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  • झारखंड कैबिनेट में चार प्रतियोगी परीक्षाओं पर हाई कोर्ट की रोक को लेकर होगा मंथन

    झारखंड कैबिनेट में चार प्रतियोगी परीक्षाओं पर हाई कोर्ट की रोक को लेकर होगा मंथन

    रांची
     मंगलवार को होनेवाली राज्य मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की बैठक में चार प्रतियोगिता परीक्षाओं को रद करने के आदेश पर झारखंड हाई कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक पर चर्चा हो सकती है। चर्चा के बाद कोर्ट के आदेश के आलोक में इसपर आगे का कोई निर्णय हो सकता है। कैबिनेट की विशेष बैठक में ही 22 परीक्षाओं को रद करने का निर्णय लिया गया था। संभावना जताई जा रही है कि सोमवार को इसपर उच्च स्तर पर मंथन किया जाएगा।

    जहां तक हाई कोर्ट के आदेश के अनुपालन के क्रम में उक्त अधिसूचनाओं पर रोक लगाने के राज्य सरकार के आदेश की बात है तो इसकी अनिवार्यता नही है। झारखंड उच्च न्यायालय के अधिवक्ता समीर सहाय के अनुसार, सरकार इसे लेकर पत्र निकाल भी सकती है और नहीं भी। चूंकि सरकार को कोर्ट में जवाब देना है, इसलिए इसकी अनिवार्यता नहीं है।

    हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है तो वह प्रभावी है। बताते चलें कि हाई कोर्ट ने जेएसएससी की संयुक्त स्नातक स्तरीय प्रतियोगिता परीक्षा (सीजीएल), जेपीएससी की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रतियोगिता परीक्षा, सीडीपीओ नियुक्ति परीक्षा तथा खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी नियुक्ति परीक्षा को रद करने के आदेश पर रोक लगा दी है।

    इधर, कैबिनेट की बैठक में जेपीएससी के अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति पर भी निर्णय हो सकता है। एल खियांग्ते के अध्यक्ष पद तथा अजीता भट्टाचार्य, अनिमा हांसदा तथा जमाल अहमद के सदस्य पद से इस्तीफा देने के बाद आयोग में ये सभी पद रिक्त हैं।

    काम करते रहेंगे पदाधिकारी और कर्मी
    जानकारों के अनुसार, चूंकि कार्मिक विभाग ने अभी प्रतियोगिता परीक्षा ही रद की है तथा नियुक्ति रद करने की अधिसूचना संबंधित विभाग से जारी नहीं हई है, इसलिए संबंधित परीक्षाओं से नियुक्त अधिकारियों और कर्मियों के काम करने पर कोई रोक नहीं है।

    उनके काम करने को लेकर कोई आदेश जारी करने की भी आवश्यकता नहीं है। हाई कोर्ट द्वारा सरकार के आदेश पर रोक लगाए जाने के साथ ही कई अधिकारी और कर्मी वापस अपने काम पर लौट भी गए थे।

  • भागलपुर में राघोपुर बांध टूटा, नदी में बने टापू के दबाव से बढ़ा कटाव?

    भागलपुर में राघोपुर बांध टूटा, नदी में बने टापू के दबाव से बढ़ा कटाव?

    पटना.

    भागलपुर जिले के खरीक प्रखंड में गंगा नदी के बायें तट पर बना 6.50 किलोमीटर लंबा काजीकोरैया-राघोपुर मार्जिनल बांध 23 अगस्त की रात को टूट गया। इस पर मानसून की शुरुआत से ही नदी की मुख्य धारा का भारी दबाव बना हुआ था।

    नदी के बीच में शोल (टापू) बनने के कारण धारा का रुख सीधे बांध की तरफ मुड़ गया था। जलस्तर बढ़ने से अंडरमाइनिंग (नीचे से मिट्टी धंसने) के कारण 'D-Nose' के पास 26 जुलाई को 110 मीटर लंबाई में कटाव शुरू हुआ। जिसके बाद 27 जुलाई 2026 को कटिहार के मुख्य अभियंता और भागलपुर बाढ़ नियंत्रण अंचल के अधीक्षण अभियंता की देखरेख में रात-दिन चले राहत कार्य के बाद सुबह 4 बजे कटाव पर काबू पा लिया। बचाव के तहत 110 मीटर लंबे और 6 मीटर चौड़े एन.सी. बेस पर बैंबू रोल व 'हाथी पांव' से काम कराया गया। साथ ही सुरक्षा के तौर पर D-Nose के अपस्ट्रीम में 250 मीटर तक हर 10 मीटर पर कुल 25 'स्लोपिंग बेड बार' बनाए गए।

