Category: लाइफस्टाइल

  • झारखंड का फेमस धुस्का घर पर बनाएं, बाहर से कुरकुरा और अंदर से नरम; जानें आसान रेसिपी

    झारखंड का फेमस धुस्का घर पर बनाएं, बाहर से कुरकुरा और अंदर से नरम; जानें आसान रेसिपी

    अगर आप हर दिन एक जैसा नाश्ता खाकर बोर हो गए हैं और कुछ नया ट्राई करना चाहते हैं तो झारखंड का पारंपरिक व्यंजन धुस्का आपके लिए बेहतरीन ऑप्शन हो सकता है. बाहर से कुरकुरा और अंदर से नरम धुस्का स्वाद में बेहद लाजवाब होता है. इसे आमतौर पर आलू की सब्जी, चने की सब्जी या चटनी के साथ परोसा जाता है.

    अच्छी बात यह है कि इसे घर पर बहुत ही आसानी से तैयार किया जा सकता है. आइए जानते हैं झारखंड का फेमस धुस्का बनाते कैसे हैं और इसे बनाने के लिए किन-किन चीजों की जरूरत होती है.

    इंग्रेडिएंट्स (ingredients)
    1 कप भीगे हुए चावल
    ½ कप भीगी हुई चना दाल
    ¼ कप भीगी हुई उड़द दाल
    4 हरी मिर्च
    ¾ इंच अदरक का टुकड़ा
    2 बड़े चम्मच बारीक कटा हरा धनिया
    1 छोटा चम्मच जीरा
    ½ चुटकी हींग
    ¼ छोटा चम्मच हल्दी पाउडर
    1 छोटा चम्मच नमक (स्वादानुसार)
    ¼ छोटा चम्मच ईनो फ्रूट साल्ट
    तलने के लिए रिफाइंड तेल

    झारखंड का धुस्का घर पर कैसे बनाएं?

    • झारखंड का धुस्का बनाने के लिए सबसे पहले चावल, चना दाल और उड़द दाल को अच्छी तरह धोकर 4 से 5 घंटे के लिए अलग-अलग पानी में भिगो दें.
    • भिगोने के बाद चावल का सारा पानी निकालकर थोड़ा पानी डालते हुए मिक्सर में पीस लें और एक बाउल में निकाल लें.
    • अब चना दाल, उड़द दाल, हरी मिर्च और अदरक को भी थोड़ा पानी डालकर महीन पेस्ट बना लें.
    • इस पेस्ट को चावल के मिश्रण में मिलाएं. फिर इसमें जीरा, हींग, हल्दी, नमक और हरा धनिया डालकर अच्छी तरह मिक्स करें. अगर घोल ज्यादा गाढ़ा लगे तो थोड़ा पानी मिला लें.
    • अब इसमें ईनो फ्रूट साल्ट डालकर 2 से 3 मिनट तक अच्छी तरह फेंट लें, ताकि धुस्का हल्का और फूला हुआ बने.
    • कड़ाही में तेल गर्म करें. जब तेल अच्छी तरह गर्म हो जाए तो चमचे की मदद से घोल डालें और मीडियम गैस पर दोनों तरफ से सुनहरा और कुरकुरा होने तक तलें.
    • तैयार धुस्का को प्लेट में निकालें और आलू की सब्जी, चने की सब्जी, टमाटर की चटनी या हरी चटनी के साथ गरमा-गरम परोसें.

    इन बातों का रखें ध्यान
        चावल और दाल को कम से कम 4-5 घंटे जरूर भिगोएं.
        बैटर न ज्यादा पतला हो और न ही बहुत गाढ़ा.
        धुस्का हमेशा मध्यम आंच पर तलें, इससे यह अंदर तक अच्छी तरह पकता है और बाहर से कुरकुरा बनता है.
        बैटर में ईनो डालने के बाद उसे ज्यादा देर तक न रखें, तुरंत धुस्का तलना शुरू करें.

     

  • चाणक्य नीति: जलनखोर रिश्तेदारों से बचने के लिए इन 5 बातों का रखें ध्यान

    चाणक्य नीति: जलनखोर रिश्तेदारों से बचने के लिए इन 5 बातों का रखें ध्यान

    जलनखोर रिश्तेदार कई बार जासूस की तरह आपकी जिंदगी की जानकारी खोजने में लग जाते हैं. वे जानना चाहते हैं कि, 'आप कैसे हो? क्या चल रहा है?" लेकिन हर बार इसका मतलब यह नहीं होता कि उन्हें आपकी चिंता है. कई बार वे सिर्फ यह जानना चाहते हैं कि आपकी जिंदगी में क्या चल रहा है. आपकी कमाई कितनी है, घर में क्या परेशानी है, पत्नी से झगड़ा हुआ या नहीं, बच्चों के कितने नंबर आए. इन्हीं बातों के चलते हम कई बार बिना सोचे-समझे अपनी सारी बातें रिश्तेदारों को बता देते हैं.

    बस, यहीं से परेशानी शुरू हो जाती है. आपने अपनी जरूरी बातें उन्हें बता दीं और बाद में वही बातें आपके खिलाफ इस्तेमाल कर सकते हैं. कभी आपकी पीठ पीछे बात होगी, तो कभी सबके सामने आपको नीचा दिखाने के लिए इन्हीं बातों का इस्तेमाल किया जाएगा.

    जलन क्या होती है?
    चाणक्य नीति के मुताबिक, मुश्किल समय में इंसान को सावधान रहना चाहिए. कई बार परेशानी बाहर के लोगों से नहीं, बल्कि अपने ही परिवार और रिश्तेदारों से हो सकती है. कुछ रिश्तेदार ऐसे होते हैं, जो आपकी अच्छाइयों से ज्यादा आपकी कमियां देखते हैं. ठीक इसी तरह कुछ लोग आपकी कई सफलताओं को छोड़कर सिर्फ आपकी एक कमी पर ध्यान देते हैं. आप अच्छी कमाई करें, नई गाड़ी खरीदें, बड़ा घर बनाएं या जीवन में आगे बढ़ें, फिर भी कुछ लोगों को आपकी खुशी पसंद नहीं आती है. वे आपकी सफलता में भी कोई न कोई कमी निकालने लगते हैं.

