Category: news

  • सचिन पायलट की पंजाब में सियासी हुंकार, बोले- ‘कॉकरोचों को राजस्थान जैसी हिम्मत दिखाओ’

    सचिन पायलट की पंजाब में सियासी हुंकार, बोले- ‘कॉकरोचों को राजस्थान जैसी हिम्मत दिखाओ’

    लुधियाना
    राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री और हाल ही में पंजाब कांग्रेस के प्रभारी बनाए गए सचिन पायलट ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को चुनौती दी। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी (AAP) शासित पंजाब में भी स्कूलों का ऑडिट उसी तरह किया जाना चाहिए, जैसे दूसरे राज्यों में किया जा रहा है।

    पायलट की यह टिप्पणी पंजाब के लुधियाना में CJP की ओर से तीन सरकारी स्कूलों के किए गए ऑडिट के बाद आई है। CJP के सह-संयोजक सौरव दास के नेतृत्व में टीम ने एक सरकारी ‘स्कूल ऑफ एक्सीलेंस’, एक सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल और एक सरकारी प्राथमिक स्कूल का दौरा किया था।

    लुधियाना के स्कूलों में क्या मिला?
    सौरव दास ने गुरुवार को एक वीडियो पोस्ट किया था। इसके मुताबिक, ‘स्कूल ऑफ एक्सीलेंस’ में बेहतर बुनियादी सुविधाएं मौजूद थीं। वहां स्विमिंग पूल, बैडमिंटन कोर्ट, दिव्यांगों के लिए रैंप और AI लैब जैसी सुविधाएं थीं।

    वहीं, बाकी दो स्कूलों में कई समस्याएं सामने आईं। दास ने यह भी कहा कि तीनों स्कूलों में शौचालयों की स्थिति को और बेहतर किया जा सकता है। इसके बाद सौरव दास और उनकी टीम ने पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस से भी मुलाकात की। दास के मुताबिक, मंत्री ने शिकायतों पर कार्रवाई का भरोसा दिया।

    AAP के संस्थापक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी दास को कमियां सामने लाने के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि इन्हें तुरंत दूर किया जाएगा।

    सोशल मीडिया पर उठे सवाल
    हालांकि, CJP के इस ‘ऑडिट’ को सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने निशाने पर लिया। आरोप लगाया गया कि पंजाब में AAP की सरकार होने के कारण CJP ने यहां नरमी बरती। सोशल मीडिया यूजर्स ने इसकी तुलना उन दूसरे राज्यों के स्कूलों से की, जिन्हें CJP ने अपने ऑडिट के लिए चुना था।

    पायलट ने राजस्थान का उदाहरण दिया
    सचिन पायलट ने अपने गृह राज्य राजस्थान का उदाहरण देते हुए CJP से पंजाब में भी उसी तरह की सख्ती बरतने को कहा। राजस्थान में CJP ने 21 अगस्त को एक ऐसे स्कूल से ऑडिट शुरू करने की योजना बनाई थी, जो कथित तबेले में चल रहा था। संगठन के मुताबिक, सह-संयोजक आशुतोष रांका के नेतृत्व में पहुंची CJP की टीम पर कुछ स्थानीय लोगों ने हमला किया था। CJP का दावा था कि ये लोग BJP से जुड़े थे।

    पायलट ने क्या कहा?
    सचिन पायलट ने कहा कि पंजाब या कहीं भी स्कूलों का ऑडिट किया जाना स्वागत योग्य है। लेकिन उन्होंने CJP से एक खास अनुरोध किया। पायलट के मुताबिक, पंजाब का ऑडिट भी उसी नजर, उन्हीं सवालों और उसी साहस के साथ किया जाना चाहिए, जिस तरह दूसरे राज्यों की सरकारों का ऑडिट किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पंजाब को कोई विशेष छूट नहीं मिलनी चाहिए और AAP को भी कोई ‘दोस्ताना छूट’ नहीं मिलनी चाहिए।

    AAP नेताओं ने पायलट को दिया पलटवार
    पायलट के बयान के बाद AAP नेताओं ने उन्हें पंजाब के स्कूलों की तुलना कांग्रेस शासित हिमाचल प्रदेश के स्कूलों से करने की चुनौती दी। AAP नेता और दिल्ली के पूर्व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि पंजाब में ऐसे 1,000 बेहतरीन स्कूल दिखाए जा सकते हैं और पायलट को हिमाचल प्रदेश के ऐसे 1,000 स्कूल दिखाने चाहिए। उन्होंने पंजाब और हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों का एक साथ ऑडिट कराने की चुनौती देते हुए पूछा कि क्या पायलट इसके लिए तैयार हैं।

    AAP के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग धांडा ने भी BJP शासित राजस्थान के जर्जर स्कूलों के बचाव को लेकर पायलट पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि इस रिश्ते को क्या नाम दिया जाए। धांडा ने कहा कि अगर पायलट हिमाचल प्रदेश के 1,000 स्कूलों की सूची दें तो AAP पंजाब के 1,000 स्कूलों की सूची देगी। उन्होंने दोनों राज्यों के स्कूलों का साथ जाकर ऑडिट करने की भी बात कही।
    CJP ने राजस्थान के शिक्षा मंत्री को लेकर क्या कहा?

