Category: लाइफस्टाइल

  • घर पर बनाएं बाजार जैसा स्पंजी खमन ढोकला, खट्टा-मीठा स्वाद आएगा लाजवाब

    घर पर बनाएं बाजार जैसा स्पंजी खमन ढोकला, खट्टा-मीठा स्वाद आएगा लाजवाब

    गुजरात का फेमस खमन ढोकला आज देशभर में फेमस है और स्नैक्स में दिल्ली-मुंबई में भी लोग इसे बड़े शौक से खाते हैं. अगर आपके घरवाले भी हमेशा एक जैसा ढोकला खाकर बोर गए हैं तो आप घर पर आसानी से बनाकर खमन ढोकला सबको खिला सकते हैं. इसका खट्टा-मीठा स्वाद और टेक्सचर बच्चों को बहुत पसंद आता है और लोग इसे बड़े मन से खाते हैं.

    आइए आपको एकदम बाजार जैसा स्ंपजी और रसभरा खमन ढोकला बनाने की विधि बताते हैं, जिसे फॉलो करते आप घर पर ही इसे आसानी से बना पाएंगे.  इस रेसिपी की सबसे खास बात यह है कि इसे बनाने में ज्यादा समय नहीं लगता और यह बहुत ही हल्का और हेल्दी स्नैक है. इसे आप सुबह के नाश्ते, शाम की चाय या बच्चों के टिफिन के लिए भी तैयार कर सकते हैं.

    खमन ढोकला बना के लिए सामग्री
    घोल के लिए:
        2 कप बेसन
        2 बड़े चम्मच सूजी
        1 बड़ा चम्मच चीनी
        1 छोटा चम्मच नमक
        1 छोटा चम्मच हल्दी
        1 बड़ा चम्मच नींबू का रस
        1 बड़ा चम्मच दही
        1 से 1¼ कप पानी
        1½ छोटा चम्मच ईनो फ्रूट सॉल्ट

    तड़के के लिए:
        2 बड़े चम्मच तेल
        1 छोटा चम्मच राई
        2 हरी मिर्च लंबाई में कटी हुई
        8-10 करी पत्ते
        2 बड़े चम्मच चीनी
        ½ कप पानी
        1 बड़ा चम्मच नींबू का रस
        गार्निश के लिए
        बारीक कटा हरा धनिया
        कद्दूकस किया हुआ ताजा नारियल

    बनाने का आसान तरीका
    बैटर तैयार करें: सबसे पहले एक बड़े बर्तन में बेसन, सूजी, नमक, हल्दी और चीनी डालकर अच्छी तरह मिला लें. अब इसमें दही, नींबू का रस और थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए बिना गुठलियों वाला चिकना घोल तैयार करें. घोल को 10 से 15 मिनट के लिए ढककर साइड में रख दें.

    पानी गर्म करें: अब स्टीमर या बड़े बर्तन में पानी गर्म होने के लिए रख दें. जिस थाली या टिन में ढोकला बनाना है, उसे हल्के तेल से ग्रीस कर लें.

    बैटर में ईनो मिलाएं: स्टीम करने से ठीक पहले घोल में ईनो डालें और ऊपर से एक चम्मच पानी डालकर हल्के हाथों से एक दिशा में मिलाएं. जैसे ही घोल फूलने लगे, उसे तुरंत ग्रीस की हुई थाली में डाल दें.

    ढोकला स्टीम करें: थाली को स्टीमर में रखकर मिडियम फ्लेम पर 15 से 20 मिनट तक पकाएं. टूथपिक डालकर जांच लें. अगर टूथपिक साफ बाहर निकल आए तो ढोकला तैयार है. इसे थोड़ा ठंडा होने दें और अपनी पसंद की शेप में काट लें.

    तड़का लगाने का तरीका
    एक पैन में तेल गर्म करें. इसमें राई डालें. राई चटकने लगे तो हरी मिर्च और करी पत्ता डालकर कुछ सेकंड भून लें. अब पानी, चीनी और नींबू का रस डालकर एक उबाल आने दें. तैयार तड़के को धीरे-धीरे कटे हुए ढोकले के ऊपर डाल दें ताकि ढोकला रस अच्छी तरह सोख ले. आखिर में ऊपर से हरा धनिया और कद्दूकस किया नारियल डालकर गार्निश करें.

    स्वाद बढ़ाने के आसान टिप्स
        ईनो डालने के बाद घोल को ज्यादा देर न रखें, तुरंत स्टीम करें.
        ढोकले को हमेशा मध्यम आंच पर पकाएं, इससे वह मुलायम बनता है.
        तड़के का पानी थोड़ा ज्यादा रखें, इससे ढोकला रसभरा और बाजार जैसा बनता है.
        हरी चटनी और मीठी इमली की चटनी के साथ परोसने पर इसका स्वाद कई गुना बढ़ जाता है.

