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    Google ने लॉन्च किया Fitbit Air, बिना स्क्रीन वाला फिटनेस बैंड; कीमत ₹13,999

    Google ने भारत में अपना Fitbit Air फिटनेस बैंड लॉन्च कर दिया है. WHOOP के बाद से मार्केट में स्क्रीनलेस फिटनेस बैंड का ट्रेंड आया और इस ट्रेंड में अब गूगल भी आ चुका है. इसे अमेरिका में कुछ महीने पहले ही लॉन्च किया गया था, लेकिन भारत में अब लॉन्च हुआ है.

    भारत में 2 अक्टूबर से बिक्री के लिए उपलब्ध होगा. इसकी सबसे खास बात यह है कि इसमें कोई स्क्रीन नहीं है. यानी यह आपकी सेहत का डेटा रिकॉर्ड करेगा, लेकिन कलाई पर मैसेज, कॉल या दूसरे नोटिफिकेशन दिखाकर आपका ध्यान नहीं भटकाएगा. इसकी कीमत 13,999 रुपये रखी गई है.

    Google के मुताबिक Fitbit Air उसका अब तक का सबसे छोटा और हल्का Fitbit ट्रैकर है. इसे 24 घंटे पहनने के हिसाब से बनाया गया है. कंपनी का फोकस यहां स्मार्टवॉच बनाने पर नहीं, बल्कि ऐसा छोटा ट्रैकर देने पर है जो चुपचाप आपकी ऐक्टिविटी और सेहत से जुड़े आंकड़े रिकॉर्ड करता रहे. ये जानकारी फोन पर Google Health ऐप में देखी जा सकती है.

    स्क्रीन नहीं है, फिर यह करेगा क्या?
    Fitbit Air को पहली नजर में देखकर सवाल उठ सकता है कि जब इसमें स्क्रीन ही नहीं है तो इसका फायदा क्या है. इसका जवाब इसके सेंसर और Google Health ऐप में छिपा है.

    यह ट्रैकर लगातार हार्ट रेट रिकॉर्ड कर सकता है. इसके अलावा आराम की स्थिति में हार्ट रेट, हार्ट रेट में बदलाव, नींद के अलग-अलग चरण, नींद की ड्यूरेशन और ब्लड ऑक्सीजन यानी SpO2 जैसी जानकारी भी रिकॉर्ड की जाती है. इसमें इरेगुलर हार्ट रिदम यानी Afib से जुड़े नोटिफिकेशन का फीचर भी दी गई है.

    मेडिकल डिवाइस नहीं, सिर्फ फिटनेस ट्रैकर है
    यहां एक जरूरी बात समझना भी जरूरी है. गूगल खुद कहता है कि Fitbit Air मेडिकल डिवाइस नहीं है और इन फीचर्स का इस्तेमाल किसी बीमारी की जांच या इलाज के लिए नहीं किया जाना चाहिए. हार्ट रेट और नींद से जुड़े आंकड़ों की सटीकता कई चीजों पर निर्भर कर सकती है.

    असली खेल Google Health Coach का है
    Google इसे अपने Google Health Coach के साथ जोड़कर देख रहा है. यानी हार्डवेयर से ज्यादा सॉफ्टवेयर पर भी काम किया गया है. Health Coach आपके ट्रैक किए गए डेटा को देखकर रोजमर्रा की सेहत और फिटनेस से जुड़े सुझाव देने के लिए बनाया गया है. कंपनी के मुताबिक यह वर्कआउट लॉग करने, गाइडेड एक्सरसाइज फॉलो करने और आपकी ऐक्टिविटीज को समझने में मदद कर सकता है. यहां तक कि जिम में किसी मशीन या व्हाइटबोर्ड पर लिखी वर्कआउट रूटीन की फोटो लेकर उसे एक्टिविटी के तौर पर लॉग करने का विकल्प भी दिया गया है.

    सात दिन तक चलेगी बैटरी
    स्क्रीन हटाने का एक सीधा फायदा बैटरी में भी दिखाई देता है. गूगल के अनुसार Fitbit Air एक बार चार्ज करने पर सात दिन तक चल सकता है. अगर बैटरी खत्म हो रही है तो सिर्फ पांच मिनट की फास्ट चार्जिंग से करीब एक दिन की बैटरी मिल सकती है.

    यह उन लोगों के लिए खास तौर पर उपयोगी हो सकता है जो रात में भी ट्रैकर पहनते हैं. गूगल का कहना है कि इसका हल्का और छोटा डिजाइन रातभर पहनने के लिए बनाया गया है. कंपनी यह भी कहती है कि यूजर दिन में Pixel Watch जैसे दूसरे डिवाइस का इस्तेमाल करके रात में Fitbit Air पहन सकता है और नींद का डेटा लगातार रिकॉर्ड कर सकता है.

    कलाई पर स्क्रीन नहीं, लेकिन फोन में पूरा डेटा
    कलाई पर आपको डेटा देखने के लिए स्क्रीन नहीं मिलेगी. इसके बजाय फोन में Google Health ऐप खोलकर अपनी जानकारी देखनी होगी. इसका एक फायदा यह है कि कलाई पर बार-बार स्क्रीन देखने की जरूरत नहीं पड़ेगी. गूगल भी इसे ऐसा डिवाइस बता रहा है जो आपको लगातार नोटिफिकेशन से दूर रखता है. यानी अगर आप स्मार्टवॉच की वजह से हर मैसेज और अलर्ट तुरंत देखने लगते हैं, तो Fitbit Air उसका उल्टा अनुभव देता है.

    कीमत 13,999 रुपये, साथ में तीन महीने का प्रीमियम ट्रायल
    भारत में Google Fitbit Air की कीमत 13,999 रुपये है और इसकी बिक्री 2 अक्टूबर से शुरू होगी. यह Google Store के अलावा Flipkart, Croma, Reliance Digital और Vijay Sales जैसे रिटेल पार्टनर्स के जरिए उपलब्ध होगा.

    हर खरीद के साथ Google Health Premium का तीन महीने का ट्रायल मिलेगा. इससे Google Health Coach का पूरा अनुभव इस्तेमाल किया जा सकेगा.

    लॉन्च ऑफर के तहत चुनिंदा HDFC Bank और ICICI Bank कार्ड से भुगतान करने पर 1,000 रुपये का कैशबैक भी दिया जा रहा है. 6 महीने की नो-कॉस्ट EMI के साथ भी 1,000 रुपये कैशबैक का विकल्प है. इसके अलावा कंज्यूमर लोन पर 12 महीने तक की नो-कॉस्ट EMI उपलब्ध होगी.

    Whoop और दूसरे स्क्रीनलेस ट्रैकर से मुकाबला
    स्क्रीनलेस फिटनेस ट्रैकर कोई नई कैटेगरी नहीं है. Whoop और कुछ दूसरे ब्रांड पहले से ऐसे डिवाइस दे रहे हैं जिनका फोकस स्क्रीन और नोटिफिकेशन के बजाय स्वास्थ्य, फिटनेस और रिकवरी डेटा पर है. Fitbit Air इसी बढ़ती कैटेगरी में Google की एंट्री है.

