Category: लाइफस्टाइल

  • सितंबर में महंगे हुए Xiaomi, Vivo और OPPO के गैजेट्स, स्मार्टफोन-टैबलेट से TV तक बढ़े दाम

    सितंबर में महंगे हुए Xiaomi, Vivo और OPPO के गैजेट्स, स्मार्टफोन-टैबलेट से TV तक बढ़े दाम

    सितंबर महीने की शुरुआत गैजेट्स के महंगे होने से हुई है। शाओमी, वीवो, ओपो जैसे प्रमुख ब्रैंड्स ने अपने कई स्मार्टफोन्स, टैबलेट की कीमतें बढ़ा दी हैं। शाओमी ने स्मार्ट टीवी की कीमत में भी इजाफा किया है। प्रीमियम स्मार्टफोन की कीमतों में 10 हजार रुपये तक बढ़ोतरी देखने को मिली है, जबकि मिड प्रीमियम स्मार्टफोन 3 हजार रुपये तक महंगे हो गए हैं। ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन से मिली जानकारी के अनुसार, नई कीमतें आज से ही लागू हो गई हैं। अगर आपने अपनी विशलिस्ट में कोई फोन रखा था, तो नीचे दी गई टेबल को ध्यान से देखें। हमने स्मार्टफोन्स और स्मार्ट टीवी के प्राइस हाइक बताए हैं, जहां आप पुरानी और नई कीमतों का अंतर देख सकते हैं।

    Xiaomi के 14 प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ीं
    जानकारी के अनुसार, शाओमी ने अपने 14 प्रोडक्ट्स की कीमतों को बढ़ाया है। शाओमी का इसी साल लॉन्च हुआ QD Mini LED Smart TV S 2026 जो 55 इंच में पहले 52999 रुपये का था, अब 54999 रुपये का हो गया है। इसके दाम 2 हजार रुपये बढ़ गए हैं। इसी तरह शाओमी पैड 8 अब 3 हजार रुपये महंगा होकर 12 जीबी रैम के लिए 46999 रुपये का हो गया है। शाओमी के सब ब्रैंड रेडमी के भी कई मॉडलों की कीमत अब बढ़ गई है।

    Vivo T5x और ओपो Find X9 सीरीज में इजाफा
    वीवो का T5x स्मार्टफोन सभी वेरिएंट्स में महंगा हो गया है। इसका टॉप वेरिएंट अब 4 हजार रुपये तक महंगा हो गया है। वहीं, ओपो फाइंड एक्स9 सीरीज के X9s और एक्स9अल्ट्रा मॉडल महंगे हुए हैं। अल्ट्रा मॉडल के दाम अब 10 हजार रुपये अधिक हो गए हैं।

    कई और मॉडल हो सकते हैं महंगे
    स्मार्टफोन्स की कीमतों में प्राइस हाइक का सिलसिला अभी नहीं रुकने वाला। कहा जा रहा है कि कई और ब्रैंड्स अपने प्रोडक्ट के दाम बढ़ा सकते हैं। ऐपल आईफोन की कीमतें बढ़ने के अनुमान कई दिन से लगाए जा रहे हैं।

     

  • WhatsApp पर वायरल ‘नए मॉनिटरिंग रूल्स’ का सच आया सामने, सरकार ने बताया फर्जी

    WhatsApp पर वायरल ‘नए मॉनिटरिंग रूल्स’ का सच आया सामने, सरकार ने बताया फर्जी

    WhatsApp इस्तेमाल करने वाले करोड़ों लोगों के बीच इन दिनों एक मैसेज तेजी से वायरल हो रहा है। इस मैसेज में दावा किया जा रहा है कि भारत सरकार ने WhatsApp नए मॉनिटरिंग रूल्स लागू कर दिए हैं। मैसेज में कहा गया है कि यूजर्स की कॉल और पर्सनल मैसेज पर नजर रखी जाएगी और कुछ खास तरह के टिक मिलने पर सरकार को बातचीत की जानकारी मिल जाएगी। कुछ मैसेज में तो यहां तक दावा किया जा रहा है कि कॉल या मैसेज के आधार पर यूजर के खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है।

    हालांकि, इस पूरे दावे की अब पोल खुल गई है। PIB Fact Check ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस मैसेज को फर्जी बताया है। सरकार की ओर से ऐसी कोई नई WhatsApp मॉनिटरिंग गाइडलाइन जारी नहीं की गई है।

    सरकार ने WhatsApp मॉनिटरिंग के दावे को बताया फर्जी
    PIB Fact Check ने 29 अगस्त को इस वायरल दावे पर सफाई दी। फैक्ट चेक के मुताबिक, सरकार ने WhatsApp की निगरानी से जुड़ी ऐसी कोई नई गाइडलाइन जारी नहीं की है। इसका मतलब साफ है कि WhatsApp पर वायरल हो रहा मैसेज सरकारी आदेश नहीं है। यूजर्स को इस तरह के मैसेज को सच मानकर आगे फॉरवर्ड करने से बचना चाहिए।