     

  • बच्चों के कान-नाक छिदवाने की सही उम्र क्या? डॉक्टर ने बताई जरूरी सावधानियां

    बच्चों के कान-नाक छिदवाने की सही उम्र क्या? डॉक्टर ने बताई जरूरी सावधानियां

    भारत में बच्चों के कान और कई परिवारों में नाक छिदवाने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है. कुछ लोग जन्म के कुछ महीनों बाद ही बच्चे का कान छिदवा देते हैं, जबकि कुछ बड़े होने का इंतजार करते हैं. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि आखिर बच्चों के कान या नाक छिदवाने की सही उम्र क्या है? इस बारे में डॉ. आर. के. चतुर्वेदी (Physician) ने कुछ जरूरी बातें बताईं.

    बच्चे के थोड़ा समझदार होने का इंतजार करें
    डॉ. आर. के. चतुर्वेदी के अनुसार, बहुत छोटे बच्चे का कान या नाक छिदवाने से बचना चाहिए. बेहतर होगा कि बच्चे का पियर्सिंग तभी कराया जाए, जब वह थोड़ा समझदार हो और नियमित रूप से ईयररिंग या नोज पिन पहन सके. बहुत छोटे बच्चे अक्सर कान की बाली पकड़कर खींच लेते हैं, जिससे खून निकल सकता है और घाव भी हो सकता है.

    बहुत छोटी उम्र में पियर्सिंग क्यों नहीं करानी चाहिए?
    डॉक्टर बताते हैं कि छोटे बच्चों में पियर्सिंग के दौरान अगर गलती से नस (नर्व) को नुकसान पहुंच जाए, तो आगे चलकर परेशानी हो सकती है. इसके अलावा, पियर्सिंग के समय होने वाला तेज दर्द बच्चे के मन में डर बैठा सकता है. छोटे बच्चों में डर जल्दी विकसित होता है और कई बार यही डर आगे चलकर ट्रॉमा का रूप भी ले सकता है.

    बरसात के मौसम में क्यों नहीं करानी चाहिए पियर्सिंग?
    डॉ. चतुर्वेदी के अनुसार, मानसून के दौरान कान या नाक छिदवाने से बचना चाहिए. इस मौसम में नमी अधिक रहती है, जिससे फंगल इंफेक्शन और घाव में संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए अगर संभव हो तो बारिश का मौसम निकलने के बाद ही पियर्सिंग कराना बेहतर माना जाता है.

    पियर्सिंग कराने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
    पियर्सिंग करवाने से पहले यह जरूर जांच लें कि जिस सुई या उपकरण का इस्तेमाल किया जा रहा है, वह नया और स्टरलाइज्ड हो. अगर गन या कोई अन्य उपकरण इस्तेमाल हो रहा है, तो उसकी साफ-सफाई और गुणवत्ता भी अच्छी होनी चाहिए. खराब क्वालिटी के उपकरण या इस्तेमाल किए हुए सामान से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है.

    क्या है डॉक्टर की सलाह?
    डॉ. आर. के. चतुर्वेदी का कहना है कि बच्चों के कान या नाक छिदवाने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए. जब बच्चा थोड़ा बड़ा हो जाए, चीजों को समझने लगे और खुद ज्वेलरी पहनने में सक्षम हो, तब पियर्सिंग कराना अधिक सुरक्षित विकल्प हो सकता है. साथ ही, साफ-सफाई और सही उपकरण का इस्तेमाल करना भी उतना ही जरूरी है.

  • सफेद डोसा खाकर हो गए हैं बोर? घर पर बनाएं ब्लैक डोसा, जानें आसान रेसिपी

    सफेद डोसा खाकर हो गए हैं बोर? घर पर बनाएं ब्लैक डोसा, जानें आसान रेसिपी

     शायद ही कोई हो जो डोसा खाना पसंद ना करता हो. दाल और चावल से बनने वाली ये साउथ इंडियन डिश खाने में बेहद स्वादिष्ट और हल्की होती है. इसे सांभर और चटनी के साथ सर्व किया जाता है. लोग ना केवल इसे नाश्ते में, बल्कि लंच और डिनर में भी खूब चाव से खाते हैं. यहां तक की अब लोगों ने घर पर ही डोसा बनाना शुरू कर दिया है. अगर आप भी डोसा खाना पसंद करते हैं, तो आपने भी सफेद डोसा ही खाया होगा. क्या आपने कभी ब्लैक डोसा खाया है? चौंकिए नहीं, डोसा ब्लैक भी होता है.

    अगर आप भी नॉर्मल डोसा बनाकर बोर हो चुके हैं और कुछ नया ट्राई करना चाहते हैं, तो ब्लैक डोसा आपके लिए बेहतरीन ऑप्शन हो सकता है. ये दिखने में बेहद अलग और आकर्षक लगता है, इसलिए बच्चों से लेकर बड़े तक इसे देखकर हैरान रह जाते हैं. खास बात ये है कि इसका काला रंग किसी फूड कलर से नहीं, बल्कि एक्टिवेटेड चारकोल से आता है. अगर आपके घर मेहमान आने वाले हैं या वीकेंड पर कुछ हटकर बनाना चाहते हैं, तो ये रेसिपी जरूर ट्राई करें.

