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  • पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी के बीच हलचल, दिल्ली में सचिन पायलट से मिले भारत भूषण आशु

    पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी के बीच हलचल, दिल्ली में सचिन पायलट से मिले भारत भूषण आशु

    चंडीगढ़.

    पंजाब कांग्रेस के नए प्रभारी एवं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआइसीसी) के महासचिव सचिन पायलट से नई दिल्ली में पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की मुलाकातों का सिलसिला लगातार जारी है। इसी कड़ी में पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भारत भूषण आशू ने शुक्रवार को नई दिल्ली में सचिन पायलट से मुलाकात की।

    दोनों नेताओं के बीच पंजाब के मौजूदा राजनीतिक हालात, संगठनात्मक मामलों और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। सचिन पायलट के पंजाब प्रभारी बनाए जाने के बाद पिछले कुछ दिनों में प्रदेश कांग्रेस के कई प्रमुख नेता उनसे मुलाकात कर चुके हैं।
    पंजाब कांग्रेस में समन्वय बढ़ाने की कोशिश पायलट से मुलाकात करने वालों में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा और पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा प्रमुख हैं। इन मुलाकातों को पंजाब कांग्रेस में चल रही अंदरूनी खींचतान के बीच संगठन को मजबूत करने और नेताओं के बीच समन्वय बढ़ाने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। भारत भूषण ने पायलट के साथ मुलाकात के बाद कहा कि दोनों के बीच पंजाब की मौजूदा राजनीतिक स्थिति, संगठन से जुड़े विषयों और प्रदेश में कांग्रेस को और मजबूत करने के लिए आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। उन्होंने पायलट को पंजाब कांग्रेस का प्रभारी बनाए जाने के बाद संगठन को मजबूत करने के प्रयासों में सहयोग का संकेत दिया।

    चुनाव से पहले सभी धड़ों को एक करना चुनौती
    कांग्रेस हाईकमान ने पांच सितंबर को भूपेश बघेल की जगह सचिन पायलट को पंजाब का प्रभारी नियुक्त किया था। यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व और संगठन को लेकर लंबे समय से मतभेद सामने आते रहे हैं। पायलट के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती प्रदेश कांग्रेस के विभिन्न धड़ों को साथ लेकर 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी आगे बढ़ाने की है। पार्टी नेतृत्व ने फिलहाल मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित नहीं करने और सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ने के संकेत दिए हैं। ऐसे में पंजाब के वरिष्ठ नेताओं के साथ पायलट की लगातार हो रही मुलाकातों को खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • रेलवे स्टेशनों पर स्टॉल लेने के नियम बदले, अब दूध और खाने के स्टॉल का होगा ई-ऑक्शन

    रेलवे स्टेशनों पर स्टॉल लेने के नियम बदले, अब दूध और खाने के स्टॉल का होगा ई-ऑक्शन

    अंबाला
     रेलवे बोर्ड ने नौ वर्ष पुरानी कैटरिंग नीति में बदलाव किया है। स्टेशन पर खाने-पीने का सामान या दूध का स्टाल लगाने वालों को ई-आक्शन से स्टाल लेने होंगे।

    इसमें किसी की सिफारिश या पुराने तरीके से आवंटन की गुंजाइश कम होगी। रेलवे बोर्ड ने कैटरिंग नीति-2017 में संशोधन करते हुए सभी श्रेणियों के स्टेशनों पर मिल्क स्टाल तथा ए-वन, ए, बी और सी श्रेणी के स्टेशनों पर जनरल माइनर यूनिट्स (जीएमयू) के आवंटन के लिए नई व्यवस्था लागू की है।

    सबसे बड़ा असर मिल्क स्टाल पर पड़ेगा। जोनल रेलवे को मिल्क स्टाल के लिए अनुबंध की विशेष शर्तें तैयार करनी होंगी। बोर्ड की ओर से 28 मई 2018 को जारी मानक बोली दस्तावेज को आधार बनाया जाएगा।

    चार श्रेणी के स्टेशनों पर जीएमयू भी ऑनलाइन ए-वन, ए, बी और सी श्रेणी के स्टेशनों की जनरल माइनर यूनिट्स के लिए भी ई-आक्शन जरूरी होगा।

