Category: लाइफस्टाइल

  • 24 अगस्त से SIM कार्ड पर नया नियम! नया नंबर लेने से पहले जरूर चेक करें कितने SIM हैं आपके नाम

    24 अगस्त से SIM कार्ड पर नया नियम! नया नंबर लेने से पहले जरूर चेक करें कितने SIM हैं आपके नाम

    SIM कार्ड का पूरा नाम सब्सक्राइबर आइडेंटिटी मॉड्यूल है. मॉडर्न स्मार्टफोन में इसको लगाने के बाद ही टेलीकॉम सर्विस का फायदा उठाया जा सकता है. 24 अगस्त यानी कल से ही सिम कार्ड को लेकर एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है. भारत सरकार का दूरसंचार विभाग  (DoT) सिम कार्ड लिमिट निमय पर सख्ती करने जा रहा है.

    जानकारी के मुताबिक, अगर कोई शख्स पूर्व निर्धारित सिम कार्ड की लिमिट तक सिम को खरीद चुका है, तो ऐसे लोगों के लिए टेलीकॉम कंपनियां नई सिम प्रोवाइड नहीं कराएगी. इसके लिए जरूरी है कि लोगों को पता होना चाहिए कि उनके नाम पर कितने सिम कार्ड इशू हो चुके हैं.

    SIM Card लेकर नियम है कि एक शख्स अधिकतम 9 सिम कार्ड खरीद सकता है और उनको चला सकता है. हालांकि अगर कोई नंबर बंद हो चुका है तो वह उसमें काउंट नहीं होगा. यह लिमिट देश के अधिकतर राज्यों में लागू होती है. वहीं, जम्मू-कश्मीर, असम और पूर्वोत्तर के राज्यों में मैक्सिमम सिम कार्ड की सीमा 6 हैं.

    लिमिट से ज्यादा सिम नहीं दे सकते हैं
    जानकारी के मुताबिक, DoT की नई गाइडलाइंस के मुताबिक टेलीकॉम कंपनियों को सिम बेचने से पहले देखना होगा कि नया सिम कार्ड लेने वाले शख्स के नाम पर पहले से कितने सिम कार्ड एक्टिव हैं. अगर वह पहले से निर्धारित लिमिट की सिम कार्ड इशू करा चुका है और वे सिम एक्टिव हैं, तो नए कनेक्शन के लिए सिम कार्ड देने से मना किया जा सकता है.

    क्या है सॉल्यूशन
    24 अगस्त के बाद से अगर आप अपने सिम कार्ड खरीदने जा रहे हैं तो सबसे पहले संचार साथी पोर्टल की मदद से खुद चेक कर सकते हैं कि आपके नाम से कितने सिम कार्ड एक्टिव हैं.

    संचार साथी पोर्टल पर चेक करें
    संचार साथी पोर्टल के होमपेज पर जाना होगा, जिसके बाद नीचे स्क्रॉल करेंगे तो वहां Know Mobile connection in Your Name नजर आएगा, उस पर क्लिक करें. फिर दस नंबर का मोबाइल नंबर एंटर करें. इसके बाद कैप्चा एंटर करें और फिर ओटीपी एंटर करें. आखिर में जाकर लॉगइन के ऑप्शन पर क्लिक कर दें.

    इसके बाद न्यू विंडो ओपन हो जाएगा, जहां आपके नाम पर रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर को देख सकेंगे. हालांकि जिन नंबर का आप यूज नहीं कर रहे हैं, उनको बंद करा सकते हैं. साथ ही कोई अनजान नंबर है, तो उसकी रिपोर्ट भी कर सकते हैं.

  • महंगे फेस क्लींजर की जरूरत नहीं, इन 4 घरेलू चीजों से करें चेहरे की सफाई

    महंगे फेस क्लींजर की जरूरत नहीं, इन 4 घरेलू चीजों से करें चेहरे की सफाई

     स्किन की देखभाल के लिए आजकल लोग कई तरह के प्रोडक्ट्स और लंबी स्किनकेयर रूटीन फॉलो करते हैं. लेकिन स्किन केयर का सबसे अहम हिस्सा क्लींजिंग यानी चेहरे की सफाई है. इसके लिए हर बार महंगे फेस क्लींजर का इस्तेमाल करना जरूरी नहीं है. किचन में मौजूद कुछ चीजों की मदद से भी आप आसानी से अपनी स्किन की सफाई कर सकते हैं. आज हम आपको कुछ ऐसी चीजों के बारे में बताएंगे, जिसका इस्तेमाल आप  क्लिंजर के तौर पर कर सकते हैं. ये आपकी स्किन को बिना ज्यादा ड्राई किए गहराई से साफ करने में मदद कर सकती हैं.

    1. दूध से करें चेहरे की सफाई
    दूध में लैक्टिक एसिड पाया जाता है. यही वजह है कि इसे पारंपरिक तौर पर स्किन को साफ करने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है. यह त्वचा की सतह पर मौजूद डेड स्किन को हटाने और त्वचा को मुलायम महसूस कराने में मदद कर सकता है.

