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  • राजस्थान-जापान के बीच बढ़ेगा रत्न-आभूषण कारोबार, सीएम भजनलाल ने निवेश का रोडमैप बताया

    राजस्थान-जापान के बीच बढ़ेगा रत्न-आभूषण कारोबार, सीएम भजनलाल ने निवेश का रोडमैप बताया

    जयपुर
     मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राजस्थान और जापान के बीच वर्षों पुराना नाता है। ऐसे में, राज्य सरकार राजस्थान और जापान के बीच रत्न-आभूषण सहित अन्य उद्योगों के विकास के लिए रोडमैप बनाकर कार्य कर रही है। इसी क्रम में जापानी जोन बनाकर विशेष सुविधाएं विकसित की गई हैं, जिससे जापानी कम्पनियों को अनुकूल आधारभूत सुविधाएं सुलभ हो रही हैं।

    मुख्यमंत्री ने रविवार को जापान के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक कर उद्योगों एवं निवेश को लेकर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने कहा कि जयपुर ज्वैलरी एसोसिएशन और यामानाशी ज्वैलरी एसोसिएशन मिलकर तकनीक और निवेश के साथ रत्न-आभूषण व्यापार को और आगे लेकर जाएं, जिससे व्यापार बढ़ने के साथ ही रोजगार के भी ज्यादा से ज्यादा अवसर सृजित हों।

    उन्होंने 2024 में अपने जापान दौरे का जिक्र करते हुए कहा कि जापानी कम्पनियों ने राजस्थान में निवेश पर तीन से चार गुना फायदे पर आभार भी जताया था। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जापान के निवेशकों को राजस्थान में उद्योग लगाने के लिए आमंत्रित करती है।  

    जापानी प्रतिनिधिमंडल ने की राज्य सरकार की सराहना
    बैठक में जापान के कोफू सिटी मेयर युइची हिगुची ने राजस्थान सरकार की निवेश अनुकूल नीतियों और यहां उपलब्ध निवेश अवसरों की सराहना करते हुए कहा कि जापान की 180 कम्पनियां राजस्थान में कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि जयपुर और कोफू सिटी के ज्वैलर्स मिलकर पूरी दुनिया में ज्वैलरी का बिजनेस कर रहे हैं। जयपुर की लगभग 60 कम्पनियां कोफू सिटी में ज्वैलरी का कार्य कर रही हैं।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री और जापानी प्रतिनिधिमंडल ने राधे-राधे कहकर एक-दूसरे का अभिवादन किया। बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) अखिल अरोड़ा, जयपुर ज्वैलरी एसोसिएशन के अध्यक्ष राजू अग्रवाल मंगोड़ीवाला, यामानाशी ज्वैलरी एसोसिएशन इंटरनेशनल कमेटी के चेयरमैन नवीन सोनकिया, कोशिन कंपनी लिमिटेड के अध्यक्ष काजुओ मात्सुमोटो, क्रिएट ताकानो कंपनी लिमिटेड के अध्यक्ष चिकारा यानागिमोटो, द यामानाशी चुओ बैंक लिमिटेड के वरिष्ठ सलाहकार नकाबा शिंदो, कोफू बिल्डिंग कंपनी लिमिटेड के चेयरमैन तेत्सुजी सकामोटो, कोफू सिटी उद्योग विभाग के महानिदेशक ताकेयासु तनाका, कोफू सिटी वाणिज्य एवं उद्योग प्रभाग के प्रबंधक सातोशी त्सुनोदा, ईगाडो कंपनी लिमिटेड के उपाध्यक्ष तादाओ शिमुरा, क्रॉसफोर कंपनी लिमिटेड के अध्यक्ष अकीहिको नाइतो, कोफू चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के प्रबंधक शिगेमासा सुजुकी, कोफू सिटी अंतरराष्ट्रीय संबंध प्रभाग के मेयर कार्यालय प्रबंधक शुनिची हागिहारा सहित अन्य उच्चाधिकारी उपस्थित रहे। 

  • झारखंड सिपाही भर्ती-2015 में बड़ा फैसला, पात्र अभ्यर्थियों को 4 सप्ताह में नियुक्ति का आदेश

    झारखंड सिपाही भर्ती-2015 में बड़ा फैसला, पात्र अभ्यर्थियों को 4 सप्ताह में नियुक्ति का आदेश

    रांची
     सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सिपाही भर्ती-2015 से जुड़े मामले में चयन प्रक्रिया पूरी करने के बाद भी नियुक्ति से वंचित रह गए पात्र अभ्यर्थियों को बड़ी राहत प्रदान की है।