    ब्लैक डोसा बनाने के लिए इंग्रेडिएंट्स
        1½ कप चावल
        ½ कप उड़द दाल
        ½ छोटा चम्मच मेथी दाना
        1 छोटा चम्मच एक्टिवेटेड चारकोल
        जरूरत अनुसार पानी
        स्टफिंग के लिए भुने आलू

    ब्लैक डोसा बनाने का आसान तरीके
    1. सबसे पहले चावल, उड़द दाल और मेथी दाना को अच्छी तरह धोकर 4 से 5 घंटे के लिए पानी में भिगो दें.

    2. भीगे हुए सभी इंग्रेडिएंट्स को पानी की मदद से पीसकर स्मूद बैटर तैयार कर लें. अब इसे ढककर पूरी रात या 8 से 10 घंटे के लिए फर्मेंट होने के लिए रख दें.

    3. फर्मेंट किए गए बैटर में से करीब 2 कप बैटर अलग निकालें. इसमें 1 छोटा चम्मच एक्टिवेटेड चारकोल डालें और अच्छी तरह मिलाएं, ताकि बैटर का रंग पूरी तरह काला हो जाए.

    4. अब तवा गर्म करें और हल्के से तेल या बटर से ग्रीस कर लें. तैयार ब्लैक बैटर को तवे पर गोलाई में फैलाएं. मीडियम आंच पर दोनों तरफ से कुरकुरा और सुनहरा होने तक सेंक लें.

    5. इसमें आप आलू वाला चटपटा मसाला भी भर सकते हैं. तैयार ब्लैक डोसा को नारियल की चटनी, सांभर या अपनी पसंद की किसी भी चटनी के साथ गरमागरम परोसें.

    ब्लैक डोसा बनाते समय रखें ये बातें
        बैटर अच्छी तरह फर्मेंट होगा, तभी डोसा कुरकुरा बनेगा.
        एक्टिवेटेड चारकोल हमेशा फूड ग्रेड वाला ही इस्तेमाल करें.
        चारकोल की मात्रा ज्यादा न डालें, इससे स्वाद पर असर हो सकता है.
        तवा सही टेंपरेचर पर होगा तो डोसा आसानी से फैलेगा और चिपकेगा नहीं.

     

  • व्रत में बनाएं समा चावल का टेस्टी चीला, मूंगफली की चटनी के साथ लगेगा लाजवाब

    व्रत में बनाएं समा चावल का टेस्टी चीला, मूंगफली की चटनी के साथ लगेगा लाजवाब

    कुट्टू और राजगिरे के आटे की तरह समा के चावल से भी व्रत में कई तरह की डिश बनाई जाती हैं. आपने अब तक इससे बनी खीर और खिचड़ी तो खूब खाई होगी लेकिन क्या कभी समा के चावल का चीला खाया है. अगर नहीं, तो आज हम आपको समा चावल का टेस्टी चीला बनाने की आसान रेसिपी बताएंगे, जिसे आप घर पर बेहद आसानी से तैयार कर सकते हैं.

    इसका स्वाद बढ़ाने के लिए आप इसे मूंगफली और दही से बनी चटपटी चटनी के साथ सर्व कर सकते हैं. आइए जानते हैं समा चावल का टेस्टी चीला बनाने का तरीका और इसके लिए किन-किन चीजों की जरूरत होगी.

    इंग्रेडिएंट्स (ingredients)
    चीला बनाने के लिए
    1 कप समा के चावल
    1/4 कप भुनी हुई मूंगफली
    1 कप दही
    1 टी स्पून भुना जीरा पाउडर
    1/4 कप बारीक कटा हरा धनिया
    2 टेबल स्पून बारीक कटी हरी मिर्च
    2 टेबल स्पून कद्दूकस किया हुआ अदरक
    स्वादानुसार सेंधा नमक

    जरूरत के अनुसार मूंगफली का तेल या घी
    चटनी के लिए
    1 कप हरा धनिया
    1/2 कप भुनी हुई मूंगफली
    2 छोटे चम्मच दही
    2 हरी मिर्च
    1 इंच अदरक
    सेंधा नमक स्वादानुसार
    पानी जरूरत अनुसार

    समा चावल का चीला बनाएं कैसे?

    • समा चावल का चीला बनाने के लिए सबसे पहले समा के चावल को अच्छी तरह धोकर लगभग 1 घंटे के लिए पानी में भिगो दें.
    • इसके बाद पानी निकालकर चावल को मिक्सर में डालें और दही के साथ पीसकर हल्का दरदरा या चिकना घोल तैयार कर लें.
    • अब इस घोल में भुनी हुई मूंगफली, भुना जीरा पाउडर, हरा धनिया, हरी मिर्च, अदरक और सेंधा नमक डालकर अच्छी तरह मिला लें. अगर घोल ज्यादा गाढ़ा लगे तो इसमें थोड़ा पानी डालकर इसे डोसे या चीले के बैटर जैसा बना लें.
    • अब तवा गर्म करें और उस पर थोड़ा सा घी या मूंगफली का तेल लगाएं. तवे पर घोल डालकर गोल आकार में पतला फैलाएं.
    • अब चीले को मीडियम गैस पर दोनों तरफ से सुनहरा और हल्का कुरकुरा होने तक सेंक लें.
    • गरमागरम समा चावल के चीले को मूंगफली की चटनी के साथ सर्व करें. यह व्रत के दौरान नाश्ते या हल्के खाने के लिए बेस्ट ऑप्शन है.

