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  • खनौरी बॉर्डर पर नहीं लगेगा पक्का मोर्चा, केंद्र से बातचीत के लिए दिल्ली कूच पर अड़े किसान

    खनौरी बॉर्डर पर नहीं लगेगा पक्का मोर्चा, केंद्र से बातचीत के लिए दिल्ली कूच पर अड़े किसान

    संगरूर.

    खनौरी बॉर्डर पर दूसरे दिन भी किसानों का मोर्चा जारी है। सोमवार को संगरूर-पटियाला के सिविल व पुलिस प्रशासन द्वारा जगजीत सिंह डल्लेवाल व अन्य किसान नेताओं से बैठक की। बैठक के उपरांत जगजीत सिंह डल्लेवाल ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि उन्होंने प्रशासन को स्पष्ट तौर पर कह दिया है कि खनौरी बार्डर पर पक्का मोर्चा लगाने का उनका कोई विचार नहीं है।

    किसान पैदल ही दिल्ली जंतर-मंत्र पर जाना चाहते हैं। जत्थे में 51 किसान पदयात्री व उनके साथ कुछ सहयोगी किसान ही आगे जाना चाहते हैं, लेकिन हरियाणा प्रशासन ने खनौरी बार्डर सील करके उन्हें यहां रोक लिया है, जिसके चलते वह यहां बैठे हैं। अगर अब रास्ता खुल जाए व हरियाणा प्रशासन उन्हें पैदल आगे जाने की अनुमति दे देता है तो अभी जत्था यहां से रवाना हो जाएगा।

    पंजाब सरकार की तरफ से पहुंचे प्रशासनिक अधिकारी 
    उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार की तरफ से प्रशासनिक अधिकारी उनके पास मुलाकात के लिए पहुंचे व उन्होंने किसान संगठनों से उनकी मांग संबंधी पर बातचीत की, जिस पर डल्लेवाल ने स्पष्ट किया कि किसान आंदोलन 2.0 से संबंधित सभी फसलों पर एमएसपी तय करने, स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करने, कर्जामाफी सहित नौ पुरानी मांगें व अब अमेरिका-भारत ट्रेड डील रद करवाने की मांग प्रमुख है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन व सरकार मिलकर हरियाणा प्रशासन से बातचीत करके रास्ता खुलवाएं। केंद्रीय कृषि मंत्री से बैठक तय करवाएं, ताकि किसान 2.0 दौरान जहां से उक्त मांगों संबंधी विचारचर्चा बंद हुई थी, वहीं से दोबारा आरंभ की जा सके।

    किसान; आज हो सकती हैं कई बैठकें
    उन्होंने कहा कि अभी बैठकों का दौर जारी है व बैठकों में सभी साथियों की सहमति से अगली रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि हरियाणा प्रशासन के कहने पर 51 किसानों के जत्थों में सदस्यों की संख्या कम करके 41 करने को भी तैयार हैं, इसलिए हरियाणा प्रशासन उन्हें आगे जाने की अनुमति जल्द प्रदान करे।

  • बिहार बनेगा देश का तीसरा R&D बजट वाला राज्य, ज्ञान-तकनीक आधारित विकास पर जोर

    बिहार बनेगा देश का तीसरा R&D बजट वाला राज्य, ज्ञान-तकनीक आधारित विकास पर जोर

     पटना
    बिहार सरकार के वित्त विभाग एवं बिहार इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी (बीआइपीएफपी) की ओर से गर्दनीबाग स्थित बापू टावर में बिहार में अनुसंधान एवं विकास बजट विषय पर चर्चा हुई।

    कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य राज्य को पारंपरिक व्यय-प्रेरित विकास मॉडल से आगे ले जाकर ज्ञान, तकनीक और नवाचार आधारित मॉडल पर स्थापित करना था। बताया गया कि केरल ने वित्तीय वर्ष 2023-24 और पंजाब ने 2025-26 से अपने अनुसंधान और विकास बजट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की है।