    कैसे करें इस्तेमाल?
        कॉटन बॉल को कच्चे या सादे दूध में भिगोएं.
        इसे चेहरे पर हल्के हाथों से लगाएं.
        कुछ देर बाद गुनगुने पानी से चेहरा धो लें.

    अगर दूध लगाने के बाद जलन, खुजली या लालिमा महसूस हो तो इसका इस्तेमाल बंद कर दें.

    2. टमाटर से पाएं फ्रेश लुक
    टमाटर में कई विटामिन और पोषक तत्व पाए जाते हैं. कुछ लोग इसे घरेलू स्किनकेयर में चेहरे पर लगाने के लिए इस्तेमाल करते हैं.

    कैसे करें इस्तेमाल?
       एक ठंडे टमाटर को आधा काट लें.
        इसे चेहरे पर बहुत हल्के हाथों से लगाएं.
        करीब 5-10 मिनट बाद पानी से चेहरा धो लें.

    अगर आपकी स्किन सेंसिटिव है तो टमाटर सीधे लगाने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें.

    3. शहद से करें क्लींजिंग
    शहद में एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं और इसे स्किन को मॉइश्चराइज और शांत रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. यह स्किन को बिना ड्राई किए क्लींजिंग करने में मदद करता है.

    कैसे करें इस्तेमाल?
        1/2 चम्मच कच्चा शहद लें.
        इसे हल्की गीली त्वचा पर धीरे-धीरे मसाज करें.
        इसके बाद गुनगुने पानी से चेहरा धो लें.
        तौलिए से चेहरे को रगड़ने के बजाय हल्के हाथों से थपथपाकर सुखाएं.

    4. आलू का रस लगाएं
    आलू में विटामिन C समेत कई पोषक तत्व पाए जाते हैं. घरेलू स्किनकेयर में आलू के रस का इस्तेमाल दाग-धब्बों और डल स्किन के लिए किया जाता है.

    कैसे करें इस्तेमाल?
        एक मीडियम साइज के आलू का रस निकालकर कटोरी में लें.
        इसे चेहरे और गर्दन पर हल्के हाथों से लगाएं.
        करीब 10-15 मिनट के लिए छोड़ दें.
        इसके बाद पानी से चेहरा अच्छी तरह धो लें.

    इन बातों का रखें ध्यान
        नेचुरल चीजें होने का यह मतलब नहीं है कि ये आपकी स्किन के लिए सेफ ही होंगी. किसी भी चीज को फेस पर लगाने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें. अगर जलन, खुजली या लालिमा महसूस हो तो तुरंत चेहरा धो लें.
        अगर आपके चेहरे पर लगातार मुंहासे, दाग-धब्बे या स्किन से जुड़ी कोई समस्या है तो घरेलू नुस्खों आजमाने के बजाय डर्मेटोलॉजिस्ट की सलाह लेना बेहतर होगा.

     

  • व्रत में मीठा खाने का मन हो तो ट्राई करें साबूदाना हलवा, चिपचिपा नहीं बनेगा

    व्रत में मीठा खाने का मन हो तो ट्राई करें साबूदाना हलवा, चिपचिपा नहीं बनेगा

    कल सावन का आखिरी सोमवार है. अगर आप कल व्रत के लिए साबूदाने की कोई चीज बनाने की सोच रहे हैं तो इस बार साबूदाने का हलवा जरूर ट्राई करें. साबूदाने का हलवा खाने में जितना स्वादिष्ट और रसीला होता है, इसे पहली बार बनाने वालों के लिए सही कंसिस्टेंसी पाना उतना ही चुनौतीपूर्ण लगता है. अक्सर शिकायत रहती है कि साबूदाना कड़ाही के तले में चिपक जाता है या फिर आपस में चिपककर चिपचिपा और मैशी बन जाता है l

    अगर आप भी पहली बार साबूदाने का हलवा बनाने जा रहे हैं तो घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. साबूदाने को सही तरीके से भिगोने और भूनने की एक छोटी सी ट्रिक से आपका हलवा एकदम मोती जैसा खिला-खिला और सॉफ्ट बनेगा. आइए जानते हैं इसे बनाने की सामग्री और सबसे आसान तरीका l

    सामग्री (Ingredients)

    साबूदाना (मीडियम साइज) – 1 कप

    देसी घी – 4 बड़े चम्मच

    चीनी – 3/4 कप (स्वादानुसार)

    पानी या दूध – 2 कप (गुनगुना)

    हरी इलायची पाउडर – 1/2 छोटा चम्मच

    काजू और बादाम (कटे हुए) – 2 बड़े चम्मच

    केसर के धागे – 8 से 10 (2 चम्मच गर्म दूध में भीगे हुए)

    बनाने का तरीका
    साबूदाने को 3-4 बार साफ पानी से तब तक धोएं जब तक कि उसका सारा सफेद स्टार्च निकल न जाए. अब 1 कप साबूदाने में सिर्फ 3/4 कप पानी डालकर 4 से 5 घंटे के लिए ढककर छोड़ दें. (ज्यादा पानी डालने से साबूदाना चिपचिपा हो जाता है).

