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  • Bihar Airport Plan 2030: बिहार में 13 एयरपोर्ट होंगे चालू, छोटे शहरों से शुरू होंगी सीधी उड़ानें

    Bihar Airport Plan 2030: बिहार में 13 एयरपोर्ट होंगे चालू, छोटे शहरों से शुरू होंगी सीधी उड़ानें

     पटना
    Bihar Airport Plan 2030: बिहार में सड़क कनेक्टिविटी के बाद अब छोटे शहरों को हवाई सेवा से जोड़ने की तैयारी तेज हो गई है। राज्य सरकार की योजना के अनुसार वर्ष 2030 तक बिहार में 13 एयरपोर्ट कार्यशील किए जाएंगे।

    केंद्र सरकार की उड़ान योजना और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के सहयोग से इन हवाई अड्डों को विकसित किया जाएगा। नेपाल और चीन सीमा पर हवाई सु‍विधा विकसित करने पर सरकार का विशेष ध्‍यान है।

    इनके चालू होने के बाद दिल्ली, मुंबई, कोलकाता समेत देश के प्रमुख महानगरों के लिए छोटे शहरों से सीधी उड़ान सेवा मिलने की उम्मीद है।

    इससे पटना और दरभंगा एयरपोर्ट पर यात्रियों का दबाव भी कम होगा। फिलहाल बिहार में पटना, गया, दरभंगा और पूर्णिया से हवाई सेवा उपलब्ध है।

    सरकार पहले चरण में छह एयरपोर्ट विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। इसके बाद गोपालगंज, किशनगंज और सोनपुर में एयरपोर्ट विकसित करने की योजना है।

    2025 में हुआ था समझौता
    बिहार सरकार और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के बीच वर्ष 2025 में राज्य के विभिन्न हिस्सों में हवाई कनेक्टिविटी बढ़ाने को लेकर समझौता हुआ था।

    उड़ान योजना के तहत वीरपुर, सहरसा, मुंगेर, वाल्मीकिनगर, मुजफ्फरपुर में एयरपोर्ट तथा मधुबनी में हेलीपोर्ट विकसित करने की योजना है।

    नेपाल सीमा से पांच किमी दूर वीरपुर एयरपोर्ट
    सुपौल जिले के वीरपुर एयरपोर्ट के विकास के लिए 83.83 एकड़ अतिरिक्त भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। नेपाल सीमा से महज पांच किलोमीटर दूर होने के कारण यह एयरपोर्ट रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    करीब 64.80 करोड़ रुपये की लागत से एयरपोर्ट को विकसित करने की योजना है। वर्तमान में यहां रनवे करीब 1200 मीटर लंबा है, जिसे बढ़ाकर 3000 मीटर किया जाएगा।

    इससे बड़े विमानों के संचालन की संभावना बढ़ेगी। एयरपोर्ट का रणनीतिक महत्व देखते हुए यहां लड़ाकू विमानों के संचालन की क्षमता विकसित करने की भी योजना बताई गई है।

    सहरसा में बनेगा नया टर्मिनल
    सहरसा एयरपोर्ट को करीब 35.14 करोड़ रुपये की लागत से विकसित करने की योजना है। यहां नया टर्मिनल भवन बनाया जाएगा।

    वर्तमान हवाई पट्टी करीब एक किलोमीटर लंबी है और यहां छोटे विमानों के संचालन की योजना है। एयरपोर्ट के विकसित होने से कोसी क्षेत्र के लोगों के लिए दिल्ली, कोलकाता और मुंबई जैसे महानगरों की यात्रा आसान होने की उम्मीद है।

    मुंगेर के सफियाबाद में बनेगा ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट
    मुंगेर के सफियाबाद के पास ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट विकसित करने की योजना है। इसके लिए 1720.11 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। भूमि अधिग्रहण पर करीब 773.46 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

    वर्तमान में यहां हवाई पट्टी करीब 758 मीटर लंबी है। इसे 70 मीटर चौड़ा और 1200 मीटर लंबा विकसित किया जाएगा। शुरुआत में यहां 19 सीटर विमानों के संचालन की योजना है।

    वाल्मीकिनगर में एयरपोर्ट से पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
    नेपाल सीमा के पास वाल्मीकिनगर में करीब 36.64 करोड़ रुपये की लागत से एयरपोर्ट विकसित किया जाएगा। इसके शुरू होने से वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व आने वाले पर्यटकों को बड़ी सुविधा मिलने की उम्मीद है। इससे पश्चिमी चंपारण में पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है।

    मधुबनी में बनेगा हेलीपोर्ट
    मधुबनी में एयरपोर्ट के बजाय हेलीपोर्ट विकसित किया जाएगा। इससे क्षेत्र में हवाई संपर्क का एक नया विकल्प उपलब्ध होगा।

