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  • Punjab Schools: सरकारी स्कूलों में अब नहीं रहेगी गंदगी! सफाई से सुरक्षा तक मुखी होंगे जिम्मेदार

    Punjab Schools: सरकारी स्कूलों में अब नहीं रहेगी गंदगी! सफाई से सुरक्षा तक मुखी होंगे जिम्मेदार

    चंडीगढ़
     पंजाब के सरकारी स्कूलों में स्टूडेंट्स को साफ-सुथरा और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के लिए शिक्षा विभाग ने प्रदेशभर में स्कूल क्लीनलिनेस एंड रेडीनेस ड्राइव चलाने के निर्देश दिए हैं। स्कूलों में गंदगी, कूड़े के ढेर और अव्यवस्थित परिसर को लेकर सामने आ रही स्थिति को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को सरकारी स्कूलों में विशेष सफाई अभियान चलाने को कहा है।

    स्कूल परिसर की सफाई से लेकर शौचालय, पेयजल, बिजली फिटिंग, अग्निशमन यंत्र, प्राथमिक उपचार किट और मिड-डे मील तक की व्यवस्था जांचने के निर्देश दिए गए हैं। डायरेक्टर स्कूल शिक्षा (सेकेंडरी), पंजाब की ओर से 21 अगस्त को जारी पत्र में कहा गया है कि आम तौर पर देखने में आया है कि कई स्कूलों में परिसर और आसपास का क्षेत्र साफ नहीं रहता तथा जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे होते हैं।

    इससे विद्यार्थियों और अध्यापकों में विभिन्न प्रकार की बीमारियां फैलने का खतरा बना रहता है। ऐसे में स्कूल मुखी को पूरे परिसर का फिजिकल वाकथ्रू कर तत्काल दूर की जा सकने वाली कमियों की पहचान कर उन्हें दूर करवाना होगा।

    कक्षा से खेल मैदान तक सफाई जरूरी
    विभाग ने स्पष्ट किया है कि स्कूल का पूरा परिसर, कक्षाएं, गलियारे, खेल मैदान और आसपास का क्षेत्र कूड़े-कचरे, मलबे, अपशिष्ट और गैरजरूरी सामान से पूरी तरह मुक्त होना चाहिए। जहां निर्माण या मरम्मत का काम चल रहा है, वहां निर्माण सामग्री और मलबे को उचित तरीके से हटाने या सुरक्षित स्थान पर रखने के निर्देश दिए गए हैं।

    खराब बिजली फिटिंग तुरंत ठीक होंगी कक्षाओं, प्रयोगशालाओं और पुस्तकालयों में ढीली या खराब बिजली फिटिंग, स्विच तथा अन्य छोटी-मोटी मरम्मत वाली वस्तुओं को तत्काल ठीक करवाने को कहा गया है। इससे विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।

    शौचालय और पेयजल व्यवस्था पर विशेष जोर
    लड़कों और लड़कियों के सभी शौचालय साफ-सुथरे, कार्यशील और पानी व रोशनी की सुविधा से युक्त होने चाहिए। हाथ धोने के स्थानों पर पानी और साबुन की उपलब्धता भी अनिवार्य की गई है। पेयजल की सभी सुविधाएं साफ और चालू हालत में रखने को कहा गया है।

    फायर एक्सटिंग्विशर और फर्स्ट एड किट आसानी से उपलब्ध हों
    स्कूलों में अग्निशमन यंत्र और प्राथमिक उपचार किट सही स्थिति में तथा ऐसे स्थान पर रखी जाएं, जहां जरूरत पड़ने पर आसानी से पहुंचा जा सके। दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए आने-जाने के रास्ते और उपलब्ध सुविधाएं भी साफ, बाधारहित और उपयोग योग्य रखने के निर्देश हैं।

    मिड-डे मील में सफाई और तय मेन्यू जरूरी
    स्कूलों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि मिड-डे मील निर्धारित मेन्यू के अनुसार नियमित रूप से दिया जा रहा हो। भोजन साफ-सुथरे और स्वच्छ तरीके से तैयार किया जाए तथा विद्यार्थियों को पर्याप्त मात्रा में परोसा जाए।

    स्कूल मुखी अभियान की समग्र जिम्मेदारी संभालेंगे और जरूरत के अनुसार स्टाफ को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपेंगे। स्कूल स्टाफ कक्षाओं, शौचालयों, गलियारों, खेल मैदानों और अन्य क्षेत्रों की सफाई व रखरखाव सुनिश्चित करेगा। सफाई, सुरक्षा, पानी और बिजली से जुड़ी स्कूल स्तर पर दूर की जा सकने वाली कमियों की तत्काल पहचान कर उन्हें ठीक कराया जाएगा।

    एसएमसी भी करेगी निगरानी में सहयोग
    स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (एसएमसी) के सदस्यों को भी स्कूल की सफाई, सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं की समीक्षा में स्कूल मुखी का सहयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। शिक्षा विभाग ने यह निर्देश समूह जिला शिक्षा अधिकारियों (प्राइमरी और सेकेंडरी) को जारी किए हैं। पत्र में अभियान को प्रभावी ढंग से लागू कर सरकारी स्कूलों को विद्यार्थियों के लिए साफ, सुरक्षित और तैयार रखने पर जोर दिया गया है।

     

  • 24 जिलों में निकलेगी भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा, 24 अगस्त से झारखंड में छात्र आंदोलन का नया चरण

    24 जिलों में निकलेगी भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा, 24 अगस्त से झारखंड में छात्र आंदोलन का नया चरण

    रांची
    जेपीएससी-जेएसएससी भ्रष्टाचार मुक्त भर्ती अभियान को अब भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा से नई गति मिलेगी। पिछले करीब 26 दिनों से चल रहे जेपीएससी जेएसएससी-सीजीएल आंदोलन के स्थगन के बाद नए सिरे से पूरे राज्य में भ्रष्टाचार मुक्त भर्ती अभियान के तहत भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा चलाई जाएगी।

