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  • हरियाणा हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, PGT शिक्षकों के ट्रांसफर में नोशनल सेवा के अंक मान्य

    हरियाणा हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, PGT शिक्षकों के ट्रांसफर में नोशनल सेवा के अंक मान्य

    चंडीगढ़.

    हरियाणा सरकार की शिक्षक स्थानांतरण नीति के तहत अनुभव अंकों की गणना को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पीजीटी शिक्षकों को बड़ी राहत दी है।

    हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिन शिक्षकों को किसी आदेश या वैधानिक प्रक्रिया के तहत पूर्व प्रभाव से नोशनल सेवा (भले ही कोई कर्मचारी किसी निश्चित समयावधि के लिए वास्तविक रूप से (फिजिकली) नौकरी पर उपस्थित या कार्यरत नहीं था, फिर भी रिकॉर्ड और गणना के उद्देश्य से उसे उस अवधि के लिए सेवा में माना जाता है) का लाभ मिला है, उस सेवा अवधि को स्थानांतरण के लिए अनुभव की गणना से बाहर नहीं किया जा सकता। ऐसे शिक्षकों को उनकी मान्य नोशनल सेवा अवधि के आधार पर भी अनुभव अंक दिए जाएंगे। इससे स्थानांतरण प्रक्रिया में उनकी मेरिट और पसंद के पद मिलने की संभावनाएं बढ़ेंगी।विभाग दूसरे लाभ दे रहा था, ट्रांसफर में अनुभव अंक रोक दिएमामला परविंद्र कुमार समेत दर्जन भर पीजीटी शिक्षकों से जुड़ा है। शिक्षकों का कहना था कि विभाग उनकी नोशनल सेवा को एसीपी, वरिष्ठता, नोशनल वेतन निर्धारण सहित अन्य सेवा लाभों के लिए मान्यता दे रहा है, लेकिन शिक्षक स्थानांतरण अभियान में अनुभव अंक देने केवल वास्तविक नियुक्ति तिथि को आधार बना रहा है।

    जगबीर मलिक ने खटखटाया अदालत का दरवाजा
    इससे उनकी सेवा अवधि कम मानी जा रही थी और उन्हें स्थानांतरण प्रक्रिया में नुकसान उठाना पड़ रहा था।इसके खिलाफ शिक्षकों ने अधिवक्ता जगबीर मलिक के माध्यम से हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई के दौरान शिक्षा विभाग की ओर से अदालत को बताया कि इसी तरह का विवाद पहले भी हाईकोर्ट की एकल और दो सदस्यीय पीठ के समक्ष आ चुका है और संबंधित याचिका खारिज की जा चुकी है। हालांकि, याचिकाकर्ताओं की ओर से नए तथ्यों और कानूनी पहलुओं को अदालत के सामने रखा गया। अधिवक्ता जगबीर मलिक ने सर्वोच्च न्यायालय के भारत सरकार बनाम के बी राजोरिया मामले में दिए गए फैसले का हवाला देते हुए दलील दी कि नोशनल सेवा से जुड़े कानूनी सिद्धांत को केवल वास्तविक नियुक्ति तिथि तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता।

    अदालत ने दोनों पक्षों की सुनी दलीलें
    अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पीजीटी शिक्षकों के पक्ष में फैसला सुनाया। जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ की एकल पीठ के इस फैसले से उन शिक्षकों को राहत मिली है, जिन्हें नोशनल सेवा अवधि का लाभ तो दिया गया, लेकिन स्थानांतरण के लिए उसी अवधि के अनुभव अंक नहीं दिए जा रहे थे। दूसरे कर्मचारियों के लिए भी खुला राहत का रास्तायह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि समान प्रकृति के मामले में कृषि विकास अधिकारी की याचिका और उसके बाद दायर एलपीए पहले खारिज हो चुके थे। इसके बावजूद सर्वोच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण फैसले और नए कानूनी पहलुओं के आधार पर पीजीटी शिक्षकों को राहत मिल गई। माना जा रहा है कि इस निर्णय के बाद नोशनल सेवा के बावजूद अनुभव अंकों से वंचित अन्य कर्मचारी भी अपने अधिकारों के लिए हाईकोर्ट का रुख कर सकते हैं।