    पताही एयरपोर्ट से उड़ेंगे 19 सीटर विमान
    मुजफ्फरपुर के पताही स्थित पुराने एयरपोर्ट को भी विकसित किया जाएगा। पहले चरण में करीब 23.47 करोड़ रुपये की लागत से टर्मिनल भवन, एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) और फायर स्टेशन का निर्माण कराया जाएगा।

    पताही एयरपोर्ट करीब 101 एकड़ में फैला है और यहां रनवे की लंबाई करीब 1050 मीटर है। शुरुआत में 19 सीटर विमानों के संचालन की योजना है।
    दूसरे चरण में गोपालगंज, किशनगंज और सोनपुर पर फोकस

    दूसरे चरण में गोपालगंज के सबेया एयरपोर्ट को विकसित करने की योजना है। रक्षा मंत्रालय के अधीन इस एयरपोर्ट का विकास क‍िया जाएगा।  

    किशनगंज के खगड़ा स्थित एयरपोर्ट को भी रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सिलीगुड़ी कॉरिडोर के नजदीक होने के कारण इसका महत्व और बढ़ जाता है।

    वर्तमान में इसकी हवाई पट्टी करीब 900 मीटर लंबी है, जिसे बढ़ाकर 2500 मीटर करने की योजना है। यहां से लड़ाकू विमानों का परिचालन भी जरूरत पड़ने पर होगा।  

    देश का तीसरा सबसे बड़ा एयरपोर्ट
    सारण जिले के सोनपुर में भी बड़ा एयरपोर्ट विकसित करने की योजना है। पटना से करीब 25 किलोमीटर दूर प्रस्तावित यह एयरपोर्ट लगभग 4228 एकड़ में विकसित किया जाएगा।

    इसकी रनवे लंबाई करीब 4.2 किलोमीटर प्रस्तावित है। योजना के अनुसार, यहां बड़े विमानों के संचालन की क्षमता विकसित की जाएगी। आकार में यह देश का तीसरा सबसे बड़ा एयरपोर्ट होगा।

    छोटे शहरों को मिलेगी हवाई कनेक्टिविटी
    इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद बिहार में हवाई कनेक्टिविटी का दायरा पटना, गया, दरभंगा और पूर्णिया से आगे बढ़ेगा।

    कोसी, सीमांचल, चंपारण, मगध और सारण जैसे क्षेत्रों के यात्रियों को अपने नजदीकी शहरों से हवाई यात्रा का विकल्प मिल सकेगा।

    इससे न केवल महानगरों तक पहुंच आसान होगी, बल्कि पर्यटन, कारोबार और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

     

  • बिहार में गंगा-गंडक का कहर! पटना से भागलपुर तक बाढ़ का खतरा, बगहा में कटाव से दहशत

    बिहार में गंगा-गंडक का कहर! पटना से भागलपुर तक बाढ़ का खतरा, बगहा में कटाव से दहशत

     पटना
    बिहार में गंगा नदी उफान पर है। पटना से भागलपुर तक गंगा में उफान से बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। दियारा इलाके में पानी बढ़ जाने से लोग बाहर निकल रहे हैं तो गांधी घाट समेत कई घाटों को खतरनाक घोषित कर दिया गया है। उधर चंपारण में गंडक नदी तबाही का सबब बनती दिख रही है। बगहा शहर पर कटाव का खतरा मंडराने लगा है। सुल्तानगंज में गंगा नदी लाल निशान से काफी ऊपर बह रही है जिससे श्रावणी मेला पर संकट उत्पन्न हो गया है। बक्सर में रामरेखा घाट पर जलस्तर खतरनाक हो जाने से स्नान और जलबोझी करने वालों पर निरगानी रखी जा रही है।

    राजधानी पटना में दियारा के निचले इलाके में पानी घुस गया है। जलस्तर लगातार बढ़ने से मनेर, दानापुर और बख्तियारपुर प्रखंड के दियारा क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। उधर, जलस्तर बढ़ने से शेरपुर-दिघवारा छहलेन पुल का निर्माण कार्य बंद करना पड़ा। एक दर्जन पिलर पानी में डूब गए हैं। कर्मियों ने मशीनें और निर्माण सामग्री हटा ली हैं।

    मनेर के हल्दीछपरा से छितनवां तक जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। गंगा के दक्षिणी इलाके में हजारों एकड़ खेतों में पानी फैल चुका है। हालांकि उत्तरी दियारा को मनेर से जोड़ने वाली मुख्य सड़कों पर पानी नहीं चढ़ा है।गंगा किनारे पिकनिक स्पॉट न बनाने और बच्चों को पानी में खेलने रोकने की अपील की गई है।

    दानापुर में पुरानी पानापुर के पास कटाव शुरू
    दानापुर दियारा के निचले इलाके से गंगा का पानी प्रवेश करने लगा है। पांच पंचायत पुरानी पानापुर, कासिमचक, हेतनपुर, मानस और नवदियरी में सोता के जरिए गंगा का पानी दियारा में आने लगा है। इससे जहाज और नाव पकड़ने के लिए घाट पर आने-जाने में परेशानी होने लगी है। देवनिया नाला के गंगा खतरे के निशान से एक मीटर नीचे बह रही है।