    जस्टिस संजय करोल और जस्टिस आगस्टीन जार्ज मसीह की खंडपीठ ने राज्य सरकार को पात्र अभ्यर्थियों की चार सप्ताह के भीतर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने और नियुक्ति पत्र जारी करने का निर्देश दिया है।

    झारखंड पुलिस भर्ती से नियुक्ति से वंचित अभ्यर्थियों ने राज्य सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जितेंद्र कुमार शर्मा सहित छह अलग-अलग एसएलपी दाखिल की थी।

    यह मामला झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) के विज्ञापन के तहत हुई झारखंड पुलिस सिपाही भर्ती से जुड़ा है। कुल 7,272 पदों के लिए प्रक्रिया शुरू की गई थी। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी 2,380 पद रिक्त रह गए थे।

    याचिकाकर्ताओं का कहना था कि कई अभ्यर्थियों ने लिखित परीक्षा, शारीरिक परीक्षा, चिकित्सा जांच और दस्तावेज सत्यापन तक की प्रक्रिया पूरी कर ली थी, लेकिन दूसरी मेरिट सूची जारी नहीं होने के कारण उन्हें नियुक्ति नहीं मिल सकी।

    सुप्रीम कोर्ट के तीन जून 2026 के आदेश के अनुपालन में 437 अभ्यर्थियों ने 20 अगस्त 2026 को शारीरिक दक्षता परीक्षा में भाग लिया। लगभग 125 अन्य अभ्यर्थियों को 21 अगस्त को इस परीक्षा में शामिल किया जाना था।

    सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने माना कि 31 जुलाई 2026 के पत्र में निर्धारित मानदंड तीन जून के आदेश के अनुरूप नहीं थे। कोर्ट के निर्देश के अनुसार संबंधित अभ्यर्थियों को पूर्ण रूप से उत्तीर्ण माना जाएगा।

    300 होमगार्ड अभ्यर्थियों का मामला भी उठा
    सुनवाई के दौरान लगभग 300 होमगार्ड अभ्यर्थियों का मुद्दा भी सामने आया। कोर्ट ने कहा कि रिक्तियां उपलब्ध हैं और इन अभ्यर्थियों ने संतोषजनक सेवा की है, इसलिए उन्हें भी समायोजित किए जाने पर विचार किया जा सकता है।

    कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी प्रारंभिक चयन प्रक्रिया पर दोबारा सवाल उठाकर उन्हें फिर से लिखित परीक्षा में बुलाने का कोई औचित्य नहीं है।

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब राज्य सरकार को पात्र अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन पूरा कर चार सप्ताह के भीतर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करनी होगी और नियुक्ति-पत्र जारी करना होगा।

    अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आदेश इन याचिकाकर्ताओं तक ही सीमित रहेगा। इन निर्देशों के साथ सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित सभी एसएलपी का निस्तारण कर दिया।

     

  • नायब सैनी का भगवंत मान पर हमला, बोले- सिर्फ चुटकुलों से नहीं चलता सरकार का काम

    नायब सैनी का भगवंत मान पर हमला, बोले- सिर्फ चुटकुलों से नहीं चलता सरकार का काम

    चंडीगढ़
     हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा है कि सिर्फ चुटकुलों से काम नहीं चलता। सरकार द्वारा किए काम धरातल पर दिखने चाहिए। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान बताएं कि पिछले चुनाव के समय महिलाओं व युवाओं से किए वादों का क्या हुआ।

    पंजाब के पटियाला जिले के घनौर कस्बे में शनिवार को आयोजित तीज महोत्सव में मातृशक्ति को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने महिलाओं से हर महीने 1000 रुपये देने का वादा किया था।

    अगले चुनाव सिर पर आ गए हैं, तब भी पंजाब के मुख्यमंत्री स्टेज से महिलाओं से पूछ रहे हैं कि बहन एक महीने के पैसे खाते में डालूं या दो महीने के या तीन महीने के। यह मजाक नहीं तो और क्या है। कानून व्यवस्था की खराब हालत के चलते इंडस्ट्री पंजाब से पलायन कर रही है, जिससे युवाओं के सामने रोजगार का संकट खड़ा है। हताश-निराश युवा लगातार नशे के दलदल में धंसता जा रहा है।

    भेजे जा चुके 2000 करोड़
    नायब सैनी ने कार्यक्रम में कोथलियां और सूट वितरित करते हुए हरियाणा में महिलाओं के लिए चलाई गई योजनाएं भी गिनाईं। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले हमने महिलाओं से 2100 रुपये प्रतिमाह देने का वादा किया था। प्रदेश में 10 लाख महिलाओं को प्रतिमाह 2100 रुपये मिल रहे हैं। अब तक महिलाओं के खातों में 2000 करोड़ रुपये भिजवाए जा चुके हैं।