    मूंगफली की चटनी कैसे बनाएं?
    मूंगफली की चटनी बनाने के लिए मिक्सर में हरा धनिया, भुनी हुई मूंगफली, दही, हरी मिर्च, अदरक और सेंधा नमक डालें. इसमें पानी डालकर सभी चीजों को अच्छी तरह पीस लें. आपकी स्वादिष्ट मूंगफली की चटनी तैयार है.

  • बारिश में भीग गया स्मार्टफोन? ये गलतियां कर सकती हैं फोन को हमेशा के लिए खराब

    बारिश में भीग गया स्मार्टफोन? ये गलतियां कर सकती हैं फोन को हमेशा के लिए खराब

    बारिश का मौसम आते ही सबसे ज्यादा खतरा सिर्फ आपके कपड़ों या जूतों को नहीं, बल्कि स्मार्टफोन को भी होता है. कई बार तेज बारिश में फोन जेब में ही भीग जाता है. कभी बाइक चलाते समय पानी लग जाता है, तो कभी फोन सीधे पानी में गिर जाता है. ऐसे में ज्यादातर लोग घबराकर वही करते हैं जो बिल्कुल नहीं करना चाहिए. यही छोटी-सी गलती फोन की स्क्रीन, मदरबोर्ड या चार्जिंग पोर्ट को हमेशा के लिए खराब कर सकती है

    अगर आपका फोन बारिश में भीग जाए या पानी में गिर जाए, तो सबसे पहले घबराएं नहीं. सबसे जरूरी काम है फोन को तुरंत पानी से बाहर निकालना और अगर वह ऑन है तो उसे बंद कर देना. फोन के अंदर पानी होने पर बिजली का करंट सर्किट को नुकसान पहुंचा सकता है. इसलिए बार-बार यह देखने की कोशिश न करें कि फोन अभी भी चल रहा है या नहीं l

    फोन का कवर तुरंत निकाल दें. अगर सिम ट्रे आसानी से निकलती है तो उसे भी बाहर निकाल लें. इसके बाद सूखे और मुलायम कपड़े से फोन को अच्छी तरह पोंछ लें. चार्जिंग पोर्ट और स्पीकर ग्रिल के पास जमा पानी को भी बाहर आने दें. फोन को जोर-जोर से झटकने की गलती न करें. ऐसा करने से पानी और अंदर तक जा सकता है l

    तुरंत चार्जिंग में ना लगाएं
    सबसे बड़ी गलती जो लोग करते हैं, वह है फोन को तुरंत चार्जिंग पर लगा देना. अगर फोन के अंदर या चार्जिंग पोर्ट में नमी है, तो चार्ज करने से शॉर्ट सर्किट हो सकता है. कई नए स्मार्टफोन खुद मॉयस्चर डिटेक्टेड या लिक्विड डिटेक्टेड का मैसेज दिखाते हैं. जब तक यह चेतावनी हट न जाए और फोन पूरी तरह सूख न जाए, तब तक चार्जिंग से बचना चाहिए l

    चावल में फोन रखें या नहीं?
    एक और पुराना तरीका है फोन को चावल में दबाकर रखना. सालों से लोग ऐसा करते आ रहे हैं, लेकिन अब ऐपल समेत कई एक्सपर्ट्स इसे सही तरीका नहीं मानते. चावल बाहर की थोड़ी नमी तो सोख सकता है, लेकिन फोन के अंदर पहुंचे पानी को नहीं निकाल पाता. उल्टा चावल के छोटे कण और धूल चार्जिंग पोर्ट या स्पीकर में फंस सकते हैं l

    हेयर ड्रायर से मोबाइल सुखाना कितना सही?
    कई लोग हेयर ड्रायर से गर्म हवा मारने लगते हैं. यह भी सही तरीका नहीं है. तेज गर्मी फोन के अंदर लगे गोंद, डिस्प्ले और बैटरी को नुकसान पहुंचा सकती है. इसी तरह फोन को धूप में लंबे समय तक रखना, माइक्रोवेव में डालना या ओवन के पास रखना भी खतरनाक हो सकता है. सबसे अच्छा तरीका है कि फोन को सामान्य कमरे के तापमान पर अच्छी हवा वाली जगह में रख दें. चाहें तो उसके सामने हल्का पंखा चला सकते हैं l

    अगर फोन सिर्फ बारिश में हल्का भीगा है, तो उसे कुछ घंटे सूखने दें. लेकिन अगर वह नदी, समुद्र, स्विमिंग पूल या किसी और पानी में गिरा है, तो मामला थोड़ा अलग हो सकता है. खारे पानी या क्लोरीन वाले पानी से फोन के अंदर जंग जल्दी लग सकती है. ऐसे मामलों में फोन को जल्द से जल्द अधिकृत सर्विस सेंटर में दिखाना बेहतर रहता है l

