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  • रांची में बनेंगे 3 स्मार्ट पावर ग्रिड, अगले 10 साल तक बिजली संकट से मिलेगी राहत

    रांची में बनेंगे 3 स्मार्ट पावर ग्रिड, अगले 10 साल तक बिजली संकट से मिलेगी राहत

    रांची.

    राजधानी में लगातार बढ़ रही बिजली की मांग को देखते हुए कुसई कालोनी, बरियातू और इटकी में तीन नए स्मार्ट ग्रिड बनाने की योजना तैयार की गई है। अधिकारियों के अनुसार, इन ग्रिड के निर्माण के बाद शहर और आसपास के इलाकों में अगले करीब 10 वर्षों तक बिजली की बढ़ती जरूरत को पूरा करने में मदद मिलेगी। तीनों ग्रिड को आधुनिक तकनीक से लैस किया जाएगा।

    वहीं, प्रस्ताव के अनुसार, इटकी में 400/220/132/33 केवी, कुसई कॉलोनी में 220/33 केवी तथा बरियातू में 132/33 केवी का स्मार्ट ग्रिड बनाया जाएगा। बरियातू और कुसई कालोनी में बनने वाले ग्रिड की क्षमता करीब 200-200 मेगावाट होगी। वहीं इटकी में प्रस्तावित ग्रिड की क्षमता इन दोनों ग्रिडों से अधिक रखी जाएगी।

    एआई और स्काडा सिस्टम से होंगे लैस
    तीनों स्मार्ट ग्रिड को एआई तकनीक से लैस किया जाएगा। इन्हें सीधे स्काडा सिस्टम से जोड़ा जाएगा। इससे ग्रिड के पैनल, यार्ड, इंसुलेटर, वायर सहित अन्य उपकरणों में किसी तरह की तकनीकी खराबी आने पर उसकी जानकारी सिस्टम पर तत्काल मिल सकेगी। इससे फॉल्ट की पहचान करने और उसे जल्द दुरुस्त करने में सुविधा होगी। अधिकारियों का मानना है कि इससे बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी।

    जमीन की जा चुकी है चिन्हित
    स्मार्ट ग्रिड निर्माण के लिए बरियातू के डॉक्टर कालोनी, कुसई कालोनी मैदान और इटकी में जमीन चिन्हित कर ली गई है। हालांकि, अभी परियोजना की कुल लागत स्पष्ट नहीं है। इंजीनियरों के अनुसार कैबिनेट से स्वीकृति मिलने के बाद डीपीआर तैयार किया जाएगा। इसके बाद टेंडर की प्रक्रिया पूरी होने पर तीनों ग्रिड की वास्तविक लागत सामने आएगी।

    पांच साल में दोगुनी हो सकती है मांग
    रांची ट्रांसमिशन के महाप्रबंधक एके भारतीयम ने बताया कि राजधानी में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। हर महीने लोड में वृद्धि हो रही है। राजधानी होने के कारण यहां आबादी और व्यावसायिक गतिविधियां भी तेजी से बढ़ रही हैं। वर्तमान में गर्मी के दिनों में रांची जिले में करीब 500 मेगावाट बिजली की मांग रहती है। आने वाले पांच वर्षों में यह मांग बढ़कर लगभग दोगुनी हो सकती है। इसी भविष्य की जरूरत को देखते हुए तीन नए स्मार्ट ग्रिड बनाने की योजना तैयार की गई है। अधिकारियों के अनुसार, इन ग्रिडों के अस्तित्व में आने के बाद बढ़ते लोड को संभालने के साथ बिजली आपूर्ति व्यवस्था को अधिक मजबूत और तकनीकी रूप से सक्षम बनाया जा सकेगा।

  • बिहार में छात्रों को बड़ी राहत, 4 लाख रुपये तक का स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड लोन जारी रहेगा

    बिहार में छात्रों को बड़ी राहत, 4 लाख रुपये तक का स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड लोन जारी रहेगा

    पटना
     बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना में बदलाव की खबरों के बीच छात्रों और अभिभावकों के बीच बनी संशय की स्थिति को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट कर दिया है