    Red Tick और 3 Blue Tick वाला दावा भी गलत
    वायरल मैसेज का एक और हिस्सा लोगों का ध्यान खींच रहा है। इसमें WhatsApp पर अलग-अलग रंग के टिक को सरकार की निगरानी से जोड़ने की कोशिश की गई है। मैसेज में कथित तौर पर बताया जा रहा है कि किसी मैसेज पर ज्यादा Blue Tick या Red Tick दिखाई देने का मतलब सरकार ने उसे देख लिया है या उस पर कार्रवाई की जा सकती है। यह दावा भी भ्रामक है। PIB Fact Check ने इन दावों को गलत बताया है। WhatsApp के टिक को सरकार की कथित मॉनिटरिंग व्यवस्था से जोड़ने का कोई आधार नहीं है।

    सरकार WhatsApp कॉल रिकॉर्ड कर रही है?
    यह वायरल मैसेज का सबसे बड़ा दावा है। इसमें यूजर्स को बताया जा रहा है कि उनकी WhatsApp कॉल रिकॉर्ड या मॉनिटर की जा रही हैं। ऐसे दावों को लेकर पहले भी फर्जी मैसेज वायरल हो चुके हैं। मौजूदा वायरल दावे पर सरकार की फैक्ट चेकिंग एजेंसी ने साफ कर दिया है कि ऐसी कोई नई सरकारी मॉनिटरिंग गाइडलाइन जारी नहीं हुई है। इसलिए केवल इस मैसेज के आधार पर यह मान लेना कि सरकार हर WhatsApp कॉल रिकॉर्ड कर रही है, गलत होगा।

  • Xiaomi ला रहा 7900mAh बैटरी वाला सस्ता फोन, भारत में इस दिन होगा लॉन्च

    Xiaomi ला रहा 7900mAh बैटरी वाला सस्ता फोन, भारत में इस दिन होगा लॉन्च

    नई दिल्ली

    Xiaomi भारतीय बाजार में एक नया स्मार्टफोन लेकर आ रहा है, जो उसकी पॉपुलर और किफायती सीरीज का हिस्सा है. इसका नाम Redmi 17 5G है, जिसको लेकर कंपनी ने खुद सोशल मीडिया पर पोस्ट करके जानकारी दी है. कंपनी ने बताया है कि यह लॉन्चिंग 3 सितंबर को होने जा रही है। 

    X प्लेटफॉर्म पर रेडमी इंडिया ऑफिशियल हैंडल ने एक पोस्ट किया है. इस पोस्ट में लॉन्च डेट के साथ बैटरी की भी जानकारी दी गई है. Redmi 17 5G में 7900mAh की बैटरी दी जाएगी. साथ ही कंपनी ने इसमें बैक पैनल पर प्रीमियम वेगन लेदर फिनिश का इस्तेमाल किया गया है। 

    ऑफिशियल पोर्टल पर लिस्ट डिटेल्स के मुताबिक, 7900mAh की बैटरी के साथ 45W का फास्ट चार्जर मिलेगा, जो बॉक्स के साथ आएगा. साथ ही यह हैंडसेट 22.5W के रिवर्स वायर्ड चार्जिंग पर काम करेगा। 

    Redmi 17 5G का कैमरा 
    शाओमी के पोर्टल पर एक पेज तैयार किया है, जिसमें इस हैंडसेट को लिस्ट किया है. कंपनी ने दावा किया है कि इसमें यूजर्स को न्यू डिजाइन देखने को मिलेगा. लिस्ट डिटेल्स के मुताबिक, 50MP का प्राइमरी कैमरा मिलता है। 

    Redmi India का पोस्ट 

    Redmi 17 5G का प्रोसेसर 

    Redmi 17 5G में स्नैपड्रैगन 4Gen 5 का इस्तेमाल किया है, जिसको लेकर कंपनी का दावा है किया है कि इस प्रोसेसर के साथ आने वाला यह भारत का पहला स्मार्टफोन है। 

    लिस्ट डिटेल्स के मुताबिक, अपकमिंग हैंडसेट तीन कलर वेरिएंट में दस्तक देगा. इसेमं एटर्नल ओरंज, एबोल्यूट ब्लैक और एंडलेस ब्लू है।  Redmi 17 5G का डिस्प्ले 
    Redmi 17 5G के डिस्प्ले को लेकर जानकारी का खुलासा नहीं हुआ है, लेकिन इतना जरूर पता चलता है कि 120Hz का रिफ्रेश रेट्स मिलेगा. आने वाले दिनों में इस हैंडसेट को लेकर और भी डिटेल्स का खुलासा होगा. Redmi 17 5G की कीमत का ऑफिशियली खुलासा नहीं है। 

  • लिवर को हेल्दी रखने के लिए डाइट में शामिल करें ये 5 सब्जियां, गाजर से चुकंदर तक हैं फायदेमंद

    लिवर को हेल्दी रखने के लिए डाइट में शामिल करें ये 5 सब्जियां, गाजर से चुकंदर तक हैं फायदेमंद

    लिवर शरीर के लिए कई सारे काम करता है। ये एनर्जी देने के साथ शरीर के टॉक्सिंस की सफाई भी करता है। जबकि ज्यादातर लोगों को लगता है कि लिवर केवल खाने को डाइजेस्ट करने के लिए बाइल प्रोड्यूस करता है। लेकिन इसके साथ भी लिवर का कई काम होता है। लिवर फंक्शन को सही तरीके से चलाते रहने के लिए जरूरी है कि हेल्दी फूड्स को खाया जाए, जैसे ये कुछ सब्जियां जो लिवर फंक्शन को स्मूद करने में मदद करती हैं। ये एंटीऑक्सीडेंट्स, फाइबर, विटामिन और मिनरल्स से भरपूर होते हैं। और इन्हें रोज की डाइट में शामिल करना अच्छा होता है।

