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  • नकली पनीर बेचने वालों पर सख्ती! हरियाणा में नॉन-डेयरी प्रोडक्ट्स पर आज से रोक, होगी जेल

    नकली पनीर बेचने वालों पर सख्ती! हरियाणा में नॉन-डेयरी प्रोडक्ट्स पर आज से रोक, होगी जेल

    चंडीगढ़.

    हरियाणा में दूध की जगह वनस्पति तेल, स्टार्च और रसायनों से बने पनीर और घी की बिक्री को अब अपराध माना जाएगा। प्रदेश सरकार ने एनालॉग या नान-डेयरी पनीर और घी के उत्पादन व बिक्री पर एक साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया है।

    ऐसे सामान को न केवल जब्त कर नष्ट किया जाएगा, बल्कि दोषी को जेल की सजा भी काटनी पड़ सकती है। ढाबों और होटलों में मक्खन के नाम पर परोसे जा रहे वनस्पति तेल तथा देसी घी के नाम पर मिठाइयों में पाम आयल के इस्तेमाल से लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ को रोकने के लिए प्रदेश सरकार ने यह कदम उठाया है।

    बाजार में बिक रहा 70 फीसदी पनीर नकली
    हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र की सरकारें पहले ही नकली पनीर और घी पर प्रतिबंध लगा चुकी हैं। अब हरियाणा भी इस लिस्ट में शामिल हो गया है। प्रदेश में स्थिति यह है कि बाजार में बिक रहा 70 प्रतिशत पनीर नकली है। एक अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक पनीर के कुल 285 नमूने लिए गए, जिनमें 200 नमूने फेल निकले। इनमें 171 निम्न स्तरीय और 29 असुरक्षित श्रेणी में पाए गए। अधिकतर निर्माता कच्चे दूध की बजाय दुग्ध पाउडर या वनस्पति तेल से छेना या पनीर तैयार कर रहे हैं। त्योहारी मौसम शुरू होने से पहले ही नकली पनीर और मिलावटी घी का इस्तेमाल रोकने के लिए खाद्य सुरक्षा आयुक्त डा. मनोज कुमार ने नियम अधिसूचित कर दिए हैं। यह नियम तत्काल प्रभाव से लागू होंगे। अगर किसी पनीर या देसी घी को इस तरह बाजार में बेचा जाता है कि ग्राहक उसे असली दूध से बना उत्पाद समझे, तो उसे नकली या इमिटेशन डेयरी प्रोडक्ट की श्रेणी में माना जाएगा। एनालाग या नॉन-डेयरी पनीर के निर्माण पर रोक के साथ ही ऐसे उत्पाद की प्रोसेसिंग और पैकेजिंग, स्टोरेज और सप्लाई तथा थोक व खुदरा बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया है। पनीर व छेना के लिए कई मानक पूरे करने होंगे।

    क्या होता है एनालॉग पनीर?
    एनालॉग पनीर को बनाने में दूध की बजाय वनस्पति तेल या फैट, पाम आयल, स्टार्च, सोया या दूसरे पौधों से मिलने वाले प्रोटीन जैसी चीजों का उपयोग किया जाता है। स्टेबलाइजर, इमल्सीफायर और फ्लेवर मिलाए जाते हैं। पैक्ड पनीर बेच रहे हैं तो पैकेट पर “नॉन-डेयरी” या “एनालॉग” लिखा होना अनिवार्य होगा। होटल-ढाबे में परोसे जा रहे पनीर को लेकर मेनू में “एनालॉग” लिखना पड़ेगा। घी के नाम पर हो रहा ‘खेल’ “पूजा हेतु घी”, “दीया हेतु घी”, “वनस्पति घी”, “कुकिंग घी”, “टेबल घी” और “हवन हेतु घी के नाम पर वनस्पति तेलों व वनस्पति वसा से बना सामान बेचा जा रहा है। रासायनिक पदार्थ, सुगंध और कणिकायन कारक मिलने से सुगंधित हो जाता है। मिठाइयों में इनका खूब प्रयोग हो रहा है।

  • मानसा जेल के 69 कैदी नशे की चपेट में, हाईकोर्ट ने पंजाब की सभी जेलों से मांगी रिपोर्ट

    मानसा जेल के 69 कैदी नशे की चपेट में, हाईकोर्ट ने पंजाब की सभी जेलों से मांगी रिपोर्ट

    चंडीगढ़.

    पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने जेलों में बंद नशे के आदी कैदियों के उपचार और पुनर्वास के संबंध में पंजाब सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी है। कोर्ट ने अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (जेल) को निर्देश दिया है कि वे प्रदेश की सभी जेलों में आउट-पेशेंट ओपिओइड असिस्टेड ट्रीटमेंट (ओओएटी) ले रहे कैदियों का जेलवार ब्यौरा हलफनामा के माध्यम से प्रस्तुत करें।

    इसके साथ ही, कोर्ट ने यह भी पूछा है कि नशे पर निर्भर कैदियों को दवाओं से धीरे-धीरे बाहर निकालने की प्रक्रिया क्या है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ ने मानसा सेशन डिवीजन के प्रशासनिक न्यायाधीश की रिपोर्ट के आधार पर स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दर्ज की थी। रिपोर्ट के अनुसार, मानसा जेल में कुल 767 कैदी बंद थे, जिनमें से 530 ओओएटी क्लीनिक में पंजीकृत थे, जोकि लगभग 69 प्रतिशत है। इसे कैदियों में नशे की लत की गंभीरता का संकेत माना गया है।

    कैदियों को दी जा रही ये दवाई
    खंडपीठ ने राज्य सरकार से ओओएटी क्लीनिक में कैदियों के पंजीकरण से संबंधित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) स्पष्ट करने को कहा है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि बड़ी संख्या में नशे के आदी कैदियों को चिकित्सा स्थिति के अनुसार ब्यूप्रेनोर्फिन और नालोक्सोन का संयोजन दिया जा रहा है। प्रशासनिक न्यायाधीश ने कैदियों के जेल से बाहर आने के बाद नशामुक्ति और फॉलोअप के संबंध में चिंता व्यक्त की थी। रिपोर्ट में ब्यूप्रेनोर्फिन-नालोक्सोन उपचार पूरा कर दवा बंद करने के चरण तक पहुंचने वाले लोगों का आंकड़ा मांगा गया था।

    नशे के चक्र में न फंसें
    हाई कोर्ट ने जेलों और निजी ओपिओइड उपचार केंद्रों में योग्य मनोचिकित्सकों, नर्सों और मनोसामाजिक सहायता की उपलब्धता का ब्योरा भी मांगा है। कोर्ट ने यह भी पूछा है कि जेल से रिहा होने के बाद कैदियों को किस प्रकार सहायता दी जाएगी, ताकि वे पुनः नशे के चक्र में न फंसें। खंडपीठ ने अधिवक्ता तनु बेदी को एमिकस क्यूरी नियुक्त करते हुए कहा कि वे पंजाब की जेलों में बंद कैदियों की बेहतरी के लिए सुधारात्मक कदम सुझाने में कोर्ट की सहायता करेंगी। मामले की अगली सुनवाई 1 सितंबर को होगी।

  • फरक्का बराज के सभी गेट खुले, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का CM सम्राट चौधरी ने किया हवाई सर्वेक्षण

    फरक्का बराज के सभी गेट खुले, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का CM सम्राट चौधरी ने किया हवाई सर्वेक्षण

    पटना
     मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आग्रह पर पश्चिम बंगाल की सरकार ने फरक्का बराज के सभी गेट खोल दिये हैं। मुख्यमंत्री ने रविवार को गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए पश्चिम बंगाल से सीएम शुभेंदु अधिकारी से फोन पर बात कर सभी गेट खोलने का आग्रह किया था। इधर मुख्यमंत्री ने सोमवार को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया। अधिकारियों को अविलंब मरम्मती कार्य कराने तथा संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी का निर्देश दिया।

    मुख्यमंत्री ने गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर एवं बाढ़ की स्थिति को देखते हुए नवगछिया राघोपुर दियारा, कोसी-गंगा संगम क्षेत्र, बेगूसराय एवं बख्तियारपुर सहित विभिन्न क्षेत्रों का हवाई निरीक्षण किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने गंगा नदी एवं इसकी सहायक नदियों के जलस्तर, दियारा एवं निचले इलाकों में उत्पन्न स्थिति तथा प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए और संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन पूरी तरह अलर्ट रहे। प्रभावित लोगों तक भोजन, पेयजल, राहत सामग्री एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं समय पर पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए।

    एयरपोर्ट पर उच्चस्तरीय बैठक
    हवाई सर्वेक्षण के बाद मुख्यमंत्री ने भागलपुर एयरपोर्ट पर उच्च अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। इस दौरान बाढ़ की स्थिति, जलस्तर, राहत एवं बचाव कार्यों तथा प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासनिक तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि तेजी से पानी का दवाब कम हो रहा है। बहुत जल्द स्थिति में सुधार होगा।

    बाढ़ प्रभावितों की सुरक्षा प्राथमिकता
    मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ प्रभावित लोगों की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी रखी जाएं तथा राहत एवं बचाव कार्यों में किसी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने तथा जलस्तर एवं बाढ़ की स्थिति में होने वाले किसी भी बदलाव की लगातार निगरानी करने का निर्देश दिया।

    लगातार निगरानी करें अधिकारी
    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को अविलंब मरम्मत कार्य कराने का निर्देश दिया। कहा कि जल संसाधन विभाग पूरी तरह मुस्तैद रहे। लगातार निगरानी करते रहे। बाढ़ प्रभावितों को पूरी सहायता उपलब्ध कराते रहें। राहत और बचाव कार्य पूरी मुस्तैदी से करें। हवाई सर्वेक्षण के दौरान उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी भी थे। वहीं, बैठक में ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, पुलिस महानिदेशक, अभियान कुंदन कृष्णन, जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह आदि उपस्थित थे।

  • पंजाब के इस गांव में मुफ्त नशामुक्ति इलाज, पूरी तरह ठीक होने पर मरीज को मिलेंगे 1100 रुपए

    पंजाब के इस गांव में मुफ्त नशामुक्ति इलाज, पूरी तरह ठीक होने पर मरीज को मिलेंगे 1100 रुपए

    मोगा.

