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  • पंजाब चुनाव से पहले राहुल गांधी की बड़ी बैठक, कांग्रेस नेताओं की गुटबाजी पर कसेंगे नकेल?

    पंजाब चुनाव से पहले राहुल गांधी की बड़ी बैठक, कांग्रेस नेताओं की गुटबाजी पर कसेंगे नकेल?

    चंडीगढ़.

    पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से चल रही गुटबाजी के बीच पार्टी हाईकमान ने अब वरिष्ठ नेताओं को एक साथ बैठाकर चुनावी रणनीति पर मंथन की तैयारी की है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी के साथ पंजाब कांग्रेस के प्रमुख नेताओं की दिल्ली में 19 और 20 अगस्त को अहम बैठक होने की संभावना है।

    बैठक में 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारियों के साथ प्रदेश संगठन में चल रहे मतभेदों पर भी चर्चा हो सकती है। 19 अगस्त को प्रस्तावित कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में विभिन्न राज्यों में आगामी चुनावों की रणनीति पर चर्चा होनी है। इसी दौरान पंजाब के नेताओं की राहुल गांधी के साथ अलग बैठक की संभावना है। इसमें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा, सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और चुनाव कैंपेन कमेटी के अध्यक्ष विजय इंदर सिंगला समेत वरिष्ठ नेता शामिल हो सकते हैं।

    एक साथ राहुल गांधी के सामने होंगे बड़े चेहरे
    यह पहली बार होगा जब पंजाब कांग्रेस के विभिन्न गुटों के प्रमुख चेहरे एक साथ राहुल गांधी के सामने होंगे। ऐसे में प्रदेश संगठन में नेतृत्व, चुनाव समितियों और टिकट वितरण को लेकर चल रही खींचतान पर हाईकमान का रुख स्पष्ट होने की उम्मीद है। खासकर वड़िंग के नेतृत्व को लेकर चन्नी खेमे की नाराजगी और रंधावा-वड़िंग के बीच हालिया मतभेद भी चर्चा में आ सकते हैं। प्रताप सिंह बाजवा ने पिछले सप्ताह राहुल गांधी से पंजाब के करीब 15 विधायकों के साथ बैठक के लिए समय मांगा था। अब प्रस्तावित दिल्ली बैठक को कांग्रेस की पंजाब इकाई में चल रहे विवाद को सुलझाने की हाईकमान की गंभीर कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

    कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल के पंजाब दौरे के दौरान भी संगठनात्मक मतभेद खुलकर सामने आए थे। हाईकमान अब चुनाव से पहले सभी नेताओं को एकजुट कर बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने और सामूहिक रणनीति बनाने पर जोर दे सकता है। राहुल गांधी के अगस्त के अंतिम सप्ताह में पंजाब दौरे और श्री हरमंदिर साहिब से चुनावी अभियान की शुरुआत की संभावनाओं के बीच दिल्ली की यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है।

  • बिहार में खनिज संपदा से हर साल मिलेगा ₹7 हजार करोड़ राजस्व, 15 अक्टूबर से शुरू होगा खनन

    बिहार में खनिज संपदा से हर साल मिलेगा ₹7 हजार करोड़ राजस्व, 15 अक्टूबर से शुरू होगा खनन

    पटना
    मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार में संसाधन की कमी नहीं है। राज्य के कई जिलों में खनिज संपदाओं का भंडार मिला है, जिससे प्राप्त होने वाली रॉयल्टी का उपयोग बिहार की जनता के हित और राज्य के विकास में किया जाएगा। इन खनिज संपदाओं से राज्य को लगभग छह से सात हजार करोड़ रुपये का सालाना राजस्व मिलेगा। मुख्यमंत्री ने सोमवार को पटना में कोयला एवं खान मंत्रालय द्वारा आयोजित महत्वपूर्ण एवं सामरिक खनिज ब्लॉकों की नीलामी एवं एनएमईडीटी कार्यशाला के उद्घाटन के मौके पर यह बात कही। कार्यशाला में गया और रोहतास स्थित तीन ब्लॉक सहित देश के कुल 20 खनिज ब्लॉकों की नीलामी पर चर्चा हुई।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि रोहतास में लाइम स्टोन, जहानाबाद तथा जमुई में मैग्नेट और औरंगाबाद, गया, बांका एवं भागलपुर में खनिज का बड़ा रिसोर्स है। इन सभी का सदुपयोग करना है। खनिज संपदा का किसी भी स्तर पर दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा। राज्य में खनिज केंद्र स्थापित करने के साथ नवंबर तक पांच लाख करोड़ रुपये के निवेश लक्ष्य को हासिल करने का प्रयास किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि कई खनिज ब्लॉकों का टेंडर किया गया है और कुछ की प्रक्रिया चल रही है। खनिज ब्लॉक आवंटन के रिकॉर्ड नौ महीने में खनन कार्य को पूर्ण करने का प्रयास होगा। पत्थर के 44 ब्लॉकों में से 28 में सर्वे का काम आगे बढ़ा है। 30 सितम्बर के पहले 30 से अधिक ब्लॉक आवंटित कर दिये जायेंगे। 15 अक्तूबर से खनन कार्य शुरू होगा। मुख्यमंत्री ने निवेशकों से निर्भीक होकर अपने काम को आगे बढ़ाने का आग्रह किया और कहा कि सरकार हर तरह से सहयोग करेगी।