    यह यात्रा झारखंड के सभी 24 जिलों के प्रमुख स्थानों पर जाएगी। इस दौरान शैक्षणिक संस्थानों, पुस्तकालयों, विश्वविद्यालयों एवं छात्र समुदाय के बीच जनजागरण अभियान चलाया जाएगा और भर्ती व्यवस्था में सुधार एवं पारदर्शिता को लेकर छात्रों को जागरूक किया जाएगा। यात्रा को सफल बनाने के लिए मार्गदर्शक टीम, मैनेजमेंट टीम, प्लानिंग टीम एवं इंटरनेट मीडिया हैंडलिंग टीम का गठन किया गया है।

    इसे लेकर छात्र नेता देवेेंद्रनाथ महतो कहते हैं कि 26 वर्षों से झारखंड की भर्ती व्यवस्था में अनियमितता, अपारदर्शिता, भ्रष्टाचार, पेपर लीक, धांधली एवं पैरवी से नौकरी पाने जैसी समस्याओं का अंबार लग चुका है।

    वर्तमान समय में जेपीएससी एवं जेएसएससी में हो रहे भ्रष्टाचार, पेपर लीक एवं धांधली के खिलाफ चल रहा आंदोलन अब एक नए रूप में सामने आ सकता है।

    शिबू सोरेन के गांव से निकलेगी यात्रा
    छात्र नेताओं ने कहा कि 24 अगस्त से दिशोम गुरु शिबू सोरेन के पैतृक गांव नेमरा, रामगढ़ से भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा का शुभारंभ किया जाएगा। जिसका उद्देश्य पूरे राज्य में शैक्षणिक व्यवस्था के साथ साथ भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह से पारदर्शी बनाना और भ्रष्टाचार को दूर करने का है।

    गत दिनों हुए आंदोलन के बारे देवेंद्र कहते हैं कि इस संघर्ष की शुरुआत 2 जुलाई से, आंदोलन की शुरुआत 5 जुलाई से, सत्याग्रह की शुरुआत 25 जुलाई से तथा भूख हड़ताल आंदोलन की शुरुआत 2 अगस्त से की गई।

    पूरे राज्य के छात्रों का व्यापक जनसमर्थन मिला और झारखंड सरकार द्वारा 45 परीक्षाओं पर कार्रवाई की गई, जिसमें 22 परीक्षाएं रद, 17 परीक्षाओं पर जांच तथा 6 परीक्षाएं स्थगित की गईं।

    आंदोलन के अगले चरण की घोषणा करते कहा कि 24 अगस्त से दिशोम गुरु शिबू सोरेन के पैतृक गांव नेमरा, रामगढ़ से भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा का शुभारंभ किया जाएगा

    इस अभियान में देवेंद्रनाथ महतो के अलावा राजेश, चंदन रजक, रवि, अयूब अली, विमल महतो, राजेश्वर, विमल कुमार, कमलेश, अंकित एवं प्रेम कुमार सहित अन्य छात्र प्रतिनिधियों का सहयोग रहेगा।देवेंद्र ने कहा कि झारखंड राज्य गठन के बाद से ही भर्ती व्यवस्था में अनियमितता, अपारदर्शिता, भ्रष्टाचार, पेपर लीक, धांधली एवं पैरवी से नौकरी पाने जैसी समस्याओं से यहां के प्रतिभावान युवा त्रस्त रहे हैं।

    सभी छात्रनेता भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, निष्पक्षता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने, लंबित जांच को स्पष्ट रूप से सामने लाने तथा छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों में सरकार से गंभीरता के साथ कार्रवाई करने की मांग पर एकमत हैं।

    सभी छात्र प्रतिनिधियों ने कहा कि यह आंदोलन किसी योग्य एवं निर्दोष अभ्यर्थी के विरोध में नहीं है। आंदोलन का उद्देश्य केवल भ्रष्ट, अपारदर्शी एवं अनियमित भर्ती व्यवस्था में सुधार कराना है, ताकि योग्य अभ्यर्थियों को निष्पक्ष तरीके से उनका अधिकार मिल सके।

    देवेंद्रनाथ महतो ने कहा कि यह लड़ाई झारखंडी छात्रों की है और इसे आगे भी शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से अंजाम तक पहुंचाया जाएगा।

    15 सितंबर की सुनवाई में सरकार से उम्मीद
    देवेंद्रनाथ महतो ने कहा कि 15 सितंबर को होने वाली न्यायालय की सुनवाई में सरकार से उम्मीद है कि वह सीआइडी जांच की रिपोर्ट एवं संबंधित परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों के तथ्यों को मजबूती से न्यायालय के समक्ष रखेगी और अपने निर्णय के पक्ष को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करेगी।

    उन्होंने कहा कि छात्रों के साथ अन्याय होता है, तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर जेपी आंदोलन की तर्ज पर इस संघर्ष को जन आंदोलन से जोड़ा जाएगा तथा सभी 24 जिलों के प्रखंड एवं गांव स्तर तक आमलोगों को आंदोलन से जोड़ा जाएगा। अपने हक और अधिकार से किसी भी परिस्थिति में समझौता नहीं किया जाएगा।

  • राजस्थान में दिन की अतिरिक्त सौर बिजली अब रात में आएगी काम, 172 जीएसएस पर लगेंगे मेगा बैटरी बैंक

    राजस्थान में दिन की अतिरिक्त सौर बिजली अब रात में आएगी काम, 172 जीएसएस पर लगेंगे मेगा बैटरी बैंक

    जयपुर
    राजस्थान के शहरी क्षेत्रों में सौर ऊर्जा से बनने वाली अतिरिक्त बिजली अब व्यर्थ नहीं जाएगी. विद्युत वितरण निगमों ने दिन में बनने वाली अतिरिक्त सौर बिजली को बैटरी में संग्रहित कर रात के समय आपूर्ति करने के लिए पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है. इसके तहत जयपुर, अजमेर और जोधपुर डिस्कॉम के 172 ग्रिड सब-स्टेशनों (जीएसएस) पर मेगा बैटरी बैंक लगाए जाएंगे.

    पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर होगा प्रोजेक्ट
    परियोजना को सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल पर लागू किया जाएगा. दिन में सौर ऊर्जा से बनने वाली अतिरिक्त बिजली को बैटरी बैंक में संग्रहित किया जाएगा और शाम व रात के समय बिजली की मांग बढ़ने पर इसी बिजली की आपूर्ति की जाएगी. पहले चरण में जोधपुर डिस्कॉम के करीब 150, जयपुर डिस्कॉम के 12 और अजमेर डिस्कॉम के 10 जीएसएस को शामिल किया गया है. इनमें जोधपुर, सीकर, झुंझुनूं, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, जयपुर और उदयपुर के शहरी जीएसएस को प्राथमिकता दी गई है.

    3 शर्तें भी हैं शामिल
    बैटरी बैंक और नियंत्रण इकाई लगाने के लिए जीएसएस के पास कम से कम 15 वर्ग मीटर खाली और सुरक्षित जगह होना जरूरी होगा. संबंधित फर्म के साथ 10 वर्ष का समझौता किया जाएगा. वहीं, ऐसे जीएसएस को तकनीकी प्राथमिकता दी जाएगी, जहां रूफटॉप और वाणिज्यिक सौर संयंत्रों का संकेंद्रण अधिक है.

    जीएसएस का सर्वे पूरा
    परियोजना के लिए अगस्त के पहले पखवाड़े में चयनित जीएसएस का सर्वे कराया जा चुका है. अब सर्वे के आधार पर परियोजना को आगे बढ़ाया जाएगा. अधिकारियों के अनुसार, पायलट प्रोजेक्ट के सफल रहने पर इसे प्रदेश के अन्य जीएसएस तक भी विस्तार दिया जा सकता है. इससे फायदा यह होगा कि दिन में उपलब्ध अतिरिक्त सौर बिजली को संग्रहित कर शाम और रात में इस्तेमाल किया जा सकेगा. इससे सौर ऊर्जा का बेहतर उपयोग होगा और बिजली आपूर्ति के प्रबंधन में भी मदद मिलेगी.

  • श्रावणी मेला में 51 लाख से ज्यादा कांवरियों ने किया जलार्पण, बाबा मंदिर को 8.23 करोड़ की आय

    श्रावणी मेला में 51 लाख से ज्यादा कांवरियों ने किया जलार्पण, बाबा मंदिर को 8.23 करोड़ की आय

     देवघर
     श्रावणी मेला के साप्ताहिक प्रेस कांफ्रेंस में उपायुक्त सौरभ कुमार भुवानियां ने अब तक की जानकारी साझा करते कहा कि मेला आरंभ होने से अब तक 51,12,531 कांवरियों ने बाबा बैद्यनाथ का जलार्पण किया है।

    जिसमें शीघ्र दर्शनम कूपन की सुविधा लेने वाले भक्तों की संख्या 1,90,887 रही है। बाबा मंदिर को 8,23,47,741 रुपया की आय हुई है। जिसमें मंदिर के अन्य स्त्रोतों के आय भी शामिल हैं।

    शीघ्रदर्शनम कूपन से कुल आय का 60 प्रतिशत 6,87,19,320 भी इसमें है। परिवहन विभाग द्वारा निबंधित व्यवसायिक वाहनों से राज्य प्रवेश शुल्क के रूप में 70 लाख, वाणिज्य कर वसूली 310.58 लाख प्राप्ति हुई है। उपायुक्त ने जानकारी दी कि विद्युत विभाग को अस्थायी विद्युत कनेक्शन से कुल 73.27 लाख का राजस्व प्राप्त हुआ है।

    नगर निगम द्वारा विभिन्न स्रोत से एक करोड़ से अधिक राजस्व का संग्रहण किया गया है। इसके अलावा खाद्य विभाग द्वारा मेला क्षेत्र में निरीक्षण कर कड़ी कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि अंतिम सोमवारी को अधिक कांवरियों के आने की पूरी उम्मीद है।

    ऐसे में जिला प्रशासन एवं पुलिस के सभी अधिकारी पहले की ही तरह सभी जगहों पर मुस्तैद होकर अपने कर्तव्यों का पालन करेंगे। कांवरियों की सुविधा को लेकर सभी मुकम्मल व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित कर ली गई हैं।

    पुलिस अधीक्षक प्रवीण पुष्कर ने कहा कि 21 अस्थाई ओपी एवं 13 यातायात ओपी सुरक्षा व्यवस्था व यातायात व्यवस्था को लेकर बनाया गया है।

    साथ ही एटीएस, रैफ की टीम, बम डिस्पोजल की टीम, डॉग स्वाक्वायड, क्यूआरटी टीम, 52 पुलिस उपाधीक्षक 92 पुलिस निरिक्षक, 758 सहायक पुलिस निरीक्षक, 1110 सशस्त्र एवं विभिन्न पुलिस बटालियनों की प्रतिनियुक्ति मेला क्षेत्र में की गयी है।

    देवघर की जनता को शीघ्रदर्शनम से मिलेगी पूजा की सुविधा
    जिला प्रशासन ने देवघर की जनता के लिए विशेष पहल की मंशा जाहिर किया है। श्रावणी मेला के अंतिम सप्ताह में यह व्यवस्था दी जाएगी। इसमें देवघर के निवासी को शीघ्रदर्शनम के रास्ते बिना कूपन के जलार्पण कराया जाएगा। उपायुक्त सौरभ कुमार भुवानिया ने स्पष्ट किया कि प्रशासन ने यह विचार किया है।