    इस बीच CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने एक यूजर को टैग करते हुए कहा कि उन्होंने राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर से कई बार उनके कार्यकाल में बनाए गए 10 सबसे शानदार स्कूल दिखाने का अनुरोध किया था, लेकिन उन्होंने इस पर ध्यान नहीं दिया। रांका ने कहा कि अगर किसी को ऐसे स्कूलों के बारे में जानकारी है तो वह बताए, CJP वहां जाकर उन्हें देखेगी। उन्होंने यह भी कहा कि अच्छे स्कूल भी दिखाए जाने चाहिए।

    पहले भी CJP पर उठे हैं सवाल
    CJP इससे पहले भी उन राज्यों को लेकर आलोचना का सामना कर चुकी है, जिन्हें उसने अपने ऑडिट के लिए चुना। BJP नेता रविशंकर प्रसाद ने हाल में आरोप लगाया था कि CJP पंजाब और कांग्रेस शासित राज्यों पर चुप है, जबकि BJP शासित राज्यों को निशाना बना रही है।

  • गुरुग्राम में 35 किमी लंबा नया मेट्रो कॉरिडोर, 28 स्टेशन और 90 की रफ्तार

    गुरुग्राम में 35 किमी लंबा नया मेट्रो कॉरिडोर, 28 स्टेशन और 90 की रफ्तार

    गुरुग्राम
     गुरुग्राम में प्रस्तावित सेक्टर-56 से पचगांव मेट्रो कॉरिडोर को तेज रफ्तार और बेहतर कनेक्टिविटी के साथ विकसित करने की तैयारी है।

    35.25 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर की डिजाइन स्पीड 90 किलोमीटर प्रति घंटे होगी और इसमें 28 स्टेशन प्रस्तावित हैं। कॉरिडोर को रैपिड मेट्रो, आरआरटीएस और हरियाणा आर्बिटल रेल कॉरिडोर (एचओआरसी) समेत भविष्य की रेल आधारित प्रणालियों से बेहतर तरीके से जोड़ने की योजना है।

    मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने शुक्रवार को प्रस्तावित कॉरिडोर की समीक्षा की और संशोधित डीपीआर को तय समय पर अंतिम रूप देने के निर्देश दिए। परियोजना को अगले 15 से 20 वर्षों की शहरीकरण, आबादी वृद्धि और आर्थिक गतिविधियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा।

    प्रस्तावित कॉरिडोर मध्यम क्षमता वाली मेट्रो के रूप में विकसित किया जाएगा। इसकी डिजाइन स्पीड 90 किलोमीटर प्रति घंटे रखी गई है। मेट्रो में सीबीटीसी सिग्नलिंग प्रणाली प्रस्तावित है।

    तेज डिजाइन स्पीड और आधुनिक सिग्नलिंग के साथ कॉरिडोर को गुरुग्राम में सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क मजबूत करने के लिए तैयार किया जा रहा है। इससे गुरुग्राम-मानेसर-पचगांव क्षेत्र में सार्वजनिक परिवहन को बेहतर करने और सड़क यातायात कम करने की योजना है।

    RRTS और रैपिड मेट्रो से जुड़ेगा
    प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडोर को मौजूदा और प्रस्तावित रेल आधारित परिवहन नेटवर्क के साथ एकीकृत करने की योजना है। इसमें रैपिड मेट्रो और आरआरटीएस के साथ हरियाणा आर्बिटल रेल कॉरिडोर को भी जोड़ा जाएगा।

    इसके अलावा भविष्य में विकसित होने वाली रेल आधारित प्रणालियों के साथ भी बेहतर एकीकरण को ध्यान में रखा जाएगा। इससे सेक्टर-56 से पचगांव तक तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों को व्यापक सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी है।

    35.25 किमी रूट पर 28 स्टेशन
    सेक्टर-56 से शुरू होने वाला कॉरिडोर सेक्टर-61, 65, 66, 50 और 49 से होते हुए खेड़कीदौला पहुंचेगा। इसके बाद ग्लोबल सिटी और न्यू गुरुग्राम के सेक्टर-84, 86 और 90 से होते हुए आईएमटी मानेसर और पचगांव तक जाएगा।

    पूरे 35.25 किलोमीटर लंबे रूट पर 28 स्टेशन प्रस्तावित हैं। कॉरिडोर के जरिये प्रमुख आवासीय, वाणिज्यिक और औद्योगिक क्षेत्रों को सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क से जोड़ने की योजना है।

    अगले 15 साल की जरूरतों पर जोर
    मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने परियोजना तैयार करते समय अगले 15 से 20 वर्षों की शहरीकरण प्रक्रिया, आबादी वृद्धि और आर्थिक गतिविधियों को ध्यान में रखने के निर्देश दिए हैं।

    उन्होंने कहा कि डीपीआर के स्तर पर ही सभी योजना संबंधी मुद्दों का समाधान किया जाए, ताकि आगे चलकर परियोजना में देरी न हो। संशोधित डीपीआर को तय समय पर अंतिम रूप देने के निर्देश दिए गए हैं।

    बैठक में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के एसीएस अनुराग अग्रवाल, निदेशक जे गणेशन, शहरी स्थानीय निकाय आयुक्त एवं सचिव अशोक कुमार मीणा, एचएसआईआईडीसी के एमडी विनय प्रताप सिंह, एचएसवीपी के मुख्य प्रशासक एवं एचएमआरटीसी के एमडी मुकुल कुमार समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

     

  • SIRB-2 के खाते से 22.46 लाख की अवैध निकासी, आरोपी सिपाही पर 90 दिन में चार्जशीट की तैयारी

    SIRB-2 के खाते से 22.46 लाख की अवैध निकासी, आरोपी सिपाही पर 90 दिन में चार्जशीट की तैयारी

    रांची
    खूंटी के स्पेशलाइज्ड इंडिया रिजर्व बटालियन-2 (एसआईआरबी-2) के खाते से 22.46 लाख रुपये की अवैध निकासी मामले में सीआइडी अपनी पहली चार्जशीट करने की तैयारी में है। इस मामले में एक लेखापाल सह सिपाही शुभम कुमार की गिरफ्तारी हुई थी।

    आने वाले 14 सितंबर को शुभम कुमार की गिरफ्तारी के 90 दिन पूरे हो जाएंगे। ऐसी स्थिति में सीआईडी दो दिनों के भीतर चार्जशीट कर देगी। सीआइडी ने अब तक की जांच में पाया है कि सिपाही शुभम कुमार ने वर्ष 2019 से 2021 के बीच करीब 28 बार में कुल 22.46 लाख रुपये स्थानांतरित की थी। खूंटी पुलिस ने ही उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा था