    इसी प्रकार सरकार 1.80 लाख रुपये सालाना आमदनी वाले परिवारों की रसोई में 500 रुपये में गैस सिलेंडर पहुंचा रही है। प्रदेश में स्वयं सहायता समूह चलाने वाली बहनों को मजबूत करने के लिए 20 लाख रुपये तक की आर्थिक मदद की जा रही है। हरियाणा में स्वदेशी मेले लगाकर महिलाएं चार दिन में चार लाख से 45 लाख रुपये तक की आमदनी कर रही हैं।

    पंजाब की महिलाओं को भी मिलेगी राशि
    गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक भोजन के लिए 6000 रुपये की राशि प्रदान की जा रही है। गरीब परिवारों को प्लाट, मकान और फ्लैट की चाबियां सौंपी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि यही सब योजनाएं पंजाब में भाजपा सरकार बनने के बाद यहां के लोगों के लिए भी लागू की जाएंगी।

    हरियाणा की तरह पंजाब के किसानों की सभी फसलों को भी एमएसपी पर खरीदा जाएगा और आलू सहित अन्य सब्जियों व फलों के लिए भावांतर भरपाई योजना लागू की जाएगी। यहां नशे का कारोबार करने वाले या तो यह काम छोड़ देंगे या पंजाब छोड़ देंगे। बिना पर्ची-बिना खर्ची युवाओं को नौकरियां दी जाएंगी और नौकरियों में चल रहे भ्रष्टाचार के जाल को पूरी तरह से खत्म कर दिया जाएगा।

  • CJP के अल्टीमेटम के बाद राजस्थान में हलचल, CM भजनलाल ने बुलाई लॉ एंड ऑर्डर बैठक

    CJP के अल्टीमेटम के बाद राजस्थान में हलचल, CM भजनलाल ने बुलाई लॉ एंड ऑर्डर बैठक

    जयपुर
    कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा राजस्थान सरकार को दिया गया 48 घंटे का अल्टीमेटम समाप्त हो गया है, जिसके तुरंत बाद जयपुर के प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। इस बीच मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने लॉ एंड ऑर्डर पर उच्चस्तरीय बैठक बुलाकर पुलिस व गृह विभाग के शीर्ष अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। इस समीक्षा बैठक में पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कुमार शर्मा, अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) भास्कर ए. सावंत सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। प्रदेश के गृह मंत्री का प्रभार भी संभाल रहे सीएम भजनलाल शर्मा ने राज्य में किसी भी कीमत पर कानून व्यवस्था बनाए रखने का कड़ा संदेश दिया है।

    गौरतलब है कि बगरू के कंवरापुरा प्राथमिक विद्यालय में सीजेपी कार्यकर्ताओं पर हुए हमले और गाड़ियों में तोड़फोड़ के मामले को लेकर माहौल गरमाया हुआ है। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके और सह-संयोजक आशुतोष रांका द्वारा हमलावरों की गिरफ्तारी न होने पर जयपुर में दिल्ली के 'जंतर-मंतर' जैसी बेमियादी हड़ताल शुरू करने की चेतावनी दी गई थी, जिसकी समयसीमा पूरी होते ही पुलिस महकमा पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है।

    राजस्थान को अराजक राज्य नहीं बनने देंगे : आशुतोष रांका
    अल्टीमेटम का समय समाप्त होते ही CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर घटना का अनएडिटेड वीडियो दोबारा शेयर करते हुए राजस्थान पुलिस और मुख्यमंत्री को टैग किया। रांका ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए तीखा हमला बोला, और कहा "CJP सदस्यों पर हुई हिंसा को लगभग 48 घंटे हो चुके हैं। मैं तोड़फोड़ और हिंसा में शामिल लोगों के स्पष्ट दृश्यों को दिखाने वाले वीडियो का अनएडिटेड संस्करण फिर से शेयर कर रहा हूं। पुलिस ने अभी तक इन उपद्रवियों को गिरफ्तार क्यों नहीं किया है? यदि आपके पास हिंसा में शामिल CJP के किसी भी सदस्य (मेरे सहित) का प्रमाण है, तो हमें भी गिरफ्तार करें। निश्चित रूप से, उस सबूत को सार्वजनिक रूप से साझा करने के लिए तैयार रहें। हम राजस्थान को एक अराजक राज्य नहीं बनने देंगे।