    शलगम
    शलगम को काफी इग्नोर किया जाता है। जबकि ये फाइबर से भरपूर होते हैं और इसमे कई ऐसे कंपाउंड होते हैं जो डाइजेशन के साथ ही मेटाबॉलिक हेल्थ को सपोर्ट करते हैं। विटामिन सी, जो ऑक्सीडेटिव डैमेज से सेल्स को बचाते हैं। हेल्दी, बैलेंस डाइट में शलगम को जरूर शामिल करना चाहिए, ये लिवर फंक्शन को भी सपोर्ट करने में मदद करते हैं।

    शकरकंद
    शकरकंद के फायदों को जरा भी इग्नोर नहीं किया जा सकता है। फाइबर, विटामिन सी, बीटा कैरोटिन के साथ ही इसके न्यूट्रिशन की लिस्ट लंबी है। शकरकंद यानि स्वीट पोटैटो में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स इंफ्लेमेशन को कम करने और ओवरऑल लिवर हेल्थ को सही रखने में मदद करते हैं। यहीं नहीं इसमे मौजूद कॉम्प्लेक्स कार्ब्स धीरे-धीरे एनर्जी देती है और गट हेल्थ को इंप्रूव करती है। जिससे बॉडी के नेचुरल डिटॉक्सिफिकेशन में मदद मिलती है।

    गाजर
    लिवर को हेल्दी रखना है तो गाजर जरूर खाएं। गाजर में बीटा कैरोटिन होता है जो बॉडी में जाकर विटामिन ए में कन्वर्ट हो जाता है और लिवर सेल्स को फ्री रैडिक्लस से होने वाले डैमेज से बचाता है। गाजर में मौजूद फाइबर डाइजेशन को सपोर्ट करता है और टॉक्सिंस को रिमूव करने मे मदद करता है। सबसे खास बात गाजर को कच्चा, उबला या फिर सूप में ब्लेंड करके जिस तरह भी खाएं फायदा ही करता है।

    मूली
    मूली में कैलोरी कम और न्यूट्रिशन ज्यादा होते हैं। वेट लॉस करने वालों को भी मूली-गाजर को डाइट में शामिल करना चाहिए। ये लिवर और गालब्लैडर के फंक्शन को सपोर्ट करने वाले कंपाउंड प्रोड्यूस करता है। मूली की प्रॉपर्टीज शरीर के कचरे को आसानी से शरीर के बाहर करने में मदद करती है। मूली को सलाद में मिलाकर खाएं या अकेले ही खाएं, दोनों तरह से फायदा ही करती है।

    चुकंदर
    लिवर हेल्थ को दुरुस्त रखना है तो चुंकदर खाने की सलाह मिल जाती है। चुकंदर के गुण इसे लिवर के लिए सुपरफूड बनाते हैं। इसमे बिटालेंस एंटीऑक्सीडेंट होता है जो ऑक्सीडेटिस स्ट्रेस से बचाता है। साथ ही लिवर के नेचुरल क्लीजिंग प्रोसेस को सपोर्ट करता है और ब्लड फ्लो इंप्रूव करता है। यहीं नहीं चुकंदर में हाई फाइबर होता है जो डाइजेशन में मदद करता है। जिससे शरीर के वेस्ट मैटेरियल आसानी से मल के जरिए शरीर के बाहर निकल जाते हैं। चुकंदर का जूस पिए, उबालकर खाएं या फिर सलाद में शामिल करें।

    खाते समय कौन सी सावधानी जरूरी है
    हेल्दी रहने के लिए केवल कुछ फूड्स, सब्जियों पर नहीं टिके रहना चाहिए। हर हफ्ते बदलकर और अलग-अलग सब्जियों को चुनकर खाना चाहिए। लिवर के लिए जड़ वाली सब्जियां हेल्दी होती है।

    कच्ची खाने के बजाय हल्का सा उबालकर, रोस्ट करके या फिर ग्रिल करके खाएं लेकिन ध्यान रहे कि डीप फ्राई करने से बचें।

    हाई फाइबर, प्रोटीन और न्यूट्रिशन वाले फूड्स को खाने के साथ ही शरीर को पर्याप्त मात्रा में पानी मिलना चाहिए। हाइड्रेटेड रहने से बॉडी को नेचुरली डिटॉक्स करना आसान होगा।

  • बचे हुए चावलों को फेंकने की बजाय बनाएं टेस्टी अप्पे, बच्चों के टिफिन के लिए भी है परफेक्ट

    बचे हुए चावलों को फेंकने की बजाय बनाएं टेस्टी अप्पे, बच्चों के टिफिन के लिए भी है परफेक्ट

