Category: लाइफस्टाइल

  • ChatGPT का बड़ा धमाका! नया हेल्थ फीचर लॉन्च, क्या डॉक्टरों की जगह ले पाएगा AI?

    ChatGPT का बड़ा धमाका! नया हेल्थ फीचर लॉन्च, क्या डॉक्टरों की जगह ले पाएगा AI?

    नई दिल्ली

    अगर आपने कभी ChatGPT से अपनी ब्लड टेस्ट रिपोर्ट या मेडिकल रिपोर्ट समझाने की कोशिश की है, तो अब यह काम पहले से आसान होने वाला है. OpenAI ने Health in ChatGPT नाम का नया फीचर लॉन्च किया है। 

    इसकी मदद से यूजर अपनी मेडिकल रिपोर्ट, अस्पताल के रिकॉर्ड और ऐपल हेल्थ का डेटा सीधे ChatGPT से जोड़ सकेंगे. इसके बाद ChatGPT उसी जानकारी के आधार पर सवालों के जवाब देगा और हेल्थ से जुड़ी बातें आसान भाषा में समझाएगा। 

    फिलहाल यह फीचर अमेरिका में 18 साल या उससे ज्यादा उम्र के यूजर्स के लिए जारी किया गया है. इसे वेब और iPhone पर इस्तेमाल किया जा सकेगा. OpenAI का कहना है कि यह फीचर Free, Go, Plus और Pro प्लान वाले यूजर्स के लिए उपलब्ध होगा। 

    अब तक अगर किसी यूजर को अपनी लैब रिपोर्ट समझनी होती थी, तो उसे हर बार पीडीएफ या फोटो अपलोड करनी पड़ती थी. नए हेल्थ फीचर में एक बार मेडिकल रिकॉर्ड ऐड करने के बाद ChatGPT उसी डेटा का इस्तेमाल करके जवाब दे सकेगा। 

    उदाहरण के लिए, अगर किसी की नई ब्लड रिपोर्ट आई है तो ChatGPT उसे पुरानी रिपोर्ट से तुलना करके बता सकता है कि क्या बदला है. अगर डॉक्टर ने कोई मेडिकल नोट लिखा है, तो उसे आसान भाषा में समझा सकता है. यह डॉक्टर से मिलने से पहले पूछे जाने वाले सवाल भी तैयार करने में मदद कर सकता है। 

    अगर आपके पास ऐपल वॉच या iPhone है और आप ऐपल हेल्थ इस्तेमाल करते हैं, तो ChatGPT आपकी नींद, चलने-फिरने, एक्सरसाइज और दूसरी हेल्थ जानकारी को भी समझ सकेगा. अगर कोई फिटनेस या न्यूट्रिशन ऐप ऐपल हेल्थ के साथ डेटा शेयर करता है, तो वह जानकारी भी ChatGPT तक पहुंच सकती है. इससे यूजर अपने हेल्थ डेटा को एक जगह देखकर बेहतर तरीके से समझ पाएंगे। 

    OpenAI का कहना है कि यह फीचर डॉक्टर की जगह लेने के लिए नहीं बनाया गया है. इसका मकसद सिर्फ लोगों को अपनी हेल्थ रिपोर्ट और मेडिकल जानकारी समझने में मदद करना है. कंपनी ने साफ कहा है कि इलाज या बीमारी का फैसला हमेशा डॉक्टर की सलाह से ही लेना चाहिए। 

    हेल्थ डेटा को लेकर लोगों की सबसे बड़ी चिंता प्राइवेसी होती है. OpenAI का दावा है कि मेडिकल रिकॉर्ड और ऐपल हेल्थ का डेटा अलग सुरक्षा के साथ रखा जाएगा। 

    कंपनी ने कहा है कि इस डेटा का इस्तेमाल ChatGPT के AI मॉडल को ट्रेन करने या ऐड्स दिखाने के लिए नहीं किया जाएगा. यूजर यह भी तय कर सकेंगे कि ChatGPT कब और किस बातचीत में उनकी हेल्थ जानकारी का इस्तेमाल करे। 

    हालांकि इस फीचर के लॉन्च के साथ कुछ सवाल भी उठ रहे हैं. हाल ही में अमेरिका में एक शख्स ने आरोप लगाया कि ChatGPT की मेडिकल सलाह पर भरोसा करने की वजह से उसने समय पर इलाज नहीं कराया. इसके बाद OpenAI ने फिर दोहराया कि ChatGPT सिर्फ जानकारी देने वाला टूल है, डॉक्टर का विकल्प नहीं। 

  • Gmail पासवर्ड भूलने की चिंता खत्म, Google लाया सेल्फी वीडियो फीचर

    Gmail पासवर्ड भूलने की चिंता खत्म, Google लाया सेल्फी वीडियो फीचर

    Google के जीमेल का पासवर्ड भूल गए हैं और उसपर रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर या फोन रिकवरी पास में नहीं है. ये एक बड़ी मुश्किल साबित हो सकती है. लोगों की परेशानी खत्म करने के लिए गूगल अब एक नए फीचर लेकर आया है, जिसका नाम सेल्फी वीडियो है.