    इस अवसर पर खान एवं भूतत्व मंत्री डॉ प्रमोद कुमार, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, खान मंत्रालय के संयुक्त सचिव कदम संदीप वसंत, निदेशक आशीष सक्सेना, खान एवं भूतत्व विभाग के सचिव अवनीश कुमार सिंह सहित अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित थे।

    क्रिटिकल मिनरल में 2047 से पहले आत्मनिर्भर बनेगा भारत : सतीश चंद्र दूबे
    केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दूबे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार क्रिटिकल मिनरल के मामले में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। वर्ष 2047 से पहले भारत आत्मनिर्भर बनेगा और आयात की जगह निर्यात में सक्षम होगा। क्रिटिकल मिनरल्स को अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए उन्होंने कहा कि सुई से लेकर जहाज तक, सभी जगह इसकी उपयोगिता है। केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि वृहद खनिजों के मिलने से निवेश, रोजगार और सरकार का राजस्व भी बढ़ेगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अगर राज्य सरकार समय से पहले खनन कार्य पूरा करती है तो उपरोक्त समय अवधि के लिए प्रोत्साहन राशि दी जायेगी।

  • LPG e-KYC की डेडलाइन करीब, 6 दिन में नहीं कराया तो रुक सकती है गैस बुकिंग

    LPG e-KYC की डेडलाइन करीब, 6 दिन में नहीं कराया तो रुक सकती है गैस बुकिंग

    अमृतसर.

    वास्तविक उपभोक्ताओं का सत्यापन करने, फर्जी और निष्क्रिय गैस कनेक्शनों की पहचान करने और वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से घरेलू एलीपीजी कनेक्शन उपभोक्ताओं से 16 अगस्त, 2026 तक ई-केवाईसी कराने को कहा गया था।

    जिले के 3.5 लाख के करीब एलपीजी कनेक्शन उपभोक्ताओं में से 85 प्रतिशत तो ई-केवाईसी करवा चुके हैं, लेकिन अभी भी 15 प्रतिशत इससे अछूते हैं। इनमें से कई उपभोक्ता ऐसे हैं जो मर चुके हैं या देश से बाहर हैं जबकि कई दिव्यांग हैं या बुजुर्ग हो चुके हैं जिनकी ई-केवाईसी नहीं हो सकती। ऐसे में उनके स्वजन कनेक्शन अपने नाम पर करवा सकते हैं, उन्हीं की सुविधा के लिए ही ई-केवाईसी करवाने का समय बढ़ाकर 23 अगस्त, 2026 तक कर दिया गया है। इस तरह ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी न करने वाले उपभोक्ता के पास छह दिन बाकी है, अन्यथा उनकी एलपीजी सिलिंडर बुकिंग रुक सकती है। इस बारे में तेल कंपनियों की तरफ से उपभोक्ताओं को बाकायदा रिमाइंडर मैसेज भी भेजे जा रहे हैं। एलपीजी उपभोक्ता तीन मोड-एप, डिलीवरी कर्मचारी या डिस्ट्रीब्यूटर के माध्यम से ई-केवाईसी करवा सकते हैं। उपभोक्ता अपनी सुविधा के अनुसार तीनों में से किसी भी मोड का चयन कर सकता है।