    उन्होंने कहा है कि उच्च शिक्षा के लिए छात्रों को मिलने वाली 4 लाख रुपये तक के शिक्षा ऋण की सुविधा आगे भी पूर्ववत जारी रहेगी।

    मुख्यमंत्री ने अपने एक्स हैंडल के माध्यम से इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना को लेकर विद्यार्थियों और अभिभावकों के मन में किसी भी प्रकार का संशय नहीं रहना चाहिए।

    4 लाख तक का लोन जारी रहेगा
    मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि उच्च शिक्षा के लिए छात्रों को 4 लाख रुपये तक का स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड मिल रहा है और यह सुविधा आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि योजना को लेकर छात्रों या अभिभावकों को चिंता करने की जरूरत नहीं है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार सरकार युवाओं की शिक्षा और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण किसी छात्र की उच्च शिक्षा प्रभावित न हो।

    'शिक्षा के रास्ते में आर्थिक संसाधन बाधा नहीं बनेंगे'
    सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि आर्थिक कठिनाइयों के कारण बिहार के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा से वंचित न होना पड़े।

    उन्होंने भरोसा दिलाया कि शिक्षा के रास्ते में आर्थिक संसाधन को कभी भी बाधा नहीं बनने दिया जाएगा। स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत उच्च शिक्षा के लिए विद्यार्थियों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है।

    मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद योजना में बदलाव को लेकर छात्रों और अभिभावकों के बीच बनी असमंजस की स्थिति दूर होने की उम्मीद है।

  • लुधियाना के युवक का शानदार प्रदर्शन, पंजाब स्टेट पिकलबॉल चैंपियनशिप में जीते 4 मेडल

    लुधियाना के युवक का शानदार प्रदर्शन, पंजाब स्टेट पिकलबॉल चैंपियनशिप में जीते 4 मेडल

    लुधियाना.

    लुधियाना के खिलाड़ी अमित सक्सेना ने तीसरी पंजाब स्टेट पिकलबॉल चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए चार कैटेगरी में 4 मेडल जीते। यह चैंपियनशिप 21 से 23 अगस्त तक पखोवाल रोड स्थित ग्लैम्पटन स्पोर्ट्स क्लब में आयोजित की गई थी।

    पंजाब पिकलबॉल एसोसिएशन द्वारा आयोजित और ChkoKko द्वारा प्रायोजित इस इवेंट में राज्य भर के बेहतरीन खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। सक्सेना ने 40+ पुरुष सिंगल्स में गोल्ड, 35+ पुरुष सिंगल्स में सिल्वर, 35+ पुरुष डबल्स में सिल्वर और 45+ पुरुष डबल्स में ब्रॉन्ज मेडल जीता। पंजाब पिकलबॉल एसोसिएशन ने अमित सक्सेना को उनकी इस शानदार उपलब्धि पर बधाई दी और खेल के प्रति उनके समर्पण की सराहना की।

    आयोजकों की तारीफ करते हुए सक्सेना ने कहा, "शानदार चैंपियनशिप आयोजित करने के लिए पंजाब पिकलबॉल एसोसिएशन और सेक्रेटरी श्री विक्रमजीत सिंह को बधाई।" उनकी यह उपलब्धि राज्य में पिकलबॉल में लुधियाना के बढ़ते दबदबे को दिखाती है।

  • बिहार के 700 स्कूलों में शुरू हुआ ‘विद्या साथी’, 3 लाख छात्रों को लाभ

    बिहार के 700 स्कूलों में शुरू हुआ ‘विद्या साथी’, 3 लाख छात्रों को लाभ

     पटना
     बिहार के विद्यार्थियों को पढ़ाई में बेहतर मार्गदर्शन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार ने नई डिजिटल पहल शुरू की है।

    CM सम्राट चौधरी ने सोमवार को लोक सेवक आवास स्थित 'संकल्प' सभागार से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य के 700 सरस्वती विद्या निकेतन मॉडल विद्यालयों में 24×7 इंटरैक्टिव प्लेटफार्म 'बिहार विद्या साथी' का शुभारंभ किया।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सही मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की दिशा में यह महत्वपूर्ण पहल है।