    सेल्फी वीडियो की मदद से यूजर्स को एक शॉर्ड वीडियो रिकॉर्ड करना होगा. फिर उस वीडियो से जीमेल यूजर्स अपनी ऑथेंटिसिटी को साबित कर पाएगा और पासवर्ड भी रिकवर कर पाएगा. इसकी जानकारी खुद गूगल ने ब्लॉगपोस्ट पर दी है.

    गूगल के मुताबिक, सेल्फी वीडियो उन लोगों के लिए डिजाइन किया गया है, जो यूजर्स अपने जीमेल का दोबारा एक्सेस हासिल करना चाहते हैं. पासवर्ड रिकवरी के दौरान अगर उनके पास स्टैंडर्ड साइन इन ऑप्शन उपलब्ध नहीं है तो वे वीडियो सेल्फी का ऑप्शन चुन सकते हैं.

    भविष्य में अगर कोई यूजर अपना जीमेल पासवर्ड भूल जाते हैं और वह अकाउंट को रिकवर करना चाहते हैं. ऐसे में गूगल सेल्फी वीडियो फीचर उन लोगों के लिए बड़े ही काम का साबित होगा.

    गूगल सेल्फी वीडियो फीचर कैसे काम करेगा?
    गूगल का सेल्फी वीडियो फीचर यूज करने के लिए सबसे पहले यूजर्स को सेटअप के दौरान एक शॉर्ट वीडियो रिकॉर्ड करना होगा. गूगल इस वीडियो को सेल्फी कैमरा की मदद से रिकॉर्ड करेगा और एक बार प्रोसेस कंप्लीट करने के बाद वह वीडियो रेफ्रेंस के लिए सेव हो जाएगा.

    एक बार रेफ्रेंस वीडियो सेव होने के बाद आगे जब भी Forget Password चुनेंगे या स्टैंडर्ड मैथेड से साइनइन नहीं कर पाएंगे, तो गूगल उसके बाद एक वीडियो रिकॉर्ड करने की सुविधा देगा, जो गूगल अकाउंट को ऑथेंटिकेट करने का करेगा.

    गूगल ने बताया है कि सेल्फी वीडियो के दौरान यूजर्स को अपना लाइव वीडियो रिकॉर्ड करना होगा. इसमें फोटो या पहले रिकॉर्डेड वीडियो का इस्तेमाल नहीं किया कर पाएंगे.

    डीपफेक को भी पकड़ सकेगा ये फीचर
    गूगल ने बताया है कि इस नए वीडियो ऑथेंटिकेशन के अंदर मल्टीपल सिक्योरिटी लेयर होती हैं. यह सिर्फ रियल वीडियो को ही ऑथेंटिकेट करेगा और डीपफेक वीडियो को भी पहचान सकेगा.

  • iPhone 17 सीरीज होगी महंगी, Apple बढ़ा सकता है कीमतों में 15 फीसदी तक इजाफा

    iPhone 17 सीरीज होगी महंगी, Apple बढ़ा सकता है कीमतों में 15 फीसदी तक इजाफा

    अब ऐपल अपने iPhone की कीमत में इजाफा करने जा रहा है. अभी तक सैमसंग समेत कई चाइनीज ब्रांड अपने स्मार्टफोन की कीमत में इजाफा कर चुके हैं. यहां तक कि ऐपल भी आईपैड और मैकबुक की कीमत में इजाफा कर चुका है.

    लेटेस्ट रिपोर्ट में दावा किया है कि Apple iPhone 17 और iPhone 17 Pro सीरीज की कीमत में इजाफा किया जाएगा. काउंटरप्वाइंट की रिपोर्ट के मुताबिक, ऐपल अपने आईफोन की कीमत में करीब 15 परसेंट तक का इजाफा कर सकता है.

    ऐपल ने बीते सप्ताह ही अपने मैकबुक और आईपैड की कीमत में इजाफा किया था. उस दौरान प्रोडक्ट की कीमतों में करीब 20 से 42 परसेंट तक का इजाफा किया था. उस दौरान कंपनी ने आईफोन की कीमत में इजाफा नहीं किया था.

    महंगे होते कंपोनेंट और हार्डवेयर
    कंपनी लंबे समय से महंगे होते कंपोनेंट और चिप के बढ़ते दाम का सामना करने रही है, जिसकी वजह से अब कंपनी अपने प्रोफिट को बनाए रखना चाहती है, जिसके लिए वह कीमतों में इजाफा करने जा रही है.

    अब iPhone की कीमत में इजाफा होने जा रहा
    गैजेट 360 ने अपनी रिपोर्ट में टिप्स्टर के हवाले से बताया है कि अब iPhone की कीमत में इजाफा होने जा रहा है. उदाहरण के तौर पर देखें तो बीते साल iPhone 17 (256GB) की कीमत 82,900 रुपये थी, जिसमें अब 12 हजार रुपये का इजाफा होने जा रहा है. ऐसे में इस हैंडसेट की कीमत 94,900 रुपये होने की आशंका है.

    रिपोर्ट में बताया है कि iPhone 17 Pro और iPhone 17 Pro Max की कीमत में भी इजाफा होगा. हालांकि अभी तक कंपनी की तरफ से इस प्राइस को लेकर कोई डिटेल्स शेयर नहीं की है.

    जापान में इजाफा कर चुका है ऐपल
    Apple ने हाल ही में जापान देश में iPhone की कीमतों में भी इजाफा किया है, जहां करीब 11 परसेंट तक का बढ़ावा किया गया है. अब कंपनी आईफोन की कीमतों का इजाफा और भी देशों में करने जा रहा है.