  • शिक्षकों के ट्रांसफर की नई पॉलिसी जल्द, पॉइंट सिस्टम से तय होगी प्राथमिकता

    शिक्षकों के ट्रांसफर की नई पॉलिसी जल्द, पॉइंट सिस्टम से तय होगी प्राथमिकता

    नई दिल्ली
    सरकारी स्कूलों के टीचर्स के ट्रांसफर की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए सरकार नई ट्रांसफर पॉलिसी तैयार कर रही है, जिसमें टीचर्स का ट्रांसफर पॉइंट सिस्टम के आधार पर होगा। टीचर्स का एक यूनिक आईडी भी बनेगा, जिसमें उनका पूरा सर्विस रिकॉर्ड होगा। सूत्रों की मानें तो सरकार 17 सितंबर से शुरू होने वाले सेवा पखवाड़े के दौरान इसका ऐलान कर सकती है।

    अलग-अलग कैटिगरी के आधार पर दिए जाएंगे अंक
    अधिकारियों के मुताबिक नई टीचर्स ट्रांसफर पॉलिसी में सबसे अहम हिस्सा पॉइंट आधारित ट्रांसफर सिस्टम होगा। इसमें अलग-अलग कैटिगरी के आधार पर टीचर्स को अंक दिए जाएंगे और कुल अंक के आधार पर उपलब्ध रिक्तियों में ट्रांसफर की प्राथमिकता तय होगी। हालांकि, किन परिस्थितियों के लिए कितने अंक मिलेंगे, इसका अंतिम फैसला किया जा रहा है। टीचर्स की पारिवारिक स्थिति, शारीरिक अक्षमता, महिला और सिंगल पैरंट्स जैसी स्थितियों पर भी अंक मिलेंगे।

    यूनिक आईडी दिए जाने की संभावना
    प्रस्तावित पॉलिसी में प्रत्येक टीचर को एक यूनिक आईडी दिए जाने की संभावना है। इसके जरिए टीचर का पूरा सर्विस रिकॉर्ड, वर्तमान स्कूल में कार्यकाल, पूर्व पोस्टिंग और अन्य जरूरी जानकारियों का एक सेंट्रलाइज डेटाबेस भी बनेगा। टीचर्स पोर्टल पर अपनी जानकारी देख सकेंगे और ट्रांसफर विंडो खुलने पर ऑनलाइन आवेदन भी कर सकेंगे। लंबे समय से एक ही स्कूल में तैनात टीचर्स को अतिरिक्त वेटेज देने पर भी विचार हो रहा है।

    हरियाणा मॉडल का अध्ययन
    सरकार ने हरियाणा मॉडल का भी अध्ययन किया है। हरियाणा में कंप्यूटराइज्ड सर्विस रिकॉर्ड और मेरिट के आधार पर खाली पदों का आवंटन किया जाता है। वहां कुल 80 अंकों में उम्र को 60 अंक का प्रमुख आधार बनाया गया है, जबकि 20 अंक विशेष श्रेणियों के लिए रखे गए है। इनमें महिला कर्मचारी, कुछ श्रेणियो की सिंगल महिलाएं, विधवा-विधुर और कपल केस शामिल है। इसमे स्थानीय जरूरतों के हिसाब से प्राथमिकता मिलेगी

    वेरिफिकेशन के बाद ट्रांसफर
    ट्रांसफर से पहले शिक्षकों से व्यक्तिगत और सर्विस रिकॉर्ड ऑनलाइन सत्यापित कराने की योजना है। विभाग रिकॉर्ड के आधार पर अंक तय कर उन्हें पब्लिक कर सकता है। इसके बाद टीचर्स अपने रिकॉर्ड या पॉइंट को लेकर आपत्ति दर्ज करा सकेंगे। आपत्तियों के निस्तारण के बाद अंतिम ट्रांसफर सूची जारी होगी। ट्रांसफर से पहले स्कूलों में स्टूडेंट्स की संख्या, स्वीकृत पद और विषयवार शिक्षको की जरूरत का डेटा की भी मैपिंग की जाएगी

  • सचिन पायलट का बड़ा बयान, बोले- कैप्टन अमरिंदर की वापसी पर हाईकमान से कोई बातचीत नहीं

    सचिन पायलट का बड़ा बयान, बोले- कैप्टन अमरिंदर की वापसी पर हाईकमान से कोई बातचीत नहीं

    चंडीगढ़.