    इन इकाइयों के लिए पात्रता मानदंड भी नए परिशिष्ट में निर्धारित हैं। इन इकाइयों के अनुबंध की विशेष शर्तें तैयार होंगी। इसके लिए 10 जनवरी 2018 को जारी जीएमयू के मानक बोली दस्तावेज को आधार बनाया जाएगा।

    यह है जमानत राशि के नियम ई-आक्शन में बोली दाताओं के लिए जमानत राशि के नियम भी स्पष्ट कर दिए हैं। वार्षिक बोली मूल्य का 10 % ईएमडी के रूप में जमा करना होगा।

    सफल बोलीदाता को कुल लाइसेंस शुल्क का 10 % सुरक्षा जमा के तौर पर देना होगा। ईएमडी को सुरक्षा जमा में समायोजित किया जाएगा। बची राशि ई-आक्शन के दो सप्ताह में ऑनलाइन जमा करनी होगी।
    यात्रियों के लिए क्यों अहम है बदलाव बदलाव का सीधा संबंध यात्रियों से भी है। रेलवे की मंशा है कि ठेके की प्रक्रिया पारदर्शी हो। इससे छोटे कारोबारियों को भी अवसर मिलेगा।

    क्रिस करेगा व्यवस्था में बदलाव रेलवे बोर्ड ने सेंटर फार रेलवे इंफार्मेशन सिस्टम्स (क्रिस) को ई-आक्शन माड्यूल में आवश्यक तकनीकी बदलाव करने के निर्देश दिए हैं। नई व्यवस्था को ऑनलाइन बोली प्रणाली में भी शामिल किया जाएगा।

     

  • तैमारा घाटी का रहस्य: जहां अचानक बदल जाता है मोबाइल का समय और तारीख!

    तैमारा घाटी का रहस्य: जहां अचानक बदल जाता है मोबाइल का समय और तारीख!

    रांची
    रांची और जमशेदपुर को जोड़ने वाला नेशनल हाईवे 33 (NH 33 Jharkhand) हमेशा से अपने खूबसूरत नजारों और घुमावदार रास्तों के लिए जाना जाता है। इसी हाईवे पर राजधानी रांची से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी स्थित है 'तैमारा घाटी(Mystery Of Taimara Ghati)'। चारों तरफ ऊंचे पहाड़ों, घने जंगलों और हरियाली से घिरी यह घाटी(Jharkhand Tourism) दिखने में जितनी मनोरम है, इससे जुड़े रहस्य और दावे उतने ही हैरान करने वाले हैं।

    समय और तारीख बदलने का रहस्य
    तैमारा घाटी की सबसे अजीब बात यहां मोबाइल और घड़ियों में होने वाले अचानक बदलावों को माना जाता है। स्थानीय लोगों और वहां से गुजरने वाले यात्रियों का दावा है कि घाटी के लगभग एक किलोमीटर के दायरे में प्रवेश करते ही मोबाइल का नेटवर्क गायब हो जाता है। इतना ही नहीं, फोन में दिख रही तारीख और समय अपने आप बदल जाते हैं।

    कई बार मोबाइल की घड़ी वर्तमान समय से पीछे या आगे चली जाती है, और कैलेंडर में साल बदल जाता है। क्षेत्र के एक स्थानीय स्कूल के शिक्षकों के अनुसार, समय में होने वाले इस उतार-चढ़ाव के कारण डिजिटल बायोमेट्रिक मशीन पर हाजिरी लगाना नामुमकिन हो जाता है, क्योंकि मशीन में तारीखें गलत दर्ज होने लगती हैं। इस तकनीकी गड़बड़ी की वजह से स्कूल में रजिस्टर पर ही हाजिरी लगानी पड़ती है। घाटी को पार करते ही मोबाइल का समय अपने आप ठीक हो जाता है।

    हादसे और सफेद साड़ी वाली स्त्री का दावा
    तैमारा घाटी को कई लोग दुर्घटनाओं के क्षेत्र के रूप में भी जानते हैं। यहां हुए सड़क हादसों को लेकर क्षेत्र में तरह-तरह की कहानियां प्रचलित हैं। कुछ लोगों का मानना है कि सड़क पर अचानक सफेद लिबास में एक आकृति दिखाई देती है, जिसे बचाने के प्रयास में तेज रफ्तार गाड़ियां अनियंत्रित होकर हादसे का शिकार हो जाती हैं। इन दुर्घटनाओं को रोकने और क्षेत्र में शांति बनाए रखने के उद्देश्य से हाईवे के किनारे एक मंदिर का निर्माण भी कराया गया है।