    उसका दूसरा सहयोगी सिपाही अजित कुमार अब भी फरार है। आरोपित शुभम कुमार ने अस्थाई आइडी बनाकर अवैध वेतन की राशि को विभिन्न खातों में स्थानांतरित की है। अवैध निकासी के मामले में सबसे पहले खूंटी थाने में 21 मई 2026 को कांड संख्या 72/26 में खूंटी के कोषागार पदाधिकारी शिव कुमार सिंह ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

    तब वहां के अनुसंधान पदाधिकारी खूंटी के थानेदार अशोक कुमार सिंह ने ही मुख्य आरोपित सह लेखापाल सिपाही शुभम कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। सीआइडी ने इस केस को 13 जुलाई को टेकओवर करते हुए कांड संख्या 15/2026 में केस री-रजिस्टर्ड की थी।

    इसके बाद से ही आरोपित शुभम कुमार के विरुद्ध सीआईडी ने साक्ष्य संकलित किया, ताकि उसके विरुद्ध निर्धारित अवधि के भीतर चार्जशीट दाखिल की जा सके।

    सात जिलों में अवैध वेतन निकासी मामले की जांच कर रही है CID
    सीआईडी झारखंड के सात जिलों में अवैध वेतन निकासी मामले की जांच कर रही है। सबसे पहला मामला बोकारो में आया था। इसके बाद एक-एक कर छह और जिलों में अवैध वेतन निकासी का मामला सामने आया।

    इन जिलों में हजारीबाग, पश्चिमी सिंहभूम, रांची, रामगढ़, देवघर व खूंटी में मामला सामने आया है। बोकारो में जिला कोषागार से 11 करोड़, हजारीबाग में 31 करोड़, पश्चिमी सिंहभूम में 27 लाख की अवैध निकासी का मामला उजागर हो चुका है।

    वहीं, रांची में 2.94 करोड़, रामगढ़ में 35 लाख व देवघर में 99.06 लाख रुपये की अवैध निकासी का मामला सामने आ चुका है। इन जिलों से गिरफ्तारियां भी हो चुकी हैं। सीआईडी इन सभी जिलों से जुड़े मामले की जांच कर रही है।

  • जयपुर नगर निगम चुनाव: हॉट सीटों पर टिकी नजरें, जीतने वाले को मिल सकता है मेयर का ताज

    जयपुर नगर निगम चुनाव: हॉट सीटों पर टिकी नजरें, जीतने वाले को मिल सकता है मेयर का ताज

    जयपुर
    मतदान पूरा होने के साथ ही अब शहर की निगाहें उन 'हॉट सीटों' के नतीजों पर टिक गई है, जहां से दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों भाजपा और कांग्रेस के बड़े चेहरे अपनी किस्मत आजमा रहे है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि इन हॉट सीटों पर जीत दर्ज करने वालों में से किसी एक के सिर जयपुर के नए महापौर का ताज सज सकता है।

    वार्ड 76
    भाजपा के पुनीत कर्णावट और कांग्रेस के प्रदीप जैन के बीच टक्कर है। हालांकि, यहां महज 54.85% मतदान दर्ज हुआ है। इस कम मतदान प्रतिशत ने प्रत्याशियों के गणित को उलझा दिया है।

    वार्ड 43
    सांगानेर क्षेत्र के वार्ड 43 में भाजपा के शैलेन्द्र भार्गव और कांग्रेस के आशीष शर्मा के बीच सीधा मुकाबला है। यहां मतदाताओं का रुझान सुस्त रहा और कुल 53.65% ही वोटिंग हो सकी।

    वार्ड 112 : सबसे हॉट मुकाबला
    सबसे चर्चित वार्ड 112 में मतदाताओं ने खुलकर मतदान किया है। यहां 67.82% मतदान हुआ है। भाजपा से सुनील कोठारी और कांग्रेस से आशीष शर्मा आमने-सामने हैं।

    वार्ड 110
    पूर्व महापौर और भाजपा की ज्योति खंडेलवाल वार्ड 110 से मैदान में हैं, जहां उनका सीधा मुकाबला कांग्रेस की सुनीता मेठी से है। इस वार्ड में 64.49% मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है।

    वार्ड 135
    वार्ड 135 शहर की चर्चित सीटों में से एक है। यहां भाजपा के विमल कुमार अग्रवाल का मुकाबला कांग्रेस के रवि कुमार शर्मा से है। इस सीट पर 71.13% मतदान हुआ है।

    इन वार्डों में 74 प्रतिशत से अधिक मतदान
    वार्ड संख्या    विधानसभा    कुल मतदाता    पड़े वोट    मतदान प्रतिशत
    वार्ड 150    आमेर    8,799    7,365    83.70%
    वार्ड 148    आमेर    19,234    15,762    81.95%
    वार्ड 149    आमेर    19,858    15,881    79.97%
    वार्ड 126    आदर्श नगर    14,572    11,599    79.60%
    वार्ड 117    आदर्श नगर    19,801    15,743    79.51%
    वार्ड 1    विद्याधर नगर    13,776    10,811    79.48%
    वार्ड 146    हवामहल    14,809    11,598    78.32%
    वार्ड 61    बगरू    13,686    10,617    77.58%
    वार्ड 51    सांगानेर    17,181    12,891    75.03%
    वार्ड 128    आदर्श नगर    15,977    11,688    73.16%

    इन वार्डों में 50 फीसदी भी नहीं पड़े वोट
    वार्ड संख्या    विधानसभा    कुल मतदाता    पड़े वोट    मतदान प्रतिशत
    वार्ड 100    सिविल लाइंस    16,607    6,714    40.43%
    वार्ड 66    बगरू    19,163    9,060    47.28%
    वार्ड 42    सांगानेर    13,325    6,369    47.80%
    वार्ड 90    सिविल लाइंस    23,789    11,511    48.40%
    वार्ड 41    सांगानेर    17,639    8,632    48.94%
    वार्ड 75    मालवीय नगर    11,821    6,006    50.81%
    वार्ड 123    आदर्श नगर    11,501    5,921    51.49%

  • Punjab Police में बड़ा फेरबदल, 70 इंस्पेक्टर बने DSP; एक साल के लिए मिली पदोन्नति