    जिले के गांव तोता सिंह वाला की ग्राम पंचायत और गांववासियों ने चिट्टा पीने और बेचने वाले लोगों के खिलाफ सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया है। पंचायत ने कहा कि नशे के कारण गांव का माहौल खराब हो रहा है। इसे रोकना जरूरी है।

    पंचायत और ग्रामीणों ने बताया कि गांव के सरकारी प्राइमरी स्कूल में चोरों ने कई बार चोरी की घटनाओं को अंजाम दिया है। पंचायत की ओर से गांव में एंटी-ड्रग कमेटी का भी गठन किया गया है, ताकि गांव का माहौल सुरक्षित बना रहे और सरकारी संस्थानों की संपत्ति की रक्षा की जा सके। मोगा जिले का ही रन सिंह कला गांव पूरी तरह से नशामुक्त हो गया है।

    इस गांव में ग्राम पंचायत ने ही पहल करके लोगों को नशे से दूर किया। नशा करने वाले युवाओं को निश्शुल्क इलाज उपलब्ध करवाया और पूर्ण स्वस्थ होने तक 1,100 रुपये की राशि उन्हें पोषित भोजन करने के लिए दी जाती है।

  • पंजाब में अकाली दल से गठबंधन पर नहीं बनी बात, बीजेपी ने 117 सीटों पर अकेले लड़ने का बनाया प्लान

    पंजाब में अकाली दल से गठबंधन पर नहीं बनी बात, बीजेपी ने 117 सीटों पर अकेले लड़ने का बनाया प्लान

    पटियाला
     शिरोमणि अकाली दल (शिअद) से भाजपा के गठबंधन की अटकलों को भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष ने सिरे से नकार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा पंजाब में सभी 117 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी।

     पटियाला में विभिन्न जिलों से आए पार्टी नेताओं के साथ बैठक करते उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पंजाब में भाजपा को खड़ा करने वाले नेताओं को कभी नजरंदाज नहीं किया जा सकता।

    उन्होंने पार्टी नेताओं को वरिष्ठ पार्टी नेताओं का सम्मान और दूसरी पार्टी में जो लोग जुड़ रहे हैं, उनका स्वागत करने की सलाह दी।उल्लेखनीय है कि इसी महीने पंजाब प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा के बाद से पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता नाराज हैं, उनका कहना है कि पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं को नजरंदाज कर दूसरी पार्टियों से आए नेताओं को जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं।

    दौरे के पहले दिन काम में जुटे बीएल संतोष
    इसी नाराजगी के चलते तीक्ष्ण सूद सहित कुछ नेताओं ने तो पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा तक दे दिया था। यह मामला तब राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन तक भी पहुंचा था। पंजाब में सत्ता में आने की योजना बना रही भाजपा ने प्रदेश नेताओं की नाराजगी को दूर करने के लिए ही बीएल संतोष को पंजाब भेजा है। संतोष भी अपने दौरे के पहले दिन ही इस काम में जुट गए हैं।

    बैठक में पटियाला के साथ-साथ मोहाली, संगरूर और फतेहगढ़ साहिब जिलों के नेताओं ने हिस्सा लिया। इस मौके पंजाब भाजपा प्रधान केवल सिंह ढिल्लों, संगठन महामंत्री श्रीनिवासुलु, पंजाब के सह प्रभारी नरेंद्र सिंह रैना, पूर्व सांसद परनीत कौर और पंजाब भाजपा महासचिव अनिल सरीन भी मौजूद रहे।

    भाजपा को खड़ा करने वालों को नजरअंदाज नहीं कर सकतेमाइक्रो मैनेजमेंट में माहिर माने जाने वाले बीएल संतोष ने कहा कि पंजाब में भाजपा को खड़ा करने वालों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    अकाली दल संग क्यों बिगड़ी बात?

    भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बी.एल. संतोष के पंजाब प्रवास के दौरान यह स्पष्ट हो गया कि पार्टी अब पुराने सहयोगी के साथ बैसाखियों के सहारे आगे नहीं बढ़ेगी। 
    1. सीट शेयरिंग और बड़े भाई की भूमिका: माना जा रहा है कि सालों पुराने फॉर्मूले के तहत भाजपा पंजाब में महज 23 सीटों पर चुनाव लड़ती थी और अकाली दल 94 सीटों पर दावेदारी पेश करता था. पिछले लोकसभा चुनाव में अकेले उतरकर भाजपा ने करीब 18.5% वोट शेयर हासिल किया और शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी बढ़त दर्ज की. इसके बाद भाजपा अब ‘छोटे भाई’ की भूमिका में रहने को तैयार नहीं थी। 