    क्या है वैज्ञानिक तर्क और अफवाह?
    इस रहस्यमयी घटना के पीछे अलग-अलग राय हैं।
    कर्क रेखा का प्रभाव: कुछ लोगों का मानना है कि इस क्षेत्र से कर्क रेखा (Tropic of Cancer) गुजरती है। उनका तर्क है कि इसके कारण यहां चुंबकीय या भौगोलिक प्रभाव उत्पन्न होता है, जो इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और नेटवर्क को प्रभावित करता है।

    मात्र एक अफवाह: दूसरी तरफ, कई स्थानीय निवासी और यात्री इन दावों को पूरी तरह नकारते हैं। उनका मानना है कि समय का बदलना और रहस्यमयी घटनाओं की बातें केवल सुनी-सुनाई बातें और अफवाहें हैं।

    हालांकि, आज यह फोरलेन सड़क बेहद खूबसूरत दिखाई देती है और बारिश के मौसम में पर्यटक यहां रुककर प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेते हैं। लेकिन इसके बावजूद, तैमारा घाटी से जुड़ी यह पहेली आज भी लोगों के बीच उत्सुकता और चर्चा का विषय बनी हुई है।

     

  • PG छात्रों की बल्ले-बल्ले! बिहार में मानदेय बढ़ा, अब हर महीने मिलेंगे ₹1.12 लाख तक

    PG छात्रों की बल्ले-बल्ले! बिहार में मानदेय बढ़ा, अब हर महीने मिलेंगे ₹1.12 लाख तक

    पटना
    बिहार के सरकारी चिकित्सा एवं दंत महाविद्यालयों में पीजी पाठ्यक्रम में अध्ययनरत छात्रों के मानदेय में बिहार सरकार द्वारा महत्वपूर्ण वृद्धि की गई है।

    स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी संकल्प के अनुसार एक जनवरी, 2026 से पीजी छात्रों के संशोधित मानदेय की नई दरें लागू होंगी।

    नई व्यवस्था के अंतर्गत प्रथम वर्ष के पीजी छात्रों को ₹92,800, द्वितीय वर्ष के छात्रों को ₹1,02,000 तथा तृतीय वर्ष के छात्रों को ₹1,12,200 प्रतिमाह मानदेय मिलेगा।

    82 हजार की जगह म‍िलेगा 92,800 रुपये
    इससे पूर्व पीजी प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय वर्ष के छात्रों को क्रमशः ₹82,000, ₹90,200 और ₹99,220 मानदेय प्रतिमाह दिया जा रहा था।

    मानदेय में यह वृद्धि राज्य के सरकारी चिकित्सा एवं दंत महाविद्यालयों में पीजी पाठ्यक्रम में अध्ययनरत छात्रों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम है।

    इससे पीजी छात्रों को उनके प्रशिक्षण एवं सेवाकाल के दौरान बेहतर आर्थिक सहयोग मिलेगा और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण मानव संसाधन को प्रोत्साहन मिलेगा

    राज्य सरकार का यह निर्णय चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में अध्ययनरत पीजी छात्रों को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ बिहार में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

    विशेषज्ञ चिकित्सकों के लिए विशेष प्रयास
    स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने कहा कि राज्य में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए सरकार लगातार आवश्यक कदम उठा रही है।

    उन्होंने कहा कि पीजी छात्र भविष्य के विशेषज्ञ चिकित्सक हैं और राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। मानदेय में वृद्धि से उन्हें प्रोत्साहन मिलेगा और चिकित्सा शिक्षा के प्रति बेहतर वातावरण तैयार होगा।

    हमारा लक्ष्य चिकित्सा संस्थानों की संख्या बढ़ाने के साथ ऐसे विशेषज्ञ चिकित्सकीय मानव-बल को तैयार करना है, जो राज्य के लोगों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा सके।

    पीजी छात्रों के मानदेय में यह वृद्धि इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। राज्य सरकार चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता, मेडिकल कालेजों में आधारभूत संरचना और चिकित्सकीय मानव संसाधन को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

    बेहतर प्रशिक्षण, बेहतर सुविधाएं और बेहतर मानव-बल के माध्यम से बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जा रहा है।