    Punjab Police में बड़ा फेरबदल, 70 इंस्पेक्टर बने DSP; एक साल के लिए मिली पदोन्नति

    चंडीगढ़
     पंजाब पुलिस में लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे इंस्पेक्टर को सरकार ने बड़ी राहत दी है। गृह मामलों एवं न्याय विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार जिला कैडर और आर्म्ड कैडर के कुल 70 इंस्पेक्टर को पदोन्नत कर डीएसपी बनाया गया है।

    इन अधिकारियों को पंजाब पुलिस सेवा के वेतन स्तर-18 में पदोन्नति दी गई है, जिसमें 56,100 से 1,77,500 रुपये का वेतनमान है।

    सरकार की ओर से यह पदोन्नति विभागीय तरक्की कमेटी की 23 मई 2025 को हुई सिफारिशों के आधार पर की गई है। अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि पदोन्नत अधिकारियों को वरिष्ठता सूची में उनकी स्थिति और निर्धारित नियमों के तहत डीएसपी के पद पर नियुक्त किया गया है।

    जिला कैडर में 50 और आर्म्ड कैडर में 20 अधिकारी
    पदोन्नति पाने वाले अधिकारियों में जिला कैडर के 50 इंस्पेक्टर शामिल हैं, जबकि आम्र्ड कैडर के 20 इंस्पेक्टर को डीएसपी बनाया गया है। सूची में कई ऐसे अधिकारी भी हैं, जो लंबे समय से इंस्पेक्टर के पद पर सेवाएं दे रहे थे। सरकार के इस फैसले से इन अधिकारियों को न केवल उच्च पद मिला है, बल्कि वेतनमान में भी महत्वपूर्ण बढ़ोतरी होगी।

    एक साल की रहेगी पदोन्नति की अवधि
    अधिसूचना में पदोन्नति को लेकर एक अहम शर्त भी रखी गई है। इसके तहत संबंधित अधिकारियों की पदोन्नति का प्रभाव तत्काल लागू होगा, लेकिन उनकी पदोन्नति एक साल की अवधि के लिए रहेगी। इस अवधि के दौरान निर्धारित नियमों और शर्तों के अनुसार उनके प्रदर्शन तथा सेवा संबंधी मामलों को देखा जाएगा।

    इसके अलावा यदि किसी अधिकारी की वरिष्ठता सूची में कोई बदलाव होता है अथवा किसी स्तर पर कोई आपत्ति या न्यायिक मामला सामने आता है, तो उसके अनुसार पदोन्नति पर दोबारा विचार किया जा सकेगा।

    डीएसपी के खाली पदों को भरने में मिलेगी मदद
    पंजाब पुलिस में डीएसपी स्तर के अधिकारियों की जिम्मेदारियां कानून-व्यवस्था, अपराध की जांच और पुलिस प्रशासन से जुड़ी महत्वपूर्ण होती हैं।

    ऐसे में 70 इंस्पेक्टर को डीएसपी बनाए जाने से विभाग को फील्ड स्तर पर भी अनुभवी अधिकारियों की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी। खासकर जिला पुलिस और आर्म्ड पुलिस में अधिकारियों की कमी को दूर करने में यह पदोन्नति महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    सरकार ने यह आदेश सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद जारी किया है। पदोन्नत अधिकारियों को अब डीएसपी स्तर की जिम्मेदारियां संभालनी होंगी और विभाग की ओर से उनके नए पदों पर तैनाती के आदेश अलग से जारी किए जा सकते हैं।

  • यूरोप से भारत लाया गया गैंगस्टर अमृत दलम, जग्गू भगवानपुरिया गैंग का गुर्गा; हत्या समेत कई मामलों में वांटेड

    यूरोप से भारत लाया गया गैंगस्टर अमृत दलम, जग्गू भगवानपुरिया गैंग का गुर्गा; हत्या समेत कई मामलों में वांटेड

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

    पठानकोट

    पंजाब पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है. जग्गू भगवानपुरिया गैंग से जुड़े कुख्यात गैंगस्टर और पंजाब में मोस्ट वॉन्टेड अमृतपाल सिंह उर्फ अमृत दलम को प्रत्यर्पित करके भारत लाया गया है. पंजाब पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारी उसे प्रत्यर्पण करके यूरोपीय देश मोल्दोवा से भारत वापस लाए हैं. यह पहली बार है जब पंजाब पुलिस ने किसी किसी आरोपी को किसी यूरोपीय देश से प्रत्यर्पित कराकर वापस पंजाब लाया गया है. अमृत दलम पर 21 मामले दर्ज थे, जिसमें अमृतसर में कई व्यापारियों को धमकाने के मामले भी दर्ज थे. उसे वापस भारत लाना बड़ी सफलता माना जा रहा है। 

    भारत से 2024 में हुआ था फरार
    अमृत दलम जग्गू भगवानपुरिया के मुख्य हिटमैन के तौर पर काम करता था. पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक अमृतपाल सिंह के खिलाफ पंजाब में कुल 21 आपराधिक मामले दर्ज हैं, इनमें 4 मामले ट्रायल में हैं, जबकि 17 मामलों में जांच चल रही है. अक्टूबर 2024 के आखिरी सप्ताह में भारत से फरार हुआ था, उसने चंडीगढ़ से जारी फर्जी पासपोर्ट का इस्तेमाल किया था. इस पासपोर्ट में उसकी पहचान गुरपाल सिंह के नाम से बताई गई थी. भारत से निकलने के बाद वह सबसे पहले संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पहुंचा और इसके बाद कई देशों से होते हुए मोल्दोवा पहुंच गया। 