    23 अगस्त की रात टूटा बांध
    23 अगस्त की रात से 'E-Nose' के डाउनस्ट्रीम में नदी का दबाव बेहद बढ़ गया। 24 अगस्त की रात 2 बजे तेज कटाव के चलते राघोपुर बांध-सह-रेलवे टैगिंग बांध 30 मीटर की लंबाई में क्षतिग्रस्त हो गया।

    स्थल पर तैनात प्रशासनिक व तकनीकी टीम
    पहले कटाव के बाद से ही 1 सहायक अभियंता और 4 कनीय अभियंताओं की मूल तैनाती के अलावा शिफ्ट के हिसाब से 1 अतिरिक्त सहायक अभियंता और 02 कनीय अभियंताओं की टीम लगाई गई है। वहीं 17 अगस्त से ही अधीक्षण अभियंता, कार्यपालक अभियंता और सहायक अभियंता की एक विशेष टीम लगातार स्थल पर कैंप कर निगरानी रख रही है।

    वर्तमान स्थिति एवं राहत-बचाव कार्य

    • रिंग बांध का निर्माण: क्षतिग्रस्त हिस्से के दोनों किनारों (कट-एंड्स) को स्थिर करने और पानी के फैलाव को रोकने के लिए रिंग बांध का निर्माण शुरू कर दिया गया है।
    • संसाधन और बल: युद्धस्तर पर जारी काम के लिए 2.50 लाख बालू भरी बोरियां, 20 नावें, 16 ट्रैक्टर, 1 पोकलेन, 2 जेसीबी और करीब 250 मजदूर दिन-रात डटे हुए हैं। स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है।
    • उच्च स्तरीय निगरानी: भागलपुर के जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) स्वयं स्थल का निरीक्षण कर पल-पल की निगरानी कर रहे हैं।

    फरक्का बराज को लेकर अंतरराज्यीय पहल
    जल निकासी की मांग: गंगा के जलश्राव की तेजी से निकासी के लिए फरक्का बराज के महाप्रबंधक (GM) को पत्र भेजा गया है। मुख्यमंत्रियों की वार्ता: बिहार में गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री से फोन पर बात कर फरक्का बराज के सभी गेट खोलने का अनुरोध किया है। विशेष दल का दौरा: बराज के गेट परिचालन और अद्यतन स्थिति की सीधी जानकारी के लिए जल संसाधन विभाग से एक टीम को फरक्का बराज भेजा गया है।

  • बिहार की 12 सैटेलाइट टाउनशिप के लिए जमीन देने के चार विकल्प, किसानों से संवाद बढ़ाएगी सरकार

    बिहार की 12 सैटेलाइट टाउनशिप के लिए जमीन देने के चार विकल्प, किसानों से संवाद बढ़ाएगी सरकार

     पटना
    Satellite Township Bihar: बिहार में प्रस्तावित 12 सैटेलाइट टाउनशिप के लिए जमीन देने को लेकर कई जगहों पर रैयतों और भू-स्वामियों का विरोध सामने आ रहा है।

    इसे देखते हुए राज्य सरकार ने जमीन मालिकों के साथ संवाद बढ़ाने और उन्हें अलग-अलग विकल्प देने का निर्णय लिया है।

    मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश पर नगर विकास एवं आवास विभाग की टीम किसानों और रैयतों के बीच जाकर पूरी प्रक्रिया और उपलब्ध विकल्पों की जानकारी देगी।

    सहमत‍ि और लैंड पूलिंग पर सरकार का जोर
    सरकार की कोशिश है कि टाउनशिप के लिए अधिक से अधिक जमीन सहमति और लैंड पूलिंग के माध्यम से उपलब्ध कराई जाए।

    हालांकि, जरूरी आधारभूत संरचनाओं के लिए जमीन उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में नियमों के तहत भूमि अधिग्रहण का विकल्प भी रखा गया है।

    टाउनशिप की सीमाओं का निर्धारण किया जा चुका है। वहीं, पाटलिपुत्र टाउनशिप के लिए योजना का प्रारूप भी सामने आ गया है। प्रस्तावित टाउनशिप को 30 सेक्टर में विकसित किया जाएगा।

    फिलहाल इसके सामाजिक-आर्थिक प्रभाव का अध्ययन कराया जा रहा है। अध्ययन पूरा होने के बाद जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