    'बिहार विद्या साथी' के माध्यम से विद्यार्थी अपनी सुविधा के अनुसार कभी भी और कहीं से भी पढ़ाई से जुड़ी समस्याओं का समाधान प्राप्त कर सकेंगे।

    3 लाख विद्यार्थियों को मिलेगा सीधा लाभ
    मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले चरण में राज्य के सभी 38 जिलों के 700 सरस्वती विद्या निकेतन मॉडल विद्यालयों को इस सुविधा से जोड़ा गया है। इससे करीब 3 लाख विद्यार्थियों को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद है।

    कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए प्लेटफार्म पर 24 घंटे लाइव शिक्षक उपलब्ध रहेंगे। विद्यार्थी अपनी जरूरत और पसंद के अनुसार शिक्षक का चयन कर सकेंगे और वन-टू-वन संवाद के माध्यम से पढ़ाई से जुड़े सवाल पूछ सकेंगे।

    75 हजार शिक्षक देंगे व्यक्तिगत शैक्षणिक सहयोग
    'बिहार विद्या साथी' के तहत करीब 75 हजार शिक्षक विद्यार्थियों को व्यक्तिगत शैक्षणिक सहयोग उपलब्ध कराएंगे। कक्षा 9वीं और 10वीं के विद्यार्थियों के लिए सभी विषयों की पढ़ाई में सहायता मिलेगी।

    वहीं, कक्षा 11वीं और 12वीं के विज्ञान वर्ग के विद्यार्थियों को लाइव ट्यूटर सपोर्ट के साथ बिहार बोर्ड, जेईई और नीट की तैयारी के लिए डिजिटल अध्ययन सामग्री भी उपलब्ध कराई जाएगी।

    AI टूल्स से बेहतर होगी कॉन्सेप्ट लर्निंग
    मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक AI टूल्स के माध्यम से विद्यार्थियों की कॉन्सेप्ट लर्निंग को और बेहतर बनाने का प्रयास किया जाएगा। विद्यार्थियों को असीमित अध्ययन और अभ्यास की सुविधा भी मिलेगी।

    उन्होंने कहा कि फिलहाल यह व्यवस्था 700 मॉडल विद्यालयों से शुरू की जा रही है। इसके अनुभव और परिणाम के आधार पर इसे आगे राज्य के अन्य विद्यालयों तक भी विस्तारित किया जाएगा।

    'जहां भी हों, सवाल का जवाब और शिक्षक का सहयोग साथ हो'
    मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से अपील की कि वे इस डिजिटल प्लेटफार्म का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान होना चाहिए और ज्ञान व कौशल के माध्यम से उन्हें अपने जीवन में आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए।

    उन्होंने कहा, हमारा प्रयास है कि विद्यार्थी जहां भी हों, जब भी पढ़ें, उनके सवाल का जवाब और शिक्षक का सहयोग हमेशा उनके साथ हो।

    मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे इस प्लेटफार्म का उपयोग अपनी शैक्षणिक गुणवत्ता मजबूत करने और अपने जीवन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए करें।

    छात्राओं ने दिया ऐप के इस्तेमाल का डेमो
    कार्यक्रम के दौरान 'बिहार विद्या साथी' ऐप पर आधारित एक लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई। राजकीय कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय, शास्त्रीनगर की छात्राओं जाह्नवी और जिया ने ऐप के इस्तेमाल का डेमो प्रस्तुत किया।

    उन्होंने प्लेटफार्म से मिलने वाली सुविधाओं और इसके लाभों के बारे में जानकारी दी और मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया।

    कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, उप मुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, शिक्षा विभाग के सचिव राजीव रौशन और बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष डॉ. त्यागराजन एस.एम. समेत अन्य वरीय अधिकारी मौजूद रहे।

     

  • हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, बिना अधिकार कब्जे पर मालिक को मिलेगी संपत्ति वापस

    हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, बिना अधिकार कब्जे पर मालिक को मिलेगी संपत्ति वापस