    कड़ाही में 2 चम्मच देसी घी गरम करें. इसमें कटे हुए काजू और बादाम डालकर हल्का सुनहरा होने तक भूनें और एक प्लेट में निकाल लें.

    अब कड़ाही के बचे हुए घी में भीगा हुआ साबूदाना डालें. आंच को धीमा रखें और 3-4 मिनट तक हल्के हाथों से चलाएं जब तक कि साबूदाने के दाने हल्के पारदर्शी न दिखने लगें.

    जब साबूदाना घी सोख ले और दाने अलग होने लगें, तब इसमें 2 कप गुनगुना पानी या दूध और केसर वाला दूध मिलाएं.

    कड़ाही को ढक्कन से ढक दें और धीमी आंच पर 2 से 3 मिनट तक पकने दें. भाप में साबूदाने का हर एक दाना मोती की तरह फूल जाएगा.

    ढक्कन हटाकर देखें जब सारे दाने अच्छे से ट्रांसपेरेंट हो जाएं, तब इसमें चीनी और इलायची पाउडर मिलाएं.

    चीनी पिघलने के बाद हलवे को लगातार चलाते हुए 2 मिनट और पकाएं. बचा हुआ 2 चम्मच देसी घी ऊपर से डालें ताकि हलवे में बेहतरीन चमक आ जाए.

    ऊपर से भुने हुए ड्राई फ्रूट्स डालें और गैस बंद कर दें. तैयार है आपका एकदम खिला-खिला और दानेदार साबूदाना हलवा.

  • संडे लंच में बनाएं सूजी की फूली-फूली पूड़ियां और चटपटे मठ्ठे वाले आलू

    संडे लंच में बनाएं सूजी की फूली-फूली पूड़ियां और चटपटे मठ्ठे वाले आलू

     

    रोज-रोज लंच में वही सादी दाल-रोटी और चावल खाकर अक्सर हर कोई बोर हो जाता है. ऐसे में आज संडे के दिन अगर लंच में कुछ खास, कचौरी जैसा खस्ता और खट्टा-मीठा चटपटा खाने को मिल जाए तो मजा आ जाता है. अगर आप भी लंच के मेन्यू में कुछ नया और मजेदार ट्विस्ट लाना चाहते हैं तो आज ही बनाएं सूजी की फूली-फूली पूड़ियां और पारंपरिक मठ्ठे वाले आलू.

    सूजी की पूड़ियां बाहर से बहुत ही क्रिस्पी और अंदर से सॉफ्ट होती हैं, जो साधारण गेंहू के आटे की पूरी से कहीं ज्यादा टेस्टी लगती हैं. वहीं दही/छाछ (मठ्ठे) के तड़के से बनी आलू की चटपटी सब्जी इसके स्वाद में चार चांद लगा देती है. आइए जानते हैं इस परफेक्ट लंच कॉम्बिनेशन को बनाने की सामग्री और तरीका.

    सामग्री
    सूजी की पूरी के लिए:

    सूजी (रवा) – 1 कप

    गरम पानी – 1 कप (सूजी भिगोने के लिए)

    गेहूं का आटा – 1 कप

    उबला और मैश किया आलू – 1 (ऐच्छिक, एक्स्ट्रा सॉफ्टनेस के लिए)

    चिली फ्लेक्स या लाल मिर्च – 1/2 छोटा चम्मच

    अजवाइन – 1/2 छोटा चम्मच

    कसूरी मेथी – 1 बड़ा चम्मच

    हरा धनिया (बारीक कटा) – 2 बड़े चम्मच

    तेल – 1 बड़ा चम्मच (मोयन के लिए) + तलने के लिए

    नमक – स्वादानुसार

    मठ्ठे वाले आलू के लिए:

    उबले आलू – 4 (हाथों से मोटे टुकड़ों में तोड़े हुए)

    खट्टा मठ्ठा (छाछ) या फेंटा हुआ दही – 2 कप

    पानी – 1 कप

    हरी मिर्च (बारीक कटी) – 2

    अदरक (कद्दूकस किया) – 1 छोटा चम्मच

    राई और जीरा – 1/2-1/2 छोटा चम्मच

    मेथी दाना – 1/4 छोटा चम्मच

    हींग – 1/2 छोटा चम्मच

    हल्दी पाउडर – 1/2 छोटा चम्मच

    लाल मिर्च पाउडर – 1/2 छोटा चम्मच

    धनिया पाउडर – 1 छोटा चम्मच

    तेल या देसी घी – 2 बड़े चम्मच

    हरा धनिया – गार्निशिंग के लिए

    नमक – स्वादानुसार

    बनाने का तरीका
    एक बर्तन में 1 कप सूजी और 1 कप गरम पानी डालकर ढककर 10 मिनट के लिए रख दें ताकि सूजी अच्छे से फूल जाए.