  • सुबह के नाश्ते में बनाएं कुरकुरा आटा-प्याज चीला, आसान रेसिपी

    सुबह के नाश्ते में बनाएं कुरकुरा आटा-प्याज चीला, आसान रेसिपी

    सुबह के नाश्ते में चीला सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले ब्रेकफास्ट में से एक है. यह आसानी से बन भी जाता है और हेल्दी व टेस्टी भी होता है. आपने अब तक  कई तरह के चीले खाए होंगे लेकिन क्या कभी आटे और प्याज का चीला ट्राई करें. यह चीला खाने में काफी टेस्टी होता है और सुबह के बिजी शेड्यूल में भी कुछ ही मिनटों में तैयार हो जाता है.

    बाहर से  कुरकुरा और अंदर से नरम इस चीले को आप हरी चटनी, टोमैटो सॉस या चाय के साथ परोस सकते हैं. आइए जानते हैं कि आटे और प्याज से चीला कैसे बना सकते हैं और इसे बनाने के लिए किन-किन चीजों की जरूरत होगी.

    इंग्रेडिएंट्स (ingredients)
    2 बड़े चम्मच गेहूं का आटा
    1/2 छोटा चम्मच सूजी
    1 प्याज (बारीक कटा हुआ)
    2 हरी मिर्च (बारीक कटी हुई)
    1 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर
    नमक स्वादानुसार
    पानी आवश्यकतानुसार
    तेल आवश्यकतानुसार

    आटे और प्याज से चीला कैसे बनाते हैं?
        आटे और प्याज से चीला बनाने के लिए सबसे पहले एक बाउल में आटा, सूजी, बारीक कटा प्याज, हरी मिर्च, लाल मिर्च पाउडर और नमक डालें.
        अब इसमें थोड़ा-थोड़ा पानी मिलाते हुए पतला और बिना गुठली वाला स्मूद घोल तैयार कर लें. ध्यान रखें कि घोल ज्यादा गाढ़ा न हो, क्योंकि पतले घोल से चीला ज्यादा कुरकुरा बनता है.
        अब गैस पर तवा गर्म करें और उस पर थोड़ा-सा तेल लगाएं. तैयार घोल को तवे पर गोल आकार में फैलाएं.
        इसे मीडियम गैस पर 1 से 2 मिनट तक पकाएं. फिर किनारों पर थोड़ा-सा तेल डालें और सावधानी से पलट दें. दूसरी तरफ से भी सुनहरा और कुरकुरा होने तक सेंक लें.
        इसी तरह बाकी घोल से भी चीले तैयार करें. गरमा-गरम आटा और प्याज का चीला हरी चटनी, दही या टोमैटो सॉस के साथ परोसें.

     

  • घर पर बनाएं क्रीमी शरीफा आइसक्रीम, गर्मी में देगी ठंडक का स्वाद

    घर पर बनाएं क्रीमी शरीफा आइसक्रीम, गर्मी में देगी ठंडक का स्वाद

    गर्मी के मौसम में ठंडी-मीठी आइसक्रीम हर किसी की पसंद होती है. लेकिन बाजार की आइसक्रीम में मिलावट, प्रिजर्वेटिव्स और आर्टिफिशियल फ्लेवर का डर बना रहता है. ऐसे में अगर आप बच्चों और परिवार को कुछ टेस्टी और हेल्दी खिलाना चाहते हैं, तो घर पर ही शरीफा की क्रीमी आइसक्रीम बना सकते हैं.

    शरीफे में प्राकृतिक मिठास, विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं. इसकी आइसक्रीम न सिर्फ खाने में स्वादिष्ट लगती है, बल्कि सेहत के लिहाज से भी एक बेहतरीन विकल्प है. शरीफा को सीताफल और इंग्लिश में कस्टर्ड एप्पल भी कहते हैं.

    शरीफा आइसक्रीम बनाने की सामग्री
    पके हुए शरीफे का गुदा: 1 कप (बीज निकले हुए)
    फुल क्रीम दूध: 2 कप

    फ्रेश क्रीम या मलाई: 1 कप

    कंडेंस्ड मिल्क या चीनी: 1/2 कप (स्वादानुसार)

    मिल्क पाउडर: 2-3 चम्मच (क्रीमी टेक्सचर के लिए)

    इलायची पाउडर: 1/4 छोटी चम्मच (ऐच्छिक)

    बनाने की आसान विधि
    पके हुए शरीफे को छीलकर छलनी या हाथों की मदद से बीज अलग कर लें और पल्प को एक कटोरी में निकाल लें.

    एक भारी तले के बर्तन में दूध उबालें. जब दूध उबलकर आधा रह जाए, तो इसमें चीनी/कंडेंस्ड मिल्क और मिल्क पाउडर डालकर अच्छी तरह मिलाएं और ठंडा होने दें.

    ठंडे हुए दूध में फ्रेश क्रीम और आधा शरीफे का पल्प डालकर मिक्सी में 1-2 मिनट के लिए ब्लेंड कर लें, ताकि मिश्रण एकदम स्मूथ हो जाए.

    अब इस स्मूथ मिक्सचर में बचा हुआ आधा शरीफे का पल्प (बाइट्स के लिए) और इलायची पाउडर डालकर चम्मच से हल्का मिला लें.

