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  • Punjab DA News: कर्मचारियों के DA पर हाईकोर्ट की डेडलाइन आज खत्म, भुगतान नहीं हुआ तो बढ़ेगा विवाद

    Punjab DA News: कर्मचारियों के DA पर हाईकोर्ट की डेडलाइन आज खत्म, भुगतान नहीं हुआ तो बढ़ेगा विवाद

    चंडीगढ़ 

    पंजाब में कर्मचारियों को DA जारी करने के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की डेडलाइन का आज आखिरी दिन है। सरकार ने अभी तक कोर्ट के आदेश के अनुसार DA जारी नहीं किया है। सरकार के रवैये से मुलाजिमों में भारी रोष है।
    पंजाब स्टेट मिनिस्टीरियल सर्विसेज यूनियन आज से दो दिन की 'कलम छोड़ व कंप्यूटर शटडाउन' स्ट्राइक पर चले गए हैं। आज और कल पंजाब भर में क्लेरिकल स्टाफ काम नहीं करेगा, जिससे लोगों के काम अटक जाएंगे।

    यूनियन नेताओं ने साफ कर दिया कि अगर सरकार ने कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया और यूनियन की अन्य मांगों को नहीं माना, तो हड़ताल आगे भी बढ़ाई जा सकती है। इससे साफ है कि आने वाले दिनों में जनता की परेशानी फिर से बढ़ने वाली है।

    PSMSU के नेताओं ने हड़ताल के लिए दिए ये तर्क, जानिए…
        15 दिन हुए, डीए नहीं दिया: यूनियन के प्रदेश पदाधिकारी तेजिंदर सिंह नंगल का कहना है कि हाईकोर्ट ने 3 अगस्त को अपने फैसले में सरकार को आदेश दिए थे कि 15 दिन में कर्मचारियों को डीए जारी किया जाए। उन्होंने कहा कि 3 अगस्त से आज 15वां दिन है, लेकिन सरकार ने अभी तक डीए जारी नहीं किया है। जिसके विरोध में यूनियन ने दो दिन हड़ताल का फैसला किया है।

        चंडीगढ़ रैली के बाद सरकार चुप: तेजिंदर सिंह नंगल ने कहा कि 7 अगस्त को पंजाब भर से सरकारी मुलाजिम चंडीगढ़ में जुटे और वहां पर धरना दिया। पुलिस ने मुलाजिमों पर बल प्रयोग किया और उसके बाद मुख्यमंत्री ने मीटिंग का टाइम दिया। उन्होंने बताया कि सीएम ने 27 अगस्त को मीटिंग का टाइम दिया, जो कि बहुत लंबा है। वे डिमांड कर रहे थे कि उन्हें जल्दी से जल्दी समय दिया जाए। उनका कहना है कि 7 अगस्त से अब तक सरकार ने मुलाजिमों के साथ कोई संपर्क तक नहीं किया।

        वित्त मंत्री के बयान से नाराज: तेजिंदर सिंह नंगल का कहना है कि चंडीगढ़ रैली के बाद वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कर्मचारी संगठनों को 'एंटी स्टेट यूनियन' कहा, जिससे कर्मचारियों में भारी रोष है। उन्होंने कहा कि कर्मचारी सूबे की तरक्की के लिए काम कर रहे हैं और सरकार के जिम्मेदार मंत्री उन्हें एंटी स्टेट कह रहे हैं।

        मांगें नहीं मानी तो बढ़ाएंगे हड़ताल: तेजिंदर सिंह नंगल का कहना है कि यूनियन की डिमांड है कि सरकार हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक आज ही मुलाजिमों का डीए जारी करे। मुख्यमंत्री के साथ जो 27 तारीख की मीटिंग फिक्स हुई है, उसे जल्दी करे और हरपाल चीमा ने जो बयान दिया है, उसे वापस लें। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने मांगें नहीं मानीं, तो हड़ताल 18 तारीख से आगे भी बढ़ाई जा सकती है।

    हड़ताल का पब्लिक के कामकाज पर होगा यह असर, जानिए…

        जमीन-जायदाद से जुड़े काम: तहसीलों में जमीन-जायदाद से जुड़े कई महत्वपूर्ण कामों पर हड़ताल का असर पड़ सकता है। रजिस्ट्री, इंतकाल, फर्द-जमाबंदी, जमीन के रिकॉर्ड में नाम या विवरण में बदलाव और राजस्व विभाग की फाइलों की प्रोसेसिंग बंद है। जिन लोगों ने जमीन की खरीद-फरोख्त या रिकॉर्ड में बदलाव के लिए आवेदन किया है, उनकी फाइल आगे बढ़ने में समय लग सकता है। इससे जमीन संबंधी दस्तावेजों की प्रक्रिया भी प्रभावित होगी।

        सर्टिफिकेट बनवाने का काम: सरकारी कार्यालयों से मिलने वाले विभिन्न प्रमाणपत्रों की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है। आय प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र, निवास या डोमिसाइल प्रमाणपत्र सहित अन्य दस्तावेजों की जांच और वेरिफिकेशन में देरी हो सकती है। कई मामलों में ऑनलाइन आवेदन होने के बावजूद उसकी अंतिम जांच या प्रमाणपत्र जारी करने का काम कार्यालय के क्लेरिकल स्टाफ से जुड़ा होता है। ऐसे आवेदनों का निपटारा प्रभावित होने की संभावना है।

        RTO से जुड़े काम: ट्रांसपोर्ट विभाग में ड्राइविंग लाइसेंस और वाहनों से संबंधित कई सेवाओं की कार्यालयी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। ड्राइविंग लाइसेंस, RC, वाहन ट्रांसफर, परमिट और अन्य दस्तावेजों से जुड़े आवेदनों की जांच और फाइल प्रोसेसिंग में देरी हो सकती है। ऑनलाइन आवेदन करने वाले लोगों को भी उन प्रक्रियाओं के लिए इंतजार करना पड़ सकता है, जिनमें दस्तावेजों की मैनुअल जांच या कार्यालय स्तर पर फाइल आगे बढ़ाने की जरूरत होती है।

        पेंशन से जुड़े काम: सामाजिक सुरक्षा विभाग की विभिन्न पेंशन योजनाओं से जुड़े काम भी प्रभावित होने की संभावना है। बुजुर्ग, विधवा, दिव्यांग और अन्य पात्र लाभार्थियों की पेंशन से संबंधित फाइलों की जांच, रिकॉर्ड में सुधार और नए मामलों की प्रोसेसिंग में देरी हो सकती है। जिन लाभार्थियों के दस्तावेजों में कोई कमी है या जिनके मामलों में कार्यालय स्तर पर वेरिफिकेशन जरूरी है, उनके काम का निपटारा हड़ताल के दौरान धीमा पड़ सकता है।