    फूली हुई सूजी में गेहूं का आटा, उबला मैश आलू, अजवाइन, चिली फ्लेक्स, कसूरी मेथी, हरा धनिया, 1 चम्मच तेल और नमक मिलाएं. बिना अतिरिक्त पानी डाले सख्त आटा गूंध लें और 10 मिनट रेस्ट दें.

    कड़ाही में 2 चम्मच तेल या घी गरम करें. इसमें जीरा, राई, मेथी दाना, हींग, हरी मिर्च और अदरक डालकर भूनें.

    अब हल्दी, लाल मिर्च और धनिया पाउडर डालें. तुरंत उबले हुए आलू डालकर 2 मिनट मसालों के साथ अच्छे से भून लें.

    अब आंच को बिल्कुल धीमा करें और कड़ाही में मठ्ठा (छाछ) और 1 कप पानी डालते हुए एक हाथ से लगातार चलाते रहें. (लगातार चलाना जरूरी है, वरना मठ्ठा फट सकता है).

    सब्जी में उबाल आने दें: जब सब्जी में पहला उबाल आ जाए, तब चलाना बंद करें और स्वादानुसार नमक मिलाएं. धीमी आंच पर 5-7 मिनट पकने दें और ऊपर से हरा धनिया डालकर गैस बंद कर दें.

    आटे की छोटी-छोटी लोइयां बनाएं और हल्का सा तेल लगाकर पूड़ियां बेल लें.
    कड़ाही में तेल तेज गरम करें और पूड़ियों को डालकर दबाते हुए फूली-फूली और सुनहरी क्रिस्पी होने तक तलें. तैयार सूजी की पूड़ियों को चटपटे मठ्ठे वाले आलू के साथ लंच में सर्व करें.

  • नीम करोली बाबा की सीख: मन की शांति के लिए इन बातों को स्वीकार करना सीखें

    नीम करोली बाबा की सीख: मन की शांति के लिए इन बातों को स्वीकार करना सीखें

     नीम करोली बाबा को उनके भक्त प्रेम से महाराजजी कहते हैं.  उनकी शिक्षाएं आज भी लोगों को सादगी, प्रेम, सेवा और भक्ति का रास्ता दिखाती हैं.  बाबा के कई ऐसे विचार हैं, जो मुश्किल समय में इंसान को हिम्मत देते हैं. उनका एक खास संदेश है कि मन को शांत रखने के साथ हर परिस्थिति को स्वीकार करना सीखना चाहिए.

    मन की शांति सबसे जरूरी
    हमारी जिंदगी में परेशानियां आती-जाती रहती हैं.  कभी नौकरी या कारोबार की चिंता होती है, तो कभी रिश्तों को लेकर मन परेशान रहता है. कई बार ऐसी बातें भी हमें परेशान करती हैं, जिन्हें हम बदल नहीं सकते. ऐसे समय में बार-बार उसी बात के बारे में सोचना समस्या को हल नहीं करता, बल्कि मन का तनाव बढ़ा देता है.

    नीम करोली बाबा की शिक्षाओं का भाव यही है कि इंसान को अपने मन पर नियंत्रण रखना सीखना चाहिए.  जो हो चुका है, उसे बदलना हमारे हाथ में नहीं होता, भविष्य में क्या होगा, यह भी पूरी तरह हमारे नियंत्रण में नहीं है. हमारे हाथ में केवल वर्तमान है. इसलिए आज के समय पर ध्यान देकर अपनी तरफ से सही प्रयास करना बेहतर है.

    हर बात को दिल परलेने से बचें
    लोग अक्सर दूसरों की कही बातों को अपने मन में लंबे समय तक रखते हैं. किसी ने कुछ गलत कह दिया, किसी ने साथ नहीं दिया या किसी काम में उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली, तो हम उसी के बारे में सोचते रहते हैं. इससे मन में गुस्सा, दुख और बेचैनी बढ़ती जाती है.

    मुश्किल समय में धैर्य रखें
    जब परिस्थितियां खराब होती हैं तो लगता है कि परेशानी हमेशा बनी रहेगी.लेकिन समय कभी एक जैसा नहीं रहता.अच्छे और बुरे दौर जीवन का हिस्सा हैं.इसलिए कठिन समय में घबराने के बजाय धैर्य रखना जरूरी है.

    अगर कोई बात आपके नियंत्रण से बाहर है, तो उसे लेकर लगातार चिंता करने के बजाय अपने प्रयास पर ध्यान दें.ईश्वर पर विश्वास रखें . परिस्थितियों को बेहतर बनाने के लिए शांत मन से कदम उठाएं.