    'बंद कमरे' की बैठक, सीएम भजनलाल के निर्देश
    जयपुर में कानून व्यवस्था बिगड़ने की आशंका को देखते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने उच्च अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में शांति भंग करने या कानून अपने हाथ में लेने वालों के साथ सख्ती से निपटा जाए। किसी भी राजनीतिक संगठन या समूह द्वारा सरकारी व्यवस्था में बाधा डालने या माहौल बिगाड़ने की कोशिशों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    जानकारी के मुताबिक़ जयपुर और आसपास के इलाकों में संभावित बेमियादी धरने और विरोध प्रदर्शनों की आशंका को देखते हुए खुफिया तंत्र (Intelligence) को अलर्ट मोड पर रहने को कहा गया है। कंवरापुरा मामले में दर्ज दोनों पक्षों की क्रॉस एफआईआर (Cross FIR) पर निष्पक्ष और त्वरित जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।

    आंदोलन और कानून व्यवस्था के बीच फंसा मामला
    एक तरफ जहां सीजेपी के 'स्कूल ठीक करो' अभियान के तहत कंवरापुरा स्कूल के लिए 18 लाख रुपये का बजट मंजूर किया जा चुका है, वहीं दूसरी तरफ सीजेपी नेता हमलावरों और गाड़ियों के कांच तोड़ने वालों की गिरफ्तारी की मांग पर अड़े हुए हैं। जयपुर पुलिस ने इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया है। अब देखना यह होगा कि अल्टीमेटम की समयसीमा खत्म होने के बाद सीजेपी की आगामी रणनीति क्या रहती है और पुलिस प्रशासन इस मामले में क्या कानूनी कदम उठाता है।

  • बिहार में जल्द एक कार्ड से बस, मेट्रो और ट्रेन का सफर, NCMC लागू करने की तैयारी

    बिहार में जल्द एक कार्ड से बस, मेट्रो और ट्रेन का सफर, NCMC लागू करने की तैयारी

    पटना
     बिहार में जल्द ही एसी-डिलक्स बस, पटना मेट्रो और रेल से यात्रा करने के लिए अलग-अलग टिकट या कार्ड रखने की जरूरत नहीं होगी। राज्य में नेशनल कामन मोबिलिटी कार्ड (एनसीएमसी) लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके तहत एक ही कार्ड से कई परिवहन माध्यमों में यात्रा की सुविधा मिल सकेगी।

    परिवहन विभाग ने शुरू की तैयारी, वेंडर की तलाश
    परिवहन विभाग के सचिव राजकुमार ने अधिकारियों को एनसीएमसी से संबंधित प्रस्ताव जल्द तैयार करने का निर्देश दिया है।

    इसके लिए वेंडर की तलाश भी शुरू कर दी गई है। उत्तर प्रदेश और दिल्ली समेत कई राज्यों में यह व्यवस्था पहले से लागू है।

    बिहार के कार्ड से दिल्ली-मुंबई में भी सफर संभव
    एनसीएमसी का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि बिहार में जारी कार्ड का इस्तेमाल दूसरे राज्यों के सार्वजनिक परिवहन में भी किया जा सकेगा।

    बिहार का यात्री दिल्ली, लखनऊ या मुंबई जाने पर वहां अलग मेट्रो कार्ड या बस टिकट लेने की जरूरत से बच सकता है। टोल भुगतान में भी कार्ड के इस्तेमाल की सुविधा होगी

    बस-मेट्रो में टच करते ही होगा डिजिटल भुगतान
    यह कार्ड रुपे कार्ड की तरह काम करेगा। यात्री कार्ड को संबंधित मशीन पर टच कर भुगतान कर सकेंगे। इससे टिकट काउंटर पर लंबी कतार में लगने की जरूरत कम होगी। कार्ड को यूपीआइ के माध्यम से रिचार्ज करने की सुविधा भी उपलब्ध होगी।

    अब मोबाइल पर पता चलेगा आपकी बस कहां पहुंची
    परिवहन विभाग यात्रियों की सुविधा के लिए ‘व्हेयर इज माय बस’ एप भी विकसित करने की तैयारी कर रहा है। यह एप ‘व्हेयर इज माय ट्रेन’ की तर्ज पर काम करेगा। यात्री मोबाइल पर बस की लोकेशन और उसके संभावित पहुंचने का समय देख सकेंगे।

    लाइव ट्रैकिंग से बस अड्डों पर भीड़ होगी कम
    एप के माध्यम से बिहार राज्य परिवहन निगम की बसों की लाइव ट्रैकिंग की जाएगी। इसमें ई-टिकटिंग समेत अन्य सेवाओं को भी जोड़ा जाएगा। इससे यात्रियों को बस के इंतजार में लंबे समय तक बस अड्डे पर खड़े रहने की जरूरत नहीं होगी।