    वॉटर रेजिस्टेंट फोन्स का क्या?
    बहुत से लोग सोचते हैं कि उनके फोन पर IP67 या IP68 लिखा है, इसलिए उसे पानी से कोई नुकसान नहीं होगा. लेकिन यह पूरी तरह सच नहीं है. IP रेटिंग का मतलब यह नहीं कि फोन पूरी तरह वाटरप्रूफ है. यह सुरक्षा कंट्रोल्ड लैब टेस्ट में तय की जाती है. समय के साथ फोन के रबर सील कमजोर हो सकते हैं. अगर फोन गिर चुका है, रिपेयर हुआ है या पुराना हो गया है, तो उसकी वॉटर रेजिस्टेंस पहले जैसी नहीं रहती. कई कंपनियां पानी सेहुए नुकसान को वारंटी में भी शामिल नहीं करतीं

    अगर फोन सूखने के बाद भी स्क्रीन झिलमिलाने लगे, कैमरे के अंदर धुंध दिखे, स्पीकर की आवाज खराब हो जाए या चार्जिंग में दिक्कत आए, तो इसे नजरअंदाज न करें. कई बार पानी का असर तुरंत नहीं दिखता और कुछ घंटों या दिनों बाद मदरबोर्ड में जंग लगने लगती है. ऐसे में जितनी जल्दी फोन की प्रोफेशनल सफाई और जांच कराई जाए, उसके बचने की संभावना उतनी ज्यादा होती है.

  • मां लक्ष्मी को नाराज कर देती हैं ये 4 आदतें, घर में बनी रहती है आर्थिक तंगी

    मां लक्ष्मी को नाराज कर देती हैं ये 4 आदतें, घर में बनी रहती है आर्थिक तंगी

    माता लक्ष्मी को धन, ऐश्वर्य और वैभव की देवी माना जाता है.हर व्यक्ति की चाहत होती है कि उसके घर-परिवार में हमेशा सुख-समृद्धि का वास रहे और कभी भी पैसों की तंगी का सामना न करना पड़े.इसके लिए लोग दिन-रात मेहनत भी करते हैं.हालांकि, कई बार लाख कोशिशों और कड़ी मेहनत के बावजूद घर में आर्थिक तंगी बनी रहती है.ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, इसके पीछे हमारी कुछ रोजमर्रा की ऐसी आदतें और अनजाने में की जाने वाली गलतियां होती हैं, जो मां लक्ष्मी को नाराज कर देती हैं.

    यदि आपके घर में भी लगातार धन हानि हो रही है या बरकत रुक गई है, तो आपको अपनी इन आदतों में तुरंत सुधार करने की जरूरत है.आइए जानते हैं उन गलतियों और बुरी आदतों के बारे में जो मां लक्ष्मी के रुठने का कारण बनती हैं:

    1. घर में रोज-रोज कलह और क्लेश होना
    वास्तु शास्त्र के अनुसार, जिस घर में हमेशा लड़ाई-झगड़ा, कलह और नकारात्मक माहौल रहता है, वहां कभी भी मां लक्ष्मी का वास नहीं होता है.जिस घर के लोग आपस में अपशब्द बोलते हैं या बात-बात पर गुस्सा करते हैं, वहां से देवी लक्ष्मी तुरंत विदा हो जाती हैं.इसलिए घर का माहौल हमेशा शांत और खुशनुमा बनाए रखना चाहिए.

    2. साफ-सफाई और स्वच्छता का अभाव
    मां लक्ष्मी का वास उसी घर में होता है जहां साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है.जिन घरों में गंदगी फैली रहती है, कोनों में मकड़ी के जाले लगे रहते हैं या कूड़ा-कचरा इकट्ठा रहता है, वहां दरिद्रता वास करती है.इसके अलावा, सूर्यास्त के समय घर में झाड़ू लगाना या मुख्य द्वार पर गंदगी रखना भी अशुभ माना जाता है.

    3. गलत दिनचर्या और आलस
    आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों की जीवनचर्या काफी बदल गई है, लेकिन कुछ आदतें सीधे तौर पर आपके भाग्य को प्रभावित करती हैं.जो लोग सूर्योदय के बाद तक बिस्तर पर सोते रहते हैं, सूर्यास्त के समय भी सोते हैं, उनसे मां लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं.ब्रह्म मुहूर्त में उठना और दिन की शुरुआत सकारात्मक ऊर्जा के साथ करना बेहद शुभ माना जाता है.

    4. अन्न और जल का अपमान
    भोजन को अन्नपूर्णा मां का रूप माना जाता है.जो व्यक्ति थाली में खाना छोड़ता है, अन्न का अपमान करता है या जरूरत से ज्यादा भोजन बर्बाद करता है, उसके घर में कभी बरकत नहीं होती.इसके अलावा, बुजुर्गों, मेहमानों और जरूरतमंदों का अनादर करने से भी मां लक्ष्मी का आशीर्वाद समाप्त हो जाता है.