        सरकारी कर्मचारियों के काम: सरकारी विभागों में काम करने वाले कर्मचारियों से जुड़े कई प्रशासनिक काम भी प्रभावित होंगे। सर्विस बुक अपडेट, छुट्टी, वेतन, एरियर, प्रमोशन, ट्रांसफर और अन्य सेवा संबंधी मामलों की फाइलें क्लेरिकल स्टाफ के जरिए आगे बढ़ती हैं। हड़ताल के कारण इन फाइलों की एंट्री, दस्तावेजों की जांच और संबंधित अधिकारी तक फाइल पहुंचाने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इससे कर्मचारियों के कई मामलों में फैसला लेने में देरी संभव है।

        खाद्य एवं राशन से जुड़े काम: खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग में राशन कार्ड और लाभार्थियों से जुड़े कई कार्यालयी काम प्रभावित हो सकते हैं। राशन कार्ड में नाम जोड़ने या हटाने, पते में बदलाव, परिवार के सदस्यों का विवरण अपडेट करने और लाभार्थी रिकॉर्ड में संशोधन जैसे कामों में देरी हो सकती है। ऑनलाइन आवेदन होने के बावजूद कई मामलों में दस्तावेजों की जांच और रिकॉर्ड अपडेट कार्यालय स्तर पर किया जाता है। इसलिए हड़ताल का असर इन सेवाओं पर भी पड़ सकता है।

        DC और SDM ऑफिस के काम: DC और SDM कार्यालयों में आम लोगों से जुड़े कई प्रशासनिक काम क्लेरिकल स्टाफ की फाइल प्रोसेसिंग पर निर्भर होते हैं। आवेदन की एंट्री, दस्तावेजों की जांच, रिकॉर्ड अपडेट, विभिन्न प्रमाणपत्रों की प्रक्रिया और दूसरी प्रशासनिक फाइलों को संबंधित अधिकारी तक पहुंचाने का काम प्रभावित हो सकता है। अधिकारी कार्यालय में मौजूद रहने के बावजूद यदि फाइल तैयार करने या रिकॉर्ड अपडेट करने वाला स्टाफ हड़ताल पर है, तो मामलों के निपटारे में देरी हो सकती है।

        नगर निगम और नगर निकाय के काम: नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों में भी क्लेरिकल स्टाफ की हड़ताल का असर कई सेवाओं पर पड़ सकता है। प्रॉपर्टी टैक्स, विभिन्न NOC, बिल्डिंग से संबंधित फाइलें, प्रॉपर्टी रिकॉर्ड और अन्य प्रशासनिक आवेदनों की प्रोसेसिंग धीमी हो सकती है। जिन मामलों में आवेदन के बाद दस्तावेजों की जांच, रिकॉर्ड में एंट्री या अधिकारी के पास फाइल भेजने की जरूरत होती है, उनमें देरी की संभावना ज्यादा रहेगी। इससे लोगों को अपने काम के लिए दोबारा कार्यालय आना पड़ सकता है।

        सेहत विभाग का कामकाज भी प्रभावित: सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर, नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ की नियमित चिकित्सा सेवाएं सामान्य रूप से जारी हैं, लेकिन क्लेरिकल स्टाफ की हड़ताल के कारण अस्पतालों और सेहत विभाग के कार्यालयी काम प्रभावित होने की आशंका है। कर्मचारियों की छुट्टी, वेतन, सर्विस रिकॉर्ड, मेडिकल बिल, विभागीय भुगतान, सरकारी योजनाओं से जुड़े रिकॉर्ड और दवाइयों व सामान की खरीद से संबंधित फाइलों की प्रोसेसिंग में देरी हो सकती है। अस्पतालों में भर्ती मरीजों से जुड़े प्रशासनिक दस्तावेज, रिकॉर्ड अपडेट और दूसरे क्लेरिकल काम भी प्रभावित हो सकते हैं।

  • हवलदार ने छोड़ी परंपरागत खेती, ड्रैगन फ्रूट ने बदली किस्मत; 6 बीघा में 14 लाख की कमाई

    हवलदार ने छोड़ी परंपरागत खेती, ड्रैगन फ्रूट ने बदली किस्मत; 6 बीघा में 14 लाख की कमाई

     फरीदाबाद
    अनेकों किसान आज भी अपनी परंपरागत खेती इसीलिए नहीं छोड़ पा रहे, शायद उनमें कुछ नया करने का जुनून-जज्बा नहीं है। फरीदाबाद की नीमका जेल में तैनात एक हवलदार ने अपने जुनून औ जिद से परंपरागत खेती छोड़कर जिले में एक मिसाल कायम की है।

    जी हां, जिस खेत में कभी गेहूं की बालियां लहलहाती थीं, कभी चावल, ज्वार, मक्का और गन्ना बोया जाता था, वह खेत ड्रैगन फ्रूट की सुगंध से महक रहा है। परंपरागत खेती से यह किसान परिवार बड़ी मशक्कत के बाद हर साल डेढ़-दो लाख रुपये कमाता था, लेकिन नई खेती ने परिवार की जिंदगी संवार दी है।

    लागत 6.5 लाख और हर साल 14 लाख का मुनाफा
    किसान परिवार ने छह बीघे (एक एकड़ से ज्यादा) खेत से इस साल 14 लाख रुपये की कमाई की है। तीन साल पहले फरीदाबाद-पलवल में यह पहल करने वाले वे पहले किसान थे, लेकिन अब दोनों जिलों में तीन-चार अन्य किसान ड्रैगन फ्रूट की खेती कर रहे हैं।एक किसान के बदलने और इस जिद-जुनून की कहानी जनवरी 2023 में शुरू हुई थी।

    फरीदाबाद-पलवल की सीमा पर मौजूद जल्हाका गांव के साधारण किसान नरेंद्र अत्री जिला कारागार विभाग में बतौर हवलदार नीमका जेल में तैनात है। एक रोज ड्यूटी के बाद बैरक में पलंग पर लेटे वे खेती-बाड़ी संबंधी यू ट्यूब चेनल पर ड्रैगन फ्रूट की खेती के बारे में सुन-देख रहे थे।

    उसी रोज, उन्होंने अपने खेत से परंपरागत खेती को हटाने का मन बना लिया। छुट्टी वाले दिन घर पहुंचे तो पत्नी-बच्चों से कहा, अब मैं ड्रैगन फ्रूट की खेती करूंगा। बच्चों ने दो-तीन बार मना किया, मनोबल गिराया, लेकिन मूलत: किसान होने के कारण नरेंद्र का फैसला अटल था।

