बरवाडीह रेलखंड के महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन टोरी जंक्शन पर वर्षों से अधूरी पड़ी यात्रियों की सबसे बड़ी मांग अब धरातल पर उतरती दिखाई देने लगी है। पश्चिमी छोर पर प्रस्तावित करोड़ों रुपये लागत के फुट ओवरब्रिज (एफओबी) निर्माण की राह आखिरकार आसान होती नजर आ रही है।

    रविवार से प्लेटफार्म संख्या पांच की लाइन संख्या सात को शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई, जिससे लंबे समय से निर्माण में आ रही तकनीकी बाधा दूर होने की उम्मीद है। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि यह प्रक्रिया पूरी होते ही एफओबी निर्माण का पहिया तेजी से घूमने लगेगा और वर्षों का इंतजार जल्द समाप्त हो सकेगा।

    टोरी स्टेशन के टीआई संजय कुमार, स्टेशन अधीक्षक रंजीत कुमार समेत विभागीय अधिकारियों की देखरेख में रेलकर्मियों ने लाइन शिफ्टिंग का कार्य शुरू किया। सुरक्षा के मद्देनजर संबंधित लाइन पर ट्रेनों का परिचालन अस्थायी रूप से बंद रखा गया तथा जिन यात्री ट्रेनों का ठहराव इस लाइन पर होता था, उन्हें आवश्यकता के अनुसार दूसरी लाइन पर ठहराया गया अथवा वहीं से परिचालित किया गया।

    पूरी प्रक्रिया तकनीकी मानकों के अनुरूप सावधानीपूर्वक कराई जा रही है। लाइन शिफ्टिंग शुरू होने की सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों में भी उत्साह देखने को मिला। कई लोग टोरी जंक्शन पहुंचकर कार्य की प्रगति का जायजा लेते रहे।

    रेलवे और निर्माण एजेंसी से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि लाइन हटते ही निर्माण स्थल पूरी तरह उपलब्ध हो जाएगा और एफओबी का कार्य तेज गति से आगे बढ़ाया जाएगा। संवेदक प्रतिनिधि नौशाद आलम ने बताया कि परियोजना से जुड़ी कई तैयारियां पहले ही पूरी कर ली गई हैं।

    रेल लाइन शिफ्टिंग के लिए लगभग 500 काउंटर फोर्ट वाल के निर्माण की प्रक्रिया भी तेजी से चल रही है। यह कार्य पूरा होते ही निर्माण एजेंसी पूरी क्षमता के साथ एफओबी निर्माण में जुट जाएगी।

    टोरी के टीआई संजय कुमार और स्टेशन अधीक्षक रंजीत कुमार ने बताया कि यात्रियों की सुविधा और सुरक्षित आवागमन को ध्यान में रखते हुए लाइन शिफ्टिंग कराई जा रही है। इसके पूरा होते ही फुट ओवरब्रिज निर्माण में तेजी आएगी।

    रेलवे को उम्मीद है कि लंबे समय से जिस सुविधा का इंतजार हजारों यात्री कर रहे हैं, वह अब जल्द ही हकीकत का रूप लेगी। वर्षों से फाइलों में अटकी यह परियोजना अब पटरी पर लौटती दिख रही है और टोरी जंक्शन को शीघ्र ही आधुनिक व सुरक्षित पहचान मिलने की उम्मीद मजबूत हो गई है।

  • अंगदान मानवता का महादान, डर और भ्रांतियां दूर करने की जरूरत: राज्यपाल बागडे

    अंगदान मानवता का महादान, डर और भ्रांतियां दूर करने की जरूरत: राज्यपाल बागडे

    जयपुर
     राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि “अंगदान” मानवता के लिए अपने आपको समर्पण करने से जुड़ा महादान है। उन्होंने कहा कि अंगदान की सबसे बड़ी बाधा मनुष्य के भीतर का डर है। इसे भगाने और इस सम्बन्ध में लोगों को प्रेरित किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने समाज में अंगदान से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने का आह्वान किया है।

    राज्यपाल बागडे सोमवार को राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय में 'अंगदान' जागरूकता कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हमारे देश में किडनी का सफल प्रत्यारोपण एक दिसम्बर 1971 को तमिलनाडु में हुआ। उन्होंने इतने वर्ष पहले अंग प्रत्यारोपण होने के बावजूद अंगदान के प्रति जागरूकता नहीं होने पर चिंता जताई और कहा कि अंगदान दिवस मनाने की बजाय इसे एक आंदोलन मानकर क्रियान्वित किया जाए। राज्यपाल ने अंगदान के साथ स्वास्थ्य जागरूकता के लिए भी अभियान चलाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हम घर में एक दिन पहले बनी रोटी नहीं खाते परन्तु बाजार से पुरानी बनी ब्रेड खरीदकर खा लेते हैं। उन्होंने खान पान की आदतों में सुधार किए जाने और व्यसन मुक्त समाज के निर्माण पर जोर दिया।