    इस मिश्रण को एक एयरटाइट कंटेनर में डालें. ऊपर से बटर पेपर या फॉयल पेपर से ढककर ढक्कन बंद कर दें (ताकि बर्फ की परत न जमे).

    इसे 7-8 घंटे या रात भर के लिए फ्रीजर में सेट होने के लिए रख दें.

  • बारिश में बनाएं क्रिस्पी वेज भजिया, चाय के साथ मिलेगा स्वाद

    बारिश में बनाएं क्रिस्पी वेज भजिया, चाय के साथ मिलेगा स्वाद

    बारिश की हल्की रिमझिम फुहारें हों और साथ में कड़क चाय का कुल्हड़ तो मन सिर्फ गरमा-गरम और क्रिस्पी पकौड़े खाने का ही करता है. लेकिन अक्सर हर घर में सिर्फ आलू या प्याज के पकौड़े ही बनाए जाते हैं, जिन्हें बार-बार खाकर स्वाद में कुछ नयापन नहीं लगता.

    अगर आप इस बारिश अपनी शाम की चाय का मजा दोगुना करना चाहते हैं तो मिक्स वेजिटेबल भजिया  एक बेहतरीन ऑप्शन है. पत्तागोभी, गाजर, शिमला मिर्च और प्याज के कॉम्बिनेशन से तैयार यह भजिया बाहर से एकदम कुरकुरी और अंदर से बेहद फ्लेवरफुल होती है. इसे बनाना बेहद आसान है और यह मिंटो में बनकर तैयार हो जाती है. आइए जानते हैं इसे सुपर क्रिस्पी बनाने की सीक्रेट रेसिपी.

    रेसिपी (Recipe)
    सामग्री:
    पत्तागोभी – 1 कप (बारीक पतली कटी हुई)

    प्याज – 1 (लंबे और पतले स्लाइस में कटा हुआ)

    गाजर – ½ कप (कद्दूकस या पतली लंबाई में कटी हुई)

    शिमला मिर्च – ½ कप (बारीक कटी हुई)

    हरी मिर्च – 2 (बारीक कटी हुई)

    हरा धनिया – 2-3 बड़ी चम्मच (बारीक कटा हुआ)

    बेसन – 1 कप

    चावल का आटा – 2 बड़ी चम्मच (अतिरिक्त क्रिस्पिनेस के लिए)

    अजवाइन – ½ छोटा चम्मच

    लाल मिर्च पाउडर – 1 छोटा चम्मच

    हल्दी पाउडर – ¼ छोटा चम्मच

    चाट मसाला – ½ छोटा चम्मच

    गरम तेल – 1 बड़ी चम्मच (सीक्रेट इंग्रीडिएंट)

    तेल – तलने के लिए
    स्वादानुसार नमक

    बनाने की विधि:
    एक बड़े बाउल में कटी हुई पत्तागोभी, प्याज, गाजर, शिमला मिर्च, हरी मिर्च और हरा धनिया डालें.

    अब सब्जियों में अजवाइन (हथेली से मसलकर), लाल मिर्च, हल्दी, चाट मसाला और स्वादानुसार नमक डालें. इसके बाद बेसन और चावल का आटा मिलाएं.

    सब्जियों में नमक डालते ही वे अपना पानी छोड़ती हैं, इसलिए पहले बिना पानी डाले हाथों से सब्जियों और बेसन को अच्छी तरह मैश करते हुए मिक्स करें. अगर जरूरत लगे, तो सिर्फ 1-2 चम्मच पानी ही छिड़कें. बैटर को बहुत गीला न करें, सब्जियों पर बेसन की बस हल्की कोटिंग होनी चाहिए.

    बैटर में 1 बड़ी चम्मच कड़क गर्म तेल डालकर मिलाएं. इससे भजिया तेल कम सोखेगी और बहुत क्रिस्पी बनेगी.

    कड़ाही में तेल तेज गर्म करें. अब बैटर से थोड़ा-थोड़ा हिस्सा लेकर रफ शेप में (बिना गोल किए) गर्म तेल में डालते जाएं.

    आंच को मध्यम रखते हुए भजिया को दोनों तरफ से सुनहरा और क्रिस्पी होने तक तलें.

    तैयार गरमा-गरम वेजिटेबल भजिया को टिशू पेपर पर निकालें, ऊपर से थोड़ा सा चाट मसाला छिड़कें और हरी चटनी व गरमा-गरम चाय के साथ सर्व करें.

  • घर पर बनाएं बाजार जैसी कुरकुरी भाकरवड़ी, चाय के साथ लगेगी बेहद स्वादिष्ट

    घर पर बनाएं बाजार जैसी कुरकुरी भाकरवड़ी, चाय के साथ लगेगी बेहद स्वादिष्ट

     चाय के साथ कुछ ऐसा खाने का मन हो जो स्वाद में मसालेदार, टेक्सचर में एकदम क्रिस्पी और खाने में बेहद टेस्टी हो, तो भाकरवड़ी से बेहतर भला क्या हो सकता है. नाम सुनकर आपको लग रहा होगा कि यह क्या बला है, लेकिन महाराष्ट्र और गुजरात का यह पारंपरिक स्नैक है. इनके अलावा आज यह डिश पूरे देश में खूब पसंद की जाती है. शाम की चाय के साथ सर्व की जाने वाली भाकरवड़ी बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आती है अक्सर लोग इसे बाजार से खरीदकर खाते हैं, लेकिन घर पर बनी ताजी भाकरवड़ी का स्वाद ही अलग होता है.