    पंजाब पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा भाजपा नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह के पिछले कुछ समय से कांग्रेस में वापसी की चर्चा है। लेकिन फिलहाल इस पर संस्पेंस भी बरकरार है। पंजाब कांग्रेस के नए प्रधान सचिन पायलट ने कैप्टन को लेकर बड़ी बात कही है।

    पायलट ने कहा कैप्टन को लेकर उनकी हाईकमान से कोई बातचीत नहीं हुई है। ऐसे में इस बारे में वह कुछ नहीं कह सकते। पंजाब दौरे से पहले सचिन पायलट अपनी तैयारी में जुटे हैं। पंजाब कांग्रेस के प्रभारी सचिन पायलट ने कहा है कि कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव पूरी ताकत और मजबूती के साथ लड़ेगी। पार्टी का मुख्य मुद्दा पंजाब में नशे को खत्म करना, विकास और युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए योजनाएं तैयार करना होगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का लक्ष्य पंजाब को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करना है। बातचीत में पायलट ने नशे की समस्या को पंजाब के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की आम आदमी पार्टी सरकार नशे के खिलाफ कार्रवाई करने में पूरी तरह विफल रही है।

    केंद्र नशे की आपूर्ती रोकने में विफल
    वहीं, केंद्र की भाजपा सरकार भी पंजाब में बाहर से आने वाले नशे की आपूर्ति को रोकने में असफल रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पंजाब के विकास के अपने पुराने रिकार्ड और युवाओं के बेहतर भविष्य के संकल्प के साथ जनता के बीच जाएगी। भाजपा के पंजाब प्रभारी सतीश पूनिया की ओर से अकाली दल के साथ संभावित गठबंधन को लेकर कांग्रेस पर की गई टिप्पणी पर पायलट ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि भाजपा को यह बताना चाहिए कि जिन लोगों को वह पहले गालियां देती थी और जिन्हें उसने किनारे कर दिया था, आज उसी शरण में वापस क्यों जाना पड़ रहा है।

    प्रकाश सिंह बादल के बाद अकाली दल टूटा
    अकाली दल को लेकर पायलट ने कहा कि यह पार्टी अब वह नहीं रही जो प्रकाश सिंह बादल के समय हुआ करती थी। पार्टी में कई टूट हुई हैं और अलग-अलग दल बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि अकाली दल और भाजपा जमीन तलाशने के लिए एक-दूसरे का साथ लेने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, जब दोनों दलों का गठबंधन था, तब भी उन्हें पंजाब में बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा था। पायलट ने दावा किया कि आगामी विधानसभा चुनाव में मुख्य मुकाबला कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच होगा। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के परिणाम इसका संकेत दे चुके हैं।

    बिखर रही आप
    आप पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी बिखर गई है और उसके राज्यसभा के अधिकतर सांसद भाजपा के साथ चले गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के पास विपक्षी दलों को तोड़ने के अलावा कोई मुद्दा नहीं है और सांसदों को तोड़कर किसी तरह परिसीमन से जुड़े कानून को आगे बढ़ाना उसका प्रयास है। पायलट ने कहा कि पंजाब के लोग राजनीतिक रूप से जागरूक हैं और कांग्रेस का संगठन पूरी मजबूती के साथ चुनाव लड़कर जीत हासिल करेगा।

  • SET 2026: 1.77 लाख अभ्यर्थी देंगे परीक्षा, 7 संभागों में बनाए गए 429 केंद्र

    SET 2026: 1.77 लाख अभ्यर्थी देंगे परीक्षा, 7 संभागों में बनाए गए 429 केंद्र

     कोटा
    कोटा विश्वविद्यालय की ओर से 13 सितम्बर को सहायक आचार्य के लिए राज्य पात्रता परीक्षा (सेट)-2026 आयोजित की जाएगी। यह परीक्षा 7 संभाग जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, उदयपुर, कोटा, अजमेर व भरतपुर में सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक एक पारी में ऑफलाइन मोड पर होगी। इसमें 37 विषयों में इस वर्ष 1 लाख 77 हजार 901 अभ्यर्थी पंजीकृत हुए हैं। सात संभागीय मुख्यालयों में कुल 429 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। जयपुर में सबसे अधिक 78 हजार तो भरतपुर में सबसे कम 8 हजार से अधिक अभ्यर्थी बैठेंगे। इसके अलावा जोधपुर में 22,609, बीकानेर 22,281, उदयपुर 17,320, कोटा 14839, अजमेर संभाग में 13,753 अभ्यर्थी शामिल होंगे।

    कोटा विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. बीपी सारस्वत ने बताया कि परीक्षा का आयोजन यूजीसी-नेट के नवीनतम मानकों के अनुरूप किया जाएगा। परीक्षा से संबंधित व्यवस्थाओं की निगरानी के लिए कोटा विश्वविद्यालय में केंद्रीय कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। परीक्षा की सुरक्षा, गोपनीयता और संवेदनशीलता से जुड़े सभी मानकों को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। उन्होंने अभ्यर्थियों से निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करने और परीक्षा केंद्र पर समय से पहुंचने की अपील की।