    राज्यपाल ने आरम्भ में उन सभी महान आत्माओं को भी श्रद्धांजलि अर्पित की जिन्होंने अपना अंग दान कर दूसरों को नया जीवन दिया है। उन्होंने सभी को अंगदान की शपथ भी दिलाई। उन्होंने कहा कि हमारे देश में हर वर्ष लाखों लोग विभिन्न अंगों की आवश्यकता के कारण अपनी जान गंवा देते हैं। किडनी, लिवर, हृदय और फेफड़ों की मांग आज भी सर्वाधिक है। पर उपलब्धता बहुत कम है। इस दृष्टि से अंगदान का यह महत्व समझाया जाना जरूरी है कि इससे हम किसी अन्य व्यक्ति की जिंदगी में नई उम्मीदों का सवेरा ला सकते है।

    राज्यपाल ने कहा कि भारत में प्रतिवर्ष लगभग 5 लाख लोग अंग प्रत्यारोपण नहीं होने से अपनी जांन गंवा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारे यहां अंग प्रत्यारोपण करने की सुविधाएं अच्छी है लेकिन यहाँ पर अंगदान करने वालों की संख्या अभी भी बहुत ही कम है। उन्होंने अंगदान की प्रेरणा के साथ—साथ अंगदान से जुड़ी सेवाओं का भी प्रदेश में विस्तार करने और सभी अस्पतालों में अंग प्रत्यारोपण संबंधी उपकरणों की व्यवस्था प्रभावी रूप में किए जाने पर जोर दिया।

    इससे पहले राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, जयपुर के कुलगुरु प्रो. प्रमोद येवले और राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. मोहनीश ग्रोवर ने अंगदान के महत्व और आयोजन से जुड़े सरोकारों के बारे में जानकारी दी। राज्यपाल ने अंगदान जागरूकता के लिए महत्वपूर्ण प्रयास करने वाले चिकित्सकों और "अंगदान" जागरूकता प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया।

  • हरियाणा में विदेश भेजने का झांसा देकर परिचित ने ठगे 25 लाख रुपए, मामला दर्ज

    हरियाणा में विदेश भेजने का झांसा देकर परिचित ने ठगे 25 लाख रुपए, मामला दर्ज

    जींद.

    निम्नाबाद गांव की एक युवती को विदेश भेजने का झांसा देकर उसके परिचित ने 25 लाख रुपये की ठगी कर ली। आरोपित ने न तो युवती को विदेश भेजा और न ही रुपये लौटाए। सदर थाना सफीदों पुलिस ने युवती की मां की शिकायत पर उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के गांव लिपस निवासी प्रभजोत के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    गांव निम्नाबाद निवासी लवप्रीत कौर ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उनकी बेटी शोभनीत कौर वर्ष 2018 में सफीदों के एक निजी स्कूल में नौवीं कक्षा में पढ़ती थी। उसी स्कूल में रिश्तेदारी में आया प्रभजोत भी पढ़ता था। तभी दोनों की पहचान हुई थी। वर्ष 2025 में प्रभजोत ने इंस्टाग्राम के माध्यम से शोभनीत से संपर्क किया और बताया कि उसकी अपनी कंपनी है, जो युवाओं को विदेश भेजने का काम करती है। शोभनीत ने विदेश जाने की इच्छा जताई और अपनी मां की प्रभजोत से बातचीत करवाई। दोनों पक्षों के बीच 25 लाख रुपये में बात तय हुई। लवप्रीत कौर के अनुसार उन्होंने सात से 19 अप्रैल 2025 के बीच 25 लाख रुपये प्रभजोत के बैंक खातों में भेज दिए।

    साथ ही बेटी के सभी आवश्यक दस्तावेज भी उसे सौंप दिए। 16 अप्रैल 2025 को प्रभजोत ने फोन कर उन्हें दिल्ली बुलाया और कहा कि उसी रात उनकी बेटी की फ्लाइट है। दिल्ली पहुंचने के बाद उन्होंने प्रभजोत से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उसने फोन नहीं उठाया। परिवार को पूरी रात दिल्ली के एक गुरुद्वारे में रुकना पड़ा। इसके बाद भी आरोपित ने उनसे कोई संपर्क नहीं किया। पीड़ित परिवार उसके घर भी गया और पंचायत भी हुई, लेकिन आरोपित ने न तो रुपये लौटाए और न ही युवती को विदेश भेजा। शिकायतकर्ता का आरोप है कि पैसे वापस मांगने पर प्रभजोत ने उन्हें धमकी भी दी। सदर थाना सफीदों प्रभारी राजेश ने बताया कि शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