    किसानों के बीच जाकर समझाए जाएंगे विकल्प
    रैयतों के विरोध को देखते हुए नगर विकास एवं आवास विभाग ने सीधे किसानों से संवाद करने का निर्णय लिया है। विभाग की टीम उन्हें जमीन देने के विभिन्न विकल्पों, मिलने वाले लाभ और पूरी प्रक्रिया की जानकारी देगी।

    सरकार की प्राथमिकता पहले चरण में लैंड पूलिंग के माध्यम से जमीन हासिल करने की है। इसके बाद जरूरत के अनुसार अन्य विकल्पों का इस्तेमाल किया जाएगा।
    क्या हैं जमीन देने के चार विकल्प?

    1. लैंड पूलिंग से जमीन देने का विकल्प
    पहले विकल्प के तौर पर किसानों की सहमति से लैंड पूलिंग की जाएगी। इसमें रैयत अपनी जमीन योजना के लिए उपलब्ध कराएंगे। इसके बाद उस क्षेत्र में सड़क, नाली, पार्क समेत अन्य आधारभूत संरचनाएं विकसित की जाएंगी।

    विकास के बाद तैयार भूमि के 55 प्रतिशत हिस्से को जमीन मालिक को वापस किया जाएगा। हालांकि, वापस मिलने वाली जमीन टाउनशिप के विकसित हिस्से के किसी भी स्थान पर हो सकती है।

    2. जरूरी सुविधाओं के लिए जमीन की खरीद या अधिग्रहण
    टाउनशिप में सड़क, नाले, पार्क, स्कूल-कॉलेज जैसी सार्वजनिक सुविधाओं के लिए जमीन की आवश्यकता होगी। इसके लिए पहले संबंधित किसानों से जमीन बेचने के लिए कहा जाएगा।

    यदि कोई रैयत जमीन देने के लिए तैयार नहीं होता है तो निर्धारित नियमों और प्रक्रिया के तहत भूमि अधिग्रहण किया जा सकेगा।

    3. आपसी समझौते के साथ अतिरिक्त लाभ
    तीसरे विकल्प के तहत किसानों से आपसी समझौते के आधार पर जमीन देने की अपील की जाएगी। इसके बदले रैयतों को अतिरिक्त लाभ दिए जाएंगे।

    4. हाइब्रिड मॉडल से जमीन उपलब्ध कराने का विकल्प
    यदि किसान पहले तीनों विकल्पों में से किसी पर सहमत नहीं होते हैं तो हाइब्रिड मॉडल अपनाया जाएगा। इसमें लैंड पूलिंग, आपसी सहमति, भूमि क्रय और जरूरत पड़ने पर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रियाओं को एक साथ इस्तेमाल किया जा सकेगा।

    इस मॉडल का उद्देश्य यह है कि टाउनशिप के विकास के लिए जरूरी जमीन उपलब्ध कराने में किसी एक प्रक्रिया पर निर्भरता न रहे।

    पाटलिपुत्र टाउनशिप 30 सेक्टर में होगी विकसित
    प्रस्तावित पाटलिपुत्र टाउनशिप (Patliputra Township) को 30 सेक्टर में विकसित करने की योजना है। इसके सामाजिक और आर्थिक प्रभाव का अध्ययन कराया जा रहा है। अध्ययन पूरा होने के बाद जमीन से जुड़ी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

     

  • PU में फीस बढ़ोतरी पर छात्रों का बड़ा प्रदर्शन, सभी गेट बंद कर VC कार्यालय के बाहर धरना

    PU में फीस बढ़ोतरी पर छात्रों का बड़ा प्रदर्शन, सभी गेट बंद कर VC कार्यालय के बाहर धरना

    पटियाला.

    पटियाला में पंजाबी यूनिवर्सिटी (PU) में फीस बढ़ोतरी के खिलाफ विद्यार्थियों का विरोध प्रदर्शन सोमवार को और तेज हो गया। स्टूडेंट्स जत्थेबंदी यूनाइटेड सिख स्टूडेंट फेडरेशन से जुड़े विद्यार्थियों ने सुबह विश्वविद्यालय के सभी मुख्य गेट बंद कर दिए।