    Google की खासियत यहां उसका बड़ा हेल्थ इकोसिस्टम है. Fitbit Air को Google Health ऐप और Google Health Coach के साथ जोड़कर कंपनी हार्डवेयर से ज्यादा डेटा और व्यक्तिगत सलाह पर जोर दे रही है. मई में Google ने बताया था कि उसका Google Health ऐप अलग-अलग हेल्थ डेटा को एक जगह लाने की दिशा में बनाया गया है.

  • कच्चे केले की मसालेदार भुजिया, स्वाद ऐसा कि आलू-सब्जी भी लगे फीकी

    कच्चे केले की मसालेदार भुजिया, स्वाद ऐसा कि आलू-सब्जी भी लगे फीकी

    रोज-रोज लंच या डिनर में वही आलू, भिंडी या दाल-सब्जी खाकर अक्सर बच्चे और बड़े दोनों ही बोर हो जाते हैं. ऐसे में अगर आप कुछ नया, झटपट और बेहद स्वादिष्‍ट बनाना चाहते हैं, तो कच्चे केले की मसालेदार भुजिया एक बेहतरीन विकल्प है. कच्चा केला सेहत के लिए बहुत फायदेमंद और फाइबर से भरपूर होता है, लेकिन सही से न पकाने पर यह अक्सर मैश या चिपचिपा हो जाता है.

    अगर कच्चे केले को पतले-पतले टुकड़ों में काटकर देसी मसालों और गरम मसाले के साथ सरसों के तेल में कुरकुरा भुना जाए, तो इसका जायका किसी पनीर या आलू की सब्जी से कम नहीं लगता. चटपटी और सोंधी खुशबू वाली यह भुजिया बच्चों के स्कूल टिफिन और ऑफिस लंच के लिए एकदम परफेक्ट है. इसे आप लंबे-लंबे पतले टुकड़ों या फिर गोल स्लाइस किसी भी तरह से बना सकते हैं. आइए जानते हैं इसे बनाने की सबसे आसान और लाजवाब रेसिपी!

    सामग्री:
    3 कच्चे केले

    2 बड़े चम्मच सरसों का तेल

    1/2 छोटा चम्मच राई (सरसों के दाने) या जीरा

    1/4 छोटा चम्मच हींग

    1/2 छोटा चम्मच हल्दी पाउडर

    1 छोटा चम्मच धनिया पाउडर

    1/2 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर

    1/2 छोटा चम्मच गरम मसाला (सीक्रेट फ्लेवर के लिए)

    1/2 छोटा चम्मच आमचूर पाउडर (खटाई के लिए)

    स्वादानुसार नमक

    2 हरी मिर्च (बारीक कटी हुई)

    बारीक कटा हरा धनिया (सजावट के लिए)

    बनाने की विधि:
    केले काटने की सही ट्रिक: कच्चे केलों को धोकर सुखा लें. चाकू की मदद से केला छील लें (हल्का हरा हिस्सा रहने दें ताकि भुजिया कुरकुरी बने). अब केले को बीच से काटकर लंबाई में या छोटे-छोटे पतले चकोर टुकड़ों में काट लें. (कटने के बाद केलों को पानी में न डालें, तुरंत बनाएं ताकि नमी न रहे).

    तड़का लगाएं: कड़ाही में 2 बड़े चम्मच सरसों का तेल डालें और धुआं निकलने तक तेज गर्म करें. फिर आंच धीमी करें और इसमें राई/जीरा, हींग और कटी हरी मिर्च डालकर कुछ सेकंड्स के लिए चटकाएं.

    केला भूनें: अब कटे हुए कच्चे केले कड़ाही में डालें. आंच को मध्यम रखें और बिना ढके 3-4 मिनट तक लगातार चलाते हुए भूनें, जब तक कि केलों पर हल्का सुनहरा रंग न आने लगे.

    नमक और हल्दी मिलाएं: अब स्वादानुसार नमक और हल्दी पाउडर डालकर मिलाएं. कड़ाही को ढक्कन से ढक दें और धीमी आंच पर 3-4 मिनट तक पकने दें. (कच्चा केला बहुत जल्दी गल जाता है, इसलिए ज्यादा देर न ढकें).

    मसाले और गरम मसाला डालें: ढक्कन हटाएं, केला सॉफ्ट हो चुका होगा. अब इसमें धनिया पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, आमचूर पाउडर और 1/2 छोटा चम्मच गरम मसाला मिलाएं.

    कुरकुरा करें: बिना ढके धीमी-मध्यम आंच पर भुजिया को 2 मिनट तक लगातार चलाते हुए भूनें ताकि सारे मसाले केले के टुकड़ों पर अच्छी तरह लिपट जाएं और भुजिया एकदम कुरकुरी हो जाए.

    सर्व करें: ऊपर से बारीक कटा हरा धनिया छिड़कें. तैयार है आपकी गरमा-गरम, चटाकेदार और खुशबूदार कच्चे केले की भुजिया! इसे पूरी, पराठे या दाल-चावल के साथ लंच में परोसें.

  • भारत में लॉन्च हुआ Apple Pay, अब कार्ड से करें पेमेंट; UPI से कितना अलग?

    भारत में लॉन्च हुआ Apple Pay, अब कार्ड से करें पेमेंट; UPI से कितना अलग?

    नई दिल्ली

    करीब 12 साल के लंबे इंतजार के बाद Apple ने आखिरकार भारत में अपनी पेमेंट सर्विस Apple Pay लॉन्च कर दी है। भारत में इसकी शुरुआत Axis Bank के साथ की गई है। फिलहाल Axis Bank के चुनिंदा Visa और Mastercard क्रेडिट कार्ड Apple Pay के साथ काम करेंगे। Apple का कहना है कि आने वाले समय में दूसरे बैंक और कार्ड जारी करने वाले फाइनेंशियल ऑर्गनाइजेशंस को भी इस सर्विस से जोड़ा जाएगा। बता दें, यह सेवा UPI से बिल्कुल अलग है।

    Apple Pay के जरिए यूजर्स अपने iPhone, iPad और Apple Watch से स्टोर, ऐप्स और वेबसाइट पर पेमेंट कर सकेंगे। इसके लिए हर बार कार्ड नंबर, PIN या OTP डालने की जरूरत नहीं होगी। पेमेंट को Face ID, Touch ID या डिवाइस की सुरक्षा व्यवस्था के जरिए ऑथराइज किया जा सकेगा। Apple के मुताबिक Mac के लिए Apple Pay सपोर्ट भी जल्द आने वाला है।

    फिलहाल सिर्फ Axis Bank के चुनिंदा कार्ड
    भारत में Apple Pay की शुरुआती उपलब्धता काफी लिमिटेड है। अभी Axis Bank के Visa और Mastercard नेटवर्क वाले एलिजिबल क्रेडिट कार्ड ही Apple Pay में जोड़े जा सकते हैं। RuPay कार्ड फिलहाल Apple Pay के साथ सपोर्टेड नहीं हैं। इसी तरह HDFC Bank, ICICI Bank और SBI Card जैसे बड़े कार्ड जारी करने वाले ऑर्गनाइजेशंस के कार्ड लॉन्च के समय उपलब्ध नहीं हैं।