    पुनपुन: जलस्तर खतरे के निशान के करीब
    झारखंड में लगातार बारिश से पुनपुन समेत क्षेत्र की अन्य नदियों पर दिखने लगा है। पुनपुन का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। पुनपुन अब खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है। वहीं, जहानाबाद से सटे धनरुआ क्षेत्र में कररुआ नदी के जलस्तर में भी लगातार वृद्धि हो रही है।

    सुल्तानगंज में गंगा लाल निशान से ऊपर
    भागलपुर में गंगा नदी का जलस्तर पिछले कुछ दिनों से लगातार बढ़ रहा है। इससे पूरे क्षेत्र में बाढ़ की गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई है। यहां गंगा लाल निशान से 44 सेमी ऊपर यानी 34.94 मीटर के गंभीर स्तर पर बह रही है। इसके चलते सुल्तानगंज के विश्वप्रसिद्ध अजगैवीनाथ धाम घाट की सीढ़ियां पूरी तरह डूब चुकी हैं। गंगा के उफान के कारण जिले का पूरा दियारा क्षेत्र जलमग्न हो चुका है। भागलपुर शहरी क्षेत्र के निचले हिस्से मानिक सरकार, आदमपुर, बूढ़ानाथ, कोयला घाट में बाढ़ का पानी तेजी से प्रवेश कर रहा है, जिससे लोग ऊंचे स्थानों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। कहलगांव, राघोपुर और इस्माईलपुर-बिंदटोली में भी स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है।

    मक्के और सब्जियों की फसलें डूबकर नष्ट
    जलस्तर की बढ़ोतरी ने स्थानीय किसानों और पशुपालकों की कमर तोड़ दी है। दियारा में सैकड़ों एकड़ में लगी मक्के और मौसमी सब्जियों की फसलें पूरी तरह पानी में डूबकर नष्ट हो गई हैं। पशुओं के लिए हरे चारे की गंभीर किल्लत हो गई है। चारे के इस संकट से पशुपालक बेहद परेशान हैं।

    कहलगांव में पशुपालक अपने मवेशियों को लेकर सुरक्षित स्थान पर जाने लगे
    गंगा के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए बाढ़ प्रभावित होने वाले गांवों, गंगा तटवर्ती इलाकों और कटाव के मुहाने पर बसे गांवों में भय का माहौल है। पशुपालक अपने मवेशियों को लेकर सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर शरण लेने लगे हैं। तोफिल गांव के मुखिया प्रतिनिधि संजय मंडल ने बताया कि बहियार में हवा चलने पर धीमी गति से कटाव हो रहा है।

    बगहा शहर के अस्तित्व को खतरा
    गंडक नदी का कटाव अब बगहा शहर के लिए भी खतरा बनता जा रहा है। शहर से सटे मंगलपुर के पास नदी की तेज धारा से कटावरोधी कार्य के छह बेडवार ध्वस्त हो गए हैं। यह बेडवार दो करोड़ रुपये की लागत से छह माह पहले बनाए गए गए थे। गंडक के कटाव का रुख देख नदी किनारे के बाशिंदे दहशत में हैं। ग्रामीण रातभर जागकर अपने घर और मोहल्ले की निगरानी कर रहे हैं।

    बारिश का एक सीजन भी नहीं झेल पाया कटावरोधी कार्य
    ग्रामीणों का कहना है कि कटावरोधी कार्य पर दो करोड़ रुपये खर्च किए गए है। लेकिन पहली बारिश में ही चार बेडवार ध्वस्त हो गए। दो बेडवार इधर एक-दो दिनों में धंस गये हैं।आरोप है कि पूर्व में भी कटावरोधी कार्य में बड़े बोल्डर की जगह छोटे-छोटे पत्थरों के टुकड़े लगाए गए थे। इससे नदी की तेज धारा के सामने यह बेडवार तिनके की तरह ध्वस्त हो गए हैं।

    रातभर बच्चों के साथ जाग रहीं महिलाएं
    गंडक के बढ़ते कटाव ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। महिलाएं छोटे बच्चों के साथ रातभर जाग रही हैं। ग्रामीणों को डर है कि अगर कटाव जारी रहा तो नदी उनके घरों और गांव को धारा में समेट सकती है। जेई शंभू सुमन ने बताया कि दिन-रात के शिफ्ट में काम किया जा रहा है। इससे नदी का रुख थोड़ा नरम पड़ा है।

    चिऊरही में स्कूल व पैक्स गोदाम काट चुकी है नदी
    बगहा के मधुबनी प्रखंड की चिऊरही पंचायत में भी गंडक नदी कटाव की चपेट में स्कूल और पैक्स गोदाम समेत कई संरचनाएं आ चुकी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते मजबूत कटावरोधी कार्य नहीं हुआ तो मंगलपुर समेत आसपास के इलाकों पर भी खतरा हो सकता है।