    इसलिए सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि हर किसी की जलन आपकी गलती नहीं है. अगर कोई आपकी तरक्की देखकर खुश नहीं होता या आपकी हर सफलता में कमी निकालता है, तो उसकी सोच के लिए आपको खुद को दोषी मानने की जरूरत नहीं है. तो आज हम चाणक्य नीति के ऐसे ही कुछ सिद्धांतों के बारे में जानेंगे, जिनकी मदद से आप जलन और नकारात्मक सोच रखने वाले रिश्तेदारों से खुद को बचा सकते हैं.

    प्रतिक्रिया पर नियंत्रण
    चाणक्य नीति के मुताबिक,  जो व्यक्ति अपने गुस्से पर नियंत्रण रखता है, वही असल में मजबूत होता है. उदाहरण, 'सोचो, परिवार में सब बैठे हैं और कोई रिश्तेदार कह देता है, सुना है नौकरी चली गई? अब क्या करोगे?' या फिर, 'उम्र निकल रही है, शादी क्यों नहीं कर रहे?' ऐसे समय में गुस्सा आना स्वाभाविक है. आपका मन करेगा कि आप कुछ बोलें और उसे जवाब दें. लेकिन यहीं आपको रुकना है. जो व्यक्ति आपको नीचा दिखाना चाहता है, उसे आपकी सफाई से ज्यादा आपकी प्रतिक्रिया में दिलचस्पी होती है. इसलिए शांत रहें, मुस्कुराएं और बात बदल दें. याद रखिए, हर बात का जवाब देना जरूरी नहीं होता है. कई बार आपकी चुप्पी ही सबसे मजबूत जवाब होती है.

    अपनी जानकारी छिपाकर रखें
    जलनखोर रिश्तेदार अक्सर आपकी महत्वपूर्ण बातें जानना चाहते हैं. उदाहरण, 'कितनी कमाई हो रही है?", "आगे क्या प्लान है?", "घर में सब ठीक है?" और हम बिना सोचे सब बता देते हैं. बाद में यही बातें आपके खिलाफ इस्तेमाल हो सकती हैं. इसलिए हर सवाल का पूरा जवाब देना जरूरी नहीं है.

    अगर कमाई पूछें तो कहिए, "बस भगवान की कृपा है, सब ठीक चल रहा है." प्लान पूछें तो कहिए, "अभी कुछ तय नहीं है, समय आने पर बताएंगे." अपनी निजी जिंदगी की हर बात हर किसी को बताना जरूरी नहीं है.

    बेवजह बहस न करें
    अगर कोई रिश्तेदार कहे, "तुमसे यह काम नहीं होगा." तो तुरंत बहस करने के बजाय कहिए, "हो सकता है आपकी बात सही हो, देखते हैं आगे क्या होता है." इससे सामने वाले की बहस की गुंजाइश खत्म हो जाती है.

    इसका मतलब यह नहीं कि आपको खुद पर भरोसा नहीं है. बस आपको अपनी ऊर्जा हर किसी को जवाब देने में बर्बाद नहीं करनी है. कई बार शांत रहना ही सबसे समझदारी भरा जवाब होता है.

    विनम्रता को ताकत बनाएं
    चाणक्य नीति के मुताबिक, अगर कोई सबके सामने आपका अपमान करें तो तुरंत गुस्सा करने के बजाय शांत रहिए. कोई कहे, "तुम तो अभी भी अपने पिता के पैसों पर पल रहे हो."

    आप कह सकते हैं, "चाचा जी, अगर आपको लगता है कि मुझे कुछ बेहतर करना चाहिए, तो आप सलाह दीजिए." इस तरह आप बिना लड़ाई किए अपनी गरिमा बनाए रखते हैं. लेकिन याद रखें, विनम्र होने का मतलब अपमान सहना नहीं है. जरूरत पड़ने पर अपनी सीमा साफ बताना भी जरूरी है.

    जरूरत पड़ने पर जवाब दें
    अगर कोई आपकी चुप्पी को कमजोरी समझकर बार-बार सीमा पार करें, तो शांत लेकिन स्पष्ट जवाब दें. अगर कोई आपकी निजी जिंदगी में बार-बार दखल दे तो कहिए कि, "मेरी निजी जिंदगी मेरे और मेरे परिवार के बीच की बात है. इस पर चर्चा करना मुझे ठीक नहीं लगता." याद रखें, सामने वाले को अपमानित करना जरूरी नहीं है. बस उसे अपनी सीमा समझा देना काफी है.

  • विदुर नीति: जीवन में सफलता और शांति चाहते हैं तो इन 5 तरह के लोगों से रहें दूर

    विदुर नीति: जीवन में सफलता और शांति चाहते हैं तो इन 5 तरह के लोगों से रहें दूर

    महाभारत काल के सबसे बुद्धिमान और दूरदर्शी नीति-कारों में महात्मा विदुर का नाम सबसे ऊपर आता है. विदुर नीति में जीवन को बेहतर, शांत और सफल बनाने के जो तरीके बताए गए हैं, वे आज के समय में भी पूरी तरह से सही बैठते हैं. जीवन में आगे बढ़ने के लिए सही लोगों का साथ होना बहुत जरूरी है, क्योंकि गलत संगति इंसान को हमेशा नीचे गिराती है.

    यदि आप अपनी लाइफ और करियर में शांति और सफलता चाहते हैं, तो विदुर नीति के अनुसार इन 5 तरह के लोगों से हमेशा दूर रहना चाहिए:

    पीठ पीछे बुराई करने वाले लोग: जो लोग आपके सामने तो आपकी बहुत तारीफ करते हैं, लेकिन आपके जाते ही आपकी बुराई करने लगते हैं, उन पर कभी भरोसा नहीं करना चाहिए. ऐसे लोग समय आने पर सबसे बड़ा धोखा देते हैं,  ये लोग समाज में आपकी छवि बिगाड़ सकते हैं.

    जल्दबाजी में फैसले लेने वाले लोग: जो लोग बिना सोचे-समझे हर काम हड़बड़ी में करते हैं, वे खुद तो मुश्किल में फंसते ही हैं, साथ ही अपने साथ काम करने वालों को भी बड़ी मुसीबत में डाल देते हैं. किसी भी काम में सफलता पाने के लिए धैर्य और समझदारी बहुत जरूरी है.