    इस दौरान किसी कर्मचारी या विद्यार्थी को परिसर के अंदर प्रवेश नहीं करने दिया गया। गेट बंद होने के कारण बड़ी संख्या में कर्मचारी विश्वविद्यालय के बाहर से ही वापस लौट गए। विद्यार्थी संगठनों के नेताओं ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से फीस बढ़ाकर विद्यार्थियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। उनका कहना है कि पहले ही आर्थिक दबाव झेल रहे विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा हासिल करना मुश्किल होता जा रहा है। फीस बढ़ोतरी वापस लेने सहित अन्य मांगों को लेकर विद्यार्थी लंबे समय से प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।

    वीसी कार्यालय के बाहर पक्का मोर्चा
    विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय के कुलपति कार्यालय के सामने पक्का मोर्चा लगाया हुआ है। प्रदर्शनकारी नेताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक फीस बढ़ोतरी वापस लेने समेत उनकी अन्य मांगों पर ठोस फैसला नहीं होता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। गौरतलब है कि पिछले कई दिनों से विद्यार्थी कुलपति कार्यालय के सामने धरना दे रहे हैं। उनका कहना है कि फीस में बढ़ोतरी का सीधा असर विद्यार्थियों और उनके परिवारों पर पड़ेगा। ऐसे में विश्वविद्यालय प्रशासन को फीस बढ़ाने के फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए।

    कामकाज हुआ प्रभावित
    सोमवार को सभी मुख्य गेट बंद किए जाने से विश्वविद्यालय का सामान्य कामकाज भी प्रभावित हुआ। कर्मचारियों और विद्यार्थियों को परिसर में प्रवेश नहीं मिलने से कई गतिविधियां प्रभावित रहीं। हालांकि प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों ने कहा कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण है और मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा। विद्यार्थी संगठनों ने प्रशासन से बातचीत कर जल्द समाधान निकालने की मांग की है। वहीं, आंदोलन के चलते विश्वविद्यालय परिसर में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।

  • रांची में प्याज के दाम बढ़े, थोक 42 और खुदरा कीमत 50 रुपये किलो पहुंची

    रांची में प्याज के दाम बढ़े, थोक 42 और खुदरा कीमत 50 रुपये किलो पहुंची

     रांची
    राजधानी के बाजार में प्याज की कीमत में पिछले कुछ दिनों से लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। वर्तमान में पंडरा थोक मंडी में प्याज 35 से 42 रुपये किलो तक बिक रहा है, जबकि खुदरा बाजार में इसकी कीमत 45 से 50 रुपये किलो पहुंच गई है। कारोबारियों का कहना है कि कीमतों में यह तेजी फिलहाल नई फसल की आवक में देरी के कारण है।

    वहीं पंडरा आलू-प्याज व्यवसायी संघ के सचिव रोहित कुमार ने बताया कि सामान्य तौर पर सावन की शुरुआत तक दक्षिण भारत की मंडियों से प्याज की नई फसल रांची पहुंचने लगती थी। इस वर्ष नई फसल की आवक में देरी हुई है। इसके कारण बाजार में उपलब्ध प्याज पर दबाव बढ़ा और कीमतों में तेजी देखने को मिली।

    दो सप्ताह बाद राहत की उम्मीद
    नुसार दक्षिण भारत से प्याज की नई फसल अगले दो सप्ताह के भीतर मंडियों में पहुंच सकती है। नई फसल की आवक शुरू होते ही बाजार में प्याज की उपलब्धता बढ़ेगी और कीमतों में कमी आने की उम्मीद है।

    ऐसे में उपभोक्ताओं को फिलहाल करीब दो सप्ताह इंतजार करना पड़ सकता है। वहीं प्याज की कीमतों में तेजी 13 और 14 अगस्त से देखने को मिली। 14 अगस्त को पंडरा थोक मंडी में प्याज 28 से 30 रुपये किलो बिक रहा था।

    कुछ ही दिनों में इसकी कीमत बढ़कर 42 रुपये किलो तक पहुंच गई। रांची में फिलहाल प्याज की आपूर्ति मुख्य रूप से मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से हो रही है।

    रोज पहुंच रहे 10 से 12 ट्रक
    संघ के सदस्यों ने बताया कि रांची की मंडियों में प्रतिदिन करीब 10 से 12 ट्रक प्याज पहुंच रहे हैं। सावन के कारण आवक में मामूली कमी जरूर रही, लेकिन इसका खास असर थोक बाजार पर नहीं पड़ा है। वहीं पंडरा मंडी में सफेद आलू 7 से 8 रुपये, लाल आलू 10 से 12 रुपये और एलटी आलू 11 से 14 रुपये किलो बिक रहा है। वहीं लहसुन की कीमत 60 से 170 रुपये किलो और अदरक 130 से 140 रुपये किलो है।

     

  • मुजफ्फरपुर में चांदनी चौक-रामदयालु मार्ग होगा 6-लेन, खत्म होगी जाम की समस्या

    मुजफ्फरपुर में चांदनी चौक-रामदयालु मार्ग होगा 6-लेन, खत्म होगी जाम की समस्या

    मुजफ्फरपुर.