    ऐप के माध्यम से ई-केवाईसी करने का तरीका
    इंडेन गैस –

    • -इंडियनआयल वन एप डाउनलोड करें (यह एप एंडरायड व आओएस दोनों पर उपलब्ध है)।
    • -एप खोलकर अपने रजिस्टर मोबाइल नंबर अथवा ईमेल एड्रेस से साइनअप करें।
    • -फिर अपने 16 अंकों की एलपीजी आइडी जोकि आपके कैश मेमो या सब्सक्रिप्शन वाउचर पर उपलब्ध है, उसे लिंक करें।
    • -होम स्क्रीन पर नीचे दिए गए विकल्पों में से मेरी प्रोफाइल पर टैप करें।
    • -माय प्रोफाइल पेज पर एलपीजी डिटेल्स, इंडेन डिटेल्स अनुभाग में जाएं और रीकेवाईसी पर टैप करें।
    • -स्क्रीन पर कुछ निर्देश तथा शर्तें दिखाई देगीं। इन्हें ध्यान से पढ़ें और अपनी सहमति दें।
    • -फिर फेस स्कैन बटन पर क्लिक करें और बायोमीट्रिक आधार वेरीफिकेशन की प्रक्रिया पूरी करें।
    • -अगर आपका आधार बायोमीट्रिक लाक है तो पहले उसे अनलाक करें।
    • -बायोमीट्रिक लाक की स्थिति में आधार से जुड़ी ई-केवाईसी पूरी नहीं हो पाएगी। इसके लिए गूगल प्ले स्टोर या एप्पल एप स्टोर से एमआधार एप डाउनलोड करें और अपने आधार के माध्यम से रजिस्टर करें।
    • -माई आधार सेक्शन पर जाएं और बायोमीट्रिक सेटिंग्स चुनें।
    • -वहां अनलाक बायोमीट्रिक पर क्लिक करें और ओटीपी द्वारा अपना बायोमीट्रिक अनलाक करें।
    • -पूरी प्रक्रिया में किसी भी चरण में सहायता के लिए काल करें।
    • -आयल इंडस्ट्री हेल्पलाइन पर 1800 2333555 (टोल फ्री)
    • -इस तरह इंडेन एलपीजी के साथ, घर बैठे पाएं ई-केवाईसी की सुविधा और निरंतर उर्जा का भरोसा।

    भारतगैस –

    • -हेलोबीपीसीएल एप खोलें।
    • -अपने भारतगैस कनेक्शन से संबंधित एलपीजी सेवाओं में जाएं।
    • -उपलब्ध केवाईसी/आधार प्रमाणीकरण (आथेंटिकेशन) विकल्प से प्रक्रिया पूरी करें।
    • -भारत पेट्रोलियम के आधिकारिक एप में भारतगैस की एलपीजी सेवाएं उपलब्ध हैं।

    एचपी गैस –

    • -एचपी-पे एप/एचपी गैस की आनलाइन सेवा में लागिन करें।
    • -एलपीजी से संबंधित केवाईसी/आधार प्रमाणीकरण (आथेंटिकेशन) विकल्प देखें।
    • -मांगी गई जानकारी देकर प्रमाणीकरण पूरा करें।
    • -एचपीसीएल के अनुसार एचपी गैस के लिए ई-केवाईसी की सुविधा उपलब्ध है और आधार को एलपीजी खाते से जोड़ने की व्यवस्था है।

    जरूरी सावधानी –
    ओटीपी या आधार की जानकारी किसी अनजान व्यक्ति को फोन पर न बताएं। अगर ऐप में ई-केवाईसी का विकल्प नहीं दिख रहा है, तो उपभोक्ता अपने अधिकृत गैस डिलीवरी कर्मचारी/डिस्ट्रीब्यूटर से सत्यापन करा सकते हैं। एलपीजी फेडरेशन अमृतसर के अध्यक्ष अनुज सिक्का ने घरेलू गैस उपभोक्ताओं से 23 अगस्त, 2026 तक अनिवार्य ई-केवाईसी कराने की अपील की है। उनके अनुसार जिले में 3.5 लाख एलपीजी कनेक्शन उपभोक्ता है। 85 प्रतिशत लोग यह प्रक्रिया मुकम्मल कर चुके है। उम्मीद है कि बाकी के उपभोक्ता भी 23 अगस्त से पहले-पहले ई-केवाईसी करवा लेंगे। उन्होंने बताया कि उपभोक्ता अपने नजदीकी गैस वितरक के कार्यालय में आधार कार्ड और उपभोक्ता संख्या के साथ जाकर बायोमीट्रिक सत्यापन के माध्यम से ई-केवाईसी करा सकते हैं।

    ई-केवाईसी की अधिक जानकारी के लिए मोबाइल पर मैसेज देखें
    जिन लोगों को नहीं मालूम है कि उनके कनेक्शन की ई-केवाईसी हुई है या नहीं। उसके लिए उन्हें अपने मोबाइल में इनबाक्स में जाकर चेक करना होगा। क्योंकि तेल कंपनियों की तरफ से प्रत्येक उपभोक्ता को रिमाइंडर मैसेज भेजे जा रहे हैं। यदि उन्हें अपने मोबाइल में ऐसा मैसेज नहीं दिखाई देता है, तो तुरंत अपनी गैस एजेंसी में जाकर पता करें। कुछ उपभोक्ता ऐसे भी है जिनके पास एंडरायड फोन नहीं है, वे

    अपने कीपैड फोन में इनबॉक्स को क्लीयर नहीं करते, जिससे कि उन्हें मैसेज आया भी है या नहीं, बाबत पता नहीं चलता। इसके अतिरिक्त कई ऐसे उपभोक्ता होते है जो कम पढ़े-लिखे होतें है, मैसेज चेक करना तक नहीं आता। इन सारी कमियों के मद्देनजर पहले भी कुछ गैस एजेंसियां फोन करके अपने उपभोक्ताओं को ई-केवाईसी पेंडिंग रहने बारे अवगत करवा चुकी है। अब दोबारा इस कवायद को अपनाने जा रहीं है।

  • JSSC-CGL की 1,932 नियुक्तियां रद्द होने की तैयारी, 7 लाख अभ्यर्थियों पर भी संकट

    JSSC-CGL की 1,932 नियुक्तियां रद्द होने की तैयारी, 7 लाख अभ्यर्थियों पर भी संकट

    रांची
     झारखंड में जेएसएससी-सीजीएल के जरिए हुई लगभग 1,932 नियुक्तियों को रद्द करने की प्रशासनिक तैयारी और टीडीपीएल से जुड़ी करीब एक दर्जन परीक्षाएं रद्द होने से राज्य के लाखों युवाओं के भविष्य पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। इस फैसले के बाद प्रदेश में बड़े पैमाने पर कानूनी विवाद और विरोध प्रदर्शनों के आसार बन गए हैं।

    कल सीएम हेमंत सोरेन की घोषणा के बाद अब कार्मिक विभाग सीजीएल से हुई नियुक्ति को रद करने का अधिसूचना जारी करेगा। इसी के साथ संबंधित विभागों को नियुक्ति रद करने का आदेश जारी करेगा। हालांकि इससे पहले सरकार विधिक राय भी ले सकती है

    नियुक्त एवं कार्यरत कर्मी इसके विरोध में आंदोलन कर सकते हैं। सरकार के विरुद्ध उनका उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करना तय है। सीजीएल के माध्यम से 1932 लगभग पदों पर नियुक्ति हुई है, जिनकी नौकरी खत्म हो सकती है।

    टीडीपीएल से जुड़ी लगभग एक दर्जन परीक्षाएं रद होने से लगभग सात लाख अभ्यर्थी प्रभावित होंगे। इनमें लगभग एक हजार अभ्यर्थी ऐसे भी होंगे जो विभिन्न पदों पर नियुक्त हो चुके हैं।

    ये नौ परीक्षाएं भी हो सकती हैं रद, फिलहाल हैं स्थगित
    – सिविल जज जूनियर डिविजन (लिखित) परीक्षा : पद 138
    – सहायक लोक अभियोजक (बैकलाग) लिखित परीक्षा : पद 26
    – कारखाना निरीक्षक लिखित परीक्षा : पद 14
    – प्रोजेक्ट मैनेजर लिखित परीक्षा : पद 30
    – सहायक लोक अभियोजक (नियमित) लिखित परीक्षा : 134
    – वाष्पित्र निरीक्षक : 05

    प्रभाव और आंकड़े

    • बेरोजगारी और अनिश्चितता: सीजीएल नियुक्तियों के रद्द होने से लगभग 1,932 परिवारों पर सीधा संकट आएगा, वहीं टीडीपीएल (TDPL) से जुड़ी परीक्षाएं रद्द होने से लगभग 7 लाख अभ्यर्थी प्रभावित होंगे।
    • भविष्य की कानूनी लड़ाई: यदि सरकार नियुक्तियां रद्द करती है, तो प्रभावित कर्मियों द्वारा उच्च न्यायालय में याचिकाएं दायर करना तय है। इसके साथ ही कर्मचारी संघों द्वारा बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन और आंदोलन की पूरी संभावना है।

    संभावित चुनौतियां और सरकार के विकल्प
    विधिक राय: सरकार द्वारा कोई भी बड़ा कदम उठाने से पहले महाधिवक्ता या विधि विभाग से राय लेना अनिवार्य है, ताकि अदालत में सरकार का पक्ष मजबूत रहे।

    भविष्य की कार्ययोजना: बार-बार परीक्षाएं रद्द होने से राज्य की छवि और आयोग (JSSC/JPSC) की साख पर असर पड़ता है। सरकार को चाहिए कि वह भविष्य की परीक्षाओं के लिए एक पारदर्शी और फूल-प्रूफ नीति बनाए ताकि बार-बार कानूनी अड़चनें न आएं।