    यात्रियों के साथ स्वजनों का भी बचेगा समय
    बस की लाइव लोकेशन मिलने से यात्रियों को अपनी यात्रा की बेहतर जानकारी मिलेगी। उन्हें लेने आने वाले स्वजन भी बस के पहुंचने का अनुमान पहले से लगा सकेंगे।

    विभाग का मानना है कि इससे बस अड्डों पर अनावश्यक भीड़ कम होगी और यात्रियों के साथ उनके स्वजनों का समय भी बचेगा।

     

  • हरियाणा विधानसभा का मानसून सत्र 27 अगस्त से, तीन दिन होगी सदन की कार्यवाही

    हरियाणा विधानसभा का मानसून सत्र 27 अगस्त से, तीन दिन होगी सदन की कार्यवाही

     चंडीगढ़
     हरियाणा विधानसभा का 27 अगस्त को शुरू हो रहा मानसून सत्र एक सितंबर तक चलेगा। वीरवार को सुबह 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होगी, जो शाम तक चलेगी। इसके बाद शुक्रवार को रक्षा बंधन का अवकाश होगा, जबकि अगले दो दिन शनिवार और रविवार का अवकाश है। तीन दिन के अवकाश के बाद 31 अगस्त और एक सितंबर को सदन की बैठकें होंगी। इस तरह कुल तीन दिन काम होगा।

    विधानसभा सचिवालय ने शनिवार को मानसून सत्र का अस्थाई कार्यक्रम जारी कर दिया। हालांकि सत्र की अवधि पर अंतिम निर्णय कार्य सलाहकार समिति (बीएसी) की बैठक में होगा। विधानसभा सचिवालय की ओर से सदन में पहले दिन की कार्यवाही के लिए विधायकों के 20 तारांकित और 20 अतारांकित सवाल शामिल किए गए हैं।

    इनेलो विधायक अर्जुन चौटाला ने 1107 निजी स्कूलों को बंद करने के बारे में जानकारी मांगी है, जबकि कांग्रेस विधायक आदित्य सुरजेवाला ने वर्ष 2017 से अब तक हृदय, फेफड़ों, कैंसर और हेपेटाइटिस से हुई मृत्यु का ब्योरा मांगा है।

    कांग्रेस विधायक बलवान सिंह दौलतपुरिया ने सरकारी स्कूलों में छठी कक्षा से विशेष कौशल विकास पाठ्यक्रम शुरू करने, नरेश सेलवाल ने एचसीएस अधिकारियों को अन्य राज्यों के अधिकारियों की तर्ज पर उच्च वेतनमान की जानकारी मांगी है। तारांकित सवालों के जवाब सदन में मंत्री खुद देंगे, जबकि अतारांकित सवालों के जवाब सदन में टेबल किए जाएंगे।

    बूचड़खानों और मांस की दुकानों को नहीं लेने पड़ेंगे दोहरे लाइसेंस
    हरियाणा में बूचड़खानों और मांस की दुकानों को दोहरे लाइसेंस नहीं लेने पड़ेंगे। अध्यादेश को कानून में बदलने के लिए प्रदेश सरकार मानसून सत्र में दो विधेयक पारित कराने जा रही है। सत्र में करीब एक दर्जन विधेयक सदन पटल पर रखे जाएंगे।

     

  • झारखंड शिक्षक नियुक्ति विवाद में अभ्यर्थियों को अंतिम मौका, 2 सप्ताह में देना होगा दावा

    झारखंड शिक्षक नियुक्ति विवाद में अभ्यर्थियों को अंतिम मौका, 2 सप्ताह में देना होगा दावा

    रांची
     वन मैन फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के अध्यक्ष सेवानिवृत्त जस्टिस गौतम कुमार चौधरी ने स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2016 की नियुक्ति से जुड़े विवाद में अभ्यर्थियों को अपना दावा पेश करने का अंतिम मौका दिया गया है।

    शनिवार को मामले की आनलाइन सुनवाई करते हुए कमेटी सभी प्रार्थियों को दो सप्ताह के भीतर अपना दावा और संबंधित विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। कमेटी ने स्पष्ट किया कि तय समय सीमा के बाद किसी भी नए दावे पर विचार नहीं किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 12 सितंबर को होगी।

    प्रार्थियों को अपने दावे में यह बताना होगा कि वे नियुक्ति के लिए किस आधार पर योग्य हैं। साथ ही, उन्हें अपनी श्रेणी में उनसे कम अंक पाने वाले ऐसे अभ्यर्थी का विवरण देना होगा, जिसका चयन हो चुका है। प्रार्थियों को अपने प्राप्त अंकों का पूरा विवरण भी देना होगा।

    शनिवार की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स, तान्या सिंह, शुभम मिश्रा सहित अन्य अधिवक्ताओं ने आनलाइन अपना पक्ष रखा।