    इन छोटी-छोटी लेकिन बेहद महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखकर और अपनी बुरी आदतों को बदलकर आप अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त कर सकते हैं.

  • घर पर बनाएं होटल जैसी पतली और मुलायम रुमाली रोटी, तवे पर ऐसे करें तैयार

    घर पर बनाएं होटल जैसी पतली और मुलायम रुमाली रोटी, तवे पर ऐसे करें तैयार

    रोटी भारतीय खाने का एक अहम हिस्सा है और ज्यादातर घरों में इसे रोज बनाया जाता है. लेकिन आप रोज की सादी रोटी या पराठा खाकर बोर हो गए हैं तो कुछ अलग ट्राई कर सकते हैं. होटल या रेस्टोरेंट में मिलने वाली पतली और मुलायम रुमाली रोटी इसका बेहतरीन ऑप्शन है. यह बेहद पतली, मुलायम और टेस्टी होती है और दाल, सब्जी, पनीर या किसी भी गाढ़ी ग्रेवी के साथ खूब पसंद की जाती है.

    ज्यादातर लोगों को लगता है कि रेस्टोरेंट जैसी रुमाली रोटी घर पर बनाना मुश्किल है लेकिन ऐसा नहीं है. आप इसे आसानी से घर पर तवे पर तैयार कर सकते हैं. तो आइए जानते हैं तवे पर रुमाली रोटी बनाने का आसान तरीका.
    रुमाली रोटी बनाने के लिए किन-किन चीजों की जरूरत होती है?

    3 कप गेहूं का आटा
    1 कप मैदा
    2 कप पानी, जरूरत के अनुसार
    सूखा आटा, रोटी बेलने के लिए

    घर पर होटल जैसी रुमाली रोटी कैसे बनाएं?

    • घर पर होटल जैसा रुमाली रोटी बनाने के लिए सबसे पहले एक बड़े बाउल में गेहूं का आटा और मैदा डालकर अच्छी तरह मिला लें.
    • अब इसमें थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए नरम और हल्का चिपचिपा आटा गूंथ लें. आटा जितना मुलायम होगा, रोटी उतनी ही अच्छी बनेगी.
    • आटा गूंथने के बाद इसे ढककर लगभग 2 से 3 घंटे के लिए रख दें. इससे आटा अच्छी तरह सेट हो जाएगा और रोटी बेलने में आसानी होगी.
    • अब तैयार आटे की छोटी-छोटी लोइयां बना लें. एक लोई लें और उस पर थोड़ा सूखा आटा लगाएं. इसे बेलकर इतना पतला करें कि रोटी लगभग पारदर्शी नजर आने लगे.
    • इसके बाद गैस पर तवा उल्टा करके रखें और उसे अच्छी तरह गर्म होने दें. अब बेली हुई रोटी को गर्म तवे पर डालें और तेज आंच पर लगभग 10-12 सेकंड तक सेंकें. जब रोटी पर छोटे-छोटे बुलबुले दिखाई देने लगें और नीचे की तरफ हल्का ब्राउन रंग आने लगे तो इसे पलट दें.
    • दूसरी तरफ से भी कुछ सेकंड तक सेंकें. ध्यान रखें कि रुमाली रोटी को ज्यादा देर तक न पकाएं, वरना यह मुलायम होने के बजाय कड़ी हो सकती है.
    • रोटी तैयार होने के बाद इसे तवे से उतारें और चार हिस्सों में मोड़ लें. इसे गरमागरम दाल, सब्जी, पनीर या किसी भी पसंदीदा ग्रेवी वाली डिश के साथ परोसें.

     

  • iPhone 17 Pro Max हुआ सस्ता, Flipkart Sale में मिल रहा ₹16,000 तक का फायदा

    iPhone 17 Pro Max हुआ सस्ता, Flipkart Sale में मिल रहा ₹16,000 तक का फायदा

    ईकॉमर्स प्लेटफॉर्म फ्लिपकार्ट पर फ्रीडम सेल की शुरुआत सभी के लिए हो चुकी है. सेल के दौरान ऐपल के iPhone पर डील्स मिल रही हैं. iPhone 15 से लेकर 17 तक पर ऑफ मिल रहा है.   

    Apple iPhone 17 Pro Max को फ्लिपकार्ट सेल के दौरान खरीदने पर 16 हजार रुपये की सेविंग करने का मौका मिल रहा है. आइए इस डील के बारे में डिटेल्स में जानते हैं.

    iPhone 17 Pro Max को बीते साल सितंबर में 1,49,999 रुपये में लॉन्च किया था. अब इस हैंडसेट को फ्लिपकार्ट सेल के दौरान 1,41,999 रुपये में लिस्ट किया है और बैंक ऑफर के तहत 8 हजार रुपये तक की एक्स्ट्रा सेविंग की जा सकती है. ऐसे में यूजर्स को 16 हजार रुपये की सेविंग होगी.