    बक्सर में खतरे के निशान के करीब पहुंची गंगा
    बक्सर में गंगा अब धीरे-धीरे खतरें के निशान की ओर बढ़ने लगी है। रामरेखा घाट सहित शहर के अन्य घाटों पर सुरक्षा घेरा तैयार कर दिया गया है ताकि कोई भी व्यक्ति निर्धारित सीमा के आगे नहीं बढ़ सके। केंद्रीय जल आयोग से प्राप्त जानकारी के अनुसार गंगा का जलस्तर 59.14 पहुंच गया है। गंगा का चेतावनी निशान 59.32 है जबकि खतरे का निशान 60.32 है। रामरेखा घाट पर पूजा-पाठ करने वालों पर पूरी निगरानी रखते हुए उन्हें सचेत किया जा रहा है। वहीं विवाह मंडप के निचला भाग पूरी तरह से डूब गया है। ऐसे में मांगलिक कार्य नहीं हो रहे हैं। सुरक्षा घेरा के पास लोगों को अलर्ट करने के लिये लाल झंडा लगाया जा रहा है

  • झारखंड में 18 प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों की बढ़ी उम्मीद, 24 अगस्त को हाई कोर्ट में सुनवाई

    झारखंड में 18 प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों की बढ़ी उम्मीद, 24 अगस्त को हाई कोर्ट में सुनवाई

    रांची
    झारखंड हाई कोर्ट द्वारा चार प्रतियोगिता परीक्षाओं के माध्यम से हुई नियुक्ति को रद करने के राज्य सरकार के आदेश पर रोक लगाए जाने के बाद अब उन अभ्यर्थियों की निगाहें कोर्ट के निर्णय पर लगी हैं, जो रद अन्य 18 प्रतियाेगिता परीक्षाओं से जुड़े हैं।

    ये सभी परीक्षाएं अलग-अलग स्तर पर लंबित हैं तथा इनमें अभी तक नियुक्ति नहीं हुई थी। चूंकि इन परीक्षाओं की प्रक्रिया लगभग दो वर्षों से चल रही थी, इसलिए संबंधित अभ्यर्थी चाहते हैं कि नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़े।

    हालांकि सीआईडी जांच में इन परीक्षाओं में या तो गड़बड़ियां सामने आ चुकी हैं या फिर इन परीक्षाओं से टीडीपीएल एजेंसी संबद्ध रही है। राज्य सरकार ने इन आधारों पर ही इन परीक्षाओं को रद किया है। फिलहाल इस मामले में हाई कोर्ट में 24 अगस्त को सुनवाई होनी है।हाई कोर्ट में वन क्षेत्र पदाधिकारी तथा सहायक वन संरक्षक नियुक्ति परीक्षा रद करने को चुनौती दी गई है, लेकिन कोर्ट में अन्य प्रतियोगिता परीक्षाओं से संबंधित याचिकाओं को भी इन याचिकाओं से संबद्ध करने को कहा है। राज्य सरकार ने झारखंड लोक सेवा आयोग की जिन 18 प्रतियोगिता परीक्षाओं को बीच में ही रद किया है, उनमें 1,227 पदों पर नियुक्ति होनी है।

    इन परीक्षाओं में सहायक निदेशक, सीनियर साइंटिफिक आफिसर बैकलाग नियुक्ति, सहायक निदेशक, सीनियर साइंटिफिक आफिसर नियमित नियुक्ति, इंजीनियरिंग कालेजाें में सहायक प्राध्यापक बैकलाग नियुक्ति, मेडिकल कालेजों में स्पेशियलिटी सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति के लिए अभी आवेदन ही मंगाए गए थे।

    वहीं, 14वीं सिविल सेवा संयुक्त परीक्षा, संयुक्त सिविल सेवा बैकलाग परीक्षा-2023 व 2025, सिविल जज जूनियर डिविजन नियुक्ति,सहायक वन संरक्षक नियुक्ति, वन क्षेत्र पदाधिकारी नियुक्ति, सहायक लोक अभियोजक नियमित नियुक्ति तथा सहायक लोक अभियोजक बैकलाग नियुक्ति की मुख्य परीक्षा होनी थी।

  • BPSC-BSSC छात्र आंदोलन में नया मोड़, रौशन आनंद ने कहा- एकजुट नहीं हुए तो खुद संभालूंगा कमान

    BPSC-BSSC छात्र आंदोलन में नया मोड़, रौशन आनंद ने कहा- एकजुट नहीं हुए तो खुद संभालूंगा कमान

    पटना
    BPSC, BSSC और लंबित भर्ती परीक्षाओं को लेकर गर्दनीबाग में चल रहे छात्र आंदोलन में शनिवार को नया मोड़ देखने को मिला। रौशन आनंद अनशन पर बैठे छात्रों से मिलने पहुंचे और आंदोलन को मजबूत करने के लिए छात्र नेताओं से एक मंच पर आने की अपील की। हाथ में एक फाइल दिखाते हुए दावा किया कि आयोग की महत्वपूर्ण जानकारी मेरे पास है अब खुलेगा काला चिट्ठा।