    जांच रिपोर्ट के लिए तीन माह का अतिरिक्त समय
    बता दें कि स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक नियुक्ति से जुड़े मामले में हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने मीना कुमारी एवं अन्य से संबंधित 257 याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए मामले की जांच के लिए वन मैन फैक्ट फाइंडिंग कमेटी का गठन किया था।

    कमेटी का अध्यक्ष हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त जस्टिस गौतम कुमार चौधरी को बनाया गया है। हाई कोर्ट ने कमेटी को जांच पूरी कर तीन माह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद जांच रिपोर्ट पेश नहीं हो सकी।

  • राजस्थान के सरकारी स्कूलों का होगा कायाकल्प, 3 साल में 12,500 करोड़ रुपए खर्च

    राजस्थान के सरकारी स्कूलों का होगा कायाकल्प, 3 साल में 12,500 करोड़ रुपए खर्च

    जयपुर
     सरकारी स्कूलों की जर्जर इमारतों और बदहाल बुनियादी सुविधाओं पर लंबे समय से उठ रहे सवालों के बीच राजस्थान सरकार ने बड़े बदलाव की तैयारी की है। झालावाड़ में स्कूल भवन गिरने से 7 बच्चों की मौत के बाद हाईकोर्ट की सख्ती और राजस्थान पत्रिका की ओर से लगातार एक साल तक मुद्दा उठाए जाने के बाद सरकार ने स्कूलों के कायाकल्प का रोडमैप तैयार किया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2028-29 तक 12,500 करोड़ रुपए खर्च कर सरकारी स्कूलों को सुरक्षित, आधुनिक और डिजिटल बनाने की योजना है। प्रदेश के 41 जिलों में सरकारी स्कूल भवनों का तकनीकी सर्वे कराया गया।

    सर्वे में सामने आई जरूरतों के आधार पर तीन साल की कार्य योजना तैयार की गई है। दिसंबर तक डिजिटल ढांचा विकसित होगा। डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए दिसंबर 2026 तक 1,087 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इसके तहत विद्यार्थियों को 80 हजार टैबलेट उपलब्ध कराने के लिए 100 करोड़ रुपए का प्रावधान है। वहीं 9 हजार स्मार्ट क्लासेज विकसित करने पर 107 करोड़ रुपए खर्च होंगे। कंप्यूटर शिक्षा को मजबूत करने के लिए 7 हजार आईसीटी लैब्स स्थापित की जाएंगी, जिन पर 880 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

    स्कूलों के लिए कई स्रोतों से जुटेगा पैसा
    अब विधायक कोष में प्रति विधायक 5 करोड़ रुपए के वार्षिक प्रावधान में से 20 प्रतिशत राशि स्कूलों के बुनियादी ढांचे पर खर्च करना अनिवार्य किया है। डांग, मगरा और मेवात विकास योजनाओं में स्कूलों की मरम्मत के लिए बजट का हिस्सा 15 से बढ़ाकर 20 प्रतिशत किया है।

    5 हजार ग्राम पंचायतों में अटल ज्ञान केंद्र
    राज्य की 5 हजार ग्राम पंचायतों में 750 करोड़ रुपए की लागत से अटल ज्ञान केंद्र स्थापित होंगे। प्रत्येक केंद्र पर 15 लाख रुपए खर्च होंगे। खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए वीबीजी रामजी योजना के तहत ग्राम पंचायत स्तर पर चरणबद्ध तरीके से स्टेडियम बनाए जाएंगे। इसके लिए प्रतिवर्ष 500 से 1,000 करोड़ रुपए तक का प्रावधान किया जाएगा।

    बालिकाओं के लिए सुविधाओं पर भी फोकस
    2,326 स्कूलों में नए बालिका शौचालय बनाने के प्रस्ताव तैयार किए गए हैं। 5 नए बालिका सैनिक स्कूल, 13 डाइट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस व 79 छात्रावास भवनों पर काम हो रहा है।

    181 भवनों का निर्माण शुरू
    वर्तमान में 3,006.34 करोड़ रुपए के विद्यालय विकास कार्य स्वीकृति, निविदा या क्रियान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं। इनमें 518 नए विद्यालय भवनों के लिए 620 करोड़ के काम स्वीकृत या निविदा प्रक्रिया में हैं। इनमें से 181 भवनों का निर्माण शुरू हो चुका है।

