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  • राजस्थान निकाय चुनाव 2026: 10,245 वार्डों की आरक्षण लॉटरी पूरी, बदला दावेदारों का गणित

    राजस्थान निकाय चुनाव 2026: 10,245 वार्डों की आरक्षण लॉटरी पूरी, बदला दावेदारों का गणित

    जयपुर
    राजस्थान में आगामी शहरी स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। आज सोमवार 17 अगस्त 2026 को राज्य की 309 निकायों के कुल 10,245 वार्डों के आरक्षण के लिए लॉटरी प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई है। इस लॉटरी के जारी होते ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों में टिकट के दावेदारों का गणित पूरी तरह बदलता हुआ दिख रहा है। जिन वार्डों में आरक्षण की स्थिति में बदलाव हुआ है, वहां पुराने निवर्तमान पार्षदों को नए वार्ड तलाशने पड़ रहे हैं, जबकि लंबे समय से तैयारी कर रहे नए दावेदारों के लिए चुनाव मैदान में उतरने के नए अवसर खुल गए हैं। राज्य में पंचायत चुनाव से पहले निकाय चुनाव करवाए जाने की तैयारियों के बीच जारी हुई इस लॉटरी ने पूरे राजस्थान में आम जनता और स्थानीय नेताओं के बीच जबरदस्त चर्चा छेड़ दी है।

    जयपुर में कलेक्टर और कमिश्नर की मौजूदगी में निकली लॉटरी
    राज्य की सबसे बड़ी नगर निगम, जयपुर नगर निगम के कुल 150 वार्डों के लिए आरक्षण की लॉटरी प्रक्रिया आज सुबह से ही गहन प्रशासनिक देखरेख में शुरू हुई। जिला कलेक्टर संदेश कुमार नायक और नगर निगम आयुक्त ओम कसेरा की प्रत्यक्ष मौजूदगी में इस लॉटरी को पूरी तरह से पारदर्शी तरीके से निकाला गया।

    लॉटरी प्रक्रिया की शुरुआत सबसे पहले अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के वार्डों के साथ हुई, जिसके बाद अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), और सामान्य (General) वर्ग के वार्डों का निर्धारण किया गया। इस बार जयपुर में कुल 150 वार्डों में से महिलाओं के लिए 50 वार्ड आरक्षित किए गए हैं, जिससे महिला दावेदारों में काफी उत्साह देखा जा रहा है।

    कहीं खुशी तो कहीं झटका,बदला राजनीतिक समीकरण

    जैसे ही लॉटरी के परिणाम सामने आए, वैसे ही कई वार्डों में निवर्तमान पार्षदों के होश उड़ गए। जिन वार्डों में पुराने पार्षद पिछले 5 साल से मेहनत कर रहे थे, उनमें से कई वार्ड अब किसी दूसरी श्रेणी के लिए आरक्षित हो गए हैं। इस वजह से कई दावेदारों को अब पड़ोसी वार्डों में नए समीकरण तलाशने पड़ रहे हैं।

    दूसरी तरफ, जिन वार्डों में आरक्षण उनके अनुकूल हो गया है, वहां नए चेहरों और युवा दावेदारों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय पार्टी दफ्तरों तक टिकट पाने के लिए जोड़-तोड़ शुरू हो चुकी है।

    स्थानीय वार्डों पर क्या पड़ेगा असर?
    वार्ड आरक्षण की लॉटरी निकलने के बाद अब आम जनता में भी अपने स्थानीय मुद्दों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। वार्ड का आरक्षण बदलने से:

    स्थानीय विकास के मुद्दे: नए दावेदार अब अपने-अपने वार्डों में सड़क, पानी, और सफाई जैसे मुख्य मुद्दों को लेकर जनता के बीच पहुंचने लगे हैं।

    महिलाओं की भागीदारी: महिलाओं के लिए 50 वार्ड आरक्षित होने से इस बार स्थानीय निकायों में महिला नेताओं की भागीदारी बढ़ेगी।

    पंचायत से पहले शहरी निकायों पर ध्यान: चुनाव आयोग की तैयारियों के मुताबिक, पहले शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव करवाए जाएंगे, जिससे शहरी क्षेत्रों में राजनीतिक गतिविधियां और अधिक बढ़ गई हैं।