  • विदेश में छिपे गैंगस्टरों पर हरियाणा STF का शिकंजा, अब तक 27 अपराधी भारत लाए गए

    विदेश में छिपे गैंगस्टरों पर हरियाणा STF का शिकंजा, अब तक 27 अपराधी भारत लाए गए

    चंडीगढ़
    हरियाणा पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने संगठित अपराध के खिलाफ कार्रवाई तेज करते हुए विदेश में छिपे वांछित अपराधियों और उनके नेटवर्क पर शिकंजा कस दिया है।

    एसटीएफ अब तक 27 गैंगस्टरों को निर्वासन या प्रत्यर्पण के माध्यम से भारत ला चुकी है। इनमें वर्ष 2025 में सात और वर्ष 2026 में अब तक 14 अपराधी शामिल हैं। चार अगस्त 2026 को एक सक्रिय वांछित अपराधी को संयुक्त अरब अमीरात से भारत लाया गया। यह वर्ष 2026 में एसटीएफ की 13वीं सफल कार्रवाई रही।

    पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने कहा कि हरियाणा पुलिस संगठित अपराध के खिलाफ शून्य सहनशीलता (जीरो टालरेंस) की नीति पर काम कर रही है। विदेश में बैठकर हरियाणा में अपराध संचालित करने वालों के साथ उनके स्थानीय सहयोगियों, हथियार आपूर्तिकर्ताओं और आर्थिक मददगारों पर भी कार्रवाई की जा रही है। विभिन्न राज्यों की पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय तथा खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान से अपराधियों के पूरे नेटवर्क की पहचान की जा रही है।

    विदेश में मौजूद 12 गैंगस्टर हिरासत में
    पुलिस महानिरीक्षक सथीश बालन के अनुसार, एसटीएफ मानव और तकनीकी खुफिया तंत्र के माध्यम से विदेश में छिपे अपराधियों की गतिविधियों, यात्रा विवरण और ठिकानों का पता लगा रही है। फर्जी पासपोर्ट, पहचान दस्तावेज और जैव-आंकड़ों का विश्लेषण भी किया जा रहा है। विदेशों में मौजूद 12 गैंगस्टरों को हिरासत में लिया जा चुका है, जबकि उन्हें भारत लाने की प्रक्रिया जारी है।

    अगस्त 2023 से अब तक की प्रमुख कार्रवाई
    144 लुक आउट सर्कुलर जारी।
    54 रेड कार्नर नोटिस जारी।
    53 इंटरपोल संदर्भ भेजे गए।
    93 पासपोर्ट रद कराए गए।
    नौ अस्थायी गिरफ्तारी अनुरोध और 16 प्रत्यर्पण अनुरोध भेजे गए।

    बदमाशों की सूचना देने वालों को दस हजार अमेरिकी डालर का ईनाम
    एसटीएफ अपराधियों से जुड़े बैंक लेन-देन, क्रिप्टोकरेंसी और यूएसडीटी के माध्यम से होने वाले वित्तीय लेन-देन की भी जांच कर रही है। उनके डिजिटल निशानों और सामाजिक मीडिया गतिविधियों पर निगरानी रखकर संपर्क, नए सदस्यों की भर्ती और आपराधिक गतिविधियों से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है।

    विदेश में छिपे चार वांछित अपराधियों की गिरफ्तारी में मददगार सूचना देने पर प्रत्येक के लिए 10 हजार अमेरिकी डालर (करीब साढ़े नौ लाख रुपये) के इनाम के प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है।

    पंजाब, राजस्थान, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के साथ समन्वय
    पुलिस महानिदेशक के अनुसार हरियाणा पुलिस ने पंजाब, राजस्थान, दिल्ली और उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ मजबूत अंतरराज्यीय समन्वय तंत्र बनाया है। इसके तहत अपराधियों, शूटरों, हथियार आपूर्तिकर्ताओं और आर्थिक मददगारों से जुड़ी सूचनाएं साझा की जा रही हैं तथा जरूरत के अनुसार संयुक्त कार्रवाई की जा रही है।

    गैंग के संबंधों और आपराधिक नेटवर्क से जुड़ी जानकारी राष्ट्रीय जांच एजेंसी के ओसीएनडी मंच पर भी साझा की जा रही है। पुलिस का लक्ष्य विदेश में बैठे अपराधियों के साथ-साथ उनके स्थानीय और वित्तीय नेटवर्क को भी एक साथ कमजोर करना है।