    2. संगठनात्मक विस्तार और नया जनाधार: कृषि कानूनों के विरोध को लेकर अकाली दल बीजेपी से अलग हो गया था. बीजेपी का मानना है कि इसके बाद उन्‍होंने राज्‍य में जमीनी स्तर पर हर बूथ को मजबूत किया है. पार्टी नेताओं का मानना है कि अब उनका अपना मजबूत कैडर खड़ा हो चुका है। 

    3. स्थानीय नेतृत्व की राय: प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों और स्थानीय कैडर की राय यही रही कि राज्य में ‘आप’ और कांग्रेस दोनों से मुकाबला करने के लिए अकेले उतरना ही सबसे कारगर रणनीति होगी। 

    बूथ स्तर पर किलेबंदी और जोनल बैठकों का ब्लूप्रिंट
    बी.एल. संतोष ने पटियाला और बठिंडा में जोनल बैठकों की अध्यक्षता करते हुए नेताओं को स्पष्ट संदेश दिया कि पंजाब अब बदलाव चाहता है और भाजपा ही इसका विकल्प बनेगी. आगामी बैठकों के जरिए लुधियाना, जालंधर और अमृतसर में संगठन को बूथ स्तर तक धार दी जा रही है। 

    दफ्तर में तय तारीख को मीटिंग अवश्य करें
    पार्टी की नीति जहां पुराने नेताओं का सम्मान करने की है, वहीं नए शामिल होने वालों का स्वागत करने की भी है। इसके लिए उन्होंने सभी मौजूदा जिला प्रधानों को सलाह दी कि वह अपने-अपने जिले के सभी पूर्व मंडल, मोर्चा और जिला प्रधानों से हर माह अपने दफ्तर में तय तारीख को मीटिंग अवश्य करें। ऐसी विनम्रता अपनानी जरूरी है।

    शिअद में सिर्फ बादल ही बादलसंतोष ने कहा कि पार्टी में कोई भी प्रधान स्थायी नहीं रहता जबकि दूसरी पार्टियों में ऐसा नहीं है। शिरोमणि अकाली दल में प्रधान केवल सुखबीर बादल ही होते हैं। इसी तरह आम आदमी पार्टी में केजरीवाल की सर्वोच्च हैं और कांग्रेस में चाहे कोई भी प्रधान हो लेकिन चलती गांधी परिवार की ही है।

  • बठिंडा में 26 अगस्त को NRI मिलनी, 7 जिलों के प्रवासी उठाएंगे मुद्दे; अधिकारी करेंगे समाधान

    बठिंडा में 26 अगस्त को NRI मिलनी, 7 जिलों के प्रवासी उठाएंगे मुद्दे; अधिकारी करेंगे समाधान

    चंडीगढ़
     पंजाब सरकार की ओर से प्रवासी पंजाबियों की समस्याओं के समाधान के लिए एनआरआई मिलनियों का सिलसिला जारी है। इसी कड़ी में 26 अगस्त को बठिंडा में एनआरआई मिलनी आयोजित की जाएगी। इसमें बठिंडा समेत सात जिलों से संबंधित प्रवासी पंजाबी हिस्सा लेकर अपनी शिकायतें और समस्याएं सीधे अधिकारियों के समक्ष रख सकेंगे।

    एनआरआई मामलों के मंत्री डाॅ. रवजोत सिंह ने बताया कि मिलनी बुधवार को सुबह 11 बजे होटल सेपल, जीटी रोड, निकट तिकोनी, बठिंडा में होगी। इसमें बठिंडा, मोगा, फिरोजपुर, फरीदकोट, फाजिल्का, श्री मुक्तसर साहिब और मानसा जिलों से संबंधित प्रवासी भारतीय शामिल होंगे।

    डाॅ. रवजोत सिंह ने कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रवासी पंजाबियों से सीधा संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं की मौके पर सुनवाई और संबंधित विभागों के समन्वय से समाधान सुनिश्चित करना है।

    मौके पर होगी शिकायतों की सुनवाई
    मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रवासी पंजाबियों के साथ सीधा संवाद स्थापित करना और उनकी समस्याओं की मौके पर सुनवाई करना है। मिलनी के दौरान प्रवासी पंजाबी अपनी संपत्ति, पारिवारिक, प्रशासनिक, कानूनी और अन्य मामलों से जुड़ी शिकायतें अधिकारियों के समक्ष रख सकेंगे।

    उन्होंने बताया कि संबंधित विभागों के वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में शिकायतों को सुना जाएगा। इससे मामलों को संबंधित विभाग तक पहुंचाने और उन पर आवश्यक कार्रवाई को तेजी से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

    पहले मोहाली और लुधियाना में हो चुकी हैं मिलनियां
    डा. रवजोत सिंह ने बताया कि इससे पहले मोहाली और लुधियाना में दो एनआरआई मिलनियां आयोजित की जा चुकी हैं। इन दोनों कार्यक्रमों के दौरान कुल आठ जिलों से संबंधित प्रवासी पंजाबियों की शिकायतों और विभिन्न मुद्दों की सुनवाई की गई।

    सरकार का प्रयास है कि विदेशों में रहने वाले पंजाबियों को अपनी संपत्ति, परिवार या अन्य प्रशासनिक एवं कानूनी मामलों के समाधान के लिए अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। इसी उद्देश्य से अधिकारियों और प्रवासी पंजाबियों के बीच सीधा संवाद स्थापित किया जा रहा है।

  • Punjab Election: स्विंग वोटर्स तय करते हैं ‘पंजाब की सरदारी’, AAP के सामने बड़ी चुनौती; आंकड़े क्या कहते हैं?