    बिहार के परिप्रेक्ष्य में इन राज्यों की पद्धतियों को अपनाते हुए एक स्पष्ट वर्गीकरण ढांचा तैयार किया जा रहा है, जिसके तहत मौजूदा विभागीय योजनाओं के भीतर छिपे हुए अनुसंधान और विकास घटकों की पहचान की जाएगी और प्रो-राटा आधार पर उनका मूल्यांकन किया जाएगा।

    बिहार देश का तीसरा ऐसा राज्य बनने जा रहा है, जो अनुसंधान एवं विकास के लिए अलग से बजट तैयार करेगा। कार्यशाला में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि अनुसंधान और विकास केवल विज्ञान, प्रौद्योगिकी या आईटी विभागों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका दायरा कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, आपदा प्रबंधन, उद्योग और सामाजिक कल्याण जैसे सभी प्रमुख क्षेत्रों में विस्तृत है।

    सार्वजनिक वित्त का एक अनिवार्य हिस्सा
    वित्त विभाग की सचिव (व्यय) सह निदेशक बीआइपीएफपी रचना पाटिल ने राज्य के वित्तीय ढांचे में शोध और नवाचार को संस्थागत रूप देने की प्रतिबद्धता दोहराई। वक्ताओं ने कहा कि भविष्य के विकसित बिहार के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अनुसंधान और विकास को जन-नीति और सार्वजनिक वित्त का एक अनिवार्य हिस्सा बनाना होगा।

    पारंपरिक रूप से जहां बजट खर्च को केवल लागत माना जाता है, वहीं अनुसंधान और विकास बजट को भविष्य की उत्पादकता बढ़ाने के लिए एक निवेश के रूप में देखा जाना चाहिए। सत्र में अपर सचिव संजीव मित्तल, बीआइपीएफपी के फैकल्टी मेंबर्स डॉ. बरना गांगुली, डॉ. बख्शी अमित कुमार सिन्हा आदि उपस्थित रहे।

  • पटना में गंगा स्नान के दौरान दर्दनाक हादसा, एक ही परिवार की 7 बच्चियां डूबीं

    पटना में गंगा स्नान के दौरान दर्दनाक हादसा, एक ही परिवार की 7 बच्चियां डूबीं

    पटना
    पटना के बख्तियारपुर रानीसराय जहाजी घाट पर सोमवार सुबह गंगा स्नान के दौरान एक ही परिवार की सात बच्चियां तेज धारा में डूब गईं। स्थानीय लोगों ने तीन बच्चियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, जबकि चार बच्चियां नदी में बह गईं। एसडीआरएफ की टीम ने तलाशी अभियान चलाकर तीन शव बरामद कर लिए हैं, जबकि एक बच्ची की तलाश जारी है। विधायक अरुण कुमार साह ने घटना के लिए बालू खनन कारोबारियों को जिम्मेदार ठहराया है।

    घटना सुबह करीब 7 बजे की बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार सभी बच्चियां एक ही परिवार की थीं, जिनमें दो सगी और अन्य चचेरी बहनें शामिल हैं। सोमवारी स्नान के दौरान एक बच्ची गहरे पानी में चली गई और डूबने लगी। उसे बचाने के प्रयास में अन्य बच्चियां भी एक-एक कर पानी में उतरती चली गईं और सभी तेज धारा की चपेट में आ गईं

    स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए तीन बच्चियों को बाहर निकाल लिया। वहीं अवधेश चंद्रवंशी की पुत्री आरती 21 व नंदनी 16, कमलेश चंद्रवंशी की पुत्री राधिका 15 तथा मंटू चंद्रवंशी की 12 वर्षीय पुत्री स्मिता गहरे पानी में बह गईं। हादसे की सूचना मिलते ही घाट पर ग्रामीणों और परिजनों की भीड़ जुट गई।