  • झारखंड में SIR को लेकर बड़ा अपडेट, दूसरे राज्य के दस्तावेज भी होंगे मान्य

    झारखंड में SIR को लेकर बड़ा अपडेट, दूसरे राज्य के दस्तावेज भी होंगे मान्य

     रांची
     यदि आप झारखंड में निवास कर रहे हैं और आपका जन्म दूसरे किसी राज्य में हुआ है तो विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के लिए वहां का भी बना आपका दस्तावेज मान्य होगा।

    मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार के अनुसार, मतदाता सूची में किसी व्यक्ति का नाम सम्मिलित होने के लिए उसका भारत का नागरिक होना, संबंधित निर्वाचन क्षेत्र का सामान्य निवासी होना तथा संबंधित अर्हता तिथि (वर्तमान एसआइआर के लिए एक अक्टूबर 2026) को 18 वर्ष की आयु पूर्ण करना आवश्यक है।

    उनके अनुसार, झारखंड की मतदाता सूची में ऐसे मतदाता भी पंजीकृत हैं, जिनका जन्म अथवा पूर्व निवास किसी अन्य राज्य में रहा है। दावा-आपत्ति एवं सुनवाई की प्रक्रिया के क्रम में यदि ऐसे मतदाताओं को आयु, जन्म अथवा अन्य विवरण के सत्यापन के लिए दस्तावेज प्रस्तुत करने का नोटिस प्राप्त हुआ है, तो वे इससे संबंधित भारत निर्वाचन आयोग द्वारा एसआईआर के लिए मान्य दस्तावेज के रूप में अपने संबंधित राज्य के द्वारा जारी किए गए दस्तावेज को प्रस्तुत कर सकते हैं।

    इसके लिए संबंधित दस्तावेज का झारखंड से ही निर्गत होना आवश्यक नहीं है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि मतदाता अपने जन्म स्थान, आयु अथवा पारिवारिक संबंध के सत्यापन के लिए वंशावली अथवा सक्षम पदाधिकारी द्वारा निर्गत पारिवारिक सूची, खतियान, शैक्षणिक दस्तावेज सहित निर्वाचन आयोग द्वारा एसआइआर के लिए निर्धारित अन्य मान्य दस्तावेज अपने संबंधित राज्य से प्रस्तुत कर सकते हैं।

    इन दस्तावेज का परीक्षण संबंधित निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि नोटिस प्राप्त होने पर निर्धारित समय पर सुनवाई में उपस्थित होकर उपलब्ध मान्य दस्तावेज प्रस्तुत करें।

    उन्होंने निर्वाचन पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रत्येक मामले में प्रस्तुत दस्तावेज का नियमानुसार परीक्षण करते हुए पात्रता के संबंध में निर्धारित प्रक्रिया के तहत निर्णय सुनिश्चित करें, ताकि कोई भी पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची में शामिल होने से वंचित न रहे और किसी भी अपात्र अथवा विदेशी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में शामिल न हो।

     

  • हरियाणा में धान की खेती पर दोहरी मार, पिछैती फसल पर अब सूखे का संकट

    हरियाणा में धान की खेती पर दोहरी मार, पिछैती फसल पर अब सूखे का संकट

    बहादुरगढ़.

    धान उत्पादक किसान इस बार आशा और निराशा के बीच झूल रहे हैं। मानसून की बेरुखी ने खेती का पूरा गणित बिगाड़ दिया है। समय पर रोपाई या बिजाई की गई धान की फसल फिलहाल संभली हुई है, लेकिन उसे बचाए रखने के लिए किसान दिन-रात ट्यूबवेल चला रहे हैं।

    दूसरी ओर, पिछैती रोपाई वाले खेतों में सूखे का असर पहले ही दिखाई दे चुका है। कहीं फसल की जुताई की जा चुकी है तो कहीं किसान उसे पशु चारे के लिए काटने को मजबूर हैं। बहादुरगढ़ क्षेत्र में इस बार करीब 20 हजार हेक्टेयर में धान की फसल है। मानसून कमजोर रहने और लंबे समय से पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण किसानों के सामने खेतों में नमी बनाए रखना बड़ी चुनौती बन गया है।