    प्रवेश के लिए ये दस्तावेज जरूरी
    अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र पर प्रवेश-पत्र की रंगीन प्रति, मूल फोटोयुक्त पहचान-पत्र के रूप में केवल आधार कार्ड तथा ऑनलाइन आवेदन के समय अपलोड की गई फोटो से मेल खाती एक रंगीन पासपोर्ट साइज फोटो साथ लानी होगी।

    अभ्यर्थियों की रिपोर्टिंग सुबह 9 से 10 बजे तक होगी। 10 बजे बाद किसी भी अभ्यर्थी को परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।

    परीक्षा समन्वयक प्रो. घनश्याम शर्मा ने बताया कि प्रवेश-पत्र पर अंकित परीक्षा केंद्र और रोल नंबर के कोड को केवल सांकेतिक न मानते हुए परीक्षा केंद्र की वास्तविक लोकेशन पहले से सुनिश्चित कर लें। इसके लिए परीक्षा से एक दिन पूर्व केंद्र पर जाकर स्थान की जानकारी प्राप्त करने की सलाह दी गई है, ताकि परीक्षा के दिन किसी प्रकार की परेशानी न हो।

    मोबाइल, स्मार्ट वॉच और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण प्रतिबंधित
    1- परीक्षा की गोपनीयता और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए परीक्षा कक्ष में मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच, ब्लूटूथ डिवाइस, कैलकुलेटर सहित किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक गैजेट, पुस्तक, नोट्स आदि ले जाना पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा।
    2- अभ्यर्थियों को आधी आस्तीन के हल्के रंग के कपड़े तथा कम हील वाली चप्पल या सैंडल पहनकर आने की सलाह दी गई है।
    3- धार्मिक, पारंपरिक अथवा सांस्कृतिक पोशाक में आने वाले अभ्यर्थियों की सुरक्षा जांच के दौरान विशेष रूप से तलाशी ली जाएगी।
    अभ्यर्थी अपने साथ केवल काले या नीले बॉल पेन लेकर आएं।
    4- ओएमआर शीट पर व्हाइटनर, ब्लेड अथवा किसी अन्य वस्तु का प्रयोग नहीं किया जा सकेगा।
    5- अनुचित साधनों का प्रयोग करते पाए जाने वाले अभ्यर्थियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

  • पटना हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: RT-PCR रिपोर्ट न होने पर भी कोविड मुआवजे का हक नहीं छीना जा सकता

    पटना हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: RT-PCR रिपोर्ट न होने पर भी कोविड मुआवजे का हक नहीं छीना जा सकता

    पटना
    पटना हाईकोर्ट ने कोरोना से मौत मामले में एक अहम फैसला सुनाया है। कहा कि कोविड से मौत मामले में तकनीकी आधार पर मुआवजा रोकना गलत है। अस्पताल का मृत्यु प्रमाण पत्र विश्वसनीय सबूत होता है। सिर्फ आरटीपीसीआर रिपोर्ट नहीं होने पर विधवा का हक नहीं छीना जा सकता। न्यायमूर्ति आलोक कुमार ने मुंगेर की आशा देवी की अर्जी पर अधिकारियों को चार सप्ताह के भीतर अनुग्रह राशि भुगतान करने का आदेश दिया।

    कोर्ट को बताया गया कि आवेदिका के पति अजय कुमार शर्मा की मृत्यु 21 मई 2021 को मुंगेर के सिटी क्रिटिकल हॉस्पिटल में हो गई थी। मृत्यु प्रमाण पत्र में मौत का कारण कोविड-19 दर्ज है। जिला प्रशासन ने उन्हें कोविड मृतकों की सूची में रखा और राशि भी आवंटित की। लेकिन भुगतान नहीं किया गया। मृतक की पत्नी ने आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य विभाग और मुंगेर डीएम को विस्तृत अभ्यावेदन दिया। पर जिला स्वास्थ्य समिति ने आरटी पीसीआर रिपोर्ट नहीं होने का हवाला दे दावा खारिज कर दिया।

    सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला
    स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, टेस्ट रिपोर्ट के अभाव में किसी को मुआवजे से वंचित करने का आधार नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि कोविड सर्टिफिकेट या टेस्ट रिपोर्ट नहीं होना निर्णायक नहीं हो सकता है। अस्पताल का प्रमाण पत्र और जिला स्तरीय सूची में नाम है, तो तकनीकी आधार पर राशि नहीं देना गलत है।