    अच्छी बात यह है कि इसे बनाने के लिए किसी खास या महंगे सामान की जरूरत नहीं पड़ती. घर में मौजूद कुछ सामान्य सामग्री से आप आसानी से स्वादिष्ट और लंबे समय तक कुरकुरी रहने वाली भाकरवड़ी तैयार कर सकते हैं. गोल-गोल रोल की गई भाकरवड़ी बाहर से कुरकुरी होती है, जबकि इसके अंदर नारियल, तिल, खसखस और कई तरह के मसालों की स्टफिंग भरी होती है.  तो चलिए जानते हैं घर पर क्रिस्पी और मसालेदार भाकरवड़ी बनाने की आसान रेसिपी.

    भाकरवड़ी बनाने के लिए सामग्री
    आटे के लिए:
        1 कप मैदा
        2 बड़े चम्मच बेसन
        2 बड़े चम्मच तेल
        नमक स्वादानुसार
        पानी जरूरत के अनुसार

    स्टफिंग के लिए:
        ½ कप सूखा नारियल
        2 बड़े चम्मच तिल
        2 बड़े चम्मच खसखस
        1 बड़ा चम्मच धनिया के बीज
        1 छोटा चम्मच जीरा
        1 छोटा चम्मच सौंफ
        1-2 सूखी लाल मिर्च
        1 छोटा चम्मच अमचूर पाउडर
        ½ छोटा चम्मच हल्दी
        ½ छोटा चम्मच गरम मसाला
        1 छोटा चम्मच चीनी
        नमक स्वादानुसार

    भाकरवड़ी बनाने का आसान तरीका
        सबसे पहले एक कटोरे में मैदा, बेसन, नमक और तेल डालकर अच्छी तरह मिला लें. अब थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए सख्त आटा गूंथ लें. आटे को ढककर करीब 15 से 20 मिनट के लिए रख दें.
        अब एक पैन में सूखा नारियल, तिल, खसखस, धनिया के बीज, जीरा, सौंफ और सूखी लाल मिर्च को हल्का रोस्ट कर लें. ठंडा होने के बाद इन्हें दरदरा पीस लें.
        इस मिक्सर को जार से निकाल लें और इसमें अमचूर, हल्दी, गरम मसाला, चीनी और नमक मिलाएं.
        अब आटे की लोई बनाकर इसे पतला और लंबा बेल लें. पूरी सतह पर तैयार मसाला फैलाएं और हल्के हाथों से दबा दें.
        अब इसे कसकर रोल करते हुए बेलन की शेप दें. किनारे पर थोड़ा पानी लगाकर रोल को अच्छी तरह सील कर दें. अब इस रोल को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें और हर टुकड़े को हल्का दबा दें.
        इस दौरान कड़ाही में तेल गर्म करें और जब तेल गर्म हो जाए तब भाकरवड़ी को मिडियम-स्लो आंच पर सुनहरा और कुरकुरा होने तक तलें.
        तली हुई भाकरवड़ी को पेपर टॉवल पर निकाल लें. ठंडी होने के बाद इसे एयरटाइट डिब्बे में स्टोर करें.

    कुरकुरी भाकरवड़ी बनाने का सीक्रेट
    भाकरवड़ी को हमेशा मिडियम और स्लो आंच पर फ्राई करें. तेज आंच पर तलने से यह बाहर से जल्दी ब्राउन हो जाएगी, लेकिन अंदर से कुरकुरी नहीं बनेगी. साथ ही आटा बहुत नरम न गूंथें, तभी भाकरवड़ी का टेक्सचर एकदम परफेक्ट आएगा.

    चाय के साथ करें सर्व
    सुबह हो या शाम गरमा-गरम चाय और कॉफी के साथ सर्व की गई यह मसालेदार और क्रिस्पी भाकरवड़ी बहुत टेस्टी लगती है. आप चाहे तो इसे ऑफिस में भी शाम की छोटी भूख के लिए बैग में रखकर ले जा सकते हैं.

  • इंस्टाग्राम पर स्टूडेंट प्रोटेस्ट कंटेंट शैडो-बैन का आरोप, मेटा से जवाब मांग

    इंस्टाग्राम पर स्टूडेंट प्रोटेस्ट कंटेंट शैडो-बैन का आरोप, मेटा से जवाब मांग

    नई दिल्ली
     सोशल मीडिया यूजर्स और कंटेंट क्रिएटर्स ने बुधवार को शिकायत की कि दिल्ली में चल रहे स्टूडेंट प्रोटेस्ट की फोटोज और वीडियोज को मेटा की तरफ से बिना किसी एक्सप्लेनेशन या अलर्ट के इंस्टाग्राम पर शैडो-बैन किया जा रहा है। इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन (IFF) के फाउंडर और वकील अपार गुप्ता ने ET को बताया कि कुछ स्टोरीज को अब रिस्ट्रिक्ट कर दिया गया है और उन पर 'sensitive content' का मैसेज दिख रहा है, जबकि उनमें ऐसा कुछ भी सेंसिटिव नहीं है। इनमें टेलीविजन ब्रॉडकास्ट के क्लिप्स और इसी तरह का कंटेंट शामिल है।