    यूजर्स अपने योग्य Axis Bank कार्ड को Apple Wallet में ऐड कर सकते हैं। इसके बाद जहां Apple Pay सपोर्ट उपलब्ध होगा, वहां iPhone या Apple Watch को कॉन्टैक्टलेस पेमेंट टर्मिनल के पास लाकर पेमेंट किया जा सकेगा। ऑनलाइन और ऐप के अंदर होने वाले पेमेंट में भी Apple Pay का इस्तेमाल किया जा सकता है।

    हर कार्ड मशीन पर नहीं चलेगा Apple Pay
    Apple Pay के भारत में लॉन्च होने के बावजूद शुरुआत में इसे हर जगह इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। पेमेंट के लिए उस मर्चेंट या पेमेंट टर्मिनल पर Apple Pay सपोर्ट होना जरूरी है। इसलिए किसी जगह पर सामान्य कॉन्टैक्टलेस कार्ड पेमेंट काम करने के बावजूद Apple Pay जरूरी नहीं कि काम करे।

    शुरुआत में Apple Pay को फूड एंड बेवरेज, ट्रैवल, फैशन और लाइफस्टाइल जैसी कैटेगरी के मर्चेंट्स के बीच रोलआउट किया जा रहा है। कंपनी समय के साथ ज्यादा मर्चेंट्स और ऐप्स को ऐड करने की योजना बना रही है।

    UPI से ऐसे अलग है Apple Pay
    भारत में Apple Pay की एंट्री ऐसे समय हुई है जब UPI डिजिटल पेमेंट का सबसे मुख्य तरीका बना हुआ है। UPI सीधे बैंक अकाउंट से बैंक अकाउंट में पेमेंट की सुविधा देता है, जबकि Apple Pay का शुरुआती भारतीय मॉडल कार्ड पर आधारित है। यही वजह है कि शुरुआत में इसकी रेंज UPI की तुलना में काफी अलग रहेगी।

    बता दें, Apple देश में iPhone की बिक्री, मैन्युफैक्चरिंग और रिटेल मौजूदगी बढ़ा रही है। अब Apple Pay के जरिए भारतीय iPhone और Apple Watch यूजर्स को कंपनी के इकोसिस्टम के भीतर एक और पेमेंट विकल्प मिलेगा।

  • 1 अक्टूबर से WhatsApp Business के नियम बदलेंगे, ऑर्डर अपडेट पर लगेगा चार्ज

    1 अक्टूबर से WhatsApp Business के नियम बदलेंगे, ऑर्डर अपडेट पर लगेगा चार्ज

    नई दिल्ली
     Meta भारत में 1 अक्टूबर 2026 से अपने WhatsApp Business Platform की प्राइसिंग में बदलाव कर रहा है, जिसका मतलब है कि बिजनेसेज को अब उन मैसेजेस के लिए भी पेमेंट करना होगा जो पहले फ्री थे। उदाहरण के लिए, अभी बिजनेसेज 24 घंटे की विंडो के भीतर कस्टमर्स के मैसेजेस का जवाब और ऑर्डर अपडेट्स बिल्कुल मुफ्त में भेज सकते हैं। लेकिन 1 अक्टूबर से ये बदल जाएगा। हालांकि, कुछ सीमित संख्या में मैसेजेस फ्री बने रहेंगे, लेकिन Meta यूटिलिटी मैसेजेस (जैसे ऑर्डर कन्फर्मेशन और डिलीवरी अपडेट्स) के लिए चार्ज लेगा, भले ही वे उसी 24 घंटे की विंडो के भीतर क्यों न भेजे गए हों।

    ध्यान दें कि ये बदलाव केवल WhatsApp Business Platform पर लागू होते हैं, रेगुलर WhatsApp या WhatsApp Business एप पर नहीं।

    तो आखिर 1 अक्टूबर से क्या बदल रहा है, क्या अब भी मुफ्त रहेगा और बिजनेसेज को कितना ज्यादा पेमेंट करना होगा? आइए समझते हैं।

    1 अक्टूबर से क्या बदल रहा है?
    अब तक, WhatsApp Business Platform का इस्तेमाल करने वाले बिजनेसेज किसी कस्टमर का मैसेज आने के 24 घंटे के भीतर उसे फ्री में जवाब दे सकते थे। इसमें प्रोडक्ट्स या ऑर्डर्स से जुड़े सवालों के जवाब देने के साथ-साथ ऑर्डर कन्फर्मेशन और डिलीवरी अपडेट्स भेजना शामिल था।

    1 अक्टूबर से Meta इस 24 घंटे की विंडो के भीतर भेजे गए ऑर्डर अपडेट्स और दूसरे यूटिलिटी मैसेजेस के लिए बिजनेसेज से चार्ज लेना शुरू कर देगा। कस्टमर्स के सवालों के जवाब हर बिजनेस फोन नंबर पर प्रति माह पहले 1,000 सर्विस मैसेजेस के लिए फ्री रहेंगे। इसके बाद बिजनेसेज को एडिशनल रिप्लाई के लिए पैसे देने होंगे।

    24 घंटे की विंडो के बाद भेजे जाने वाले यूटिलिटी मैसेजेस पर पहले से ही चार्ज लगता था, इसलिए वह नियम वैसा ही रहेगा।

    WhatsApp Business मैसेजेस का कितना खर्च आएगा?
    भारत में Meta ने ऑर्डर कन्फर्मेशन और डिलीवरी अपडेट्स जैसे यूटिलिटी मैसेजेस के लिए जीएसटी (GST) से पहले स्टैंडर्ड रेट 0.115 रुपये प्रति डिलीवर्ड मैसेज तय किया है। 18 परसेंट GST जोड़ने के बाद ये लगभग 0.136 रुपये प्रति मैसेज बैठता है।

    30 सितंबर तक बिजनेसेज किसी कस्टमर के मैसेज करने के 24 घंटे के भीतर यूटिलिटी मैसेजेस फ्री में भेज सकते हैं। 1 अक्टूबर से उन्हें बिना GST के 0.115 रुपये प्रति डिलीवर्ड यूटिलिटी मैसेज देना होगा। उदाहरण के लिए, अगर कोई बिजनेस 1,000 ऑर्डर अपडेट्स भेजता है, तो उसे GST से पहले 115 रुपये या 18 परसेंट GST मिलाकर करीब 135.70 रुपये चुकाने होंगे।

    मैसेज की रेट इस बात पर निर्भर करती है कि मैसेज किस तरह का है। मेटा मार्केटिंग मैसेज (जैसे प्रमोशनल ऑफर और सेल अनाउंसमेंट्स) के लिए 0.8631 रुपये प्रति मैसेज की दर तय करता है, जबकि ऑथेंटिकेशन मैसेज (जैसे वन-टाइम पासवर्ड या OTP) की कीमत GST से पहले 0.115 रुपये प्रति मैसेज होती है।

    1 अक्टूबर 2026 से Meta हर बिजनेस फोन नंबर के लिए प्रति माह पहले 1,000 सर्विस रिप्लाई फ्री देगा। इसके बाद, सर्विस मैसेजेस की दर संबंधित मार्केट में यूटिलिटी और ऑथेंटिकेशन दरों के बराबर होगी।