    कोविड के दौरान इलाज में लापरवाही पर अस्पताल सील
    कोविड के दौरान इलाज में लापरवाही पर पटना के कुम्हरार स्थित भागवत नगर स्थित पुष्पांजलि मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल को सिविल सर्जन ने सील कर दिया। जिला प्रशासन और पुलिस से प्राप्त जांच रिपोर्ट के आधार पर अस्पताल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए थाने को आवेदन भी दिया गया है।

    यह कार्रवाई 2021 में आई कोरोना की दूसरी लहर में भारती देवी नाम की महिला की मौत के मामले में की गई है। मामले में परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर इलाज में लापरवाही बरतने और अधिक बिल देने का आरोप लगाया था। परिजनों ने सिविल सर्जन के पास शिकायत की थी। इसके बाद मेडिकल बोर्ड बैठी थी। सिविल सर्जन डॉ. योगेंद्र प्रसाद मंडल की ओर से जारी पत्र में बताया गया है कि जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर अस्पताल के विरुद्ध कार्रवाई की गई। अस्पताल के साथ वहां के चिकित्सकों और अन्य कर्मियों के खिलाफ भी शिकायत का उल्लेख है। पत्र की प्रतिलिपि पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के संबंधित अधिकारियों को भी भेजी गई है।

    सिविल सर्जन ने कहा कि अस्पताल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए थाना प्रभारी को आवेदन दिया गया है। जांच में जो तथ्यों आएंगे उसके आधार पर कार्रवाई होगी।

  • झारखंड में SIR को लेकर बड़ा अपडेट, दूसरे राज्यों के दस्तावेज भी होंगे मान्य

    झारखंड में SIR को लेकर बड़ा अपडेट, दूसरे राज्यों के दस्तावेज भी होंगे मान्य

     रांची
    यदि आप झारखंड में निवास कर रहे हैं और आपका जन्म दूसरे किसी राज्य में हुआ है तो विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के लिए वहां का भी बना आपका दस्तावेज मान्य होगा।

    मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार के अनुसार, मतदाता सूची में किसी व्यक्ति का नाम सम्मिलित होने के लिए उसका भारत का नागरिक होना, संबंधित निर्वाचन क्षेत्र का सामान्य निवासी होना तथा संबंधित अर्हता तिथि (वर्तमान एसआइआर के लिए एक अक्टूबर 2026) को 18 वर्ष की आयु पूर्ण करना आवश्यक है।

    उनके अनुसार, झारखंड की मतदाता सूची में ऐसे मतदाता भी पंजीकृत हैं, जिनका जन्म अथवा पूर्व निवास किसी अन्य राज्य में रहा है। दावा-आपत्ति एवं सुनवाई की प्रक्रिया के क्रम में यदि ऐसे मतदाताओं को आयु, जन्म अथवा अन्य विवरण के सत्यापन के लिए दस्तावेज प्रस्तुत करने का नोटिस प्राप्त हुआ है, तो वे इससे संबंधित भारत निर्वाचन आयोग द्वारा एसआईआर के लिए मान्य दस्तावेज के रूप में अपने संबंधित राज्य के द्वारा जारी किए गए दस्तावेज को प्रस्तुत कर सकते हैं।

    इसके लिए संबंधित दस्तावेज का झारखंड से ही निर्गत होना आवश्यक नहीं है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि मतदाता अपने जन्म स्थान, आयु अथवा पारिवारिक संबंध के सत्यापन के लिए वंशावली अथवा सक्षम पदाधिकारी द्वारा निर्गत पारिवारिक सूची, खतियान, शैक्षणिक दस्तावेज सहित निर्वाचन आयोग द्वारा एसआइआर के लिए निर्धारित अन्य मान्य दस्तावेज अपने संबंधित राज्य से प्रस्तुत कर सकते हैं।

    इन दस्तावेज का परीक्षण संबंधित निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि नोटिस प्राप्त होने पर निर्धारित समय पर सुनवाई में उपस्थित होकर उपलब्ध मान्य दस्तावेज प्रस्तुत करें।

    उन्होंने निर्वाचन पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रत्येक मामले में प्रस्तुत दस्तावेज का नियमानुसार परीक्षण करते हुए पात्रता के संबंध में निर्धारित प्रक्रिया के तहत निर्णय सुनिश्चित करें, ताकि कोई भी पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची में शामिल होने से वंचित न रहे और किसी भी अपात्र अथवा विदेशी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में शामिल न हो।

     

  • पंजाब में 3 IAS अधिकारियों के तबादले, ऋषि पाल को मिली महिला आयोग की जिम्मेदारी

    पंजाब में 3 IAS अधिकारियों के तबादले, ऋषि पाल को मिली महिला आयोग की जिम्मेदारी

    चंडीगढ़.