    कई यूजर्स ने नोट किया कि मेटा ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और पॉलिटिशियन अनीश गवान्डे की पोस्ट्स को 'sensitive content' के तौर पर मार्क किया था। IFF फाउंडर अपार गुप्ता ने कहा कि हालांकि ये ट्रांसपेरेंसी का एक लिमिटेड फॉर्म है, लेकिन सच ये है कि रिस्ट्रिक्शन तो लगाया जा रहा है, पर कंटेंट स्टैंडर्ड खुद डिस्क्लोज नहीं किया जा रहा है। वे मेटा से ये डिस्क्लोज करने की मांग कर रहे हैं कि ऐसा क्यों किया जा रहा है।

    पिछले दो दिनों से सोशल मीडिया पर प्रोटेस्ट साइट पर हुई झड़पों के वीडियोज और फोटोज भरे पड़े हैं, जहां पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया। कई यूजर्स ने कहा कि उनका इंस्टाग्राम फीड प्रोटेस्ट से जुड़ी पोस्ट्स को प्रायोरिटी नहीं दे रहा है। ET की रिपोर्ट के मुताबिक, नाम न छापने की शर्त पर एक यूजर ने बताया कि उनका इंस्टाग्राम डिस्कवरी पेज प्रोटेस्ट की इमेजेस और वीडियोज नहीं दिखा रहा है, जबकि वे पिछले कुछ हफ्तों से ऐसा कंटेंट एक्टिवली देख रहे हैं। उन्होंने आगे बताया कि कुछ पोस्ट्स को 'sensitive content' के तौर पर फ्लैग किया गया है, लेकिन 'know more' पर क्लिक करने के बाद भी वे उसे देख नहीं पा रहे हैं।

    IFF ने मेटा से पूछा है कि क्या रिपोर्ट की गई कोई भी कार्रवाई सरकारी अथॉरिटीज की लीगल डिमांड्स से जुड़ी है। एल्गोरिदम पर इंस्टाग्राम के ब्लॉग के मुताबिक, प्लेटफॉर्म के पास ऐसा कोई सिंगल एल्गोरिदम नहीं है जो ये तय करे कि लोग एप पर क्या देखते हैं। ब्लॉग में कहा गया है कि वे कई तरह के एल्गोरिदम, क्लासिफायर्स और प्रोसेस का इस्तेमाल करते हैं, जिनमें से हर एक का अपना पर्पज होता है।

    इस बीच, सेंसिटिव कंटेंट पर मेटा का कम्युनिटी स्टैंडर्ड कहता है कि वे समझते हैं कि ग्राफिक और वॉयलेंट इमेजरी को लेकर लोगों की सेंसिटिविटी अलग-अलग होती है। यूजर्स को ऐसे कंटेंट से बचाने के लिए, वे सबसे ज्यादा ग्राफिक कंटेंट को हटा देते हैं और दूसरे टाइप के कंटेंट पर वार्निंग लेबल जोड़ देते हैं ताकि लोगों को क्लिक करने से पहले पता चल सके कि ये सेंसिटिव हो सकता है।

    अकाउंट ब्लॉकिंग
    बुधवार शाम को 25 मिलियन फॉलोअर्स वाले CJP के ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट को टेम्परेरी तौर पर ब्लॉक कर दिया गया था। मेटा ने हैंडल पर एक मैसेज इश्यू किया कि ये अकाउंट इंडिया में अवेलेबल नहीं है, क्योंकि उन्होंने इस कंटेंट को रिस्ट्रिक्ट करने की लीगल रिक्वेस्ट का पालन किया है। इससे पहले उसी दिन, रिपोर्ट्स आईं थी कि मेटा ने CJP के स्पोक्सपर्सन सौरव दास के अकाउंट को सिस्टम द्वारा गलती से सस्पेंड करने के बाद अनब्लॉक कर दिया था। मेटा के ऑटोमेटेड मॉडरेशन सिस्टम ने इस अकाउंट को गलती से फ्लैग कर दिया था, जिसे गलती सामने आने के बाद रिस्टोर कर दिया गया।

    लीगल राइट्स
    हालांकि ये प्रोटेस्ट फिजिकली नई दिल्ली में हुआ, लेकिन देशभर के नागरिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पोस्ट्स और स्टोरीज के जरिए ऑनलाइन उनसे जुड़े। लीगल और साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स के मुताबिक दंगों या प्रोटेस्ट के दौरान प्लेटफॉर्म्स के पास कुछ सेंसरशिप पावर्स होती हैं। हालांकि, बिना किसी एक्सप्लेनेशन या रीजनिंग के, ऐसी कार्रवाइयां संविधान के आर्टिकल 19 (1) (a) का उल्लंघन कर सकती हैं, जो फ्रीडम ऑफ स्पीच एंड एक्सप्रेशन की गारंटी देता है।

    एक इंडस्ट्री एक्सपर्ट ने कहा कि इस बात के डॉक्यूमेंटेड सबूत मौजूद हैं कि अट्रॉसिटीज और ह्यूमन राइट्स एब्यूज से जुड़े कंटेंट को, जिन्हें UN जैसी ह्यूमन राइट्स बॉडीज और ऑर्गनाइजेशन्स रिकॉग्नाइज करती हैं, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स द्वारा रिस्ट्रिक्ट किया गया है।