    एकजुटता नहीं तो खुद आंदोलन की कमान संभालने का ऐलान
    रौशन आनंद ने कहा कि छात्रों की मांग तभी मजबूती से उठेगी, जब सभी गुट एक साथ आएंगे। उन्होंने साफ संकेत दिया कि अगर छात्र नेता एकजुट नहीं हुए तो वह खुद छात्रों के मुद्दों को लेकर आंदोलन आगे बढ़ाएंगे।

    हाथ में फाइल लेकर आयोग पर बड़ा दावा
    धरना स्थल पर रौशन आनंद हाथ में एक फाइल लेकर पहुंचे। उन्होंने दावा किया कि इसमें आयोग से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी है। हालांकि उन्होंने कहा कि छात्रों के एक मंच पर आने तक वह इस फाइल को सार्वजनिक नहीं करेंगे।

    BPSC और BSSC घेराव का दिया संकेत
    रौशन आनंद ने छात्रों के मुद्दों को लेकर आगे BPSC और BSSC के घेराव की बात कही। उनके इस ऐलान के बाद आंदोलन के अगले चरण को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

    दिलीप के साथ मंच साझा करने पर नहीं बनी बात
    रौशन आनंद ने छात्र नेता दिलीप से भी मुलाकात की। उनके मुताबिक उन्होंने दिलीप से एक मंच पर आने की अपील की, लेकिन सहमति नहीं बन सकी। हालांकि दिलीप की ओर से इसके पीछे की वजह का कोई स्पष्ट आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

    TRE-4 से लेकर BSSC तक कई मांगें
    गर्दनीबाग आंदोलन में TRE-4 का नोटिफिकेशन, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, एकल परीक्षा प्रणाली, नकारात्मक अंकन खत्म करने और BSSC समेत अन्य भर्तियों से जुड़े मुद्दे उठाए जा रहे हैं। छात्रों की मांगों को लेकर आंदोलन अगस्त के मध्य से लगातार चर्चा में है।

    अब आंदोलन की दिशा पर सबकी नजर
    रौशन आनंद की एंट्री और BPSC-BSSC घेराव के ऐलान ने छात्र आंदोलन में नेतृत्व और एकजुटता का सवाल फिर सामने ला दिया है। अब देखना होगा कि अलग-अलग छात्र समूह साझा मंच पर आते हैं या आंदोलन आगे भी अलग-अलग नेतृत्व में जारी रहता है।

     

  • चीनी की जमाखोरी पर सरकार सख्त, 400 टन से ज्यादा स्टॉक रखने पर होगी कार्रवाई

    चीनी की जमाखोरी पर सरकार सख्त, 400 टन से ज्यादा स्टॉक रखने पर होगी कार्रवाई

    चंडीगढ़
    चीनी की लगातार बढ़ती कीमतों के बीच जमाखोरी रोकने के लिए प्रदेश सरकार सख्त हो गई है। अधिकतम स्टॉक की सीमा तय कर दी गई है। किसी भी व्यापारी को किसी भी स्थान या समय पर अधिकतम 4000 क्विंटल यानी 400 टन से अधिक चीनी का स्टॉक रखने की अनुमति नहीं होगी।

    नए नियम के तहत कोई भी व्यापारी चीनी के स्टॉक को प्राप्त होने की तारीख से 30 दिनों से अधिक समय तक नहीं रख पाएगा। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने राज्य में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और जमाखोरी रोकने के लिए कड़े निर्देश जारी करते हुए चीनी व्यापारियों के लिए नई स्टॉक सीमाएं तय की गई हैं।

    व्यापारियों के लिए खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर पंजीकरण करना और अपने वर्तमान स्टॉक की घोषणा करना तुरंत प्रभाव से अनिवार्य कर दिया गया है। इसके साथ ही व्यापारियों को हर शुक्रवार पोर्टल पर नियमित रूप से अपने स्टॉक का विवरण अद्यतन (अपडेट) करना होगा।

    यह विशेष आदेश एक अगस्त से 30 नवंबर तक लागू रहेगा। विभाग ने चेतावनी दी है कि पोर्टल पर पंजीकरण न कराने, विलंब करने या गलत और अधूरी जानकारी देने वाले दोषियों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    सरकार ने राज्य में चीनी की कीमतों और आपूर्ति की निरंतर निगरानी का आश्वासन देते हुए आम जनता से घबराकर अनावश्यक खरीदारी या जमाखोरी न करने की अपील की है। यदि किसी उपभोक्ता को जमाखोरी, निर्धारित सीमा से अधिक स्टॉक रखने या अनुचित दाम वसूलने की जानकारी मिलती है, तो वे इसकी सूचना संबंधित जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक कार्यालय में दे सकते हैं, ताकि त्वरित जांच कर उचित कार्रवाई की जा सके।

  • चंडीगढ़ के बच्चों को कबाड़ के मॉडल से कराई अंतरिक्ष यात्रा, शिक्षक होंगे सम्मानित

    चंडीगढ़ के बच्चों को कबाड़ के मॉडल से कराई अंतरिक्ष यात्रा, शिक्षक होंगे सम्मानित

    चंडीगढ़.