     

  • अलकतरा चालान गड़बड़ी मामले में हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, सेवानिवृत्त अभियंता पर कार्रवाई रद

    अलकतरा चालान गड़बड़ी मामले में हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, सेवानिवृत्त अभियंता पर कार्रवाई रद

     रांची
     हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में अलकतरा चालान गड़बड़ी के मामले में सेवानिवृत्त सहायक अभियंता सुरेंद्र प्रसाद की याचिका पर सोमवार को सुनवाई हुई। अदालत ने विभागीय जांच में दी गई वेतन कटौती और सरकारी राशि की वसूली के आदेश को रद कर दिया।

    अदालत ने कहा कि विभागीय जांच में केवल सीबीआइ की चार्जशीट या जांच के दौरान जुटाए गए दस्तावेजों को सबूत नहीं माना जा सकता। दस्तावेजों की सामग्री को सक्षम गवाह के माध्यम से साबित करना जरूरी है, ताकि संबंधित कर्मचारी को प्रति परीक्षण का प्रभावी अवसर मिल सके। अदालत ने सुरेंद्र प्रसाद को उन सभी परिणामी लाभों का हकदार माना, जो उक्त दंड आदेश के कारण उन्हें नहीं मिल सके था।

    अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे रिकार्ड की जांच कर परिणामी लाभों की गणना करें और आवश्यक आदेश जारी करते हुए इस आदेश की प्रति प्राप्त होने की तिथि से 12 सप्ताह के भीतर उन्हें लाभ प्रदान करें।

    अदालत ने कहा कि विभाग यह साबित नहीं कर सका कि कितनी मात्रा में अलकतरा का कथित कम उपयोग हुआ, उसका मूल्य कितना था। ठेकेदार से कितनी राशि वसूल की जानी थी और सुरेंद्र प्रसाद की व्यक्तिगत जिम्मेदारी के कारण सरकारी खजाने को कितना नुकसान हुआ।

    अदालत ने कहा कि बिना प्रमाण और स्पष्ट गणना के वेतन या पेंशन संबंधी लाभों से वसूली नहीं की जा सकती। विभाग ने वर्ष 2015 में सुरेंद्र प्रसाद के वेतन को उनके पद के न्यूनतम वेतनमान तक घटाने और कथित सरकारी नुकसान की आनुपातिक राशि वसूलने का आदेश दिया था।

    सुरेंद्र प्रसाद ग्रामीण अभियंत्रण संगठन (वर्तमान में ग्रामीण कार्य विभाग) में सहायक अभियंता के पद पर कार्यरत थे और वर्ष 2019 में सेवानिवृत्त हुए। मामला वर्ष 2004-05 में बानो से पबुरा-निमतुर-पनगुर पथ के निर्माण एवं मरम्मत कार्य से जुड़ा था।

    विभाग ने आरोप लगाया था कि ठेकेदार द्वारा अलकतरा की खरीद से संबंधित कथित फर्जी चालानों पर सहायक अभियंता ने काउंटर साइन किया था, जिससे ठेकेदार को अनुचित भुगतान का लाभ मिला और सरकारी खजाने को नुकसान हुआ।

  • ‘टिकट चाहिए तो सिर्फ डेरा बाबा नानक से’, सुखजिंदर रंधावा ने कांग्रेस हाईकमान को दिया साफ संदेश

    ‘टिकट चाहिए तो सिर्फ डेरा बाबा नानक से’, सुखजिंदर रंधावा ने कांग्रेस हाईकमान को दिया साफ संदेश

    चंडीगढ़.