    सोमवार को CJP ने NEET-UG एग्जाम में हुई गड़बड़ियों को लेकर जंतर-मंतर से दिल्ली स्थित संसद तक 'चलो संसद' मार्च का कॉल दिया था, जिसमें प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।

     

  • चार्जिंग पोर्ट की सफाई में रखें सावधानी, गलत तरीका कर सकता है नुकसान

    चार्जिंग पोर्ट की सफाई में रखें सावधानी, गलत तरीका कर सकता है नुकसान

    स्मार्टफोन का चार्जिंग पोर्ट एक अहम हिस्सा है. चार्जिंग से लेकर डेटा ट्रांसफर के लिए जरूरी है. फोन जेब, बैग और धूल वाली जगहों पर रखने से पोर्ट के अंदर धीरे-धीरे धूल, कपड़ों के रेशे और छोटे-छोटे कण जमा हो जाते हैं. ऐसे में चार्जिंग केबल ठीक से कनेक्ट नहीं हो पाती और चार्जिंग में दिक्कत आने लगती है. कई बार केबल लगाते ही लूज भी होने लगता है.

    चार्जिंग पोर्ट की सफाई करना जरूरी है, लेकिन इसे गलत तरीके से साफ करना आपके फोन को नुकसान भी पहुंचा सकता है. इसलिए सफाई करने से पहले यह जानना जरूरी है कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं.

    सबसे पहले फोन को पूरी तरह बंद कर दें. अगर चार्जर लगा है तो उसे निकाल दें. अब किसी टॉर्च की मदद से चार्जिंग पोर्ट के अंदर देखें. अगर आपको धूल या कपड़ों के रेशे दिखाई दे रहे हैं, तभी सफाई करें. अगर पोर्ट साफ दिख रहा है और फिर भी फोन चार्ज नहीं हो रहा, तो समस्या चार्जर, केबल या फोन के हार्डवेयर में भी हो सकती है.

    अगर सिर्फ हल्की धूल जमी है तो एक साफ और सूखे, मुलायम ब्रश से बहुत हल्के हाथ से पोर्ट के बाहर और किनारों की सफाई करें. किसी भी चीज को जोर से अंदर न डालें. इससे पोर्ट के अंदर लगे छोटे-छोटे पिन खराब हो सकते हैं.

    बहुत से लोग चार्जिंग पोर्ट साफ करने के लिए सेफ्टी पिन, सुई, पेपर क्लिप या चाकू जैसी धातु की चीजें इस्तेमाल करते हैं. ऐसा बिल्कुल नहीं करना चाहिए. इससे पोर्ट के पिन मुड़ सकते हैं या शॉर्ट सर्किट का खतरा हो सकता है. अगर ऐसा हुआ तो चार्जिंग पोर्ट बदलवाना पड़ सकता है.

    अगर आपके फोन में पानी चला गया है या 'Moisture Detected' का मैसेज आ रहा है, तो सबसे पहले चार्जर निकाल दें. फोन को कुछ घंटों तक सूखने दें. जरूरत हो तो ठंडी हवा वाले पंखे के सामने रखें. गीले पोर्ट में चार्जर लगाने की कोशिश न करें. सैमसंग भी यही सलाह देता है कि पोर्ट पूरी तरह सूखने के बाद ही चार्जिंग करें.

    एक और बात का ध्यान रखें. कई लोग चार्जिंग पोर्ट में पानी, सैनिटाइजर, परफ्यूम  या कोई केमिकल स्प्रे डाल देते हैं. ऐसा करना भी सही नहीं है. इससे फोन के अंदर नुकसान हो सकता है. ऐपल भी सलाह देता है कि फोन के किसी भी खुले हिस्से में लिक्विड या क्लीनिंग केमिकल नहीं जाना चाहिए.

    अगर सफाई के बाद भी फोन चार्ज नहीं हो रहा, केबल बार-बार निकल रही है या चार्जिंग बीच-बीच में रुक रही है, तो बार-बार खुद कोशिश करने के बजाय कंपनी के ऑफिशियल सर्विस सेंटर पर जाना बेहतर रहेगा. कई बार समस्या पोर्ट की नहीं, बल्कि चार्जिंग आईसी, बैटरी या केबल की भी हो सकती है.

    आम तौर पर अगर आपका फोन हमेशा जेब में रहता है, तो हर तीन से छह महीने में एक बार चार्जिंग पोर्ट की जांच कर लेना अच्छा रहता है. अगर आपको धूल जमा दिखे तभी सफाई करें. बिना वजह बार-बार पोर्ट में कोई चीज डालकर सफाई करने की जरूरत नहीं होती. जितना कम पोर्ट के अंदर छेड़छाड़ करेंगे, उसके खराब होने का खतरा भी उतना ही कम रहेगा.

  • एयरप्लेन मोड क्यों जरूरी है? जानिए फोन और विमान सुरक्षा का सच

    एयरप्लेन मोड क्यों जरूरी है? जानिए फोन और विमान सुरक्षा का सच

    जैसे ही एयरप्लेन रनवे पर पहुंचता है, एक अनाउंसमेंट लगभग हर फ्लाइट में सुनाई देता है- 'कृपया अपने मोबाइल फोन को Airplane Mode पर कर लें'. कई लोग बिना सोचे ऐसा कर देते हैं, जबकि कुछ के मन में सवाल आता है कि आज के 5G और AI वाले दौर में भी इसकी जरूरत क्यों है?