    शहर के सबसे व्यस्ततम मार्गों में एक रामदयालु से चांदनी चौक के बीच 4.50 किमी लंबी 6-लेन सड़क बनेगी। इससे हजारों लोगों को रोजाना जाम झेलने की समस्या से स्थाई तौर पर छुटकारा मिलेगा

    पथ निर्माण विभाग और बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड के अधिकारियों का मानना है कि बहुप्रतीक्षित रामदयालु नगर से चांदनी चौक के बीच 44.76 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली 6 लेन सड़क के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई और दूसरे विभागों से अनुमति मिल चुकी है। जल्द ही सड़क चौड़ीकरण और उन्नयन का कार्य शुरू किया जाएगा। पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल ने बताया कि परियोजना के मार्ग में आने वाली राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से जुड़ी औपचारिकताओं को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है।

    परियोजना निदेशक एनएचएआई एवं पीआईयू-मुजफ्फरपुर के पत्रांक-701 के माध्यम से इस पूरी परियोजना के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र निर्गत कर दिया गया है, जिससे कार्य में किसी प्रकार की बाधा नहीं रही और काम तय समय-सीमा के अंदर पूरा होने की राह पर है। बताया कि चांदनी चौक से रामदयालु नगर के बीच प्रतिदिन हजारों छोटे-बड़े वाहनों का दबाव रहता है। इस सड़क के चौड़ीकरण और आधुनिक बनने से सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि चांदनी चौक से रामदयालु नगर के बीच लगने वाले निरंतर और भीषण जाम से लोगों को स्थायी मुक्ति मिल जाएगी।

    वाहनों का आवागमन बिना किसी रुकावट के सुगमतापूर्वक और निर्बाध रूप से हो सकेगा। इससे न केवल आम जनता के बहुमूल्य समय और ईंधन की काफी बचत होगी, बल्कि क्षेत्र में सड़क दुर्घटनाओं में भी काफी कमी आएगी। उन्होंने कहा कि सड़क चौड़ीकरण से स्थानीय लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी और आसपास के व्यापारिक गतिविधियों से उनका सीधा जुड़ाव होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस सड़क के बनने से मुजफ्फरपुर शहर के सुगम विकास को एक नई गति मिलेगी। यह परियोजना केवल सड़क निर्माण नहीं, बल्कि मुजफ्फरपुर के आधुनिक बुनियादी ढांचे की दिशा में एक बड़ी सफलता है।

    एक नजर में परियोजना –

    • चांदनी चौक से रामदयालु नगर तक सड़क चौड़ीकरण और उन्नयन कार्य।
    • लंबाईः 4.50 किमी
    • लागतः 44.76 करोड़
  • पूर्व CM चन्नी की परीक्षा वाली फोटो की जांच की मांग, NSUI ने युवाओं के लिए बताया प्रेरणा

    पूर्व CM चन्नी की परीक्षा वाली फोटो की जांच की मांग, NSUI ने युवाओं के लिए बताया प्रेरणा

    चंडीगढ़.

    पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर से कांग्रेस सांसद चरणजीत सिंह चन्नी के पंजाब यूनिवर्सिटी में एमए पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन की परीक्षा देने का मामला अब राजनीतिक विवाद में बदल गया है। 20 अगस्त को परीक्षा देने के बाद सामने आई परीक्षा हॉल की तस्वीर को लेकर चंडीगढ़ के पूर्व मेयर और पीयू सीनेटर देवेश मोदगिल ने विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की है।

    मोदगिल ने पीयू चांसलर और कुलपति समेत संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजकर पूछा है कि परीक्षा केंद्र के अंदर तस्वीर कैसे खींची गई और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण वहां तक कैसे पहुंचा। उन्होंने 20 अगस्त की परीक्षा की सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने और उसकी जांच कराने की मांग की है। साथ ही यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि चन्नी को परीक्षा में बैठने के लिए कोई विशेष अनुमति दी गई थी या नहीं। नियमों का उल्लंघन सामने आने पर उन्होंने कार्रवाई की मांग की है। विश्वविद्यालय की ओर से इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।