    यूट्यूब देखकर बदली किस्मत
    यूट्यूब पर जो वीडियो देखा था, वह उन्होंने सहेज रखा था। हर रोज उसे कई बार देखते थे। उससे जो सीखा, उसके अनुरूप फरवरी, 2023 में उन्होंने खेत की मिट्टी और ट्यूबवेल के पानी का पीएच लेवल चेक कराया, जो अनुकूल निकला। अगला कदम था, खेत में पोल्स खड़े करना, कलम लाना और उसे लगाना, उसके बाद रिंग लाकर पोल्स पर लगाना। ये सब काम अगले तीन महीने में पूरे हो गए।

    इंतजार शुरू हुआ, कलम से पौधे के विकास और उसकी हाइट का रिंग तक पहुंचना। नौ महीने बाद वह दिन भी आया। पौधे विकसित होते हुए रिंग के अंदर जाकर पेड़ बनकर फैलने लगे। उसी समय पहली बार इनपर फ्रूट आया, किंतु नियमानुसार 15-20 साल तक फसल लेने लेने के लिए उन्हें उसी समय तोड़ना था।

    सभी पेड़ों से पहली बार आया फूलनुमा फ्रूट तोड़ दिया गया। डेढ़ साल बाद पहली बार भरकर फ्रूट हुआ, जो करीब ढाई से तीन टन था। तीन साल बाद अब इस डेढ़ बीघे खेत से करीब आठ टन फ्रूट निकाला जा चुका है।

    थोक मूल्य 200 रुपये किलो के हिसाब से इस साल नरेंद्र अत्री ने 14 लाख रुपये की कमाई की है। नरेंद्र बताते हैं कि पहले दिन से लेकर अब तक उनका महज 6.5 लाख रुपये खर्च हुआ है। यह खेती 10 से 12 साल तक इतना फ्रूट हर साल देगी। लागत शून्य है, कीमत हर साल बढ़ेगी तो मुनाफा भी हर साल बढ़ेगा।

  • हरियाणा सरकार ने मानी जीवन कुंडू मर्डर केस की मांगें, 14 दिन बाद आज होगा अंतिम संस्कार

    हरियाणा सरकार ने मानी जीवन कुंडू मर्डर केस की मांगें, 14 दिन बाद आज होगा अंतिम संस्कार

    हिसार.

    जीवन कुंडू हत्याकांड को लेकर चल रहा आंदोलन सोमवार को सरकार के साथ वार्ता के बाद समाप्ति की ओर बढ़ा। न्याय संघर्ष समिति की छह सदस्यीय कमेटी ने चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात की।

    बैठक में मुख्य आरोपित रमेश अत्री की गिरफ्तारी का आश्वासन देने के साथ 15 अगस्त को हांसी में दर्ज मुकदमे रद करने, पकड़े गए वाहनों को वापस लौटाने और पीड़ित परिवार की हरसंभव मदद करने पर सहमति बनी। इसके बाद परिवार ने 14 दिन से रखे गए जीवन के शव का मंगलवार को किनाला में अंतिम संस्कार करने पर सहमति जताई है। इससे पहले महापंचायत ने वार्ता बेनतीजा रहने पर 18 अगस्त से हिसार-दिल्ली, हिसार-सिरसा और हिसार-चंडीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग बंद करने की चेतावनी दी थी।

    पूर्व प्रदेश महामंत्री ने कराई मध्यस्थता
    न्याय संघर्ष समिति की कमेटी के साथ भाजपा के पूर्व प्रदेश महामंत्री सुरेंद्र पूनिया भी चंडीगढ़ पहुंचे। उन्होंने सरकार और समिति के बीच वार्ता में मध्यस्थता की। समिति सदस्य पूर्व सरपंच रवि कुंडू ने बताया कि मुख्यमंत्री ने परिवार की हरसंभव मदद का भरोसा दिया और मुख्य आरोपित की गिरफ्तारी का आश्वासन दिया।

    15 अगस्त को हांसी में हुआ था टकराव
    मुख्यमंत्री के हांसी स्थित नेहरू कॉलेज में स्वतंत्रता दिवस समारोह से पहले सिसाय पुल नाके पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव हुआ था। सुबह करीब 6:40 बजे 150 से 200 लोग ट्रैक्टर-ट्रालियों के साथ समारोह स्थल की ओर बढ़े थे। पुलिस के अनुसार बैरिकेड तोड़ने, ट्रैक्टर चढ़ाने और पथराव के प्रयास के बाद ड्यूटी मजिस्ट्रेट के आदेश पर लाठीचार्ज किया गया। झड़प में हांसी के एसपी विनोद कुमार समेत कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे। मामले में कई धाराओं में केस दर्ज कर गिरफ्तारियां की गई थीं।

  • अशोकधाम भगदड़ में मृतकों के परिजनों को ₹4-4 लाख देगी बिहार सरकार: CM सम्राट चौधरी

    अशोकधाम भगदड़ में मृतकों के परिजनों को ₹4-4 लाख देगी बिहार सरकार: CM सम्राट चौधरी

    पटना
     बिहार के लखीसराय स्थित अशोकधाम में सावन की तीसरी सोमवारी पर मची भगदड़ में सात श्रद्धालुओं की मौत पर सीएम सम्राट चौधरी ने दुख जताया है। सोशल मीडिया के जरिए मुख्यमंत्री ने हादसे के पीड़ित परिवारों को ढाढस बंधाते हुए मृतकों के परिवारों के लिए चार-चार लाख की सहायता देने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को घायलों के समुचित इलाज का निर्देश दिया है। सीएम ने जिला प्रशासन को मरने वालों के परिवारों को उचित सहायता देने का भी आदेश दिया है। हादसे की सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचे सूर्यगढ़ा के जदयू विधायक रामानंद मंडल ने आरोप लगाया है कि यह हादसा प्रशासन की लापरवाही का नतीजा है।

    सीएम ने एक्स हैंडल पर पोस्ट करके कहा है कि घटना अत्यंत दुःखद एवं हृदयविदारक है। हादसे में श्रद्धालुओं की मृत्यु की खबर से मन व्यथित है। शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। घायलों के समुचित एवं त्वरित इलाज के लिए प्रशासन को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति एवं घायलों को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ प्रदान करें। इस घटना के मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख अनुग्रह अनुदान देने की घोषणा मुख्यमंत्री ने की है।