    Punjab Election: स्विंग वोटर्स तय करते हैं ‘पंजाब की सरदारी’, AAP के सामने बड़ी चुनौती; आंकड़े क्या कहते हैं?

    चंडीगढ़ 

    आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर पंजाब में चुनावी चौसर सजनी शुरू हो गई है। सभी राजनीतिक दलों ने कमर कस ली है। अबकी बार आम आदमी पार्टी के लिए जहां सत्ता वापसी बड़ी चुनौती रहेगी। वहीं, शिअद, कांग्रेस और भाजपा भी सत्ता तक अपनी पहुंच बनाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाएंगे। इसके लिए सभी दलों के चुनावी रणनीतिकार अपने-अपने कामों में जुट चुके हैं।

     पंजाब में सियासी पारा जैसे-जैसे चढ़ रहा है, मुद्दों की जमीन भी तैयार होती जा रही है। दलों ने एक-दूसरे की घेराबंदी शुरू कर दी है, तो वहीं दल-बदल के तहत पार्टियों का काम भी शुरू हो चुका है जो कि चुनाव तक चलने की संभावना है। कई प्रभावशाली नेता इधर से उधर भी हुए हैं। विभिन्न मुद्दों और मसलों पर सियासी दलों द्वारा आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो चुका है। 

    सियासी समीकरणों और वोटरों को अपने पाले में करने के लिए सभी पार्टियां उन मुद्दों पर होमवर्क कर रही हैं, जिन्हें आगामी चुनाव में जनता के बीच ले जाना है। पंजाब के चुनाव में वोटरों का मिजाज बहुत मायने रखता। साल 1997 से साल 2022 के चुनावी पैटर्न को देखें तो यहां स्विंग वोटर्स काफी असरदार रहे हैं। वे मुद्दों को तरजीह देते हैं मगर नया विकल्प मिलने पर राजनीतिक बदलाव के लिए भी वोट करते हैं।

    पंथक सियासत का गहरा प्रभाव
    सूबे में पंथक सियासत का प्रभाव दशकों से गहरा रहा है, हालांकि हाल के वर्षों में इसमें बदलाव देखे गए हैं। यह सियासत मुख्य रूप से सिख पहचान, बंदी सिखों की रिहाई, बेअदबी मामलों और एसजीपीसी के नियंत्रण जैसे धार्मिक व राजनीतिक मुद्दों के इर्द-गिर्द ही घूमती हैं। पारंपरिक रूप से पंथक वोटों पर शिरोमणि अकाली दल का दबदबा रहा है मगर हालिया चुनावों में इस वोट बैंक में बिखराव आया है। अब राज्य का वोटर केवल पंथक मुद्दों के बजाय विकास, रोजगार और बदलाव जैसे मुद्दों को भी तरजीह दे रहा है। 

     सत्ता बदल देते हैं स्विंग वोटर्स
    साल 1997 में भाजपा-अकाली गठबंधन को 40.7 प्रतिशत स्विंग वोटर्स का सहारा मिला और इस गठबंधन ने सरकार बनाई। स्विंग वोटर्स वे मतदाता होते हैं जो किसी एक राजनीतिक दल या विचारधारा के प्रति स्थायी रूप से वफादार नहीं होते। चुनाव के समय इनका वोट किस तरफ जाएगा, यह पहले से तय नहीं होता। ये मतदाता उम्मीदवारों की नीतियों, स्थानीय मुद्दों, काम के प्रदर्शन और तत्कालीन परिस्थितियों के आधार पर अपना निर्णय बदलते रहते हैं।

     साल 2002 में 13.8 प्रतिशत स्विंग वोटर्स के बूते कांग्रेस-सीपीआई गठबंधन ने सरकार बनाई। ये वोटर्स भाजपा-अकाली गठबंधन से छिटक गए। साल 2017 में 23.70 प्रतिशत स्विंग वोटर्स पंजाब की सत्ता में नई पारी खेलने वाले दल आम आदमी पार्टी की ओर शिफ्ट हुए। इससे समीकरण बिगड़े मगर फायदा कांग्रेस को मिला। 

    साल 2022 में आप को 18.29 प्रतिशत स्विंग वोटर्स की बढ़त मिली और पार्टी सत्ता में आई। इसका असर इतना ज्यादा था कि शिअद अध्यक्ष व डिप्टी सीएम रहे सुखबीर बादल जलालबाद और कांग्रेस के तत्कालीन सीएम चरणजीत सिंह चन्नी चमकौर साहिब और भदौड़ दोनों सीटों से हार गए।