    रात के बने हुए चावल अक्सर बच जाते हैं, जिन्हें हम फ्रिज में स्टोर कर के रख देते हैं। सुबह इन्हें दोबारा खाने का मन नहीं होता और फिर समझ ही नहीं आता कि इनका क्या किया जाए। आपके साथ भी यही होता है, तो ये रेसिपी आपके बड़े काम आने वाली है। बच्चों का टिफिन हो या शाम का स्नैक, बचे हुए चावलों से आप ये हेल्दी और टेस्टी अप्पे बना सकते हैं। इन्हें बनाने में ज्यादा मेहनत भी नहीं लगती और ना ही टाइम। खूब सारी सब्जियां एड कर के आप इन्हें और भी ज्यादा हेल्दी बना सकते हैं। तो अगली बार से जब चावल बच जाएं, तो उन्हें फेंकने के बजाए ये टेस्टी और हेल्दी अप्पे का नाश्ता बनाना बिल्कुल ना भूलें। चलिए फटाफट से इसकी रेसिपी जान लेते हैं।

    बचे हुए चावलों से बनाएं हेल्दी और टेस्टी नाश्ता
    रात के चावल बच जाएं तो सुबह नाश्ते में या बच्चों की टिफिन के लिए आप ये टेस्टी और हेल्दी अप्पे बना सकते हैं। इसके लिए आपको जिन सामग्रियों की जरूरत होगी वो हैं- बचे हुए चावल (2 कप), दही (1 कप), सूजी (1 कप), बारीक कटी हुई सब्जियां (शिमला मिर्च, गाजर, हरा धनिया और प्याज), चिली फ्लेक्स (मोटी कुटी हुई लाल मिर्च), काली मिर्च पाउडर और नमक (स्वादानुसार), बेकिंग सोडा (चुटकीभर) और जरूरत के हिसाब से तेल।

    स्टेप बाय स्टेप सीखें बचे हुए चावलों का हेल्दी नाश्ता
    स्टेप 1- सबसे पहले एक मिक्सर में बचे हुए चावल, ताजी दही और सूजी को पीसकर एक स्मूद सा बैटर तैयार कर लें। ध्यान रहे आपको इसमें पानी बिल्कुल भी एड नहीं करना है।

    स्टेप 2- अब अपनी मनपसंद सब्जियों को बारीक काट कर रख लें। उदाहरण के लिए शिमला मिर्च, कद्दूकस की हुई गाजर, हरा धनिया पत्ता और प्याज; अप्पे में बहुत ही टेस्टी लगती हैं।

    स्टेप 3- बारीक कटी हुई सब्जियों को बैटर में डालें। साथ में थोड़ी सी चिली फ्लेक्स, स्वादनुसार नमक और थोड़ा सा काली मिर्च का पाउडर एड करें। बच्चों के लिए बना रहे हैं, तो तीखा थोड़ा कम रख सकते हैं।

    स्टेप 4- सभी चीजों को बैटर में अच्छी तरह मिक्स कर लें। फिर चुटकीभर बेकिंग सोडा डालकर हल्के हाथों से मिला दें। अप्पे का बैटर बनकर तैयार है।

    स्टेप 5- अब अप्पे पैन को गैस पर रखें और इसके हर खाने में थोड़ा सा तेल लगाकर ग्रीस कर लें। पैन गर्म होने पर हर खाने में थोड़ा-थोड़ा बैटर और ढककर लो फ्लेम पर 3-4 मिनट के लिए पकने दें।

    स्टेप 6- जब नीचे की तरफ से अप्पे गोल्डन और हल्के क्रिस्पी हो जाएं तो ऊपर की तरफ थोड़ा सा तेल अप्लाई कर के इन्हें पलट दें। फिर दोबारा ढककर 3-4 मिनट के लिए लो फ्लेम पर पकने दें। अप्पे बनकर तैयार हैं।

    सर्विंग टिप- गरमा-गरम चावल के अप्पे को आप हरी चटनी और टोमैटो केचअप के साथ सर्व कर सकते हैं। वहीं अगर आपको फुल साउथ इंडियन टेस्ट लेना है तो साथ में नारियल की चटनी एक अच्छा ऑप्शन हो सकती है।

  • मध्यप्रदेश में सर्वाइकल कैंसर के मामले बढ़े, ग्वालियर में 5 साल में 1857 केस; जानें लक्षण

    मध्यप्रदेश में सर्वाइकल कैंसर के मामले बढ़े, ग्वालियर में 5 साल में 1857 केस; जानें लक्षण

    ग्वालियर 
     कैंसर से हर साल दुनियाभर में करोड़ों मौतें होती हैं. भारत में भी इसके आंकड़े डरावने हैं. बात करें मध्यप्रदेश की तो 2025 में यहां कैंसर के 88 हजार से ज्यादा नए मरीज सामने आए थे. लेकिन कई प्रकार के कैंसर में से एक सर्वाइकल कैंसर मध्य प्रदेश को तेजी से अपनी चपेट में ले रहा है. चिंता की बात ये है कि हर साल लगभग 4 हजार महिलाएं प्रदेश में सर्वाइकल कैंसर से पीड़ित हो रही हैं. चौंकाने वाली बात तो ये है कि अकेले ग्वालियर में पिछले 5 सालों में 1800 से ज्यादा सर्वाइकल कैंसर के मामले दर्ज हुए। 