    जल्द ही इसका अंतिम घोषणा किया जाएगा। भीड़ को देखते हुए बुधवार या गुरूवार की तिथि तय की जाएगी। इस व्यवस्था से पूजा कराने की तिथि तय होने से एक दिन पहले आम जन को प्रशासन की ओर से जानकारी दे दी जाएगी। स्थानीय जिन लोगों को जलार्पण की इच्छा होगी वह प्रशासन के निर्धारित तिथि को आकर लाभ ले सकते हैं।

    यह सुविधा केवल देवघर की जनता को मिलेगी। उनको अपना आधार या कोई भी प्रमाण पत्र जिसमें पता होगा दिखाना होगा। जानकारी हो कि प्रेस कांफ्रेंस में एसडीएम रवि कुमार ने कहा कि सोमवार के बाद और पूर्णिमा से पहले देवघर की जनता को शीघ्रदर्शनम से जलार्पण की मुफ्त सुविधा दी जाएगी। इसका प्रस्ताव तैयार किया गया है। जल्द ही इसका एलान किया जाएगा।

  • मुस्तफा के बयान पर भड़के राजा वड़िंग, कानूनी नोटिस भेजकर कहा- बयान वापस लें और माफी मांगें

    मुस्तफा के बयान पर भड़के राजा वड़िंग, कानूनी नोटिस भेजकर कहा- बयान वापस लें और माफी मांगें

    चंडीगढ़
     पंजाब कांग्रेस में चल रही अंदरूनी खींचतान के बीच लुधियाना से सांसद और पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने पूर्व डीजीपी मोहम्मद मुस्तफा को कानूनी नोटिस भेजा है। मुस्तफा वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री रजिया सुल्ताना के पति हैं।

    वड़िंग ने आरोप लगाया है कि एक साक्षात्कार (इंटरव्यू) के दौरान मुस्तफा ने उनके खिलाफ झूठे, निराधार, अपमानजनक और मानहानिकारक बयान दिए। नोटिस में मुस्तफा से कथित बयानों को तत्काल वापस लेने, बिना शर्त सार्वजनिक माफी मांगने और भविष्य में इस तरह के मानहानिकारक बयान देने से बाज आने को कहा गया है।

    वड़िंग की ओर से भेजे गए नोटिस में कहा गया है कि उनकी प्रतिष्ठा वर्षों की सार्वजनिक सेवा और राजनीतिक कार्य का परिणाम है। इसे नुकसान पहुंचाने का कोई भी प्रयास उनकी व्यक्तिगत छवि के साथ-साथ सार्वजनिक और राजनीतिक प्रतिष्ठा को भी प्रभावित करता है।

    मुस्तफा ने की वड़िंग के नेतृत्व को लेकर टिप्पणी 
    नोटिस के अनुसार मुस्तफा ने एक साक्षात्कार में वड़िंग तथा उनके नेतृत्व को लेकर टिप्पणी की थी। आरोप है कि साक्षात्कार में उनकी बुद्धिमत्ता, क्षमता, निर्णय लेने की योग्यता और नेतृत्व संबंधी जिम्मेदारियां निभाने की क्षमता पर व्यक्तिगत टिप्पणियां की गईं।

    वड़िंग ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि मुस्तफा के बयान किसी राजनीतिक फैसले, नीति या उनके किसी कार्य की आलोचना तक सीमित नहीं थे, बल्कि व्यक्तिगत हमले थे। नोटिस में कहा गया है कि ऐसे बयानों का कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है।

    व्यक्तिगत हमला स्वीकार नहीं
    नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि वड़िंग को उनके राजनीतिक फैसलों, नीतियों या रुख पर वैध असहमति और सद्भावनापूर्ण आलोचना से कोई आपत्ति नहीं है। राजनीतिक विमर्श में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन किसी नेता की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने या उसका उपहास करने के उद्देश्य से व्यक्तिगत हमले स्वीकार्य नहीं हैं।

    पूर्व डीजीपी के पद का हवाला देते हुए नोटिस में कहा गया है कि मुस्तफा अपने बयानों के कानूनी परिणामों से भली-भांति परिचित हैं। उनके पद के कारण उनके बयानों को जनता के बीच अतिरिक्त विश्वसनीयता मिल सकती है, इसलिए उनसे सार्वजनिक टिप्पणियों में अधिक जिम्मेदारी बरतने की अपेक्षा थी।

  • रंधावा का हाईकमान को संदेश- चन्नी जैसा CM चाहिए! बोले- SC, मैं जट्ट सिख, आशू ब्राह्मण; अनुभव और सोशल इंजीनियरिंग का बैलेंस

    रंधावा का हाईकमान को संदेश- चन्नी जैसा CM चाहिए! बोले- SC, मैं जट्ट सिख, आशू ब्राह्मण; अनुभव और सोशल इंजीनियरिंग का बैलेंस

    लुधियाना

    पंजाब कांग्रेस में जारी कलह के बीच चरणजीत सिंह चन्नी खेमे ने उन्हें सीएम फेस बनाने की डिमांड फिर तेज कर दी है। इसे लेकर पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने हाईकमान को लुधियाना से डायरेक्ट मैसेज दिया।

    रंधावा ने कहा कि उन्हें चरणजीत सिंह चन्नी जैसा CM ही चाहिए, जिसने चार महीने में ही सीएम रहते बेहतरीन काम किया और पंजाब के लोग आज भी उन्हें याद करते हैं। रंधावा ने आगे कहा कि चन्नी के पास एक्सपीरियंस भी है और सोशल इंजीनियरिंग का बैलेंस भी।

    इससे पहले चन्नी गुट के नेता लगातार सोशल मीडिया पर चरणजीत सिंह चन्नी के 111 दिन की सरकार की उपलब्धियां गिनाकर उन्हें सीएम फेस बनाने की डिमांड कर चुके हैं।