    बचाव में उतरी NSUI
    उधर, पंजाब एनएसयूआई अध्यक्ष ईशरप्रीत सिंह ने चन्नी का बचाव करते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री ने परीक्षा देकर कोई गलत काम नहीं किया। उनके मुताबिक, चन्नी का परीक्षा देना युवाओं के लिए प्रेरणादायक है और इस मामले को बेवजह तूल दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों को गोल्डन चांस और री-अपीयर जैसी सुविधाएं मिलती रही हैं।

    परीक्षा के कारण दिल्ली में बैठक से रहे थे दूर
    चन्नी ने 20 अगस्त को परीक्षा देने के कारण दिल्ली में हुई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में हिस्सा नहीं लिया था। उन्होंने कहा था कि परीक्षा छूटने पर उनकी एमए की डिग्री एक साल और लंबित हो जाती। चन्नी के मुताबिक, उन्होंने पार्टी हाईकमान से पहले ही बैठक में अनुपस्थित रहने की अनुमति ले ली थी। चन्नी पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और पहले पंजाब यूनिवर्सिटी से राजनीति विज्ञान में पीएचडी कर चुके हैं। परीक्षा विवाद के बीच अब सबसे बड़ा सवाल परीक्षा केंद्र में तस्वीर बनने और परीक्षा नियमों के समान रूप से पालन का है। इस मामले में पंजाब यूनिवर्सिटी कुलपति की ओर से पूरे मामले में जांच के आदेश दिए जा सकते हैं।

  • हरियाणा में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के बीच सरकार ने जॉब सिक्योरिटी पर रखा पक्ष

    हरियाणा में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के बीच सरकार ने जॉब सिक्योरिटी पर रखा पक्ष

     चंडीगढ़
    हरियाणा में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के बीच राज्य सरकार ने कर्मचारियों के वेतन और जाब सिक्योरिटी को लेकर अपना आधिकारिक पक्ष सामने रखा है। सरकार के मुताबिक वर्तमान में सफाई कर्मचारियों को कुल 20,590 रुपये मासिक दिए जा रहे हैं। इसमें 19,000 रुपये मासिक वेतन तथा 1,590 रुपये भत्ते के रूप में शामिल हैं।

    सरकार ने कहा है कि वह पालिका रोल पर कार्यरत कर्मचारियों को जाब सिक्योरिटी देने के लिए तैयार है। जाब सिक्योरिटी मिलने के बाद कर्मचारियों का कुल मासिक भुगतान बढ़कर 22,590 रुपये हो जाएगा। इसमें 21,000 रुपये मासिक वेतन और 1,590 रुपये भत्ते शामिल होंगे। सरकार के अनुसार जाब सिक्योरिटी के नियमों के तहत कर्मचारियों को हर साल वेतन में होने वाली वार्षिक वृद्धि का लाभ भी मिलेगा।

    कर्मचारियों की मांगें मानने संबंधी दावे खारिज
    सरकार के इस बयान के बीच सफाई कर्मचारियों की मांगों को लेकर आंदोलन और तेज होने के संकेत हैं। कर्मचारी संगठनों ने सरकार के दावों को स्वीकार करने के बजाय कई अहम सवाल उठाए हैं। नगरपालिका कर्मचारी संघ हरियाणा एवं अग्निशमन विभाग कर्मचारी यूनियन के नेताओं ने सरकार की ओर से सफाई कर्मचारियों की मांगें मानने संबंधी दावे को खारिज किया है।

    संगठनों का कहना है कि सरकार के प्रेस नोट में जिन मांगों को ‘सैद्धांतिक रूप से स्वीकृत’ बताया गया है, उनमें से कई मांगों का लाभ कर्मचारियों को पहले से मिल रहा है या वे सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच हुए पुराने समझौते का हिस्सा हैं।

    आज तक आवश्यक आदेश जारी नहीं किए गए
    नगरपालिका कर्मचारी संघ हरियाणा के राज्य प्रधान नरेश कुमार शास्त्री, महासचिव मांगेराम तिगरा तथा अग्निशमन विभाग के प्रधान राजेंद्र सिंद और महासचिव गुलशन भारद्वाज ने कहा कि 13 मई को सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच हुए समझौते में 22 मांगों में से 17 मांगों को सरकार पहले ही स्वीकार कर चुकी थी।