    चंडीगढ़
     पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति संपत्ति का किरायेदार साबित नहीं होता, लेकिन वह मालिक की संपत्ति पर बिना किसी वैध अधिकार के कब्जा किए हुए है, तो मालिक को केवल इस आधार पर कब्जा लेने से वंचित नहीं किया जा सकता कि मालिक-किरायेदार का संबंध साबित नहीं हुआ।

    कोर्ट ने ऐसे व्यक्ति के कब्जे को अनधिकृत कब्जा या अतिक्रमण के समान माना है। जस्टिस परमोध गोयल ने फरीदाबाद के उदय पाल की 27 साल पुरानी नियमित दूसरी अपील खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया। मामला फरीदाबाद के गांव ऊंचागांव की एक आवासीय संपत्ति से संबंधित है।

    रघुबीर सिंह ने दावा किया कि वह संपत्ति के मालिक हैं और उन्होंने 1986 में मकान का निर्माण कराने के बाद उदय पाल को 250 रुपये मासिक किराये पर दिया था। आरोप है कि उदय पाल ने अप्रैल 1990 से किराया देना बंद कर दिया, जिससे 8,200 रुपये का बकाया हो गया।

    किरायेदारी समाप्त करने के लिए 10 सितंबर 1993 को कानूनी नोटिस भेजा गया था। इसके बाद रघुबीर सिंह ने मकान का कब्जा, बकाया किराया और उपयोग एवं कब्जे के हर्जाने की मांग करते हुए मुकदमा दायर किया।

    उदय पाल ने किरायेदारी से इनकार करते हुए दावा किया कि उसने लगभग नौ वर्ष पहले 150 रुपये प्रति वर्ग गज की दर से संपत्ति रघुबीर सिंह से खरीद ली थी। उसका कहना था कि बिक्री की 50 प्रतिशत राशि देकर कब्जा ले लिया गया था और शेष राशि भी बाद में अदा कर दी गई।

    ट्रायल कोर्ट ने रघुबीर सिंह के स्वामित्व को स्वीकार किया, लेकिन किरायेदारी साबित न होने के कारण कब्जे का मुकदमा खारिज कर दिया। हाई कोर्ट में उदय पाल ने दलील दी कि जब ट्रायल कोर्ट ने माना कि किरायेदारी का संबंध नहीं था, तो उसे बेदखल करने के लिए दायर मुकदमा खारिज किया जाना चाहिए था।

    हालांकि, हाई कोर्ट ने इस दलील को अस्वीकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि दोनों निचली अदालतों ने पाया है कि संपत्ति रघुबीर सिंह की है और उदय पाल यह साबित करने में विफल रहा कि उसने संपत्ति खरीदी थी।

    जस्टिस गोयल ने स्पष्ट किया कि यदि उदय पाल को किरायेदार नहीं माना जाता, तब भी उसका कब्जा अनधिकृत है। कोर्ट ने कहा कि यदि यह स्थापित हो जाता है कि प्रतिवादी बिना किसी अधिकार के संपत्ति पर कब्जा किए हुए है, तो मालिक कब्जा वापस प्राप्त कर सकता है।

  • राजस्थान निकाय चुनाव 2026 की तैयारियों की समीक्षा, लापरवाही पर निर्वाचन आयुक्त नाराज

    राजस्थान निकाय चुनाव 2026 की तैयारियों की समीक्षा, लापरवाही पर निर्वाचन आयुक्त नाराज

    जयपुर
    राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह की अध्यक्षता में सोमवार को शासन सचिवालय स्थित राज्य निर्वाचन आयोग के सभागार में नगरीय निकाय आम चुनाव-2026 के लिए नियुक्त रिटर्निंग अधिकारियों का प्रशिक्षण कार्यक्रम वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से आयोजित किया गया। इसमें प्रदेश के सभी जिलों से संबंधित अधिकारी जुड़े।

    राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने सभी जिलों के अधिकारियों से सीधे संवाद कर नगरीय निकाय चुनाव की तैयारियों और अब तक हुई प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने जिलेवार चुनाव तैयारियों की समीक्षा की तथा अधिकारियों से चुनाव कार्य में आ रही समस्याओं के बारे में जानकारी लेकर उनका समाधान किया और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए

    इस दौरान आयुक्त ने मतदाता सूचियों में संशोधन एवं अद्यतन की स्थिति, दिव्यांगजनों के लिए मतदान केंद्रों पर उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं तथा संवेदनशील और क्रिटिकल मतदान केंद्रों की तैयारियों के बारे में भी जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में सुनिश्चित हों और दिव्यांग एवं अन्य जरूरतमंद मतदाताओं को मतदान के दौरान आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

    चुनाव कार्यो में लापरवाही पर जताई नाराजगी
    राज्य निर्वाचन आयुक्त ने चुनाव तैयारियों में अपेक्षित गंभीरता नहीं बरतने वाले जिलों एवं अधिकारियों के प्रति नाराजगी जाहिर की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि निर्वाचन कार्य में किसी भी स्तर पर लापरवाही या शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी। सभी अधिकारी निर्धारित समय-सीमा में चुनाव संबंधी कार्य पूरे करें और आयोग के निर्देशों की पूरी तरह पालना सुनिश्चित करें।

    प्रशिक्षण के दौरान रिटर्निंग अधिकारियों को नामांकन, मतदान, मतगणना सहित निर्वाचन प्रक्रिया के विभिन्न चरणों और उनकी जिम्मेदारियों के बारे में जानकारी दी गई। अधिकारियों की शंकाओं का समाधान करते हुए आवश्यक मार्गदर्शन भी दिया गया।

    आयुक्त ने कहा कि नगरीय निकाय चुनाव को निष्पक्ष, पारदर्शी, शांतिपूर्ण और सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए सभी अधिकारी आपसी समन्वय के साथ पूरी गंभीरता से कार्य करें। उन्होंने चुनाव से जुड़े कार्यों की नियमित निगरानी करने तथा किसी भी समस्या का समय पर समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

  • JPSC परीक्षाओं में गड़बड़ी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, झारखंड सरकार और केंद्र को नोटिस

    JPSC परीक्षाओं में गड़बड़ी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, झारखंड सरकार और केंद्र को नोटिस

    रांची.

    14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं की सीबीआई जांच की मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद सर्वोच्च अदालत ने मामले में जेपीएससी और जेएसएससी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

    यह जनहित याचिका प्रार्थी हरिशरण देवगन की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई है। याचिका में 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा से जुड़े मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की मांग की गई है।

    जेपीएससी-जेएसएससी से मांगा जवाब
    सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग को नोटिस जारी किया है। अदालत के इस कदम के बाद अब दोनों आयोगों को याचिका में लगाए गए आरोपों और उठाए गए सवालों पर अपना पक्ष रखना होगा

    हाईकोर्ट के बाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
    JPSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवाद के बीच अब मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। इससे पहले पिछले सप्ताह झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के 11वीं और 13वीं JPSC परीक्षा एवं उनसे हुई नियुक्तियों को रद्द करने के फैसले पर रोक लगा दी थी। हाईकोर्ट के इस आदेश से उन अभ्यर्थियों को राहत मिली थी, जिनकी नियुक्तियां रद्द होने की आशंका थी। अब 2025 की JPSC प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई है। हाईकोर्ट के आदेश और सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के बाद JPSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर कानूनी लड़ाई और महत्वपूर्ण हो गई है।

    सीबीआई जांच की मांग
    बता दें कि, याचिका में 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई गई है। प्रार्थी की ओर से मामले की जांच सीबीआई से कराने का अनुरोध किया गया है। अब सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद मामले में आगे की सुनवाई और आयोगों के जवाब पर नजर रहेगी।

  • रक्षाबंधन पर ऑनलाइन शॉपिंग के भारी डिस्काउंट कहीं खाली न कर दें आपका बैंक खाता?

    रक्षाबंधन पर ऑनलाइन शॉपिंग के भारी डिस्काउंट कहीं खाली न कर दें आपका बैंक खाता?

    बरनाला.