    तलाशी में देरी पर हंगामा, सड़क जाम
    एसडीआरएफ को बुलाने में देरी से नाराज ग्रामीणों ने सड़क जाम कर दिया, जिससे करीब 20 मिनट तक आवागमन बाधित रहा। ग्रामीण तत्काल बचाव कार्य शुरू करने की मांग कर रहे थे। प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद जाम हटाया गया और एसडीआरएफ ने अभियान तेज किया।

    जानकारी मिलने पर पुलिस और प्रशासन के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और लोगों से बात की। नदी की तेज धारा और गहराई के कारण बचाव कार्य में कठिनाई आ रही है। तीन शव मिलने के बाद परिजनों में कोहराम मच गया है, जबकि एक बच्ची की तलाश जारी है। खबर सुनकर विधायक अरुण कुमार भी मौके पर पहुंचे।

    बालू खनन पर उठे सवाल
    स्थानीय विधायक अरुण कुमार साह ने हादसे पर दुख जताते हुए रानीसराय घाट के पास हो रहे बालू खनन को जिम्मेदार बताया। उन्होंने कहा कि रिहायशी क्षेत्र में खनन और बालू भंडारण पर तत्काल रोक लगनी चाहिए, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। बालू की कमाई के चक्कर में एक परिवार तबाह हो गया। घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है। एक ही परिवार की बच्चियों के साथ हुए इस दर्दनाक हादसे से ग्रामीण स्तब्ध हैं और प्रशासन राहत व खोज अभियान में जुटा है।

  • कैग की रिपोर्ट में डीडीए पर सवाल, 39 हजार से ज्यादा फ्लैट खाली और करोड़ों रुपये फंसे

    कैग की रिपोर्ट में डीडीए पर सवाल, 39 हजार से ज्यादा फ्लैट खाली और करोड़ों रुपये फंसे

    नई दिल्ली
    दिल्ली विकास प्राधिकरण ( DDA ) के कामकाज पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने सवाल उठाए हैं। खासकर आवास योजनाओं और फ्लैटों की बिक्री में कमियां सामने आई हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि दिल्ली सरकार को भुगतान करने के बाद भी कुछ अधिग्रहित जमीन का भौतिक कब्जा डीडीए ने नहीं लिया।

    2017 के बाद 10 आवास योजनाएं शुरू कीं
    पिछले सप्ताह संसद में पेश रिपोर्ट के मुताबिक, 2017-18 से 2021-22 की लेखा परीक्षा अवधि में डीडीए ने अलग-अलग इलाकों में कई तरह के मकान और फ्लैट बेचने के लिए 10 आवास योजनाएं शुरू कीं। रिपोर्ट में कहा गया कि पुरानी सूची को अलग-अलग आवास योजनाओं में बिक्री के लिए रखा गया। वहीं, पिछली योजनाओं में फ्लैट लौटाने और रद्द होने के कारणों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।

    बुनियादी सुविधाओं के बिना योजनाएं शुरू करने का आरोप
    कैग ने कहा कि आवास योजनाओं में पेश किए गए फ्लैटों के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा उपलब्ध है या नहीं, यह सुनिश्चित किए बिना ही योजनाएं शुरू कर दी गईं। रिपोर्ट के अनुसार, 2017 के बाद शुरू की गई 10 आवास योजनाओं में डीडीए ज्यादातर फ्लैट बेच नहीं पाया।

        31 मार्च 2024 तक डीडीए के पास कुल 39,904 फ्लैट खाली थे। इनमें 38,576 फ्लैट यानी 96.7 प्रतिशत निम्न आय वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के थे। इन फ्लैटों की बिक्री से मिलने वाली करीब 4,983 करोड़ रुपये की रकम भी फंसी हुई है।
        कैग की रिपोर्ट में डीडीए के पास मौजूद बिना बिके पार्किंग गैरेज का भी जिक्र है। इनके कारण कम से कम 78.4 करोड़ रुपये का राजस्व नहीं मिल पाया।