    इस विचार से क्या सीख मिलती है?
    नीम करोली बाबा की शिक्षाओं का यह संदेश हमें याद दिलाता है कि सुकून बाहरी चीजों से नहीं, बल्कि मन की स्थिति से मिलता है.जब हम बीती बातों का बोझ कम करते हैं, भविष्य की चिंता छोड़कर वर्तमान पर ध्यान देते हैं. हर परिस्थिति में धैर्य रखते हैं, तो जीवन काफी आसान महसूस होने लगता है.

    इसलिए जब भी मन किसी बात को लेकर अशांत हो, खुद से एक सवाल जरूर करें कि क्या यह बात मेरे नियंत्रण में है? अगर जवाब नहीं है, तो उसे लेकर खुद को परेशान करने के बजाय उसे स्वीकार करना और आगे बढ़ना ही बेहतर रास्ता है.

  • सावन के आखिरी सोमवार पर बनाएं बिना चीनी-दूध का रसीला सिंघाड़े का हलवा, 10 मिनट में तैयार

    सावन के आखिरी सोमवार पर बनाएं बिना चीनी-दूध का रसीला सिंघाड़े का हलवा, 10 मिनट में तैयार

     कल सावन का आखिरी सोमवार है. कल अगर आप व्रत रख रहे हैं और व्रत में कुछ मीठा खाना चाहते हैं तो बाजार से मिठाई की जगह घर में ही सिंघाड़े के आटे का रसीला हलवा बनाकर खाएं. व्रत में शरीर को तुरंत ऊर्जा देने के लिए सिंघाड़े का आटा सबसे अच्छा माना जाता है. लेकिन अक्सर लोग हलवा बनाते समय इसमें भारी मात्रा में चीनी और दूध का इस्तेमाल करते हैं, जिससे यह पचाने में भारी हो जाता है.

    अगर आप भी इस व्रत में बाजार की मिलावटी मिठाइयों और ज्यादा कैलोरी वाली चीनी से बचना चाहते हैं तो बिना चीनी और बिना दूध के बनाएं रसीला सिंघाड़े का हलवा. गुड़ की कुदरती मिठास और शुद्ध देसी घी में सिके सिंघाड़े के आटे का यह हलवा न सिर्फ खाने में बेहद स्वादिष्ट और रसीला लगता है बल्कि महज 10 मिनट में बनकर तैयार भी हो जाता है. आइए जानते हैं इसे बनाने की सामग्री और सबसे आसान तरीका.

    सामग्री
    सिंघाड़े का आटा – 1 कप

    गुड़ (कद्दूकस किया हुआ) – 3/4 कप

    पानी – 2.5 कप (गुनगुना)

    देसी घी – 4 बड़े चम्मच

    हरी इलायची पाउडर – 1/2 छोटा चम्मच

    काजू और बादाम (कटे हुए) – 2 बड़े चम्मच

    बनाने का तरीका
    एक बर्तन में 2.5 कप गुनगुना पानी लें और उसमें कद्दूकस किया गुड़ डालकर अच्छे से घोल लें ताकि गुड़ पिघल जाए. फिर इसे छलनी से छान लें.

    कड़ाही में 1 चम्मच देसी घी गरम करें और कटे हुए काजू-बादाम को हल्का सुनहरा होने तक भूनकर एक प्लेट में निकाल लें.

    अब कड़ाही में बचा हुआ 3 चम्मच देसी घी डालें और 1 कप सिंघाड़े का आटा मिलाएं. धीमी आंच पर आटे को लगातार चलाते हुए भूनें.

    आटे को तब तक भूनें जब तक कि इसका रंग हल्का डार्क ब्राउन न हो जाए और इसमें से सोंधी खुशबू न आने लगे.

    गैस की आंच बिल्कुल धीमी करें और एक हाथ से गुड़ का पानी थोड़ा-थोड़ा डालते जाएं व दूसरे हाथ से व्हिस्कर या कछुल से तेजी से चलाते रहें ताकि गुठलियां न बनें.

    अब मध्यम आंच पर हलवे को लगातार चलाते रहें. सिंघाड़े का आटा पानी को बहुत तेजी से सोखता है और 2 मिनट में गाढ़ा होने लगता है.

    जब हलवा कड़ाही का तला छोड़ने लगे, तब इसमें इलायची पाउडर और 1 चम्मच ऊपर से देसी घी डालें ताकि हलवे में बेहतरीन चमक और रसीलापन आ जाए.

    ऊपर से भुने हुए ड्राई फ्रूट्स मिलाएं और गैस बंद कर दें. तैयार है आपका बिना चीनी और बिना दूध का एकदम रसीला सिंघाड़े का हलवा. इसे गरम-गरम सर्व करें.