    यूक्रेन भागने वाला था अमृत दलम 
    बताया जा रहा है कि अमृत दलम यूक्रेन भागने की फिराक में था. इसी चक्कर में वह मोल्दोवा में पकड़ा गया. अमृतपाल सिंह को 24 फरवरी 2026 को मोल्दोवा के अधिकारियों ने उस समय पकड़ लिया, जब वह ओटासी स्टेट बॉर्डर से यूक्रेन जाने की कोशिश कर रहा था. इसके बाद पंजाब पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों की कोशिशों से उसे भारत वापस लाने की कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई. अमृत दलम को अजरबैजान के बाकू के ट्रांजिट रूट से भारत लाया गया. पंजाब पुलिस की टीम और आरोपी आज सुबह 12 जून 2026 को नई दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर पहुंचे थे. पंजाब पुलिस ने अमृतपाल सिंह के फर्जी पासपोर्ट की जानकारी और उसके संभावित ठिकानों से जुड़ी जानकारी केंद्रीय एजेंसियों के साथ साझा की. इसके आधार पर उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस की प्रक्रिया शुरू की गई और नोटिस हासिल किया गया। 

    21 आपराधिक मामलों का रिकॉर्ड
    दबोचा गया गैंगस्टर, जग्गू भगवानपुरिया के मुख्य हिटमैन के तौर पर काम करता था। पंजाब पुलिस ने विदेश भागे आरोपी अमृतपाल सिंह उर्फ अमृत दलम उर्फ गुरपाल सिंह को मोल्दोवा से भारत वापस ला दिया है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, अमृतपाल सिंह के खिलाफ पंजाब में कुल 21 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें 4 मामले ट्रायल में हैं, जबकि 17 मामलों में जांच चल रही है। 

    फर्जी पहचान से भारत से फरार हुआ था
    पुलिस के मुताबिक अमृतपाल सिंह करीब अक्टूबर 2024 के आखिरी सप्ताह में भारत से फरार हुआ था। उसने चंडीगढ़ से जारी फर्जी पासपोर्ट का इस्तेमाल किया था। इस पासपोर्ट में उसकी पहचान ‘गुरपाल सिंह’ के नाम से बताई गई थी। 

    भारत से निकलने के बाद वह सबसे पहले संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पहुंचा और इसके बाद कई देशों से होते हुए मोल्दोवा पहुंच गया।

    यूक्रेन भागने की कोशिश के दौरान मोल्दोवा में पकड़ा गया
    अमृतपाल सिंह को 24 फरवरी 2026 को मोल्दोवा के अधिकारियों ने उस समय पकड़ लिया, जब वह ओटासी स्टेट बॉर्डर से यूक्रेन जाने की कोशिश कर रहा था। इसके बाद पंजाब पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों की कोशिशों से उसे भारत वापस लाने की कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई।  

    इसके बाद अमृत दलम को अजरबैजान के बाकू के ट्रांजिट रूट से भारत लाया गया। पंजाब पुलिस की टीम और आरोपी आज सुबह 12 जून 2026 को नई दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर पहुंचे।

    फर्जी पासपोर्ट और लोकेशन के आधार पर रेड कॉर्नर नोटिस
    पंजाब पुलिस ने अमृतपाल सिंह के फर्जी पासपोर्ट की जानकारी और उसके संभावित ठिकानों से जुड़ी जानकारी केंद्रीय एजेंसियों के साथ साझा की। इसके आधार पर उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस की प्रक्रिया शुरू की गई और नोटिस हासिल किया गया। 

    छह महीने तक चला इंटरनेशनल ऑपरेशन
    अमृतपाल सिंह को पकड़ने के लिए पंजाब पुलिस की AGTF और OFTEC Punjab ने करीब छह महीने तक इंटेलिजेंस आधारित अंतरराष्ट्रीय अभियान चलाया। इस ऑपरेशन का नाम ‘Operation Eastern Reach’ रखा गया था। इसमें लगातार निगरानी के साथ देश और विदेश की अलग-अलग एजेंसियों के बीच समन्वय किया गया। 

    मोल्दोवा की अदालत से मिली भारत प्रत्यर्पण की मंजूरी
    अमृतपाल सिंह को भारत वापस लाने की कानूनी प्रक्रिया के दौरान 26 मई 2026 को अदालत ने उसके भारत प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी। इसके बाद उसने इस फैसले के खिलाफ अपील की, लेकिन 16 जुलाई 2026 को Court of Appeal Centru ने उसकी अपील खारिज कर दी। इसके साथ ही प्रत्यर्पण का आदेश अंतिम हो गया। 

    चार सदस्यीय पंजाब पुलिस टीम मोल्दोवा पहुंची
    प्रत्यर्पण का रास्ता साफ होने के बाद पंजाब पुलिस की चार सदस्यीय टीम मोल्दोवा पहुंची। टीम ने 11 सितंबर 2026 को चिशिनाउ एयरपोर्ट पर अमृतपाल सिंह को अपनी हिरासत में लिया और उसे पंजाब वापस लाया। 

    पंजाब में 21 केस, कई गंभीर धाराओं से जुड़े मामले
    पुलिस के रिकॉर्ड के मुताबिक अमृतपाल सिंह के खिलाफ दर्ज मामलों में UAPA/Explosives, हत्या, Arms Act, NDPS, जबरन वसूली, Passport Act और अन्य BNS से जुड़े मामले शामिल हैं। रिकॉर्ड में हत्या से जुड़े 5, Arms Act के 9, NDPS का 1 और UAPA/Explosives का 1 मामला दर्ज बताया गया है। 

    किन जिलों में दर्ज हैं मामले?
    जांच के तहत चल रहे 17 मामलों में सबसे ज्यादा 7 FIR बटाला, 4 गुरदासपुर, 2 अमृतसर कमिश्नरेट, 2 होशियारपुर, 1 लुधियाना कमिश्नरेट और 1 FIR SSOC अमृतसर से जुड़ी बताई गई है। वहीं ट्रायल में चल रहे 4 मामले बटाला में दर्ज हैं। 

    यानी करीब दो साल पहले फर्जी पहचान और पासपोर्ट के जरिए देश से फरार हुआ अमृतपाल सिंह मोल्दोवा में पकड़ा गया। छह महीने चले अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशन, कानूनी प्रक्रिया और प्रत्यर्पण के बाद अब पंजाब पुलिस उसे भारत वापस ले आई है।