    रक्षाबंधन का त्योहार नजदीक आते ही ऑनलाइन खरीदारी का क्रेज तेजी से बढ़ गया है। लोग राखी, मिठाई, कपड़े और गिफ्ट समेत अन्य सामान घर बैठे ऑनलाइन मंगवा रहे हैं। त्योहारों के इस सीजन में साइबर ठग भी सक्रिय हो जाते हैं और फर्जी शॉपिंग वेबसाइट, सोशल मीडिया विज्ञापन और भारी डिस्काउंट का लालच देकर लोगों को ठगी का शिकार बनाने की कोशिश करते हैं।

    पुलिस अधीक्षक संजीव गोयल ने जिलावासियों को साइबर ठगों से सावधान रहने की सलाह देते हुए कहा कि ऑनलाइन खरीदारी हमेशा भरोसेमंद और आधिकारिक ई-कॉमर्स वेबसाइट से ही करें।

    कहा- भरोसेमंद ई-कॉमर्स वेबसाइट से ही करें खरीदारी
    एस.पी. संजीव गोयल ने कहा कि किसी वेबसाइट से सामान खरीदने से पहले उसकी विश्वसनीयता जांच लें। केवल भारी छूट, आकर्षक ऑफर या एक्सप्रेस डिलीवरी देखकर किसी अनजान वेबसाइट पर भरोसा न करें। उन्होंने कहा कि डिजिटल दौर में ऑनलाइन शॉपिंग जिंदगी का हिस्सा बन चुकी है, लेकिन साइबर अपराधी इसी सुविधा का फायदा उठाकर फर्जी वेबसाइट और लिंक तैयार करते हैं। कई बार भुगतान लेने के बाद सामान नहीं भेजा जाता तो कहीं नकली या घटिया सामान भेजकर लोगों को चूना लगाया जाता है।

    बैंकिंग जानकारी किसी से सांझा न करें
    एस.पी. ने कहा कि व्हाट्सएप या ई-मेल से आए संदिग्ध लिंक खोलने से बचें। बैंक खाता बंद होने, केवाईसी अपडेट कराने या इनाम का झांसा देकर फोन करने वाले व्यक्ति को बैंक डिटेल, पासवर्ड, कार्ड की जानकारी या ओटीपी कतई न दें। बैंक संबंधी परेशानी होने पर केवल बैंक की आधिकारिक वेबसाइट या आधिकारिक कस्टमर केयर से संपर्क करें। उन्होंने कहा कि लॉटरी, रिचार्ज कूपन, डिस्काउंट व अन्य लालच में आकर अपनी निजी या बैंकिंग जानकारी किसी अनजान व्यक्ति को न दें।

    सोशल मीडिया विज्ञापनों से रहें सावधान
    पुलिस अधीक्षक ने कहा कि फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप समेत अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दिखने वाले हर शॉपिंग विज्ञापन को सही न मानें। ठग भारी डिस्काउंट, सीमित समय की सेल, मुफ्त गिफ्ट व एक्सप्रेस डिलीवरी जैसे ऑफर दिखाकर फर्जी वेबसाइट पर ले जा सकते हैं। किसी भी लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी सत्यता जांचें। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन राखी या गिफ्ट भेजते समय भरोसेमंद वेबसाइट अथवा कोरियर सेवा का ही इस्तेमाल करें। विदेश में गिफ्ट भेजने पर कस्टम नियमों की जानकारी पहले लें। रिसीवर का नाम, पता, पिनकोड व मोबाइल नंबर सही भरें। डिलीवरी समय व शिपिंग चार्ज की जानकारी लेने के साथ ऑर्डर आईडी व रसीद भी सुरक्षित रखें।

    धोखाधड़ी होने पर तुरंत करें शिकायत
    एस.पी. संजीव गोयल ने कहा कि वित्तीय धोखाधड़ी होने पर बिना देरी किए 1930 पर कॉल कर शिकायत दर्ज करवाएं। इसके अलावा साइबर क्राइम थाना अथवा संबंधित थाने की साइबर हैल्प डैस्क पर भी शिकायत दी जा सकती है। उन्होंने आमजन से अपील की कि खुद जागरूक रहने के साथ परिवार व आसपास के लोगों को भी साइबर ठगी से बचाव के प्रति जागरूक करें। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन खरीदारी में जल्दबाजी न करें और किसी भी ऑफर के लालच में अपनी मेहनत की कमाई व निजी जानकारी जोखिम में न डालें।