  • चाणक्य नीति: इन 5 लोगों से भूलकर भी न लें दुश्मनी, वरना बढ़ सकती हैं मुश्किलें

    चाणक्य नीति: इन 5 लोगों से भूलकर भी न लें दुश्मनी, वरना बढ़ सकती हैं मुश्किलें

    जीवन में हर किसी के साथ विचारों का मेल होना जरूरी नहीं है. कई बार मतभेद बढ़ते-बढ़ते विवाद का रूप ले लेते हैं, लेकिन समझदारी इसी में है कि हर व्यक्ति से टकराव का रास्ता न चुना जाए.  आचार्य चाणक्य ने अपनी नीतियों में ऐसे लोगों और परिस्थितियों का जिक्र किया है, जिनके साथ शत्रुता मोल लेना व्यक्ति के लिए परेशानी का कारण बन सकता है.  

    अग्नि, सर्प, सत्ता और मूर्ख से रहें सावधान

    श्लोक:
    राजा अग्निर्महासर्पो मूर्खश्च बहुनायकः।
    अहर्निशं न सेव्यन्तः शीघ्रं कुर्वन्ति सङ्क्षयम्॥

    इस नीति का भाव यह है कि अग्नि, विषैले सर्प, शक्तिशाली सत्ता और मूर्ख व्यक्ति को हल्के में नहीं लेना चाहिए.  इनके साथ लापरवाही या अनावश्यक टकराव कभी भी भारी पड़ सकता है. आग छोटी हो या बड़ी, असावधानी बरतने पर नुकसान पहुंचा सकती है. इसी तरह मूर्ख व्यक्ति बिना परिणाम सोचे कोई भी कदम उठा सकता है. इसलिए ऐसे लोगों से विवाद बढ़ाने के बजाय सावधानी और समझदारी से काम लेना बेहतर माना जाता है.

    जो आपके राज जानता हो, उससे सोच-समझकर व्यवहार करें
    चाणक्य नीति के अनुसार, जीवन में हर व्यक्ति को अपने निजी रहस्य और कमजोरियां हर किसी के सामने नहीं रखनी चाहिए. यदि कोई मित्र या रिश्तेदार आपके बारे में ऐसी बातें जानता है, जिनका गलत इस्तेमाल किया जा सकता है, तो उसके साथ अनावश्यक दुश्मनी करना भी मुश्किलें बढ़ा सकता है.ऐसे व्यक्ति से लड़ाई करने के बजाय परिस्थितियों को समझकर दूरी बनाना और अपने व्यवहार में संयम रखना ज्यादा बुद्धिमानी हो सकती है.

    ज्ञानी व्यक्ति से शत्रुता क्यों नहीं करनी चाहिए?
    आचार्य चाणक्य ज्ञान को जीवन की सबसे बड़ी शक्तियों में से एक मानते हैं. जो व्यक्ति आपको सही सलाह देता है , जीवन में आगे बढ़ने का मार्ग दिखाता है, उसके साथ अनावश्यक विवाद करने से आप उसके अनुभव और मार्गदर्शन से दूर हो सकते हैं. इसलिए ज्ञानी व्यक्ति की बातों से असहमति होने पर भी संयम से अपनी राय रखनी चाहिए. हर मतभेद को दुश्मनी में बदल देना समझदारी नहीं है.

    वैद्य से भी न करें अनावश्यक विवाद
    चाणक्य नीति में वैद्य यानी चिकित्सक को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है. वैद्य व्यक्ति की बीमारी और उसकी शारीरिक स्थिति को समझता है. इसलिए ऐसे व्यक्ति के साथ संबंध खराब करना उचित नहीं माना गया है. स्वास्थ्य से जुड़ी जरूरत के समय योग्य चिकित्सक का सहयोग जीवन में महत्वपूर्ण हो सकता है.

    शस्त्रधारी या शक्तिशाली व्यक्ति से टकराव हो सकता है खतरनाक
    जिस व्यक्ति के पास किसी को तुरंत नुकसान पहुंचाने की शक्ति या साधन हो, उसके साथ सोच-समझकर व्यवहार करना चाहिए. चाणक्य की सीख का सार यही है कि बिना अपनी क्षमता और सामने वाले की स्थिति को समझे किसी से संघर्ष नहीं करना चाहिए

     

  • अब SIM कार्ड लेना नहीं होगा आसान, नए कनेक्शन के लिए बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन जरूरी

    अब SIM कार्ड लेना नहीं होगा आसान, नए कनेक्शन के लिए बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन जरूरी

    अब नया SIM कार्ड लेना पहले जैसा आसान नहीं होगा. दूरसंचार विभाग DoT ने यूजर की पहचान को लेकर नए नियम जारी किए हैं.  नए SIM कनेक्शन के लिए अब बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन जरूरी होगा, यानी SIM लेते समय सिर्फ KYC के लिए दस्तावेज देना ही काफी नहीं होगा. नए नियम के मुताबिक, यूजर की पहचान बायोमेट्रिक तरीके से भी जांची जाएगी. इसमें फिंगरप्रिंट, चेहरे या आंखों की पुतली यानी Iris जैसी जानकारी का इस्तेमाल किया जा सकता है.