    पंजाब सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर तीन IAS अधिकारियों के तबादले और नई नियुक्तियों के आदेश जारी किए हैं। सरकार की ओर से जारी आदेश के अनुसार 2014 बैच के IAS अधिकारी ऋषि पाल सिंह को पंजाब राज्य महिला आयोग का सदस्य सचिव नियुक्त किया गया है।

    इसके साथ ही दो अन्य आइएएस अधिकारियों को भी नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। 2014 बैच के अधिकारी ऋषि पाल सिंह अब पंजाब राज्य महिला आयोग में सदस्य सचिव की जिम्मेदारी संभालेंगे। आयोग से जुड़े प्रशासनिक कार्यों और विभागीय स्तर पर समन्वय की जिम्मेदारी उनके पास रहेगी।

    IAS सुखपाल रजिस्ट्रार नियुक्त
    इसी तरह 2018 बैच के आइएएस अधिकारी सुखजीत पाल सिंह का तबादला करते हुए उन्हें पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना का रजिस्ट्रार नियुक्त किया गया है। वह विश्वविद्यालय के प्रशासनिक कामकाज की जिम्मेदारी संभालेंगे।

    IAS अभिजीत संभालेंगे ऊर्जा विकास
    वहीं, 2015 बैच के आइएएस अधिकारी अभिजीत कपलिश को पंजाब ऊर्जा विकास एजेंसी का मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही उन्हें खेल एवं युवा सेवाएं विभाग के निदेशक का अतिरिक्त कार्यभार भी सौंपा गया है। सरकार के इन प्रशासनिक आदेशों के बाद तीनों अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव हुआ है। अभिजीत कपलिश के पास ऊर्जा विकास एजेंसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पद के साथ खेल एवं युवा सेवाएं विभाग के निदेशक का अतिरिक्त प्रभार भी रहेगा।

  • जयपुर में कर्ज और गृहक्लेश के दलदल में फंसे पिता ने की पत्नी-बेटियों की हत्या

    जयपुर में कर्ज और गृहक्लेश के दलदल में फंसे पिता ने की पत्नी-बेटियों की हत्या

    जयपुर
    करधनी की गोविंद वाटिका में शुक्रवार सुबह घटी वारदात ने पूरे शहर को झकझोर दिया है। शेयर बाजार में भारी नुकसान, गृहक्लेश और कर्ज के दलदल में फंसे राहुल झा ने ऐसा खौफनाक कदम उठाया कि वह अपनी पत्नी गीता और बेटियों नंदिनी, राधिका व गिरिशा का हत्यारा बन गया। यह सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि उस आर्थिक बदहाली और सामाजिक अलगाव का वीभत्स रूप है, जिसमें घुट रहे एक परिवार की चीखें बंद दरवाजों के पार तक नहीं पहुंच सकीं।

    एडिशनल डीसीपी राजेश गुप्ता ने बताया कि प्राथमिक जांच में सामने आया है कि राहुल ने कई लोगों से पैसे उधार ले रखे थे। गोविंद वाटिका स्थित मकान उसकी पत्नी के नाम पर है और राहुल कुछ दिनों से इसे बेचने की फिराक में था। आशंका है कि इसी बात को लेकर दंपती के बीच गृहक्लेश चल रहा था। फिलहाल जांच जारी है और आरोपी की तलाश में पुलिस की टीमें जुटी हुई हैं।

    बेटियों के सुनहरे भविष्य का खौफनाक अंत
    कभी राहुल अपनी बेटियों को अच्छे से पढ़ा-लिखाकर उनका भविष्य संवारना चाहता था। पत्नी गीता घर में ब्यूटी पार्लर चलाकर आर्थिक मदद की कोशिश में थी, वहीं बड़ी बेटी नंदिनी भी पढ़ाई के साथ हाथ बंटा रही थी। बेटी राधिका और गिरिशा भी पढ़ाई में जुटी थीं। लेकिन आर्थिक तंगी व गृहक्लेश ने परिवार को ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया, जहां राहुल का दिमागी संतुलन ढह गया।

    उसने एक पड़ोसी से 50 हजार रुपए मांगे थे, पर 25 हजार की मदद मिल पाई। तनाव गहराता गया, लेकिन पड़ोसियों या रिश्तेदारों को भनक तक नहीं लगी कि यह घबराहट हत्या के पागलपन में बदल जाएगी। एफएसएल जांच के मुताबिक वारदात तड़के 4 से 5 बजे के बीच हुई। आशंका है कि राहुल ने पहले पत्नी व बेटियों को कोई नशीला पदार्थ सूंघाया और फिर सीमेंट की भारी ईंट से वार कर उनके चेहरे कुचल दिए।