    महिलाओं में होने वाला दूसरा सबसे आम कैंसर, लेकिन जानलेवा
    ग्वालियर अंचल में सर्वाइकल कैंसर दूसरे कैंसर की तुलना में तेजी से पैर पसार रहा है. 100 में 99 महिलाओं में होने वाला यह कैंसर ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) के संक्रमण की वजह से होता है. आईसीएमआर की रिपोर्ट के अनुसार स्तन कैंसर के बाद यह महिलाओं में होने वाला दूसरा सबसे आम कैंसर है. ये ऐसी बीमरी है कि, समय पर पता चल जाए तो इलाज के जरिए मरीज ठीक भी हो सकता है लेकिन बाद में मरीज का बचना मुश्किल होता है. ग्वालियर में इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं 

    5 सालों में लगातार बढ़ा सर्वाइकल कैंसर का ग्राफ
    ग्वालियर में बीते पांच वर्षों में हर साल सर्वाइकल कैंसर के केस बढ़े हैं, जहां 2021 में ग्वालियर में 288 केस सामने आए थे, वहीं साल दर साल ये संख्या बढ़ती जा रही है. ग्वालियर स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बीते 5 सालों में से 2021 में 288, 2022 में 359, 2023 में 335, 2024 में 349 और 2025 में अब तक सर्वाधिक 368 महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर पाया गया.जबकि 1 जनवरी 2026 से 31 जुलाई 2026 तक ही 158 केस हो चुके हैं. यानी पांच सालों में 1857 मामले आए हैं. ये वे आंकड़े हैं जो सरकारी अस्पतालों तक पहुचे हैं. और सरकारी रिकॉर्ड में हैं. इसके अलावा ग्वालियर से बाहर इलाज कराने वाली महिलाएं रिकॉर्ड में नहीं हैं। 

    क्या होता है सर्वाइकल कैंसर?
    सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाली गंभीर बीमारी है, जो गर्भाशय ग्रीवा यानि बच्चेदानी के निचले हिस्से की कोशिकाओं में होने वाला कैंसर है. यह अचानक नहीं होता बल्कि महिला के ह्यूमन पैपिलोमा वायरस के संपर्क में आने पर फैलता है. यदि समय पर इसे डिटेक्ट ना किया जाए और समय पर इलाज ना मिले तो ये जानलेवा हो सकता है। 

    सर्वाइकल कैंसर से बचाव का सबसे कारगर तरीका
    इन हालातों पर जब हमने विशेषज्ञों से संपर्क किया तो कैंसर हॉस्पिटल की सीनियर डॉक्टर गुंजन श्रीवास्तव के मुताबिक, '' महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर साइलेंट किलर माना जाता है. कैंसर से मौतों के मामले में सबसे ज्यादा मृत्यु सर्वाइकल कैंसर की वजह से होती है. किशोरावस्था में खासकर 9 से 15 वर्ष की आयु में ही बेटियों को एंटी एचपीवी वैक्सीन लगवा देना चाहिए, क्योंकि ह्यूमन पैपिलोमा वायरस के संपर्क में आने से पहले अगर वैक्सीन लग जाती है तो यह ज्यादा कारगर होती है. और सर्वाइकल कैंसर से बचाव करती है.'' डॉ गुंजन श्रीवास्तव के मुताबिक 30 साल की उम्र के बाद महिलाओं को खासकर शादीशुदा महिलाओं को पैप स्मीयर टेस्ट हर तीन साल में करना चाहिए। 

    कैसे पहचानें सर्वाइकल कैंसर के लक्षण?
    जया आरोग्य अस्पताल समूह के ऑनकोलॉजी डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ. अक्षय निगम कहते हैं, '' सर्वाइकल कैंसर अपने प्री कैंसर स्टैट्ज में कुछ मुख्य लक्षणों से पहचाना जा सकता है. और पहली ही स्टेज में इलाज के द्वारा पूरी तरह ठीक किया जा सकता है. इसके मुख्य लक्षण हैं, महिलाओं में पेल्विक पेन, अनियमित रक्तस्राव, बदबूदार डिस्चार्ज, लगातार वाइट डिस्चार्ज. ऐसा होने पर तुरंत स्त्रीरोग विशेषज्ञ से जांच कराना चाहिए. और अगर जांच में सर्वाइकल कैंसर की पुष्टि होती है तो तुरंत कैंसर विशेषज्ञ से कंसल्ट करें। 

    मध्यप्रदेश में किशोरियों को निशुल्क लगाई जा रही वैक्सीन
    मध्यप्रदेश में सर्वाइकल कैंसर के खतरे को देखते हुए शासन द्वारा भी स्वास्थ्य विभाग के जरिए 14 से 15 वर्ष की बालिकाओं को निशुल्क टीकाकरण कराया जा रहा है. लगातार प्रचार प्रसार से लोगों में जागरूकता भी आई है. ग्वालियर के जिला टीकाकरण अधिकारी दे आरके गुप्ता के मुताबिक, "शासन सर्वाइकल कैंसर से बचाव के बचाव के लिए 14 से 15 आयु वर्ग की बच्चियों के लिए निशुल्क एचपीवी वैक्सीन लगवा रही है, ग्वालियर में उसके लिए 23311 वैक्सीन का स्टॉक उपलब्ध कराया गया था. अच्छी बात यह है की लोगो ने इस टीकाकरण में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया है जिससे अब तक ग्वालियर जिले में 22472 वैक्सीन डोज लगाए जा चुके हैं. और यह काम निशुल्क सभी सरकारी अस्पतालों में लगातार जारी है। 