    सीएम सोशल मीडिया के जरिए बताया है कि लखीसराय के अशोकधाम हाल्ट पर हुई हृदयविदारक दुर्घटना में सभी मृतकों के निकटतम आश्रितों को राज्य सरकार की ओर से ₹4-4 लाख अनुग्रह अनुदान दिया जाएगा। दुःख की इस घड़ी में राज्य सरकार पूरी संवेदना और प्रतिबद्धता के साथ शोक संतप्त परिवारों के साथ खड़ी है।

    घटना की सूचना मिलने पर सूर्यगढा के जदयू विधायक रामानंद मंडल घटना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि यह हादसा प्रशासन की लापरवाही का नतीजा है। इसकी जांच कराई जाएगी कि किस स्तर पर चूक हुई। उन्होंने कहा कि यह घटना बहुत दुखद है। भगवान मृत आत्मा को शांति दें। घायलों का इलाज कराया जा रहा है।

    घटना के विरोध में गंहामा शुरू हो गया है। मृतकों के परिजनों और स्थानीय लोगों ने सदर अस्पताल के पास सड़क जाम कर दिया। हालांकि, जिला प्रशासन ने समझा बुझाकर सड़क से उन्हें हटा दिया है। लोगों का आरोप है कि प्रसाशन ने ठीक से सुरक्षा की व्यवस्था नहीं की। तीसरी सोमवारी को उमड़ने वाली भीड़ का सभी को अंदाजा है पर प्रशासन ने इसे हल्के से लिया। सुरक्षा के नाम पर खानापूर्ति की गयी। भगदड़ के समय जब लोग बेतरतीव भाग रहे थे और नीचे गिर चुके लोग कुचल रहे थे उस समय कोई भी स्थिति पर नियंत्रण करने के लिए नहीं था।

    धार्मिक न्यास परिषद ने जांच के आदेश दिया
    बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद के अध्यक्ष रणवीर नंदन ने कहा है कि जांच टीम को लखीसराय भेजा जा रहा है। न्यास परिषद और जिला प्रशासन की टीम संयुक्त रूप से हादसे की जांच करेंगे। बताया कि जितने भी मंदिर न्यास परिषद से जुड़े हैं वहां की व्यवस्था की हम चिंता करते हैं। भविष्य में ऐसी कोई घटना नहीं हो इसे सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाया जाएगा।

  • चंडीगढ़ में कचरा अलग नहीं किया तो लगेगा भारी जुर्माना, 10 लाख रुपये तक भरने होंगे

    चंडीगढ़ में कचरा अलग नहीं किया तो लगेगा भारी जुर्माना, 10 लाख रुपये तक भरने होंगे

    चंडीगढ़.

    नगर निगम ने सालिड वेस्ट मैनेजमेंट बायलाॅज-2026 का ड्राफ्ट जारी कर शहरवासियों से 15 दिन में सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। प्रस्तावित उपनियमों में घरों और अन्य कचरा उत्पादकों के लिए स्रोत स्तर पर कचरे को चार श्रेणियों गीला, सूखा, सैनिटरी और विशेष देखभाल वाला कचरा में अलग करना अनिवार्य किया गया है।

    अलग-अलग कचरा अधिकृत कलेक्टर को सौंपना होगा। ड्राफ्ट में कचरा प्रबंधन नियमों के उल्लंघन पर 500 रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रविधान किया गया है। सार्वजनिक स्थान पर कचरा फेंकने पर पहली बार 500, दूसरी बार 1,000 और इसके बाद 2,000 रुपये जुर्माना होगा। खुले में कचरा जलाने पर पहली बार 5,000, दूसरी बार 10,000 और इसके बाद 20,000 रुपये जुर्माना प्रस्तावित है।

    यहां भेजें सुझाव
    निगम ने नागरिकों से ड्राफ्ट पर सुझाव और आपत्तियां 15 दिन के भीतर ई-मेल swmbylawsmcc@gmail.com या एमओएच कार्यालय में जमा करवाने को कहा है। ड्राफ्ट निगम की वेबसाइट पर उपलब्ध है।

    बल्क वेस्ट जनरेटर के लिए सख्ती
    100 किलो से अधिक प्रतिदिन कचरा पैदा करने वाली हाउसिंग सोसायटी, संस्थान, होटल, रेस्तरां, अस्पताल, बाजार और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बल्क वेस्ट जनरेटर माने जाएंगे। इन्हें अपने परिसर में गीले कचरे का कंपोस्टिंग या बायो-मेथनेशन के माध्यम से प्रसंस्करण करना होगा। साथ ही कचरे का स्रोत पर पृथक्करण, रिकॉर्ड का रखरखाव और मासिक रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य होगा। नियमों की अनदेखी पर सख्त दंड का प्रविधान किया गया है।

  • VHP नेता का CJP आंदोलन पर बड़ा दावा, बोले- जंतर-मंतर पर ‘Gen-Z’ नहीं; पंजाब में धर्मांतरण को लेकर भी उठाए सवाल

    VHP नेता का CJP आंदोलन पर बड़ा दावा, बोले- जंतर-मंतर पर ‘Gen-Z’ नहीं; पंजाब में धर्मांतरण को लेकर भी उठाए सवाल

    चंडीगढ़ 
    पठानकोट पहुंचे VHP के केंद्रीय संगठन महामंत्री मिलिंद परांडे ने कहा कि विदेशी फंडिंग के जरिए धर्मांतरण कराया जा रहा है। पठानकोट में विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री मिलिंद परांडे ने पंजाब में धर्मांतरण, विदेशी फंडिंग और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर कई बड़े दावे किए। छात्रों के जंतर-मंतर के आंदोलनों का जिक्र करते हुए। 

    परांडे ने कहा कि ऐसे लोगों की मौजूदगी वाले आंदोलन को छात्रों या ‘जेन-जी’ का आंदोलन बताना सही नहीं है। वहीं पंजाब के सिख समाज को लेकर उन्होंने विदेशी फंडिंग के जरिए कथित धर्मांतरण का मुद्दा उठाया।

    उन्होंने दावा किया कि सिख समुदाय और गरीब वर्ग के लोगों को ईसाई बनाने की कोशिशें की जा रही हैं। उन्होंने इसे पंजाब के साथ-साथ देश के लिए भी बड़ी चुनौती बताते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की।

    मिलिंद परांडे ने कही ये बड़ी बातें…

        पंजाब में धर्मांतरण और विदेशी फंडिंग: मिलिंद परांडे ने कहा कि पंजाब में विदेशी धन के जरिए सिख समुदाय और गरीब वर्ग के लोगों को कथित तौर पर छल-कपट से ईसाई बनाने की कोशिशें हो रही हैं। उन्होंने इसे पंजाब ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए चुनौती बताया।