    उदाहरण के तौर पर, अगर भारत में कोई बिजनेस एक महीने में 1,500 सर्विस रिप्लाई भेजता है, तो पहले 1,000 फ्री होंगे और बाकी बचे 500 मैसेजेस के लिए उसे पेमेंट करना होगा। 0.115 रुपये प्रति मैसेज के हिसाब से ये GST से पहले 57.50 रुपये या GST मिलाकर करीब 67.85 रुपये होगा।

    क्या-क्या फ्री रहेगा?
    इन बदलावों के बावजूद WhatsApp Business के सभी मैसेजेस चार्जेबल नहीं होंगे।
    जैसा कि पहले बताया गया है, बिजनेसेज को हर बिजनेस फोन नंबर पर हर महीने 1,000 सर्विस मैसेजेस फ्री मिलेंगे। इसके अलावा कस्टमर्स हमेशा की तरह बिजनेसेज को फ्री में मैसेज भेज सकते हैं और उन्हें इन मैसेजेस को भेजने या रिसीव करने के लिए कोई पैसे नहीं देने होंगे।

    Meta उन बिजनेसेज के लिए मौजूदा 72 घंटे की फ्री विंडो को भी जारी रख रहा है, जिन्हें 'Click-to-WhatsApp' विज्ञापनों या Facebook पेजेस पर मौजूद कॉल-टू-एक्शन बटन्स के जरिए मैसेजेस मिलते हैं। इन तीन दिनों के दौरान बिजनेसेज बिना कोई Meta मैसेजिंग चार्ज दिए कस्टमर्स को मैसेज भेज सकते हैं।

    इस फ्री विंडो की पेशकश करके Meta का मकसद ज्यादा से ज्यादा बिजनेसेज को अपने एडवरटाइजिंग टूल्स का इस्तेमाल करने के लिए बढ़ावा देना है, ताकि वे संभावित कस्टमर्स तक पहुंच सकें और उनसे WhatsApp पर जुड़ सकें।

    कुल मिलाकर, 1 अक्टूबर से जो बिजनेसेज कस्टमर्स को जवाब देने, ऑर्डर अपडेट्स भेजने और डिलीवरी नोटिफिकेशन शेयर करने के लिए WhatsApp का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें इन मैसेजेस के लिए Meta को ज्यादा पेमेंट करना पड़ सकता है।

    हालांकि, आम कस्टमर्स के लिए कुछ भी नहीं बदलेगा। उन्हें बिजनेसेज को मैसेज भेजने या WhatsApp पर रिप्लाई और अपडेट्स पाने के लिए कोई पैसे नहीं देने होंगे।

     

  • ठंडी शाम में चाय के साथ बनाएं क्रिस्पी मखाना चाट, नमकीन भी भूल जाएंगे

    ठंडी शाम में चाय के साथ बनाएं क्रिस्पी मखाना चाट, नमकीन भी भूल जाएंगे

    पिछले कुछ दिन से पड़ रही रिमझिम बारिश से मौसम ने करवट ले ली है. ठंड ने भारत की दहलीज पर दस्तक दे दी है. ऐसे में मौसम बहुत ही सुहाना और ठंडा-ठंडा हो गया. इस मौसम में शाम होते ही चाय के साथ कुछ चटपटा और कुरकुरा खाने का मन करने लगता है. अक्सर घर में बिस्कुट, नमकीन या तली-भुनी चीजें निकाल ली जाती हैं. लेकिन अगर आप चाय के साथ कुछ ऐसा खाना चाहते हैं जो स्वादिष्ट होने के साथ थोड़ा हेल्दी भी हो, तो मखाना चाट ट्राई कर सकते हैं.

    इसमें कुरकुरे मखाने, भुनी मूंगफली, आलू, ककड़ी और चटपटी हरी चटनी का ऐसा कॉम्बिनेशन बनता है कि एक बार खाने के बाद नमकीन याद नहीं आएगी. सबसे अच्छी बात ये है कि इसे बनाने में ज्यादा समय भी नहीं लगता. चलिए जानते हैं कैसे तैयार होता है ये झटपट स्नैक, जो ठंडे मौसम में चाय का मजा दोगुना कर सकता है.

    मखाना चाट बनाने के लिए इंग्रेडिएंट्स
        1 कप मखाना
        1/4 कप मूंगफली
        1/2 छोटी चम्मच घी
        1 ककड़ी, बारीक कटी हुई
        1 टमाटर, बारीक कटा हुआ
        1 उबला हुआ आलू, छोटे टुकड़ों में कटा
        1 हरी मिर्च, बारीक कटी हुई
        1 नींबू का रस
        थोड़ा लाल मिर्च पाउडर
        स्वादानुसार नमक
        बारीक कटा हरा धनिया

    चटपटी हरी चटनी के लिए
        1/2 कप हरा धनिया
        2 इंच अदरक
        4 हरी मिर्च
        2 बड़े चम्मच भुनी मूंगफली
        2 बड़े चम्मच दही
        थोड़ा सा नमक
        जरूरत के हिसाब से पानी

    बनाने का तरीका
    1. सबसे पहले एक पैन को गैस पर गर्म करें और उसमें मूंगफली डालकर धीमी-मीडियम आंच पर भूनें. मूंगफली को तब तक भूनें, जब तक उसमें हल्की दरार आने लगे और अच्छी खुशबू न आने लगे. इसके बाद इसे प्लेट में निकाल लें.

    2. अब उसी पैन में आधी छोटी चम्मच घी डालें और इसमें मखाने डाल दें. मखानों को धीमी आंच पर लगातार चलाते हुए तब तक भूनें, जब तक वे अच्छी तरह कुरकुरे न हो जाएं. अगर आप घी इस्तेमाल नहीं करना चाहते तो मखानों को बिना घी के भी भून सकते हैं या एयर फ्राई कर सकते हैं.

    3. अब मिक्सर जार में हरा धनिया, अदरक, हरी मिर्च, भुनी मूंगफली, दही, थोड़ा नमक और जरूरत के हिसाब से पानी डालकर बारीक पीस लें. आपकी चटपटी हरी चटनी तैयार है.

    4. एक बड़े बर्तन में ककड़ी, टमाटर, उबला हुआ आलू और हरी मिर्च डालें. इसमें नींबू का रस, थोड़ा लाल मिर्च पाउडर, स्वादानुसार नमक और तैयार की गई हरी चटनी डालें. ऊपर से हरा धनिया डालकर सभी चीजों को अच्छी तरह मिला लें.

    5. अब सबसे जरूरी बात है कि मखाना और मूंगफली आखिर में डालें. अगर इन्हें पहले डाल देंगे तो चटनी और नींबू के कारण इनका कुरकुरापन कम हो सकता है. इसलिए सर्व करने से ठीक पहले भुने हुए मखाने और मूंगफली डालें और हल्के हाथ से सबको मिक्स कर दें.