    समय पर रोपी गई फसल की स्थिति ठीक
    समय पर रोपी गई फसल की स्थिति अभी अपेक्षाकृत ठीक है, मगर इसके लिए लगातार सिंचाई करनी पड़ रही है। किसानों का कहना है कि धान को पानी की जरूरत के समय नहरों में भी पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा। ऐसे में ट्यूबवेल ही एकमात्र सहारा है। इससे डीजल और बिजली के साथ सिंचाई का खर्च बढ़ रहा है। किसान आनंद के अनुसार, पिछले सप्ताह तीन-चार दिन बूंदाबांदी हुई, जिससे कुछ राहत मिली, लेकिन खेतों में पर्याप्त नमी नहीं बन पाई। तापमान बढ़ने के साथ पानी की जरूरत और बढ़ गई है। यदि ट्यूबवेल से सिंचाई नहीं की जाए तो फसल पर असर पड़ने का डर है।

    क्या इस बार बचेगा मुनाफा?
    लगातार सिंचाई के बावजूद इस बात की चिंता है कि अंत में उत्पादन कितना होगा और बढ़ी हुई लागत के बाद हाथ में मुनाफा कितना बचेगा। पिछैती रोपाई वाली फसल पर संकट सूखे की सबसे ज्यादा मार पिछैती रोपाई वाली फसल पर पड़ी है। मौसम में अगले एक-दो दिन में बदलाव और बारिश की संभावना से किसानों को उम्मीद बंधी है। अब देखना यह है कि आसमान से कितनी राहत मिलती है और खेतों में खड़ी धान की फसल किसानों की उम्मीद को उत्पादन और मुनाफे में कितना बदल पाती है। इधर, कृ़षि विभाग के एसडीओ डा. सुनील कौशिक ने बताया कि अभी फसल की स्थिति ठीक है।

  • पंजाब में CM सेहत योजना का बड़ा अभियान, 33 लाख हेल्थ कार्ड घर-घर पहुंचाएंगे अधिकारी

    पंजाब में CM सेहत योजना का बड़ा अभियान, 33 लाख हेल्थ कार्ड घर-घर पहुंचाएंगे अधिकारी

    चंडीगढ़.

    पंजाब में मुख्यमंत्री सेहत योजना कार्डों के वितरण में अब तेजी आने वाली है, करीब 33 लाख कार्ड जल्द ही जिलों में उपलब्ध होने की उम्मीद है। राज्य सरकार सभी पात्र लाभार्थियों को योजना के दायरे में लाने के लिए कार्य कर रही है।

    स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि करीब 31 लाख मुख्यमंत्री सेहत योजना कार्ड पहले ही जिलों में उपलब्ध हो चुके हैं, जबकि लगभग 2 लाख और कार्ड जल्द उपलब्ध होने की उम्मीद है। सरकार ने करीब 2,008 गांवों और वार्डों की पहचान की है, जहां 400 या उससे अधिक लाभार्थी कार्ड के लिए पात्र हैं। इन स्थानों पर विशेष वितरण शिविर लगाए जाएंगे, ताकि कार्ड वितरण की प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके और लाभार्थियों को अपने क्षेत्र में ही कार्ड प्राप्त करने की सुविधा मिल सके।

    लाभार्थियों को शिविरों के बारे में दी गई सूचना
    लाभार्थियों को शिविरों के बारे में पहले से सूचित किया जाएगा। आशा कार्यकर्ताओं, आशा फैसिलिटेटरों, सेहत मित्रों और अन्य फील्ड स्टाफ को लाभार्थियों को शिविरों तक लाने तथा अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए तैनात किया जाएगा। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान द्वारा मुख्यमंत्री सेहत योजना कार्ड वितरण कार्यक्रम के औपचारिक शुभारंभ के बाद शिविर आधारित वितरण शुरू होगा। सरकार ने कार्यक्रम शुरू होने के एक सप्ताह के भीतर इन शिविरों में कार्ड वितरण पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। जिन गांवों और वार्डों में 400 से कम लाभार्थी हैं, वहां पहले से चल रही घर-घर कार्ड वितरण व्यवस्था जारी रहेगी।