        संशोधित FCRA कानून की जरूरत: उन्होंने कहा कि अवैध विदेशी फंडिंग के जरिए होने वाले कथित धर्मांतरण पर रोक लगाने में केंद्र सरकार का संशोधित फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (FCRA) प्रभावी साबित होगा।

        सीमावर्ती क्षेत्रों में सतर्कता: परांडे ने बांग्लादेशी और म्यांमार के अवैध घुसपैठियों, ‘लव जिहाद’ और धर्मांतरण का जिक्र करते हुए कहा कि इससे सीमावर्ती क्षेत्रों में हिंदू आबादी के संतुलन पर असर पड़ रहा है। उन्होंने पठानकोट और पंजाब के लोगों से सतर्क रहने की अपील की।

        बूढ़ा अमरनाथ यात्रा का प्रभाव: मिलिंद परांडे ने कहा कि 2006 में बजरंग दल द्वारा शुरू की गई इस यात्रा से पुंछ जिले में हिंदुओं का आत्मविश्वास बढ़ा है, जिससे वहां हिंदू आबादी 7% से बढ़कर 10% हुई है। उन्होंने कहा कि कश्मीर से धारा 370 हटने के बाद सीमावर्ती इलाकों में सड़कों का निर्माण, अर्थव्यवस्था में सुधार और सुरक्षा स्थिति में व्यापक मजबूती आई है।

        जंतर-मंतर आंदोलन में हिस्ट्रीशीटर शामिल हुए: उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर के आंदोलन में करीब 2,800 हिस्ट्रीशीटर, 60 हत्यारे और 100 से अधिक बलात्कारी शामिल थे; ऐसे अपराधियों की भीड़ को छात्रों या 'जेन-जी' (Gen-Z) का प्रतिनिधित्व नहीं कहा जा सकता।

        धार्मिक यात्राओं में देश का असली युवा: उन्होंने कहा कि भारत का असली युवा जंतर-मंतर के आंदोलनों में नहीं, बल्कि वैष्णो देवी, बूढ़ा अमरनाथ, कांवड़ यात्रा, अयप्पा मंदिर और स्वर्ण मंदिर में श्रद्धा के साथ दर्शन करने पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि तुष्टिकरण की राजनीति के कारण ही भारत का विभाजन और लाखों लोगों का विस्थापन हुआ था; वैसी परिस्थितियां दोबारा न बनें, इसके लिए हर देशभक्त नागरिक को सजग रहना होगा।

  • राजस्थान में तबादलों पर बड़ी गफलत, एक ही दिन जारी हुईं दो अलग-अलग सूची

    राजस्थान में तबादलों पर बड़ी गफलत, एक ही दिन जारी हुईं दो अलग-अलग सूची

    जयपुर
    राजस्थान सरकार की दो अलग-अलग 'तबादला सूची' की वजह से बड़ी गफलत सामने आई है। ये गफलत तब सामने आई जब राजस्व विभाग में तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों के स्थानांतरण/पदस्थापन आदेशों को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हो गई। दरअसल, एक ही दिन में दो अलग-अलग प्रशासनिक स्तरों से दो अलग-अलग तबादला सूचियां जारी होने से न केवल आम जनता में बल्कि खुद राज्य के विभिन्न जिलों में तैनात अधिकारियों के बीच भी अनिश्चितता का माहौल बन गया। इस पूरे मामले में सबसे ध्यान खींचने वाली बात यह रही कि राजस्व मंडल और राजस्व विभाग दोनों ने ही अपनी-अपनी अलग-अलग तबादला सूची जारी कर दी, जिससे पूरा मामला उलझ गया और आखिरकार सरकार को एक सूची पर तुरंत रोक लगानी पड़ी।

    पहले आदेश जारी हुआ, फिर कुछ ही देर में रोक
    राजस्थान राजस्व विभाग में जैसे ही तबादला सूची आई, वैसे ही राज्य के अलग-अलग जिलों में काम कर रहे अधिकारियों और आम लोगों के बीच यह खबर आग की तरह फैल गई। लेकिन इस खुशी और चिंता के बीच एक नया मोड़ तब आया जब पता चला कि दो अलग-अलग स्तरों पर तबादला आदेश तैयार किए गए थे।

    राजस्व मंडल ने अलग सूची निकाली और जयपुर स्थित राजस्व विभाग ने अपनी अलग सूची जारी की। जब इस 'गफलत' या भ्रम की जानकारी उच्च अधिकारियों तक पहुंची, तो तुरंत कार्रवाई करते हुए राजस्व विभाग ने राजस्व मंडल द्वारा जारी की गई सूची पर रोक लगा दी। इस फैसले ने यह साफ कर दिया कि प्रशासन में समन्वय की कितनी बड़ी कमी रही, जिसके कारण अधिकारियों को भी समझ नहीं आया कि उनका नया पदस्थापन आदेश कहां का है।

    157 बनाम 164 तहसीलदार
    इस पूरे विवाद की सबसे बड़ी वजह तबादला आंकड़ों में आया अंतर है। विभिन्न जिलों में नई पोस्टिंग का इंतजार कर रहे अधिकारियों के लिए ये दोनों सूचियां बिल्कुल अलग कहानी बयां कर रही थीं

    राजस्व मंडल की सूची: राजस्व मंडल ने कुल 157 तहसीलदार और 47 नायब तहसीलदार के तबादले का आदेश जारी किया था।

    राजस्व विभाग की सूची: दूसरी तरफ, राजस्व विभाग ने 164 तहसीलदार और 49 नायब तहसीलदार के तबादले के आदेश जारी कर दिए।

    जब दोनों सूचियों का मिलान किया गया, तो संख्या में अंतर के साथ-साथ कई अधिकारियों के नाम और पदस्थापन स्थानों में भी अंतर पाया गया। इस वजह से जिला स्तर पर प्रशासनिक कार्य प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई।

    तहसीलदार और नायब तहसीलदार किसी भी जिला प्रशासन की वह महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं जो जमीन, राजस्व, जाति प्रमाण पत्र, नामांतरण और स्थानीय कानून-व्यवस्था जैसे जरूरी कामों से सीधे जुड़े होते हैं।

    राजस्थान के ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में आम जनता रोजमर्रा के कामों के लिए तहसील कार्यालय के चक्कर काटती है। जब इस तरह की तबादला सूची पर भ्रम बनता है, तो स्थानीय स्तर पर काम पूरी तरह से ठप हो जाता है:

    अब कौन सी ट्रांसफर लिस्ट मान्य?
    राजस्व विभाग के सख्त आदेश के बाद अब पूरी स्थिति साफ हो चुकी है। विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि राजस्व मंडल (Revenue Board) द्वारा जारी की गई सूची को निरस्त/होल्ड पर रखा गया है।

    अब सिर्फ और सिर्फ राजस्व विभाग द्वारा जारी की गई तबादला सूची ही मान्य मानी जाएगी। इसका मतलब है कि 164 तहसीलदार और 49 नायब तहसीलदार वाली सूची के हिसाब से ही अधिकारियों को अपनी नई पोस्टिंग की जगह पर रिपोर्टिंग करनी होगी। विभाग ने सभी जिला कलेक्टर्स और संबंधित अधिकारियों को भी निर्देश दे दिए हैं कि वे केवल विभाग के आदेश का ही पालन करें।

    प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल
    इस पूरी घटना ने राजस्थान के राजस्व प्रशासन के भीतर चल रहे आंतरिक संवाद के अभाव को उजागर किया है। आमतौर पर तबादला सूची जारी करने से पहले सभी स्तरों पर स्वीकृति और सत्यापन पूरा किया जाता है। लेकिन एक ही दिन में दो अलग-अलग स्रोतों से अलग-अलग संख्या में तबादला आदेशों का बाहर आना यह दर्शाता है कि विभागीय प्रक्रियाओं में समन्वय की कमी थी।

    सरकार ने हालांकि समय रहते इस पर रोक लगाकर स्थिति को संभालने की कोशिश की है, लेकिन इस घटना से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल जरूर उठ रहे हैं। अब देखना यह होगा कि नए आदेश के बाद सभी तहसीलों में कामकाज सामान्य रूप से शुरू हो पाता है या नहीं।

  • पंजाब में सरकारी फैसलों को प्रभावित करने के आरोप पर FIR की तैयारी! ED के पत्र पर DGP ने मांगी कानूनी राय

    पंजाब में सरकारी फैसलों को प्रभावित करने के आरोप पर FIR की तैयारी! ED के पत्र पर DGP ने मांगी कानूनी राय

    चंडीगढ़.

    प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के पत्र ने पंजाब की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। ईडी ने पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गौरव यादव को पत्र भेजकर निजी व्यक्ति नितिन गोहल और अन्य के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने का आधार बताया है।

    ईडी का दावा है कि पीएमएलए के तहत की गई जांच में ऐसे तथ्य सामने आए हैं। जांच में ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनसे भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत संज्ञेय अपराध बनते हैं। इसके बाद पंजाब सरकार अब इस मामले में एफआइआर दर्ज करने समेत आगे की कार्रवाई के विकल्पों पर विचार कर रही है। डीजीपी ने ब्यूरो आफ इन्वेस्टिगेशन (बीओआइ) से उपलब्ध कानूनी रास्तों और ईडी के आरोपों पर राय मांगी है।

    क्या है पूरा मामला
    ईडी की जांच पीएमएलए के तहत दर्ज ईसीआइआर जेएलजेडओ/21/2024 से जुड़ी है। यह मामला अजय सहगल और इंडियन कोआपरेटिव हाउसिंग बिल्डिंग सोसायटी से जुड़े लोगों के खिलाफ जांच से संबंधित है। ईडी के अनुसार जांच में आरोप सामने आए कि सरकारी अधिकारियों के माध्यम से कुछ रियल एस्टेट संस्थाओं को जमीन के इस्तेमाल में बदलाव यानी सीएलयू की सुविधा दिलाने की कोशिश की गई। इसी जांच के दौरान नितिन गोहल सहित कुछ लोगों की भूमिका एजेंसी के निशाने पर आई। ईडी ने आरोप लगाया कि गोहल ने मुख्यमंत्री के विशेष कार्य अधिकारी (ओएसडी) राजबीर घुम्मण से अपने संपर्क का इस्तेमाल सरकारी कामकाज को प्रभावित करने के लिए किया।

    बिचौलिये की निभाई भूमिका
    एजेंसी का दावा है कि गोहल अधिकारियों के तबादलों और तैनातियों, गोपनीय सरकारी दस्तावेजों, हथियार लाइसेंस, सुरक्षा संबंधी मंजूरियों तथा अन्य सरकारी लाभों के मामलों में बिचौलिये की भूमिका निभा रहा था। ईडी के मुताबिक इन कथित गतिविधियों के बदले गोहल ने राजबीर घुम्मण और उनके सहयोगियों के साथ मिलकर नकद, जमीन और अन्य माध्यमों से करीब दो करोड़ रुपये की अपराध से अर्जित आय एकत्र की।

    तलाशी में दस्तावेज-नकदी मिलने का दावा
    ईडी ने सात से 10 मई के बीच नितिन गोहल, अजय सहगल, सुरेश कुमार बजाज और सोसायटी से जुड़े अन्य लोगों के परिसरों की तलाशी ली थी। एजेंसी के अनुसार इस कार्रवाई में कई दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण सूचनाएं मिलीं। ईडी ने करीब एक करोड़ रुपये नकद बरामद करने का भी दावा किया है। इसके अलावा 20 लाख रुपये वाली एक थैली मिलने की बात कही गई है, जिसे एजेंसी के अनुसार खरड़ स्थित गोहल के फ्लैट से बाहर फेंका गया था। जांच के दौरान ईडी ने गोहल के मोबाइल फोन से मिले 21 वाट्सऐप चैट, कॉल रिकार्ड और दस्तावेजों को भी अपने आरोपों का आधार बनाया है। ये चैट 20 सितंबर 2023 से 18 मार्च 2026 के बीच की बताई गई हैं। ईडी का दावा है कि इनमें पुलिस, पंजाब सिविल सर्विसेज, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, मार्कफेड और ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथारिटी (गमाडा) से जुड़े अधिकारियों के तबादलों और तैनातियों का उल्लेख है।

    नीतिगत फैसलों में दखल का भी आरोप
    ईडी ने आरोप लगाया है कि गोहल ने सरकारी अधिकारियों और विभागों से संबंधित नीतिगत फैसलों, नियमों में संशोधन, प्रशासनिक मंजूरियों, टेंडर की शर्तों, लाइसेंसिंग और अन्य सरकारी मामलों को प्रभावित करने की कोशिश की। एजेंसी ने फोर्टिफाइड चावल की आपूर्ति से जुड़े टेंडर और डीएसपी के तबादलों का भी उल्लेख किया है।