    चाय के साथ मिलेगा चटपटा और कुरकुरा स्वाद
    अब आपकी क्रिस्पी मखाना चाट बनकर तैयार है. इसमें हरी चटनी का तीखापन, नींबू की खटास, आलू की सॉफ्टनेस और मखाने-मूंगफली का कुरकुरा स्वाद मिलता है. ठंडी शाम में गरमागरम चाय के साथ ये कॉम्बिनेशन काफी अच्छा लगेगा. खास बात यह है कि इसे बनाने में बहुत ज्यादा मेहनत या समय नहीं लगता.

    अगर आपको टमाटर पसंद नहीं है तो उसे छोड़ सकते हैं. इसी तरह ककड़ी की जगह अपनी पसंद की दूसरी सब्जियां भी इस्तेमाल की जा सकती हैं. चाट को और चटपटा बनाने के लिए आप स्वाद के मुताबिक मसाले भी बढ़ा सकते हैं.

  • पानी में पकाकर बनाएं अनोखी लिट्टी, कम तेल में होगी क्रिस्पी और टेस्टी

    पानी में पकाकर बनाएं अनोखी लिट्टी, कम तेल में होगी क्रिस्पी और टेस्टी

     लिट्टी-चोखा बिहार की फेमस डिश है, जिसे आमतौर पर आग पर सेंककर या भूनकर बनाया जाता है. लेकिन क्या आपने कभी पानी में पकाई हुई लिट्टी खाई है.  जी हां, पानी वाली लिट्टी. यह लिट्टी भी आम लिट्टी की तरह खाने में काफी टेस्टी होती है, बस इसे बनाने का तरीका थोड़ा अलग होता है. इसमें लिट्टी को पहले उबलते पानी में पकाया जाता है और फिर कम तेल में फ्राई किया जाता है. इससे लिट्टी अंदर से अच्छी तरह पक जाती है और फ्राई करते समय ज्यादा तेल की जरूरत नहीं पड़ती.

    अगर आप घर पर लिट्टी-चोखा का कुछ अलग स्वाद ट्राई करना चाहते हैं तो पानी वाली लिट्टी बना सकते हैं. इसे बैंगन, टमाटर और आलू के चोखे, हरी चटनी और अचार के साथ सर्व किया जाता है. तो आइए जानते हैं इसे बनाने का आसान तरीका.

    इंग्रेडिएंट्स (Ingredients)
    लिट्टी के लिए
    2 कप गेहूं का आटा
    2 चम्मच रिफाइंड ऑयल या घी
    नमक स्वादानुसार

    जरूरत के अनुसार पानी
    सत्तू की स्टफिंग के लिए
    1/2 कप चना सत्तू
    1 चम्मच अजवाइन
    आधा छोटी चम्मच कलौंजी
    आधा छोटी चम्मच लाल मिर्च पाउडर
    एक चौथाई छोटी चम्मच हल्दी
    लहसुन और लाल मिर्च का दरदरा पेस्ट
    बारीक कटा प्याज
    धनिया पत्ती
    नींबू का रस
    1 चम्मच घी या सरसों का तेल
    अचार का मसाला
    नमक स्वादानुसार
    जरूरत के अनुसार थोड़ा पानी

    चोखा के लिए
    1 बड़ा बैंगन
    1-2 टमाटर
    2 उबले आलू
    बारीक कटा प्याज
    बारीक कटी हरी मिर्च
    धनिया पत्ती
    1 चम्मच सरसों का तेल
    चाट मसाला
    नमक स्वादानुसार
    लहसुन और लाल मिर्च का पेस्ट

    पानी वाली लिट्टी कैसे बनाएं?
        सबसे पहले एक बड़े बाउल में गेहूं का आटा लें. इसमें नमक और तेल या घी डालकर अच्छी तरह मिला लें. अब थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए आटा गूंथ लें. आटा न ज्यादा नरम रखें और न बहुत सख्त. इसे ढककर लगभग15 मिनट के लिए रख दें.
        अब सत्तू की स्टफिंग तैयार करें. इसके लिए एक बाउल में सत्तू लें और इसमें अजवाइन, कलौंजी, लाल मिर्च पाउडर, हल्दी, नमक, लहसुन-मिर्च का पेस्ट, प्याज, धनिया पत्ती, नींबू का रस, घी और अचार का मसाला डालें. सभी चीजों को अच्छी तरह मिला लें. इसमें थोड़ा-सा पानी डालकर स्टफिंग को तैयार करें. ध्यान रखें कि मिश्रण ज्यादा गीला न हो.
        अब आटे की बराबर आकार की लोइयां बना लें. एक लोई को हल्का दबाकर बीच में जगह बनाएं और उसमें सत्तू की स्टफिंग भर दें. किनारों को अच्छी तरह बंद करके गोल आकार दें. इसी तरह सारी लिट्टियां तैयार कर लें.
        अब एक बड़े बर्तन में पर्याप्त पानी डालकर तेज आंच पर उबालें. पानी में अच्छी तरह उबाल आने के बाद लिट्टियों को एक-एक करके इसमें डालें. सारी लिट्टियां एक साथ डालने से पानी का तापमान कम हो सकता है, इसलिए इन्हें धीरे-धीरे डालें. लगभग10 मिनट तक इन्हें उबलने दें. जब लिट्टियां फूलकर पानी के ऊपर आने लगें तो समझें कि ये अच्छी तरह पक गई हैं. इन्हें पानी से निकालकर कुछ देर ठंडा होने दें.
        इसके बाद एक पैन में थोड़ा तेल या घी गर्म करें और लिट्टियों को धीमी से मध्यम आंच पर चारों तरफ से सुनहरा होने तक सेंक लें. आप चाहें तो इन्हें ओवन में भी बेक कर सकते हैं. इसके लिए ओवन को 180 डिग्री सेल्सियस पर प्रीहीट करके लिट्टियों को करीब 15-20 मिनट तक बेक करें.

    ऐसे बनाएं बैंगन-टमाटर का चोखा
        चोखा बनाने के लिए बैंगन और टमाटर पर थोड़ा तेल लगाकर गैस पर भून लें. जब इनका छिलका अच्छी तरह जल जाए और अंदर से ये नरम हो जाएं तो गैस से उतारकर थोड़ा ठंडा करें. इसके बाद जला हुआ छिलका हटा दें.
        अब भुने हुए बैंगन और टमाटर को मैश कर लें. इसमें उबले हुए आलू, प्याज, हरी मिर्च, धनिया पत्ती, नमक, चाट मसाला, सरसों का तेल और लहसुन-मिर्च का पेस्ट डालकर अच्छी तरह मिला लें.
        तैयार पानी वाली लिट्टी को गरमा-गरम बैंगन-टमाटर के चोखे, हरी चटनी और अचार के साथ सर्व करें. पानी में पकाने के बाद कम तेल में फ्राई की गई यह लिट्टी बाहर से हल्की क्रिस्पी और अंदर से सॉफ्ट बनती है.