  • पंजाब विधानसभा में भर्ती और पेपर लीक पर प्रस्ताव पारित, केंद्र से सख्त सुधारों की मांग

    पंजाब विधानसभा में भर्ती और पेपर लीक पर प्रस्ताव पारित, केंद्र से सख्त सुधारों की मांग

    चंडीगढ़.

    पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान सोमवार को वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने सरकारी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं, प्रश्नपत्र लीक और भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर सदन में प्रस्ताव पेश किया।

    प्रस्ताव में परीक्षा प्रणाली की विफलताओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा गया कि बार-बार प्रश्नपत्र लीक, परीक्षाओं में धोखाधड़ी, भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं और प्रशासनिक विफलताओं ने योग्यता आधारित व्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंचाया है तथा लाखों युवाओं के भविष्य को खतरे में डाल दिया है। प्रस्ताव में कहा गया कि पिछले एक दशक के दौरान भारतीय जनता पार्टी के शासन में प्रश्नपत्र लीक, डिजिटल परीक्षा प्रणाली में सेंध और भर्ती घोटालों सहित 70 से अधिक बड़े परीक्षा घोटाले सामने आए हैं। इससे पारदर्शी और निष्पक्ष भर्ती व्यवस्था में लोगों का विश्वास गंभीर रूप से कमजोर हुआ है।

    पुलिस बल के प्रयोग पर उठाए सवाल
    हरपाल सिंह चीमा ने प्रस्ताव में कहा कि जवाबदेही की मांग कर रहे शांतिपूर्ण छात्र आंदोलनों के जवाब में मनमानी गिरफ्तारियां, आपराधिक मामले दर्ज करने और बल प्रयोग जैसी कार्रवाई की गई, जिससे लोकतांत्रिक अधिकारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हुई हैं। प्रस्ताव में पर्यावरण प्रेमी और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक को हिरासत में लेने और उन्हें बदनाम किए जाने की कड़ी निंदा भी की गई। इसमें कहा गया कि प्रश्नपत्र लीक मामलों में जवाबदेही की मांग कर रहे छात्रों के समर्थन के कारण उन्हें जबरन हिरासत में लिया गया और दमन का सामना करना पड़ा।

    एफआईआर करने का किया विरोध
    प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि विभिन्न राज्यों में शांतिपूर्ण और निहत्थे छात्रों के प्रदर्शन पर बल प्रयोग किया गया। छात्रों के खिलाफ आंसू गैस के इस्तेमाल तथा बड़ी संख्या में आपराधिक मामले दर्ज किए गए। इसमें कहा गया कि नाबालिग छात्र-छात्राओं के विरुद्ध भी भारतीय न्याय संहिता और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत कई प्राथमिकी दर्ज की गईं। सदन के समक्ष रखे गए प्रस्ताव में प्रश्नपत्र लीक, भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं और संस्थागत विफलताओं की कड़े शब्दों में निंदा की गई। साथ ही शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों और नागरिकों के खिलाफ बल प्रयोग, मनमानी हिरासत तथा आपराधिक कार्रवाई की भी निंदा करते हुए देशभर के छात्रों के साथ एकजुटता व्यक्त की गई।  प्रस्ताव में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी गैरवाजिब आपराधिक मामलों को तत्काल वापस लेने की मांग की गई।

    संस्थाओं में सुधार की रखी मांग
    प्रस्ताव के माध्यम से केंद्र सरकार से सरकारी परीक्षा प्रणाली का व्यापक पुनर्गठन करने, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) जैसी संस्थाओं में सुधार और विकेंद्रीकरण करने, प्रश्नपत्र लीक गिरोहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने तथा प्रदर्शन के दौरान घायल हुए छात्रों को उपचार, पुनर्वास और मुआवजा उपलब्ध कराने की मांग की गई। साथ ही सिफारिश की गई कि इस प्रस्ताव की प्रतियां प्रधानमंत्री कार्यालय, गृह मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय को भेजी जाएं, ताकि सरकारी परीक्षाओं की विश्वसनीयता और विद्यार्थियों के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा संबंधी पंजाब विधानसभा का मत केंद्र सरकार तक पहुंच सके।

  • सावन की पहली सोमवारी पर पटना के शिवालयों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