    इन मांगों को लागू करने के लिए सरकारी पत्र और आदेश जारी किए जाने थे, लेकिन उनके अनुसार आज तक आवश्यक आदेश जारी नहीं किए गए।

    कर्मचारी नेताओं का आरोप है कि अब उन्हीं मांगों को दोबारा ‘सैद्धांतिक सहमति’ के तौर पर पेश करना कर्मचारियों के साथ छलावा है। उनका कहना है कि कर्मचारी केवल आश्वासन नहीं, बल्कि अपने अधिकारों को लागू करने वाले स्पष्ट सरकारी आदेश चाहते हैं

    संगठन के नेताओं ने सरकार से 13 मई के समझौते को तत्काल लागू करने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने पालिका रोल कर्मचारियों को नियमित करने, ठेका प्रथा समाप्त करने, सफाई एवं सीवर कर्मचारियों की स्थायी भर्ती करने और समान काम के लिए समान वेतन लागू करने की मांग दोहराई है।

  • बिहार में डीएम के बढ़े अधिकार, सात तरह के अपराधों पर अब लगेगा सीसीए

    बिहार में डीएम के बढ़े अधिकार, सात तरह के अपराधों पर अब लगेगा सीसीए

    पटना
    बिहार सरकार ने असामाजिक तत्व और संगठित अपराध पर नियंत्रण को लेकर डीएम के अधिकार बढ़ाये हैं। हाल ही में बिहार सीसीए (अपराध नियंत्रण अधिनियम) में किए गये संशोधन में जिलाधिकारियों को सात तरह के बड़े अपराधों में शामिल अपराधियों पर सीसीए लगाने की मंजूरी दी गयी है। सार्वजनिक या निजी संपत्ति को गैर कानूनी तरीके से बड़ा नुकसान पहुंचाने वाले अपराधियों के साथ ही गैर कानूनी तरीके से उसकी चल-अचल संपत्ति से बेदखल करने वाले भू-माफियाओं पर भी सीसीए लगेगा। संगठित कदाचार, अवैध खनन, सोशल मीडिया पर घृणा फैलाने और मानव तस्करी में संलिप्त अपराधी भी इसके दायरे में आयेंगे।

    राज्य सरकार ने सीसीए लगाने के मापदंडों में भी संशोधन किया है। ऐसे मामलों में शामिल अपराधियों पर सीसीए लगाने के लिए आवश्यक होगा कि उक्त व्यक्ति के विरुद्ध बीते पांच वर्षों के दौरान कम से कम दो मामले में पुलिस रिपोर्ट दाखिल हो, जिसमें उसकी संलिप्तता दिखाई गई हो। साथ ही उस अवधि के दौरान किसी एक मामले में दोष सिद्ध किया गया हो। पहले यह अवधि मात्र दो वर्ष रखी गयी थी। अधिनियम की धारा 12 के तहत अब डीएम पहली बार में अधिकतम छह महीने के लिए जिला या क्षेत्र बदर करने का आदेश दे सकेंगे। पहले यह अवधि मात्र छह महीने की थी।

    उक्त अवधि को समीक्षा कर छह-छह महीने के लिए बढ़ाया जा सकेगा। पीड़ित डीएम द्वारा पारित जिला बदर या निष्कासन जैसे आदेशों के खिलाफ प्रमंडलीय आयुक्त के समक्ष अपील कर सकेंगे। 2024 से लागू बिहार सीसीए एक्ट में आईपीसी और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872 से जुड़ी धाराएं शामिल थी, जिन्हें बदल दिया गया है। अब नये बीएनएस और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 की धाराएं डाली गयी हैं। इससे न्यायालय में अपराधियों को सजा दिलाने में आ रही तकनीकी बाधाएं समाप्त होंगी।

    संशोधित अधिनियम में डीएम को प्राप्त अधिकार
    ● चिह्नित अपराधी को जिला या उसके किसी हिस्से से बाहर निकालने का आदेश

    ● अपराधी को समय-समय पर थाने में हाजिरी लगाने और अपनी गतिविधियों की सूचना देने का आदेश

    ● संदिग्धों की तलाशी, संपत्ति की जब्ती और वारंट जारी करने की शक्ति

    ● लोक व्यवस्था खतरे में डालने वाले अपराधियों को हिरासत में लेने का आदेश

    इनमें शामिल अपराधियों पर भी लग सकेगा सीसीए
    ● सार्वजनिक या निजी संपत्ति अवैध कब्जा करने या उसको भारी नुकसान पहुंचाने में

    ● पेपर लीक या संगठित कदाचार में

    ● अवैध खनन में

    ● वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाने में

    ● सोशल मीडिया पर जाति, धर्म, भाषा या समुदाय के आधार पर शत्रुत या घृणा फैलाने पर

    ● मानव तस्करी में शामिल होने पर

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  • हरियाणा में कमजोर मानसून से बढ़ी उमस भरी गर्मी, कई जगहों पर हुई बूंदाबांदी

    हरियाणा में कमजोर मानसून से बढ़ी उमस भरी गर्मी, कई जगहों पर हुई बूंदाबांदी

    हिसार.