    कांग्रेस नेता और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि जब उन्हें पार्टी का टिकट मिला था, उस समय उनके पिता पार्टी के अध्यक्ष थे और उन्होंने उसी दिन सक्रिय राजनीति से अलग होने का फैसला कर लिया था। रंधावा ने कहा कि उनके परिवार ने हमेशा सिद्धांतों की राजनीति को प्राथमिकता दी है।

    उन्होंने कहा कि यदि टिकट लेना होगा तो केवल एक टिकट लिया जाएगा और वह डेरा बाबा नानक विधानसभा क्षेत्र से ही होगा। इसके अलावा किसी अन्य सीट से टिकट लेने का सवाल ही नहीं है। रंधावा ने कहा कि पार्टी में टिकट योग्यता और जीतने की क्षमता के आधार पर दिया जाना चाहिए, न कि किसी की चापलूसी या खुशामद के आधार पर।

    उन्होंने स्पष्ट कहा कि टिकट उन लोगों को मिलना चाहिए जो चुनाव जीतने की क्षमता रखते हैं और संगठन के लिए जमीन पर काम करते हैं। केवल नेताओं की खुशामद करने वालों को टिकट देना पार्टी के हित में नहीं है। इंटरनेट मीडिया पर रंधावा के इस बयान को आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस में टिकट वितरण की संभावित रणनीति और दावेदारों के लिए स्पष्ट संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

  • त्योहारों से पहले राजस्थान सरकार सख्त, मिलावटखोरों पर होगी त्वरित कार्रवाई

    त्योहारों से पहले राजस्थान सरकार सख्त, मिलावटखोरों पर होगी त्वरित कार्रवाई

    जयपुर
    प्रमुख शासन सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग गायत्री राठौड़ ने कहा कि त्यौहार के दौरान आमजन को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के लिए मिलावटखोरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए । राठौड़ ने खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण आयुक्तालय की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने के लिए जोखिम आधारित जांच, प्रभावी सैंपलिंग और समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    प्रमुख शासन सचिव ने कहा कि त्यौहार के दौरान जिन खाद्य पदार्थों में मिलावट की आशंका अधिक रहती है, उन पर विशेष निगरानी रखी जाए। खाद्य सुरक्षा अधिकारी मैदानी स्तर पर सक्रिय रहें और मिलावटी अथवा असुरक्षित खाद्य पदार्थ मिलने पर नियमानुसार तुरंत कार्रवाई करें।

    उन्होंने निर्देश दिए कि सैंपल लेने के बाद उनकी जांच भी तय समय में पूरी हो, ताकि मिलावट पाए जाने की स्थिति में संबंधित व्यक्ति या प्रतिष्ठान के खिलाफ आगे की कार्रवाई में अनावश्यक देरी नहीं हो। विभाग की पूरी कार्रवाई का उद्देश्य आमजन की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना होना चाहिए।

    बैठक में बाजार में बिना डॉक्टर की पर्ची के मिलने वाली ओटीसी(बिना पर्ची वाली दवाएँ) दवाओं की सैंपलिंग को भी प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। ऐसी दवाओं की नियमित जांच कर उनकी गुणवत्ता सुनिश्चित की जाएगी।

    उन्होंने कहा कि यदि कोई दवा निर्धारित गुणवत्ता के अनुरूप नहीं पाई जाती है तो उसकी जांच और कानूनी कार्रवाई में देरी नहीं की जाएगी। संबंधित पक्ष की जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

    प्रमुख शासन सचिव ने निर्देश दिए कि खाद्य एवं औषधि सुरक्षा से जुड़े मामलों में सैंपल लेने, जांच करने, जिम्मेदारी तय करने, कानूनी कार्रवाई और न्यायालय में मामलों की पैरवी तक पूरी प्रक्रिया की नियमित मॉनिटरिंग की जाए। लंबित मामलों में जरूरी दस्तावेज और साक्ष्य समय पर उपलब्ध करवाए जाएं, ताकि मामलों का शीघ्र निस्तारण हो सके।

    राठौड़ ने कहा कि खाद्य एवं औषधि सुरक्षा को लेकर सोशल मीडिया के माध्यम से आमजन को जागरूक करने पर भी जोर दिया गया। लोगों को मिलावटी और असुरक्षित खाद्य पदार्थों की पहचान, खाद्य सामग्री के सही भंडारण एवं उपयोग तथा दवाओं के सुरक्षित इस्तेमाल के बारे में सरल भाषा में जानकारी दी जाए।