    नरेला में जमीन का कब्जा नहीं लिया
    लेखा परीक्षा के दौरान कैग ने नरेला में जमीन अधिग्रहण को लेकर भी कमी बताई। 2017-18 तक कुल 2,689 हेक्टेयर अधिग्रहित जमीन में से 419.6 हेक्टेयर का भौतिक कब्जा डीडीए ने नहीं लिया था। अधिग्रहित जमीन के कुछ हिस्से 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के प्रावधानों के तहत समाप्त हो गए थे। इसके बावजूद डीडीए ने दिल्ली सरकार को भुगतान किया था।

    भुगतान के बाद जमीन का क्या हुआ?
    कैग ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसे मामलों की मौजूदा स्थिति की जानकारी नहीं मिली। यह भी पता नहीं चल सका कि भुगतान की गई रकम डीडीए को वापस की गई या जमीन का भौतिक कब्जा बाद में डीडीए को सौंपा गया। रिपोर्ट के मुताबिक, इस जानकारी के अभाव में लागत संबंधी रिकॉर्ड में दर्ज जमीन के भंडार की वास्तविकता की पुष्टि नहीं की जा सकी।

    मंत्रालय ने बताया कानूनी रास्ता अपना रहा डीडीए
    आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने अपने जवाब में कहा कि डीडीए अदालतों में जमीन के अधिकार खत्म होने को चुनौती देकर कानूनी रास्ता अपना रहा है। कैग ने इस जवाब पर कहा कि इसे इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए देखा जाना चाहिए कि नरेला में अधिग्रहित पूरी जमीन का कब्जा डीडीए ने वास्तव में नहीं लिया था।

     

  • पटियाला के गुरुद्वारा साहिब में चली तलवारें, गोली लगने से दो लोग घायल

    पटियाला के गुरुद्वारा साहिब में चली तलवारें, गोली लगने से दो लोग घायल

    पटियाला.

    पटियाला के घनौर थाना क्षेत्र के गांव मंडौली स्थित गुरुद्वारा साहिब में सोमवार को गोलक की सेवा गिनने के दौरान दो पक्षों में विवाद हो गया। देखते ही देखते मामला झड़प तक पहुंच गया। इस दौरान तलवार से हमला और गोली चलने की घटना सामने आई।

    वारदात में गुरुद्वारा कमेटी के प्रधान नायब सिंह और गांव निवासी कमलजीत सिंह घायल हो गए। दोनों को उपचार के लिए पटियाला के राजिंदरा अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जानकारी के अनुसार सोमवार को संगरांद होने के कारण गुरुद्वारा साहिब में गोलक की सेवा गिनने का काम चल रहा था। इसी दौरान कमलजीत सिंह गुरुद्वारा साहिब के बाहर पहुंचा। बताया जा रहा है कि उसके हाथ में तलवार थी। गुरुद्वारा कमेटी के प्रधान नायब सिंह ने उसे बाहर रोकने के साथ घर जाने के लिए कहा। इसी बात को लेकर दोनों के बीच कहासुनी हो गई। आरोप है कि विवाद बढ़ने पर कमलजीत सिंह ने नायब सिंह पर तलवार से दो वार कर दिए। हमले में नायब सिंह घायल हो गए। इसके बाद नायब सिंह ने कथित तौर पर अपने बचाव में गोली चला दी। गोली कमलजीत सिंह के पेट में लग गई।

    घटना के बाद गुरुद्वारा साहिब में मची अफरा-तफरी
    गोलियों की आवाज और झड़प के बाद गुरुद्वारा साहिब में मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। लोगों ने दोनों घायलों को संभाला और उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया। दोनों का राजिंदरा अस्पताल में उपचार चल रहा है। बताया जा रहा है कि कमलजीत सिंह पिछले कुछ दिनों से मानसिक रूप से परेशान था और गांव में हाथ में कृपाण लेकर घूमता था। हालांकि पुलिस ने इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इसलिए इस दावे को फिलहाल परिजनों और स्थानीय लोगों की जानकारी के तौर पर ही देखा जा रहा है।