    फूट-फूटकर रो पड़ा बड़ा भाई
    चाची व चचेरी बहनों की मौत की सूचना पर भतीजी सिमरन मौके पर पहुंची। सिमरन ने अपने दादा लक्ष्मीनाथ झा को संभाला, लेकिन उसके भी आंसू थम नहीं रहे थे। कुछ देर बाद सिमरन के पिता संजय और भाई भी वहां पहुंचे और फूट-फूटकर रोने लगे। परिवार के अनुसार, बिजली विभाग से सेवानिवृत्त लक्ष्मीनाथ पहले झोटवाड़ा के संजय नगर में दोनों बेटों संजय और राहुल के साथ रहते थे। लक्ष्मीनाथ की पत्नी की मृत्यु के बाद यह मकान बेच दिया गया और राहुल ने वर्ष 2021 में गोविंद वाटिका में मकान खरीदा। ग्राउंड फ्लोर पर अलग-अलग कमरों में बेटियां व हॉल में लक्ष्मीनाथ रहते थे, जबकि ऊपर की मंजिल पर राहुल व गीता रहते थे। बड़ा भाई संजय प्रेम नगर में परिवार के साथ रहने लगा। घटना की सूचना फैलते ही बड़ी संख्या में परिजन व कॉलोनी के लोग राहुल के घर पहुंच गए।

    'व्यवहार में बदलाव, घोर निराशा जैसे संकेतों को गंभीरता से लेना चाहिए'
    ऐसी जघन्य घटना के पीछे केवल कर्ज या गृहक्लेश को ही कारण मानना उचित नहीं होगा। लंबे समय तक बना आर्थिक दबाव, वैवाहिक तनाव, क्रोध पर नियंत्रण की कमी, निराशा और मानसिक अस्थिरता जैसे कई कारक इसमें भूमिका निभाते हैं। परिवारों को व्यवहार में अचानक आने वाले बदलाव, अत्यधिक चिड़चिड़ापन, हिंसक प्रवृत्ति, नींद के पैटर्न में बदलाव और घोर निराशा जैसे संकेतों को गंभीरता से लेना चाहिए। ऐसी स्थिति में समय रहते मनोचिकित्सक से परामर्श लिया जाना बेहद जरूरी है।
    -डॉ. संजय जैन, मनोरोग विशेषज्ञ

  • प्रशासन की अनदेखी के बाद युवाओं ने श्रमदान से 600 मीटर सड़क बना दी

    प्रशासन की अनदेखी के बाद युवाओं ने श्रमदान से 600 मीटर सड़क बना दी

     इटकी
     जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के उपेक्षापूर्ण रवैये से तंग आकर इटकी प्रखंड के रानीखटंगा गांव के युवाओं ने आत्मनिर्भरता की एक मिसाल पेश की है।

    सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए तरस रहे ग्रामीणों ने खुद ही बीड़ा उठाते हुए श्रमदान किया और लगभग 600 मीटर लंबी कच्ची सड़क का मोरमीकरण कर उसे चलने लायक बना दिया।

    ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में इस ग्रामीण सड़क पर कीचड़ का अंबार लग जाता था, जिससे यहां पैदल चलना भी दूभर हो जाता था। स्थिति इतनी दयनीय थी कि स्कूली बच्चों का आवागमन और बुजुर्गों का घर से बाहर पैदल चलना मुश्किल हो गया था।

    बार-बार गुहार लगाने के बावजूद जब जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभाग ने कोई सुधि नहीं ली, तो युवाओं ने खुद ही इस समस्या का समाधान निकालने का फैसला किया। समस्या के समाधान के लिए रानीखटंगा के युवाओं ने आपसी सहयोग से चंदा एकत्र किया और मिट्टी मोरम की व्यवस्था की।

    इसके बाद सभी युवाओं ने हाथों में कुदाल और फावड़ा थाम लिया और मुख्य मार्ग से बाड़ी मस्जिद तक करीब 600 मीटर के रास्ते पर मोरमीकरण का कार्य पूरा किया। अब इस काम चलाऊ सड़क के बन जाने से ग्रामीणों को आवागमन में बड़ी राहत मिली है।

    युवाओं के सराहनीय और प्रेरणादायक कार्य को पूरा करने में रानीखटंगा के युवा वर्गों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। श्रमदान करने वालों में मुख्य रूप से सदर अज़हर अंसारी, सेक्रेटरी इमरोज अंसारी, अब्दुल कुद्दूस, अतिकूल अंसारी, फज़ले अंसारी, सरबूल अंसारी और सफी नज़र सहित गांव के अन्य ऊर्जावान युवा शामिल रहे।

  • गोल्डन टेंपल में प्रकाश पर्व की धूम, हरिमंदिर साहिब में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

    गोल्डन टेंपल में प्रकाश पर्व की धूम, हरिमंदिर साहिब में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

    अमृतसर.