    छह महीने तक चला इंटरनेशनल ऑपरेशन

    अमृतपाल सिंह को पकड़ने के लिए पंजाब पुलिस की AGTF और OFTEC Punjab ने करीब छह महीने तक इंटेलिजेंस आधारित अंतरराष्ट्रीय अभियान चलाया. इस ऑपरेशन का नाम Operation Eastern Reach रखा गया था. इसमें लगातार निगरानी के साथ देश और विदेश की अलग-अलग एजेंसियों के बीच समन्वय किया गया. अमृतपाल सिंह को भारत वापस लाने की कानूनी प्रक्रिया के दौरान 26 मई 2026 को अदालत ने उसके भारत प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी. इसके बाद उसने इस फैसले के खिलाफ अपील की, लेकिन 16 जुलाई 2026 को कोर्ट ने उसकी अपील खारिज कर दी. इसके साथ ही प्रत्यर्पण का आदेश अंतिम हो गया। 

  • Punjab Power Crisis: बिजली की मांग 16,619 मेगावाट के रिकॉर्ड स्तर पर, कई यूनिटें ठप; कोयले का संकट गहराया

    Punjab Power Crisis: बिजली की मांग 16,619 मेगावाट के रिकॉर्ड स्तर पर, कई यूनिटें ठप; कोयले का संकट गहराया

    जालंधर

    पंजाब में बिजली संकट और गहरा गया है। बिजली की मांग 16,619 मेगावाट के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। शुक्रवार को राजपुरा थर्मल की 700 मेगावाट की यूनिट नंबर-1 तकनीकी खराबी के कारण बंद हो गई। पहले से कई थर्मल और हाइडल यूनिटों के ठप होने से राज्य में कुल 1,915 मेगावाट बिजली उत्पादन प्रभावित है। बारिश की कमी और उमस भरी गर्मी के बीच बढ़ी मांग के कारण उद्योगों, जिला मुख्यालयों, गांवों और कृषि क्षेत्र में बिजली कटौती करनी पड़ी।

    बिजली संकट के कारण उद्योगों में सवा चार घंटे, जिला मुख्यालयों पर तीन से चार घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में एक घंटे के कट लगाने पड़े। कृषि क्षेत्र को भी केवल पांच से छह घंटे बिजली मिल सकी।

    शुक्रवार को तकनीकी खराबी से राजपुरा थर्मल की 700 मेगावाट की यूनिट नंबर-1 बंद हो गई। पहले से रोपड़ थर्मल की 210 मेगावाट यूनिट नंबर-6 और तलवंडी साबो थर्मल की 660 मेगावाट यूनिट नंबर-2 बंद हैं। हाइडल परियोजनाओं में रणजीत सागर बांध की 300 मेगावाट क्षमता वाली यूनिट नंबर-3 व 4 तथा यूबीआईडीसी की तीन यूनिटें ठप हैं। हाइडल से 345 मेगावाट उत्पादन प्रभावित है। 

    पंजाब में बिजली संकट और गहरा गया है। शुक्रवार को बिजली की मांग रिकॉर्ड 16,619 मेगावाट तक पहुंच गई। प्राइवेट थर्मल प्लांट तलवंडी साबो में 7 दिन और राजपुरा थर्मल प्लांट में 3 दिन का कोयला बचा है।

    तलवंडी साबो में चार, राजपुरा में सात दिन का कोयला बचा
    थर्मल प्लांटों में कोयले का संकट भी बरकरार है। तलवंडी साबो में चार, राजपुरा में सात, लहरा मोहब्बत में 11 और गोइंदवाल में 18 दिन का कोयला बचा है। पावरकॉम के अपने सभी साधनों से शुक्रवार को केवल 4,162 मेगावाट बिजली उपलब्ध रही, जबकि मांग पूरी करने के लिए नॉर्दर्न ग्रिड से 11,747 मेगावाट बिजली लेनी पड़ी। शुक्रवार की मांग 2025 के 11,404 मेगावाट और 2024 के 14,481 मेगावाट से भी काफी अधिक रही। 

    थर्मल और हाइडल यूनिटों के बंद होने से राज्य में कुल 1,915 मेगावाट बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ है। बिजली संकट के कारण उद्योगों में करीब सवा चार घंटे, जिला मुख्यालयों पर 3 से 4 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 1 घंटे के कट लगाने पड़े। कृषि क्षेत्र को भी केवल 5 से 6 घंटे बिजली मिल सकी।

    इधर, जालंधर के इंडस्ट्रियल एरिया में 10 से 11 घंटे के लंबे बिजली कट से परेशान लोगों ने देर रात करीब साढ़े 11 बजे सोढल चौक पर जाम लगा दिया। लोगों ने सरकार और पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PSPCL) के खिलाफ नारेबाजी की।

    प्रदर्शन कर रहे लोगों ने कहा कि शाम 7 बजे से अगले दिन सुबह 6 बजे तक लगातार 10 से 11 घंटे के कट लगाए जा रहे हैं। बिजली नहीं होने से पीने के पानी की सप्लाई भी प्रभावित हो रही है। उनका कहना था कि लंबे बिजली कट के कारण लोग रात में ठीक से सो भी नहीं पा रहे हैं।

    राजपुरा में 3 दिन का कोयला बाकी
    जानकारी के अनुसार, हर प्लांट में 20 दिन के कोयले का स्टॉक होना जरूरी होता है। लेकिन प्राइवेट थर्मल प्लांट तलवंडी साबो में टोटल स्टॉक 23 प्रतिशत कोयला बचा है, जो कि 7 दिन के लिए है। इसी तरह राजपुरा में स्टॉक का 18 प्रतिशत कोयला बचा है, जो 3 दिन ही चलेगा। हालांकि दोनों थर्मल प्लांटों को कोयले की सप्लाई प्रति दिन खपत के अनुसार निरंतर मिल रही है।

    इसी तरह सरकारी थर्मल प्लांट लहरा मोहब्बत में 68 प्रतिशत कोयला स्टॉक में है, जो कि खपत के हिसाब से 12 दिन के लिए है। वहीं गोइंदवाल में 93 प्रतिशत स्टॉक है, जो कि 32 दिन के लिए है। इसी तरह रोपड़ में 169 प्रतिशत कोयले का स्टॉक है, जो कि खपत के हिसाब से 66 दिन के लिए है।