  • क्या मोबाइल को खत्म कर देगा SIM वाला इयरफोन? Plaud One TWS में मिलेंगे AI फीचर्स

    क्या मोबाइल को खत्म कर देगा SIM वाला इयरफोन? Plaud One TWS में मिलेंगे AI फीचर्स

     नई दिल्ली
    मोबाइल का इस्तेमाल बहुत से लोग सिर्फ कॉलिंग के लिए और म्यूजिक आदि सुनने के लिए करते हैं. अब लोगों की ऐसी ही बेसिक जरूरतों को पूरा करने के साथ उसमें AI सपोर्ट को शामिल कर दिया है और एकदम न्यू इयरफोन लॉन्च कर दिया है. इसमें वॉयस कंट्रोल, रिकॉर्डर और AI की मदद से कॉल को ट्रांसक्राइब का सपोर्ट दिया है। 

    Plaud One नाम के TWS में eSIM का सपोर्ट दिया गया है, जो कॉलिंग और कॉल रिकॉर्डिंग में मदद करता है. साथ ही AI को कमांड देने के भी काम आता है. ये अभी अमेरिका में लॉन्च हुए हैं. हालांकि इसमें कॉल करने का प्रोसेस नहीं बताया है। 

    अमेरिका बेस्ड Plaud नाम की कंपनी ने एक न्यू इयरफोन प्रोडक्ट लॉन्च किया है. ये देखने में तो आम इयरबड्स के जैसे नजर आते हैं. साथ ही कंपनी ने इसमें eSIM कार्ड का सपोर्ट दिया है. कंपनी ने बताया है कि इस फीचर की मदद से यूजर बिना फोन या कंप्यूटर का इस्तेमाल किए भी इस्तेमाल कर सकेंगे. AI का भी फायदा उठा सकेंगे। 

    Plaud One के फीचर्स 
    Plaud One में 12mm ड्राइवर्स दिए हैं और इसमें एक्टिव नॉयस कैंसिलेशन (ANC) का फीचर दिया गया है. कंपनी ने दावा किया है कि यह केस 5 मीटर तक की दूरी से भी क्लियर वॉयस को रिकॉर्ड कर सकता है।  

    मिलेगा दमदार बैटरी बैकअप 
    एक बार बैटरी को फुल चार्ज करने के बाद यूजर्स 25 घंटे तक की बातचीत रिकॉर्ड कर सकेगा. कंपनी ने 249 डॉलर देकर प्री ऑर्डर शुरू कर दिया है. कंपनी इसकी शिपिंग को जल्द ही शुरू करेगी. शुरुआत में कंपनी देखना चाहती है कि यह लोगों को कितना पसंद आता है, उसके बाद आगे का फैसला लेगी। 

    बड़े काम का है AI 
    Plaud ने बताया है कि इयरफोन का सॉफ्टवेयर और AI फीचर उसको दूसरों से अलग बनाता है. ये ईयरबड्स बातचीत को ट्रांसक्राइब करने के बाद उसका AI एजेंट Gmail, Google Calendar, Notion और Slack जैसे टूल्स से कनेक्ट होने की सुविधा देता है। 

  • पैंक्रियाटिक कैंसर के इलाज में नई उम्मीद, FDA ने ‘रासोंक’ को दी मंजूरी; मौत का खतरा हुआ कम

    पैंक्रियाटिक कैंसर के इलाज में नई उम्मीद, FDA ने ‘रासोंक’ को दी मंजूरी; मौत का खतरा हुआ कम

     नई दिल्ली

    पैंक्रियाज में होने वाले कैंसर को पैंक्रियाटिक कैंसर कहते हैं. इससे अधिकतर मामले आखिरी स्टेज में सामने आते हैं. ऐसे में मरीजों की जान बचाना बहुत मुश्किल हो जाता है. लेकिन अब एक नई दवा ने उम्मीद जगाई है.  अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने नई दवा रासोंक को मेटास्टैटिक पैंक्रियाटिक कैंसर यानी जो कैंसर शरीर के दूसरे हिस्सों में भी फैल गया है उसके इलाज के लिए मंजूरी दे दी है. यह दवा खासतौर पर उन मरीजों के लिए मंजूर की गई है, जिनका पहले इलाज हो चुका है या जो किसी कारण से सामान्य कीमोथेरेपी नहीं ले सकते। 

    खास बात यह है कि इसे दिन में सिर्फ एक बार गोली के रूप में लिया जा सकता है. इस दवा को लेकर ट्रायल किए गए थे. ट्रायल में दवा काफी फायदेमंद मिली है. इससे पैंक्रियाटिक कैंसर के मरीजों के जीवन को बढ़ाने में मदद मिली है. हालांकि ये कैंसर का इलाज नहीं है, लेकिन इस बीमारी से मौत के खतरे को कम कर सकती है। 

    मरीजों के जिंदा रहने की दर बढ़ी

    दवा को मंजूरी देने से पहले किए गए बड़े क्लिनिकल ट्रायल में इसके बहुत अच्छे नतीजे सामने आए हैं. इस दवा से पैंक्रियाटिक कैंसर के जिन मरीजों की बीमारी एडवांस यानी अंतिम स्टेज के आसपास पहुंच गई है उनके जिंदा रहने की दर में सुधार देखा गया है. कुछ मरीजों में सर्वाइवल का फायदा पहले से इस्तेमाल हो रहे इलाज की तुलना में करीब दोगुना तक रहा है.  हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि दवा कैंसर को पूरी तरह खत्म कर देती है. लेकिन फायदा यह है कि जिन मरीजों में पैंक्रियाज का कैंसर शरीर के दूसरे अंगों में फैल गया था उनमें मरीजों की जिंदगी को लंबा करने और लक्षणों को कम करने में मदद मिली है। 