    अगर कोई ऐसा नहीं करता तो क्या विमान को खतरा हो सकता है? इस सवाल का जवाब उतना सीधा नहीं है, जितना सोशल मीडिया पर बताया जाता है.

    एयरप्लेन मोड में फोन में क्या बदलाव होता है?
    सबसे पहले यह समझिए कि स्मार्टफोन का एयरप्लेन मोड आपके फोन का सेल्यूलर रेडियो बंद कर देता है. यानी फोन मोबाइल टावर से संपर्क करने की कोशिश नहीं करता.

    हालांकि Wi-Fi और ब्लूटूथ को जरूरत पड़ने पर बाद में दोबारा चालू किया जा सकता है. यही वजह है कि आज कई फ्लाइट्स में एयरप्लेन मोड ऑन होने के बाद भी इन-फ्लाइट Wi-Fi इस्तेमाल किया जा सकता है.

    यही सेल्यूलर सिग्नल असली वजह है. जब एयरप्लेन उड़ान भर रहा होता है या लैंड कर रहा होता है, तब वह जमीन के सबसे करीब होता है. अगर बड़ी संख्या में फोन नॉर्मल मोड में रहें, तो वे लगातार आसपास के मोबाइल टावर से कनेक्ट होने की कोशिश करते हैं.

    रिस्क नहीं लेना चाहती इंडस्ट्री
    इससे रेडियो फ्रीक्वेंसी का शोर बढ़ सकता है. मॉडर्न विमान ऐसे सिग्नल झेलने के लिए डिजाइन किए जाते हैं, लेकिन एविएशन इंडस्ट्री सिक्योरिटी के मामले में कोई जोखिम नहीं लेना चाहती.

    क्या एक फोन से विमान क्रैश हो सकता है? जवाब है नहीं. ऐसा कोई सबूत नहीं है कि सिर्फ एक यात्री का फोन विमान गिरा सकता है. FAA और EASA जैसी एजेंसियों ने भी माना है कि मॉडर्न विमान इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से होने वाली ज्यादातर इंटरफेरेंस को संभाल सकते हैं.

    यही वजह है कि आज कई देशों में एयरप्लेन मोड के साथ पूरे सफर में फोन इस्तेमाल करने की परमिशन है.

    फिर नियम अब भी क्यों है?
    क्योंकि एविएशन में सोच हमेशा 'Better Safe Than Sorry' वाली होती है. टेक्नोलॉजी जितनी भी आगे बढ़ जाए, उड़ान के सबसे अहम चरण फेज यानी टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान किसी भी तरह का एक्स्ट्रा रेडियो इंटरफेरेंस ऐक्सेप्ट नहीं किया जाता.

    अगर सैकड़ों फोन एक साथ नेटवर्क सर्च लगें, तो पायलट और एयर ट्रैफिक कंट्रोल के बीच रेडियो कम्युनिकेशन में हल्का शोर या 'बज़' जैसी आवाज आ सकती है. यह खतरनाक नहीं माना जाता, लेकिन इंपॉर्टेंट बातचीत के दौरान ऐसी दिक्कत कोई नहीं चाहता.

    पुराने विमान हो सकते हैं प्रभावित
    पिछले कुछ सालों में 5G नेटवर्क को लेकर भी यह बहस हुई थी. अमेरिका में FAA ने कुछ समय के लिए चेतावनी जारी की थी कि 5G C-Band सिग्नल कुछ पुराने विमान के रेडियो ऑल्टीमीटर को प्रभावित कर सकते हैं.

    रेडियो ऑल्टीमीटर वही सिस्टम है जो विमान को जमीन से सटीक ऊंचाई बताता है, खासकर खराब मौसम में लैंडिंग के दौरान. बाद में एयरक्राफ्ट और टेलीकॉम कंपनियों ने मिलकर कई बदलाव किए, लेकिन इस घटना ने दिखाया कि रेडियो फ्रीक्वेंसी और एविएशन के बीच संतुलन कितना महत्वपूर्ण है.

    दिलचस्प बात यह है कि यूरोप में कई एयरलाइंस अब ऐसे टेक इस्तेमाल कर रही हैं, जहां विमान के अंदर ही मोबाइल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई जाती है. वहां एयरलाइन पहले यह मेक श्योर करती है कि विमान के सिस्टम पर इसका कोई असर न पड़े. यानी तकनीक मौजूद है, लेकिन फैसला एयरलाइन और रेगुलेटर की सुरक्षा जांच पर निर्भर करता है.

    एक और वजह है जिसे लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं. टेकऑफ और लैंडिंग को एविएशन की क्रिटिकल फेज ऑफ फ्लाइट माना जाता है. अगर इस दौरान कोई इमरजेंसी हो जाए, तो यात्रियों का क्रू की अनाउंसमेंट सुनना और तुरंत निर्देश मानना जरूरी होता है. इसलिए भी एयरलाइंस चाहती हैं कि पैसेंजर्स का ध्यान फोन की बजाय सेफ्टी पर रहे.