    नए क्लासरूम और भवन बनेंगे
    2,487.75 करोड़ रुपए की लागत से 3,587 नए विद्यालय भवन बनाए जाएंगे। 8,378.30 करोड़ रुपए से 83,783 नए कक्षा-कक्षों का निर्माण होगा। 22,589 स्कूलों में 1,129.45 करोड़ रुपए से मेजर रिपेयर और सुरक्षात्मक कार्य होंगे। 13,616 नए शौचालय परिसरों के निर्माण के लिए 340.40 करोड़ रुपए का प्रावधान।

  • राजस्थान में मानसून पड़ा कमजोर, सामान्य बारिश का 65% ही हुआ पूरा

    राजस्थान में मानसून पड़ा कमजोर, सामान्य बारिश का 65% ही हुआ पूरा

     जयपुर
    राजस्थान में मानसून की बेरुखी का असर बारिश और बांधों पर देखने को मिल रहा है। जल संसाधन विभाग के मानसून के 50 दिन के आंकड़ों को देखें तो 30 सितंबर तक सामान्य बारिश का 424.71 मिमी का आंकड़ा भी पूरा होना मुश्किल दिख रहा है। आधा सीजन निकलने के बाद भी 278.44 मिमी ही बारिश हो सकी है, जो कुल सामान्य बारिश का करीब 65 फीसदी है। मौसम विभाग ने भी आगामी दिनों में भारी बारिश की कोई संभावना नहीं जताई है। वहीं, गत वर्ष 22 अगस्त तक 424.71 मिमी के मुकाबले 453 मिमी बारिश दर्ज की गई थी, जो सामान्य से 0.16 फीसदी अधिक थी।

    पिछले साल बाढ़ के हालात
    पिछले साल मानसून में कोटा, बूंदी, बारां, सवाई माधोपुर, टोंक, झालावाड़, चित्तौड़गढ़, बाड़मेर और जोधपुर समेत 12 जिलों में बाढ़ के हालात बन गए थे। बूंदी समेत कई जिलों का आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से हवाई सर्वे भी कराया गया था। वहीं, 693 बांधों में से 286 बांध लबालब हो गए थे, लेकिन इस साल केवल 40 बांध ही भर सके हैं।

    तेज धूप और उमस से परेशानी
    जयपुर समेत प्रदेशभर में बारिश का दौर धीमा पड़ गया है। पश्चिमी जिले सूखे रहे, वहीं पूर्वी जिलों में कहीं-कहीं हल्की बूंदाबांदी दर्ज की गई। सर्वाधिक बारिश कामां (डीग) में 10 मिमी दर्ज की गई। जयपुर में भी तेज धूप और उमस से लोग परेशान रहे। सर्वाधिक तापमान श्रीगंगानगर में 39.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। चूरू में 38, बीकानेर में 36.4, फलोदी में 35.4 और फतेहपुर में 35.5 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ।

    माउंट आबू : नक्की झील में चली चादर, ओवरफ्लो देखने उमड़े लोग
    माउंट आबू (सिरोही)। पर्वतीय पर्यटन स्थल माउंट आबू में रुक-रुककर हो रही बारिश से ऐतिहासिक नक्की झील में शनिवार को चादर चल पड़ी। झील के ओवरफ्लो से बहते पानी का नजारा देखने के लिए सुबह से ही लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। चादर चलने की खबर शहर में फैलते ही लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई और कई जगह मिठाइयां बांटकर जश्न मनाया गया। माउंट आबू में शनिवार सुबह आठ बजे तक बीते 24 घंटों में 7 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इसके साथ ही मानसून सीजन में अब तक कुल 1071 मिलीमीटर बारिश हो चुकी है। लगातार बारिश के चलते शनिवार अलसुबह करीब साढ़े पांच बजे जलग्रहण क्षेत्रों से पानी की आवक बढ़ी और दक्षिणी तट स्थित झील के ओवरफ्लो से चादर चल पड़ी। चादर देखने के लिए नक्की झील के परिक्रमा पथ पर लोगों का जमावड़ा लग गया। ओवरफ्लो के दक्षिणी और उत्तरी दरवाजे से पानी बहने की खबर मिलते ही लोग दुपहिया वाहनों, साइकिलों और पैदल झील की ओर पहुंचने लगे। दिनभर लोगों की आवाजाही बनी रही।

  • बिहार में KYP केंद्रों पर संकट, 1700 से अधिक केंद्र बंद होने की आशंका

    बिहार में KYP केंद्रों पर संकट, 1700 से अधिक केंद्र बंद होने की आशंका

    पटना
    कुशल युवा कार्यक्रम के तहत बीते दस वर्षों से युवाओं का कौशल विकास करने वाले 17 सौ से अधिक केंद्रों पर अब ताला लटक जाएगा। युवा रोजगार एवं कौशल विकास विभाग ने अब इस कार्यक्रम में संशोधन कर तकनीकी पाठ्यक्रम शुरू करने का निर्णय लिया है। विभाग के इस निर्णय से केंद्र चला रहे संचालकों के 200 करोड़ डूब जाएंगे। साथ ही लगभग 10 हजार लोगों का बेरोजगार होना भी तय है। दरअसल, बीते दिनों राज्य कैबिनेट से कुशल युवा कार्यक्रम संशोधन के साथ अगले पांच वर्षों तक जारी रखने का प्रस्ताव पारित हुआ।