    रियल एस्टेट से जुड़े मामलों का जिक्र
    रियल एस्टेट से जुड़े मामलों में जमीन के इस्तेमाल में बदलाव, गमाडा की मंजूरियों, संपत्ति विवादों और निजी विकासकर्ताओं से संबंधित मामलों का जिक्र किया गया है। ईडी ने मोहाली के फेज-7 में प्लाट डी-156 के कथित लेनदेन का भी उल्लेख करते हुए कहा है कि इसमें भुगतान का एक बड़ा हिस्सा नकद में किया गया था। ईडी ने पंजाब स्माल इंडस्ट्रीज एंड एक्सपोर्ट कारपोरेशन लिमिटेड (पीएसआइईसी) से संबंधित एक मामले में कथित तौर पर अनअर्नड इंक्रीज की राशि वसूल नहीं किए जाने का भी जिक्र किया है। एजेंसी ने ट्रैवल एजेंटों के रिकार्ड का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि गोहल ने राजबीर घुम्मण और बीर देविंदर के हवाई टिकटों तथा होटल में ठहरने के खर्च का भुगतान भी किया। पत्र में एक करण भूषण से हवाला के जरिये कथित भुगतान का भी उल्लेख है।

    ईडी ने धाराओं का दिया हवाला
    ईडी ने अपने पत्र में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 और आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के प्रावधानों के अलावा भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश), 420 (धोखाधड़ी), 467 (मूल्यवान दस्तावेज की जालसाजी) और 471 (फर्जी दस्तावेज को वास्तविक बताकर इस्तेमाल करना) का हवाला दिया है। एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट के विजय मदनलाल चौधरी और ललिता कुमारी से संबंधित फैसलों का भी उल्लेख करते हुए कहा है कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर एफआइआर दर्ज किए जाने का आधार बनता है।

    गोहल ने आरोपों को बताया गलत
    नितिन गोहल ने ईडी के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि राजबीर घुम्मण उनके पुराने मित्र हैं और वह उनके कार्यालय में निजी सहायक के तौर पर मदद करते रहे हैं। गोहल ने आरोप लगाया कि ईडी ने प्रशासनिक बातचीत और चैट को गलत संदर्भ में पेश किया है। उन्होंने नकदी वाली थैली के आरोप को भी गलत बताया और कहा कि पूछताछ के दौरान ईडी अधिकारियों ने स्वीकार किया था कि थैली उनकी नहीं थी। हवाला लेनदेन के आरोप पर भी गोहल ने इसे गेम कोड से संबंधित एक मित्र के साथ बातचीत बताया।

    राजनीतिक विवाद भी तेज
    ईडी का पत्र सामने आने के बाद पंजाब में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल और भाजपा ने मामले को लेकर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की है। विपक्ष का आरोप है कि ईडी के पत्र में सरकारी कामकाज को प्रभावित करने और कथित भ्रष्टाचार से जुड़े गंभीर तथ्य सामने आए हैं। वहीं, पंजाब सरकार ने केंद्र सरकार और केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार ने इसे राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश बताया है। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ईडी, सीबीआइ और आयकर विभाग जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं और राज्य सरकारों पर दबाव बनाने के लिए कर रही है।

    अब डीजीपी की कानूनी राय पर नजर
    ईडी के पत्र के बाद फिलहाल सबसे अहम सवाल यह है कि पंजाब पुलिस इस मामले में एफआइआर दर्ज करती है या नहीं। डीजीपी गौरव यादव ने बीओआइ से ईडी द्वारा उपलब्ध कराई गई सामग्री और कानूनी विकल्पों पर इनपुट मांगा है। इसके बाद सरकार यह तय करेगी कि ईडी के आरोपों के आधार पर किस स्तर पर और किस कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे में बीओआइ की कानूनी जांच और डीजीपी की अगली कार्रवाई पर पूरे मामले की दिशा निर्भर करेगी।

  • अशोक धाम मंदिर में भगदड़, 7 महिला श्रद्धालुओं की मौत; 19 घायल

    अशोक धाम मंदिर में भगदड़, 7 महिला श्रद्धालुओं की मौत; 19 घायल

     लखीसराय
    बिहार में लखीसराय के प्रसिद्ध अशोक धाम मंदिर में सावन की तीसरी सोमवारी पर सुबह-सुबह भगदड़ मचने से सात महिला श्रद्धालुओं की मौत हो गई है। लखीसराय डीएम शैलेंद्र कुमार ने भगदड़ और मृतकों की संख्या की पुष्टि कर दी है। भगदड़ में 19 लोग घायल हुए हैं। पांच लोगों को गंभीर हालत में हायर सेंटर भेजा गया है। जल चढ़ाने के लिए सुबह से लोगों की लंबी लाइन लगी थी। कांवड़ियों की कतार के पास ही खेत में एक बिजली का पोल गिरने के बाद वहां करंट फैलने की अफवाह उड़ी, जिसके बाद भगदड़ मच गई। मरने वालों में सभी महिलाएं हैं। डीएम शैलेंद्र कुमार अस्पताल में और एसपी प्रेरणा कुमार मंदिर परिसर में कैंप कर रहे हैं।

    डीएम ने बताया कि सभी घायलों का इलाज चल रहा है। भगदड़ से मंदिर परिसर और अस्पताल में चीख-पुकार मची है। मृतकों के साथ रहे परिजनों के रोने से अस्पताल और मंदिर परिसर में मातम का माहौल है। जिला प्रशासन और आसपास के लोग राहत और बचाव कार्य में जुटे हुए हैं। मृतकों में एक महिला की पहचान नहीं हुई है।

    मृतकों का नाम पता
    मनमाला देवी, उम्र 44, पति निरंजन कुमार, बड़हिया, लखीसराय

    रिंकू देवी, 50 वर्ष, पति नीरज यादव, सफियासराय, मुंगेर

    हेमलता देवी, 55 साल, पति सुरेंद्र यादव, कैंदी प्रतापपुर, हलसी, लखीसराय

    ललिता देवी, 45 साल, पति- गोरेलाल यादव, प्रतापपुर, हलसी, लखीसराय

    सोनी देवी, 50 साल, पति निरंजन सिंह, बड़हिया, लखीसराय

    संगीता देवी, 40 साल, पति- रणवीर यादव, प्रतापपुर, हलसी, लखीसराय

    पोल गिरने से मची भगदड़
    प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बैरिकेडिंग के पास एक बिजली का पोल था। भीड़ के दबाव से बांस का बल्ला टूटकर पोल पर अटक गया, जिससे पोल गिर गया। उसके बाद अफवाह फैल गई कि पोल गिर गया है और करंट फैल गया है। उसके बाद लोग जान बचाने के लिए भागने लगे। एक-दूसरे के ऊपर दौड़ते हुए भागने से बड़ी संख्या में लोग कुचलकर जख्मी हो गए, जिनमें से अब तक सात की मौत हो चुकी है। जानकारी के मुताबिक अशोक धाम मंदिर से अशोक धाम रेलवे हॉल्ट तक करीब दो किलोमीटर में लोगों को कतार में लगाने के लिए बांस-बल्ले की बैरिकेडिंग की गई थी।
    मृत महिला के शव से लिपटकर रोते परिजन