    दूसरों को दुख देने की सोचने वाले: जो लोग हमेशा दूसरों को परेशान करने या नुकसान पहुंचाने की योजना बनाते रहते हैं, उनसे हमेशा दूरी बनाकर रखनी चाहिए. ऐसे लोग बुरे वक्त में कभी काम नहीं आते और मन में हमेशा शक पैदा करते हैं.

    सम्मान न देने वाले लोग: विदुर नीति कहती है कि जो व्यक्ति आपको इज्जत नहीं देता, उसके साथ रहने से आपका आत्मविश्वास कम होने लगता है. ऐसे स्वार्थी लोग अपने फायदे के लिए कभी भी आपको धोखा दे सकते हैं.

    बात-बात पर गुस्सा करने वाले लोग: जिन लोगों को छोटी-छोटी बात पर बहुत गुस्सा आता है, वे गुस्से में अक्सर गलत फैसले ले लेते हैं. ऐसे क्रोधी लोगों के साथ रहने से हमेशा तनाव का माहौल रहता है, जिससे मानसिक शांति खत्म होती है.

  • चाय में चीनी कम करनी है? स्टीविया से खजूर तक, ये 6 विकल्प दे सकते हैं नेचुरल मिठास

    चाय में चीनी कम करनी है? स्टीविया से खजूर तक, ये 6 विकल्प दे सकते हैं नेचुरल मिठास

    चाय के बिना दिन की शुरुआत अधूरी लगती है. भारतीय सिर्फ सुबह ही नहीं, बल्कि शाम के समय भी चाय पीना पसंद करते हैं. लोगों का मानना है कि चाय पीने से उनकी थकान उतर जाती है. यूं तो चाय पीने में स्वादिष्ट लगती है, लेकिन इसमें डलने वाली चीनी इसे सेहत के लिए नुकसानदायक बनाती है. अगर हर कप चाय में चीनी की मिठास शामिल है तो धीरे-धीरे इसकी मात्रा कम करना समझदारी हो सकती है. खासकर जो लोग अपनी डाइट में एक्स्ट्रा चीनी घटाना चाहते हैं वो लोग सोचते हैं कि उनके लिए चाय छोड़ना ही एकमात्र ऑप्शन बचता है.

    लेकिन ऐसा नहीं है क्योंकि आप चीनी के बिना भी टेस्टी और मीठी चाय बना सकते हैं. आजकल लोग नेचुरल स्वाद और हेल्दी ऑप्शंस की तरफ बढ़ रहे हैं और यही वजह है कि चीनी की जगह कुछ नेचुरल चीजें डालकर चाय को मीठा बनाने के तरीके ट्रेंड में हैं. चलिए जानते हैं क्या डालकर आप अपनी चाय को बिना चीनी डाले भी मीठा कर सकते हैं. चलिए जानते हैं चीनी की जगह चाय में क्या-क्या डाल सकते हैं.

    1. स्टीविया से मिलेगी तेज मिठास: अगर आप चीनी की जगह ऐसा ऑप्शन चाहते हैं, जो बहुत कम मात्रा में ही चाय को मीठा कर दे तो स्टीविया आजमा सकते हैं. ये पौधे से मिलने वाला स्वीटनर है और चीनी की तुलना में काफी ज्यादा मीठा होता है. इसलिए इसे चाय में बहुत थोड़ी मात्रा में ही डालना काफी हो सकता है. स्टीविया पत्तियों, पाउडर या ड्रॉप्स के रूप में भी मिलता है.

    2. खजूर देगा नेचुरल मिठास: इस लिस्ट में दूसरा नाम खजूर का आता है. आप खजूर का पाउडर, पेस्ट या सिरप का इस्तेमाल करके भी चाय का स्वाद बदल सकता है. खासकर दूध वाली चाय में खजूर का पेस्ट अच्छी तरह घुल जाता है और इसमें हल्की नेचुरल मिठास आती है. अगर आपको चाय में थोड़ी रिच और अलग तरह की मिठास पसंद है, तो ये ऑप्शन ट्राई किया जा सकता है.

    3. गुड़ वाली चाय का स्वाद है अलग: चीनी की जगह गुड़ डालकर चाय बनाने का चलन नया नहीं है. गुड़ चाय को अलग स्वाद और रंग देता है. हालांकि इसे चीनी का 'लो-कैलोरी' ऑप्शन समझना सही नहीं होगा, क्योंकि गुड़ में भी शुगर और कैलोरी होती हैं. इसलिए अगर आप गुड़ इस्तेमाल कर रहे हैं तो उसकी मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है.

    4. कोकोनट शुगर से बदल जाएगा चाय का फ्लेवर: नारियल से तैयार कोकोनट शुगर भी चाय में इस्तेमाल की जा सकती है. इसका स्वाद नॉर्मल चीनी से अलग और थोड़ा कैरामेल जैसा महसूस हो सकता है. ये उन लोगों के लिए एक ऑप्शन है जो चाय में सिर्फ मिठास नहीं, बल्कि थोड़ा अलग फ्लेवर भी चाहते हैं. हालांकि इसे भी सीमित मात्रा में लेना बेहतर है.

    5. दालचीनी और सौंफ से बिना स्वीटनर के मिठास: अगर आपका मकसद चाय में किसी तरह की एक्स्ट्रा शुगर या स्वीटनर डालना कम करना है, तो मसालों से स्वाद बढ़ाने का तरीका काम आ सकता है. चाय बनाते समय थोड़ी दालचीनी या सौंफ डालने से उसमें हल्का मीठा-सा स्वाद और अच्छी खुशबू आती है. इससे चाय का फ्लेवर भी ज्यादा दिलचस्प हो जाता है.

    6. मिश्री: मिश्री को कई लोग चीनी से अच्छा मानकर चाय में डालते हैं, लेकिन ये भी मूल रूप से शुगर ही है. इसलिए अगर आपका लक्ष्य डाइट में एक्स्ट्रा चीनी कम करना है, तो मिश्री डालने से खास फायदा नहीं होगा. इसे भी सीमित मात्रा में ही लेना चाहिए.