  • Delhi SIR: तुगलकाबाद और ओखला में सबसे ज्यादा वोट कटने का खतरा, सिर्फ 52% और 54.66% फॉर्म जमा

    Delhi SIR: तुगलकाबाद और ओखला में सबसे ज्यादा वोट कटने का खतरा, सिर्फ 52% और 54.66% फॉर्म जमा

    नई दिल्ली

    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण का प्रोसेस पूरा हो चुका है. प्रदेश में करीब 47 लाख मतदाता गैर-हाजिर या मृत कैटेगरी में शामिल किए गए हैं. इसका मतलब ये हुआ कि वे दिल्ली के मतदाता नहीं है. दिल्ली में अब तक 1 करोड़ 45 लाख 10 हजार 299 मतदाता थे. अब तक SIR के तहत 97 लाख 47 हजार 879 का फॉर्म जमा हुआ है. यानी दिल्ली में 67.18 फीसदी मतदाताओं ने अपने फॉर्म जमा कराए हैं। 

    अब अगर SIR के तीसरे चरण यानी 30 जून से 17 अगस्त की प्रक्रिया पर नजर डाली जाए, तो पता चलता है कि दिल्ली में सबसे कम तुगलकाबाद विधानसभा में मतदाताओं ने फॉर्म जमा कराए. यानी इस विधानसभा में महज 52 फीसदी मतदाताओं ने ही फॉर्म जमा किया. बाकी करीब 48 फीसदी गायब पाए गए। 

    वहीं, दूसरे नंबर पर मुस्लिम बहुल विधानसभा ओखला है, जहां 54.66 फीसदी मतदाता ही अपना फॉर्म जमा करा पाए. तीसरे नंबर पर कस्तूरबा नगर और कालकाजी विधानसभा सीटें हैं, जहां 56 फीसदी और 57 फीसदी लोगों ने फॉर्म जमा कराए. यानी दक्षिणी-पूर्व जिले में 15 लाख 57 हजार 289 मतदाता थे जबकि सिर्फ 8 लाख 77 हजार 64 मतदाता ही फॉर्म जमा करा पाए. इसका मतलब, विधानसभा क्षेत्र के सिर्फ 56.32 फीसदी मतदाता ही फॉर्म जमा करा पाए। 

    इन इलाकों में सबसे ज्यादा नाम कटने का खतरा! 
    दिल्ली के ओखला और तुगलकाबाद जैसे इलाकों में बड़ी तादाद में छात्र, कामकाजी लोग और प्रवासी मजदूर रहते हैं. ओखला में बड़ी तादात में जामिया के छात्र किराए पर रहते हैं जबकि तुगलकाबाद में फरीदाबाद बॉर्डर पर काम करने वाले प्रवासी मजदूर है। 

    जानकारों का कहना है कि इसी के चलते सबसे ज्यादा तुगलकाबाद और ओखला विधानसभा में वोटर्स अपने फॉर्म नहीं जमा पाए. ओखला विधानसभा से अमानतउल्लाह खान विधायक हैं और तुगलकाबाद विधानसभा से सहीराम पहलवान विधायक हैं. गौर करने वाली बात है कि दोनों नेता आम आदमी पार्टी के हैं। 

    दिल्ली में सबसे ज्यादा फॉर्म कहां भरे गए?
    एसआईआर की प्रक्रिया के तहत सबसे ज्यादा मतदाता फॉर्म आउटर नॉर्थ यानी बाहरी उत्तरी क्षेत्र में भरे गए. इस इलाके में 75.68 फीसदी मतदाताओं के फॉर्म जमा हुए. इलाके में कुल 8 लाख 32 हजार 510 रजिस्टर्ड वोटर्स में से 6 लाख 30 हजार 30 मतदाताओं के फॉर्म जमा हुए. बाहरी उत्तरी जिले में नरेला, बवाना और बादली जैसे विधानसभा क्षेत्र हैं. लेकिन दिल्ली में रोहिणी और शरीर बस्ती ऐसी विधानसभाएं हैं, जहां सबसे ज्यादा मतदाओं ने अपने फॉर्म जमा कराए. रोहिणी विधानसभा में 1 लाख 50 हजार 398 मतदाताओं में से 1 लाख 25 हजार 470 लोगों ने फॉर्म जमा कराए. वहीं, दूसरे नंबर पर शरीर बस्ती विधानसभा रही, जहां पर 80 फीसदी से ज्यादा मतदाताओं ने फॉर्म जमा कराया। 