    पुलिस जांच में जुटी
    घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर रही है और विवाद के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि जांच के बाद ही घटना के संबंध में पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। मामले में आगे की कार्रवाई घायलों के बयान और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर की जाएगी।

  • झारखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए AI तकनीक का सहारा, तीन क्षेत्रों में लगे सर्विलांस टावर

    झारखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए AI तकनीक का सहारा, तीन क्षेत्रों में लगे सर्विलांस टावर

    रांची
     झारखंड में बारिश के मौसम के बाद मानव और वन्यजीवों के बीच टकराव की घटनाओं में बढ़ोतरी हो जाती है।

    जंगलों में पानी भरने के कारण हाथी, तेंदुए और अन्य वन्यजीव भोजन व सुरक्षित ठिकाने की तलाश में आबादी वाले इलाकों की ओर रुख करते हैं।

    जिससे अक्सर जान-माल का भारी नुकसान होता है। इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए वन एवं पर्यावरण विभाग ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीक का सहारा लिया है।

    पायलट प्रोजेक्ट के तहत तीन क्षेत्रों में लगे टावर
    विभाग ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत रामगढ़, दलमा और पलामू क्षेत्र में तीन नए AI आधारित सर्विलांस टावर स्थापित किए हैं। इससे पहले थर्मल इमेजिंग तकनीक से केवल जीवों की एकसमान छवियां ही मिलती थीं।

    लेकिन नई AI तकनीक जानवरों के आकार और बनावट के आधार पर उनका सटीक वर्गीकरण (हाथी, तेंदुआ, हिरण आदि) करने में सक्षम है।

    इन टावरों में ऑटोमैटिक अलर्ट सिस्टम लगा है जो वन्यजीवों की गतिविधि दर्ज होते ही सीधे कमांड सेंटर को रीयल-टाइम अलर्ट भेजेगा।

    इससे वन विभाग की टीम त्वरित कार्रवाई कर सकेगी और स्थानीय ग्रामीणों को भी समय रहते सतर्क किया जा सकेगा।

    पलामू जैसे क्षेत्रों में, जहाँ तेंदुए के हमले की घटनाएँ अक्सर सामने आती हैं, यह तकनीक बेहद कारगर साबित होगी।

    सालाना 100 से अधिक लोग गंवाते हैं जान
    झारखंड में वन्यजीवों के हमलों के कारण प्रतिवर्ष औसतन 100 लोगों की मौत हो जाती है; कुछ वर्षों में यह आंकड़ा 130 तक भी पहुेचा है।

    मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकथाम टास्क फोर्स से जुड़े शहजादा अनवर ने बताया कि हाथियों के मूवमेंट को ट्रैक करने में उत्तराखंड ने AI मॉडल अपनाकर मौतों के आंकड़ों में 40 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की है। झारखंड में भी इस तकनीक से सीमावर्ती ग्रामीणों को सुरक्षा मिलेगी।

    आंकड़ों के विश्लेषण के बाद पूरे राज्य में विस्तार
    मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) एसआर नटेश ने बताया कि मानसून के बाद इन तीनों टावरों से प्राप्त आंकड़ों और इनपुट्स का विश्लेषण अन्य स्रोतों से मिले डाटा के साथ किया जाएगा।

    नतीजों की समीक्षा के बाद राज्य के अन्य संवेदनशील वन क्षेत्रों में भी ऐसे AI सर्विलांस टावर लगाने की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी। विभाग की प्राथमिकता ग्रामीण आबादी और वन्यजीवों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

  • कैथल के लांस नायक नरेंद्र सिंधू को मरणोपरांत शौर्य चक्र, आतंकियों से मुठभेड़ में हुए थे बलिदान

    कैथल के लांस नायक नरेंद्र सिंधू को मरणोपरांत शौर्य चक्र, आतंकियों से मुठभेड़ में हुए थे बलिदान