    उधर, खुद चन्नी हाईकमान को अपने बयानों से असमंजस में डाल रहे हैं। शनिवार को उन्होंने सज्जन कुमार को रोल मॉडल बताने वाले कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड़ा को जुबान संभालकर बात करने को कह दिया है। चन्नी के इस बयान से कांग्रेस हाईकमान को भी असमंजस में डाल दिया।

        'मंत्रियों के घर बैठकर चलाई सरकार': लुधियाना में मीडिया से बात करते हुए सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि चरणजीत सिंह चन्नी हमेशा से एक्टिव रहे। पंजाब के पहले ऐसे चीफ मिनिस्टर हैं, जिनको अगर मंत्रियों के घर जाकर काम करवाना पड़ा तो वो गए। पंजाब को अब भगवंत मान जैसा झूठा चीफ मिनिस्टर नहीं चाहिए, बल्कि चन्नी जैसा काम करने वाला मुख्यमंत्री चाहिए।

        हमारे पास एक्सीरिएंस: रंधावा का कहना है कि हमारे पास एक्सपीरिएंस है। चरणजीत सिंह चन्नी ने 111 दिन की शानदार सरकार चलाई है। उन 111 दिनों में लिए गए फैसलों को लोग आज भी याद करते हैं। उन्होंने कहा कि चन्नी के पास मुख्यमंत्री का अनुभव है। मेरे पास भी मंत्री और डिप्टी सीएम का पद रहा जबकि आशू भी मंत्री रहे हैं। ऐसे हमारे पास कई लीडर हैं जिन्होंने पिछली सरकारों में अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं।

        हम तीन नेता, तीन बड़े वर्ग: चन्नी और भारत भूषण आशू की मौजूदगी में रंधावा ने कहा कि विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस पूरी तरह से स्टैंड कर रही है। यहां तीन बड़े नेता खड़े हैं कि एक चीफ मिनिस्टर, एक डिप्टी चीफ मिनिस्टर और एक मिनिस्टर रह चुका। रंधावा ने कहा कि चन्नी एससी लीडर, मैं जट्ट सिख और आशू ब्राह्मण लीडर । तीनों यहीं पर हैं। अब आप ही बताओ, हम 2027 के लिए हम मजबूती से स्टैंड कर रहे हैं या नहीं?

        स्टोरेज और फसलों के मुद्दे पर अफसरों की क्लास: रंधावा ने कहा कि मैं फूड स्टैंडिंग कमेटी का मेंबर हूं। जिस दिन यह कमेटी पंजाब आएगी, उसी दिन पंजाब सरकार के अफसरों से सीधे सवाल किए जाएंगे। राइस मिलर्स और आढ़तियों के सामने चीफ मिनिस्टर से जवाब-तलबी की जाएगी कि राज्य में अनाज स्टोरेज को लेकर क्या हालात बने हुए हैं।

    2027 के लिए चन्नी गुट की सोशल इंजीनियरिंग

    चन्नी खेमा 111 दिन की सरकार के अनुभव के साथ दलित, जट्ट सिख और शहरी हिंदू/ब्राह्मण वोटों को साधने का संदेश दे रहा है। रंधावा का बयान सीधे कांग्रेस हाईकमान के लिए संकेत है कि 2027 में पंजाब का चुनाव स्थानीय चेहरे, खासकर चरणजीत सिंह चन्नी को आगे रखकर लड़ा जाए। केंद्रीय नेताओं पर चन्नी के तीखे तेवर और पार्टी की गुटबाजी हाईकमान के लिए चुनौती हैं, लेकिन लुधियाना में एकजुटता दिखाकर चन्नी गुट ने अपनी दावेदारी साफ कर दी है।

        चन्नी ने सज्जन कुमार पर क्या कहा: पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के दोषी सज्जन कुमार को लेकर कांग्रेस के भीतर ही तीखा मोर्चा खोल दिया। चन्नी ने उन्हें ‘सिखों का कातिल’, ‘पंजाब का दुश्मन’ और ‘गद्दार’ बताया। उन्होंने कहा कि दिल्ली में सिखों को टायर डालकर जिंदा जलाया गया, ऐसे व्यक्ति को तो सरेआम गोली मार देनी चाहिए थी। चन्नी ने हरियाणा से कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्‌डा के सज्जन कुमार को ‘रोल मॉडल’ बताए जाने पर भी आपत्ति जताते हुए कहा कि ऐसा कहने वालों को संभलकर बोलना चाहिए।

        पार्टी लाइन से अलग जाकर हाईकमान को घेरा: राजनीतिक एक्सपर्ट पवनदीप शर्मा के मुताबिक, चन्नी का बयान सिर्फ सज्जन कुमार पर हमला नहीं, बल्कि कांग्रेस की पुरानी राजनीतिक लाइन पर भी सवाल है। कांग्रेस लंबे समय से 1984 के दंगों को लेकर रक्षात्मक रही है। ऐसे में चन्नी का पार्टी के भीतर से ही इस मुद्दे को आक्रामक तरीके से उठाना हाईकमान के लिए असहज स्थिति पैदा करता है। एक्सपर्ट के अनुसार, यह बयान गांधी परिवार की पुरानी भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े करता है और चन्नी के हाईकमान के खिलाफ बढ़ते तेवरों का संकेत देता है।

        ‘हाईकमान की कमजोर नस पकड़ ली’: राजनीतिक विश्लेषक प्रमोद बातिश के अनुसार, चन्नी ने ऐसे मुद्दे को छेड़ा है, जिस पर कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर हमेशा सावधानी बरतती रही है। उनका कहना है कि चन्नी के तेवरों से हाईकमान से नाराजगी साफ दिखाई देती है। 1984 के दंगों का मुद्दा पंजाब में भावनात्मक रूप से बेहद संवेदनशील है और इसे खुलकर उठाकर चन्नी ने पार्टी नेतृत्व को राजनीतिक रूप से असहज स्थिति में ला दिया है।

  • हरियाणा में निवेश का नया रोडमैप, मुंबई से ‘हैपनिंग हरियाणा 2.0’ की शुरुआत

    हरियाणा में निवेश का नया रोडमैप, मुंबई से ‘हैपनिंग हरियाणा 2.0’ की शुरुआत

     चंडीगढ़
     हरियाणा में निवेश का नया रोडमैप तैयार है। प्रदेश को उत्तर भारत में बड़े निवेश के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी रविवार को मुंबई में ‘हैपनिंग हरियाणा 2.0’ निवेश रोडशो का शुभारंभ करेंगे।

    उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह तथा अधिकारियों की टीम के साथ मुख्यमंत्री लगातार दो दिन उद्योग जगत, संस्थागत निवेशकों और वैश्विक कारोबारी नेतृत्व के साथ उच्चस्तरीय बैठकों में हरियाणा में निवेश की संभावनाओं को सामने रखेंगे।

    उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डाक्टर अमित अग्रवाल के अनुसार मुंबई रोडशो को अगले साल अप्रैल में प्रस्तावित ‘हैपनिंग हरियाणा ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट’ की दिशा में पहला बड़ा कदम माना जा रहा है।

    एक ट्रिलियन डॉलर की राज्य अर्थव्यवस्था की नींव
    सरकार का जोर महज निवेश रुचि जुटाने पर नहीं, बल्कि उसे ठोस परियोजनाओं, पूंजी प्रतिबद्धताओं और दीर्घकालिक संस्थागत साझेदारियों में बदलने पर है। मुख्यमंत्री का यह अभियान हरियाणा की आर्थिक प्रगति को विकसित भारत@2047 के विजन से जोड़ते हुए भविष्य के लिए तैयार एक ट्रिलियन डालर की राज्य अर्थव्यवस्था की नींव मजबूत करने पर केंद्रित रहेगा।

    दौरे की सबसे अहम कड़ी प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल ब्रेकफास्ट राउंडटेबल होगी। इसमें ऐसे वैश्विक फंड मैनेजर और संस्थागत निवेशक हिस्सा लेंगे, जिनके पास सामूहिक रूप से 500 अरब अमेरिकी डालर से अधिक की प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियां हैं। बातचीत में टेक्नोलाजी स्टार्टअप, प्रिसीजन मैन्युफैक्चरिंग, आधुनिक लाजिस्टिक्स, कामर्शियल रियल एस्टेट और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में निवेश के अवसरों पर फोकस रहेगा।

    ‘प्रवासी हरियाणवी संवाद मंच’ आयोजित
    डॉक्टर अमित अग्रवाल के अनुसार मुख्यमंत्री उद्योग दिग्गजों, सीईओ और संस्थागत फंड प्रमुखों के साथ वन-टू-वन बैठकें भी करेंगे। साथ ही मुंबई में बसे प्रमुख हरियाणवी कारोबारियों और वैश्विक उद्यमियों को जोड़ने के लिए विशेष ‘प्रवासी हरियाणवी संवाद मंच’ आयोजित किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा है कि हालिया नीति घोषणाओं के दौरान 1.10 लाख करोड़ रुपये से अधिक के प्रारंभिक निवेश आशय मिलना राज्य की नीतियों और शासन सुधारों पर बाजार के भरोसे को दर्शाता है। मुंबई से अब सरकार इस रुचि को वास्तविक परियोजनाओं और रोजगार के अवसरों में बदलने की कोशिश करेगी।

    नई अर्थव्यवस्था के सेक्टरों पर हरियाणा की नजर
    रोडशो में इलेक्ट्रिक वाहन एवं मोबिलिटी, सेमीकंडक्टर डिजाइन व फैब्रिकेशन, हाई-डेंसिटी डेटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंफ्रास्ट्रक्चर, फार्मास्यूटिकल्स, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर और ग्रीन एनर्जी जैसे हाई-वैल्यू सेक्टरों को प्रमुखता दी जाएगी। डिजिटल सिंगल-विंडो मंजूरी व्यवस्था, क्षेत्रीय नीतियों और पारदर्शी निर्णय प्रक्रिया के जरिए निवेशकों को परियोजना के पूरे जीवनचक्र में सुविधा देने की व्यवस्था की गई है।

     

  • राजस्थान निकाय चुनाव में आचार संहिता लागू, पट्टे-नामांतरण और पुराने विकास कार्य रहेंगे जारी

    राजस्थान निकाय चुनाव में आचार संहिता लागू, पट्टे-नामांतरण और पुराने विकास कार्य रहेंगे जारी

    जयपुर
    राजस्थान में 309 नगरीय निकायों के आगामी आम चुनाव की घोषणा के साथ ही आदर्श आचार संहिता लागू हो चुकी है। आचार संहिता लागू होने के बाद अक्सर विकास कार्यों और आम जनता से जुड़े दैनिक प्रशासनिक कामों के ठप होने की आशंका बनी रहती है। लेकिन इस बार आम जनता को होने वाली परेशानियों को ध्यान में रखते हुए स्वायत्त शासन विभाग (LSG) ने एक राहत भरा स्पष्टीकरण आदेश जारी किया है। विभाग के निदेशक जुईकर प्रतीक चंद्रशेखर द्वारा जारी इस आधिकारिक आदेश में उन सभी कार्यों की सूची स्पष्ट की गई है जो आचार संहिता के दौरान भी बिना किसी रुकावट के जारी रह सकेंगे।

    स्वायत्त शासन विभाग ने प्रदेश के सभी नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पालिकाओं के आयुक्तों व अधिशासी अधिकारियों (EO) को पत्र भेजकर इन दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं ताकि विकास की रफ्तार भी न रुके और चुनाव नियमों का उल्लंघन भी न हो।

    आचार संहिता के दौरान भी जारी रहेंगे ये प्रमुख काम
    स्वायत्त शासन विभाग के आदेश के अनुसार, पूर्व से जारी या सामान्य दैनिक प्रकृति के

    निम्नलिखित कार्यों पर आचार संहिता का प्रभाव नहीं पड़ेगा-

    • भवन मानचित्र स्वीकृति: राजस्थान नगरपालिका अधिनियम की धारा 194 के तहत नए भवन निर्माण, पुनर्निर्माण या संशोधन के आवेदनों को निर्धारित 2 माह की समयसीमा में निस्तारित किया जाएगा।
    • भूखंडों के पट्टे जारी करना: पूर्व में स्वीकृत आवासीय या व्यावसायिक योजनाओं में नीलाम किए गए भूखंडों की पूरी राशि जमा होने पर पट्टे जारी किए जा सकेंगे।
    • कृषि भूमि नियमन व नामांतरण: सक्षम स्वीकृति और पूरी राशि जमा होने के बाद नियमन, निर्माण स्वीकृति और नामांतरण के पट्टे दिए जाएंगे।
    • चल रहे विकास कार्य: जिन विकास कार्यों के वर्क ऑर्डर (Work Order) आचार संहिता लागू होने से पहले जारी हो चुके हैं या जिन पर काम शुरू हो चुका है, वे जारी रहेंगे।
    • DPR और एस्टीमेट तैयार करना: प्रस्तावित प्रोजेक्ट्स की डीपीआर तैयार करना, अप्रूवल लेना, ड्राइंग-डिजाइन और टेंडर डॉक्यूमेंट्स तैयार करने की प्रशासनिक प्रक्रिया जारी रहेगी।
    • अति-आवश्यक नागरिक सेवाएं: जिला निर्वाचन अधिकारी के निर्देशानुसार सड़क, नाली और स्ट्रीट लाइट मरम्मत के आपातकालीन काम कराए जा सकेंगे।
    • पट्टों का नवीनीकरण व पुनर्वैध: पूर्व में जारी पट्टों के पंजीयन न होने पर उनके री-वैलिडेशन और नवीनीकरण का काम होगा।
    • नामांतरण (Mutation): पट्टों के नामांतरण का नियमित कार्य जारी रहेगा।
    • दैनिक प्रकृति के कार्य: आम जनता को असुविधा से बचाने के लिए नगर निकायों के नियमित प्रशासनिक काम चालू रहेंगे।
    • विभिन्न विभागों के पुराने प्रोजेक्ट्स: अन्य विभागों के वे निर्माण कार्य जो पहले से चल रहे हैं, वे प्रभावित नहीं होंगे।

    नई स्कीम और नए टेंडर पर पूर्ण प्रतिबंध
    विभाग ने स्पष्ट किया है कि आचार संहिता के प्रभाव में रहने के दौरान किसी भी तरह की नई स्कीम, नए विकास कार्य, नए टेंडर जारी करने और नए वर्क ऑर्डर देने पर पूरी तरह से रोक रहेगी। इसके अलावा, चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक भूमि आवंटन और ऋण वितरण से जुड़े नए नीतिगत निर्णय भी नहीं लिए जा सकेंगे। इस दौरान नगर पालिकाओं की साधारण सभा की बोर्ड बैठकें आयोजित करने पर भी प्रतिबंध रहेगा।

    सरकारी वाहनों के उपयोग पर रोक
    स्वायत्त शासन विभाग ने चुनाव में सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग को रोकने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। आदेश के अनुसार, नगर पालिका, नगर परिषद और नगर निगमों के निर्वाचित जन प्रतिनिधियों जैसे मेयर, डिप्टी मेयर, अध्यक्ष, सभापति, उपाध्यक्ष या उपसभापति द्वारा चुनाव प्रचार के लिए किसी भी सरकारी या निकाय के वाहन का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। प्रचार के दौरान किसी भी तरह की राजकीय सुविधाओं का इस्तेमाल करना आचार संहिता का उल्लंघन माना जाएगा।

  • चांडिल जलाशय में बढ़ती गाद पर होगा वैज्ञानिक शोध, सीयूजे की डॉ. शिखा को मिली परियोजना

    चांडिल जलाशय में बढ़ती गाद पर होगा वैज्ञानिक शोध, सीयूजे की डॉ. शिखा को मिली परियोजना

    रांची
     सेंट्रल यूनिवर्सिटी आफ झारखंड (सीयूजे) के सिविल इंजीनियरिंग विभाग की सहायक प्राध्यापक डा. शिखा चौरसिया को झारखंड काउंसिल आन साइंस, टेक्नोलाजी एंड इनोवेशन (जेसीएसटीआइ) के जनवरी 2026 चक्र के तहत एक महत्वपूर्ण दीर्घकालिक शोध परियोजना स्वीकृत हुई है।

    इस परियोजना में चांडिल जलाशय के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में पानी के प्रवाह और गाद के जमा होने की प्रक्रिया का विज्ञानी अध्ययन किया जाएगा। चांडिल जलाशय झारखंड के महत्वपूर्ण जल संसाधनों में से एक है। यह क्षेत्र लोगों की विभिन्न जल संबंधी जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण है।

    ऐसे में जलाशय की क्षमता और लंबे समय तक इसकी उपयोगिता बनाए रखना बेहद आवश्यक है। पिछले कुछ वर्षों में जलाशय के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में मृदा कटाव और गाद के बहकर जलाशय तक पहुंचने की समस्या बढ़ी है। शोध परियोजना का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि जलाशय में इतनी अधिक मात्रा में गाद किन क्षेत्रों और किन कारणों से पहुंच रही है।

    क्षेत्र में अनियंत्रित खनन, पेड़ों की कटाई, भूमि के बदलते उपयोग और तेजी से हो रहे शहरी विस्तार के कारण मिट्टी के कटाव की समस्या बढ़ सकती है। वर्षा के दौरान यही मिट्टी और अन्य अवसाद पानी के साथ बहकर जलाशय में पहुंचते हैं और वहां जमा हो जाते हैं।

    जलाशय में लगातार गाद जमा होने से उसकी पानी रखने की क्षमता धीरे-धीरे कम हो सकती है। यदि समय रहते इस समस्या का विज्ञानी समाधान नहीं किया गया, तो भविष्य में जलाशय के प्रभावी उपयोग और जल प्रबंधन पर इसका असर पड़ सकता है।

    इसी महत्वपूर्ण समस्या को ध्यान में रखते हुए डॉ. शिखा चौरसिया के नेतृत्व में यह शोध परियोजना तैयार की गई है। परियोजना के दौरान जलग्रहण क्षेत्र का विस्तृत सर्वेक्षण किया जाएगा।विभिन्न स्थानों से आवश्यक आंकड़े और नमूने एकत्र किए जाएंगे। वर्षा, पानी के बहाव, मिट्टी के कटाव और गाद के परिवहन से जुड़े आंकड़ों का अध्ययन किया जाएगा।

    इसके साथ ही विज्ञानी माडल की मदद से यह समझने का प्रयास किया जाएगा कि किस क्षेत्र से कितनी मात्रा में मिट्टी और गाद जलाशय तक पहुंच रही है। शोध के माध्यम से गाद के प्रमुख स्रोतों की पहचान की जाएगी। इसके बाद यह भी आकलन किया जाएगा कि गाद के जमा होने से चांडिल जलाशय की जल-भंडारण क्षमता पर कितना प्रभाव पड़ रहा है।

    इस जानकारी के आधार पर जलग्रहण क्षेत्र में मिट्टी के कटाव को कम करने और जलाशय में गाद की मात्रा को नियंत्रित करने के लिए व्यावहारिक और विज्ञानी उपाय सुझाए जाएंगे। इस परियोजना का लाभ केवल वर्तमान स्थिति को समझने तक सीमित नहीं रहेगा।

    शोध से प्राप्त जानकारी का उपयोग भविष्य में जलग्रहण क्षेत्र के बेहतर प्रबंधन, जलाशय के संरक्षण और जल संसाधनों की दीर्घकालिक योजना तैयार करने में किया जा सकता है। इससे जलाशय की उपलब्ध जल-भंडारण क्षमता को बनाए रखने और पानी की उपलब्धता को अधिक विश्वसनीय बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    परियोजना में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी यूनिवर्सिटी, रांची के विश्वविद्यालय भूगोल विभाग के डॉ. अभय कुमार सिंह सह-प्रधान अन्वेषक के रूप में कार्य करेंगे। दो यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों के बीच सहयोग से इस महत्वपूर्ण विषय पर बहुआयामी अध्ययन किया जाएगा।

    डॉ. शिखा चौरसिया को जेसीएसटीआइ की यह शोध परियोजना मिलना सीयूजे के लिए गौरव की बात है। यह उपलब्धि सीयूजे के शिक्षकों द्वारा किए जा रहे गुणवत्तापूर्ण शोध कार्यों को दर्शाती है। साथ ही, यह झारखंड की पर्यावरणीय समस्याओं और जल संसाधनों से जुड़ी चुनौतियों के विज्ञानी समाधान की दिशा में सीयूजे के बढ़ते योगदान को भी सामने लाती है।

    इस शोध से प्राप्त परिणाम भविष्य में चांडिल जलाशय और उसके जलग्रहण क्षेत्र के सतत विकास, बेहतर जल प्रबंधन और जल सुरक्षा के लिए उपयोगी आधार उपलब्ध करा सकते हैं। इससे न केवल जलाशय के संरक्षण में मदद मिल सकती है, बल्कि झारखंड में जल संसाधनों के विज्ञानी और टिकाऊ प्रबंधन की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलने की उम्मीद है।

  • बिहार में जमीन अधिग्रहण का बदला नियम, अब नई MVR के आधार पर तय होगा मुआवजा

    बिहार में जमीन अधिग्रहण का बदला नियम, अब नई MVR के आधार पर तय होगा मुआवजा

    पटना
    बिहार में सड़क, रेल और अन्य सरकारी परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण में अब नई एमवीआर (मिनीमन वैल्यू रजिस्ट्रेशन) को आधार बनाया जाएगा।

    जून 2026 के बाद जारी हुई भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना की तारीख पर लागू एमवीआर के अनुसार ही जमीन का बाजार मूल्य तय होगा।

    सरकार ने इस संबंध में सभी संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किया है। निबंधन विभाग के अनुसार राज्य में जमीन की एमवीआर बढ़ाई गई है।

    ग्रामीण क्षेत्रों में बाजार मूल्य को 1.6 गुना किया गया है। वहीं, शहरी और शहर से लगे क्षेत्रों में एमवीआर दो गुना की गई है। अब भू-अर्जन अधिनियम, के तहत जारी होने अधिसूचना, राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम के तहत धारा और रेलवे अधिनियम की धारा की अधिसूचना की तारीख को लागू एमवीआर को जमीन के बाजार मूल्य का आधार बनाया जाएगा।

    नया मूल्य तय करने में लगता था समय
    सरकार के अनुसार राज्य में लंबे समय से एमवीआर के अद्यतन नहीं होने के कारण कई क्षेत्रों में जमीन का नया बाजार मूल्य तय करने में समय लगता था।

    इससे भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में देरी और जमीन की कीमत को लेकर विवाद की स्थिति बनती थी। नई व्यवस्था में अधिसूचना जारी होने की तारीख को लागू एमवीआर को आधार बनाने से इस तरह का असमंजस दूर होगा।

    इससे जमीन मालिकों और अधिग्रहण करने वाली एजेंसियों के बीच मूल्य को लेकर विवाद कम होने की उम्मीद है। सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि नई व्यवस्था के अनुसार ही अर्जनाधीन जमीन का बाजार मूल्य तय करें।

    इसका उद्देश्य भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई को तेज करना है। साथ ही सड़क, रेल और अन्य लोकहित की परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण समय पर पूरा करने पर जोर दिया गया है।