    उन्होंने कहा कि लोगों को दवा खरीदते समय लेबल पढ़ने, निर्धारित मात्रा एवं उपयोग अवधि का ध्यान रखने तथा एक्सपायर्ड या संदिग्ध दवाओं का इस्तेमाल नहीं करने के लिए भी जागरूक किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर योग्य चिकित्सक या फार्मासिस्ट से सलाह लेने के लिए प्रेरित किया जाए।

     

  • बिहार शिक्षक भर्ती में बड़ा बदलाव, टीआरई-4 में शामिल होंगे मैथिली शिक्षकों के पद

    बिहार शिक्षक भर्ती में बड़ा बदलाव, टीआरई-4 में शामिल होंगे मैथिली शिक्षकों के पद

     दरभंगा
     Maithili Teacher Vacancy Bihar : मैथिली भाषा में शिक्षक बनने का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर है। शिक्षक भर्ती परीक्षा (टीआरई)-4 में मैथिली शिक्षकों के रिक्त पद शामिल किए जाएंगे।

    शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने आवश्यक रिक्तियों का आकलन और रोस्टर कार्य पूरा कर संशोधित अधियाचना बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) को भेजने का निर्देश दिया है

    मैथिली की रिक्तियों का होगा आकलन
    सांसद सह लोकसभा में पार्टी सचेतक डा. गोपाल जी ठाकुर ने बताया कि पांच अगस्त को उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी से मुलाकात कर टीआरई में मैथिली भाषा के शिक्षकों के पद निर्धारित करने का आग्रह किया था। इसके बाद शिक्षा मंत्री ने सरकार की ओर से उठाए गए कदम की जानकारी दी।

    बीपीएससी को भेजी जाएगी संशोधित अधियाचना
    शिक्षा मंत्री के निर्देश के अनुसार मैथिली समेत अन्य भाषाओं में आवश्यक रिक्तियों का आकलन किया जाएगा। रोस्टर का काम पूरा कर संबंधित पदों की अधियाचना जल्द बीपीएससी को भेजी जाएगी। इन रिक्तियों को आगामी शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया यानी टीआरई-4 में शामिल कर विज्ञापन प्रकाशित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

    16 अगस्त की बैठक में हुई पुष्टि
    मैथिली शिक्षकों की रिक्तियों को टीआरई-4 में शामिल करने के निर्णय की पुष्टि 16 अगस्त को शिक्षा विभाग की बैठक में भी कर दी गई। इससे मैथिली विषय से शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों में उम्मीद जगी है।

    32,388 पदों की अधियाचना पहले ही
    टीआरई-4 के लिए 32,388 शिक्षक पदों की अधियाचना पहले ही बीपीएससी को भेजी जा चुकी है। अब छूटे हुए अन्य विषयों की रिक्तियों को भी इसमें जोड़ा जाएगा। इसके बाद संशोधित अधियाचना आयोग को भेजी जाएगी।

    रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद
    सांसद डा. ठाकुर ने सरकार के इस कदम की सराहना की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री की पहल से मैथिली भाषा के माध्यम से हर कक्षा में शिक्षकों की बहाली का रास्ता साफ हुआ है। इससे मैथिली भाषा के अभ्यर्थियों के लिए रोजगार के नए अवसर उपलब्ध होने की उम्मीद है।

     

  • JPSC-JSSC छात्रों की सरकार से वार्ता पर फिर पेच, गाड़ी में बैठा प्रतिनिधिमंडल उतारा गया

    JPSC-JSSC छात्रों की सरकार से वार्ता पर फिर पेच, गाड़ी में बैठा प्रतिनिधिमंडल उतारा गया

    रांची
    जेपीएससी वह जेएसएससी सुधार की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों के प्रतिनिधिमंडल को सरकार ने सोमवार को दोपहर दो बजे वार्ता के लिए राजकीय अतिथिशाला बुलाया था। छात्र प्रतिनिधिमंडल को अपनी मांगों और परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर सरकार के साथ चर्चा करनी थी।

    निर्धारित समय के आसपास जिला प्रशासन की ओर से वाहन भेजा गया। 10 सदस्यीय छात्र प्रतिनिधिमंडल वाहन में सवार भी हो गया, लेकिन गाड़ी के रवाना होते ही उसे रुकवा दिया गया। छात्रों को वाहन से उतारकर कुछ अपरिहार्य कारणों का हवाला देते हुए फिलहाल इंतजार करने को कहा गया।