    उन्होंने कहा कि थोड़ी सी सतर्कता साइबर ठगों के मंसूबों पर पानी फेर सकती है। एस.पी. ने बरनाला जिलावासियों से अपील की कि त्योहारी सीजन में खरीदारी का आनंद लें, लेकिन सतर्कता बरतना न भूलें। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन साइबर अपराधों पर लगातार निगरानी रखे हुए है और जागरूकता ही इस प्रकार की ठगी से बचने का सबसे कारगर तरीका है।

  • दानापुर में पेयजल व्यवस्था होगी मजबूत, 93.56 करोड़ से 5,877 घरों तक पहुंचेगा शुद्ध पानी

    दानापुर में पेयजल व्यवस्था होगी मजबूत, 93.56 करोड़ से 5,877 घरों तक पहुंचेगा शुद्ध पानी

    पटना
    दानापुर शहर और आसपास के आवासीय इलाकों में अब पेयजल की व्यवस्था मजबूत होगी। केंद्र सरकार की अमृत 2.0 योजना के तहत दानापुर जलापूर्ति योजना को हरी झंडी मिल गई है।

    बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड (बुडको) को कार्य कराने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके लिए 93.56 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। योजना पूरी होने के बाद 5,877 से अधिक घरों तक नल से शुद्ध पानी पहुंचाने का लक्ष्य है।

    परियोजना को पूरा करने में एक साल का समय लगेगा। इसके लिए टेंडर जारी कर दिया गया है। निर्माण पूरा होने के बाद एजेंसी पांच साल तक योजना के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेगी।

    योजना के तहत दानापुर नगर परिषद क्षेत्र और आसपास के इलाकों में पेयजल आपूर्ति का नेटवर्क मजबूत किया जाएगा। योजना के तहत 63 किलोमीटर लंगी नई पाइपलाइन बिछाई जाएगी। इसमें राइजिंग मेन और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क शामिल होगा।

    इससे दानापुर के घने और नए विकसित इलाकों को भी जलापूर्ति नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। अभी जिन इलाकों में पाइपलाइन की सुविधा नहीं है, वहां भी नल से पानी पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी।

    पानी को स्टोर करने और सभी इलाकों में समान दबाव के साथ आपूर्ति के लिए 2,526 किलोलीटर क्षमता के ऊंचे जल भंडार गृह (ओवरहेड टैंक) बनाए जाएंगे। इससे पानी को पर्याप्त दबाव के साथ अंतिम छोर तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। योजना के तहत पुराने पंपिंग स्टेशनों और जल निकायों के जीर्णोद्धार का काम भी किया जाएगा।

    हर व्यक्ति को रोज 135 लीटर पानी का लक्ष्य
    योजना के तहत प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 135 लीटर पानी उपलब्ध कराने का मानक रखा गया है। घर-घर पानी पहुंचाने के लिए नल कनेक्शन दिए जाएंगे। इससे लोगों की हैंडपंप और भूजल पर निर्भरता कम होगी।

    साथ ही दूषित पानी के कारण होने वाली बीमारियों का खतरा भी कम होगा। पानी की गुणवत्ता बेहतर रखने के लिए आधुनिक वाटर ट्रीटमेंट प्लांट प्रणाली को भी योजना में शामिल किया गया है। इससे फिल्टर और साफ पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

    पानी की बर्बादी पर लगेगी रोक
    निर्माण कार्य के दौरान जल मीटर और कंट्रोल वाल्व भी लगाए जाएंगे। जल मीटर से पानी की खपत पर नजर रखने में मदद मिलेगी, जबकि कंट्रोल वाल्व के माध्यम से जरूरत के अनुसार पानी के प्रवाह को नियंत्रित किया जा सकेगा।

    इससे पानी की बर्बादी रोकने के साथ सभी घरों तक समान रूप से पानी पहुंचाने में मदद मिलेगी। अमृत 2.0 के तहत यह परियोजना दानापुर की पेयजल व्यवस्था को आधुनिक और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। योजना पूरी होने के बाद शहर के लोगों को नियमित और गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