  • Gen Z को स्मार्टफोन नहीं, पुराने iPod का चढ़ा क्रेज! 2022 में बंद हुआ डिवाइस 2026 में फिर ट्रेंड में

    Gen Z को स्मार्टफोन नहीं, पुराने iPod का चढ़ा क्रेज! 2022 में बंद हुआ डिवाइस 2026 में फिर ट्रेंड में

     नई दिल्ली

    ऐपल ने अपने iPod को 2022 में बनाना बंद कर दिया था. लेकिन आज के समय में Gen Z के बीच iPod पर गाने सुनने का ट्रेंड फिर से लौट आया है. स्मार्टफोन का हर काम के लिए इस्तेमाल करने की बजाय नई जनरेशन म्यूजिक सुनने के लिए पुराने क्लासिक तरीके को अपना रही है. iPod के इस्तेमाल के पीछे की वजह जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे. आइए जानते हैं इसके बारे में। 

    iPod क्या होता है?
    गाने सुनने के लिए ऐपल ने iPod बनाया था. इसमें गाने स्टोर करके कहीं भी आसानी से सुने जा सकते हैं. इसे चलाने के लिए इंटरनेट या सिम कार्ड की जरूरत नहीं होती. लेकिन स्मार्टफोन में म्यूजिक ऐप्स आने के बाद iPod का इस्तेमाल कम होने लगा और स्मार्टफोन ने इसकी जगह ले ली। 

    जानिए क्यों कर रहे हैं Gen Z iPod का इस्तेमाल

    डिजिटल डिटॉक्स
    आजकल के Gen Z खुद को डिजिटल डिवाइस से दूर रखने की कोशिश कर रहे हैं. वे कुछ समय के लिए स्मार्टफोन और कंप्यूटर से दूरी बनाते हैं, ताकि दिमाग पर कम असर पड़े और स्ट्रेस कम हो. ऐसे में गाने सुनने के लिए iPod उनके काफी काम आता है। 

    एल्गोरिदम से दूरी
    म्यूजिक ऐप्स में ऐसा एल्गोरिदम होता है, जो आपको बार-बार आपकी पसंद के ही गाने सुनाता है. इससे कुछ समय बाद लोग ऊब जाते हैं. इसी वजह से कई Gen Z यूजर्स ने iPod का इस्तेमाल फिर से शुरू कर दिया है. iPod में गाने पहले से स्टोर होते हैं और इसमें कोई एल्गोरिदम नहीं होता। 

    यानी क्या सुनना है, इसका पूरा कंट्रोल सुनने वाले के हाथ में होता है. इससे म्यूजिक सुनने का एक्सपीरियंस और बेहतर हो जाता है। 

    स्कूल में भी किया जा सकता है इस्तेमाल
    ज्यादातर स्कूलों में स्मार्टफोन बैन होते हैं, लेकिन iPod में इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. इसी वजह से कई जगह इसे स्कूल में भी गाने सुनने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. कई Gen Z बच्चे पुराने दिनों को याद करने के लिए भी iPod का इस्तेमाल करते हैं। 

    रीसेल वैल्यू बढ़ रही है
    जैसे-जैसे Gen Z के बीच iPod का ट्रेंड बढ़ रहा है, वैसे-वैसे सेकंड हैंड मार्केट में इसकी कीमत भी बढ़ गई है. अब कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सेकंड हैंड iPod पहले के मुकाबले काफी महंगे दाम में बिक रहे हैं। 

    इन सभी वजहों से आजकल Gen Z के बीच iPod का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है और अब यह एक नया ट्रेंड बन चुका है। 

  • Google Fitbit Air की भारत में एंट्री! अक्टूबर में होगा लॉन्च, सिंगल चार्ज में 7 दिन चलेगा

    Google Fitbit Air की भारत में एंट्री! अक्टूबर में होगा लॉन्च, सिंगल चार्ज में 7 दिन चलेगा

     नई दिल्ली
    Google एक फिटनेस ट्रैकर लेकर आ रहा है, जिसका नाम Google Fitbit Air होगा. यह एक बिना स्क्रीन वाला डिवाइस होगा और इसे भारत में इस साल अक्टूबर में लॉन्च किया जाएगा. कंपनी ने गूगल पिक्सल 11 सीरीज की लॉन्चिंग के दौरान बताया है कि भारत में फिटनेस ट्रैकर लेकर आ रहा है। 

    भारत में बिना डिस्प्ले वाले फिटनेस ट्रैकर काफी पॉपुलर हो रहे हैं. विराट कोहली समेत कई एथलीट बिना डिस्प्ले वाले फिटनेस ट्रैकर को पहनते हैं, जिसका नाम Whoop है. ऐसे में गूगल इस रेस में पीछे नहीं रहना चाहता है। 

    दोबारा गूगल के अपकमिंग डिवाइस पर लौटते हैं. बताते हैं कि Fitbit Air  एक 12 ग्राम वजनी प्रोडक्ट होगा. कंपनी ने इसमें डिस्प्ले ना देने का फैसला किया है, साथ ही इसमें हार्ट रेट ट्रैकर दिया जाएगा। 

    Fitbit Air के फीचर्स
    Fitbit Air के फीचर्स की बात करें तो इसमें हार्ड रेट ट्रैकर, ब्लड ऑक्सीजन, वर्कआउट डिटेक्ट करने के लिए सेंसर दिए जाएंगे. इसके बाद Fitbit Air का डेटा सीधा गूगल हेल्थ ऐप पर देखा जा सकता है. अपने स्मार्टफोन को फिटनेस बैंड से कनेक्ट करना होगा। 

    Fitbit Air सिंगल चार्ज में 7 दिन चलेगा 
    बैटरी लाइफ को लेकर जानकारी दी है कि एक बार फुल चार्जिंग के बाद 7 दिन तक का बैटरी बैकअप मिलेगा. फिटनेस ट्रैकर के अंदर AI पर काम करने वाले हेल्थ इनसाइट भी दिए जाएंगे. हालांकि गूगल ने इवेंट के दौरान ये डिटेल्स में स्पेसिफिकेशन्स के बारे में नहीं बताया है। 