     

  • 18 साल के रेहान का कमाल, गुजरात में ₹80 करोड़ से लगाएंगे सेमीकंडक्टर फैक्ट्री

    18 साल के रेहान का कमाल, गुजरात में ₹80 करोड़ से लगाएंगे सेमीकंडक्टर फैक्ट्री

    आज के दौर में 18 साल की उम्र में ज्यादातर युवा कॉलेज, करियर और नौकरी के बारे में सोच रहे होते हैं. लेकिन गुजरात के अहमदाबाद के रहने वाले रेहान मनसूरी ने इतनी कम उम्र में सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग की दुनिया में कदम रखा है. उनकी कंपनी Micronex गुजरात के सानंद में करीब ₹80 करोड़ के निवेश से सेमीकंडक्टर लीड फ्रेम बनाने की फैक्ट्री लगाने जा रही है.

    खास बात यह है कि यह कोई ऐप या AI सॉफ्टवेयर स्टार्टअप नहीं है. कंपनी सीधे उस हार्डवेयर सप्लाई चेन में उतर रही है, जो चिप को पैकेज करने के लिए जरूरी होती है. कंपनी के मुताबिक फैक्ट्री में निर्माण का काम शुरू हो चुका है और मई 2027 तक प्रोडक्शन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है. पहले चरण में हर साल करीब 50 करोड़ लीड फ्रेम यूनिट बनाने की योजना है. फैक्ट्री शुरू होने के बाद करीब 250 लोगों को सीधे रोजगार मिलने की उम्मीद है.

    लीड फ्रेम होता क्या है?
    नाम सुनकर आपको लग सकता है कि यह चिप के अंदर लगा कोई छोटा सा इलेक्ट्रॉनिक पार्ट है. असल में लीड फ्रेम एक बेहद पतले मेटल का स्ट्रक्चर होता है, जिस पर सेमीकंडक्टर चिप को लगाया जाता है. यह चिप को सपोर्ट देने के साथ-साथ उसे बाहरी सर्किट से जोड़ने में भी मदद करती है.

    चिप और लीड फ्रेम  को बेहद पतले गोल्ड या कॉपर वायर से जोड़ा जाता है. इसके बाद पूरा पैकेज सर्किट बोर्ड से कनेक्ट किया जा सकता है. यानी आसान भाषा में कहें तो चिप बनने के बाद उसे इस्तेमाल करने लायक पैकेज बनाने की प्रक्रिया में लीड फ्रेम की अहम भूमिका होती है.

    Micronex इन लीड फ्रेम्स  को कॉपर एलॉय से बनाने की योजना बना रही है. इनकी मोटाई 0.1mm से 0.25mm के बीच होगी. कंपनी के मुताबिक ये पार्ट चिप को मैकेनिकल सपोर्ट देने, गर्मी निकालने और मैन्युफैक्चरिंग के दौरान सुरक्षा देने में भी मदद करते हैं.

    पहले कार और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, फि मोबाइल और टेलीकॉम
    कंपनी की शुरुआती योजना लीड फ्रेम्स को पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और ओटोमोटिव सेक्टर के लिए तैयार करने की है. इसके बाद उत्पादन क्षमता बढ़ने पर कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और टेलीकॉम सेक्टर में भी विस्तार करने की योजना है.

    Micronex ने SEMICON India 2026 के दौरान Kaynes Semicon के साथ MoU भी साइन किया है. इससे भविष्य में कंपनी के लीड फ्रेम्स को सेमीकंडक्टर कंपनियों तक सप्लाई करने का रास्ता खुल सकता है. कंपनी ने India Semiconductor Mission के Semicon 2.0 कार्यक्रम के तहत प्रस्ताव देने की भी योजना बताई है.

    18 साल के रेहान ने सेमीकंडक्टर ही क्यों चुना?
    Rehan Mansuri एक ऐसे परिवार से आते हैं जिसका कारोबार प्लास्टिक वेस्ट रिसाइक्लिंग से जुड़ा है. रिपोर्टों के मुताबिक परिवार की भारत में सात रिसाइक्लिंग यूनिट हैं. इसी वजह से उन्हें कम उम्र से ही मैन्युफैक्चरिंग और बिजनेस का अनुभव मिला. रेहान के मुताबिक उन्होंने भारत की सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में लीड फ्रेम्स को लेकर एक गैप देखा. उनका फोकस शुरुआत में दुनिया की बड़ी कंपनियों से कीमत या स्केल पर सीधी टक्कर लेने के बजाय लोकल कंपनियों को स्थानीय सप्लाई, तेज डिलीवरी, इंजीनियरिंग सपोर्ट और डिजाइन बदलाव में मदद देने पर है.

    गुजरात क्यों बन रहा है सेमीकंडक्टर का बड़ा सेंटर?
    Micronex का यह प्रोजेक्ट ऐसे समय में आया है जब गुजरात में सेमीकंडक्टर से जुड़ा पूरा इकोसिस्टम तेजी से विकसित हो रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक गुजरात में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में करीब ₹1.4 लाख करोड़ के निवेश का जिक्र किया गया है. सानंद में पहले से ही सेमीकंडक्टर पैकेजिंग और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े प्रोजेक्ट डेवेलप हो रहे हैं.

  • 1 अक्टूबर से महंगे होंगे AC, TV, फ्रिज और वॉशिंग मशीन, 8% तक बढ़ सकते हैं दाम

    1 अक्टूबर से महंगे होंगे AC, TV, फ्रिज और वॉशिंग मशीन, 8% तक बढ़ सकते हैं दाम

    मुंबई 

    फेस्टिव सीजन में अगर आप AC, TV, फ्रिज या वॉशिंग मशीन खरीदने का प्लान बना रहे हैं तो आपके लिए जरूरी खबर है. 1 अक्टूबर से इन प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ सकती हैं. कई बड़ी कंपनियां अक्टूबर से अपने प्रोडक्ट्स के दाम 5 से 8 फीसदी तक बढ़ाने की तैयारी में हैं. वहीं कुछ कंपनियों ने कीमतें बढ़ाने का फैसला पहले ही कर लिया है.

    इसका सबसे ज्यादा असर AC की कीमतों पर देखने को मिल सकता है. कंपनियां AC के दाम करीब 5 से 8 फीसदी तक बढ़ा सकती हैं. वहीं वॉशिंग मशीन, फ्रिज और LED TV की कीमतों में भी 3 से 4 फीसदी तक बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. हर कंपनी की कीमत बढ़ाने की टाइमिंग अलग हो सकती है. आइए जानते हैं, क्यों बढ़ाए जा रहे हैं दाम?

    क्यों कंपनियां बढ़ा रही हैं कीमत?
    कंपनियों पर कॉपर, एल्युमिनियम, स्टील और प्लास्टिक जैसी चीजों की बढ़ती कीमतों का दबाव है. इसके अलावा सामान को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का खर्च भी बढ़ा है. डॉलर में उतार-चढ़ाव और पश्चिमी एशिया में चल रही स्थिति का असर भी कंपनियों की लागत पर पड़ रहा है.

    जानिए किन कंपनियों ने दाम बढ़ाने का ऐलान कर दिया है?
    Blue Star, Godrej Appliances, Haier, Daikin और Super Plastronics जैसी कंपनियां कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान कर चुकी हैं. LG और Bosch Home Comfort ने भी AC की कीमतों में करीब 5 फीसदी तक बढ़ोतरी की है. Panasonic अभी कीमत बढ़ाने को लेकर स्थिति को देख रही है.