    कबाड़ से विज्ञान की दुनिया का नया स्वरूप तैयार करने वाले रवि जायसवाल को राष्ट्रीय शिक्षक अवाॅर्ड 2026 से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान 5 सितंबर को दिल्ली में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में उन्हें प्रदान किया जाएगा।

    रवि मलोया कॉलोनी स्थित गवर्नमेंट मॉडल हाई स्कूल (जीएमएचएस) में टीजीटी के पद पर कार्यरत हैं। वे साइंस पढ़ाते हैं। उन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद विज्ञान शिक्षा को प्रयोगात्मक, कम लागत और रोचक बनाने में उल्लेखनीय कार्य किया है। पिछले 16 वर्षों से स्कूल में सेवाएं दे रहे रवि के नवाचारों को शहर स्तर पर पहचान मिली है और अन्य सरकारी स्कूलों में भी अपनाया गया है। रवि ने स्कूल में एक अनोखी लैब बनाई है, जिसमें उन्होंने स्क्रैप से सीवी रमन डोम थिएटर तैयार किया है।

    यह डोम बेकार टिन शीट, थर्माकोल और पेपर स्क्रैप से निर्मित है। इसमें इनर कर्व्ड प्रोजेक्शन सिस्टम के माध्यम से 360 डिग्री का इमर्सिव अनुभव प्रदान किया जाता है, जिसमें 25 से 30 विद्यार्थी एक साथ अंतरिक्ष और जैविक यात्राओं का अनुभव कर सकते हैं। इसकी सफलता के बाद समग्र शिक्षा के तहत छह अन्य सरकारी स्कूलों में भी इस मॉडल का विस्तार किया गया है। इसके अलावा, रवि ने विद्यार्थियों के लिए विभिन्न गणितीय पार्क भी तैयार किए हैं।

  • झारखंड में राशन कार्डधारकों पर बड़ी कार्रवाई, 1.63 लाख नाम हटे; जानें किन लोगों का कटेगा नाम

    झारखंड में राशन कार्डधारकों पर बड़ी कार्रवाई, 1.63 लाख नाम हटे; जानें किन लोगों का कटेगा नाम

     रांची
     झारखंड में राशन कार्डधारकों के लिए एक बड़ी खबर है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत झारखंड में निबंधित 6,29, 973 लाभुकों में से अपात्र लाभुकों को हटाने के क्रम में राज्य सरकार निर्धारित डेट लाइन 26 अगस्त तक लगभग 26 प्रतिशत उपलब्धि हासिल कर चुकी है।

    किन लोगों का कटेगा नाम?
    यह आंकड़ा 1.63 लाख लाभुकों के बराबर है। इस सूची में उन लोगों के नाम भी शामिल हैं, जो किसी ना किसी कारण से पिछले छह महीने से राशन का उठाव नहीं कर रहे थे। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से चिह्नित कर जो नाम दिए गए थे उनमें से 26 प्रतिशत लोगों के लाम कट रहे हैं। इसी कड़ी में यह निर्णय लिया गया है।

    राज्य सरकार पहले ही अपात्र लाभुकों की पहचान कर उन्हें सूची से हटाने के लिए नोटिस दे चुकी थी। इनमें उन लोगों के नाम भी शामिल हैं जो विभिन्न प्रकार की सरकारी नौकरियों में थे। जिनका पीएफ कट रहा था और जो इसके बावजूद केंद्र की योजना के तहत मुफ्त का राशन भी प्राप्त कर रहे थे। अब केंद्र सरकार ने एनएफएसए – 2 लागू की है जिसके तहत ऐसे लाभुकों के नाम स्वत: कट जाएंगे।
    इसके अलावा पोस्टल सेवा से भी 808 लोगों के नाम हैं। नई व्यवस्था में उन लोगों के नाम को भी शामिल किया गया है जिन्होंने पिछले एक वर्ष में 25 लाख रुपये से अधिक का जीएसटी फाइल किया है। ऐसे लोगों की आर्थिक स्थिति बेहतर मानकर केंद्र सरकार इन्हें भी सूची से बाहर करने की तैयारी कर चुकी है।

    सरकार ने इसके लिए पात्रता ट्रैकिंग का फॉर्मूला तैयार किया जिसके तहत मासिक सब्सिडी वाले खाद्यान्न कोटा और हाल के लेनदेन इतिहास की जांच की जाती है। वन नेशन वन कार्ड को भी केंद्र सरकार प्राेत्साहित कर रही है।

    इसके तहत भारत में कहीं भी सुविधाजनक अंतरराज्यीय राशन संग्रह के लिए आस-पास की उचित मूल्य की दुकानों से खाद्यान्न का उठाव कियाा जा सकता है। ऐसे में सरकार चाहती है कि एक भी अपात्र लाभुक राशन कार्ड का गलत इस्तेमाल नहीं करें।