    Fitbit Air की संभावित कीमत 
    गूगल ने Fitbit Air की कीमत का ऐलान नहीं किया है, लेकिन ग्लोबल मार्केट में यह डिवाइस करीब 99.99 अमेरिकी डॉलर (करीब 9500 रुपये) में सेल किया जाएगा. कंपनी ने अभी तक लॉन्च डेट का ऐलान नहीं किया है। 

  • Google ला रहा बिना स्क्रीन वाला Fitbit Air, 7 दिन चलेगी बैटरी, जानें फीचर्स

    Google ला रहा बिना स्क्रीन वाला Fitbit Air, 7 दिन चलेगी बैटरी, जानें फीचर्स

    Google एक फिटनेस ट्रैकर लेकर आ रहा है, जिसका नाम Google Fitbit Air होगा. यह एक बिना स्क्रीन वाला डिवाइस होगा और इसे भारत में इस साल अक्टूबर में लॉन्च किया जाएगा. कंपनी ने गूगल पिक्सल 11 सीरीज की लॉन्चिंग के दौरान बताया है कि भारत में फिटनेस ट्रैकर लेकर आ रहा है l

    भारत में बिना डिस्प्ले वाले फिटनेस ट्रैकर काफी पॉपुलर हो रहे हैं. विराट कोहली समेत कई एथलीट बिना डिस्प्ले वाले फिटनेस ट्रैकर को पहनते हैं, जिसका नाम Whoop है. ऐसे में गूगल इस रेस में पीछे नहीं रहना चाहता है l

    दोबारा गूगल के अपकमिंग डिवाइस पर लौटते हैं. बताते हैं कि Fitbit Air  एक 12 ग्राम वजनी प्रोडक्ट होगा. कंपनी ने इसमें डिस्प्ले ना देने का फैसला किया है, साथ ही इसमें हार्ट रेट ट्रैकर दिया जाएगा l

    Fitbit Air के फीचर्स
    Fitbit Air के फीचर्स की बात करें तो इसमें हार्ड रेट ट्रैकर, ब्लड ऑक्सीजन, वर्कआउट डिटेक्ट करने के लिए सेंसर दिए जाएंगे. इसके बाद Fitbit Air का डेटा सीधा गूगल हेल्थ ऐप पर देखा जा सकता है. अपने स्मार्टफोन को फिटनेस बैंड से कनेक्ट करना होगा l  

    Fitbit Air सिंगल चार्ज में 7 दिन चलेगा
    बैटरी लाइफ को लेकर जानकारी दी है कि एक बार फुल चार्जिंग के बाद 7 दिन तक का बैटरी बैकअप मिलेगा. फिटनेस ट्रैकर के अंदर AI पर काम करने वाले हेल्थ इनसाइट भी दिए जाएंगे. हालांकि गूगल ने इवेंट के दौरान ये डिटेल्स में स्पेसिफिकेशन्स के बारे में नहीं बताया है l

    Fitbit Air की संभावित कीमत
    गूगल ने Fitbit Air की कीमत का ऐलान नहीं किया है, लेकिन ग्लोबल मार्केट में यह डिवाइस करीब 99.99 अमेरिकी डॉलर (करीब 9500 रुपये) में सेल किया जाएगा. कंपनी ने अभी तक लॉन्च डेट का ऐलान नहीं किया है l 

  • पॉकेट में रखा फोन बम की तरह फटा! इन खतरनाक संकेतों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज

    पॉकेट में रखा फोन बम की तरह फटा! इन खतरनाक संकेतों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज

     नई दिल्ली

    स्मार्टफोन में ब्लास्ट होने की नई घटना सामने आई है, जहां एक शख्स का हाथ और प्राइवेट पार्ट झुलस चुके हैं. दरअसल, शख्स ने पैंट की जेब में स्मार्टफोन को रखा था, जो अधिकतर लोग करते हैं. इसके बाद अचानक से फोन में धमाका हुआ और रेलवे स्टेशन पर भगदड़ मच गई। 

    यह मामला गाजियाबाद के रेलवे स्टेशन का है. जहां आम लोगों की तरह ही शख्स ने स्मार्टफोन को जेब में रखा था. तभी अचानक से उसका मोबाइल गर्म हुआ और जब तक वह कुछ समझ पाता स्मार्टफोन में ब्लास्ट हो गया। 

    यह हादसा ग्रेटर नोएडा के दनकौर के रहने वाले 26 साल के मोहम्मद माजिद के साथ हुआ है. गाजियाबाद रेलवे स्टेशन पर फोन फटते ही वहां पर अफरा तफरी मच गई. जिस स्मार्टफोन में ब्लास्ट हुआ है, उसको शख्स ने करीब एक महीने पहले ही खरीदा था. अब माजिद के परिवार ने स्मार्टफोन कंपनी पर सवाल उठाए हैं। 

    स्मार्टफोन में ब्लास्ट क्यों होता है? 
    मॉडर्न स्मार्टफोन में लीथियन ऑयन बैटरी का इस्तेमाल किया है, जो अति ज्वलनशील होती है. ऐसे में अगर बैटरी पर दबाव पड़ता है या फिर वह लीक हो जाती है तो उसमें ब्लास्ट होने का खतरा बन जाता है। 

    पॉकेट में रखा स्मार्टफोन वेंटीलेशन से दूर हो जाता है. इसकी वजह से उसका तापमान बढ़ जाता है. साथ ही शरीर की गर्मी की वजह से मोबाइल का टेम्प्रेचर को और ज्यादा बढ़ा देता है. कई फोन में हैवी टास्क  चल रहे होते हैं, जिसकी वजह से टेम्प्रेचर बढ़ जाता है। 

    स्मार्टफोन अगर हाई टेम्प्रेचर का सामना करेगा तो Lithium-ion बैटरी में थर्मल रनवे शुरू कर सकता है. थर्मल रनवे, असल में वह प्रोसेस होता है, जिसमें बैटरी के अंदर हीट और गैस तेजी से बढ़ते हैं, जिसका रिजल्ट ब्लास्ट के रूप में सामने आता है। 