    iPhone 17 Pro Max पर और भी कई बैंक ऑफर
    iPhone 17 Pro Max के साथ और भी बैंक डिस्काउंट मिल रहा है, जिनका फायदा उठाकर ऑफर का फायदा उठाया जा सकता है. साथ ही पुराने हैंडसेट को एक्सचेंज करके कीमत को और भी कम किया जा सकेगा. पुराने फोन की एक्सचेंज वैल्यू उसकी कंडिशन पर निर्भर करती है.

    iPhone 17 Pro Max के स्पेसिफिकेशन्स
    iPhone 17 Pro Max में 6.9 इंच का LTPO सुपर रेटिना XDR OLED डिस्प्ले दिया है. इसमें 120Hz का रिफ्रेश रेट्स मिलता है. इसमें स्क्रीन टू बॉडी रेश्यो 90.7 परसेंट तक का मिलता है. साथ ही कंपनी ने स्क्रीन की सुरक्षा के लिए सेरेमिक शील्ड 2 का इस्तेमाल किया है. इसमें एंटी रिफ्लेक्टिंग कोटिंग का यूज किया है. iPhone 17 Pro Max में ऐपल का A19 (3nm) चिपसेट का यूज किया है. इसमें ऐपल जीपीयू दिया है.  

    iPhone 17 Pro Max का कैमरा सेटअप
    iPhone 17 Pro Max में ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप मिलता है. इसमें तीनों ही सेंसर 48-48 मेगापिक्सल के हैं. इसमें अल्ट्रावाइड और पेरिस्कोप टेलीफोटो लेंस मिलता है. इसमें 18 मेगापिक्सल का मल्टी-आस्पेक्ट कैमरा दिया है.

  • UPI पर MDR को लेकर सरकार ने साफ की तस्वीर, आम यूजर पर नहीं लगेगा चार्ज

    UPI पर MDR को लेकर सरकार ने साफ की तस्वीर, आम यूजर पर नहीं लगेगा चार्ज

    नई दिल्ली
    यूनिफाइड इंटरफेस पेमेंट्स यानी UPI पर एमडीआर का मामला बीते कुछ दिनों से लगातार सुर्खियां बना हुआ है. संसद में मोदी सरकार की ओर से विधेयक पेश किए जाने के बाद आम जनता जहां इस सोच में पड़ी कि क्या अब 2000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई पेमेंट पर उसे चार्ज देना होगा? तो विपक्ष कांग्रेस इसे लेकर सरकार पर हमलावर नजर आया.

    हालांकि, अब लोकसभा में भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन करने वाले इस विधेयक को पारित कर दिया गया है और इसके साथ ही सरकार ने संसद में इससे जु़ड़ी 'A To Z' डिटेल करते हुए तस्वीर साफ कर दी है. सरकार ने बता दिया है कि MDR क्यों लागू करने की तैयारी है, इससे आम यूपीआई यूजर पर कितना प्रभाव होगा?

    MDR आखिर होता क्या है?  
    सबसे पहले ये समझना जरूरी है कि आखिर मर्चेंट डिस्‍काउंट रेट यानी MDR होता क्या है? तो बता दें कि यह वह चार्ज है, जो व्‍यापारी डिजिटल ट्रांजेक्‍शन को पूरा करने के लिए बैंकों या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को देते हैं. यानी नाम से जाहिर है कि ये मर्चेंट के लिए, आम कंज्‍यूमर्स इस चार्ज का पेमेंट नहीं करते हैं. इसे जुड़ा नया विधेयर सरकार को बैंकों और अन्य सर्विस प्रोवाइडर्स  को यूपीआई और अन्य नोटिफाई इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट मोड्स से किए गए भुगतानों पर शुल्क लगाने की अनुमति देने के लिए अधिकृत करता है.

    सरकार ने साफ की तस्वीर
    लोकसभा द्वारा मोदी सरकार द्वारा पेश किए गए इस विधेयक को पारित किए जाने के एक दिन बाद सरकार ने कहा कि यूपीआई के माध्यम से भुगतान करने पर उपयोगकर्ताओं को कोई लेन-देन शुल्क नहीं देना होगा, बल्कि ये एमडीआर भविष्य में सीमित संख्या में व्यापारी लेनदेन के लिए शुरू की जा सकती है. सीधे शब्दों में समझें, तो वित्त मंत्रालय की ओर से साफ कर दिया गया है कि व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) यूपीआई ट्रांजैक्शन पूरी तरह से फ्री रहेंगे. इसके साथ ही व्यापारियों द्वारा किए जाने वाले अधिकांश लेनदेन पर भी इसका असर नहीं होगा.

    MDR लागू हुआ तो…
    सरकार ने बताया है कि अगर MDR शुल्क लागू किए जाते हैं, तो वे सिर्फ एक निश्चित सीमा से अधिक के सीमित व्यापारी लेनदेन पर ही लागू होंगे. ये चार्ज नाममात्र के होंगे और डेबिट-क्रेडिट कार्ड लेनदेन पर लागू एमडीआर से काफी कम होंगे. मतलब सरकार के मुताबिक, एमडीआर सीमा-आधारित होगा और सभी यूपीआई लेनदेन पर समान रूप से लागू नहीं होगा. सरकार की ओर से आगे कहा गया है कि UPI Transactions की मात्रा में तेजी से हो रही वृद्धि के लिए साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी की रोकथाम और बुनियादी ढांचे के उन्नयन में महत्वपूर्ण और निरंतर निवेश की आवश्यकता है.