    पंजाब के अमृतसर में मौजूद गोल्डन टेंपल में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पहले प्रकाश पर्व को लेकर आज धार्मिक समागम करवाए जा रहे हैं। गोल्डन टेंपल को फूलों से सजाया गया है। यहां बड़ी संख्या में लग नतमस्तक होने के लिए पहुंच रहे हैं।

    गोल्डन टेंपल और श्री अकाल तख्त साहिब व गुरुद्वारा बाबा अटल राय साहिब में जलौ सजाएं जाएंगे। हरमंदिर साहिब में तैयारियां किस तरह चल रही हैं। उसे इन तस्वीरों में देखा जा सकता है। अमृतसर स्थित गोल्डन टेंपल में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पहले प्रकाश पर्व को लेकर आज (12 सितंबर) विशेष धार्मिक समागम करवाए जा रहे हैं। गोल्डन टेंपल परिसर को फूलों से खूबसूरती से सजाया गया है। बड़ी संख्या में संगत नतमस्तक होने के लिए पहुंच रही है।

    पहले प्रकाश पर्व पर गुरुद्वारा श्री रामसर साहिब से गोल्डन टेंपल तक पुरातन परंपरा के अनुसार नगर कीर्तन सजाया। इसमें शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी, सिंह साहिबान और प्रमुख शख्सियतें शामिल होंगी। वहीं, गोल्डन टेंपल, श्री अकाल तख्त साहिब और गुरुद्वारा बाबा अटल राय साहिब में जलौ सजाए जाएंगे। रात को गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब दीवान हॉल में शब्द विचार और कीर्तन समागम होगा। इसके साथ ही गोल्डन टेंपल परिसर में दीपमाला और आतिशबाजी भी की जाएगी।

    गुरु ग्रंथ साहिब से जुड़े ये तथ्य-
    बाबा बुड्ढा जी ने बाणी पढ़ने की शुरुआत की थी: सिखों के पांचवें गुरु अर्जन देव जी ने 1604 में दरबार साहिब में पहली बार गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश किया था। 1430 अंग (पन्ने) वाले इस ग्रंथ के पहले प्रकाश पर संगत ने कीर्तन दीवान सजाए और बाबा बुड्ढा जी ने बाणी पढ़ने की शुरुआत की।
    बाबा बुड्ढा जी इस ग्रंथ के पहले ग्रंथी बने: पहली पातशाही से छठी पातशाही तक अपना जीवन सिख धर्म की सेवा को समर्पित करने वाले बाबा बुड्ढा जी इस ग्रंथ के पहले ग्रंथी बने। आगे चलकर इसी के संबंध में दशम गुरु गोबिंद सिंह ने हुक्म जारी किया, "सब सिखन को हुकम है गुरु मान्यो ग्रंथ।"
    गुरु अर्जन देव बोलते गए, भाई गुरदास लिखते गए: 1603 में 5वें गुरु अर्जन देव ने भाई गुरदास से गुरु ग्रंथ साहिब को लिखवाना शुरू करवाया, जो 1604 में संपन्न हुआ। नाम दिया ‘आदि ग्रंथ’। 1705 में गुरु गोबिंद सिंह ने दमदमा साहिब में गुरु तेग बहादुर के 116 शबद जोड़कर पूर्ण किया। 1708 में दशम गुरु गोबिंद सिंह ने हजूर साहिब में फरमान जारी किया था, “सब सिखन को हुकम है गुरु मान्यो ग्रंथ।”
    समूची मानवता को एक लड़ी में पिरोने का संदेश है गुरु ग्रंथ साहिब: सिखों में जीवंत गुरु के रूप में मान्य श्री गुरु ग्रंथ साहिब केवल सिख कौम ही नहीं, बल्कि समूची मानवता के लिए आदर्श व पथ प्रदर्शक हैं। दुनिया में यह इकलौते ऐसे पावन ग्रंथ हैं, जो तमाम तरह के भेदभाव से ऊपर उठकर आपसी सद्भाव, भाईचारे, मानवता व समरसता का संदेश देते हैं।