    मोबाइल ब्लास्ट होने से कैसे बचाएं? 
    स्मार्टफोन को ब्लास्ट होने से बचाने के ढेरों तरीके हैं, आइए सेफ्टी टिप्स के बारे में डिटेल्स में जानते हैं। 

    स्मार्टफोन अगर पैंट की पॉकेट में रखा है और वह अचानक से गर्म होने लगता है. ऐसी कंडिशन में स्मार्टफोन को तुरंत जेब से बाहर निकालें और उसे किसी ठंडी सरफेस पर रख दें. सावधानी के रूप में उससे दूरी भी बना सकते हैं। 

    स्मार्टफोन गर्म होने से बचाएं 
    फोन बहुत गर्म हो जाए तो उसका इस्तेमाल बंद कर दें. अगर गेम खेल रहे हैं या फिर वीडियो देख रहे हैं तो उस टास्क को बंद कर दें. स्मार्टफोन का टेम्प्रेचर कम होने का इंतजार करें। 

    बैटरी फूलने पर तुरंत चेंज कराएं
    अगर आपके स्मार्टफोन का बैक पैनल अचानक से फूल गया है तो समझ लें कि मोबाइल की बैटरी फूल गई है. ऐसे में ऑथराइज्ड सर्विस सेंटर पर जाएं और जेनुअन बैटरी से रिप्लेस कराएं। 

    तकिए के नीचे ना रखें स्मार्टफोन
    स्मार्टफोन को चार्जिंग के दौरान तकिए के नीचे ना रखें. बहुत से लोग रात में सोने से पहले स्मार्टफोन को चार्जिंग पर लगा देते हैं, जिसके बाद मोबाइल को तकिये, कंबल आदि के नीचे दबा देते हैं. ऐसा करना खतरनाक साबित होगा. चार्जिंग के दौरान मोबाइल हीट जनरेट करता है. ऐसे में तकिए के नीचे दबा फोन ओवरहीट होकर फट सकता है। 

  • Private Part के बाल शेव करने हैं? डॉक्टर ने बताया सही तरीका, इन गलतियों से रहें सावधान

    Private Part के बाल शेव करने हैं? डॉक्टर ने बताया सही तरीका, इन गलतियों से रहें सावधान

    इंटीमेट एरिया काफी सेंसेटिव होता है, ऐसे में वहां शेव करना भी थोड़ा मुश्किल हो सकता है। डॉक्टर ने सही तरीका बताया है।

    प्यूबिक हेयर शेव करना सबकी पर्सनल चॉइस होती है। कुछ महिलाएं इसे साफ-सुथरा महसूस करने के लिए करती हैं, तो कुछ बालों को वैसे ही रखना पसंद करती हैं। दोनों ही नॉर्मल हैं। अगर आप शेविंग करना पसंद करती हैं, तो सही तरीका जानना काफी जरूरी है।

    इंटिमेट एरिया की त्वचा शरीर के दूसरे हिस्सों की तुलना में ज्यादा सेंसेटिव होती है। इसलिए जल्दबाजी में शेव करने, पुराने रेजर का इस्तेमाल करने या त्वचा पर ज्यादा दबाव डालने से परेशानी हो सकती है। डॉक्टर वैदेही मराठे के अनुसार, सही तैयारी और कुछ छोटी सावधानियां अपनाकर शेविंग के बाद होने वाली कई कॉमन प्रॉब्लम्स से बच सकते हैं।

    1. साफ और तेज रेजर का इस्तेमाल करें
    सबसे पहले यह देखें कि रेजर साफ और अच्छी हालत में हो। बहुत पुराना रेजर बालों को ठीक से काटने के बजाय त्वचा पर ज्यादा फ्रिक्शन पैदा कर सकता है। रेजर किसी दूसरे व्यक्ति के साथ बिल्कुल शेयर ना करें। इसे साफ जगह पर रखें और जरूरत के अनुसार समय-समय पर बदलते रहें।

    2. शेविंग से पहले त्वचा को तैयार करें
    ड्राई स्किन पर सीधे रेजर चलाने से जलन और छोटे कट लगने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए शेविंग से पहले कुछ देर गुनगुने पानी से उस हिस्से को नरम होने दें। अगर बाल ज्यादा लंबे हैं, तो पहले साफ कैंची से उन्हें थोड़ा छोटा कर लें। इससे रेजर चलाना आसान हो जाएगा और रेजर में बाल फंसने के चांसेस भी कम होंगे।

    3. शेविंग जेल का इस्तेमाल करें
    शेविंग से पहले हल्का शेविंग जेल लगाएं जो त्वचा के लिए सुरक्षित और नरम हो। इससे रेजर त्वचा पर आसानी से चलेगा और फ्रिक्शन भी कम होगा। बहुत तेज खुशबू वाले या स्किन को इरिटेट करने वाले प्रोडक्ट्स से बचना बेहतर है।

    4. बालों की दिशा में शेव करें
    रेजर चलाते समय बाल जिस दिशा में बढ़ रहे हैं, उसी दिशा में शेव करना बेहतर रहता है। बहुत नजदीक से बाल हटाने के लिए बार-बार उसी जगह रेजर चलाने से त्वचा में जलन और बालों के अंदर की ओर बढ़ने की परेशानी हो सकती है। इसलिए एक ही जगह पर बार-बार रेजर चलाने से बचें।

    5. रेजर पर ज्यादा दबाव ना डालें
    प्यूबिक एरिया की त्वचा सेंसेसटिव होती है। इसलिए रेजर को बहुत जोर से दबाकर चलाने की जरूरत नहीं है। हल्के हाथ से और धीरे-धीरे शेव करें। अगर किसी जगह त्वचा खिंच रही हो या रेजर आसानी से नहीं चल रहा हो, तो वहां दोबारा शेव करने से पहले थोड़ा जेल लगाएं।

    6. शेविंग के बाद त्वचा को दें आराम
    शेविंग के बाद उस हिस्से को साफ पानी से धोकर धीरे से सुखाएं। त्वचा को रगड़कर पोंछने से जलन बढ़ सकती है। इसके बाद जरूरत हो तो लाइट मॉइस्चराइजर लगा सकते हैं।