    सिर्फ नया SIM ही नहीं, नियमों का असर सिर्फ नया कनेक्शन लेने तक सीमित नहीं है. यूजर की जानकारी अपडेट करने, SIM बंद कराने और दोबारा पहचान सत्यापित करने के दौरान भी बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन की व्यवस्था रहेगी. सरकार का कहना है कि इस तरह की व्यवस्था से फर्जी नाम पर लिए गए SIM और गलत पहचान के इस्तेमाल को रोकने में मदद मिलेगी.

    सरकार ने इस लिए बदला नियम
    आज मोबाइल नंबर सिर्फ कॉल या इंटरनेट के लिए नहीं है. बैंकिंग, UPI और कई दूसरी डिजिटल सेवाओं में भी मोबाइल नंबर का इस्तेमाल होता है. ऐसे में मोबाइल कनेक्शन किस व्यक्ति के नाम पर है इसकी सही पहचान काफी अहम हो जाती है. नए नियमों के बाद SIM लेने से लेकर यूजर की जानकारी बदलने और दोबारा वेरिफिकेशन तक, पहचान जांचने की प्रक्रिया और मजबूत होगी.

    तय लिमिट से ज्यादा नहीं रख पाएंगे सिम कार्ड
    इसके अलावा दूरसंचार विभाग ने मोबाइल कनेक्शन की भी सीमा तय कर दी है. नए नियम के मुताबिक, टेलीकॉम कंपनियों को ऐसे ग्राहकों काी पहचान करनी होगी, जिनके पास नए नियम के तहत तय सीमा से ज्यादा मोबाइल कनेक्शन हैं. जानकारी के मुताबिक, एक व्यक्ति के नाम पर अधिकतम 9 मोबाइल कनेक्शन हो सकते हैं. जम्मू-कश्मीर, असम और नॉर्थ ईस्ट सर्विस एरिया में यह लिमिट 6 सिम की है. अगर किसी ग्राहक के पास उनके नाम पर इस तय लिमिट से ज्यादा मोबाइल कनेक्शन हैं तो उसे अतिरिक्त नंबर बंद करने होंगे.

    वरुण भसीन एबीपी न्यूज़ में प्रिंसिपल कॉरेस्पॉन्डेंट हैं. पिछले 9 साल से पत्रकारिता कर रहे हैं. वे एयरलाइंस, रेलवे और सड़क-परिवहन से जुड़ी खबरें कवर करते हैं. इससे पहले वे कई संस्थानों में काम कर चुके हैं. वरुण न्यूज जगत से जुड़ी डॉक्यूमेंट्री फिल्में भी बनाते आए हैं. वरुण ने MBM यूनिविर्सिटी जोधपुर से पढ़ाई की है. संपर्क करने के लिए मेल आईडी है-

  • रोज-रोज की भिंडी से हैं बोर? ट्राई करें आंध्रा स्टाइल मसालेदार भिंडी

    रोज-रोज की भिंडी से हैं बोर? ट्राई करें आंध्रा स्टाइल मसालेदार भिंडी

    भिंडी की सब्जी ज्यादातर भारतीयों की फेवरेट सब्जी है. लेकिन आप रोज-रोज एक जैसी सब्जियां खाकर बोर हो गए हैं तो इस बार भिंडी को नए अंदाज में बनाकर खा सकते हैं. आज हम आपको आंध्रा स्टाइल भिंडी बनाना बताएंगे. भिंडी की यह मसालेदार रेसिपी खाने में बेहद टेस्टी होती है और इसे रोटी, पराठे या दाल-चावल के साथ भी परोसा जा सकता है. खास बात यह है कि इसे बनाने में ज्यादा समय भी नहीं लगता. आइए जानते हैं कि आंध्रा स्टाइल भिंडी कैसे बना सकते हैं और इसे बनाने के लिए किन-किन चीजों की जरूरत होती है.

    इंग्रेडिएंट्स (ingredients)
    250 ग्राम भिंडी
    4 बड़े चम्मच तेल
    2 मीडियम साइज प्याज
    2 छोटी चम्मच धनिया के बीज
    1 छोटी चम्मच जीरा
    स्वादानुसार नमक
    7-8 सूखी लाल मिर्च
    1/4 कप भुनी हुई मूंगफली
    5-6 लहसुन की कलियां

    आंध्रा स्टाइल भिंडी बनाएं कैसे?