    Haier 1 अक्टूबर से अपने रूम AC की कीमत करीब 5 फीसदी बढ़ाने वाली है. कंपनी ने TV और वॉशिंग मशीन जैसे दूसरे प्रोडक्ट्स की कीमतों में 2 से 3 फीसदी बढ़ोतरी की भी बात कही है. कंपनी के मुताबिक अगर लागत इसी तरह बढ़ती रही तो दिसंबर और जनवरी में भी कीमतें बढ़ सकती हैं.

    पुराने स्टॉक की वजह से मिलेगी राहत!
    यहां एक राहत वाली बात भी है. कंपनियों और डीलर्स के पास पुराने दाम पर खरीदा गया स्टॉक मौजूद है. ऐसे में फेस्टिव सीजन की शुरुआत में कुछ प्रोडक्ट पुराने दाम पर मिल सकते हैं. Godrej के मुताबिक यह पुराना स्टॉक करीब एक से डेढ़ महीने तक चल सकता है. यानी दिवाली तक कुछ प्रोडक्ट्स पर पुराने दाम का फायदा मिल सकता है.

    लेकिन दिवाली के बाद नए दाम ज्यादा साफ तौर पर देखने को मिल सकते हैं. खासकर TV की कीमतों में आगे और बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है. इसलिए अगर आप इस फेस्टिव सीजन में कोई बड़ा इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदने का सोच रहे हैं, तो कीमत और ऑफर दोनों को देखकर फैसला करना जरूरी होगा.
     

  • बिल गेट्स की AI पर बड़ी चेतावनी, बोले- गलत इस्तेमाल से हो सकती है 1 अरब मौतें

    बिल गेट्स की AI पर बड़ी चेतावनी, बोले- गलत इस्तेमाल से हो सकती है 1 अरब मौतें

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर दुनिया में जितना उत्साह है, उतनी ही तेजी से इसके खतरों पर भी बहस बढ़ रही है. अब माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर बिल गेट्स ने AI को लेकर ऐसी चेतावनी दी है, जिसने इस बहस को और गंभीर बना दिया है.

    बिल गेट्स ने कहा है कि AI इतना पावरफुल हो चुका है कि अगर इसका गलत इस्तेमाल हुआ तो ऐसी घटनाएं हो सकती हैं, जिनमें एक अरब लोगों की मौत तक हो सकती है. हालांकि, गेट्स ने यह नहीं कहा कि AI निश्चित तौर पर इतनी मौतों का कारण बनेगी. उनका कहना है कि AI की मौजूदा और भविष्य की क्षमता गलत हाथों में बड़े स्तर पर नुकसान पहुंचाने के लिए पर्याप्त हो सकती है.

    बिल गेट्स को आखिर किस बात का डर है?
    NBC के कार्यक्रम Meet the Press में क्रिस्टन वेलकर के साथ बातचीत में गेट्स से पूछा गया कि क्या AI पूरी मानवता को खत्म करने जितनी ताकतवर हो सकती है. इसके जवाब में उन्होंने कहा कि AI ऐसी घटनाओं को जन्म देने के लिए निश्चित रूप से पर्याप्त शक्तिशाली है, जिनमें एक अरब लोगों की मौत हो सकती है.

    गेट्स की चिंता सिर्फ किसी फिल्म जैसे AI रोबोट के इंसानों के खिलाफ हो जाने को लेकर नहीं है. उनका बड़ा डर यह है कि इंसान खुद AI का इस्तेमाल विनाशकारी कामों के लिए कर सकते हैं.

    उन्होंने खास तौर पर साइबर अटैक और बायो-टेररिज्म जैसे खतरों का जिक्र किया है. उनके मुताबिक AI का इस्तेमाल ऐसे साइबर हमलों में हो सकता है जो अस्पतालों या बिजली जैसी जरूरी सेवाओं को ठप कर दें.

    यानी खतरा यह नहीं है कि कोई AI अचानक खुद फैसला लेकर इंसानों पर हमला कर दे. बड़ा सवाल यह है कि बेहद शक्तिशाली AI टूल अगर गलत लोगों के हाथ में चले गए तो वे उनका इस्तेमाल कितनी तेजी और बड़े स्तर पर कर सकते हैं.

    AI को लेकर दुनिया के टेक दिग्गज भी क्यों चिंतित हैं?
    गेट्स की यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब AI कंपनियों के अंदर से भी इसके खतरों को लेकर आवाजें उठ रही हैं. Anthropic के CEO डारियो अमोडी ने भी AI के गलत इस्तेमाल से साइबर अटैक और बायो-टेररिज्म जैसे जोखिमों की बात की है. हाल ही में AI इंडस्ट्री के कुछ बड़े नामों ने भी ज्यादा मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और नियमों की जरूरत पर चर्चा की है.

    इस पूरी बहस में सबसे दिलचस्प बात यह है कि AI बनाने वाली कंपनियां खुद भी अब सिर्फ अपनी इंटरनल सेफ्टी पॉलिसीज पर निर्भर रहने के सवाल का सामना कर रही हैं.

    गेट्स का कहना है कि सेल्फ रेगुलेशन यानी कंपनियों का खुद अपने लिए नियम बनाना काफी नहीं है. उनके मुताबिक सरकारों, कानून लागू करने वाली एजेंसियों और नेताओं को भी तय करना होगा कि AI के लिए कौन से सेफ्टी और मॉनिटरिंग नियम जरूरी हैं.

    इसका मतलब AI को रोक देना चाहिए?
    गेट्स AI के पूरी तरह खिलाफ नहीं हैं. यही इस कहानी का दूसरा और ज्यादा दिलचस्प पहलू है. उनका मानना है कि AI आने वाले समय में बीमारी के इलाज, शिक्षा, खेती और दूसरे क्षेत्रों में बड़ा बदलाव ला सकती है.

    गेट्स की चिंता AI के इस्तेमाल को खत्म करने की नहीं, बल्कि यह तय करने की है कि इसकी रफ्तार इतनी तेज न हो जाए कि इंसानों के पास नुकसान होने के बाद प्रतिक्रिया देने के अलावा कोई रास्ता न बचे.

    सबसे बड़ा सवाल: नियम कौन बनाएगा?
    दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां अमेरिका और चीन के बीच AI की होड़ में तेजी से आगे बढ़ रही हैं. ऐसे माहौल में ज्यादा सख्त नियमों को लेकर यह सवाल भी उठ रहा है कि कहीं सुरक्षा के नाम पर AI की रफ्तार तो धीमी नहीं हो जाएगी.

    गेट्स का तर्क है कि जरूरी सुरक्षा व्यवस्था AI की प्रगति को पूरी तरह रोकने वाली नहीं होनी चाहिए. उदाहरण के लिए उन्होंने ऐसे मॉनिटरिंग सिस्टमम्स की बात की है जो यह पहचान सकें कि किसी AI का इस्तेमाल साइबर अटैक या बायो-टेररिज्म के लिए तो नहीं हो रहा. उनके मुताबिक इसके लिए AI की पूरी डेवेलपमेंट को रोकना जरूरी नहीं है.