  • ‘मिनी गोवा’ बनेगा पंजाब का बड़ा टूरिज्म हब, पठानकोट की झील में चलेंगे 95 सीटर क्रूज

    ‘मिनी गोवा’ बनेगा पंजाब का बड़ा टूरिज्म हब, पठानकोट की झील में चलेंगे 95 सीटर क्रूज

    पठानकोट 
    पठानकोट में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए चमरोड पत्तन (मिनी गोवा) में पैरासेलिंग और वाटर स्पोर्ट्स शुरू हो गए हैं। हालांकि रंजीत सागर बांध की झील में पैरासेलिंग अभी शुरू नहीं हुई है। यहां इसका ट्रायल सफल रहा है। जेट स्की, एयर बैलून और अन्य गतिविधियां अगस्त के अंतिम सप्ताह तक शुरू करने की तैयारी है।

    परीक्षित वाटर एडवेंचर के प्रोपराइटर पुनीत पिंटा ने बताया कि मिनी गोवा और रंजीत सागर झील का प्राकृतिक सौंदर्य पहले से पर्यटकों को आकर्षित करता है। एडवेंचर गतिविधियां शुरू होने से होटल, रेस्तरां, टैक्सी और अन्य कारोबार के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। पंजाब के साथ हिमाचल और जम्मू-कश्मीर से पर्यटकों के आने की उम्मीद है। 

    95 और 45 सीटर क्रूज चलेंगे
    पंजाब में पहली बार यहां दो क्रूज चलाए जाएंगे। बांध से मुक्तेश्वर धाम तक आठ किलोमीटर के सफर के लिए 95 और 45 सीटर क्रूज होंगे। किराया 850 रुपये जीएसटी सहित होगा। वरिष्ठ नागरिकों को 15 प्रतिशत छूट मिलेगी। क्रूज में भोजन, शौचालय और प्रति यात्री 10 लाख रुपये का बीमा होगा।

    मिनी गोवा में जिप लाइन, एटीवी, निशानेबाजी, गर्म हवा का गुब्बारा और घुड़सवारी पहले से उपलब्ध हैं। यहां आठ इको हट भी बनाए गए हैं। मिनी गोवा का एक साल का ठेका 70 लाख और झील की तरफ का 40 लाख रुपये तय हुआ है। 

  • PU छात्रसंघ चुनाव की बिछने लगी बिसात, संगठन एक्टिव; पिछले दो चुनावों के नतीजे बने चुनौती

    PU छात्रसंघ चुनाव की बिछने लगी बिसात, संगठन एक्टिव; पिछले दो चुनावों के नतीजे बने चुनौती

     चंडीगढ़
     पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) छात्रसंघ चुनाव को लेकर कैंपस में सियासी हलचल तेज हो गई है। सितंबर के पहले सप्ताह में प्रस्तावित चुनाव को लेकर छात्र संगठनों ने रणनीति बनानी शुरू कर दी है।

    पिछले दो चुनावों के नतीजों ने इस बार मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। वर्ष 2024 में पहली बार निर्दलीय उम्मीदवार ने अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज कर छात्र संगठनों के समीकरण बदले थे।

    इसके बाद पिछले वर्ष पीयू के इतिहास में पहली बार अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने अध्यक्ष पद पर कब्जा किया। लगातार बदलते चुनावी परिणामों ने सभी संगठनों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।

    इसके साथ ही इस बार के चुनाव में पांच हजार नए मतदाता पहली बार अपने मत का प्रयोग करेंगे। इसलिए इनका वोट जिस भी छात्र संगठन की ओर जाएगा उसकी तकदीर बदल जाएगी। यूनिवर्सिटी में कुल करीब 16 हजार मतदाता है। इनमें से एक तिहाई नए मतदाता है।

    ऐसे में इन वोटरों की भूमिका सबसे अहम हो जाती है। इनकी शक्ति को पहचानते हुए छात्र संगठन ने नए छात्रों को अपने पाले में करने में पूरी ताकत झोंक रहे है। नए छात्रों को लुभाने के लिए छात्र संगठनों की ओर से एडमिशन प्रक्रिया के दौरान भी विभागों के बाहर हेल्प डेस्क लगाए थे। वहीं,स्टूडेंट्स की काउंसिल की गई थी।

    1977 में हुई थी शुरुआत
    पंजाब यूनिवर्सिटी में वर्ष 1965-66 अकादमिक रूप से छात्रसंघ चुनावों की शुरुआत हुई। वर्ष 1977 में पीयू में प्रत्यक्ष रूप से छात्रसंघ चुनाव शुरू हुए। इसमें चार पदों–प्रेसिडेंट, वाइस प्रेसिडेंट, सेक्रेटरी और जॉइंट सेक्रेटरी का चुनाव होता है। हालांकि कुछ कारणों के चलते 1983 में छात्र संघ चुनाव रुक गए।