     

  • बिहार के नगर निकायों में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 3 साल से एक ही डेस्क पर जमे कर्मियों का होगा तबादला

    बिहार के नगर निकायों में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 3 साल से एक ही डेस्क पर जमे कर्मियों का होगा तबादला

    भागलपुर
     बिहार में नगर निकायों में लंबे समय से एक ही डेस्क या प्रभार पर कार्यरत कर्मियों का अब स्थानांतरण किया जाएगा। नगर विकास एवं आवास विभाग ने सभी नगर निगमों के नगर आयुक्त, कार्यपालक पदाधिकारियों तथा नगर परिषद व नगर पंचायत के पदाधिकारियों को इस संबंध में निर्देश जारी किया है।

    विभाग के विशेष सचिव शाहिद परवेज ने बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 की धारा 67 में प्रदत्त शक्तियों का हवाला देते हुए यह आदेश जारी किया है।

    पारदर्शिता के लिए रोटेशन जरूरी
    विभाग की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि नगर निकाय कार्यालयों में लंबे समय से एक ही प्रकार का कार्य करने वाले कर्मियों के दायित्वों में निष्पक्षता, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व सुनिश्चित करने के लिए उनके कार्यात्मक दायित्वों में आवर्तन (रोटेशन) आवश्यक है।

    पत्र में स्पष्ट किया गया है कि एक ही डेस्क या प्रभार पर लंबे समय तक कार्यरत रहना प्रशासनिक दृष्टिकोण से उचित नहीं है और इससे कार्यप्रणाली की निष्पक्षता प्रभावित होने की आशंका रहती है।

    निर्देश के अनुसार, सभी नगर निकायों में तीन वर्ष से अधिक समय से एक ही डेस्क/प्रभार पर कार्यरत कर्मियों की पहचान कर उनका आवर्तन किया जाएगा।

    इसके तहत संबंधित कर्मियों को दूसरे कार्य या डेस्क की जिम्मेदारी दी जाएगी, ताकि कार्यालयीन कार्यों में पारदर्शिता और सुशासन सुनिश्चित हो सके।

    एक हफ्ते में रिपोर्ट पेश करने के निर्देश
    विभाग ने सभी नगर निकायों को इस आदेश का अनुपालन प्राथमिकता के आधार पर करने को कहा है। साथ ही, अपने-अपने निकाय में तीन वर्ष से अधिक समय से एक ही डेस्क या प्रभार पर कार्यरत कर्मियों का आवर्तन करते हुए की गई कार्रवाई की रिपोर्ट एक सप्ताह के अंदर विभाग को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।

    विभाग के इस आदेश के बाद लंबे समय से एक ही जिम्मेदारी संभाल रहे नगर निकाय कर्मियों के कार्यक्षेत्र में बदलाव होना तय माना जा रहा है। इससे कार्यालयों में कार्यों के बेहतर वितरण और प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है।

  • राजस्थान में जर्जर स्कूल पर सरकार का एक्शन, 12.50 लाख से होगा रामपुरा-कुंवरपुरा स्कूल का कायाकल्प

    राजस्थान में जर्जर स्कूल पर सरकार का एक्शन, 12.50 लाख से होगा रामपुरा-कुंवरपुरा स्कूल का कायाकल्प

    जयपुर
    बगरू विधानसभा क्षेत्र के रामपुरा-कुंवरपुरा गांव में सीजेपी और ग्रामीणों के बीच मारपीट के बाद अब राजस्थान सरकार ने एक्शन लिया है। शिक्षा विभाग के आदेश के बाद जयपुर जिला शिक्षाधिकारी गिर्राज पारीक स्कूल का निरीक्षण करने के लिए पहुंचे। इस दौरान मीडियाकर्मियों ने कहा कि तबादले में स्कूल चल रहा है, जिस पर उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि स्कूल भवन जर्जर हालत में है। बच्चों की सुरक्षा के लिए बच्चों को दूसरी जगह शिफ्ट किया गया है। बता दें कि रामपुरा-कंवरपुरा गांव स्थित राजकीय प्राथमिक स्कूल की बदहाल स्थिति का जायजा लेने के लिए शुक्रवार सुबह कॉकरोच जनता पार्टी की टीम पहुंची थी।

    इस दौरान ग्रामीणों ने जमकर हंगामा किया था। ग्रामीणों ने सीजेपी टीम को धक्का-मुक्की कर गांव से बाहर निकाल दिया था और स्कूल के बाहर ही ग्रामीण धरने पर बैठ गए थे। ग्रामीणों ने मुख्य रास्ते पर ट्रैक्टर-ट्रॉली खड़ी कर घेराबंदी की और आने-जाने वाली गाड़ियों की जांच की। इसके बाद करीब दस बजे आशुतोष रांका के साथ टीम वापस स्कूल पहुंची तो ग्रामीण भड़क गए और उन्हें पीटकर खदेड़ दिया था। इस मामले में दोनों ही पक्षों की ओर से पुलिस थाने में मामला दर्ज करवाया गया है।