    नोट: शेविंग के बाद हल्की रेडनेस कुछ समय के लिए हो सकती है, लेकिन अगर परेशानी बढ़ रही है तो इसे इग्नोर ना करें। खासकर अगर लगातार खुजली, जलन, सूजन, दर्द, रेजर बंप्स, इनग्रोन हेयर या इंफेक्शन जैसे लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। अगर त्वचा पर कट लग जाए तो उसे साफ रखें और ठीक होने तक उस जगह पर दोबारा शेविंग ना करें।

  • Instagram का 2010 से 2026 तक सफर, आखिर क्यों बार-बार बदला लोगो और डिजाइन

    Instagram का 2010 से 2026 तक सफर, आखिर क्यों बार-बार बदला लोगो और डिजाइन

    इंस्टाग्राम की शुरुआत जिस मक़सद से हुई थी वो कमोबेश अब खत्म हो चुका है. शुरुआत में इंस्टा एक ऐसा प्लेटफॉर्म हुआ करता था जहां लोग ज़्यादातर फ़ोटोज़ के ज़रिए एक्सप्रेस करते थे. जमाना बदला और इंस्टा भी. टिक टॉक ने शॉर्ट वीडियो का क्रेज़ शुरु किया और इंस्टा ने स्नैपचैट और टिकटॉक के फीचर्स से इंस्पायर होता गया. धीरे धीरे फ़ोटोज़ गुम होते गए और अब हालत ये है कि इंस्टाग्राम पर ज़्यादातर शॉर्ट वीडियोज हैं. लोगों की स्क्रीन टाइम बढ़ती ही जा रही है. एक पुराने कैमरे से शुरू हुआ Instagram आज दुनिया के सबसे पहचान वाले सोशल मीडिया ब्रांड्स में है.

    इस सफर में इसका लोगो भी कई बार बदला. कभी असली कैमरे जैसा दिखने वाला लोगो था, फिर रेट्रो कैमरा आया, 2016 में पूरा डिजाइन उलट गया और अब 2026 में इंस्टाग्राम ने करीब 10 साल बाद अपने लिखे हुए नाम यानी वर्डमार्क को बदल दिया है. आखिर हर बार इंस्टाग्राम ने अपना लोगो क्यों बदला और इन बदलावों के पीछे क्या सोच थी?

    अगर आज किसी को बिना नाम लिखे सिर्फ इंस्टाग्राम का ऐप आइकॉन दिखा दिया जाए, तो शायद उसे पहचानने में एक सेकंड भी नहीं लगेगा. यही किसी भी बड़े ब्रांड की सबसे बड़ी ताकत होती है. लेकिन इस पहचान तक पहुंचने में इंस्टाग्राम का लोगो एक लंबा सफर तय कर चुका है. दिलचस्प बात यह है कि इंस्टाग्राम का लोगो शुरू से ऐसा बिल्कुल नहीं था जैसा आज हम देखते हैं.

    2010: शुरुआत एक असली कैमरे से हुई थी
    इंस्टाग्राम अक्टूबर 2010 में लॉन्च हुआ था. उस समय इसका लोगो आज के साफ-सुथरे ऐप आइकॉन से बिल्कुल अलग था. यह एक पुराने इंस्टैंट कैमरे जैसा दिखता था, जिसमें कैमरे की बॉडी, लेंस, फ्लैश और बाकी छोटे-छोटे हिस्से तक दिखाई देते थे.

    साल 2010 से अब तक कितना बदला लोगो.
    इस पहले लोगो को Instagram Co-founder Kevin Systrom ने बनाया था. डिजाइन में कैमरे को काफी असली दिखाने की कोशिश की गई थी. यह उस समय के ऐप डिजाइन के एक बड़े ट्रेंड का हिस्सा था, जिसे स्क्यूओमॉर्फिज्म कहा जाता था. आसान भाषा में समझें तो डिजिटल चीजों को असली दुनिया की चीज जैसा दिखाना.

    लेकिन इस लोगो की एक दिक्कत भी थी. यह एक असली कैमरे से काफी मिलता-जुलता था. बताया जाता है कि इसी वजह से इंस्टाग्राम को आगे चलकर दूसरे डिजाइन की तरफ जाना पड़ा.

    2010:  रेट्रो कैमरा जैसा लोगो
    इंस्टाग्राम ने जल्द ही डिजाइनर और फोटोग्राफर Cole Rise की मदद ली. राइज ने 1950 के दशक के Bell & Howell कैमरे से प्रेरणा लेकर एक नया आइकन तैयार किया. बेल एंड होवेल अमेरिका की एक पुरानी कैमरा कंपनी थी, जो 20वीं सदी में फिल्म और कैमरा इक्विपमेंट्स के लिए जानी जाती थी.

    यह डिजाइन पहले वाले कैमरे से काफी आसान था, लेकिन इसमें पुराना कैमरा वाला एहसास बरकरार रखा गया. कैमरे का बड़ा लेंस, ऊपर व्यूफाइंडर और बीच में रंगीन रेनबो स्ट्राइप इसकी पहचान बन गए.

    यहां एक बेहद दिलचस्प बात है. इंस्टाग्राम उस समय मोस्टली फोटो शेयर करने वाला ऐप था और उसके सबसे खास फीचर्स में फोटो फिल्टर शामिल थे. यानी लोग अपनी नई तस्वीरों को पुराने कैमरे और फिल्म जैसी फील देने के लिए इंस्टाग्राम इस्तेमाल कर रहे थे. इसलिए रेट्रो कैमरे वाला लोगो सिर्फ अच्छा दिखने वाला डिजाइन नहीं था. वह इंस्टाग्राम के उस समय के प्रोडक्ट से सीधे जुड़ा हुआ था.

    2011: वही कैमरा, लेकिन ज्यादा रियल
    2011 में Instagram ने इस कैमरा आइकॉन को फिर से थोड़ा बदला. इस बार कैमरे में ज्यादा डिटेल जोड़ी गई. लेंस में चमक और गहराई बढ़ाई गई, ऊपर वाले हिस्से में लेदर जैसी टेक्सचर दिखाई देने लगी और रेनबो स्ट्राइप को भी ज्यादा साफ किया गया. यानी कैमरा अब पहले से ज्यादा असली लगने लगा था.