  • दिल्ली के कुख्यात गैंगस्टरों पर शिकंजा, हाई रिस्क कैदियों को दूसरे राज्यों में भेजने की तैयारी

    दिल्ली के कुख्यात गैंगस्टरों पर शिकंजा, हाई रिस्क कैदियों को दूसरे राज्यों में भेजने की तैयारी

    नई दिल्ली
    दिल्ली की जेलों में बंद कुख्यात गैंगस्टरों और हाई रिस्क विचाराधीन कैदियों पर अब और शिकंजा कसने की तैयारी है। दिल्ली सरकार ऐसे कैदियों को जरूरत पढ़ने पर दूसरे राज्यों की जेलों में भेजने की तैयारी कर रही है, ताकि उनका वर्चस्व तोड़ा जा सके। इसके लिए सरकार ट्रांसफर ऑफ प्रिजनर्स (पंजाब अमेडमेंट) एक्ट, 2025 को दिल्ली में लागू करने की तैयारी कर रही है।

    मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि इसका मकसद जेल सुरक्षा, कानून व्यवस्था और सार्वजनिक हित को ध्यान में रखते हुए ऐसे कैदियों के अंतरराज्यीय स्थानांतरण को संभव बनाना और संगठित अपराध से निपटने में राज्यों के बीच सहयोग को मजबूत करना है।

    कहां फंस रहा पेंच?
    दरअसल, मौजूदा व्यवस्था में विचाराधीन गैंगस्टरों और कुख्यात अपराधियों को दिल्ली से दूसरे राज्य की जेल में भेजना संभव नहीं है। ट्रांसफर ऑफ प्रिजनर्स एक्ट, 1950 के तहत अंतरराज्यीय ट्रांसफर का प्रावधान आरोप साबित हो चुके कैदियों के लिए है। वहीं, विचाराधीन कैदियों का मामला संबंधित ट्रायल कोर्ट के रिमांड वारंट और रिजनर्स एक्ट, 1900 के तहत आता है, जो राज्य के भीतर कैदियों के ट्रांसफर की अनुमति देता है।

    पंजाब के संशोधित कानून को दिल्ली में लागू करने की तैयारी
    इस कमी को दूर करने के लिए पंजाब सरकार ने ट्रांसफर ऑफ प्रिजनर्स (पंजाब अमेडमेंट) एक्ट, 2025 पेश किया था। इसे 21 अप्रैल 2025 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली थी। इसमें सुरक्षा, कानून-व्यवस्था या जनहित के आधार पर विचाराधीन कैदियों को भी एक राज्य से दूसरे राज्य की जेल में भेजने का प्रावधान किया गया है। दिल्ली सरकार अब इसी संशोधित व्यवस्था को राजधानी में लागू करने का प्रस्ताव लाई है।

    जेलों में गैंगवॉर के मामले होंगे कम'
    सरकार का कहना है कि कुछ कुख्यात विचाराधीन कैदी जेल मे रहते हुए भी स्थानीय नेटवर्क और दूसरे गिरोहों से संपर्क बनाए रखते है। इससे वे अपने आपराधिक गठजोड़ को बढ़ाने की कोशिश कर सकते है। ऐसे कैदियों के बीच गैंगवॉर मामले भी सामने आते रहते हैं। सरकार के अनुसार, ऐसे कैदियों को दिल्ली से बाहर की जेलों में भेजने से गवाहों को प्रभावित करने और मुकदमे की कार्रवाई में बाधा डालने की उनकी क्षमता कम की जा सकती है।

    वही, मॉडल प्रिजन एड करेक्शनल सर्विसेज एक्ट, 2023 की धारा 20 में भी कैदियों के एक राज्य से दूसरे राज्य में ट्रांसफर का प्रावधान है। इसमें विचाराधीन कैदी को भी दूसरे राज्य की जेल में भेजने की व्यवस्था है। इसके लिए ट्रायल कोर्ट की सहमति जरूरी बताई गई है। दिल्ली में इस सशोधित कानून के लागू होने से इससे जेल सुरक्षा और प्रबंधन मजबूत होगा।