    छात्र प्रतिनिधिमंडल में रविंद्र पासवान, पीयूष कुमार सिंह, रविंद्र कुमार रवि, कार्तिक सोरेन, राजेश प्रसाद, उमेश प्रसाद, शशांक कुमार, अंकित कुमार, आनंद कुमार और शालू कुमारी शामिल हैं।

    इधर, वार्ता शुरू नहीं होने के कारण छात्र प्रतिनिधिमंडल के सदस्य फिलहाल जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में इंतजार कर रहे हैं। जेपीएससी जेएसएससी रिफॉर्म मंच की ओर से छात्र नेता राधे कुमार ने बताया गया कि सरकार की ओर से वार्ता शुरू होने या आगे की प्रक्रिया के संबंध में आधिकारिक सूचना मिलते ही मीडिया को जानकारी दी जाएगी। छात्रों का कहना है कि वे सरकार के साथ अपनी मांगों पर स्पष्ट और सार्थक वार्ता के लिए तैयार हैं।

    तीन दौर की बातचीत के बाद भी नहीं निकला रास्ता
    छात्रों और सरकार के बीच इससे पहले तीन दौर की बातचीत हो चुकी है। हालांकि, परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच, परीक्षा रद्द करने और भर्ती प्रक्रिया में सुधार जैसी कई अहम मांगों पर अब तक सहमति नहीं बन सकी है।

    अब चौथे दौर की वार्ता ऐसे समय हो रही है जब आंदोलनकारी छात्रों ने 18 अगस्त तक अपनी मांगों पर सरकार से स्पष्ट निर्णय लेने की उम्मीद जताई है। इसके बाद 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास घेराव का कार्यक्रम घोषित किया गया है।
    सरकार की ओर से चार मंत्री, छात्र भी अपनी बात पर अड़े

    आज की बैठक में सरकार की ओर से मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, दीपिका पांडेय सिंह, संजय प्रसाद यादव और चमरा लिंडा छात्रों से बातचीत करेंगे।

    वहीं, छात्रों की ओर से 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल बैठक में अपनी मांगें रखेगा। प्रतिनिधिमंडल में रविंद्र पासवान, पीयूष कुमार सिंह, रविंद्र कुमार रवि, कार्तिक सोरेन, राजेश प्रसाद, उमेश प्रसाद, शशांक कुमार, अंकित कुमार, आनंद कुमार और शालू कुमारी शामिल हैं।

    बैठक में किन मुद्दों पर फंस सकता है पेंच?
    वार्ता में JPSC और JSSC की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच, संबंधित परीक्षाओं को रद्द करने, CBI जांच और भर्ती प्रक्रिया में सुधार जैसे मुद्दे प्रमुख रह सकते हैं।

    छात्र लगातार भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता और सिस्टम में सुधार की मांग कर रहे हैं। वहीं सरकार की ओर से कुछ मामलों में CID जांच और न्यायिक निगरानी समेत उठाए गए कदमों की जानकारी दी गई है। यही वे मुद्दे हैं जिन पर दोनों पक्षों के बीच अब तक सबसे ज्यादा गतिरोध देखने को मिला है।

    चौथे दौर की बातचीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि छात्र पहले ही आगे के आंदोलन का ऐलान कर चुके हैं। यदि आज की बैठक में कोई ठोस सहमति बनती है तो आंदोलन को लेकर नया रास्ता खुल सकता है। लेकिन अगर बातचीत फिर बेनतीजा रहती है तो 20 अगस्त का मुख्यमंत्री आवास घेराव आंदोलन का अगला बड़ा पड़ाव बन सकता है।

    अब सबसे बड़ा सवाल यही है- तीन दौर की बातचीत के बाद क्या चौथी बैठक में सरकार और छात्रों के बीच बात बनेगी, या 20 अगस्त का आंदोलन तय कार्यक्रम के मुताबिक आगे बढ़ेगा?