    इन प्लांटों की यूनिटें बंद
    पावरकॉम के अपने सभी साधनों से शुक्रवार को केवल 4,162 मेगावाट बिजली उपलब्ध रही, जबकि मांग पूरी करने के लिए नॉर्दर्न ग्रिड से 11,747 मेगावाट बिजली लेनी पड़ी। रोपड़ थर्मल की 210 मेगावाट यूनिट नंबर-6 और तलवंडी साबो थर्मल की 660 मेगावाट यूनिट नंबर-2 बंद हैं। हाइडल परियोजनाओं में रणजीत सागर बांध की 300 मेगावाट क्षमता वाली यूनिट नंबर-3 व 4 तथा यूबीडीसी की तीन यूनिटें बंद हैं।

    शिकायत पर JE और XEN नहीं करते सुनवाई
    जालंधर में प्रदर्शन कर रहे लोगों ने आरोप लगाया कि बिजली विभाग के अधिकारियों (JE और XEN) को शिकायत करने पर कोई सुनवाई नहीं होती। अधिकारी पटियाला मुख्यालय से मैसेज आने और ऊपर से ही कट लगाए जाने का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं।

    सबसे ज्यादा राजस्व देने वाले औद्योगिक क्षेत्र का ऐसा हाल होने पर स्थानीय कारोबारियों ने रोष व्यक्त किया कि बिना बिजली के न तो फैक्ट्रियां चल पा रही हैं और न ही घरों में कोई काम हो पा रहा है।

    मुफ्त के बजाय 24 घंटे बिजली दे सरकार
    प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि सरकार मुफ्त बिजली और बिजली बिल माफ जैसे बड़े-बड़े दावे करना बंद करे और 24 घंटे बिजली देने का प्रबंध करे। जब भी अधिकारियों से बात करते हैं तो एक ही जवाब मिलता है कि पटियाला से आदेश है। अगर जल्द ही बिजली कटौती की समस्या का स्थाई समाधान नहीं किया गया, तो वे अपने इस आंदोलन को और उग्र करेंगे और सड़कों पर पक्का धरना देने के लिए मजबूर होंगे।

    5 दिन पहले ही बिजली मंत्री ने दी थी चेतावनी
    बिजली मंत्री तरणप्रीत सिंह सौंद ने कोयले की कमी से पैदा हुए बिजली संकट पर 5 दिन पहले वीडियो जारी किया था। इसमें कहा था कि पूरे भारत में कोयले की कमी के कारण सूबे को घरेलू और इंडस्ट्री सेक्टर में कट लगाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

    देशभर में लगभग 63 गीगावाट (GW) क्षमता के थर्मल पावर प्लांट कोयले की किल्लत से सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं और अधिकांश निजी बिजली प्लांट के पास केवल 3 से 4 दिनों का ही कोयला स्टॉक बचा है, जिसके कारण वे अपनी आधी क्षमता (हाफ कैपेसिटी) पर चलने को मजबूर हैं।

    बिजली मंत्री ने कहा कि नाभा पावर लिमिटेड (राजपुरा) और तलवंडी साबो पावर प्लांट (मानसा) पूरी तरह से केंद्र सरकार द्वारा सप्लाई किए जाने वाले कोयले पर निर्भर हैं। केंद्र से पर्याप्त कोयला न मिलने के कारण ये दोनों बड़े प्लांट वर्तमान में आधी क्षमता पर ही बिजली उत्पादन कर पा रहे हैं।

  • रामनंदी होटल्स पर ED का बड़ा एक्शन, बिहार-दिल्ली-गुरुग्राम के 17 ठिकानों पर छापेमारी

    रामनंदी होटल्स पर ED का बड़ा एक्शन, बिहार-दिल्ली-गुरुग्राम के 17 ठिकानों पर छापेमारी

    पटना
    प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग ) मामले में रामनंदी होटल्स एंड रिसॉर्ट्स लिमिटेड के 17 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह छापेमारी बिहार के गया जी और बोधगया के साथ ही नई दिल्ली और गुरुग्राम स्थित कंपनी के विभिन्न ठिकानों पर की गयी।

    कंपनी के निदेशक अखौरी गोपाल और उनके बेटों निशांत और नितेश पर कथित धोखाधड़ी व मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं। कंपनी से जुड़े 85 करोड़ के बैंक ऋण में कथित हेराफेरी मामले की सीबीआई पूर्व से ही जांच कर रही है। इसमें इस अपराध से हुई कथित कमाई 131.79 करोड़ रुपये बताई गई है। इस मामले में धन शोधन की आशंका को देखते हुए अब ईडी की एंट्री हुई है

    58 करोड़ रुपये की हेराफेरी
    ईडी सूत्रों के मुताबिक, रामनंदी होटल्स एंड रिसॉर्ट्स लिमिटेड मूलत: बिहार से जुड़ी कंपनी है। कंपनी के निदेशक गया जी के चांदचौरा निवासी अखौरी गोपाल का पूर्व में रामनंदी ऑटोमोबाइल नाम से कारोबार रहा है। उनकी कंपनी पर बैंकों के कंसोर्टियम से लिए गए करीब 85 करोड़ रुपये के ऋण में लगभग 58 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी और डायवर्जन का आरोप है।

    फर्जी और जाली दस्तावेज मिल
    ईडी को जांच में कथित तौर पर फर्जी और जाली दस्तावेज मिले हैं। आरोप है कि कंपनी के चार्टर्ड अकाउंटेंट की ओर से परियोजना पूरी होने की दी गयी गलत रिपोर्ट के आधार पर पहले बैंक से लोन की रकम हासिल की गई। फिर लोन के बदले कई संपत्तियां गिरवी रखी गयीं। इनमें पांच संपत्तियां टाटा मोटर्स के पक्ष में मॉर्गेज बताई गई हैं। बाद में इन संपत्तियों को बेच दिया गया। जांच एजेंसी को बिक्री में भी गड़बड़ी का संदेह है।