    किस तरह काम करती है यह दवा?
    पैंक्रियाटिक कैंसर के कई मामलों में KRAS नाम के जीन में बदलाव या म्यूटेशन पाया जाता है. यह बदलाव कैंसर कोशिकाओं को तेजी से बढ़ने और शरीर में फैलने में मदद कर सकता है. नई दवा इसी कैंसर पैदा करने वाले रास्ते को निशाना बनाकर काम करने के लिए विकसित की गई है. यही वजह है कि इसे पैंक्रियाटिक कैंसर के इलाज में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। 

    हर मरीज के लिए नहीं होगी दवा
    FDA की मंजूरी का मतलब यह नहीं है कि पैंक्रियाटिक कैंसर का हर मरीज इस गोली को ले सकता है. डॉक्टर मरीज के कैंसर की स्टेज, पहले हुए इलाज, ट्यूमर की जेनेटिक जांच और उसकी कुल स्वास्थ्य स्थिति को देखकर तय करेंगे कि यह दवा उसके लिए सही है या नहीं है। 

  • Swine Flu का बढ़ रहा खतरा! बचाव के लिए लगवाएं ये वैक्सीन, जानें कैसे करती है फायदा

    Swine Flu का बढ़ रहा खतरा! बचाव के लिए लगवाएं ये वैक्सीन, जानें कैसे करती है फायदा

       नई दिल्ली 
       दिल्ली ही नहीं अब कई दूसरे राज्यों में भी स्वाइन फ्लू के केस बढ़ रहे हैं. लोगों को तेज बुखार, खांसी, जुकाम, गले में दर्द जैसे लक्षण हो रहे हैं. कुछ मरीजों को सांस लेने में भी परेशानी हो रही है. बढ़ते मामलों के बीच स्वाइन फ्लू से बचाव करना बहुत जरूरी हो गया है. इससे बचाव कैसे करें? क्या स्वाइन फ्लू से बचने के लिए भी कोई वैक्सीन है? अगर है तो कौन सी, कब लगवानी चाहिए. इस बारे में डॉक्टर ने बताया है। 

    स्वाइन फ्लू इन्फ्लूएंजा वायरस का ही एक प्रकार है. फ्लू वैक्सीन से ही स्वाइन फ्लू समेत इन्फ्लूएंजा के दूसरे स्ट्रेन से बचाव हो जाता है. हर साल फ्लू की वैक्सीन को अपडेट किया जाता है. ऐसे में यह सभी स्ट्रेन के खिलाफ प्रभावी होती है. ये वैक्सीन आमतौर पर उस सीजन में फैलने वाले इन्फ्लूएंजा वायरस के प्रमुख स्ट्रेन को ध्यान में रखकर तैयार की जाती हैं. इससे यह स्वाइन फ्लू से भी आसानी से बचाव कर सकती है। 

    कौन सी Vaccine लगवानी चाहिए, क्या है नाम? 

    दिल्ली के आरएमएल हॉस्पिटल में मेडिसिन विभाग में प्रोफेसर डॉ. सुभाष गिरि ने इस बारे में Aajtak.in को बताया है. डॉ. सुभाष कहते हैं कि स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए जो वैक्सीन लगती है उसका नाम सीजनल इन्फ्लूएंजा वैक्सीन है. इसको मॉडर्न क्वाड्रिवेलेंट फ्लू शॉट कहते हैं। 

    डॉ. सुभाष कहते हैं कि इन्फ्लूएंजा वायरस समय के साथ बदलते रहते हैं. यही वजह है कि फ्लू वैक्सीन को भी समय-समय पर अपडेट किया जाता है. आमतौर पर 6 महीने या उससे अधिक उम्र के लोग इसको लगवा सकते हैं. लेकिन अगर किसी को कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या है तो उसको वैक्सीन लेने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। 

    कब लगवानी चाहिए वैक्सीन और कितने दिन में असर करती है?
    फ्लू वैक्सीन लगवाने के बाद शरीर को फ्लू के खिलाफ इम्यूनिटी बनाने में करीब दो हफ्ते लग सकते हैं. इसलिए यह सही समय है कि आप अपने डॉक्टर की सलाह लेकर ये टीका लगवा सकते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि इस समय स्वाइन फ्लू के केस काफी बढ़ रहे हैं. ऐसे में समय पर टीका लगने के कई फायदे हैं. इससे स्वाइन फ्लू से होने वाले गंभीर लक्षणों से बचाव किया जा सकता है. ऐसे में हॉस्पिटल में भर्ती होने की आशंका भी कम होती है। 

    किन लोगों के लिए ज्यादा जरूरी है?
    हालांकि फ्लू किसी को भी हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों में यह गंभीर रूप ले सकता है. इसलिए छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और डायबिटीज, दिल या फेफड़ों की बीमारी वाले लोगों को फ्लू से बचाव पर खास ध्यान देना चाहिए. कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में भी संक्रमण गंभीर होने की आशंका रहती है. ऐसे में इन लोगों को वैक्सीन जरूर लगवा लेनी चाहिए। 