    एक नजर में चुनावी ट्रेंड
        साल 1997 :
    शिअद को 75, भाजपा को 18 व कांग्रेस को 14 सीट। कांग्रेस के खिलाफ भारी जनादेश; अकाली-भाजपा गठबंधन का उभार।

        साल 2002 : कांग्रेस को 62, शिअद को 41, भाजपा को 3 सीट। पांच साल की सत्ता के बाद अकाली-भाजपा सरकार के खिलाफ बदलाव।

        साल 2007 : शिअद को 48, भाजपा को 19 व कांग्रेस को 44 सीट। कांग्रेस को सत्ता से बाहर कर शिअद-भाजपा गठबंधन की वापसी

        साल 2012 : शिअद को 56, भाजपा को 12 व कांग्रेस को 46 सीट। पहली बार लगातार। शिअद-भाजपा गठबंधन सरकार फिर सत्ता पर काबिज।

        साल 2017 : कांग्रेस को 77, आप को 20, शिअद को 15 व भाजपा को 3 सीट। 10 साल की शिअद-भाजपा गठबंधन सरकार के खिलाफ जबरदस्त सत्ता विरोधी फेक्टर।

        साल 2022 : आप को 92, कांग्रेस 18, शिअद को 3 व भाजपा को 2 सीट। परंपरागत दलों को दरकिनार कर तीसरे विकल्प आप को प्रचंड बहुमत।

     

  • राजस्थान की 25 महिला पुलिसकर्मी बनेंगी ब्लैक कैट कमांडो, मानेसर में लेंगी कड़ी ट्रेनिंग

    राजस्थान की 25 महिला पुलिसकर्मी बनेंगी ब्लैक कैट कमांडो, मानेसर में लेंगी कड़ी ट्रेनिंग

    जयपुर
    राजस्थान पुलिस के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है, जहां प्रदेश की बेटियां अब आतंकवाद और आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए स्पेशल 'ब्लैक कैट' कमांडो का रूप धारण करेंगी। राजस्थान पुलिस के आरएसी एवं एमबीसी कैडर से चयनित 25 महिला पुलिस कार्मिकों को राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) के मानेसर हरियाणा स्थित प्रशिक्षण केंद्र में 12 सप्ताह के अति-कठिन और गहन कमांडो प्रशिक्षण के लिए भेजा गया है। 24 अगस्त से शुरू हो रहा ये यह विशेष प्रशिक्षण 13 नवंबर तक संचालित होगा। इस दौरान महिला कार्मिकों को अत्याधुनिक हथियार तकनीक, अर्बन काउंटर टेररिज्म, काउंटर-आईईडी और जीरो एरर की रणनीति पर तैयार किया जाएगा।

    राजधानी जयपुर स्थित पांचवीं बटालियन आरएसी (घाटगेट) में आयोजित विदाई समारोह के दौरान सभी चयनित महिला जवानों का उत्साह चरम पर दिखा। इस ऐतिहासिक ट्रेनिंग सेशन के लिए रवाना होने से पहले वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने महिला जवानों का हौसला बढ़ाया और उन्हें इस कठिन चुनौती को सफलतापूर्वक पार करने का मंत्र दिया।

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    जीरो एरर की नीति और कड़ा अनुशासन : ADG रूपेंद्र सिंह
    महिला कार्मिकों को मानेसर के लिए हरी झंडी दिखाकर रवाना करने से पूर्व अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (आर्म्स बटालियन्स, राजस्थान) रूपेंद्र सिंह ने जवानों को विस्तृत रूप से ब्रीफ किया। एडीजी सिंह ने एनएसजी कमांडो प्रशिक्षण की राष्ट्रीय महत्ता पर प्रकाश डालते हुए महिला जवानों को प्रेरित किया।

    उन्होंने कहा, 'कमांडो प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य जवानों को ऐसी अद्वितीय दक्षता और क्षमता प्रदान करना है, जिससे वे किसी भी प्रकार की चुनौतीपूर्ण या विषम परिस्थितियों में आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए पूरी क्षमता और आत्मविश्वास के साथ कार्य कर सकें।'

    उन्होंने कहा, 'एनएसजी का मूल मंत्र 'सर्वत्र सर्वोत्तम सुरक्षा' है और आपको प्रशिक्षण के दौरान कड़े अनुशासन, अत्याधुनिक हथियार तकनीक और जीरो एरर की नीति को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी है।'

    जयपुर से मानेसर के लिए रवाना
    समारोह के बाद एडीजी रूपेंद्र सिंह ने सभी 25 महिला पुलिसकर्मियों को विशेष राजकीय वाहन से मानेसर स्थित राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड प्रशिक्षण केंद्र के लिए रवाना किया। इस अवसर पर उप महानिरीक्षक पुलिस (आरएसी) विनीत बंसल, चतुर्थ बटालियन एवं पांचवीं बटालियन आरएसी के कमांडेंट सहित पुलिस विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