    वित्त मंत्री से RBI गवर्नर तक ने दिलाया भरोसा
    सरकार की ओर से संसद में यूपीआई पेमेंट पर एमडीआर चार्ज को लेकर तस्वीर साफ करने से पहले वित्त मंत्री ने कांग्रेस के आरोपों पर पलवार करते हुए कहा था कि 'अगर कोई मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी  MDR लागू की जाती है, तो वह सिर्फ और सिर्फ व्यापारियों पर लागू होगी, ग्राहकों पर नहीं. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि एनपीसीआई (NPCI) की अध्यक्षता वाली यूपीआई और सेवा संचालन समिति ने अभी तक एमडीआर पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है.'  

    इसके अलावा RBI Governor संजय मल्होत्रा ने भी साफ कहा था कि यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने के मुद्दे पर अभी जल्दबाजी में कुछ नहीं कहा जा सकता है. भुगतान प्रणाली पर अभी भी विचार-विमर्श जारी है.

    सरकार ने इस दावों को बताया 'झूठा'
    वित्त मंत्रालय ने UPI Payment MDR को लेकर जारी उन तमाम रिपोर्ट्स को खारिज किया है, जिनमें कथित तौर पर यह दावा किया गया कि बाहरी प्रभाव नीतिगत परिवर्तनों को प्रेरित कर रहे हैं. सरकार ने इस तरह के दावों को पूरा तरह से बेबुनियाद, झूठा और भ्रामक करार दिया है. सरकार ने कहा कि अगर बाहरी दबाव ने सरकारी नीति को प्रभावित किया होता, तो 2016 में यूपीआई की शुरुआत नहीं की गई होती और न ही जनवरी 2020 से इसे व्यापारियों और नागरिकों दोनों के लिए फ्री किया गया होता.

  • Meta के बाद अब अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सरकार की नजर, होगी जांच

    Meta के बाद अब अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सरकार की नजर, होगी जांच

    भारत सरकार मेटा के बाद अब अन्य प्लेटफॉर्म को भी बुलाने की योजना बना रही है. सरकार जांच करेगी कि वह अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं या नहीं. हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फेसबुक वीडियो को हटाने वाले मामले में मेटा को माफी मांगनी पड़ी है. अब सरकार अन्य प्लेटफॉर्म्स को भी बुलाने की योजना बना रही है.  

    सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को बुलाकर यह जांच करेगी कि भारतीय कानून के तहत वे इंटरमीडियरी की परिभाषा में आते हैं या नहीं. ये जानकारी सूत्र के हवालों से मिली है.

    अगर Meta या अन्य प्लेटफॉर्म यह तय करते हैं कि कौन-सा कंटेंट किसे दिखाया जाए, तो यह पब्लिशिंग के कंटेंट के तहत आते हैं. ऐसे में प्लेटफॉर्म को अपने काम की जिम्मेदारी लेनी होगी.

    प्लेटफॉर्म तय करता है कि यूजर्स क्या देखें?
    सूत्र के मुताबिक, जब किसी प्लेटफॉर्म का रिकमेंडेशन सिस्टम यह तय करता है कि किस यूजर को कौन-सा कंटेंट दिखाया जाए, या वह पेड कंटेंट को प्रमोट करता है, तो उसके इंटरमीडियरी स्टेटस पर सवाल खड़े होते हैं.

    मेटा ऑफिसर ने कहा, जो हुआ गलत हुआ
    हाल ही में अमेरिका से भारत आए मेटा के चीफ ग्लोबल अफेयर्स ऑफिसर जोएल कैपलन ने लिखित बयान में माफी मांगी. उन्होंने नरेंद्र मोदी के फेसबुक पोस्ट पर लगी पोस्ट रिमूव होने पर खेत जताया. साथ ही मेटा सीईओ मार्क जकरबर्ग ने कुछ मामलों के लेकर खेत जताता है.

    केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के साथ हुई थी मीटिंग
    मेटा अधिकारियों की ये मीटिंग केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के साथ हुई. मेटा से पूछा गया कि क्या कंपनी पैसे लेकर कुछ अलग तरह के कंटेंट को प्रमोट करती है.

    नियम ना मानने पर खत्म होगा अधिकार  
    मेटा के साथ बातचीत के दौरान सरकार ने  सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 79 का जिक्र किया है. अगर कोई प्लेटफॉर्म मीडिएटर के रूप में अपनी कानूनी जिम्मेदारी का पालन नहीं करते हैं तो उनको मिलने वाली सेफ हार्बर सुविधा को खत्म किया जाएगा. सेफ हार्बर एक तरह की कानूनी सुरक्षा होती है.