    कितनी हो सकती है Vaccine की कीमत?
    भारत में फ्लू वैक्सीन की कीमत ब्रांड, वैक्सीन के प्रकार के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है. प्राइवेट अस्पतालों में इसकी कीमत कुछ सौ रुपये से लेकर लगभग 1,000 से 2,000 रुपये या इससे अधिक तक हो सकती है. अगर आप ये वैक्सीन लगवाना चाहते हैं तो अपने डॉक्टर से सलाह लेकर किसी हॉस्पिटल में जाकर इसको लगवा सकते हैं. इसका कोई नुकसान नहीं है, बल्कि ये इन्फ्लूएंजा से बचाने का ही काम करती है। 

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    पैंक्रियाटिक कैंसर के इलाज में बड़ी सफलता, FDA ने पहली RAS टारगेटेड दवा को दी मंजूरी

    पैनक्रिएटिक कैंसर यानी अग्राशय के कैंसर को दुनिया के सबसे जानलेवा कैंसर माना जाता है, क्योंकि यह शुरुआती स्टेज में पकड़ में ही नहीं आता है. हालांकि, अब मरीजों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है. अमेरिका की फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने एडवांस्ड पैनक्रिएटिक कैंसर के लिए एक क्रांतिकारी नई दवा का मंजूरी दे दी है, जिसे दशकों से डॉक्टर और वैज्ञानिक तलाश कर रहे थे. आइए जानते हैं यह दवा क्या है, कैसे काम करती है, और मरीजों के लिए यह कितनी असरदार साबित हुई है.

    कौन सी दवा को मिली मंजूरी?
    फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने 'डाराक्सोनरासिब' वैक्सीन को मंजूरी दी है, जिसे रेवोल्यूशन मेडिसिन्स कंपनी रासोंक ब्रांड नाम से बेचेगी. यह अपनी तरह की पहली गोली है, जो एक म्यूटेटेड प्रोटीन को ब्लॉक करती है. यह 90 प्रतिशत से ज्यादा पैनक्रिएटिक कैंसर मामलों में ट्यूमर की ग्रोथ को बढ़ा देता है. फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने इसे तय वक्त से छह महीने पहले ही एक्सपेडाइटेड अप्रूवल दे दिया, जो इस दवा की अहमियत को दिखाता है.

    क्या टारगेट करती है यह दवा?
    यह नई दवा आरएएसजीन फैमिली में होने वाले म्यूटेशन को निशाना बनाती है, जो सेल ग्रोथ को नियंत्रित करता है. इसमें केआरएएस म्यूटेशन को पैनक्रिएटिक कैंसर बढ़ाने का सबसे बड़ी वजह माना जाता है. लेकिन इस प्रोटीन की बनावट ऐसी है कि इससे जुड़ने वाली कोई दवा बनाना कई दशक तक नामुमकिन माना जाता था, यही वजह है कि इसे अनड्रगेबल कहा जाता था. रेवोल्यूशन मेडिसिन्स की यह दवा एक तरह के मॉलिक्यूलर ग्लू के जरिए कई केआरएएस सबटाइप्स से जुड़ने में कामयाब रहती है.

    मरीजें को क्यों है फायदेमंद?
    इस स्टडी में 500 मरीज शामिल हुए थे, जिनका मेटास्टैटिक यानी फैल चुका कैंसर पहले के इलाज पर रिस्पॉन्स करना बंद कर चुका था. मरीजों को रैंडमली इस नई दवा या पुराने कीमोथेरेपी ट्रीटमेंट पर रखा गया है. नतीजों में पाया गया कि नई दवा लेने वाले मरीजों की जिंदा रहने का मौका लगभग दोगुनी हो सकती है. साथ ही उनमें खतरनाक साइड इफेक्ट भी कम देखे जा सकते हैं.

    कितनी है दवा की कीमत
    कंपनी के मुताबिक, इस दवा के एक महीने के कोर्स की कीमत करीब 39,800 डॉलर है, यानी भारतीय रुपयों में करीब 33 लाख रुपये के आसपास आता है. यह रोजाना ली जाने वाली गोली के रूप में आएगी. पैनक्रिएटिक कैंसर का इलाज करने वाले डॉक्टरों को उम्मीद है कि इस दवा की मंजूरी दूसरे कैंसर के लिए भी नए रास्ते खोल सकती है, क्योंकि इसी बुनियाद पर दर्जनों एक्सपेरिमेंटल दवाएं भी डेवलपमेंट स्टेज में हैं. कंपनी अब इसी टेक्नोलॉजी को फेफड़ों के कैंसर के साथ कई और तरह के कैंसर पर भी टेस्ट कर रही है.

    अमेरिकन कैंसर सोसाइटी के मुताबिक अकेले अमेरिका में इस साल करीब 67,000 नए पैनक्रिएटिक कैंसर मामले सामने आए हैं, जबकि 52,000 से ज्यादा लोगों की इससे मौत होने का खतरा होता है. इस बीमारी की पांच साल की जिंदा रहने की दर सिर्फ 13 प्रतिशत है, जो इसे सबसे जानलेवा कैंसर में से एक बनाती है.