    शिविरों के बाद भी जो कार्ड वितरित नहीं हो पाएँगे, उन्हें भी आशा कार्यकर्ताओं और आशा फैसिलिटेटरों के माध्यम से लाभार्थियों के घरों तक पहुंचाया जाएगा। अंतिम स्तर तक कार्ड पहुंचाने को प्रोत्साहित करने के लिए आशा कार्यकर्ताओं को प्रत्येक सफलतापूर्वक वितरित कार्ड के लिए 10 रुपये, जबकि आशा फैसिलिटेटरों को प्रति कार्ड ₹2 दिए जाएंगे। घर-घर कार्ड वितरण का रिकॉर्ड रखा जाएगा और संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा प्रोत्साहन राशि के दावों की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

    दो सप्ताह के भीतर घरों तक पहुंचाए जाएंगे कार्ड
    शिविर आधारित वितरण अभियान पूरा होने के बाद शेष कार्डों को अगले दो सप्ताह के भीतर घर-घर वितरण व्यवस्था के माध्यम से वितरित करने का लक्ष्य रखा गया है। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी द्वारा जिलों को कार्ड तथा सूचना, शिक्षा एवं संचार (IEC) सामग्री पहले ही उपलब्ध करवाई जा चुकी है, इसमें कार्ड जैकेट, लिफाफे और ब्रोशर भी शामिल हैं। अधिकारियों को पूरी प्रक्रिया की करीबी निगरानी करने तथा निर्धारित समयसीमा और मानक संचालन प्रक्रिया (स्टैण्डर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर) का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरे पंजाब में मुख्यमंत्री सेहत योजना कार्डों का वितरण पूरा करना है, सरकार का विशेष जोर यह सुनिश्चित करने पर है कि कोई भी पात्र लाभार्थी योजना के लाभ से वंचित न रहे।

  • हिसार एयरपोर्ट से बढ़ेंगी उड़ानें, कनेक्टिंग फ्लाइट्स पर हरियाणा सरकार का फोकस

    हिसार एयरपोर्ट से बढ़ेंगी उड़ानें, कनेक्टिंग फ्लाइट्स पर हरियाणा सरकार का फोकस

    चंडीगढ़
     हिसार एयरपोर्ट से देश के अलग-अलग हिस्सों में उड़ानों की संख्या में बढ़ोतरी की जाएगी। विशेषकर कनेक्ट फ्लाइट्स पर फोकस रहेगा, ताकि अधिक से अधिक यात्रियों को लाभ हो सके।

    कनेक्टिंग फ्लाइट वह यात्रा है, जिसमें अंतिम गंतव्य पर पहुंचने के लिए बीच के किसी हवाई अड्डे पर विमान बदलना पड़ता है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने वीरवार को ‘स्टेट प्रगति पोर्टल’ के तहत चल रही 75 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली 11 विकास परियोजनाओं की समीक्षा बैठक में कहा कि हिसार एयरपोर्ट के पास आईएमसी (इंटिग्रेटिड मैनुफैक्चरिंग कलस्टर) के कार्य को तेजी से पूरा करवाया जाए।

    1578 एकड़ में परियोजना के लिए पर्यावरण मंजूरी प्राप्त हो चुकी है और परियोजना के निर्माण कार्य का टेंडर किया जा चुका है। ऊर्जा विभाग की आयुक्त एवं सचिव आशिमा बराड़ ने बताया कि गुरुग्राम की 11 केवी फीडर लाइन नवीनीकरण की एक परियोजना में 93 प्रतिशत तथा दूसरी में 79 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है।

    जगाधरी क्षेत्र में आरडीएसएस परियोजना को दिसंबर तक पूरा कर लिया जाएगा। यमुनानगर में दीनबंधु छोटूराम ताप विद्युत संयंत्र में 800 मेगावाट अल्ट्रा सुपरक्रिटिकल यूनिट की स्थापना संबंधी कार्य निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार चल रहा है। रेवाड़ी जिले में आरडीएसएस के तहत लास रिडक्शन परियोजना का लगभग 86 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और इसे 30 नवंबर तक पूरा करवा दिया जाएगा।

    साढ़ौरा में 66 केवी सबस्टेशन को 220 केवी स्तर पर अपग्रेड करने की परियोजना का 95 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। कुरुक्षेत्र सर्कल में कृषि कनेक्शनों के लिए 4,717 एच-पोल लगाने तथा नए ट्रांसफार्मर उपलब्ध कराने की परियोजना का 57 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। कैथल सर्कल में 2847 एच-पोल एवं नए ट्रांसफार्मरों से संबंधित परियोजना का 72 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है।