    12 सप्ताह की इस स्पेशल ट्रेनिंग को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद ये महिला कार्मिक राजस्थान पुलिस की पहली समर्पित महिला कमांडो यूनिट का हिस्सा बनेंगी, जिन्हें राज्य में वीआईपी सुरक्षा, एंटी-टेरर ऑपरेशन्स और आपातकालीन रेस्क्यू ऑपरेशन्स में तैनात किया जाएगा।

  • रांची में धरना-प्रदर्शन के लिए अब पूर्व अनुमति जरूरी, प्रशासन ने जारी किए निर्देश

    रांची में धरना-प्रदर्शन के लिए अब पूर्व अनुमति जरूरी, प्रशासन ने जारी किए निर्देश

    रांची
     रांची जिले में धरना-प्रदर्शन, घेराव, जुलूस, रैली एवं आमसभा के आयोजन के लिए आयोजकों को सक्षम प्राधिकारी अनुमंडल पदाधिकारी, रांची सदर/बुंडू से निर्धारित प्रक्रिया के तहत पूर्व अनुमति प्राप्त करनी होगी।

    जिला प्रशासन ने आयोजकों से कार्यक्रम से पहले आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने की अपील की है, ताकि विधि-व्यवस्था, जन-सुरक्षा और सुचारु यातायात व्यवस्था के लिए आवश्यक प्रबंध किए जा सकें।

    बिना पूर्व सूचना के आयोजन से प्रभावित होती है व्यवस्था
    जिला प्रशासन के अनुसार, विभिन्न स्थानों पर धरना-प्रदर्शन, घेराव, जुलूस, रैली एवं आमसभा का आयोजन किया जाता है। कई बार ऐसे कार्यक्रमों की आवश्यक जानकारी प्रशासन को पूर्व में उपलब्ध नहीं कराई जाती। इससे विधि-व्यवस्था और जन-सुरक्षा के साथ यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है। इसके कारण आम नागरिकों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ता है।

    शांतिपूर्ण विरोध संवैधानिक अधिकार, लेकिन नियमों का पालन जरूरी
    न्यायालय के विभिन्न निर्णयों में स्पष्ट किया गया है कि शांतिपूर्ण धरना एवं विरोध-प्रदर्शन नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का हिस्सा है। हालांकि, इस अधिकार का प्रयोग सार्वजनिक व्यवस्था, जन-सुरक्षा, यातायात तथा अन्य नागरिकों के अधिकारों को ध्यान में रखते हुए लागू कानूनों एवं सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी वैध निर्देशों के अधीन किया जाना आवश्यक है।

    सार्वजनिक स्थानों पर होने वाले धरना-प्रदर्शन, जुलूस, रैली एवं आमसभा के लिए सक्षम प्राधिकारी अनुमंडल पदाधिकारी, रांची सदर/बुंडू द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा। आयोजकों को कार्यक्रम से पूर्व निर्धारित प्रक्रिया के तहत अनुमति प्राप्त करनी होगी।

    जुलूस-रैली के लिए मार्ग और समय बताना होगा
    आयोजकों को प्रस्तावित कार्यक्रम की आवश्यक जानकारी समय पर प्रशासन को उपलब्ध करानी होगी। विशेष रूप से जुलूस एवं रैली के लिए प्रस्तावित मार्ग या रूट, आयोजन की तिथि, प्रारंभ एवं समाप्ति का समय तथा संभावित प्रतिभागियों की संख्या की जानकारी देना आवश्यक होगा।

    कार्यक्रम में शामिल होने वाले प्रमुख व्यक्तियों की जानकारी भी, जहां आवश्यक हो, प्रशासन को उपलब्ध करानी होगी, ताकि सुरक्षा और यातायात प्रबंधन की समुचित व्यवस्था की जा सके।

    सार्वजनिक मार्ग बाधित नहीं करने की अपील
    जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम का आयोजन लागू कानूनों, नियमों तथा सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी वैध आदेशों एवं निर्देशों के अनुरूप किया जाए। सार्वजनिक मार्ग या स्थान पर ऐसा कोई कार्य नहीं किया जाए, जिससे अनधिकृत रूप से आवागमन बाधित हो, जन-सुरक्षा प्रभावित हो अथवा अन्य नागरिकों के अधिकारों में अनुचित हस्तक्षेप हो।

    छात्रों और आम नागरिकों से भी अपील
    जिला प्रशासन ने छात्रों एवं आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी कार्यक्रम में शामिल होने से पहले आयोजकों से कार्यक्रम की वैधानिक स्थिति और प्रशासन द्वारा निर्धारित शर्तों की जानकारी प्राप्त करें। किसी अफवाह या भ्रामक सूचना के आधार पर ऐसा कोई कदम न उठाएं, जिससे विधि-व्यवस्था, सुरक्षा, यातायात व्यवस्था अथवा आम नागरिकों को असुविधा हो।

    कार्यक्रम रोकना नहीं, व्यवस्था सुनिश्चित करना उद्देश्य
    जिला प्रशासन ने कहा है कि पूर्व सूचना और सक्षम प्राधिकारी से अनुमति की व्यवस्था का उद्देश्य किसी शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक कार्यक्रम को रोकना नहीं है। इसका उद्देश्य प्रतिभागियों की सुरक्षा, विधि-व्यवस्था, यातायात प्रबंधन और आम नागरिकों की सुविधा के लिए आवश्यक प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित करना है।