    • सबसे पहले एक पैन में तेल गर्म करें. दूसरी कड़ाही में धनिया और जीरे को बिना तेल के हल्का भून लें.
    • अब गर्म तेल में छोटी प्याज डालकर लगभग 2 मिनट तक भूनें. इसके बाद कटी हुई भिंडी और स्वादानुसार नमक डालकर अच्छी तरह मिलाएं. पैन को ढककर भिंडी को पकने दें.
    • इस बीच भुने हुए धनिया और जीरे में सूखी लाल मिर्च डालकर कुछ सेकंड और भूनें. फिर इसमें भुनी हुई मूंगफली और लहसुन की कलियां मिलाकर मिक्सर में दरदरा पीस लें.
    • जब भिंडी अच्छी तरह पक जाए, तो इसमें तैयार मसाला डालें और 2-3 मिनट तक अच्छी तरह चलाते हुए पकाएं, ताकि मसाले का स्वाद भिंडी में अच्छी तरह मिल जाए.
    • अब गैस बंद करें और गर्मागर्म मसालेदार भिंडी को रोटी, पराठे या दाल-चावल के साथ परोसें.

    इन बातों का रखें ध्यान

    •     भिंडी को धोने के बाद अच्छी तरह सुखाकर ही काटें, इससे वह चिपचिपी नहीं होगी.
    •     मसालों को हल्का ही भूनें, ज्यादा भूनने से उनका स्वाद कड़वा हो सकता है.
    •     मूंगफली का दरदरा पाउडर भिंडी को अलग स्वाद और हल्का क्रंच देता है.
    •     तीखापन अपनी पसंद के अनुसार सूखी लाल मिर्च की मात्रा कम या ज्यादा कर सकते हैं.

     

  • उमस में राहत देगा झारखंड का दही का चौंका, 5 मिनट में बनाएं स्वादिष्ट डिश

    उमस में राहत देगा झारखंड का दही का चौंका, 5 मिनट में बनाएं स्वादिष्ट डिश

     उमस भरे मौसम में न तो रसोई में जाने का मन करता है और न ही खाना बनाने का. ऐसे में सबसे ज्यादा टेंशन लंच की होती है कि ऐसा क्या बनाएं, जो जल्दी बन भी जाए और सबको पसंद भी आए.ऐसे में गर्मी और बारिश के बाद होने वाली उमस के दिनों में झारखंड में लोग पेट को ठंडा रखने के लिए दही की एक खास डिश बनाते हैं, जिसे वहां दही का चौंका कहा जाता है. इस रेसिपी को बनाने में बिल्कुल समय नहीं लगता है और सबसे अच्छी बात यह है कि लंच में चावल के साथ आप इसे मजे से खा सकते हैं.

    स्वाद में भी दही का चौंका लाजवाब होता है और इसके साथ ही इसे बनाने में बिल्कल मेहनत नहीं लगती है. इसलिए अगर आपको खाने में कुछ हैवी न खाने और बनाने का मन ना हो तो आप इस रेसिपी को जरूर ट्राई कर सकते हैं. इसकी एक खास बात यह भी है कि यह हमारे डाइजेस्टिव सिस्टम को सही रखती है, झारखंड में गांव और शहरों दोनों जगहों पर लोग इसे बड़े चाव से खाते हैं और वहां की यह स्पेशल रेसिपी है.

    दही का चौंका बनाने के लिए सामग्री
        1 कप ताजा दही
        1 छोटी चम्मच सरसों के दाने
        1-2 सूखी लाल मिर्च
        5-6 करी पत्ते
        1-2 हरी मिर्च बारीक कटी हुई
        1 छोटी चुटकी हींग
        1 छोटी चम्मच तेल
        स्वादानुसार नमक
        बारीक कटा हरा धनिया

    दही का चौंका बनाने का तरीका

    • सबसे पहले दही को अच्छी तरह फेंट लें, ताकि उसमें कोई गांठ न रहे. फेंटने के बाद दही में स्वादानुसार नमक मिलाएं और फिर उसे अलग रख दें.
    • इसके बाद तड़का तैयार करें, उसके लिए एक छोटी कड़ाही में तेल गर्म करें. तेल गर्म होने पर इसमें सरसों के दाने डालें. जब सरसों चटकने लगे तो सूखी लाल मिर्च, हरी मिर्च, करी पत्ता और हींग डालकर कुछ सेकंड के लिए भून लें.
    • इसको भूनने के बाद गैस बंद कर दें और इस गर्म तड़के को फेंटे हुए दही के ऊपर डाल दें. इसे अच्छी तरह मिला लें और ऊपर से हरा धनिया डालकर गार्निश करें.
    • झारखंड का स्वादिष्ट दही का चौंका तैयार है और इसे आप चावल के साथ परोसें. चावल के साथ तो इसका स्वाद कई गुना बढ़ जाता है. हालांकि रोटी के साथ भी यह काफी टेस्टी लगता है, आप इसके साथ में सलाद में प्याज-खीरा काटकर खा सकते हैं, वो इसके साथ अच्छे लगते हैं.
    • प्रो टिप: दही को ज्यादा गर्म तड़के में डालकर पकाने के बजाय तड़का गैस बंद करने के बाद दही में मिलाएं, इससे दही का स्वाद और टेक्सचर बेहतर रहेगा. दही को अच्छी तरह से फेंठ लें, क्योंकि अगर उसमें लम्स आ जाते हैं तो वो खाने में अच्छा नहीं लगता है.