    इसके बाद 1997 में छात्रों के प्रदर्शन के बाद चुनाव प्रक्रिया दोबारा शुरू की गई। पंजाब यूनिवर्सिटी प्रशासन परिसर में शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने और छात्रों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए हर साल चुनाव करता है। इसके लिए चुनाव आयोग और कोर्ट की गाइडलाइन का पालन किया जाता है।

    ये संगठन चुनाव में सक्रिय

        अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी)
        स्टूडेंट्स फाॅर सोसाइटी (एसएफएस)
        नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई)
        स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया (सोई)
        इंडियन नेशनल स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (इनसो)
        पंजाब यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन (पुसु)
        छात्र युवा संघर्ष समिति (सीवाईएसएस)
        आईएसओ (इंडियन स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन) 

     

  • बाबूलाल मरांडी का राहुल गांधी पर हमला, छात्रों के मुद्दे पर गुप्त पत्र को लेकर उठाए सवाल

    बाबूलाल मरांडी का राहुल गांधी पर हमला, छात्रों के मुद्दे पर गुप्त पत्र को लेकर उठाए सवाल

    रांची
     झारखंड विधानसभा में विपक्ष के नेता और राज्य के पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने सोमवार को एक्स पर एक पोस्ट के जरिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। मरांडी ने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी छात्रों के मुद्दों को सुलझाने के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिख रहे हैं, लेकिन यह पत्र पूरी तरह गुप्त तरीके से भेजा जा रहा है।

    मरांडी ने लिखा, “मीडिया के माध्यम से जानकारी मिल रही है कि राहुल गांधी जी ने छात्रों के मुद्दों को सुलझाने के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है। लेकिन सवाल यह है कि ऐसी क्या मजबूरी है कि राहुल गांधी जी को गुप्त रूप से पत्र लिखना पड़ रहा है? पत्र में क्या लिखा है, यह कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष तक को नहीं पता और न ही पत्र इनके माध्यम से भेजा जा रहा है।”

    उन्होंने आगे कहा कि देशभर में राहुल गांधी छात्रों के मुद्दों पर मीडिया के सामने खुलकर बोलते हैं, फिर झारखंड के छात्रों के साथ यह आंख-मिचौली क्यों हो रही है? मरांडी ने जेपीएसी और JSSC-CGL परीक्षा में हुई कथित धांधली का जिक्र करते हुए कहा कि अब पूरा देश जान चुका है कि इस परीक्षा में सीटें कैसे बेची गईं। इस पूरे प्रकरण में मुख्यमंत्री, मुख्यमंत्री आवास, सीआईडी और अभय तिवारी समेत कई लोगों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।

    उन्होंने एक गंभीर आरोप लगाते हुए पूछा, कहीं ऐसा तो नहीं कि 2200 पदों की परीक्षा में हुई धांधली से जुटाए गए हजारों करोड़ रुपये में राहुल गांधी जी की भी कोई हिस्सेदारी है? राहुल गांधी जी, झारखंड के मेधा घोटाले प्रकरण पर अपना पक्ष स्पष्ट कीजिए और झारखंड के छात्रों को जवाब दीजिए।

    यह बयान ऐसे समय में आया है जब झारखंड में JSSC-CGL और अन्य भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं को लेकर छात्र लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। बाबूलाल मरांडी ने अपने पोस्ट में बीजेपी के शीर्ष नेताओं को भी टैग किया है।

    बाबूलाल को अनर्गल बयानबाजी करने की आदत: कांग्रेस
    प्रदेश कांग्रेस के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने बाबूलाल के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें अनर्गल बयानबाजी करने की आदत है और यह बयान इस बात का जीता-जागता उदाहरण है।

    सार्वजनिक  मंचों पर पार्टी की ओर से सरकार में शामिल मंत्रियों ने इस पत्र को जारी किया है। बाबूलाल मरांडी अपनी पार्टी के सोशल मीडिया को संचालित करनेवाली टीम से संपर्क में रहते तो इस तरह का बयान कतई  नहीं देते।

  • JPSC में अध्यक्ष-सदस्यों के इस्तीफे से नियुक्तियां ठप, 7 प्रतियोगी परीक्षाएं स्थगित

    JPSC में अध्यक्ष-सदस्यों के इस्तीफे से नियुक्तियां ठप, 7 प्रतियोगी परीक्षाएं स्थगित

    रांची
     झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और घोटालों का असर नियुक्ति प्रक्रिया पर पड़ा है। इस्तीफा के बाद आयोग में अध्यक्ष एवं सदस्य के नहीं होने से नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह ठप हो चुकी है।

    आयोग की कार्यप्रणाली और परीक्षाओं में सुधार की कवायद चल रही है। ऐसे में जेपीएससी में अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति होने के बाद ही नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ पाएगी। नियुक्ति परीक्षाओं में गड़बड़ी का असर उन सात प्रतियोगिता परीक्षाओं पर पड़ा ही है, जो अगस्त और सितंबर माह में आयोजित होनेवाली थी।

    इसका असर आनेवाली बहालियों पर भी पड़ा है। गड़बड़ियों की सीआइडी जांच शुरू होने तथा अध्यक्ष के पद से एल खियांग्ते के इस्तीफा के बाद आयोग ने सात परीक्षाओं को स्थगित कर दिया। इन सभी परीक्षाओं की तिथियां घोषित की जा चुकी थीं।

    गड़बड़ियों का असर अन्य परीक्षाओं पर भी पड़ा जो अक्टूबर से दिसंबर के बीच आयोजित होनेवाली थी। आयोग में कई विभागों से नियुक्ति की अधियाचनाएं भी मिली हैं। उन नियुक्ति परीक्षाओं का विज्ञापन भी जारी नहीं हो पा रहा है।

    बताते चलें कि 21 जुलाई को सीआइडी जांच शुरू होने के बाद तत्कालीन अध्यक्ष एल खियांग्ते ने 22 जुलाई को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद तीनों सदस्यों अजिता भट्टाचार्य, अनिमा हांसदा तथा जमाल अहमद ने भी हाल में इस्तीफा दे दिया।

    जेपीएससी से 1,645 पदों पर होनी है नियुक्ति
    झारखंड विधानसभा में छह अगस्त को पेश की गई एक्शन टेकेन रिपोर्ट (एटीआर) में ही कार्मिक विभाग ने जानकारी दी कि जेपीएससी से 1,645 विभिन्न पदों पर नियुक्ति होनी है।

    इसमें कहा गया कि जेपीएससी के माध्यम से वर्ष 2020 से अबतक कुल 3,377 पदों पर नियुक्ति हुई है। वहीं, 798 पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया जा चुका है, जबकि 847 पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी करने की प्रक्रिया चल रही है।

    महत्वपूर्ण परीक्षाओं के परिणाम पर भी असर
    नियुक्ति प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी का असर कई महत्वपूर्ण परीक्षाओं पर भी पड़ा है। इनमें विश्वविद्यालयों एवं अंगीभूत कालेजों में सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति को लेकर अर्हता तय करने से संबंधित झारखंड पात्रता परीक्षा (जेट) प्रमुख हैं, जो राज्य में 18 वर्ष बाद आयोजित हुई है। इसका परिणाम जारी किया जाना है।

     

  • जींद से अमृतसर-लुधियाना जाने वाली बसों का बदला रूट, अब कैथल फ्लाईओवर के नीचे से गुजरेंगी

    जींद से अमृतसर-लुधियाना जाने वाली बसों का बदला रूट, अब कैथल फ्लाईओवर के नीचे से गुजरेंगी

    जींद.

    पटियाला चौक के बस यात्रियों के लिए खुशखबरी है। रोडवेज जींद डिपो प्रबंधन ने अमृतसर और लुधियाना रूट पर चलने वाली बसों के लिए नया संचालन निर्देश जारी किया है। इन रूटों की बसों को निर्धारित मार्ग के अनुसार कैथल फ्लाईओवर के नीचे से संचालित किया जाएगा।

    बसों को शहर के अंदर अनावश्यक रूप से प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। डिपो प्रबंधन की ओर से जारी निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित रूट के बजाय बसों का संचालन शहर के अंदर करने पर संबंधित चालक व परिचालक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। प्रबंधन ने चालक व परिचालकों को निर्देशों की पालना सुनिश्चित करने के लिए कहा है।
    अमृतसर और लुधियाना रूट की बसें कैथल फ्लाईओवर के नीचे से गुजरने के कारण इन बसों में सफर करने वाले यात्रियों को बस पकड़ने के लिए मुख्य बस स्टैंड तक जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे यात्रियों के समय और अतिरिक्त आवागमन दोनों की बचत होगी। महाप्रबंधक राहुल जैन ने कहा कि बसों के संचालन को लेकर चालक व परिचालकों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे निर्धारित मार्ग और स्टापेज का ही इस्तेमाल करें।