    AI का असली खतरा शायद AI नहीं, इंसान हैं
    AI खुद कोई इंसानी इरादा नहीं रखती, लेकिन यह इंसानों की क्षमता को कई गुना बढ़ा सकती है. अगर यही ताकत गलत व्यक्ति, अपराधी संगठन या किसी खतरनाक नेटवर्क के हाथ लगती है, तो नुकसान का स्तर आज की तकनीकों से कहीं ज्यादा हो सकता है.

    बिल गेट्स का 'एक अरब मौतों' वाला बयान इसी बड़े सवाल की तरफ इशारा करता है. यह किसी तय भविष्यवाणी का दावा नहीं है, बल्कि AI के गलत इस्तेमाल से पैदा हो सकने वाले संभावित नुकसान को लेकर उनकी चेतावनी है. और जैसे-जैसे AI ज्यादा शक्तिशाली होती जा रही है, यह बहस सिर्फ टेक कंपनियों की नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की बनती जा रही है.

  • पितृपक्ष में बिना प्याज-लहसुन बनाएं स्वादिष्ट आलू-मटर, पूड़ी के साथ लगेगी लाजवाब

    पितृपक्ष में बिना प्याज-लहसुन बनाएं स्वादिष्ट आलू-मटर, पूड़ी के साथ लगेगी लाजवाब

    पितृपक्ष में घर पर श्राद्ध के दौरान सात्विक भोजन बनाया जाता है. इस दौरान कई घरों में प्याज-लहसुन का इस्तेमाल नहीं किया जाता. ऐसे में श्राद्ध के लिए बनाई जाने वाली सब्जियों को स्वादिष्ट और खास बनाना थोड़ा मुश्किल लगता है. अगर आप भी श्राद्ध के लिए बिना प्याज-लहसुन की ऐसी सब्जी बनाना चाहते हैं, जो स्वाद में भरपूर हो और बनाने में ज्यादा समय भी न लगे, तो आलू-मटर की ये रेसिपी ट्राई कर सकते हैं.

    इसमें प्याज-लहसुन की जगह अदरक, हरी मिर्च, साबुत धनिया, सौंफ और खड़े मसालों का इस्तेमाल किया जाता है. इसे कुकर में बनाया जाता है, इसलिए आलू-मटर जल्दी गल भी जाते हैं और मसालों का स्वाद सब्जी में अच्छी तरह उतर जाता है. पूड़ी या कचौड़ी के साथ गरमा-गरम आलू-मटर की ये सब्जी श्राद्ध के भोजन के लिए बढ़िया ऑप्शन हो सकती है. चलिए जानते हैं कैसे झटपट बनाएं श्राद्ध स्पेशल आलू-मटर की सब्जी.

    इंग्रेडिएंट्स
        4 मीडियम साइज के आलू
        1 कप मटर
        3 टमाटर
        2-3 बड़े चम्मच तेल
        ½ छोटा चम्मच सरसों
        ½ छोटा चम्मच जीरा
        1 तेज पत्ता
        दालचीनी का 1 छोटा टुकड़ा
        2 लौंग
        3 इलायची
        ½ छोटा चम्मच हींग
        1 टेबलस्पून साबुत धनिया
        1 छोटा चम्मच सौंफ
        ½ छोटा चम्मच काली मिर्च
        1 इंच अदरक
        2-3 हरी मिर्च
        ½ छोटा चम्मच हल्दी पाउडर
        1 छोटा चम्मच धनिया पाउडर
        ½ छोटा चम्मच जीरा पाउडर
        2 छोटे चम्मच कश्मीरी लाल मिर्च
        1 सूखी लाल मिर्च
        1 छोटा चम्मच नमक या स्वादानुसार
        ¼ छोटा चम्मच काला नमक
        ½ छोटा चम्मच गरम मसाला
        1 छोटा चम्मच कसूरी मेथी
        1 छोटा चम्मच चाट मसाला
        बारीक कटा हरा धनिया
        जरूरत के अनुसार गर्म पानी

    बनाने का तरीका
    1. आलू को छीलकर बड़े टुकड़ों में काट लें और पानी में डालकर रखें, ताकि उनका रंग काला न पड़े. अब मिक्सर जार में साबुत धनिया, सौंफ, काली मिर्च, अदरक और 1-2 हरी मिर्च डालें. इसमें पानी न डालें और सभी चीजों को दरदरा पीस लें. यही मसाला आलू-मटर की सब्जी का स्वाद बढ़ाएगा.

    2. अब कुकर में तेल गर्म करें. तेल गर्म होने पर सरसों डालकर चटकने दें. इसके बाद जीरा, तेज पत्ता, दालचीनी, लौंग और इलायची डालें. खड़े मसालों को धीमी आंच पर कुछ सेकंड भूनें, ताकि उनकी खुशबू तेल में अच्छी तरह आ जाए.

    3. अब हींग डालें और तुरंत तैयार किया हुआ दरदरा मसाला डाल दें. इसे धीमी आंच पर करीब 30-40 सेकंड तक भूनें.

    4. अब इसमें हल्दी, धनिया पाउडर, जीरा पाउडर और कश्मीरी लाल मिर्च डालें. थोड़ा सा पानी डालकर मसालों को अच्छी तरह भूनें. मसाला तब तक भूनें, जब तक उसके किनारों से तेल अलग होता हुआ नजर न आने लगे. इसके बाद एक सूखी लाल मिर्च डालकर मिला दें.

    5. अब 3 टमाटरों को कद्दूकस करके डालें. अगर आप मिक्सर में टमाटर पीस रहे हैं तो उन्हें बहुत बारीक पेस्ट न करें, थोड़ा दरदरा रखें. अब नमक और काला नमक डालकर अच्छी तरह मिला दें.

    6. टमाटर को मीडियम से तेज आंच पर तब तक भूनें, जब तक उसका पानी पूरी तरह सूख न जाए और मसाले के किनारों से तेल अलग न होने लगे. इस स्टेप को अच्छी तरह करने से सब्जी का स्वाद काफी बढ़ जाता है.

    7.  अब कटे हुए आलू और मटर मसाले में डालें. चाहें तो 1-2 साबुत हरी मिर्च भी डाल सकते हैं. आलू और मटर को मसाले के साथ करीब 2 मिनट तक मीडियम आंच पर भूनें.

    8. अब जरूरत के हिसाब से गर्म पानी डालें. सब्जी में जितनी ग्रेवी चाहिए, उसी हिसाब से पानी डालें. पानी डालकर एक उबाल आने दें और फिर कुकर का ढक्कन लगा दें.

    9. तेज आंच पर 2-3 सीटी आने तक पकाएं. आलू के टुकड़े अगर बड़े हैं तो एक सीटी ज्यादा भी लग सकती है.

    10. कुकर का प्रेशर पूरी तरह निकलने के बाद ढक्कन खोलें. अब गरम मसाला, कसूरी मेथी, चाट मसाला और बारीक कटा हरा धनिया डालें. सब्जी को अच्छी तरह मिलाकर धीमी आंच पर करीब 1 मिनट पकाएं. अगर ग्रेवी कम लगे तो थोड़ा गर्म पानी डालकर एक उबाल और दे सकते हैं.