     कैथल
     गांव रोहेड़ा निवासी लांस नायक नरेंद्र सिंधू को मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया है। स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी से उन्हें यह सम्मान दिया गया।

    बलिदानी के सम्मान में गांव के युवाओं ने यात्रा निकाली और उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर नमन किया। नरेंद्र राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात थे। सितंबर 2025 में श्रीनगर के गुडडर के जंगलों में सर्च अभियान के दौरान लांस नायक नरेंद्र सिंधू (28) बलिदान हो गए थे।
    लश्कर के दो आतंकी किए थे ढेर

    उनके साथ हुई मुठभेड़ में लश्कर-ए-तैयबा के दो आतंकी भी मारे गए थे। एक आतंकी को घायल करने के बाद ढेर किया गया था। भारी गोलीबारी और विषम परिस्थितियों के बावजूद नरेंद्र ने संयम व सूझबूझ का परिचय दिया।

    उन्होंने घेराबंदी के अंदर मौजूद साथी जवानों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा। नजदीक से संदिग्ध गतिविधि दिखाई देने पर उन्होंने नियमों के अनुसार निडरता से आतंकवादी को ललकारा।

    आतंकी की भीषण गोलीबारी में वह गंभीर घायल हो गए। इसके बावजूद उन्होंने धैर्य नहीं खोया और अपनी पोजीशन बदलकर सटीक जवाबी कार्रवाई करते हुए आतंकी को मार गिराया। बाद में उसकी पहचान कैटेगरी-ए के दुर्दांत आतंकी के रूप में हुई।

    गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे नरेंद्र
    गंभीर रूप से घायल नरेंद्र को उपचार के लिए निकाला गया, लेकिन देश की रक्षा करते हुए उन्होंने वीरगति प्राप्त की। उनकी असाधारण बहादुरी, कर्तव्यनिष्ठा और सर्वोच्च बलिदान को देख उन्हें मरणोपरांत शौर्य चक्र देने का फैसला लिया।

    स्वजन के अनुसार नरेंद्र शहादत से नौ साल पहले सेना में भर्ती हुए थे और चार साल पहले श्रीनगर में उनकी पोस्टिंग हुई थी। वह अविवाहित थे और परिवार उनकी शादी की तैयारी कर रहा था।

    ट्रांसफर के बाद थी शादी की योजना
    जम्मू-कश्मीर से ट्रांसफर के बाद उनकी शादी की योजना थी। पिता दलबीर सिंधू ने कहा कि बेटे के देश के लिए बलिदान पर उन्हें गर्व है। उनका छोटा बेटा अब परिवार संभाल रहा है। उसे प्रदेश सरकार में जल्द क्लर्क के पद पर ज्वाइन करवाया जाएगा।

    शौर्य चक्र मिलने पर प्रदेश सरकार 31 लाख रुपये देती है, जबकि केंद्र और सेना से अलग लाभ मिलते हैं। परिवार ने प्रदेश सरकार से गांव में शहीद के नाम पर द्वार बनाने और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का नाम उनके नाम पर रखने की घोषणा को जल्द पूरा करने की मांग की है। कैथल डीसी अपराजिता ने भी शहीद को नमन किया।

     

  • कर्मचारियों से वादाखिलाफी पर भड़के वड़िंग, बोले- पुरानी पेंशन और DA का वादा पूरा करे सरकार

    कर्मचारियों से वादाखिलाफी पर भड़के वड़िंग, बोले- पुरानी पेंशन और DA का वादा पूरा करे सरकार

    चंडीगढ़.

    पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने सरकारी कर्मचारियों की मांगों की अनदेखी करने और उनकी आवाज दबाने के लिए सरकारी ताकत का इस्तेमाल करने का आरोप राज्य सरकार पर लगाया है।

    कांग्रेस के ‘योद्धाओं के साथ सेशन-2’ के दौरान वड़िंग ने कर्मचारियों को डीए और पुरानी पेंशन स्कीम (ओपीएस) नहीं मिलने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कांग्रेस हक की लड़ाई में मजबूती से साथ खड़ी है। वड़िंग ने कहा कि राज्य सरकार एक तरफ राज्य के पास पर्याप्त पैसा होने का दावा करती है, जबकि दूसरी ओर कर्मचारियों को डीए देने के लिए धन की कमी बताती है। उन्होंने हाई कोर्ट के डीए संबंधी आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के सरकार के फैसले पर भी सवाल उठाया।

    सरकार बनाने में कर्मचारियों की भूमिका
    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों ने आम आदमी पार्टी को सत्ता में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। सरकार ने सत्ता में आने से पहले उनसे कई वादे किए, लेकिन बाद में उन्हें भुला दिया गया। उन्होंने कहा कि किसान, मजदूर, सफाई कर्मचारी, शिक्षक और पीएसपीसीएल कर्मचारी समेत विभिन्न वर्ग सरकार के रवैये से परेशान हैं।

    ओपीएस लागू न होने का दावा
    वड़िंग ने पुरानी पेंशन योजना को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि आप सरकार ने ओपीएस लागू करने का वादा किया और नोटिफिकेशन भी जारी किया, लेकिन इसे जमीन पर लागू नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकारों ने हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में ओपीएस लागू की है। वड़िंग ने आरोप लगाया कि केंद्र और पंजाब की सरकारें विरोध की आवाजों को दबाने के लिए पुलिस बल का इस्तेमाल कर रही हैं।

  • राजस्थान में पंचायत चुनाव की आरक्षण लॉटरी की नई तारीखें तय, 17 सितंबर को जिला स्तर पर होगी प्रक्रिया

    राजस्थान में पंचायत चुनाव की आरक्षण लॉटरी की नई तारीखें तय, 17 सितंबर को जिला स्तर पर होगी प्रक्रिया

    जयपुर
     राजस्थान सरकार ने जिला परिषद सदस्यों, प्रधान, पंचायत समिति सदस्यों, सरंपच और वार्ड पंचों के आरक्षण की लॉटरी की नई तारीखें तय कर दी हैं। जिला स्तर पर जिला परिषद सदस्य, प्रधान और पंचायत समिति सदस्यों के लिए आरक्षण लॉटरी अब अगले माह 17 सितंबर को निकाली जाएगी। जबकि उपखंड स्तर पर सरपंच और वार्ड पंच के आरक्षण की लॉटरी 18 सितंबर को निकाली जाएगी। वहीं, 309 निकायों के 10,245 वार्डों के आरक्षण की लॉटरी आज निकाली जाएगी।

    पहले लॉटरी 17 और 18 अगस्त को निकाला जाना प्रस्तावित था। अचानक लॉटरी की तिथि बदलने से पंचायतीराज संस्थाओं के आरक्षण की लॉटरी करीब एक माह आगे खिसकने के बाद अब ग्रामीण क्षेत्र में आचार संहिता लागू होने को लेकर भी नई अटकलें शुरू हो गई है। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार, 13 अगस्त को जिला प्रमुख पदों के आरक्षण लॉटरी प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव द्वितीय चरण में संभावित होने के कारण जिला स्तर पर जिला परिषद सदस्य और प्रधान पद तथा उपखंड स्तर पर सरपंच एवं वार्ड पंच के आरक्षण की लॉटरी की तारीखें निर्धारित की गई है।

    आचार संहिता को लेकर भी बढ़ी अटकलें
    यदि नगरीय निकाय और पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव अलग-अलग चरण में होते हैं, तो ग्रामीण क्षेत्रों में नगरीय निकाय चुनाव के साथ ही आचार संहिता लागू नहीं होगी। ऐसी स्थिति में पंचायत क्षेत्रों में विकास कार्यों की रफ्तार पर चुनावी बंदिशों का तत्काल असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, ग्रामीण क्षेत्र में आचार संहिता कब और किस स्तर पर लागू होगी, यह स्थिति राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से जारी होने वाले अंतिम चुनाव कार्यक्रम के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगी।