    मरने वालों में सारी महिलाएं
    मरने वालों में सातों महिलाएं हैं। तीन घायलों का नाम सामने आया है, जो खुशबु कुमारी बायपास, शबनम कुमारी इंदुपुर, स्वीटी कुमारी पिपरिया हैं। उनका मंदिर में लगे स्वास्थ्य शिविर में इलाज हो रहा है। अन्य घायल सदर अस्पताल में भर्ती कराए गए हैं।
    पूर्व से हादसे नहीं ली सीख

    इससे पहले 12 अगस्त 2019 को भी अशोक धाम मंदिर में भगदड़ की घटना हो चुकी है। इस वजह से मंदिर परिसर में लोहे के पाइप की बैरिकेडिंग की गई थी। लेकिन मंदिर के बाहर बांस-बल्ले की बैरिकेडिंग के सहारे सुरक्षा बहाल की गई थी, जो कमजोर पड़ गई। कहा जा रहा है कि 400 जवानों को लगाया गया था। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि मंदिर परिसर के बाहर सुरक्षाकर्मी नहीं दिख रहे थे।

    एक साथ दो ट्रेनें पहुंचीं, बढ़ गई भीड़, प्रशासन नहीं था तैयार
    बताया गया कि लखीसराय में एक साथ दो ट्रेनें पहुंची। आस-पास के जिलों से भारी संख्या में श्रद्धालु एक साथ पहुंच गए और जलार्पण के लिए कतार में लग गए। प्रशासन का है कि तीसरी सोमवारी की संभावित भीड़ के मद्देनजर सुरक्षा तैनाती की गई थी, लेकिन भीड़ के सामने वह कम पड़ गई।

    स्थिति फिलहाल सामान्य
    डीएम ने बताया कि मंदिर परिसर में स्थिति सामान्य हो गया है। लोग कतारबद्ध होकर जलाभिषेक कर रहे हैं। उन्होने कहा कि हालात को देखते हुए सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है। घटना की जांच कराई जाएगी। फिलहाल राहत-बचाव के साथ-साथ आज सोमवार को मंदिर की व्यवस्था को संचालित करना प्राथमिकता है। डीएम ने दावा किया है कि स्थिति अब नियंत्रण में है।

    व्यवस्था में कमी का आरोप, आक्रोश
    स्थानीय लोगों का कहना है कि सोमवारी पर अशोक धाम में लाखों की भीड़ आती है। प्रशासन को इसकी जानकारी पहले से है। लेकिन, तैयारी में कमी की गई। पूर्व की बैठकों में बड़े-बड़े दावे किए गए, लेकिन प्रबंध ढीला रखा गया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि लापरवाही की वजह से यह घटना घटी है।

  • किसानों का दिल्ली कूच फिर रोका गया, खनौरी बॉर्डर सील; भारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ प्रदर्शन तेज

    किसानों का दिल्ली कूच फिर रोका गया, खनौरी बॉर्डर सील; भारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ प्रदर्शन तेज

     संगरूर
     भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध सहित अन्य किसानी मुद्दों को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) के नेतृत्व में दिल्ली की ओर पैदल कूच कर रहे किसानों का 51 सदस्यीय जत्था खनौरी बॉर्डर पर पहुंचकर रुक गया।

    हरियाणा प्रशासन द्वारा खनौरी बॉर्डर को सील किए जाने और किसानों को पैदल भी हरियाणा की सीमा में प्रवेश की अनुमति नहीं दिए जाने के कारण किसान रविवार रात भर बॉर्डर के पास सड़क पर ही डटे रहे। किसानों ने सड़क पर बिस्तर लगाकर रात गुजारी।

    सीएम सैनी ने दिया आश्वासन
    दिल्ली जाने की अनुमति को लेकर रविवार को किसान प्रतिनिधियों और हरियाणा प्रशासन के बीच बैठक हुई। बैठक के दौरान हरियाणा प्रशासन की ओर से किसानों की मुलाकात हरियाणा के मुख्यमंत्री से करवाने का आश्वासन दिया गया। हालांकि, किसान प्रतिनिधियों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।

    किसानों का कहना है कि उनकी मांगें हरियाणा सरकार से संबंधित नहीं हैं। मांगों का हल केंद्र सरकार द्वारा ही संभव है, इसलिए उनकी बैठक केंद्रीय कृषि मंत्री के साथ तय करवाई जानी चाहिए। किसानों ने स्पष्ट किया कि जब तक केंद्रीय कृषि मंत्री के साथ बैठक तय नहीं होती अथवा उन्हें दिल्ली जाने की अनुमति नहीं मिलती, तब तक वह खनौरी बॉर्डर पर ही बैठे रहेंगे।

    51 किसानों का जत्था जाना चाहता है दिल्ली
    किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा कि पिछली बार सरकार ने किसानों को ट्रैक्टर-ट्रालियों के साथ दिल्ली जाने से रोक दिया था। इस बार किसान शांतिपूर्ण तरीके से केवल पैदल 51 किसानों का जत्था लेकर दिल्ली जाना चाहते हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें रास्ते में रोक दिया गया है। उन्होंने कहा कि किसानों का उद्देश्य शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें केंद्र सरकार तक पहुंचाना है।

    सोमवार को किसान संगठनों के प्रतिनिधि खनौरी बॉर्डर पर बैठक कर आगे की रणनीति पर विचार-विमर्श करेंगे। साथ ही हरियाणा प्रशासन के साथ एक बार फिर बैठक होने की संभावना भी जताई जा रही है।

    खनौरी बॉर्डर सील
    उधर, खनौरी बॉर्डर को हरियाणा प्रशासन की ओर से कंक्रीट बैरिकेडिंग सहित पूरी तरह सील कर दिया गया है। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।

    मौके पर वाटर कैनन और आंसू गैस के गोले दागने के उपकरण भी लगाए गए हैं। किसान फिलहाल खनौरी बॉर्डर से करीब 200 मीटर पीछे सड़क पर बैठे हुए हैं और केंद्र सरकार के साथ वार्ता की मांग पर अड़े हैं।