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  • राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने ली दौसा की समीक्षा बैठक, टीबी और नशे पर सख्ती के निर्देश

    राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने ली दौसा की समीक्षा बैठक, टीबी और नशे पर सख्ती के निर्देश

    जयपुर
    राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने मंगलवार को जिला कलक्ट्रेट सभागार में अधिकारियों की बैठक लेकर जिले में टीबी की स्थिति, मादक पदार्थों की रोकथाम के लिए की जा रही कार्रवाई तथा शिक्षा व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से विभिन्न बिंदुओं पर जानकारी लेते हुए टीबी मरीजों को समय पर पूरा उपचार मुहैया कराने, ‘नशा मुक्त दौसा’ बनाने के लिए नशे के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    राज्यपाल ने जिले में टीबी की स्थिति की समीक्षा करते हुए वर्तमान में टीबी से ग्रसित मरीजों की संख्या, उनकी औसत आयु और उपचार की स्थिति सहित विभिन्न बिंदुओं पर अधिकारियों से रिपोर्ट ली। उन्होंने कहा कि टीबी मुक्त जिले का लक्ष्य रखते हुए टीबी के प्रत्येक मरीज को समय पर समुचित उपचार उपलब्ध कराया जाए। गंभीर मरीजों को आवश्यकता के अनुसार अस्पताल में भर्ती कर उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    राज्यपाल ने जिले में मादक पदार्थों के उपयोग एवं नशे की स्थिति की समीक्षा करते हुए ‘नशा मुक्त दौसा’ बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नशे के दुष्प्रभावों के प्रति लोगों को जागरूक करने के साथ युवाओं के मन में नशे के प्रति नकारात्मक भावना विकसित की जाए। नशीले पदार्थों के स्रोतों को चिन्हित कर उन्हें बंद करने के लिए प्रभावी कार्रवाई की जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि पुलिस मादक पदार्थों के स्रोत तक पहुंचे।

    उन्होंने कहा कि सरकारी विभागों को अपने कार्मिकों के स्तर पर भी नशा मुक्ति के लिए पहल करनी चाहिए। शिक्षण संस्थानों के आसपास नशीले पदार्थों की उपलब्धता पूरी तरह रोकने के लिए संबंधित विभाग समन्वय से कार्रवाई करें। पुलिस नशे के नेटवर्क के खिलाफ दृढ़ता से कार्रवाई करते हुए लगातार निगरानी एवं मॉनिटरिंग सुनिश्चित करे।

    राज्यपाल ने जिला शिक्षा अधिकारियों के साथ जिले में शिक्षा की स्थिति की समीक्षा करते हुए विद्यार्थियों की संख्या, शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात, शिक्षकों की उपलब्धता तथा विषयवार शिक्षकों की स्थिति सहित विभिन्न मानकों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यक्ति के जीवन को बेहतर बनाने और उसे आगे बढ़ाने का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है। जितने अधिक नागरिक शिक्षित होंगे, उतना ही देश मजबूत होगा। उन्होंने शिक्षकों से ‘मैं शिक्षक हूं’ की भावना को हमेशा अपने मन में रखते हुए विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने का आह्वान किया। उन्होंने निर्देश दिए कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहे, ड्रॉपआउट न हो और किसी भी स्तर पर पढ़ाई बीच में न छूटे, यह सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने नीट एवं जेईई में चयनित विद्यार्थियों की जानकारी लेते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।

  • स्वाइन फ्लू ने दिल्ली को डराया! मामले 2300 के पार, CM ने बुलाई आपात बैठक

    स्वाइन फ्लू ने दिल्ली को डराया! मामले 2300 के पार, CM ने बुलाई आपात बैठक

    नई दिल्ली

    दिल्ली में एच1एन1 इन्फ्लूएंजा के बढ़ते मामलों को देखते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इमरजेंसी मीटिंग बुलाई है। स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि दिल्ली में इस साल इन्फ्लूएंजा के लगभग 3,000 मामले सामने आए हैं, जिनमें 2,308 H1N1 संक्रमण के मामले शामिल हैं।

    सिंह ने कहा, डॉक्टरों, कर्मचारियों या दवाइयों की कोई समस्या नहीं है। मुख्यमंत्री ने एक इमरजेंसी रिव्यू मीटिंग बुलाई है। मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि कोई समस्या नहीं है, सब कुछ नियंत्रण में है। उन्होंने ये बात स्वास्थ्य विभाग, MCD, NDMC और दिल्ली छावनी बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ रिव्यू मीटिंग के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही। उन्होंने कहा कि यह बैठक दिल्ली में H1N1 या मौसमी इन्फ्लूएंजा के साथ-साथ वेक्टर-जनित बीमारियों के लिए व्यवस्थाओं और तैयारियों की समीक्षा करने के लिए बुलाई गई थी।

    मंत्री ने कहा- सबकुछ कंट्रोल में
    पंकज सिंह ने कहा, हमने H1N1 और डेंगू पर एक मीटिंग की, जिसमें एनडीएमसी, म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन और कैंटोनमेंट इलाकों के अधिकारियों को भी बुलाया गया था। हमने दिल्ली में हालात का जायजा लेने और उन्हें समझने की भी कोशिश की। मैं आपके सभी चैनलों के जरिए यह बताना चाहता हूं कि कहीं भी घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है। सब कुछ कंट्रोल में है। हमारे अस्पतालों में काफी बेड, डॉक्टर और दवाइयां मौजूद हैं।

    उन्होंने कहा, एच1एन1 के लगभग 3,000 मरीज आए हैं (दोनों वैरिएंट्स मिलाकर), और वे ठीक होकर डिस्चार्ज हो रहे हैं। अगर H1N1 की बात करें, तो 2,308 मामले हैं। दूसरे वैरिएंट के लगभग 600–650 मामले हैं। कल तक डेंगू के 2,200 मामले सामने आए हैं। यह हमारी ताज़ा रिपोर्ट है। कोई मौत नहीं हुई है। कोई भी मरीज गंभीर हालत में नहीं है, और कोई भी वेंटिलेटर या आईसीयू में नहीं है। मरीज सामान्य बुखार के लक्षणों के साथ आ रहे हैं, इलाज करवा रहे हैं और ठीक होकर डिस्चार्ज हो रहे हैं।

    क्या है H1N1 वायरस?
    डॉक्टरों के अनुसार, एच1एन1 वायरस को स्वाइन फ्लू के नाम से जाना जाता है और इसमें आमतौर पर बुखार, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, शरीर में दर्द और थकान के लक्षण होते हैं। उन्होंने लगातार तेज बुखार, सांस लेने में कठिनाई, सीने में दर्द से पीड़ित लोगों को तुरंत इलाज सहायता लेने की सलाह दी।

  • राजस्थान निकाय चुनाव: चिमटा, केतली, चक्की और चारपाई होंगे निर्दलीय प्रत्याशियों के चुनाव चिह्न

    राजस्थान निकाय चुनाव: चिमटा, केतली, चक्की और चारपाई होंगे निर्दलीय प्रत्याशियों के चुनाव चिह्न

    जयपुर
    राजस्थान में आगामी नगर निकाय और पंचायती राज चुनावों को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। राजनीतिक दल जहां अपनी-अपनी तैयारियों में जुटे हैं, वहीं निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों के लिए चुनाव चिह्नों की आधिकारिक घोषणा कर दी गई है। राज्य में होने वाले निकाय चुनावों के मैदान में हर बार की तरह इस बार भी दिलचस्प और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े प्रतीक नजर आने वाले हैं। चुनाव आयोग द्वारा जारी सूची में जहां रसोई घर से जुड़े चिमटा, केतली और मूसल को जगह मिली है, वहीं पुरानी यादों को ताजा करने वाली चक्की, चारपाई और बच्चों के बस्ते से गायब हो चुकी स्लेट भी उम्मीदवारों के चुनावी पहचान पत्र बनेंगे।

    दिलचस्प बात यह है कि आज के दौर में युवा पीढ़ी और 'जेन-जी' के बीच बेहद लोकप्रिय रहने वाले लैपटॉप, स्मार्टफोन, टैबलेट या स्कूटी जैसे आधुनिक गैजेट्स को चुनाव चिह्नों की सूची में शामिल नहीं किया गया है।

    राष्ट्रीय-राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों के लिए आरक्षित सिंबल
    राज्य निर्वाचन आयोग की सूची के अनुसार, मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के लिए उनके पारंपरिक चुनाव चिह्नों को सुरक्षित रखा गया है। 6 राष्ट्रीय स्तर के दलों के लिए उनके चिह्न आरक्षित हैं-
    भारतीय जनता पार्टी (BJP): कमल

    भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC): हाथ का पंजा

    बहुजन समाज पार्टी (BSP): हाथी

    कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया – मार्क्सवादी (CPI-M): हथौड़ा, हसिया और सितारा

    आम आदमी पार्टी (AAP): झाड़ू

    नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP): किताब

    इसके अलावा, राजस्थान के राज्य स्तरीय मान्यता प्राप्त दलों में शामिल राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) का बोतल और भारत आदिवासी पार्टी (BAP) का तीर-कमान का चिह्न भी सुरक्षित श्रेणी में रखा गया है।

    नगर पालिका अध्यक्ष पद के निर्दलियों के लिए 40 प्रतीक
    नगर पालिका अध्यक्ष (चेयरमैन) पद पर स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के लिए 40 मुक्त चिह्नों की अलग सूची तय की गई है। इस सूची में मुख्य रूप से घरेलू उपयोग और पुरानी जीवनशैली से जुड़ी वस्तुओं को शामिल किया गया है

    पढ़ाई और पत्राचार: स्लेट, पेंसिल और लैटर बॉक्स (डाक पेटी)।

    रसोई व घरेलू सामान: चाय की केतली, चिमटा, मूसल व खरल, भारी-भरकम पुराना प्रेस और छड़ी।

    अन्य वस्तुएं: करणी (राजमिस्त्री का औजार) व अन्य पारंपरिक उपकरण।

    वार्ड पार्षद प्रत्याशियों के लिए चक्की, चारपाई और फ्रॉक
    नगरीय निकायों के विभिन्न वार्डों से पर्चा भरने वाले निर्दलीय प्रत्याशियों के लिए 40 अलग मुक्त प्रतीक जारी किए गए हैं। इन चिह्नों को मतदाता आसानी से पहचान सकें, इसके लिए दैनिक जीवन की परिचित चीजों को चुना गया है।

    घरेलू और पुरानी वस्तुएं: हाथ से चलाने वाली आटा चक्की, चारपाई, सिलाई मशीन, पुराना टेलीफोन, जंजीर, आरी और बक्सा।

    सब्जियां व फल: फूलगोभी, अंगूर और हरी मिर्च।

    वाहन व उपकरण: पाल युक्त नौका (नाव), हाथ गाड़ी, ईंट, फव्वारा और साइकिल पंप।

    पहनावा व स्टेशनरी: फ्रॉक, पेंसिल बॉक्स और बांसुरी व हारमोनियम जैसे संगीत वाद्य यंत्र।

    चुनावी अपडेट्स और आधिकारिक जानकारियां
    निकाय चुनाव से जुड़ी सटीक जानकारियों, मतदाता सूचियों और चुनाव कार्यक्रमों के लिए राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग के पोर्टल का उपयोग करें।

  • बिहार के 50 स्टेट हाईवे और 45 पुलों पर लगेगा टोल? सर्वे पूरा, जल्द आएगी रिपोर्ट

    बिहार के 50 स्टेट हाईवे और 45 पुलों पर लगेगा टोल? सर्वे पूरा, जल्द आएगी रिपोर्ट

    पटना
    बिहार के स्टेट हाईवे और बड़े पुलों पर टोल टैक्स लेने के लिए सर्वे पूरा कर लिया गया है। अब इसके आधार पर रिपोर्ट तैयार की जा रही है। उम्मीद है कि इसी माह संबंधित एजेंसी यह रिपोर्ट पथ निर्माण विभाग को सौंप देगी। पथ निर्माण विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, राज्य के 50 स्टेट हाईवे और राज्य सरकार के अधीन बने 45 पुलों का सर्वे किया गया है। इस दौरान इन सड़कों और पुलों से गुजरने वाले वाहनों को कैमरे के माध्यम से रिकॉर्ड किया गया। विभाग के पदाधिकारियों के अनुसार, सात दिनों तक गुजरने वाले वाहनों का रिकॉर्ड लिया गया है।

    इसके आधार पर प्रतिदिन औसतन गुजरने वाले वाहनों की संख्या का आकलन किया जाएगा। इसके बाद तय होगा कि किन सड़कों और पुलों पर टोल टैक्स की वसूली की जाएगी। अधिक वाहनों के आवागमन वाले सड़कों और पुलों को इसके लिए चुना जाएगा। रिपोर्ट के अध्ययन के बाद ही यह फैसला लिया जाएगा कि सर्वे किए गए 50 स्टेट हाईवे और 45 पुलों में से कितने पर टोल टैक्स वसूला जाएगा।

    निजी वाहनों से टोल नहीं लिया जाएगा
    राज्य के स्टेट हाईवे और पुलों पर निजी वाहनों से टोल टैक्स नहीं लेने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। विभाग जल्द ही इस प्रस्ताव पर राज्य कैबिनेट की सहमति लेगा। मालूम हो कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सात जुलाई, 2026 को ही घोषणा की थी कि राज्य के स्टेट हाईवे और बड़े पुलों पर निजी वाहनों से किसी प्रकार का टोल टैक्स नहीं लिया जाएगा। केवल व्यावसायिक वाहनों से ही टैक्स लिया जाएगा।

    किस पर कितना टोल लगेगा
    राज्य सरकार की टोल नीति में यह स्पष्ट किया गया है कि दो लेन से अधिक तथा चार लेन से कम के स्टेट हाईवे पर तय राशि का 60 प्रतिशत टोल टैक्स लगेगा। वहीं, चार लेन तथा इससे अधिक चौड़ी सड़कों पर तय राशि का सौ प्रतिशत टोल टैक्स लगेगा। इसी प्रकार मध्यवर्ती लेन (5.5 मीटर चौड़ी) सड़क पर 50 प्रतिशत टैक्स लगेगा। पुल पर टोल टैक्स का निर्धारण उसकी लंबाई में दस गुना कर किया जाएगा। अर्थात कोई 50 किमी की सड़क है, उसमें पांच किलोमीटर लंबा पुल और 45 किलोमीटर सड़क का हिस्सा है तो उस पर कुल टोल 45 जोड़ 50 अर्थात 95 किलोमीटर पर तय होगा।

    इस तरह लगेंगे शुल्क
    ● छोटे व्यावसायिक वाहन (मिनी बस-माल वाहक) : 2 रुपये प्रति किमी

    ● बस और ट्रक, दो धुरी वाले: 4.25 रुपये प्रति किमी

    ● तीन धुरी वाले वाणिज्यिक वाहन: 4.60 रुपये प्रति किमी

    ● भारी निर्माण मशीनरी या अर्थ मूविंग उपस्कर, छह धुरी वाले: 6.65 रु. प्रति किमी।

    ● विशाल आकार के वाहन (सात या अधिक धुरी वाले): 8.10 रुपये प्रति किमी।

  • Punjab SIR-2026: 12 सितंबर तक करें दावे-आपत्तियां, अक्टूबर में जारी होगी अंतिम मतदाता सूची

    Punjab SIR-2026: 12 सितंबर तक करें दावे-आपत्तियां, अक्टूबर में जारी होगी अंतिम मतदाता सूची

    चंडीगढ़.

    पंजाब में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर)-2026 के तहत मतदाता सूचियों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया जारी है। इस दौरान नागरिकों की शिकायतों और सवालों के त्वरित समाधान के राज्य शिकायत निवारण सेल ने सभी जिला शिकायत निवारण अधिकारियों (डीजीआरओ) को निर्देश जारी किए हैं।

    एसआईआर के नोटिस चरण के दौरान 1950 हेल्पलाइन सुबह आठ बजे से शाम आठ बजे तक संचालित होगी। यह व्यवस्था एसआईआर की प्रक्रिया पूरी होने तक जारी रहेगी। ड्राफ्ट मतदाता सूची 13 अगस्त 2026 को प्रकाशित हो चुकी है। मतदाता अपना नाम और विवरण मुख्य निर्वाचन अधिकारी, पंजाब की वेबसाइट https://www.ceopunjab.gov.in/index तथा निर्वाचन आयोग के वोटर पोर्टल https://voters.eci.gov.in/ पर देख सकते हैं। इसके अलावा डीईओ, ईआरओ और एईआरओ कार्यालयों में निर्धारित हेल्प डेस्क पर भी ड्राफ्ट मतदाता सूची उपलब्ध है।

    12 सितंबर तक दावे-आपत्तियां
    ड्राफ्ट मतदाता सूची में नाम और विवरण सही होने पर किसी कार्रवाई की जरूरत नहीं है। यदि नाम सूची में शामिल नहीं है, विवरण में गलती है, पता बदलना है या किसी नाम पर आपत्ति दर्ज करानी है तो निर्धारित फार्म के माध्यम से आवेदन किया जा सकता है। दावे और आपत्तियां 13 अगस्त से 12 सितंबर 2026 तक दाखिल की जा सकती हैं। अंतिम तारीख के बाद दावा दाखिल नहीं किया जा सकेगा। निर्धारित प्रक्रिया के तहत जमा किए गए प्रत्येक दावे या आपत्ति की रसीद भी दी जाएगी। नया वोट बनवाने के लिए फार्म छह भरा जा सकता है। 18 वर्ष या इससे अधिक उम्र के ऐसे लोग जिनकी वोट नहीं बनी है, वे भी आवेदन कर सकते हैं। जो व्यक्ति 1 अक्टूबर 2026 को 18 वर्ष की आयु पूरी कर रहे हैं, वे भी फार्म छह भर सकते हैं। विदेश में रहने वाले भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए फार्म 6-ए, मतदाता सूची में किसी नाम पर आपत्ति या नाम हटाने के लिए फार्म सात और विवरण में सुधार, पता बदलने, ईपीआईसी बदलने तथा दिव्यांग मतदाता के रूप में चिन्हित करने के लिए फार्म आठ का इस्तेमाल किया जाएगा। नया वोट बनवाने के लिए आधार के अलावा उम्र और निवास का प्रमाण देने वाला एक अन्य दस्तावेज देना होगा। कोई भी मतदाता निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपने निर्वाचन क्षेत्र की ड्राफ्ट मतदाता सूची में किसी प्रविष्टि के खिलाफ आपत्ति दर्ज करा सकता है।

    8 अक्टूबर तक चलेगा नोटिस चरण
    एसआईआर का नोटिस चरण 13 अगस्त से 8 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। हाउस-टू-हाउस प्रक्रिया के बाद अनमैप्ड पाए गए मतदाताओं, मैपिंग के बाद लाजिकल डिस्क्रेपेंसी (एलडी) वाले मामलों और ऐसे मामलों में नोटिस जारी किया जा सकता है, जहां ईआरओ को जांच की आवश्यकता महसूस हो। लाजिकल डिस्क्रेपेंसी का मतलब 2003 के विवरण और वर्तमान मतदाता सूची में दर्ज जानकारी के बीच विसंगति है। ऐसे मामलों में संबंधित मतदाता को नोटिस देकर निर्णय से पहले जरूरी दस्तावेज या स्पष्टीकरण देने का अवसर दिया जाएगा। एलडी के मामलों में मतदाता और उसके माता-पिता की उम्र में 15 वर्ष से कम या 50 वर्ष से अधिक का अंतर, मतदाता और दादा-दादी या नाना-नानी की उम्र में असामान्य अंतर, वर्तमान मतदाता सूची में पिता के नाम और पिछली एसआईआर सूची में दर्ज पिता के नाम में अंतर जैसी विसंगतियां शामिल हो सकती हैं। इसके अलावा पिछली एसआईआर में दर्ज माता-पिता से जुड़े किसी अन्य बच्चे के साथ उम्र का अंतर नौ महीने से कम होना, एक ही व्यक्ति को कई लोगों द्वारा पिता के रूप में दर्ज करना और पुराने एसआईआर रिकॉर्ड से गलत लिंक होना भी लाजिकल डिस्क्रेपेंसी के मामले हो सकते हैं।

    नोटिस मिलने पर सुनवाई में शामिल होना जरूरी
    नोटिस मिलने वाले मतदाता को निर्धारित तारीख पर सुनवाई में शामिल होना चाहिए। यदि किसी उचित कारण से वह स्वयं उपस्थित नहीं हो सकता तो परिवार के किसी सदस्य या प्रतिनिधि को प्राधिकरण पत्र देकर अपनी ओर से जरूरी दस्तावेज जमा कराए जा सकते हैं। यदि किसी उचित कारण से निर्धारित तारीख पर सुनवाई में शामिल होना संभव नहीं है तो संबंधित ईआरओ/एईआरओ कार्यालय से संपर्क कर सुनवाई की तारीख केवल एक बार बदलवाने का अनुरोध किया जा सकता है। प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार होगी। नोटिस चरण में बीएलओ मतदाता को ड्राफ्ट मतदाता सूची में नाम और विवरण की पुष्टि करने, जरूरी फार्म और सहायक दस्तावेज जमा कराने तथा चुनावी विवरण में सुधार के लिए आवेदन करने में मदद करेगा। नोटिस प्राप्त करने वाले मतदाताओं को सुनवाई के दौरान दस्तावेज जमा कराने में भी बीएलओ सहायता करेगा।

    1950 हेल्पलाइन पर मिलेंगे मानक जवाब
    राज्य शिकायत निवारण सेल ने सभी डीजीआरओ को निर्देश दिए हैं कि 1950 हेल्पलाइन को एसआईआर की प्रक्रिया पूरी होने तक सुबह 8 बजे से शाम 8 बजे तक सुचारू रूप से चलाया जाए। हेल्प डेस्क पर तैनात टेली-कॉलर और टीम को उपलब्ध कराए गए एफएक्यू के आधार पर नागरिकों के सवालों और शिकायतों का एक समान जवाब देने को कहा गया है। 1950 पर आने वाली किसी नई क्वेरी या प्रश्न को भी संबंधित ग्रुप में भेजने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि उसका मानक जवाब तैयार किया जा सके। इसके साथ ही पोर्टल पर फ्रीज होने के कारण लंबित पुरानी शिकायतों का भी पूर्ण निपटारा सुनिश्चित करने को कहा गया है।

    मतदाताओं से कहा गया है कि वे ड्राफ्ट मतदाता सूची में अपना नाम और विवरण जरूर जांचें, नोटिस को ध्यान से पढ़ें और निर्धारित समय में जवाब दें। नोटिस मिलने पर सुनवाई में शामिल हों और जरूरी मूल दस्तावेज साथ लेकर जाएं। किसी आधिकारिक सूचना को नजरअंदाज न करें, गलत जानकारी या फर्जी दस्तावेज न दें और दावे-आपत्तियां दाखिल करने के लिए अंतिम तारीख का इंतजार न करें। अनधिकृत सूचना पर भरोसा करने के बजाय केवल आधिकारिक माध्यमों का इस्तेमाल करें। अंतिम मतदाता सूची 12 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित की जाएगी।

  • हरियाणा में निवेश की बौछार, 20 कंपनियों ने किए एमओयू; गोदरेज लगाएगा ₹20 हजार करोड़

    हरियाणा में निवेश की बौछार, 20 कंपनियों ने किए एमओयू; गोदरेज लगाएगा ₹20 हजार करोड़

     चंडीगढ़
     ‘हैपनिंग हरियाणा 2.0’ के तहत मुंबई में आयोजित अंतरराष्ट्रीय आउटरीच अभियान के दूसरे दिन करीब 20 कंपनियों ने हरियाणा में निवेश के लिए एमओयू किए। निवेश में सबसे बड़ा प्रस्ताव गोदरेज ग्रुप का 20,000 करोड़ रुपये का है। कंपनी ने इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में निवेश का एमओयू किया है।

    निवेश प्रस्तावों में वारी एनर्जीज लिमिटेड और आवाडा ग्रुप 10-10 हजार करोड़ रुपये के निवेश के साथ दूसरे बड़े निवेशक हैं। दोनों कंपनियां डेटा सेंटर क्षेत्र में निवेश करेंगी। वहीं बर्कलेज 8,200 करोड़ रुपये के निवेश के साथ जीसीसी क्षेत्र में उतरेगा। इसके अलावा नारेडको 6,600 करोड़, बॉक्सएलएनजी 6,000 करोड़, प्रोलोगिस 1,500 करोड़ और एलएंडटी 1,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगी।

    एमओयू पर किए गए हस्ताक्षर
    प्रस्तावित निवेश की सूची में अल्ट्राटेक 650 करोड़, स्पेक्ट्रा टेक्नोलॉजीज 600 करोड़, ओपी मोबिलिटी 500 करोड़, प्रूडेंशियल 458 करोड़ और मालपानी ग्रुप 400 करोड़ रुपये का निवेश करेंगे। वहीं लाइफवर्क्स सॉल्यूशंस 353 करोड़, कोंग्सबर्ग ऑटोमोटिव 160 करोड़, स्कलार 150 करोड़ और सिवेंट 100 करोड़ रुपये के निवेश के लिए एमओयू किए गए हैं।

    इन निवेश प्रस्तावों में सबसे बड़ी हिस्सेदारी औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा सेंटर और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) जैसे क्षेत्रों की है। हरियाणा के उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त व सचिव डॉक्टर अमित अग्रवाल के अनुसार गोदरेज कंपनी पहले ही हरियाणा में करीब 12,000 करोड़ रुपये निवेश कर चुकी है और अब आगामी पांच वर्षों में लगभग 20,000 करोड़ रुपये और निवेश करेगी।

    कंपनीवार निवेश
    क्रमांक     कंपनी का नाम     निवेश राशि
    1              गोदरेज ग्रुप     ₹20,000 करोड़
    2               वारी एनर्जीज     ₹10,000 करोड़
    3              आवाडा ग्रुप     ₹10,000 करोड़
    4              बर्कलेज     ₹8,200 करोड़
    5             नारेडको     ₹6,600 करोड़
    6             एलएनजी     ₹6,000 करोड़
    7            प्रोलोगिस     ₹1,500 करोड़
    8            एलएंडटी     ₹1,000 करोड़
    9            अल्ट्राटेक     ₹650 करोड़
    10          स्पेक्ट्रा टेक्नोलॉजीज     ₹600 करोड़
    11          ओपी मोबिलिटी     ₹500 करोड़
    12         प्रूडेंशियल     ₹458 करोड़
    13         मालपानी ग्रुप     ₹400 करोड़
    14         लाइफवर्क्स सॉल्यूशंस     ₹353 करोड़
    15          कोंग्सबर्ग ऑटोमोटिव     ₹160 करोड़
    16         स्कलार     ₹150 करोड़
    17          सिवेंट     ₹100 करोड़

  • रांची में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर सवाल, 14 में 9 सैंपल मानक से फेल

    रांची में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर सवाल, 14 में 9 सैंपल मानक से फेल

    रांची
     राजधानी में लोगों की थाली और गिलास तक पहुंच रहे खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पिछले पांच माह में जिले के विभिन्न होटल, रेस्टोरेंट और दुकानों से लिए गए खाद्य पदार्थों के नमूनों की जांच में 54 में से नौ नमूने खाद्य सुरक्षा के निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे।

    जांच में मुख्य रूप से डेयरी उत्पाद पनीर, खोवा, मिठाई और घी समेत अन्य खाद्य पदार्थ मानक में सही नहीं पाए गए हैं। होटलों से लिए गए पेयजल के नमूनों की गुणवत्ता को लेकर भी विभाग की ओर से जांच की जा रही है। इन सैंपलों में अधिकतर सैंपल खुले रूप से बिना ब्रांडेड पैकेट के बिकने वाले खाद्य सामग्री थे।

    खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी डा. पवन कुमार के अनुसार, पिछले पांच माह के दौरान जिले के अलग-अलग इलाकों में खाद्य प्रतिष्ठानों से नमूने लिए गए थे। इन्हें जांच के लिए राज्य खाद्य जांच प्रयोगशाला भेजा गया।

    अब तक प्राप्त 14 जांच रिपोर्ट में नौ खाद्य उत्पाद सब-स्टैंडर्ड श्रेणी में पाए गए हैं। खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी पवन कुमार ने बताया कि जिन खाद्य कारोबारियों के उत्पाद मानक के अनुरूप नहीं मिले हैं, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।

    जिन स्थानों से सैंपल लिए गए उनमें राजधानी के धुर्वा, डोरंडा, रातू रोड, ओरमांझी, बूटी मोड़ जगह प्रमुख है, इसके अलावा जिले के विभिन्न क्षेत्रों में बुंडू तमाड़ आदि जगह शामिल है। इन जगहों के छोटे-बड़े होटलों से खाद्य पदार्थ व पानी के सैंपल जांच कि लिए लिए गए थे।

    डेयरी उत्पादों पर सबसे बड़ा सवाल
    जांच रिपोर्ट में मुख्य रूप से डेयरी उत्पादों के मानकों पर खरा नहीं उतरने की बात सामने आई है। पनीर, खोवा और घी जैसे खाद्य पदार्थ सीधे तौर पर रोजाना बड़ी संख्या में लोगों की थाली तक पहुंचते हैं।

    ऐसे में इनकी गुणवत्ता में कमी मिलना खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर मामला है। हालांकि, सब-स्टैंडर्ड पाए जाने का अर्थ स्वत यह नहीं है कि संबंधित खाद्य पदार्थ जहरीला है लेकिन यह स्वास्थ्य के लिए नुकसान सिद्ध हुआ है।

    इसका मतलब है कि उत्पाद निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरा। किसी खाद्य पदार्थ को असुरक्षित घोषित करने के लिए जांच में स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले तत्वों या अन्य निर्धारित मानकों के उल्लंघन का प्रमाण आवश्यक होता है।

    क्या है सब-स्टैंडर्ड खाद्य पदार्थ, क्या है दंड
    खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत निर्धारित गुणवत्ता मानकों को पूरा नहीं करने वाले खाद्य पदार्थ को सब-स्टैंडर्ड माना जाता है। अधिनियम की धारा 51 के तहत ऐसे खाद्य पदार्थ का निर्माण, भंडारण, बिक्री या वितरण करने पर पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। मामले में कार्रवाई जांच रिपोर्ट के आधार पर होती है।

    खाद्य सुरक्षा अधिकारी की ओर से रिपोर्ट मिलने के बाद सक्षम अधिकारी तय करता है कि मामला केवल आर्थिक दंड वाला है या उसमें अभियोजन की जरूरत है।

    आर्थिक दंड वाले मामलों में खाद्य सुरक्षा अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर न्याय निर्णायक अधिकारी के समक्ष कार्रवाई की जाती है। संबंधित कारोबारी को अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया जाता है।

    कार्रवाई केवल जुर्माने तक सीमित नहीं
    खाद्य पदार्थ की प्रकृति और उल्लंघन के आधार पर कार्रवाई का स्वरूप अलग हो सकता है। गलत लेबलिंग के मामले में अधिनियम की धारा 52 के तहत तीन लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

    खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी पवन कुमार ने बताया कि वहीं खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता या प्रकृति उपभोक्ता की मांग के अनुरूप नहीं होने पर धारा 50 के तहत पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

    यदि जांच में खाद्य पदार्थ असुरक्षित पाया जाता है और मामला गंभीर प्रकृति का है, तो अधिनियम के तहत इससे कहीं अधिक कड़ी कार्रवाई और सजा का प्रावधान है। इसलिए सब-स्टैंडर्ड और अनसेफ को एक ही श्रेणी मानना सही नहीं है।

    14 में नौ रिपोर्ट खराब, अब आगे की कार्रवाई अहम
    विभाग के अनुसार पांच माह में प्राप्त 14 रिपोर्ट में नौ नमूनों का मानक से नीचे मिलना खाद्य प्रतिष्ठानों की निगरानी बढ़ाने की जरूरत को सामने लाता है। खासकर डेयरी उत्पादों की बिक्री करने वाले प्रतिष्ठानों, होटल-रेस्टोरेंट और खाद्य दुकानों में नियमित नमूना संग्रह और जांच जरूरी है।

    खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी पवन कुमार ने बताया कि जिन कारोबारियों के खाद्य उत्पाद सब-स्टैंडर्ड पाए गए हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित मामलों में कितने कारोबारियों पर जुर्माना लगाया जाता है और कितने मामलों में आगे की कानूनी कार्रवाई होती है।

    उपभोक्ताओं के लिए भी सवाल
    खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांच की यह कार्रवाई केवल विभागीय आंकड़ा नहीं है। रांची में बड़ी संख्या में लोग होटल, रेस्टोरेंट और दुकानों से पनीर, मिठाई, खोवा, घी तथा अन्य तैयार खाद्य पदार्थ खरीदते हैं। ऐसे में खाद्य प्रतिष्ठानों की नियमित जांच और जांच रिपोर्ट के आधार पर त्वरित कार्रवाई उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए जरूरी है।

    क्या है चुनौती
    खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण के नियमों में खाद्य कारोबारियों के लाइसेंस, नमूना जांच, खाद्य मानक, प्रयोगशाला परीक्षण और कार्रवाई के लिए अलग-अलग प्रावधान हैं

    अब विभाग के सामने चुनौती केवल नमूने लेने तक सीमित नहीं, बल्कि जांच में मानक से नीचे पाए गए उत्पादों के कारोबारियों पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने की भी है।

    स्ट्रीट फूड वेंडर्स को दिया जाता रहा है खाद्य सुरक्षा का प्रशिक्षण
    शहर के स्ट्रीट फूड वेंडर्स को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के उद्देश्य से दो दिवसीय खाद्य सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाता रहा है। प्रशिक्षण के दौरान स्वच्छता, भोजन तैयार करने और परोसने की सुरक्षित प्रक्रिया, खाद्य सामग्री का सही भंडारण, साफ पानी का उपयोग तथा व्यक्तिगत स्वच्छता के बारे में बताया जाता है।

    वेंडर्स को एप्रन, ग्लव्स और हेयर गियर के अनिवार्य इस्तेमाल के प्रति भी जागरूक किया जाता है। अधिकारियों ने बताया कि असुरक्षित खाद्य पदार्थों से कई संक्रामक बीमारियां हो सकती हैं। इसलिए खाद्य कारोबारियों को निर्धारित मानकों का पालन करते हुए उपभोक्ताओं को सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है।

  • अंबाला में सांड का कहर! स्कूली छात्रा को 7 फीट तक उठाकर पटका, माथे पर लगे 8 टांके

    अंबाला में सांड का कहर! स्कूली छात्रा को 7 फीट तक उठाकर पटका, माथे पर लगे 8 टांके

    अंबाला.

    लालकुर्ती में सोमवार सुबह बेसहारा सांड ने स्कूल जा रही 10वीं कक्षा की छात्रा खुशी पर सोमवार सुबह करीब 7:15 बजे हमला कर दिया। जानकारी के अनुसार छावनी के खालसा स्कूल-टू में 10वीं कक्षा में पढ़ने वाली छात्रा रोज की तरह स्कूल जा रही थी। वह बैग लेकर सड़क से गुजर रही थी, तभी सड़क किनारे खड़े सांड ने उस पर हमला कर दिया।

    पहली बार छात्रा किसी तरह बच गई। इससे पहले छात्रा कुछ समझ पाती सांड ने दोबारा पीछे से हमला कर उसे सींगों से करीब छह से सात फीट तक उठाकर सड़क पर पटक दिया। छात्रा माथे के बल वहां बने डिवाइडर पर गिरते ही बेसुध हो गई। उसे राहगीरों ने उठाया और छावनी नागरिक अस्पताल में भर्ती करवाया। छात्रा को पटकने के बाद सांड वहां से भाग गया। उपचार के दौरान उसके माथे पर आठ टांके लगाए गए। स्वजन के अनुसार चोट के कारण उसकी एक आंख पूरी तरह बंद हो गई थी और आंखों के आसपास काफी सूजन थी। हाथ-पैरों पर भी घसीट के निशान आए हैं। माथे पर सबसे ज्यादा चोट लगी है। उपचार के बाद दोपहर करीब एक बजे छात्रा को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। पूरी घटना पास लगे सीसीटीवी में कैद हो गई।

    इकलौती संतान, घटना के बाद परिवार सहमा
    घायल छात्रा पिता धर्मेंद्र यादव की इकलौती संतान है। परिवार दूध बेचकर गुजर-बसर करता है। मां ऊषा गृहिणी हैं। इस हमले के बाद पूरा परिवार सहमा हुआ है। स्थानीय लोगों ने बताया कि कैंटोनमेंट बोर्ड क्षेत्र में घूमने वाला यह सांड पहले भी लोगों पर हमला कर चुका है। लोगों के अनुसार कुछ समय पहले एक बुजुर्ग को भी सांड ने टक्कर मारी थी। क्षेत्र में बेसहारा पशुओं के झुंड घूमते रहते हैं।

    पूरे दिन प्रशासन के लिए चुनौती बना रहा सांड
    10वीं कक्षा की छात्रा को सींगों पर उठाकर सड़क पर पटकने वाला सांड सोमवार को पूरे दिन प्रशासन के लिए चुनौती बना रहा। सुबह करीब 7:15 बजे लालकुर्ती में हमला करने के बाद भी सांड रात नौ बजे तक पकड़ा नहीं जा सका। समाचार लिखे जाने तक वह एक स्कूल के पास ही बैठा था। यानी जिस सांड ने सुबह एक बच्ची को अस्पताल पहुंचा दिया, उसके घंटों बाद भी उसके अगले हमले का खतरा लोगों के सिर पर मंडराता रहा।

    सांड को रखा कहां जाए… यक्ष सवाल, नहीं कोई बाड़ा
    हैरानी की बात यह है कि इस सांड को पकड़ने के बाद रखने के लिए कहीं कोई व्यवस्था नहीं है। यदि इसे कोई पकड़ भी ले तो इसे ऐसे ही कहीं छोड़ा भी नहीं जा सकता क्योंकि यदि छोड़ा गया तो यह वहां भी ऐसा ही आतंक मचाएगा। हैरानी यह कि सांड को पकड़ने के लिए जिम्मेदारी तय करने से लेकर उसे सुरक्षित रखने तक की व्यवस्था स्पष्ट नहीं हो सकी। कैंटोनमेंट बोर्ड के सीईओ ने शहर की वंदेमातरम् दल को सांड पकड़ने का अनुरोध किया। टीम ने सहयोग की हामी भरने से पहले सुरक्षा व्यवस्था स्पष्ट करने को कहा। इसके लिए उस समय यातायात रोकने, सांड पकड़े जाने के बाद उसे रखने की जगह और उसके उपचार की व्यवस्था तय करने की बात उठाई गई। उधर नगर परिषद के किसी अधिकारी ने कहीं पत्राचार तक नहीं किया।

    पशुपालन विभाग से लेकर स्थानीय निकायों तक सवाल
    बेसहारा पशुओं की समस्या केवल कैंटोनमेंट बोर्ड या नपा तक सीमित नहीं है। जिले के नगर निगम, नगर परिषद और नगरपालिकाओं के स्तर पर भी बेसहारा पशुओं को पकड़ने की व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। बेसहारा पशुओं को पकड़ने के लिए टेंडर दिया जाना चाहिए लेकिन अफसरों की सुस्ती के कारण ऐसा नहीं हो पा रहा। सवाल यह है कि सड़क पर घूम रहे बेसहारा पशुओं, खासकर लोगों पर हमला कर चुके आक्रामक सांडों को पकड़ने के लिए प्रशासन के पास तत्काल कार्रवाई की स्थायी व्यवस्था आखिर है कहां।

    इस तरह कई मामले पहले आए सामने

    • -बराड़ा में लगभग 2019 में आवारा पशुओं के हमलों से कई लोग घायल हो गये थे। एक युवक को आवारा बैल ने टक्कर मारकर घायल किया था।
    • -24 जुलाई 2025: अंबाला में सड़क पर आए बेसहारा गोवंश के कारण कार हादसे में चार लोग घायल हुए थे।
    • -दिसंबर 2025: अंबाला में बेसहारा गोवंश ने एक महिला पर सीधे हमला किया, महिला ने भागकर जान बचाई।
  • डूंगरपुर: जर्जर कमरे की छत भरभराकर गिरी, 120 बच्चों की बची जान