    Instagram का लोगो
    यह लोगो 2016 तक इंस्टाग्राम की पहचान बना रहा. उस दौरान इंस्टाग्राम भी तेजी से बड़ा हो रहा था. इसलिए लाखों लोगों के लिए यह रेट्रो कैमरा सिर्फ एक ऐप आइकॉन नहीं रहा. वह इंस्टाग्राम की पहचान बन गया. और फिर 2016 में कंपनी ने फिर से लोगो बदला.

    2016: लोगो में हुआ सबसे बड़ा बदलाव
    मई 2016 में इंस्टाग्राम ने अपना पुराना कैमरा आइॉन हटा दिया और उसकी जगह एक बेहद सिंपल कैमरा आइकॉन पेश किया. पीछे पर्पल, पिंक, ऑरेंज और यलो कलर का ग्रेडिएंट था और सामने सिर्फ व्हाइट लाइन से कैमरे का आकार बनाया गया था. आज यह डिजाइन इतना जाना-पहचाना है कि शायद नई पीढ़ी के लिए यही इंस्टाग्राम है. लेकिन 2016 में इसे लेकर लोगों के रिएक्शन काफी अलग थे.

    कई लोगों को पुराना ब्राउन कैमरा पसंद था. नए लोगो को लेकर सोशल मीडिया पर मजाक बना और कई यूजर्स ने इसे इंस्टाग्राम की पहचान खत्म करने वाला बदलाव तक कहा. उस समय मीडिया में भी इस बदलाव को लेकर काफी चर्चा हुई थी. लेकिन इंस्टाग्राम ने यह बदलाव अचानक नहीं किया था.

    कंपनी के तत्कालीन हेड ऑफ डिजाइन Ian Spalter और उनकी टीम ने इस पर लंबे समय तक काम किया था. टीम के सामने सबसे बड़ा सवाल था कि इंस्टाग्राम की पुरानी पहचान को बचाते हुए उसे फ्यूचर के लिए कैसे बदला जाए.

    इसके लिए इंस्टाग्राम ने अपने कर्मचारियों से एक दिलचस्प काम करवाया. उनसे कहा गया कि वे पांच सेकंड में याद से इंस्टाग्राम का आइकॉ बनाएं. ज्यादातर लोगों ने तीन चीजें बनाईं, रेनबो, लेंस और व्यूफाइंडर.

    इंस्टाग्राम की डिजाइन टीम ने इन्हीं तीन चीजों को नए डिजाइन की नींव बनाया. पुराने कैमरे की पूरी तस्वीर हट गई, लेकिन कैमरे का आइडिया, लेंस और रेनबो नए डिजाइन में रह गए. यानी इंस्टाग्राम ने अपनी पहचान को मिटाया नहीं. उसने उसे छोटा करके एक सिंपल निशान में बदल दिया.

    यह बदलाव सिर्फ लोगो का नहीं था. 2016 में इंस्टाग्राम ने सिर्फ ऐप आइकन नहीं बदला था.  पूरे ऐप का लुक भी बदल दिया गया. अंदर का इंटरफेस ज्यादा साफ और ब्लैक-एंड-व्हाइट हो गया ताकि यूजर का ध्यान तस्वीरों और वीडियो पर रहे.

    इंस्टाग्राम ने उस समय कहा था कि पिछले पांच साल में ऐप सिर्फ फोटो फिल्टर करने और शेयर करने की जगह नहीं रहा. लोग वीडियो शेयर कर रहे थे, नए टूल इस्तेमाल कर रहे थे और एक्सप्लोर के जरिए नए लोगों और कंटेंट से जुड़ रहे थे. इसलिए ब्रांड का लुक भी बदलती कम्युनिटी के साथ बदलना जरूरी था. यही वह दौर था जब इंस्टाग्राम ने अपने रेट्रो कैमरे को पीछे छोड़कर डिजिटल दुनिया के हिसाब से खुद को दोबारा डिजाइन किया.

    2022: इंस्टाग्राम ने कलर्स फिर से बदले, लेकिन पहचान नहीं
    2022 में इंस्टाग्राम ने अपनी विजुअल पहचान को एक बार फिर अपडेट किया. इस बार बदलाव 2016 जितना बड़ा नहीं था. कंपनी ने अपने मशहूर ग्रेडिएंट को ज्यादा ब्राइट और लाइवली बनाया. साथ ही Instagram Sans नाम का नया फॉन्ट सिस्टम भी पेश किया गया और पूरी विजुअल पहचान को ज्यादा मॉडर्न बनाने की कोशिश की गई. यानी 2022 में इंस्टाग्राम ने यह नहीं कहा कि पुराना डिजाइन गलत था. उसने उसी पहचान को थोड़ा और मॉडर्न बनाने की कोशिश की.

    2026: 10 साल बाद बदला इंस्टाग्राम का वर्डमार्क
    13 अगस्त 2026 को इंस्टाग्राम ने अपने लिखे हुए नाम यानी वर्डमार्क को करीब 10 साल बाद अपडेट किया है. यहां सबसे जरूरी बात यह है कि इंस्टाग्राम का मशहूर कैमरा ऐप आइकॉन नहीं बदला है. इस बार बदलाव लिखे हुए इंस्टाग्राम नाम में है. नया वर्डमार्क पुराने कर्सिव स्टाइल और प्रिंट अक्षरों के बीच का डिजाइन है. Instagram CEO Adam Mosseri के मुताबिक ऐप के ऊपर दिखने वाला वर्डमार्क 10 साल से नहीं बदला था, इसलिए इसे रिफ्रेश करने का समय आ गया था. कंपनी का फोकस इसे ज्यादा साफ और मॉडर्न बनाने पर है, जबकि पुराने इंस्टाग्राम की झलक भी इसमें रखी गई है. लेकिन इंटरनेट ने नए डिजाइन को तुरंत ऐक्सेप्ट नहीं किया. कुछ यूजर्स को यह नया डिजाइन पसंद आया, लेकिन कई लोगों का कहना है कि कुछ अक्षर साफ नहीं दिखते. सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने मजाक में इसे Instagram की जगह Instagzam तक पढ़ दिया. रेडिट पर भी नए वर्डमार्क को लेकर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली.