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  • झारखंड पुलिस को सीमा पार आतंकवाद से निपटने की ट्रेनिंग, 5 हजार जवान-पदाधिकारी प्रशिक्षित

    झारखंड पुलिस को सीमा पार आतंकवाद से निपटने की ट्रेनिंग, 5 हजार जवान-पदाधिकारी प्रशिक्षित

    रांची
     झारखंड पुलिस अपने कनीय पुलिस पदाधिकारियों, जवानों को सीमा पार आतंकवाद (क्रॉस बार्डर टेररिज्म) के विरुद्ध कार्रवाई व उसके विरुद्ध तकनीकी अनुसंधान के गुर सीखा रही है। ऐसे आतंकवाद, उग्रवाद के विरुद्ध कैसे कार्रवाई की जानी चाहिए, अनुसंधान के तकनीकी पहलू क्या होंगे, कौन-कौन सी विधि अपनाई जा सकती है, सहित विभिन्न बिंदुओं से झारखंड पुलिस के जवान व पदाधिकारी अवगत हो रहे हैं। राज्य के भीतर व राज्य के बाहर अब तक पांच हजार पुलिस पदाधिकारी व जवान अब तक प्रशिक्षित हो चुके हैं।

    जब एक देश या राज्य के आतंकवादी या उग्रवादी दूसरे देश या राज्य की सीमा पार करके हमला करते हैं तो उसे सीमा पार आतंकवाद कहते हैं। झारखंड हो या पूरा देश इस तरह के आतंकवाद या उग्रवाद से लंबे समय से पीड़ित रहा है।

    इसके लिए प्रशिक्षु पदाधिकारियों को सीमा प्रबंधन बताया जाता है, जैसे स्क्रीनिंग तकनीक, यात्रा दस्तावेज की सुरक्षा व बायोमीट्रिक डेटा जुटाना, साइबर खुफिया जानकारी, डेटा विश्लेषण, मानव खुफिया जानकारी, वित्तीय निगरानी, कानूनी व रणनीतिक ढांचा आदि समझाया जाता है।

    राज्य के भीतर ऑनलाइन, ऑनलाइन 28 प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रशिक्षित हुए 4794 पदाधिकारी जवान
    राज्य के भीतर इस वर्ष जनवरी से जुलाई तक यानी सात महीने में ऑनलाइन व ऑफलाइन माध्यम से विभिन्न प्रकार के कुल 28 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। इस कार्यक्रम में कुल 4794 पुलिस पदाधिकारी व कर्मी प्रशिक्षित हुए हैं। इनमें दारोगा से इंस्पेक्टर रैंक तक के लिए इंडक्शन प्रशिक्षण कोर्स कराया गया।

    पुलिस के कार्य से संबंधित तकनीकी जानकारी दी गई। नए कानून भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, भारतीय साक्ष्य अधिनियम आदि से प्रशिक्षुओं को अवगत कराया गया। इसके अलावा बुजुर्ग माता-पिता, वरिष्ठ नागरिकों आदि की देखभाल, उनकी कल्याणकारी योजनाओं से भी उन्हें अवगत कराया गया है।

    ड्रोन तकनीक व इसके एप तथा सीमा पार आतंकवाद पर भी हुए प्रशिक्षण कार्यक्रम
    राज्य के बाहर भी आनलाइन व आफलाइन माध्यम से विभिन्न प्रकार के कुल 68 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। इसके तहत इस वर्ष सात महीने में राज्य के कुल 222 पुलिस पदाधिकारियों-कर्मियों को विभिन्न तरह से प्रशिक्षित किए गए हैं।

    इनमें ड्रोन तकनीक व इसके एप से संबंधित कोर्स, सीमा पार आतंकवाद से संबंधित कोर्स आदि का प्रशिक्षण दिया गया है। आने वाले समय में अभी और पदाधिकारियों-जवानों को प्रशिक्षित किया जाना है।

  • JPSC धांधली केस पर सुनवाई, CID ने कोर्ट में 1000 पन्नों की केस डायरी दी

    JPSC धांधली केस पर सुनवाई, CID ने कोर्ट में 1000 पन्नों की केस डायरी दी

    रांची
    झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में कथित धांधली के मामले में मंगलवार को पांच आरोपियों की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई. अपर न्यायायुक्त योगेश कुमार की अदालत में पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. ख्यांगते, श्वेता गुप्ता, अभय तिवारी, सुमन सौरव और उमेश कुमार की ओर से दाखिल बेल पिटिशन पर सुनवाई की गई l

    सुनवाई के दौरान जांच एजेंसी CID की ओर से मामले से जुड़ी केस डायरी अदालत में पेश की गई. जानकारी के मुताबिक, CID ने करीब 1000 पन्नों की केस डायरी कोर्ट में समर्पित की है. केस डायरी में जांच के दौरान जुटाए गए दस्तावेज, आरोपियों से पूछताछ और अन्य साक्ष्यों से जुड़ी जानकारियां शामिल होने की बात कही जा रही है l

    2 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
    मामले में मंगलवार की सुनवाई के बाद अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 2 सितंबर की तारीख निर्धारित की है. अब उस दिन आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर आगे की सुनवाई होगी. फिलहाल आरोपियों की ओर से जमानत के लिए अदालत में दलीलें रखी जा रही हैं, जबकि जांच एजेंसी की ओर से केस डायरी के आधार पर अपना पक्ष रखा जा रहा है l

    JPSC परीक्षा में गड़बड़ी की जांच कर रही CID
    दरअसल, 14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा समेत आयोग की अन्य परीक्षाओं में कथित अनियमितता सामने आने के बाद मामले की जांच CID को सौंपी गई थी. जांच के दौरान JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांगते, तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता और TDPL से जुड़े अभय तिवारी समेत कई लोगों की भूमिका जांच के दायरे में आई है l

    एल. ख्यांगते से CID कई दौर में पूछताछ भी कर चुकी है
    जांच में परीक्षा प्रक्रिया, OMR शीट की स्कैनिंग और डेटा प्रोसेसिंग समेत परीक्षा संचालन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की जा रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, CID की जांच में अभ्यर्थियों से कथित तौर पर पैसे लेकर परीक्षा में सेटिंग और OMR में छेड़छाड़ जैसे आरोपों की भी जांच की जा रही हैl

    श्वेता गुप्ता और अभय तिवारी से जुड़े आरोप
    जांच के दौरान उप परीक्षा नियंत्रक रहीं श्वेता गुप्ता से भी CID ने पूछताछ की है. सूत्रों की माने तो परीक्षा परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया और तत्कालीन अध्यक्ष के कथित दबाव से जुड़ी बातें सामने आई हैं. हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और जांच पूरी होने के बाद ही होगी. वहीं, अभय तिवारी की पूछताछ के आधार पर कथित परीक्षा सेटिंग और अभ्यर्थियों से पैसे लेने के नेटवर्क को लेकर भी जांच आगे बढ़ी है. CID की जांच में एजेंटों के जरिए अभ्यर्थियों से संपर्क और कथित तौर पर OMR में टेंपरिंग के आरोपों की पड़ताल की जा रही है l

    अब 2 सितंबर पर टिकी नजर
    फिलहाल पांचों आरोपियों की बेल याचिका पर सुनवाई आगे बढ़ गई है. करीब 1000 पन्नों की केस डायरी अदालत में पेश किए जाने के बाद अब 2 सितंबर को होने वाली सुनवाई अहम मानी जा रही है. उस दिन अदालत केस डायरी में दर्ज तथ्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर आगे विचार करेगी. इसके बाद ही आरोपियों को जमानत मिलती है या नहीं, इस पर स्थिति स्पष्ट होगी l

  • NEET PG 2026: रांची के 4 परीक्षा केंद्रों के 200 मीटर दायरे में निषेधाज्ञा, जानें जरूरी नियम

    NEET PG 2026: रांची के 4 परीक्षा केंद्रों के 200 मीटर दायरे में निषेधाज्ञा, जानें जरूरी नियम

     रांची
     नीट-पीजी 2026 परीक्षा को लेकर रांची के चार परीक्षा केंद्रों के 200 मीटर की परिधि में निषेधाज्ञा लागू की गई है। परीक्षा का आयोजन 30 अगस्त को किया जाएगा। कदाचारमुक्त परीक्षा संचालन और विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अनुमंडल दंडाधिकारी, सदर, रांची ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत यह आदेश जारी किया है।

    निषेधाज्ञा 30 अगस्त की सुबह छह बजे से दोपहर 3:30 बजे तक प्रभावी रहेगी। जिला प्रशासन के अनुसार, परीक्षा केंद्रों पर असामाजिक तत्वों के भीड़ लगाकर विधि-व्यवस्था भंग करने की आशंका को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

    परीक्षा के शांतिपूर्ण संचालन के लिए परीक्षा केंद्रों पर पुलिस पदाधिकारी, पुलिस बल के साथ दंडाधिकारी की प्रतिनियुक्ति भी की गई है। निषेधाज्ञा के दौरान परीक्षा केंद्रों के 200 मीटर के दायरे में पांच या पांच से अधिक लोगों के एक स्थान पर जमा होने पर रोक रहेगी। परीक्षा को लेकर प्रशासन ने सभी आवश्यक सुरक्षा और विधि-व्यवस्था संबंधी तैयारियां पूरी करने का निर्देश दिया है।

    सुविधा के लिए परीक्षार्थी इन केंद्रों के नाम नोट कर सकते हैं-
        RTCIT: राम टहल चौधरी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, आनंदी, ओरमांझी ब्लॉक चौक
        Arunima Technical Services: प्रगति पथ, रोड नंबर-6, सामलोंग, लोअर चुटिया
        iQube Digital: मेदांता अस्पताल के पास, कैफेटेरिया बिल्डिंग, इरबा
        Oxford Public School: ओल्ड एचबी रोड, प्रगति पथ, रांची

    परीक्षार्थियों के लिए आवश्यक टिप्स
    समय पर पहुंचें: निषेधाज्ञा और सुरक्षा जांच के मद्देनजर केंद्र पर रिपोर्टिंग टाइम से कम से कम 45 मिनट पहले पहुंचें।

    पहचान पत्र: अपना वैध एडमिट कार्ड और एक मूल सरकारी फोटो पहचान पत्र (आधार कार्ड/पैन कार्ड/ड्राइविंग लाइसेंस) साथ रखना अनिवार्य है।

    निषेध वस्तुएं: परीक्षा हॉल के भीतर मोबाइल फोन, ब्लूटूथ डिवाइस, कैलकुलेटर या किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक गैजेट ले जाने की सख्त मनाही है।

     

  • BPSC TRE 4: वाटर कैनन के बीच शैंपू लगाकर नहाने लगा छात्र, पथराव के बाद लाठीचार्ज

    BPSC TRE 4: वाटर कैनन के बीच शैंपू लगाकर नहाने लगा छात्र, पथराव के बाद लाठीचार्ज

    पटना.

    बीपीएससी टीआरई-4 में एकल परीक्षा कराने, निगेटिव मार्किंग खत्म करने समेत अन्य मांगों को लेकर मंगलवार को पटना में छात्रों का प्रदर्शन उग्र हो गया। प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को वाटर कैनन और लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा। इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। हिरासत में लिए गए छात्रों को पहले सचिवालय और बाद में हवाई अड्डा थाने ले जाया गया।

    हालांक‍ि, करीब दो घंटे तक डाकबंगला चौराहे पर प्रदर्शनकारी डटे हुए हैं। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए गांधी मैदान से डाकबंगला चौराहे तक सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। गांधी मैदान के जेपी गोलंबर पर पुलिस ने बैरिकेडिंग कर रखी थी, लेकिन प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ गए। बड़ी संख्या में छात्र डाकबंगला चौराहे तक पहुंच गए।

    वाटर कैनन की बौछार के बीच डांस, शैंपू लगाकर नहाने लगा छात्र
    डाकबंगला चौराहे पर स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर वाटर कैनन चलाया। हालांकि, पानी की तेज बौछार के बावजूद प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं थे। इसी दौरान कुछ प्रदर्शनकारी तिरंगा लेकर डांस करने लगे। प्रदर्शन के बीच एक छात्र ने तो अलग ही अंदाज दिखाया। वाटर कैनन की बौछार के बीच उसने शैंपू लगाकर नहाना शुरू कर दिया। इसके बाद वह सिर पर शैंपू लगाए पुलिसकर्मियों के सामने जाकर उन्हें चिढ़ाता नजर आया। प्रदर्शन के बीच छात्र की इस हरकत को देखकर मौके पर मौजूद लोगों की हंसी भी छूट गई।

    डाकबंगला पर बिगड़े हालात, पुलिस ने किया लाठीचार्ज
    डाकबंगला चौराहे पर प्रदर्शनकारियों की बढ़ती भीड़ के कारण स्थिति तनावपूर्ण हो गई। पुलिस ने पहले प्रदर्शनकारियों को समझाने और पीछे हटाने का प्रयास किया। जब प्रदर्शनकारी नहीं माने तो पुलिस ने लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर करने की कोशिश की। बताया जा रहा है कि इसी दौरान प्रदर्शन कारियों की ओर से पथराव भी किया गया। इसमें टाउन डीएसपी कामाख्या नारायण सिंह के चोटिल होने की सूचना है।

    प्रदर्शन में छात्रा घायल, अस्पताल में भर्ती
    प्रदर्शन के दौरान एक छात्रा के सिर में भी चोट लगी। सिर फटने के बाद उसे इलाज के लिए गार्डिनर रोड अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं, प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कई बार धक्का-मुक्की की स्थिति बनी। पुलिस की ओर से लगातार प्रदर्शनकारियों को हटाने का प्रयास किया जाता रहा, जबकि छात्र अपनी मांगों पर अड़े रहे। दोपहर बाद तक बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी डाकबंगला और आसपास के इलाकों में जुटे रहे।

  • राजगीर बना बिहार का बड़ा इको-टूरिज्म हब, 2025 में 24 लाख से ज्यादा पर्यटक पहुंचे

    राजगीर बना बिहार का बड़ा इको-टूरिज्म हब, 2025 में 24 लाख से ज्यादा पर्यटक पहुंचे

    पटना
    बिहार की प्राकृतिक संपदा को संरक्षित रखते हुए पर्यटन को स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार से जोड़ने की कवायद तेज है।

    वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की पहल से राजगीर इको टूरिज्म के प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।

    हरी-भरी पहाड़ियों, घने वन क्षेत्र, गर्म जलस्रोत, घोड़ा कटोरा और नेचर सफारी पर्यटकों को लगातार आकर्षित कर रहे हैं।

    विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में जनवरी से नवंबर के बीच 24 लाख 55 हजार 255 पर्यटक राजगीर पहुंचे।

    इनमें 23 लाख 37 हजार 383 घरेलू और एक लाख 17 हजार 872 विदेशी पर्यटक शामिल थे। वहीं, इस वर्ष जनवरी से मार्च के बीच भी एक लाख 37 हजार 855 पर्यटकों ने राजगीर का भ्रमण किया।

    पांच पहाड़ियों के बीच बसा राजगीर बना आकर्षण का केंद्र
    पांच पहाड़ियों से घिरा राजगीर प्राकृतिक और धार्मिक पर्यटन का अनोखा संगम है। वैभवगिरि, विपुलाचल, रत्नागिरि, उदयगिरि और स्वर्णगिरि की पहाड़ियां यहां आने वाले पर्यटकों के लिए खास आकर्षण हैं।

    पहाड़ियों और हरियाली से घिरे इस क्षेत्र में प्रकृति के करीब समय बिताने का अनुभव पर्यटकों को खूब पसंद आ रहा है।

    राजगीर के गर्म जलस्रोत धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यटकों के आकर्षण का भी प्रमुख केंद्र हैं। वहीं, घोड़ा कटोरा अपनी प्राकृतिक खूबसूरती, हरियाली और शांत वातावरण के कारण प्रकृति प्रेमियों को खास तौर पर आकर्षित करता है।

    रोपवे और नेचर सफारी बढ़ा रहे रोमांच
    राजगीर में रोपवे भी पर्यटकों के आकर्षण का बड़ा केंद्र बन चुका है। पहाड़ियों के बीच रोपवे की सवारी पर्यटकों को प्राकृतिक दृश्यों का अलग अनुभव देती है। इसके साथ ही नेचर सफारी ने राजगीर को एडवेंचर और इको टूरिज्म के नक्शे पर नई पहचान दी है।

    वन एवं पर्यावरण विभाग का जोर केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाने पर नहीं, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ स्थानीय लोगों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने पर भी है।

    पर्यटन बढ़ने से स्थानीय लोगों को रोजगार
    राजगीर में पर्यटन गतिविधियों के विस्तार का सीधा लाभ स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिल रहा है। स्थानीय गाइड, वाहन संचालक, होटल-रेस्तरां, खान-पान, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों से जुड़े लोगों के लिए रोजगार और आय के अवसर बढ़े हैं।

    विभाग का प्रयास है कि इको टूरिज्म के विकास के साथ स्थानीय समुदाय को भी इसका लाभ मिले और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित करते हुए पर्यटन को टिकाऊ बनाया जा सके।

    इससे राजगीर की पहचान केवल धार्मिक और ऐतिहासिक पर्यटन स्थल के रूप में नहीं, बल्कि प्रकृति, रोमांच और स्थानीय संस्कृति के संगम वाले प्रमुख इको टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में और मजबूत हो रही है।

     

  • ‘गुजरात और पंजाब के स्कूलों की जांच करवा लें’, अरविंद केजरीवाल का BJP को खुला चैलेंज

    ‘गुजरात और पंजाब के स्कूलों की जांच करवा लें’, अरविंद केजरीवाल का BJP को खुला चैलेंज

    नई दिल्ली.

    आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पंजाब के सरकारी स्कूलों को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। एक वीडियो संदेश जारी कर केजरीवाल ने बीजेपी नेतृत्व को खुली चुनौती दी है कि वे गुजरात के 1,000 और पंजाब के 1,000 सरकारी स्कूलों की संयुक्त जांच करा लें, ताकि पूरा देश देख सके कि कहां की शिक्षा व्यवस्था बेहतर है।

    पंजाब के स्कूलों को बदनाम करने में जुटी बीजेपी
    वीडियो संदेश में अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आजकल बीजेपी वाले पंजाब के स्कूलों को बदनाम करने में लगे हुए हैं। मैं बीजेपी को चैलेंज करता हूं। 30 साल से आपकी गुजरात में सरकार है और साढ़े चार साल से हमारी पंजाब में सरकार है। पंजाब के 1000 स्कूलों की लिस्ट मैं देता हूं और गुजरात के 1,000 स्कूलों की लिस्ट आप दो। पूरा मीडिया साथ चलेगा, बीजेपी वाले भी आएं और हम भी जाएंगे। दोनों राज्यों के स्कूलों का इंस्पेक्शन करते हैं कि कौन से अच्छे हैं।

    पुराने वीडियो और फर्जी तस्वीरों का लगाया आरोप
    केजरीवाल ने आरोप लगाया कि जब से विपक्षी दलों ने बीजेपी शासित राज्यों के स्कूलों की बदहाली उजागर करनी शुरू की है, तब से बीजेपी पंजाब के स्कूलों को निशाना बना रही है। उन्होंने कहा कि इन्होंने अपने स्कूल तो ठीक नहीं किए, लेकिन पंजाब के स्कूलों को बदनाम करना शुरू कर दिया। ये लोग 2018 का वीडियो चलाकर कह रहे हैं कि आम आदमी पार्टी का स्कूल खराब है। 2018 में पंजाब में कांग्रेस की सरकार थी और 2017 तक बीजेपी की साझेदारी वाली सरकार थी, उन्होंने स्कूलों की ऐसी हालत की थी।

    साढ़े चार साल में बदले 19,200 स्कूल
    पंजाब सरकार के शिक्षा मॉडल का ब्योरा देते हुए केजरीवाल ने बताया कि राज्य में कुल लगभग 19,700 सरकारी स्कूल हैं। इनमें से 19,200 से अधिक स्कूलों का कायाकल्प कर उन्हें बेहद शानदार बना दिया गया है। शेष बचे 500 स्कूलों का जीर्णोद्धार जारी है, जो अगले डेढ़ से दो साल के भीतर पूरा कर लिया जाएगा। केजरीवाल ने कहा कि पंजाब के सरकारी स्कूलों को सुधारने का काम किसी एक पार्टी ने नहीं, बल्कि वहां के शिक्षकों, प्रिंसिपलों, बच्चों और अभिभावकों ने मिलकर किया है।

    उन्होंने अपील की कि पुरानी तस्वीरों, AI-डॉक्टर्ड वीडियो और भ्रामक पोस्ट के जरिए पंजाब की जनता और शिक्षकों के प्रयासों का अपमान न किया जाए। केजरीवाल ने अपनी बात का अंत करते हुए दोहराया कि यदि बीजेपी में हिम्मत है, तो वह उनके 1,000 बनाम 1,000 स्कूलों के निरीक्षण की चुनौती को स्वीकार करे।

  • रक्षाबंधन को लेकर नरपतगंज के बाजारों में बढ़ी रौनक, सजीं रंग-बिरंगी राखियां

    रक्षाबंधन को लेकर नरपतगंज के बाजारों में बढ़ी रौनक, सजीं रंग-बिरंगी राखियां

     फुलकाहा (अररिया)
    भाई-बहन के अटूट प्रेम, स्नेह और विश्वास का पावन पर्व रक्षाबंधन जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे नरपतगंज क्षेत्र के बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है।

    बाजारों में रंग-बिरंगी, डिजाइनर, बच्चों की पसंदीदा कार्टून राखियों से लेकर पारंपरिक और आकर्षक राखियों की बिक्री शुरू हो गई है। दुकानदारों ने भी पर्व को लेकर विशेष तैयारियां की हैं।

    रक्षाबंधन केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का प्रतीक है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनकी सुख-समृद्धि, दीर्घायु और उज्ज्वल भविष्य की कामना करती हैं। बदले में भाई अपनी बहन की रक्षा और जीवनभर उसके साथ खड़े रहने का संकल्प लेते हैं।

    इतिहास और परंपराओं से जुड़ा है रक्षाबंधन
    रक्षाबंधन का इतिहास भारतीय पौराणिक कथाओं और ऐतिहासिक प्रसंगों से जुड़ा रहा है। मान्यता है कि प्राचीन काल से ही रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा समाज में प्रचलित रही है। यह केवल भाई-बहन तक सीमित नहीं था, बल्कि रक्षा, विश्वास और शुभकामनाओं का प्रतीक माना जाता था।

    पौराणिक मान्यताओं में भगवान श्रीकृष्ण और द्रौपदी के प्रसंग का उल्लेख मिलता है, जबकि ऐतिहासिक परंपराओं में भी रक्षा सूत्र के माध्यम से संबंधों को मजबूत करने की अनेक कथाएं प्रचलित हैं।

    यही कारण है कि समय के साथ रक्षाबंधन भारतीय समाज में प्रेम और सुरक्षा के एक बड़े सांस्कृतिक पर्व के रूप में स्थापित हो गया।

    नरपतगंज के बाजारों में राखियों की चहल-पहल
    रक्षाबंधन को लेकर नरपतगंज क्षेत्र के प्रमुख बाजारों में इन दिनों चहल-पहल शुरू हो गई है। दुकानों पर तरह-तरह की राखियां सजाई गई हैं। बच्चों के लिए कार्टून और आकर्षक डिजाइन वाली राखियां, युवाओं के लिए स्टाइलिश राखियां तथा पारंपरिक पसंद रखने वालों के लिए साधारण और धार्मिक डिजाइन वाली राखियां बाजार में उपलब्ध हैं।
    दुकानदारों का कहना है कि त्योहार के करीब आने के साथ बिक्री में और तेजी आने की उम्मीद है।

    भारत-नेपाल के रिश्तों की भी दिखती है खूबसूरत झलक
    सीमावर्ती नरपतगंज क्षेत्र में रक्षाबंधन का पर्व केवल पारिवारिक उत्सव नहीं, बल्कि भारत और नेपाल के सदियों पुराने सामाजिक एवं सांस्कृतिक संबंधों की भी सुंदर झलक प्रस्तुत करता है। भारत-नेपाल सीमा के दोनों ओर रहने वाले लोगों के बीच लंबे समय से रोटी-बेटी का संबंध कायम है।

    यही दृश्य भारत-नेपाल के बीच केवल राजनीतिक या भौगोलिक संबंधों से कहीं आगे बढ़कर दिलों के रिश्ते की कहानी कहता है। सीमाएं भले ही दोनों देशों को अलग करती हों, लेकिन परिवार, संस्कृति, भाषा, परंपराएं और रिश्ते उन्हें मजबूती से जोड़े हुए हैं।

    एक ओर बाजारों में रंग-बिरंगी राखियों की चमक है, तो दूसरी ओर भाई-बहन के प्यार की चमक। एक ओर सीमाएं हैं, तो दूसरी ओर रिश्तों की ऐसी डोर, जिसे कोई सीमा बांध नहीं सकती।

    रक्षाबंधन का संदेश साफ है
    रिश्तों की रक्षा हो, प्रेम बना रहे और भाई-बहन का यह अटूट बंधन हर वर्ष और मजबूत होता रहे।

     

  • झारखंड में 22 शिक्षा पदाधिकारियों को प्रोन्नति, DEO-DSE समेत कई अधिकारियों को मिला लाभ

    झारखंड में 22 शिक्षा पदाधिकारियों को प्रोन्नति, DEO-DSE समेत कई अधिकारियों को मिला लाभ

     रांची
     स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने राज्य शिक्षा सेवा के 22 पदाधिकारियों को प्रोन्नति प्रदान की है। इनमें कई जिला शिक्षा पदाधिकारी और जिला शिक्षा अधीक्षक सम्मिलित हैं। प्रोन्नति के बाद वेतनमान पे मैट्रिक्स लेवल-9 से बढ़कर लेवल-11 हो गया है।

    जिन अधिकारियों को प्रोन्नति मिली है, उनमें बोकारो के डीईओ प्रवीण रंजन, पश्चिमी सिंहभूम के डीईओ प्रिंस कुमार, रामगढ़ के डीईओ अभय कुमार शील, हजारीबाग की डीईओ कुमारी नीलम, पूर्वी सिंहभूम की डीईओ निशु कुमारी और गिरिडीह के डीईओ विनय कुमार सम्मिलित हैं।

    साथ ही सिमडेगा के डीईओ मिथिलेश केरकेट्टा, डायट, पाकुड़ के प्राचार्य संतोष गुप्ता, रांची के डीईओ मो. वसीम अहमद, देवघर के डीईओ बिनोद कुमार, बोकारो के डीएसई अतुल कुमार चौबे, साहिबगंज के डीएसई नयन कुमार, लोहरदगा की डीईओ दास सुनंदा चन्द्रमौलेश्वर, दुमका के डीईओ संजीत कुमार, कोडरमा के डीएसई मुकुल राज, जामताड़ा के चार्ल्स हेम्ब्रम, पाकुड़ की अनिता पुरती और गोड्डा की मिथिला टुडू को भी प्रोन्नति दी गई है।

    झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के प्रशासी पदाधिकारी मनोज कुमार को भी प्रोन्नति प्रदान की गई है। वहीं, सेवानिवृत्त अधिकारी जयंत मिश्रा को नोशनल प्रोन्नति प्रदान की गई है।

    तीन प्रशासनिक अधिकारियों की सेवा संपुष्ट की गई
    प्रशासनिक सेवा के तीन अधिकारियों की सेवा संपुष्ट कर दी गई है। इससे संबंधित अधिसूचना कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग ने जारी कर दी है।

    अधिसूचना के अनुसार ज्योति वंदना कुजूर, अरुण कुमार मुंडा और विनय कुमार की सेवा संपुष्टि से संबंधित पत्र जारी कर दिया गया है। विनय कुमार 2022 से प्रशासनिक सेवा में कार्यरत थे, ज्योति वंदना कुजूर 2010 से और अरुण कुमार मुंडा 2015 से कार्यरत हैं।

     

  • रुक्का जलशोध संस्थान में 2400 किलो का ट्रांसफार्मर चोरी, 34 करोड़ की सुरक्षा पर उठे सवाल

    रुक्का जलशोध संस्थान में 2400 किलो का ट्रांसफार्मर चोरी, 34 करोड़ की सुरक्षा पर उठे सवाल

     रांची
     जरा कल्पना कीजिए… एक ऐसी जगह, जहां 24 घंटे सुरक्षा की व्यवस्था हो। चार सुरक्षा गार्ड और सात सुपरवाइजर लगातार ड्यूटी पर हों। पूरा परिसर ऊंची चहारदीवारी से घिरा हो और सुरक्षा के नाम पर हर साल करीब 34 करोड़ रुपये खर्च किए जाते हों। इसके बावजूद चोर रात के अंधेरे में करीब 2400 किलो वजनी ट्रांसफार्मर उठाकर निकल जाएं और किसी को भनक तक न लगे।

    रुक्का जलशोध संस्थान में कुछ ऐसा ही हुआ है। राजधानी की जलापूर्ति व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण इस प्लांट में चोर 500 केवीए का ट्रांसफार्मर लेकर फरार हो गए। ट्रांसफार्मर नव निर्मित प्लांट के पास लगा था। इसके साथ ही कई अन्य उपकरणों के भी गायब होने की सूचना है। चोरी गए सामान की कीमत करीब 30 लाख रुपये आंकी जा रही है। फिलहाल विभागीय स्तर पर इसका आकलन कराया जा रहा है।

    सबसे बड़ा सवाल यही है कि 2400 किलो की मशीन चोरों ने आखिर उठाई कैसे और इतनी सुरक्षा के बीच उसे परिसर से बाहर ले कैसे गए?
    2400 किलो का ट्रांसफार्मर ऐसे ही नहीं उठ गया होगा

    500 केवीए के ट्रांसफार्मर का वजन करीब 2400 किलो बताया जा रहा है। यानी करीब 24 क्विंटल। यह कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे कोई व्यक्ति कंधे पर उठाकर या हाथ में लेकर भाग जाए।

    ट्रांसफार्मर में करीब 450 किलो तेल और 500 किलो से अधिक तांबा भी होता है। यही वजह है कि कबाड़ बाजार में इसकी कीमत भी अच्छी-खासी हो सकती है। तांबे की स्क्रैप कीमत करीब 650 रुपये प्रति किलो के आसपास बताई जा रही है।

    यानी चोरों को इसे निकालने के लिए वाहन, लोगों और समय—तीनों की जरूरत पड़ी होगी। सवाल यह है कि यह सब हुआ और प्लांट की सुरक्षा में तैनात किसी व्यक्ति को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई?

    चार गार्ड, सात सुपरवाइजर… फिर भी चोर बेखौफ
    रुक्का जलशोध संस्थान में सुरक्षा के लिए चार सुरक्षा गार्ड और सात सुपरवाइजर की ड्यूटी रहती है। प्लांट के चारों ओर चहारदीवारी है। परिसर के अंदर कर्मचारियों और इंजीनियरों के लिए आवास भी बनाए गए हैं। इसके बावजूद चोर आए, ट्रांसफार्मर को अपने कब्जे में लिया, उसे बाहर ले जाने की तैयारी की और फिर लेकर फरार भी हो गए।

    न गार्ड ने देखा, न सुपरवाइजर को पता चला और न ही किसी अन्य कर्मचारी को इसकी भनक लगी। यही बात इस चोरी को सामान्य चोरी से अलग बनाती है और सुरक्षा व्यवस्था पर सबसे बड़ा सवाल खड़ा करती है।

    सुरक्षा पर हर साल 34 करोड़ रुपये, फिर भी 24 क्विंटल की मशीन गायब
    रुक्का प्लांट की सुरक्षा पर विभाग हर साल करीब 34 करोड़ रुपये खर्च करता है। इसके बावजूद प्लांट से 24 क्विंटल वजन वाला ट्रांसफार्मर चोरी हो जाना सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

    अब सवाल यह भी है कि सुरक्षा के लिए इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद क्या केवल गार्ड की तैनाती ही सुरक्षा व्यवस्था है? क्या रात में नियमित पेट्रोलिंग होती है? क्या महत्वपूर्ण उपकरणों की निगरानी की जाती है? क्या प्रवेश और निकास पर वाहनों की जांच होती है?
    इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा।

    परिसर में बने हैं आवास, फिर भी नहीं रहते इंजीनियर
    प्लांट कर्मियों के अनुसार नियम के मुताबिक इंजीनियरों को प्लांट से करीब आठ किलोमीटर की परिधि में रहना चाहिए। इसके लिए परिसर में एसडीओ और जेई के आवास भी उपलब्ध हैं। लेकिन फिलहाल इन आवासों में कोई इंजीनियर नहीं रहता। ऐसे में रात के समय प्लांट की निगरानी कितनी प्रभावी है, इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं।

    34 करोड़ के रखरखाव ठेके के बीच सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
    रुक्का जलशोध संस्थान के संचालन, रखरखाव और जलापूर्ति व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने एजेंसी को करीब 34 करोड़ रुपये का ठेका दिया है। इसके तहत एजेंसी को औसतन करीब 3.14 लाख रुपये प्रतिदिन का भुगतान किया जाता है। इतने बड़े ठेके के बावजूद प्लांट के महत्वपूर्ण विद्युत उपकरण की चोरी ने रखरखाव के साथ-साथ सुरक्षा की निगरानी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
    पुलिस के सामने भी बड़ा सवाल- 2400 किलो का ट्रांसफार्मर गया कैसे?

    प्लांट के आपरेशन और मेंटेनेंस का काम देख रही पाठक इंजीनियरिंग कारपोरेशन की ओर से ओरमांझी थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए आवेदन दिया गया है।

    अब पुलिस यह पता लगाने में जुटेगी कि चोर प्लांट के आसपास किस रास्ते से पहुंचे और इतनी भारी मशीन को किस रास्ते से बाहर ले गए। यह भी जांच का विषय होगा कि ट्रांसफार्मर को खोलकर उसके हिस्से अलग किए गए या उसे किसी वाहन की मदद से पूरा ही बाहर ले जाया गया। ट्रांसफार्मर के साथ अन्य उपकरणों के गायब होने की सूचना ने मामले को और गंभीर बना दिया है।

    पहले भी तकनीकी समस्या को लेकर चर्चा में रहा है प्लांट
    रुक्का प्लांट पहले भी तकनीकी और संचालन संबंधी समस्याओं को लेकर चर्चा में रहा है। वर्ष 2023 में यहां लो-वोल्टेज की समस्या सामने आई थी। बिजली विभाग की टीम ने ट्रांसफार्मर के टैप में सुधार कर समस्या को दूर किया था। अब ट्रांसफार्मर की चोरी ने प्लांट की सुरक्षा व्यवस्था को सवालों के घेरे में ला दिया है।

    विभाग करा रहा चोरी गए सामान का आकलन
    मैकेनिकल रांची के अधीक्षण अभियंता शंकर दास ने बताया कि ट्रांसफार्मर समेत कई उपकरणों की चोरी की सूचना मिली है। प्लांट के आपरेशन और मेंटेनेंस का काम देखने वाली एजेंसी की ओर से चोरी के संबंध में प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए आवेदन दिया गया है। विभागीय स्तर पर चोरी गए सामान का मूल्यांकन कराया जा रहा है।

    मंत्री बोले- घटना सामान्य नहीं, मुख्यालय से जाएगी जांच टीम
    पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि रुक्का फिल्ट्रेशन प्लांट में चोरी की घटना सामान्य नहीं है। सुरक्षा गार्ड के रहते हुए ट्रांसफार्मर समेत विभिन्न उपकरणों की चोरी की विस्तृत जांच कराई जाएगी। जांच के लिए मुख्यालय से टीम भेजी जाएगी।

     

  • जयपुर में 310 अतिक्रमण हटेंगे, राजस्थान हाईकोर्ट ने 3 महीने में कार्रवाई के दिए आदेश

    जयपुर में 310 अतिक्रमण हटेंगे, राजस्थान हाईकोर्ट ने 3 महीने में कार्रवाई के दिए आदेश

     जयपुर
    राजस्थान हाईकोर्ट ने 22 गोदाम रेलवे स्टेशन से बी-2 बाइपास तक सड़क पर मौजूद लगभग 310 अतिक्रमणों को 15 दिनों का नोटिस देकर और सुनवाई का अवसर प्रदान करते हुए हटाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने 3 महीने में अतिक्रमण हटाकर रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने याचिका को जनहित याचिका के रूप में स्वीकार कर लिया है। न्यायाधीश इंद्रजीत सिंह और न्यायाधीश संदीप तनेजा की खंडपीठ ने सीताराम देवांदा व अन्य द्वारा दायर याचिका तथा इससे जुड़ी अवमानना व विविध याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया।

    जेडीए की ओर से पेश हुए अधिवक्ता अमित कुमार ने एक शपथ पत्र प्रस्तुत किया। जेडीए ने शपथ पत्र में यह भी स्वीकार किया कि सड़क के इन तीनों हिस्सों पर अलग-अलग स्थानों पर लगभग 310 अतिक्रमण मौजूद है। सुनवाई के दौरान मध्यस्थ के वकील ने कोर्ट को बताया कि रेलवे अधिकारियों ने भी उक्त सड़क के कुछ हिस्सों पर अतिक्रमण किया हुआ है। अगली सुनवाई 25 नवंबर 2026 को तय की गई हैं। राजस्थान हाईकोर्ट ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए आदेश दिया है कि देश की कोई भी सिविल अदालत या ट्रिब्यूनल इस सड़क से संबंधित किसी भी अपील या सिविल सूट (दीवानी मामले) पर सुनवाई नहीं करेगा।

        22 गोदाम रेलवे स्टेशन से महेश नगर फाटकः 40 फीट
        महेश नगर फाटक से गोपालपुरा बाइपासः 60 फीट
        गोपालपुरा बाइपास से बी-2 बाइपासः 80 फीट

    एमडी रोड पानी-पानी, नाले से अतिक्रमण हटाने की मांग
    जयपुर की MD रोड पर सोमवार को जलभराव हो गया है। ऐसे में लोगों को आने-जाने में काफी परेशानी हुई। आनंदपुरी नव युवक विकास समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि जेडीए और निगम में कई बार शिकायत कर चुके, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। समिति के महामंत्री गिर्राज प्रसाद शर्मा ने बताया कि नायला हाउस से खरबूजा मंडी तक बरसात में जलभराव से अब तक निजात नहीं मिल पाई है। जबकि, पूर्व में जेडीए-निगम से लेकर स्वायत्त शासन विभाग को भी पत्र लिखा जा चुका है। समिति ने मांग की कि आनंदपुरी के सामने बड़ा नाला है। इसको अतिक्रमण से मुक्त कराया जाए और मुख्य सडक़ की चौड़ाई मास्टरप्लान के अनुरूप की जाए।