    डूंगरपुर: जर्जर कमरे की छत भरभराकर गिरी, 120 बच्चों की बची जान

    डूंगरपुर
    डूंगरपुर के दोवड़ा ब्लॉक स्थित ग्राम पंचायत सत्तु देवकी के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। रोजाना की तरह स्कूल में कक्षाएं संचालित हो रही थीं और लगभग 120 बच्चे अपने-अपने कमरों में बैठकर पढ़ाई कर रहे थे

    बता दें कि इसी दौरान स्कूल परिसर में लंबे समय से बंद पड़े एक जर्जर कमरे की छत अचानक तेज आवाज के साथ भरभराकर गिर गई। छत ढहने की आवाज सुनते ही पूरे स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई, जिसके बाद शिक्षक और विद्यार्थी घबराकर तुरंत अपने-अपने कमरों से बाहर निकल आए।

    एक साल से बंद था जर्जर कमरा
    जिस कमरे की छत गिरी, वह पिछले एक साल से बेहद जर्जर हालत में था। स्कूल प्रशासन ने कमरे को पहले ही असुरक्षित घोषित कर दिया गया था और उसमें बच्चों की कक्षाएं लगाना पूरी तरह बंद था। यदि बच्चों को उस कमरे में बैठाया गया होता, तो हादसा हो सकता था। इस सावधानी की वजह से 120 विद्यार्थियों और शिक्षकों की जान बाल-बाल बच गई और कोई भी चोटिल नहीं हुआ।

    10 में से 2 कमरे हैं जर्जर
    स्कूल प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार, विद्यालय भवन में कुल 10 कमरे हैं। इनमें से 2 कमरे काफी समय से पुराने और जर्जर हो चुके थे। सुरक्षा के दृष्टिकोण से इन दोनों ही कमरों का इस्तेमाल पूरी तरह रोक दिया गया था। इन्हीं 2 जर्जर कमरों में से एक की पूरी छत अचानक ढह गई। घटना के तुरंत बाद विद्यालय के शिक्षकों ने पूरे मामले की सूचना पंचायत प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी पंकज वर्मा को दी।

    अधिकारियों ने लिया जायजा, जल्द मरम्मत का दिया आश्वासन
    सूचना मिलते ही PEEO पंकज वर्मा और मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी दीपक शाह तुरंत मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने दुर्घटनाग्रस्त कमरे तथा दूसरे जर्जर कमरे का गहन निरीक्षण किया। CBEO दीपक शाह ने बताया, दूसरे जर्जर कमरे की स्थिति को देखते हुए नई छत डालने और मरम्मत कार्य करवाने का प्रस्ताव उच्च अधिकारियों को भेजा जा चुका है। स्वीकृति मिलते ही निर्माण व मरम्मत का कार्य प्राथमिकता से शुरू करवाया जाएगा।

  • CWC की बैठक छोड़कर परीक्षा देने पहुंचे पूर्व CM चरणजीत सिंह चन्नी, दी सफाई

    CWC की बैठक छोड़कर परीक्षा देने पहुंचे पूर्व CM चरणजीत सिंह चन्नी, दी सफाई

    चंडीगढ़.

    पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर से सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने पंजाब यूनिवर्सिटी में एमए पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन की परीक्षा देने के दौरान उनकी वायरल तस्वीर को लेकर उठे विवाद पर सफाई दी है।

    चन्नी ने कहा कि परीक्षा देते समय उनकी तस्वीर खींचना मीडिया के हाथ में था और वह पत्रकारों को फोटो लेने से नहीं रोक सकते। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने परीक्षा के दौरान किसी नियम का उल्लंघन नहीं किया। चन्नी ने बताया कि उन्होंने 20 अगस्त को एमए पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन की परीक्षा दी थी। परीक्षा कक्ष में अन्य विद्यार्थियों के साथ पेपर लिखते हुए उनकी तस्वीर बाद में डिजिटल मीडिया पर वायरल हो गई। तस्वीर सामने आने के बाद परीक्षा केंद्र में नियमों के पालन को लेकर सवाल उठे। चंडीगढ़ के पूर्व मेयर और पंजाब यूनिवर्सिटी के पूर्व सीनेटर देवेश मोंगिल ने मामले की जांच की मांग करते हुए सवाल किया था कि परीक्षा कक्ष के अंदर तस्वीर कैसे खींची गई और क्या किसी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण को अंदर ले जाने की अनुमति थी।

    20 बार दे चुका हूं परीक्षा: चन्नी
    चन्नी ने कहा कि वह इससे पहले भी करीब 20 बार परीक्षा दे चुके हैं, लेकिन कभी उनकी तस्वीर सामने नहीं आई। उनके मुताबिक, दिल्ली में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में शामिल नहीं होने की जानकारी मीडिया को थी, इसलिए इस बार परीक्षा देते हुए उनकी फोटो सामने आई। उन्होंने कहा कि उन्होंने परीक्षा के दौरान सभी नियमों का पालन किया है। वहीं, पंजाब यूनिवर्सिटी के कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन प्रो. जगत भूषण ने स्पष्ट किया कि चन्नी की तस्वीर परीक्षा कक्ष के बाहर से ली गई थी। उनके सुरक्षाकर्मी भी परीक्षा केंद्र के बाहर ही मौजूद थे और सुरक्षा में किसी तरह की चूक नहीं हुई। विश्वविद्यालय ने यह भी बताया कि संबंधित परीक्षा कक्ष में सीसीटीवी कैमरा नहीं था।

    एमए की डिग्री में लगेगा और एक साल का समय
    चन्नी के अनुसार, परीक्षा छोड़ने पर उनकी एमए की डिग्री पूरी होने में एक वर्ष और लग सकता था। इसी शैक्षणिक प्रतिबद्धता के कारण उन्होंने कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में भी हिस्सा नहीं लिया। उन्होंने कहा कि वह आगे पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन और नीतिगत सुधारों के क्षेत्र में शोध जारी रखना चाहते हैं। इससे पहले भी चरणजीत सिंह चन्नी पॉलिटिकल साइंस संकाय से पीएचडी की डिग्री हासिल कर चुके हैं। यह डिग्री भी उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी से की थी।