  • BRICS Summit की वेलकम किट में बिहार का सत्तू-मखाना, वैश्विक मंच पर दिखेगा देसी स्वाद

    BRICS Summit की वेलकम किट में बिहार का सत्तू-मखाना, वैश्विक मंच पर दिखेगा देसी स्वाद

    पटना
     BRICS सम्मेलन में विदेशी मेहमानों को भारत की विविधता के साथ बिहार के खास जायके का स्वाद भी चखने को मिलेगा।

    दिल्ली में होने वाले BRICS Summit की वेलकम किट में बिहार के सत्तू और मखाना को शामिल किया गया है। बिहार के इन दोनों उत्पादों के वैश्विक मंच पर पहुंचने से सीएम सम्राट चौधरी गदगद हैं।

    मुख्यमंत्री ने प्रसन्नता जताते हुए इसे बिहार के लिए गौरव का क्षण बताया है। उन्होंने अपने एक्स हैंडल पर लिखा कि 'नए बिहार की नई पहचान,बिहार का स्वाद अब दुनिया के सामने।'

    मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली BRICS Summit की वेलकम किट में शामिल सत्तू और मखाना बिहार के स्वाद, परंपरा और उद्यमिता की पहचान हैं।

    उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार जताते हुए कहा कि लोकल टू ग्‍लोबल (Local to Global) के संकल्प को इससे मजबूती मिली है।

    एक ही मेज पर दिखेगी भारत की स्वाद विविधता
    BRICS सम्मेलन में आने वाले विदेशी मेहमानों को भारतीय खानपान की विविधता से रूबरू कराने की तैयारी की गई है। मेन्यू में देश के अलग-अलग हिस्सों के पारंपरिक और लोकप्रिय व्यंजनों को शामिल किया गया है।

    एक ही मेज पर रागी का डोसा, बाजरे का उपमा, कश्मीरी पुलाव, हैदराबादी बिरयानी और लखनवी कबाब जैसे व्यंजन नजर आएंगे।

    इसके साथ ही बाजरा उपमा, अवधी कबाब, हैदराबादी बिरयानी और किनुआ बिरयानी जैसे व्यंजन भी मेहमानों को परोसे जाने की जानकारी सामने आई है।

    इस तरह BRICS सम्मेलन के जरिए विदेशी मेहमानों को एक ही जगह पर भारत के अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों के स्वाद का अनुभव मिलेगा।

    सत्तू-मखाना बने बिहार की पहचान
    वेलकम किट में सत्तू और मखाना को जगह मिलना ब‍िहार के लिए खास महत्व रखता है। सत्तू लंबे समय से बिहार के पारंपरिक खानपान का हिस्सा रहा है, जबकि मखाना अब देश-दुनिया में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

    खासकर मिथिलांचल का मखाना बिहार की कृषि और स्थानीय उद्यमिता की महत्वपूर्ण पहचान बन चुका है। इसके बढ़ते बाजार के बीच अंतरराष्ट्रीय मेहमानों तक बिहार के इस उत्पाद की पहुंच राज्य के लिए नए अवसरों का संकेत भी मानी जा रही है।

    'लोकल टू ग्लोबल' की दिखी तस्वीर
    BRICS जैसे वैश्विक मंच पर बिहार के सत्तू और मखाना की मौजूदगी को ‘लोकल टू ग्लोबल’ की सोच से जोड़कर देखा जा रहा है। स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की कोशिशों के बीच बिहार के पारंपरिक स्वाद को दुनिया के प्रभावशाली प्रतिनिधियों तक पहुंचाने का यह मौका अहम है।

    मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी इसी संदर्भ में इसे बिहार की नई पहचान से जोड़ा है। अब BRICS सम्मेलन में दुनिया के अलग-अलग देशों से आने वाले मेहमान जब भारतीय व्यंजनों का स्वाद चखेंगे, तो उनकी मेज पर बिहार का सत्तू और मखाना भी अपनी खास मौजूदगी दर्ज कराएगा।

        बिहार का गौरव वैश्विक मंच पर!
        दिल्ली BRICS Summit में Welcome Kit में शामिल सत्तू और मखाना हमारे स्वाद, परंपरा और उद्यमिता की पहचान हैं।

        माननीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी का आभार, जिन्होंने ‘Local to Global’ संकल्प को साकार किया।
        नए बिहार की नई पहचान—बिहार का स्वाद अब…