    इसी बीच शिक्षा विभाग के आदेश के बाद जयपुर जिला शिक्षाधिकारी गिर्राज पारीक स्कूल का जायजा लेने के लिए रामपुरा-कुंवरपुरा गांव पहुंचे। जहां पर उन्होंने जर्जर स्कूल भवन का बारीकी से निरीक्षण किया। साथ ही स्कूल भवन की जल्द मरम्मत के निर्देश दिए। जहां पर बच्चों की पढ़ाई हो रही है, वहां जाकर भी उन्होंने शिक्षकों से मुलाकात की। मीडिया से चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि सरकार ने स्कूल भवन की मरम्मत के लिए 12.50 लाख रुपए स्वीकृति दी और जल्द ही स्कूल का निर्माण कार्य शुरू होगा। उन्होंने कहा कि स्कूल का काम करीब छह महीने में पूरा कर लिया जाएगा।

    भवन जर्जर… अभी कहां चल रहा है स्कूल?
    रामपुरा गांव के राजकीय प्राथमिक स्कूल की बिल्डिंग पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। ऐसे में स्कूल को बंद कर दिया गया है। छत पर लोहे के एंगल लगाए गए हैं। स्कूल को 50 मीटर दूर एक बाड़े में शिफ्ट कर रखा है, जहां पर बच्चे टीनशेड के नीचे पढ़ाई करते है। यहां पर पास में पशुओं का चारा भरा पड़ा है और दीवारों की ईंटें गिर हुई है। दो कमरों में 20 से 30 बच्चों को दो शिक्षक पढ़ाते है। बता दें कि 1999 में बना भवन लंबे समय से मरम्मत के अभाव में जर्जर हो चुका है। सरकार ने स्कूल की मरम्मत के लिए करीब 12.50 लाख रुपए स्वीकृत किए हैं, लेकिन निर्माण कार्य अभी शुरू नहीं हुआ है।

  • सीएम मान और पंजाब गवर्नर की आज मुलाकात, हवारा की पैरोल पर हो सकती है अहम चर्चा

    सीएम मान और पंजाब गवर्नर की आज मुलाकात, हवारा की पैरोल पर हो सकती है अहम चर्चा

    चंडीगढ़.

    पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान शनिवार दोपहर करीब ढाई बजे पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया से मुलाकात करेंगे। यह मुलाकात चंडीगढ़ स्थित पंजाब राजभवन में होगी। पिछले करीब 15 दिनों में मुख्यमंत्री और राज्यपाल की यह दूसरी बैठक है। ऐसे में इस मुलाकात को राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री बैठक के दौरान पंजाब से जुड़े कई अहम मुद्दे राज्यपाल के सामने रख सकते हैं। इनमें जगतार सिंह हवारा की पैरोल से जुड़ा मामला भी शामिल हो सकता है। मुख्यमंत्री इस मामले में अपनी सरकार का पक्ष राज्यपाल के सामने रख सकते हैं। हालांकि, बैठक में किन-किन मुद्दों पर अंतिम रूप से चर्चा होगी, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है। जगतार सिंह हवारा की पैरोल का मुद्दा पिछले कुछ समय से चर्चा में है। ऐसे में मुख्यमंत्री और राज्यपाल की होने वाली मुलाकात में इस विषय पर बातचीत की संभावना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार की ओर से इस मामले से जुड़े तथ्यों और अपने पक्ष की जानकारी राज्यपाल को दी जा सकती है।

    राजनीतिक और प्रशासनिक हालात पर भी चर्चा संभव
    मुख्यमंत्री और राज्यपाल की बैठक ऐसे समय हो रही है, जब पंजाब में विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को लेकर माहौल सक्रिय है। हाल ही में किसान मोर्चा की ओर से पंजाब बंद का आह्वान किया गया था। शुक्रवार को बंद के दौरान प्रदेश के कई हिस्सों में इसका असर देखने को मिला था। ऐसे में राज्य के मौजूदा हालात भी बैठक में चर्चा का विषय बन सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री राज्य में कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक मामलों और मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों से जुड़े विषयों पर भी राज्यपाल से बातचीत कर सकते हैं। इसके अलावा सरकार से संबंधित लंबित मामलों और प्रदेश के हित से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी विचार-विमर्श होने की संभावना है।

    राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज
    पिछले करीब 15 दिनों में मुख्यमंत्री भगवंत मान और राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया की यह दूसरी मुलाकात होगी। लगातार दूसरी बैठक होने के कारण राजनीतिक हलकों में भी इस मुलाकात को लेकर चर्चा है। हालांकि, बैठक के बाद ही स्पष्ट होगा कि दोनों के बीच किन मुद्दों पर विस्तार से बातचीत हुई और किन मामलों को लेकर आगे कोई निर्णय लिया जाता है।