    बिना ठोस कारण बताए लॉटरी स्थगित करने पर चर्चाएं तेज
    पंचायतीराज विभाग ने अचानक एक दिन पहले पंचायतीराज संस्थाओं के वार्डों की लॉटरी को 1 महीने आगे खिसकाने के पीछे कोई ठोस कारण नहीं बताया है। लॉटरी स्थगित करने को लेकर पंचायतीराज विभाग के आदेश में हाईकोर्ट के नवंबर तक पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव करवाने के फैसले की पालना करने के संकल्प का हवाला दिया है। पंचायतीराज विभाग के आदेश में पंचायतीराज चुनाव शहरी निकायों के बाद दूसरे फेज में होने की संभावना का हवाला दिया है। एक तरफ विभाग ने हाईकोर्ट के आदेशों की पालना करने की बात कही है, दूसरी तरफ पंचायतीराज चुनाव दूसरे फेज में होने की संभावना के कारण लॉटरी को एक महीने आगे खिसकाया है।

    निकायों की लॉटरी आज
    राज्य की 309 निकायों के 10,245 वार्डों के आरक्षण की लॉटरी सोमवार को निकाली जाएगी। निकायों के चुनाव पहले चरण में होंगे। आरक्षण का निर्धारण होते ही भाजपा और कांग्रेस में टिकट के दावेदारों का गणित बदल जाएगा। जिन वार्डों में आरक्षण की स्थिति बदलेगी, वहां कई निवर्तमान पार्षदों और संभावित प्रत्याशियों को नए वार्ड तलाशने पड़ सकते हैं, जबकि लंबे समय से चुनाव की तैयारी कर रहे नए चेहरों के लिए भी मौका बन सकता है।

  • भिवानी स्कॉर्पियो गोलीकांड में 15 गिरफ्तार, मुख्य आरोपियों की तलाश जारी

    भिवानी स्कॉर्पियो गोलीकांड में 15 गिरफ्तार, मुख्य आरोपियों की तलाश जारी

    चरखी दादरी.

    शहर के कोर्ट रोड पर बीते छह अगस्त को सिटी पुलिस थाने के सामने स्कार्पियो सवार लोगों पर हुई अंधाधुंध फायरिंग मामले में पुलिस ने दो और आरोपितों को गिरफ्तार किया है। मामले में अब तक साजिश रचने वाले, रेकी करने वाले, साजिश कर्ताओं को पनाह देने वाले इत्यादि 15 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। लेकिन फायरिंग करने वाले तीनों शूटर दस दिन बाद भी पुलिस की पकड़ में नहीं आए हैं।

    उल्लेखनीय है कि छह अगस्त 2026 को कोर्ट से पेशी भुगतकर लौट रहे स्कार्पियो सवार सात युवकों पर कोर्ट रोड पर सिटी पुलिस थाने के सामने तीन हथियारबंद बदमाशों ने ताबड़तोड़ करीब 30 राउंड फायरिंग की। जिसमें गाड़ी सवार सातों युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। जिन्हें चरखी दादरी सिविल अस्पताल से प्राथमिक उपचार के बाद रोहतक पीजीआइ रेफर किया गया। बाद में उपचार के दौरान घायल हिसार जिले के टोकस निवासी कीर्तिमान की मौत हो गई।

    पुलिस ने केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने साजिशकर्ता, पनाह देने वाले, रेकी करने वालों की पहचान की और उन्हें गिरफ्तार किया गया। मामले में अब पुलिस ने कलाली निवासी आरोपित दिक्षेंद्र उर्फ दोला व निमली निवासी नितिन उर्फ को गिरफ्तार किया गया। आरोपितों को को कोर्ट में पेश किया गया जहां से उन्हें 14 दिन का न्यायिक रिमांड मंजूर कर जिला जेल भेजने के आदेश दिए हैं।