  • जीवन कुंडू हत्याकांड: सरकार से वार्ता के बाद आंदोलन खत्म करने पर बनी सहमति, आज होगा अंतिम संस्कार

    जीवन कुंडू हत्याकांड: सरकार से वार्ता के बाद आंदोलन खत्म करने पर बनी सहमति, आज होगा अंतिम संस्कार

    हिसार
     जीवन कुंडू हत्याकांड को लेकर चल रहा आंदोलन सोमवार को सरकार के साथ वार्ता के बाद समाप्ति की ओर बढ़ा। न्याय संघर्ष समिति की छह सदस्यीय कमेटी ने चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात की।

    बैठक में मुख्य आरोपित रमेश अत्री की गिरफ्तारी का आश्वासन देने के साथ 15 अगस्त को हांसी में दर्ज मुकदमे रद करने, पकड़े गए वाहनों को वापस लौटाने और पीड़ित परिवार की हरसंभव मदद करने पर सहमति बनी।

    इसके बाद परिवार ने 14 दिन से रखे गए जीवन के शव का मंगलवार को किनाला में अंतिम संस्कार करने पर सहमति जताई है। इससे पहले महापंचायत ने वार्ता बेनतीजा रहने पर 18 अगस्त से हिसार-दिल्ली, हिसार-सिरसा और हिसार-चंडीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग बंद करने की चेतावनी दी थी।

    पूर्व प्रदेश महामंत्री ने कराई मध्यस्थता
    न्याय संघर्ष समिति की कमेटी के साथ भाजपा के पूर्व प्रदेश महामंत्री सुरेंद्र पूनिया भी चंडीगढ़ पहुंचे। उन्होंने सरकार और समिति के बीच वार्ता में मध्यस्थता की। समिति सदस्य पूर्व सरपंच रवि कुंडू ने बताया कि मुख्यमंत्री ने परिवार की हरसंभव मदद का भरोसा दिया और मुख्य आरोपित की गिरफ्तारी का आश्वासन दिया।

    15 अगस्त को हांसी में हुआ था टकराव
    मुख्यमंत्री के हांसी स्थित नेहरू कॉलेज में स्वतंत्रता दिवस समारोह से पहले सिसाय पुल नाके पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव हुआ था। सुबह करीब 6:40 बजे 150 से 200 लोग ट्रैक्टर-ट्रालियों के साथ समारोह स्थल की ओर बढ़े थे।

    पुलिस के अनुसार बैरिकेड तोड़ने, ट्रैक्टर चढ़ाने और पथराव के प्रयास के बाद ड्यूटी मजिस्ट्रेट के आदेश पर लाठीचार्ज किया गया। झड़प में हांसी के एसपी विनोद कुमार समेत कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे। मामले में कई धाराओं में केस दर्ज कर गिरफ्तारियां की गई थीं।

  • भेड़िये से टकराकर बेपटरी हुई सावन स्पेशल ट्रेन, दो दिन बाद भी रेल परिचालन प्रभावित

    भेड़िये से टकराकर बेपटरी हुई सावन स्पेशल ट्रेन, दो दिन बाद भी रेल परिचालन प्रभावित

     धनबाद
     इतवारी से धनबाद होकर मधुपुर जाने वाली सावन स्पेशल ट्रेन के ट्रैक पर भेड़िया फंसने से बेपटरी होने की घटना के दो दिन भी रेल परिचालन पर इसका असर बरकरार है।

    मधुपुर जाने वाली सावन स्पेशल जहां घंटों लेट रही। वहीं मधुपुर से इतवारी जाने वाली स्पेशल ट्रेन आज भी प्रभावित है। घटना के कारण मालदा टाउन-सूरत एक्सप्रेस भी प्रभावित हो गई है।

    शनिवार की देर रात इतवारी से मधुपुर जा रही सावन स्पेशल ट्रेन ट्रैक के प्वाइंट में भेड़िये का सिर फंसने से पटरी से उतर गई। यात्री ट्रेन का एक कोच बेपटरी हो गया।

    ट्रेन का बदला रूट
    इतवारी-मधपुर सावन स्पेशल ट्रेन मूरी के पास पटरी से उतरने के कारण मूरी से चंद्रपुरा के बीच परिवर्तित मार्ग से चलाई गई। इस वजह से आठ घंटे लेट से मधुपुर पहुंची।