    जिला प्रशासन ने सभी राजनीतिक दलों, सामाजिक एवं स्वयंसेवी संगठनों, विभिन्न संस्थाओं, संगठनों तथा आम नागरिकों से सार्वजनिक कार्यक्रमों के आयोजन के संबंध में लागू विधि एवं निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने की अपील की है। साथ ही आवश्यक जानकारी समय पर प्रशासन को उपलब्ध कराने और विधि-व्यवस्था, जन-सुरक्षा एवं सुचारु यातायात व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करने को कहा है।

  • सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, जोजरी नदी किनारे 100 मीटर निर्माण पर रोक

    सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, जोजरी नदी किनारे 100 मीटर निर्माण पर रोक

     जयपुर
    राजस्थान में जल संकट और नदियों में बढ़ते औद्योगिक प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। सोमवार को जोजरी नदी प्रदूषण से जुड़े एक स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने नदी के किनारों के संरक्षण के लिए अंतरिम आदेश जारी किया। जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने जोजरी नदी के किनारे से 100 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार के निर्माण या विकास गतिविधियों पर पूरी तरह से रोक लगा दी है।

    इसके अलावा कोर्ट ने पर्यावरण की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए निर्देश दिया है कि नदी के मौजूदा प्रवाह पथ या चिन्हित फ्लड लाइन के दोनों ओर 500 मीटर के दायरे में कोई भी खतरनाक, प्रदूषण फैलाने वाली या नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचाने वाली औद्योगिक गतिविधि संचालित करने की अनुमति नहीं होगी। यह प्रतिबंध तब तक प्रभावी रहेगा, जब तक कि हाई फ्लड लाइन और आवश्यक पारिस्थितिक बफर जोन के निर्धारण के लिए चल रही वैज्ञानिक प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती।

    पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के लिए अंतरिम उपाय
    सुप्रीम कोर्ट ने नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को हुए नुकसान पर गहरी चिंता व्यक्त की। पीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जब तक हाई फ्लड लाइन (उच्च बाढ़ रेखा) और बफर जोन का वैज्ञानिक सीमांकन पूरा नहीं हो जाता, तब तक नदी के अस्तित्व को बचाने के लिए एक निश्चित और मापने योग्य अंतरिम सुरक्षा क्षेत्र लागू करना अनिवार्य हो गया था।

    कोर्ट ने उल्लेख किया कि जोजरी नदी में प्रदूषण का स्तर अत्यधिक चिंताजनक स्थिति तक पहुंच चुका है, जिसके कारण राज्य के इस जल-अभाव वाले क्षेत्र में रहने वाली लगभग 20 लाख की आबादी प्रभावित हो रही है। अदालत इस मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को करेगी, जिसमें आगे की रिपोर्ट और निर्देशों पर विचार किया जाएगा।

    प्रदूषण से प्रभावित प्रमुख नदियां और क्षेत्र
    राजस्थान के पश्चिमी हिस्से में नदियों के प्रदूषण का मुद्दा काफी समय से संवेदनशील बना हुआ है। जोजरी नदी मुख्य रूप से जोधपुर जिले से होकर गुजरती है, जबकि बांडी नदी पाली जिले से और लूणी नदी बालोतरा से होकर बहती है। बांडी और जोजरी नदियां आगे चलकर बालोतरा शहर के पास लूणी नदी में मिल जाती हैं।

    कपड़ा छपाई, रंगाई और अन्य औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले अंनट्रीटेड जहरीले पानी ने इन मौसमी नदियों के पानी और आसपास के भूजल को प्रदूषित कर दिया है। इससे न केवल पीने के पानी का संकट पैदा हुआ है, बल्कि कृषि भूमि भी बंजर हो रही है।

    राज्य सरकार को 20 सूत्रीय कार्य योजना बनाने के निर्देश
    इससे पहले 4 अगस्त को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को जोजरी, बांडी और लूणी नदियों में जारी प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए 20 सूत्रीय संकल्प योजना तैयार करने का सुझाव दिया था। कोर्ट ने विशेष रूप से पाली शहर का जिक्र करते हुए कहा था कि वहां का पूरा औद्योगिक क्षेत्र नदी के किनारे स्थित है। दीर्घकालिक समाधान के रूप में राज्य अधिकारियों को इन उद्योगों को नदी से दूर किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने पर विचार करना होगा।

    इसके साथ ही 7 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक हफ्ते के भीतर 'एकीकृत समन्वय समूह' का गठन करे। यह समूह तीनों नदियों के प्रदूषण को नियंत्रित करने और अदालत के आदेशों को धरातल पर लागू करने की जिम्मेदारी संभालेगा। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से राजस्थान के औद्योगिक क्षेत्रों में हलचल तेज हो गई है। वहीं, पर्यावरणविदों और स्थानीय निवासियों ने इसे नदियों को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना है।