    इसके बाद केवाईपी केंद्र चला रहे संचालकों ने जब विभागीय अधिकारियों से संपर्क साधा तो साफ कर दिया गया कि उनके केंद्रों में नए पाठ्यक्रमों की पढ़ाई नहीं होगी। विभाग ने यह भी साफ कर दिया कि यह कार्यक्रम राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों, प्रखंड कौशल विकास केंद्रों, प्रखंड स्तरीय राजकीय महाविद्यालयों एवं अन्य संस्थान तथा सरकार के अन्य संसाधनों आदि की उपलब्ध अवसंरचना के माध्यम से संचालित किया जाएगा।

    युवाओं को वर्तमान उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप उच्चस्तरीय और नई तकनीक वाले क्षेत्रों में, जिनकी बाजार में ज्यादा मांग है मसलन-सोलर, ड्रोन तकनीक, नेटवर्किंग, होम नर्सिंग, मल्टी-स्किल्ड वर्कर, लैब तकनीशियन, इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन, ब्यूटी एवं वेलनेस, बेकरी, इन्फॉरमेशन टेक्नोलॉजी, डिजिटल मार्केटिंग, बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं, टैली, विदेशी भाषा एवं उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाएगा।

    हालांकि, विभाग ने यह जरूर कहा कि इस प्रक्रिया में पूर्व में नवीनीकरण योग्य पाए गए कौशल विकास केन्द्रों के संचालकों/एजेंसियों को चयन की पात्रता निर्धारण के निमित्त अपनायी जाने वाली प्रक्रिया में प्राथमिकता दी जाएगी। विभाग का कहना है कि कुशल युवा कार्यक्रम के पाठ्यक्रमों को राष्ट्रीय मानकों (एनएसक्यूएफ) के अनुरूप संशोधित कर कुशल युवा कार्यक्रम तकनीकी के रूप में लागू किया जा रहा है। इससे इन केंद्रों से प्रशिक्षित बच्चों को देश में कहीं भी रोजी-रोजगार मिल सकेगा।

    सात निश्चय-1 से चल रहा प्रशिक्षण
    सात निश्चय एक के तहत 2016 में आर्थिक हल युवाओं का बल के तहत युवाओं को रोजगार और कौशल विकास के लिए कुशल युवा कार्यक्रम के तहत कौशल विकास केंद्र का संचालन हो रहा था। सात निश्चय दो में भी इसका संचालन जारी रहा। अब तक लगभग 33 लाख से अधिक छात्रों ने इन केंद्रों में नामांकन कराया। इसमें से लगभग 26 लाख को प्रशिक्षण दिया गया है। विभाग ने पहले ही 400 से अधिक केंद्रों को बंद कर दिया है। अब संशोधन होने के बाद बाकी 13 सौ केंद्रों के बंद होने का खतरा मंडरा गया है। सवाल यह है कि जब एक दशक से बिहार में इन केंद्रों का संचालन हो रहा था तो फिर इसे अचानक से बंद कर लोगों की 200 करोड़ की पूंजी क्यों पर दांव लगाई जा रही है।

    साथ ही क्या 26 लाख बच्चे जिन्हें प्रशिक्षण मिला, वे अब नए सिरे से प्रशिक्षण की बात नहीं करेंगे। ताकि उन्हें भी देश के अन्य राज्यों में रोजी-रोजगार मिल सके। सरकार के इस कदम में बिहार के दसवीं पास गरीब बच्चे कंप्यूटर, भाषा और संवाद का प्रशिक्षण हासिल नहीं कर सकेंगे। कुशल युवा कार्यक्रम बचाओ अभियान समिति के राज्य संयोजक, राहुल सिंह कैबिनेट से कुशल युवा कार्यक्रम का विस्तार हुआ है। इसलिए पहले से चल रहे कौशल विकास केंद्रों पर शीघ्र प्रशिक्षण शुरू किया जाए। सभी केंद्रों को इस सत्र के लिए नवीनीकरण किया जाए, क्योंकि दो लाख से अधिक छात्र पंजीकृत हो चुके हैं। अगर हमारे साथ न्याय नहीं हुआ तो हम सभी संगठित होकर लड़ाई लड़ेंगे।