    देर से पहुंचने से वापसी में मधुपुर से सुबह 9:00 बजे के बदले 11 घंटे 37 मिनट लेट से रात रात 8:37 पर खुली। विलंब से चलने से सुबह के बदले देर शाम इतवारी पहुंचने की संभावना जताई गई।

    दूसरी ओर, शनिवार को खुली मालदा टाउन-सूरत एक्सप्रेस पहले दुर्गापुर-अंडाल के बीच मार्ग परिवर्तन के कारण लेट हुई। शाम के बदले देर रात धनबाद पहुंची।

    दोपहर 2 बजे पहुंचने की संभावना
    धनबाद-रांची रेल मार्ग पर इतवारी-मधुपुर सावन स्पेशल के पटरी से उतरने के कारण धनबाद- चंद्रपुरा के बीच रोकी गई। 11 घंटे से अधिक विलंबित होने के कारण सोमवार तड़के चार बजे के बजाय दोपहर दो बजे पहुंचने की संभावना जताई गई।

    इस वजह से सूरत से मालदा टाउन के बीच चलने वाली ट्रेन सोमवार को दोपहर 2:20 के बदले आठ घंटे विलंब से रात 10:20 पर रवाना होगी। देर से खुलने से मंगलवार रात के बदले बुधवार की सुबह धनबाद आगमन होगा तथा मालदा टाउन सुबह के बदले दोपहर या शाम तक पहुंचेगी।

  • बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ के 11 साल का हिसाब संसद में पेश, लिंगानुपात और लड़कियों की पढ़ाई में सुधार

    बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ के 11 साल का हिसाब संसद में पेश, लिंगानुपात और लड़कियों की पढ़ाई में सुधार

    चंडीगढ़
     हरियाणा के पानीपत से 22 जनवरी 2015 को शुरू हुई ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ मुहिम के 11 साल का हिसाब अब संसद में सामने आया है। 46 सांसदों के सवालों के जवाब में केंद्र सरकार ने बताया कि अभियान के दौरान देश में जन्म के समय लिंगानुपात 918 से बढ़कर 929 हो गया है।

    वहीं, माध्यमिक स्तर पर लड़कियों का सकल नामांकन अनुपात 2014-15 के 75.51 फीसदी के मुकाबले बढ़कर 2024-25 में 83.4 फीसदी पहुंच गया है।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हरियाणा के पानीपत से बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान की शुरुआत की थी। इस समय केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल हरियाणा के मुख्यमंत्री थे। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अनुसार, अभियान की शुरुआत उस समय हुई थी जब बेटियों के जन्म को लेकर सामाजिक असमानता बड़ी चुनौती थी।

    जून 2026 तक अभियान पर 1,075.37 करोड़ खर्च
    प्रधानमंत्री मोदी ने पानीपत से इसकी शुरुआत करते हुए बेटियों के जन्म, संरक्षण और शिक्षा को राष्ट्रीय प्राथमिकता से जोड़ा था। बाद में अभियान को स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला एवं बाल विकास जैसे क्षेत्रों से जोड़ते हुए देश के सभी जिलों तक विस्तार दिया गया।

    फिलहाल यह ‘मिशन शक्ति’ के तहत संचालित हो रहा है। सरकार ने संसद में बताया कि जून 2026 तक अभियान पर 1,075.37 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इस अवधि में देशभर में 78,305 कार्यक्रम आयोजित हुए, जिनमें 3.37 करोड़ से अधिक लोगों की भागीदारी रही। इनका उद्देश्य बेटियों के जन्म, शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य और सामाजिक स्वीकार्यता को लेकर जागरूकता बढ़ाना रहा।

    सरकार ने हालांकि इन आंकड़ों को अभियान की अकेली उपलब्धि के तौर पर नहीं बताया है। लिंगानुपात और शिक्षा में बदलाव के पीछे स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला सशक्तीकरण से जुड़े अन्य कार्यक्रमों की भी भूमिका रही है।