    प्रॉक्सी खरीदार होने की आशंका
    आरोप है कि संपत्तियों की कीमत कम दिखाई गई। रकम का एक हिस्सा नकद प्राप्ति के रूप में दर्शाया गया। कुछ खरीदार भी ईडी की जांच के घेरे में हैं। एजेंसी को संदेह है कि करोड़ों की संपत्ति खरीदने वाले कुछ लोगों की आर्थिक क्षमता इतनी नहीं थी। ऐसे में उनके बेनामी या प्रॉक्सी खरीदार होने की आशंका है।

    लोन की व्यक्तिगत गारंटी दी थी
    प्रवर्तन निदेशालय की जांच में रामनंदी होटल्स एंड रिसॉर्ट्स लिमिटेड का नियंत्रण अखौरी गोपाल और उनके पुत्रों निशांत एवं नितेश के पास होने की बात सामने आई है। बैंक ऋण के लिए अखौरी गोपाल और परिवार के सदस्यों की व्यक्तिगत गारंटी भी दी गयी थी। प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने शुक्रवार की अहले सुबह ही गया जी के चांदचौरा में अखौरी गोपाल और उनके नजदीकी रहे बोधगया के अमर बिगहा गांव में मिथिलेश राय के आवास पर छापेमारी शुरू की। जांच एजेंसी के अधिकारी बिहार समेत देशभर में छापेमारी के दौरान मिले दस्तावेजों की विस्तृत छानबीन करेगी।

    गया में 15 घंटे तक चली तलाशी
    ईडी की टीम ने गया जी और बोधगया में तीन ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह छापेमारी करीब 15 घंटे तक चली। इस दौरान गया जी शहर की कालीबाड़ी स्थित न्यू कॉलोनी में अरविंद कुमार के घर में रह रहे किरायेदार, बाला जी नगर और बोधगया के अमर बिगहा में मिथिलेश राय के घर की जांच की गयी। जांच टीम ने दस्तावेज, बैंक खातों, वित्तीय लेनदेन और संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले। तलाशी पूरी होने के बाद टीम जरूरी दस्तावेज और अन्य कागजात अपने साथ ले गई है। जांच एजेंसी ने छापेमारी व बरामदगी से संबंधित जानकारी देने से इनकार कर दिया।

  • पंजाब में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी कार्रवाई, 22 हजार लीटर नकली देसी घी बरामद; ग्रेटर नोएडा से आई थी सप्लाई

    पंजाब में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी कार्रवाई, 22 हजार लीटर नकली देसी घी बरामद; ग्रेटर नोएडा से आई थी सप्लाई

    फरीदकोट
    फरीदकोट स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोटकपूरा में सूचना के आधार पर पकड़े गए 22 हजार लीटर संदिग्ध देसी घी से भरे टैंकर से लिए गए सैंपलों की जांच रिपोर्ट फेल आई है। रिपोर्ट में सैंपल अनसेफ पाए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने टैंकर चालक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। साथ ही विभाग की ओर से पुलिस को शिकायत देकर आपराधिक मामला दर्ज करवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

    इस मामले में फूड सेफ्टी अधिकारी नवदीप सिंह चहल ने बताया कि जांच रिपोर्ट में सैंपल अनसेफ पाए गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद विभाग की ओर से नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।जानकारी के मुताबिक, जीएसटी विभाग की इंटेलिजेंस विंग को सूचना मिली थी कि ग्रेटर नोएडा से देसी घी से भरा टैंकर कोटकपूरा आ रहा है। इस संबंध में जीएसटी विभाग ने स्वास्थ्य विभाग को सूचित किया। 

    इसके बाद गुरुवार रात फूड कमिश्नर अमित जोशी के नेतृत्व में चंडीगढ़ से टीम कोटकपूरा पहुंची। टीम ने फरीदकोट के फूड सेफ्टी अधिकारी नवदीप सिंह चहल के नेतृत्व वाली टीम के साथ मिलकर फरीदकोट रोड स्थित फैक्ट्री में पहुंचे टैंकर को कब्जे में लिया। टैंकर से घी के सैंपल एकत्रित कर जांच के लिए भेजे गए। 

    .फूड सेफ्टी अधिकारी नवदीप सिंह चहल ने बताया कि टैंकर से लिए गए सैंपलों की जांच रिपोर्ट फेल आई है। रिपोर्ट में सैंपल अनसेफ पाए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने टैंकर चालक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

  • बार एसोसिएशन चुनाव में गुजराल की बड़ी जीत, 661 वोट लेकर बने अध्यक्ष

    बार एसोसिएशन चुनाव में गुजराल की बड़ी जीत, 661 वोट लेकर बने अध्यक्ष

    चंडीगढ़.

    करीब डेढ़ साल के इंतजार के बाद चंडीगढ़ जिला बार एसोसिएशन को शुक्रवार को नया प्रधान मिल गया। जिला अदालत परिसर में हुए चुनाव के परिणाम देर रात घोषित किए गए। अध्यक्ष पद पर एएस गुजराल ने 661 वोट हासिल कर जीत दर्ज की।

    उन्होंने गगन अग्रवाल (450), रविंदर सिंह बस्सी उर्फ जौली (464) और सुनील नारंग (327) को पीछे छोड़ा। वहीं, उपाध्यक्ष पद पर अभय जोशी ने बाजी मारी। जोशी को 1071 वोट पड़े जबकि उनके मुकाबले धर्मिंदर सिंह को 801 वोट मिले। जोशी 270 वोट से विजयी रहे। उन्होंने पहले राउंड से ही बढ़त बना ली थी। सचिव पद पर तेजविंदर सिंह गिल 1147 वोट हासिल कर विजयी रहे, जबकि नरेश कुमार को 733 वोट मिले। ज्वाॅइंट सेक्रेटरी पद पर पुष्पिंदर सिंह ने बाजी मारी। उन्हें 836 वोट मिले। वहीं कोषाध्यक्ष पद पर प्रतीक गर्ग ने 1043 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। उनके प्रतिद्वंद्वी पुनीत छाबड़ा को 867 वोट मिले।