    सावन की पहली सोमवारी पर पटना के शिवालयों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

    पटना
     सावन की पहली सोमवारी पर इंद्रदेव भी मानो महादेव का जलाभिषेक करने धरती पर उतर पड़े। सुबह से रुक-रुककर वर्षा हो रही है। देवों के देव महादेव की आराधना के लिए शिव का दरबार सज गया है।

    शहर के महावीर मंदिर, गर्दनीबाग ठाुकरबाड़ी, कदमकुआं चूड़ी मार्केट, खाजपुरा, पंचशिव मंदिर कंकड़बाग समेत अन्य शिव मंदिरों को रंगीन बल्बों के साथ विभिन्न प्रकार के फूलों से सजाया गया है।

    सुबह से ही शिवालयों में श्रद्धालुओं की कतार लगी है। हर-हर महादेव और बोलबम की गूंज हो रही है। मंदिरों के पास सुबह से चहल-पहल बनी हुई है।

    आज से शुरू हो रही 16 सोमवारी
    सावन की पहली सोमवारी का संयोग भी खास है। उत्तराभाद्रपद नक्षत्र व सुकर्मा योग का सुयोग बन पड़ा है। घरों में पार्थिव पूजन के साथ मठ-मंदिरों में भजन-कीर्तन के साथ भगवान शिव का भव्य शृंगार किए जाने की तैयारी है।

    आज से 16 सोमवारी व्रत की भी शुरुआत होगी।  वहीं, मिथिलांचल का लोक पर्व मधुश्रावणी भी आज से शुरू हो रहा है। इसका समापन 15 अगस्त शनिवार को समाप्त होगा

    राजधानी से सटे खुसरुपुर के बैकटपुर स्थित श्री गौरीशंकर बैकुंठनाथ मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा है। बिहटा स्थित बाबा बिहटेश्वरनाथ मंदिर समेत अन्य जगहों पर भी भक्त पहुंच रहे हैं।

    शिव की पूजा कल्याणकारी
    सावन मास में शिव की पूजा करने से चार गुना ज्यादा पुण्य मिलता है। भक्तों के लिए इनकी पूजा-आराधना सर्वदा कल्याणकारी ही होता है। सावन के पहली सोमवारी पर महादेव को दूध व गंगाजल से अभिषेक कर बेलपत्र चढ़ाने से श्रद्धालुओं को सभी प्रकार के मनोरथ पूर्ण होते हैं।

    महामृत्युंजय मंत्र, वेदोक्त मंत्र एवं गायत्री मंत्र के साथ रुद्राभिषेक करने के बाद उमा-महेश्वर की श्रृंगार पूजा से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। प्रत्येक सोमवारी को रुद्राभिषेक, शिवसहस्रनाम, शिव पंचाक्षर, शिव महिम्न, रुद्राष्टक, शिव कवच तथा शिव तांडव स्त्रोत्र का 108 बार पाठ करने से दरिद्रता का ह्रास और शिव की विशेष अनुकंपा प्राप्त होती है।

    शिव पर अर्पित करने वाले वस्तुओं का महत्व
        जल : मंत्रों के साथ शिवलिंग पर जल चढ़ाने से व्यक्ति का स्वभाव शांत और स्नेहमय होता है।
        दूध : शिवलिंग पर दूध अर्पित करने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है और बीमारियां दूर होती है।
        दही : जल और दूध के साथ शिवलिंग पर दही चढ़ाने से जीवन में आने वाली परेशानी दूर होती है।
        घी : शिवलिंग पर घी अर्पित करने से शक्ति में वृद्धि होती है।
        शहद : भोलेनाथ को शहद चढ़ाने से वाणी में मधुरता आती है।
        इत्र : शिवलिंग पर इत्र लगाने से विचार पवित्र और शुद्ध होता है।
        केसर : शिवलिंग पर केसर अर्पित करने से सौम्यता में वृद्धि होती है।
        चंदन : चंदन चढ़ाने से व्यक्तित्व आकर्षक होता है। समाज में मान सम्मान और यश मिलता है।

    भगवान शिव को करें अर्पित
        दीर्घायु: अकावन की फूल अर्पित करें।
        सुख प्राप्ति: हरसिंगार का पुष्प अर्पित करें।
        शत्रु नाश: घी व सरसो तेल से अभिषेक करें।
        सुयोग्य पत्नी: बेला का फूल अर्पित करें।
        मोक्ष प्राप्ति: आक, अलसी या समीपत्र अर्पित करें।
        लक्ष्मी प्राप्ति: दूध व ईख रस से अभिषेक करें।