    नीति आयोग ने 2020 और 2025 में किया मूल्यांकन
    सांसदों ने अभियान की उपलब्धियों के साथ उसके प्रभाव और मूल्यांकन की जानकारी भी मांगी थी। केंद्र के अनुसार, नीति आयोग ने 2020 और 2025 में स्वतंत्र मूल्यांकन कराया। दोनों आकलनों में अभियान को प्रभावी बताया गया और इसके क्रियान्वयन को और बेहतर बनाने के लिए सुझाव दिए गए।

    2015 में चुनिंदा जिलों से शुरू हुई मुहिम अब देशव्यापी अभियान बन चुकी है। संसद में पेश आंकड़े बताते हैं कि 11 वर्षों में बेटियों के जन्म और माध्यमिक शिक्षा में भागीदारी, दोनों प्रमुख संकेतकों में सुधार दर्ज हुआ है।

  • राजस्थान विधानसभा सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक, स्पीकर देवनानी ने सभी दलों को बुलाया

    राजस्थान विधानसभा सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक, स्पीकर देवनानी ने सभी दलों को बुलाया

     जयपुर
     राजस्थान विधान सभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने सोलहवीं राजस्‍थान विधान सभा के षष्‍ठम सत्र के लिए सर्वदलीय बैठक मंगलवार 18 अगस्‍त को प्रात: 11:00 बजे विधानसभा में बुलाई है। सोलहवीं विधान सभा का षष्‍ठम सत्र गुरूवार 20 अगस्‍त से आरम्‍भ हो रहा है। स्‍पीकर देवनानी की अध्‍यक्षता में यह सातवीं सर्वदलीय बैठक होगी। देवनानी ने कहा है कि सदन को शांतिपूर्ण चलाने में सर्वदलीय बैठक अहम कदम है।

    सभी दलों को किया गया है आमंत्रित
    स्‍पीकर देवनानी ने बताया है कि बैठक में भाग लेने के लिए मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल, सरकारी मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग, मुख्य सचेतक प्रतिपक्ष रफीक ख़ान, विधायक डॉ. सुभाष गर्ग, मनोज कुमार, थावर चन्द को आमन्त्रित किया गया है।

    सदन की गरिमा बनाये रखना सामूहि‍क दायित्‍व
    देवनानी ने कहा कि सदन जनहित के मुद्दों पर चर्चा करने का पवित्र स्‍थल है। इस स्‍थल की गरिमा को बनाए रखना सभी दलों के विधायकों की सामूहिक जिम्‍मेदारी होती है। विधानसभा अध्यक्ष देवनानी ने कहा कि सर्वदलीय बैठक लोकतांत्रिक परंपराओं को सुदृढ़ करने का सशक्त माध्यम है। इससे सदन की कार्यवाही में सभी दलों की सहभागिता सुनिश्चित होती है और जनहित के मुद्दों पर सार्थक चर्चा का मार्ग प्रशस्त होता है। देवनानी ने कहा कि सर्वदलीय बैठक, विधान सभा सत्र शांतिपूर्ण चलने पर सभी दलों की सहमति का सार्थक एवं महत्‍वपूर्ण कदम है।

    सर्वदलीय बैठकों से मिलता है आपसी संवाद, विश्‍वास और सहयोग की भावना को बल
     देवनानी ने कहा कि सर्वदलीय बैठकों की परंपरा लोकतांत्रिक संवाद और संसदीय समन्वय को सशक्त बनाने का प्रभावी माध्यम रही है। सर्वदलीय बैठक से सदन के प्रभावी संचालन, जनमहत्व के विषयों पर सार्थक चर्चा तथा संसदीय परंपराओं एवं सदन की गरिमा के अनुरूप कार्यवाही संचालित करने में सकारात्मक वातावरण बनता है। उन्होंने कहा कि सर्वदलीय बैठकों से आपसी संवाद, विश्वास और सहयोग की भावना को बल मिलता है, जिससे विधानसभा जनअपेक्षाओं के अनुरूप अधिक प्रभावी, उत्तरदायी और परिणामोन्मुख भूमिका निभाने में सक्षम होती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आगामी सर्वदलीय बैठक भी षष्‍ठम सत्र को अधिक सुव्यवस्थित, गरिमापूर्ण और जनहित के प्रति समर्पित बनाने में महत्वपूर्ण सिद्ध होगी।