    हरियाणा-एनसीआर दिल्ली में मानसून कमजोर पड़ने से एक बार फिर उमस भरी गर्मी लोगों को परेशान कर रही है। वर्ष 2025 में हरियाणा में मानसून जून के अंतिम सप्ताह में पूरे प्रदेश में सक्रिय हो गया था। जून से सितंबर तक मानसूनी अवधि में सामान्य से करीब 34 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई थी।

    इस दौरान करीब 568.4 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। अधिक वर्षा और बादलों की आवाजाही के कारण तापमान सामान्य या सामान्य से थोड़ा नीचे रहा। अधिकतर दिनों में औसत तापमान करीब 28 से 32 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। वहीं, इस वर्ष जुलाई और अगस्त में औसत अधिकतम तापमान करीब 32 से 36 डिग्री सेल्सियस चल रहा है, जो बीते वर्ष की तुलना में करीब चार से पांच डिग्री अधिक है। न्यूनतम तापमान भी 25 से 28 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। वर्षा और बादलों की आवाजाही के बावजूद कई दिनों में तापमान अधिक रहने से गर्मी का असर महसूस हुआ। अब मानसूनी गतिविधियां कमजोर होने से उमस और बढ़ गई है।

    मानसून कमजोर रहने की संभावना, हिसार सबसे गर्म
    मौसम विशेषज्ञ डा. चंद्रमोहन ने बताया कि आने वाले दिनों में भी मानसून कमजोर रहने की संभावना है। प्रदेश के केवल उत्तरी और पूर्वी जिलों में हल्की मानसूनी गतिविधियां देखने को मिल रही हैं, जबकि अधिकांश हिस्सों में मौसम परिवर्तनशील लेकिन शुष्क बना हुआ है। राजस्थान की ओर से लगातार चल रही पश्चिमी और दक्षिण-पश्चिमी गर्म हवाओं के कारण मानसूनी हवाओं पर असर पड़ रहा है।

    मानसून टर्फ के एक बार फिर तराई क्षेत्रों की ओर पहुंचने से हरियाणा-एनसीआर दिल्ली में मानसून ब्रेक की स्थिति बन सकती है। कुछ स्थानों पर छिटपुट बूंदाबांदी या हल्की वर्षा हो सकती है, लेकिन लगातार वर्षा की संभावना कम है। गर्म और नम हवाओं के कारण लोगों को पसीना छुड़ाने वाली उमस भरी गर्मी का सामना करना पड़ेगा। रविवार को हिसार में दिनभर बीच-बीच में बादलों की आवाजाही बनी रही, लेकिन बारिश नहीं हुई। हिसार प्रदेश में सबसे गर्म रहा। यहां अधिकतम तापमान 37.7 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 26.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

    मानसून से पहले ही दिखने लगा वापसी जैसा असर
    मौसम विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिमी और दक्षिण-पश्चिमी हवाओं का प्रभाव तथा मानसून की कमजोर गतिविधियां इस समय मौसम को प्रभावित कर रही हैं। आमतौर पर इस तरह की स्थिति मानसून की वापसी के बाद देखने को मिलती है, लेकिन इस बार मानसून की विदाई से पहले ही इसका असर दिखाई देने लगा है। वर्षा की कमी और नम हवाओं के कारण तापमान बहुत अधिक नहीं होने के बावजूद उमस के चलते गर्मी ज्यादा महसूस हो रही है। आने वाले दिनों में भी बारिश की गतिविधियां सीमित रहने से उमस भरी गर्मी से राहत मिलने की संभावना कम है।

    तापमान (डिग्री सेल्सियस में)
    जिला – अधिकतम – न्यूनतम

    हिसार – 37.7 – 26.7
    भिवानी – 37.0 – 26.9
    चरखी दादरी – 36.2 – 28.0
    महेंद्रगढ़ – 35.5 – 26.4
    करनाल – 34.0 – 25.6